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हिन्दी में मस्त कहानियाँ

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Guest
हिन्दी में मस्त कहानियाँ

मेडम को कार चलाना सिखाया

यह बात तब की है जब मैं 12 क्लास में था . मैं इंग्लीश के सब्जेक्ट में थोड़ा वीक था. हमारी इंग्लीश मॅम का नाम स्नेहा था. वो एक साउत इंडियन थी. उनकी एज करीबन 40 साल थी. वो कुछ मोटी थी ख़ासकर उनके हिप्स काफ़ी मोटे थे. उनके ब्रेस्ट भी काफ़ी बड़े और भारी थे. वो एक टिपिकल इंडियन वोमेन लगती थी. 11 क्लास में मेरे इंग्लीश में बहुत कम मार्क्स थे इसीलिए मैने सोचा के 12 में आते ही इंग्लीश पर ज़्यादा ध्यान दिया जाए. 12 क्लास की सम्मर वाकेशन्स से एक दिन पहले मैने छुट्टी में स्नेहा मॅम को अप्रोच किया

गुड आफ्टरनून मॅम”

गुड आफ्टरनून सुमित”

मॅम, आइ नीड सम गाइडेन्स ”

या”

मॅम, एज यू नो , माइ स्कोर इन इंग्लीश हॅज़ नोट बीन वेरी गुड इंप्रेस्सिव इन 11थ”

यस , आइ नो दट ठाट ईज़ व्हाई आइ कीप टेल्लिंग यू टू वर्क हार्ड”

यस..मॅम आइ डू नोट वॉंट टू रिपीट दा सेम रिज़ल्ट इन माइ बोर्ड एग्ज़ॅम्स”

सो यू हॅव फाइनली अवेकन..अट्लस्ट”

यस मॅम…आइ नो दट आइ विल हॅव टू वर्क हार्ड.आंड आइ आम रेडी फॉर इट..बट मॅम आइ डू नो हाउ टू गो अबौट इट..आइ मीन माइ बेसिक्स आर नोट स्ट्रॉंग अट ऑल..सो मॅम इफ़ यू कॅन गाइड मी फ्रॉम वहेरे टू स्टार्ट”

डेफनेट्ली सुमित.आइ आम युवर टीचर आंड इट्स माइ ड्यूटी टू गाइड यू…यू डू वन थिंग यू टेक माइ फोन आंड अड्रेस आंड रिंग मी आफ्टर आ वीक”

ओके ..थ्न्क्स मॅम”

फिर मैने मॅम का फोन नंबर और अड्रेस ले लिया.

एक हफ्ते बाढ़ मैने मॅम को फोन किया

हेलो, क्या स्नेहा मॅम से बात कर सकता हूँ?”

बोल रही हूँ”

मॅम, मैं सुमित बोल रहा हूँ..मॅम आपने कहा था की एक हफ्ते बाद फोन कर लेना”

हाँ याद है.फोन पर तो तुम्हारी प्राब्लम डाइक्यूस कर पाना मुश्किल है…तुम एक काम करो कल शाम 5 बजे मेरे घर आजओ..तभी तुम्हारी प्राब्लम डिसकस कर लेंगे…ठीक है”

ओके मॅम..बाइ”

बाइ”

फिर अगले-ही दिन मैं शाम 5 बजे मॅम के घर गया. मैने बेल बजाई और मॅम ने दरवाज़ा खोला

हेलो मॅम”

हेलो सुमित..आओ ..अंदर आओ..बैठो.अड्रेस ढूँदने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई”

थोड़ी सी..क्योंकि मैं इस कॉलोनी में पहले कभी नहीं आया”

चलो..खैर.क्या लोगे .चाइ..कॉफी..कोल्डद्रिंक.”

नोथिन्ग मॅम.कुच्छ नहीं”

शरमाओ मत..तुम्हे कुच्छ ना कुच्छ तो लेना ही पड़ेगा”

ओके.कॉफफफी”

बस अभी लाती हूँ”

फिर मॅम कॉफी ले आई

ह्म.लो सुमित..कॉफी लो”

थॅंक्स”

बिस्कुट भी तो लो”

नहीं मॅम, इसकी ज़रूरत क्या”

सुमित तुम बहुत शाइ लड़के हो..खैर हमने क्या बात करनी थी”

मॅम आपको तो पता ही है कि मेरे इंग्लीश मे कैसे मार्क्स आते हैं”

ह्म..मेरे ख़याल से तुम्हारे 11थ क्लास में 50 से ज़्यादा मार्क्स नहीं आए”

यस मॅम….और हाइयेस्ट मार्क्स 95 तक आते हैं..मॅम मैं चाहता हूँ कि मेरे भी 90+ आए”

बिल्कुल आ सकते हैं.लेकिन उसके लिए तुम्हे काफ़ी हार्डवर्क करना पड़ेगा..क्या तुम करोगे”

यस मॅम, मैं हार्डवर्क करूँगा…पर मेरे बेसिक्स ही क्लियर नहीं हैं और मेरी ग्राममेर बहुत वीक है”
 


सुमित तुम्हे सबसे पहले अपने बेसिक्स ही स्ट्रॉंग बनानी चाहिए ..जिसके बेसिक्स स्ट्रॉंग नहीं उससे कुच्छ भी नहीं आता”

मॅम तो बेसिक्स स्ट्रॉंग कैसे होंगे”

उम्म…मैं तुम्हे बेसिक्स स्ट्रॉंग करने में हेल्प कर दूँगी”

यस मॅम.आप मुझे कुच्छ दिन- के लिए कोचैंग दे दी जीये”

ओके .तुम एक काम करो तुम कल से सुबेह 10 बजे आ जाया करो”

ओके मॅम”

कॉफी तो पियो..ठंडी हो रही है”

येस मॅम.मॅम आपकी फॅमिली में कौन-कौन है”

मैं , मेरे हज़्बेंड और एक लड़की और एक लड़का”

मॅम कहाँ हैं सब.कोई दिख नहीं रहा”

बच्चे तो अपनी नानी के यहाँ छुट्टियाँ बिताने गये हैं .आक्च्युयली मैं भी वहाँ से कल ही आई हूँ पर बच्चे वहीं रुक गये हैं..और हज़्बेंड 2 हफ्ते के लिए ऑफीस के काम से आउट ऑफ स्टेशन गये हैं”

बच्चे कब तक आएँगे”

वो भी दो-एक हफ्ते बाद आएँगे..यही तो दिक्कत है.अब मुझे मार्केट से कुच्छ भी लाना हो तो मैं नहीं ला सकती”

क्यों मॅम”

मार्केट यहाँ से काफ़ी दूर है..रिक्शा से जाने में बहुत टाइम लगता है…और स्कूटर और कार मुझे चलानी नहीं आती”

मॅम इस में प्राब्लम क्या .आपको जब कुच्छ चाहिए हो तो आप मुझे कह दीजिएगा”

नहीं ऐसी बात नही है..दट’स नाइस ऑफ यू…सुमित..तुम्हे कार चलानी आती है क्या”

यस मॅम”

तुम मुझे कार चलाना सिखा सकते हो…आक्च्युयली मेरे हज़्बेंड तो सारा दिन बिज़ी रहते हैं…और आज कल तो हमारी कार खाली ही पड़ी है..हज़्बेंड तो ऑफीस की कार ले गये हैं”

यस मॅम.इट वुड मी माइ प्लेषर.मैं आपको कार सीखा दूँगा”

कितना टाइम लगेगा कार सीखने में”

करीबन एक हफ़्ता तो लगेगा ही”

