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हिन्दी में मस्त कहानियाँ



मैं फ़ौरन शमी के मम्मो से खेल'ने लगा. पह'ले सहलाते रहा फिर दबाने लगा. फिर मैने अप'नी छोटी बहन के छोटे छोटे मम्मे बारी बारी से बड़े प्यार से चूसे. शमी छट'पटा रही थी. मूँ'ह में सलवार ठूँसा हुवा होने की वजह से उस'की आवाज़ बाहर नहीं आ रही थी. गुल ख़ान भी शमी की कमसिन चूत की पुट्तियाँ खोल'ने लगा था. वह दोनों हाथों से चूत फैला रहा था. कुच्छ देर बाद उस'ने चूत में अंगुल डाल'नी शुरू कर दी. फिर बोला,

अबे साले अब चूस'ना छ्चोड़ और चोद अप'नी बहन को. फिर मुझे भी चोद'ना है, देख'ता नहीं कब से खड़ा है. गुल ख़ान ने मुझे अप'ना 10" का खड़ा लंड दिखाया. मैं फ़ौरन शमी की टाँगों के बीच में आ गया और अप'ना 7" के करीब लंड को बहन की चूत के ऊपर टिका दिया. गुल ख़ान ने अंगुल कर'के शमी की चूत खोल दी थी फिर भी मैने गुल ख़ान की तरफ देखा,

गांडू कहीं के धक्का मार के थेल दे अंदर. इतना सुनते ही मैने एक ज़ोर का धक्का मार दिया और मेरा आधा लंड शमी की चूत में घुस गया. शमी ज़ोर से बिस्तर पर उच्छली. वह तो गुल ख़ान ने उस'के मूँ'ह पर हाथ रखा हुवा था, वरना उस'की चीख सारे मुहल्ले में सुनाई दे जाती. मुझे बहन की टाइट चूत में लंड पेलने में बहुत मज़ा आ रहा था. मैने यह परवाह नहीं की कि उसे कित'ना दर्द हो रहा होगा और लंड बाहर खींच खींच के 4 - 5 और तग'डे धक्के उस'की चूत में लगा दिए. मेरा पूरा लंड चूत में घुस गया था.

फिर तो मैने बहन की ताबड तोड़ चुदाई शुरू कर दी. मैं लंड बाहर खींच खींच के अंदर घुसा रहा था. हर धक्के के साथ लंड 'छप' 'छप' कर'ता हुवा बहन की फुददी में जा रहा था. मैं लग'भग 5 मिनिट तक उसे चोद'ता रहा और उस'के बाद मेरे लंड ने पानी छ्चोड़ दिया. कुच्छ ही देर में मैं सुस्त होके बहन के ऊपर से हट गया. तभी मैने शमी की चूत की तरफ देखा तो उस'की चूत के इराद गिरद खून जमा पड़ा था और चूत बूरी तरह खून और मेरे रस से लत'पथ थी. मेरा रस अभी भी उस'की चूत से बह रहा था. गुल ख़ान ने यह देखा तो बोला,

साले तुम'ने अप'नी बहन की चूत फाड़ दी. ऐसे चोदा जाता है. देख इस'के तो खून आ गया. शमी के मूँ'ह से गों गों की घुटी घुटी आवाज़ें आ रही थी. गुल ख़ान ने शमी को अप'नी गोद में बैठ लिया और उस'के सर पे हाथ फेर'ते हुए उसे प्यार कर'ने लगा. फिर वह उस'के गालों की चुम्मियाँ लेने लगा. अब उस'ने शमी के मुँह से कप'डा निकाल दिया. शमी ने पह'ले तो हिच'कियाँ ली फिर रोने लगी.

आज़ाद तुम'ने यह अच्च्छा काम नहीं किया. कल जब सब'को यह बात मालूम पड़ेगी तो तुम्हें तो पोलीस पकड़ के ले जाएगी और तुम्हारा खानदान बदनाम हो जाएगा. गुलख़ान शमी की चूचियों को हल्के हल्के सह'लाते बोला.

क्या कह'ते हो मैं अकेला थोड़े ही था तुम भी तो साथ थे. मैने घबराई आवाज़ में कहा.

ठीक है मुझे भी पह'ले इसे चोद लेने दो, फिर कोई रास्ता सोच'ते हैं.

नहीं छ्चोड़ो मुझे. मैं मर जाउन्गी. भाई तुम'ने मुझे बार'बाद कर तो दिया. इस दरिंदे से मुझे बचाओ. मुझे छोड़ दो, मैं किसी को कुच्छ नहीं कहूँगी. यह कह शमी फिर रोने लगी. मुझे भी अब शमी पर दया आ रही थी पर यह भी जान'ता था कि गुल ख़ान उसे चोदे वगैर छोड़'ने वाला नहीं. तभी गुल ख़ान ने शमी से कहा,

देखो तुम एक बार चुद चुकी हो. अब चाहे एक बार चुदी हो या दस बार चुदी हो कोई फ़र्क़ नहीं पड़'ता. अब मेरे से भी राज़ी राज़ी चुद'वा लो तो तेरे हाथ भी खोल दूँगा और खूब प्यार से चोदून्गा नहीं तो फिर से मूँ'ह में कप'डा ठूंस साली की पूरी चूत फाड़ के भोसरा बना दूँगा.

नहीं गुल अंकल बहुत दर्द हो रहा है. मेरी पह'ले ही फॅट गयी है. छोड़ दो मुझे, मैं तुम दोनों के हाथ जोड़'ती हूँ और किसी को कुच्छ नहीं बोलूँगी. जाने दो मुझे.

यह ऐसे नहीं मानेगी. आज़ाद ठूंस दे इस'के मुँह में कप'डा. और साली चुप कर रन्डी भाई से तो तुम चुदवा ली अब क्या मैं इस खड़े लंड को तेरे भाई की गान्ड में डालूं.

अभी छोड़ दो मुझे. नहीं तो मेरी जान निकल जाएगी. अभी एक बार छोड़ दो. मैं ठीक हो जाउन्गी तो ..... अभी छोड़ दो..... किसी को कुच्छ ..... नहीं .. बोलूँगी. गुल ख़ान ने शमी के हाथ खोल दिए और कहा,

जा बातरूम में जाकर ठीक से नहा ले और इस पर क्रीम लगा लेना. लड़'कियों की पह'ली चुदाई में ऐसा होता है और कुँवारी लड़'की के पह'ली बार खून भी आता है. सब के साथ ऐसा होता है. डर'ने की कोई बात नहीं. शमी उठी और सीधी बाथरूम में चली गयी. तभी गुल ख़ान ने मुझे पलट दिया और मेरी गान्ड पर अंगुल में ले ढेर सारा थूक लगा दिया.

गुल ख़ान यह क्या कर रहे हो? मैने वापस सीधा होते हुए कहा.

अरे साले तेरी गान्ड मारूँगा. तेरे को बहन चोदने का पह'ला मौका क्या दे दिया तूने तो उस बेचारी की फाड़ के रख दी. अब यदि मैं उसे चोद्ता तो हो सकता था कि बात बिगड़ जाती और हम दोनों जैल में बंद हो जाते. अब मैने उसे छोड़ दिया है देख'ना वह अब हम दोनों से राज़ी राज़ी चुद'वाएगी. अब पलट और मुझे तेरी गान्ड मार'ने दे, देख भाई बहन की चुदायी देख के कब से खड़ा है मेरा लंड.

पर गुल ख़ान तेरा बहुत बड़ा है और मैने इस'से पह'ले कभी गान्ड नहीं मर'वाई.

तो साले तेरी बहन ने इस'से पह'ले कभी चुदाया था क्या? तब तो तुम'ने यह बात नहीं सोची. तू चाह'ता है क्या कि मैं तेरे भी उसी तरह हाथ बाँधू और तेरे मुँह में भी कप'डा ठूँसू.

