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होता है जो वो हो जाने दो complete

एक हाथ से वीनीत की भाभी उसके लंड को पेंट के ऊपर से ही मसल रही थी तो दूसरे हाथ से राहुल की हथेली से अपनी गरम बुर को मसलवा रही थी। दोनों कामातूर हो चुके थे विनीत की भाभी तो आहें भर-भर की अपनी बुर मसलवा भी रही थी और राहुल के लंड को मसल भी रही थी। दोनों को बहुत मजा आ रहा था राहुल तो मस्ती में अपनी आंखें बंद कर लेता था जब विनीत की भाभी उसके लंड को अपनी हथेली में कस के मसल देती थी' वीनीत की भाभी भी सिहर उठती थी जब राहुल कामातुर होकर उसकी रसीली बुर को अपनी हथेली मे दबोच लेता था। विनीत की भाभी की खुशी का कोई ठिकाना ना था तो मन में ही सोच रही थी कि जब पैंट के अंदर इतना ज्यादा तगड़ा मोटा लंबा लग रहा है तो अगर बाहर आएगा तो कितना भयानक दिखेगा इतना सोच कर ही वह मस्त हुए जा रहे थी। राहुल लंबी-लंबी सांसे भरने लगा था यह सब रोकने की स्थिति में वह बिल्कुल भी नहीं था। बल्कि वह तो अपनी किस्मत पर खुश हो रहा था कि बिना मांगे ही उसे सब कुछ मिल रहा था।

वीनीत की भाभी से अब ज्यादा सहा नहीं जा रहा था उसने अपनी उंगलियों को पेंट के बटन पर रखकर बटन को खोलने ही जा रही थी कि राहुल एकदम शर्मा कर अपना हाथ विनीत की भाभी के हाथ पर रख कर उसे रोकना चाहा लेकिन तभी विनीत की भाभी ने अपनी आंख तैर्राते हुए राहुल की तरफ देखी तो राहुल ने अपनी हथेली को उसकी हथेली पर से हटा लिया। अगले ही पल पेंट की बटन को खोलकर पेंट की जीप को खोलने लगी विनीत की भाभी की हरकत से राहुल के भजन में हलचल सी मच ने लगी उसका रोम रोम झनझना गया' अगले ही पल विनीत की भाभी ने पेंट की जीप खोल कर पेंट को घुटनों को तक सरका दी , अंडर वियर में उसका तना हुआ तंबू और ज्यादा भयानक लग रहा था यह नजारा देखकर विनीत की भाभी से अपने आप को रोका नहीं गया और उसने अंडरवियर के ऊपर से ही लंड के आगे वाले भाग पर अपनी जीभ फिराने लगी , राहुल के तो जेसे होश ही उड़ गए वो मन मे ही सोचने लगा ये क्या ... भाभी यह क्या कर रही है? उसे अजीब तो लग रहा था उसे रोकना भी चाह रहा था लेकिन रोके भी तो कैसे रोके मजा भी तो आ रहा था।

विनीत की भाभी जीभ से मजे ले लेकर अंडरवियर के ऊपर से हीं लंड के आगे वाले भाग का जो हिस्सा गीला हो चुका था उसी को ही चाटे जा रही थी। उत्तेजना के कारण राहुल की आंखें बंद हो चुकी थी और उसकी सांसे गहरि चल रही थी। वीनीत की भाभी ने राहुल की तरफ देखी तो उसकी आंखें बंद थी वह समझ गई कि राहुल को बहुत ज्यादा मजा आ रहा है इसलिए उसने राहुल की हथेली पर से अपनी हथेली को हटा ली और

एक झटके में अंडरवियर को पकड़ कर नीचे सरका दी।

अंडरवियर के नीचे से सरकते ही राहुल झट से अपनी आंखों को खोल दिया आंखो को फाड़े विनीत की भाभी की तरफ देखने लगा।

जैसे ही वीनीत की भाभी ने अंडर वियर को नीचे सरकाई थी सामने का नजारा देख कर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी उसने सपने में भी ऐसा लंड नहीं देखी थी बस पोर्न मूवी में ही इस तरह के लंड को देख देख कर अपनी बुर में उंगली करती रहती थी। इसकी लंबाई लगभग 9 इंच की रही होगी जो की हवा में ऊपर नीचे लहरा रहा था लंड के गुलाबी सुपाड़े पर नजर पड़ते ही उसकी बुर पनिया गई थी इतना मोटा सुपाड़ा शायद ही उसने देखी हो उसकी बुर अंदर ही अंदर फूलने पिचकने लगी थी। उसकी मोटाई नापने के लिए विनीत की भाभी ने लंड को अपनी हथेली मे लेकर कस ली... और लंड को अपने हथेली में कसते ही उसके मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी।

आहहहहहहह...राहुल.... कहां से लाया रे इतना मोटा लंड गजब का है रे तेरा.... ( इतना कहने के साथ ही विनीत की भाभी ने लंड की तरफ अपना मुँह बढ़ाई और देखते ही देखते लंड के सुपाड़े को अपने मुंह में भर ली ........ राहुल एकदम से गनगना गया जेसे की उसके शरीर में करंट दौड़ गया हो। राहुल का गला सूखने लगा उसका बदन अकड़ने लगा वह ऐसे तड़प उठा कि जैसे जल बिन मछली तड़पती हो। विनीत की भाभी तो पहले से ही अनुभवी थी उसने तुरंत लंड के सुपाड़े पर अपनी जीभ फिराने लगी जिससे मारे उत्तेजना के राहुल छटपटाने लगा और अपने पैर के पंजो पर खड़ा होके ऊपर उचकने लगा।

लंड के सुपाड़े को अपने मुंह में लेकर विनीत की भाभी को लंड की ताकत का अंदाजा लग गया था। किसी का भी लंड मुंह में लेकर चूसने में उसे इतना मुंह खोलना नहीं पड़ा था जितना कि राहुल का लंड मुंह में लेने के लिए खोलना पड़ा था। वीऩत की भाभी राहुल के लंड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी थी। राहुल को तो जन्नत का मजा मिल रहा था उसके आनंद की कोई सीमा नहीं थी आंखों को बंद करके लंड चुसवाने का मजा ले रहा था। एक हाथ उसका अभी भी विनीत की भाभी की बुर पर ही था जिसे वह बार बार चुदवासा होकर दबोच ले रहा था, राहुल जब भी हथेली से वीनीत की भाभी की रसीली बुर को दबोचता तो वीनीत की भाभी भी कामातुर होकर राहुल के लंड को ओर भी अंदर मुंह मे भर लेती थी।

दोनों को भरपुर मजा मिल रहा था' अनुभवी वीनीत की भाभी ने अपनी जीभ का कमाल पुरी तरह से कुंवारे राहुल के लंड पर दीखा रही थी। एक तरह से राहुल के उपर दोनों तरफ से हमला हो रहा था एक तरफ से उसकी बुर की गर्माहट हथेली से होती हुई उसके बदन को गनगना दे रही थी और दूसरी तरफ वीनीत की भाभी राहुल के टनटनाए हुए लंड पर अपनी जीभ से कहर बरसा रही थी।

राहुल अपना सुध बुध खो चुका था बस आनंद के सागर में डूबता चला जा रहा था वनीत की भाभी आज पहेली बार एेसे दमदार लंड का स्वाद चख रही थी वह रह रह कर लंड को पूरा अपने गले में उतार ले रही थी जिससे उसकी सांसे भी रुंध जाती थी। राहुल गहरी गहरी सांसे ले रहा था। उसकी हथेली वीनीत की भाभी के बुर पर बराबर जमी हुई थी। बुर से रिस रहा नमकीन पानी की वजह से राहुल की हथेली पुरी तरह से गीली हो चुकी थी। एक तो लंड की जबरजस्त चुसाई ओर. दूसरे बुर की मदहोश कर देने वाली गर्मी राहुल को बेचैन कर रही थी उससे यह सब बर्दाश्त कर पाना बड़ा मुश्किल हुए जा रहा था इसलिए उसने अपनी बीच वाली उंगली को बुर की फांकों पर रगड़ते हुए उंगली से ही गुलाबी छेद को टटोलकर उसमे अपनी उंगली को प्रवेश करा दिया।

आहहहहहहह...( उसके मुंह से आनायस ही ये ऊदगार निकल गया।। वो भी क्या करता नया नया खिलाडी था इसलिए पीच की नमी और उस की गर्मी को भांप नहीं पाया तभी तो बुर में उंगली डालते ही उसकी सिसकारी छूट गई थी। बुर में उंगली के घुसते ही वीनीत की भाभी का भी यही हाल हुआ वह एकदम से चुदवासी हो गई और तुरंत अपनी गांड को ऊपर की तरफ उचका दी। वीनीत की भाभी की हालत को देख कर राहुल को लगा की शायद कुछ गलत कर दिया है वह अपनी उंगली को बुर से निकलने ही वाला था कि राहुल का इरादा भापकर कर विनीत की भाभी ने तुरंत फिर से अपनी हथेली को राहुल की हथेली पर रखकर दबा दी ओर राहुल की उंगली सड़सड़ाट बुर के अंदर समा गई।

ऊंगली के अंदर घुसते ही राहुल का पूरा वजूद हचमचा आ गया। बुर अंदर से इतनी तेज तप रही थी कि उसे ऐसा लगने लगा की कहीं उसकी उंगली गल ना जाए।

राहुल की उंगली आधे से भी ज्यादा बुर में समाई हुई थी और विनीत की भाभी अपनी हथेली का दबाव बढ़ा कर उंगली को ओर अंदर करने की कोशिश कर रही थी।

राहुल की उत्तेजना चरम शिखर तक पहुंच चुकी थी उसकी उंगली बुर में होने के बावजूद भी वह हथेली से बुर को दबोच ले रहा था जिससे वीनीत की भाभी सिहर उठती थी।

वीनीत की भाभी खुब आगे पीछे करके लंड की चुसाई कर रही थी। राहुल का लंड एकदम लोहे की छड़ की तरह हो गया था। लंड इतना ज्यादा टाइट था कि राहुल को हल्का-हल्का उसमें दर्द महसूस हो रहा था।

विनीत की भाभी राहुल की हथेली पकड़कर उसकी उंगली को खुद ही अंदर बाहर करते हुए गरम सिसकारी भरने लगी।

आहहहहहहहहह.....राहुल.....बड़ा मजा आ रहा है....उममममममममम.....एसे ही करते रह रे.... आहहहहहहह...( इतना कहते हुए वीनीत की भाभी ने अपने मुंह से लंड को बाहर निकालकर अपने हाथ से मुट्ठीयाए जा रहे थी। वीनीत की भाभी की तड़प बढ़ने लगी थी उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। )

ओहह... राहुल अब यह प्यास उंगली से नहीं बुझने वाली। अब तो उंगली नहीं मेरी बुर में तेरा ( लंड को हीलाते हुए) यह मोटा तगड़ा लंड डाल और चोद मुझे मेरी प्यास बुझा दे मेरी बुर की खुजली मिटा दे राहुल।

( विनीत की भाभी की यह बात सुनकर राहुल एकदम से सकपका गया और खुद को चोदने वाली बात से एकदम से जोश में आ गया। और हकलाते हुए बोला)

ममममम...मै कककक....कैसै...भाभी... !

( वीनीत की भाभी लंड को मुठ्ठीयातेे हुए बोली।)

अरे राहुल इसमें कौन सी कला दिखाना है बस जो काम तुम उंगली से कर रहे हो( अपनी बुर की तरफ इशारा करते हुए) बस यही काम तुम्हें इसके अंदर तुम्हारा लंड डालकर करना है।

( वीनीत की भाभी की बात सुनकर राहुल एकदम पसीने पसीने हो गया था घबराहट और उत्तेजना के कारण उसका बदन काँप रहा था। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि चुदाई करने का शुभ अवसर उसे इतने जल्दीे प्राप्त होगा। उसे यह तो मालूम था कि क्या करना है लेकिन यह नहीं पता था कि कैसे करना है इसीलिए वहीं पर खड़ा ही रहा वीनीत की भाभी उसकी मनोदशा को अच्छी तरह से जानती थी इसलिए वह खुद ही बोली।)

अच्छा तू इधर आ मैं तुझे बताती हूं कैसे करना है( इतना कहने के साथ ही वह बिस्तर पर बेठते हुए अपने ब्लाउज के बटन को खोलने लगी और अगले ही पल वह राहुल के सामने एकदम नंगी होकर बिस्तर पर बैठी थी राहुल की नजर तो अब उसकी बड़ी बड़ी चूचीयो पर ही टिकी हुई थी। अपनी चुचियों को घुरता हुआ राहुल को पाकर वह बोली।

क्या देख रहे हो राहुल( अपनी चुचियो को दोनों हाथों से थाम कर) मेरी चूची! इसका भी मजा दूंगी लेकिन बाद में

( इतना कहने के साथ ही वह खिसक कर बिस्तर के किनारे आ गई और अपने दोनों पैरों को बिस्तर के नीचे लटका कर अपनी दोनों जांघों को फैला दी.. जाँघों को फैलाते ही वीनीत की भाभी की गुलाबी बुर हल्के से खुल गई जिस पर राहुल की नजर पड़ते ही...

जिस पर नजर पड़ते हैं राहुल के लंड नें आलस को मरोड़ते हुए हल्की सी ठुनकी लिया जिसे देख कर वीनीत की भाभी बोली।

देखो राहुल तुम्हारा लंड कितना तड़प रहा है मेरी बुर में समाने के लिए...(अपनी बुर को हथेली से मसलते हुए)

आजा राहुल देर मत कर डाल दे अपना लंड..

