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होता है जो वो हो जाने दो complete

अपनी मम्मी के कारण पेंट में बने हुए तनाव पर नजर पड़ते ही एक बार फिर से राहुल को अपने ऊपर क्रोध आ गया अपने आप पर गुस्सा करने लगा और अपना ध्यान दूसरी तरफ बंटाने लगा। राहुल और सोनू भी दरवाजे पर लॉक लगाकर अपने अपने स्कूल की तरफ चल दीए।

आज क्लास में विनीत बड़ा ही गुम सुम बैठा हुआ था गुमसुम क्या था वह सिर्फ अलका के ख्यालों में ही खोया हुआ था। उसकी आंखोे के सामने कल की बीती सारी घटना के वह लाजवाब पल एक एक करके नजर आ रहे थे। उसके बदन मे झनझनाट फैल गई जब उसे याद आया कि उसने पहली बार एक बहाने से कैसे उसकी चूची को स्पर्श किया था, ऊफफफफ.... गजब की नरमी और गुदाजपन था उसकी चूची में, वीनीत का लंड टनटना के खड़ा हो गया जब उसे वह पल याद आया जब उसने अंधेरे का लाभ उठाते हुए अलका को अपनी बाहों में कस के भींच लिया था और लगे हाथ अपने दोनों हथेलियों काे अलका की गदराई हुई बड़ी-बड़ी गांड पर रख के कस कस के दबाए जा रहा था और पूरा मन बना लिया था की आज तो अलका को चोदकर ही रहेगा और इसीलिए उसने अलका की साड़ी को कमर तक उठा कर अपने लंड को बाहर भी निकाल लिया था अलका को घुमाकर इससे ज्यादा और कुछ कर पाता इससे पहले ही मोटरगाड़ी की लाइट में सारा मजा किरकिरा कर दिया था। वह उस समय इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि अगर अलका वहां से भाग ना खड़ी हुई होती तो उसे वो मोटर गाडी वाले का जरा भी ़ परवाह नहीं था, विनीत अलका को वही खुली सड़क पर ही चोद दीया होता, लेकिन उसका नसीब खराब था । घर पर पहुंचने पर भी उस की उत्तेजना जरा सी भी कम नहीं हुई थी । अलका के बदन की गर्मी का गरम एहसास उसे उत्तेजित किए हुए था। तभी तो घर पहुंचते ही जैसे ही उसकी भाभी चुदवासी होकर उसके बदन से लिपटी तो वीनीत ने तुरंत अपनी भाभी को अलका समझ कर अपनी बाहों में भीच लिया

और बिस्तर पर पटक कर ऐसी जबरदस्त चुदाई किया कि उसकी भाभी का पोर पोर दर्द करने लगा था।

वह क्लास में बैठे-बैठे भी उस मोटर गाड़ी वाले को कोस ही रहा था कि पीछे से अपने कंधे पर थपथपाने से उसकी तंद्रा भंग हुई। पीछे मुड़कर देखा तो राहुल था। राहुल उसे यूं गुमसुम होकर बैठा हुआ देख कर बोला।

क्या हुआ यार तू इतना उदास क्यों है? क्या कोई प्रॉब्लम है क्या।( इतना कहने के साथ ही राहुल उसके बगल में बैठ गया। अब वीनीत उसे बताएं भी तो क्या बताएं, पहले तो वह सब कुछ बता भी देता था लेकिन ना जाने क्यों अब राहुल से वह अपनी प्राइवेट बातें नहीं बताता था। इसलिए सर दुखने का बहाना कर के राहुल से कन्नी काट लिया। राहुल भी उससे ज्यादा पूछताछ करना ठीक नहीं समझा। तो राहुल का पूरा ध्यान उसकी मम्मी पार ही लगा हुआ था उसकी मम्मी के ऊपर से ध्यान हटता दो विनीत की भाभी पर चला जाता, दोनों औरतों की वजह से आप उसका ध्यान पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था।

राहुल के बदन मे चुदाई की खुजली मच रही थी। वह जानबूझकर विनीत से नोट्स ले जाने के बारे में बोलता था ताकि विनीत नोट ले जाए तो उसे लेने के लिए वह भी वीनीत के घर जा सके। लेकिन विनीत को अभी नोट्स की जरूरत नहीं थी इसलिए वह इंकार कर देता।

दूसरी तरफ मधु थी जिसकी जवानी ऊफान मार रही थी

जिसकी बुर में आग लगी हुई थी राहुल के लंड को लेने के लिए, लेकिन उसे कोई मौका हाथ नहीं लग रहा था।

राहुल से चुदवाने के लिए वह किसी भी हद तक तैयार थी।

रिशेेष में वह मौका देखकर राहुल से बोली।

राहुल तुमसे मुझे जरूरी काम था क्या तुम मेरी मदद करोगे।( मधु दौड़ते हुए राहुल के पास गई थी इस वजह से वह हांफ रही थी। और तेज तेज सांस लेने की वजह से उसकी बड़ी-बड़ी गाेलाईयां ऊपर-नीचे हो रही थीे जिस पर राहुल की नजर पड़ ही गई। और राहुल भी थूक निगलते हुए एकदम मधु की चूचियों को देखने लगा। मधु की तेज नजरों ने राहुल की नजरों के निशाने को भांप ली और अंदर ही अंदर खुश होने लगी। राहुल एकटक उसकी चूचियों को ही देखे जा रहा था तो मधु मुस्कुराते हुए फिर से बोली।)

क्या हुआ राहुल मेरी मदद करोगी या नहीं?

( राहुल हड़ बड़ाते हुए बोला।)

हां हां कककक...क्यों नही। जरूर करूंगा तुम्हारी मदद लेकिन कैसी मदद। ( राहुल को भी नहीं पता था कि मधु को किस तरह की मदद चाहिए थी । और वैसे भी मधु को तो किसी और चीज में मदद चाहिए थी लेकिन इस तरह से खुल्लम खुल्ला तो बोल नहीं सकती थी इसलिए कोई ना कोई बहाना तो चाहिए ही था। और पढ़ाई के बहाने से बेहतर बहाना और क्या हो सकता था इसलिए वह बोली।)

मुझे मैथ्स में कुछ प्रॉब्लम पड़ रही है जिसका सोल्युशन मिल नहीं रहा, क्या तुम मैथ के प्रश्नों को हल करने में मेरी मदद करोगे।

हां हां जरूर करूंगा यह तो मेरे बाएं हाथ का खेल है।

तो चलो वही ऊपर की मंजिल पर जहां पर सारी क्लास खाली रहती हैं वहां कोई शोर शराबा भी नहीं होगा और मैं ठीक से समझ भी लूंगी। ( ऊपर की क्लास की बात सुनते ही राहुल का रोम रोम संजना गया क्योंकि कुछ दिन पहले ही मधु उसे ऊपर की क्लास में ले गई थी और क्लास में जो उसने की थी उसकी यादें अभी भी उसके मानस पटल पर ताजा थी। राहुल के लिए मना करने का सवाल ही नहीं उठता था इसलिए वह तुरंत तैयार हो गया क्योंकि उसे भी मधु का साथ बहुत ही प्यारा लगता था।

दोनों नजरे बचाकर ऊपर की मंजिलें पर चले गए।

ऊपर की मंजिल पर पहुंचते ही नीलू ने राहुल को क्लास में ले गई। नीलू के करीब होते ही राहुल की धड़कन बढ़ जाती थी, एक तरह से उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती थी। ऊपर की मंजिल पूरी तरह से खाली थी कोई भी विद्यार्थी नहीं था। नीलू को अक्सर ऐसे ही मौके की तलाश रहती थी। नीलू और राहुल दोनों एक ही बेंच पर बैठ गए। बेंच पर बैठते ही राहुल ने बोला।

लाओ बताओ तो नीलू तुम्हें कौन से प्रश्न में उलझन हो रही है। ( अब नीलू क्या कहें उसे कोई उलझन हो ताे ना बताए लेकिन फिर भी उसने झूठ मूठ का मैथ्स की बुक खोलकर एक सवाल राहुल को बता दी।

राहुल ने किताब अपनी तरफ खींच कर नोट में सवाल हल करने लगा सवाल हल करते जाता था और नीलू को समझाता भी जाता था लेकिन नीलू का ध्यान किधर था उसे सवाल हल करना होता तो ना ध्यान देती। उसे तो बस बहाना चाहिए खराब होने के नजदीक रहने का और हमेशा मौके की ही ताक में रहती थी। नीलू की आंखों के आगे तो हमेशा राहुल के पेंट में बना हुआ तंबू ही नजर आता था। वह बहुत दिनों से तड़प रही थी राहुल के लंड को लेने के लिए लेकिन उसकी नसीब खराब थी कि मौका मिलते हुए भी वह मौके का लाभ नहीं उठा पा रही थी कोई ना कोई उलझन सामने खड़ी हो ही जा रही थी। आज इस मौके का लाभ उठाना चाहती थी। राहुल नीलू के मन में क्या चल रहा था इन बातों से वह बिल्कुल भी बेखबर था।

नीलू मन ही मन में कोई न कोई बहाना ढूंढ ही रही थी कि क्लास में राहुल के साथ थोड़ा बहुत मजा ले लिया जाए लेकिन कैसे? वह मन ही मन में राहुल को कोस भी रही थी कि कैसा लड़का है एक सुंदर, जवानी से भरपूर नवयौवना उसके सामने अकेले ही बैठी है और यह मौका है कि सवाल हल करन मेे लगा है इस उमर में तो इसको जवानी के सवाल हल करने चाहिए न की किताबों के। इसकीे जगह कोई ओर लड़का होता तो ना जाने कब से मेरे ऊपर टूट पड़ता मेरी जवानी के रस को अपने मोटे ताजे लँड से खींच खींचकर चूस लिया होता।

यही सब सोच-सोच कर परेशान हुए जा रही थी उसे कोई बहाना सुझ नहीं रहा था। बहुत दिनों बाद जो उसे मौका मिला है उसे हांथ से गंवाना नहीं चाहती थी ।

नीलू आंखें मटका मटका कर राहुल के चेहरे को गौर से देखे जा रही थी राहुल था कि सवाल हल करने में ही मस्त था उसने एक बार भी नजरें उठाकर नीलु की तरफ नहीं देखा था।

तभी उसने अपने पैर से सैंडल को पेऱ का सहारा लेकर उतार दी और उस पैर को राहुल की टांगो पर रगड़ने लगी। अपने पैर पर नीलू के पैर की रगड़ने को महसूस करके राहुल आश्चर्यचकित होकर नीलू की तरफ देखने लगा और नीलू थी कि राहुल को देखते हुए मुस्कुराए जा रही थी।

नीलू ने अपने पैर के अंगूठे के बीच राहुल के पेंट की किनारी को दबाकर हल्के से पेंट को ऊपर की तरफ उठाने लगी' और उतने से भाग पर अपनी नरम नरम ओर मुलायम गोरी टांग को रगड़ने लगी। नीलू की हरकत पर राहुल पूरी तरह से गनगाना गया' , नीलू की आंखों में अजीब सी ख़ुमारी छाई हुई थी उसके चेहरे पर बिखरी हुई कामुक मुस्कान किसी के भी कलेजे पर छुरिया चलाने के बराबर था। नीलु राहुल की तरफ देखते हुए बड़े ही मादक अंदाज में अपने लाल-लाल होठों को दांत से चबाने लगी। नीलू का यह रुप देख कर राहुल उत्तेजना से भर गया उसकी जांघों के बीच फन दबाए बैठे मुसल मे सुरसुराहट होने लगी। नीलू लगातार अपने पैरों का कमाल दिखाई जा रही थी राहुल का गला सुर्ख होने लगा था अजीब से सुख की अनुभूति करके उसके बदन में कंपकंपी सी मची हुई थी।

नीलू के लगातार प्रयास करने पर भी राहुल बिना कुछ किए सिर्फ मुक दर्शक बनकर नीलू की हरकतों का आनंद उठा रहा था, बल्कि राहुल की जगह कोई और होता है तो कब से इस इशारे को अपने लिए आमंत्रण समझ कर टूट पड़ता। लेकिन नीलु समझ चुकी थी कि जो भी करना था उसे ही करना था। अब इससे ज्यादा वह क्या करें कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन इतना तो उसे ज्ञात हो चुका बात है कि राहुल पूरी तरह से ऊत्तेजीत हो चुका था। और उत्तेजित हुआ है तो उसका लंड भी पूरी तरह से टन टना कर खड़ा हो चुका होगा। यही सोचकर नीलू के मन में गुदगुदी मचने लगी।

उसने तो मन ही मन में राहुल के मोटे तगड़े लंड का चित्रांकन करके मस्त होते हुए अपनी बुर को पनिया चुकी थी। वह मन में ही सोच रही थी कि राहुल की जगह अगर कोई और लड़का होता तो बिना बोले ही उसकी पनियाई बुर में लंड डालके चोद दीया होता।

नीलू अभी भी अपनी हरकतों से राहुल को बहकाने की कोशिश कर रही थी पर ऐसा नहीं था कि राहुल का हक ना रहा हो राहुल के चेहरे से साफ पता चल रहा था कि वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका है। उसका चेहरा उत्तेजना के कारण तमतमा गया था। वह थूक निकलते हुए नीलू को ही घूरे जा रहा था और नीलू थी की अपने होठों को दांतों से चबाते हुए अपनी उत्तेजना को दबाए जा रही थी। क्या करें उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था लेकिन कुछ तो करना ही था ऐसा मौका वह हाथ से जाने भी नहीं देना चाहती थी। तभी उसके दिमाग में एक युक्ति सूझी और वह तुरंत बेंच पर से उठ खड़ी हुई।

खड़े होते ही मैं उसी जगह पर उछलने लगी , जैसे कि उसके कपड़ो में कुछ घुस गया हो और वाकई में वह उछलते हुए अपने दोनों हाथो को पीछे पीठ की तरफ करके खुजाते हुए राहुल से बोली।

ककककककककुछ काट रहा है कुछ काट रहा है राहुल मुझे....

( नीलू का चिल्लाना सुनकर वह भी झट से बेंच पर से खड़ा हुआ और घबराते हुए बोला।)

क्या काट रहा है नीलु कहां काट रहा है?