तो ठीक है तुम मुझे कल से ही कार सिखाना शुरू कर दो”

ओके मॅम.पर किस टाइम”

तुम 10 बजे मुझसे पढ़ने तो आओगे ही .. तुम्हे पढ़ाने के बाद मैं तुमसे कार सीख लिया करूँगी..पर सुमित. कोई बहुत बड़ा ग्राउंड है क्या…आक्च्युयली कोई मुझे सीखते देखे तो मुझे शरम आयगी..ऐसी कोई जगह हो जो एक दम खाली हो और जहाँ ज़्यादा लोग ना आते हो”

यस मॅम ..शहर से बाहर निकलते ही एक ग्राउंड है जो एक खाली रहता है”

ठीक है.तो वहीं चलेंगे कल दोपहर (नून) में”

पर मॅम दोपहर (नून) में तो काफ़ी गर्मी होती है”

दोपहर में इस लिए की उस वक़्त लोगे बाहर नहीं निकलते और हमारी कार तो एर कंडीशंड है..मैं क्या करूँ लोग मुझे कार सीखते देखें तो मुझे शरम आती है..बाइ दा वे.तुम्हे तो कोई प्राब्लम नहीं है ना”

बिल्कुल नहीं..तो मॅम मैं कल आता हूँ 10 बजे”

ओके सुमित…बाइ”

मैं अगले दिन ठीक 10 बजे मॅम के घर पहुच गया. मॅम ने उस दिन ग्रीन कलर का सूट पहना हुआ था. हलकी मॅम थोड़ी मोटी और डार्क थी.लेकिन मुझे तो मॅम सेक्सी लगती थी. मॅम ने मुझे 10 से 1 बजे तक पढ़ाया. उसके बाद हम कार सीखाने शहर से बाहर एक ग्राउंड में गये. आस पास कोई भी नहीं था क्योंकि दुपहर का वक़्त था.

ग्राउंड में पहुँच कर मैने मॅम को कार सिखानी शुरू की

मॅम.पहले तो मैं आपको गियर डालना सीखाता हूँ”

मैं कुच्छ देर तक मॅम को गियर , आक्सेलरेटर, क्लच, ब्रेक एट्सेटरा. के बारे में बताता रहा

चलिए मॅम.अब आप चलाइए”

मुझे डर लग रहा है”

कैसा डर”

कहीं मुझसे कंट्रोल नहीं हुई तो”

उसके लिए मैं साथ हूँ ना”

फिर मॅम ड्राइवर सीट पर बैठ गयी और मैं ड्राइवर की साथ वाली सीट पे आ गया. फिर मॅम ने कार चलानी शुरू की लेकिन मॅम ने एक दम से ही रेस दे दी तो एक दम से कार बहुत स्पीड में चल पड़ी. मॅम घबरा गयी..मैने कहा

मॅम आक्सेलरेटर से पैर हटाइए”

मॅम ने पेर हटा लिया तो मैने स्टियरिंग पकड़ कर कार कंट्रोल में करी

मैने कहा था ना मुझ से नहीं चलेगी”

कोई बात नहीं मॅम..पहली बार ऐसा होता है”

नहीं….मैं कार सीख ही नहीं सकती…मुझ से नहीं चलेगी”

चलेगी…चलिए अब स्टार्ट की जीए और फिर ट्राइ करिए.पर इस बार आक्सेलरेटर आराम से छोड़ना”

नहीं मुझे नहीं होगा”

मॅम शुरू शुरू में ग़लतियाँ होती हैं..कोई बात नहीं”

नहीं मुझे डर लगता है”

अच्छा..एक काम करते हैं..मैं भी आपकी सीट पर आ जाता हूँ .फिर आपको डर नहीं लगेगा”

 


लेकिन एक सीट पर हम दोनो कैसे आ सकते हैं”

आप मेरी गोद (लॅप) में बैठ जाना.मैं स्टियरिंग कंट्रोल करूँगा और आप गियर कंट्रोल करना”

लेकिन कोई हमें देखेगे तो कैसा लगेगा”

मॅम इस वक़्त यहाँ कोई नहीं आएगा..और वैसे भी आपकी कार मे यह शीशों पर फिल्म लगी है इससे अंदर का कुच्छ दिखाई नहीं देता”

चलो ठीक है”

फिर मैं ड्राइवर सीट पर बैठा और मॅम मेरी गोद में. जैसे ही मॅम मेरी गोद में बैठी मेरे बदन से करेंट सा दौड़ (ऋण) गया. हम दोनो का यह पहला स्पर्श था.

मैने कार स्टार्ट करी

रेडी मॅम”

हां..मुझे से सिर्फ़ गियर ही संभालने हैं ना”

यस मॅम .आज के दिन आप सिर्फ़ गियर ही सीखो”

कार चलनी शुरू हुई. क्योंकि मेरे हाथ स्टियरिंग पर थे और मॅम मेरी गोद में..इस लिए मेरी बाहें (आर्म्स) मॅम के ब्रेस्ट के साइड से टच हो रही थी और मॅम के ब्रेस्ट थे भी काफ़ी बड़े. मॅम थोड़ा अनकंफर्टबल फील कर रही थी इस लिए वो मेरी जांघों (थाइस) पे ना बैठ के मेरी नीस के पास बैठी थी. जैसे ही मैं कार को टर्न करता तो मॅम की पूरी ब्रेस्ट मेरी बाहें को टच करती थी. मॅम गियर सही बदल रही थी

क्यों सुमित..ठीक कर रहीं हूँ ना”

पर्फेक्ट..मॅम अब आप थोड़ा स्टियरिंग भी कंट्रोल कीजीए”

ओके”

क्योंकि माँ मेरी गोद में काफ़ी आगे होकर बैठी थी इस लिए स्टियरिंग कंट्रोल करने में उन्हे प्राब्लम हो रही थी

मॅम.आप थोड़ी पीछे खिसक जाईए..तभी स्टियरिंग सही कंट्रोल हो पाएगा”

अब मॅम मेरी जांघों(थाइस) पे बैठ गयी और हाथ स्टियरिंग पर रख लिए.

मॅम.थोड़ा और पीछे हो जाईए”

और कितना पीछे होना पड़ेगा”

जितना हो सकती हो”

ठीक है”

अब मॅम पूरी तरह से मेरे लंड पर बैठी थी.

मैने अपने हाथ मॅम के हाथों पर रख दिए और स्टियरिंग कंट्रोल कराना सिखाने लगा. जब भी कार टर्न होती तो मॅम की हिप्स मेरे लंड में धँस जाती . मॅम के ब्रेस्ट इतने बड़े थे कि वो मेरे हाथों को टच कर रहे थे. मैं जान बूझ कर उनके ब्रेस्ट को टच करता रहा.

मॅम अब आक्सेलरटोर भी आप संभालिए”

कहीं कार फिर से आउट ऑफ कंट्रोल ना हो जाए”

मॅम अब तो मैं बैठा हूँ ना”

मॅम ने फिरसे पूरा आक्सेलरेटर दबा दिया तो कार ने एक दम स्पीड पकड़ ली.

