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होता है जो वो हो जाने दो complete

Reich Pinto wrote: ↑ 27 Jun 2017 17:22
wow another shocking dramatic turn in story now. what happens next is curious suspense
 
आज क्या बात है मम्मी आज इतनी ढेर सारे पकवान बनाए जा रहे हैं कोई खास बात है क्या।हां खास बात तो है आज तेरी शादी की बात करने के लिए तेरे पापा ने विनीत के भैया सहित पूरे परिवार को निमंत्रण दिए हुए हैं। और वह लोग किसी भी वक्त घर पर आ सकतेहैं। ( इतना सुनते ही नीलू तो सन्न हो गई जिसे कि उसे किसी सांप ने सूंघ लिया हो। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह बस जड़वंत उसी स्थान पर खड़ी रह गई। उसे तो जैसे कोई हो सही ना हो उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके पापा ने उससे बिना पूछे यह फैसला ले लिया है।

नीलू उदास हो गई उसके चेहरे पर परेशानी के भाव साफ झलक रहे थे मुझे अपने पापा से यह उम्मीद नहीं थी। तभी उसे उदास देख कर उसकी मां उससे बोली।

क्या हुआ नीलु तुम खामोश क्यों हो गई?

क्या बात है?

(नीलू अपनी मां की बात सुन कर रोने लगी। अब वह अपनी मां से क्या कहती लेकिन फिर भी अपने दिल की बात सुबह अपनी मां को बताना चाहती थी क्योंकि उसे थोड़ी बहुत उम्मीद थी कि शायद कुछ बात बन जाए इसलिए वह अपनी मां से बोली।)

मम्मी मुझे पता नहीं था कि पापा इतनी जल्दबाजी कर देंगे। मैं उनसे कुछ इस बारे में बात करना चाहती थी और दिन बात करने के लिए पूरी तरह से तैयार भी थी की तभी उनकी तबीयत खराब हो गई और मैं उनसे बात नहीं कर सकी।

किस बारे में बात करना चाहती थी क्या कह रही हो मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है।

मम्मी मे एक लड़के से प्यार करती हूं जोंकि मेरे ही स्कूल में पढ़ता है वह बहुत अच्छा है मम्मी। आपको याद है मम्मी मैं किसी सब्जेक्ट में मदद के लिए ऊसे घर पर लेकर आई थी।

नहीं बेटा मुझे ऐसा कुछ भी याद नहीं है।( अपने दिमाग पर जोर देते हुए बोली।)

मीनू को पता था किसी समय वह विनीत को घर पर लेकर आए थे उस समय उसकी मम्मी ड्रिंक की हुई थी इसलिए शायद उन्हें याद नहीं है। फिर भी वह बोली।

मम्मी को बहुत अच्छा है बहुत प्यार करता है।

( कोई सामान में घर की लड़की होती तो अपनी मम्मी के सामने ऐसी बात करने में उसे शर्म का एहसास जरूर होता लेकिन नीलू मॉडर्न परिवार से थे उसके मम्मी पापा भीे मॉर्डन थे इसलिए वह अपनी मम्मी से इस तरह की बातें करने में सक्षम थी। नीलू की बात सुनकर उसकी मम्मी कढ़ाई को ढंकते हुए बोली।

नाम क्या है उसका?

राहुल नाम है मम्मी उसका।

उसके पापा क्या करते हैं कितना कमाते हैं समाज में क्या स्टेटस है? ( सवाल करते हुए नीलू की तरफ घूरते हुए बोली।)

मम्मी उसके पापा नहीं है।

पापा नहीं है मतलब तो घर का खर्चा कैसे चलता है करते क्या है वो लोग।

मम्मी वह लोग अमीर नहीं हूं वह लोग सामान्य स्थिति में रहते हैं उसकी मम्मी है जो ऑफिस में काम पर जाती है उसी से वो लोग का घर खर्च चलता है।( नीलू नीचे नजरें करती हुई बोली। इतना सुनते ही नीलू की मम्मी उसपर भड़क गई।)

तुम पागल हो गई हो नीलू तुम्हें कुछ खबर भी है कि तुम क्या कह रही हो तुम्हारी हर जरुरत को तुम्हारी हर जिद को सर आंखों पर रखकर तुम्हारे पापा पूरी करते आ रहे हैं। बड़े ही लाड़-प्यार से तुम्हें पालकर इतना बड़ा किए है। तुम उनके लिए लड़की नहीं उनके लिए उनका बेटा हूं जानती हो जब भी हकीकत उनके सामने खुलेगी तब उनके दिल पर क्या बीतेगी। एक बार तो दिल का दौरा पड़ चुका है। तुम्हारी यह बात सुनकर कहीं उन्हें फिर से दिल का दौरा ना पड़ जाए वह डॉक्टर ने क्या कहा है तुम अच्छी तरह से जानती हो नीलू।

( अपनी मां की बात सुनकर नीलू सिसक सिसक कर रोने लगी। उसको रोते हुए देख कर नीलू की मम्मी उसके नजदीक गई और उसे चुप कराने लगी। )

नीलु बेटा तुम कितनी समझदार हो फिर क्यों ऐसा कर रहीे हो तुम्हारे पापा कभी भी ऐसा नहीं चाहेंगे कि उनकी परी जैसी लड़की सामान्य जीवन जीने के लिए मजबूर हो जाए।

मम्मी मैं उसके बिना नहीं जि पाऊंगी। ( नीलू अपनी मां से लिपट कर रोते हुए बोली।)

नीतू बेटा समझने की कोशिश करो डॉक्टर ने क्या कहा था जरा सा भी ऐसी कोई बात जो हमें टेंशन देगी तो ऊन्हे फिर से दिल का दौरा पड़ सकता है क्या तुम यही चाहती हो कि तुम्हारे प्यारे पापा फिर से मुसीबत झेले। या ऊनकी जान पर कोई खतरा हो। नीलू बेटा अपने पापा के लिए उनकी खुशी के लिए तुम्हें यह फैसला मानना ही होगा।

मम्मी मैं नहीं रह पाऊंगी मुझसे यह नहीं हो पाएगा।

कैसे नहीं हो पाएगा बेटा अगर तुम खुद अपने पापा को मौत के कुएं में ढकेलना चाहती हो तो खुशी से धकेलो। (अपनी मां की यह बात सुनकर वह अपनी मां को गौर से देखने लगी )

बेटा समझने की कोशिश करो अभी अभी तुम्हारे पापा मौत से लड़कर आए हैं और तुम अगर ऐसी बात उनके सामने करोगी तो शायद फिर मुश्किल हो जाए। (अपनी मां की यह बात सुनकर वह अपनी मां की तरफ देखने लगी।)

समझने की कोशिश करो बेटा अभी स्थिति ठीक नहीं है अगर ऐसा है तो अभी अपने पापा की बात मान लो अभी तो सिर्फ शादी की बात कर रहे हैं सगाई करेंगे शादी तो दो-तीन साल बाद ही होनी है और वैसे भी अभी शादी की उम्र तो है नहीं।

( अपनी मां का यह सलाह नीलू को अच्छा लगा। इसलिए वह अपनी मां की बात मान गई।)

नीलू की माया अच्छी तरह से जानती थी की इस उम्र में सिर्फ आकर्षण ही होता है जिसमें लड़के लड़की अपनी जिंदगी बर्बाद कर देते हैं उन्हें जिंदगी की सच्चाई के बारे में कुछ भी पता नहीं होता। वह सिर्फ आकर्षण को ही प्यार समझ बैठते हैं जिंदगी में आने वाली मुसीबतों जिंदगी का कड़वा सच उनकी समझ से कोसों दूर होता है जब तक यह समझ में आती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इसलिए नीलू की मां भी यही चाहती थी कि नीलू ऐसी कोई भी गलती ना करें इसलिए उसे एक बहाने से बहला चुकी थी।

वैसे भी राहुल से मिलने के पहले नीलू को वीनीत से ही प्यार था वह वीनीत को ही अपना सब कुछ समझती थी। लेकिन राहुल से मिलने के बाद उससे शारीरिक सुख हासिल करने के बाद उसे राहुल से प्यार हो गया जो कि प्यार नहीं बल्कि एक वासना ही था। क्योंकि शरीर सुख देने के मामले में विनीत से राहुल कई गुना आगे था। सही मायने में नीलू का झुकाव राहुल की तरफ से इसलिए ज्यादा था कि वह उसके मोटे लंबे और तगड़े ल़ंड पर फिदा हो चुकी थी। उसके मोटे लंड से चुदने में उसे बेहद आनंद की प्राप्ति होती थी चौकी विनीत के साथ उसे इतनी ज्यादा आनंद की अनुभूति नहीं होती थी।

खेर नीलू अपनी मां की बात मानकर रसोई के काम में उसका हाथ बताने लगी क्योंकि उसकी मां ने में से एक उम्मीद जगा दी थी कि अभी नहीं तो बाद में इस बारे में बात करेंगे। पूरी तैयारियां हो चुकी थी किसी भी वक्त वीनीत के भैया भाभी और वीनीत घर पर आ सकता था।

दूसरी तरफ अलका बेहद परेशान थी। वीनीत ने जो मुसीबत खड़ी किया था उससे निकलने की ऊसे कोई राह नजर नहीं आ रही थी। ऊसका घर से निकलना मुश्किल हो गया था। वह विनीत और बदनामी के डर से ऑफिस जाना बंद कर दी थी े उसके दिल में दहशत बन चुकी थी। ऊसका कहीं भी आना जाना दुश्वार हो चुका था। अपनी मां के इस व्यवहार से राहुल आश्चर्य में पड़ गया था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार ऊसकी मां को हुआ क्या है। वह कई बार अपनी मां से इस बारे में पूछने की भी कोशिश किया लेकिन हर बात उसकी मां तबीयत का बहाना बनाकर बात को टाल दे रही थी। राहुल की तड़प अपनी मां का व्यवहार देखकर और ज्यादा बढ़ती जा रही थी कुछ दिनों से उसे चुदाई तो दूर-बुर देखना भी नसीब नहीं हुआ था। वह अपनी मां को जमकर चोदना चाहता था लेकिन उसे अपनी मां की तबीयत को देखते हुए, अपने आप पर संयम रखना पड़ रहा था।