अच्च्छा मैं नारियल तेल ले आता हूँ. तुम पह'ले ठीक से लंड और गांद चिक'ना कर लो और धीरे धीरे मार'ना. मैं उठ और ड्रेसिंग टेबल से अम्मी की नारियल तेल की बॉटल ले आया और गुल ख़ान के हाथ में दे डी. गुल ख़ान ने प्लास्टिक की बॉटल दबा काफ़ी जमा हुवा नारियल तेल निकाला और उसे अप'ने लंड पर चुपऱ लिया फिर उस'ने मुझे अपने चारों हाथ पैरों पर कर दिया और मेरी गान्ड हवा में उँची उठा दी.

उसने नारियल तेल की प्लास्टिक की बॉटल का मुख मेरी गान्ड के छेद पर रखा और बॅटल थोऱी दबा के मेरी गन्ड में तेल दीया. फिर उस'ने बॉटल कस के दबा दी और मुझे गान्ड में ठंडा ठंडा महसूस हुवा. फिर गुल ख़ान ठीक मेरे पीछे आ घुट'ने के बल बैठ गया. उस'ने मेरे दोनों चुत्डो पर हाथ जमा के उन्हे चौडाने लगा. फिर उस'ने कहा,
 


आज़ाद! ठीक से तकिये पर मुख रख ले और तकिया में मुँह दबा ले. मैं समझ गया कि अब वह मेरी गान्ड में अप'ना 10" का मूसल ठोकेगा और साला मुँह दबाने के लिए कह रहा है जिस'से कि मेरी आवाज़ ना निक'ले. मैने वैसे ही किया. डर भी लग रहा था, पर इस नये तज़ूर'बे के बारे में सोच सोच मैं काफ़ी उत्तेजित भी हो गया था और मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था.

गुल ख़ान मेरी गान्ड के ठीक पीछे अप'ने पैरों पर खड़ा होके मेरी पीठ पर झुक गया और उस'ने अप'नी बाहें मेरी छाती पर कस ली/ तभी मुझे उस'का लंड अप'नी गान्ड के छेद पर महसूस हुवा और मैने तकिये में दाँत भींच के अप'ना चेहरा और कस के गाढ दिया. मेरी गान्ड का किला फ़तेह होने वाला था. गुल ख़ान ने लंड का दबाव मेरी गांद में दिया और एक तेज़ दर्द की लहर मेरे सारे बदन में दौड़ गयी. मैं कस'मासाया पर मैने सोच रखा था कि चाहे जो हो जा'य मुझे गले से आवाज़ बाहर नहीं निकलने देनी है.

फिर गुल ख़ान अप'ने लंड के सुपारे को मेरी गान्ड में कुच्छ देर हिलाता रहा. जिस'से मेरी गान्ड में भरा जमा हुवा नारियल तेल फैल'ने लगा. उस'के लंड का सुपारा मेरी गान्ड में अट'का 'पच' 'पच' कर के हिल रहा था. तभी उस'ने मेरी गान्ड पर और दबाव बढ़ाना शुरू किया और मुझे लंड अंदर सरक'ता साफ मालूम पड़ा. कुच्छ दूर तक तो बिना दर्द के अंदर सरक गया परंतु इस'के बाद मुझे ऐसे लगा कि जैसे मेरी गान्ड चीरी जा रही हो. तभी मैने अप'ना ध्यान शमी की पह'ली चुदाई की तरफ मोड़ दिया.

अब मुझे महसूस हो रहा था कि जब शमी की चूत में मैने पह'ली बार लंड पेला था तो उसे भी ऐसा दर्द हुवा होगा. मैं यह सोच कर पहली बार गान्ड मार'वाने के दर्द को झेल'ने लगा कि अभी कुच्छ देर पह'ले जब मैने अप'नी सग़ी बहन की चूत को ऐसा ही दर्द दिया था तो अब मैं क्यों चिल्लाउ. मैं अप'ने ख़यालों में खोया हुवा था और उधर गुल ख़ान ने मेरी नारियल तेल से सनी गान्ड में पूरा 10" का लंड जड़ तक पेल दिया था. उस'की बाहें मेरी छाती पर और कस गयी.

फिर गुल ख़ान ने आधा लंड मेरी गान्ड से निकाला और वापस धीरे से पूरा अंदर डाल दिया. ऐसा उस'ने तीन बार किया और तीस'री बार मुझे दर्द महसूस नहीं हुवा. फिर तो अचानक तूफान आ गया. अब गुल ख़ान सुपरे तक लंड बाहर खींच एक ही झट'के में पूरा जड़ तक घुसा रहा था. धीरे धीरे उस'की स्पीड बढ़'ती गयी और मुझे केवल पच्च पच्च सुनाई पड़ रहा था. मेरा लंड तन गया था और जब गुल ख़ान ने मेरी छाती से एक हाथ नीचे बढ़ाके मेरा लंड पक'डा तो मुझे बहुत मज़ा आया. मैं बोल पड़ा,

गुल ख़ान मेरे लंड को सर'का मारो. ओह तुम तो गान्ड मार'ने के पूरे एक्सपर्ट हो. गुल ख़ान ने मेरे लंड को मुत्ठी में जाकड़ लिया और वह मेरे लंड को मूठ मार'ने लगा. उधर बहुत तेज़ी के साथ उस'का लंड भी मेरी गान्ड में अंदर बाहर हो रहा था. तभी शमी कमरे में आ गयी और जैसे ही वह मूड के वापस जाने लगी गुल ख़ान बोल पड़ा,

शमी बेटे यहाँ आओ और बैठो. देखो मैं तुम्हारे भाई से तुम्हारा बद'ला कैसे ले रहा हूँ. ठीक से नहा ली हो ना. अभी दर्द कम हो गया न. शमी ने हां में गर्दन हिला दी.

ले साले झेल मेरा लंड. आज तेरी गान्ड फाड़ के बिटिया का बदला लूँगा. ले झेल.... गुल ख़ान मेरे लंड को मुठियाते हुए दना डन मेरी गान्ड में लंड पेल रहा था. तभी मेरे लंड से फव्वारा छूटा और तभी मुझे अप'नी गान्ड में गुल ख़ान के रस का फव्वारा महसूस हुवा. उस दिन और कुच्छ नहीं हुवा. शमी और दिन की अपेक्षा आज बहुत जल्द अप'ने कम'रे में जा कर सो गयी. मैं भी जल्द सो गया. दूसरे दिन मैं और शमी रोज की तरह यूनिवर्सिटी और स्कूल गये. दुस'री रात शमी राज़ी हो गयी. तीसरे दिन जब तक अम्मी अब्बू नहीं आ गये तब तक शमी इस खेल की खिलाड़ी बन चुकी थी. तो दोस्तो कैसी लगी ये कहानी ज़रूर बताना आपका दोस्त राज शर्मा

समाप्त

 
चाचा की बेटी

हाई दोस्तों,

मेरे विद्यालय की छुट्टियाँ में मैंने अपने गॉंव जाने का प्लान बनाया | मेरा गॉंव पूरी तरह से हरियाली और खेत – खालिआलों से भरा है | मुझे गॉंव आकर घूमने का मौका साल में एक बार ही मिलता हैं इसलिए मैं घूमने – फिरने और एश करने में कोई कसर नहीं छोड़ता |

गॉंव मैं मेरी दादी के साथ मेरे चाचा – चाची और उनकी बेटी अंजू रहती है | इस बार मैं पुरे १ साल बाद गॉंव गया था इसीलिए मुझे वहाँ काफ़ी अच्छा लग रहा था और बहुत उत्सह भी था सबसे मिलने का क्यूंकि मुझे सब दिल से चाहते हैं | गॉंव आते ही सबसे पहले चाची और अंजू आए मुझे घर ले जाने के लिए आए | उस वक्त मेरी निगाहें बस अंजू पर ही टिकी हुई थी, वो काफ़ी बड़ी हो चुकी थी और सुन्दर भी लग रही थी | मैं अपने आप को रोकना चाहता था पर उसके स्तन के उभार ने तो जैसे मेरी नज़रों पर ही काबू कर लिया था |

अगली सुबह मैं अंजू के साथ खेत की तरफ घूमने निकल पड़ा | हम दोनों बातें करते – करते घर से बहुत दूर निकल आये थे और फिर कुछ देर के बाद हम दोनों थक कर वहीँ एक पेड़ के निचे बैठ गए | हमारे चारों खेतों में लंबी – लंबी इंक की फसल होने के कारण हमें कोई चाहकर भी देख नहीं सकता था | कुछ देर इधर – उधर की बातों में उलझाते हुए मैंने अचानक उससे यौन सम्बंधित विषय की बातें करना शुरू कर दिया | अंजू एक दम घबरा गई और सहमी – सी आवाज में बोली,

“ऐसी बातें करना .. हमें शोभा नहीं देता . . ! !”