इस पर मैने एक दम से ब्रेक लगा दी तो कार एक दम से रुक गयी. मॅम को झटका लगा तो वो स्टियरिंग में घुसने लगी. इस पर मैने मॅम के ब्रेस्ट्स को अपने हाथों में पकड़ कर मॅम को स्टियरिंग में घुसने से बचा लिया. कार रुक गयी थी और मॅम के ब्रेस्ट मेरे हाथ में थे. मॅम बोली

मैने कहा था ना कि मैं फिर कुछ ग़लती करूँगी”(मॅम के ब्रेस्ट मेरे हाथ में हैं)

कोई बात नहीं.कम से कम गियर तो बदलना सीख लिया” (मॅम के ब्रेस्ट मेरे हाथ में हैं)

शायद मुझे स्टियरिंग संभालना कभी नहीं आएगा” “(मॅम के ब्रेस्ट मेरे हाथ में हैं)

एक बार और ट्राइ कर लेते हैं” “(मॅम के ब्रेस्ट मेरे हाथ में हैं)

ठीक है” “(मॅम के ब्रेस्ट मेरे हाथ में हैं)

मॅम ने मुझे ऐहसास दिलाने के लिए मेरे हाथ उनके ब्रेस्ट पर हैं, मॅम ने ब्रेस्ट को हल्का सा झटका दिया तो मैने अपने हाथ वहाँ से हटा लिए. मैने कार फिर से स्टार्ट करी. मॅम ने अपने हाथ स्टियरिंग पर रख लिए और मैने अपने हाथ मॅम के हाथो पर रख दिए

मॅम आक्सेलरेटर मैं ही संभालूँगा.आप सिर्फ़ स्टियरिंग ही संभालीए”

यही मैं कहने वाली थी”

कुच्छ देर तक मॅम को स्टियरिंग में हेल्प करने के बाद मैं बोला

मॅम अब मैं स्टियरिंग से हाथ उठा रहा हूँ.आप अकेले ही संभालीए”

ओक.अब मुझे थोड़ा कॉन्फिडेन्स आ रहा है.लेकिन तुम अपने हाथ रेडी रखना .कहीं कार फिर से आउट ऑफ कंट्रोल हो जाए ”

मॅम मेरे हाथ हमेशा रेडी रहतें हैं”

मैने अपने हाथ स्टियरिंग से उठा कर मॅम की ब्रेस्ट पर रख दिए. मैं तो मॅम से डाँट (स्कोल्डिंग) एक्सपेक्ट कर रहा था लेकिन मॅम ने कुच्छ ना कहा

सुमित मुझे कस के पकड़ना..कहीं ब्रेक मारने पर मैं स्टियरिंग में ना घुस जाऊं”

यस मॅम..कस के पकड़ता हूँ”

मैने मॅम के ब्रेस्ट दबा दिए तो मॅम के मूह से आह..आ निकल गयी.

सुमित.मेरे ख्याल से आज इतना सीखना ही काफ़ी है.चलो अब घर चलते हैं”

ओके मॅम”

मॅम मेरी गोद से उठ कर अपनी सीट पर बैठ गयी और हम मॅम के घर चल दिए

ओके मॅम ..मैं चलता हूँ”

रोटी खा के जाना”

नहीं मॅम मैने मम्मी को कहा था कि रोटी के टाइम तक घर पर आजाऊंगा”

ठीक है …तो कल 10 बजे आओगे ना”

यस मॅम..ऑफ कोर्स”

मैं अगले दिन भी पूरे 10 बजे पहुँच गया. पढ़ने के बाद हम फिर से कार सीखने उसी ग्राउंड में आ गये.

तो सुमित आज कहाँ से शुरू करेंगे”

मॅम मेरे क्याल से आप पहले स्टियरिंग में पर्फेक्ट हो जाईए.उसके बाद और कुच्छ करेंगे”

ठीक है.कल जैसे ही बैठना है”

यस मॅम”

आज मॅम ने सिल्क की सलवार कमीज़ पहनी हुई थी. मॅम आज सीधे आकर मेरे लंड पर बैठ गयी. आज मॅम की सलवार थोड़ी टाइट थी और मॅम की हिप्स से चिपकी हुई थी.

हमने कार चलानी शुरू की. मॅम ने अपने हाथ स्टियरिंग पर रख लिए. मैने अपने हाथ मॅम के हाथों पर रख लिए . आज मॅम की हिप्स मेरे लंड पर बार बार हिल रही थी. कुछ देर बाद मैने कहा
 
हमने कार चलानी शुरू की. मॅम ने अपने हाथ स्टियरिंग पर रख लिए. मैने अपने हाथ मॅम के हाथों पर रख लिए . आज मॅम की हिप्स मेरे लंड पर बार बार हिल रही थी. कुछ देर बाद मैने कहा

मॅम .अब मैं अपने हाथ स्टियरिंग से हटा रहा हूँ”

हां..अपने हाथ स्टियरिंग से हटा लो”

मैने हाथ स्टियरिंग से उठा कर मॅम की ब्रेस्ट पर रख दिए..और वाह…मज़ा आ गया..मॅम ने आज ब्रा नहीं पहनी थी..इससलिए आज मॅम के ब्रेस्ट बड़े सॉफ्ट और मासल लग रहे तहे..मैने मॅम के ब्रेस्ट को धीरे-धीरे दबाना शुरू कर दिया..मॅम की सिल्क की सलवार में उनके ब्रेस्ट को दबाने में बड़ा मज़ा आ रहा ..मॅम ने अपनी टाँगें(लेग्स) वाइड करली और अब उनकी बुर मेरे लंड पर थी…मैने अपना एक हाथ मॅम की कमीज़ में डाला और मॅम की ब्रेस्ट को दबाने लगा..

मॅम.मज़ा.आ रहा है”

आ..आ..किसमे”

कार चलाने में”

हां.कार चलाने में भी मज़ा आ रहा है”

मॅम.अब आपको स्टियरिंग संभालना आ गया”

ह्म”

अब मैने अपना दूसरा हाथ भी मॅम की कमीज़ में डाल दिया और उसको भी दबाने लगा

आहह..ह..सुमित तुम…आ.. यह क्या कर रहे हो”

मॅम.आपको कार सीखा रहा हूँ”

सुमित.तुम्हारे हाथ कार के स्टियरिंग पर होने चाहिए”

पर मॅम …आपके स्टियरिंग संभालने में ज़्यादा मज़ा आ रहा है”

तुम्हे मेरे साथ ऐसा नहीं करना चाहिए…..और वैसे भी मैं तो एक मोटी और काली औरत हूँ..मुझ में तुम्हे क्या अच्छा लगेगा”

मॅम आपकी एक एक चीज़ अच्छी है”

सुमित मैं थोड़ा थक गयी हूँ..पहले तुम कार रोक लो…आगे जा कर थोड़ी झाड़ियाँ(बुशस) हैं..कार वहाँ ले चलो”

यस मॅम”

मैने कार झाड़ियों में जा कर रोक ली

बस थोड़ी देर आराम कर लेते हैं…हां तो सुमित इस मोटी और काली औरत में तुम्हे क्या अच्छा लगा होगा”

मॅम.एक बात बोलूं”

हाँ बोलो”

मॅम.आपके संतरे बहुत अच्छे हैं”

क्या..संतरे.मैं क्या कोई पेड़ (ट्री) हूँ जो मुझ में संतरे हो”

मॅम यह वाले संतरे” मैने मॅम के ब्रेस्ट को दबाते हुए कहा

आहह.आहह…”

मॅम आपके खरबूज़े भी बहुत अच्छे हैं”

क्या.खरबूज़े.मुझ में खरबूज़े कहाँ हैं”

मॅम आइ मीन टू से युवर हिप्स”

झूट.मेरी हिप्स तो बहुत चौड़ी(वाइड) और मोटी हैं”