नीलू के घर में विनीत और उसके भइया भाभी आ चुके थे सब लोग डिनर पर बैठे हुए थे। सभी लोग खाना खा रहे थे और नीलू और उसकी मम्मी उन सभी को खाना परोस रही थी। नीलू का मन उदास था वह बेमन से विनीत और उसके भइया भाभी को खाना परोस रही थी। नीलू के पापा और विनीत का बड़ा भाई दोनों एक दूसरे से अच्छी तरह से परिचित थे। खाना खाते हुए बातों का दौर शुरू हुआ। नीलू के पापा विनीत के बड़े भाई से बोले।

देखिए मैं ज्यादा घुमा फिरा कर बात नहीं करना चाहता वैसे भी हम दोनों के परिवार के बीच बहुत पहले से ही संबंध है। मैं चाहता हूं कि अब यह संबंध रिश्तेदारी में बदल जाए। मैं अपनी बेटी नीलू की शादी तुम्हारे छोटे भाई वीनीतं से करना चाहता हूं। ( यह सुनते ही विनीत के साथ-साथ उसके भइया भाभी भी बहुत खुश हुए खुश होते हुए उसके भइया बोले।)

देखिए इसमें हमें कोई एतराज नहीं है हम तो यही चाहते थे कि वीनीत की शादी आपकी बेटी नीलू से ही हो। और वैसे भी नीली और वीनीत दोनों एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं वह दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते भी हैं। पिछले दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं। क्यों वीनीत तुम्हें कोई एतराज तो नहीं है।( विनीत का भाई निवाला मुंह में डालते हुए वीनीत से बोला।)

मुझे कोई एतराज नहीं है भैया।

( नीलू को यह सब अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए वह नाराज होकर वहां से चली गई। तो उसकी मम्मी बात को संभालते हुए बोली।)

शरमा गई है, अपनी शादी की बात सुन कर। नीलु के पापा ने यह भी बताया कि अभी इन दोनों की सगाई कर देंगे दो तीन साल बाद शादी क्यों की अभी यह लोग शादी करने की उम्र से छोटे ही हैं।

( नीलू के पापा ने अपने बिजनेस के आगे का प्लान विनीत के बड़े भाई को बता दिया जिससे साफ जाहिर था की शादी के बाद नीलू के पापा का सारा बिजनेस नीलू के नाम पर और उसके होने वाले पति के नाम पर हो जाएगा इस बात को लेकर विनीत और भी नहीं उसका बड़ा भाई काफी खुश नजर आ रहे थे। सब कुछ ठीक से निपट जाने के बाद विनीत और उसके भइया भाभी नीलु के घर से वापस अपने घर पर चले गए रास्ते में वीनीत का बड़ा भाई विनीत को बोला कि यह रिश्ता तुम्हारे लिए और हम सबके लिए बहुत ही लाभदायक है क्योंकि आने वाले दिनों में नीलू के पापा के बिजनेस की वजह से हम लोगों का भी बिजनेस काफी बढ़ जाएगा इसलिए यह रिश्ता बेहद जरूरी है।

विनीत के बड़े भाई ने विनीत से कहा कि अगर नीलू के पापा नीलू की शादी अभी करना चाहते तो मैं अभी तुम्हारी शादी उसके साथ कर देता लेकिन। क्योंकि वह सगाई करके निश्चित हो जाना चाहते हैं। जिस तरह से उनकी तबीयत अभी ठीक नहीं रहती इसलिए उन्हें अपनी तबीयत पर ज्यादा भरोसा नहीं है।

विनीत को बिजनेस से कोई लेना देना नहीं था उसे तो नीलु से प्यार था और वह उससे शादी करना चाहता था यह ख्याल उसके मन में बहुत पहले से ही था। नीलू से शादी की बात को लेकर वह बहुत खुश था। एक तरफ खुशी थी तो दूसरी तरफ डर और दहशत का माहौल था। अलका का हर एक पल बड़ी दहशत के साथ गुजर रहा था उसे बार बार इस बात का डर लगा रहता था कि कही उसके बेटे को सारी बात का पता न चल जाए। और कहीं वीनीत ने अलका की सारी बातों को इन दोनों के बीच क्या क्या हुआ सब कुछ कहीं अपने स्कूल में बता दिया तब क्या होगा। राहुल का क्या होगा? , वह खुद कैसे घर से बाहर निकलेगी , कैसेदुनिया को मुंह दिखाएगी। यही सब सोच सोच कर उसके मन में विनीत का डर पूरी तरह से छा चुका था। राहुल को चुदाई की तड़प लगती तो वह तबीयत का बहाना बनाकर उसे परे कर देती। अपनी मां का यह व्यवहार उसे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था। नतीजन उसे रात को अपने हाथ का इस्तेमाल करके ही शांत होना पड़ता था।

दूसरे दिन भी अलका ऑफिस नहीं गई। उसने राहुल से बता रखी थी कि कुछ दिनों के ऑफिस से छुट्टी ले रखी है। उसने तुम अपने बच्चों को यह बात बता दी थी लेकिन बात कुछ और ही थी जो कि वह अपने बच्चों से छुपा रही थी।

स्कूल में विनीत बहुत खूश था। उसने राहुल को बताया कि उसके घर वाले और नीलू के घर वालों ने मिलकर दोनों के रिश्ते को तय कर दिया है और बहुत ही जल्द नीलू उसकी पत्नी बन कर उसके घर आएगी। यह सुनते ही राहुल का दर्द बढ़ गया उसे यह उम्मीद नहीं थी कि नीलू उसके बिना बताए ही विनीत से शादी करने के लिए तैयार हो जाएगी। जबकि वह तो खुद राहुल से शादी करने के सपने देख चुकी थी साथ जीने और साथ मरने की कसमें खा चुके थे दोनों। नीलू उसे इस तरह से धोखा देगी इसकी उम्मीद ऊसे कतई नहीं थी। विनीत के चेहरे पर खुशी देखकर राहुल को उससे जलन होने लगी। जी में तो आया कि उसका मुंह तोड़ दे लेकिन किसी तरह से अपने आपको संभाल ले गया। राहुल को देखते ही विनीत को भी जलन होती थी उसके पीछे का कारण अलका थी जिसकी खूबसूरती और भरे बदन का वह दीवाना हो चुका था। नीलू जैसी खूबसूरत लड़की के साथ के बावजूद भी वह उसकी मां की उम्र की अलका का वह दीवाना था। और दीवाना होता भी क्यों नहीं अलका का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि उसे देखते ही कोई भी उसका दीवाना हो जाए। गोरा गोरा भरा हुआ बदन बेहद खूबसूरत चेहरा रेशमी काले घने बाल जिसकी लटें

उसके गोरेगांल पर काली नागिन कि तरह बलखाती थी। उसकी बड़ी बड़ी गोल चूचियां ब्लाउज में कैद होने के बावजूद भी ऐसा लगता था कि अभी ब्लाउज फाड़ के बाहर आ जाएगी। वीनीत को इस उम्र में भी अलका की कसी हुई बुर ज्यादा प्रभावित कर गई थी। इसलिए तो वह एक बार उसे भोगने के बाद भी फिर से भोगने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार था।

दोनों की शादी की बात सुन कर राहुल का दिल टूट चुका था वह नीलू से मिलना चाहता था उससे बात करना चाहता था कि आखिर यही सब करना था तो उस से दिल क्यों लगाई। क्यों उसे झूठे सपने दिखाए। यही सब सवालों का जवाब ऊसे चाहिए था।

और मौका देखकर वह नीलू से मुलाकात कर लिया नीलू से मिलते हैं उस पर सवालों की झड़ी बरसाना सुरु कर दिया। नीलू ऊसे सब कुछ समझाते हुए बोली।

सुनो राहुल जैसा तुम समझ रहे हो वैसा बिलकुल भी नहीं है। हां मेरी ओर विनीत की शादी की बात चल रही है। पापा का यह फैसला था लेकिन तुम तो जानते ही हो पापा की तबीयत ठीक नहीं है। और ऐसे में ऐसी कोई भी बात सुनकर दिल को ठेस पहुंचाती हो इसी बात पर उन्हें फिर से दिल का दौरा पड़ सकता है। क्योंकि उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है इसलिए मेरे सामने उनकी बात मानने के सिवा और कोई चारा भी नहीं था।

और वैसे भी मम्मी को मैंने सब कुछ बता दी हुं और उन्होंने मुझे यकीन दिलाया है कि सही समय आने पर इस बारे में वह पापा से बात करेंगी। तुम चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा।

(इतना कहकर वह चली गई। लेकिन राहुल समझ चुका था कि अब ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है नीलू की शादी वीनीत से ही होगी। नीलू की मम्मी उसे बेवकूफ बना रही है। कोई भी मां बाप यह बिल्कुल नहीं चाहेगा कि उसकी बेटी जो कि यह तो आराम में पली बढ़ी हुई है, जिसकी शादी एेसे घर में हो जिसकी कोई हैसियत ही ना हो। राहुल बहुत ही जल्द सच से वाकीफ हो चुका था। आज उसका दिल टूट चुका था। वह भी नीलू के साथ साथ उसे पाने का सपना देख चुका था। जो कि सच में सपना बनके रह गया था।

 
विनीत का दिल अब कुछ ज्यादा ही मचलने लगा था। क्योंकि नीलू अब उसके हाथ में थी और जिस तरह से उसने अल़का को धमकाया था उसे यकीन हो चला था। कि अपनी इज्जत बचाने के लिए अलका उसे फिर से अपना सब कुछ सौंप देगी। वह तो आने वाले पल की कामना में ही रचा हुआ था। उसे फिर से अलका अपनी बाहों में कसमसाते हुए नजर आने लगी थी। अलंका ने अपना इरादा बदला कि नहीं यह जानने के लिए वह फिर से शाम को बाजार में उसका इंतजार कर रहा था।

लेकिन अलका विनीत के ही डर से ऑफिस नहीं गई थी तो इसलिए बाजार में मिलने का कोई सवाल ही नहीं उठता था वीनीत पागलों की तरह अलका की याद में आंखें बिछाए उसका इंतजार कर रहा था। लेकिन समय बीतता गया घड़ी की सुई अपनी रफ्तार में अपनी मध्य बिंदु पर घूमती रही। विनीत उसका इंतजार कर कर के थक चुका था उसे यकीन हो गया था कि शायद आज अलका ऑफिस गई ही नहीं। थक हारकर वह अपने घर लौट गया।