( अभी भी जोर-जोर से उछलते हुए अपनी हथेली से पीठ को खुजला रही थी और बोली।)

यहां पीठ पर राहुल कुछ बहुत जोरों से काट रहा है मुझ से रहा नहीं जा रहा। कुछ करो राहुल कुछ करो।

 
अब इसमे राहुल क्या कर सकता था उसे पीठ में कुछ काट रहा था और वह ऐसे में कर भी क्या सकता था वह बस बेवजह हवा में हाथ पैर मार रहा था कोई चालाक और होशियार लड़का होता तो इतने से भी फायदा उठाते हुए नीलु को उसकी कमीज उतार देने के लिए कहता, लेकिन शर्मिले राहुल से इतना सा भी नहीं कहा गया। नीलू उसके भोलेपन पर खूब नाराज हुई वह उसे खुलकर डांटना चाहती थी लेकिन मजबूरीवश डांट ना सकी। लेकिन तभी वह वक्त गंवाना नहीं चाहती थी इसलिए खुद ही अपनी कमीज को नीचे से पकड़कर ऊपर की तरफ सरकाने लगी जैसे कि वह उतार रही हो राहुल को तो कुछ समझ में नहीं आया क्योंकि जैसे जैसे कमीज ऊपर की तरफ सरकती गई वैसे वैसे नीलू की दूधिया नंगी पीठ राहुल की आंखों के सामने नंगी होती चली गई। राहुल ने सोचा कि नीलू बस पीठ तक की ही कमीज को उठाएगी ताकि मैं देख सकूं कि उसे पीठ पर क्या काट रहा है। लेकिन तभी राहुल की आंखें आश्चर्य से फटी की फटी रह गई जब उसने अपनी कमीज को पूरी तरह से अपने बदन से अलग कर दी। राहुल की तो सांसे थम गई उसे समझ में नहीं आया कि यह नीलू उसकी आंखों के सामने इस क्लास में इस तरह की हरकत क्यों कर रही है। पूरी कमीज़ उतारने की क्या जरूरत थी लेकिन राहुल थोड़ा बुद्धू का बुद्धू ही था उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि जवान लड़की किसी लड़के के सामने ऐसी हरकतें

और अपनी कमीज क्यों उतारती है? जबकि उसने विनीत की भाभी के संग औरत के बदन की खुशबू क्या होती है औरत की चुदाई का मजा क्या होता है सब कुछ ले चुका था फिर भी अभी वह नादान ही था। नीलु काली रंग की ब्रा पहने हुए थीे उसकी दूधिया नंगी पीठ राहुल की तरफ ही थी और वह उंगली के इशारे से राहुल को दिखाने लगी थी की किस जगह पर उसे कुछ काट रहा है वह जिस जगह पर दिखा रही थी वह ब्रा की पट्टी के ठीक नीचे आ रही थी। जिसे देखने के लिए राहुल को या तो ब्रा का हुक खोलना पड़ता या तो पट्टी थोड़ा ऊपर सरका कर देखना पड़ता, वह जानबूझकर बार-बार राहुल से आग्रह कर रहे थे कि देखो राहुल कौन सी कीड़ी काट रही है जो मुझे इतना दर्द हो रहा है।

नीलू की नंगी पीठ और उसकी काली रंग की ब्रा की पट्टी को देख कर ही राहुल का लंड तनकर पेंट में तंबू बना चुका था। नीलू को इस रुप में देख कर राहुल उन्माद से भर चुका था , वॉइस शर्मा भी रहा था लेकिन नीलू के बार-बार आग्रह करने पर वह नीलू की तरफ बढ़ा नीलू गर्दन घुमा कर राहुल की तरफ ही देख रही थी वह देखना चाहती थी कि अब राहुल क्या करता है।

राहुल नीलू के ठीक पीछे खड़ा था और कांपते हाथों से नीलू की पीठ पर अपनी हथेली रखा ही था की नंगी पीठ पर हथेली रखते हैं उसका बदन उत्तेजना से झनझना गया, नीलू का भी यही हाल था स्कूल के इस खाली क्लास में नीलू राहुल की हथेली का अपनी नंगी पीठ पर स्पर्श पाते ही वह भी पूरी तरह से चुदवासी हो गई। समय बहुत कम था और आज इतने कम समय में उसे थोड़ा बहुत लुफ्त उठाना ही था। इसलिए वह राहुल को निर्देश देते हुए बोली, राहुल यहां ( उंगली से रगड़कर दिखाते हुए) पिक्चर का पर देखो पट्टी के नीचे कुछ काट रहा है।

राहुल भी उस काले रंग की ब्रा की पट्टी को उंगली से ऊपर की तरफ सरकाने की कोशिश करने लगा लेकिन ब्रा इतनी टाइट थीै कि उसकी पट्टी ऊपर की तरफ खसक नहीं रही थी। नीलू राहुल की मनोदशा को भांप गई इसलिए वह बोली।

राहुल पट्टी बहुत टाईट है इसलिए शायद खसक नहीं रही है तुम पट्टी के हुक को खोल दो मुझे उस जगह पर बहुत ज्यादा जलन हो रही है,

राहुल को लगने लगा था कि नीलू को वाकई में बहुत ज्यादा जलन हो रही होगी तभी तो वह इतना तडप रही है। इसलिए अब आपने कांपते हाथों से ब्रा की हुक को खोलने की कोशिश करने लगा। ब्रा का हुक दोनों हाथों से पकड़कर आमने-सामने खींचने लगा, वाकई में ब्रा की पट्टी बहुत ज्यादा टाइट थी वैसे भी नीलु की आदत थी की वह अपनी चुचियों के कप की साइज से कम नाप की ब्रा पहनती थी, ताकि उसकी पड़ी-पड़ी गोल चुचीयां टाइट रह सके। आखिरकार राहुल की मेहनत रंग लाई और अगले ही पल उसने ब्रा के हुक को खोल दिया। हुक के खुलते ही ब्रा कि दोनों पत्तियां साइड में हो गई और पीछे की पूरी पीठ एकदम नंगी हो गई। राहुल की आंखों में कई बोतलों का नशा चढ़ने लगा उसका लंड पेंट के अंदर गदर मचाए हुए था।

नीलू भी ऐसे माहौल में कम उत्तेजित नहीं थी उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी पैंटि गीली होने लगी थी। उसकी बुर में भी खुजली मची हुई थी, नीलु गर्दन को पीछे की तरफ घुमाकर राहुल की तरफ देख भी रही थी वह देखना चाहती थी कि राहुल क्या करता है उसकी नंगी पीठ को देखकर राहुल में किस तरह का बदलाव आता है।

राहुल का मुंह खुला का खुला रह गया था वह नजरें झुकाए अपनी नजरों को नीलू की नंगी पीठ पर ही टीकाए हुए था कभी कभार उसकी नजर पीठ से होते हुए कमर के नीचे भरावदार नितंब पर भी चली जा रही थी जिससे राहुल की उत्तेजना में पल पल बढ़ोतरी हो रही थी। राहुल की उत्तेजना देख कर नीलू को बहुत खुशी हो रही थी। तभी राहुल के अंदर कामोत्तेजना ने अपना असर दिखाना शुरू किया और वह हल्के से अपनी हथेली को नीलू की नंगी पीठ पर फिराने लगा। जैसे ही राहुल ने नीलु की नंगी पि ठ पर अपनी हथेली को फिराया वैसे ही तुरंत उत्तेजना से सराबोर होकर नीलू अपनी आंखों को मूंद ली। कामातूर नीलू जो कि ना जाने कितने ही लड़कों के साथ हमबिस्तर हो चुकी थी। उसके लिए इतनी सी बात कोई बडे मायने नहीं रखती थी । ना जाने कितने लड़कों ने उसकी चुदाई कर चुके थे ना जाने उसके बदन पर कहां कहां हाथ और मुंह दोनों लगा चुके थे लेकिन फिर भी आज राहुल के मात्र हथेली के छुअन से नीलु का पूरा वजूद कांप गया था राहुल में जरूर कोई अनोखी बात थी जिसे नीलू की अनुभवी आंखों ने पहचान ली थी। राहुल हल्के-हल्के उसकी पीठ पर अपनी हथेली को फेरने लगा दूधिया नंगी पिठ का रेशमी मुलायम अहसास का असर राहुल को उसकी जांघो के बीच टनटनाए हुए लंड में दिखने लगा था।

सनी लियोन को भी मजा आने लगा था लेकिन वह जानती थी कि समय बहुत ही कम है और अगर ऐसे ही केवल हांथ फिराने में समय निकल गया तो इसका यहां आना व्यर्थ होगा। इसलिए वह खुदही झट से अपनी ब्रा को निकाल दी, और इस तरह से झटकने लगी जैसे कि कपड़े में चींटी हो, इसलिए नीलू के इस तरीके पर राहुल को बिल्कुल भी शक नहीं हुआ। और नीलू वही उछलकूद मचाते हुए अपनी ब्रा को झटकने लगी। राहुल उसे देखने लगा ' नीलू का युं उछल-कूद मचाना राहुल को अच्छा लग रहा था राहुल उसके पीछे के भाग पर पूरी तरह से अपनी नजर ऊपर से नीचे तक घुमा रहा था

उछलने पर उसकी गदराई हुई गांड कि थिरकन देखकर राहुल का मन डोलने लगा था। उसके लंड में एेंठन आना शुरु हो गया था की तभी नीलू ब्रा को झटकते हुए राहुल की तरफ घूम गई, नीलू काे उसकी तरफ घूमते ही राहुल के तो जेसे होश ही उड़ गए उसका दिमाग सुन्न हो गया। राहुल की नजर सीधे ऊपर नीचे हो रही नीलू की दोनों गोलाइयों पर चली गई, एक बार नजर उस पर पड़ी तो बस राहुल की नजरे गड़ी की गड़ी रह गई और नीलू थी की राहुल की तरफ ध्यान दिए बिना ही जानबूझकर ब्रा को झटकते ही जा रही थी ' लेकिन नीलू यह अच्छी तरह से जानती थी कि राहुल की नजर कहां है? उसकी गोल गोल चुचियां कुछ ज्यादा ही उछाल मार रही थी। राहुल उत्तेजना से सरो बोर हो चुका था। तभी नीलू की नजर राहुल पर पड़ी और ऐसे बर्ताव करने लगी कि जैसे कि यह सब अनजाने में ही हुआ है और वही शर्मिंदा होकर ठिठक गई, वह झट से ब्रा का साहारा लेकर अपनी चुचियों को ढंकने की नाकाम कोशिश करने लगी। ढंक क्या रही थी बल्कि वह और भी ज्यादा राहुल का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने में लगीे थी। राहुल एकटक नीलू के नंगे बदन को निहारे जा रहा था तभी नीलू और राहुल की नजरे में आपस में टकराई, दोनों एक दूसरे की आंखों में खोने लगे दोनों की आंखों में अजब सा नशा छाने लगा था। नीलू हाथों में ब्रा पकड़े और उससे चुचियों को ढकने की नाकाम कोशिश करते हुए राहुल की तरफ बढ़ी दोनों की नजरें एक दूसरे के ऊपर से हट नहीं रही थी। नीलू राहुल के बिल्कुल करीब पहुंच गई दोनों अजीब से आकर्षण में बंध चुके थे। तभी नीलू ने अपने होठों को राहुल के होठों की तरफ बढ़ाई राहुल मे भी जैसे हिम्मत आ गई हो ऐसे वह भी अपने होंठ को नीलु के होठो की तरफ बढ़ाया, नीलू यह मौका नहीं खोना चाहती थी इसलिए उसने तुरंत अपने तपते हुए होंठ को राहुल के होंठ पर रखकर चूमने लगी। राहुल तो खुशी से एकदम गदगद हो गया।

नीलू खुद राहुल के होठों को अपने होठों के बीच भरकर चुसे जा रही थी। नीलू की एक दम उत्तेजित हो चुकी थी उसके हाथों से ब्रा छूट कर नीचे गिर गई। उत्तेजना की वजह से राहुल की आंखें मुंद चुकी थी। नीलू एक पल भी गांव आना ठीक नहीं समझी और उसने तुरंत राहुल के दोनों हाथों को पकड़ कर खुद ही अपनी चुचियों पर रख दी, राहुल का मन प्रसन्नता से भर गया उसके हाथों में भी ऐसे छुपा हुआ खजाना हाथ लग गया हो इस तरह से वह खुद ही उस खजाने को लूटने से अपने आप को रोक नहीं पाया और वह नीलू की दोनों को गोलाइयो को अपनी हथेली में हल्के हल्के भरकर दबाने लगा।

आाहहहहहहहह.... गजब का गरम और मुलायम अहसास था नीलू की चुचियों में, राहुल को तो जैसे सीजनल अाम मिल गया हो इस तरह से दबाना शुरु कर दिया। राहुल को तो मजा आ ही रहा था नीलू भी कम लुत्फ नहीं उठा रही थी। वेरावल के होठों से और उसकी हथेलियों से भरपूर आनंद ले रही थी। क्लासरूम में दोनों एक दूसरे में खोए हुए थे राहुल तो मदमस्त हुआ जा रहा था उसे बार बार वीनीत ं की भाभी याद आ जा रही थी जिससे कि उसके लंड में खून का दौरा काफी बढ़ जा रहा था। ऐसा लगने लगा था कि उसका लंड पेंट फाड़ कर बाहर ही चला आएगा।

राहुल पूरी तरह से आवेश में था उत्तेजना का नशा उसके सर पर हावी हो चुका था वह लगातार नीलू की चुचियों दवाई जा रहा था । नीलू भी उसके होठों को चुसते हुए उसके बदन के सटी जा रही थी। वह अपने दोनों हाथों को राहुल की पीठ पर सहलाते हुए अपनी दोनों हथेलियों के नीचे की तरफ ्लाई और कमर से नीचे राहुल के नितंब पर दोनों हथेलियों को रख कर उसे अपने बदन से सटाने के लिए अपनी तरफ दबाई ही थी की नीलू का खुद का बदन झनझना गया उसके बदन में जैसे चीटियां रेंगने लगी, उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी क्योंकि जैसे ही नीलू ने राहुल के नितम्ब पर हथेली रखकर उसे अपनी तरफ दबाई थी। वैसे ही तुरंत राहुल के पेंट में बना तंबू सीधे जाकर नीलू की जांघेा के बीच बुर वाली जगह से टकरा गया' नीलू के तो होश ही उड़ गए क्योंकि तंबू का स्पर्श कुछ ज्यादा ही दमदार था जिसका असर सीधे उसकी बुर की गहराई में उतर गई।

