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राहुल अपनी हरकत से अंदर ही अंदर बहुत खुश था लेकिन अपने किए गए हरकत की वजह से शर्मिंदगी महसूस कर रहा था। वह मन ही मन में यह सोच रहा था कि क्या मेरे लंड की चुभन मम्मी को अपनी गांड पर महसूस हुई भी या नहीं। अगर सच में मम्मी मेरे लंड की चुभन अपनी गदराई गांड पर महसूस कर रही थी तो मुझे रोकी क्याे नही ,क्यों उसी तरह से झुक कर खड़ी रहेी। कहीं ऐसा तो नहीं मम्मी मेरी हरकत का मजा ले रही थी इसलिए मुझे कुछ बोल ही नहीं वरना इतनी देर तक बाहों में भरने नहीं देती तो वैसे भी तो वह सब्जी काट रही थी। पर ऐसा भी तो हो सकता है कि साड़ी के ऊपर से मम्मी को मेरे लंड की चुभन महसूस ही ना हुई हो।
राहुल भी कंफ्यूज था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह यह नहीं तय कर पा रहा था कि उसकी मम्मी मजा ले रही थी या यूं ही उस का दुलार समझ कर खड़ी रह गई थी। फिर भी राहुल अपने मन को यह समझा कर रहे गया कि उसकी मम्मी दूसरी औरतों की तरह नहीं थी जो ऐसी हरकत का मजा ले वह तो बहुत ही सीधी सादी औरत हे। मैं ही कुछ गलत समझ गया।
राहुल यह कहकर अपने मन को मना ले गया।
लेकिन फिर यह सोच कर हैरान हुआ जा रहा था कि मम्मी का पिछवाड़ा देखते हैं उसे क्या हो जाता है क्यों ऐसी हरकत कर बैठता है। ऐसा पहले तो कभी नहीं होता था फिर अब क्यो एसा होने लगा। फिर खुद ही पिछले कुछ दिनों से आए अपने अंदर के बदलाव के कारण को समझने लगा। नीलू से मुलाकात और फिर विनीत की भाभी इन दोनों के साथ तो सब कुछ हो ही चुका था ऊपर से अपनी मां को संपूर्णता नंगी देखना। यही सब कारण था कि राहुल अपनी मां की मदमस्त गांड को देखकर आपे से बाहर हो जाया करता था।
और फिर से आइंदा ऐसी हरकत ना करने का खुद ही वचन लेकर शांत हो गया।
इसी तरह से कुछ दिन और बीत गए. अलका के अंदर वासना का संचार बढ़ता ही जा रहा था वह भी अब अपने बेटे के ताक में लगी रहती थी खास करके अलका अपने बेटे का तंबू देखना चाहती थी जिस दिन से उसने अपने बेटे के नंगे लँड को अपने हाथ से छुई थी। तब से तो राहुल के लँड ने अलका के दीमाग मे पुरी तरह से कब्जा जमा लिया था।
अलका राहुल के ताक झांक में लगी रहती थी और राहुल अपनी मां के में लगा रहता था बस वह मौका ही देखता रहता था कि कब कौन सा अंग झलक जाए।
ऐसे ही एक दिन रविवार का दिन था। अलका के ऑफिस की और राहुल के स्कूल की छुट्टी थी। अलका के अंदर की कामाग्नि दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। खास करके जब से उसने अपने बेटे के लंड को देखी थी तब से तो उससे रहा ही नहीं जाता था हर रात अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड की कल्पना करके कभी उंगली से तो कभी बैगन से ककड़ी और केले से सभी तरह के लंबे और मोटे फल से अपने बुर की प्यास को बुझाने की पूरी कोशिश कर चुकी थी लेकिन यह प्यास थी की बढ़ती ही जा रही थी। अलका जो इतने बरसों से अपने आप को