राहुल अपने घर में अपने कमरे में बैठकर नीलू के साथ बिताए पलों को याद कर रहा था उसके मन में नीलू को खोने का डर बन चुका था जो कि वास्तव में नीलू ऊससे दूर हो चुकी थी। उसे इस बात पर कभी भी यकीन नहीं हुआ कि नीलू जैसी खूबसूरत लड़की उसकी गर्लफ्रेंड थी। क्योंकि दोनों के बीच में जमीन आसमान का फर्क था कहा नीलू और कहां राहुल दोनों के बीच में हैसियत की दीवार खूब ऊंची थी। नीलू की चलती तो वह ईस दीवार को कब से गिरा चुकी होती। लेकिन इसमें उसकी भी कोई गलती नहीं थी हालात ही कुछ ऐसे पैदा हो गए थे कि ऊन हालातों से समाधान करना ही उचित था। नीलू की मां भी उसे बहका कर मना ली थी।

नीलू के प्यार में वासना ही केंद्र बिंदु था लेकिन राहुल उस से सच्चे दिल से मोहब्बत करने लगा था। राहुल उसे खोना नहीं चाहता था लेकिन कर भी क्या सकता था हालात के हाथों वह भी मजबूर था। राहुल ने इस सच्चाई को अपना लिया था की नीलू अब उसकी नहीं रही। सपनों की दुनिया में रेत के घर बनाने से कोई फायदा नहीं था। राहुल का मन कहीं लग नहीं रहा था। आज अलका के साथ-साथ राहुल ने भी खाना नहीं खाया उसकी मां जब उसे ना खाने का कारण पूछी तो वह भी तबीयत ठीक नहीं है कहकर अपने कमरे में चला गया। विनीत का बड़ा भाई घर पर होने से विनीत की भाभी से भी बात नहीं हो पा रही थी ।अलका तो वैसे ही परेशान थी वह तो दिन रात बस भगवान से बस यही प्रार्थना करती थी कि कैसे भी करके इस मुसीबत से वह छुटकारा पा जाए। रात भर वाह विनीत के द्वारा दी गई धमकी के बारे में सोच सोच कर करवटें बदलती रही, उसे अब कोई भी रास्ता सूझ नहीं रहा था किसी से कहने पर बदनामी होने का पूरा डर था। इस मुसीबत से निकलने का ऊसे कोई भी रास्ता ना हीं सूझ रहा था ना दिखाई दे रहा था और ना वह किसी की मदद ले सकती थी । उसके सामने सिवा समर्पण के कोई ओर चारा नहीं था। लेकिन यह बात उसे कुछ अजीब सी लगती थी कल के छोकरे के सामने वह इस तरह से झुक जाए। उसकी दी हुई धमकी के आधीन हो जाए,। उसका मन किसके आधीन होने के बिल्कुल खिलाफ था। क्योंकि उसका मन इस बात को मानने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी कि वह एक बीत्ते भर के लड़के के सामने उसकी अवैध मांग के अधीन हो कर उसे अपना एक बार फिर से सब कुछ समझ पढ़ कर दे।

लेकिन ऐसा भी नहीं था कि वह उसकी बात ना मानकर उसे करारा जवाब दे सके। उसके साथ बीच सड़क पर बहस करने का मतलब था , बात का खुलना। जो कि उसके और उसके बच्चों के लिए ठीक नहीं था। मतलब अलका के लिए इस मुसीबत से बचने के सारे दरवाजे बंद हो चुके थे एक दरवाजा खुला था जो कि सिर्फ वीनींत के पास जाता था वह भी उसकी इच्छा पूर्ति के लिए। इसलिए उसने फैसला कर ली की अपनी और अपने परिवार की इज्जत बचाने के लिए एक बार फिर से वह अपनी इज्जत विनीत को सौंपेंगी। मन में यह फैसला कर के वह सो गई।

सुबह उठते ही वह घर के काम में लग गई नाश्ता बना कर दोनों बच्चों को स्कूल भेज दि जाते जाते राहुल ने आज फिर से ऑफिस जाने के लिए पूछा तो कुछ देर सोचने के बाद ना बोल दी।

रात को जो उसने वीनीत को समर्पण करने का फैसला की थी सुबह होते ही उस फैसले पर अटल रहने कि उसकी हिम्मत नहीं हुई। क्योंकि वह मन ही मन में सोच रही थी कि विनीत को अपना तन सौंपने का मतलब था कि वह सीधे सीधे देंह के व्यापार में उतर रही थी। क्योंकि यह एक समाधान की तरह ही था अलका उसे कर्जा चुकाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी लेकिन वह था कि पैसा लेना ही नहीं चाहता था उसे तो अलका से कुछ और चाहिए था। विनीत को अलका की इज्जत चाहिए थे वह उसे भोगना चाहता था बदले में वह ऊसका सारा कर्जा माफ कर देता। इज्जत के बदले कर्जा माफ करने वाली बात अलका को कतई पसंद नहीं थी क्योंकि वह इतनी भी मजबूर नहीं थी कि अपना तन बेचकर कर्जे की रकम चुकाए। बात अगर कर्जे की ही होती तो अलका जैसे तैसे करके उसका कर्जा जरूर चुका देती लेकिन बात अब इज्जत की थी। अलका को अपने आप पर गुस्सा आ रहा था अगर अस्पताल में उससे गलती नहीं हुई होती तो विनीत की इतनी हिम्मत नहीं थी कि उसके सामने एसी बात कर सके। उसकी एक गलती आज उसके लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन चुकी थी। विनीत बार-बार उसे धमकी देते हुए उसे चोदने की फरमाइश कर रहा था और अगर वह ऐसा नहीं करती है तो कहां उसे समाज में बदनाम कर देगा बस इसी बात का डर अलका को खाए जा रहा था।

अलका रोज की तरह आज भी बहुत परेशान थी घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था इसलिए सारा दिन घर में ही बैठी रहती थी।

स्कूल में राहुल आज पहले की तरह खुश नजर नहीं आ रहा था विनीत से तो वह नफरत सा करने लगा था। लेकिन नीलू उससे पहले की तरह ही मिली क्योंकि वह अनजान थी कि उसकी मां उसे धोखे में रख रही थी। राहुल को नीलू की मुस्कान बेहद पसंद है उसके गुलाबी होठों की नरमी का एहसास उसे अपने होठों पर हमेशा महसूस होता था। राहुल भी उसी से पहले की ही तरह मिला क्योंकि वह नीलू को उदास नहीं देखना चाहता था चाहे जो भी हो वह नीलू से बेहद प्यार करने लगा था।

जैसे तैसे करके वह तड़प तड़प कर अपना दिन क्लास में काटा और छूटने के बाद वह अपने घर नहीं गया बल्कि इधर उधर घूमता रहा।

विनीत बाजार में फिरसे ऑफिस के छूटने के समय से पहले ही आकर अपना डेरा जमा लिया था वह आज अलका से मिलना ही चाहता था। क्योंकि उसकी तड़प बढ़ती ही जा रही थी अलका को पाने का जुनून हर पल बढ़ता ही जा रहा था। लेकिन फिर वही हुआ अलका जब ऑफिस आई ही नहीं थी तो बाजार से गुजरने का तो सवाल ही नहीं था वह फिर से पागलों की तरह बेवकूफ बना बैठा रहा। मैं समझ गया कि कल का ऑफिस आई ही नहीं है और मंद मंद मुस्कुराते हुए मन में ही सोचने लगा कि उसकी धमकी पूरी तरह से अलका पर असर कर गई है। क्योंकि वह उनका को धमकी तो देता था लेकिन उसे अंदर से डर भी लगता था कि नहीं उसका दांव उल्टा ना पड़ जाए । इसलिए बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि अलका का ऑफिस ना आना ऊसकी धमकी का असर बता रहा था। उसे अपनी मंजिल करीब होती नजर आ रही थी। लेकिन इस तरह से हल्का कर ऑफिस में नहाना और बाजार में ना मिलना विनीत की तड़प को और ज्यादा बढ़ा रहा था। इसलिए वह अभी इसी समय उसके घर पर जाने का फैसला कर लिया, और मोटरसाइकिल स्टार्ट करके उसके घर की तरफ चल पड़ा ।लेकिन उसके मन में इस बात की शंका भी देगी अगर घर पर राहुल मिला तो वह क्या कहेगा। शंका का समाधान भी उसने ढूंढ लिया अगर घर पर राहुल हुआ तो वह कह देगा कि वह नोट्स लेने के लिए आया है। और अगर राहुल नहीं हुआ तो वह अपने मन की बात करेगा।

वीनीत राहुल के घर पर थोड़ी ही दूरी पर अपनी बाइक खड़ी करके वहां से पैदल उसके घर की तरफ जाने लगा। दरवाजे के पास पहुंचा तो दरवाजा बंद था तो उसने दरवाजे को खटखटाते हुए दस्तक दिया। दस्तक देने के थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला दरवाजा खोलते हैं विनीत को अलका के दर्शन हो गए। अलका को देखते ही विनीत बहुत खुश हुआ लेकिन अलका के तो होश ही उड़ गए। विनीत अपने चेहरे पर का मुख्य स्थान लिए कमरे में प्रवेश कर दिया। लेकिन तभी उसकी नजर नीचे बैठ कर पढ़ाई कर रहे सोनू पर चली गई। अलका अपने घर में विनीत को देखकर घबरा गए और घबराते हुए उससे बोली।

यहां क्या करने आए हो वीनीत ?

