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होता है जो वो हो जाने दो complete

राहुल अपनी हरकत से अंदर ही अंदर बहुत खुश था लेकिन अपने किए गए हरकत की वजह से शर्मिंदगी महसूस कर रहा था। वह मन ही मन में यह सोच रहा था कि क्या मेरे लंड की चुभन मम्मी को अपनी गांड पर महसूस हुई भी या नहीं। अगर सच में मम्मी मेरे लंड की चुभन अपनी गदराई गांड पर महसूस कर रही थी तो मुझे रोकी क्याे नही ,क्यों उसी तरह से झुक कर खड़ी रहेी। कहीं ऐसा तो नहीं मम्मी मेरी हरकत का मजा ले रही थी इसलिए मुझे कुछ बोल ही नहीं वरना इतनी देर तक बाहों में भरने नहीं देती तो वैसे भी तो वह सब्जी काट रही थी। पर ऐसा भी तो हो सकता है कि साड़ी के ऊपर से मम्मी को मेरे लंड की चुभन महसूस ही ना हुई हो।

राहुल भी कंफ्यूज था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह यह नहीं तय कर पा रहा था कि उसकी मम्मी मजा ले रही थी या यूं ही उस का दुलार समझ कर खड़ी रह गई थी। फिर भी राहुल अपने मन को यह समझा कर रहे गया कि उसकी मम्मी दूसरी औरतों की तरह नहीं थी जो ऐसी हरकत का मजा ले वह तो बहुत ही सीधी सादी औरत हे। मैं ही कुछ गलत समझ गया।

राहुल यह कहकर अपने मन को मना ले गया।

लेकिन फिर यह सोच कर हैरान हुआ जा रहा था कि मम्मी का पिछवाड़ा देखते हैं उसे क्या हो जाता है क्यों ऐसी हरकत कर बैठता है। ऐसा पहले तो कभी नहीं होता था फिर अब क्यो एसा होने लगा। फिर खुद ही पिछले कुछ दिनों से आए अपने अंदर के बदलाव के कारण को समझने लगा। नीलू से मुलाकात और फिर विनीत की भाभी इन दोनों के साथ तो सब कुछ हो ही चुका था ऊपर से अपनी मां को संपूर्णता नंगी देखना। यही सब कारण था कि राहुल अपनी मां की मदमस्त गांड को देखकर आपे से बाहर हो जाया करता था।

और फिर से आइंदा ऐसी हरकत ना करने का खुद ही वचन लेकर शांत हो गया।

इसी तरह से कुछ दिन और बीत गए. अलका के अंदर वासना का संचार बढ़ता ही जा रहा था वह भी अब अपने बेटे के ताक में लगी रहती थी खास करके अलका अपने बेटे का तंबू देखना चाहती थी जिस दिन से उसने अपने बेटे के नंगे लँड को अपने हाथ से छुई थी। तब से तो राहुल के लँड ने अलका के दीमाग मे पुरी तरह से कब्जा जमा लिया था।

अलका राहुल के ताक झांक में लगी रहती थी और राहुल अपनी मां के में लगा रहता था बस वह मौका ही देखता रहता था कि कब कौन सा अंग झलक जाए।

ऐसे ही एक दिन रविवार का दिन था। अलका के ऑफिस की और राहुल के स्कूल की छुट्टी थी। अलका के अंदर की कामाग्नि दिन ब दिन बढ़ती जा रही थी। खास करके जब से उसने अपने बेटे के लंड को देखी थी तब से तो उससे रहा ही नहीं जाता था हर रात अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड की कल्पना करके कभी उंगली से तो कभी बैगन से ककड़ी और केले से सभी तरह के लंबे और मोटे फल से अपने बुर की प्यास को बुझाने की पूरी कोशिश कर चुकी थी लेकिन यह प्यास थी की बढ़ती ही जा रही थी। अलका जो इतने बरसों से अपने आप को संभाले हुए थी अब उससे अपने बदन की आग बुझाए नहीं बुझ रही थी किसी भी वक्त उसके कदम लड़खड़ा सकते थे। विनीत तो इसी ताक में लगा रहता था लेकिन कुछ दिन से उससे मुलाकात नहीं हो पा रही थी अलका को भी बाजार में आते जाते बस वीनीत का ही इंतजार रहता था और घर पहुंचने पर अपने बेटे के गठीलेे बदन और उसके पेंट में बने तंबू को देख देखकर अपनी पैंटी गीली किए जा रही थी। राहुल भी कम नहीं था रोज अपनी मां के मांसन गोरे बदन और उसकी बड़ी बड़ी चूचियां और भरावदार गांड को देख देख कर और उसकी कल्पना कर कर के रोज रात को मुठ मारकर शांत हुआ करता था।

कुछ दिन से राहुल का मन चोदने को तड़प रहा था, राहुल को भी बहुत दिन हो गए थे बुर में लंड डाले, क्या करे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था नीलू और वीनीत की भाभी की बहुत याद आ रही थी उसे। बहुत दीन हो गए थे बुर के दर्शन किए। चुदाई का जुनून राहुल पर इस कदर छाया हुआ था कि बार-बार उसकी नजर घर का काम कर रही उसकी मां पर ही जा रहे थी। एक मन उसका कहता कि यह गलत है ऐसा सोचना भी पाप है लेकिन जब जब उसकी नजर अपनी मां की गदराई गांड पर जाती तो सारे रिश्ते नाते एक तरफ रख देता और उस समय बस उसे उसकी मां का नशीला बदन और गदराई गांड ही नजर आती थी। वह अपनी मां के साथ आगे बढ़ना चाहता था लेकिन डर लगता था उसे , कि कहीं उसकी मम्मी इस हरकत से नाराज ना हो जाए।

उसे कहां पता था कि जिस तरह से वह चुदाई करने के लिए तड़प रहा था। उसी तरह उसकी मा भी मोटे ताजे लंड को अपनी बुर में डलवाने के लिए तड़प रही थी। अगर राहुल अपनी मां के मन की बात को जान सकता तो जरूर बिना कहे घर में ही अपनी मां की जमकर चुदाई कर दिया होता। लेकिन मजबूर था अपने संस्कारों की वजह से क्योंकि अब तक अलका ने एसा माहौल नहीं बनने दी थी कि राहुल किसी तरह की छूट छाठ ले सकें। वह तो राहुल की उम्र का तकाजा था जो अपनी रसोई घर में अपनी मां को बाहों में भरकर हरकत कर बैठा था।

दोपहर का समय था गर्मी अपने चरम सीमा पर थी। पंखे की हवा भी बदन को ठंडक देने में असमर्थ साबित हो रहे थे। अलका राहुल और सोनू तीनों ड्राइंग रूम में आराम कर रहे थे। गर्मी की वजह से तीनों फर्ष पर चटाई बिछाकर नीचे लेटे हुए थे सोनू तो सो चुका था लेकिन अलका और राहुल की आंखों से नींद कोसों दूर थी। तापमान की गर्मी से ज्यादा दोनों के अंदर बासना की गर्मी का पारा ज्यादा था। अलका पतला सा गाउन पहने हुए थी। बीच में सोनू लेटा हुआ था और किनारे पर राहुल जौकी सिर्फ टॉवल और बनियान पहनकर ही लेटा हुआ था। जिसमे से उसके गठीले बदन का आकर्षण किसी भी औरत को मस्त कर देने में सक्षम था। और उस आकर्षण से खुद उसकी मां भी बच नहीं पाई थी। रह रह कर अलका की नजर अपने बेटे के बदन पर चली जा रही थी, लेकिन उसकी नजरें जो देखना चाहती थी अभी तक वह नजारा सामने नहीं आया था। बार-बार अलका की नजर राहुल की जांघों के बीच उस उठाव को देखना चाहती थी जिसे देखने के लिए हर औरत बेताब रहती हे। लेकिन अभी तक राहुल का लंड फनफना कर खड़ा नहीं हुआ था अभी शायद टॉवल के अंदर सो रहा था और उसे जगाने की कोशिश में अलका जूट चुकी थी। वह बार-बार जानबूझकर अपने चूड़ियों को खनकाती थी ताकि राहुल उसकी तरफ देख सकें और ऐसा होता भी था अपनी मां की चूड़ियों की खनक सुन कर राहुल बार-बार अपनी मां की तरफ एक नजर फेर ले रहा था। लेकिन इसका प्रभाव उसकी जांघो के बीच सोए लंड महाराज पर बिल्कुल भी नहीं पड़ रहा था। अलका की की गई कोशिश नाकाम होती नजर आ रही थी वह परेशान थी की कैसे राहुल को अपनी तरफ आकर्षित करें। अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने में उसे एक अजीब सा मजा मिल रहा था। लेकिन इस मजे की वजह से उसकी तड़प और ज्यादा बढ़ जा रहे थे अभी तक तो राहुल उसकी तरफ आकर्षित नहीं हो पाया था और अलका की उत्तेजना पल पल बढ़ती जा रही थी। क्या करें कैसे राहुल का ध्यान अपनी तरफ खींचे अलका इसी सोच में लगी हुई थी। अलका पीठ के बल लेटी हुई थी तभी वहां अपने पैर को घुटनों से मोडते़े हुए राहुल का ध्यान उस पर जाए इस तरह से उसको सुनाते हुए बोली।

बेटा आज कितनी गर्मी है मुझसे तो बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है। ( इतना कहने के साथ ही अलका ने अपने पैर को घुटनों से मोड़ आते हुए और बड़े ही चतुराई से अपने गांऊन को थोड़ा सा चढ़ा कर घुटनों से छोड़ दी और उसका गांऊन तुरंत घुटनों से फिसलता हुआ नीचे कमर तक आ गया जिससे अलका की मांसल गोरी गोरी जांघे बिल्कुल नंगी हो गई, चूड़ियों की खनक और ज्यादा गर्मी वाली बात सुनकर राहुल की नजर अपनी मां पर पड़ी तो वह अपनी मां को देखते ही दंग रह गया। अपनी मां की गोरी चिकनी टांगे और मांसल केले के तने के समान मांसल जांघों को देखकर उसका सोया हुआ लंड फुंफकारने लगा। यह नजारा देखते ही राहुल का गला उत्तेजना के कारण सूखने लगा । अलका भी तिरछी नजर से अपने बेटे की तरफ देखी तो उसकी नजरों को अपने बदन के ऊपर फिरती देख कर अंदर ही अंदर खुश होने लगी। अलका की नजर तुरंत अपने बेटे के जांघो के बीच गई, और जांघों के बीच उठते हुए टावल को देख कर उसकी बुर उत्तेजना के कारण फूलने पिचकने लगी। वह जान गई थी कि उसका काम बन चुका हैबदन की प्यास बुझाने के लिए जो काम उसने जवानी में नहीं की थी वह काम उसे इस उम्र में करना पड़ रहा थाा। वो भी अपने बेटे के लिए। राहुल तिरछी नजरों से अपनी मां को ही देखे जा रहा था। अलका अपने बेटे को और ज्यादा उकसाना चाहतीे थी। ताकि उसका लंड बुर मांगने लगे इस वजह से उसने करवट बदलते हुए दूसरी तरफ मुंह करके अपने बेटे की तरफ पीठ कर ली। और राहुल को पता ना चले इस तरह से एक हाथ से धीरे से गाऊन को ओर कमर की तरफ सरका ली , जिससे अलका की मदमस्त बड़ी-बड़ी और गोरी गांड बिल्कुल नंगी होकर राहुल की आंखों के सामने नाचने लगी। राहुल अपनी मां का यह रूप देख कर एकदम से चुदवासा हो गया। उसका जी तो कर रहा था कि अपनी मां के पीछे जाकर लेट जाए और अपना टनटनाया हुआ लंड पीछे से अपनी मा की बुर मे डालकर चोद दे।

राहुल अपनी मां का गजब का रुप देख कर आश्चर्य से भर चुका था। अलका ने भी अपने बेटे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए पूरा जोर लगा चुकी थी इसलिए तो उसने आज पेंटी भी उतार फेंकी थी। गोरी गोरी गांड वह भी एक दम भरावदार ऐसा लग रहा था कि जैसे रस से भरे दो तरबूज किसी ने लगा दिए हो। वैसे भी अलका के बदन में सबसे ज्यादा आकर्षक उसकी उन्नत नितंब ही थी, पैसा नहीं था कि अलका सिर्फ बड़ी-बड़ी और गोलाकार गांड की वजह से ही सुंदर दिखती थी उसका हर एक अंग तरासा हुआ था। सर से लेकर पांव तक पोर पोर में खूबसूरती भरी हुई थी। उन्नत वक्ष स्थल गोरा बदन भरे हुए लाल लाल गाल जैसे कि काशमीेरी सेव, चिकना पेट एकदम सपाट और चिकने पेट के बीच

गहरी नाभि जौकी छोटी सी बुर ही लगती थी। कुदरत की सारी कारीगरी अलका में उतर आई थी एकदम कामदेवी लगती थी।

राहुल देखा तो देखता ही रह गया' ऐसा नहीं था कि वह पहली बार देख रहा हूं इससे पहले भी कई बार उसने अपनी मां को नंगी देख चुका है खास करके उसकी भरावदार गांड को लेकिन इस समय का नजारा कुछ और ही था। राहुल जानता था कि उसकी मां जाग रही है, लेकिन जिस तरह से उसके अंगो का प्रदर्शन हो रहा था उसे ऐसा लग रहा था शायद उसकी मां अर्ध निद्रा में है वरना उसकी मां ऐसी हरकत करने की कभी सपने में भी सोच नहीं सकती थी। नींद मे ही होने की वजह से उसका गाउन घुटनों से नीचे सरक गया था, और अनजाने में ही करवट लेने की वजह से उसकी मां का भरपूर गांड उजागर होकर प्रदर्शित हो रहा था। ऐसी धारणा राहुल के मन में बनी हुई थी लेकिन वह यह नहीं जानता था कि यह सारी हरकतें उसकी ही मां की सोची समझी साजिश थी।

वाकई में अलका की हिम्मत की दाद देनी होगी क्योंकि वह बहुत ही संस्कारी और शर्मीली औरत थी। ऐसी हरकत करने के बारे में वह कभी सोच भी नहीं सकती थी। लेकिन कहते हैं ना की वासना की पट्टी अगर आंखों पर पड़ जाए तो अच्छे बुरे की पहचान करना मुश्किल हो जाता है उसी तरह का कुछ अलका के साथ भी हो रहा था उसकी आंखों पर भी वासना की पट्टी चढ़ी हुई थी इस समय वह यह नहीं सोच पा रही थी कि जो हरकत वह कर रही है इसका कितना दुष्परिणाम हो सकता है। लेकिन इसके बारे में सोचने की शक्ति अलका खो चुकी थी उसनेे इस समय अपना सारा ध्यान बस अपने बेटे को अपना अंग प्रदर्शित करके उसे अपनी तरफ आकर्षित करने में लगा रखी थी और अपनी इस साजिश में कामयाब भी होती जा रही थी क्योंकि इससे मैं राहुल का पूरा ध्यान उसकी मां पर ही टीका हुआ था। राहुल की प्यासी नजरें उसकी मां की भरपूर उठी हुई गांड पर ही इधर-उधर फिर रही थी चिकनी जांगे वह भी मोटी मोटी मांसल जांघे जिसे देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। अपनी मां की नंगी गांड को देख कर राहुल का भी यही हाल हो रहा था कुछ देर पहले सोया हुआ उसका लंड टन टना के खड़ा होने लगा था । टॉवेल का उभार बढ़ता ही जा रहा था। और उसकी मां अपने बेटे को पूरा मौका दे रही थी कि वह उसकी मदमस्त गांड को देखकर उत्तेजित होने लगे। इसलिए तो उसने अभी तक करवट नहीं बदली थी और रह-रहकर अपनी हथेली को अपनी जांघ पर ऐसे फिरा रही थी कि राहुल को लगे कि वह खुजला रही हो।

