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हाय रे ज़ालिम.......complete

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नीलम:“उंघह उंह्म्मह… उह्ह उसके मुँह से सिसकारियाँ ही निकल सकती थीं। वो आने वाले लम्हे का इंतजार भी कर रही थी और उसे डर भी था कि कहीं देवा…”

रत्ना:“अह्म्मह… आह्हम्म्म्म…”

तभी देवा नीलम की चूत में जोर से धक्का मारता है।

देवा का लंड कुँवारी नीलम की चूत को फाड़ता हुआ आधे से ज्यादा नीलम की चूत में फँस जाता है।

नीलम“उंन्ह… घूँन् घूँन मम्मी जी…” वो इतने जोर से चीखी कि देवा को अपने हाथों से उसके मुँह को बंद करना पड़ा। देवा का आधे से ज्यादा लण्ड नीलम की चूत में था और उसकी चूत का परदा फट चुका था।नीलम की चूत से खून निकल चूका था। नीलम की आँखों से लगातार आँसू निकल रहे थे। उसका पूरा जिस्म कांप रहा था, उसकी चूत जैसे किसी अंगारों पे रख दी गई थी।

देवा एक और झटका देता है, और अपना पूरा का पूरा लण्ड नीलम की चूत में उतार देता है। देवा जानता था देर से दुर्घटना भली-“अह्म्मह… बस मेरी जान हो गया ना… अब रोना बंद कर दो…” वो अपने होंठों से नीलम के निप्पल को चूसने लगता है, और धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाता चला जाता है।

रत्ना ये सब बैठी देख रही थी।

नीलम का दर्द कम होता जा रहा था और उसे देवा का लण्ड अपनी चूत में अच्छा लगने लगा था-“उंन्ह… जानू, आखिर आपने मुझे औरत बना ही दीया उंन्ह… उंन्ह… मम्मी देखो ना उंन्ह…”

देवा:“हाँ मेरी जान… देख मैंने तुझे चोद ही दिया अह्म्मह… ओऊऊ…” वो दोनों अपनी अलग दुनियाँ में पहुँच चुके थे, वहाँ उन्हें किसी की आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी। देवा अपने लण्ड को किसी पिस्टन की तरह नीलम की चूत में पेले जा रहा था।

वहीं नीलम अपनी कमर उठा-उठाकर उसका साथ दे रही थी-“अह्म्मह… उंन्ह…” दोनों प्रेमी एक ऐसे रिश्ते में बँध चुके थे जिसे अब दुनियाँ की कोई भी ताकत जुदा नहीं कर सकती थी।

देवा“अह्म्मह… नीलम, मेरा पानी ले ले आह्ह्हह… उंन्ह… और देवा अपना पानी नीलम की चूत में उतारने लगता है।

नीलम अपनी चूत में गर्म-गर्म पानी के एहसास से सिहर उठती है, और उसकी चूत भी पानी छोड़ने लगती है-“अह्म्मह… अह्म्मह… जानू मुझे भी लो ना उंन्ह… उंन्ह…”

दोनों प्रेमी एक दूसरे से चिपके अपनी सांसें संभालने लगते हैं।
 
अपडेट 150 (लास्ट)

वहीं रत्ना अपनी बारी का इंतजार करने लगती है।

देवा बेड पे लेटा हुआ था और रत्ना उसके लण्ड को एक गीले कपड़े से साफ करने लगती है। क्योंकी उसपे नीलम की चूत का खून लगा हुआ था।

नीलम उठकर बाथरूम में चली जाती है, अपनी चूत को साफ करने।

रत्ना की आँखें लाल हो चुकी थीं, वो तो बस एक जबरदस्त चुदाई चाहती थी। वो देवा के सिर के पास जाकर बैठ जाती है, और उसका सिर अपनी नंगी जाँघों पे रख लेती है। फिर उसके बालों में हाथ फेरने लगती है।

रत्ना की चूत की भीनी-भीनी खुश्बू देवा के दिमाग़ में कुछ करती है, और वो अपना सिर मोड़कर उसे रत्ना की जाँघ के अंदर घुसा देता है। फिर अपनी जीभ बाहर निकालकर रत्ना की चूत चाटने लगता है।