संभाले हुए थी अब उससे अपने बदन की आग बुझाए नहीं बुझ रही थी किसी भी वक्त उसके कदम लड़खड़ा सकते थे। विनीत तो इसी ताक में लगा रहता था लेकिन कुछ दिन से उससे मुलाकात नहीं हो पा रही थी अलका को भी बाजार में आते जाते बस वीनीत का ही इंतजार रहता था और घर पहुंचने पर अपने बेटे के गठीलेे बदन और उसके पेंट में बने तंबू को देख देखकर अपनी पैंटी गीली किए जा रही थी। राहुल भी कम नहीं था रोज अपनी मां के मांसन गोरे बदन और उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और भरावदार गांड को देख देख कर और उसकी कल्पना कर कर के रोज रात को मुठ मारकर शांत हुआ करता था।
कुछ दिन से राहुल का मन चोदने को तड़प रहा था, राहुल को भी बहुत दिन हो गए थे बुर में लंड डाले, क्या करे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था नीलू और वीनीत की भाभी की बहुत याद आ रही थी उसे। बहुत दीन हो गए थे बुर के दर्शन किए। चुदाई का जुनून राहुल पर इस कदर छाया हुआ था कि बार-बार उसकी नजर घर का काम कर रही उसकी मां पर ही जा रहे थी। एक मन उसका कहता कि यह गलत है ऐसा सोचना भी पाप है लेकिन जब जब उसकी नजर अपनी मां की गदराई गांड पर जाती तो सारे रिश्ते नाते एक तरफ रख देता और उस समय बस उसे उसकी मां का नशीला बदन और गदराई गांड ही नजर आती थी। वह अपनी मां के साथ आगे बढ़ना चाहता था लेकिन डर लगता था उसे , कि कहीं उसकी मम्मी इस हरकत से नाराज ना हो जाए।
उसे कहां पता था कि जिस तरह से वह चुदाई करने के लिए तड़प रहा था। उसी तरह उसकी मा भी मोटे ताजे लंड को अपनी बुर में डलवाने के लिए तड़प रही थी। अगर राहुल अपनी मां के मन की बात को जान सकता तो जरूर बिना कहे घर में ही अपनी मां की जमकर चुदाई कर दिया होता। लेकिन मजबूर था अपने संस्कारों की वजह से क्योंकि अब तक अलका ने एसा माहौल नहीं बनने दी थी कि राहुल किसी तरह की छूट छाठ ले सकें। वह तो राहुल की उम्र का तकाजा था जो अपनी रसोई घर में अपनी मां को बाहों में भरकर हरकत कर बैठा था।
दोपहर का समय था गर्मी अपने चरम सीमा पर थी। पंखे की हवा भी बदन को ठंडक देने में असमर्थ साबित हो रहे थे। अलका राहुल और सोनू तीनों ड्राइंग रूम में आराम कर रहे थे। गर्मी की वजह से तीनों फर्ष पर चटाई बिछाकर नीचे लेटे हुए थे सोनू तो सो चुका था लेकिन अलका और राहुल की आंखों से नींद कोसों दूर थी। तापमान की गर्मी से ज्यादा दोनों के अंदर बासना की गर्मी का पारा ज्यादा था। अलका पतला सा गाउन पहने हुए थी। बीच में सोनू लेटा हुआ था और किनारे पर राहुल जौकी सिर्फ टॉवल और बनियान पहनकर ही लेटा हुआ था। जिसमे से उसके गठीले बदन का आकर्षण किसी भी औरत को मस्त कर देने में सक्षम था। और उस आकर्षण से खुद उसकी मां भी बच नहीं पाई थी। रह रह कर अलका की नजर अपने बेटे के बदन पर चली जा रही थी, लेकिन उसकी नजरें जो देखना चाहती थी अभी तक वह नजारा सामने नहीं आया था। बार-बार अलका की नजर राहुल की जांघों के बीच उस उठाव को