 
राहुल तो एक दम मस्त हो चुका था उसका मन अंदर ही अंदर बेताब हुए जा रहा था। वह इस समय का नजारा देखकर अपनी मां को चोदना चाहता था। लेकिन कैसे वह डर भी रहा था कि कहीं उसकी मां बुरा मान गई तो और इस की ऐसी हरकत पर इसकी मां क्या सोचेगी। शर्मिंदा होने पर वह कैसे अपनी मां से आंख मिला पाएगा। राहुल इसी उधेड़बुन में लगा हुआ था । पूरे बदन में उसके उत्तेजना का प्रसार हो चुका था उसके लंड में मीठा मीठा दर्द होने लगा था। टावल में उठे हुए तंबू को देख कर राहुल खुद हैरान था क्योंकि आज तंबू की ऊंचाई कुछ ज्यादा ही लग रही थी।

और उसकी मा थी की उत्तेजना में डूबी जा रही थी उसकी बुर धीरे-धीरे करके मदन रस बहा रही थी। उस की उत्तेजना और भी ज्यादा पर जा रही थी जब वह मन ही मन यह सोच रही थी कि पीछे से उसकी गांड पूरी तरह से निर्वस्त्र और नंगी थी जिसे उसका ही बेटा आंखें फाड़ कर देखे जा रहा था। वाकई में यह नजारा क्या खूब था जब एक मां अपने नंगे बदन को याद करके उसकी बड़ी बड़ी मस्त गांड को अपने ही बेटे को उकसाने के लिए उसे कामुक अदा से दिखा रही हो और उसका बेटा भी उत्तेजना में सराबोर होकर अपनी मां की मस्त बड़ी बड़ी गांड देखकर अपना लंड टाइट किए हुए हो तो वाकई में यह नजारा कामुक की दृष्टि से एकदम अतुल्य हो जाता है।

मां बेटे दोनों एक दूसरे के लिए तड़प रहे थे दोनों के बदन में कामाग्नि अपना असर दिखा रही थी राहुल अपनी मां के बदन को देख कर उत्तेजित हो चुका था तो अलका अपने बेटे को अपने अंग का प्रदर्शन करके उसके उठे हुए टॉवल को देखकर मस्त हुए जा रही थी

दोनों आगे बढ़ना चाहते थे एक दूसरे में खो जाना चाहते थे। अपने बदन में भड़की जिस्म की प्यास को एक दूसरे से बुझाना चाहते थे लेकिन दोनों अनजान थे दोनों एक दूसरे की हसरत को समझ नहीं पा रहे थे। राहुल भी पूरी तरह से तैयार था अपनी मां को चोदने के लिए और अलका भी पूरी तरह से तैयार थी अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए। लेकिन दोनों के बीच पतली सी असमंजसता की चादर थी जो पहल करने में घबरा रही थी। दोनों के बीच मां बेटे की रिश्तो की मर्यादा ने दोनों को रोके हुए था। रिश्तो का उल्लंघन कर पाने मैं दोनों संकोच कर रहे थे । पूरे कमरे का माहौल गर्म हो चुका था। वातावरण की गर्मी और दोनों के बदन की गर्मी कहर बरसा रही थी। दोनों ईस आग को बुझा कर ठंडा करना चाहते थे। लेकिन कैसे दोनों के समझ के बाहर था अलका से अब सहन कर पाना बड़ा मुश्किल हुआ जा रहा था। बदन में आए जरा सी हलचल से हलका का पूरा बदन कसमसा उठता जिससे उसके नितंबों की थिरकन बढ़ जाती जिसे देख कर राहुल का लंड अकड़ने लगता । अलका से बर्दाश्त कर पाना बड़ा मुश्किल हुए जा रहा था और आगे बढ़ने में उसे डर भी लग रहा था कि अगर कहीं उसका बेटा उसके बारे में गलत धारणा बांध लिया तो जीते जी मर जाएगी कैसे मुह दीखाएगी, कैसे अपने बच्चों से आंख में आंख मिलाकर बात कर पाएगी। यही सोचकर वह तुरंत उठ गई और उसे उठता हुआ देखकर राहुल में तुरंत दूसरी तरफ करवट कर लिया। अलका की नजर जब राहुल पर पड़ी तो वह दूसरी तरफ करवट किए हुए था। उसे कुछ समझ में नहीं आया क्या वाकई में राहुल उसके नंगे बदन को नहीं देखा या देख कर भी ना देखने का नाटक कर रहा है अलका के लिए यह समझ पाना बड़ा मुश्किल हुए जा रहा था।

अलका वहां से तुरंत बाथरूम में चली गई और बाथरूम में जाते ही उसने अपने गांऊन को उतार फेंकी, गांऊन के उतारते हैं अल्का पुरी तरह से नंगी हो गई।

नीचे लेटे लेटे राहुल से भी रहा नहीं जा रहा था अपनी मां की नंगी गांड को देख कर जिस तरह से वह उत्तेजित हुआ था उसे अपने आप को शांत करना था इसलिए वह भी अपनी जगह से उठा और अपनी मां के पीछे पीछे बाथरूम की तरफ आ गया। राहुल मन में यह उम्मीद लेकर आया था कि शायद उस दिन की तरह आज भी बाथरूम में उसे अपनी मां नंगी देखने को मिल जाए और उसकी यह उम्मीद खरी भी उतर गई। बाथरूम के दरवाजे पर पहुंचते ही उसे पता चला कि बाथरूम का दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था। उस हल्के से खुले हुए दरवाजे के अंदर नजर ़ दौड़ाते ही राहुल के लँड ने ठुनकी मारना शुरू कर दिया। बाथरूम के अंदर उसकी मां पूरी तरह से नंगी थी। राहुल की आंखों के सामने उसकी मां की नंगी पीठ बड़ी बड़ी गांड जो कि हल्के उजाले में चमक रही थी। राहुल दीवार की वोट लेकर अपने आप को छुपा कर चोर नजरों से अपनी मां के नंगे बदन के रस को अपनी नजरों से पीने लगा। आगे से उसका टावल उठ चुका था।

अंदर उसकी मां खड़े-खड़े ही पानी के पीप में से मग भर भर के पानी अपने बदन पर डाल रही थी। पानी अपने सर पर डालते ही उसकीे गर्मी शांत होने लगी। कुछ देर पहले उसके सर पर जो वासना की गर्मी छाई हुई थी ठंडा पानी पड़ते ही सारी गर्मी ठंडे पानी के साथ पिघलने लगी। वह कुछ देर तक अपने बदन पर ठंडा पानी डालती ही रही। और बाथरूम के बाहर खड़ा होकर अपनी मां के नंगे बदन को देख कर राहुल मुठ मारना शुरु कर दिया था। अलका का दिमाग शांत होते ही उसे अपनी हरकत पर पछतावा होने लगा। उसे इसका एहसास होने लगा कि उससे बहुत बड़ी गलती होने जा रही थी। अगर आज वाकई में कुछ गलत हो गया होता तो वह अपने आप को ही कैसे मुंह दीखाती।

ठंडा पानी पड़ते ही अलका के सर से वासना का बुखार ऊतर चुका था। बाथरुम के अंदर अलका अपने नंगे बदन पर ठंडा पानी डाल कर शांत हो चुकी थी लेकिन बाहर राहुल अपनी मां के नंगे बदन को देख कर अपने आप को शांत करने के लिए जोर जोर से मुठ मारे जा रहा था अपने मां की गांड की थिर कन को देखते ही उसका जोश दुगना होता जा रहा था। और वह जोर जोर से लंड को मुठीयाने मे लगा हुआ था। अपनी मां को चोदने की कल्पना करते हुए वह थोड़ी ही देर में लंड से गर्म फुवारा फर्श पर दे मारा।

अलका अंदर नहा चुकी थी। इसलिए किसी भी वक्त वह बाथरुम से बाहर आ सकती थी। इसलिए राहुल का वहां देर तक खड़े रहना ठीक नहीं था इसलिए वह अपने आप को शांत कर के वहां से आ कर वापस नीचे चटाई पर लेट गया।

बासना का तूफान गुजर चुका था। मां बेटे दोनों इस वासना के तूफान में तहस-नहस होने से बच तो गए थे,

लेकिन यह तूफान दोनों के अंतर्मन में अपनी निशान चिन्हित कर गया था। मन में जब किसी के प्रति आकर्षण जन्म लेता है तो आकर्षण से अपने नजरअंदाज कर पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा हो जाता है। भले ही मन अपने आप को संभालने की पूरी कोशिश करें लाख दुहाई दे फिर भी या आकर्षण नहीं जाता। वासना का तूफान इस वक्त के लिए तो शांत हो चुका था लेकिन खत्म नहीं हुआ था। अलका और राहुल जिस दौर से गुजर रहे थे' ऐसे नहीं ज्यादा दिन तक अपने आप को संभाल पाना नामुमकिन सा था। राहुल अभी अभी जवान हो रहा था उसके अंदर किसी औरत के प्रति आकर्षण जन्म लेना कुदरती था। ऐसे में उसकी निगाह अपनी ही मां के बदन पर फीरने लगी थी। अलका एकदम मैच्योर थी लेकिन बरसों से प्यासी एेसे में विनीत के द्वारा प्रेम का इजहार करना और अपने ही बेटे के दमदार लंड के प्रति आकर्षित होना , अलका अपने आप को ज्यादा दिन बहकने से रोक नहीं सकती थी।

राहुल अपनी गर्मी शांत करके वापस आकर लेट चुका था और अलका भी ठंडे पानी से नहा कर अपने बहकते मन पर रोक लगा चुकी थी।

तनख्वाह की तारीख आ चुकी थी ।अलका बहुत खुश नजर आ रही थी। ओर खुश हो भी क्यों न महीने भर तो ऐसे ही हाथ तंग रहते हैं। बस एक ही दिन मिलता है जिसमें थोड़ा अपने पसंद का और बच्चों के पसंद का कुछ खरीद सकती हो। इसलिए तो तनख्वाह कर दिन अलका के साथ साथ दोनों बच्चे भी खुश नजर आते हैं।

तनख्वाह के एक दिन पहले ही अलका सारी लिस्ट तैयार कर लेती थी किसको कितना देना है दूधवाला राशन वाला जैसे छोटे बड़े खर्चे सभी को लिस्ट में समाहित कर लेती थी लेकिन इस बार 2000 का अलग का खर्चा था जोकि विनीत को देना था। यह 2000 की रकम विनीत को चुकाने के बाद हाथ में ज्यादा रकम नहीं बच पा रही थी। और ऐसे में तो 15 दिन में ही घर खर्च के सारे पैसे खत्म हो जाएंगे और फिर तनख्वाह तक घर का खर्चा उठा पाना बड़ा मुश्किल हो जाएगा। अलका के चेहरे पर आई मुस्कान तुरंत गायब हो गई उसे 2000 की चिंता सताए जा रही थी। लेकिन फिर मन में यही सोच कर अपने आप को तसल्ली देती की देना तो है ही, और वैसे भी विनीत ने बहुत ही मुश्किल के समय उसकी मदद की थी इसलिए समय पर उसका पैसा चुकाना बहुत जरूरी है।

फिर मन मे वह सोची की 2000 हो चुका देगी और अपने बॉस से कुछ पैसे अडवांस ले लेगी ताकि महीने भर का खर्चा चल सके। यही सोचकर वह राहुल और सोनू को स्कूल भेज कर ऑफिस चली गई।

काम करते-करते शाम हो गई लेकिन ऑफिस में काम कुछ ज्यादा था इसलिए बॉस ने 2 घंटे ओवरटाइम करने को कहा।

तनख्वाह मिल चुकी थी, एडवांस के लिए कहने पर बॉस ने इनकार कर दिया जिससे अलका दुखी हो गई लेकिन उसके लिए खुशी वाली बात यह थी की उसकी मेहनत और लगन उसके काम को देखते हुए बॉस ने उसकी तनख्वाह में १५०० का ईजाफा कर दिया था लेकिन यह रकम उसे अगले महीने की तनख्वाह से मिलने वाला था दुखी होने के बावजूद भी उसे इस बात की खुशी थी कि अगले महीने से उसकी मुसीबते कुछ हद तक कम हो जाएंगी।

२ घंटे के ओवर टाइम के बाद समय कुछ ज्यादा हो चुका था ऑफिस से छूटते ही अलका जल्दी-जल्दी अपने घर की तरफ जाने लगी। तनख्वाह वाले दिन वह घर पर कुछ स्पेशल खाने को जरूर ले जातीे थी इसलिए वह तेज कदमों से मार्केट की तरफ बढ़ रही थी। कि अचानक एक मोटरसाइकिल उसके आगे आकर रुक गई अलका एकदम से घबरा गई उसे यू लगा कि मोटरसाइकिल से टकरा जाएगी तभी मोटरसाइकिल वाले ने अपना हेलमेट निकाला तो अलका को थोड़ी राहत हुई' क्योंकि वह वीनीत था, हेलमेट उतारते ही विनीत बोला आईए आंटी जी मैं आपको छोड़ देता हूं।