रत्ना:“अह्म्मह… देवा… उह्म्मह… ऊऊऊह्म्मह…”

देवा:“माँ क्या कर रही हो? अह्म्मह… मैं उह्म्मह…”

रत्ना पहली बार अपनी चूत में इतना खिचाव महसूस कर रही थी। उसकी चूत आग उगलने को तैयार थी-“अह्म्मह… चोदो मुझे, मैं चुदना चाहती हूँ अह्म्मह… प्लीज़्ज़ज्ज्ज चोदो मुझे अह्म्मह…”

देवा रत्ना को डोगी स्टाइल में कर देता है, और पीछे अपना लण्ड उसकी गाण्ड में डालने लगता है।

रत्ना:“उंह्म्मह… वहाँ नहीं अह्म्मह… चूत में उंन्ह… अह्म्मह…”

देवा का लण्ड तब तक रत्ना की गाण्ड में जा चुका था और वो अपनी स्पीड बढ़ाने लगा था, तभी बाथरूम से नीलम बाहर आती है। उसके सामने उसकी सास रत्ना अपनी गाण्ड आगे पीछे करते हुए अपने बेटे का मूसल लण्ड अपनी गाण्ड के छोटे से सुराख में ले रही थी और सिसकारियाँ भर रही थी। ये सब देखकर नीलम की चूत में भी चीटियाँ रेंगने लगती हैं, और वो रत्ना के पास आकर बैठ जाती है।

देवा:“देख क्या रही है? मेरी जान, अपनी चूत रत्ना के मुँह के पास ले जा। वो चाटेगी तेरी चूत को आह्ह्हह… बहुत मज़ा आ रहा है।इसकी गाण्ड बहुत टाइट है…”
 
रत्ना तो जैसे दूसरी दुनियाँ में थी। देवा की जबरदस्त चुदाई से उसकी हल्की-हल्की सांस निकल रही थी। वो अपना मुँह नीलम की चूत के पास ले जाती है, और उसकी अभी-अभी चुदी चूत को चाटने लगती है-गलप्प्प-गलप्प्प अह्म्मह… आराम से अह्म्मह… गलप्प्प…”

नीलम अपने दोनों पैर खोलकर देवा की आँखों में देखते हुए अपनी चूत रत्ना को चुसवा रही थी। वो इतनी उत्तेजित हो चुकी थी कि अभी रत्ना की गाण्ड से लण्ड निकालकर खुद की चूत में लेना चाहती थी।

देवा अपने लौड़े को बाहर निकालकर रत्ना के संभालने से पहले ही फिर से उसकी गाँड में पेल देता है-“आह्ह्हह… बहुत अच्छा लग रहा है। रत्ना तेरी चूत में मेरा लण्ड आह्ह्हह…” वो भी नीलम की आँखों में देखते हुए रत्ना को चोद रहा था। ये एहसास उसके लिये एकदम नया और सुखद था कि अपनी मम्मी को अपनी बीबी के सामने चोदे।

देवा के सांसें बढ़ चुकी थीं, क्योंकी रत्ना झड़ चुकी थी और वो भी अपना पानी निकालने के करीब था। वो जोर-जोर से रत्ना को चोदे जा रहा था और एक चीख के साथ वो अपना पानी रत्ना की गाँड में निकाल देता है। वो जानता था कि अभी उसे सारी रात इन दोनों को चोदना है। वो निढाल सा बेड पे लेट जाता है।

वहाँ तीनों अपना पानी निकलने से थोड़े ठंडे पड़ चुके थे। वो दोनों देवा के पास आकर उसे चिपक के लेट जाती हैं। नीलम देवा के ऊपर लेट जाती है। और रत्ना देवा के साइड में। रात के 12 बज रहे थे, देवा की आँख लग जाती है।

पर रत्ना और नीलम जाग रही थीं। रत्ना नीलम की आँखों में देख रही थी और अपनी चूत रगड़ रही थी। नीलम देवा के ऊपर से उतरकर रत्ना की पास आ जाती है।