देखना चाहती थी जिसे देखने के लिए हर औरत बेताब रहती हे। लेकिन अभी तक राहुल का लंड फनफना कर खड़ा नहीं हुआ था अभी शायद टॉवल के अंदर सो रहा था और उसे जगाने की कोशिश में अलका जूट चुकी थी। वह बार-बार जानबूझकर अपने चूड़ियों को खनकाती थी ताकि राहुल उसकी तरफ देख सकें और ऐसा होता भी था अपनी मां की चूड़ियों की खनक सुन कर राहुल बार-बार अपनी मां की तरफ एक नजर फेर ले रहा था। लेकिन इसका प्रभाव उसकी जांघो के बीच सोए लंड महाराज पर बिल्कुल भी नहीं पड़ रहा था। अलका की की गई कोशिश नाकाम होती नजर आ रही थी वह परेशान थी की कैसे राहुल को अपनी तरफ आकर्षित करें। अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने में उसे एक अजीब सा मजा मिल रहा था। लेकिन इस मजे की वजह से उसकी तड़प और ज्यादा बढ़ जा रहे थे अभी तक तो राहुल उसकी तरफ आकर्षित नहीं हो पाया था और अलका की उत्तेजना पल पल बढ़ती जा रही थी। क्या करें कैसे राहुल का ध्यान अपनी तरफ खींचे अलका इसी सोच में लगी हुई थी। अलका पीठ के बल लेटी हुई थी तभी वहां अपने पैर को घुटनों से मोडते़े हुए राहुल का ध्यान उस पर जाए इस तरह से उसको सुनाते हुए बोली।
बेटा आज कितनी गर्मी है मुझसे तो बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है। ( इतना कहने के साथ ही अलका ने अपने पैर को घुटनों से मोड़ आते हुए और बड़े ही चतुराई से अपने गांऊन को थोड़ा सा चढ़ा कर घुटनों से छोड़ दी और उसका गांऊन तुरंत घुटनों से फिसलता हुआ नीचे कमर तक आ गया जिससे अलका की मांसल गोरी गोरी जांघे बिल्कुल नंगी हो गई, चूड़ियों की खनक और ज्यादा गर्मी वाली बात सुनकर राहुल की नजर अपनी मां पर पड़ी तो वह अपनी मां को देखते ही दंग रह गया। अपनी मां की गोरी चिकनी टांगे और मांसल केले के तने के समान मांसल जांघों को देखकर उसका सोया हुआ लंड फुंफकारने लगा। यह नजारा देखते ही राहुल का गला उत्तेजना के कारण सूखने लगा । अलका भी तिरछी नजर से अपने बेटे की तरफ देखी तो उसकी नजरों को अपने बदन के ऊपर फिरती देख कर अंदर ही अंदर खुश होने लगी। अलका की नजर तुरंत अपने बेटे के जांघो के बीच गई, और जांघों के बीच उठते हुए टावल को देख कर उसकी बुर उत्तेजना के कारण फूलने पिचकने लगी। वह जान गई थी कि उसका काम बन चुका हैबदन की प्यास बुझाने के लिए जो काम उसने जवानी में नहीं की थी वह काम उसे इस उम्र में करना पड़ रहा थाा। वो भी अपने बेटे के लिए। राहुल तिरछी नजरों से अपनी मां को ही देखे जा रहा था। अलका अपने बेटे को और ज्यादा उकसाना चाहतीे थी। ताकि उसका लंड बुर मांगने लगे इस वजह से उसने करवट बदलते हुए दूसरी तरफ मुंह करके अपने बेटे की तरफ पीठ कर ली। और राहुल को पता ना चले इस तरह से एक हाथ से धीरे से गाऊन को ओर कमर की तरफ सरका ली , जिससे अलका की मदमस्त बड़ी-बड़ी और गोरी गांड बिल्कुल नंगी होकर राहुल की आंखों के सामने नाचने लगी। राहुल अपनी मां का यह रूप देख कर एकदम से चुदवासा हो गया। उसका जी तो कर रहा था कि अपनी मां के पीछे जाकर लेट जाए और अपना टनटनाया हुआ लंड पीछे से अपनी मा की बुर मे डालकर चोद दे।