अलका इंकार ना कर सकी क्योंकि वैसे भी उसे देर हो रही थी और वह मोटरसाइकिल पर वीनीत के पीछे बैठ गई। मोटरसाइकिल मर्यादीत रफ्तार में सड़क पर भागी चली जा रही थी। अपनी मोटरसाइकल पर अलका को बिठा कर मन ही मन बहुत प्रसन्न हो रहा था। तभी विनीत के गंदे दिमाग में एक युक्ती सूझी। उसने रह-रहकर ब्रेक मारना शुरू कर दिया जिससे अलका का मदमस्त बदन उसके बदन से टकरा जा रहा था और जब-जब अलका का खूबसूरत बदन विनीत के बदन से टकराता विनीत के पूरे बदन में हलचल सी मच जाती। बार बार वीनीत के ब्रेक मारने पर अलका परेशान हो जा रही थी। उसका कंधा बार-बार विनीत की पीठ पर टकरा जाता था। विनीत जानता था कि इस तरह से अलका को परेशानी हो रही है लेकिन वह भी ट्राफिक का बहाना बना देता था। मोटरसाइकिल का एक्सीलेटर बढ़ाते हुए विनीत बोला आंटी जी परेशानी हो रही है तो एक हाथ मेरे कंधे पर रख दीजिए इससे आपका बैलेंस बना रहेगा। वैसे भी विनीत के मोटरसाइकिल चलाने पर अलका हचमचा जा रही थी , इसलिए वह भी अपने बैलेंस को बनाने के लिए एक हाथ वीनीत के कंधे पर रखकर उस का सहारा ले ली। अपने कंधे पर अलका का हाथ रखवा कर विनीत ने चालाकी करी थी। क्योंकि अब वह जब भी ब्रेक लगाता तो अलका की दाहिनी चूची सीधे विनीत की पीठ पर टकराकर दब जाती जिससे विनीत के साथ-साथ अलका के बदन में ऐसा रोमांच उठ़ता कि पूछो मत। विनीत के जांघों के बीच तुरंत सोया हुआ लंड फुफकारने लगा।वीनीत को बहुत मजा आ रहा था, औरअलका शर्मसार हुए जा रही थी। वह अपने आप को संभाले भी तो कैसे क्योंकि विनीत इतनी तेज ब्रेक लगाता कि संभल पाना बड़ा मुश्किल था। और ना चाहते हुए भी अलका विनीत के बदन से टकरा जाती। पराए मर्द के बदन की रगड़ से अलका भी पूरी तरह से गंनगना जा रही थी। यह रगड़ और आगे बढ़ती इससे पहले ही बाजार आ गया। विनीत ने झट से सरबत की दुकान के आगे मोटरसाइकिल को खड़ी कर दिया, और अलका को ऊतरने को कहा। अरे कभी मन में सवाल लिए उतर गई।वीनीत भी मोटरसाइकिल को स्टैंड पर लगाते हैं सरबत वाले को दो मैंगो ज्युस का आर्डर दे दिया। अलका कुछ कह पाती इससे पहले ही विनीत ने कुर्सी उसकी आंखें बढ़ा दिया और अलका को बैठना ही पड़ा।

शाम ढल रही थी अलका को घर जाने की भी चिंता सताए जा रही थी। वीनीत बहुत खुश नजर आ रहा था वह अलका के पास ही कुर्सी पर बैठ गया। थोड़ी ही देर में मैंगो जूस भी आ गया। वीनीत झट से शरबत वाले के हाथ से दोनों गिलास थाम कर एक गिलास अलका को थमा दिया। अलका भी गर्मी से बेहाल थी इसलिए वह भी झट से जूस का गिलास थाम ली, और गिलास को अपने गुलाबी होठों से लगाकर पीने लगी।

विनीत अलका को जुस पीते हुए देख रहा था। उसके गुलाबी गुलाबी होठों से आम का जूस घुंट घुंट अंदर जा रहा था जिसे देख कर वीनीत के शैतानी दिमाग ने कल्पना करना शुरू कर दिया कि जिस तरह से अलका आम का जूस धीरे धीरे करके होठों से चूस रही है, एक दिन मैं भी उसकी बड़ी बड़ी चूचियों को मुंह में भरकर धीरे धीरे से उसका रस पियूंगा। इतना सोचते ही वीनीत का पूरा बदन झनझना गया। उसका लंड फिर से टनटना कर खड़ा हो गया। अलका जूस पीते पीते 2000रु के बारे में सोचने लगी वह मन ही मन सोच रही थी कि यह 2000रु विनीत को दे की नहीं। क्योंकि अगर वह 2000रु भी नहीं तो को लौटा देती है तो महीने का खर्च चलाना बड़ा मुश्किल हो जाएगा लेकिन अगर नहीं देती है तो भी अच्छी बात नहीं थी उसका मन बड़ा असमंजस में था। इसी सोचने जूस का गिलास भी खत्म हो गया। धीरे-धीरे अंधेरा छाने लगा था उसे घर जाने की भी चिंता सताए जा रही थी। घर जाकर उसे खाना बनाना था। और यही बाजार में ही देर हो जाने की वजह से खाना बनाने का मूड. नही कर रहा था।

2000रुपए के चलते अलका विनीत से नजरें मिलाने में कतरा रही थी वह उसे कहना चाह रही थी कि 2000रु के लिए उसे कुछ दिन की मोहलत और दे दे, लेकिन कह भी नहीं पा रही थी। इसी उधेड़बुन में विनीत में शरबत वाले को उसके पैसे चूका दिए और पैसे चुकाने के बाद

वह अलका से बोला।

आंटी जी आपको और कुछ चाहिए।( वीनीत के सवाल से अलका एकाएक हड़बड़ा गई. और हड़बड़ाते हुए बोली।)

हंहंहं.... हां आज मुझे देर हो चुकी है इसलिए मुझे अपने बच्चों के लिए कुछ नाश्ता ले जाना पड़ेगा ताकि खाना ना बना सकूं क्योंकि मेरा आज खाना बनाने का मूड नहीं है।

तो चलिए कुछ ले लीजिए।

( अलका सामने की हलवाई की दुकान पर जाने लगी और पीछे पीछे विनीत भी आगे बढ़ने लगा दुकान पर पहुंच गए अलका ने हलवाई से कुछ मिठाईयां और समोसे पेक करवाए, विनीत ने आगे बढ़कर रसमलाई का पैकेट भी पैक करवा लीया, अलका समझी की विनीत ने अपने लिए रसमलाई पैक करवाया है और दुकानदार ने साथ में ही सबका बिल बना दिया, अलका ने जैसे ही दुकानदार के पैसे चुकाने के लिए अपना पर्स खोली उससे पहले ही वीनीत ने अपने पर्श से 500का नोट निकालकर दुकानदार को थमाते हुए बोला।

 
लो जो भी होता है इस में से काट लो।

( विनीत को यू नोट थमाते हुए देखकर अलका बोली।)

अरे अरे यह क्या कर रहे हो! मैं दे रही हूं ना।

तब तक दुकानदार ने पैसे काट कर बाकी के पैसे विनीत को लौटा दीया। अलका देखती ही रह गई। दुकानदार ने मिठाई और समोसे को एक थैली में डालकर अलका को थमा दीया। अलका भी आवाक सी उस थैली को पकड़ ली, वीनीत दुकान से बाहर आ गया पीछे पीछे अलका भी आ गई। वीनीत ने अलका से बोला।

आप यहीं रुकिए मैं गाड़ी लेकर आता हूं। ( विनीत के इतना कहते ही अलका बोली।)

नहीं नहीं मेरे लिए तकलीफ मत उठाओ में खुद चली जाऊंगी।

अरे इसमें तकलीफ केसी, आप ऐसा कह कर मुझे शर्मिंदा कर रही हैं। आप यहीं रुकिए मैं लेकर के अाता

हुं। ( इतना कहकर वह मोटरसाइकिल लाने चला गया। वीनीत मोटरसाइकल चालू करके सीधे अलका के सामने लाकर खड़ा कर दिया और अलका को बेठने का इशारा किया। अलका भी बिना कुछ बोले मोटर साइकिल पर बैठ गई। विनीत भी धीरे-धीरे एक्सीलेटर देते हुए मोटरसाइकिल को आगे बढ़ाने लगा। वह ज्यादा से ज्यादा वक्त अलका के साथ बिताना चाहता था इसलिए उसे कोई जल्दी नहीं थी अंधेरा छा रहा था। अलका असमंजस में थी तनख्वाह मिल चुकी थी विनीत को ₹2000 लौटाने थे लेकिन अगर लौटा देती तो महीने भर का खर्चा चलाना मुश्किल हो जाता। इसलिए वह बड़े सोच में पड़ी हुई थी। फीर भी औपचारिकता तो यही बनती थी कि विनीत का पैसा लौटा दिया जाए क्योंकि बड़े मुसीबत की घड़ि में उसने पैसे देकर मदद किया था। बातों के दौऱ को आगे बढ़ाते हुए अलका बोली।

तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। मैं दुकानदार को पैसे चुका रही थी ना फिर देने की क्या जरूरत थी।

अरे आंटी जी ईसमें क्या हुआ मैं चुकाऊ या आप चुकाओ बात तो एक ही है। रही बात पैसे की तो हमें बिजनेस में बहुत ज्यादा मुनाफा हुआ है। और आज मैं बहुत खुश हूं मेरे रिश्तेदार तो है नहीं , की उनके साथ में अपनी खुशी शेयर कर सकूं। घर पर सिर्फ भाभी है और भैया तो बिजनेस में ही मस्त रहते हैं जो कुछ भी है आप ही हैं इसलिए मैं आपके साथ अपनी खुशी सेयर करता हूं। और आप हैं कि मेरी खुशी में शामिल नहीं होना चाहती,

ऐसी बात नहीं है वीनीत , मुझे अच्छा लगेगा अगर मैं तुम्हारी खुशी में शामिल हो सकूं तो लेकिन इस तरह से बार बार पैसे की मदद करना....( अलका बोलते बोलते अचानक रुक गई, रुक क्या गई जानबूझकर बात का रुख बदलते हुए बोली।)

अरे हां विनीत पैसे से याद आया कि आज मेरी तनख्वाह हो गई है और मुझे तुम्हारे ₹2000 लौटाने हैं आगे चलो चौराहे पर वही देती हूं।

( पैसे की बात आते ही विनीत सकपका गया, क्योंकि वह जानता था कि अलका को दिए हुए उधार पैसे की ही वजह से वह थोड़ी बहुत छूट छाट ले पाता था। अगर वह अलका से पैसे वापस ले लिया तो,मिलने वाली छुट छाट भी बंद हो जाएगी। इसलिए वह बोला।)

अरे आंटी जी मुझे पैसे की जरूरत नहीं है और मैंने कहा आपसे पैसे मांगे हैं आपको जरूरत हो तो अभी रख लीजिए। मुझे जरूरत होगी तो मैं खुद ही मांग लूंगा।( कहते हुए विनीत धीरे-धीरे मोटरसाइकिल को आगे बढ़ा रहा था अंधेरा छा चुका था और जिस रास्ते से वे दोनों गुजर रहे थे वहां पर कम ही गाड़ी आ जा कर रही थी यह वही जगह थी जहां पर बरसात और अंधेरे का फायदा उठाते हुए विनीत ने अलका को अपनी बाहों में भर कर अपनी मर्यादा को लांघने की कोशिश किया था। वह दृश्य याद आते हैं विनीत के बदन मे सुरसुराहट सी फेल गई। तभी उत्तेजना में हल्के से ब्रेक मारकर जैसे ही एक्सीलेंटर छोड़ा अलका का बदन झटका खाकर विनीत के बदन से टकरा गया जिससे अलका की चूची विनीत की पीठ से रगड़ खा गई जिसका एहसास महसुस करते ही विनीत का लंड खड़ा हो गया। ओर ब्रेक लगते ही अलका अपने आप को संभाल नहीं पाए थे और उसके मुंह से आउच निकल गया।)

आाउच....( विनीत के कंधे पर अपना हाथ रख कर संभलते हुए) बात ऐसी नहीं है विनीत अब उधार लेी हुं तो उसे लौटाना भी तो होगा ना। ( अलका पैसे लौटाने के लिए तो बोल रही थी लेकिन अंदर ही अंदर पैसे ना लौटाने का लालच भी बना हुआ था लालच कैसा यह लालच नहीं उसकी मजबूरी थी। और विनीत तो चाहता ही था कि अलग का उसे पैसे ना लौटाए, ताकि पैसों के बहाने उस से नज़दीकियां बढ़ाई जा सके। इसलिए वह बोला।)

ऐसी कोई बात नहीं है आंटी जी मुझे क्या, जरूरत होगी तो मैं आपसे खुद ही कह दूंगा। ( विनीत की बात सुनकर अलका अंदर ही अंदर खुश होने लगी क्योंकि उसके महीने भर का खर्चा चलाने का टेंशन दूर हो चुका था। लेकिन वह अपनी खुशी जाहिर नहीं होने दी। अंधेरा बढ़ चुका था बड़े-बड़े उठ हमें पेड़ की वजह से अंधेरा और गाढ़ा लगने लगा था जगह जगह पर स्ट्रीट लाइट लगी हुई थी लेकिन कुछ-कुछ स्ट्रीट लाइट नहीं जलती थी जिसकी वजह से अंधेरा ही अंधेरा नजर आता था। तभी विनीत जिस चीज में माहीर था, अपना वही हथियार उपयोग करने की सोचा। अपनी मीठी मीठी् फ्लर्टी बातों से अलका को खुश करने का पूरा मन बना लिया और अलका से बोला।)

एक बात कहूं आंटी जी।

हां बोलो (हवा से उड़ रहे अपने जुल्फों को अपनी नाजुक उंगलियों के कान के पीछे ले जाते हुए बोली।)

आप बुरा तो नहीं मानेगी ना।

बुरा ! मैं भला बुरा क्यों मानुंगी हां अगर कुछ गलत कहागे तो जरुर बुरा मान जाऊंगी। ( अलका अब थोड़ी बेफिक्र हो चुकी थी उसका एक हाथ विनीत के कंधे पर था और उसका मांसल खूबसूरत बदन विनीत के बदन से सटा हुआ था। जिसकी वजह से रह रहे कर विनीत के बदन में सुरसुराहट फैल जा रही थी। )

बुरी बात तो नहीं है आंटी जी लेकिन फिर भी मेरे मन की बात है इसलिए कहता हूं पहले प्रॉमिस करिए तभी कहूंगा।

अच्छा बाबा प्रॉमिस बस।

आंटी जी वैसे तो आप बहुत खूबसूरत हैं लेकिन आज और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही हो। ददद...।देखो आंटी जी बुरा मत मानिएगा यह तो मेरे दिल की बात थी इसलिए मैंने कह दिया अगर आप को बुरा लगा हो तो इसके लिए भी माफी मांगता हूं।

( भला ऐसी कौन औरत होगी जो अपनी सुंदरता की तारीफ सुनकर नाराज होगी। अपनी तारीफ सुनकर तो अलका अंदर ही अंदर खुश हो रही थी। उसे तो इस बात की और ज्यादा खुशी थी कि एक बेटी की उम्र का लड़का अपने मां के उम्र की औरत की खूबसूरती की तारीफ कर रहा था। )

आप नाराज हो आंटी जी।

नहीं तो।

फिर आप कुछ क्यों बोल नहीं रही है। क्या आपको मेरी बात अच्छी नहीं लगी।( विनीत की बातों का अलका क्या जवाब देती विनीत की बातें सुनकर अलका अंदर ही अंदर प्रसन्नता के साथ साथ शर्म भी महसूस कर रहे थे कि एक बित्ते भर का छोकरा उसकी तारीफ कर रहा था। तभी वह चौराहा आ गया जहां से अलका को अपने घर की तरफ मुड़ना था और अलका तुरंत बोली।)

बस बस यहीं रोक दो में चली जाऊंगी।

( विनीत भी ब्रेक दबाते हुए मोटरसाइकिल को चौराहे के किनारे रोक दिया रोज की तरह इधर भी अंधेरा था कुछ लोग ही आ जा कर रहे थे। वैसे भी कोई यह मुख्य सड़क नहीं थी। यहां का रास्ता आजूबाजू के सोसाइटियों में ही जाता था इसलिए इस रोड पर आवन जावन कम ही होता था। अलका मोटरसाइकिल से उतर गई उसे शर्म सीे महसूस हो रही थी विनीत अभी भी मोटर साइकिल पर बैठा हुआ था। अलका विनीत का शुक्रिया अदा करने के लिए उस से बोली।

