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हिन्दी में मस्त कहानियाँ



उधर चित लेटे हुए गंगा पर माधवी सवार हो गयी थी, जैसे घोड़े पर. गंगा का लंड सीधा पेट पर पड़ा था. चौड़ी की हुई जांघों के बीच माधवी की भोस लंड के साथ सॅट गयी थी. चूत में पैठे बिना लंड भोस की दरार में फिट बैठ गया था. अपने नितंब आगे पिछे कर के माधवी अपनी भोस लंड से घिस रही थी. माधवी के हर धक्के पर उस की क्लाइटॉरिस लंड से रगड़ी जा रही थी और लंड की टोपी चढ़ उतर होती रहती थी. भोस और लंड काम रस से तर-ब-तर हो गये थे. वो गंगा के सीने पर बाहें टिका कर आगे झुकी हुई थी और आँखें बंद किए सिसकारियाँ ले रही थी. गंगा उस के स्तन सहला रहे थे और कड़ी निपल्स को मसल रहे थे.

थोड़ी देर में वो थक गयी. गंगा के सीने पर गिर पड़ी. अपनी बाहों में उसे जाकड़ कर गंगा पलटे और उपर आ गये. माधवी ने जांघें चौड़ी कर अपने पाँव गंगा की कमर से लिपटाए, बाहें गले से लिपताई. भोस की दरार में सीधा लंड रख कर गंगा धक्के देने लगे, चूत में लंड डाले बिना. माधवी की क्लाइटॉरिस अच्छि तरह रगड़ी गयी तब वो छटपटाने लगी.

गंगा बोले : माधवी बिटिया, ये आखरी घड़ी है. अभी भी समय है. ना कहे तो उतर जाउ.

माधवी बोली नहीं. गंगा को जोरों से जाकड़ लिया. वो समझ गये. गंगा अब बैठ गये. टोपी उतार कर लंड का मत्था धक दिया. एक हाथ से भोस के होठ चौड़े किए और दूसरे हाथ से लंड पकड़ कर चूत के मुँह पर रख दिया. एक हलका दबाव दिया तो मत्था सरकता हुआ चूत में घुसा और योनि पटल तक जा कर रुक गया. गंगा रुके. लंड पकड़ कर गोल गोल घुमाया, हो सके इतना अंदर बाहर किया. चूत का मुँह ज़रा खुला और लंड का मत्था आसानी से अंदर आने जाने लगा. अब लंड को चूत के मुँह में फसा कर गंगा ने लंड छ्चोड़ दिया और वो माधवी उपर लेट गये. उस ने महावी का मुँह फ्रेंच किस से सील कर दिया, दोनो हाथ से नितंब पकड़े और कमर का एक झटका ऐसा मारा कि झिल्ली तोड़ आधा लंड चूत में घुस गया. दर्द से माधवी छ्टपटाई और उस के मुँह से चीख निकल पड़ी जो गंगा ने अपने मुँह मे झेल ली. गंगा रुक गये.

गंगा को देख परेश भी धक्का लगा ने लगा. हम कुर्सी में थे इसी लिए आधा लंड ही चूत में जा सकता था. परेश को हटा कर में फर्श पर आ गयी और जांघें फैला कर उसे फिर मेरे उपर ले लिया. तेज रफ़्तार से परेश मुझे चोदने लगा.

उधर माधवी शांत हुई तब गंगा ने पुछा : कैसा है अब दर्द? माधवी ने गंगा के कान में कुच्छ कहा जो में सुन नहीं पाई. गंगा ने लेकिन अपनी कमर से उस के पाँव च्छुड़ाए और इतने उपर उठा लिए कि घुटनें कान तक जा पहुँचे. माधवी के नितंब अधर हुए. गंगा की चौड़ी जांघें बीच से माधवी की भोस और उस में फसा हुआ गंगा का लंड साफ दिखने लगे. आधा लंड अब तक बाहर था जो गंगा धीरे धीरे चूत में पेल ने लगे. थोड़ा अंदर थोड़ा बाहर ऐसे करते करते दो चार इंच ज़्यादा अंदर घुस पाया लेकिन पूरा नहीं. अब गंगा ने वो तकनीक आज़माई जो मेरे साथ सुहाग रात को आज़माई थी.

उस ने होल से लंड बाहर खींचा स..र..र..र..र कर के. अकेला मत्था जब अंदर रह गया तब वो रुके. लंड ने ठुमका लगाया तो मत्थे ने ऑर मोटा हो कर चूत का मुँह ज़्यादा चौड़ा कर रक्खा. माधवी को ज़रा दर्द हुआ और उस के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी. इस बार गंगा रुके नहीं. स..र.र..र..र..र.र कर के उस ने लंड फिर से चूत में डाला. आखरी दो इंच तो बाकी ही रह गया, जा ना सका. बाद में गंगा ने बताया कि माधवी की चूत पूरा लंड ले सके इतनी गहरी नहीं थी. उस को ज़्यादा दर्द ना लग जाय इसीलिए सावधानी से चोदना ज़रूरी था. ये तो अच्छा हुआ कि माधवी की पहली चुदाई गंगा ने की, वरना चाची की दहशत हक़ीकत में बदल जाती.

यहाँ परेश और में झाड़ चुके थे, परेश का लंड नर्म होता चला था. गंगा हलके, धीर्रे और गहरे धक्के से माधवी को चोदने लगे. माधवी के नितंब डोल ने लगे थे. लंड चूत की पक्फ पुच्च आवाज़ के साथ माधवी की सिसकारियाँ और गंगा की आहें गूँज रही थी.

परेश : भाभी, देख, भोस के होठ कैसे लंड से चिपक गये हैं ? बड़े भैया का लंड मोटा है ना ?

में : देवर्जी, तुम्हारा भी कुच्छ कम नहीं है.

गंगा के धक्के अब अनियमित होते चले थे. स..र..र..र.र की आवाज़ के कभी कभी घच्छ से लंड घुसेड देते थे. लगता था कि गंगा झड़ने के नज़दीक आ गये थे. माधवी लेकिन इतनी तैयार नहीं थी. उस ने खुद रास्ता निकाल लिया. अपने ही हाथ से क्लाइटॉरिस रगड़ डाली और छ्टपटाती हुई झड़ी . गंगा स्थिर थे लेकिन माधवी के चूतड़ ऐसे हिलाते थे कि लंड चूत में आया जाया करता था. माधवी का ऑर्गॅज़म शांत हुआ इस के बाद तेज रफ़्तार से धक्के मार कर गंगा झड़े और उतरे. करवट बदल कर माधवी सो गई. सफाई के बाद हम सब सो गये.

दूसरे दिन जागे तब परेश ने एक ओर चुदाई मागी मूह से. गंगा ने भी अनुरोध किया. में क्या करती ? दस मिनिट की मस्त चुदाई हो गई. परेश की खुशी छुपाए नही छुपति थी . शर्म की मारी माधवी किसी से नज़र मिला नहीं पाती थी. फिर भी गंगा ने उसे बुलाया तो उस के पास चली गयी. गले में बाहें डाल गोद में बैठ गयी. गंगा ने चूम कर पुछा : कैसा है दर्द ? नींद आई बराबर ?

शरमा कर उस ने अपना मुँह छुपा दिया गंगा के सीने में. कान में कुच्छ बोली.

गंगा : ना, अभी नहीं. दो दिन तक कुच्छ नहीं. चूत का घाव ठीक हो जाय इस के बाद.

लेकिन माधवी जैसी हठीली लड़की कहाँ किसी का सुनती है ? वो गंगा का मुँह चूमती रही और लंड टटोलती रही. गंगा भी रहे जवान आदमी, क्या करे बेचारा ? उठा कर वो माधवी को अंदर ले गये और आधे घंटे तक चोदा.