तभी मैंने अंजू को प्यार से समझाया जिसपर वो कुछ देर न – न करती हुई मान गई और हम दोनों एक दूसरे से यौन समन्धित बातें करने लगे जिससे मेरा लंड पैंट अंदर ही सलामी देने लगा | अंजू १७ साल की हो चुकी थी और हर तरह से देसी माल लग रही थी, मुझे अंजू को बस खुल्ले सांड की तरह चोदने का मन करने लगा |

कुछ देर बातें करने के बाद हम दोनों एक दूसरे के कुछ और करीब आकर बैठ गए फिर एक दूसरे को टकटकी लगाकर देखने लगे | मैंने अपने हाथो से अंजू के खुले बालों को खोल सहलाने लगा और धीरे – धीरे उसकी पीठ पर हाथों को फेरने लगा जिससे अंजू ने सहमते हुए धीमे सी आवज़ में कहा,

अंजू – क्या. . . कर रहे हो . . .? ?

मैंने अंजू से कुछ न कहते हुए उसके होठों को चूमने लगा जिसपर पहले अंजू ने मेरा हल्का- हल्का विरोध किया पर आखिर अपने तन की गर्मी आगे हार मन ली | मैंने अंजू को समझाया की,

“इस तरह के शारीरिक समंध से कुछ नहीं होता. . हम दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हैं. .यह तन की गर्माहट तो कुदरत की ही देन है . . ! !”

मेरे कई देर समझाने के बाद अंजू आखिकार मान ही गई और मुझे इज़ाज़त दे दी | मैंने अंजू को उसी वक्त गले लगा लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा और अपने हाथों से उसकी पीठ को मसलने लगा और फिर धीरे – धीरे उसके मुलायम गालों तक पहुँच उसके होठों पर चूमने लगा | अब अंजू के मुंह से भी कामुक आवाजें निकल रही थी और उसका पूरा शरीर काँप रहा था |

अब मैंने धीरे से अंजू की कुर्ती को उतारा और उसके ब्रा को चाटने लगा, उसने काले रंग का ब्रा पहने हुए था फिर मैंने उसके ब्रा की हुक खोली और ब्रा उतार दिया | उसके गोरे – गोरे स्तन अब मेरे सामने थे जिन्हें मैंने चुमते हुए अपने दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया और उसकी चूचकों को अपने होठों में भींचकर पीने लगा | मेरे ऐसा करने से अंजू झटपटाने लगी और गरम- गरम सिस्कारियां भरने लगी मैंने उसका हाथ थाम लिया और फिर कुछ देर उसके स्तनों को पीने के बाद पीछे से उसकी पीठ को चूमना शुरू कर दिया और उसके पेट पर अपना हाथ फेरने लगा | कुछ देर बाद मैंने अपनी जीभ से अंजू की नाभि के इर्द – गिरध चाटने लगा |

कुछ देर यह सब करने के बाद मैंने अंजू की सलवार का नाडा खोल उसे उतार वहीँ मिटटी की क्यारियों में रख गिरा दिया | उसकी जांघ बहुत गोरी- गोरी थी, उसने लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी | मैंने उसकी जाँघों को चूमना शुरू कर दिया और चुमते – चुमते उसकी पैंटी तक पहुँच उसकी चुत के उप्पर अपनी जीभ रगड़ने लगा | कुछ देर यूँही करने के बाद मैंने उसकी पैंटी को उतारा और अब उसकी उसकी चिकनी – कुंवारी चुत में अपनी ऊँगली अंदर – बाहर करने लगा |

अंजू को बहुत मज़ा आ रहा था जिससे मैंने मेरा जोश बढ़ा और मैंने उसे वहीँ मिटटी में लेटकर अपने लंड को उसकी चुत के छेद पर रगड़ने लगा | अब मैं मंजू के गोरे बदन पर लेट मस्त में एक ज़ोरदार झटका लगाया जिससे पहले वो जोर के चिल्लाई और उसकी चुत में हुए दर्द के कारण रोने लगी मैंने इसकी परवाह न करते हुए पहले उसकी चुत को चाटने लगा फिर जैसे ही गर्मी चढ़ी तो मैंने फिर अंजू की चुत में धक्के देना शुरू कर दिया | जिससे अब वो पूरी तरह कामुकता में डूबकर लेने लगी | मैंने लगभग ४५ मिनट अंजू की चुत में अपने लंड को रौन्धाया और उसकी चुत को मसलते हुए अपना सारा घड़ा वीर्य उसकी चुचों पर ही छोड़ दिया |

हम तभी अपने कपड़े पेहेन समय पर घर पहुँच गए | अब अंजू भी मुझसे काफ़ी करीब आ चुकी थी और जब भी मुझे मौका मिलता मैं उसे दबोच लेता |

 
कुँवारी जवानी--1

गर्मी की तपती हुई दोपहर थी !

मै मस्तराम की 'कुँवारी जवानी' पढ़कर अपने लौड़े को मुठिया रहा था।

इसे मैने लखनऊ के चारबाग स्टेशन के बाहर एक फुटपाथ से खरीदा था।

किताब की कीमत थी 50 रूपये।

लेकिन जो मजा मिल रहा था उसकी कीमत का कोई मूल्य नहीं था।

इस किताब को पढ़ कर मै पचासों बार अपना लौड़ा झाड़ चुका था और हर बार उतनी ही लज्जत और मस्ती का अहसास होता था जैसे पहली बार पढ़ने पर हुआ था।

कहानी में एक ऐसे ठर्की बूढ़े का जिक्र था जिसे घर बैठे-बैठे ही एक कुँवारी चूत मिल जाती है !

इस कहानी को पढ़कर मै भी दिन में ही सपना देखने लगा था जैसे मुझे भी घर बैठे-बैठे ही कुँवारी चूत मिल जायेगी और फिर मै उसमें अपना मोटा मूसल घुसा कर भोषड़ा बना दूंगा।

यही सोच-सोच के लौड़े को मुठियाकर पानी निकाल देता था।

लेकिन फिर एक अजीब सी चिन्ता भीतर कहीं सिर उठाने लगती की कहीं अपनी जवानी बरबाद तो नहीं कर रहा हूँ।

इसी चिन्ता से ग्रस्त मै मिला 'बाबा लौड़ा भस्म भुरभुरे' से।

जिनकी दुकान आलमबाग में एक गली के अंदर थी।

पहले तो भीतर जाने में संकोच लगा लेकिन जब देखा की दुकान एकदम किनारे हैं और कोई भी इधर आता जाता नहीं दिख रहा तो मै जल्दी से भीतर घुस गया। पूरी की पूरी दुकान तरह-तरह की जड़ी बूटियों से भरी पड़ी थी।

लौड़ा भस्म भुरभुरे ने मुझे अपनी मर्दाना ताकत को बरकरार रखने का एक नुस्खा बताया।

मूठ चाहे जितना मारो लेकिन हर महीने एक चूत का भोग जरूर करना वरना लौड़े को मूठ की आदत पड़ जायेगी फिर लड़की देखकर भी पूरा तनाव नहीं आ पायेगा।

इस बात का डर भी लगा रहेगा की कहीं मैं बुर को चोदकर उसे ठण्डा कर पाऊगा भी या नहीं।

इस सोच से एक मानसिक कुंठा दिमाग में घर कर जायेगी। जिसकी वजह से लौड़े में पूरी तरह से तनाव नहीं आ पाता।

इसके अलावा उन्होंनें भैसे के वृषण का कच्चा तेल, बैल के सींग का भस्म व ताजा- ताजा ब्याही औरत की चूत का बाल यानि झाँटों को जलाकर उसमें गर्भवती औरत की चूची का कच्चा दूध मिलाकर एक घुट्टी दी।