बहुत दिनों से तुम्हारे दर्शन नहीं हुए इसलिए सोचा कि तुम्हारे घर पर ही चल कर क्यों ना मिल लुं।

( विनीत की आवाज सुनकर सोनू उसकी तरफ देखते हुए बोला।)

भैया आप यहां कैसे ? (सोनू खुश होता हुआ बोला)

तुम्हारी तबीयत के बारे में पूछने आया था अब तो तुम्हें आराम है ना।

हां भैया अब मुझे बिल्कुल आराम है।

सोनू तू अपने कमरे में जाकर पढ़।( अलका सोनू को कमरे में जाने के लिए बोली और सोनू चला भी गया)

अच्छा हुआ कि तुम खुद ही उसे अंदर जाने के लिए कह दी वरना मैं उसके सामने ही तुमसे सारी बातें करता तब जाकर तुम्हारी अकल ठिकाने आती। तुम मेरी धमकी को लगता है सीरियस नहीं ली इसलिए कोई जवाब नहीं दे रही हो।

देखो विनीत जो तुम करना चाह रहे हो वह ठीक नहीं है।

ऐसा हरगिज़ नहीं हो सकता हूं मैं तुम्हारी धमकी के आगे झुकने वाली नहीं हूं। ( अलका थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए विनीत से बोली।)

अच्छा तो क्या करोगी ( इतना कहने के साथ वह अलका की तरफ बढ़ने लगा।), विनीत को अपनी तरफ बढ़ता देखकर अलका घबराने लगी' । और घबराते हुए बोली।)

देखो अगर तुम नहीं माने तो मैं पुलिस के पास जाऊंगी।( पुलिस का नाम सुनकर एक बार तो वीनीत भी घबरा गया, लेकिन अपनी घबराहट को अलका के सामने महसूस होने नहीं दिया। और बहुत ही जल्द अपने आप को संभालते हुए वह बोला।)

अच्छा पुलिस के पास जाओगे लेकिन पुलिस से कहोगी क्या। यह कहोगी कि मैंने तो हस्पताल में तुम्हारी मर्जी से तुम्हें चाेदा हूं। या यह कहोगे कि तुम मुझसे ढेर सारा रूपया ऊधार ली हो और उसे ना चुका पाने के एवज में

तुमने मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाए यही कहोगी या यह कहो गि कि मैंने तुम्हारे साथ जबरदस्ती किया हुं।

देखो मेरी जान चाहे तुम कुछ भी कहो अगर तुम पुलिस के पास जाओगी तो पुलिस पूछताछ करने के लिए तुम्हारे घर पर जरूर आएगी और घर पुलिस तुम्हारे घर पर आए तो तुम्हारी आस पड़ोस के लोग इकट्ठा जरूर होंगे। और धीरे-धीरे चाहे तुम कितना भी छुपाने की कोशिश कर लो यह बात सामने जरुर आएगी की तुम्हारे शारीरिक संबंध मेरे साथ है और मैं तुम्हारे साथ क्या करना चाहता हूं। तो तुम ही ठंडे दिमाग से सोचो जब पूरे मोहल्ले में यह बात सामने आएगी कि उनकी पड़ोस में रहने वाली अलका अपने बेटे के उम्र की और तों और अपने ही बेटे के दोस्त के साथ शारीरिक संबंध बनाती है। तो सोचो आस पड़ोस में पूरे समाज में तुम्हारी क्या इज्जत रह जाएगी कैसे तुम उनके सवालों का सामना कर पाओगी और कैसे घर से बाहर निकल पाओगे जबकि अभी सिर्फ मेरी धमकी की वजह से ही तुम ऑफिस जाना छोड़ दि हो।

विनीत की यह सब बातें सुनकर अलका फूट कर रोने लगी। विनीत की एैसी बातें उसके मन में विनीत का डर पूरी तरह से बैठा दी थी। अलका के सामने अब कोई भी विकल्प नहीं बचा था सिवाय समर्पण के। इसलिए वह रोए जा रही थी क्योंकि अब कोई भी रास्ता नहीं बचा था। अलका को रोता हुआ देखकर विनीत ऊसका हाथ पकड़ते हुए बोला।

देखो मेरी रानी इसलिए ही मैं कह रहा था की बस एक बार एक बार फिर से मुझे अपनी बुर का स्वाद चखा दो।

एक बार मुझे चोदने दो। बस एक बार उसके बाद फिर मैं कौन और तुम कोन मै तुमसे दोबारा कभी भी नहीं मिलूंगा। अच्छे से सोच लो मैं फिर तुम्हें जल्दी ही मिलूंगा।( इतना कहकर वह जाने लगा जाते-जाते वह रुका और बोला।) और हां खुद बदनाम होने का शौक हो तो अपनी मनमानी जरूर कर लेना। मैं जल्द ही तुमसे मिलूंगा और इस बार तुम्हारी हां होनी चाहिए।

इतना कहकर वीनीत चला गया। अलका वही बेठी रोती रही और अपनी किस्मत को कोसती रहीं। जिस समय विनीत अलका के घर से निकल रहा था उसी समय दूसरी सड़क से राहुल घर की तरफ चला आ रहा था उसने विनीत को अपने घर से बाहर निकलते हुए देखा ऊसे समझ में नहीं आया कि वह क्या करने घर पर आया है। वह उसे आवाज देता इससे पहले ही वह निकल गया। उसे कुछ अजीब सा लग रहा था क्योंकि विनीत आज तक उसके घर पर कभी नहीं आया था चाहे जितना भी जरूरी काम है उसने तो आज तक उसका घर भी नहीं देखा था। वह वीनीत के बारे में सोचते हुए घर में प्रवेश करते हुए बोला।

मम्मी यह राहुल यहां ( तभी उसकी नजर उसकी मम्मी पर पड़ी जोंकि वह रो रही थी, मुझे रोता हुआ देखकर) क्या हुआ मम्मी आप रो क्यों रहीे हैं?

 
राहुल घबराते हुए बोला।

मम्मी आप रो क्यों रही है क्या हुआ? अौर ये राहुल यहां क्यों आया था? क्या हुआ मम्मी आप कुछ बोलेंगी भी या ऐसे ही रोती रहेंगी मुझे आपका यह रोना बिल्कुल भी देखा नहीं जा रहा है। ( राहुल अपनी मां को रोता हुआ देखकर परेशान हुआ जा रहा था और उसकी मम्मी थी कि बस रोए जा रही थी। राहुल को देख कर उसकी आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। वह सिसक सिसक कर रोए जा रही थी। राहुल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार हुआ क्या है विनीत का यूं घर से बाहर निकलना और अलका का रोना उसे कुछ खटक रहा था। लेकिन जब तक अलका खुद नहीं बताएगी कि बात क्या है तब तक राहुल को पता कैसे चलेगा कि वह रो क्यों रही है उसके पीछे का कारण क्या है। अपनी मां को यूं रोता देखकर उसका मन बहुत परेशान हो रहा था। और अपनी मां की खामोशी को देख कर उसे गुस्सा भी आने लगा था।

वह अपनी मां के कंधे पर हांथ रखते हुए बोला।

मम्मी जब तक तुम मुझे बताओगी नहीं की क्या हुआ है तब तक मुझे पता कैसे चलेगा और यह रोना( अपने हाथ से आंसू पोंछते हुए) बंद करो और मुझे बताओ कि क्या हुआ है और यह वीनीत यहां क्या करने आया था। इसने तो कभी भी मेरा घर नहीं देखा था तो यहां कैसे पहुंच गया।

विनीत का जिक्र आते ही अलका फिर से जोर जोर से रोने लगे उसका रोना बंद ही नहीं हो रहा था उसकी आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। वह अब तक छुपाते आ रही थी लेकिन बताना भी जरूरी था, कि उसके ऊपर क्या गुजर रही है काफी दिनों से वह अंदर ही अंदर कौन सा दुख झेल रही है। और उसके दुख के पीछे किसका हाथ है।

राहुल अपनी मां को चुप कराने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन अलका चुप होने का नाम ही नहीं ले रही थी वह भी पर क्या करती थी बहुत दिनों से वह भी अंदर ही अंदर घुट रही थी। वह कैसे अपने बेटे को बता दें कि उसका ही दोस्त उसके साथ गलत कर चुका है और फिर से संभोग सुख की मांग कर के उसे ब्लैकमेल किए जा रहा है। वह बताना भी चाहती थी लेकिन डरती थी सच्चाई जानने के बाद कहीं राहुल उससे नफरत न करने लगे वह क्या सोचेगा ' उसके दिल पर क्या गुजरेगी जब राहुल को पता चलेगा कि उसकी मम्मी उसके ही दोस्त के साथ चुदवा चुकी है। राहुल अपनी मां को चुप करा करा कर परेशान हो चुका था अलका के रोने की आवाज सुनकर सोनू भी नीचे आ गया। राहुल अपने छोटे भाई सोनू से पूछने लगा कि हुआ क्या है। वह अपने भाई को जवाब देते हुए बोला।

मुझे नहीं मालूम भैया सब कुछ तो ठीक था मैं यहीं नीचे बैठ कर पढ़ रहा था तभी वह भैया आए और उसके बाद में ऊपर कमरे में चला गया।

कौन भैया! कौन आया था इधर।

( अब राहुल का दिमाग झनझनाने लगा था क्योकी अभी अभी वीनीत ही घर से बाहर गया था। राहुल की बात सुनकर उसका जवाब देते हुए सोनू बोला।)

वही जो उस दिन मेरी तबीयत खराब होने पर साथ में ही अस्पताल में रुके थे।

अस्पताल में रुके थे, किसके साथ मुझे तो इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है।( राहुल आश्चर्य के साथ बोला, अब अलका के सामने राहुल को विनीत के बारे में बताने के सिवा और कोई रास्ता नहीं था इसलिए वह बोली।)

विनीत, विनीत ही उस दिन मेरे साथ अस्पताल में रुका था।( अलका नीचे की तरफ नजर झुका कर बोली। उसकी आंखों से आंसू टपक रहे थे। राहुल को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह लोग क्या कह रहे हैं इसलिए आश्चर्यचकित होता हुआ फिर से बोला।)

लेकिन विनीत ने ईस बारे में मुझसे कभी भी कोई भी बात नहीं किया।

क्योंकि वह नहीं जानता था कि मैं तुम्हारी मम्मी हुं।

(अलका साड़ी की कीनारी से अपने आंसू पोंछते हुए बोली। राहुल अभी भी आश्चर्य में था।)

क्या मतलब मम्मी?