राहुल के तो जेसे होश ही उड़े हुए थे वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए विनीत की भाभी की तरफ बढ़ा जब वह चहलकदमी कर रहा था तो उसका लंड बड़े ही भयानक तरीके से ऊपर नीचे ही रहा था जिसे देखकर विनीत की भाभी की बुर को फुदकने लगी थी। वह बहुत ही ज्यादा चुदवासी हो गई। राहुल के बदन पर अभी भी कपड़े थे इसलिए वीनीत की भाभी बोली।

रुको राहुल पहले अपने कपड़े तो उतार लो जब तक तुम भी मेरी तरह पूरे कपड़े उतारकर नंगे नहीं हो जाओगे तब तक चुदाई का पूरा मजा नहीं ले पाओगे।

( विनीत की भाभी की यह बात सुनकर राहुल शर्मा गया है क्योंकि उसने आज तक अपनी जानकारी में किसी के सामने अपनो कपड़े नहीं उतारे थे। और यहां तो एक औरत के सामने कपड़े उतारकर नंगा होना था इसलिए ज्यादा शर्म आ रही थी कोई और पल होता तो शायद राहुल अपने कपड़े नहीं उतारता लेकिन यह पल ही इतना ज्यादा कामुक था ओर दिलीप की भाभी की आंखों में उसकी बातों में एक अजीब सा आकर्षण और जादू सा था जिसमे राहुल का पूरा ध्यान खो सा गया था

इसीलिए वह वही करता था जो विनीत की भाभी कहती थी अगले ही पल वह भी अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगा हो गया।

अब कमरे में वासना का उन्मादक खेल शुरु होने वाला था विनीत की भाभी और राहुल दोनों ईस वक्त कमरे मे एकदम नग्नावस्था मे थे। राहुल का टनटनाया हुआ हिलता डुलता लंड और भी भयानक लग रहा था। विनीत की भाभी एक हाथ से अपनी खरबूजे जैसी चूची को मसल रही थी और दूसरे हाथ से अपनी बुर की गुलाबी पंखुड़ियों को उंगली के सहारे रगड़ रही थी। जिसे देख कर राहुल के लंड की नशे उभर आई थी

राहुल धीरे-धीरे इसकी जानू के बीच जाकर खड़ा हो गया और ललचाई आंखों से विनीत की भाभी के पुरे नंगे बदन का अवलोकन करने लगा। राहुल की नजर बार-बार उसकी बड़ी बड़ी चुचियाे पर ही जाकर टीक जा रही थी। राहुल का मन बार-बार चूचियों को देखकर मचल जा रहा था वह उन चूचियों को हाथों में भरना चाहता था दबाना चाहता था हथेलियों में भर कर मसलना चाहता था। लेकिन वह जानता था कि अपने मन से वह कुछ नहीं कर सकता क्योंकि उसके में इतनी हिम्मत ही नहीं थी ' विनीत की भाभी की आज्ञा के बिना चुचियों को हाथ लगा पाना राहुल के लिए बड़ा ही मुश्किल था। वैसे तो नामुमकिन कुछ भी नहीं खाने की राहुल के लिए जरूर नामुमकिन सा था।

राहुल जिस नजारे को हमेशा सपने में देखता था या कल्पना करके अपनी हस्तकला का उपयोग करता था।

उसकी यही कल्पना अब वास्तविकता का रूप धारण कर रहीे थी। उसके फड़फड़ा रहे कबूतर को उसका घोसला मिलने वाला था।

वीऩत की भाभी राहुल के लंड को देखकर मस्त हुए जा रही थी उत्तेजना में आकर उसने अपने निचले होंठ को दांतो तले दबा दी और एक हाथ से राहुल की लंड को पकड़कर आगे पीछे कर के हिलाने लगी। राहुल तो उत्तेजना के उस शिखर तक पहुंच चुका था जहां से वापस लौटना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था। उसकी गहरी सांसे उसके अंदर कितना उत्तेजना भरा हुआ है इस को बयां कर रही थी। वीनीत की भाभी भी सातवें आसमान में विहर कर रही थी क्योंकि वह जानती थी कि नया और कुंवारा लंड ज्यादा दमदार और जोशीला होता है। आज बरसो बाद फीर से उसकी रसीली बुर एक लंड का स्वाद चखने वाली थी।

राहुल क्या इससे पहले भी तुमने कभी किसी लड़की या औरत को चोदा है? ( वीनीत की भाभी राहुल के लंड को मुठ्ठीयाते हुए बोली। राहुल ने तो इससे पहले इतनी नजदीक से किसी औरत को नंगी देखा भी नहीं था तो चाेदने की बात तो बहुत दूर रही 'आज पहली बार ही तो उसने इतने नजदीक से किसी औरत की रसीली बुर को देखा था।)

नहीं भाभी बिल्कुल भी नहीं।

राहुल का जवाब सुनकर वीनीत की भाभी प्रसन्न होते हुए बोली.

तो राहुल आज मैं तुम्हें स्वर्ग के सुख का अहसास कराऊंगी , एक औरत और मर्द के बीच किस प्रकार का संबंध होता है ये आज तुम्हें मैं बताऊंगी। मर्द औरत को चोदने के लिए इतना बेताब इतना तडपता क्यों है आज तुम्हें खुद ही पता चल जाएगा।

( विनीत की भाभी की बातें सुनकर ही राहुल एकदम से चुदवासा हुए जा रहा था वीनीत की भाभी के मुंह से गंदी बातें उसे और भी ज्यादा सुहानी और सुरीली लग रही थी। राहुल एकदम मस्त हुए जा रहा था उसे तो बस इंतजार था कि कब वीनीत की भाभी उसे संभोग का एक नया अध्याय सिखाती है। राहुल मन में ऐसा सोचा ही रहा था कि तभी विनीत की भाभी बोली।

( राहुल के लंड को मुट्ठी में भर कर आगे पीछे करते हुए।) देखो राहुल ज्यादा कुछ करना नहीं है बस अपने इस मोटे लंबे लंड को मेरे इस( बुर की तरफ उंगली से इशारा करके) बुर की गुलाबी छेद में डालकर अपनी कमर को आगे पीछे कर के ही लाना है बस जैसा मैं कहती हूं वैसा करते जाओ तुम्हें स्वर्ग के सुख की अनुभुति होगी ।। बहोत मजा आएगा तुम्हे इतना ज्यादा मजा की तुम रोज एसा सुख पाने के लिए मेरे पास आओगे।। ( इतना कहने के साथ ही विनीत की भाभी राहुल का लंड अपनी तरफ खींचने लगी थी तभी वह बोली।)

रुको राहुल मुझे चोदने से पहले मुझे इतना ज्यादा गर्म कर दो कि बस मजा आ जाए। ( गर्म करने वाली बात राहुल समझ नहीं पाया और अनजान बन खड़ा ही रह गया तो विनीत की भाभी बोली।)

मैं तुझे बताती हूं कि कैसे गर्म करना है तु शायद नहीं जानता जब तक औरत गर्म ना हो तब तक चुदाई का मजा ना औरत को आता है ना मर्द को मिलता है। इसलिए औरत का गर्म होना बहुत जरूरी है।

राहुल जैसे मैंने तेरा लंड मुंह में लेकर चूसी उसे जीभ से चाटी वैसे ही तुम्हें भी अपनी जिभ से मेरी बुर को चाटना होगा और मुझे एकदम गर्म करके चुदवासी बनाना होगा। ( एक औरत के मुंह से इतनी गंदी बातें सुनकर राहुल की उत्तेजना उसकी नसों में दिखाई दे रही थी वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुका था। खास करके उसे बुर चाटने वाली बात और ज्यादा उत्तेजित कर गई उसे यह नहीं पता था कि औरत की बुर को भी चाटा जाता है। उसे यह नहीं समझ में आ रहा था कि आखिरकार जहां से औरत पेशाब करती है उस जगह को चाटकर किस प्रकार का आनंद मिलता होगा। लेकिन फिर भी विनीत की भाभी की बात उसे मानना ही था। इसलिए वह मंत्मुग्ध सा जैसा जैसा वीनीत की भाभी कहती गई वैसे ही वह करता गया। वीनीत की भाभी ने उसे बिस्तर के किनारे जांघो के बीच घुटनों के बल. उसे बैठने को कहीं

राहुल वैसे ही बैठ गया वीनीत की भाभी ने थोड़ा सा और अपनी गांड को सरका कर बिस्तर के किनारे पर रख दी और अपनी जाँघो को थोड़ा सा और फैला दी।

 
राहुल का चेहरा बुर के बिल्कुल करीब था इतनी करीब के बुर के अंदर से उठ रही मादक खुशबु सीधे उसके नथुनों से होकर के सीने में भर जा रही थी। राहुल बुर की मादक खुशबू से एकदम बदहवास हो गया मदहोशी उसकी आंखों में छाने लगी' विनीत की भाभी भी अगले पल की इंतजार में मदहोश हो रही थी उसे राहुल की जीभ का स्पर्श अपनी बुर पर होने का इंतजार था। इसलिए उसकी बुर उत्तेजना में फूल पिचक रही थी। राहुल विनीत की भाभी की तरफ देख रहा था और वीनीत की भाभी भी राहुल को ही देख रही थी दोनों की नजर आपस में टकराई तो राहुल शर्मिंदा हो गया। वीनीत की भाभी ने उसे इशारे से अपनी बूर चाटने के लिए बोली तो राहुल घबराते हुए बुर के बिल्कुल करीब अपना मुंह ले गया बुर से एक भाप सी उठ रही थी जो कि राहुल के नथुनों को गर्म कर दे रही थी। राहुल ने हल्के से अपना मुंह खोल कर अपनी जीभ को बाहर निकाला और एक नजर फिर से वीनीत की भाभी पर डाल दिया विनीत की भाभी भी राहुल पर ही नजर गड़ाए हुए थी इसलिए उसे इशारा करके बुर चाटने के लिए बोली।

विनीत की भाभी की बुर एकदम गीली हो चुकी थी उस पर राहुल ने हल्के से बुर की गुलाबी पंखुड़ियां पर जीभ का स्पर्श कराया। जैसे ही राहुल की जीभ का स्पर्श बुर की पंखुड़ियों पर हुआ वीनीत की भाभी एकदम मदहोश हो गई उसका रेाम राेम झन्ना गया' ऐसा लगने लगा कि जैसे वीनीत की भाभी के शरीर में करंट उतर आया हो। उसका पूरा बदन कांप सा गया' आज उसे ऐसा महसूस होने लगा कि पहली बार किसी के जीभ का स्पर्श उसकी बुर पर हुआ है। जबकि अनगिनत मर्दों से उसने अपनी बुर चटवाकर उसका लूत्फ उठाई थी। लेकिन आज राहुल की जीवनी उसे पहली बार का एहसास दिला दिया और वह चुदवासी हो करके एक हाथ राहुल के सर पर रखकर अपनी बुर पर दबाई और अपनी गदराई गांड को उपर की तरफ उचका दी .' जिससे राहुल की जीभ गप्प करके विनीत के भाभी की पनियाई बुर मे समा गई। जैसे ही राहुल की जीभ विनीत की भाभी की बुर में समाई वह तो एकदम पगला सी गई, और अपना दूसरा हाथ भी राहुल के सर पर रख कर जोर से अपनी बुर पर ही दबा दी राहुल की जीभ के साथ साथ उसकी नाक भी बुर की दरार में प्रवेश कर गई

दिनेश की बातें तो उत्तेजना में जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी छटपटाने लगी बिस्तर पर इधर उधर अपना सर पटकने लगी और सिसकारी लेते हुए बोली।

ससससहहहहहहहह....आहहहहहहहहहहहह..... राहुल ऊमममममममममम....चाट...चाट. मेरी बुर को....आहहहहहह...राहुल...ओहहहहहह...राहुल.... ऊमममममममम.....

( मस्ती की अनुभूति होते ही विनीत की भाभी की आंखें अपने आप मुंद गई और वह अपने दोनों हाथों से राहुल का सिर पकड़ कर अपनी बुर पर चाँपी हुई थी ओर उसे उकसा भी रही थी बूर चाटने के लिए।)

ओहहहहहह...राहुल.... अपनी जीभ घुमा मेरी बुर में चाट-चाट मेरी बुर को अपने जीभ से मेरे राजा अो मेरे राहुल....

( वीनीत की भाभी जैसे पहली बार अपने बुर चटवा रही हो इस तरह से पगला सी गई थी। राहुल की जीभ उसकी बुर में समाई हुई थी नमकीन पानी का बुलबुला सा छुट रहा था उसकी बुर से जोगी जी तुसी लगते ही उसके स्वाद का अनुभूति राहुल को हो रहा था। बुर के पानी का स्वाद चखते ही राहुल का मन खिन्न हो गया,

बुर का कसैला स्वाद उसे अच्छा नहीं लगा। वह बुर पर से अपना मुंह हटाना चाहता था लेकिन मजबूर था क्योंकि विनीत की भाभी उसका सिर अपनी बुर पर ही दबाई हुई थी तो ना चाहते हुए भी उसे अपनी जीभ बुर मे टीकाए रहना पड़ा। वीनीत की भाभी बार-बार उसे बुर के अंदर जीभ चलाने के लिए कह रही थी तो ना चाहते हुए भी राहुल हल्के हल्के से अपनी जीभ को बुर की दीवारों पर घुमाने लगा। अभी उस पगले को क्या मालूम था कि बुर चाटने में जो जन्नत का मजा मिलता है और कहीं नहीं। सारी दुनिया इसी को चाटने के लिए पागल है इसका कसेला स्वाद भी मधुर मध की तरह लगने लगता है बुर के नमकीन पानी का नशा वा नशा होता है कि इसके आगे दुनिया की सारी शराब की बोतलों का नशा फीका लगने लगता है। कुछ ही देर में राहुल को भी इसका अंदाजा होने लगा था। जो थोड़ी देर पहले बेमन से अपनी जीभ को इधर-उधर घुमा रहा था वह अब मजे ले लेकर बुर की दीवारों को चाट रहा था।

वह समझ गया कि वाकई में इस नमकीन और कसेले पानी का स्वाद तो मधुर मध की तरह है।

राहुल अब वीनीत की जाँघो को अपनी हथेली मे कसकर बुर चाटने का लुफ्त उठा रहा था। विनीत की भाभी तो जैसे सातवें आसमान में उड़ रही हो उसका बदन बिस्तर पर हीचकोले खा रहा था। वह मदहोश होकर अपना सिर दाएं बाएं पटक रही थी और अपने दोनों हाथों से राहुल के सिर को पकड़ कर जितना हो सकता था उतना अपनी बुर पर ही दबाए हुए थी।

दोनों मदहोश हो चुके थे, बुर चटवा कर विनीत की भाभी एकदम चुदवासी हो चुकी थी। उसकी चुदवाने की प्यास बढ़ चुकी थी एकदम से गरमा चुकी थी विनीत की भाभी। अब उसे राहुल के लंड की जरूरत थी।

और राहुल था की उसकी बुर में ही खोया हुआ था जन्नत का मजा उसे मिल रहा था वह खुद चटकारे लगा लगा कर बूर के पानी को जीभ से चाट कर मस्त हु ए जा रहा था। गजब का नजारा बना हुआ था कमरे में राहुल और विनीत की भाभी दोनों एकदम नग्नावस्था में वासना का खेल खेल रहे थे दोनों की सिसकारियों और गर्म अाहों से पूरा कमरा गूंज रहा था। दोनो एक दूसरे को संपूर्ण सुख देने और लेने में लगे हुए थे। वीनीत की भाभी अनुभवी थी इसलिए समझ गई थी कि उसकी बुर को इस समय किस चीज की जरूरत है इसलिए वह राहुल से बोली।

ओहहहहहह...राहुल... मेरी बुर तड़प रही है तेरे मोटे लंड को अंदर लेने के लिए.. बस अब देर मत कर अपने टनटनाए हुए लंड को मेरी बुर में डालकर इसकी प्यास बुझा दे ,'मेरी बुर को चोदकर पानी पानी कर दे मेरे राजा...

( वीनीत की भाभी तड़प रही थी सिसक रही थी राहुल के मोटे ताजे लंड को लेने के लिए लेकिन राहुल था की वह बुर चाटने में ही मगन था। जब भी नहीं की भाभी में एक दो बार और उसे बोली तो वह नहीं माना वह बुर चाटने में ही मस्त रहा. तो इस बार भी नहीं थी भाभी गुस्से में उसके बाल पकड़कर अपनी बुर से हटाते हुए बोली।।

राहुल... मेरे राजा मुझे अब तेरे लंड की जरूरत है। तू अपनी मोटे लंड को मेरी बुर में डालकर चोद मुझे...