नीलू की बुर ने छलछला के दो चार मदनरस की बुंदे पेंटी मे ही टपका दी।

राहुल भी जानता था की उसका लंड सलवार के ऊपर से ही कोन सी जगह ठोकर मार रहा था। इसलिए तो राहुल भी अपने आप को संभाल नहीं पाया और कस कस के नीलू की चूचियों को मसलने लगा।

नीलू राहुल के स्तन मरदन और लंड की ठोकर को अपनी बुर पर महसुस करते ही एकदम से चुदवासी हो गई,और कामातुर होकर पेंट के ऊपर से ही राहुल के लँड को अपनी हथेली मे दबोच ली।

आहहहहहहहहहह.......राहुल के मुंह से अनायास ही सीसकारी छुट गई। अजीब से सुख की अनुभुति के एहसास से गनगना गया। नीलु भी एेसे दमदार लंड को पेंट के ऊपर से दबोचते ही गदगद हो गई ,ऊसकी पनीयाई बुर भी खुशी से फुलने पिचकने लगी। पेंट के ऊपर से ही नीलु लंड की मजबुती को भांप गई। ऊसने एक पल भी गंवाए बिना ही पेंट की बटन को खोलकर चड्ढी सहीत एक झटके मे जांघो तक खींच दी। पेंट के नीचे सरकते ही जो नजारा आंखो के सामने था,वह नीलु के होश उड़ाने के लिए काफी था।

राहुल का टनटनाया हुआ लंड पेंट ऊतरते ही हवा मे लहराने लगा, जो की गजब का लग रहा था' नीलु तो बस देखते ही रह गई। ऊसने अब तक एसा जानदार ओर तगड़ा लंड नही देखी थी। नीलू का मुंह खुला का खुला रह गया था, लंड का बदामी रंग का सुपाडा ही गजब की गोलाई लिए हुए था नीलु मन ही मन सोचने लगी कि, हे भगवान इसके लंड का सुपाडा कितना मोटा है। और इसके सुपारी की मोटाई की तुलना में मेरी बुर का गुलाबी छेद कुछ ज्यादा ही छोटा है अगर उसका सुपाड़ा मेरी बुर में गया तब तो यह मेरी बुर फाड़ ही देगा। ऊफफफफफफफ..... गजब का दमदार लंड है इसका। नीलू मन हीं मन मे बड़बड़ाए जा रही थी।

राहुल तो अपनी सुध बुध पूरी तरह से खो चुका था। दोनों का प्रगाढ़ चुंबन टूट चुका था। नीलू धीरे धीरे नीचे घुटनों के बल बैठते जा रही थी। राहुल को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था और वह खाली मूकदर्शक बन कर नीलू की हरकतों को देखता जा रहा था। उसे अब डर लगने लगा था क्योंकि यह क्लास था वैसे तो किसी के यहां आने का डर बिल्कुल भी नहीं था फिर भी उसके मन में डर बना हुआ था। नीलु अब तक जिसके बारे में कल्पना करके बार-बार पनियां जाती थी वह जानदार ओर तगड़ा लंड उसके सामने सिर उठाए खड़ा था। नीलू अपने लालच को और ज्यादा रोक नहीं पाई और अपना हाथ बढ़ाकर राहुल के टनटनाए हुए लंड को थाम ली । जैसे ही नीलू ने राहुल के लंड को अपनी हथेली में दबोची, लंड की मोटाई और उसका गरम एहसास नीलू के रोम रोम को झनझना दिया, साथ ही राहुल का भी बुरा हाल होने लगा।

नीलू से अब अपने आप को रोक पाना बड़ा मुश्किल हुए जा रहा था और उसने तुरंत एक दो बार लंड को मुठीयाई ' राहुल की तरफ नजर उठाकर देखी तो राहुल गहरी सांस ले रहा था। राहुल की उत्तेजना देखकर नीलु बहुत प्रसन्न हुई और उसने तुरंत राहुल से नजरें मिलाते हुए ही लंड के सुपाड़े को अपने मुंह में भर ली।

आहहहहहहहह.....( जैसे ही नीलू ने लंड को मुंह में भरी राहुल के मुंह से सिसकारी छूट गई।)

नीलू चुदाई के हर एक खेल में माहिर थी इसलिए वह अपनी जीभ का कमाल राहुल के लंड पर दिखाने लगी।

वह अपनी जीभ को सुपाड़े पर गोल गोल फिराते हुए लंड को आइसक्रीम कोन की तरह चाट रही थी।

राहुल की तो सांसे ऊपर नीचे हुए जा रही थी उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसका पूरा बदन हवा में झूल रहा है। आंखों को मुंद कर वह जन्नत के ईस परमसुख की अनुभूति करके मस्त हुआ जा रहा था।

 
नीलू एकदम चुदवासी हो चुकी थी। उसकी पैंटी भी धीरे-धीरे करके गीली हो चुकी थी तभी तो वह लंड को मुंह में लेकर चूसते हुए एक हाथ से सलवार के ऊपर से ही अपनी बुर को मसल रही थी। दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी दोनों चुदवासे हो कर चुदाई की आग में झुलस रहे थे। चप्प चप्प की कामुक आवाज नीलू के मुख से निकल रही थी जिससे पूरा क्लास रूम गुंज रहा था। ऐसे अजब से सुख की अनुभूति करके राहुल नीढाल हुए जा रहा था। नीलू तो राहुल के मोटे लंड को पाकर एकदम पगला सी गई थी वह बहुत जल्दी जल्दी अपने मुंह को उसके ऊपर आगे पीछे कर के लंड चुसाई का मजा ले रही थी। उसकी बुर से मदन रस टपक रहा था जिस पर अपनी हथेली को रगड़ रगड़ कर बुर वाली जगह को एकदम गीली कर ली थी।

दोनों लंड चुसाई का भरपूर आनंद उठा रहे थे। राहुल से रहा नहीं जा रहा था' उसे ऐसा लग रहा था जैसे की उसका लंड वीनीत की भाभी की बुर में अंदर बाहर हो रहा है। इसलिए राहुल से और ज्यादा सब्र नहीं हुआ और उसने अपनी कमर को आगे पीछे हिलाते हुए नीलू के सर को दोनों हाथों से थाम लिया' और आंखों को मुंद़कर जिस तरह से वीनीत की भाभी की बुर में लंड को अंदर बाहर करते हुए पेल रहा था। उसी तरह से नीलू के मुंह में लंड को ठुंसे हुए ही कमर को आगे पीछे करके चलाने लगा।

नीलू और राहुल दोनों को बहुत मजा आ रहा था पल-पल दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी राहुल था कि अब बिना शर्म किए सिसकारी लेते हुए नीलू के मुंह में लंड को पेले जा रहा रहा था।

नीलू भी अपने मुख से गर्म सिसकारी भरी आवाज निकालते हुए अपनी हथेली को बुर पर लगातार रगड़ते जा रही थी। दोनों चरमसुख की तरफ बढ़ ही रहे थे कि तभी रीशेष पूरी होने की घंटी बज गई। घंटी की आवाज सुनते ही राहुल हड़बड़ा गया हालांकि फिर भी वह नीलू के मोह में धक्के लगाए जा रहा था और नीलू भी लंड को चूसे जा रही थी। नीचे विद्यार्थियों की आवाज बढ़ती जा रही थी जिसकी वजह से राहुल को डर लगने लगा वह नीलू के मुंह से अपने लंड को बाहर की तरफ खींचने लगा लेकिन नीलू थी की राहुल कै लंड को अपने मुंह से निकालने के लिए तैयार ही नहीं थी। राहुल ने फिर भी जैसे-तैसे करके अपने लंड को नीलू के मुंह से बाहर खींच ही लिया ओर झट से अपनी पेंट को ऊपर चढ़ा कर बटन बंद कर लिया। राहुल बिना कुछ बोले क्लास से बाहर निकल गया पर नीलू वहीं पर ठगी सी बैठी रह गई। अकेले बैठे वह वहां पर क्या करती वह भी नीचे फर्श पर गिरी अपनी ब्रा उठाई और उसे पहनने लगी' कमीज पहन ने के बाद वह अभी क्लास से बाहर आ गई।

आज नीलू की अभिलाषा कुछ हद तक पूरी हुई थी। जिसके बारे मैं अब तक कल्पना कर कर के ही अपनी पेंटी को गीली करती आ रही थी आज बहुत दिनों बाद उसे छूने का उसकी गर्मी को महसूस करने का मौका मिला था। और नीलू ने इस मौके का कुछ हद तक फायदा भी उठा ली ,बहुत लडको के लंड को चूस चूस कर नीलू ने अपनी प्यास बुझाई थी। लेकिन आज राहुल के मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने के बावजूद भी उसकी प्यास बुझने के बजाए और भी ज्यादा बढ़ चुकी थी। उसकी बुर कुलबुला रहीे थेी राहुल के मोटे तगड़े लंड को अपने अंदर लेने के लिए।। इसलिए तो वहां छुट्टी के बाद जैसे ही घर पर पहुंची तुरंत अपने कमरे के अटैच बाथरूम में पूरी तरह से नंगी होकर सावर ली, शावर लेने के बाद अपने बदन को टावल से पोछकर नग्नावस्था में ही अपने बिस्तर पर लेट गई और ना जाने कितनी बार अपनी उंगली से ही अपनी बुर का पानी निकालकर अपने आप को शांत करने की कोशिश करती रही।

राहुल का भी यही हाल था ,एक तो वीनीत की भाभी ने उसके होश पहले से ही उड़ा रखे थे। ऊपर से जो आज नीलू ने क्लासरूम में उसके साथ मुखमैथुन का आनंद प्रदान की थी उस आनंद ने तो राहुल को पागल ही बना दिया था। राहुल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि स्कूल के क्लास रूप में एक सुंदर लड़की उसके अकेलेपन का फायदा उठाते हुए उसके लंड को चूसकर उसे परम आनंद की अनुभूति कराएगी। राहुल अपने आप को भाग्यशाली समझ रहा था कि बिना मांगे ही उसे सब कुछ मिल रहा था। एक खूबसूरत लड़की नीलु जो उसे प्यार करने लगी थी और आज मुखमैथुन जैसे अतुल्य कार्य का आनंद भी दे चुकी थी। और वीनीत की भाभी थी जिसने उसे संभोग सुख दे चुकी थी। जिसने उसे यह एहसास दिलाया कि बुर और लंड के मिलन से जो सुख प्राप्त होता है ऐसा सुख दुनिया में और कहीं भी नहीं प्राप्त होता। और तों और अब तो राहुल के ऊपर उसकी खुद की मां के बदन का आकर्षण भी बनता जा रहा था। अपनी मम्मी के भरावदार बदन के प्रति भी उस का झुकाव बढ़ने लगा था। इन तीनों औरतों के बारे में कल्पना कर करके राहुल ने सारी रात ना जाने कितनी बार हस्तमैथुन करते हुए अपने गरम पानी को निकालकर अपने बदन को शीतलता प्रदान करता रहा।

दूसरी तरफ विनीत था वह अलका के चक्कर में एकदम देवदास हो गया था ,उसकी हालत एकदम मजनू की तरह हो चुकी थी। ना ठीक से खाता था ना पीता था और पढ़ाई में तो उसका मन पहले से ही नहीं था।

यह तो तय था कि यह कोई प्रेम नहीं था बस आकर्षण और वासना का मिला-जुला असर था।

इंसान में वासना गजब का असर दिखाती है। एक बार जब इंसान के अंदर वासना दाखील हो जाती है तो ना उम्र देखती है ना संबंध ना ही रिश्तो का लिहाज ही करती है। अलका उसके परम मित्र की मा थी इस बात से तो विनीत अनजान था लेकिन फिर भी अलका उसके मां की उम्र की थी। उसे अलका की उम्र का भी लिहाज नहीं था, उसे तो बस अलका का खूबसूरत मादक बदन उसकी खूबसूरती उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और सबसे ज्यादा अलका का भरावदार गांड विनीत को भा गई थी। उसे चारों पहर ़ बस अलका ही अलका नजर आती थी। इसलिए पिछले 3 दिनों से रोज शाम के वक्त ऑफिस से लौटने के समय पर अलका की राह तकता रहता था, लेकिन जैसे कि वक्त ने उसकीे तड़प को और ज्यादा बढ़ाने की ठान ली थी इसलिए अलका से उसकी मुलाकात हो ही नहीं पा रही थी। विनीत पूरी तरह से अलका के मोह पास में जकड़ चुका था। अब तो हाल यहां तक हो चुका था कि विनीत को उसकी भाभी की चुदाई करने में भी मजा नहीं आ रहा था, वह जब भी अपनी भाभी की चुदाई करता तो कल्पना में अलका के बदन के बारे में ही सोचते हुए अपनी भाभी को चोदता तब जाकर उसके मन को थोड़ी बहुत शांति मिलती थी।

जबसे विनीत की भाभी ने राहुल का लंड अपनी बुर में ली थी तब से उसे विनीत के लंड से जरा भी मजा नहीं आ रहा था उसकी बुर तड़प रही थी दुबारा राहुल के लंड को लेने के लिए।

अब तो अलका का भी बुरा हाल हो गया था उसकी भी रातें विनीत द्वारा की गई कामुक हरकत की वजह से बिना पेंटि गीली किए नहीं कट रही थी। हालाकी उसने उस दिन की तरह अपनी बुर में उंगली डालकर अपने आप को शांत करने की कोशिश नहीं की थी बल्कि उन विचारों के माध्यम से ही वह अपनी बुर की पुतलियों को अपनी हथेली से रगड़ रगड़ कर आनंद ले रही थी। अलका खुद विनीत की तरफ खींची चली जा रही थी जिसका उसे पता ही नहीं था क्योंकि अब तो जब भी शांत बैठती थी तब उसके दिमाग में विनीत ही घूमता था खास करके बारिश वाली रात की हरकतें। मार्केट से गुजरते समय उसकी भी नजरे विनीत को ही ढूंढती रहती थी ,लेकिन उसकी भी मुलाकात विनीत से नहीं हो पा रही थी। बरसात के दूसरे दिन ही वह मार्केट के एक स्टोर पर गई थी, उसे वीट हेयर रिमूवर लेना था। क्योंकि वह रात को अपनी बुर पर उगे हुए बालों के गुच्छे को देख कर बहुत खराब लगा था और उसे वह क्रीम लगाकर साफ करना चाहती थी इसलिए वीट क्रीम खरीदने का निर्धार वो रात को ही बना ली थी ।स्टोर पर जाने में उसे बहुत ही संकोच हो रहा था। 2. 3 स्टोर तो वह छोड़ चुकी थी क्योंकि वहां पर कुछ ग्राहक पहले से ही जमा हुए थे तो उन लोगों के सामने वीट क्रीम मांगने में उसे शर्म सी महसूस हो रही थी। ऐसे करते करते वह मार्केट खत्म होने के करीब तक पहुंच गई। तभी सामने एक छोटा सा स्टोर दिखा, वहां पर भी पहले से ही दो लड़के खड़े थे। लेकिन उसने हिम्मत जुटाकर मन में ही फैसला कर ली थी जो होगा देखा जाएगा। आख़िर सभी औरतें लड़कियां इसे खरीदतीे हैं, मैं ही हमेशा क्यों बीट लेते समय इतना शर्माती हुं। इसलिए वह हिम्मत जुटाकर सीधे स्टोर पर पहुंच गई।