यह कहकर मॅम खड़ी हो गयी और अपनी सलवार नीचे कर दी . मॅम ने पॅंटी नहीं पहनी हुई थी

देखो ना …कितनी बड़ी हैं मेरी हिप्स” मैं तो देखता ही रह गया . मॅम की हिप्स मेरे मूँह के पास थी मैं मॅम की हिप्स पर हाथ फेरने लगा

मॅम मुझे तो ऐसी ही हिप्स अच्छी लगती हैं.बड़ी और डार्क”

मॅम..आपके हिप्स की स्मेल बहुत अच्छी”

यह कह कर मैं मॅम की हिप्स पर किस करने लगा. मैं मॅम के क्रॅक मे जीभ (टंग) मारने लगा
 


ओह..ऊओ.सुमित यह क्या कर रहे हो”

मॅम…मुझे खरबूज़े बहुत अच्छे लगते हैं”

ओह्ह..और क्या अच्छा लगता है तुम्हे”

चूयिंग गम”

क्या..चूयिंग-गम.वो कौनसा पार्ट है”

जवाब में मैं मॅम की चूत दबाने लगा

ऊहह..आह.आह.सुमित….चूयिंग-गम को दबाते नहीं हैं”

मॅम..इस पोजीसन से मैं चूयिंग-गम को छू नहीं कर सकता”

सुमित.कार की पिछली सीट पे चूयिंग-गम छुई जा सकती है”

फिर हम दोनो पिछली सीट पर आ गये. मॅम ने टाँगें(लेग्स) खोल ली और अपनी चूत पे हाथ रख कर बोली

सुमित.यह रही तुम्हारी चूयिंग-गम”

मैं मॅम की चूत चाटने लगा. मॅम सीट पे लेटी हुई थी. मेरी जीभ मॅम की चूत पे और मेरे हाथ मॅम की ब्रेस्ट को दबा रहे थे. मैं करीब 10 मिनिट तक मॅम की चूत पे जीभ मारता रहा

सुमित..क्या तुम्हारी पेन्सिल शार्पेंड है”

क्या मतलब”

बुद्धू..मेरे पास शारपनर है और पेन्सिल तुम्हारे पास है..”

यस मॅम..मेरी पेन्सिल को शार्प कर दीजीये”

लेकिन पहले तुम अपनी पेन्सिल दिखाओ तो”

मैने अपनी जीन्स उतार दी . मैने अंडरवेर नहीं पहना था. मैं अपना लंड मॅम के मूँह के पास ले गया तो मॅम ने जल्दी से उसे अपने मूँह में ले लिया.कुछ देर तक मॅम मेरा लंड चूस्ति रही..फिर बोली

सुमित..तुम्हारी पेन्सिल काफ़ी अच्छी क्वालिटी की है”

मॅम क्या आपका शारपनर भी अच्छी क्वालिटी का है”

यह तो पेन्सिल शार्प होने पर ही पता चलेगा”

तो मॅम करलूँ अपनी पेन्सिल शार्प”

येस्स्स्स…सुमित..जस्ट डू इट..फक मी.यस फक मी हार्ड…चोद मी..स्क्रू मी..”

मैने अपना लंड मॅम की चूत में डाल दिया और धक्के देने लगा

ओह्ह्ह..सुमित..माइ डार्लिंग..युवर पेन्सिल ईज़ फिट फॉर माइ शारपनर….आआहह..वेरी गुड..कीप डोइंगगगगगग…सुमित..मेरे संतरों को ना भूलो…इन्हे तुम्हारे हाथों की सख़्त ज़रूरत है”

मॅम.आ.आपकी चूत मारने में बहुत मज़ा आ रहा है”

एयेए…हह..सुमित.बच्चे.अपनी मेडम के संतरों से मिल्क-शेक तो पियो”

फिर मैं धक्के देने के साथ साथ मॅम के निपल्स को मूँह में लेकर चूस्ता रहा. कुछ ही देर बाद मॅम के बूब्स में से दूध निकलने लगा और मैं पीने लगा

आऐईए.सुमित..और तेज़..तेज़ तेज़ धक्का मारो..आज अच्छी तरह ले लो मेरी.मेरे मिल्क-शेक का फ़ायदा उठाओ..स्पीड बढ़ाओ”

मैने तेज़ तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए. करीब 15 मिनिट बाद

एयेए.ओह्ह.सुमीईइत्त्त्त….तेज़…मैं आने वाली हूँ”

मैं और मॅम एक साथ ही झाडे

आ.एयाया..आहा..आइ लव यू सुमित..मज़ा आ गया”

यस मॅम..आपका शारपनर ग़ज़ब का है”

तुम्हारी पेन्सिल भी कमाल की है..”

मॅम मैं आपके पीछे वाले शारपनर को भी यूज़ करना चाहता हूँ”

पीछे वाला शारपनर..मैने कभी नहीं यूज़ करवाया”

लेकिन मुझे तो करने देंगी ना”

शुवर..लेकिन बाकी का काम घर चल कर..और फिर अभी तो मुझे कार सीखने में कुछ दिन और लगेंगे”

तबसे मैं और मॅम हर मौके पर चुदाई करते थे और मॅम से ट्यूशन पड़ते वक़्त हम दोनो बिल्कुल नंगे होते थे .

समाप्त

 
एक यादगार और मादक रात पार्ट --1

मेरा नाम है कैलाश. में देहाती लड़की हूँ, हाइ स्कूल तक पढ़ी हुई. मेरी शादी दो साल पहले हुई है. मेरे पति गंगाधर किसान है. वो 22 साल के हैं और में 18 साल की. घर में हम दोनो ही हैं, उन के माता पिता कई सालों से गुजर गये थे. आज में आप को मेरी निजी कहानी सुनाने जा रही हूँ.

छ्होटी उमर से ही मुझे सेक्स का भान था. हम देहाती बच्च्चे बचपन से ही गाय, भेंस, कुत्ते वगेरह प्राणिओ की चुदाई देख पाते हेँ. मेरे पिताजी के घर कई गाएँ थी. वो जब चुदवाने के लिए हीट में आती थी तब हमारा नौकर सांड़ ले आता था. बचपन से ही मेने सांड़ का पतला लंबा लंड गाय की चूत में जाता देखा था. दस साल की उम्र तक ऐसे सेक्स देखने से मुझे कुछ नहीं होता था. बढ़ती उम्र के साथ गाय की चुदाई देख में उत्तेजित होती जाती थी.

बारह साल में मेरी माहवारी शुरू हुई तब मेरी बड़ी बहन ने मुझे वो कहा जो में जानती थी. उस ने कहा कि पति जो करे वो करने देना, पाँव लंबे रख कर सोते रहना. मेरे सीने पर बड़े बड़े स्तन उभर आए थे और नितंब भारी चौड़े हो गये थे. भोस पर काले घुंघराले बाल निकल आए थे. उसी साल मेरी मँगनी गंगाधर से हो गयी. पहली बार वो हमारे घर आए और हम मिले तब गंगा ने मेरी कच्ची चुचियाँ सहलाई थी, मेरा हाथ थाम कर अपना लंड पकड़ा दिया था. मुझे गुदगुदल हो गई थी. इतने में जीजी ना आ जाती तो उस दिन में अवश्य चुद जाती.