राहुल अपनी मां का गजब का रुप देख कर आश्चर्य से भर चुका था। अलका ने भी अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए पूरा जोर लगा चुकी थी इसलिए तो उसने आज पेंटी भी उतार फेंकी थी। गोरी गोरी गांड वह भी एक दम भरावदार ऐसा लग रहा था कि जैसे रस से भरे दो तरबूज किसी ने लगा दिए हो। वैसे भी अलका के बदन में सबसे ज्यादा आकर्षक उसकी उन्नत नितंब ही थी, पैसा नहीं था कि अलका सिर्फ बड़ी-बड़ी और गोलाकार गांड की वजह से ही सुंदर दिखती थी उसका हर एक अंग तरासा हुआ था। सर से लेकर पांव तक पोर पोर में खूबसूरती भरी हुई थी। उन्नत वक्ष स्थल गोरा बदन भरे हुए लाल लाल गाल जैसे कि काशमीेरी सेव, चिकना पेट एकदम सपाट और चिकने पेट के बीच
गहरी नाभि जौकी छोटी सी बुर ही लगती थी। कुदरत की सारी कारीगरी अलका में उतर आई थी एकदम कामदेवी लगती थी।
राहुल देखा तो देखता ही रह गया' ऐसा नहीं था कि वह पहली बार देख रहा हूं इससे पहले भी कई बार उसने अपनी मां को नंगी देख चुका है खास करके उसकी भरावदार गांड को लेकिन इस समय का नजारा कुछ और ही था। राहुल जानता था कि उसकी मां जाग रही है, लेकिन जिस तरह से उसके अंगो का प्रदर्शन हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था शायद उसकी मां अर्ध निद्रा में है वरना उसकी मां ऐसी हरकत करने की कभी सपने में भी सोच नहीं सकती थी। नींद मे ही होने की वजह से उसका गाउन घुटनों से नीचे सरक गया था, और अनजाने में ही करवट लेने की वजह से उसकी मां का भरपूर गांड उजागर होकर प्रदर्शित हो रहा था। ऐसी धारणा राहुल के मन में बनी हुई थी लेकिन वह यह नहीं जानता था कि यह सारी हरकतें उसकी ही मां की सोची समझी साजिश थी।
वाकई में अलका की हिम्मत की दाद देनी होगी क्योंकि वह बहुत ही संस्कारी और शर्मीली औरत थी। ऐसी हरकत करने के बारे में वह कभी सोच भी नहीं सकती थी। लेकिन कहते हैं ना की वासना की पट्टी अगर आंखों पर पड़ जाए तो अच्छे बुरे की पहचान करना मुश्किल हो जाता है उसी तरह का कुछ अलका के साथ भी हो रहा था उसकी आंखों पर भी वासना की पट्टी चढ़ी हुई थी इस समय वह यह नहीं सोच पा रही थी कि जो हरकत वह कर रही है इसका कितना दुष्परिणाम हो सकता है। लेकिन इसके बारे में सोचने की शक्ति अलका खो चुकी थी उसनेे इस समय अपना सारा ध्यान बस अपने बेटे को अपना अंग प्रदर्शित करके उसे अपनी तरफ आकर्षित करने में लगा रखी थी और अपनी इस साजिश में कामयाब भी होती जा रही थी क्योंकि इससे मैं राहुल का पूरा ध्यान उसकी मां पर ही टीका हुआ था। राहुल की प्यासी नजरें उसकी मां की भरपूर उठी हुई गांड पर ही इधर-उधर फिर रही थी चिकनी जांगे वह भी मोटी मोटी मांसल जांघे जिसे देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। अपनी मां की नंगी गांड को देख कर राहुल का भी यही हाल हो रहा था कुछ देर पहले सोया हुआ उसका लंड टन टना के खड़ा होने लगा था । टॉवेल का उभार बढ़ता ही जा रहा था। और उसकी मां अपने बेटे को पूरा मौका दे रही थी कि वह उसकी मदमस्त गांड को देखकर उत्तेजित होने लगे। इसलिए तो उसने अभी तक करवट नहीं बदली थी और रह-रहकर अपनी हथेली को अपनी जांघ पर ऐसे फिरा रही थी कि राहुल को लगे कि वह खुजला रही हो।