( राहुल फिर से आश्चर्य जताते हुए बोला। अलका पूरी तरह से तैयार थी जवाब देने के लिए वह अपने आप को तैयार कर चुकी थी आज वह अपना राज बताने के लिए जिस वजह से वहां अंदर ही अंदर घुट घुट कर मर रही है। )

मैं तुम्हें सब कुछ बताती हुं राहुल ,( अलका सोनू की तरफ देखकर ) तुम अंदर जाकर पढ़ो बेटा।

( राहुल को उसकी मां की बातें और उसका व्यवहार कुछ अजीब सा लग रहा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर ऐसी कौन सी बात है कि वह सोने के कमरे में जाने के लिए बोल रही है फिर भी वह शांत खड़ा रहा वह जानना चाहता था कि आखिर बात क्या है। अलका कुछ देर तक शांत बैठी रही उसके बाद फिर से फफक कर रो पड़ी। राहुल अपनी मां को फिर से चुप कराते हुए ऊन्हे उनकी परेशानी का कारण बताने के लिए बोला। इस बार अलका बोली।)

बेटा जो मैं तुम्हें बताने जा रही हूं एक मां के लिए बेहद शर्मनाक है लेकिन मैं किसी और से बता भी नहीं सकती पता नहीं तुम मुझ पर विश्वास करोगे या नहीं हो सकता है तुम मुझ पर गुस्सा भी करो लेकिन मेरी भावनाओं को समझ कर फैसला करना कि जो भी हुआ था इसमें मेरा दोष था या मेरी मजबूरी या फिर हालात का दोष था।

( राहुल अपनी मां की बात सुनकर और भी ज्यादा परेशान होने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर क्या बात क्या है जो मम्मी मुझसे इस तरह से बातें कर रही है। और मम्मी के परेशानी के पीछे विनीत हो सकता है यह बात ऊसे बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रही थी। अलका उसे बताते हुए बोलीे )

बेटा विनीत से मेरी मुलाकात ऑफिस से आते समय बाजार में हुई थी। वह मेरी मदद किया था तुम्हारी उम्र का ही है तुम्हारा ही दोस्त है यह तो मुझे अब जाकर मालूम पड़ा लेकिन यह बात उसे पहले भी शायद नहीं मालूम थी मैं तुम्हारी मम्मी हूं। वह आए दीन मुझे बाजार में मिलता और कभी कभार मेरी मदद भी कर देता। शायद तुम्हें पता होगा एक बार मुझे पैसो की बहुत ज्यादा जरूरत थी सोनू की फीस भरनी थी। और मेरे पास फूटी कौड़ी नहीं थी मैं सब जगह हाथ फैलाकर मदद मांग कर हार गई लेकिन मुझे कहीं से भी मदद नहीं मिली जहां तक कि मुझे ऑफिस में भी कोई मदद नहीं मीली। ऑफिस से भी जब मुझे कोई मदद नहीं मिली तो मैं ऑफिस से घर पर आ रही थी तो रास्ते में ही मुझे विनीत मिल गया। मैं उससे कोई मदद मांगने नहीं चाहती थी लेकिन क्या करूं मैं मजबूर थी और मुझे लगता भी नहीं था कि वह मेरी मदद कर पाएगा लेकिन बात ही बात में मैंने ऊसे अपनी परेशानी बताइए तो वह झट से पैसे निकालकर मुझे थमा दिया। मैं क्या करती मजबूरी थी तो मैंने वह पैसे उधार के तौर पर ले ली। विनीत को मैं अपने बेटे जैसा ही मानने लगी थी क्योंकि वह अच्छा लड़का था वह तुम्हारी उम्र का था।

तभी सोनू की भी तबीयत खराब हो गई लेकिन तुम उस समय घर पर नहीं थे, मैं सोनू को लेकर जल्दी जल्दी अस्पताल की तरफ चली जा रही थी कि तभी विनीत मिल गया और वह अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर हमें अस्पताल पहुंचाया और अस्पताल में सारी मदद किया यहां तक कि अस्पताल का बिल भी उसी ने चुकाया । ( राहुल अपनी मां की सारी बातों को ध्यान से सुने जा रहा था अब तक की बातों को सुनकर उसे कोई ऐसी बात नहीं लगी जो कुछ गलत हुआ हो। ) मेरे पास तो अस्पताल का बिल चुकाने के लिए भी पैसे नहीं थे । मैं मन ही मन में सोच रही थी कि इसका यह एहसान मैं कभी भी चुका नहीं सकती लेकिन इतना तय कर ली थी कि तनख्वाह मिलने पर उसका धीरे-धीरे सारा कर्जा चुका दूंगी। ( इतना कहकर अलका शांत हो गई, राहुल ठीक उसके सामने कुर्सी पर एकदम करीब बैठा हुआ था। वह अपनी मां को खामोश देखकर बोला।)

फीर क्या हुआ मम्मी?

( इस बार अलका बात को आगे बढ़ाते हुए जज्बाती हो गई है और अपनी बेटे का हाथ पकड़कर नजरें झुका कर वह बोली।)

 
बेटा डॉक्टर ने कहा था कि रात भर हम को रुकना होगा हम रुक तो गए लेकिन सोने के लिए एक ही बेड खाली था । और उस बेड पर मैं और विनीत दोनों सो गए, मैं तो अभी नहीं को अच्छा लड़का समझती थी बेटा लेकिन मुझे क्या मालूम था वह एक नंबर का हरामखोर निकलेगा।( अपनी मां की यह बात सुनकर राहुल को अंदेशा हो रहा था कि क्या हुआ होगा लेकिन फिर भी अपने मन को बार बार समझा रहा था कि जैसा वह सोच रहा है वैसा ना हो। इसलिए वह बीच नहीं बोला।)

क्यों मम्मी फिर ऐसा क्या हो गया जो आप ऐसा बोल रही है?

क्या कहूं बेटा मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई मैं किसी को भी मुंह दिखाने के लायक नहीं रही।( इतना कहने के साथ ही वह फिर से फफक-फफक कर रोने लगी। एक बार फिर से उसकी आंखों से आंसू बहने लगे राहुल अपनी मां को चुप करा था वह बोला )

बोलो तो सही मम्मी फिर क्या हुआ?

वही हुआ बेटा जो नहीं होना चाहिए था मेरे माथे पर कलंक लग गया मेरा दामन गंदा कर दिया उसने।

उसने मौके का फायदा उठाकर, मेरी मजबूरी का फायदा उठा कर मेरे साथ शारीरिक संबंध बना लिया।

( इतना कहने के साथ है वह राहुल का हाथ जोर से पकड़ कर फिर से वह रोने लगी। इतना सुनते ही राहुल एकदम से आग बबूला हो गया वह जोर से चिल्लाया।)

मम्मीईई.......

यह क्या कह रही हो मम्मी ऐसा नहीं हो सकता कह दो कि यह झूठ है। ( राहुल के मन में यह बात लग गई कि उसका ही दोस्त उसकी मां के साथ ऐसा गलत संबंध स्थापित किया। अलका रोए जा रही थी चुप होने का नाम ही नही ले रही थी। और राहुल की आंखों से अंगारे छूट रहे थे, उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका था। अगर इस समय विनीत उसके सामने होता तो वह ना जाने क्या कर देता। अलका के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे वह रोते सिसकते हुए अपनी बेगुनाही बताई जा रही थी।)

बेटा इसमें मेरी कोई गलती नहीं है मैं हालात के आगे मजबूर हो गई थी ।मुझे ....मुझे यह नहीं मालूम था कि विनीत ऐसी नीच हरकत करेगा।

( राहुल को गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन अपनी मां के आंसुओं को देखकर वह अपने आप को संभाल ले गया। वह जानता था कि कुछ दिनों से उसकी मां अंदर ही अंदर ईतना बड़ा दुख अकेले ही झेल रही थी। अगर इस समय राहुल उसे कुछ भी कहता है तो उसकी मां अंदर ही अंदर से टूट सकती थी इसलिए वह अपनी मां को दोष नहीं दिया। बल्कि वह भी अपनी मां के हाथ को पकड़े हुए उसे शांत करा रहा था। लेकिन बहुत दिनों से वह अपने अंदर बहुत कुछ छुपा कर रखी थी।

जो कि आज वह अपने बेटे के सामने रो रो कर अपना मन हल्का कर लेना चाहती थी। इसलिए वह रोए जा रही थी ओर साथ मे बोले भी जा रही थी।

बेटा वह रात मेरे लिए किसी तूफ़ान से कम नहीं था जिसने मेरी जिंदगी को झकझोर कर रख दिया था रात बीतने के बाद मुझे अपनी गलती का एहसास पूरी तरह से हो गया था। मुझे इस बात का खेद हमेशा रहेगा कि मैं उस रात को उसे रोक सकती थी लेकिन ना जाने किन हालातों ने मेरे हाथ बांध रखे थे कि मैं उसे बिल्कुल भी ना नहीं कह सकी। रात गुजर जाने के बाद सुबह होते ही मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया लेकिन अब पछताने किसी का मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था। मैं अपनी गलती की वजह से पल पल रोज मर रही हुं। तुम खुद ही कुछ दिनों से मेरी हालत पर गौर कर रहे होगे मुझे कहीं भी सुकून नहीं मिल रहा , मैं मर जाना चाहती हूं बेटा मैं मर जाना चाहती हूं मैं जीना नहीं चाहती मुझसे जो गलती हुई है उसकी यही सजा है ( इतना कहने के साथ ही वह फिर से जोर जोर से रोने लगी। राहुल तुरंत अपनी जगह से उठा और अपनी मां की ख़ुशी के बगल में अपनी कुर्सी लगाते वहां बैठकर अपनी मां को चुप कराने लगा।)

चुप हो जाओ मम्मी मैं समझ सकता हूं इसमें आपकी गलती नहीं है गलती तो उस हरामजादे की है जिसने मदद के बहाने आपके साथ इतना घटिया काम किया है उसकी सजा उसे जरूर मिलेगी। ( इतना कहने के साथ ही उसे जैसे कुछ याद आया हो एेसे बोला।) लेकिन मम्मी मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि इतना कुछ होने के बावजूद भी आज विनीत अपने घर में क्या करने आया था।

वह मेरे साथ फिर से वही करना चाहता है जो उसने अस्पताल में किया था ।(अलका अपनी नज़रें नीचे झुका कर बोली।)

यह क्या कह रही हो मम्मी ।(राहुल फिर से क्रोधित हो गया)