खेर, 16 साल की उम्र में शादी कर के में ससुराल आई. पहली रात ही मेरे पति ने मुझे जिस तरह चोदा ये में कभी भूल ना पाउन्गि. आधा घंटे तक चूमा चाती और स्तन से खिलवाड़ किया, भोस सहलाई, मेरे हाथ से लंड सहलवाया बाद में चूत में डाला. योनि पटल टूटा तब दर्द तो हुआ लेकिन चुदवाने के आवेश में मालूम ना पड़ा. एक घंटे तक चली चुदाई के दौरान में दो बार झड़ी. आज भी वो मुझे ऐसे चोदते हेँ कि जैसे हमारी सुहाग रात हो. हम दोनो एक तुझ से खूब प्यार करते हेँ. हमारे बीच समझौता हुआ है कि वो मन चाहे वो लड़की को चोद सके और में कोई भी मर्द से चुदवा सकती हूँ . लेकिन ऐसा अब तक हुआ नहीं था.

शादी के दो साल बाद मेरे पति के एक दूर के चाचा कई साल अफ्रीका रह कर वापस लौटे. उन के परिवार में एक लड़का था, परेश, मेरी उमर का और एक लड़की थी, माधवी जो दो साल छ्होटी थी. अफ्रीका में वो भाई बहन रेसिडेन्षियल स्कूल में पढ़े थे. चाचा नया घर बनवा रहे थे, उस दौरान वो सब हमारे मकान में ठहरे.

परेश और माधवी बड़े प्यारे थे. उन के साथ मेरी अच्छि बन गयी थी. नये घर में जाने के बाद भी वे रोज मेरे घर आते थे और दुनिया भर की बातें करते थे. मेने देखा कि उन दोनो काफ़ी हुशियार थे लेकिन सेक्स के बारे में बिल्कुल अग्यात थे. परेश मानता था कि लड़की के मुँह से लड़के का मुँह लगने से बच्चा पैदा होता है. माधवी कुच्छ ज़्यादा जानती थी लेकिन उसे पता नहीं था कि चुदाई कैसे की जाती है.

एक दिन गंगाधर को दूसरे गाँव जाना हुआ. इतने बड़े मकान में रात को अकेले रहने से मुझे डर लगता था. मेने परेश और माधवी को सोने के लिए बुला लिए, चाचा चाची की मंज़ूरी साथ.

रात का खाना खा कर हम ताश खेलने लगे. परेश ने रानी डाली उस पर मेने राजा डाला. माधवी शरमाती हुई हसी और बोली, "रानी पर राजा चढ़ गया, अब बच्चा होगा."

परेश : क्या बकवास करती हो ?

माधवी : तू नहीं समझेगा. है ना भाभी ?

में : ये तो ताश है. इस में बच्चा कच्चा कुच्छ नहीं होता.

बाज़ी आगे चली. माधवी की रानी पर मेने गुलाम डाला. माधवी फिर बोली : भाभी, रानी पर गुलाम चढ़ने से तो राजा उसे मार डालेगा.

परेश अब गुस्सा हो गया, पन्ने फैंक दिए और बोला : ये क्या चढ़ने उतरने की चला रक्खी है ?

मेने उसे शांत किया. मुँह च्छुपाए माधवी हस रही थी. वो बोली : भैया, भाभी से कहो तो बच्चा कैसे पैदा हो ता है.

परेश चुप रहा. मेने धीरे से पुचछा : कहो तो सही, में जानूँ तो.

परेश ने माधवी से कहा : छिपकली, तू ही बता दे ना, हुशियार कहीं की

माधवी की शर्म और हसी थमती ना थी, परेश का गुस्सा थमता ना था.

मेने कहा : माधवी तू ही बता.

सर झुका कर, दाँतों में उंगली डाल कर वो बोली : भीया कहते हैं कि लड़का लड़की का हाथ पकड़ कर मुँह से मुँह लगाता है तब बच्चा पैदा होता है.

में : और तुम क्या कहती हो ?

माधवी ने मुँह फेर लिया और बोली : नहीं बताती, मुझे शर्म आती है.

अब परेश बोला : में कहूँ. वो कहती है कि जब लड़की पर लड़का चढ़ता है तब बच्चा होता है. क्या ये सच है भाभी ?

में : सच तो है लेकिन पूरा नहीं. माधवी, जानती हो कि उपर चढ़ कर लड़का क्या करता है ?

सर हिला कर माधवी ने हा कही और बोली : चोदता है.

ये सुन कर परेश अवाक हो गया. फिर बोला : माधवी गंदा बोली.

में समझ गयी कि दोनो में से किसी को पता नहीं था कि चोदना क्या है.

में ; जानती हो चोदना क्या होता है ?

माधवी : एक दूजे के मूह से मुँह मिलते हैं.

परेश : वो तो में कब का कह रहा हूँ.

में : रूको.मुँह से मुँह लगता है चुदाई में, लेकिन इस से ज़्यादा ओर कुच्छ भी होता है.

माधवी : भाभी तुम बताओ ना.. बड़े भैया तुम्हे रोज...रोज..चोदते होंगे ना ?

परेश : माधो , तुम बहुत गंदा बोलती हो.

माधवी : तुम्हे क्या ? तुम भी बोलो.

में : झगाडो मत. अब कौन बताएगा कि लड़का और लड़की में फ़र्क क्या है ?

परेश : लड़के को दाढ़ी मुछ होते हेँ और लड़की के सीने पर चुचियाँ.

में : सही. लेकिन मुख्य फ़र्क कौन सा है ?

माधवी : जाँघो बीच लड़की की पिंकी होती है और लड़के की नुन्नि.

में : बराबर. जब वो बड़े होतेहें तब उसे भोस और लॉडा कहते हेँ.
 


इतनी बात होते होते हम तीनो उत्तेजित होते चले थे. माधवी बार बार अपनी निकर ठीक करने के बहाने अपनी भोस खुजला लेती थी. परेश के टॅटर लंड ने पाजामा का तंबू बना दिया था.

मेने आगे कहा : जब चोदने का दिल होता है तब आदमी का लॉडा तन कर लंबा, मोटा और कड़ा हो जाता है. लड़की की भोस गीली हो जाती है. आदमी अपना कड़ा लॉडा जिसे लंड भी कहते हेँ उसे लड़की की चूत में डाल कर अंदर बाहर करता है. इसे चोदना कहते हेँ.

माधवी : ऐसा क्यूँ करते हेँ ?

में : ऐसा करने में बहुत मज़ा आता है और आदमी का वीर्य लड़की की चूत में गिरता है.वीर्य में पुरुष बीज होता है जो लड़की के स्त्री-बीज साथ मिल जाता है और नया बच्चा बन जाता है.

माधवी : भाभी देखो, भैया का ....वो खड़ा हो गया है.

परेश : तुझे क्या ? भाभी, एक बात बताउ ? मेरा तो रोज रात को खड़ा हो जाता है. उस में कुच्छ बुरा तो नहीं ना ?

में : कुच्छ बुरा नहीं. खड़ा भी होता होगा और स्वप्न देख कर वीर्य भी निकलता होगा.

परेश : भाभी, मधु के आगे क्यूँ....?

में : अब उन की बारी है. मधु, तुझे महावरिशुरू हो गयी होगी. नीचे भोस पर बाल उगे हेँ ?

माधवी ने सर हिला कर हा कही.

में : तू उंगली से खेलती हो ना ?

फिर सर हिला कर हा.

में :तूने लंड देखा है कभी ?

शरमा कर नीचे देख कर उस ने ना कही

मेना : परेश, तूने कब्भी चुचियाँ देखी हैं ?

उस ने ना कही.

में : ऐसा करते हेँ, माधवी तू तेरे स्तन दिखा और परेश तू लंड दिखा.

परेश : तू क्या दिखाएगी, भाभी ?

में : में भोस दिखाउन्गि. परेश, पहले तुम.