राहुल भी कंफ्यूज था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह यह नहीं तय कर पा रहा था कि उसकी मम्मी मजा ले रही थी या यूं ही उस का दुलार समझ कर खड़ी रह गई थी। फिर भी राहुल अपने मन को यह समझा कर रहे गया कि उसकी मम्मी दूसरी औरतों की तरह नहीं थी जो ऐसी हरकत का मजा ले वह तो बहुत ही सीधी सादी औरत हे। मैं ही कुछ गलत समझ गया।
राहुल यह कहकर अपने मन को मना ले गया।
लेकिन फिर यह सोच कर हैरान हुआ जा रहा था कि मम्मी का पिछवाड़ा देखते हैं उसे क्या हो जाता है क्यों ऐसी हरकत कर बैठता है। ऐसा पहले तो कभी नहीं होता था फिर अब क्यो एसा होने लगा। फिर खुद ही पिछले कुछ दिनों से आए अपने अंदर के बदलाव के कारण को समझने लगा। नीलू से मुलाकात और फिर विनीत की भाभी इन दोनों के साथ तो सब कुछ हो ही चुका था ऊपर से अपनी मां को संपूर्णता नंगी देखना। यही सब कारण था कि राहुल अपनी मां की मदमस्त गांड को देखकर आपे से बाहर हो जाया करता था।
और फिर से आइंदा ऐसी हरकत ना करने का खुद ही वचन लेकर शांत हो गया।
इसी तरह से कुछ दिन और बीत गए. अलका के अंदर वासना का संचार बढ़ता ही जा रहा था वह भी अब अपने बेटे के ताक में लगी रहती थी खास करके अलका अपने बेटे का तंबू देखना चाहती थी जिस दिन से उसने अपने बेटे के नंगे लँड को अपने हाथ से छुई थी। तब से तो राहुल के लँड ने अलका के दीमाग मे पुरी तरह से कब्जा जमा लिया था।
अलका राहुल के ताक झांक में लगी रहती थी और राहुल अपनी मां के में लगा रहता था बस वह मौका ही देखता रहता था कि कब कौन सा अंग झलक जाए।
ऐसे ही एक दिन रविवार का दिन था। अलका के ऑफिस की और राहुल के स्कूल की छुट्टी थी। अलका के अंदर की कामाग्नि दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। खास करके जब से उसने अपने बेटे के लंड को देखी थी तब से तो उससे रहा ही नहीं जाता था हर रात अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड की कल्पना करके कभी उंगली से तो कभी बैगन से ककड़ी और केले से सभी तरह के लंबे और मोटे फल से अपने बुर की प्यास को बुझाने की पूरी कोशिश कर चुकी थी लेकिन यह प्यास थी की बढ़ती ही जा रही थी। अलका जो इतने बरसों से अपने आप को संभाले हुए थी अब उससे अपने बदन की आग बुझाए नहीं बुझ रही थी किसी भी वक्त उसके कदम लड़खड़ा सकते थे। विनीत तो इसी ताक में लगा रहता था लेकिन कुछ दिन से उससे मुलाकात नहीं हो पा रही थी अलका को भी बाजार में आते जाते बस वीनीत का ही इंतजार रहता था और घर पहुंचने पर अपने बेटे के गठीलेे बदन और उसके पेंट में बने तंबू को देख देखकर अपनी पैंटी गीली किए जा रही थी। राहुल भी कम नहीं था रोज अपनी मां के मांसन गोरे बदन और उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और भरावदार गांड को देख देख कर और उसकी कल्पना कर कर के रोज रात को मुठ मारकर शांत हुआ करता था।