रत्ना नीलम को अपने से चिपका लेती है-“आज तू भी औरत बन गई मेरी बच्ची…”

नीलम:“हाँ मम्मी, और मुझे ये खुशी उस इंसान ने दी है, जिसे मैं बहुत चाहती हूँ…”

रत्ना:“हाँ मेरी बच्ची, आज से हम दोनों देवा का बहुत खयाल रखेंगे…” नीलम रत्ना से इतनी चिपकी हुई थी कि उसकी जाँघ और चुचियाँ रत्ना से रगड़ खा रही थी-“हाँ… बेटा, पर तुझे टैबलेट खाने होंगे कुछ दिन।

ताकि कुछ दिन तुमलोग जवानी के पुरे मज़े ले सको।

नीलम: “मम्मी, और आप?”
 
रत्ना मुस्कुराते हुए-“वो मुझे देवा ज्यादा मेरी गाँड में गिराता है अपना माल या मेरे मुँह में बेटी…”

नीलम:“मम्मी, मुझे अभी प्रेग्गनेंट नहीं होना है …” और मुझे भी वही करना होगा जो आप करती हो।वो ये बोलते-बोलते रत्ना के ऊपर चढ़ जाती है।

दोनों सास बहु एक दूसरे से चिपक चुके थे, और अब वो एक दूसरे की आँखों में देखते हुए अपनी चूत को रागड़ने लगती है। नीलम अपने होंठ रत्ना के होंठों पे रखकर उसके निचले होंठ को चूसने लगती है।

रत्ना भी मचल जाती है-“उंन्ह… बेटी आह्ह्हह… आह्ह्हह…” दोनों बस एक दूसरे को खा जाने वाले अंदाज में रगड़ने, चाटने और चूसने लगे थे। वो ये भूल गये थे कि देवा उन्हें देख रहा है, और उसका लण्ड भी तना हुआ है।

जब ये दोनों औरतें अपनी चूत की आग एक दूसरे की चूत से रगड़कर बुझाने में लगी हुइ थीं, तभी देवा पीछे से आकर अपना लण्ड नीलम की चूत में पेल देता है।

नीलम: “आह्ह्हह… मम्मी…” एक तेज धारदार चाकू अचानक से उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर घुस चुका था उसे ऐसा ही महसूस होता है। क्योंकी उसकी चूत अभी इतनी खुली नहीं थी इसलिये ये दर्द उसे बर्दाश्त करना था। वो सिसक उठती है। पर देवा अपना लण्ड उसकी चूत में जड़ तक पेलने लगता है।

नीलम रत्ना की छाती से चिपकी हुई थी और देवा उसकी गाण्ड पकड़कर दनादन अपना लण्ड चूत में पेलते जा रहा था, वो तेज-तेज अपनी कमर रत्ना की चूत पे पटकने लगती है। रत्ना समझ जाती है कि नीलम झड़ने के नज़दीक है, और वो नीलम के होंठों को अपने मुँह में लेकर उसकी जीभ चूसने लगती है।

नीलम: “उम्म… उंघह… उंन्ह…” और उसकी चूत से ढेर सारा पानी रत्ना की चूत से होता हुआ बेडशीट भिगोने लगता है।

देवा अपना लण्ड निकालकर नीलम को साइड में कर देता है। क्योंकी वो अभी झड़ा नहीं था और उसे चूत चाहिए थी, जो उसका साथ दे। वो रत्ना के पैर हवा में उठाकर अपना लण्ड जल्दी से उसकी चूत में डाल देता है-“आह्ह्ह्हह… रत्ना तेरी ही चूत है वो मेरा साथ देती है… मेरी जान…”

रत्ना“: आह्ह्ह्ह्ह्ह… जानू आपकी ही चूत तो है… चोदो अपनी रत्ना को आह्ह्हह… मेरी चूत में पेल दो जानू उंन्ह… आह्ह्हह… मेरी जान ऊओह्हहह…”

करीब 15 मिनट की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद देवा रत्ना के मुँह में झड़ जाता हैं। और देवा एक तरफ लेट जाता है।
 
सुबह 5 बजे....