परेश ने पाजामा खोल कर नीचे सरकाया. लंड के पानी से उस की निक्केर गीली हो गई थी. वो ज़रा खिचकाया तो माधवी ने हाथ लंबा किया. परेश तुरंत हट गया और निक्केर उतार दी.

क्या लंड था उस का ? सात इंच लंबा और दो इंच मोटा होगा. दांडी एक दम सीधी थी. मत्था बड़ा था और टोपी से ढका हुआ था. चिकाने पानी से लंड गीला था. माधवी आश्चर्य से देखती रही. परेश को मेने धकेल कर लेटा दिया और उस के हाथ हटा कर लंड पकड़ लिया. मेरे छूते ही लंड ने ठुमका लगाया. वेल्वेट में लिपटा लोहे का डंडा जैसा उस का लंड था, बड़ा प्यारा हा.

में : माधु, ये लंड की टोपी चढ़ सकती है और मट्ठा खुला किया जा सकता है. देख.

मेने टोपी चड़ाई तो लंड से समेग्मा की बदबू आई. मेने कहा : परेश, नहाते समय उस को सॉफ करते नहीं हो ? ऐसा गंदा लंड से कौन चुड़वाएगी ? जा, सॉफ कर आ. परेश बाथरूम में गया.

में : माधवी, पसंद आया परेश का लंड ? अच्च्छा है ना ?

माधवी : में उसे च्छू सकती हूँ ?

में : क्यूँ नहीं ? लेकिन चुदवा नही सकोगी..

माधवी : क्यूँ नहीं ? मेरे पास भोस जो है ?

में : सही,लेकिन भाई बहन आपस में चुदाई नहीं करते.

इतने में परेश आ गया. ठंडा पानी से धोने से लंड ज़रा नर्म पड़ा था. मेने परेश को फिर लेटा दिया. लंड पकड़ कर टोपी चढ़ा दी. बड़ा मशरूम जैसा चिकना मत्था खुल गया. मेने हलके हाथ से मूठ मारी तो लंड फिर से तन गया. मेने पुचछा : मज़ा आता है ना ?

परेश : खूब मज़ा आता है भाभी, रुकना मत.

में होले होले मूठ मारती रही और बोली : माधवी, कुरती खोल और स्तन दिखा. माधवी खूब शरमाई, पलट कर खड़ी हो गयी. उस ने कुरती के हुक खोल दिए लेकिन खुले कपड़े से स्तन ढके रख सामने हुई. लंड छ्चोड़ मेने माधवी के हाथ हटाए और कुरती उतार दी. उस ने ब्रा पहनी नहीं थी, जवांन स्तन खुले हुए.

उमर के हिसाब से माधवी के स्तन काफ़ी बड़े थे, संपूर्ण गोल और कड़े. पतली नाज़ुक चमड़ी के नीचे खून की नीली नसें दिखाई दे रही थी. एक इंच की अरेवला ज़रा सी उपज आई थी. बीच में किस्मीस के दाने जैसी छोटी सी निपल थी. एग्ज़ाइट्मेंट से उस वक्त निपल कड़ी हो गई थी जिस से स्तन नॉकदार लगता था. स्तन देख कर परेश का लंड ने ठुमका लिया और कुच्छ ज़्यादा तन गया. वो बोला : में च्छू सकता हूँ ?

में : ना, बहन के स्तन भाई नहीं छुता.

परेश : भाभी, तू तो मेरी बहन नहीं हो. तेरे स्तन दिखा और च्छू ने दे.

में भी चाहती थी कि कोई मेरी चुचियाँ दबाए और मसले. मेने चोली उतार दी. वो दोनो देखते ही रह गये. मेरे स्तन भी सुंदर हेँ, लेकिन शादी के बाद ज़रा झुक गये हेँ. मेरी अरेवला बड़ी है पर निपल्स अभी छ्होटी है. मेरी निपल्स बहुत सेन्सिटिव है. गंगाधर उसे छूते है कि मेरी भोस पानी बहाना शुरू कर देती है. चोदते हुए वो जब मुँह में लिए चुसते हेँ तब मुझे झड़ने में देर नहीं लगती.
 


बिना कुच्छ कहे परेश ने स्तन पर हाथ फिराया. तुरंत मेरी निपल कड़ी हो गयी. उस ने हथेली से निपल को रगड़ा. स्तन के नीचे हाथ रख कर उठाया जैसे वजन नापता हो. मेरे बदन में झुरझुरी फैल गयी. उस के हाथ पर हाथ रख कर मेने मेरे स्तन दबाए. आगे सीखना ना पड़ा, परेश ने बेदर्दी से स्तन मसल डाले. मेरी भोस पानी बहाने लगी.

मेरे दिमाग़ में चुदवाने का ख़याल आया कि किसी ने दरवाजा खिटकहिटाया. फटा फट कपड़े पहन कर उन दोनो को सुला दिया और मेने जा कर दरवाजा खोला. सामने खड़े थे गंगाधर.

में : आप ? अभी कैसे आ सके ?

गंगा : एक गाड़ी आ रही थी, जगह मिल गयी.

में : अच्च्छा हुआ, चलिए, खाना खा लीजिए.

मुझे आगोश में लेते हुए वो बोले : खाना बाद में खाएँगे पहले ज़रा प्यार कर लें. में कुच्छ बोलूं इस से पहले उन्हों ने मेरे होटो से होट चिपका दिए. कपड़े उतारे बिना मुझे पलंग पर पटक दिया. किस करते करते घाघारी उपर उठाई और निकर खींच उतारी. में उन को कभी चुदाई की ना नहीं कहती हूँ. मेने जांघें पसारी और वो उपर आ गये. उन का लंड खड़ा ही था. घच्छ से चूत में घुसेड दिया. मुझे बोलने का मौका ही ना दिया, घचा घच्छ, घचा घच्छ ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे. पंद्रह बीस धक्के बाद वो धीरे पड़े और लंबे और गहरे धकके से चोदने लगे. स..र..र..र..र्ररर लंड अंदर, स...र...र...र.. बाहर. थोड़ी देर चुदाई का मज़ा ले कर में बोली : घर में मेहमान हेँ.

चुदाई रुक गई. वो बोले : मेहमान ? कौन मेहमान ?

मेने परेश और माधवी के बारे में बताया और कहा : वो शायद जागते होंगे.

घबडा कर गंगा उतर ने लगे. मेने रोक दिया : उन दोनो को चुदाई दिखानी ज़रूरी है. में उन को बुला लेती हूँ.

गंगा : अरे, वो तो अभी बच्चें हें, चाचा, चाची क्या कहेंगे ?

में : तुम फिकर ना करो. दो दिन पहले चाची ने मुझ से कहा था कि उन दोनो को चुदाई के बारे में शिक्षा दूं.

गंगा : क्यूँ ?

में : बात ऐसी हुई कि चाची के मायके में एक नयी दुल्हन को उस के पति ने पहली रात ऐसे चोदा कि उस की चूत फट गयी. लड़की को हॉस्पिटल ले गये लेकिन बचा ना सके. खून बह जाने से लड़की मर गयी. ये सुन कर चाची घबडा गयी है कि कहीं माधवी को ऐसा ना हो. इस लिए वो चाहती है कि हम उन्हें चुदाई की सही शिक्षा दे. ज़रूरत लगे तो उस की झिल्ली भी तोड़ दे. वैसे भी वो दोनो कुच्छ नहीं जानते.

गंगा : बुला लूँ उन को ?