कुछ दिन से राहुल का मन चोदने को तड़प रहा था, राहुल को भी बहुत दिन हो गए थे बुर में लंड डाले, क्या करे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था नीलू और वीनीत की भाभी की बहुत याद आ रही थी उसे। बहुत दीन हो गए थे बुर के दर्शन किए। चुदाई का जुनून राहुल पर इस कदर छाया हुआ था कि बार-बार उसकी नजर घर का काम कर रही उसकी मां पर ही जा रहे थी। एक मन उसका कहता कि यह गलत है ऐसा सोचना भी पाप है लेकिन जब जब उसकी नजर अपनी मां की गदराई गांड पर जाती तो सारे रिश्ते नाते एक तरफ रख देता और उस समय बस उसे उसकी मां का नशीला बदन और गदराई गांड ही नजर आती थी। वह अपनी मां के साथ आगे बढ़ना चाहता था लेकिन डर लगता था उसे , कि कहीं उसकी मम्मी इस हरकत से नाराज ना हो जाए।
उसे कहां पता था कि जिस तरह से वह चुदाई करने के लिए तड़प रहा था। उसी तरह उसकी मा भी मोटे ताजे लंड को अपनी बुर में डलवाने के लिए तड़प रही थी। अगर राहुल अपनी मां के मन की बात को जान सकता तो जरूर बिना कहे घर में ही अपनी मां की जमकर चुदाई कर दिया होता। लेकिन मजबूर था अपने संस्कारों की वजह से क्योंकि अब तक अलका ने एसा माहौल नहीं बनने दी थी कि राहुल किसी तरह की छूट छाठ ले सकें। वह तो राहुल की उम्र का तकाजा था जो अपनी रसोई घर में अपनी मां को बाहों में भरकर हरकत कर बैठा था।
दोपहर का समय था गर्मी अपने चरम सीमा पर थी। पंखे की हवा भी बदन को ठंडक देने में असमर्थ साबित हो रहे थे। अलका राहुल और सोनू तीनों ड्राइंग रूम में आराम कर रहे थे। गर्मी की वजह से तीनों फर्ष पर चटाई बिछाकर नीचे लेटे हुए थे सोनू तो सो चुका था लेकिन अलका और राहुल की आंखों से नींद कोसों दूर थी। तापमान की गर्मी से ज्यादा दोनों के अंदर बासना की गर्मी का पारा ज्यादा था। अलका पतला सा गाउन पहने हुए थी। बीच में सोनू लेटा हुआ था और किनारे पर राहुल जौकी सिर्फ टॉवल और बनियान पहनकर ही लेटा हुआ था। जिसमे से उसके गठीले बदन का आकर्षण किसी भी औरत को मस्त कर देने में सक्षम था। और उस आकर्षण से खुद उसकी मां भी बच नहीं पाई थी। रह रह कर अलका की नजर अपने बेटे के बदन पर चली जा रही थी, लेकिन उसकी नजरें जो देखना चाहती थी अभी तक वह नजारा सामने नहीं आया था। बार-बार अलका की नजर राहुल की जांघों के बीच उस उठाव को देखना चाहती थी जिसे देखने के लिए हर औरत बेताब रहती हे। लेकिन अभी तक राहुल का लंड फनफना कर खड़ा नहीं हुआ था अभी शायद टॉवल के अंदर सो रहा था और उसे जगाने की कोशिश में अलका जूट चुकी थी। वह बार-बार जानबूझकर अपने चूड़ियों को खनकाती थी ताकि राहुल उसकी तरफ देख सकें और ऐसा होता भी था अपनी मां की चूड़ियों की खनक सुन कर