थैंक्यू विनीत( शरमाते हुए)

इसमें थैंक यू की क्या बात है अांटी जी लेकिन आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया।

क्या( अलका मुस्कुराते हुए पूछी)

यही कि मेरी बात आपको अच्छी लगी या बुरी।

बुरी लगने जैसी कोई बात ही नहीं थी तो भला मुझे क्यों बुरी लगती।( अलका मुस्कुराते हुए बोली।)

( अलका के चेहरे पर मुस्कुराहट देखकर विनीत बहुत खुश हुआ और तभी अचानक अलका के हाथ से नास्ते वाली थैली छूट कर नीचे गिर गई। नाश्ते की हथेली उठाने के लिए अलका नीचे झुकी तो वैसे तो कुछ साफ दिख नहीं रहा था लेकिन फिर भी वीनीत को उसके ब्लाउज मै से झांकते दोनों कबूतर नजर आ गए। जिसे देखकर विनीत का मन मचल उठा और वह अलका की मदद करने के लिए तुरंत मोटरसाइकिल को स्टैंड पर लगाकर नाश्ते की थैली में से बिखरे सामान को इकट्ठा करके थेली में भरने लगा। नीचे बिखरे हुए पैकेट को उठाने में अलका के नाजुक हाथ विनीत के हाथ में आ गया जिससे अलका शरमा गई। बिखरे हुए पैकेट इकट्ठा करके थैली में रख चुका था, लेकिन उसने अलका के हाथ को नहीं छोड़ा था उसका हाथ पकड़े-पकड़े ही वह दोनों खड़े हुए। विनीत की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, अलका के बदन में भी कुछ कुछ उत्तेजना का प्रसार हो रहा था। वह दोनों अंधेरे में भी एक दूसरे की आंखों में झांक रहे थे। दोनों अपने आपे से बाहर हो रहे थे। दोनों की नजदीकियां बढ़ती जा रही थी विनीत अपने होठों को अलका के होठों पर नजदीक ले जा रहा था। विनीत के होटो से अलका के होठों की दूरी मात्र तीन चार अंगुल भरी ही रह गई थी। विनीत को यह दूरी बर्दाश्त नहीं हो रही थी और उसने तुरंत एक झटके से ही अपने होठों को अलका के गुलाबी होठो पर रखकर तुरंत चूसने लगा इस तरह से होठों की चुसाई करने परअलका भी संयम खो बैठी और अलका भी विनीत का साथ देते हुए उसके होठों को भी चूसना शुरू कर दी। कुछ ही पल में दोनों उत्तेजना के परम शिखर पर सवार हो गए। विनीत एक पल की भी देरी किए बिना तुरंत अपनी हथेली को ब्लाउज में फुदक रहे उसकी चूची पर रख दिया और दबाना शुरु कर दिया इससे अलका के बदन में उत्तेजना का प्रसार दुगनी गति से होने लगा और वह भी विनीत और अपनी उम्र के बीच की खाई को भुलाते हुए विनीत को अपनी बाहों में भर ली और अपने गुलाबी होंठ का रस उसको पिलाते हुए खुद भी उसके होठों को चूसने लगी। कामुकता की वजह से अलका का बदन कांप रहा था। एक दूसरे के होठों को चूसने की वजह से च्च्च्च....च्च्च्च.....की कामुक आवाजे दोनों के मुंह से आ रहीे थी। विनीत ने तो अपने दोनों हाथों को अलका के पूरे बदन पर इधर उधर घुमाने लगा। कभी इस चूची को दबाता तो कभी दूसरी चूची को, और कभी तो साड़ी के ऊपर से ही उसकी बुर वाली जगह पर अपनी हथेली से कुरेदने लगता । अलका काम विह्वल हुई जा रही थी।

आज फिर बरसात वाला दृश्य दोहराया जा रहा था। दोनों की सांसे तेज चल रही थी। गालों का रंग लाल सुर्ख पड़ता जा रहा था और चूची मर्दन करने से चुचीयों का भी रंगलाल हुआ जा रहा था। गाढ़े अंधेरे में दोनों एक दूसरे के बदन में समा जाने को पूरी तरह से तैयार थे। तभी अचानक विनीत ने ऐसी हरकत कर दिया कि अलका की बुर से मदन रस टपकने लगा। विनीत ने फिर से उस दिन की तरह अपने दोनों हथेलियों को अलका की भरावदार नितंब पर रखकर गांड को कस के अपनी हथेलियों में दबोचते हुए उसे अपनी तरफ खींच कर अपने बदन से सटा लिया जिससे पेंट में तना हुआ उसका लंड सीधे अलका की जांघों के बीच बुर वाली जगह पर घर्षण करने लगा। विनीत की इस हरकत पर अलका इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि जैसे ही उसका लंड साड़ी के ऊपर से ही ठीक बुर वाली जगह पर स्पर्श हुआ तुरंत ही अलका की बुर से मदन रस टपकने लगा।

अपनी हालत को देखते हुए अलका एकदम से शर्मसार हो गई। उसे शर्म इस बात की महसूस होने लगी की बेटे की उम्र के लड़के ने उसका पानी निकाल दिया था। और मदन रस टपकने की ही वजह से उसे जैसे होश आया हो इस तरह से तुरंत उसके बदन पर अपने बदन को दूर कर ली,

और फिर से उस दिन की तरह ही बिना कुछ बोले झट से तेज कदमों के साथ अपने घर की तरफ मोड़ रहे सड़क पर चलने लगी, विनीत एक बार फिर से पीछे से आवाज़ देते हुए अपना हाथ मलता रह गया।

अलका अपने घर पर पहुंच चुकी थी। दरवाजा खोलते ही सामने सोनू पढ़ाई कर रहा था अपनी मां को देखते ही खुश हो गया और अपनी मां से जाकर लिपट गया।

कहां रह गई थी मम्मी आज इतनी देर क्यों लगा दी।( अपनी मां से लिपटते ही सोनू सवाल पर सवाल पूछने लगा। अलका का बदन अभी भी उत्तेजना से कांप रहा था। वह सोनू को नाश्ते की थैली पकड़ाते हुए सीधे बाथरूम में घुस गई। बाथरूम में घुसते ही वह ठंडे पानी के छींटे अपने चेहरे पर मारने लगी। हाथ मुंह धोने के बाद उसका मन कुछ शांत हुआ वह फिर पछताने लगी आज फिर से अपने आप को बचा ले गई थी। आज फिर से अपने दामन पर दाग लगते लगते बचा ली थी।

अलका यह बखूबी जानती थी कि ऐसे नाजुक समय में अपने आप को संभाल पाना बड़ा मुश्किल होता है वह कैसे बच जा रही थी यह वह भी नहीं जानती थी।

लेकिन यह भी वह जानती थी कि अगर ऐसा ही होता रहा तो बहकने से अपने आप को बचा नहीं पाएगी। बरसों बीत चुके थे शारीरिक सुख का आनंद लिए हर शरीर का हर औरत की एक जरूरत होती है उसे ज्यादा दिन तक दबाए हुए रहा नहीं जा सकता था इसलिए बल का को भी डर लगने लगा था कि वह भी किसी भी ऐसे नाजुक पल में बहक सकती है।

हाथ मुंह टॉवल से पोछने के बाद अलका बाथरुम से बाहर आ गई। बाहर आकर देखी तो सोनू नास्ते की थैली में से सारे पैकेट को बाहर निकाल चुका था। अलका सोनू के नजदीक पहुंच गई, अपनी मम्मी को पास आता देख सोनू बोला।

मम्मी आज नाश्ता लेकर आई हो( सोनू खुश नजर आ रहा था। अलका सोनू के सर पर हाथ फेरते हुए बोली।)

हां बेटा आज ऑफिस में कुछ ज्यादा काम था और आज तनख्वाह की तारीख की थी इस वजह से लेट हो गया। आज खाना नहीं बनाऊंगी इसलिए तुम लोगों के लिए नाश्ता ले कर आई हूं अरे हां राहुल कहां गया।

वह तो अपने कमरे में है मम्मी शायद पढ़ाई कर रहा है। बुला कर लाऊं क्या?

नहीं तुम यहीं रुको मैं बुला कर लाती हूं।

( इतना कहकर अलका राहुल के कमरे की तरफ जाने लगी, वह मन मे सोच रही थी कि राहुल जरुर मेरा इंतजार करते-करते सो गया होगा भूख भी लगी होगी , आज वाकई में कुछ ज्यादा ही लेट हो गया। यही सोचते सोचते वह राहुल के कमरे के सामने खड़ी हो गई जैसे ही वह दरवाजे पर दस्तक देने के लिए अपना हाथ रखी दरवाजा खुद-ब-खुद खुलने लगा । दरवाजा थोड़ा सा ही खुला था कि अंदर का नजारा देख कर उसके होश उड़ गये , उसे ऐसा लगने लगा जैसे कि उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई हो। अलका की नजर सीधे अपने बेटे के लंड पर पड़ी थी जो कि एकदम टनटना के खड़ा था, और राहुल उसे मोटे तगड़े लंड को अपनी मुट्ठी में भर कर ऊपर नीचे करते हुए मुट्ठ मार रहा था। एक पल को तो उसे ऐसा लगा कि अंदर जाकर राहुल के गाल पर चार-पांच तमाचा जड़ दें। लेकिन अलका अपने गुस्से को दबा ले गई। ओर वही खड़े होकर अंदर का नजारा देखने लगी। राहुल बिस्तर पर पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में था बिल्कुल नंगा उसके पूरे बदन में उत्तेजना छाई हुई थी और उत्तेजना के मारे उसकी आंखें मूंद चुकी थी। वह जोर जोर से अपने लंड को हीलाते हुए अपनी कमर को ऊपर नीचे कर रहा था। यह देख कर थोड़ी ही देर में अलका की बदन में भी उत्तेजना की चीटियां रेंगने लगी , कुछ पल पहले ही जो अपने बेटे के इस हरकत पर उसे तमाचा जड़ने की सोच रहीे थी। वही इस समय उत्तेजित हुए जा रहीे थी। राहुल के मोटे लंड को देख कर उसे अपनी बुर में सुरसुराहट सी महसूस होने लगी। उसे वीनीत की हरकत याद आने लगी। विनीत द्वारा किए गए हरकत को याद करके अलका भी फिर से चुदवासी होने लगी और अंदर राहुल चरम सुख की तरफ बढ़ रहा था। राहुल की हालत को देखकर अलका भी मस्त हुए जा रही थी , अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को देखकर उसका हाथ खुद ब खुद अपने ही बुर पर पहुंच चुका था जिसे वह साड़ी के ऊपर से मसल रही थी। अंदर के नजारे का लुत्फ अलका ज्यादा देर तक नहीं उठा पाई क्योंकि तभी राहुल जोर-जोर से मुठ मारते हुए गरम नमकीन पानी की तेज धार छत की तरफ लंड से छोड़ने लगा, और लंड से तेजधार छोड़ते हुए जोर जोर से सिसकारी भी ले रहा था।

लंड से निकली इतनी तेज पिचकारी को देखकर अलका के मुंह के साथ साथ उसकी बुर में भी पानी आ गया। अब ज्यादा देर तक यू दरवाजे पर खड़ा रहना ठीक नहीं था इसलिए अलका भी बिना कुछ बोले वहां से सीधे सोनू के पास आ गई।

सोनू के पास आकर अलका सोनू को नाश्ता देने लगी लेकिन उसके बदन में आग लगी हुई थी। अपने बेटे को लंड मुठियाता देखकर अलका एकदम से चुदवासी हो गई थी। उसकी बुर से नमकीन पानी रिसने लगा था। पहले वीनीत और अब राहुल दोनों ने मिलकर अलका के बदन में आग लगा दीया था। अब तक राहुल नहीं आया था इसलिए सोनू बोला।

क्या हुआ मम्मी भाई अब तक नहीं आया।

(राहुल का भी नाश्ता निकालते हुए) आता ही होगा बेटा।

अलका अच्छी तरह से जानती थी कि उसने राहुल को बुलाई ही नहीं तो आएगा कैसे। इसलिए सोनू को दिखाने के लिए वह वहीं बैठे बैठे ही जोर से राहुल को आवाज लगाई। और राहुल ने अपनी मां की आवाज सुनी भी इसलिए वह जल्दी जल्दी कपड़े पहन कर नीचे आ गया और आते ही अपनी मम्मी से बोला।

आज इतनी देर कहां लगा दी मम्मी और यह क्या( नाश्ते की तरफ देखते हुए) आज लगता है तनख्वाह हो गई। ( अपनी मम्मी की तरफ देखते हुए)

हां बेटा आज तनिक वा का दिन भी था और ऑफिस में काम भी जा रहा था इसलिए मुझे इधर आने में देर हो गई और आते आते मैं तुम दोनों के लिए नाश्ता भी लेकर आई हुं, चलो अब जल्दी से नाश्ता कर लो समय भी काफी हो गया है।

तीनों मिलकर नाश्ता करने लगे अलका की नजर बार-बार राहुल पर चली जा रहीे थी। खास करके उसके पेंट की तरफ, अलका पेंट के उभार को देखना चाहते थे लेकिन अभी अभी राहुल अपने लंड को शांत कर के आया था इसलिए उसका लंड भी आराम से सो रहा था।

ा नाश्ता करते हुए अपने बेटे के बारे में ही सोच रही थी। अपने बेटे को मुठ मारता हुआ देखकर वह समझ गई थी कि उसके बेटे ने जवानी पूरी तरह से आ चुकी है। अब वह बड़ा हो चुका था और उसके दमदार मोटे तगड़े और लंबे लंड को देख कर खुद उसकी बुर कुलबुलाने लगी थी। नाश्ता करते हुए राहुल के बारे में सोच-सोच कर ही उत्तेजित होने लगी थी उसकी सांसे भारी हो चली थी। बुर से रीस रहा नमकीन पानी उसे आंखों से निकले आंसू से कम नहीं लग रहे थे जो कि बुर की तड़प ना सह पाने की वजह से आंसु की तरह ही बुर से निकल रहा था। राहुल को देख देखकर अलका का बदन कसमसा रहा था। अलका के कमर के नीचे की हालत बिल्कुल खराब थी खासकर के जांघो के बीच की दशा के बारे में तो पूछो मत। बार-बार अपने बेटे के मुठ को याद कर करके उसकी बुर फुल पिचक रही थी।

अलका या सोच-सोचकर और भी ज्यादा उत्तेजित हो जा रही थी कि अगर सच में राहुल का लंड जो की कुछ ज्यादा ही मोटा और तगड़ा था उसकी बुर में जब अंदर तक जाएगा तब कैसा महसूस होगा बुर लंड की मोटाई की वजह से एकदम फेलते हुए अंदर जाएगा। इतना कल्पना करते ही अलका की बुर से अमृत की बूंद टपक पड़ी। राहुल बड़े मजे ले लेकर समोसे और रसमलाई खा रहा था। सोनू भी बड़े चाव से नाश्ता कर रहा था। लेकिन अलका का हाल बुरा था हाथ में समोसा तो जरूर था लेकिन उसे खा नहीं रही थी। और रसमलाई तो बस कटोरे में ही रखी हुई थी और उसका रस अलका की बुर से निकल रहा था। अलका जिस्म की तपन में तप रही थी। उसकी तड़प बढ़ती जा रही थी उस से अब