परेश और माधवी को बुलाने की ज़रूरत ना थी. वो दरवाजे में खड़े थे. गंगा को मेने उतर ने ना दिया. उन का लंड ज़रा नर्म पड़ा था, मेने चूत सिकोड कर दबाया तो फिर कड़ा हो गया. वो चोदने लगे. चुदाई के धक्के खाते खाते मेने कहा : मा..मया...माधवी...त...तुम....ऊओ, सीईइ, तुम और पा...पा...परेश यहाँ..आ...आ...कर, गंगा ज़रा धी..धीरे...उउउइई ...तुम देखो.

वो पलंग के पास आ गये. गंगा हाथों के बल उपर उठे जिस से हमारे पेट के बीच से देखा जा सके कि लंड कैसे चूत में आता जाता है. माधवी खड़े खड़े एक हाथ से अपना स्तन मसल रही थी, दूसरा भोस पर लगा हुआ था. परेश होले होले मूठ मार रहा था.

गंगा मेरे कान में बोले : देखा परेश का लंड ? ऐसा कर, तू उन से चुदवा ले. में माधवी साथ खेलता हूँ.

में ; माधवी को चोदना नहीं.

गंगा : ना, ना. चूत में लंड डाले बिना स्वाद चखाउन्गा.

क्रमशः................

 
एक यादगार और मादक रात--2

गंगा उतरे. उन का आठ इंच लंबा गीला लंड देख माधवी शरमाई. उस ने मुस्कुराते हुए मुँह फेर लिया. परेश का लंड पकड़ कर मेने पूछा : परेश, चोदना है ना ?

बिन बोले वो मेरी जाँघो के बीच आ गया. लंड पकड़ कर धक्के मार ने लगा.

वो इतना जल्दी में था कि लंड भोस पर इधर उधर टकराया लेकिन उसे चूत का मुँह ना मिला. बाहर ही भोस पर झाड़ जाय उस से पहले मेने लंड पकड़ कर चूत पर धर दिया. एक ही धक्के से पूरा लंड चूत में उतर गया. आगे सिखाने की ज़रूरत ना रही/ धना धन, घचा घच्छ धक्के से वो मुझे चोदने लगा.

उधर गंगा माधवी लो गोद में लिए बैठे थे. माधवी ने अपना मुँह उस के सीने में छुपा दिया था. गंगा का एक हाथ स्तन सहला रहा था और दूसरा निक्केर में घुसा हुआ था. बार बार माधवी छटपटा जाती थी और गंगा का निक्केर वाला हाथ पकड़ लेती. मेरे ख़याल से गंगा उस की क्लाइटॉरिस छेड़ रहे थे. इतने में गंगा ने माधवी का हाथ पकड़ कर लंड पर रख दिया. पहले तो झटके से माधवी ने हाथ हटा लिया लेकिन जब गंगा ने फिर पकड़ाया तब मात्र उंगलियों से च्छुआ, पकड़ा नहीं. गंगा बोले : माधो, मुट्ठी में पकड़, मीठा लगेगा.

कुच्छ आनाकानी के बाद माधवी ने मुट्ठी मे लंड पकड़ लिया. गंगा के दिखाने मुताबिक वो होले होले मूठ मार ने लगी.

माधवी का चाहेरा उठा कर गंगा ने मुँह पर चुंबन किया. में देख सकती थी कि गंगा ने अपनी जीभ से माधवी के होठ चाते औट खोले. मेने परेश को ये नज़ारा दिखाया. अपनी बहन के स्तन पर गंगा का हाथ और बहन के हाथ में गंगा का लंड देख परेश की उत्तेजना बढ़ गयी. घच घच्छ, घचक घच्छ तेज धक्के से चोदने लगा. अचानक में झाड़ गयी.

गंगाधर का कम मुश्किल था लेकिन वो सब्र से काम लेते थे. माधवी अब शरमाये बिना लंड पकड़े मूठ मार रही थी. उस के मुँह से सिसकारियाँ निकल पड़ती थी और नितंब डोलने लगे थे.

इधर तेज रफ़्तार से धक्के दे कर परेश झाड़ा. थोड़ी देर तक वो मुझ पर पड़ा रहा और बाद में उतरा. उस का लंड अभी भी टाइट था. में माधवी के पास गयी. गंगा को हटा कर मेने माधवी को गोद में लिया. में पलंग की धार पर बैठी और मेने माधवी की जांघें चौड़ी पकड़ रखी. उस की गीली गीली भोस खुली हुई.

माधवी सोलह साल की थी लेकिन उस की भोस मेरी भोस जैसी बड़ी थी. उँची मोन्स पर और बड़े होठ के बाहरी हिस्से पर काले घुंघराले झाँत थे. बड़े होठ मोटे थे, बड़े संतरे की फाड़ जैसे और एक दूजे से सटे हुए. बीच की दरार चार इंच लंबी होगी. क्लाइटॉरिस एक इंच लंबी और मोटी थी. उस वक्त वो कड़ी हुई थी और बड़े होठ के अगले कोने में से बाहर निकल आई थी. गंगा फर्श पर बैठ गये. दोनो हाथ के अंगूठे से उस ने भोस के बड़े होठ चौड़े किए और भोस खोली. अंदर का कोमल गुलाबी हिस्सा नज़र अंदाज हुआ. छोटे होठ पतले थे लेकिन सूजे हुए थे. चूत का मुँह सिकुदा हुआ था और काम रस से गीला था. गंगा की उंगली जब क्लाइटॉरिस पर लगी तब माधवी कूद पड़ी. मेने पिछे से उस के स्तन थाम लिए और निपल्स मसल डाली. गंगा अब भोस चाटने लगे. भोस के होठ चौड़े पकड़े हुए उसने क्लाइटॉरिस को जीभ से रगड़ा. साथ साथ जा सके इतनी एक उंगली चूत में डाल कर अंदर बाहर करने लगे. माधवी को ऑर्गॅज़म होने में देर ना लगी. उस का सारा बदन अकड़ गया, रोएँ खड़े हो गये, आँखें मिच गई और मुँहसे और चूत से पानी निकल पड़ा. हलकी सी कंपन बदन में फैल गयी. ऑर्गॅज़म बीस सेकेंड चला. माधवी बेहोश सी हो गयी.

मेने उसे पलंग पर सुलाया. थोड़ी देर बाद वो होश में आई . वो बोली : भाभी, क्या हो गया मुझे ?

गंगाधर : बिटिया, जो हुआ इसे अँग्रेज़ी में ऑर्गॅज़म कहते हैं. मज़ा आया कि नहीं ?

माधवी : बहुत मज़ा आया, अभी भी आ रहा है. नीचे पिंकी में फट फट हो रहा है. क्या तुमने मुझे चोदा ?

गंगाधर : ना, चोदा नहीं है, तुम अभी कंवारी ही हो. अब में कुच्छ नहीं सुनना चाहता. तुम दोनो चुप चाप सो जाओ और आराम करो.

परेश : आप क्या करेंगे ?

में : हमारी बाकी रही चुदाई पूरी करेंगे.

परेश : में देखूँगा.ये मुझे सोने नहीं देगा.

परेश ने अपना लंड दिखाया जो वाकई पूरा तन गया था. माधवी लेटिरही और करवट बदल कर हमें देख ने लगी.