उस रात के बाद वो भाई बहन अक्सर हमारे घर आते रहे और चुदाई का मज़ा लेते रहे. जब स्कूल खुले तब उन्हें शहर में जाना पड़ा. मैं और गंगाधर इंतेज़ार कर रहे हैं कि कब वाकेशन पड़े और वो दोनो घर आए. आख़िर नये नये लंड से चुदवाने में और नयी नयी चूत को चोदने में कोई अनोखा आनंद आता है. है ना ? तो दोस्तो ये कहानी यही ख़तम होती है फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ तब तक के लिए विदा आपका दोस्त राज शर्मा

 
डॉक्टर रश्मि

दोस्तो कोई भी घटना कभी भी सोची समझी नही होसकती और ना ही मनचाई.. खास कर के सेक्स तो बिल्कुल भी नही... क्योंकि सभी किसी ना किसी से फॅंटसी सेक्स करते है लड़के सोचते है को वो कैटरीना कैफ़ या प्रियंका चोपड़ा को चोदेन्गे या लड़की सोचे कि वो सलमान या अक्षय कुमार से चुदवा ले तो यह फॅंटसी तक तो ठीक है पर हक़ीकत नही... और रियल लाइफ मे भी चुदाई के लिए बहुत आसानी से कोई मिलता भी नही .. यहा तक कि वाइफ भी बिना मनुहार के अपनी चूत चुदवाने को तय्यार नही होती......

दोस्तो मैं हू देव.. आपका अपना देवमूकुंद जिसने आपको पहले अपने कुछ अनुभव पढ़ने के लिए स्टोरी के रूप मे दिए.... अब मेरी उमर 40 टच कर रही है लेकिन आक्टिव सेक्स लाइफ अभी भी जी रहा हू.. मैं अपनी वाइफ और जो भी मिल जाती ही उससे बड़ी ही उम्दा चुदाई कर लेता हू.. मैं सागर का रहने वाला हू.. यह स्टोरी है जब मेरी शादी हुई हुई थी ... मेरी एक फ्रेंड है गिनॅकलजिस्ट डॉक्टर रश्मि(नेम चेंज्ड) की उसी की क्लिनिक मे चुदाई की....

हुआ कुछ यूँ की मेरी शादी लोकल मे ही हुई है.. और मेरी वाइफ एक टीचर की फॅमिली से है तो आप समझ सकते है कि वो कितनी फॉर्वर्ड होगी... मैने अपनी वाइफ को पहली बार अपनी ही शादी मे जैमला के स्टेज पर ही देखा था ध्यान से.... खैर मेरे लंड की साइज़ ज़्यादा लंबी होने से उसकी सील तो टूट गयी और जबरदस्त सुहाग रात तो क्या दिन, सुबहा, शाम सब कुछ बहुत मस्त हुई.... लेकिन मेरे लंड की ठोकरो से मेरी वाइफ जिसने पहले कभी लंड का नाम भी ना सुना हो इस हल्लाबी लंडको अपनी चूत मे घुस्वाकर लंगड़ाकर चलती थी.. पहले कुछ दिन तो वो ठीक से लंगड़ा कर भी ना चल सकी...चूँकि वो नई नई थी तो चुदवाने को भी मना ना कर सकती थी सारे दर्द सहते हुए भी चुपचाप चुदवाती रहती थी मेरे से लेकिन फिर रोती थी और उसकी चूत रोज सूज जाती और उससे रोज थोडा बहुत खून टपकता था....

हम दोनो ने एक दिन बाहर एक शाम साथ गुजारने का फ़ैसला किया उस दिन मैने उससे पूछा की घर मे तो तुम शरमाती हो मेरे से बात करने मे और कमरे मे तुमको देखकर सिर्फ़ तुमको नंगा करके चोद्ते रहने को दिल चाहता है... यहा बताओ तुम खुल कर क्यों नही चुदवाती .. बड़ी मुस्किल से उसने बताया की आपका वो (लंड) बहुत बड़ा है इससे मेरी वो(चूत) मे घाव हो जाता है मुझे यूरिनेशन मे भी दिक्कत होती है.... तभी मैने निर्णय किया की इसको अपनी ज्ञानिक फ्रेंड डॉक्टर.रश्मि के पास ले चलता हू.. मैने उसे फोन किया वो क्लिनिक पर ही थी.. उसने मुझे टाइम दे दिया... और कहा डिन्नर साथ मे ही करेंगे...

हम फिक्स्ड टाइम पर उसकी क्लिनिक पर पहुचे ड्र.रश्मि वैसे तो मेरे से उमर मे बड़ी थी उस समय उनकी उमर 35-38 की रही होगी और मेरी 28 की थी... लेकिन मैं वॉलंटियियर्ली ब्लड डोनेट करता था और मज़लूम की मदद करता था इसलिए मेरी उससे दोस्ती थी वो मेरे से काफ़ी इंप्रेस्ड थी... उसने अपने सभी पाटेंट्स निबटा लिए थे सबसे आखरी मे हमे बुलाया....

मैने उसको समस्या बताई तो ड्र. रश्मि कहने लगी" यार देव एक बात कहु बुरा मत मानना यार"

मैने कहा " हा कहिए आप तो डॉक्टर है"

" यार तुमने इस बेचारी को बड़ी ही बेरेहमी से प्यार किया होगा इसलिए इसकी हालत खराब हो गई"

वहाँ खड़ी उसने मेरी वाइफ को कहा तुम अंदर चलो चेकप कॅबिन मे अपने कपड़े उतारो और टेबल पर लेट जाओ.. मैं आती हू...

फिर वो अपने ग्लव्स वागियरह लेकर पहुचि... उसने कुछ देर तक चेकुप किया फिर मेरी वाइफ की कन्सेंट लेकर मुझे भी अंदर बुला लिया.....

रश्मि मेरे से बोली" देखो देव इस मासूम सी चीज़ (चूत) की तुमने कैसी धज्जियाँ उड़ा दी"

यह तो बहुत प्यार करने की चीज़ है तुमने इसे किस तरीके से हॅंडल किया कि इसकी वेगीना मे घाव ही घाव है अंदर तक.. और मेरी पत्नी से कहा तुम बहुत खुसकिस्मत हो कि तुमको ऐसा पति मिला नही तो औरते तरसती है ऐसे प्यार के लिए...

मेरी वाइफ ने कहा " डॉक्टर एक तो इनका बहुत बड़ा और मोटा है ऊपेर से यह 1-2 घंटे के पहले मेरी उसमे से नही निकालते" मेरा पूरा बदन टूटता है...

मेरी वाइफ की चिकनी चूत जिस पर मैने डिज़ाइन दार झांते बना रखी थी देख कर मेरा लंड तो तुरंत तन गया था और यह शायद रश्मि ने देख लिए था तो उसने अपनी गांद कॅबिन मे कम जगह होने के कारण मेरे लंड से रगडी थी...

"अछा चलो अब जो हो गया सो हो गया मैं सब ठीक कर दूँगी.. चलो देव तुम अब बाहर वेट करो" रश्मि ने उसे दिलासा और मुझे बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा...

कुछ देर बाद वो अकेली ही मेरी वाइफ के कपड़े लिए हुए आई और बोली उसे अभी 1-1.30 घंटे लेटने के लिए कहा है क्रीम लगाई है अंदर तक और कहा है कि तुमको चेक करना है.... रश्मि मेरे से बोली

रश्मि उस दिन येल्लो सलवार सूट पहने हुई थी जिस्मै से उसके 38 साइज़ के बूब्स झलक रहे थे और वो कॅबिन से बिना चुन्नी के निकली थी... वो बैठत हुए मेरे सामने झुकी अपनी दूधों की घाटी दिखाते हुए ... और मुझे प्रैज़्क्रिपशन लिखने लगी...

"मुझे भी चेक करोगी क्या.....' मैने पूछा

"हा करना ही पड़ेगा" रश्मि बोली और मुझे अपनी सीट के पीछे बने दरवाजे की ओर इशारा किया कि तुम वाहा चलो....

मैं उठा तो वाहा चला गया....