बर्दाश्त कर पाना मुश्किल हुआ जा रहा था। एक बार तो उसके जी में आया कि राहुल को अपनी बाहों में भर ले और खुद ही उसके लंड पर अपनी बड़ी बड़ी गांड रख कर बैठ जाए। वासना तो पूरी तरह से अलका पर हावी हो चुका था। वह चाहती तो जरूर ऐसा कर लेतीे लेकिन रिश्तों की मर्यादा और उसके संस्कार ऐसा करने से उसे रोक रहे थे। हलका में अभी भी थोड़ी बहुत समझ बची थी जिससे वह बार बार बच जा रही थी।

दोनों ने नाश्ता कर लिया था। अलका का मन खाने में नहीं लग रहा था लेकिन फिर भी थोड़ा बहुत खा कर उठ गई।

राहुल और सोनू दोनों अपने कमरे में जा चुके थे। अलका रसोईघर में तड़प रही थी, बदन की आग बुझाए नहीं दिख रही थी उसका मन में आज बहुत चुदवाने का कर रहा था। अपने बेटे के ही लंड पर मोह गई थी वह।

रसोई घर में खड़े खड़े ही वह कल्पना कीे दुनिया में खोने लगती। उसे ऐसा महसूस होता है कि उसका ही बेटा उसको चोद रहा है उसका मोटा लंड उसकी बुर की गुलाबी पंखुड़ियों को फैलाते हुए अंदर की तरफ सरक रहा है और वह भी मजे ले ले कर खुद अपनी कमर को हिलाते हुए अपने बेटे से चुदवा रही हैं। और जब कल्पना की दुनिया से बाहर आती तो, उसकी सांसे भारी हो चली होती, और तेज चलती सांसों के साथ-साथ उसकी ऊपर नीचे हो रही विशाल छातियां उसकी कामुकता की गवाही देती। अलका रसोईघर में खड़े-खड़े ही अपने बेटे के लंड को याद करके साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर को मसल रही थी। लेकिन आज वो अच्छी तरह से जानती थी कि इस तरह से मसलने से रगड़ने से और उंगली डालने से भी उसकी प्यास बुझाने वाली नहीं थी इसलिए थक हार कर मटके से ठंडा पानी निकाल कर एक सांस में गटक गई, पानी पीने के बाद वह सीधे अपने कमरे में चली गई खिड़की से ठंडी ठंडी हवा आ रही थी और बाहर का मौसम भी बदलने लगा था दूर दूर हल्की-हल्की बिजली चमक रही थी। वह मन ही मन बड़बड़ाई कि आज बारिश होने वाली है।

ऐसी गर्मी में ठंडी हवा उसे राहत पहुंचा रही थी इसलिए बिस्तर पर पड़ते ही उसे नींद आ गई। अर्धा एक घंटा ही बीता होगा कि उसे ऐसा लगने लगा कि, राहुल उसकी साड़ी धीरे धीरे ऊपर की तरफ सरका रहा है। उसकी गरम हथेलियों के स्पर्श से अलका पूरी तरह से गनंगना जा रही थी। अलका कुछ समझ पाती इससे पहले ही राहुल ने साड़ी को एकदम कमर तक चढ़ा दिया था। अलका भी अपने बेटे की इस हरकत पर पूरी तरह से उत्तेजित हो गई। इतनी ज्यादा उत्तेजित कि वह खुद ही अपने हाथों से अपनी पैंटी उतार कर अपनी बुर को अपने बेटे के सामने परोस दी। रसीली और फुली हुई बुर मे तुरन्त राहुल अपना लंड डालकर चोदने लगा। बुर में मोटा लंड घुसते हुी अलका से सहन नहीं हुआ और उसके मुंह से चीख निकल गई वह बार-बार राहुल से अपना लंड निकालने को कहती रही लेकिन राहुल अपनी मां की एक नहीं सुना और धड़ाधड़ अपने लंड को अपनी मां की बुक में अंदर बाहर करके चोदता रहा। अलका से यह चुदाई बर्दाश्त नहीं हो रही थी। थोड़ी ही देर में वो दर्द से कराहने लगी उसका पूरा बदन पसीना पसीना हो गया था। वह बार बार दर्द को दबाने के लिए

अपने दांतों को भींच ले रही थी । लेकिन दर्द था कि बढ़ता ही जा रहा था उस के दर्द का राहुल पर बिल्कुल भी असर नहीं पड़ रहा था। वह तो बस अपनी मां को चोदने में लगा था। तभी राहुल ने पूरी ताकत लगाकर जोरदार धक्का लगाया और अलका की बुरी तरह से चीख निकल गई। उसकी तुरंत आंख खुल गई। आंख खुली तो देखी कमरे में कोई नहीं था वह एक सपना देख रही थी। अलका अपनी हालत पर गौर की तो वह पसीने से पूरी तरह से तरबतर हो चुकी थी जबकि बाहर तेज हवा के साथ बारिश हो रही थी। वह अपनी हालत को देख कर परेशान हुए जा रही थी उसकी सांसे अभी भी तेज चल रही थी। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था इस तरह का सपना देखने का क्या मतलब था आज तक उसने इस तरह का सपना नहीं देखी थी जो कि इतना पूरी तरह से हकीकत लगे। वह सोचने लगी क्या वाकई में वह अपने बेटे के साथ चुदाई का सुख ले सकती है। कभी उसका मन कहता हां तो कभी इंकार कर देता। लेकिन फिर वह सोचने लगती कि आखिर बुरा ही क्या है उसकीे भी तो जरूरते हैं, आखिर कब तक तड़पती रहेगी चुदाई के लिए, राहुल भी तो तड़प रहा है चोदने के लिए तभी तो वह मुठ मार रहा था।। शायद वह भी मुझे चोदना चाहता है तभी तो रसोई घर में दो बार मुझे अपनी बाहों में भर कर जानबूझकर अपने लंड को मेरी गांड की फांको के बीचो बीच चुभा रहा था। वह सच मे मुझे चोदना चाहता है। यही सब बातें अलका के दिमाग में चल रहीे थी। और बाहर हवा के साथ बारिश हो रही थी जिससे पानी के छीटे अंदर कमरे तक आ रहे थे। अलंका खिड़की को बंद करने के लिए बिस्तर से उठी, और खिड़की को बंद करते हुए उसे ख्याल आया कि छत पर उसने कपड़े सूखने के लिए रखी थी। इतनी देर में तो कपड़े भीग चुके होंगे लेकिन लाना भी तो जरुरी था इसलिए मैं छत पर जाने के लिए कमरे से बाहर आ गई।

 
बारिश का जोर बढ़ता ही जा रहा था। अलका जानती थी की छत पर जाकर कपड़े समेटने का कोई मतलब नहीं था क्योंकि सारे के सारे कपड़े गीले हो चुके ही होंगे। लेकिन फिर भी वह छत की तरफ जाने लगी, तेज हो रही बारिश की वजह से राहुल की भी नींद खुल चुकी थी। वह भी उठकर कमरे से बाहर आ गया। ऐसी तेज बारिश में राहुल का मन बहक रहा था । उसे इस समय स्त्री संसर्ग की ज्यादा ही जरूरत महसूस हो रही थी। उसके लंड में अपने आप ही तनाव आ गया था। इस समय उसके बदन पर सिर्फ एक टॉवल ही लिपटी हुई थी. और तो और उसने कमरे में ही अंडरवियर उतार फेंका था, वैसे भी वह कमरे में पूरी तरह से नंगा ही लेटा हुआ था वह तो बारिश की वजह से बाहर आते ही टॉवेल लपेट लिया था। उसका मन इधर उधर भटक रहा था। खास करके उसे इस समय उसकी मां ही याद आ रही थी। उसकी मतवाली मटकती भरावदार गांड और उसका नंगा बदन राहुल के होश उड़ाए हुए था। टॉवल के अंदर लंड का तनाव बढ़ता ही जा रहा था कि तभी उसे सीढ़ी पर से ऊपर की तरफ जाते हुए उसकी मां नजर आई व सोच में पड़ गया कि इतनी रात गए मम्मी कहां जा रही है छत पर वो भी इस बारिश में . वैसे इस समय सीढ़ियों पर चढ़ते हुए अपनी मां को देखकर उसका मन डोल ने लगा था क्योंकि राहुल की प्यासी आँखे उसकी मां की गोल गोल बड़ी गांड पर ही टीकी हुई थी। वैसे भी मन जब चुदवासा हुआ होता है तब औरत का हर एक अंग मादक लगने लगता है लेकिन यहां तो हल्का सर से पांव तक मादकता का खजाना थी। सीढ़ियों पर चढ़ते समय जब वह एक एक कदम ऊपर की तरफ रखती थी. तब जब भी वह अपने कदम को शिढ़ी पर रखने के लिए ऊपर की तरफ बढ़ाती तब उसकी भरावदार गांड और भी ज्यादा उभरकर बाहर की तरफ निकल जाती जिसे देखकर राहुल के लंड में एेंठन होना शुरू हो गया था। बस यह नजारा दो-तीन सेकंड का ही था और उसकी मां आगे बढ़ गई लेकिन यह दो-तीन सेकेंड का नजारा उसके बदन में कामुकता भर दिया। वह भी अपनी मां के पीछे पीछे सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने लगा। बारिश तेज हो रही थी अलका जानती थी की छत पर जाने पर वह भी भीग जाएगी लेकिन ना जाने क्यों आज उसका मन भीगने को ही कर रहा था। वह छत पर पहुंच चुकी थी, और बारिश की बूंदे उसके बदन को भिगोते हुए ठंडक पहुंचाने लगे। बारिश की बूंदे जब उसके बदन पर पड़ती तो अलका के पूरे बदन में सिरहन सी दौड़ने लगती। अलका को आनंद का अहसास हो रहा था। लेकिन अलका की नजरें छत पर कुछ और ढूंढ रही थी। वह छत पर अपनी नजरों को इधर उधर दौडा़ रही थी, राहुल दीवार की ओट लेकर

अपनी मां को बारीश मे भीगते हुए देख रहा था। धीरे धीरे करके बारिश के पानी में उसका पूरा बदन. भीगने लगा। साड़ी के साथ-साथ उसका ब्लाउज पेटीकोट ब्रा और पेंटी भी पूरी तरह से गीली हो गई। राहुल अपनी मां के मदमयी बदन को देख कर उत्तेजित होने लगा।

लेकिन यह देख कर आश्चर्य में था कि उसकी मां छत पर इधर उधर नजरें दौड़ाकर क्या ढूंढ रही थी। एक तो अलका का गीला बदन उसे परेशान किए हुए था, और फिर उसका इधर-उधर ढूंढना राहुल से रहा नहीं गया वह भी छत पर आ गया उसके बदन को भी बारिश की बूंदे भीगाेने लगी, वैसे भी वह पूरी तरह से ही नंगा था बस एक टॉवल ही थी जो उसके नंगेपन को छिपाए हुए थी।े बारिश के पानी में वह भी गीला होने लगा था।

राहुल उत्तेजना में सरोबोर हो चुका था और ऊपर से यह बारिश का पानी उसे और ज्यादा चुदवासा बना रहा था।

अलका की पीठ राहुल की तरफ थी'। पूरी तरह से भीगी बाल खुले हुए थे, जो कि पानी में भीगते हुए बिखर कर एक दूसरे में उलझे हुए थे जिससे पीछे का भाग और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था। अलका की साड़ी कपड़े पूरी तरह से गीले हो कर बदन से ऐसे चिपके थे कि बदन का हर भाग हर कटाव और उसका उभार साफ साफ नजर आ रहा था राहुल तो यह देख कर एकदम दीवाना हो गया उसकी टावल भी तंबू की वजह से उठने लगी थी। राहुल को अपनी मां के खूबसूरत बदन का आकर्षण इस कदर बढ़ गया था कि उसके बदन में मदहोशी सी छाने लगी थी उसे अब यह डर भी नहीं था कि कहीं उसकी मां जांघों के बीच बने उठे हुए तंबू को ना देख ले, राहुल भी शायद अब यही चाहता था कि होता है जो हो जाने दो। इसलिए वह खुद भी यही चाहता था कि' उसकी मां की नजर उसके खड़े लंड पर जाए। राहुल भी बारिश के पानी का मजा ले रहा था लेकिन बारिश का यह ठंडा पानी उसके बदन की तपन को बुझाने की वजाय और ज्यादा भड़का रहीे थी। उसकी मां भी अब कुछ ढूंढ़ नहीं रही थी बल्कि भीगने का मजा ले रही थी पहली बार यु आधी रात को वह छत पर भीेगने के लिए आई थी। शायद बारिश के ठंडे पानी से अपने बदन की तपन को बुझाना चाहतीे थी लेकिन, लेकिन इस बारिश के पानी से अलका के भी मन की प्यास भड़क रही थी। उसे अपनी जवानी के दिन याद आने लगे जब ऐसी ही किसी भीगती बारिश में उसके पति ने उसकी जमकर चुदाई किया था। उस पल को याद करके अलका और भी ज्यादा उत्तेजित होने लगी और उत्तेजना के मारे भीगती बारिश में उसके दोनों हाथ खुद-ब-खुद उसकी चूचियों पर चले गए जिसे वह जोर जोर से दबा रही थी, राहुल आंख फाड़े अपनी मां के इस हरकत को देख रहा था। उत्तेजना के मारे राहुल के लंड में मीठा मीठा दर्द होने लगा। लंड की एठन ओर

दर्द उस पर और ज्यादा बढ़ गया जब राहुल ने देखा कि उसकी मां की दोनों हथेलियां चूचियों पर से बारिश के पानी के साथ सरकते सरकते कमर से होते हुए उसकी भारी भरकम भरावदार गांड पर चली गई और गांड पर हथेली रखते ही उसकी मां उसे जोर जोर से दबाने लगी।

अपनी मां को अपनी मदमस्त पानी में भीगी हुई भरावदार गांड को दबाते हुए देखकर राहुल से रहा नहीं गया वह मदहोश होने लगा उसकी आंखों में खुमारी सी छाने लगी। एक बार तो उसके जी में आया कि पीछे से जाकर अपनी मां के बदन से लिपट जाए और तने हुए लंड कोें उसकी बड़ी बड़ी गांड की फांकों के बीच धंसा दे। लेकिन अपने आपको रोके रहा। अपनी मां की कामुक अदा को देखकर राहुल की बर्दाश्त करने की शक्ति क्षीण होती जा रही थी। लंड में इतनी ज्यादा ऐठन होने लगी थी कि किसी भी वक्त उसका लावा फूट सकता था। अभी भी उसकी मां के दोनों हाथ उसीकी भरावदार नितंबों पर ही टिकी हुई थी। अलका को भी अपने उठे हुए नितम्ब पर नाज होता था।

राहुल वहीं इसके पीछे खड़े खड़े अपनी मां को ही देख कर पागल हुए जा रहा था उसकी हर एक अदा पर उसका लंड ठुनकी मारने लग रहा था। राहुल की कामुक नजरें अपनी मां के मदमस्त बदन, चिकनी पीठ, गहरी कमर और उभरे हुए नितम्ब जोकि भीगने की वजह से साफ साफ नजर आ रही थी ऊस पर फीर रही थी।

उसे डर लग रहा था कि कहीं उसकी मां पीछे मुड़कर उसे देख ली तो उसे अपने आप को देखता हुआ पाकर कहीं गुस्सा ना हो जाए इसलिए वह बोला।

मम्मी ईतनी रात को ओर ईस बारीस मे क्यों भीग रही हो और क्या ढूंढ रही थी?