हां बेटा यह सच है विनीत कुछ दीनों से फिर से मेरे पीछे पड़ा है। वह हमेशा ऑफिस जाते जाते मुझे मिलता है और मुझे फिर से वही करने के लिए मजबूर कर रहा है।

और यह धमकी भी देता है कि अगर जैसा वह चाहता है वैसा मैंने नहीं की तो वह मुझे बदनाम कर देगा। मुझे बहुत डर लग रहा है बेटा (अपने बेटे का हाथ पकड़ते हुए बोली।) मैं उसकी धमकी के आगे डरती नहीं लेकिन वह मुझे पूरे समाज में बदनाम कर देने की धमकी देता है और तो और यदि कैसा है कि मैं तुम्हारे बेटे की स्कूल में सबको बता दूंगा कि उसके और मेरे बीच में कैसे संबंध है। इसी बात से मुझे और भी डर लग रहा है मैं बदनाम होना नहीं चाहती बेटा। मेरी जिंदगी उसने बर्बाद कर दिया है। ( राहुल के चेहरे पर क्रोध के भाव साफ नजर आ रहे थे वह बहुत कुछ कर देना चाहता था। लेकिन अपनी मां की वजह से अपने आप को संभाले हुए था क्योंकि अगर वह जरा सा भी हिम्मत हारता तो उसकी मां टूट कर बिखर सकती थी क्योंकि वह नहीं चाहता था क्योंकि वह अपनी मां से बेहद प्यार करता था। वह नहीं चाहता था कि उसकी मां ऐसे बिखर जाए इसलिए वह अपनी मां को दिलासा देते हुए बोला।)

ऐसा कुछ भी नहीं होगा मम्मी आप चिंता मत करिए। जेसा वह धमकी दे रहा ऐसा कुछ भी नहीं होगा अच्छा हुआ सब कुछ आप ने मुझे बता दिया अब आप चिंता मत करिए मैं सब कुछ संभाल लूंगा मम्मी । और उस से डरने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है। वह साला हरामजादा हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता। उसे तो मैं अच्छी तरह से सबक सिखाऊंगा।

( अपने बेटे की बात सुनकर अलका को थोड़ी राहत हुई लेकिन उसे इस बात की चिंता भी होने लगी कि राहुल कहीं गुस्से में आकर कुछ गलत ना कर दे जिससे जिंदगी भर पछताना पड़े इसलिए वह बोली।)

बेटा गुस्से में आकर ऐसा कुछ मत कर देना कि हम सभी को जिंदगी भर पछताना पड़े तेरे ओर सोनु के सिवा मेरा इस दुनिया में कौन सहारा है। हम दोनों उसे मिलकर समझाएंगे हो सकता है कि वह समझ जाए और दोबारा ऐसी गलती ना करें।

मम्मी आप बिल्कुल भी टेंशन मत लो मैं कहता हूं ना कि मैं उसे समझा दूंगा आखिरकार वह मेरा दोस्त है मेरी बात जरुर मानेगा जो भी हुआ उससे गलती से ही हो गया आगे से ऐसा नहीं होगा। मैं उसे कल समझाऊंगा आप बिल्कुल भी चिंता मत करो जैसे पहले रहती थी वैसे ही बिना टेंशन के रहो और हां जल्दी से खाना बना दो क्योंकि मुझे बहुत जोरों की भूख लगी है।

( अपने बेटे की बात सुनकर अलका के चेहरे पर बहुत दिनों बाद मुस्कुराहट आई इस मुस्कुराहट को देखकर राहुल भी मुस्कुरा दिया। अपने बेटे को सारी बातें बता कर अलका का मन शांत हो गया था वह अंदर ही अंदर अपने आप को हल्का महसूस कर रही थी। राहुल के द्वारा दिए गए दिलासे से उस का टेंशन कुछ हद तक दूर हो चुका था। वह कुर्सी से उठी और मुस्कुराते हुए बोली।)

बेटा मैं अभी जल्दी से खाना बना देती हूं।( इतना कहने के साथ ही वह किचन में चली गई।)

जैसे ही अलका रसोईघर में गई राहुल वही कुर्सी पर बैठ कर सोचने लगा वह अच्छी तरह से जानता था कि विनीत ऐसी बातों से मान जाए ऐसा नहीं था वह एक नंबर का वासना से भरा हुआ था। अपनी मां की बात को सुनकर वह अच्छी तरह से समझ गया था कि विनीत भी उसकी मां के खूबसूरत बदन का दीवाना हो चुका था उसके बदन की खुशबू को वह फिर से महसूस करना चाहता था। राहुल इस वास्तविकता से अच्छी तरह से वाकिफ था कि उसकी मां बेहद खूबसूरत थी और कोई भी जरा सा भी मौका मिलने पर वह मौके का फायदा जरूर उठाता और यही काम विनीत ने भी किया था। राहुल को यह सब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। राहुल अपनी मां को बेहद प्यार करता था वह बहुत खूबसूरत थी और यह प्यार सारी मर्यादाए लांघ चुका था दोनों के बीच दुनिया के लिए मां बेटे का रिश्ता था लेकिन घर की चारदीवारी के अंदर दोनों प्रेमी प्रेमिका और पति पत्नी की तरह ही रहते थे। और कोई भी प्रेमी है या पति यह नहीं चाहता कि उसकी शादी किसी और के साथ हमबिस्तर हो। पर यहां तो हल्का उसकी मां भी थी , तो वह कैसे बर्दाश्त कर लेता कि उसकी मां जिसके साथ वहां रोज शारीरिक संबंध बनाकर शारीरिक सुख का आनंद लेता था वह किसी और के साथ शारीरिक संबंध बना ली हो या कैसे बर्दाश्त कर पाता। जबकि वह जानता था कि जो भी हुआ वह एक बहकावे में ही हुआ है जिसका पछतावा उसकी मां को पल पल तड़पा रहा था। लेकिन जिस तरह का संबंध राहुल का अलका के साथ का राहुल बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था कि उसकी मां के साथ कोई और उस तरह का संबंध स्थापित करें। जोकि वीनीत ने कर चुका था। और यही बात राहुल को भी अंदर ही अंदर खाए जा रही थी वह क्रोध में एकदम आग बबूला हो चुका था लेकिन किसी तरह से अपने आप को संभाले हुए था। अलका पर सिर्फ पूरी तरह से राहुल का ही हक था जिसे वह किसी के साथ भी बांट नहीं सकता था। उसे बस इंतजार था सुबह का।

 
Sexi Rebel wrote: ↑ 06 Jul 2017 13:56
बंधु गजब का शानदार अपडेट है अगले अपडेट का इंतजार है
 
दूसरे दिन सुबह राहुल तैयार होकर स्कूल जाने के लिए निकला उसकी मां रसोई घर में काम कर रही थी और रसोई घर में जाते ही , राहुल की नजर आदत अनुसार फिरसे उसकी मां के भरावदार नितंबों पर पड़ी तो उन्हें देखते ही राहुल का मन ललच उठा। भले ही अलका चाहे कितनी भी परेशान क्यों न हो उसकी खूबसूरती में कोई कमी आने वाली नहीं थी। इसलिए तो इतना कुछ हो जाने के बावजूद भी राहुल का आकर्षण अपनी मां के प्रति बिल्कुल भी कम नहीं हुआ था इसका कारण एक ही था अलका का भराव दार बदन ,उसकी खूबसूरती ,उसका गठीला बदन ,उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और उभरी हुई बड़ी बड़ी गोल गांड। इसलिए तो राहुल की नज़रों में हमेशा इसकी मां की यही कामुकता से भरी छवि बनी रहती है। अलका की खासियत भी यही थी उसकी उपस्थिति में उसके समकक्ष चाहे कोई भी हो , उसके प्रति आकर्षित हुए बिना रह नहीं पाता।

राहुल के मन में बदला लेने की भावना तीव्र हो गई थी वह जल्द से जल्द स्कूल पहुंचना चाहता था क्योंकि उसे वीनीत से मिलना था और उसे सबक सिखाना था। लेकिन रसोईघर में आते ही उसकी नजर अलका पर पड़ गई जोकि कड़ाही में कुछ चला रही थी और कढ़ाई में चमची चलाने की वजह से उसके बदन में अजीब सी थिरकन हो रही थी खास करके उसकी कमर के नीचे का उभार कुछ ज्यादा ही थिरक रहा था जिस पर नजर पड़ते ही राहुल की टांगो के बीच लटक रहा हथियार सुन सुराने लगा। और यह नजारा देख कर उससे रहा नहीं गया वह पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में भर लिया तब तक उसके लंड का तनाव अपनी पूरी औकात पर आ गया था वह पेंट में तंबू बना लिया था। राहुल अपनी मां को पीछे से अपनी बाहों में भरते हुए तुरंत अपने पेंट मे बना तंबू अपनी मां के नितंबों के बीचो-बीच सटा दिया। जैसे ही अलका को अपने नितंबों के बीच के बीच कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ उसके मुंह से आउच निकल गया। और वह तुरंत अपनी गांड को आगे की तरफ बढ़ाकर अपने बेटे के ल** की पहुंच से दूर करने की कोशिश करने लगी लेकिन राहुल ने तुरंत अपने दोनों हाथ को नीचे जांगो पर ले जाकर उसे फिर से अपनी तरफ खींचते हुए पैंट के अंदर अपने खड़े लंड से सटा दिया। कड़क लंड की चुभन से अलका के बदन में सनसनी फैल गई। उसके मुख से कामुक स्वर में आवाज निकली।

क्या कर रहा है राहुल ऐसा मत कर मुझे ना जाने क्या होने लगता है। मेरे मन में इतनी सारी चिंताएं हैं कि कुछ दिनों से मैं तेरी तरफ और तेरी जरूरत को पूरा भी नहीं कर पा रहीे हुँ। ( अलका कसमसाते हुए बोली।)

क्या करूं मम्मी मुझे भी तुम्हें देखते ही ना जाने क्या होने लगता है जब भी तुम्हारी यह बड़ी-बड़ी (एक हाथ से गांड को मसलते हुए) गांड देखता हूं तो मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है। ( राहुल इतना कहने के साथ ही अपनी मां की बड़ी बड़ी चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा। अलका भी अपने बेटे की हरकत से थोड़ी ही देर में गर्म होने लगी। लेकिन उसके मन में अभी भी बहुत बड़ा बोझ था। उत्तेजित होने के बावजूद भी वह राहुल को अपने से अलग करते हुए बोली।