( इस तरह से अपनी बुर पर से उसका बाल खींचकर हटा देने से राहुल वीनीत की भाभी पर थोड़ा गुस्सा जरूर हुआ लेकिन वह कुछ कर भी नहीं सकता था।

क्योंकि वह जानता था कि वीनीत की भाभी का यह एक एहसान ही था उसके ऊपर क्योंकि ऐसा जन्नत का मजा उसी ने उसको दे रहीे थी वरना कौन औरत उसे एसा सुख देती इसलिए वह अभिनीत की भाभी के एक इशारे पर उठ कर खड़ा हो गया उसका लंड छत की तरफ टनटनाए खड़ा था' जिसे देख कर विनीत की भाभी की बुर उसे अपने अंदर लेने के लिए फूलने पिचकने लगी। वीऩत की भाभी ने राहुल को इशारे से सबकुछ समझा दी कि अब क्या करना है। राहुल भी उसके इशारों का अनुकरण करते हुए अपना पोजीशन ले लिया था। राहुल उसकी जाँघों के बीच थोड़ा झुका हुआ था उत्तेजना के मारे उसका बदन कांप सा रहा था।

उसे यह नहीं मालूम था कि लंड को बुर में डालने से कैसा मजा मिलेगा लेकिन इतना जरुर जानता था कि ऐसा करने से पत बहुत ही ज्यादा सुख और आनंद की अनुभूति होती है। इसलिए वह वीनीत की भाभी पर झुकता चला गया। उसका लंड बुर से बस दो अंगुल की दूरी पर ही था जहां से बूर की गर्मी का एहसास उसके लंड के सुपाड़े पर बराबर हो रहा था। वीनीत की भाभी को अगले पल का बड़ी बेचैनी से ईंतजार था तभी राहुल थोड़ा सा और झुका तो उसका टनटनाया हुआ लंड बुर के मुहाने पर स्पर्श कीया।..

आहहहहहहहह....राहुल...( बुर के मुहाने पर राहुल के लंड का सुपाड़ा स्पर्श होते ही वीनीत की भाभी के मुंह से सिसकारी निकल गई.. सुपाड़े की गर्मी से अंदर ही अंदर बुर रिसने लगी। वीनीत की भाभी को एहसास हो गया की आज असली मर्द से पाला पड़ा है। राहुुल अभी अनाड़ी था वह लंड के सुपाड़े से बुर के गुलाबी छेंद को टटाेल नही पाया ओर लंड के सुपाड़े को बुर के मुहाने पर ही स्पर्श कराकर धक्का लगा दिया और लंड फटाक से आगे की तरफ निकल गया राहुल गिरते-गिरते बचा।

वीनीत की भाभी उसकी इस नाकाम कोशिश से समझ गई कि राहुल कितना नादान है। राहुल की नाकाम कोशिश की वजह से विनीत की भाभी चुदास की आग में और ज्यादा झुलसने लगी । उससे यह तड़प बर्दाश्त नहीं हुई और उसने खुद ही अपने हाथ को आगे की तरफ लाकर राहुल के लंड को पकड़ ली ' लंड को अपनी मुट्ठी में भर कर पहले तो उसने गरम सुपाड़े को अपनी बुर की दरार पर ऊपर नीचे करके रगड़ने लगी

जिससे राहुल का भी जोश बढ़ गया। विनीत की भाभी ने लंड के सुपाड़े को अपनी गुलाबी बुर के छेंद पर रखकर बोली...( एकदम मादक आवाज में)

ओह ..... राहुल बस जहां पर मैं तेरे सुपाड़े को रखी हूं बस इसी जगह पर धक्के लगा.।. डाल दे पूरे लंड को मेरी बुर में उतर जा बुर के सहारे मेरे जिस्म में..आहहहहहह...राहुल अब देर मत कर डाल दे...

( वीनीत की भाभी चुदवासी हो कर तड़प रही थी उसे इस समय अपनी बुर में लंड की बहुत ज्यादा जरूरत थी इसीलिए वह राहुल से मिन्नते कर रही थी। राहुल तो पहले से ही व्याकुल हो चुका था जब वीनीत की भाभी ने उसके लंड को पकड़ के अपनी बुर पर घिसते हुए बुर के छेंद पर टीकाकर उसे धक्के लगाने को बोली थी। राहुल बदहवास हो चुका था। विनीत की भाभी की बात मानते हुए उसने उसकी जांघो को हथेली में दबोच कर अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ाया... बुर पहले से ही पानी से पनीयाई हुई थी ईसलीए राहुल को थोड़ा कम ही जोर लगाना पड़ा और लंड करीब आधा जितना बुर मे घुस गया... आधा लंड बुर में घुसते ही राहुल तो मस्त हो गया उसको ऐसा लगने लगा कि वह हवा में उड़ रहा है, एक अजीब से सुख का अहसास उसके पूरे बदन में फैल गया, उसका रोम-रोम झन्ना गया उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है आंखों मैं खुमारी सी छाने लगी ... और दूसरी तरफ आधा लंड घुसते ही वीनीत की भाभी अंदर ही अंदर चरमरा गई' एक अजीब से सुख और मीठे दर्द की अनुभूति से उसका पूरा बदन कांप सा गया। राहुल की मोटे लंड ने उसकी बुर की गुलाबी पंखुड़ियों को कुछ ज्यादा ही फैलाते हुए अंदर की तरफ गया था। ....

राहुल तो फिर से आगे की तरफ झटका लगाया.. इस बार का धक्का कुछ ज्यादा ही करारा था। इसलिए राहुल का मोटा ताजा लंड बुर के अंदरुनी अड़चनो को पार करते हुए सीधा बुर की जड़ में जाकर गड़ गया' और जैसे ही लंड बुर की जड़ में धंसा वैसे ही दर्द के मारे वीनीत की भाभी के मुंह से आह निकल गई। धक्का इतना तेज था कि विनीत की भाभी अंदर तक कांप गई

तुरंत उसका बदन पसीने पसीने हो गया' अच्छी तरह से समझ गई थी कि उसका लंड कौन सी जगह पर जाकर ठोकर मारा था। आज तक इस जगह पर बहुत कम लोगों का ही लंड पहुंच पाया था वीनीत जो उसे दिन रात चोदता था उसका लंड दे तो आज तक यहां पहुंच ही नहीं पाया था। विनीत की भाभी बहुत प्रसन्न थी कि बिना किसी परेशानी के राहुल का लंड उसकी बच्चेदानी से सीधे जाकर टकराया था। बुर के अंदर जाने पर वीनीत की भाभी को इसका एहसास हुआ कि राहुल का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा था। विनीत की भाभी का पूरा बदन पसीने से तरबतर हो चुका था। वह गहरी गहरी सांसे ले रही थी वह मन ही मन बोल रही थी कि आज चुदाई का असली मजा आएगा। राहुल पूरा लंड वीनीत की भाभी की बुर में ठुंस कर वह वैसे का वैसे ही खड़ा था इसके आगे उसे क्या करना है यह शायद उसे नहीं मालूम था। इसलिए विनीत की भाभी सिसकारी लेते हुए बोली।

 
ससससससहहहहहहह....राहुल.... बड़ा तगड़ा लंड है रे तेरा... तूने तो मेरी बुर.. को फैला ही दिया... बस बेटा अब तू अपने लंड को युं ही मेरी बुर में अंदर बाहर करके चोद.... चोद मेरे राजा....( विनीत की भाभी की बातें सुनकर राहुल का जोश बढ़ गया ओर जेसा वीनीत की भाभी बोली थी ठीक वैसे ही उसने अपने लंड को बाहर की तरफ खींचा... और फिर से एक जबरदस्त करारा धक्का बुर के अंदर लगाया... ल़ंड फिर से सब कुछ चीरता हुआ वापस वीऩत की भाभी के बच्चेदानी से टकराया... और फिर से इस बार वीनीत की भाभी के मुंह से सिसकारी के साथ उसकी आह निकल गई। विनीत की भाभी की आह सुनकर राहुल को बहुत ज्यादा आनंद प्राप्त हो रहा था। उसे आज पहली बार एहसास हुआ कि बुर क्या चीज होती है. राहुल पसीने पसीने हो गया था बुर की गरमी लंड से होते हुए उसके पूरे बदन को तपा रही थी। राहुल अपने आप को संभाल नहीं पा रहा था उसे ऐसा लगने लगा था कि बुर की गर्मी में कहीं उसका लंड तपकर गल ना जाए.. उसे नहीं मालूम था कि वाकई मे बुर इतनी गर्म होती है। .....( दोबारा अपनी बुर में करारा धक्का खाकर वीनीत की भाभी बोली।)

बस बेटा इसी तरह से चोद मुझे फाड़ दे मेरी बुर को समा जा मेरी बुर में ...जैसे तेरा मन करता है वैसे मुझे चोद़ ...मेरी प्यास बुझा दे खुजली मिटा दे मेरी बुर की...( वीनीत की भाभी चुदवासी हो कर जो मन में आ रहा था वह बड़बड़ाए जा रही थी। और विनीत की भाभी के मुंह से इतनी गंदी बातें सुनकर राहुल के बदन में नशा सा होने लगा था उसका जोश दुगना हो चला था। और उसने फिर से अपने लंड को बाहर की तरफ खींचा और वापस अंदर की तरफ ठुंस दिया... अब राहुल का लंड वीनीत की भाभी की बुर

अब राहुल का लंड वीनीत की भाभी की बुर में अंदर बाहर होने लगा था वह अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए वीनीत की भाभी को जबरजस्त धक्कों के साथ चोद रहा था। कुछ ही देर में राहुल की सिसकारी छूटने लगी' अब राहुल को एहसास हो रहा था कि चुदाई करने में कितना मजा आता है।

विनीत की भाभी कुछ ज्यादा ही प्रसन्न नजर आ रही थी जबरदस्त चुदाई के कारण उसका चेहरा तमतमा गया था। पहली बार वीनीत की भाभी को चुदाई का असली मजा मिल रहा था। राहुल का लंड सटा सट बुर के अंदर बाहर हो रहा था। राहुल को तो अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि वह किसी औरत को चोद रहा है। इतनी जल्दी उसे ये शुभ अवसर मिलेगा यह सच में उसके लिए यकीन के बाहर था।

कुछ ही देर मे बुर से फच्च फच्च की आवाज आने लगी। लेकिन यह आवाज पुरे कमरे एक मधुर संगीत की तरह बजने लगी। कमरे का पूरा वातावरण संगीतमय हो गया था।

राहुल का हर धक्का जबरदस्त पड़ रहा था, हर धक्के के साथ पूरा पलंग हचमचा जा रहा था वाकई मे राहुल के लंड का प्रहार वीनीत की भाभी की बुर मे ईतना तेज हो रहा था की खुद वीनीत की भाभी भी आगे की तरफ सरक जा रही थी। तभी चोदते हुए राहुल की नजर उस की बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चुचियों पर पड़ी' और उससे रहा नहीं गया उसने अपनी दोनों हथेली को भाभी के दोनों खरबूजों पर रख दिया ' चूचियों पर हथेली पड़ते ही राहुल पूरी तरह से गनगना गया उसके बदन में इतना ज्यादा जोश बढ़ गया कि वह जोर जोर से चूचियों को मसलने लगा। इससे विनीत की भाभी का मजा दुगुना हो गया ।

वीनीत की भाभी दोनों जाँघों को फैलाकर राहुल के लंड को बड़ी तेजी से अपनी बुर के अंदर बाहर ले रही थी।

वीनीत की भाभी दुसरे पॉजीशन मे चुदवाना चाहती थी लेकीन राहुल ईतना मस्त चुदाई कर रहा था की वह एक पल भी बिना लंड के गंवाना नही चाहती थी। ईसलिए वह ईसी पॉजीशन मे चुदवाने का मजा लेती रही।

करीब ३५ मिनट की चुदाई के बाद वीनीत की भाभी की सिसकारीयों की आवाज बढ़ने लगी .. वीनीत की भाभी अब चरमसीमा की तरफ बढ़ने लगी थी। पुरे कमरे मे उसकी सिसकारीयां गुंजने लगी।

आहहहहहह...राहुल.... ओर जोर से...ऊममममममम...।ओह मेरे राजा...चोद मुझे....आहहहहह.....

( ओर थोड़ी ही देर मे वीनीत की भाभी ने राहुल को अपनी बांहो मे कस के भींच ली.... ओर सिसकारी भरते हुए अपना मदन रस की पिचकारी छोड़ दी.. राहुल भी कुछ ही देर मे अपने लंड की पिचकारी वीनीत की भाभी की बुर मे छोड़ दीया ओर भाभी के ऊपर ही ढह गया।

राहुल अपने गर्म पानी का बौछार विनीत की भाभी की बुर में करके निढाल होकर उसके ऊपर पड़ा था। दोनों हांफ रहे थे, विनीत की बात भी तो अभी भी राहुल को अपनी बाहों में कसी हुई थी मेरा मुन्ना राम और बड़ी बड़ी चूचियां राहुल के छातियों से दबी हुई थी जिसकी निकोली निप्पले सुई की तरह चुभ रही थी।

आज बरसों के बाद विनीत की भाभी सावन का बादल बनके राहुल के ऊपर बर्सी थी। राहुल का लंड अभी भी वीऩत की भाभी की बुर में समाया हुआ था जिस में से दोनों का मिला जुला काम रस बुर से होता हुआ उसकी गांड की किनारी पकड़ कर बिस्तर को भिगो रहा था। वासना का तूफान थम चुका था लेकिन दोनों की सांसे अभी भी गहरी चल रही थी। राहुल आंख मुंदे उसकी छातियों पर पड़ा था। चुचियों की गर्माहट उसे बहुत ही शांति पहुंचा रही थी । चुचियों का स्पर्श उसे बहुत ही अच्छा लग रहा था।

विनीत की भाभी को राहुल पर बहुत ज्यादा प्यार उमड़ रहा था वह अपनी उंगलीयो से उसके बालों को सहला रही थी। और प्यार उमड़े भी क्यों ना उसने जो आज चुदाई का असीम सुख उसे दिया था वह आज तक किसी मर्द ने उसे नहीं दे पाया था। इसलिए तो वह इतनी गर्म सिसकीरीयां ले लेकर उस से चुदवा रही थी कि राहुल का तो दिमाग ही ठनठना गया था।

औरत एैसी अजीब-अजीब चुदवाते समय जोश से भरी हुई आवाजे निकालती है इसका ज्ञात राहुल को इसी समय चला था। राहुल को सिसकारियों की आवाज इतनी ज्यादा सुमधुर लगी थी कि उसकी कानों में अभी भी वो आवाजे ही गुंज रही थी। राहुल के बालों को सहलाते हुए विनीत की भाभी बोली।

राहुल आज मैं बहुत खुश हूं आज तुमने ईस प्यासन को अपना गरम जल पिलाकर.. तृप्त कर दिया है।आज मेरी बुर ने जानी है की असली लंड क्या होता है.( राहुल उसकी चूचियों पर ही लेटा रहा) राहुल पहली बार की ही चुदाई में तूने मुझे दो बार झाड़ दिया.