( पीछे से आती आवाज सुनकर अलका चौंक गई और चौक कर पीछे अपने बेटे को खड़ा पाकर तुरंत अपने नितंबों पर से हाथ हटा ली। और हड़बड़ाते हुए बोली।)

ककक...कुछ नही ....युं ही.... बारिश हो रही थी तो मैं छत पर कपड़े लेने आई थी लेकिन यहां तो......

कपड़े मैंने समेट लिए थे मम्मी( अपनी मां की बात पूरी होने से पहले ही राहुल बीच में बोल पड़ा।)

वोह तभी मैं कहूं कि कपड़े कहां चले गए। वैसे भी बेटा गरमी इतनी थी कि बारिश देखकर मुझे नहाने की इच्छा हो गई और मैं यहीं रुक गई। लेकिन तुम कब आए।

मैं अभी-अभी आया हूं मुझेे ऐसी बारिश में नींद नहीं आ रही थी और मैंने आपको सीढ़ियों से ऊपर आते देखा तो मै भी आपके पीछे पीछे आ गया। ( रह रह कर बादलों की गड़गड़ाहट के साथ बिजली भी चमक जा रही थी। राहुल का लंड पूरी तरह से तना हुआ था. टॉवेल आगे से उठकर एकदम तंबू बनी हुई थी। जो के पानी में भीगने की वजह से रह रहे कर सरकने लगती और राहुल उसे हाथ से संभाल लेता। अभी तक अलका की नजर उस के तने हुए लंड पर नहीं पडी़े थी। लेकिन राहुल की नजर अपनी मां के बदन के हर एक कोने तक पहुंच रही थी। पानी में भिगोकर अलका का ब्लाउज उसकी चूचियों के चिपक गया था जिससे ब्लाउज के अंदर गुलाबी रंग की ब्रा भी साफ साफ नजर आ रही थी। राहुल ललचाई आंखों से पानी में भीगी हुई अपनी मां की चुचियों को देख रहा था अलका ने तुरंत उसकी नजरों के सिध को भांप ली। अपने बेटे की कामुक नजरो को अपनी चूची पर घूमती हुई देखकर उसकी बुर में सुरसुराहट होने लगी। तभी अलका की नजरें उसके बेटे की नंगी छातियों पर पारी जोकि अच्छी खासी चोड़ी थी गठीला बदन देखते अलका भी उत्तेजित होने लगी

बारिश का जोर और ज्यादा बढ़ने लगा था बिजली की चमक और बादलों की गड़गड़ाहट बढ़ने लगी थी एक तरह से यह तूफानी बारिश थी। लेकिन इतनी तूफानी बारिश में भी दोनों मां बेटे एक दूसरे को अपनी तरफ आकर्षित करने में लगे हुए थे। तेज बारिश में भी अपनी मां के ऊपर नीचे हो रही है छातियों को राहुल साफ-साफ देख रहा था। साड़ी भीगकर एक तरफ हो गई थी।

जिससे अलका का गोरा चिकना पेट पर पेट के बीचमें नीचे की तरफ गहरी नाभि एकदम साफ दिखाई दे रही थी जिस पर रह रहकर राहुल की नजर चली जा रही थी। अलका अपने बेटे की नजर को अपने बदन के नीचे जाति देख उसकी नजर भी अपने बेटे की कमर से ज्यों नीचे गई उसका दिल धक्क से कर गया। उसकी भीगी बुर मे से भी मदन रस चु गया। अलका कर भी क्या सकते थे अपने बेटे के कमर के नीचे का नजारा ही कुछ ऐसा देख ली थी कि उसकी बुर पर उसका कंट्रोल ही नहीं रहा। अलका आंख फाड़े अपने बेटे की कमर के नीचे देख रही थी। बारिश के पानी मे राहुल के साथ साथ उसकी टावल भी एकदम गीली हो चुकी थी। टावल का कपड़ा भीगने की वजह से गीला होकर और ज्यादा वजनदार हो गया था। लेकिन टॉवल के अंदर राहुल का लंड एकदम टाइट हो कर आसमान की तरफ देख रहा था जिससे टॉवल भी तन कर तंबू बन गया था। यह नजारे को देखकर अलका समझ गई थी कि उसके बेटे का लंड बहुत ज्यादा ताकतवर और तगड़ा है। और इस तरह से अपने बेटे के लंड खड़े होने का कारण भी वह जान गई थी ।

वह अच्छी तरह से जान गई थी की उसके कामुक भीगे हुए बदन को देखकर ही उसके बेटे का लंड खड़ा हुआ है। अलका ऐसी तूफानी बारिश में भी अल्का पुरी तरह से गर्म हो चुकी थी।

राहुल भी जान गया था कि उसकी मां की नजर उसके खड़े लंड पर पड़ चुकी है। इस पल एक दूसरे को देख कर दोनों मां बेटे चुदवासे हो चुके थे। बादलों की गड़गड़ाहट की आवाज माहौल को और गर्म कर रहा था। न अलका से रहा जा रहा था और ना ही राहुल से दोनों मां-बेटे अपने आप को संभाल पाने में असमर्थ साबित हो रहे थे। दोनों तैयार थे लेकिन दोनों अपनी अपनी तरफ से यह देख रहे थे कि पहल कौन करता है।

दोनों एक दूसरे को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए सब कुछ कर चुके थे और कर भी रहे थे लेकिन पहल करने में डरते थे। तभी राहुल अपनी मां को अपनी तरफ देखते हुए देख कर बोला।

क्या देख रही हो मम्मी?

( अपने बेटे के इस सवाल का जवाब एकदम ठंडे दिमाग से देते हुए बोली।)

कुछ नहीं बेटा मैं बस यह देख रही हूं कि मेरा साथ देने के लिए तुम इतनी रात को भी छत पर भीगने चले आए इसलिए आज मेरा जी भर के मन कर रहा है की इस बारिश मे मै खुब नहाऊं। ( इतना कहने के साथ हुई अलका अपने बेटे को लुभाने के लिए अपने हाथ से साड़ी को उतारने लगी यह देखकर राहुल के बदन में कामाग्नी भड़क उठी। और राहुल के देखते ही देखते अलका ने अपने बदन से साड़ी को उतार फेंकी और सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में ही बारिश में भीगने का मजा लेने लगी। शायद अलका को देखकर बरसात भी उसकी दीवानी हो गई थी इसलिए तो साड़ी को उतारते हुए बरसात और तेज पड़ने लगी बादलों की गड़गड़ाहट बढ़ गई बिजली की चमक वातावरण को और ज्यादा गर्म करने लगे। अलका साड़ी को उतार फेंकते हैं बारिश में भीगने का मजा लेने लगी मजा क्या लेने लगी वह अपनी कामुक अदा से अपने ही बेटे को लुभाने लगी। वह जानती थी कि गीले कपड़ो मे से उसके गोरे बदन का पोर पोर झलक रहा हे और उसे देखकर उसका बेटा उत्तेजित भी हो रहा है इसलिए वह उसे और ज्यादा दिखा कर अपने बेटे को अपना दीवाना बना रही थी।

 
राहुल भी अपनी मां की अदाओं को देखकर एकदम ज्यादा उत्तेजित हो चुका था इतना ज्यादा उत्तेजित कि उसे डर था कि कहीं उसके लंड का लावा फूट ना पड़े।

लंड की नसों में खून का दौरा दुगनी गति से दौड़ रहा था। उसका लंड इतना ज्यादा टाइट हो चुका था कि टॉवल के दोनों छोर को जहां से बांधा हुआ था। लंड के तगड़ेपन की वजह से टॉवल का वह छोर हट गया था या युं कह सकते हैं कि लंड टॉवल फाड़कर बाहर आ गया था। अपनी मां को देखकर राहुल की सांसे बड़ी ही तीव्र गति से चलने लगी थी। वह एक टक अपनी मां को देखे ही जा रहा था अलका के अंदर ना जाने कैसी मदहोसी आ गई थी कि वह पानी में भीगते हुए लगभग नाच रही थी। अलका के बदन में चुदासपन का उन्माद चढ़ा हुआ था। उत्तेजना और उन्माद की वजह से उस की चिकनी बुर पूरी तरह से फुल चुकी थी। वह भीगने में मस्त थी। और राहुल उसे देखने में मस्त था। टॉवल से बाहर झांक रहे लंड को वापस छुपाने की बिल्कुल भी दरकार नहीं ले रहा था बल्कि वह तो यही चाहता था कि

उसकी मां की नजर के नंगे लंड पर पड़े और उसे देख कर दोनों बहक जाएं। और यही हुआ भी बारिश में भीगते भीगते अलका की नजर अपने बेटे के टावल में से झांक रहे मोटे तगड़े लंड पर पड़ी ओर उसकी मोटाई देख कर अलका की बुर फुलने पिचकने लगी। उसके बदन में झनझनाहट सी फैल गई। राहुल अच्छी तरह से जान रहा था कि इस समय उसकी मां की नजर उस के नंगे लंड पर टिकी हुई है। और जीस मदहोशी और खुमारी के साथ वह लंड को देख रही थी राहुल को लगने लगा था कि बात जरूर बन जाएगी।

अलका उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुकी थी वह इससे आगे कुछ सोच पाती थी तभी। इतनी तेज बादल गरजा की, पूरे शहर की बिजली गुल हो गई छत पर जल रहा बल्ब भी बंद हो गया ' चारों तरफ घोर अंधेरा छा गया इतना अंधेरा की ईस तेज बारिश में वह दोनों एक दूसरे का चेहरा भी नहीं देख पा रहे थे। रह रह कर बिजली चमकती तब जाकर कहीं दोनों एक दूसरे को देख पा रहे थे।

पूरे शहर की लाइट गुल हो चुकी थी, अलका और राहुल दोनों छत पर भीग रहे थे। अंधेरा इस कदर छाया हुआ था कि एक दूसरे को देखना भी नामुमकिन सा लग रहा था। बारिश जोरों पर थी बादलों की गड़गड़ाहट बढ़ती ही जा रही थी। यह ठंडी और तूफानी बारिश दोनों के मन में उत्तेजना के एहसास को बढ़ा रहे थे। अलका की सांसे तो चल नहीं रही बल्कि दौड़ रही थी, राहुल बेताब था तड़प रहा था उसका लंड अभी भी टावल से बाहर था। जिसे देखने के लिए अलका की आंखें इस गाढ़ अंधेरे में तड़प रही थी लेकिन देख नहीं पा रही थी। राहुल इस कदर उत्तेजित था उसकी लंड की नसें उभर सी गई थी। ऐसा लगने लगा था कि कहीं यह नसे फट ना जाए। तभी राहुल बोला।

मम्मी यहां तो बहुत अंधेरा हो गया कुछ भी देख पाना बड़ा मुश्किल हो रहा है।

हां बेटा नहाने का पूरा मजा किरकिरा हो गया अब हमें नीचे चलना होगा।( इतना कहते हुए अलका राहुल की तरफ बढ़ी ही थी कि हल्का सा उसका पैर फिसला और वह राहुल की तरफ गिरने लगी कि तभी अचानक राहुल ने अपनी मां को थाम लिया उसकी मां गिरते-गिरते बची थी वह तो अच्छा था कि राहुल के हाथों में गीरी थी वरना उसे चोट भी लग सकती थी। लेकिन बचते-बचाते में अलका सीधे अपने बेटे की बाहों में आ गई थी। जिससे अलका का बदन अपने बेटे के बदन से बिल्कुल सट गया था। दोनों के बदन से बारिश की बूंदें नीचे टपक रही थी। हवा इतनी तेज थी कि दोनों अपने आप को ठीक से संभाल नहीं पा रहे थे। अचानक जो एक दूसरे के बदन से सटने पर टॉवल से बाहर झांक रहा राहुल का तना हुआ लंड पेटीकोट सहित उसकी मां की जांघों के बीच सीधे उसकी बुर वाली जगह पर हल्का सा दबाव देते हुए धंस गया , अलका को अपनी बुर पर अपने बेटे के लंड के सुपाड़े का गरम एहसास होते ही अलका एकदम से गरम हो कर मस्त हो गई। आज एकदम ठीक जगह लंड की ठोकर लगी थी। लंड की रगड़ बुर पर महसुस होते ही , अलका इतनी ज्यादा गर्म हो गई थी कि उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी छूट पड़ी , लेकिन शायद तेज बारिश की आवाज में वह सिसकारी दब कर रह गई। अलका को भी अच्छा लग रहा था वह तो ऊपर वाले का शुक्र मनाने लगे कि फिसल कर ठीक जगह पर गई थी फिर भी औपचारिकतावश बोली।

अच्छा हुआ बेटा तुमने मुझे थाम लिया वरना में गिर गई होती।

मेरे होते हुए आप कैसे गिर सकती है मम्मी।( राहुल अपनी मम्मी को थामने से मिले इस मौके को हांथ से जाने नही देना चाहता था इसलिए वह अपनी मम्मी को अभी तक अपनी बाहों में ही भरा हुआ था उसकी मां भी शायद इसी मौके की ताक में थी तभी तो अपने आप को अपने बेटे की बाहों से अलग नहीं कर रही थी।

और राहुल भी था मिलने के बहाने अपनी कमर को और ज्यादा आगे की तरफ बढ़ाते हुए अपने लंड को अपनी मां की बुर वाली जगह पर दबा रहा था। राहुल का ल** रसोईघर की तरह पेंट में नहीं था बल्कि एकदम नंगा था और एक दम शुरुर में था और इतना ज्यादा ताकतवर था कि इस बार पेटीकोट सहित लंड का सुपाड़ा अलका की बुर में हल्का सा अंदर घुस गया। सुपाड़ा बुर के ऊपरी सतह पर ही था। लेकिन अलका के लिए इतना ही बहुत था आज बरसों के बाद लंड उसकी बुर के मुहाने तक पहुंच पाया था। इसलिए तो अलका एकदम से मदहोश हो गई उसके पूरे बदन में एक नशा सा छाने लगा और वह खुद ही अपने बेटे को अपनी बाहों में भींचते हुए अपनी बुर के दबाव को अपने बेटे के लंड पर बढ़ाने लगी। दोनों परम उत्तेजित हो चुके थे। अपनी मां की बुर के और लंड के बीच सिर्फ वह पटना का पेटीकोट ही दीवार बना हुआ था यह दीवार पेटीकोट की नहीं बल्की शर्म की थी। क्योंकि उसकी मां की जगह अगर कोई और औरत होती तो यह पेटीकोट रुपी दीवार राहुल खुद अपने हाथों से गिरा दिया होता ' और अलका खुद अगर इस समय यह उसका बेटा ना होता तो वह खुद ही इस दीवार को ऊपर उठा कर लंड को अपनी बुर में ले ली होती।