और बेधड़क होकर दुकानदार से उसने वीट क्रीम मांग ली, और इधर उधर देखते हुए अपने चेहरे पर आई शर्म के भाव को छुपाने की कोशिश करने लगी।

अमिता के द्वारा बीत क्रीम मांगने पर दुकानदार कबाट की ओर बढ़ गया और पास में ही खड़े दोनों लड़कों ने अलका के मुंह से बीट क्रीम सुने ही थे की उनकी कान के साथ-साथ जांघों के बीच लटक रहा लंड भी खड़ा हो गया। अलका के बदन में गुदगुदि सी मची हुई थी। बीट मांगने के नाम पर ही अलका के बदन में एक रोमांच सा ऊठ रहा था। उसकी पैंटी बीट के नाम पर कब गीली हो गई उसे खुद को पता नहीं चला।

अलका को बीट मांगते देख पास मे हीं खड़े दोनों लड़कों की नजर अलका के बदन पर ऊपर से नीचे तक पड़ी , तभी एक लड़के ने दूसरे लड़के को फुशफुसाते हुए कहा।

यार देख तो सही आज बीट ले जा रही है आज पूरे बाल साफ करके चिकनी कर देगी,उफफफफ.... आज तो जो भी इसकी लेगा पूरी चीभ लगाकर चाट जाएगा। काश हमारी किस्मत में ऐसी होती... । ( इतना कहने के साथ ही दोनों हंसने लगे। अलका उन लड़कों के कमेंट्स सुनकर एकदम शर्मसार हो गई, उसे उन लड़कों पर क्रोध भी आया वह उन लड़कों को डांटना चाहती थी लेकिन शर्म के मारे कुछ कह नहीं पाई, उन लड़कों से ज्यादा उसे उस दुकानदार पर गुस्सा आ रहा था जो क्रीम देने में इतनी देर लगा रहा था। उन लड़कों की गंदी कमेंट सुनकर अलका के बदन में शिहरन सी दौड़ गई थी। उत्तेजना में अलका की बुर फुदकने लगी थी।

वैसे भी अक्सर मर्द लोग औरत के उपयोग में ली जाने वाली हर वस्तु के बारे में कल्पना करना शुरु कर देते हैं।

अगर कोई औरत ब्रा पैंटी लेती होगी तो मर्द लोग कल्पना करने लगते हैं कि वह कैसे ब्रा और पैंटी पहनेगी यै कैसी दिखेगी इसे पहनने के बाद' हेयर रिमूवर ली तो उसके बारे में कल्पना करना शुरू कर देंगे कि कैसे वह अपनी बुर पर पर वीट लगाकर साफ करके अपनी बुर को चिकनी करेगी यह सब क्या अक्सर हर मर्द ने चलने लगता है।

 
अलका द्वारा बीट का उपयोग करने की कल्पना उन दो लड़कों में भी चल रही थी। तभी उस दुकानदार ने अलका को क्रीम थमाया और अलका ने तुरंत उसे पैसे देकर वहां से चलती बनी। हालाकि दो-तीन दिन गुजर गए थे लेकिन अलका ने बीट क्रीम का उपयोग नहीं कर पाई थी। बरसों बाद उसके बदन में भी प्यास की फुवार उठ रही थी।

एक दिन अलका ऑफिस से छूटकर अपनी घर की तरफ जा रही थी और जैसे ही मार्केट से होते हुए गुजर रही थी, की वही उसकी राह तकते हुए बैठे विनीत की नजर अलका पर पड़ी और वह दौड़ते हुए अलका के पास गया, अलका की नजर जैसे ही विनीत पर पड़ी वह अंदर ही अंदर बहुत खुश हुई लेकिन चेहरे पर बनावटी गुस्सा लाते हुए बोली।

तुम मेरे पास भी मत अाना' तुम्हें मैं इतना सीधा लड़का समझी थी लेकिन तुम तो शैतान निकले। बीते भरके हो लेकिन तुम्हारी हरकतें एकदम आदमियों की तरह हो गई है। ( अलका उसे खरी-खोटी सुनाते हुए कंधे पर पर्स लटकाए तेजी से चली जा रही थी, और विनीत था कि उससे मिन्नतें करते हुए उसके पीछे पीछे लगा हुआ था। अलका के बीते भरके वाली बात पर वह मन ही मन सोचा की अगर यह आंटी मुझे मौका दे देती तो मे ईसे दिखा देता की यह बीते भर का लड़का इस औरत का तीन चार बार पानी एक ही बार में निकालने की ताकत रखता है। लेकिन अभी तैयार से काम लेना था इसलिए उसके पीछे पीछे मिन्नते करते हुए जा रहा था। वह उसके साथ चलते चलते बोला।

एक बार सुनो तो आंटी मानता हूं मुझसे गलती हो गई पर मेरी पूरी बात तो सुन लो इस तरह से नाराज होकर जाओगी तो कैसे चलेगा।

अब कहने और सुनने के लिए बचा ही क्या है तुम्हे जो करना था कर तो दिया ना। अब क्या है? ( अलका की बात सुनकर उसके मुंह से एकाएक निकल गया।)

कहां आंटी जी ।कहां कुछ कर दिया।

अब यूं भोला मत बन, तुम कितना शैतान हो मैं उस दिन जान गई।

आंटी जी उसी बात की तो मैं आपसे माफी मांगने के लिए कितने दिनों से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। ( रास्ते पर एक दूसरे की दलीलों को सुनते हुए दोनों आगे निकल गए यहां रास्ते पर भीड़ कुछ कम थी, इसीलिए वीनीत हिम्मत करके अलका का हाथ थाम लिया, इस तरह से हांथ थामने पर अलका को विनीत पर गुस्सा आ गया और वह झटके से अपना हाथ छुडाते़ हुए बोली

विनीत अब कुछ ज्यादा ही हो रहा है तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इस तरह से मेरा हाथ पकड़ने कीे ।

मेरी इस हरकत के लिए माफी चाहता हूं आंटी जी। उस दिन जो हुआ उसके लिए मैं आपसे हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं। ( विनीत लगभग रुवांसा होते हुए बोला' दिनेश के चेहरे पर बदलते भाव को देखकर अलका शांत हुई। और बोली।)

अब क्या कहना चाहते हो । तुम्हे क्या ईसका अंदाजा भी है की अगर ऊस दीन कीसीने जो तुम हरतक कर रहे थे अगर कीसी ने देख लिया होता तो क्या होता, लोग क्या समझते मेरे बारे मे मे तो कीसी को भी मुंह दीखाने के काबिल भी नही रह जाती। ( हल्का बनावटी गुस्सा दिखाते हुए विनीत को बोले जा रही थी। और विनीत भी अब सच में रोने जैसा हो गया था ओर वह भी अपनी सफाई देते हुए बोला।)

माफी तो मांग रहा हूं आंटी जी अब बोलो मे क्या करु'

मेरी ओर गलती के लिए आप जो बोलोगे वह सजा मुझे मंजूर होगी लेकिन उसके पहले मेरी बात तो सुन लो।

( वीनीत की बातें सुनकर अलका एक दम शांत हो गई और वीनीत उसकी खामोशी को उसकी इजाजत समझते हुए बोला।)

आंटी जी उस दिन जो भी हुआ मैं वैसा कुछ भी नहीं करना चाहता था मैं तो आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाना चाहता था ताकि आपको बारिश में तकलीफ ना हो. लेकिन आंटी जी आपकी खूबसूरती देखकर मैं बाहक गया। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि औरत इतनी ज्यादा खूबसूरत होती है। ( इस बार अलका विनीत को ध्यान से देखने लगी उसकी बात को ध्यान से सुनने लगी। अलका को वीनीत की ऐसी रोमांटिक बातें अच्छी लगने लगी थी। विनीत जानता था कि अगर किसी औरत को वश में करना हो तो सबसे बड़ा हथियार है उनकी तारीफ करना। अपनी तारीफ सुनकर दुनिया की कोई भी औरत किसी के भी सामने पिघल सकती हैं। और वही अलका के साथ भी हो रहा था। विनीत अलका की तारीफ के पुल बांधता हुआ बोला।)

सच कहूं तो आंटी जी बारिश में भीगने के बाद आप ओर भी ज्यादा खुबसुरत हो गई थी। मैं तिरछी नजर से चोरी छिपे आपके बदन की खूबसूरती को निहार ले रहा था। और आंटी जी तब तो मुझसे और भी अपने आप को संभाला नहीं गया जब आपको संभालते समय अनजाने में मेरा हाथ आप की चूची पर पड़ी थी। ( विनीत के मुंह से चुची शब्द सुनते ही अलका का मुंह खुला का खुला रह गया, उसे कुछ पल तो यकीन ही नहीं हुआ कि यह विनीत क्या कह रहा है, कभी वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए जानबूझकर अलका को उकसाते हुए बोला।)

आंटी जी आपकी चूची जैसे ही मेरे हाथों को छू आई थी मेरा पूरा बदन ऐसा झनझना गय़ा मानो की करंट लग गया हो। इतनी नरम नरम चूची के स्पर्श का एहसास मेरे पूरे वजूद को हिला गया था। ( विनीत जानबूझकर नमक मिर्च लगा कर उनका की तारीफ करते हुए गंदी बातों का सहारा लेकर उसको उकसाने की कोशिश कर रहा था। अलका भी उसकी चिकनी चुपड़ी बातों के बाहाव में बही जा रही थी। कुछ देर वहीं खड़े रहने के बाद अलका फिर से चलने लगी, वीनीत भी उसके पीछे पीछे चलने लगा लेकिन इस बार अलका ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की। विनीत फिर से उसके बराबर में चलते हुए बोला।)

आंटी जी आप मेरी बातों से नाराज तो नहीं है ना, देसी आंटी जी मेरे मन में पाप नहीं है लेकिन जो मेरे मन में था वह साफ साफ आपको पूरी सच्चाई बता दिया।

( दिनेश की बातें सुनने के बाद चलते चलते ही अलका का बोली।)

तुम्हें नहीं लगता है कि तुम्हारी यह बातें और तुम्हारी की गई हरकतें दोनों गंदी हैं।

मैं कब कह रहा हूं आंटी जी कि मैंने जो कुछ भी किया वह सब ठीक था। आप की जगह पर अगर कोई और होती तो मेरी इन हरकतो की वजह से मेरे गाल पर थप्पड़ रसीद कर दी होती' और तो और मैं हैरान हूं कि अब तक मेरे गाल लाल क्यों नहीं हो गए।

( वीनीत की इस बात पर अलका को हंसी आ गई' और अलका की हंसी को देखकर विनीत अंदर ही अंदर खुश होने लगा क्योंकि उसने बहुत कुछ साफ-साफ बोल दिया था जो कि एकदम खुले शब्दों में था फिर भी अलका की हंसी से साफ जाहिर हो रहा था कि वह उसकी बातों को सुनकर नाराज नहीं थी। इसलिए उसकी हिम्मत बढ़ रही थी और वह फिर से अलका की तारीफ में दो शब्द और जोड़ते हुए बोला।)

आंटी जी आप सच बताइए आप नाराज तो नहीं है ना।

देखो विनीत नाराजगी का तो कोई सवाल ही नहीं उठता जो भी तुम कर रहे हो ये सब सही नहीं है।

आंटी जी मैं जानता हूं कि ऐसा सही नहीं है लेकिन उसके लिए बारिश की वजह से बहक गया था खास करके आपके भीगे हुए बदन को देख कर, मैं आपको पहले भी बता चुका हूं कि मैंने आपसे ही खूबसूरत औरत कभी नहीं देखा। उस दिन अगर मैं आपके होठों का रास्ता ना किया होता तो मैं अपना होश कभी नहीं खोता, और ना ही आपके गुलाबी हो तो के मधुर रस की वजह से मेरे होश खोते ओर न मैं आपकी इन( आंखों से इशारा करते हुए) बड़ी बड़ी चुचियों को अपनीे हथेली में भर कर दबाता। और ना ही आपकी साड़ी को आपकी कमर तक उठा कर आपकी मोटी मोटी जांघों को सहलाने की जुर्रत करता। इसमें आपका ही दोष है ।

( कल का दिन एक की इन बातों को सुनकर एकदम भोंचक्की सी हो गई उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था की वह जो सुन रही है ना कोई उसके बेटे के हमउम्र का लड़का ही है। जो खुद उससे इतनी गंदी बातें कर रहा है। अलका को गुस्सा भी आ रहा था लेकिन विनीत की इन बातों में अश्लीलता के साथ-साथ उसकी खुद की तारीफ भी छुपी हुई थी इसलिए उसे यह सब सुनने में अच्छा भी लग रहा था। विनीत का जवाब सुनकर उसे क्या कहना है ये उसे सुझ ही नहीं रहा था, फिर भी वह बोली।)

तुम पागल हो गए हो क्या यह तो वही हो गया आपकी उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। गलती भी खुद कर रहे हो ओर गलती का दोष दूसरे के सर मथ रहे हो।

 
कैसी गलती आंटी जी मैं आपसे प्यार करने लगा हूं आई लव यू( वीनीत ने बिना एक पल गंवाए एक सांस में ही सब कुछ बोल दिया। उसकीे बात सुनकर अलका एकदम से स्तब्ध रह गई उसे इस बात पर गुस्सा करें कि ना करें कुछ समझ नहीं पा रहीे थी। वह मन में बहुत कुछ सोचने लगी। मेरे बेटे का हम उम्र होकर मुझे से कैसी बातें कर रहा है। इसे कुछ समझ हे कि नहीं, विनीत के प्रपोजल का जवाब देते हुए अलका बोली।)