कुल मिलाकर एक हजार रूपये का लम्बा बिल बना। मगर मर्दाना ताकत बरकरार रहें ताकि बुर चोदने का मजा लेता रहूँ, इस लोभ के आगे एक हजार क्या था....मिट्टी।

तो मै बात कर रहा था तपती हुई दोपहर की। जब मै कमरे में पंखे की ठण्डी हवा में चारपाई पर लेटा अपने लौड़े पर भैसे के बृषण का कच्चा तेल लगा रहा था।

कमाल की बात ये थी की लौड़ा भस्म भुरभुरे की दवा काफी कारगर साबित हो रही थी। लौड़े पर तेल लगाते ही लौड़ा काफी सख्त हो जाता था जैसे भैंसे और बैल की ताकत मेरे लौड़े में ही समा गई हो।

इतना टाइट की 12 साल की कच्ची बुर को भी फाड़ कर घुस जाय।

अगर इस वक्त मुझे कोई कच्ची बुर ही मिल जाती तो मै उसे छोड़ने वाला नहीं था।

और हुआ भी वहीं।

मानों भगवान ने मेरी सुन ली।

घर बैठे-बैठे चूत की व्यवस्था हो गई थी।

मेरे घर के पिछवाड़े एक ईमली का पेड़ था।

जहाँ अक्सर लड़के लड़कियाँ ईमली तोड़ने आ जाते थे।

दिन भर मै उन लोगों को हाँकता ही रहता था।

लेकिन आज की तरह मेरी नियत मैली नहीं थी।

मैने बाहर कुछ लड़कियों की फुसफुसाती आवाज सुनी तो कान शिकारी लोमड़ी की तरह सतर्क हो गये।

मै लौड़े को हाथ से मुठियाते हुए खिड़की तक पहुँचा और पीछे झाँका तो मानों मुँह माँगी मुराद मिल गई।

एक छोटी लड़की लगभग 11 साल की नीचे से ईमली उठा-उठा कर अपनी स्कर्ट की झोली में डाल रही थी।

लेकिन मेरी नियत उस लड़की पर उतनी खराब नहीं हुई जितनी उस लड़की पर जो ईमली की एक डाल पर चढ़ कर ईमली तोड़कर नीचे फेंक रही थी।

सीने के ऊभार बता रहे थे की अभी 14-15 के बीच में ही थी।

यानि एकदम कोरी, कुँवारी, चिपकी हुई, अनछुई, रेशमी झाँटों वाली कसी बुर।

सोच के ही लौड़े के छेद से लसलसा पानी चू गया।

मेरा कमीना दिल सीने के पिंजरे में किसी बौराये कुत्ते की तरह जोर-जोर से भौंकने लगा।

देखकर कसा-कसा लाल चिपचिपा बिल, भौंकने लगता है ये साला दिल!

ये मस्तराम की शायरी थी जो इस वक्त मेरे दिमाग में हूटर की तरह बज रहा था।

फिर क्या था- मैने बनियान पहनकर एक लुंगी लपेटी और एक डण्डा उठाकर धड़धड़ाते हुए वहाँ पहुचा।

वही हुआ जो होना लाजमी था।

छोटी भाग खड़ी हुई लेकिन बड़ी जाल में फँस गई।

"नीचे ऊतर साली चोट्टी...."- मैने डण्डा जमीन पर पटककर उसकी तरफ देखा।

वो एक डाल पर दुबकी बैठी थी।

नीचे से मै उसकी कोरी जवानी देख रहा था।

दोनों टागों के बीच लाल रंग की छोटी सी कच्छी।

जिसके नीचे उसकी कच्ची बुर छिपी हुई थी।

देखकर ही लौड़ा हिनहिनाने लगा।

जब मैने देखा की मेरे डाँटने पर वो नीचे नहीं आ रही तो मैने प्यार से पुचकारा-

"चल...नीचे उतर...नहीं मारूगा...अगर मेरे 10 गिनने तक नीचे नहीं आई तो समझ लेना..."

फिर वो डरते सहमते नीचे उतरने लगी।

मै लुंगी के नीचे लौड़े को सोहराता हुआ स्कर्ट के नीचे उसकी गोरी-गोरी गदराई टागों को देखकर मस्ताया हुआ था।

कुल मिलाकर अभी कच्ची कली थी जो धीरे-धीरे खिल रही थी।
 


जब वो मेरे सामने आ खड़ी हुई तब मैने उसे सिर से लेकर पाँव तक घूरा।

लौड़े में मस्ती की लहर दौड़ गई।

मै उसे देखकर लुंगी के नीचे अपने लौड़े को मसल रहा था।

"नाम क्या है तेरा?..."

"रुचि...."-वो सहमे हुए भाव से बोली।

"किस क्लास में है?.."

"आठवीं में...."

यानि अभी 14 से 15 साल की थी।

मतलब चूत पर रेशमी बाल आ चुके थे।

और हो सकता था माहवारी भी शुरू हो गई हो।

सोचकर ही लौड़ा लुंगी के अंदर हाँफने लगा।

"किसके घर की है?...."

"राम आसरे मेरे पापा हैं...."

"अच्छा तो तु उस दरुवल की लौडिया है....अच्छा हुआ तू मेरे हाथ लग गई....तेरे बाप से तो काफी पुराना हिसाब चुकता करना है...चल अंदर चल...और अगर ज्यादा आना कानी की तो यहीं पर उल्टा लटका दूँगा...तेरा बाप मेरा झाँट भी नहीं उखाड़ पायेगा।..."

वो और ज्यादा सहम गई।

मैने उसका हाथ पकड़ा और उसे कमरे के भीतर ले आया।

मैने दरवाजे में अंदर से कुण्डी लगा ली।

कहते हैं की भूखे शेर के पंजे में माँस और हबशी पुरूष के चंगुल में फँसी लड़की.....दोनों का एक ही जैसा हश्र होता है। दोनों भूख मिटाने के ही काम आती हैं। एक पेट की तो दूसरी लण्ड की।

दोनों ही खून फेंकती हैं चाहे माँस हो, चाहे कच्ची बुर।

शिकार फँसाने के बाद अगर उसे सब्र के साथ खाया जाय तो ज्यादा मजा आता है।

लेकिन ये साली सब्र बड़ी कमीनी चीज है....होकर भी नहीं होती।

खासतौर पर तब जब फ्री फण्ड की कुँवारी लड़की हाथ लग जाय।

वो भी घर बैठ कर ख्याली पुलाव पकाते हुए।

धन्य हो मेरे परदादा जी जिन्होने ईमली का पेड़ पिछवाड़े लगाया था।

फल ही फल मिल रहा था- खट्टा भी और नमकीन भी।

खट्टा यानी ईमली का मजा और नमकीन मतलब कुँवारी बुर के अनचुदे छेद में अटकी पेशाब की बूँद को जीभ से चाटने का मजा।

लौड़ा भस्म भुरभुरे की एक और बात याद आई कि कुँवारी, अनचुदी, माहवारी हो रही बुर का पेशाब पीने से मर्दाना ताकत बनी रहती है।

इस वक्त मेरी नजर वहाँ थी जहाँ सम्भवतया लड़की की भूरे रोयेंवाली छोटी सी गोरी-गोरी बुर हो सकती थी।

मै लुंगी के भीतर लौड़े के छेद से चू रहे लसलसे पानी को ऊँगली से सुपाड़े पर मल रहा था।

ताकि कुँवारी चूत में घुसने के लिए सुपाड़ा एकदम चिकना हो जाय।

"हमें जाने दीजिये......फिर कभी ईमली तोड़ने नहीं आँऊगी....."

"एक शर्त पे छोड़ दूँगा, अगर.....अपना मूत पिला दे..."

"धत्त्..."

मेरी बात सुनकर लड़की शरमा कर नीचे देखने लगी।

यानि उम्र भले ही छोटी थी लेकिन उतनी अंजान भी नहीं थी।

ये सोच कर मेरी मस्ती और भी बढ़ गई।

"अगर तुमने मेरा कहना नहीं माना तो नंगी करके ईमली के पेड़ पर उल्टा लटका दूँगा...सारे लड़के तुम्हें नंगी देख कर खूब मजा लूटेंगें...."