सब्र का बांध तो टूट चुका था लेकिन शर्म का बांध टूटना बाकी था। मां बेटे दोनों चुदवासे हो चुके थे। एक चोदने के लिए तड़प रहा था तो एक चुदवाने के लिए तड़प रही थी। दोनों की जरूरते एक थी मंजिले एक थी और तो ओर रास्ता भी एक था। बस उस रास्ते के बीच में शर्म मर्यादा और संस्कार के रोड़े पड़े हुए थे।

मां बेटे दोनो एक दूसरे में समा जाना चाहते थे। दोनों एक दूसरे की बाहों में कस के चले जा रहे थे बारिश अपनी ही धुन में नाच रही थी अलका की बड़ी बड़ी चूचियां उसके बेटे के सीने पर कत्थक कर रहीे थी। राहुल का सीना अपनी मां की चुचियों में समा जाना चाहता था। तेज बारिश और हवा के तेज झोंकों में राहुल की टावल उसके बदन से कब गिर गई उसे पता ही नहीं चला राहुल एकदम नंगा अपनी मां को अपनी बाहों में लिए खड़ा था। उसका तना हुआ लंड उसकी मां की बुर में पेटीकोट सहित धंशा हुआ था। अलका की हथेलियां अपने बेटे की नंगी पीठ पर फिर रहीे थी। उसे यह नहीं पता था कि उसका बेटा पूरी तरह से नंगा होकर उससे लिपटा पड़ा है। अलका की बुर एकदम गर्म रोटी की तरह फूल चुकी थी। बुर से मदन रस रिस रहा था जो कि बारिश के पानी के साथ नीचे बहता चला जा रहा था। तभी आसमान में इतनी तेज बादल गरजा कि जैसे दोनोे को होश आया हो , दोनों एक दूसरे की आंखों में देखे जा रहे थे लेकिन अंधेरा इतना था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था वह तो रह रह कर बिजली के चमकने हल्का-हल्का दोनों एक दूसरे के चेहरे को देख ले रहे थे। अलका मस्त हो चुकी थी' बुर में लंड लेने की आकांक्षा बढ़ती ही जा रही थी। मैं थोड़ा बहुत अपने बेटे से दुखी थी और दुखी इस बात से थी कि उसका बेटा ये भी नहीं जानता था कि औरत के मन में क्या चल रहा है क्योंकि वह जानती थी कि राहुल की जगह अगर कोई और लड़का होता तो इस मौके का भरपूर फायदा उठाते हुए कब से उसकी चुदाई करने लगा होता।

अलका भी इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी छत पर नजर दौड़ाते हुए कुछ सोचने लगे क्योंकि आज वह भी यही चाहती थी कि होता है जो वो हो जाने दो।

बारिश रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी बारिश पल-पल तेज होती जा रही थी छोटी-छोटी बुंदे अब बड़ी होने लगी थी जो बदन पर पड़ते ही एक चोट की तरह लग रही थी। अलका कोई उपाय सोच रही थी क्योंकि उसे रहा नहीं जा रहा था बारिश के ठंडे पानी में उसकी बुर की गर्मी को बढ़ा दिया था। जिस पर अभी भी उसके बेटे का लंड पेटीकोट सहित सटा हुआ था। अलका अपने बेटे की नंगी पीठ पर हाथ फिराते हुए बोलि।

अच्छा हुआ बेटा कि तू छत पर आ गया वरना मुझे गिरते हुए कौन संभालता।( इतना कहते हुए एक हाथ से अपनी पेटीकोट की डोरी को खोलने लगी, क्योंकि वह जानती थी की डोरी खुलते ही उसे पेटीकोट उतारने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी क्योंकि बारिश इतनी तेज गिर रही थी कि बारिश की बोछार से खुद ही उसकी पेटीकोट नीचे सरक जाएगी। और अगले ही पल उसने पेटीकोट की डोरी को खोल दी। राहुल जवाब देते हुए बोला।)

मैं इसलिए तो यहां आया था मम्मी ताकि मुसीबत में मैं काम आ सकुं, और तुम्हें गिरते हुए बचा कर मुझे अच्छा लग रहा है।

( अपनी बेटे की बात को सुनकर अलका खुश हो गई और लंड की रगड़ से एकदम रोमांचित हो गई। और रोमांचित होते हुए अपने बेटे के गाल को चुमने के लिए अपने होठ आगे बढ़ाई अंधेरा इतना गाढ़ा था कि एक दूसरे का चेहरा भी नहीं दिखाई दे रहा था इसलिए अलका के होठ राहुल के गाल पर ना जाकर सीधे उसके होंठ से टकरा गए। होठ से होठ का स्पर्श होते ही राहुल के साथ साथ खुद अलका भी काम विह्ववल हो गई। राहुल तो लगे हाथ गंगा में डुबकी लगाने की सोच ही रहा था इसलिए तुरंत अपनी मां के होठों को चूसने लगा बारिश का पानी चेहरे से होते हुए हॉठ चुसाई की वजह से एक दूसरे के मुंह में जाने लगा। दोनों मस्त हो गई. राहुल तो पागलों की तरह अपनी मां की गुलाबी होंठों को चुसे जा रहा था। उसकी मां भी अपने बेटे का साथ देते हुए उसके होठों को चूस रही थी । यहां चुंबन दुलार वाला चुंबन नहीं था बल्कि वासना में लिप्त चुंबन था। दोनों चुंबन में मस्त थे और धीरे-धीरे पानी के बाहावं के साथ साथ अलका की पेटीकोट भी उसकी कमर से नीचे सरक रही थी। या यों कहो कि बारिश का पानी धीरे-धीरे अलका को नंगी कर रहा था। दोनों की सांसे तेज चल रही थी राहुल अपनी कमर का दबाव आगे की तरफ अपनी मां पर बढ़ाए ही जा रहा था और उसका तगड़ा लंड बुर की चिकनाहट की वजह से पेटीकोट सहित हल्के हल्के अंदर की तरफ सरक रहा था। दोनों का चुदासपन बढ़ता जा रहा था की तभी बहुत जोर से फिर बादल गरजा ओर ईस बार फीर से दोनों की तंद्रा भंग हो गई। अलका की सांसे तीव्र गति से चल रही थी। वह लगभग हांफ रही थी। और इस बार खुद को राहुल की बाहों से थोड़ा अलग करते हुए बोली।

बेटा शायद यह बारिश रुकने वाली नहीं है वैसे भी लाइट चले जाने पर नहाने का सारा मजा किरकिरा हो गया है अब हमें नीचे चलना चाहिए। ( वैसे तो राहुल का नीचे जाने का मन बिल्कुल भी नहीं था उसे छत पर ही मजा आ रहा था। फिर भी वह एतराज जताते हुए बोला।)

हां मम्मी लेकिन कैसे जाएंगे नहीं थे यहां इतना अंधेरा है कि हम दोनो एक दूसरे को भी नहीं देख पा रहे हैं। हम दोनों का बदन भी पानी से पूरी तरह से भीग चुका है, ऐसे नहीं सीढ़ियां चढ़कर नीचे उतर कर जाना हम लोग फेशल भी सकते हैं और वैसे भी सीढ़ी भी दिखाई नहीं दे रही है।

( मन तो अलका का भी नहीं कर रहा था नीचे जाने को लेकिन वह जानती थी कि अगर सारी रात भी छत पर रुके रहो तो भी बस बाहों में भरने के सिवा आगे राहुल बढ़ नहीं पाएगा। और वैसे भी अलग का आगे का प्लान सोच रखी थी इसलिए नीचे जाना भी बहुत जरूरी था।

नीचे तो चलना पड़ेगा बेटा और वैसे भी जब तुम मुझे संभाल सकते हो तो क्या मैं तुम्हें गिरने दूंगी। ( अलका इतना कह रही थी तब तक पेटिकोट सरक कर घुटनों से नीचे जा रही थी अलका मन ही मन बहुत खुश हो रही थी। क्योंकि नीचे से वह पूरी तरह से नंगी होती जा रही थी। माना कि उसका बेटा उसे नंगी होते हुए देख नहीं पा रहा था लेकिन फिर भी अंधेरे मे ही सही अपने बेटे के सामने नंगी होने में।

अलका के बदन में एक अजीब से सुख की अनुभूति हो रही थी। वह रोमांचित होते हुए बोली।

बेटा तू बिल्कुल भी चिंता मत कर बस तू मुझे पकड़कर

मेरा सहारा लेते हुए मेरे पीछे पीछे सीढ़ियां उतरना। ( इतना कहने के साथ ही सरक कर पैरों में गिरी हुई पेटीकोट को पैरों का ही सहारा देकर टांग से निकाल दी। अब अलका कमर के नीचे बिल्कुल नंगी हो चुकी थी, उसके मन में यह हूक रहे जा रहीे थीे कि काश उसे नंगी होते हुए उसका बेटा देख पाता तो शायद वह कुछ आगे करता लेकिन फिर भी जो उसने सोच रखी थी वह अगर कामयाब हो गया तो आज की ही रात दोनों एक हो जाएंगे। अलका के बदन पर मात्र उसका ब्लाउज ही रह गया था और अंदर ब्रा बाकी वह बिल्कुल नंगी हो चुकी थी। राहुल तो पहले से ही एकदम नंगा हो चुका था। आने वाले तूफान के लिए दोनों अपने आपको तैयार कर रहे थे। इसलिए तो अलका ने अपने बदन पर से पेटीकोट उतार फेंकी थी और राहुल बारिश की वजह से नीचे गिरी टावल को उठाकर लपेटने की बिल्कुल भी दरकार नहीं ले रहा था। और बारिश थी की थमने का नाम ही नहीं ले रही थी। अलका नीचे जाने के लिए तैयार थी बादलों की गड़गड़ाहट से मौसम रंगीन बनता जा रहा था तेज हवा दोनों के बदन में सुरसुराहट पैदा कर रही थी।

अलका नीचे उतरने के लिए नीचे जाती सीढ़ियों की तरफ जाने के लिए कदम बढ़ाएं और एक हाथ से टटोलकर राहुल को इशारा करते हुए अपने पीछे आने को कही क्योंकि सीढ़ियों वाला रास्ता बहुत ही संकरा था वहां से सिर्फ एक ही इंसान गुजर सकता था इसलिए राहुल को अपने पीछे ही रहने को कहीं अंधेरा इतना था कि वह खुद राहुल का हाथ पकड़कर अपने कंधे पर रख दी ताकि वह धीरे धीरे नीचे आ सके। अलका सीढ़ियों के पास पहुंच चुकी थी क्योंकि रह रह कर जब बिजली चमकती तो उसके उजाले में ज्यादा तो नहीं बस हल्का हल्का नजर आ रहा था। बारिश का शोर बहुत ज्यादा था। अब वह सीढ़ियों से नीचे उतरने वाली थी इसलिए राहुल को बोली।

बेटा संभलकर अब हम नीचे उतारने जा रहे हैं अगर डर लग रहा हो तो मुझे पीछे से पकड़ लेना। ( अलका ने टॉवल से बाहर झांकते उसके लंड को देख चुकी थी और वह यही चाहती थी कि राहुल सीढ़ियां उतरते समय उसे पीछे से पकड़ेगा तो उसका लंड गांड में जरूर रगड़ खाएगा। उसकी मां की यह बात राहुल के लिए तो सोने पर सुहागा था। इससे तो उसे खुला मौका मिल जाएगा। वह कुछ बोला नहीं बस हामी भर दीया।

अलका धीरे धीरे सीढ़िया उतरने लगे और उसके पीछे पीछे राहुल, अलका आराम से दो तीन सीढ़ियां उतर गई, और राहुल भी बस कंधे पर हाथ रखे हुए नीचे आराम से उतर रहा था। दोनों तरफ रहे थे कल का चाह रही थी कि राहुल पीछे से उसे पकड़ ले राहुल भी यही चाह रहा था कि अपनी मां के बदन पर पीछे से जाकर सट जाए। लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था। अलका तो तड़प रही थी उसे जल्द ही कुछ करना था वरना यह मौका हाथ से जाने वाला था दोनों अगर ऐसा ही होता रहा है तो शर्म के मारे यह सुनहरा मौका हाथों से चला जाएगा। इसलिए अलका ने शिढ़ी पर फिसलने का बहाना करते हुए आगे की तरफ झटका खाते हुए।

ऊईईईई....मां ....गई रे.....

( इतना सुनते ही राहुल बिना वक्त गवाएं झट से अपनी मां को पीछे से पकड़ लिया, अब लगा पीछे से अपने बेटे की बाहों में थी। राहुल का बदन अपनी मां के बदन से बिल्कुल सटा हुआ था इतना सटा हुआ कि दोनों के बीच में से हवा को आने जाने की भी जगह नहीं थी। लेकिन अपनी मां को संभालने संभालने मे उसका लंड जोकी पहले से ही टनटनाया हुआ था वह ऊसकी मां की बड़ी बड़ी भरावदार गांड की फांको के बीच जाकर फंस गया। राहुल के बदन मे आश्चर्य के साथ सुरसुराहट होने लगी।

 
राहुल के बदन में आश्चर्य के साथ सुरसुराहट होने लगी क्योंकि पीछे से अपनी मां को थामने में उस का टनटनाया हुआ लंड उसकी मां की भरावदार गांड की फांखों के बीच फंस गया था। उसे आनंद तो बहुत आया लेकिन लेकिन एक बात उसको आश्चर्य में डाल दी थी। क्योंकि उसकी मां पेटीकोट पहनी हुई थी। लेकिन इस वक्त सीढ़ियों से उतरते समय जिस तरह से उसका लंड सटाक करके गांड की फांकों के बीच फस गया था , इससे तो यही लग रहा था उसे कि उसकी मां ने पेटीकोट नहीं पहनी है। राहुल को अजीब लग रहा था ' तभी उसकी मां ने बोली।

ओहहहहह.... बेटा तूने मुझे फिर से एक बार गिरने से बचा लिया और कहां मैं तुझे कह रही थी कि मै सभाल लूंगी। तेरा बहुत-बहुत शुक्रिया बेटा।

इसमें शुक्रिया कैसा मम्मी यह तो मेरा फर्ज है।

तू बहुत समझदार हो गया और बड़ा भी। ( इतना कहकर अलका हंस दी, उसके कहने का कुछ और मतलब था लेकिन उसका मतलब राहुल समझ नहीं पाया अलका कुछ देर तक सीढ़ियों पर खड़ी थी राहुल भी उसे अपनी बाहों में लिए खड़ा था उसका लंड अलका की भरावदार गांड में फंसा हुआ था जो कि यह बात अलका बहुत अच्छी तरह से जानतीे थी। वह इसी लिए तो जान बूझकर अपनी पेटीकोट को छत पर उतार आई थी, क्योंकि वह जानती थी की सीढ़ियों से उतरते समय कुछ ऐसा ही दृश्य बनने वाला था। अलका के साथ साथ राहुल की भी सांसे तीव्र गति से चल रही थी।