तुम पागल हो क्या तुम्हें इतना समझ में भी नहीं आ रहा,

अरे अपनी उम्र देखो ओर मेरी उम्र देखो। कुछ तो ऊम्र का भी लिहाज कीया होता। तुम्हारी मां की उम्र की हुँ।

तुमको तो अपनी उम्र की कोई सुन्दर लड़की से कहना चाहीए था। मुझसे कहकर तुम्हे क्या हासिल हो जाएगा।

आंटी की कुछ हासिल करने वाला करने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता मुझे बस तुम अच्छी लगती हो आज तक मैंने तुम्हारे जैसी कोई औरत नहीं देखा, आप मुझे बहुत पसंद आई इसलिए तो मैं आपसे आई लव यू कह रहा हूं।

फिर वही आलाप जपना शुरु कर दिया तुमने। मैं कह तो रही हूं' मेरी उम्र में और तुम्हारी उम्र में बहुत फर्क है और मुझे इन सब चीजों में बिल्कुल भी इंटरेस्ट नहीं है।

( अलका सड़क पर बने फुटपाथ पर चलती जा रही थी

साथ में विनीत भी अलका के कदमों से कदम मिलाकर चले जा रहा था। अलका भले ही ऊपरी मन से यह सब कह रही थी लेकिन अंदर ही अंदर विनीत की बातों को सुनकर वह प्रसन्न हुए जा रही थी। बातों ही बातों में सड़क का वह मोड आ गया जहां से अलका अपने घर की ओर चली जाती थी।। विनीत जानता था कि अलका अब अपने घर की तरफ मुड़ने वाली है। इसलिए विनीत की तड़प बढ़ती जा रही थी। उसने फिर से बोला।

( हाथ पकड़ते हुए) आंटी जी मैं सच कह रहा हूं मुझे आप से मोहब्बत होने लगी है। और रही बात उमर की तो मे उम्र को नहीं मानता। बस इतना जानता हूं कि मैं आपसे प्यार करने लगा हूं। अब मुझे आपके बिना कुछ अच्छा नहीं लगता, सोते जगते हर पल हर घड़ी आपकी याद मुझे सताती रहती है। मैं आपके बिना नहीं रह पाऊंगा आई लव यू ,आई लव यू

( अलका फिर से उसके भोलेपन पर मुस्कुरा दी और उसके सवाल का जवाब दिए बिना ही हंसते हुए फिर से मुख्य सड़क से नीचे उतर कर अपने घर की तरफ जाने लगी। विनीत वही खड़ा उसे देखता रह गया, वीनीत की नजर फिर से अलका के मादक बदन पर ऊपर से नीचे तक फीरने लगी। अलका हाई हील की सेंडल पहने हुए थी जिससे चलते समय उसकी बड़ी बड़ी गांड कुछ ज्यादा ही थिरक रहे थे ' अलका की बड़ी बड़ी गांड एक बार फिर से वीनीत के लंड में सुरसुराहट पैदा कर गई थी। विनीत वही खड़ा पैंट के ऊपर से ही लंड को मसलते हुए अलका को जाते देखता रहा और तब तक देखता रहा जब तक कि अलका उसकी आंखों से ओझल नहीं हो गई। वीनीत को उसका काम बनता हुआ नजर आ रहा था। क्योंकि उसने जैसा सोचा था कि अलका उसको गुस्सा करेंगीे नाराज होगी डाटेंगी यह हो सकता है कि मिलना जुलना ही बंद कर दे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था बल्कि वह तो उसकी बातों को सुनकर मुस्कुरा रही थी। इसलिए तो विनीत एब एकदम आत्मविश्वास से भर चुका था। मुझे पक्का यकीन हो गया था कि बारिश की रात को जो काम उसने अधूरा छोड़ा था बहुत जल्द वह पूरा होने वाला है। कुछ ही देर में अलका भी आंखों से ओझल हो गई फीर भी वही खड़ा खड़ा उस रास्ते को देखने लगा जहां से अलका रोज आती जाती थी ' ईसके बाद विनीत भी अपने घर की तरफ चल दिया।

रसोई बनाते समय अलका बहुत खुश नजर आ रही थी वह मन ही मन में कोई गीत गुनगुना रही थी। और खुश क्यों ना हो बरसों के बाद किसी ने उसे प्रपोज किया था वरना जो भी उसकी तरफ देखता था तो बस नोचने और खसोटने जेसा ही विचार हर मर्द में आता था। अलका के हिसाब से विनीत सबसे अलग था। उसका अंदाज उसके बोलने का तरीका उसका एटीट्यूट सब कुछ अल्का को भाने लगा था।

अलका बहुत खुश थी । उसकी खुशी का पूरा असर आज रसोईघर में भी देखने को मिल रहा था क्योंकि आज से बच्चों के मन पसंद की खीर पूरी सब्जी और मालपुआ भी बना रही थी। तभी तो पढ़ाई कर रहे राहुल और सोनू दोनों को रसोई घर से आती स्वादिष्ट खुशबू इन दोनों के मुंह में पानी आ गया। राहुल और सोनू से एक पल भी रुका नहीं गया और वह दोनों रसोई घर में आ गए , रसोई घर में घुसते ही राहुल मालपुआ को चखना चाहता था लेकिन जैसे ही मालपुआ को लेने के लिए आगे बढ़ा ही था कि उसकी नज़र सीधे उसकी मां की भरावदार नितंब पे पड़ी' और उसके कदम ज्यों के त्यों वहीं रुक गए। राहुल की मम्मी मालपुआ को छानते वक्त एक पांव को घुटनों से मोड़ कर दूसरे पांव पर रखकर हल्के हल्के रगड़ रही थी। जिसकी वजह से उसके पीछे का भाग कुछ ज्यादा ही उभार लिए हुए था।

और ऊस वक्त उसने सिर्फ गाउन पहने हुए थी। जोकि उसके बदन से बराबर चिपका हुआ था इसलिए उसके अंगों का घुमाव मरोड़ और कटाव बराबर झलक रहा था। यह सब देख कर राहुल को अपनी जांघों के बीच सुरसुराहट सी महसूस होने लगी। तत्काल उसके लंड ले तनाव आना शुरु हो गया। बड़ी-बड़ी और भरावदार गांड राहुल की कमजोरी बनती जा रही थी। विनीत की भाभी की भी गांड बिल्कुल ऐसी ही भरावदार और गोल गोल थी, और तो और उसने तो दिनेश की भाभी की गांड को छुआ भी था उसकी नरमाहट को अपनी हथेली में मसल मसल कर महसूस भी किया था। उस वक्त राहुल को विनीत की भाभी की बड़ी बड़ी गांड बहुत ही ज्यादा कामुक और अतुल्य लग रही थी' और उसे चोदने के बाद से उसकी नजर जब भी किसी औरत पर पढ़ते थी तो सबसे पहले उसके भरावदार गांड पर ही पड़ती थी। और वहां तो खुद दो तीन बार अपनी मां की नंगी गांड के दर्शन कर चुका था। सबसे उसके मन के कोने में की मां की भरावदार गांड के प्रति आकर्षण बना हुआ था। इसलिए तो रसोई घर में प्रवेश करते ही, उसकी नजर जैसे ही उसकी मम्मी की भरावदार गांड जो कि गाउन का लबादा ओढ़े हुए थी उस पर पड़ते ही राहुल की यादें भरावदार गांड को लेकर तरोताजा हो गई,

राहुल वहीं खड़े होकर अपनी मां के पिछवाड़े का नजरों से जायजा ले रहा था तब भी इस तरह से खड़े हो जाने पर सोनू बोला।

भैया मम्मी तो आज पकवान बना रही है आज मजा आ जाएगा खाने मे। ( सोनू की आवाज उसके कानों में पढ़ते ही जैसे कि वह नींद से जगा हो इस तरह से सकपका गया' राहुल की मम्मी को भी इसका एहसास हो गया कि उसके दोनो बच्चे रसोईघर में आ चुके हैं। तभी वह मालपुआ तलते हुए बोली।)

राहुल सोनू तुम दोनो रसोई में चले आए मुझे मालूम है जिस लिए आए हो। आज तुम दोनों की पसंद का खाना बना रहीे हुं। ( मालपुआ को कड़ाई से निकालते हुए )

आज तो तुम दोनों के मुंह में पानी आ गया होगा।

राहुल के मुंह में मालपुआ की खुशबू से तो पानी आया ही आया था लेकिन अपनी मां की भरावदार गांड को देखकर उसके लंड से भी पानी की एक दो बुंद टपक पड़ी। राहुल बड़ी-बड़ी नितंब के आकर्षण से अपने आप को बचा नहीं सका और आगे बढ़ कर उसने पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में कसते हुए बोला।

ओह मम्मी तुम कितनी अच्छी हो ,तुम हम दोनों का बहुत ख्याल रखती हो। आज तुमने हम दोनों के मनपसंद का खाना बनाई हो आज मैं बहुत खुश हूं मम्मी।

( राहुल अपनी बात हो गई पीछे से अपनी मां को भरा हुआ था लेकिन उसके पेंट में बना तंबू सीधे उसकी मां की गांड के दरार में घर्षण करने लगा था, राहुल आम तौर पर इसी तरह से रसोई घर में जब भी खुश होता था तो अपनी मम्मी को पीछे से यूं ही बाहों में भर कर दुलार करने लगता था। उसकी मां को भी है अौपचारीक ही लगा था की ' उसने अपनी गदराई हुई गांड पर कुछ नुकीला सा चुभता महसुस की ,उसे समझते जरा भी देर नही लगी की उसकी गांड पर जो नुकीली चीज चुभ रही है वह कुछ ओर नही बल्की राहुल का लंड है जो की ईस समय एकदम तनाव मे है। उस नुकीली चीज के चुभन को समझते ही उसका पुरा बदन अजीब से रोमांच मे झनझना गया। तुरंत उसकी बुर मे सिहरन सी दौड़ गई ओर उत्तेजना मे फुलने पिचकने लगी। उसको तो कुछ समझ में नहीं आया कि क्या करें, राहुल से यह हरकत अनजाने में ही हुई थी तुरंत वह सकते में आ गई थी। उसको यह लग रहा था कि राहुल से यह हरकत अनजाने में ही हुई है क्योंकि जहां तक वह पूरी तरह से अपने बच्चों से वाकिफ थी राहुल इस तरह का लड़का कदापि नहीं था वह इतनी गंदी हरकत जानबूझ कर ही नहीं सकता था।

वह समझ रही थी कि राहुल से यह हरकत अनजाने में ही हो रही है क्योंकि वह इस तरह से हमेशा उसे पीछे से बाहों में भर कर दुलार करता था। लेकिन आज की यह हरकत अलका को अजीब सी लगी क्योंकि इससे पहले उसके भरावदार नितंब पर इस तरह की चुभन कभी भी नहीं हुई।

अलका को लग रहा था कि यह हरकत राहों से अनजाने में ही हुई है लेकिन राहुल ने इस तरह की हरकत जानबूझकर किया था। अपनी मां के भरावदार गांड को देख कर वो अपने आप को रोक नहीं पाया था और सीधे जाकर पीछे से अपनी मां को बाहों में भरते हुए अपने पेंट में बने तंबू को आगे की तरफ बढ़ा कर अपनी मां की भरावदार गांड पर रगड़ने लगा था, राहुल को इस तरह से बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। उसे अपने तंबु को अपनी मां की गांड पर चुभाने में रगड़ने में बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। राहुल उत्तेजना से एकदम से भर चुका था उसका बस चलता तो कब का गाउन उठाकर अपनी मां की बुर में लंड पेल दिया होता

 
वैसे भी विनीत की भाभी ने कुछ हद तक चुदाई करने के सारे दांव पेंच सिखा ही दि थी। राहुल इतनी हिम्मत तो दिखा चुका था लेकिन इसके आगे हिम्मत दिखाने की ताकत उसमे नहीं थी।

दूसरी तरफ अलका को यह सब अनजाने में ही लग रहा था राहुल को कैसे मना करे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था । अगर वह राहुल को उसकी हरकत बताते हुए डांटती है तो इसका बुरा असर राहुल पर पड़ सकता था। वह नही चाहती थी कि इन सब गंदी बातों पर उसका ध्यान जाए। वह अभी तक अपने तंबू को अलका की गांड पर रगड़े हुए था और अलका मालपुआ चल रही थी वह माल पूए को कड़ाही से निकालते हुए बोली।

अरे छोड़ मुझे मालपुआ तों बनाने दे वरना रसोई तैयार करने में फिर देर हो जाएगी।

( राहुल अपनी मां को छोड़ना नहीं चाहता था लेकिन उसकी बात सुनकर उसे छोड़ना ही पड़ा,)

अच्छा तुम दोनों बाहर बैठोे मैं तुरंत रसोई तैयार करके

उसे परोस कर लाती हूं।

( राहुल के मन से हामी भर कर रसोई घर के बाहर जाने लगा की तभी अचानक अलका उसे रोकते हुए बोली।)

सुनो राहुल

हां मम्मी ...( अपनी मां की तरफ पलटते हुए।)

देखो बेटा तुम दोनों ठीक है अपने हाथ पांव धो लेना क्योंकि खाने से पहले सफाई बहुत जरूरी है ठीक है ना।

( राहुल भी हामी भरके रसोई घर के बाहर चला गया।

अलका का यह स्वच्छता के बारे में हिदायत देना कोई जरूरी नहीं था लेकिन वह इस बहाने कुछ और देखना चाहती थी और जो देखना चाहती थी राहुल के बदन पर उसकी नज़रों ने कोई जगह का पूरी तरह से मुआयना कर ली थी। अलका की अनुभवी आंखों ने अपने बेटे के पेंट में बने तंबू का पूरी तरह से जायजा ले लिया था। पेंट में बने उस उभार को देख कर अलका अंदर ही अंदर सिहर उठी थी। अपने बेटे के पेंट में बने उस तंबू को देख कर आज पहली बार उसे यह एहसास हुआ कि उसका बेटा भी अब बड़ा हो चुका है। अलका को अंदर ही अंदर यह एहसास हो चुका था कि उसके बेटे का लंड काफी तगड़ा और जानदार है।