वो कमरा डॉक्टर्स रेस्टरूम रूम था जिस्मै सोफा और बेड फ्रिड्ज टीवी से सज़ा हुआ था भीने भीने रोज़ सेंट की स्मेल आ रही थी.... मेरा लंड तो वाइफ की चूत और रश्मि के बूब्स की घाटी देखकर वैसे ही तना हुआ था फिर इस महॉल ने और उसे जगा दिया था....

थोड़ी देर बाद रश्मि रूम मे दाखिल हुई... उसने डोर बोल्ट किया...

कहने लगी "पेंट खोलो..."

मैने कहा "मुझे शर्म आती है"

"धात पगले डॉक्टर से कैसे शर्म"

उसने मुझे पलंग पर लिटा दिया और मेरा पॅंट खोलने लगी....
 


मेरा पॅंट निकाल कर उसे डाइरेक्ट ही मेरे लंड के दर्शन हो गये...... क्योंकि मैं उन दिनो अंडरवेर नही पहनता था......

मेरा लंड खुलते ही उसने अपने हाथों पर दस्ताने चढ़ा लिए और कहा कि बहुत मस्त माल पाया है रे देव तूने तो इसे देख कर तो किसी की भी नीयत खराब हो जाए और अंदर जाने पर अछी ख़ासी मेच्यूर औरत भी चीखेगी....

" उसने मेरे लंड को अपनी मुट्ठी मे लेकर उसको उपर से नीचे और नीचे से ऊपेर सहलाया मूठ मारने की स्टाइल मे"

उसके हाथ लगाने से मेरा लंड कुछ और फूल गया था.. मुझे लग रहा था कि मैं ज़्यादा नही टिक पाउन्गा... मैने कहा डॉक्टर यदि चेक कर लिया हो तो मैं पेंट पहन लू

बोली अभी नही... फिर उसने एक बॉटल मे से कुछ लिक्विड निकाल कर लंड पर लगाया उस्मै से चेररिश खुसबू आ रही थी......

"देव तेरा पेनिस तो बहुत मस्त है ऐसा लगता है इसे प्यार करती रहू" रश्मि ने कहा... रस्मी की गांद मेरी ओर थी और वो झुक कर मेरे लंड का मुआईना कर रही थी....

मुझे लगा कि वो शायद गरम हो गई है तो मैने चान्स लेना ठीक समझा...

मैने अपना हाथ उसकी गांद पर फेरना चालू किया... और उंगलिया सलवार के ऊपेर से ही उसकी चूत के पास तक ले गया.....

"सीईईईईईई दीएव मैं अपना कॉंटरोल्ल खोती जा रही हू........ "

"एक तो तुम्हारा यह गुलाबी मस्त मलांगा लंड और उपर से तुम्हारी यह हरकते......उम्म्म्म देव... आइ म गॉन मड्ड....."

'रश्मि ....... मुझे तो अब चूत चाहिए चाहे तुम मुझे दो या मेरी वाइफ को यहा बुलाओ...... " कहते हुए मैने उसकी चूत को अपनी हथेली मे भर लिया सलवार के ऊपेर से ही........

उसकी चूत को मसलते ही रश्मि ने गहरी साँस के साथ सिसकारी भरी मोअन्न किया... सीईईईूम्म्म्मम .....आआआआ........... और मेरा लंड अपने मूह मे भर लिया.......... और वो मेरे लंड को पागलों की तरह चूसने लगी....... मैं उसकी चूत को सलवार और उसकी पॅंटी समेत ही मसल्ने लगा.....

रस्मी मेरा लंड मूह मे ही लिए हुए मेरे ऊपेर सवार हो गई और उसने अपनी सलवार एक झटके मे नीचे खिसका दी.. उसकी सलवार मे नाडा की जगह एलास्टिक लगी हुई थी..... मेरे सामने उसकी सामली सामली सी गोल गोल गांद और उसकी येल्लो प्रिंटेड पॅंटी थी जो की चूत की जगह से बहुत गीली थी.......

वो चूत को मेरे मूह पर रख रही थी.. और मेरे लंड को बहुत जोरो से चूस रही थी... मैने पहले उसकी जांघे और खोल कर उसकी पॅंटी जहा से गीली थी उसको सूँघा उस्मै से उसकी पेशाब और उसके पानी की मिली जुली स्मेल आ रही थी......

मैने कहा रश्मि मेरी जान तुमने मूत लिया क्या .... तुम्हारी पेशाब की खुसबू तो बहुत ही अछी है मैने इतना कहते हुए वित पॅंटी उसकी चूत को अपने मूह मे भरकर चूसा....

मेरे चूसने से वो मेरा लंड अपने मूह मे कसने लगी और वैसे मे ही मोन करने लगी.....मैं भी उसकी तबाद तोड़ चूसा उसकी चुसाइ से मैंझरने के करीब था और वो भी मेरे चूत चूसने से वैसे ही झार गई..... मैने ना जाने कितनी पिचकारी उसके गले मेछोड़ी होंगी.........वो बिना एक भी बूँद टपकाए मेरा पूरा पानी पी गई और वो निढाल होकर पैर मेरे सिर के दोनो ओर फैलाकर मेरे उपर ही लेट गई.... मेरा लंड अब भी उसके मूह मे था.... मैने उसकी पॅंटी चूत पर से खिसकाई तो उसकी झांते थी...... मैने चूत को सूँघा और उसे जीव से चॅटा....... तो वो चिहुक पड़ी........

"उई....देव.... बहुत गुदगुदी होती है.... ऐसा करने से........."

'रश्मि थोडा उठो ना.....अपने कपड़े उतारो"

' नही पूरे नही अभी तो मुझे तुम ऐसे ही चोदो..."

मैने कहा अभी यह खड़ा होने मे 10-15 मिनिट लेगा जब तक मुझे प्यार तो कर लेने दो....

वो उठी तो मैने उसका कुर्ता निकाला जिस्मै उसकी येल्लोयिश ब्रा मे मम्मे बाहर को निकलने को बेताब थे मैं भी पूरा नंगा हो चुका था.....

मैने रश्मि से कहा तुम्हारे हज़्बेंड तो इन दूध की घाटी मे ही मस्त हो जाते होंगे.....

" कहा जानू..... वो तो मेरे हाथ लगाते ही ढेर हो जाते है फिर मुझे अपने मूह से फारिग करते है"....

" तुम दूसरों का तो इलाज़ करती हो फिर उनका क्यों नही किया" .....

"क्या फ़ायदा.. करने से... उनका तुम्हारे लंड का 1/4थ भी नही है"

"देव मुझे जबरदस्त चोदो..... आज.... मेरी 3 साल से चुदाई नही हुई...मैं तो तुम्हारी वाइफ की चूत की हालत और कॅबिन मे तुम्हारा लंड अपनी गांद पर महसूस करके ही पानी छोड़ दी थी.....और निश्चय कर लिया था की आज चाहे कुछ हो जाए तुमसे चुदवा के रहूंगी.."

" हा रानी..... मैने उसके मम्मो को मसलते हुए.. कहा"" मैं तुम्हारी चूत का उससे भी बुरा हाल करूँगा.....

" तो करो... ना जाअँ बात मत करो...."

कही प्रीति(मेरी वाइफ) आ गई तो" मैने कहा....

" नही यार मैने उसे नींद का इंजेक्षन दिया है 11-12 के पहले नही उठ पाएगी.. और मैने तुम्हारे घर भी फोन कर दिया है की हमारे यहा डिन्नर कर रहे है लेट आएँगे"

फिर तो मैने रश्मि को पलंग से नीचे खड़ा किया और उसके रसीले होंठ को अपने होंठ मे दबाए और उसके मम्मे इस स्टाइल से दबा रहा था कि उसके दोनो निपल मेरे अंगूठे और उंगली की गिरफ़्त मे भी रहे.....

"उम्म्म.....आआ....... देववव इन्हे बहुत मस्लो...... इनकी तरफ सिर्फ़ मेडिकल कॉलेज मे प्रोफेस्सर्स ने ध्यान दिया था फिर तो किसी ने इनको देखा तक नही..."