( राहुल उसकी बातें सुनकर मन ही मन खुश हो रहा था और मन ही मन विनीत की भाभी को धन्यवाद भी कर रहा था उसने जो उसे आज दी थी उसे से राहुल की पूरी दुनिया ही बदल गई थी।

कुंवारे लंड का मालिक राहुल अब कुंवारा नहीं रह गया था अब एक लड़के से मर्द बनने का सफर उसका शुरू हो चुका था। राहुल के कानों में तो बार-बार विनीत की भाभी की सू मधूर सिसकारियां गूंज रही थी। वह मन ही मन में सोच रहा था कि कैसे वीनीत की भाभी चुदवाते समय गरम गरम सिसकारियां और आहे भर रही थी।

विनीत की भाभी के बदन के ऊपर से राहुल का उठने का मन ही नहीं कर रहा था वीनीत की भाभी का गुदाज बदन उसे डनलप का गद्दा लग रहा था।

अच्छा तो विनीत की भाभी को भी लग रहा था वह दोनो नग्न अवस्था में एक दूसरे से चिपके बिस्तर पर लेटे हुए थे भला एक कामुक औरत के लिए इससे अच्छा पल और कौन सा हो सकता है। लेकिन फिर भी बिस्तर पर पीठ के बल लेटे लेटे राहुल के धक्को को सहन करते करते उसकी पीठ दर्द करने लगी थी' इसलिए ना चाहते हुए भी उसने राहुल को अपने ऊपर से उठाते हुए खुद उठने लगी, आखिरकार राहुल भी कब तक उसके ऊपर लेटे रहता वह भी उठने लगा लेकिन राहुल का लंड अभी वीनीत की भाभी की बुर में फंसा हुआ था। जिस पर दोनों की नजर आकर टीक गई, दिनेश की भाभी बड़ी उत्सुकता से अपनी बुर की तरफ देख रही थी जिसमें कि राहुल का लंड घुसा हुआ था अभी भी उसे अपनी बुर में राहुल के लंड़ के कड़कपन का एहसास हो रहा था। अपने लंड को वीनीत की भाभी की बुर में घुसा हुआ देखकर एकबार फीर से राहुल का मन डोलने लगा। एकबार फीर चुदाई के इस अद्भुत खेल को खेलने की उसकी इच्छा प्रबल हो गई। राहुल अपने लंड कों वीनीत की भाभी की बुर से निकालना नहीं चाहता था' विनीत की भाभी को उसके कड़कपन का अहसास अपनीे बुर में बराबर हो रहा था वह एकदम से हैरान हो रही थी कि पानी निकलने के बाद भी उसका लंड तनिक भी ढिला नहीं पड़ा था। फिर भी राहुल बेमन से अपने लंड को बुर के अंदर से बाहर की तरफ खींचा, लंड बुर की दीवारों में रगड़ खाता हुआ गप्प की आवाज करता हुआ बुर के बाहर निकल गया। लंड को देखकर वीनीत की भाभी का भी मन फीर से डोल गया। लेकिन दिन आपकी भाभी को जोरों से पेशाब लगी थी इसलिए वह राहुल को बोली।

राहुल तुम ही खड़े रहो मुझे जोरों की पेशाब लगी है मैं पेशाब करके आती हूं।( दिनेश की भाभी की यह बात सुनकर राहुल का लंड एक बार ठुनकि मारा जिस पर वीनीतं की भाभी की नजर पड़ गई वह मन ही मन मुस्कुराते हुए रूम से अटैच बाथरूम की तरफ बढ़ गई।

विनीत की भाभीें संपूर्ण नग्नावस्था में ही चलते हुए बाथरुम की तरफ जा रही थी जिसे पीछे से देखकर राहुल का लंड टनटना के और भी ज्यादा टाइट हो गया- मटकती हुई बड़ी बड़ी गांड देखकर राहुल के मुंह में पानी भर आया .. राहुल वहीं खड़े खड़े वीनीत की भाभी को बाथरूम में जाते हुए देख रहा था। विनीत की भाभी बाथरुम के अंदर जाकर कुछ सेकंड खड़ी ही रही राहुल को लगा कि वह दरवाजा बंद करेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ विनीत की भाभी एक बार पीछे की तरफ राहुल को देखि जो कि वह उसी को देख रहा था और वीनीत की भाभी बिना किसी शर्म के राहुल की तरफ देखते हुए एक बार फिर मुस्कुराई और एक बार बड़ी ही मादक अदा से अपने भारी भरकम गांड को पीछे की तरफ उभारकर वही राहुल देख सके इस तरह से बैठकर पेशाब करने लगी। वह इतना मादक दृश्य था कि राहुल अपनी नजरें चाह कर भी नहीं हटा पा रहा था।

इस चुदास से भरे नजारे को देखकर राहुल का लंट ठुनकी मारने लगा।

वीनीत की भाभी ने जानबूझकर दरवाजे को बंद नहीं की थी क्योंकि वह भी यही चाहती थी थी कि राहुल उसे पेशाब करता हुआ देखकर उत्तेजित हो' । वीनीत की भाभी भी बार बार पीछे मुड़कर राहुल की तरफ देख ले रही थी और राहुल को भी उसकी तरफ देखता हूआ पाकर उसका मन मयूर नाचने लगता था।

जैसे उसकी बुर ने अपने गुलाबी पत्तियों के बीच से काम रूपी धुन छेंड़ दी हो इस तरह से एक मधुरमय संगीत पूरे कमरे में गूंज रहा था। बुर से आ रही सीईईईई.....सीईीईीईई ...करती सीटी की आवाज की बांसुरी की धुन से कम नही लग रही थी।

कुल मिलाकर बहुत ही कामोत्तेजक और अतुल्य नजारा था। कुछ ही देर मे वह पेशाब करके बड़े ही मादक अदा से गांड मटकाते हुए खड़ी हुई और अपनी बड़ी बड़ी प पइया जैसी चूचियों को हिलाते हुए राहुल की तरफ आने ली, राहुल के पास पहुंचते है उसने राहुल के टनटनाए हुए लंड पर अपना हाथ रख दी। उसकी गर्म हथेली का स्पर्श अपने गरम लंड पर होते ही राहुल एकदम से गनगना गया। और वीनीत की भाभी उसके लंड को पकड़कर मुठीयाते हुए बोली।

ओहहहह....राहुल.... तेरा टनटनाया हुआ लंड देखकर मे हैरान हुं..जानता हे क्यों?

( राहुल ने ना मे सिर हिला दिया। राहुल का जवाब सुनकर विनीत की भाभी ने अपनी हथेली को लंड पर और ज्यादा कसते हुए।)

राहुल अगर लंड से एक बार पानी निकल जाए तो लंड ढीला पड़ जाता हे ओर ईतने जल्दी खड़ा नही होता हे।

( राहुल के लंड को मुठ़ीया ही रही थी।) लेकीन तुम्हारा लंड ( ईतना कहने के साथ ही गरम सिसकारी लेते हुए) ससससससहहहहहह....राहुल...तेरा लंड तो झड़ने के बाद भी बिना ढीला हुए अभी तक खड़ा है...राहुल तेरी ताकत देखकर मेरी बुर फीर से तुझसे चुदने के लिए पनीया रही है। ( वीनीत की भाभी की ऐसी बातें सुनकर फिर से राहुल का मन मचल उठा. राहुल खुद उसे फिर से चोदना चाहता था लेकिन यह बात कह नहीं पा रहा था. विनीत की भाभी की एसी ही ख्वाहिश सुन कर उसका मन प्रसन्नता से भर गया। राहुल का जवाब सुने बिना ही वीनीत की भाभी पलंग की तरफ बढ़ी और अपना एक घुटना बिस्तर पर रख के आगे की तरफ घोड़ी बन कर झुक गई। राहुल तो कुछ समझ हीें नहीं पाया की यह कर क्या रही है। घोड़ी बने हुए यह पीछे की तरफ नजर घुमाकर राहुल को देख रही थी । लेकिन राहुल था कि वैसे ही लंड टाइट करके खड़ा था। दिनेश की भाभी उसके अनाड़ीपन को समझ गई और राहुल से बोली।

 
राहुल तुम्हें मेरी (अपने हाथ को पीछे ले जाकर अपनी बुर की तरफ इशारा करके)बुर दिखाई दे रही है ना।( राहुल भी अपनी नजरों को थोड़ा सा नीचे की तरफ झुका कर उसकी बुर को देखते हुए हां मैं सिर हिलाया)

इसी में तुम्हें मेरे पीछे ं आकर खड़े खड़े ही लंड डालकर मेरी चुदाई करनी है। ( यह सब देखकर राहुल तो पहले से उतावला हो चुका था वह तुरंत उसके पीछे आकर खड़ा हो गया , राहुल को पीछे से उसकी गदराई हुई और ऊभरी हुई गांड और भी ज्यादा बड़ी लग रही थी । यह देखकर राहुल से रहा नहीं गया और उसने अपने दोनों हथेली को उसके बड़े बड़े खरबूजों पर रखकर दबाने लगा। राहुल का लंड एकदम टाइट खड़ा था इसलिए उसका सुपाड़ा उसकी गांड की दरार के ईर्द गिर्द रगड़ खा रहा था। जिससे वीनीत की भाभी और ज्यादा चुदवासी हुई जा रही थी। वीनीत की भाभी से रहा नही गया ओर उसने खुद अपना हांथ पीछे ले जाकर लंड को थामी ओर उसके सुपाड़े को बुर के छेंद पर टीकाकर राहुल को धक्का लगाने के लिए बोली। राहुल तो पहले से ही उतावला था। उसने भी अपनी कमर को आगे की तरफ धक्का लगाया ओक उसका लंड पहले से ही पनियायी बुर में घुसता चला गया। दोनों थोड़ी देर में फिर से एकाकार हो गए। । विनीत की भाभी की गरम सिस्कारियों से फीर से पूरा कमरा गूंज उठा। जांघो से जाँघ टकरा रही थी जिसकी ठाप से कमरे का पुरा माहोल मादक हो गया था। राहुल तो बस बिना रुके ही अपना मुसल जेसा लंड वीनीत की भाभी की बुर मे पेले जा रहा था। दोनो चुदाई का मजा लुट रहे थे। कभी कभी धक्के ईतने तेज लग जा रहे थे की वीनीत की भाभी आगे की तरफ लुढक जा रही थी लेकीन राहुल उसकी कमर को थाम कर धक्के लगाते हुए चोद रहा था। करीब बीस मिनट की घमासान चुदाई के बाद दोनो की सांसे तेज चलने लगी ' ओर कुछ ही धक्को मे दोनो अपना कामरस बहाते हुए हांफ रहे थे। ।

वीनीत की भाभी ओर राहुल दोनो बहोत खुश थे। राहुल तो आज पहली बार ईस अद्भुत सुख से परीचीत हो रहा था।

दोनो कपड़े पहन चुके थे 'राहुल अपनी नोटबुक ले लिया था। वीनीत की भाभी ने उसकी नोटबुक पर अपना नम्बर लिख कर दी थी। राहुल वीनीत के घर से बाहर निकल आया।

राहुल जा चुका था वीनीत की भाभी ने दरवाजे को बंद करके सोफे पर आकर धम्म से बैठ गई। उसके रोम रोम मे पूरे बदन में मीठा मीठा दर्द हो रहा था। उसे साफ-साफ एहसास हो रहा था कि उसकी बुर की फाँके कुछ ज्यादा ही खुल चुकी थी। वह जानती थी की राहुल का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा तगड़ा था। उसके लंड के बारे में सोचते ही विनीत की भाभी का पूरा बदन अजीब से सुख की अनुभूति करता हूंआ गनगना जा रहा था। आज पूरे तीन चार घंटे तक राहुल से चुदवाकर पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी।

आज पहली बार ही उसके साथ चुदवाकर चुदाई का सुख ली थी लेकिन अगली मुलाकात के लिए अभी से तड़पने लगी थी मन ही मन मे सोच रही थी कि अच्छा हुआ कि उसने वीनीत को तीन चार घंटे के लिए बाहर भेज दी थी वरना आज ऐसा अतुल् एहसास का अनुभव कभी नहीं कर पातेी। आज वह बहुत खुश थी।

शाम ढल चुकी थी रात गहरा रही थी राहुल खाना खाकर अपने कमरे में लेटा हुआ था आज उसका कुंवारापन खो चुका था लेकिन इस कुंवारेपन के खोने का जरा सा भी गम राहुल को नहीं था े । राहुल को ही क्यों सारी दुनिया के मर्दो को इस को खोने का जरा सा भी ग़म नहीं होता बल्कि दुनिया का हर मर्द अपना कुंवारापन लूटाने के लिए हमेशा बेताब रहता है।

वीनीत की भाभी को याद करके राहुल का लंड खड़ा होने लगा था। आज उसे एहसास हो गया था कि बुर में जो मजा आता है वह दुनिया की किसी चीज में नहीं आता*।

राहुल संभोग के सुख को प्राप्त करके आनंदित हो चुका था आज पहली बार उसने अपने लंड का सदुपयोग किया था वरना अब तक सिर्फ मुत्र त्याग और हिलाने के ही काम में आता था। कसी हुई बुर की गर्मी अब तक उसे अपने लंड पर महसूस हो रही थी। जिस तरह से वीनीत की भाभी राहुल से दोबारा मुलाकात के लिए तड़प रही थी ठीक उसी तरह राहुल भी वीनीत की भाभी के साथ दूसरी मुलाकात के लिए तड़प रहा था वह मन ही मन में सोच रहा था कि ना जाने कब भाभी से कब मुलाकात होगी।

विनीत की भाभी के बारे में सोचते हुए राहुल का हाथ कब उसके पजामे में जाकर टनटनाए हुए लंड को थाम लिया उसे पता ही नहीं चला। उसने अपनी मुट्ठी को लंड पर एकदम भींच लिया और आंखों को बंद करके हिलाते हुए विनीत की भाभी की कसी हुई बुर के बारो मे सोचते हुए मुठ मारने लगा। और कुछ ही देर में हांफते हुए लंड का पानी पजामे में ही गिरा दिया।

कुछ दिन तक यूं ही चलता रहा राहुल हमेशा विनीत की भाभी के ख्यालों में ही खोया रहता था। पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता था और दूसरी तरफ नीलू थी जो कि राहुल के आगे पीछे लट्टु बनकर फिरा करतीे थी। लेकिन कुछ दिनों से उसे भी मौका नहीं मिला था कि राहुल से संबंधों को आगे बढ़ाया जा सके। सब अपनी अपनी धुन में मस्त थे।

एक दिन अलका अपनी ऑफिस में बैठकर कंप्यूटर पर कुछ फाइले सबमिट कर रही थी। बाहर का मौसम खराब हो रहा था। हल्की फुल्की बूंदाबांदी हो रही थी,