मेरी ये बात सुनकर वो घबराई भी और थोड़ी सहमी भी।

"बोलो....पिलाओगी अपना पेशाब...."

वह चुपचाप खड़ी रही।

"जल्दी बोलो नहीं तो तुझे अभी ले चलता हूँ...."

इतना कहकर मै एक कदम उसकी तरफ बढ़ा।

उसने जल्दी से अपना सिर हाँ में हिलाया।

मैने जल्दी से एक गद्दा लिया और उसे फर्श पर बिछा दिया।

फिर छत की तरफ सिर करके लेट गया।

शेष अगले भाग में......

 
कुँवारी जवानी--2

"जैसे मूतने बैठती है उसी तरह कच्छी सरका कर मेरे मुँह के पास आकर बैठ जा..."

वह चुचाप खड़ी रही फिर बोली-

"मै नहीं कर पाऊँगी...."

मैने उसकी तरफ घूर कर देखा-

"क्यों?.."

"मेरा महीना चल रहा है...."

ये सुन कर मेरा कमीना दिल और बुर-चोद लौड़ा जोर-जोर से हाँफने लगा।

"कोई बात नहीं तू आकर मेरे मुँह में पेशाब कर बस.."

"पर..पर.. बहुत बदबू करेगा..."

"कोई बात नहीं तेरी बदबू मेरे लिए खुशबू है...आ जा..."

फिर वो सकुचाती हुई मेरे पास तक आई।

"कैसे करू मेरी समझ में नहीं आ रहा...."

"अरे अपना एक पैर मेरी गर्दन के इधर रख और दूसरा उधर...फिर धीरे से अपनी कच्छी सरका कर बैठ जा.."

सकुचाती हुई शरमाते हुए उसने वही किया।

अब मेरा सिर उसकी स्कर्ट के ठीक नीचे था।

मै नीचे से उसकी लाल रंग की कच्छी देख रहा था।

जहाँ पर उसकी बुर थी वहाँ पर काफी ऊभार था।

मतलब उसने पैड लगाया हुआ था।

वह खड़ी होकर अपने स्कर्ट को इस तरह दबाने लगी ताकि मै उसकी बुर न देख पाँऊ।

"ऐसे ढकेगी तो अपना मूत कैसे पिलायेगी....चल जल्दी से कच्छी सरका कर मेरे मुँह में मूत..."

इतना कहकर मैने अपना भाड़ जैसा मुँह बा दिया।

तब उसने सकुचाते हुए कच्छी के अंदर हाथ डाला और विस्पर का पैड धीरे से बाहर निकाल लिया।

जिस पर मेरी निगाह पड़ गई।

जहाँ बुर का छेद था वहॉ खून की 2-3 बूँदें सूख कर जम गई थीं।

उसकी जाँघें भी खूब मोटी, चिकनी और भरी-भरी थीं।

उसने शरमाते हुए अपनी कच्छी धीरे से नीचे सरकाई और मेरे मुँह के पास बैठ गई।

मेरा चेहरा उसकी स्कर्ट के घेरे में था।

मैने गौर से उसकी छोटी सी बुर को देखा।

उसमें से सड़े अण्डे जैसी बड़ी ही मीठी-मीठी खुशबू निकल रही थी।

बुर की फाँकें चिपकी हुई थीं और उनके बीच में एक चीरा लगा था।

चूत पर बहुत हल्की-हल्की झाँटें भी निकल आई थी।

यानी लड़की जवान हो रही थी।

बुर को देखते ही मेरा लौड़ा गधे की तरह जोर-जोर से हाँफने लगा।

"जय हो बाबा लौड़ा भस्म भुरभुरे..."

और मैने उसकी बुर को चभुवाके अपने मुँह में भर लिया।

मै जीभ को उसकी दरार में धँसा-धँसा के चाट रहा था।

मेरे ऐसा करते ही लड़की भी सिसियाने लगी।

"सीSSSS....सीSSSSS....ऊई मम्मी.....आह..."

वो जितना सिसियाती मै उतनी कसकर उसकी बुर चूसता।

उसकी गाँड़ भी खूब चिकनी थी।

बुर चाटते वक्त मै उसके चूतरों को खुब सहला रहा था।

धीरे-धीरे वो भी गोल-गोल अपने चूतरों को मटकाने लगी तब पहली बार मुझे ये पता चला की 14-15 साल की उमर मे भी लड़कियों के अंदर जवानी की गरमी उबलने लगती है।

बुर चाटते वक्त एकाएक मेरे मुँह में नमकीन स्वाद कुछ ज्यादा आने लगा।

मैने बुर की फाँकों को चीर कर दरार में एकदम नीचे देखा।

एक लाल छेद बार-बार खुलता और बंद हो रहा था और साथ ही उसमें से चिपचिपा पानी निकल रहा था।

इसी पानी को बोलते हैं- कुँवारी चूत का रस।

मैने होंठ गोल करके छेद पर चिपका दिया और जोर-जोर से चूसने लगा।

लड़की एकदम मस्ता चुकी थी।

अब वह भी अपनी स्कर्ट उठा कर देख रही थी कि मै कैसे उसकी बुर चाट रहा हूँ।

लड़की का चेहरा तमक कर धीरे-धीरे लाल होने लगा था।

वह धीरे-धीरे अपने चूतरों को गोल-गोल घूमाने लगी।

मै समझ गया की लड़की मदहोश हो चुकी है।

"चल मेरी चिकनी....मूत मेरे मुँह में.....पिला दे अपना अमृत..."

इतना बोलकर मै उसकी बुर की मूत्रिका को चुसने लगा।

"हाय मम्मी....निकल जायेगी अंकल...."

"अंकल नहीं मेरी जान राजा बोल...मेरे राजा..."

"हाय....सच में निकल जायेगी मेरे राजा.....आईईई..."

आई-आई करती हुई एकाएक उसने पेशाब की एक धार मारी। जिसे मै चटखारे लेकर पी गया।

"और मूत मेरी रानी.....बड़ा मीठा पेशाब है....मूत....थोड़ा जोर लगा..."

लड़की ने गाँड़ का छेद सिकोड़ कर ताकत लगाई।

लेकिन 2-3 बूँद के अलावा नहीं निकला।

"नहीं निकलेगा...."

"बहुत हो गई चूत चटाई.....अब होगी तेरी बुर चोदाई...."

इतना बोल कर उसे मैने गोंद में उठा लिया और खटिये पर ला पटका।

फिर क्या था मैने लौड़ा भस्म भुरभुरे का नाम लिया और उसे धर दबोचा।

इस वक्त मै एकदम जन्मजात नंगा था।
 


लौड़ा लोहे की तरह टाइट होकर फनफना रहा था।

मुझे नंग-धड़ंग देख कर लड़की घबरा गई थी।

मैने जल्दी से उसे नंगी करके अपनी बाँहों में दबोच लिया और उसकी चिकनी टाँगों को अपनी मर्दाना टाँगों के बीच दबाकर अपने चौड़े सीने से उसके नींबुवों को मसलने लगा।

और लौड़ा उसकी छोटी सी बुर का चुम्मा ले रहा था की बस मेरी जान अभी फाड़ता हूँ तुझे।

जब मैने देखा की लड़की का चेहरा लाल पड़ चुका तो मैने आसन जमा लिया और उसकी टाँगों को खोलकर अपने कंधें पर डाल लिया और हिनहिनाते लौड़े को उसकी 14 साल की रोयेंदार, कसी, कुँवारी बुर के छेद पर टिकाकर उसे सीने से चिपका लिया फिर हुमक कर उसकी बुर में पेल दिया।

लौड़ा उसकी चूत के अंदर धँस गया।

वह परकटी कबुतरी की तरह फड़फड़ाने लगी।

साली बुर बहुत टाइट थी लेकिन कसी बुर के अंदर जाने के बाद लौड़ा और गरमा गया था।

फिर क्या था मैने उसे कसकर दबोचा और पूरी ताकत से पेल दिया।

लौड़ा उसकी चूत को बाता हुआ सीधे उसकी बच्चेदानी से जा टकराया।

"ऊई मम्मी....फट गई मेरी.......आह....छोड़ दीजिए आई माई...."