उम्म्म्ममाआ................. मस्लो मैने रश्मि के माथे को चूमा और एक निपल को मरोड़ा और उसकी पीठ सहलाई.... फिर कान को चूमा फिर गले को.... और उसकी गांद को मसला....उसकी गांद के छेद को सहलाया.....मैं उसके मम्मो के इर्द-गिर्द वेट किस कर रहा था... रूम मे मेरे किस की पुचह... पुचह.... और रश्मि के मुँह से उम्म्म एयाया ... सीईइ ही गूँज रहे थे......
 


मैने रश्मि को सोफे पर बैठाया...और उसके एक मम्मे को नीचे से चाटना और चूसना शुरू किया... जैसे ही जीव हटती उसके मम्मे से वाहा पर गहरे लाल और बाद मे नीला निशान बन जाता... रश्मि की झांतों भरी सामली सलोनी और अंदर से गुलाबी चूत उसके पानी के कारण चमक रही थी....

वो अपने दोनो पैर फैलाए हुई थी... मैने एक उंगली उसकी चूत मे जैसे ही घुसेडि... वो चिहुक पड़ी... उसकी चूत बहुत चिकनी थी उसके पानी छोड़ने के कारण और टाइट तथा गरम बहुत थी मैं एक दो बार अंदर बाहर कर के उसका जी-स्पॉट पर उंगली फेरी और उसके एक एरोला कोमुह मे भरकर निपल को बुरी तरह से चूसा... उसे स्मझ नही आ रहा था कि वो मेरे सिर अपने बूब्स पर दबाए या मेरी उंगली अपनी चूत पर.... वो पगलाती जा रही थी....... .

उई.... माआआअ... यह क्या कर रहे हो देव...... मैं पिघल रही हू..... जल रही हू.... मेरी चूत को चोदो अपने लंड से......... उम्म्म .....आआआअ..... देव... प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़

मत तडपऊ..........उम्म्म्मम.........आआआ.... मैईन तो अब तुमसे चुदवाती रहूंगी..........

मैने उसके मम्मो को फ्री कर दिया था जिनपर मेरे प्यार के निशनात दिख रहे थे....

मैं उसको किस करते हुए उसकी चूत की तरफ बढ़ता चला था..... उसकी चूत के किनारे और उसकी जाँघो से चूत के किनारे और चूत के किनारे से जांघों तक चाट रहा था साथ मे उसकी चूत मे उंगली कर रहा था.....बीच बीच मे उसकी बुर के दाने को भी मसल देता...... रश्मि से जब सहन नही हुआ तो उसने मेरे बाल पकड़े और मेरे होंठ अपनी चूत पर दबा दिए और अपनी टांगे मेरी गर्दन पर कस ली.....

:' ले चूस्स्स.... साले बहुत चूसना है... ना ले... इसे कभी किसी ने नही चूसा तुम्हारे जैसा..... एयाया...... बहुत मज़ा आ रहा है... "

मेरी साँस घुटने लगी थी वो नीचे से चूत रगड़ रही थी और उपर से सिर दबाए थी... उसकी झाँते मेरी नाक मे रगड़ रही थी और मैं चूत चाट नही पा रहा था....

मैने फिर से उसके पैर फैलाए.....और उसकी चूत को उंगली से खोल कर उस पर गांद के छेद के पास से उसकी क्लितोरियाल हुड तक चूत को चटा.... वो निढाल हो गई....

'उ माआ..........उईईइ अओमम्म्म द्द्डड़डेव.... सीईईईई बहुत अछा लग रहा है.......मैं अपनी जीव से उसकी चूत पर अलग अलग मोशन्स मे गुदगुदी कर रहा था... और बुर के छेद मे जीव अंदर तक डाल कर गोल घुमा ता तो वो अपनी कमर उठा लेती सोफे पर से.... रश्मि की चूत लगातार पानी छोड़ रही थी....

वो बहुत कसमसकर झारी..... मुझे उसकी चूत का छोड़ा हुआ पानी बहुत टेस्टी लगा.. सही कहु तो अपन वाइफ से भी ज़्यादा... हो सकता है कि रुका हुआ पानी ज़यादा टेस्टी हो जाता हो इसलिए..... लगा हो

अब मेरा लंड भी तन्ना रहा था.....

प्लज़्ज़्ज़्ज़ देवववववव.. आइ बेग उउउ.... फक मी... हरद्दद्ड... उम्म्म्ममम... ईडिडन्त कंट्रोल....... प्लज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़्ज़

मैने सोफे पर उसकी कमर को और किनारे तक लाया और उसके दोनो पैर फैलाकर उसकी अंद्रूणी जाँघो से थाम लिया..... उसकी चूत मेरे लंड को खुला निमंत्रण दे रही थी........

मैने अपना सूपड़ा उसकी खुली हुई चूत से टीकाया और उसे चूत पर रगड़ा....

"उफ़फ्फ़ देववव बहुत गरम है तुम्हारा लंड.. और बहुत कड़ा.......... भीइ... एब्ब तो पेल दो........."

उसने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी बुर की ओपनिंग पर टीका लिया......

मैने कहा रश्मि थोड़ा दर्द होगा.... ऊपेर को साँस लो..... उसने ऐसा ही किया.....मैने सूपदे को दबाया तो सूपड़ा चूत मे घुस गया.......

'अयाया देववववव....... बहुत फूला हुआ है तुम्हारा लंड...... जब मेरी जैसी चुदी हुई औरत को इतनी तक़लीफ़ हो रही है... तो तुम्हारी वाइफ तो कुँवारी ही थी.......""""

और मैने रश्मि से कहा अपने पैर संभलो अपने हाथ से... और उसके एक निपल को अपने मूह मे लेकर जोरो से चूसना चुबलाने लगा वो बहुत गरमा रही थी....

" देव अंदर करो... आआआआ मेरी चूत.....एयाया........मैने उसके निपल को अपने दाँत मे दबाया तो कराह उठी और उसकी समय फ़च्छाआक्ककक..... से लंड पूरी ताक़त से उसकी बुर मे ठेल दिया...........

रश्मि दोहरे दर्द के मारे चीख पड़ी......

" उईईई...माआआआआआआआआआआआअ... फट गयीईईईईई.... देव तुमने अँगारे घुसेड दिया..........थोड़ा रूको.... प्लज़्ज़्ज़्ज़....."
 


मैं कहा सुनने वाला था... मैने लंड को सूपड़ा अंदर रहने तक बाहर खींचा और फिर से फ़चाआक...... इस बार तो पूरा जड़ तक लंड उसकी बुर की गहराई मे उतर गया था...... उसकी आँखों से आँसू बह निकले.... मेरा लंड उसकी चूत मे कसा हुआ था लंड पर गरमा गरम चूत ऐसे कसी हुई मेशसूस हो रही थी जैसे लंड को गरम मास मे कस कर बाँध दिया हो.....

मैने लगातार 2-3 धक्के और मारे फिर रुका..... और उसके मम्मो को मसला.. और उसके लिप्स और बूब्स को किस किया....

वो थोड़ी देर मे कमर हिलाने लगी थी.. मैने जैसे ही लंड खींचा तो उसकी बुर से खून निकल कर मेरे लंड पर छपा हुआ था... मुझे लगा उसके पीरियड कही चालू तो नही हो गये.......

" रश्मि तुम्हारी बुर से खून आ या है दो चार बूँद.. कही तुम्हारे पीरियड तो ..."

नही देव अभी 6 दिन पहले ही ख़तम हुए है..... तुम तो चोदो मेरे राजा.... मेरी परवाह नही करो.....

मैं बहुत इतमीनान से गहरे गहरे धक्कों से मीडियम स्पीड मे चोद रहा था.....

उम्म्म्मम... एयाया.... देव.... मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं पहली बार चुदवा रही हू.........