अलका के मन में घबराहट सी हो रही थी क्या कल बारिश तेज होने लगी तो घर कैसे पहुंचेगी क्योंकि रास्ते में घुटनों तक पानी भर जाता था ऐसे में चल पाना बड़ा मुश्किल होता था और तो और पानी में अलका को डर भी लगता था' उनका यही सब सोचते हुए कंप्यूटर के बटन को बड़ी तेजी से दबाए जा रही थी ताकि काम जल्द से जल्द खत्म हो।

अभी अलका एक मुसीबत के बारे में सोच ही रही थी कि तब तक दूसरी मुसीबत भी सामने कुर्सी पर आकर बैठ गई।

और बताइए मैडम जी क्या हाल है( हाथ में कॉफी का मग पकड़े शर्मा जी कुर्सी पर बैठते हुए बोले।)

ठीक है शर्मा जी।( अलका भी औपचारिक वश शर्मा जी की तरफ बिना देखे ही कंप्यूटर पर बटन दबाते हुए बोली।)

आजकल आप हमारी तरफ जरा भी गौर नहीं कर रही है मैडम जी। ( कॉफी की चुस्की लेते हुए शर्मा जी बोले)

( अलका वैसे ही अपने काम में मग्न होते हुए बोली।)

शर्मा जी हम सिर्फ यहां अपने काम पर गौर करने आते हैं किसी आलतू फालतू चीज पर नहीं।

( अलका का जवाब सुनकर शर्मा जी बुरा सा मुंह बनाने लगे । लेकिन अपनी वासनामई नजरों को अलका के मधुशाला की दोनों छलकते हुए पैमानो पर बराबर गड़ाए हुए थे। इस बात से अलका बिल्कुल अंजान थी क्योंकि वह शर्मा की तरफ ज्यादा ध्यान दे ही नहीं रही थी पर वह अपने काम में इतनी ज्यादा खो गई थी कि उसका आंचल के कंधे से लड़ा कर कब नहीं चाहिए आ गया इसका पता ही नहीं चला। और इसी बात का फायदा शर्मा जी उठाते हुए अलका की पड़ी पड़ी चूचियों के बीच की गहराई को आंखों से ही नाप रहे थे।

बड़ी बड़ी चुचियों को अधनंगी देखकर शर्मा जी के बुढ़े लंड में भी तनाव आना शुरु हो गया। अलका तो पूरी तरह से अपने काम मे खोई हुई थी उसे यह कहां पता था कि उसके दोनों छलकते हुए पैमानों को कोई अपनी आंखों से ही पी रहा है। शर्मा जी के मुंह में पानी भर आया था अलका के मदमस्त बदन उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और मटकती हुई गांड को देख देखकर वह तड़पता रहता था और उसकी याद में घर जाकर रोज मुठ मारा करता था।

शर्मा जी अभी भी बेशर्मों की तरह कॉफी की चुस्की लेते हुए अलका की छातियों को ही निहारे जा रहा था।

लास्ट फाइल सबमिट करने के बाद जैसे ही अलका का ध्यान अपनी छातियों पर गयी और उसने अपने छातियों को खुला पाई तो उसकी नजर सामने बैठे शर्मा जी पर पड़ी जो की ललचाई आंखों से उसकी चूचियों को ही घूर रहा था'अलका ने झट से अपने पल्लू को दिल तो करते हुए अपनी छातियों को ढकते हुए गुस्से मे बोली।

शर्मा जी आप जाकर अपना काम कीजिए युं दूसरों को परेशान करने मत चला आया करिए। ( अलका का गुस्सा देखकर शर्मा जी झट से कुर्सी से उठ गए और बिना कुछ बोले वहां से हाथ मलते हुए अपनी केबिन में चले गए। अल्का का काम खत्म हो चुका था उसे घर जल्दी भी जाना था क्योंकि बाहर बारिश शुरु हो चुकी थी इसलिए उसने मैनेजर पर घर जाने की अनुमति मांगी और मैनेजर भी हवामान को देखते है उसे घर जाने की इजाजत दे दिया। अलका भी जल्दी-जल्दी अपना पर्स उठाई और ऑफिस के बाहर आ गई, हल्की हल्की बारिश शुरु हो चुकी थी। वह जानती थी कि वह भीग जाएगी लेकिन किया भी क्या जा सकता था इस मौसम का ठिकाना होता तो छतरी भी ले कर घर से बाहर आती लेकिन अब तो बिन मौसम ही बारिश होने लगती है।

अलका मन में ही बड़बड़ाते हुए अपने कदम बढ़ा रही थी। बारिश की हाल्की ठंडी ठंडी बूदे धीरे धीरे करके उसके बदन को भिगोने लगी थी। वह कुछ दूर ही चली थी कि धीरे-धीरे करके उसके सारे कपड़े भीग गए।

रह-रहकर पवन का तेज झोंका उसके बदन मे सुरसराहट फैला जाता। अलका को मार्केट पहुंचते-पहुंचते वह बारिश के पानी में पूरी तरह से तरबतर हो चुकी थी और बारिश थी कि रुकने का नाम नहीं ले रही थी । सड़को पर पानी धीरे धीरे करकेे घुटनों से नीचे तक बहने लगा था । अलका की परेशानी बढ़ते जा रही थी।

साड़ी गीली हो कर उसके मादक बदन पर चिपकी हुई थी जहां से हल्के हल्के उसके अंग का प्रदर्शन हो रहा था। पूरी तरह से ब्लाउज के लिए होने की वजह से ब्लाउज के अंदर की काले रंग की ब्रा साफ साफ नजर आ रही थी पीठ की तरफ उसकी काली पट्टीी देखकर आने जाने वालों का लंड टाइट हो जा रहा था। साड़ी गीली होकर उसके बदन से एेसे चिपकी हुई थी की उसकी भरपुर मादक गांड का उभार और कटाव साफ साफ दीखाई दे रहा था। और वास्तव में अलका को बदन की प्राकृतिक सुंदरता को देख कर आने जाने वालों की नजरें एक पल के लिए उसके बदन पर ही चिपक जाती थी। अलका भीगे बदन में और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगी थी। घर पहुंचने की जल्दी में बिना आगे पीछे देखे झटाझट अपने कदमों को बढ़ाते हुए चली जा रही थी लेकिन रास्ते पर पानी घुटनों तक आ गया था जिसकी वजह से पैर को आगे बढ़ाने में तकलीफ हो रही थी।

 
अलका को अब शर्म महसूस होने लगी थी , क्योंकि रास्ते का पानी घुटनों तक होने की वजह से उसे ना चाहते हुए भी अपनी साड़ी को घुटनों तक उठाना पड़ा जिससे उसकी गोरी गोरी मांसल पिंडलियां दिखने लगी थी। बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी रह रह कर बादलों की गड़गड़ाहट से उसका मन काँप उठ़ता था और कोई समय होता तो ऐसी बारिश में वो कभी नहीं निकलती लेकिन क्या करें मजबूरी थी घर पहुंचना था इसलिए उसे बारिश में निकलना ही पड़ा। पानी में अपने पैरों को घसीटते हुए वह आगे बढ़ ही रही थी कि तभी उसे पीछे से आवाज आई।

आंटी जी... वो आंटी जीे ...थोड़ा रुकिए....

( उसे यह आवाज कुछ जानी पहचानी लगी इसलिए उसके कदम ठीठक गए , पीछे मुड़कर देखी तो विनीत था जो की छतरी लेकर उसकी तरफ ही बढ़े चले आ रहा था। उसे देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कान तेैर गई

विनीत को देख कर उसे क्यों इतनी खुशी हुई यह खुद वह नहीं जानती थी। इस खुशी के पीछे कोई लगाव कोई अपनापन या आकर्षण था ईसको बता पाना अलका के लिए भी बड़ा मुश्किल था।

वीनीत छत्री ओढ़ै अलका के पास पहुंच गया और बोला

आंटी जी आप ऐसी बारिश में कहां से आ रहीे हैं?

अरे बेटा मैं तो ऑफिस से आ रही हूं अब क्या करूं मुझे बारिश में बहुत ज्यादा डर लगता है लेकिन मजबूरी है इसलिए मुझे एसी बारिश में भी जाना पड़ रहा है। ( अलका विनीत के सवाल का जवाब देते हुए बोली. अलका को अब तक बहुत जल्दी पड़ी थी घर पहुंचने को लेकिन अलका भी शायद अंदर ही अंदर विनीत के प्रति आकर्षित होती जा रही थी। इसलिए तो ऐसी तूफानी बारिश में भी खड़ी हो गई थी। अलका के चेहरे पर और ज्यादा प्रसन्नता के भाव दीखाई देने लगे जब वीनीत ने छत्री को अपने ऊपर से हटाकर अलका के ऊपर कर दीया। अलका पुरी तरह से भीग चुकी थी लेकीन उस लड़के का अंदाज देखकर उससे कुछ. बोला नही गया। विनीत भीगा हुआ नहीं था लेकिन अपने ऊपर से छतरी हटाकर अलका के ऊपर रखने से वह भी बारिश में भीगने लगा । अलका उसे छतरी में आने के लिए कहने से शर्मा रही थी. दोनों घुटने तक पानी में दो ही कदम चले थे कि जोर से बादल गरजा और बादल के गरजने की आवाज सुनते ही अलका घबरा गई और उसने तुरंत विनीत को छतरी में आने के लिए कहीं।

विनीत तो जैसे अलका के कहने का इंतजार ही कर रहा था कि वह तुरंत क्षतरी में आ गया ओर जान बुझ के बिल्कुल अलका के बदन से सट गया लेकिन इस बात से अलका बिल्कुल अनजान थीे कि विनीत जानबूझकर उसके बदन से अपने बदन का स्पर्श करा रहा है। दोनों घुटनोे तक पानी में धीरे धीरे पैरों को लगभग घसीटते हुए आगे बढ़ रहे थे। अलका ने किस तरह से अपनी साड़ी को घुटनों तक उठाकर पकड़कर चल रही थी उसे देखकर किसी भी मर्द की इच्छा उसको चोदने के लिए मचल उठे उसकी इठलाती बलखाती कमर और बड़ी-बड़ी मटकती हुई गांड अच्छे अच्छो का पानी निकाल दे। विनीत तो रह रह कर अपनी नजरें नीचे करके उसकी गोरी नंगी पिंडलियो को देख कर अपनी आंखों को सेक ले रहा था, विनीत के साथ चलते हुए अलका का डर कुछ हद तक कम हो चुका था। अभी दोनों मार्केट में ही थे बारिश का जोर कुछ कम होता नजर आ रहा था लेकिन पानी अभी भी घुटनों तक ही था अभी भी दोनों को बहुत चलना था वैसे तो आम दिनों में अपने घर पहुंचने में अलका को सिर्फ 15 या 20 मिनट लगते थे लेकिन पानी भरे होने की वजह से आज शायद कुछ ज्यादा ही समय लग जाए। विनीत अलका के साथ बातों का दौर बढ़ा रहा था। और भी लोग थे जो सड़कों पर घुटनों तक पानी में आ जा रहे थे जब भी कोई बड़ी मोटर वहां से गुजरती तो पानी की लहरें दोनों को हक मचा देती ओर पानी का बड़ा सा गुब्बारा की तरह लहरों के साथ दोनों के बदन से टकराता तो दोनों गिरते गिरते बचते । अलका अगर अकेले ही होती तो लहरों की टक्कर से जरुर गिर जाती लेकिन विनीत बार-बार अलका को सहारा देकर संभाल ले रहा था। और अलका को संभालने मे वीनीत का हांथ अलका के बदन पर जहां तहां पड़ जा रहा था। एक हाथ में छतरी पकड़े अलका अपने आप को संभाल भी नहीं पा रही थी। विनीत उस को संभालने में कभी अपने हाथ को अलका की मांसल कमर तो कभी उसकी बांह पकड़ ले रहा था एक बार तो मौका देख कर वीनीत ने अलका को सभालने संभालने में अपनी हथेली को अलका कि बांह से निकालकर अलका की चूची पर ही रख दिया और मौका देख कर उसे हल्के से दबा भी दिया।

अलका को विनीत की ये हरकत महसूस जरूर हुई लेकिन उसने यह सोच कर टाल दिया कि शायद अनजाने में ही वीनीत के हांथो ऐसी गलती हो गई होगी।

लेकिन एकबारगी विनीत की इस हरकत से अलका के पूरे बदन में झनझनाहट सी फैल गई, चूचियों पर विनीत के हाथों का स्पर्श की झनझनाहट उसकी रीढ की हड्डी से होते हुए उसकी जांघों के बीच की पतली दरार तक पहुंच गई। अलका वीनीत को कुछ बोल नहीं पाई।

दोनों बातें करते हुए पानी में चले जा रहे थे लेकिन अलका कुछ कम ही बोल रही थी क्योंकि उसे शर्म सी महसूस होने लगी थी , लता अपने मन के द्वंद युद्ध में ही उलझी पड़ी थी वह अपने आपको समझा नहीं पा रही थी कि विनीत का यह स्पर्श उसे अच्छा लग रहा था या खराब लग रहा था। जितना सटकर विनीत चल रहा था इतने करीब उसने किसी मर्द को नहीं आने दी थी। सिर्फ राहुल ही था जो चलते समय या कैसे भी उसके इतने करीब रहता था राहुल उसका बेटा था और विनीत भी राहुल के ही हम उम्र का था जो कि उसके बेटे के ही समान था। विनीत के इतने करीब रहने पर अलका के बदन में अजीब सी फीलिंग हो रही थी जब की राहुल की वजह से उसे आज तक ऐसी फीलिंग नहीं हुई थी,

ईसी फीलिंग को समझ नहीं पा रही थी कि ऐसा क्यों हो रहा है।

विनीत का तो हाल बुरा हो चुका था बारिश की ठंडी बूंदों में भी उसके पसीने छूट रहे थे इतना गर्म इतना मुलायम और गुदाज चूची का स्पर्श उसे अंदर तक हीला गया था। ब्लाउज गीली होने की वजह से उसकी काले रंग की ब्रा साफ साफ नजर आ रही थी और ब्रा से झांकती उसकी बड़ी बड़ी चूचियां उसके लंड में खून के दौरे को बढ़ा रही थी। भीगे मौसम में भी विनीत पूरी तरह से गरमा चुका था, शाम ढल चुकी थी अंधेरा छाने लगा था वैसे भी बारिश के मौसम की वजह से काले बादलों ने पहले से ही अंधेरा किए हुए था। दोनों धीरे धीरे चलते हुए मार्केट से बाहर आ चुके थे. अब सड़क पर केवल इक्का-दुक्का इंसान ही नजर आ रहे थे जो कि वह लोग भी घर पहुंचने की जल्दी मे अपने आसपास ध्यान दिए बिना ही चले जा रहे थे।