राहुल रसोई घर के बाहर जा चुका था लेकिन उसने जो अपनी मां को एहसास करा गया वह बहुत कुछ बदलने वाला था।

अलका रसोई तैयार कर चुकी थी उसका मन अब नहीं लग रहा था। बार बार वह अपनी गदरैई हुई गांड पर अपने बेटे के लंड के चुभन को महसूस करके गंनगना जा रही थी। ना चाहते हुए भी उसका ध्यान बार-बार अपने बेटे के पेंट में बने उस उभार पर चला जा रहा था

गैस की नौब बंद करते समय उसे अपनी बुर से कुछ रीसता हुआ महसुस हुआ वह एक दम से चौंक गई और उसने तुरंत एक नजर रसोई घर की तरफ करते हुए नजरें बचाकर अपने गांऊन में को कमर तक उठा दि और पेंटी की तरफ देखीे तो पूरी पेंटी गीली हो चुकी थी उसने अपनी उंगली गीली पेंटी के ऊपर रगड़ कर अपनी उंगली को अंगूठे से रगड़ कर देखी तो उसमे बहुत चिकनाहट थी, वह समझ गई कि चिकनाहट से भरी यह गीलापन कैसा है। उसे ऐसा लगने लगा था कि कहीं उसका पीरियड तो नहीं आ गया लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था।

उसे समझ में ही नहीं आया कि आज उसके खुद के बेटे की वजह से वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि उसका नमकीन पानी छूट गया और उसे पता भी नहीं चला।

खेर जैसे-तैसे करके उसने 3 थाली में रसोई परोसी और पहले की तरह तीनों साथ में बैठकर भोजन किए।

भोजन करने के बाद उसके दोनों बच्चे अपने अपने कमरे में चले गए। और अलका विचारमग्न होकर सारे काम करती रही बर्तन साफ करने के बाद वह भी अपने कमरे में सोने के लिए चली गई। वह अपने बिस्तर पर लेट कर बहुत सारी बातें सोचने लगी नींद उसकी आंखों से क इसको तय कर पाना उसके लिए भी बड़ा मुश्किल हुआ जा रहा था।

पहले तो उसे वीनीत की हरकतों ने परेशान किए हुए था

और उसका बड़े ही रोमांटिक तरीके से प्रपोज करना यह सब उसे अच्छा भी लग रहा था और परेशान भी किए हुए था। वह कैसे अपने ही बेटे के उमर के लड़के का प्रपोजल सवीकार कर ले । अगर कर भी लेती है तो कितना अजीब लगता है अगर इस बारे में किसी को पता भी चल गया तो उसके बारे में कैसी कैसी धारणाएं बंधेगी। लोग क्या कहेंगे। एक तरफ वह लोगों के बारे में सोचकर चिंतित हो रही थी और दूसरी तरफ खुश भी थी की एक जवान लड़के ने अपनी मां की उम्र कि औरत मे ऐसा ना जाने क्या देख लिया कि उससे प्यार करने लगा। उसे अंदर ही अंदर खुशी हो रही थी कि इस उम्र में भी उसके अंदर बहुत कुछ बाकी है तभी तो एक जवान लड़का इस कदर उससे प्यार करने लगा है।

यह सब सोच ही रही थी की तभी रसोई घर वाली बात याद आ गई। राहुल के द्वारा पर हरकत अनजाने में ही हुई थी लेकिन उस हरकत का असर ईतना ज्यादा था कि कुछ हरकत के बारे में सोचकर ...

अलका की बुर पसीजने लगी थी। अलका से बर्दाश्त नहीं हो रहा था पल पल उस की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। अपने बेटे के ख्याल से तो उसकी उत्तेजना एकदम चरम शिखर पर पहुंच जाती थी। वह अपने बेटे के इस तरह के ख्याल से एकदम परेशान हो चुकी थी ना चाहते हुए भी उसका ध्यान बार-बार राहुल के पेंट में बने तंबु पर ही चला जा रहा था। आखिरकार वह बिस्तर से उठी

और तुरंत अपनी गाउन को उतार फेंकी, बिना एक पल भी गवाएं उसने तुरंत अपने दोनों हाथ को पीछे ले जाकर ब्रा के हुक को खोल दी। हुक के खुलते ही उसने ब्रा को अपनी बाहों से उतार फेंकी। उसी तरह से उसने झट से अपनी पैंटी को उतार कर पूरी तरह से नंगी हो गई और आकर आदम कद आईने के सामने अपने आप को निहारने लगी।

अलका एकदम संपूर्ण निर्वस्त्र होकर आईने के सामने खड़ी थी। उसके बदन का हर एक अंग उभार मार रहा था। आईने में अपनी बड़ी बड़ी चुचियों को देखकर अलका के चेहरे पर मुस्कान फैल गई। यूं तो वह अपने बदन को रोज ही निहारती थी ,कभी कभी निर्वस्त्र होकर बात हुई नहीं तो कभी कपड़े बदलते समय आईने के सामने। लेकिन आज की बात कुछ और थी आज उसे अपनी चुचियों में कुछ बदलाव सा नजर आ रहा था उत्तेजना की वजह से उसकी चुचीयो का साइज थोड़ा सा बढ़ गया था, जिसे देख कर अल्का मुस्कुरा रही थी उसे लगने लगा था कि वाकई में इस उम्र में भी उसके बदन में अभी बहुत कुछ बाकी था। वह मन ही मन अपने ऊपर गर्वित हुए जा रही थी। यह वह भली भांति जानती थी कि उसके अंगों में जो अभी भी निखारता और सुंदरता बची है यह उसके अनुशासन और अपने ऊपर काबू कर पाने की शक्ति कि ही वजह से कायम है

वरना वह भी दूसरी औरतों की तरह अगर अपने मन पर काबू नहीं कर पाती तो अब तक उसके अंगों में भी लचीलापन और चुचीयों में ढीलापन ना जाने कब से आ चुका होता।

उससे रुका ना गया और उसके दोनों हथेलियां खुद-ब-खुद चूचियों पर फिरने लगी, जैसे-जैसे उसकी नरम हथेलियां उसकी कैसी हुई चूचियों पर फिर रही थी वैसे वैसे उसके चेहरे के भाव बदलते हुए नजर आ रहे थे।

अपने बेटे के खड़े लंड की चुभन को अपनी गांड पर चुभता हुआ महसूस करते हुए उसने अपनी हथेली को चूचियों पर कसना शुरु कर दिया जैसे ही चुचियों पर उसकी मुट्ठी भींची उसके मुख से करारी सिसकारी छूट पड़ी।

सससससससस....आहहहहहहहहहहह......

अचानक से अपने मुख से निकली गरम सिसकारी की आवाज सुनकर वह खुद हैरान हो गई और मुस्कुराने भी लगी।

आज रसोईघर में जो भी हुआ उससे वह काफी तौर पर हैरान थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह राहुल की नादानी थी या उसकी शरारत। अलका के लिए समझ बड़ा मुश्किल हुए जा रहा था। आज से पहले कभी भी उसे ऐसी चुभन अपने नितंबों पर महसूस नहीं हुई , पहली बार उसने अपने नितंब पर अपने बेटे के लंड की चुभन को महसूस की थी , विनीत की भाभी और मधु की ही तरह अलका भी अपने बेटे के लंड की मजबूती और तगड़ेपन को भांप ली थी।

अलका अभी भी आईने के सामने ही खड़ी होकर अपनी चुचियों को अपनी हथेली में नीचे जा रही थी और सोच रही थी कि यह हरकत राहुल से अनजाने में हुई है या यह उसके उम्र का दोष है कहीं ऐसा तो नहीं कि मेरा लड़का बड़ा होने लगा है। हां ऐसा तो उसके ल** की चुभन की मजबूती को देखकर लगने लगा है कि वाकई में मेरा लड़का जवान होने लगा है।

कल का मन ही मन अपने आप से बातें कर रही थी।

पहले तो वीनीत की कामुक हरकत नैं उसे बेचैन किए हुए था और अब तो उसके खुद के लड़के के लंड की चुभन ने उसकी तड़प को और भी ज्यादा बढ़ा दिया था।

 
आईने में अपने सुर्ख हो चले गाल को देख कर वो खुद ही शरमा गई। पल पल उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी चूचियों पर भीेची हुई हथेली धीरे-धीरे पेट पर से सरकते हुए नाभि से गुजरते हुए जांघों के बीच जाकर तपती हुई दरार पर जाकर ठहर गई। अलका ईस समय इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी की उत्तेजना मे उसने अपनी हथेली से अपनी बुर को दबोच ली। बुर को दबोचते ही फिर से उसके मुंह से सिसकारी छूट गई। बुर के साथ-साथ उसकी बुर पर ऊगी हुई झांटों की झुरमुटे भी उसकी हथेली में भींच गई जिससे उसे हल्के दर्द का एहसास हुआ तब उसे एकाएक याद आया की 2 दिन पहले ही उसने बाजार से लौटते समय वीट क्रीम खरीदी थी, अपने बालों को साफ करने के लिए। वह झट से अलमारी की तरफ बढ़ी और ड्रोवर खोल कर उसमें से वीट क्रीम को बाहर निकाल ली। वीट क्रीम को हथेली में लेते ही उसके बदन में उत्तेजना का संचार बड़ी ही तीव्र गति से होने लगा। उसकी बुर से नमकीन पानी अमृत की बूंद बनकर रिसना शुरू हो गई। अलका को यह एहसास अब अच्छा लगने लगा था। अलका ने वीट क्रीम के ढक्कन को खोलकर अपनी एक टांग को आईने के टेबल पर रख दी और थोड़ा सा अपनी टांगो को फैला दी ताकि वह क्रीम को ठीक से लगा सकें। उसने सीधे क्रीम को बालों से सटाकर ट्यूब को दबाई और ढेर सारी क्रीम को अपने बालों पर छोड़ दी, जरूरत जितनी क्रीम को बालों पर निकाल कर ट्यूब को टेबल पर रख दी ओर प्लास्टिक की पट्टी से क्रीम को बालो पर फैलाने लगी। बहुत ही कामुक नजारा बना हुआ था। अलका पुरी तरह से नंगी होकर के आईने के सामने एक टांग को टेबल पर टिका कर अपनी बालों से भरी बूर पर

क्रीम को चुपड़ रही थी। एक टांग को उठाकर के टेबल पर रखने की वजह से उसकी भारी-भरकम गांड और भी ज्यादा उभार लिए हुए दिखाई दे रही थी। सच में अगर इस समय अलका के रूप को कोई भी मर्द देख ले तो उसका खड़े-खड़े ही पानी छूट जाए।

अलका अपने बालों पर पूरी तरह से क्रीम को लगा चुकी थी। वह भी बड़ी उत्सुक थी अपनी बालों से भरी बुर को एकदम चिकनी देखने के लिए। वह ट्यूब को वापस खोखे में रख कर ड्रोवर में डाल दी। और कमरे में ही चेहरे करनी करते हुए नजर को अपने ही बदन पर ऊपर से नीचे तक आगे से पीछे तक दोड़ाते हुए अपनी चाल-ढाल का जायजा लेने लगी। खास करके उसकी नजर पीछे को उसके पिछवाड़े पर ही जा रही थी क्योंकि चलते वक्त वो कुछ ज्यादा ही थिरकन लिए हुए थी। अपनी उधर ही बड़ी बड़ी गांड को मटकते हुए देख कर उसे अपने बदन पर और भी ज्यादा फक्र होने लगा था।

वह यूं ही चहल कदमी करते हुए कुछ समय बिता रही थी ताकी क्रीम मैं डूबे हुए उसके झांट के बाल नरम पड़ जाए।

वही दूसरे कमरे में राहुल भी परेशान था आज उसने जो हरकत किया था इससे उसके पूरे बदन में अभी तक झुनझुनी सी मची हुई थी। वह बिस्तर पर लेटा हुआ था उसका पाजामा नीचे घुटनों तक सरका हुआ था।।

और उसकी मुठ्ठी उसके टनटनाए हुए लंड पर भींची हुई थी और वह जोर-जोर से लंड को हिलाते हुए मुठ मार रहा था। और उसके जेहन में बस उसकी मां की ही कल्पना चल रही थी। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि वह इतनी हिम्मत दिखा पाएगा। करता भी क्या इतनी बड़ी बड़ी और गोल गोल गांड को देखकर वह अपने आपे से बाहर हो गया था इसलिए अपनी मां को गले लगाने के बहाने उसके चूतड़ों के बीच अपने टनटनाए हुए लंड को रगड़ने का आनंद लेने से अपने आप को रोक नहीं पाया। इस वक्त उसे मुठ मारने में कुछ ज्यादा ही आनंद की प्राप्ति हो रही थी क्योंकि वह आंखों को मुंद कर अपनी मां के बारे में गंदी कल्पना कर रहा था वह मन ही मन में सोच रहा था कि वह वैसे ही रसोई घर में खाना बना रही है और वह रसोई घर में जाता है , और वह अपनी मां को खाना बनाते हुए देखता है लेकिन उसकी नजर सीधे जा कर उस की उभरी हुई बड़ी बड़ी गांड पर ही टीक जाती है। पल में ही उसका सोया हुआ लंड टनटना कर खड़ा हो जाता है, वह एकदम कामातूर होकर सीधे अपनी मम्मी के पीछे जाकर खड़ा हो जाता है और तुरंत उसकी साड़ी को उसकी कमर तक उठा कर एक टांग को रसोईघर की टेबल पर रख कर पीछे से अपना खड़ा लंड पेल देता है,

थोड़ी ही देर में उसकी मां भी अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी भारी भरकम गांड को पीछे की तरफ ठेलते हुए राहुल के लंड को अपनी बुर में तेजी से लेने का प्रयास करती है। यह कल्पना करते हुए राहुल थोड़ी ही देर में लंड की पिचकारी छोड़ता है जोकि खुद उसके ऊपर जांघो पर आ कर गिरता है।

राहुल के मन में चल रहे वासना का तूफान जैसे ही शांत होता है उसे अपने किए पर पछतावा होने लगता है। राहुल फिर से अपने आप को भला बुरा कह कर आइंदा से ऐसी गंदी हरकत ना करने की कसम खा कर सो जाता है।

कमरे में अलका अभी भी चहल कदमी करते हुए बार-बार कभी बालों पर लगी क्रीम को तो कभी अपने पिछवाड़े को देख कर संतुष्ट हो रही थी। क्रीम को साफ करने का समय हो चुका था। अलका को बड़ी बेसब्री से इंतजार था अपनी चिकनी बुर को देखने के लिए, उसने बिस्तर पर रखे हुए टावल को उठाई और टॉवल से घिस घिसकर क्रीम को साफ करने लगी , टावल से क्रीम को पूरे इत्मीनान से साफ कर लेने के बाद वह जैसे ही टावल को अपनी बुर पर से हटाई तो अपनी बुर को देख कर वह खुद हैरान रह गई। वह कभी अपनी बुर की तरफ तो कभी आईने में दिख रही उसकी बुर के अक्स की तरफ नजरें दौड़ा रही थी। झांटों के झुरमुटो को क्रीम से साफ करने के बाद उसमें आई चिकनाई को देखकर वह बहुत आश्चर्य चकित हुई। अपनी बुर की खूबसूरती को देखकर वह खुद ही कायल हो चुकी थी।

उसकी बुर की गुलाबी पत्तियां हल्के से बाहर की तरफ झांक रही थी। जिस पर नजर पड़ते ही अलका का मन एकदम से उत्तेजना से भर गया और वह ना चाहते हुए भी अपनी हथेली को उन गुलाबी पत्तियों के ऊपर रख कर मसल दी जिससे पुनः उसके मुख से सिसकारी छूट गई।

ससससससससस......