तुम्हारी वाइफ बहुत किस्मत वाली हीईइ उसे तो रोज और जीवन भर इस मस्ताने लॉड का स्वाद मिलेगा....... आआ देव चोदो... बहुत अछा लग रहा है..... आअहह इस दर्द के लिए मैं बहुत तर्सि हू..

मैने कुछ धक्के बहुत भारी लगाते हुए कुछ धक्के भरपूर लंड को जड़ तक चूत के गहराई तक पेलते हुए लगाए....

हर धक्के पर रश्मि आआहह ऑश... मैं तों निहाअल हो गई........एयाया.... कर रही थी....

अचानक रश्मि ने मुझे अपने पैरों मे कस लिया और मेरे से लिपट कर अपनी कमर उचकाने लगी.....

हा मेरे रजाअ ... और पेलो.. फाड़ूओ मेरी बुर को.... अपना बीज मेरी चूत की गहरइइ मे डालूओ....एयेए ऐसे ही... मैने भी स्पीड थोड़ी बड़ा दी..... थी ......

आअहह.. सीईईई बहुत प्यारा लंड पाया हैइ... ऐसे लंड से तो हर चूत जिंदगी भर चुदवाना चाहेगी.....चोदो.....चूदूओ.....

उईईई मुझे क्या हो रहा हाीइ.... एयाया..... उईईइ......उईईईईईई...आमम्म्माआ...ओह आआअहह... माइ अगाइिईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई आआ देव... उसने पानी छोड़ दिया....... उसका पानी बहुत सारा निकला था जो की उसकी गांद से बहता हुआ उसके सोफा को गीला कर गया.... मैं अभी जल्दी नही झरने वाला था... क्योंकि मैं झाड़ चुका था उसके मूह मे....

मैने... रश्मि को उठाया और उसे बेड पर लिटाया और उसे फिर से किस किया उप्पेर से नीचे तक्क और उसे क्लाइटॉरिस को चूसा...... ... रश्मि की चूत फूल गई थी और लाल हो गई थी..... मैने जब क्लाइटॉरिस छूआ तो और जोरो से गरमा गई....

देव जल्दी डालो..... मेरी चूत मे करोड़ों चीतियाँ रेंग रही है...... मैने रश्मि की दोनो टाँगे मोड़ कर उसके दोनो कानो से चिपकाई और उसकी कमर के नीचे तकिया लगाया.. जिससे उसकी चूत खुल कर उपर हो गई मैने रश्मि से कहा तुम अपने दोनो पैर अपने हाथ से दबाओ......

उसने ऐसा ही किया... रश्मि की गीली चूत और झांतो पर लगा हुआ पानी बहुत अछा लग रहा था.... मैने लंड को अपनी हथेली मे लेकर उसकी चूत और दाने पर थपकी लगाई... रश्मि के मूह से उईईई एयाया. देववव चूत्त फदाक रही हॅयियी... देखो मत तरसाऊओ.. जाआं अपना यह मूसल मेरी बुर मे पेलो... जल्दी करो टाइम बर्बाद मत करो....मैने लंड को उसकी बुर पर क्लाइटॉरिस से नीचे गांद के छेद तक रगड़ा 5-6 बार और ऐसे मे ही टीकाकार फ़ाआचह की आवाजज्ज के साथ पूरा एक बार मे पेल दिया....... रश्मि चिल्ला कर रह गई इस बार....

मैं पूरा लंड पेल कर कुछ देर रुका और अपना बजन अपने हाथो पर टीकाकार तबाद तोड़ धक्के मारना चालू किया....

आआहह देवववववव मेरी फट गाइ.... आआ चिल्ल्ल्ल गाइिईई तुम्हारे लंड ने मेरी बच्चा दानी को धाक्का मार दिया उसे हटाकर पेट मे घुस गायाअ.....

आरीए तूमम तो बहुत कामीने हो...... साले कुत्ते हो..... ऐसी बहरहमी से चोद रहे हो... एयाया... बहुत मज़ा आ रहा है सहबसशह...........

इस बार रश्मि जल्दी झारी ... और जल्दी ही तय्यार हो गई...... उसके पैर अभी भी मुड़े थे मैं उसस्के मम्मो को चूस और मसल्ते हुए तबाद तोड़ धक्को से चोद रहा था... तभी मैने उसकी गांद के छेद मे उंगली से चोदनाशुरू किया उसकी गांद का छेद उसकी चूत के पानी से सराबोर था उसकी गांद बहुत टाइट थी शायद कुँवारी थी.... उसे गांद के छेद का स्टिम्युलेशन बहुत अछा लग रहा था.....

मैने एक उंगली अंदर कर दी उसकी गांद के लंड और उंगली की टाइमिंग मैने एक ही रखी एक ही टाइम मे उगली और लंड भीतर और बाहर हो रहे थे....

रश्मि की बुर बहुत बुरी तरह से पानी छोड़ रही थी.............. अब मैं भी झरने वाला था......

मैने कहा रश्मि मैं आने वाला हू...... बोली कोई बात नही मेरी बच्चे दानी को भर दो.......

मैने उसकी कमर को थामा और उसकी गांद मे दो उंगली डाल कर फाका फककक..... फककक फ़ाच की आवाज़ों के साथ तूफ़ानी धक्के मारे जब मेरा लंड वीर्य निकालने को तय्यार हुआ तो मैने लंड को रश्मि की बुर की गहराई मे उतार दिया और वाहा पर उसकी पिचकारी चालू करी .....

रश्मि एक बार फिर मेरी पिचकारी के साथ झारी................. और मैं झरने के बाद भी कुछ देर तक धक्के मारता रहा......

मैं लंड उसकी चूत मे पेले ही उस पर निढाल होकर लेट गया....

करीब आधा घंटे के बाद जब मुझे पेशाब लगने लगी और लंड अधबठा था मैने लंड निकाला तो रश्मि की बुर से मेरे वीर्य की एक लहर जैसे एकदम उसकी गांद को गीला करती हुई बिस्तर पर फैल गई...........

देव..... अब मैं तुमसे प्रेगञेन्ट हो जाउन्गि....... आअज्जजज तुमने तो 18 पिचकारी मारी... है... कही ऐसा ना हो मैं 18 बच्चो की मा बनू........

मुझे हसी आ गई उसकी बात पर मैं फ़ौरन बाथरूम का पूछा और घुस गया वाहा पर लंड सॉफ किया और नहा कर फ्रेश हो गया......

मेरे बाद रश्मि बेड से उठी .. उसकी चूत खुल गई थी और सूज गई थी उससे चला नही जा रहा था.. उसे सहारा देकर मैने बाथरूम तक पहुचेया.. फिर उसने मुझे एक क्रीम का नाम बताया जो मैने उसकी बुर पर लगाई और कुछ टॅब्लेट्स उसने खाई दर्द कम होने की... उसने मुझे एक रिंग दिया कि जब मैं अपनी पत्नी को चोदु तो यह रिंग अपने लंड पर पहन लू इससे मेरी वाइफ को तक़लीफ़ ना हो...

इसके बाद मेरी वाइफ की खबर ली वो अभी अभी जागी थी और रिलॅक्स फील कर रही थी. हम तीनो ने डिन्नर किया रश्मि ने मेरी वाइफ को एक गोलडेन रिंग गिफ्ट करी और कहा आते रहना......

मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया जिसे रश्मि ने अपने मूह से चूस्कर और मूठ मार कर ठंडा किया... और कहा देव मैं तुमसे कई औरते छुड़वाउंगी यही इसी बिस्तेर पर... मेरे पास तो बहुत आती है प्यासी औरते.....

रश्मि ने पहले अपनी एक सहेली फिर दो जैन औरतों को मेरे से चुदवाया... उन्मै से एक की तो शादी के 2 साल बाद तक भी सील नही टूटी थी......

दोस्तो मुझे मैल करके बताए यह घटना कैसी लगी आपलोगों को.....