जब वह सिसकने लगी तो मैने उसके होंठों को अपने मुँह में भर लिया और उसकी गाठदार चूचियों को मसलने लगा तथा एक हाथ से उसके चिकने-चिकने चूतरों को पकड़कर दबोचने लगा। लौड़ा चूत में घुसाये मैं कम से कम पाँच मिनट तक वैसे ही लेटा रहा।

जब लड़की अपना चूतर धीरे-धीरे मटकाने लगी तो मै समझ गया की उसकी बुर में धीमा-धीमा दर्द हो रहा है।

अब वह अपने बुर पर धक्के पेलवाना चाहती थी।

मै धीरे-धीरे उसकी बुर में पेलने लगा।

"आई मम्मी....दुःख रही है....सीSSSS...धीरे से...."

वह सिसियाते हुए कसकर मेरे सीने से चिपक गई।

वह जितना कसके चिपकती मै उतनी कसकर उसकी बुर में लौड़ा चाप देता।

कुछ देर बाद वह भी धीरे-धीरे अपना चूतर उछालने लगी फिर क्या था मैं कस-कस के पूरी ताकत से उसकी बुर में लौड़ा चापने लगा।

थोड़ी देर में वह सिसियाते हुए मुझसे चिपक गई।

उसकी चूत से चुदाई का रस निकल रहा था।

उसके बाद मैने कस-कस के उसकी बुर में पेला और कुत्ते की तरह हाँफता हुआ झड़ गया।

उसके बाद वो लड़की रोज-रोज आने लगी।

सिर्फ उसे ही नहीं बल्कि उसकी सहेलियों को भी मैने फँसाकर लौड़ा भस्म भुरभुरे की बात का पालन किया।

यानि हर महीने एक कुँवारी चूत का मुँह खोलने लगा।

और वाकई में मै आज एक मर्द हूँ।

अगर आप लोग भी अपनी मर्दानगी बरकरार रखना चाहते हैं तो वही कीजिए जो मै करता हूँ।......धन्यवाद॥

""जय हो बाबा लौड़ा भस्म भुरभुरे की...""

 
माँ चुद गयी सुहागरात में

हाय अल्ला, मैं बिलकुल सच्ची सच्ची बता रही हूँ तुझे . सुहागरात थी मेरी और चुद गयी मेरी माँ ? हां हां , मैं तो हैरान हो गयी जब मुझे चोदने वाला मेरा हसबैंड नहीं कोई और दो लड़के थे . एक लण्ड मैं मुह में लेकर चूस रही थी तब तक किसी ने एक लण्ड मेरी चूत में पेल दिया . लण्ड मुझे चूत में पेलवाना अच्छा लगा इसलिए मैं कुछ बोली नहीं बस चुदवाती रही . थोड़ी देर में चूत वाला लण्ड मुह में घुस गया और मुह वाला लण्ड चूत में . मैं समझी की एक लण्ड मेरे मियां का है और दूसरा उसके दोस्त का होगा ? हमारे यहाँ अक्सर ऐसा होता है की दूल्हा का दोस्त भी दुल्हन को चोदने लगता है . दुल्हन खूब मजे से दोनों लण्ड से चुदवाती है . इसलिए मैं भी चुदवाने लगी . जब थोड़ी रौशनी हुई तो मैंने देखा की उन दोनों में से मेरा हसबैंड कोई नहीं है ? मैं थोडा हैरान हुई . तब तक मेरी ननद बोली भाभी चिंता न करो तेरा हसबैंड अपनी भाभी की बुर चोद रहा है . और तुझे एक तो मेरा हसबैंड चोद रहा है और दूसरा उसका दोस्त .

मैंने कहा :- इसका मतलब यह है की यहाँ न तो मेरा हसबैंड है और न ही मेरे हसबैंड का दोस्त ?

नन्द बोली :- अरी मेरी बुर चोदी भाभी तुझे आज के दिन लण्ड से मतलब है की आदमी से ? तुझे दो लण्ड चाहिए आज सुहागरात के दिन बस ? अब लण्ड किसका है इसकी चिंता न कर . तू जा और मस्ती से चुदवा ?

इतने में मैं बाथ रूम जाने लगी .

तब मैंने देखा की यहाँ तो मेरी माँ चुद रही है . चोदने वाले एक नहीं तीन तीन लण्ड है . एक उसकी बुर में घुसा है . दूसरा उसके मुह में और तीसरा गांड मार रहा है . लेकिन मेरे माँ के चेहरे में तनिक भी सिकन नहीं है . वह तो बड़े मजे से तीनो लण्ड झेल रही है . गचागच भकाभक चुदवा रही है . बड़ी मस्त से चुदवा रही है मेरी माँ .

मैंने कहा हाय अल्ला, कैसा इत्तिफाक है ?

सुहाग रात है मेरी और चुद रही है मेरी माँ ?

मैंने कहा :- तू भोषड़ी की मेरी ननद मेरी माँ चुदवा रही है वह भी मेरी सुहागरात में ? तू तो बहुत ज़ालिम है .

ननद बोली :- अरी बहन की लौड़ी मेरी भाभी, तेरी ही माँ ही नहीं चुद रही है ? ज़रा आगे बढ़ कर देख मेरी भी माँ चुद रही है . वह भी खुले आम ?

मैंने आगे कदम बढाया तो वहां का सीन देख कर ज्यादा हैरान हो गयी . मैंने देखा की मेरे मियां की माँ चुद रही है और चोदने वाला कोई और नहीं बल्कि मेरे अब्बू है . मेरा अब्बू अपना पूरा लण्ड बार बार बाहर निकाल निकाल कर फिर पेल देता है है मेरी सास की चूत में . मैं मन ही मन बहुत खुश हुई की चलो मेरी माँ के साथ साथ मेरे मरद की भी माँ चुद रही है . इस समय मेरे अब्बू का लौड़ा बड़ा खूखार हो गया है ,. वास्तव में मेरी सास का भोषडा ऐसे चुद रहा है की जैसे कोई घोडा घोड़ी की चूत चोदता है . इतने में मेरी ननद बोली भाभी ज़रा बगल के कमरे भी झाँक कर देख ले न . मैंने जब वहां देखा तो और मस्त हो गयी मैं ? मैंने देखा की मेरा शौहर अपनी भाभी की बुर चोद रहा है . मैंने मन ही मन कहा वाह वाह क्या चारों तरफ चुदाई हो रही है ?

मैंने सोचा की जब की मेरी माँ चुद रही है . मेरे मियां की माँ चुद रही है . मेरी जेठानी चुद रही है तो फिर मुझे गैर मर्दों से चुदाने में क्या परहेज ?

मैं तुरंत लौट आयी अपने बेड पर और बुर खोल कर टाँगे फैला दी . वे दोनों तो लण्ड खड़ा किये हुए मेरा इंतज़ार कर ही रहे थे ,. एक ने मेरी बुर में पेला लण्ड और दूसरे ने मुह में . मुझे दुगुना मज़ा आने लगा . लेकिन इस बार चोदने वाले बदल गए थे . मैंने पूंछा भी नहीं ? मुझे तो लण्ड पसंद आये तो मैं चुदवाती चली गयी . मेरी ननद ने खुद बताया की जब तुम अपनी माँ की चुदाई देख रही थी तो मेरी खाला उन दोनों को अपने कमरे में ले गयी और खुद ही चुदाने लगी . उनके बदले में मैंने अपने देवर और अपने जीजू को भेज दिया है तुम्हे चोदने के लिए . इस बार चुदाने में मुझे ज्यादा मज़ा आ रहा था .

मैंने पूंछा :- हाय मेरी ननद यहाँ घर में मेरी माँ चुद रही है , मेरी सास चुद रही है मेरी जेठानी चुद रही है और मेरी खाला सास चुद रही है . मैं चुद रही हूँ तो तू मादर चोद क्यों नहीं चुद रही है ? क्या तेरी चूत बुर चोदी अभी तक गरम नहीं हुई ?