राहुल बार-बार अपनी मां की तरफ एक नजर फेर ले रहा था। लेकिन इसका प्रभाव उसकी जांघो के बीच सोए लंड महाराज पर बिल्कुल भी नहीं पड़ रहा था। अलका की की गई कोशिश नाकाम होती नजर आ रही थी वह परेशान थी की कैसे राहुल को अपनी तरफ आकर्षित करें। अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने में उसे एक अजीब सा मजा मिल रहा था। लेकिन इस मजे की वजह से उसकी तड़प और ज्यादा बढ़ जा रहे थे अभी तक तो राहुल उसकी तरफ आकर्षित नहीं हो पाया था और अलका की उत्तेजना पल पल बढ़ती जा रही थी। क्या करें कैसे राहुल का ध्यान अपनी तरफ खींचे अलका इसी सोच में लगी हुई थी। अलका पीठ के बल लेटी हुई थी तभी वहां अपने पैर को घुटनों से मोडते़े हुए राहुल का ध्यान उस पर जाए इस तरह से उसको सुनाते हुए बोली।
बेटा आज कितनी गर्मी है मुझसे तो बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है। ( इतना कहने के साथ ही अलका ने अपने पैर को घुटनों से मोड़ आते हुए और बड़े ही चतुराई से अपने गांऊन को थोड़ा सा चढ़ा कर घुटनों से छोड़ दी और उसका गांऊन तुरंत घुटनों से फिसलता हुआ नीचे कमर तक आ गया जिससे अलका की मांसल गोरी गोरी जांघे बिल्कुल नंगी हो गई, चूड़ियों की खनक और ज्यादा गर्मी वाली बात सुनकर राहुल की नजर अपनी मां पर पड़ी तो वह अपनी मां को देखते ही दंग रह गया। अपनी मां की गोरी चिकनी टांगे और मांसल केले के तने के समान मांसल जांघों को देखकर उसका सोया हुआ लंड फुंफकारने लगा। यह नजारा देखते ही राहुल का गला उत्तेजना के कारण सूखने लगा । अलका भी तिरछी नजर से अपने बेटे की तरफ देखी तो उसकी नजरों को अपने बदन के ऊपर फिरती देख कर अंदर ही अंदर खुश होने लगी। अलका की नजर तुरंत अपने बेटे के जांघो के बीच गई, और जांघों के बीच उठते हुए टावल को देख कर उसकी बुर उत्तेजना के कारण फूलने पिचकने लगी। वह जान गई थी कि उसका काम बन चुका हैबदन की प्यास बुझाने के लिए जो काम उसने जवानी में नहीं की थी वह काम उसे इस उम्र में करना पड़ रहा थाा। वो भी अपने बेटे के लिए। राहुल तिरछी नजरों से अपनी मां को ही देखे जा रहा था। अलका अपने बेटे को और ज्यादा उकसाना चाहतीे थी। ताकि उसका लंड बुर मांगने लगे इस वजह से उसने करवट बदलते हुए दूसरी तरफ मुंह करके अपने बेटे की तरफ पीठ कर ली। और राहुल को पता ना चले इस तरह से एक हाथ से धीरे से गाऊन को ओर कमर की तरफ सरका ली , जिससे अलका की मदमस्त बड़ी-बड़ी और गोरी गांड बिल्कुल नंगी होकर राहुल की आंखों के सामने नाचने लगी। राहुल अपनी मां का यह रूप देख कर एकदम से चुदवासा हो गया। उसका जी तो कर रहा था कि अपनी मां के पीछे जाकर लेट जाए और अपना टनटनाया हुआ लंड पीछे से अपनी मा की बुर मे डालकर चोद दे।