नीलम अभी तक बेसुध होकर देवा के ऊपर सो गई थी

रत्ना बेड पे बैठ जाती है। उसकी आँखें थोड़ा दर्द कर रही थीं, क्योंकी कल रात वो एक पल के लिये भी सो नहीं पाई थी। वो अपने पैंटी उठाकर पहनने लगती है। पर देवा उसका हाथ पकड़ लेता है तो रत्ना सवालिया नज़रों से देवा की तरफ देखने लगती है।

देवा:“जब तक हम यहाँ हैं… ना तू कपड़े पहनेगी और ना नीलम। पूरी रात तुम मेरे साथ इस रूम में पूरे नंगे रहने वाले हो, तो ये सब बैग में रखो और चलो मैं भी फ्रेश हो जाता हूँ…”

नीलम अपनी आधी खुले पलकों से देवा को देख रही थी। उसने भी देवा का फरमान सुन लिया था। वो तो बहुत खुश थी। उसके हाथों की मेंहदी बेड के चादर पे गिरी हुई थे और एक ख़ून का छोटा सा धब्बा भी दिखाई दे रहा था, वो नीलम के कुँवारीपन के टूटने की निशानी था।

रत्ना और देवा बाथरूम में नहाने घुस जाते हैं। शावर ओन करके वो दोनों एक दूसरे से चिपक के नहाने लगते हैं।

तभी नीलम भी वहाँ आ जाती है-“ह्म्मम्म्म्म… अपनी पहली बीवी के चक्कर में कहीं नई नवेली बीवी को मत भूल जाना मेरे जानू…” और वो भी उन दोनों के साथ नहाने लगती है।

देवा का लण्ड खड़ा होने लगता है। आख़िरकार साथ में दो नंगी औरतें नहा रही हों तो किसका लण्ड आवाज़ नहीं देगा।

रत्ना नीचे बैठकर देवा के लण्ड को साबुन लगाने लगती है। और उसे पानी से साफ कर देती है।

एक ही पल में देवा उसे कुछ कहने वाला था। उससे पहले ही रत्ना देवा के खड़े लण्ड को अपने गले तक ले चुकी थी-“गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प-गलप्प्प…”

नीलम देवा की छाती से चिपकी अपनी दोनों चुचियाँ उससे मसलवाते हुये होंठ चूस रही थी। माँ लण्ड चूसे और बहू चुचियाँ दबवाए तो मर्द बेचारा क्या कर पाए। यही हालत देवा की थी। उसके लण्ड का ज्वालामुखी आग उगलना चाहता था।
 
देवा रत्ना के मुँह से लण्ड बाहर निकालकर उसे खड़ा कर देता है। और नीलम के साथ-साथ रत्ना के भी होंठ चूसने लगता है। दोनों औरतें पूरी तरह गरम हो चुकी थीं और हवस की आग उनके चेहरे से साफ बयान हो रही थी।

नीलम और रत्ना देवा के सामने खड़े। उसके लण्ड को अपने नरम-नरम हाथों में लेकर सहला रही थी, और उसके होंठों को बारी-बारी चूस रही थीं। आज देवा को एहसास हो रहा था कि उसकी मम्मी और बीबी कितनी चुदक्कड़ औरतें हैं।

देवा नीलम को दीवार से खड़ा कर देता है, और उसकी चुचियों से चिपका के रत्ना को। वो दोनों आमने सामने खड़ी थीं और एक दूसरे की चुचियों से चुचियाँ रगड़ रही थीं। देवा रत्ना की कमर को थोड़ा सा पीछे की तरफ करता है, जिससे उसकी गाण्ड और चूत उसे आसानी से दिखाई देने लगती है। वो बिना देर किए अपने लण्ड को रत्ना की चूत में पेलने लगता है।