अलका का बदन पूरी तरह से कसमसा गया और वह और भी ज्यादा दबाव देते हुए हथेली को बुर की गुलाबी पत्तियों पर रगड़ने लगी। आज बरसों के बाद उसने अपनी बुर को इतनी ध्यान से निहार रही थी, अपनी ब** को देख देखकर और बार-बार उस पर हथेली रगड़ने की वजह से उसकी बुर से मदन रस की बूंदें टपक पड़ती थी।

अलका उत्तेजना से सरो बोर हो चुकी थी बुर पर मसल रही हथेली से कब एक उंगली उसकी बुर मे समा गई उसे खुद को पता ही नहीं चला। मस्ती के सागर में हिलोरे लेते हुए उसने अपनी आंखोें को मूंद ली।

उसकी उत्तेजना दबाए नहीं दब रही थी उसने अपनी एक हथेली को अपनी बड़ी बड़ी चूची पर रखकर दबाने लगी, अलका आईने के सामने एकदम निर्वस्त्र खड़ी थी टांगे फैलाकर एक उंगली से अपनी उतेजना को शांत करने की कोशिश कर रही थी। अलका के अंदर बरसों से दलीप यार अब उछलने लगी थी आखिरकार औरत का मन नदी के पानी के बहाव की तरह होता है कब तक वह उसे मिट्टी का रोड़ा बनाकर रोक सकती है। एक ना एक दिन तो पानी के बहाव में वह मिट्टी का रोड़ा बह जाना था। अलका के मन के अंदर का बांध टूट चुका था। एक उंगली से बुर को चोदते हुए वह गर्म सिसकारी भर रही थी उसे अब लगने लगा था कि उसकी बुर की प्यास एक उंगली से नहीं बुझने वाली है इसलिए वह अपनी दूसरी उंगली को भी रसीली चिकनी बुर में प्रवेश करा दी।

ऊउउममममममममममम...सससससससहहहहहहह....

आहहहहहहहह.......ऊईईई....म्मा....

( अलका अब दोनों अंगुलियों को बुर के अंदर बाहर करते हुए अपनी बुर की चुदाई कर रही थी और गरम गरम सिसकारियां छोड़कर पूरे कमरे का माहौल गर्म किए हुए थी। अलका जिंदगी में पहली बार आज अपनी उंगलियों से हस्तमैथुन करते हुए अपने आप को संतुष्ट करने की कोशिश कर रही थी। वह पूरे लय में अपनी उंगली को अंदर बाहर तीव्र गति से कर रही थी और उसी लय में अपनी कमर को भी आगे पीछे करते हुए मजा ले रही थी। वह अपनी बुर को उंगली से तो चोद रही थी लेकिन उसके जेहन में राहुल के पजामे में बने तंबू का ही ख्याल आ रहा था। बुर में उंगली पेलते हुई उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बुक में उसकी उंगली नहीं बल्कि उसके बेटे का लंड अंदर बाहर हो रहा है। अपनी गदराई गांड पर अपने बेटे के लंड की चुभन को याद करके वह और भी ज्यादा चुदवासी हो गई।

 
अलका इस समय सच पूछा जाए तो उंगली की बजाए उसे लंड की ही जरूरत थी और खास करके ऊसके बेटे के हीे लंड की जरूरत उसे पड़ रहीे थी।

अलका चुदासपन से भरी जा रही थी और उसकी चुदवाने की तड़प बढ़ती ही जा रही थी। तभी उत्तेजना के मारे उसके मुंह से कुछ ऐसे शब्द निकल गई जिसके बारे में सोच कर वह बाद में खुद अपने ऊपर क्रोधित होने लगी।

ओह राहुल चोद मुझे डाल दे पूरा लंड मेरी बुर में बेटे..

आहहहहह...।बेटा चोद मुझे....ससससससहहहहहहह....आहहहहहहह...। बेटा

डाल ....आहहहहहहह...पुरा डाल....अपना लंड मेरी बुर मे...शशशशशशहहहहहहह....आहहहहहहहह....राहुल मेरे बेटे....

( अलका बड़ी तीव्र गति से अपनी उंगली से अपनी बुर की चुदाई करते हुए अपने बेटे को याद कर रही थी खास करके उसके मोटे तगड़े लंड को जिसे उसने अभी तक देखी भी नहीं थी। सिर्फ उसके आकार से पजामे में बने तंबू को ही देखी थी। अलका की सिसकारियां बढ़ने लगी थी।पुरे कमरे मे गुँज रही गरम सिसकारीया उसके चुदासपन की गवाही दे रहीे थी। कुछ ही पल में अलका के मुंह से एक गर्म चीख निकली और उसकी रसीली बुर से नमकीन पानी का फुवारा फुट पड़ा , वह आनंद के सागर में गोते लगाने लगी उसकी भारी हो चली सांसे और भी तेज चलने लगी थी। वह पानी का तेज फव्वारा छोड़ते हुए पीछे कदम बढ़ाते हुए अपने बिस्तर की तरफ चली जा रहीे थी, जैसे ही बिस्तर से उसकी टांगें स्पर्श हुई वह बिना कुछ सोचे समझे धम्म से बिस्तर पर पसर गई और गर्म सांसे लेते हुए नमकीन पानी का फव्वारा छोडऩे लगी।

थोड़ी देर में वो एक दम शांत हो गई, अपनी प्यास को वह अपने ही उंगलियों से बुझाने में अंततः कामयाब हो चुकी थी। चैन की सांस लेते हुए उसकी आंख लग गई।

विनीत भी कम नहीं तड़प रहा था। रात भर उसकी भाभी ने उसके लंड से खेली वह जब भी विनीत का लंड अपनी बुर में लेती तब वीनीत यह सोच कर अपनी भाभी की बुर में लंड डालता है कि वह उसकी भाभी नहीं बल्कि अलका है वह मन में अपनी भाभी को चोदते हुए अलका का ही कल्पना कर रहा था। वह सारी रात अपनी भाभी को अलका समझकर ही चोदता रहा।

तीनों अपने अपने तरीके से प्यासे तड़प रहे थे। इन सभी के साथ साथ मधु और विनीत की भाभी भी थी। सब के सब चुदाई के प्यासेे हो चुके थे। इन सभी का केंद्र बिंदु राहुल ही था।

अलका के पति के जाने के बाद जानकारी अपने आपको दुनिया की नजरों से संभाल के रखे हुए थी। लाख मुसीबते आई लेकिन अलका अपने हालात और परिस्थितियों से कभी भी समझौता नहीं की वह अपने कर्म पथ पर अडग चलती ही रही. लेकिन अब हालात बदल चुके थे बित्ते भरका लगने वाला वह लड़का वीनीत और उसी के हम उम्र का उसका खुद का बेटा राहुल की वजह से बरसों से दबी उसकी काम भावनाएं अब प्रज्वलित होने लगी थी।

अलका के कमरे में शांति से फेली हुई थी कि तभी सुबह का 6:00 बजे का अलार्म बजने लगा' अलार्म की आवाज सुनते ही प्रगाढ़ निद्रा में सो रही अलका की नींद अचानक खुल गई, सामने टंगी दीवार घड़ी पर नजर पड़ते ही वह तुरंत बिस्तर पर से उठ खड़ी हुई और सामने दरवाजे की तरफ लगभग भागते हुए गई , लेकिन जैसे ही उसने अपनी हालत पर गौर की तो वह एकदम से दंग रह गई। उसे तुरंत रात की बात याद आ गई जब वह अपने हाथों से ही हस्तमैथुन करते हुए आत्म संतुष्टि पाकर उसी तरह से संपूर्ण नग्नावस्था में ही बिस्तर पर सो गई थी। वह खुद ही अपनी हालत पर शर्मिंदा हो गई उसके गोरे-गोरे गाल शर्म की वजह से सूर्ख लाल हो गए और उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गई ज्यादा देर वही खड़े रहना उसके लिए मुनासीब ना था।

क्योंकि वह पहले से ही एक घंटा लेट हो चुकी थी। वह मन ही मन में यह सोचते हुए कि राहुल तो उठ गया होगा उसके लिए नाश्ता बनाना है सोनू भी उठ गया होगा आज इतनी देर तक सोई रह गई उसे पता ही नहीं चला।

अलका मन ही मन में बड़ बड़ाते हुए गाउन उठाइ और उसे पहन ली।

कमरे से बाहर आते ही वह कमरे में फेली शांति को देखकर हैरान थी, वह समझ गई कि उसी की ही तरह आज लगता है उसके दोनों बच्चे भी सो ही रहे हैं।

राहुल के कमरे की तरफ बढ़ गई दरवाजे के बाहर खड़े होकर वह दरवाजे पर दस्तक देने ही वाली थी कि उसकी हथेली दरवाजे पर पड़ते ही दरवाजा खुद ब खुद खुलता चला गया' इस तरह से लापरवाह की तरह दरवाजा खुला छूटा हुआ देखकर वह मन ही मन बड़बड़ाई ।

यह लड़का भी ना इतना बड़ा हो गया लेकिन ना जाने कब इसे अक्ल आएगी( इतना कहने के साथ ही वह कमरे में प्रवेश कर गई लेकिन जैसे ही उसकी नजर बिस्तर पर सो रहे राहुल पर पड़ी वह दंग रह गई राहुल का पजामा उसके घुटनों तक खींचा हुआ था और उसका लंड खुंटे की तरह बिल्कुल सीधा छत की तरफ मुंह ऊठाए खड़ा था। अलका की नजर सीधे ही उसके बेटे के खड़े लंड पर पड़ी थी।

बाप रे बाप इतना मोटा ताजा ओर इतना तगड़ा लंड

( अलका की नजर अपने बेटे के लंड पर पड़ते ही सबसे पहली प्रतिक्रिया उसकी यही थी। वह हैरान थी, उस के समझ के बाहर था कि इतना सीधा सादा लड़का होते हुए भी उसका हथियार इतना दमदार क्यों था वह मन ही मन में सोचने लगी कि वाकई में मेरे बेटे के लंड को देख कर ही औरतों की बुर पानी झटक दे।

अपने बेटे के लंड को देख कर उसकी खुद की बुर पानी रिसने लगी थी गजब का नजारा बना हुआ था राहुल बिस्तर पर अध नंगा लेटा हुआ था, उसका लंड एकदम टनटना के सीधे खड़ा था। और कमरे में उसकी मां जोकि बरसों के बाद चुदवासी हुई थी वह एकदम कामातूर होकर अपने ही बेटे के लंड को बुर में पानी लिए निहार रहीे थी।

वह क्या करे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था उसे कल रसोई घर वाली घटना तुरंत याद आने लगी और वह मन मे ही बड़बडाई़..तभी तो मैं सोचूं कि मेरे बेटे के पजामे में बना तंबू मेरी गांड मे इतना ज्यादा क्यों चुभ रहा था।

अलका कमरे में अपने बेटे को जगाने ं आई थी लेकिन अपने बेटे का मूसल लंड देखकर वह काम विह्वल हो गई थी। उत्तेजना के मारे उसकी हथेली खुद-ब-खुद गाउन के ऊपर से ही बुर के ऊपर चली गई थी जिसे वह गांऊन के ऊपर से हि मसल रही थी।

समय बीतता जा रहा था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह से अपने बेटे को जगाए इस तरह से जगाना भी ठीक नहीं था। वैसे तुम इसका मानी यहां से जाने को हो ही नहीं रहा था उसका दिल तो यह कह रहा था कि एक बार वह अपने ही बेटे के लंड को अपनी हथेली में दबोच कर देखें लेकिन ऐसा संभव नहीं

था। वह ना चाहते हुए भी कमरे के बाहर गई और दरवाजे को बाहर से बंद करते हुए दरवाजे पर दस्तक देने लगी। दरवाजे पर दस्तक की आवाज को सुन कर रहा हूं कि नींद खुली और उसकी नजर भीे सामने टंगी दीवार घड़ी पर पड़ी तो वह भी हैरान हो गया। उससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि उसका पजामा घुटनों में फंसा हुआ था और उसने झट से पजामे को ऊपर सरका कर पहन लिया।

उसकी मम्मी लगातार दरवाजे पर दस्तक दिए जा रही थी तो जवाब में सिर्फ इतना ही बोला।

हां हां आया मम्मी। ( इतना कह कर वह बिस्तर से उठा

और मन ही मन में वह भी बोला कि अच्छा हुआ इस हाल में मम्मी ने उसे नहीं देखा वरना डांटना शुरू कर देती। हो जल्दी से कमरे से बाहर आया तब तक उसकी मम्मी जा चुकी थी।

बाथरूम में अलका ने अपने बेटे के लंड की कल्पना करते हुए फिर से अपनी उंगली से संतुष्टि प्राप्त की।।

थोड़ी देर बाद अलका नाश्ता तैयार कर दी । और दोनों बच्चों को नाश्ता करा कर स्कूल भेजने के बाद , खुद भी तैयार होकर ऑफिस के लिए निकल गई।