अलका की खूबसूरती और उसके भीगे बदन की खुशबू से विनीत का मन मचल रहा था। अपने आप पर कंट्रोल कर पाना उसके लिए मुश्किल हुए जा रहा था। एक तो रोमांटिक मौसम और ऊपर से एक खूबसूरत औरत का साथ जोकि पानी में भीगकर और भी ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी हो चुकी थी, और तो और दोनों एक ही छतरी के नीचे आपस में कटे हुए भीगते बारिश में घुटनों तक पानी मे चले जा रहे थे जिससे विनीत का अपने ऊपर कंट्रोल कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा लगने लगा था।

बारिश ने अपना जोर कम कर दी थी लेकिन बंद नही की थी। वीनीत अलका को अपनी बाहों में भरकर चूमना चाहता था उसके मधभरे रसीले होठों को अपने होठों के बीच रख कर उनके रस को नीचोड़ना चाहता था' अलका की बड़ी बड़ी गांड जो की साड़ी भीेगने की वजह से और भी ज्यादा उभरी हुई और उसके कटाव साफ साफ दिखाई दे रहे थे जिसे देखकर विनीत पगला सा गया था विनीत उसे मसलना चाहता था। उसे इंतजार था तो बस सही मौके का, अंधेरा छाने लगा था रह-रहकर बादलों की गड़गड़ाहट से अलका का मन बैठ जा रहा था। बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट से अलका को बहुत डर लग रहा था इसलिए डर वश वह विनीत के और भी ज्यादा नजदीक सट कर चलने लगी। यहां से कुछ ही दूरी पर चौराहा था जहां तक अलका के साथ ही चलना था। विनीत की बेचैनी बढ़ती जा रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था क्या करें कि वह अलका को अपनी बाहों में भर कर चूमने लगे।

अलका थी की विनीत की हरकत की वजह से अभी तक रह रहकर उसके बदन में सीहरन सी दोड़ जा रही थी। ना जाने क्यों उसे ऐसा लगने लगता कि अभी भी उसकी चूची पर विनीत की हथेली कसी हुई है। उसे यू पानी में वीनीत के साथ चलना अच्छा लग रहा था,

पूरी तरह से अंधेरा छातियों का था आज सड़कों पर की लाइट भी बंद थी इसलिए कुछ ज्यादा ही घना अंधेरा लग रहा था। अलका इस अंधेरेपन से पूरी तरह से वाकिफ थी क्योंकि वह जानती थी कि जब भी बारिश का सीजन आता है तो बारीश की वजह सें सड़कों की लाइटें चली जाती हैं।

पानी घुटनों से नीचे आ चुका था क्योंकि ईधर का रास्ता थोड़ा ऊंचाई पर था और चारों तरफ बड़े-बड़े घने पेड़ों से ढके होने के कारण यहां कुछ ज्यादा ही अंधेरा लग रहा था और अब तो सड़क पर एक इंसान भी नजर नहीं आ रहा था यही मौका वीनीत को ठीक लग रहा था।

अलका इस रास्ते से गुजरते वक्त मन ही मन घबरा रही थी, उसकी घबराहट का एक कारण अंधेरा तो था ही और उपर से सबसे बड़ा कारण था बादलों का तेज गड़गड़ाहट और बिजली का चमकना ये सबसे अलका कुछ ज्यादा ही घबरा रही थी इसलिए यहां पर चलते समय वह विनीत से कुछ ज्यादा ही सट चुकी थी।

अकेलापन और अंधेरे का साथ पाकर विनीत मैं थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए धीरे से अलका की कमर पर अपनी हथेली रख दिया, अपनी कमर पर विनीत की हथेली का स्पर्श पाते हैं अलका एकदम से सिहर ऊठी ' वीनीत धीरे-धीरे अलका की कमर को सहलाते हुए उसे अपनी तरफ खींचे हुए चल रहा था। विनीत को अपनी कमर को ईस तरह से सहलाते हुए देख कर अलका का पूरा बदन कांप पर सा गया। सड़क एकदम सुनसान थी पानी उतर चुका था बारिश की बूंदे भी लगभग बंद हो चुकी थी, दूर दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था इसलिए अलका को वीनीत की हरकत से और ज्यादा डर लगने लगा। अलका के हाथ में अभी भी छतरी थी।

वीनीत ने धीरे-धीरे अपनी हथेली को कमर से होते हुए ऊपर की तरफ सरकाना शुरू कर दिया और कुछ ही सेकंड में उसकी हथेली पूरी तरह से अलका की एक चूची पर जम चुकी थी, और विनीत ने तो उसे मसलना भी शुरू कर दिया था। अलका की चूची इतनी बड़ी थी कि विनीत के हाथ में ठीक से समा भी नहीं पा रहे थे।

विनीत तो एकदम मदहोश हो चुका था और अलका एकदम से घबरा चुकी थी लेकिन ना जाने क्यों उसे अच्छा भी लग रहा था। आज बरसों के बाद कीसी के हथेलियों का स्पर्श उसकी चूची पर हुआ था, उसे अच्छा भी लग रहा था लेकिन उसका मन नहीं मान रहा था की अपने बेटे की उम्र के लड़के के साथ इस तरह....छी...छी..।छी.. उसकी अंतरात्मा गवाही नहीं दे रही थी उसे यह सब बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था अलका उसे यह सब करते हुए रोकना चाह रही थी,

लेकिन भी नहीं था कि वहां चूची को दबाए ही जा रहा था, तभी अलका ने हिम्मत करके उसे रोकते हुए बोली

विनीत.....( अलका के मुंह से इतना निकला ही था कि तभी अचानक इतनी तेज बिजली कड़की की वह एकदम से कांप उठी और डर के मारे खुद ही विनीत के बदन से चिपक गई. वीनीत भी मौके की नजाकत को समझते हुए तुरंत उसे अपनी बाहों में कस लिया। बाहों लोक आते ही विनीत अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ पर सहलाते हुए नीचे कमर की तरफ ले जाने लगा, अलका पुरी तरह से गनगना चुकी थी। विनीत ऐसी हरकत करेगा अलका को यह उम्मीद न थी। अलका उससे छूटने की कोशिश करती ईससे पहले ही विनीत में अपने दोनों हथेलियों को उस की गदराई गांड पर रखकर दोनों हाथ से दबाने लगा। विनीत को तो जैसे कोई खजाना मिल गया होै इस तरह से टूट पड़ा था। गर्दन को चूमते चूमते उसने एक हाथ से अलका के सिर को थाम कर अपनी प्यासे होठो को अलका के दहकते होठो पर रख दिया ओर गुलाबी होठो को चुसने लगा।

अलका ऊसके बांहो की कैद से छुटने के लिए तड़फड़ा रही थी लेकीन वीनीत के हांथो को अपनी गदराई गांड पर महसूस कर के अलका का भी मन बहकने लगा था लेकिन वह पूरी तरह से बदहवास नहीं हुई थी वह उससे अभी भी चोदने की कोशिश कर ही रही थी कि, विनीत ने अलका को उस की गदराई गांड से पकड़कर फिर से अपने बदन से सटा लिया ओर इस बार विनीत के पेंट में बना तंबू सीधे जाकर साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर पर दस्तक देने लगा, वीनीत के हर स्पर्श से अलका अपने आप को संभाले हुए थी लेकिन इस बार वीनीत के लंड की ठोकर अपनी बुर पर महसुस करके अलका पुरी तरह से बहक गई ओर वह अपने आपको संभाल नहीं पाई और खुद ही जैसे पेड़ में तने लिपट़ते हैं ।

 
उसी तरह से वह भी वीनीत के बदन से लिपट गई' और खुद ही उसके होठों को चूसने लगी। अलका को साथ देता देखकर विनीत की हिम्मत बढ़ने लगी। अंधेरे का लाभ उठा कर विनीत यहीं पर सब कुछ कर लेना चाहता था इसलिए वह अलका की चूचियों को भी मसलने लगा' लंड की चुभन ओर चुचीयो के मसलन से अलका मस्त होने लगी।उसकी कामोत्तोजना बढ़ती जा रही थी। ठंडे ओर खुशनुमा मोसम मे भी अलका गरमाने लगी थी। वीनीत तो इतना पागल हो चुका था कि उसके हाथ अल्का के बदन के कोने-कोने तक पहुंच रहे थे।

अलका के गुलाबी होठों को चूस चूस कर के बदन में मदहोशी छाने लगी थी ऐसा लगने लगा था कि जैसे शराब की कई बोतल का नशा उसकी आंखों में उतर आया हो। अलका उत्तेजना की वजह से शुध बुध को बैठी थी। उसके दिमाग में इस समय कुछ भी नहीं चल रहा था अच्छे-बुरे कि समझ खो चुकी थी। इस वक्त उसका दिमाग एकदम शुन्यमनस्क हो चुका था। कामोत्तेजना में सराबोर होकर कब उसके दोनों हाथ विनीत की पीठ पर जाकर उसे सहलाने लगे उसे खुद को पता नहीं चला।

विनीत तो कभी उसकी पीठ सहलाता तो कभी उस की गदराई बड़ी-बड़ी गांड को दोनों हाथों से मसलता तो कभी दोनो चुचियों को हथेली में भर भर कर दबाता , अलका विनीत की इन सभी हरकतों से आनंदित हुए जा रही थी। अलका उस वक्त एकदम जल बिन मछली की तरह तड़प उठी जब विनीत ने अपनी हथेली को साड़ी के ऊपर से ही उसकी जांघों के बीच बुर पर रगड़ने लगा

अलका के पुरे बदन में चुदास की लहर भर गई. वह एकदम से तड़प ऊठी। वह उत्तेजना के मारे कसमसाने लगी विनीत की हथेली बुर वाली जगह को लगातार रगड़ रही थी। दोनों के हॉट आपस में भिड़े हुए थे दोनों पूरी तरह से गरमा चुके थे।

विनीत समझ चुका था कि अलका पुरी तरह से उसके हाथ में आ चुकी है। इसलिए वह एक हाथ से उसकी साड़ी को पकड़कर उपर कि तरफ सरकाने लगा धीरे धीरे करके उसने साड़ी को जाँघो के ऊपर तक ऊठा दिया, अलका इससे ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी कि उसने एक बार भी विनीत को रोकने की कोशिश नहीं की बल्कि वह शायद अंदर से यही चाह भी रही थी' या उसके बदन की गर्मी ने उसे वीनीत को रोकने की इजाजत नहीं दिया। विनीत का लंड एकदम टाइट चुका था, और उसने तुरंत एक हाथं से अपनी जीप खोलकर अपने टनटनाए हुए लंड को पेंट से बाहर निकाल लिया था। वीनीत पूरी तरह से तैयार था वह इसी जगह पर अलका को चोदना चाहता था इसलिए वह अलका को पकड़कर दूसरी तरफ घुमाना चाह ही रहा था कि दूर से आ रही मोटरकार कीे लाईट की वजह से रुक गया और तुरंत अपने लंड को वापिस पेंट में ठूस लिया। अलका को भी जैसे होश आया हो उसने तुरंत अपने कपड़े को दूरुस्त की ओर मोटर कार उसके पास से होकर गुजरे इससे पहले ही वह बिना कुछ बोले लगभग दौड़ते हुए चौराहे के दूसरे तरफ से अपने घर की तरफ चल दी ' अलका एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखी वह जल्द से जल्द अपने घर की तरफ चली जा रही थी और वीनीत वही खड़े ठगी आंखों से अलका को जाते हुए देखता रहा।

अलका हांफते हांफते अपने घर पर पहुंची ' रात के 8:30 बज चुके थे। राहुल अपनी मां को देखते ही सवाल पर सवाल पूछने लगा।

क्या हुआ मम्मी इतनी देर कैसे लग गई , कहां रह गई थी मम्मी, ( अब राहुल के सवाल का क्या जवाब देती इसलिए वह गोल-गोल घुमाते हुए बोली।)

अरे बेटा देख तो रहे हो एक तो वैसे ही ऑफिस में इतनी देर हो गई थी और ऊपर से जब ऑफिस से छुट्टी तो बाहर यह बारिश घुटनों तक पानी में पैदल चल कर आ रही हुं ओर तू है कि सवाल पर सवाल पूछे जा रहा है।

( अलका का जवाब सुनकर राहुल बोला।)

सॉरी मम्मी इतनी देर हो गई थी इसलिए मुझे चिंता हो रही थी।

अच्छा सोनू कहां है उसे कुछ खिलाए कि नहीं?

अपने कमरे में हे मम्मी पढ़ रहा है।

ठीक है बेटा थोड़ा इंतजार करो मैं झटपट खाना बना देती हूं मुझे मालूम है कि तुम लोगों को भूख लगी होगी।

( अलका बाथरूम में जाकर अपने कपड़े बदल ली और पतला गाऊन अपने बदन पर डाल कर खाना बनाने में जुट गई। खाना बनाते समय रह नहीं कर उसे सड़क वाला दृश्य याद आ रहा था उस दृश्य को याद करके अलका रोमांचित हो जा रही थी। आज उसके साथ जो हुआ था उसने कभी सपने में भी नहीं सोची थी। वह इतना कैसे बहक गई उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था। आज खाना बनाने में उसका मन बिल्कुल नहीं लग रहा था लेकीन जैसे तैसे करके उसने खाना तैयार कर ली। अलका अपसाथ में बैठकर खाना खाने लगी तभी राहुल की नजर दीवाल के सहारे रखी छतरी पर पड़ी, और छतरी को देखते ही राहुल बोला।

यह छतरी किस की है मम्मी?

( राहुल की बात सुनते ही अलका का दिल धक से रह गया। उसे तुरंत याद आया कि उसने तो छतरि देना भूल ही गई। और छतरी को देखते ही अलका के आंखों के सामने विनीत का चेहरा तेरने लगा उसे वह सब याद आने लगा जो उसके साथ सड़क पर हुआ था। राहुल का उसको अपनी बाहों में कसना उसका होठो को चूसना, अपनी दोनों हथेलियों से उसकी बड़ी बड़ी गांड को कस कस के मसलना, अलका के पूरे बदन में सीहरन सी दौड़ गई जब उसे याद आया कि कैसे वीनीत ने साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुप को मसलना शुरू कर दिया था और तो और हद तब हो गई थी जब उसने उसकी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाना शुरु कर दिया था। यही सब अलका याद कर रही थी कि तभी अचानक राहुल बोला।

क्या हुआ मम्मी कहां खो गई तबीयत तो ठीक है ना!