उसका झटका इतना जोर का था कि रत्ना सीधा नीलम की चुचियों से चिपक जाती है। और उसके होंठ नीलम के होंठ से चिपक जाते हैं। रत्ना नीलम के होंठ चूसने पे मजबूर हो जाती है, क्योंकी देवा पूरी ताकत से पीछे से चोद रहा था, जिससे उसका मुँह खुला का खुला रह रहा था। उसकी जीभ बाहर निकल रही थी और चूत के अंदर तक लण्ड जाने से वो पूरी तरह तड़प रही थी।

अपनी सास को ऐसे चुदते देखकर नीलम की चूत भी पानी छोड़ने लगी थी। वो रत्ना के मुँह में मुँह डालकर उसकी जीभ को अपने मुँह में खींच रही थी। जब देवा रत्ना की चूत में धक्का मारता तो, रत्ना सीधा नीलम की चूत से जाकर टकराती। दोनों सास- बहू एक वक्त में एक साथ पानी छोड़ने लगती हैं। रत्ना की चूत से पानी निकल चुका था और वो नीचे बैठ जाती है।

वो देवा के लण्ड और नीलम की चूत के बीच बैठी हुई थी। वो अपना बड़ा सा मुँह खोलकर देवा का लण्ड अपने मुँह में ले लेती है, वो अभी तक झड़ा नहीं था और जल्द से जल्द चूत चूत चिल्ला रहा था। रत्ना अपनी चूत का स्वाद देवा के लण्ड से चखने के बाद लण्ड को थोड़ा खींचकर नीलम की चूत के पास लाती है। और देवा बिना देर किए लण्ड नीलम की चूत में डालने लगता है।
 
देवा नीलम को रत्ना की तरह चोद रहा था। वो ये भूल गया था कि रत्ना की चूत थोड़ी खुली हुई है, और नीलम तो बेचारी कल रात ही औरत बनी है। एक कच्ची कली को भँवरा जब बेरहमी से चूसे, उसका सारा रस एक साथ पीकर उड़ना चाहे तो उस कली की वो हालत होती है, वही इस वक्त नीलम की थी।

नीलम हिल नहीं सकती थी क्योंकी रत्ना उसके पैर के पास बैठकर नीचे से देवा के आंड और नीलम की गाण्ड को चाट रही थी। और बेरहम देवा सटासट अपने लोहे के रोड जैसे लण्ड को अपनी नई नवेली बीबी की चूत में लगातार अंदर-बाहर कर रहा था। वो बस चिल्ला सकती थी, पर उसे भी देवा बीच-बीच में रुक देता, अपने होंठ उसके मुँह में घुसाकर, उसकी आवाज़ भी निकलने से रुक जा रही थी।

नीलम: गूँन्… उंन्ह… गूँन्न…” एक घुटी-घुटी सी आवाज़ के साथ चुदे जा रही थी-“उंन्ह… अह्म्मह… मुझे सांस तो लेने दो जी उंन्ह… अह्म्मह… मम्मी प्लीज़ मेरी गाण्ड को… मेरे चूत पर… आह रहम करो मैं आह्ह्ह्हह… आह्ह्ह्हह… और वो तेज धार के साथ मूतने लगती है। उसका पेशाब सीधा रत्ना के मुँह में गिरने लगता है, जिसे रत्ना बड़े चाव से किसी अमृत के तरह पी जाती है।

रत्ना:“गलप्प्प-गलप्प्प अह्म्मह… मेरे पति और बहू का पानी…” उसके पेशाब में देवा के पानी की भी खुश्बू आ रही थी क्योंकी नीलम का पेशाब देवा के लण्ड से होता हुआ गुजर रहा था, वो नीलम की चूत में सटासट अंदर-बाहर हो रहा था।

नीलम अब थोड़ी खुल चुकी थी। इतना गंदा उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी चूत का पानी उसकी सास पिएंगी और वो खड़े-खड़े देवा के लण्ड के दबाव से चुदते हुए मूतने लगेगी। ये एहसास ही उसे पानी छोड़ने पे मजबूर कर देता है। और वो देवा से चिपक के झड़ने लगती है-“अह्म्मह… उंह्म्मह… जोर से जड़ तक आह्ह्ह्हह… ऐसे ही एक बार आह्ह्ह्हह…” वो झड़ते-झड़ते बस यही चिल्ला रही थी।