बेटा जो बोझ मेरे मन पर है जब तक कि हल्का नहीं हो जाता तब तक मेरा मन किसी भी चीज़ में नहीं लगेगा मुझे जल्दी से जल्दी ईस मुसीबत से निजात दिला उसके बाद जी भरके मैं तुझे प्यार दूंगी। ( राहुल अपनी मां की पीड़ा को समझ सकता था उसके मंन पर बहुत बड़ा बोझ था लेकिन क्या करता ऐसे नाजुक घड़ी में भी अपनी मां के प्रति उसका आकर्षण बिल्कुल भी कम नहीं हो रहा था। इसलिए तो वह वीनीत को सबक सिखाने के लिए घर से निकल ही रहा था कि अपनी मां की कामुकता से छलकती मादक गांड को देखते ही अपने होश खो बैठा और वह पीछे से जाकर अपनी मां को बाहों में भर लिया। अपनी मां की बात को सुनकर राहुल अपनी मां को दिलासा देते हुए बोला।

आप बिल्कुल भी चिंता मत करो मम्मी ने बहुत ही जल्दी तुम्हें इस मुसीबत से निजात दिला दूंगा क्योंकि आपका जो पल पल अंदर ही अंदर तड़पना मुझसे देखा नहीं जा रहा है।

राहुल को बहुत ही जल्द एहसास हो गया की स्कूल के लिए उसे लेट हो रहा है इसलिए वह तुरंत अपनी मां से इजाजत लेकर स्कूल के लिए निकल पड़ा। उसकी मां वहीं खड़े खड़े राहुल के बारे में सोचने लगी उसे यकीन तो नहीं हो रहा था कि राहुल उसे एक मुसीबत से छुटकारा दिला देगा लेकिन फिर भी भगवान को प्रार्थना करके वह मन ही मन राहुल की रक्षा के लिए प्रार्थना करने लगी और जल्द से जल्द वह अपना वचन पूरा कर सके इसके लिए भी भगवान से मिन्नतें मांग रही थी ।

राहुल स्कूल पहुंच गया था। दोनों क्लास में बैठे हुए थे राहुल विनीत को घृणा की नजर से देख रहा था लेकिन चालू स्कूल में वहां उसके साथ कुछ कर नहीं सकता था इसलिए वह रिशेष का इंतजार करने लगा।

रीशेष की घंटी बजते ही वह विनीत के पास आया और उसे जरूरी काम है यह कहकर उसे अकेले में ले गया। दोनों को एकांत मिलते ही राहुल विनीत से एकदम क्रोधित होते हुए बोला।

वीनीद हरामजादे( राहुल के मुंह से यह शब्द सुनते ही विनीत चौंक गया उसे कुछ समझ में नहीं आया कि राहुल यह क्या कह रहा है।) तूने जो किया है वह तुझे नहीं करना चाहिए था तू ने दोस्ती की भी लाज नहीं रखी

तो साला इतना बेशर्म हो गया कि अपने ही दोस्त की मां के साथ ....छी.....छी.....छी..... मुझे तो सोचकर ही तुझसे घिन्न आती है।

अच्छा तो तुझे सब पता चल गया चल अच्छा हुआ कि तुझे सब पता चल गया कहीं दूसरों के मुंह से सुनता तो शर्म से गड़ जाता। ( विनीत के मुंह से इतना सुनते ही राहुल में उसकी कॉलर पकड़ लिया और कॉलर पकड़ते ही दो घुसा उसके गाल पर जड़ दिया जिससे विनीत तुरंत नीचे जमीन पर गिर गया। राहुल नीचे गिरें विनीत को लातों से मारने लगा। दो-चार लात वह विनीत को मारा ही था कि विनीत ने उसकी टांग पकड़कर पीछे की तरफ ठेल दिया जिससे राहुल भी गिर गया। और विनीत मौका देखकर तुरंत खड़ा हो गया राहुल की फुर्ती से भरा हुआ था इसलिए वह भी नीचे गिरते ही तुरंत खड़ा हो गया। खड़ा होते ही राहुल गाली देते हुए विनीत की तरफ लपका।)

हरामजादे कुत्ते कामीने मैं तुझे आज नहीं छोडूंगा ( इतना कहने के साथ ही वह भी लेती तरफ लपका और उसी से भिड़ गया उसके पेट में वह मुक्के से मारने लगा विनीत भी कम नहीं था वह भी जवाब देते हुए राहुल पर भी वार करने लगा। राहुल ने उसे कस के पकड़ कर घुमा कर फेंका तो वह थोड़ी दूर जाकर गिरा। दोनों की भिड़ंत में विनीत को ही ज्यादा मार लग रही थी क्योंकि राहुल विनीत के मुकाबले अच्छी कद-काठी का था। विनीत इतना बेशर्म हो चुका था कि वह राहुल से माफी तक नहीं मांग रहा था बल्कि मौका मिलने पर उसे उसकी मां की गंदी बात बोलकर उकसा भी रहा था। जब वह नीचे गिरा तो राहुल को उकसाते हुए बोला।

यार तेरी मां बहुत मस्त माल है क्या खूब मजा देती है मेरा तो लंड झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

( विनीत के मुंह से अपनी मां के लिए इतनी गंदी बातें सुनकर राहुल फिर से उसकी तरफ दौड़ा लेकिन विनीत भी तुरंत खड़ा होकर फिर से उससे भिड़ गया और दोनों एक दूसरे को मुक्के से मारने लगे। राहुल उसे गाली देते हुए मार रहा था और विनीत मार खाते हुए उसकी मां की गंदी बात बोले जा रहा था।)

राहुल तेरी मां ने जेसे ही मेरा मोटा लंड अपने मुंह में लेकर चूस ना शुरू की मैं तो जैसे हवा में उड़ रहा हूं। साली बहुत मजा देती है।( राहुल उसकी गंदी बातें सुनकर उसे और ज्यादा क्रोध में मारने लगा था लेकिन विनीत पर जैसे कोई असर नहीं हो रहा था हालांकि उसे चोट लग रही थी लेकिन ऐसी बातें करके वहां राहुल को बिना मारे ही चोट पहुंचा रहा था।)

राहुल साले तेरी मां की बुर इस उम्र में भी इतनी टाइट है कि क्या बताऊं बुर में डालते ही इतना मजा आता है कि पूछो मत अंदर से तेरी मां की बुर इतनी गरम रहती है कि लगता है कि अभी तुरंत लंड का पानी निकल जाएगा।

विनीत के मुंह से अपनी मां के लिए चिंतन भी गंदी बातें सुनकर राहुल का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जा रहा था और वह बार-बार ऊसे पीटते हुए फेक दे रहा था लेकिन वीनीत पर इसका कोई असर नहीं हो रहा था वह ऐसी गंदी बातें बोल बोल कर राहुल को अंदर से आहत कर रहा था। और राहुल अपनी मां की गंदी बातें सुन-सुनकर अंदर से आहत भी हो रहा था। दोनों कि इस तरह के झगड़े को देखकर कुछ विद्यार्थी दोनों को छुड़ाने लगे और दोनों को बोल रहे थे कि तुम दोनों इतने अच्छे दोस्त होने के बावजूद भी इस तरह से क्यों झगड़ रहे हो क्या बात है। दूसरों की बात सुनकर वीनीत हंसते हुए बोला।

राहुल इन लोगों को बता दो कि अपने दोनों में किस बात को लेकर झगड़ा हो रहा है तू कहे तो बता दूं।

राहुल विनीत की यह बात सुनकर अंदर ही अंदर सुलग उठा लेकिन कुछ कहने की हालत में वह बिल्कुल नहीं था। दोनों को छुड़ाकर सभी लड़के अपनी अपनी क्लास की तरफ जाने लगे। राहुल विनीत को गुस्से की नज़र से देख रहा था और वीनीत भी उसे देख कर बेशर्मी मुस्कान मुस्कुरा रहा था। राहुल से मुस्कुराते हुए बोला।

देख रहा हूं तुझे ठीक है समझा रहा हूं वरना दूसरे तरीके भी हैं समझाने के। तुझे शायद इस बात का एहसास नहीं है कि अगर मैं तेरी मां के साथ मेरा क्या संबंध है इस बारे में सारी स्कूल को बता दूं तो तू कहीं मुंह दिखाने के काबिल ही नहीं रह जाएगा।

तू ऐसा नहीं कर सकता हरामजादे ( राहुल विनीत को घूरकते हुए बोला।)

मैं ऐसा बिल्कुल कर सकता हूं तेरी मां को पाने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं। ( विनीत के मुंह से इतना सुनते ही वह फिर से वीनीत को मारने के लिए लपका लेकिन विनीत उसे रोकते हुए बोला।)

ना नननननननन....... अब मुझ पर हाथ उठाने की गलती दोबारा मत करना वरना सारे स्टूडेंट अभी इधर ही है, सब को बुलाकर में बता दूंगा कि तेरी मां मुझसे चुदवाती है। तब तू ही सोच ले यह खबर जब पूरे स्कूल में आपकी तरफ से मिलेगी तब सारे स्टूडेंट तुझे कौन सी नजर से देखेंगे और तु ऊन लोगों से कैसे नजरें मिला पाएगा।

इसीलिए कहता हूं कि तू मान जा और अपनी मां को भी मना ले बस एक बार बस एक ही बार मुझे मैं जो चाहता हूं वह मुझे दे दे ऊसके बाद मैं तुम लोगों को कभी परेशान नहीं करूंगा।

( विनीत कि यह सब बातें सुनकर राहुल का खून खौल रहा था लेकिन कुछ सोचकर वह रुका रहा विनीत की बातों ने उसके मुंह पर ताला लगा दिया था उसे इस बात का डर था कि कहीं विनीत सब को बताना भी कि अस्पताल में उसकी मां और ऊसके बीच में क्या हुआ था। इसी डर की वजह से वह खामोश रहा अपनी बेज्जती सुनता रहा। विनीत अपने चेहरे पर बेशर्मी वाली मुस्कुराहट लाते हुए राहुल और उसकी मां के बारे में गंदी गंदी बातें बोले जा रहा था। जिसे सुनने के अलावा राहुल के पास और कोई चारा नहीं बचा था। )
 