कुछ दिन तक सब कुछ सामान्य ही रहा, राहुल का मन होते हुए भी उसे कुछ भी देखने का मौका नहीं मिल पाया। उसकी नजरे अब हमेशा अपनी ही मम्मी को नंगी देखने की कामना लिए यहां वहां घूमती रहती थी। लेकिन कुछ दिनों से कोई बात नहीं बनी। नीलू से भी कोई खास बात नहीं बन पाई हालांकि राहुल का तो मन बहुत करता था कि नीलू वही हरकत दौहराएे जो उस दिन स्कूल के ऊपरी मंजिल की क्लाश में की थी। नीलू के द्वारा की गई उसके लंड की चुसाई को याद करते ही राहुल का पुरा बदन गनगना जाता था। राहुल की दिली ख्वाहिश बढ़ती जा रही थी कि नीलू एक बार फिर से उसके मुसल जैसे लंड को अपने मुंह में लेकर चुसे।

लेकिन उसकी दिल की बात दिल में ही रह गई क्योंकि अब तक जो भी हुआ था दूसरों के ही मर्जी से हो रहा था राहुल की मर्जी तो थी ही लेकिन कभी भी उसने आगे से चलकर अपनी जरूरत को नहीं बताया। राहुल कुछ इस तरह से लाभ होता आ रहा था अगर उसकी जगह कोई और लड़का होता तो सामने से चलकर अपने को मिली हुई लाभ का पूरा का पूरा फायदा उठा था लेकिन यह सब में उसकी शर्म आड़े आ जा रही थी।

खेर जैसे तैसे करके दिन बीतता गया, राहुल के तन की और मन की दोनों प्यास बढ़ती ही जा रही थी। जिसे वह रोज रात को मुठ मारकर शांत करने की कोशिश करता रहता।

राहुल की मां भी ठीक इसी तरह परेशान थी उसके भी तन की प्यास उसे परेशान किए हुए थे राहुल की तरह वह भी अपनी उंगली से ही काम चला रहीे थी और जब से उसने अपने बेटे के लंड को अपने चूतड़ों के बीच महसुस की थी और अपनी आंखों से अपने बेटे के टन टनाए हुए लंड को देखी थी तब से तो और भी ज्यादा उसकी प्यास भड़क चुकी थी। और कुछ दिनों से तो उसकी मुलाकात विनीत से भी नहीं हो पाई थी। विनीत भी अल्का से ना मिलकर परेशान ही था। सबके सब अपने जरूरत और सड़क को लेकर परेशान थे।

 
रविवार का दिन था। मतलब ना अलका को ऑफिस जाना था ना बच्चों को स्कूल जाना था वैसे भी रविवार के दिन राहुल देर तक सोए रहता था। आज की सुबह के 9:00 बज चुके थे फिर भी राहुल अपने कमरे में सोया हुआ था। जिस दिन से अलका अपने बेटे के लंड को देखी थी उस दिन से वह रोज राहुल को जगाने उसके कमरे तक पहुंच जाती थी। लेकिन उस दिन की तरह उसे दुबारा वह सुनहरा मौका ना मिल सका हमेशा राहुल के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद ही रहता था। वह हमेशा यही सोचकर से कमरे तक जाती थी कि शायद आज उसे फिर से वही दृश्य देखने को मिल जाए ताकि उसकी सूखी तपती जांघो के बीच की नहर मैं कुछ गिला पन आ जाए लेकिन ऐसा दुबारा हो नहीं पा रहा था।

अलका रसोई घर में रसोई तैयार कर रही थी उसे मालूम था कि सोनू और राहुल दोनों छुट्टी के दिन देर तक ही सोते रहते थे। इसलिए वह उन्हें आज के दिन जल्दी नहीं जगाती थी। फिर भी कुछ ज्यादा ही टाइम हो जाने पर अलका के मन में विचार आया कि आज कुछ ज्यादा ही टाइम हो गया है चलकर दोनों बच्चों को जगा ही देती हूं, और उसके मन में वही दृश्य पुन: देखने की लालसा भी जाग गई थी। इसलिए वह राहुल के कमरे की तरफ बढ़ गई लेकिन दरवाजा अंदर से बंद होने की वजह से निराश हो गई और वह बाहर से ही दरवाजे को थपथपाकर राहुल को आवाज देने लगी, अलका के आने के कुछ देर पहले ही राहुल की आंख खुल चुकी थी। इसलिए वो दरवाजे पर दस्तक होते ही बिस्तर पर से उठ चुका था और आता हूं कहकर अपने कपड़े व्यवस्थित करने लगा। राहुल जब चुका था यह जानकर अलका बाथरूम की तरफ बढ़ गई । राहुल जग तो चुका था लेकिन उसकी आंखों में अभी भी नींद की वजह से भारीपन था। अगर वह फिर से बिस्तर पर पड़ता तो उसे फिर से नींद आ जाती लेकिन समय काफी हो चुका था इसलिए उसे उठना ही पड़ा। दरवाजे को खोलते हुए उसे याद आ गया कि आज तो उसे एक मित्र के वहां उसके बर्थडे पर जाना था। राहुल जानता था कि वह मित्र उतना खास नहीं था बस हाय हेलो जितना ही संम्बंध था। लेकिन फिर भी वह बड़े प्यार से बुलाया था इसलिए जाना तो पड़ता ही। लेकिन वहां जाने के लिए आज तो अभी बहुत टाइम था क्योंकि उसने पार्टी शाम को दे रखी थी।

राहुल आंखों को मिंजता हुआ बाथरूम की तरफ जाने लगा। उस पर नींद अभी भी हावी थी। आंखों को मिंजते मिंजते वह बाथरूम तक पहुंच गया। जैसे ही वह दरवाजे को खोलने के लिए दरवाजे का हैंडल पकड़ा दरवाजा खुद-ब-खुद हल्का सा खुल गया। बस हल्की सी खुले दरवाजे से उसने जो बाथरुम के अंदर का नजारा देखा तो उसकी नींद उड़ गई। उसका रोम रोम झनझना गया। उसकी सांस अटक गई। बाथरूम के अंदर का नजारा राहुल तो क्या उसकी जगह दुनिया का कोई भी मर्द देखता तो उसकी हालत ठीक वैसीे ही होती जैसी राहुल की थी। राहुल के पजामे में तुरंत तंबू सा तन गया। राहुल करता भी क्या अंदर का नजारा से कुछ ऐसा था कि अच्छे अच्छो का लंड खड़ा हो जाए।

बाथरूम के अंदर राहुल की मां थी जो कि इस वक्त पोशाब कर रही थी। उसका मुंह सामने दीवार की तरफ था। और उसकी गांड राहुल कीे तरफ थी , जिस पर राहुल की नजर पहले ही पड़ी थी। अपनी ही मां की बड़ी-बड़ी सुडोल गोरी गोरी गांड पर नजर पड़ते ही राहुल की तो हालत खराब हो गई। नींद की वजह से पहले तो राहुल को पता ही नहीं चला कि बाथरूम में मम्मी कर क्या रही है। लेकिन बाथरूम में गूंज रही सुमधुर सीटी की आवाज जो बिल्कुल बांसुरी की आवाज की तरह लग रही थी राहुल उस सिटी की आवाज को तुरंत पहचान गया । उसे जैसे ही यह आभास हुआ की मम्मी बाथरूम में बैठ कर पेशाब कर रही है,तो इस बात से ही राहुल का लंड टनटना कर खड़ा हो गया । क्योंकि इससे पहले भी वह बाथरुम के बाहर खड़ा होकर पेशाब करने की वजह से आ रही सीटी की आवाज को सुन चुका था , लेकीन पहले यह बांसुरी की धुन की तरह निकल रही सीटी की आवाज को सुनकर ऊसे कभी उत्तोजना और रोमांच का एहसास कभी नही हुआ। लेकीन अब... अबकी बात कुछ ओर थी अब तो माहोल के साथ साथ नजरीया भी बदल चुका था।

पेशाब करते समय राहुल की मां ने गाऊन को आधी पीठ तक चढ़ा ली थी जिससे पीछे से उसकी बड़ी बड़ी गांड संपूर्णत: नग्न दीखाई दे रही थी। राहुल वहीं खड़े खड़े हल्के से खुले दरवाजे की ओट लेकर अंदर का नजारा देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था। राहुल अपनी मां को पेशाब करते हुए और उसकी मदमस्त बड़ी-बड़ी गोरी गांड को देखकर उत्तेजित होता हुआ मन ही मन बोला।

ऊफ्फ्रफफ......... क्या गजब की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड है मम्मी की जी करता है कि पीछे से जाकर पूरा लंड डालकर चोद दुँ( इतना सोचते हुए वह पजामे भी बने तंबू को अपनी हथेली में भरकर मसनने लगा।

राहुल की मम्मी एक दम बिंदास होकर आराम से बैठ कर पेशाब कर रही थी। अलका को यह बिल्कुल भी आभास नहीं था कि उसने जो दरवाजा खुला ही छोड़ आई थी पेशाब करने के लिए उसी खुले हुए दरवाजे की ओट लेकर उसका ही बेटा उसकी बड़ी बड़ी गांड को और पेशाब करते हुए देख कर एकदम चुदवासा हुआ जा रहा था। अलका लापरवाही ने दरवाजा खुला छोड़ दी थी क्योंकि अभी-अभी ही वह राहुल को जगा कर आई थी और इसी यह लग रहा था कि इतनी जल्दी राहुल बाथरुम की तरफ नहीं आएगा फिर उसे पेशाब भी तो बड़ी तेज लगी थी की उसे दरवाजे की कड़ी लगाने तक का समय नहीं ले सकी और वह आव देखी ना ताव , झट से गाऊन उठा कर बैठ गई पेशाब करने वो तो अच्छा हुआ कि उसने पेंटी नहीं पहनी थी वरना पेंटी ही गीली कर देती।

राहुल अभी भी दरवाजे के बाहर खड़ा अपनी फटी आंखों से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को घूरे जा रहा था और एक हाथ से अपने तने हुए तंबू को मसले जा रहा था। तभी उसे बुर से आ रही सीटी की आवाज धीमी पड़ती सुनाई देने लगी उसे पता चल गया कि मम्मी की टंकी खाली होने वाली है, और अब यहां ज्यादा देर तक खड़े रहना ठीक नहीं था क्योंकि मम्मी किसी भी वक्त बाहर आ सकती थी। वह सोच ही रहा था कि तब तक उसकी मम्मी पेशाब करके खड़ी हो गई। राहुल अपनी मम्मी को खड़ी होते देख एकदम से हड़बड़ा गया उसे कुछ सुझ ही नहीं पाया और उसने भी हड़बड़ाहट में हल्के से दरवाजे को बंद किया और दूर जाने का तो मौका था ही नही उसके ईसलिए वह झट से मुंह दुसरी तरफ घुमाकर एेसे खड़ा हो गया की जेसे वह अपनी मम्मी का बाहर निकलने का ईंतजार कर रहा हो।

पेशाब करने के बाद राहुल की मां राहत का अनुभव कर रही थी बहुत कोई गीत गुनगुनाते हुए जैसे ही दरवाजा खोलकर सामने नजर दौड़ाई तो दरवाजे के बाहर राहुल सामने की तरफ मुंह किए हुए खड़ा मिला। राहुल को देखते ही वह बोली।

अरे बेटा तुम उठ गए ।( अपनी मां की आवाज सुनते ही राहुल अपनी मां की तरफ घुमा ।)

कब आए यहां? अच्छा कोई बात नहीं है तुम जल्दी से नहा लो मैंने नाश्ता तैयार कर दीया है , तैयार होकर आओ जल्दी से गरमा-गरम खा लो( इतना कहने के साथ ही जैसे ही उसकी नजर राहुल के पजामे में बने तंबू पर गई तो वह चौंक गई। कब तक राहुल बोला।)

जी मम्मी आप नाश्ता लगाओ मैं झट से नहा कर तैयार होकर आता हूं।

इतना कहने के साथ ही वह बाथरूम का दरवाजा खोलकर झट से बाथरूम में घुस गया। अलका उसे बाथरूम में जाते देखते रह गई। और कुछ देर तक वहीं खड़े खड़े सोचती रह गई कि कहीं राहुल ने से पेशाब करते देख तो नहीं लिया है , वैसे भी तो दरवाजा खुला ही था हो सकता है वह भूल से अंदर झांक लिया हो और मुझे पेशाब करता हुआ देखकर शर्मिंदा होकर वापस बाहर खड़े होकर मेरे बाहर निकलने का इंतजार करने लग गया हो। लेकिन अगर वह मुझे पेशाब करता हुआ देख कर शर्मिंदा हुआ होता तो उसके पजामे में उसका लंड क्यों तनकर खड़ा हो गया? कहीं ऐसा तो नहीं कि वह मुझे इस हाल में देखकर उत्तेजित हो रहा हो। ऐसे ढेर सारे सवाल अलका के मन में उसके बेटे को लेकर घूम रहे थे जिसका जवाब ढूंढ पाना उसके लिए मुश्किल हुए जा रहा था। अलका वहीं खड़ी खड़ी रसोई घर में हुई हरकत और आज की घटना को बारी-बारी से टटोल रही थी। लेकीन वह कीसी भी सवाल का जवाब ढुंढ पाने मै असमर्थ साबित हो रही थी। वह वहां से चल कर वापस रसोई घर में आ गई।

राहुल से यह दृश्य देख कर बर्दाश्त नहीं हुआ और वह बाथरुम में घुसते ही अपने सारे कपड़ों को उतारकर एकदम नंगा हो गया। और उसने अपनी मुट्ठी में अपने टनटनाए हुए लंड को भरकर आगे पीछे करके अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड के बारे में सोच कर मुठ मारने लगा। मुठ मारकर वह जल्दी जल्दी नहा कर तैयार हो गया और गरमा गरम नाश्ता करने लगा। उसकी मम्मी उसे बड़ी अजीब नजरों से देख रही थी। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वाकई में उसका लड़का अभी भी मासूम है या अब बड़ा हो चुका है। चेहरे से तो अभी भी वह भोलाभाला ही लगता था लेकिन अपनी हरकतों से बड़ा होने लगा था। खैर तीनों ने साथ मिलकर नाश्ता किया, । राहुल बार-बार छिपी नजरों से अपनी मां को देख ले रहा था।

नाश्ता करते समय ही राहुल ने अपनी मां को बता दिया था कि उसे एक दोस्त के जन्मदिन पर जाना था। तो उसकी मां ने वहां जाने कि उसे इजाजत भी दे दी।

 
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