आपका दोस्त राज शर्मा
 
शरीफ सिस्टर

आज मे आपके लिए रियल स्टोरी लाया हूँ दोस्तो मेने अपने दीदी के ननद के मामा ससुर की लड़की की चुदाई कैसे की वो में आज बताऊंगा. दोस्तो वो हमारे बाजू के घर मे रहते थे. मेने दीपाली को कभी बुरी नज़र से नही देखा था। मुझे यह जब पता चला की वो दीदी के रिलेटिव थे तो

हमारे परिवार और उनके परिवार मे सम्बन्ध काफ़ी ओर अच्छे हो गये थे। मे ओर दीपाली के पिताजी हम दोनो शेयर का काम करते हे तो मेरी उनसे अच्छी पटती थी. ओर माँ बाप मुझे अपना बेटा की तरह ही मानते थे. दीपाली मुझे भैया कहती थी।

यह बात कुछ महीनो पुरानी हे. मेरे अंदर सेक्स बहुत मचलता था. मे स्कूल मे चोरी से अपनी टीचर्स को हर कोने से देख कर घर आकर नहाते वक्त या टॉयलेट मे हस्त्मेथुन कर लेता था. लेकिन मेने उसे [दीपाली] को कभी इस नज़र से देखता था पर एक दिन मे उसके घर गया तो 1 रूम मे वो ओर उसकी सहेली से कुछ बाते करते सुना मैने तोड़ा ध्यान से सुना तो वो किसी लड़के की बात कर रही थी. जो उन्हे कॉलेज जाते वक़्त घूरता रहता था।

दीपाली शरीफ थी लेकिन उसकी फ्रेंड थोड़ी चालु थी पर उसकी मस्त बाते मेरे को उकसा रही थी. उस दिन पहली बार मैने रूम मे (जो की बंद था) के होल से देखा तो बस देखता ही रह गया। दीपाली की फ्रेंड ने स्कर्ट पहना हुआ था जिसमे से बेड पर बैठे हुए उसकी चड्डी दिख रही थी. मैने पहली बार ओरिजनल मे किसी लड़की की टांगो को इतना सॉफ देखा था। पर दीपाली पंजाबी सूट पहने हुए थी. लेकिन उसके बोब्स जिस पर कोई ब्रा नही थी सूट के नीचे से भी बड़ी सेक्सी लग रही थी. वो ऐसी बाते करते हुए तोड़ा शरमा रही थी. सो उसने ताल-मटोल करके अपनी फ्रेंड को घर से भेज दिया. उस दिन से मेरे ख्याल दीपाली के लिए थोड़े बदल गए थे।

मुझमे एक अलग सी खुशी का एहसास होने लगा था. पता नही मेरे को जैसे क्या मिल गया. मे हर वक्त इसे चोरी से देखता रहता था. कुछ दीनो मे यह चाहत बहुत बड गयी थी. पहले तो मे डरता रहता था. लेकिन थोड़े दीनो मे ही मेरी कामुकता मेरी शक्ति बड़ाती गयी. मे उसके बोब्स को देखने के बहाने सोचने लगा और एक दिन तो कमाल हो गया. मेरे घर के साथ मे हमारी जॉइंट बालकनी थी।

जिसका एक गेट मेरे रूम मे और दूसरा गेट बालकनी [गार्डन साथ मे ] मे था. वो कपड़े धो रही थी। कपड़े धोते वक्त मे चोरी से उसके सामने से चक्कर लगाने के बहाने उसकी चुचियो को देख कर मस्त हो रहा था. जब कपड़े धोने के बाद उसे वो निचोड़ने लगी तो पानी के साथ उसका सूट गीला हो गया। जिससे उसकी चुचि का उभार और निप्पले बड़े आराम से मुझे दिख गये. उसको थोड़ी शरमाई तो वो अपने कपड़े चेंज करने रूम मे चली गयी. मे भी झट से होल मे से देखने के लिए अपने रूम मे चला गया. मेरा तो भाग खुल गया मैने देखा की उसने अपना शर्ट उतारा तो लाइट की रोशनी मे वो मुझे बहुत ही खूबसूरत लगी। मेरा लंड पूरा तन गया अजीब सा नशा सा चड़ने लगा।

और गोल गोल चुचि देख कर मे दंग रह गया और मैने वही पर हाथ से मूठ मारनी शुरू कर दी. आज मुझे दीपाली सारे जहाँ से सुन्दर दिख रही थी. 10 मिंनट बाद मेरा डिसचार्ज हुआ तो सामने सारा गेट पर चला गया। मेरा वीर्य इतना गाड़ा गर्म और ज्यादा था की पूरा रुमाल गिला हो गया सॉफ करते हुए. मेरा पूरा शरीर दर्द करने लगा. कुछ देर बाद मुझे अच्छा फील होने लगा पर बाद मे दुबारा जब उसको देखा तो फिर मुझ पर कामुकता चड़ने लगी उसके बाद तो मे उसे पूरा नंगा देखना चाहता था सो बहाने सोचने लगा. बस उस दिन के बाद कम ही गार्डन मे कपड़े धोने आती थी पर 1 दिन जब मे उसके घर गया तो उसकी माँ बोली बेटा आओ क्या काम हे…
 


मेने कहा – आंटी मुझे दीपाली का कंप्यूटर पर काम करना हे.. मुझे शेयर का कुछ काम हे.. मेने आंटी से कहा की मेरे कंप्यूटर खराब हे सो आंटी ने बोला ठीक हे ध्यान से काम करना कही जरूरी फाइल ना उड जाए और दीपाली बाहर गयी हे.. तो जल्दी करना मे बोला ठीक हे आंटी…

जेसे ही मेने कंप्यूटर ऑन किया मे अपना काम कर रहा था तोड़ा मेने उसके कंप्यूटर मे छेड़ करने लगा तो देखा की शरीफ नही बहुत ही गंदी थी क्यूकी वो ब्लू फिल्म देखती थी पर मेने सोचा की क्या पता शायद अंकल [दीपाली के पापा ] उसे देखते हो तो पर मेने देखा की आंटी किचन मे तो मेने दीपाली डॉर मे देखा उसकी बुक्स मे सेक्सी नंगे पिक्चर्स हे मे समज गया उसका मन बहुत ही मचल रहा हे।

1 दिन जब उसके सारे घर वाले ओर मेरे घर वाले शादी मे गये थे तो उसकी माँ ने मुझसे कहा बेटा तुम मेरे घर मे बेठ सकते हो… दीपाली घर पर अकेली हे.. मेने कहा की ठीक आंटी मन ही मन मे खुश हो गया की आज मोका मिल ही गया हे मुझे मेरी फॅमिली ओर उसकी फॅमिली दोनो साथ मे चले गये ओर मे उसके घर मे बेठ गया। और कुछ देर बाद मेने सुना की बाथरूम मे हे दीपाली तो मे उसके होल से उसके मजे लेने लगा तो उसे तोड़ा शक हुआ तो मेने कहा मे हूँ.. वो बोली की भैया आप हे.. मे बोला हां.. वो बोली आप बाहर बेठो मे अभी आई.. मेने कहा ठीक हे.. वो कपड़े चेंज करके अपने रूम मे आई. उसके पहले मेने वो फिल्म चला दी ओर उसके सामने खड़ा हो गया उसका चेहरा लाल था वो बोली यह क्या मे बोला ब्लू फिल्म यह तेरे पीसी से ऑन की.. वो बोली इसके बारे मे किसी को मत बोलना.. मे बोला ठीक हे कसम से बस मे तुम्हारी माँ को बता दूँगा.. और वो मेरे सामने रोने लगी।

बोली भैया प्लीज ऐसा मत करना वरना वो मुझे मार देगी मे बोला ठीक हे तो जस्ट 1 टाइम मुझे खुश कर दो वो बोली मे.. क्या.. मे बोला 1 टाइम सेक्स वो बोली नही यह ग़लत हे.. मे बोला तो फिर मेने अपने सेल से आंटी को कॉल किया ओर पूछा आप सब लोग पहुच गये सही से वो बोली हा.. और आंटी बोली हम लोग रात मे जल्दी से जल्दी आ जाएँगे.. और उन्होने फ़ोन काट दिया. मे ऐसे ही बात करने लगा मेने कहा आंटी मे बाहर गया था तो मुझे अचानक याद आया के मेरे सेल तो आपके घर रह गया हे तो मे रिटर्न अपने घर आया तो ठीक हे.. घर से निकल कर आपके घर आया तो मेने देखा की दीपाली किसी लड़के के साथ अश्लील हरकते कर रही थी.. तो आप जल्दी आ जाये.. वो लड़का मुझे धक्के मार कर भाग गया हे.. इधर दीपाली ने मेरे हाथो से सेल लिया ओर जल्दी से बोलने लगी की यह सब गलत हे रोंग हे.. माँ पर मेरा सेल तो बंद था वो बोली ठीक हे तेरी शर्त मंजूर हे..