में फर्श पर चित लेट गयी. गंगा ने मेरी जंघें इतनी उठाई कि मेरे घुटने मेरे कानों से लग गये. घच्छ सा एक धक्के से उस ने पूरा लंड चूत में घुसेड दिया. हम दोनो काफ़ी उत्तेजित हो गये थे. घचा घच्छ, घचा घच्छ धक्के से वो चोदने लगे. चूत सिकोड कर में लंड को भींचती रही. बीस पचीस भकको के बाद गंगा उतरे और ज़्झट पट मुझे चारो हाथ पाँव के बल कर दिया, घोड़ी की तरह. वो पिछे से चढ़े. जैसे ही उस ने लंड चूत में डाला कि मुझे ऑर्गॅज़म हो गया. वो लेकिन रुके नहीं, धक्के मारते रहे. दस बारह धक्के के बाद मेरी कमर पकड़ कर उस ने लंड को चूत की गहराई में घुसेड दिया और पक्फ, पक्फ पिचकारियाँ लगा कर झाडे. मुझे दूसरा ऑर्गॅज़म हुआ. मेरी योनि उन के वीर्य से छलक गयी. में फर्श पर चपत हो गयी. थोड़ी देर तक हम पड़े रहे, बाद में जा कर सफाई कर आए.

माधवी बैठ गई थी वो बोली : भाभी, परेश ने मेरी पिंकी देख ली पर अपना लंड देखने नहीं देता.

गंगाधर : कोई बात नहीं,बेटा, मेरा देख ले. कैलाश, तू ही दिखा.
 


गंगा लेट गये. एक ओर में बैठी दूसरी ओर माधवी. परेश बगल में खड़ा देखने लगा.

एक हाथ में लॉडा पकड़ कर मेने कहा :ये है दंडी, ये है मत्था. यूँ तो मत्था टोपी से ढका रहता है. चूत में घुसते वक्त टोपी उपर चढ़ जाती है और नंगा मत्था चूत की दीवारों साथ घिस पाता है. ये जगह जहाँ टोपी मत्थे से चिपकी हुई है उस को फ्रेनम बोलते हैं. लड़की की क्लाइटॉरिस की तरह फ्रेनम भी बहुत सेन्सिटिव है. ये है लंड का मुँह जहाँ से पिसाब और वीर्य निकल पाता है.

लंड की टोपी उपर नीचे कर के में आगे बोली : मूठ मारते वक्त टोपी से काम लेते हैं. लंड मुँह में भी लिया जाता है. देख, ऐसे.....

मेने लंड का मत्था मुँह में लिया और चूसा. तुरंत वो अकड़ ने लगा.

माधवी : में पकडू ?

गंगाधर : ज़रूर पकडो. दिल चाहे तो मुँह में भी ले सकती हो.

आधा तना हुआ लंड माधवी ने हाथ में लिया कि वो पूरा तन गया. उस की अकड़ाई देख माधवी को हसी आ गयी. वो बोली : मेरे हाथ में गुदगुदी होती है.

मेने लंड मुँह से निकाला और कहा : मुँह में ले, मज़ा आएगा.

सर झुका कर डरते डरते माधवी ने लंड मुँह में लिया. मेने कहा : कुच्छ करना नहीं, जीभ और ताल्लू के बीच मत्था दबाए रक्ख. जब वो ठुमक लगाए तब चूसना शुरू कर देना.

माधवी स्थिर हो गयी.

परेश ये सब देख रहा था और मूठ मार रहा था. वो बोला : भाभी, में माधो की चुचियाँ पकडू ? मुझे बहुत अच्छि लगती है.

गंगाधर : हलके हाथ से पकड़ और धीरे से सहला, दाबना मत. स्तन अभी कच्चे हैं, दबाने से दर्द होगा.

माधवी गंगा का लंड मुँह में लिए आगे झुकी थी. परेश उस के पिछे खड़ा हो गया. हथेलिओं में दोनो स्तन भर के सहलाने लगा. वो बोला : भाभी, माधो के स्तन कड़े हैं और निपल्स भी छ्होटी छ्होटी है. तेरे स्तन इन से बड़े हैं और निपल्स भी बड़ी हैं.

में बगल में खड़ी थी. मेरा एक हाथ परेश का लंड पकड़े मूठ मार रहा था. दूसरा हाथ माधवी की क्लाइटॉरिस से खेल रहा था. क्लाइटॉरिस के स्पंदन से मुझे पता चला कि माधवी बहुत उत्तेजित हो गयी थी और दूसरे ऑर्गॅज़म के लिए तैयार थी अचानक मुँह से लन्ड़ निकाल कर वो खड़ी हो गयी. अपने हाथ से भोस रगड़ती हुई बोली : बड़े भैया, चोद डालो मुझे, वारना में मर जाउन्गि.

गंगा : पगली, तू अभी कम उमर की है.

माधवी : देखिए, में सोलह साल की हूँ लेकिन मेरी चूत पूरी विकसित है और लंड लेने के काबिल है. भाभी, तुम ने पहली बार चुदवाया तब तुम भी सोलह साल की ही थी ना ?

गंगा : फिर भी, तू मेरी छ्होटी बहन है

माधवी : सही, लेकिन आप चाहते हैं कि में किसी ऑर के पास जाउ और चुदवाउ ?

गंगा : बेटे, चाहे कुच्छ कहो, तेरे माई बाप क्या कहेंगे हमें ?

माधवी ने गुस्से में पाँव पतके और बोली : अच्च्छा, तो में चलती हूँ घर को. परेश, चल. घर जा के तू मुझे चोद लेना.

गंगा : अरी पगली, ज़रा सोच विचार कर आगे चल.

मुँह लटकाए वो बोली : भाभी ने परेश को चोदने दिया क्यूँ कि वो लड़का है. मेरा क्या कसूर ? मुझ से अब रहा नहीं जाता. परेश ना बोलेगा तो किसी नौकर से चुदवा लूँगी.

माधवी रोने लगी. मेने उसे शांत किया और कहा : घर जाने की ज़रूरत नहीं है इतनी रात को. तेरे भैया तुम्हे ज़रूर चोदेन्गे

इतने में फिर से दरवाजा खटखटाने की आवाज़ आई. फटा फट ताश खेलते हों ऐसा महॉल बना दिया. मेने जा कर दरवाजा खोला. सामने चाची खड़ी थी. अंदर आ कर उस ने दरवाजा बंद किया और बोली : सब ठीक तो है ना ?

में : वो आ गये हैं. उन दोनो ने काफ़ी कुच्छ देख लिया है. एक मुसीबत है लेकिन.

चाची : क्या मुसीबत है ?

में : परेश से तो वो...वो...करवा लिया, समझ गयी ना ? अब माधवी भी माँग रही है.

चाची : तो परेशानी किस बात की है ? तुझे तो मालूम होगा कि गंगाधर झिल्ली तोड़ने में कैसा है.

में : उन की हुशियारी की बात ही ना करें. कौन जाने कहाँ से सीख आए है तकनीक.

चाची : बस तो में चलती हूँ. गंगाधर से कहना कि सब्र से काम ले.

चाची चली गयी. में अंदर आई तो देखा कि माधवी गंगा से लिपटी हुई लेटी थी. उस की एक जाँघ सीधी थी, दूसरी गंगा के पेट पर पड़ी थी. उस की भोस गंगा के लंड साथ सटी हुई थी. उन के मुँह फ्रेंच किस मे जुड़ गये थे. गंगा का हाथ माधवी की पीठ और नितंब सहला रहा था. कुर्सी में बैठा परेश देख रहा था और मूठ मार रहा था. अब निश्चित था कि क्या होनेवाला था. मेने इशारे से गंगा को आगे बढ़ने का संकेत दे दिया. में परेश के पास गयी. उस को उठा कर में कुर्सी में बैठ गयी और उस को गोद में ऐसे बिठाया कि हम गंगा और माधवी को देख सके. परेश का लंड मेने जंघें चौड़ी कर चूत में ले लिया.
 
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