ननद बोली :- हाय भाभी मेरी चूत तो भठ्ठी हो गयी है . पर मेरे घर के रिवाज़ के मुताबिक भाई जान की सुहागरात में बहन सबकी चुदाई का पूरा इंतजाम करती है . घर भर की सभी बुर चोदी जाती है इस दिन . सबकी बुर में लण्ड पेले जाते है . लेकिन पराये मर्दों के लण्ड ? यहाँ तुमने देखा की कोई भी अपनी बीवी की बुर नहीं चोद रहा है . सब दूसरी की बीवियां चोद रहे है . सभी औरतें गैर मर्दों से चुदवा रही है . कोई एक लण्ड से कोई दो लण्ड से कोई तीन लण्ड से . अगर लण्ड की कमी होती है तो मैं बाहर से लण्ड मंगवा लेती हूँ . लेकिन सबकी चूत को पूरा मज़ा देती हूँ .

ऐसा कहा जाता है की इस दिन अगर सबकी चूत अच्छी तरह चुदती है तो वह ज़िन्दगी भर खूब चुदती रहेगी . उसे कभी लण्ड की कमी महसूस नहीं होगी ? एक और कहावत है भाभी :-

हनीमून इक जश्न है, चूसो चाटो लण्ड .

अपनी बुर में पेलिये, सब मर्दों के लण्ड .

जहाँ तक मेरी चुदाई का सवाल है . जो लोग आज सबको चोद रहे है वही लोग कल मुझे चोदेंगें .

मैंने कहा :- तो कल तुम मेरे अब्बू से भी चुदवाओगी ?

उसने कहा :- हां बिलकुल कल उसके लण्ड का मज़ा लूंगी मैं . वैसे मैंने देखा है की तेरा अब्बू मादर चोद बड़ा चोदू है . उसका लण्ड भी सबसे बड़ा है .

मैंने कहा :- तो आज तेरा अब्बू किसको चोद रहा है ?
 


उसने बताया :- आज मेरा अब्बू पड़ोसन की बुर चोद रहा है . वह अकेली है . उसका हसबैंड बाहर गया है . तो वह मेरे अब्बू को ले गयी चुदवाने के लिए . मेरी नयी पड़ोसन है . अभी ३२ साल की है . बड़ी जबरदस्त लण्ड की दीवानी है . अभी दो दिन पहले ही उसने मेरे हसबैंड का लण्ड मेरे सामने ही पकड़ लिया और मेरे बेड पर लेट कर ही चुदवाया . मैं कुछ नहीं बोलीं . मैं भी उसके हसबैंड को नंगा करके अपने घर ले आयी . और लण्ड अपनी बुर में पेल कर चुदवाने लगी . मैं किसी से कम नहीं हूँ भाभी ? मेरी चूत साली बड़ी चुदक्कड़ है

दोस्तों, मेरा नाम हया है और मेरे हसबैंड का नाम हबीब . यहाँ सुहागरात मनाने के बाद मैं फिर गोवा चली गयी अपने हसबैंड के साथ सुहागरात मनाने क्योंकि मैंने अभी तक अपने मियां से चुदवाया ही नहीं था . वहां पहुँचने पर मैंने अपना सामान रूम में रखा और हम दोनों बाहर घूमने के लिए निकल ही रहे थे मेरे बगल के कमरे में एक कपल आ गया . इतीफाक से जब मैंने उसको देखा तो कहा अरे सना तू यहाँ कैसे ? सना मेरे कॉलेज के दिनों की फ्रेंड है . उसने कहा यार हया मैं यहाँ अपने हसबैंड के साथ हनीमून पर आयी हूँ . ये मेरे मियां सफी है और इसके साथ इसका दोस्त रफ़ी भी है . मैंने कहा यार तो इसके सामने तुम कैसे मनाओगी हनीमून ?उसने कहा अरे मेरी जान यह भी मेरे साथ रहेगा . फिर वह मुझे एक कोने में ले गयी और बोली मैं इन दोनों से चुदवाकर मनाऊंगी हनीमून . मैंने इस बात पर अपने हसबैंड को मना लिया है की जब रफ़ी की बीवी अपने माईके से आ जाएगी तो मेरा हसबैंड उसे चोदेगा . यार मैं दो लण्ड से चुदवाकर हनीमून मानना चाहती हूँ . मैंने कहा यार मुझे भी मौका दो न प्लीज . मैं भी इन दोनों से चुदाना चाहती हूँ . उसने कहा यार तुम अपने मियां से बात कर लो . वह मान जाये तो मेरे कमरे में आ जाना .फिर हम सब मिल कर मनायेगें हनीमून . दो चूत और तीन लण्ड के साथ . लण्ड अदल बदल कर चुदवाने में बड़ा मज़ा आएगा .

मैंने जब अपने हसबैंड से कहा तो वह बहन चोद फ़ौरन तैयार हो गया . बस हम दोनों सना के कमरे में चले गए . सना ने ड्रिंक्स का इंतजाम किया था . हम पांचो लोग शराब का मज़ा लेने लगे .सना ने धीरे धीरे अपनी चूंचियां खोल दी और मुझे भी खोलने का इशारा किया . मैंने तो चूंचियां क्या चूत भी खोल कर दिखा दिया . सना का मियां मुझे नंगी देखता रहा . रफ़ी ने तो हाथ बढाकर मेरी चूंचियां पकड़ ली . सना का हसबैंड अपनी बीवी को भूल गया और मेरी तरफ आकर मुझे चिपका लिया . मैं उसका लंड टटोलने लगी . सफी के बगल में रफ़ी था मैं उसका भी लंड ढूढने लगी . दोनों मदर चोदों को नंगा करके उनके लंड पकड़ लिया . मेरे दोनों हाथ में लंड आ गए . सना मेरे हसबैंड का लंड पकड़ कर सहलाने लगी . लंड टन टना उठा .

सना बोली :- हाय अल्ला, हया तेरे मियां का लण्ड तो गज़ब का है ? यार ये तो मेरी चूत फाड़ देगा .

मैंने कहा :- तो क्या फडवा ले न अपनी चूत ? देख मैं भी तो चूत फडवाने ही आयी हूँ यहाँ ? मैं तो एक ही लण्ड से फडवाने आयी थी यहाँ मुझे दो नये लण्ड मिल गए .

सना बोली :- हां यार इत्तिफाक है ? मुझे भी दो के वजाए तीन लण्ड मिल गये .

गोवा से चुदवा कर जब मैं वापस अपने घर गयी तो देखा की मेरी माँ भोषड़ी वाली एकदम नंगी पड़ी है .

उसके हाथ में मेरे ससुर का लण्ड है और बुर में मेरे पडोसी का लण्ड. अम्मी बड़े मजे से दोनों लण्ड से चुदवाने में लगी है . मैं थोडा छुप गयी तो देखा की ससुर का लण्ड अम्मी के मुह में घुस गया और पडोसी का लण्ड अम्मी की गांड में . मुझे अपने ससुर का लण्ड ज्यादा पसंद आया . ज्यादा मोटा था उसका लण्ड . और वह पूरा लण्ड पेल पेल कर चोद रहा था . फिर मैं रुकी नहीं मुझे भी जोश आ गया .

मैं कमरे में घुस गयी और बोली :- अम्मी तुम पडोसी से चुदवाओ और मेरे ससुर का लण्ड मेरी बुर में पेल दो .

इसका लौडा बहन चोद मुझे बहुत पसंद आ गया है . अब मुझे जम कर चुदवा लेने दो .