वो रोने लगी और कहने लगी की एसा मत करना किसी को मत कहना… मेने कहा ठीक हैं मुझे किस करने दो उसने कहा ठीक हे… मैं आराम से उसके पास गया और दोनो हाथो से उसके गालो को पकड़ा और उसके होठो पर होंठ रख कर उसके होंठो चूसने लगा वो बिल्कुल सीधी खड़ी रही. और मेरा लंड खड़ा हो गया था। मेने उसे कहा की तुम भी सपोर्ट करो और मेने उसकी जीभ से अपनी जीभ मिला दी और चूसने लगा।

और मेरे हाथ उसके बोब्स दबाने लगे उसने मेरा हाथ पकड़ लिया मेने उसे कहा कोई बात नही करने दे वो डर गयी और उसने मेरा हाथ छोड़ दिया. मेने उसकी शर्ट के बटन खोले और ब्रा को नीचे करके उसके बोब्स ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा वो रोने लगी और कह रही थी छोड़ दो… मेने उसे गोदी मैं उठाया और उसके बेड पर लेटा दिया जो और लेट कर किस करने लगा और उसके हाथ मैं अपना लंड पकड़ा दिया। उसके गरम गरम हाथ मैं मेरे लंड को बहुत आराम मिल रहा था. मैं खड़ा हुआ और अपने सारे कपड़े उतार दिए और उसके भी मैं कुर्सी पर बैठ गया और उस से कहा की मेरे लंड को सहला वो भी गर्म हो चुकी थी और चुप भी हो गयी थी शायद उसे समझ आ गया था की मैं आज उसे नही जाने दूँगा।
 


थोड़ी देर मैं उसके उपर लेट गया और उसके दोनो टाँगो को हवा मैं उठा कर उसकी चूत को सहला रहा था. 10 मीं. सहलाते सहलाते उसने पानी छोड़ दिया और तकिये को पकड़ लिया। अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और ज़ोर से धक्का मारा तो वो चिल्ला पड़ी आआआः मररर्र्ररर गई बाहर निकालो… मेने कोई परवाह ना करते हुए और ज़ोर का धक्का फिर मारा तो मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया और वो चिल्लाई मार दिया.. आआआआआआआः मररर्र्र्र्र्र्र्ररर गायययययीईई रे.. और उसकी चूत से तोड़ा खून निकलने लगा पर मे घबराया नही. 10 मि. की चुदाई के बाद मेने उसकी चूत मे ही सारा माल डाल दिया था वो बोली यह क्या किया मे बोला चुप रह कमीनी मुझे पता हे तू 1 बार चुदवा चुकी हे.. किसी लड़के से वो बोली तुम्हे केसे पता.. और मे बोला कमीनी मेने तेरे डोर मे से e-pil की गोलि देखी हे.. मे थक कर ढेर हो गया और उसके उपर ही लेट गया। अच्छा दोस्तों अभी मे चलता हूँ.. फिर मेने कब और केसे दीपाली को चोदा बाद में बताऊंगा। अभी तक की मेरी स्टोरी कैसी लगी मुझे जरुर बताना।

 
मासूम बहन

वो बरसात के दिन थे और मैं यूनिवर्सिटी से जल्दी वापिस आ गया, जब मैं घर पाहूंचा तो ऐज यूषुयल मेन गेट लॉक्ड था क्योंकी मेरी छ्होटी बहन स्कूल से 1 बजे वापिस आती थी और उस वक़्त 11 बजे थे. मैं ने की से मेन गेट खोला और कॉरिडर से गुज़रता हुआ अपने रूम की तरफ बढ़ रहा था कि मुझे शुमैला के कमरे का दरवाज़ा खुला नज़र आया मैं ने अंदर देखा तो शमी सोई हुई थी (शुमैला का निक नेम शमी हे).

मैं हैरान था कि आज शमी स्कूल क्यूँ नही गयी? लेकिन फिर मुझे खुद ही यह ख़याल आया की आज बरसात की वजह से स्कूल में छुट्टी हो गयी हो गी. मैं ने शमी की तरफ देखा वो सोते हुए बुहुत मासूम लग रही थी. मैं ने उसे जगाना मुनासिब ना समझा और अपने रूम में आ गया, बाथ लिया, शॉर्ट्स पहने और फिर नेट लगा के बैठ गया और राज शर्मा की स्टोरीस पढ़ने लगा उस वक़्त मैं ऐक इंसेस्ट (सेक्स वित रिलेटिव्स) की स्टोरी पढ़ रहा था और जैसे जैसे मैं पढ़ता जा रहा था मेरा लंड खड़ा होता जा रहा था.

मेरे दिमाग़ में मेरी छ्होटी बहन शमी का तसवउर आ रहा था जो अपने बेडरूम में सोई हुई थी. मैं आप'को हमारे घर के बारे में बता दूँ. यह आज से 2 साल पह'ले का वाकिया है. मेरा नाम आज़ाद और उमर उस समय 19 साल की थी.तब शमी की उमर यही कोई 18 साल होगी,(अब शुमैला 20 साल की हो चुकी हे). मेरी अम्मी और अब्बू 5 दिन के लिए रिस्तेदारी में गये हुए थे.

शमी की बिल्कुल गोरी और सफेद रंगत, काले बाल सियाह आँखे, छ्होटे छ्होटे बूब्स और दरमियाना क़ांड है. मेरे दिमाग़ में ऐक सोच आई कि क्यू ना अपनी बहन के जिस्म का मज़ा चखा जाए और यह सोच कर मैं अपनी छ्होटी बहन के कमरे में चला गया. वो उस वक़्त भी सो रही थी और उस के पेट पर से क़मीज़ हटी हुई थी और उस का गोरा पैट नज़र आ रहा था जिसे देख कर मेरा लंड झटके मारने लगा.

मैं शमी के बेड पर बैठ गया, मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था, आख़िर कार मैं ने उस के पेट पर हाथ रख दिया, वाउ कितना गर्म पेट था उस का छ्होटा सा लैकिन चिकना फिर मैं ने अपने दूसरे हाथ को उस के गालो पर फेरना शुरू किया मगर वो नही जगी तो मैं ने पेट पर हाथ फेरते फेरते अपनी बहन की क़मीज़ ऊपर उठाके उस के मम्मे नंगे कर दिए वाउ क्या सीन था! टेबल टेन्निस की बाल जितना बूब जिस पर हल्का ब्राउन सा निपल उभरा हुआ था. वाउ मैं तो पागल हो गया. मेरी बहन शमी ज़रा सी हिली तो मैं ने फ़ौरन हाथ पीछे हटा लिए, लैकिन वो जगी नही थी.