राहुल की बात सुनते ही अलका हड़बड़ाते हुए बोली।

ककककक...कुछ नही बेटा ये छतरी तो मेरी एक सह कर्मचारी की है जिसने मुझे बारिश से बचने के लिए छतरी दी थी कल उसे लौटा दूंगी।

( अलका राहुल से झूठ बोल गई थी। थोड़ी देर में खाना खत्म करके दोनों बच्चे अपने अपने कमरे में चले गए और रसोई की साफ-सफाई कर के अलका भी अपने कमरे में आ गई।

अलका अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी, रह-रहकर अभी भी उस का मन मचल जा रहा था। आज जो कुछ भी हुआ उसके बारे में सोचते ही उसकी जांघों के बीच सुरसुराहट होने लग रही थी। वह मन ही मन बार बार अपने आप को ही कोस रही थी कि उसने क्यों उस बित्ते भर के छोकरे को रोक नहीं पाई। वह मन ही मन अपने आप से ही सवाल पूछ रही थी कि पति के जाने के बाद जिसने आज तक किसी भी मर्द को अपने आस-पास भटकने भी नहीं दी, तो उस लड़के को इतनी आगे बढ़ने की इजाजत कैसे दे दी क्यों उसे रोक नहीं पाई कैसे उसका बदन उसके सामने ढीला पड़ने लगा। विनीत के साथ का रास्ते पर का सारा ब्यौरा उसकी आंखों के सामने तैर रहा था' बार-बार उसे उसकी बुर पर साड़ी के ऊपर से ही विनीत के द्वारा हाथ लगाना याद आ रहा था उस दृश्य को याद कर करके रोमांचित भी हो जा रही थी लेकिन फीर अपने आप पर गुस्सा भी आ रहा था।

वह अपने आप मन में ही बड़बड़ातेे हुए बोली उस बित्ते भर के छोकरे की इतनी हिम्मत कि उसने मेरी ......छी....( अलका अपनी बुर के बारे में मन ही मन बड़बड़ा रहे थी लेकिन अलका कभी भी अपने मुंह से अपनी अंगो का नाम नहीं ली थी अपने पति के सामने भी नहीं )...उसने मुझे क्या दूसरी औरतों की तरह समझा था जो मेरे साथ ऐसा करने लगा , अब कभी भी वह मुझे मिला तो उसे जरूर डांटुंगी और अब से यह भी कहूंगी कि मेरे करीब बिल्कुल ना आए। ( अलका दूसरी तरफ करवट लेकर आंखों को बंद करके सोने की कोशिश करने लगी लेकिन जैसे ही आंखों को बंद की तुरंत उसकी आंखों के सामने फिर से वही दृश्य तेरने लगा। उसका चूचियों को दबाना है उस को मसलना कमर को सहलाते हुए बड़ी-बड़ी गांड को दबाना, उसके होठों को ऐसे चूसना जैसे कि वह उसकी प्रेमिका हो और उसकी बुर को साड़ी के ऊपर से ही मसलना, साड़ी को ऊपर की तरफ उठाना और उसको होश में लाती हुई मोटर कार की तेज रोशनी, उसने तुरंत अपनी आंखें खोल दी और मन ही मन सोचने लगी कि अगर आज वह ऐन मौके पर मोटर गाड़ी नहीं आती तो ना जाने क्या हो जाता बरसों से बेदाग दामन में बदनामी का धब्बा लग जाता। अभी अलका को ऐसा लगने लगा कि उसकी जाँघों के बीच कुछ रीस रहा है , वह समझ नहीं पाई की यह क्या है और उत्सुकता वश बैठ गई। उसने बैठे-बैठे ही अपने गांउन को झट से अपनी कमर तक खींच ली, तुरंत कमर के नीचे का भाग पूरा नंगा हो गया

और तो और उसने आज पेंटी भी नहीं पहनी थी इसलिए गांव के अंदर पूरी तरह से नंगी ही थी, अलका ने जब अपनी उंगलियों से बुर को टटोलते हुए चेक करने लगीे तो उसके आश्चर्य का कोई ठिकाना ना था। वह समझ गई कि उसकी बुर से काम रस रीस रहा था।

वह समझ नहीं पाई कि ऐसा क्यों हो रहा है आखिर यह काम रस क्यों उसकी बुर से निकल रहा है। कहीं विनीत के साथ उसका जोवा क्या हुआ था कहीं उसके बदन को आनंदित तो नहीं कर रहा है . । अलका बार-बार कैटरीना को भूलना चाहती थी इस घटना से निकलना चाहती थी लेकिन फिर भी ना जाने क्यों उसे वही सब वाकया याद आ रहा था और वह यह भी साफ तौर पर जानती थी कि उस वाक्ये से उसे भी आनंद आ जरूर रहा था। तभी तो बारबार उसे आज की घटना याद आ जा रहाी थी। और वह भी उस घटना को याद कर करके रोमांचित हुए जा रही थी।

अलका की ऊंगलिया खुद ब खुद बुर पर घुमने लगी थी।

अलका आज बड़े गौर से अपनी बुर को निहार रही थी, कई सालों के बाद आज पहली बार इतनी ध्यान से अपनी जांघों के बीच की पतली दरार को देख रही थी।

नाजुक नाजुक उंगलीयो पर बालों के झुरमुटों का नरम स्पर्श होते ही उसको यह एहसास हुआ कि महीनों से उसने इन बालों को साफ नहीं की थी और बाल काफी बड़े हो गए थे जिसकी वजह से बुर की पतली दरार भी बड़ी मुश्किल से नजर आ रही थी, अलका की ऊंगलिया बुर के कामरस मे भीगने लगी थी। अपनी बुर पर ऊंगलिया फीराते हुए अलका मदहोशी के आलम में उतरती चली जा रही थी। अलका ने उत्सुकता वश जैसे ही अपनी उंगली से बुर की गुलाबी पत्तियों को कुरेदी उसे फिर से वीनीत याद आ गया, जब उसने उसे कसके अपनी बाहों में भींचा था तो कैसे उसका टनटनाया हुआ लंड पेंट के अंदर होते हुए भी उसकी ठोकर उसकी साड़ी के ऊपर से ही सीधे इसकी बुर पर लग रही थी।

उसके लंड की ठोकर को अपनी बुर पर महसुस करके अलका एक बार फिर से पूरी तरह से गनगंना गई।

अलका के चेहरे पर एक बार फिर से शर्म-ओ-हया की लाल़ी छाने लगी उसके गाल सुर्ख गुलाबी हो गए। उसके चेहरे पर एक बार फीर से क्रोध ओर आनंद का मिला जुला असर देखने को मिल रहा था।

अलका एक साथ दो राहों पर चल रही थी एक तो उसका बदन जो बरसों से प्यासा था उसके बस में नहीं था एक तरफ वीनीत की हरकतों से उसके बदन में मस्ती की लहर दौड़ जा रही थी और दूसरी तरफ उसका मन इन सब बातों से अपने आप को खुद ही कोश भी रहा था।

अलका विनीत के बारे में सोचते हुए अंगुलियों से अपनी बुर को कुरेदे जा रही थी, उसे अब मजा आने लगा था।

ईसमे दोष उसका नही बल्की बर्षो से ऊसके अंदर दबी हुई उसके बदन की भुख थी जैसे विनीत ने अपनी हरकतों से भड़का दिया था। अलका ने उसके पति के जाने के बाद अपने हालात से समझौता कर ली थी, उसने अपना सारा ध्यान अपने बच्चों के पालन-पोषण में ही लगा दी थी। बल्कि जिस समय उसका पति उसे छोड़ कर गया था एसी उम्र में बदन की प्यास और ज्यादा भड़क जाती है ऐसे में औरत बिना लंड लिए संतुष्ट नहीं हो पाती। अलका जीस उम्र के दौर से गुजर रही थी एसी उमर में अक्सर औरत बिना लंड के एक पल भी गुजारा नहीं कर पाती, और अलका ने तो इस उम्र में ही इन सब बातों को बहुत पीछे छोड़ चुकी थी, अपने बदन की जरूरत को उसने अपने अंदर ही दफन कर ली थी। अलका को सेक्स की जरूरत कभी महसूस ही नहीं हुई थी. उसने अपने अंदर सेक्स की प्यास को भड़कने ही नहीं दी थी । लेकिन आज उस छोकरे ने अपनी हरकत से बरसों से दबी हुई उसके बदन की आग को भड़का दिया था।

अलका प्यासी थी लेकिन उसके संस्कारों ने उसे बांध रखे थे। अगर हल्की सी चिंगारी को भी थोड़ी सी हवा दी जाए तो वह भड़क उठती है, उसी तरह से अलका के भी बदन में दबी हुई बरसों की चिंगारी धीरे धीरे भड़क रही थी।

अलका हल्के हल्के अपनी उंगलियों से बुर की पत्ती को मसलना शुरू कर दी थी, झांटों के झुरमुटों के बीच जब

अलका अपनी उंगलियों को कसकर रगड़ती तो बड़े बड़े बाल अंगुलियों की रगड़ के साथ खींचा जाते जिससे उसे दर्द होने लगता लेकिन उस दर्द को अलका अपने होंठ को दातो तले दबा कर सह जाती। कुछ ही पल में उन्माद से भरा हुआ अलका का बदन हिचकोले खाने लगा, सांसे भारी होने लगी थी. उसका गला सूख रहा था। अब उसे ज्यादा कुछ नहीं बस वही दृश्य बार-बार याद आ रहा था जब विनीत ने उसे करके अपनी बाहों में भींचा था, और तुरंत उसका कड़क लंड साड़ी के ऊपर से ही बुर पर ठोकर मार रहा था। आज बरसों के बाद उसने लंड की कठोरता को अपनी बुर के इर्द-गिर्द महसूस की थी। इसलिए तो उसका बदन और भी ज्यादा चुदवासा होकर चुदास की तपन मे तप रहा था।

इस वक्त ना चाहते हुए भी उसे विनीत ही बार बार याद आ रहा था । मदहोशी के आलम में अलका की आंखें मुंदी हुई थी, और वह विनीत को याद करके अपनी बुर को बड़ी तेजी से रगड़ रही थी, लेकिन बार-बार उसकी झांट के बाल उंगलियों के साथ खींचा जा रही थी।

 
जिसकी वजह से उसे दर्द के साथ साथ बूर को रगड़ने में दिक्कत भी ं हो रही थी इसलिए वह मन ही मन तय कर ली कि कल वह मार्केट से लौटते समय दुकान से वीट क्रीम लेकर आएगी और अपने इन बालों को साफ करके बुर को वापस एकदम चिकनी कर लेगी वैसे भी उसे बुर पर ज्यादा बाल पसंद नहीं थे लेकिन उसकी उमंग ही खत्म हो चुकी थी इसलिए उसने बार बार बाल को साफ करने की जेहमत उठाना ठीक नहीं समझती थी, लेकिन अब उसे लगने लगा था कि बुर को समय समय पर साफ करके चीकनी कर लेना ही ठीक रहेगा।

अलका बदहवास होकर अपनी बुर को मसल रहीे थी और तभी फिर से उसे वीनीत के लंड की ठोकर याद आई और उसने झट से अपनी बीच वाली उंगली को आधी बुर में उतार दी , यह कब और कैसे हो गया उसे पता ही नहीं चला। अलका अपनी आंखें खोली अपनी ब** की तरह ही देख रही थी और बार बार बुर में अाधी घुसी हुई अपनी उंगली की तरफ देखकर सोच रही थी कि, यह ठीक नहीं है मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए यह गलत है अगर आज बहक गई तो अनर्थ हो जाएगा। उसका दिमाग उसे रोक रहा था लेकिन उसका मन नहीं मान रहा था उसके बदन की जरूरत उसके दिमाग का साथ नहीं दे रही थी। वैसे भी जब तू दास की लहर बदन में उतरती है तो अच्छे-अच्छों का दिमाग काम करना बंद कर देता है। क्या सही है क्या गलत है इसका फैसला कर पाना इंसान के लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसे में इंसान सिर्फ अपने बदन की जरूरत का ही साथ देता है बाकी सब बातें उसे बकवास लगने लगती है। अलका के साथ भी यही हुआ इस समय उसे बदन की प्यास मिटाने की जरुरत थी और अलका ने भी बदन की प्यास मिटाने को ही अग्रिमता दी। और ना चाहते हुए भी वीनीत को याद करके अपनी उंगली को बुर के अंदर बाहर करना शुरु कर दी। वैसे तो अल्का दो बच्चों की मां थी ईसलिए उसकी बुर फैली हुई होनी चाहिए थी लेकिन बरसों से उसने लंड का स्वाद नहीं चखी थी, उसकी बुर में बरसों से किसी भी लंड ने प्रवेश नहीं किया था इसलिए उसकी बुर धीरे धीरे टाइट हो चुकी थी। उसकी कसी हुई बुर में आधी उंगली भी चुस्त पड़ रही थी। धीरे धीरे अलका आनंद के अथाग सागर में परवेश कर गई थी।

हल्की-हल्की अंदर बाहर हो रही उंगली अब बड़ी तेजी से अंदर बाहर होने लगी थी और साथ ही साथ उसकी सांसे बड़ी तीव्र गति से चल रही थी। धीरे धीरे करके अलका ने पूरी उंगली को बुर में उतार दी और बड़ी तेज गति से अंदर बाहर करने लगी, रह-रहकर उसके मुंह से गरंम सिसकारी छूट पड़ रही थी। अब अलका के लिए यहां से पीछे हट जाना बड़ा ही मुश्किल था और वैसे भी वहां अब पीछे हटना नहीं चाहती थी। इसलिए वह धीरे धीरे करके इतनी ज्यादा चुदवासी हो गई की उसने अपनी दूसरी उंगली भी बुर में घुसा दि, अलका की रसीली बिर उसके काम रस एकदम लतपत हो चुकी थी। उस की उंगलियां बुर के काम रस में सनि हुई थी।

उत्तेजना के मारे उसे ऐसे लगने लगा था कि जैसे उसके बदन पर चिंटिया रेंग रही हो इसलिए वहां एक हाथ से अपने पूरे बदन को सहला रही थी बार-बार अपनी हथेली को गाऊन के ऊपर से ही चूचियों पर रखकर दबा रही थी अपनी उत्तेजना को समा पाना उससे मुश्किल हुआ जा रहा था इसलिए उसने एक हाथ से धीरे-धीरे करके अपने गाऊन को उतार फेंकी। वह बिस्तर पर एकदम निर्वस्त्र हो गई एकदम नंगी।

गजब की खूबसूरत लग रही थी अलका ,उसके बदन का मादक कटाव ,उसका उभार किसी के भी मन को डोला दे। वह कस कस के अपनी चुचियों को बारी-बारी से दबा रही थी। उसकी गर्म सिस्कारियों से उसका पूरा कमरा गूंज रहा था। उसकी गरम सिसकारीयो की आवाज उसके बच्चों के कानो तक ना पहुंच जाए अब इसकी भी जरा सी चिंता उसे नहीं थी। वह तो अपने आप में मस्त हो गई थी, आंखों को मूंद कर विनीत के द्वारा उसके साथ ली गई छुट छाट को याद करके अपनी बुर में बड़ी तेजी से उंगली को पेले जा रही थी। वह चरम सीमा के बिल्कुल करीब पहुंच गई थी। तभी उसकी सिसकारियां एकाएक तेज होने लगी।

आहहहहहहहहह.......ससससहहहहहहहह.....आहहहहहहहहहहहह.........ऊमममममममममम.....

ओहहहहहहहह.....ओहहहहहहहहह.....

ओह....।म्म्म्म्म्म्म्मा.......