राहुल अपनी मां का गजब का रुप देख कर आश्चर्य से भर चुका था। अलका ने भी अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए पूरा जोर लगा चुकी थी इसलिए तो उसने आज पेंटी भी उतार फेंकी थी। गोरी गोरी गांड वह भी एक दम भरावदार ऐसा लग रहा था कि जैसे रस से भरे दो तरबूज किसी ने लगा दिए हो। वैसे भी अलका के बदन में सबसे ज्यादा आकर्षक उसकी उन्नत नितंब ही थी, पैसा नहीं था कि अलका सिर्फ बड़ी-बड़ी और गोलाकार गांड की वजह से ही सुंदर दिखती थी उसका हर एक अंग तरासा हुआ था। सर से लेकर पांव तक पोर पोर में खूबसूरती भरी हुई थी। उन्नत वक्ष स्थल गोरा बदन भरे हुए लाल लाल गाल जैसे कि काशमीेरी सेव, चिकना पेट एकदम सपाट और चिकने पेट के बीच
गहरी नाभि जौकी छोटी सी बुर ही लगती थी। कुदरत की सारी कारीगरी अलका में उतर आई थी एकदम कामदेवी लगती थी।
राहुल देखा तो देखता ही रह गया' ऐसा नहीं था कि वह पहली बार देख रहा हूं इससे पहले भी कई बार उसने अपनी मां को नंगी देख चुका है खास करके उसकी भरावदार गांड को लेकिन इस समय का नजारा कुछ और ही था। राहुल जानता था कि उसकी मां जाग रही है, लेकिन जिस तरह से उसके अंगो का प्रदर्शन हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था शायद उसकी मां अर्ध निद्रा में है वरना उसकी मां ऐसी हरकत करने की कभी सपने में भी सोच नहीं सकती थी। नींद मे ही होने की वजह से उसका गाउन घुटनों से नीचे सरक गया था, और अनजाने में ही करवट लेने की वजह से उसकी मां का भरपूर गांड उजागर होकर प्रदर्शित हो रहा था। ऐसी धारणा राहुल के मन में बनी हुई थी लेकिन वह यह नहीं जानता था कि यह सारी हरकतें उसकी ही मां की सोची समझी साजिश थी।
वाकई में अलका की हिम्मत की दाद देनी होगी क्योंकि वह बहुत ही संस्कारी और शर्मीली औरत थी। ऐसी हरकत करने के बारे में वह कभी सोच भी नहीं सकती थी। लेकिन कहते हैं ना की वासना की पट्टी अगर आंखों पर पड़ जाए तो अच्छे बुरे की पहचान करना मुश्किल हो जाता है उसी तरह का कुछ अलका के साथ भी हो रहा था उसकी आंखों पर भी वासना की पट्टी चढ़ी हुई थी इस समय वह यह नहीं सोच पा रही थी कि जो हरकत वह कर रही है इसका कितना दुष्परिणाम हो सकता है। लेकिन इसके बारे में सोचने की शक्ति अलका खो चुकी थी उसनेे इस समय अपना सारा ध्यान बस अपने बेटे को अपना अंग प्रदर्शित करके उसे अपनी तरफ आकर्षित करने में लगा रखी थी और अपनी इस साजिश में कामयाब भी होती जा रही थी क्योंकि इससे मैं राहुल का पूरा ध्यान उसकी मां पर ही टीका हुआ था। राहुल की प्यासी नजरें उसकी मां की भरपूर उठी हुई गांड पर ही इधर-उधर फिर रही थी चिकनी जांगे वह भी मोटी मोटी मांसल जांघे जिसे देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। अपनी मां की नंगी गांड को देख कर राहुल का भी यही हाल हो रहा था कुछ देर पहले सोया हुआ उसका लंड टन टना के खड़ा होने लगा था । टॉवेल का उभार बढ़ता ही जा रहा था। और उसकी मां अपने बेटे को पूरा मौका दे रही थी कि वह उसकी मदमस्त गांड को देखकर उत्तेजित होने लगे। इसलिए तो उसने अभी तक करवट नहीं बदली थी और रह-रहकर अपनी हथेली को अपनी जांघ पर ऐसे फिरा रही थी कि राहुल को लगे कि वह खुजला रही हो।