राहुल अगर अपने आप को अपनी परिवार को बदनामी से बचाना है तो मेरी बात मान जा वरना तू तो अंजाम जानता ही है एक बार तेरे परिवार की तेरी ओर तेरी मां की इज्जत चली गई तो समाज में रहने लायक नहीं रह जाओगे। बस एक ही बार की तो बात है इसमें तेरा और तेरी मां का कुछ घिस जाने वाला नहीं है। ( विनीत राहुल से यह सब बोल ही रहा था कि रिशेष पूरी होने की घंटी बज गई और वहां जाते जाते राहुल के कान में बोला।)

एक बात कहूं राहुल बुरा मत मानना तेरी मां की बुर सच में बहुत टाइट है एकदम कसी हुई साली को चोदने में मजा ही आ जाता है। ( इतना कहने के साथ वह हंसते हुए चला गया और राहुल अपने आप को अपनी किस्मत को अपनी लाचारी पर कोसते हुए वहीं कुछ देर खड़ा रहा। इसके बाद वह भी अपने क्लास मे चला गया उसे इसका आभास हो चुका था कि विनीत इतनी आसानी से मानने वाला नहीं है। उसे ऐसा लगा था कि विनीत उसकी धमकी उसके मारपीट से मान जाएगा लेकिन हालात की सोचने के मुताबिक कुछ उल्टा ही हो गया था। स्कूल में जब तक छुट्टी नहीं हो रही तब तक वो भी नींद के बारे में ही सोचता रहा कि कैसे इस मुसीबत से छुटकारा पाया जाए लेकिन उसे भी कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। स्कूल में उसकी मुलाकात नीलू से भी हुई लेकिन आज ऊसे कुछ अच्छा नहीं लग रहा था,ईसलिए तबीयत का बहाना बनाकर घर आ गया।

अलका जो कि विनीत के डर से ऑफिस नहीं जा रही थी राहुल के कहने पर आज ऑफिस गई थी , उसे लग रहा था कि राहुल सब कुछ ठीक कर लेगा लेकिन बाजार में उसकी मुलाकात फिर से वीनीत से हो गई।

विनीत को देखते ही फिर से उसके हाथ पांव फूलने लगे उसके मन में फिर से एक बार घबराहट होने लगी वीनीत कामुक मुस्कान लिए उसकी ओर बढ़ा और अपने आसपास नगर दौड़ाकर अलका का हाथ पकड़ लिया अलका उसके हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी लेकिन वह बड़ी मजबूती से पकड़ा था' और उसे धमकाते हुए बोला।

क्यों तुम्हें क्या लगा था कि राहुल मुझे समझा लेगा वह सब कुछ ठीक कर देगा। वह मुझे क्या समझाएगा मैंने ही उसे अच्छी तरह से समझा दिया हुं।

छोड़ मेरा हाथ मुझे जाने दे।( अलका अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली।)

मै तुझे अभी भी कहता हूं कि ठीक तरह से मान जा । एक तो पहले ही तूने गलती कर दी अपने बेटे को बता कर वैसे तो सब कुछ हो जाता हूं और तेरे बेटे को भनक तक नहीं लगती लेकिन अब तो तेरे बेटे को भी पता चल गया है कि मैं तुझे चोद़ना चाहता हूं। और तू थक हार के मुझसे चुदवाएगी भी। लेकिन अब तो तेरे बेटे को पता भी चल जाएगा कि तु मुझसे चुदवा कर आ रही है तो सोच तेरे बारे में वह क्या सोचेगा?

अब देखना अब तो तुझे तेरा बेटा ही मेरे पास लेकर आएगा( इतना कहने के साथ ही वह अलका का हाथ छोड़ दिया और हाथ छूटते हतअलका वहां से भाग खड़ी हुई।

घर पर पहुंचते ही बार फिर से राहुल के सामने रोते हुए बोली।

तू तो कह रहा था कि बेटा कि मैं इस मुसीबत से छुटकारा दिला दूंगा वीनीत को समझा दूंगा लेकिन उसने आज फिर से बाजार में मुझे धमकी दिया है। मुझे बहुत डर लग रहा है बेटा वह तेरी बात भी नहीं माना।

( अपनी मां को रोते और डरा हुआ देखकर राहुल उसे समझाते हुए बोला।)

मां तुम चिंता मत करो मुझे लगा था कि वह समझाने से मान जाएगा लेकिन मुझे भी लगता है कि अब ऊंगली टेढ़ी ही करनी पड़ेगी। वह ऐसे नहीं मानेगा।

लेकिन बेटा मुझे डर लग रहा है कि गुस्से में आकर कहीं तू कुछ उल्टा-सीधा ना कर बैठे।

तुम चिंता मत करो मम्मी मैं तुमसे वादा करता हूं (अपनी मां के कंधे पर हाथ रखते हुए) उससे छुटकारा दिलाना मेरी जिम्मेदारी है। और हां उससे छुटकारा ही मेरे जन्मदिन की तुम्हारे लिए तोहफा होगा। ( अपने मां के मुड को ठीक करने हेतु वह हंसते हुए बोला।) लेकिन तुम को भी मुझे मेरे जन्मदिन पर तोहफा देना होगा।

कैसा तोहफा? ( अलका आश्चर्य के साथ बोली)

कैसा तोहफा पर इतनी जल्दी भूल गए क्या वहीं मुझे पूरी तरह से खुश करने का।

( अपने बेटे की यह बात सुनकर अलका रोते-रोते हंसने लगी और राहुल के सीने पर धीरे से मुक्का मारते हुए बोली।)

धत्त ऐसे मौके पर भी तुझे शरारत सुझती है।

अच्छा मम्मी अब जल्दी से गरमा गरम खाना बना दो मुझे भूख लगी है।

( खाना खाने के बाद राहुल अपने कमरे में बैठा विनीत से छुटकारा पाने के बारे में ही सोच रहा था। राहुल अच्छी तरह से समझ गया था कि उससे लड़ाई झगड़ा करके इस मुसीबत से निकला नहीं जा सकता था बल्कि ऐसा करने पर उसकी ओर उसके परिवार की बदनामी हो सकती थी। आर्थिक स्थिति से भले ही वह लोग मजबूत ना हो लेकिन अभी भी उनकी इज्जत समाज में बरकरार थी जोकी इन हालात में वह अपने परिवार की बदनामी होने नहीं देना चाहता था। बहुत ही सोच समझकर और संभालकर इन विकट परिस्थितियों में वह इस मुसीबत का हल ढूंढ रहा था। उसे इस बात का बखूबी ख्याल रखना था कि जिस परिस्थितियों ं से वह लोग गुजर रहे थे पूनम प्रस्तुतियों ं के बारे में किसी को कानों-कान भनक भी नहीं लगनी चाहिए थी। वरना उसके परिवार की बदनामी होना निश्चित था।

राहुल के सामने बड़ी ही कठिन परिस्थिति आ चुकी थी। उसकी मां अजीब सी मुसीबत में फंसी हुई थी। कैसे मैं उसे सिर्फ अपने बेटे का ही सहारा था उस पर ही वह पूरी तरह से विश्वास कर रही थी। राहुल भी अपनी मां के विश्वास को पूरा करने के लिए एक बार कोशिश कर चुका था लेकिन इस कोशिश से उसे उल्टा मुंह की खाना पड़ा था। इसलिए वह आगे क्या करना है कैसे करना है इस बारे में रात भर जागकर सोचता रहा। उसे विनीत के हाथों अपनी मां की इज्जत बचानीे थी, जो कि अब वह उसे अपनी प्रेमिका के रूप में ही देखा करता था। उसे अपनी मां के साथ साथ अपनी प्रेमिका की भी इज्जत बचाना था। विनीत उसकी मां को और उसे ब्लैकमेल कर रहा था। इसलिए सारी रात जागकर राहुल में भी यह फैसला कर लिया कि विनीत के ही हथियार से वह विनीत को मारेगा।

सुबह नहा धोकर नाश्ता करके स्कुल के लिए तैयार हो गया। अलका राहुल से ऑफिस जाने के लिए पूछा तो वह अपनी मां को हंसते हुए बोला।

मम्मी तुम ऑफिस बेफिक्र होकर जाओ मैं तुम्हें इस मुसीबत से छुटकारा दिला दूंगा।( और क्या कर जाती राहुल अपनी मां की गुलाबी होठ पर अपने होठों पर चूम लिया और स्कूल के लिए चला गया। लेकिन वह स्कूल नहीं गया था बल्कि इधर-उधर घूमता रहा ओर।करीब 20 मिनट बाद आज वह पहली बार खुद विनीत की भाभी को फोन लगाया।

सामने फोन रिसीव करके विनीत की भाभीी बोली।

अरे वाह आज क्या बात है आज तुम सामने से फोन कर रहे हो।

क्या करूं भाभी बहुत दिन हो गए थे इसलिए मेरा आज बहुत मन कर रहा था तुम्हारी याद भी मुझे बहुत आ रही थी इसलिए तुम्हें सामने से कॉल करना पड़ा और तुम तो अब फोन ही नहीं करती हो।

नहीं राहुल ऐसी बात नहीं है मैं भी तुम्हारे लंड के लिए तड़प रही हुं। विनीत के भैया घर पर ही थे इसलिए मैं तुम्हें फोन नहीं कर सकी। लेकिन तुमने अच्छे समय पर फोन किया है कल रात को ही विनीत भैया बिजनेस के सिलसिले में बाहर चले गए। एक काम करो तुम मेरे घर पर चले अाओ विनीत के आने तक हम दोनों मजे कर लेंगे।

आज दिन की छुट्टी के बाद घर नहीं आएगा वह शाम तक ही लौटेगा क्योंकि उसे कहीं बाहर घूमने जाना है।

वाह तब तो अच्छा है आज दिन भर हम दोनों एस करेंगे

लेकिन भाभी मुझे कुछ पैसों की जरूरत है।

कोई बात नहीं ले लेना तुम सिर्फ घर पर आओ तो सही। जल्दी आना।( इतना कहकर वीनीत की भाभी ने फोन काट दी और राहुल वहीं खड़ा मुस्कुराने ं लगा क्योंकि यह उसके प्लान का पहला चरण था।)

 
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