इतना कहने के साथ ही उसकी बुर से कामरस का फव्वारा फुट पड़ा। उसकी पूरी हथेली काम रस में भीग गई। उत्तेजना के मारे उसकी सांसे उखड़ने लगी थी।

चुदास से भरा हुआ तूफान अपना काम कर चुका था।

बरसों से चुदास की आग में तप रही अलका का बदन काम रस के फव्वारे के छूटने के साथ ही कुछ हद तक ठंडा पड़ने लगा था। थोड़ी ही देर में अलका शांत हो गई उसकी उखड़ती सांसे दुरुस्त होने लगी। उसकी तड़प मीट चुकी थी वह आंखों को मु्दे हुए ही बिस्तर पर तकिए पर सर रखकर लेट गई और कब उसकी आंख लग गई उसे पता ही नहीं चला।

सुबह राहुल नहा कर तैयार हो गया तब तक उसकी मां उठी नहीं थी। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। इसलिए राहुल को चिंता होने लगी उसे ऐसा लगने लगा कि कहीं उसकी मम्मी भीगने की वजह से बीमार तो नहीं हो गई है। मन मे ढेर सारे सवाल लिए राहुल अपनी मम्मी के कमरे की तरफ जाने लगा। कमरे के पास पहुंचते ही उसने दरवाजे को खटखटाने के लिए जैसे ही उस पर अपनी हथेली रखा दरवाजा खुद-ब-खुद खुलता चला गया। दरवाजा खुला हुआ देखकर राहुल के मन में अजीब अजीब से सवाल पैदा होने लगे। वह दबे क़दमों से कमरे में प्रवेश किया और जैसे ही उसकी नजर सामने बिस्तर पर पड़ी। वह एकदम से दंग रह गया वह अपनी नजरें बिस्तर पर ही गड़ाये रहा, उसका गला सूखने लगा उत्तेजना के मारे उसके बदन मे कंपकंपी सी फैल गई। तुरंत उसके पजामे में तंम्बू तन गया। क्या करे नजारा ही कुछ ऐसा था। उसकी मम्मी एकदम निर्वस्त्र पूरी तरह से नंगी होकर पेट के बल एकदम बिंदास होकर बिस्तर पर लेटी हुई थी।

 
अपनी मां को नंगी लेटे हुए देखकर राहुल का दिमाग सन्न रह गया था उसके होश उड़ चुके थे। वह अपनी मां के कामुकं बदन को एक टक देखते ही रह गया' उसकी मां भी बड़े ही कामुक अंदाज में अपने पैरों को थोड़ा सिकोड़कर लेटी हुई थी जिसकी वजह से उसकी भारी भरकम गांड अपनी गोलाइयां लिए हुए उभर कर सामने आ रही थी । जिसे देखते ही राहुल तो क्या दुनिया के किसी भी मर्द के होश उड़ जावे।

वीनीत की भाभी के साथ बिताए हुए पल के बाद राहुल को हर औरत अब सेक्सी लगने लगी थी वह हर औरत को अपने अलग नजरिए से देखने लगा था। अपनी मम्मी को नग्नावस्था में देख कर आज पहली बार राहुल को लगने लगा था कि उसकी मम्मी बहुत ज्यादा ही खूबसूरत और बहुत ही सेक्सी है। राहुल का गला शुर्ख हो चला था उसकी आंखों की चमक उसकी ही मां की भरपुर गांड को देखकर बढ़ चुकी थी। उसका लंड अपनी ही मां को नंगी देखकर तुरंत हरकत में आ गया था और उसका लंड पूरी तरह से फुल टाइट होकर पेंट में तनकर तंबू बनाया हुआ था। जिस दिन से उसने विनीत की भाभी को चोदा था उसके बाद से उसे चोदने की इच्छा बहुत ज्यादा होने लगी थी और इस वक्त अपनी मम्मी को संपूर्ण नग्नावस्था में देखकर उसके चोदने की इच्छा और भी ज्यादा प्रज्वलित हो चुकी थी।

वह क्या करे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था, एक मन तो कह रहा था कि जाकर उसे जगा दे इसी बहाने वह अपनी मां के कामुक ओर मादक बदन को स्पर्श कर सकेगा लेकिन इस तरह से जगाना ठीक नहीं था ' क्योंकि उसे डर था कि मेरे इस तरह से जगाने पर उसकी मां अगर उठेगी तो अपनी नग्न हालत को देखकर शर्मसार हो जाएगी. और उसे भी भला बुरा कह सकती है। उसकी यह भी इच्छा हो रही थी कि बिना कुछ बोले बिस्तर पर जाकर मम्मी की बड़ी बड़ी गांड को पकड़कर पूरा लंड उसकी बुर में पेल कर चोदना शुरू कर दे जिस तरह से वीनीत की भाभी की बुर में लंड पेल कर चोदा था। यही मन में सोचते हुए राहुल पेंट के ऊपर से ही अपने टनटनाए हुए लंड को मसलना शुरु कर दिया। उसके मन में यह विचार आ रहा था कि ज्यादा कुछ नहीं तो पेंट को नीचे सरका कर टनटनाए हुए लंड को बाहर निकाल कर अपनी मां की खूबसूरत नंगे बदन को देखते हुए ही मुठ मार लूं, और उसने ऐसा किया भी अपनी पेंट की जीप खोला और अब उठे और उंगली का सहारा लेकर अपने मोटे ताजे लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगा लेकिन उसका लंड इतना ज्यादा मोटा और टाइट हो चुका था कि इस तरह से जीप के रास्ते बाहर आ पाना मुश्किल हो रहा था। इसलिए उसने पेंट की बटन खोलकर पेंट को ही नीचे जांघो तक सरका दिया। उसका लंड अपनी मां के नंगे बदन को देख कर और भी ज्यादा मोटा ताजा हो गया था और खुशी के मारे हवा में झूल रहा था। राहुल एकदम चुदवासा हो चुका था इसलिए वह अपने मोटे लंड को अपने मुठ में दबा लिया और आगे पीछे करके मुठ मारना शुरू कर दिया उसकी नशीली और चुदवासी आंखें अपनी मां के पुरे नंगे बदन पर ऊपर से नीचे तक घूम रही थी। वह दो-चार बार ही लंड को मुट्ठी में भर कर हिलाया ही था कि उसकी मां के बदन में हल्की सी हलचल हुई। हलचल होते ही राहुल तुरंत उल्टे पाव कमरे से बाहर आ गया उसने यह देखना भी ठीक नहीं समझा कि उसकी मम्मी जाग गई है या अभी भी सो ही रही है। राहुल अपने कमरे में खड़ा था उसका लंड अभी भी फूल टाइट था। कुछ पल पहले जो नजारा उसने अपनी मम्मी के कमरे में देखा था वह नजारा पूरी तरह से राहुल के दिमाग पर हावी हो चुका था, उस नजारे से पूरी तरह से निकल पाना तो बहुत मुश्किल था लेकिन उससे कुछ पल के लिए पीछा छुड़ाने का एक ही तरीका था। और राहुल ने भी वही किया उसने फिर से अपनी पेंट को नीचे जांघो तक सरका दिया , उसकी नज़र जैसे ही अपने टनटनाए हुए लंड पर पड़ी तो उसके चेहरे पर कामुक मुस्कान फैल गई। उसने तुरंत अपने मोटे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर कस लिया और आगे पीछे करके अपने लंड काे मुठीयाने लगा। राहुल की ऊत्तेजना पल पल बढ़ती जा रही थी। क्योंकि उसके जेहन में उसकी मां की बड़ी बड़ी गांड कि वह छवी बसी हुई थी जिसे देख कर वह उन्माद से भर चुका था।

वह अपने लंड को कसकर के मुट्ठीयाने लगा उसकी आंखें बंद थी और हाथ बड़ी ही तीव्र गति से आगे पीछे चल रहे थे। लंड तो उसका हथेली मे कसा हुआ था लेकीन ऊसकी कल्पना मे उसका लंड उसकी मम्मी की नमकीन बुर मे घुसकर कमर आगे पीछे कर रहा था।

इसलिए उस की उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच चुकी थी। राहुल के सर पर इस समय वासना सवार थी आज अगर जरा सा भी मौका मिलता तो वह अपनी मां की बुर लंड कर चोद दिया होता। लेकिन फिर भी वह यहां पर मुठ मारते हुए कल्पना मे ही अपनी मां को चोद रहा था। राहुल मुठ मारते हुए चरमसीमा के बिल्कुल करीब पहुंच चुका था कि अगले ही उसके मुंह से हल्की चीख निकल गई और लंड से फुवारा छुट़कर नीचे फ़र्श पर गिरने लगा। राहुल पूर्ण रुप से संतुष्ट हो चुका था।

वह कपड़े व्यवस्थित कर के कुछ देर वहीं बैठ गया बासना का तूफान शांत हो चुका था,कुछ देर पहले उस की जो मनोस्तिथि थी उस से उबर चुका था'

वासना का तूफान शांत होने पर उसे अपनी हरकत पर क्रोध आने लगा उसका मन ग्लानीे से भर गया' वह अपने आप को ही कोसने लगा की उसने ऐसी गंदी हरकत कैसे कर दी अपनी ही मम्मी के बारे में इतना गंदा गंदा सोच कर हस्तमैथुन कैसे कर लिया। उसका मन पछतावे से भर गया और आइंदा ऐसी गंदी हरकत कभी भी नहीं करेगा इसकी कसम भी खा लिया।

और वहीं दूसरी तरफ अलका की आंख खुल चुकी थी और अपनी हालत पर गौर करते ही शर्म की लाली उसके चेहरे पर बिखर गई, अपने बिस्तर पर अपने आप को नंगी पाकर भी वह अपने बदन को चादर से ढंक लेने की जरूरत नहीं समझी क्योंकि वह जानती थी कि कमरे में उसे कौन देखने वाला है , लेकिन वह यह कहां जानती थी कि देखने वाले ने तो उसका सब कुछ देख चुका है, और उसके नग्न बदन रुपी खजाने को देखने वाला दूसरा कोई और नहीं बल्कि उस का अपना ही बेटा था जो कि उस के नंगे बदन को देखकर इतना उत्तेजित हो गया था कि मुठ मारकर अपने आप को शांत करना पड़ा।

अलका एकदम बिंदास होकर एकदम नंगी बिस्तर पर बैठी हुई थी और अपनी बाहें फैलाकर अंगड़ाई लेते हुए अपने आलस को मरोड़ रही थी, उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव थे के चेहरे पर जरा सा भी कल जो हुआ था उसको लेकर बिल्कुल भी तनाव नहीं था। खुश नजर आ रही थी आज अलका और खुश हो भी क्यों ना आज पहली बार उसने अपने लिए अपने मन की सुनी थी, आज बरसो बाद उसने वह की थी जो उसके मन ने कहा था और जो उसके बदन की जरूरत थी। अलका आरस मरोड़ कर बिस्तर से नीचे उतर कर खड़ी हुई नीचे जमीन पर उस का गाउन पड़ा हुआ था अपने गाउन को देख कर वो फिर से मुस्कुराएं क्योंकि उसे तुरंत याद आ गया कि रात को इतनी ज्यादा उत्तेजित और उन्माद से भर चुकी थी कि कब उसने अपने बदन से एक-एक करके सारे कपड़ों को उतार के नीचे फेंक दी उसे पता ही नहीं चला। अलका ने अपना काउंट उठा कर कैसे अपने बदन पर डाल ली और कमरे के बाहर आ गई।

कमरे में बैठे बैठे काफी समय बीत चुका था वह कमरे से बाहर आया तो देखा कि उसकी मम्मी रसोई घर में नाश्ता तैयार कर रही थी, राहुल को सब कुछ नॉर्मल ही लग रहा था वह रसोई घर में प्रवेश किया और अपनी मम्मी से बोला।

गुड मॉर्निंग मम्मी।

गुड मॉर्निंग बेटा( कढ़ाई में चमची चलाते हुए बोली)

आज इतनी लेट तक सोए रहे मम्मी तबीयत तो ठीक है ना। ( इतना कहने के साथ ही वह मटके से पानी निकाल कर पीने लगा। उसकी मम्मी भी जवाब देते हुए बोली।)

हां बेटा थोड़ी थकान सी महसूस हो रही थी और वैसे भी कल भीगने की वजह से थोड़ी सर्दी हो गई है इसलिए आज आंख लग गई थी। ( इतना कहने के साथ ही वह हरी मिर्ची को काटने लगी और राहुल अपनी मम्मी के जवाब से संतुष्ट होकर रसोई घर से बाहर आ गया। राहुल के जाते ही अलका को फीर से कल की और रात की बाते याद आने लगी, उत्तेजनात्मक पल को याद करके एक बार फिर से उसकी पेंटी गीली होने लगी।

उसे बीते पल को याद करने में बड़ा ही रोमांच लग रहा था और मजा भी आ रहा था। बातों ही बातों में अलका ने नाश्ता तैयार कर ले और राहुल और सोनू को नाश्ता दे कर खुद अपने कमरे में जाकर ऑफिस के लिए तैयार होने लगी। सज धज कर तैयार होते ही अलका फिर से आसमान से उतरी कोई हूर लगने लगी।

हाथ में पर्श़ लिए अलका अपने कमरे से बाहर आई राहुल की नजर अपनी मम्मी पर पड़ी तो वह देखता ही रह गया, पहले भी हो इसी तरह से तैयार होकर सुंदर लगती थी लेकिन राहुल के लिए आज देखने का रवैया कुछ और था। विनीत की भाभी के साथ शारीरिक संबंध के बाद कहीं और तो को देखने का उसका नजरिया बदल गया था जो कुछ भी बचा था आज सुबह अपने ही मम्मी को संपूर्ण रुप से नग्नावस्था में देखकर वह भी बदल गया।

( अलका आज कुछ जल्दी मे हीं थी' इसलिए वह राहुल को हिदायत देते हुए बोली।)

बेटा आज मुझे देर हो रही है तुम और सोनू ठीक से स्कूल चले जाना और जाते जाते दरवाजे पर लोक मारते जाना' ठीक है ना।

ठीक है मम्मी आप चिंता मत करिए आप आराम से जाइए।( राहुल जवाब देते हुए बोला और राहुल कि मम्मी राहुल के जवाब से संतुष्ट होकर प्यार से दोनों बच्चों पर अपना हाथ फेरते हुए कमरे से बाहर चलीे गई। ना चाहते हुए भी राहुल की नजर की मम्मी की बडी़े-बड़ेी मटकती हुई गांड पर चली गई जो की चलते समय गजब की थिरकन लिए हुए थी। अपनी मम्मी की मटकती हुई गांड को देखकर राहुल के लंड ने फिर से अंगड़ाई लेना शुरु कर दिया। राहुल इससे ज्यादा और कुछ सोच पाता इसके पहले ही उसकी मम्मी उसकी आंखों से दूर होती चली गई। लेकिन जब तक उसकी मम्मी उसकी आंखों से ओझल होती तब तक उसकी मटकती गांड ने अपना कमाल दिखा चुकी थी और तुरंत राहुल के लंड में पूर्ण रुप से तनाव आ चुका था।

 
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