जब नीलम पूरा झड़ जाती है तो देवा भी अपना लंड उसकी चूत में से निकल कर रत्ना के मुँह में झड़ने लगा था। दोनों का पानी नीचे बहने लगता है। जिसे रत्ना चाटती जा रही थी-“गलप्प्प-गलप्प्प अह्म्मह…” रत्ना का चेहरा पूरी तरह नीलम के पेशाब और देवा के वीर्य से भीग चुका था।

देवा उसे खड़ा करता है, और शावर के नीचे दोनों के साथ नहाने लगता है। उस दिन से देवा ने रत्ना और नीलम को कपड़े पहनने नहीं दिया। ये सिलसिला पूरी रात चला। वो हर वक्त रूम में नंगे रहते, और देवा किसी ना किसी को चोद रहा होता।
 
रत्ना भी अपने बहू के सामने देवा से चुदते-चुदते बेशरम हो चुकी थी कि वो किसी भी वक्त देवा के लण्ड को मुँह में लेकर चूसने लगती। कभी-कभी तो देवा नीलम को चोद रहा होता तो वो नीलम की चूत से लण्ड को खींचकर अपने मुँह में और फिर अपनी चूत में ले लेती।

नीलम अपनी सास से 1 दिन में कितनी बार चूत चूसा चुकी थी, ये भी उसे याद नहीं था। वो दोनों सास-बहू पूरी तरह लेज्बियन बन चुकी थीं। देवा के सोने के बाद वो 69 की पोजीशन में कितने देर एक दूसरे की चूत को मुँह में लेकर चूसती रहतीं, एक दूसरे की चूत का पानी पीते-पीते उन्हें अब चूत का पानी या देवा के लंड के पानी के सिवा और कुछ अच्छी नहीं लगती थी।

दूसरी रात......

रत्ना दूसरे रूम में सोई हुई थी।

देवा ने अकेले मे नीलम को पकड़ लिया और उसकी चुचियों को सहलाने लगा।

नीलम: क्या हुआ जी क्या इरादा है आपका? कहीं फिर से आपके अजगर ने फन तो नहीं उठा लिया ना।

देवा: तेरे जैसी हसीन और जवान प्रेमिका जो अब बीवी बन चुकी है तो कैसे कंट्रोल करूँ.. बताओ?

देवा बोलते बोलते नीलम के निप्पल दबा रहे थे और उसकी जांघ भी सहला रहा था।

नीलम: सच कहूँ तो मैं भी आपके लंड की दीवानी हो गई हूँ जी.. आप चाहो तो हम फिर कर सकते हैं. मैं आपको इतनी ख़ुशी देना चाहती हूँ कि आप सारे टेंशन भूल जाओ.. वो सारी बातें भूल जाओ जिसके लिए मैंने आपको तरसाया है.

देवा: आई लव यू डार्लिंग.. मैं भी तुझे इतना चोदना चाहता हूँ की कोई कमी ना रह जाए और फिर हम जब भी मिलें तो तुम्हें तकलीफ़ नहीं सिर्फ़ मज़ा मिले।

नीलम: ठीक है जी जैसा आप कहो, तो पहले मैं आपका लंड चूसूं या आप मेरी चुत चाटने वाले हो।

देवा: दोनों साथ में करेंगे तो ज़्यादा मज़ा आएगा और वैसे भी मैं तुम्हें एक अलग मज़ा देने वाला हूँ मेरी जान।

नीलम: सच्ची तो जल्दी करो ना जी, मुझे मज़ा चाहिए बस और कुछ नहीं।
 
दोनों 69 के पोज़ में आ गए और चुसाई शुरू हो गई. करीब 15 मिनट तक ये चुसाई चलती रही. उसके बाद नीलम की वासना बहुत ज़्यादा भड़क गई तो उसने लंड मुँह से निकाला और देवा को सीधा करके खुद देवा के लंड पर धीरे से बैठ गई और ऊपर नीचे होने लगी।

देवा: आह.. कूद मेरी जान.. तेरे पति का लंड बहुत मजबूत है, जितना चाहे ज़ोर से कूद.. और कर ले अपनी चुत में पूरा फिट आह..