मैं ने अपना ऐक हाथ उस के मम्मे पर रख दिया उफफफ्फ़ यह कित'ना कड़ा था, कुच्छ देर अपनी छ्होटी बहन के मम्मे से खेलने के बाद मैं ने अपना दूसरा हाथ उस की ग्रीन फूलों वाली शलवार में डाला ओह मेरी छोटी बहन की शलवार में अज़रबन्द की बजाए एलास्टिक था. मैं ने आहिस्ता से उस की शलवार थोड़ी सी नीचे कर दी… मेरा दिल सीने से बाहर आने वाला था शमी की नन्ही मुन्नी चूत बेहद हसीन थी उस पर हल्का हल्का ब्राउन कलर का दाना था. मैं ने शमी की चूत को देखा तो पागल सा हो गया और झुक कर उस पर अपनी ज़ुबान रख दी. शमी ने अपनी टाँगे पीछे घसीटी और उठ कर बैठ गई मैं भी पीछे हट गया. शमी ने मुझे देखा और सब से पहले अपनी शलवार ऊपर की और कहने लगी

भाई जान आप क्या कर रहे हैं? मैं ने कहा.

मेरी बहन मैं तुम से प्यार कर रहा हूँ, वो कहने लगी.

भाई आप को शर्म आनी चाहिए मैं आप की छ्होटी बहन हूँ और आप मेरे साथ ऐसी हरकते कर रहे हैं. मैं ने शमी को बाज़ू से पकड़ा और कहा,

बहना देखो मैं तुम से प्यार करना चाहता हूँ… वो रोने लगी.

छोड़ो मुझे भाई. क्या हर भाई अपनी बहन को ऐसे करता है? मैं ने कहा,

मैं नहीं जानता. लैकिन बहुत से भाई कामो वेश अपनी बहनों के बारे में ऐसे ख़यालात रखते हैं और उन में से बहुत से अपने ख़यालों को हक़ीक़त भी बना लेते हैं.
 


लेकिन शमी मान कर ही नही दे रही थी वो चिल्लाने लगी बचाओ… बचाओ… बचाओ… मैं ने उस के मुँह पर हाथ रखा और दूसरे हाथ से उस की शलवार नीचे कर दी. वो चीखने की कोशिश कर रही थी मगर मैं ने उस का मुँह अपने हाथ से दबाया हुआ था, मगर शमी ने मेरे हाथ पर काट लिया और मैं ने दर्द के मारे उस के मुँह से हाथ हटा लिया और वो बचाओ बचाओ चीखते हुए कमरे से बाहर भागी… मैं उस के पीछे बाहर भगा. कॉरिडर में निकला तो मैं ने देखा कि हमारा चोकीदार गुल ख़ान शमी के सर पर हाथ फेर रहा था और गुस्से से मेरी तरफ देख रहा था उस ने मुझे देखते ही कहा.

सूअर शैतान अपनी मासूम बहन को चोदना चाहता है? तुम को शर्म नही आती. लानत है तुम पर, गुल ख़ान ने मुझे धमकी दी कि वो मेरे माँ बाप को बताए गा और अगर मैं ने शमी को हाथ भी लगाया तो वो मुझे शूट कर दे गा मैं गुल ख़ान की धमकी से डर गया वो 30-35 साल का ऐक हॅटा कटा पठान था. उस ने शमी को गोद में उठा लिया और कहने लगा,

बेटी तुम फिकर मत करो यह शैतान अब तुम्हे हाथ भी नही लगा सकता. और शमी को उस के कमरे में ले आया और मुझे भी आवाज़ दी कि इधर आओ. मैं डर रहा था मगर अंदर गया. गुल ख़ान ने शमी को गोद में उठाया हुआ था क्योंकी शमी उसे अंकल कहती थी और वो थी भी ऐक 15 साल की मासूम बच्ची. शमी अब हिचकियाँ ले रही थी और उसे गुल ख़ान ने गोद में बिठाया हुआ था और खुद शमी के बेड पर बैठा हुआ था. उस ने मुझे कहा इधर आओ और साथ ही आँख मार दी. मैं तो हैरान रह गया… मैं गुल ख़ान के पास गया उस ने कहा कि,

गॅंडू अपना जंगिया (शॉर्ट्स) उतारो. मैं समझा वो मेरी गांद मारेगा लैकिन मैं ने डरते हुए शलवार उतार दी शमी हिचकियाँ लेटे हुए मेरी तरफ देख रही थी और मेरे लंड को जो अब दोबारा खड़ा हो रहा था, कि तरफ देख रही थी कि अचानक गुल ख़ान ने मुझे कहा,

गांडू का बच्चे तुम को कुच्छ नही पता की कैसे करते हैं, यह कह कर उस ने अपनी शलवार के नाले में हाथ डाला और अपनी शलवार में से नाला निकाल लिया, शमी हैरान थी कि अंकल गुल यह क्या करने वाले हैं. गुल ख़ान ने अचानक शमी के बाज़ू उस की कमर के पीछे किए और अपने नाले/ अज़रबंद से मेरी छ्होटी बहन के हाथ बाँधने लगा.

मैं हैरान था कि और खुश भी की गुल ख़ान भी मेरा साथी बन गया हे लैकिन मेरी बहन शमी मचलने लगी और दोबारा चीखने लगी तो गुल ख़ान ने ऐक ज़ोरदार थप्पर मेरी मासूम बहन के मुँह पर मारा कि शमी के मुँह में से खून बहने लगा. उस का गाल अंदर से फॅट गया था. फिर गुल ख़ान ने मेरी बहन को उठा कर बेड पर लिटाया और उस के पेट पर से अपनी टाँग ऐसे गुज़ारी कि शमी का बदन उस की टाँग का नीचे दब गया, अब वो हिल भी नही सकती थी. शमी के हाथ उस की कमर पर बँधे हुए थे. फिर गुल ख़ान ने मुझे इशारा किया और कहा,

लो अब आओ और मज़ा करो और हम को भी मज़ा लैने दो. मेरी खुशी की कोई इंतेहा नही थी मैं अपनी बहन के पास आया और उस के क्यूट से चेहरे को हाथों में लिया और उस के होन्ट चूसने लगा. शमी चीख रही थी.

कुत्तो हरमजादो छोड़ दो मुझे… भेया मैं तुम्हारी सग़ी बहन हूँ अपनी छोटी बहन से ऐसा कर रहे हैं आप… भाई जान मैं मर जाऊं गी मेरी इज़्ज़त ना लूटो भाई जान मुझे छोड़ दें. मगर कौन सुनता उस की बकवास उस वक़्त. मैं ने गुल ख़ान की तरफ देखा तो उस ने खुद को कपड़ो के तकल्लूफत से आज़ाद करवा लिया था और उस का 10 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड 90 के आंगल पर खड़ा था, वो मुस्कुरा रहा था.

मैं ने शमी की तकलीफ़ का सोचा तो मुझे झुरजूरी आ गयी कि मेरी मासूम कुँवारी बहन के साथ क्या होने वाला है जब यह दरिन्दा उसे चोदे गा तो क्या हो गा. मगर मैं ने यह फज़ूल बातें सोचने में वक़्त ज़ाया नही किया और अपनी छ्होटी बहन की शलवार खेंच कर उतार ली. वाउ उस की नन्ही मुन्नी चूत हल्के हल्के ब्राउन रूवे के साथ इंताई खूबसूरत लग रही थी. ईतने में शमी जो हिचकियाँ ले रही थी उस ने दोबारा ज़ोर से चीखना और रोना शुरू कर दिया.

बचाओ… बचाओ… मुझे बचा लो अम्मी जी… पापा मुझे बचाएँ मम्मी! लेकिन उस की यह आवाज़े उस के हलक़ में ही दब गयीं क्योंकि मैं ने उस की शलवार उठा कर उस का गोला बनाया और उस के मुँह में डाल दिया अब उस के मुँह से घ्ह्ह्ह्ह…गग्ग्ग….ग….ग..घह….ऊओ ण्न्न्न्न्घ्ह्ह्ह की आवाज़े आ रही थीं. फिर मैं ने उस की क़मीज़ का गिरेबान दोनों हाथों से पकड़ा और ऐक झटके से फार डाला. अब शमी हम दोनों के बीच बिल'कुल नंगी थी.
 
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