=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=०=० समाप्त

 
बहू की बुर सास का भोसड़ा

सासू जी बोली :- आज मैं खुल कर कह रही हूँ तुमसे बहू की मेरी बुर बहुत चुदासी है . कई दिनों से कोई लौड़ा इसमें नहीं घुसा है बहू रानी ? मैं समझती हूँ की तुम बहुत ऐसे मर्दों को जानती हो जो अपना लण्ड मेरी बुर में घुसा सकते है . प्लीज उन्ही में से किसी को बुला कर उसका लौड़ा मेरी चूत में पेल दो . चुदवा लो अपनी सास का भोसड़ा ? जैसे तुम अपनी माँ चुदवाती हो वैसे ही तुम अपनी सास चुदाओ . कल जब मैंने तुम्हे अपने बॉय फ्रेंड से चुदवाते हुए देखा तो मेरा भी मन हुआ की मैं भी कमरे में घुस जाऊं और पकड़ लूं उसका लण्ड ? फिर मैंने सोंचा कि नहीं यह अच्छा नहीं होगा ? मैं अगर चुदा लूंगी तो मेरी बहू बिचारी चुदासी रह जायेगी . यही सोच कर मैं नहीं आयी तेरे पास बहू . वैसे मुझे उसका लण्ड बहुत पसंद आया, बहू

बहू बोली :- वो मेरी सहेली का मियां है, सासू जी . मैं जब कब उससे चुदवा लेती हूँ . तुमने कल बताया होता तो मैं उसका लण्ड तेरी बुर में पेल देती . मैं किसी और को बुला कर चुदवा लेती . सासू माँ, देखो चुदाने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए . न डरना चाहिए और न शर्माना चाहिये ? ऐसा मेरी माँ कहती है . जब वह चुदासी होती है तो मेरी बुर से लौड़ा निकाल कर अपनी बुर में पेल लेती है . मैं जब चुदासी होती हूँ तो अपनी माँ की चूत से लौड़ा खींच कर अपनी चूत में घुसेड़ लेती हूँ . अब आज से तुम मुझसे न शर्म करना और न झिझकना, समझी मेरी बुर चोदी सासू माँ ? चुदाना हो तो मेरी गांड में दम कर देना मैं कोई न कोई लण्ड जरुर घुसेड़ दिया करूंगी तेरी चूत में ? मेरे पास बहुत लोग है जो माँ की चूत चोदने में बड़े एक्सपर्ट है .

सासू बोली :- वाह कितनी अच्छी है मेरी बहू ? कितना ख्याल रखती है अपनी सासू जी का और सासू जी के भोसड़ा का ?

दूसरे दिन मैं सवेरे जैसे ही अपनी झाटें बनाकर बाथ रूम से निकली, वैसे ही किसी ने डोर बेल बजा दी . मैंने उस समय सिर्फ एक बड़ी सी तौलिया अपनी चूंचियों तक लपेटे हुए धीरे से दरवाजा खोला तो सामने मेरे बॉस विक्रम खड़े थे . मेरे बाल भीगे थे . मैंने उसे अंदर बैठाया और मैं कपडे बदलने जाने लगी तो वह बोला रुको मोनिका सुनो यह एक मैसेज है इसे हेड ऑफिस भेज देना आज मैं ज़रा देर से आऊंगा ? इतने में मेरी सासू जी आ गयी . वह जींस और बिना ब्रा के टॉप पहने हुई थी . उसकी चूंचियां झूम रही थी जिन्हे विक्रम बड़ी तेज निगाह से देख रहा था . मैंने उसे अपनी बॉस से मिलवाया . बॉस जाने लगा तो सासू जी बोली ऐसे कैसे जा सकते हो . चाय तो पीकर जाओ ? वह बैठ गया और मैं भी तौलिया में लिपट कर किसी तरह बैठ गयी . वह बोला यार मोनिका आज तुम बहुत सुन्दर लग रही हो . और ये तेरी सास तो बला की खूबसूरत औरत है . मैंने उसके कान में कहा अब क्या मेरी सास भी चोदोगे सर . उसने आगे कहा अपनी जवानी में तो इसके बड़े जलवे होंगे ? मैं हंस पड़ी . मैंने कहा जलवे तो आज भी है उसके सर ? मैं फिर उसके कान में बोली क्या तेरा लण्ड भोसड़ी का पैंट के बाहर हो रहा है ? तब तक सासू जी चाय लेकर आ गयी . उसने झुक कर चाय रखी तो उसकी बड़ी बड़ी चूंचियों पर बॉस की नज़र पड़ी . उसने बड़ी दूर तक चूंचियां देख ली . मेरा बॉस चाय पीकर चला गया . तब सासू जी कहती हैं कि हाय मोनिका तेरा बॉस तो बाद स्मार्ट है . इसका लौड़ा भी बड़ा मस्त होगा . किसी दिन ले आओ बहन चोद को मैं इसका लौड़ा देखना चाहती हूँ . मेरी चूत में आज ही से आग लग गयी है .

एक दिन मैं जब ऊपर से उतर रही थी तो सासू जी ने मुझे बुलाया और कहा बहू इनसे मिलो ये है मिस्टर जॉनसन मेरे कॉलेज के दोस्त . उस दिन मैं बिना ब्रा के टॉप पहने थी . सासू जी बोली बहू थोडा नास्ता वगैरह ले आओ . मैं पहले पानी लायी और झुक कर रखा फिर दो तीन बार नास्ता रखा, हर बार मैं झुक जाती थी और मेरी चूंचियां अंकल को दिख जाती थी . उसके बाद जब तक मैं बैठी रही तब तक वह मेरी चूंचियां ही देखा रहा . वह बोला यार सोफिया तेरी बहू बड़ी खूबसूरत है . मेरा तो दिल आ गया है इस पर . सासू जी जॉनसन के कान में बोली क्या तेरा लौड़ा खड़ा हो रहा है ? वह मुस्कराने लगा . (यह बात सासू जी ने मुझे बाद में बताई )

एक दिन जब मैंने फिर सासू जी कहा तो वह भड़क गयी बोली ये क्या बार बार सासू जी सासू जी लगा रखा है तूने ? मेरा नाम है सोफिया . तुम मुझे सोफिया कहा करो मैंने बोली ऐसे कैसे हो सकता है सासू जी ? वह बोली सोफिया न कहो तो बुर चोदी सोफिया कहो . मादर चोद सोफिया कहो भोषड़ी की सोफिया कहो . पर गाली दे कर कहो . मैं भी तुम्हे बहू नहीं कहूँगी . मैं तुम्हे माँ की लौड़ी मोनिका कहूँगी .

दूसरे दिन मेरी वही सहेली कैंडी आ गयी जिसके हसबैंड से मैं उस दिन चुदवा रही थी . हम दोनों बातें करने लगी . इतने में उसका फोन आ गया .

वह बोली :- हां निकोलस अंकल आ गये हो ? कोई दिक्कत तो नहीं हुई तुझे ?

वह बोला :- हां हा मैं तो तेरे घर में ही बैठा हूँ . कोई दिक्कत नहीं हुई मुझे . मैं तेरे बताये हुए रस्ते पर चला आया . यहाँ मुझे मालूम हुआ है की तेरा हसबैंड विदेश चला गया .

कैंडी बोली :- तो क्या हुआ ? मेरी भोसड़ी वाली माँ तो है न घर में ? तुम माँ चोदो मेरी, अंकल ?

वह बोला :- तुम कब तक आओगी कैंडी ?

कैंडी ने जबाब दिया :- देखो अंकल आज रात को मैं एक चुदाई पार्टी में जा रही हूँ . तुम मेरी माँ का चोदो भोसड़ा और मारो उसकी गांड ? मैं कल चुदाऊंगी तुमसे ? तेरा बहन चोद लौड़ा इतना बड़ा है की मैं बिना चुदाये रह ही नहीं सकती . कहो तो मैं तेरे लिए आज रात को २/३ चूत बुक करा दूं . चोदते रहना रात भर ?

वह बोला :- हा यार बुक करा दो . मैं भी आज कोई नयी बुर चोदना चाहता हूँ .

उसका फोन जैसे ही बंद हुआ वैसे ही मैं बोली :- अरी कैंडी :- आज अपने अंकल का लौड़ा मेरे लिए बुक कर दे न ? आज मैं चुदा लूंगी उससे और अपनी सास भी चुदवा लूंगी .

उसने निकोलस को फोन लगा दिया और कहा सुन मादर चोद अंकल आज रात को तुम मेरी सहेली मोनिका की बुर चोदना और उसकी माँ का भोसड़ा भी ? रात भर चोदना दोनों को खूब मज़ा लेना . मैं आकर पूछूंगी ?
 
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