नीलम आह.. सस्स जी आह.. मज़ा आ रहा है.. आह.. आपका लंड बहुत मस्त है. आप भी नीचे से झटके मारो ना.. आह.. चोदो, अपनी बीबी को आह..

नीलम बहुत उत्तेज़ित हो गई थी, अब वो स्पीड से ऊपर नीचे होने लगी और 10 मिनट तक स्पीड से चुदती रही. फिर उसका पानी निकल गया और चुत से बहकर देवा की जाँघों पे गिरने लगा।

जब नीलम एकदम शांत हो गई तो नीचे उतर कर लेट गई मगर देवा का लंड अभी भी तना हुआ था, उनका पानी अन्दर उफान मार रहा था।

नीलम: आह.. मज़ा आ गया.. सच्ची आपका लंड बहुत मजेदार है।

देवा: तुझे तो शान्ति मिल गई मगर मेरे लंड को अभी भी चुदाई की जरूरत है. चलो अब घोड़ी बन जाओ फिर देखो कैसे नया मज़ा देता हूँ तुझे।

नीलम: ठीक है मेरे जी, आपके लंड का ख्याल मैं नहीं तो और कौन रखेगा. लो बन गई घोड़ी, डाल दो चुत में.. और आप इसको भी ठंडा कर लो।

देवा के दिमाग़ में कुछ और ही चल रहा था। उनको तो बस नीलम की गांड का गुलाबी छेद दिख रहा था और उनकी नियत उस पर पूरी तरह बिगड़ चुकी थी।
 
देवा ने गांड पर जीभ लगाई और छेद को चाटने लगा।

नीलम: सस्स्सस्स आह.. जी.. ये आप क्या कर रहे हो आह.. नहीं.. उफ़.. मेरे पूरे जिस्म में करंट दौड़ रहा है.. अहह..

हर लड़की या औरत का एक सेन्सिटिव पॉइंट होता है, वैसे ही नीलम का पॉइंट उसकी गांड का छेद था। अब देवा के चाटने से वो बहुत ज़्यादा उत्तेज़ित हो गई थी।

नीलम: आह.. प्लीज़ आह.. डाल दो आह.. लंड आह.. चुत में बहुत खुजली हो रही है। मेरी चूत की खुजली मिटा दो!

देवा: का इरादा तो गांड मारने का था. वो नीलम की बात को अनसुना कर गया और अपने लंड को नीलम की गांड के भूरे छेद पर रख कर घिसने लगा।

जब नीलम को ये अहसास हुआ कि उसके पति अब उसकी गांड मारने वाले हैं.. तो वो डर से काँपने लगी. उसके जिस्म में कंपन होने लगा जो उत्तेजना अभी जागी थी, वो हवा हो गई।

नीलम: अजी आप ये क्या कर रहे हो? नहीं मेरी गांड में मत डालना, ये फट जाएगी.. इसमें आह.. आपका लंड नहीं जाएगा प्लीज़ नहीं आह.

देवा: मेरी जान, जब चुत नहीं फटी तो गांड कैसे फटेगी. अब बीवी बनी है तो पूरा मज़ा लूँगा ना.. बस अब हाथ को टाइट कर ले मैं लंड घुसेड़ने वाला हूँ।

नीलम: नहीं जी ऐसा मत करो. अच्छा आपको गांड ही मारनी है तो मेरी सास की मार लेना, आपको मज़ा भी आएगा उसकी गांड भी बहुत बड़ी है।

देवा: उसकी रोज मारता हूँ जानेमन.. आज तो तेरी ही मारूँगा, ऐसी मस्त गांड मैंने जिंदगी में नहीं देखी है।

नीलम ने बहुत मना किया मगर देवा तो पूरा मूड बना चुका था। उसने लंड को छेद पे टिकाया और ज़ोर का धक्का मारा। उसका आधा लंड नीलम की गांड में घुस गया और नीलम ज़ोर से चिल्ला उठी।
 
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