राहुल तो अपनी मां की गांड के बीचो बीच लंड फंसाए आनंदीत भी हो रहा था और आश्चर्यचकित भी हो रहा था। उसने अपनी मन की आशंका को दूर करने के लिए एक हाथ को अपनी मम्मी के कमर के नीचे स्पर्श कराया तो उसके आश्चर्य का ठिकाना ही ना रहा। उसकी हथेली अलका की जांघो पर स्पर्श हो रही थी और जांघो को स्पर्श करते ही वह समझ गया कि उसकी मम्मी कमर से नीचे बिल्कुल नंगी थी। उसके मन में अब ढेर सारे सवाल पैदा होने लगे कि यह पेटीकोट कैसे उतरी क्योंकि उसकी आंखों के सामने तो उसकी मां ने सिर्फ अपनी साड़ी को उतार फेंकी थी। साड़ी को उतार फेंकने के बाद उसके बदन पर ब्लाउज और पेटीकोट रह गई थी।

तो यह पेटीकोट कब और कैसे उतर गई, कहीं मम्मी ने अंधेरे में तो नहीं अपनी पेटीकोट उतार कर नंगी हो गई। क्योंकि बिना पेटीकोट की डोरी खोलें ऐसी तेज बारिश में भी पेटीकोट अपने आप उतर नहीं सकती थी।

इसलिए जानबुझकर मम्मी ने अपनी पेटीकोट की डोरी खोलकर पेटीकोट उतार दी' इसका मतलब यही था कि मम्मी भी कुछ चाह रही है। कहीं ऐसा तों नहीं कि मम्मी भी इस मौके का फायदा उठाना चाहती है। जो भी हो उसमें तो मेरा ही फायदा है। यही सब बातें कशमकश राहुल के मन में चल रही थी।

मजा दोनों को आ रहा था,खड़े लंड का युं मस्त मस्त भरावदार गांड में फसने का सुख चुदाई के सुख से कम नहीं था। अलका तीन सीढ़ियां ही उतरी थी और वहीं पर ठीठक गई थी। अपने बेटे की जांघों का स्पर्श अपनी जाँघो पर होते ही हल्का को समझते देर नहीं लगा की उसका बेटा भी पूरी तरह से नंगा है। अपने बेटे के लंड की मजबूती का एहसास उसे अपनी गांड की दरारो के बीच बराबर महसूस हो रहा था। बादलों की गड़गड़ाहट अपने पूरे शबाब में थी बारिश होगा जोर कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था कुल मिलाकर माहौल एकदम गरमा चुका था। बारिश की ठंडी ठंडी हवाओं के साथ पानी की बौछार मौसम में कामुकता का असर फैआ रही थी। अलका कि साँसे भारी हो चली थी रह-रहकर उसके मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ रही थी। लेकिन बारिश और हवा का शोर इतना ज्यादा था कि अपनी मां की गरम सिसकारी इतनी नजदीक होते हुए भी राहुल सुन नहीं पा रहा था। तभी अलका अपने बेटे से बोली।

कसकर मुझे पकड़े रहना बेटा क्योंकि छत का पानी सीढ़ीयो से भी बह रहा है। और हम दोनों भीगे हुए हैं इसलिए पैर फिसलने का डर ज्यादा है इसलिए निसंकोच मुझे पीछे से कस के पकड़े रहना।

( अलका का इरादा कुछ और था बस वह पेेर फीसलने का बहाना बना रही थी। आज अलका भी अपने बेटे के साथ हद से गुजर जाना चाहती थी। और राहुल भी अपनी मां के कहने के साथ ही पीछे से अपने दोनों हाथ को कमर के ऊपर लपेटे हुए कस के पकड़ लिया और इस बार कस के पकड़ते ही उसने अपनी कमर का दबाव अपनी मां की गांड पर बढ़ा दिया, जिससे उसके लंड का सुपाड़ा सीधे उसकी गांड की भूरे रंग के छेंद पर दस्तक देने लगा। उस भूरे रंग के छेद पर सुपाड़े की रगड़ का गरम एहसास होते ही अलका के बदन में सुरसुरी सी फैल़ गई एक बारगी उसका बदन कांप सा गया। अलका के बदन में इतनी ज्यादा उत्तेजना भर चुकी थी कि उसके होठों से लब्ज भी कपकपाते हुए निकल रहे थे। वह कांपते स्वर में बोली।

बबबबब....बेटा ... कस के पकड़ा है ना।

हहहह...हां मम्मी राहुल की भी हालत ठीक उसकी मां की तरह ही थी उसके बदन में भी उत्तेजना का संचार तीव्र गति से हो रहा था खास करके उसके तगड़े लंड में जो की अपनी ही मां की गांड की दरार में उस भूरे रंग के छेद पर टिका हुआ था जहां पर अपने बेटे के लंड का स्पर्श पाकर अलका पूरी तरह से गनगना गई थी। अलका की बुर से मदन रस रीस नहीं बल्कि टपक रहा था। अलका पूरी तरह से कामोत्तेजना में सराबोर हो चुकी थी। उसकी आंखों में नशा सा चढ़ने लगा था। बरसात की भी आवाज किसी रोमांटिक धुन की तरह लग रही थी। अलका अपने बेटे का जवाब सुनकर अपना पैर सीढ़ियों पर उतारने के लिए बढ़ाई अब तक राहुल का लंड अलका की गांड में फंसा हुआ था। लेकिन जैसे ही अलका ने अपने पैर को अगली सीढी पर उतारी और उसी के साथ राहुल अपनी मां को पीछे से बाहों में जकड़े हुए जैसे ही अपनी मां के साथ साथ पैर को अगली सीढ़ी पर उतारा उसका लंड गांड की गहरी दरार से सरक कर गांड की ऊपरी सतह से सट गई। राहुल अपनी मां को पीछे से कस के पकड़े हुए था उसकी मां भी बार बार करते पकड़े रहने की हिदायत दे रही थी। और मन ही मन अपने बेटे के भोलेपन को कोस रही थी क्योंकि इतने में तो, कोई भी होता अपने लंड को थोड़ा सा हाथ लगाकर उसकी बुर में डाल दिया हो तो उसके लिए राहुल भोला का भोला ही रहेगा।

अलका अपने बेटे को भोला समझ रही थी लेकिन उसे क्या मालूम था कि वह इससे पहले दो सिखरो की चढ़ाई कर चुका था। ऐसे ही ऐसे एक दूसरे से चिपके हुए दो सीढ़ियां और उतर गए। अलका की तड़प बढ़ती जा रही थी इतनी नजदीक लंड के होते हुए भी उसकी बुर अभी तक प्यासी थी और उसकी प्यास अलका से बर्दाश्त नहीं हो रही थी। उसे लगने लगा था कि उसे ही कुछ करना है जैसे जैसे नीचे उतारती जा रही थी अंधेरा और भी गहराता जा रहा था और बारिश तो ऐसे बरस रही थी कि जैसे आज पूरे शहर को निगल ही जाएगी। लेकिन यह तूफानी बारिश दोनों को बड़ी ही रोमांटिक लग रही थी। तभी अलका ने सीढ़ी पर रुक कर अपने दोनों हाथ को पीछे ले जाकर राहुल की कमर को पकड़ते हुए थोड़ा सा पीछे की तरफ करते हुए बोली।

बेटा थोड़ा ठीक से पकड़ नहीं तो मेरा पैर फिसल जाएगा( पर इतना कहते हैं कि साथ ही वापस अपने हाथों को हटा ली,)

ठीक है मम्मी (इतना कहने के साथ ही राहुल का लंड अपने आप एडजस्ट होकर वापस गांड की गहरी दरार में फस गया। और अलका यही करने के लिए बहाना बनाई थी। अलका अपनी बाहों में में पूरी तरह से कामयाब हो चुकी थी क्योंकि इस बार उसका लंड उसकी गांड के भुरे छेंद से नीचे की तरफ उसकी बुर की गुलाबी छेद के मुहाने पर जाकर सट गया। बुर के गुलाबी छेद पर अपने बेटे के लंड के सुपाड़े का स्पर्श होते हैं अलका जल बिन मछली की तरह तड़प उठी, उसकी हालत खराब होने लगी वह सोचने लगी थी की वह क्या करें कि उसके बेटे का मोटा लंड उसकी बुर में समा जाए और दो औरतों की चुदाई कर चुका राहुल भी अच्छी तरह से समझ चुका था कि उसके लंड का सुपाड़ा उसकी मम्मी के कौन से अंग पर जाकर टिक गया है। राहुल का लंड तो तप ही रहा था। लेकिन उसकी मां की बुरउसके लंड से कहीं ज्यादा गरम होकर तप रही थी। अपनी मां की बुर की तपन का एहसास लंड पर होते हैं राहुल को लगने लगा की कहीं उसका लंड पिघल ना जाए। क्योंकि बुर का स्पर्श होते ही उसके लंड का कड़कपन एक दम से बढ़ चुका था और उसमे से मीठा मीठा दर्द का एहसास हो रहा था। अलका पुरी तरह से गनगना चुकी थी। क्योंकि आज बरसों के बाद उस की नंगी बुर पर नंगे लंड का स्पर्शा हो रहा था।

बरसों से सूखी हुई उसकी जिंदगी में आज इस बारिश में हरियाली का एहसास जगह आया था। उत्तेजना के मारे अलका के रोंगटे खड़े हो गए थे। अपने बेटे के लंड के मोटे सुपाड़े को वह अपनी बुर के मुहाने पर अच्छी तरह से महसूस कर रही थी वह समझ गई थी कि उसकी बुर के छेद से उसके बेटे के लंड का सुपाड़ा थोड़ा बड़ा था।

जो की बुर के मुहाने पर एकदम चिपका हुआ था। अलका अपनी गर्म सिस्कारियों को दबाने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन उसकी हर कोशिश उत्तेजना के आगे नाकाम सी हो रही थी। ना चाहते हुए भी उसके मुंह से कंपन भरी आवाज निकल रही थी।

बबबबब.....बेटा ....पपपपपप...पकड़ा है ना ठीक से।

हंहंहंहंहं....हां .... मम्मी ( राहुल भी उत्तेजना के कारण हकलाते हुए बोला)

अब मैं सीढ़ियां उतरने वाली हूं मुझे ठीक से पकड़े रहना। ( इतना कहने के साथ ही एक बहाने से वह खुद ही अपनी गांड को हल्के से पीछे ले जाकर गोल-गोल घुमाते हुए अपने आप को सीढ़िया उतरने के लिए तैयार करने लगी। राहुल भी गरम सिसकारी लेते हुए हामी भर दिया। राहुल की भी हालत खराब होते जा रही थी। वह मन ही मन में यह सोच रहा था कि इतनी उत्तेजित अवस्था में तो वह नीलू और विनीत की भाभी के साथ भी नहीं था जितना उत्तेजित वह इस समय अपनी मां के साथ था। रिमझिम गिरती तूफानी बारिश और बादलों की गड़गड़ाहट एक अजीब सा समा बांधे हुए थी। अलका जानती थी कि इस बार संभालकर सीढ़ियां उतरना है वरना फिर से इधर उधर होने से राहुल का लंड अपनी सही जगह से छटककर कहीं और सट जाएगा। इसलिए वह वापस अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के कमर को कस के पकड़ते हुए अपनी गांड से सटाते हुए बोली बेटा इधर फीसल़ने का डर कुछ ज्यादा है पूरी सीढ़ियों पर पानी ही पानी है।

इसलिए तु मुझे कस के पकड़े रहना मैं नीचे उतर रही हूं

( इतना कहने के साथ ही अलका अपने पैर को नीचे सीढ़ियों पर संभालकर रखने लगे और राहुल को बराबर अपने बदन से चिपकाए रही। इस तरह से राहुल की कमर पकड़े हुए वह आधी सीढ़ियो तक आ गई। इस बीच राहुल का लंड उसकी मां की बुर पर बराबर जमा रहा। अपनी बुर पर गरम छुपाने की रगड़ पाकर अलका पानी पानी हुए जा रही थी उसकी बुर से मदन रस टपक रहा था जो कि राहुल के लंड के सुपाड़े से होता हुआ नीचे सीढ़ियों पर चु रहा था। अलका के तो बर्दाश्त के बाहर था ही लेकिन राहुल से तो बिल्कुल भी यह तड़प सही नहीं जा रही थी। दो औरतों की चुदाई कर चुका राहुल या अच्छी तरह से जानता था कि, उसका लंड उसके मां की उस अंग से सटा हुआ था जहां पर हल्का सा धक्का लगाने पर लंड का सुपाड़ा सीधे बुर के अंदर जा सकता था लेकिन राहुल अभी भी शर्म और रीश्तो के बंधन में बंधा हुआ था। राहुल को अभी भी शर्म की महसूस हो रही थी यह तो अंधेरा था इस वजह से इतना आगे बढ़ चुका था। वह अपने मन मे बोल भी रहा था की इस समय अगर इसकी मां की जगह कोई और औरत होती तो वह कब से अपना समूचा लंड बुर में पेल दिया होता। लेकिन राहुल की मां इसके विपरीत

सोच रही थी, उसे राहुल नादान लग रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि किसी को भी अगर इतनी छूट दी जाए तो इतने से ही सब कुछ कर गुजर गया होता। लेकिन राहुल इतना नादान और भोला है कि जन्नत के द्वार पर बस लंड की टीकाए खड़ा है।

दोनों से बर्दाश्त नहीं हो रहा था दोनों एक दूसरे की पहल में लगे हुए थे। लेकीन ईस समय जो हो रहा था। उससे भी कम आनन्द प्राप्त नही हो रहा था। ईस तरह से भी दोनो संभोग की पराकाष्ठा का अनुभव कर रहे थे।

दोनों की सांसे लगभग उखड़ने लगी थी। अलका तो यह सोच रही थी कि वह क्या करें कि उसके बेटे का लंड उसकी बुर में समा जाए। सीढ़ियां उतरते समय राहुल का लँड उसकी मां की गांड में गदर मचाए हुए था, राहुल का लंड अलका की गांड की दरार के बीचोबीच कभी बुर पर तो कभी भुरे रंग के छेंद पर रगड़ खा रहा था।

अलका तो मदहोश हुए जा रही थी उसकी दोनों टांगे कांप रही थी। राहुल की भी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी। वह बराबर अपनी मां को कमर से पकड़ कर अपने बदन से चिपकाए हुए था। इसी तरह से पकड़े हुए दोनों सीढ़ियां लगभग उतर चुके थे , राहुल अपनी मां को अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था और अलका भी अपने दोनों हाथों से अपने बेटे के कमर को पकड़ कर अपने बदन से चिपकाए हुए थी। मां बेटे दोनों संभोग का सुख प्राप्त करने के लिए तड़प रहे थे।

लेकिन अब राहुल से बर्दाश्त नहीं हो रहा था क्योंकि कई दिन बीत चुके थे उसने बुर में लंड नहीं डाला था। और इस समय दोनों के बीच इस तरह के हालात पैदा हुए थे की ऐसे में तो चुदाई ही ईसकी मंजिल बनती थी। राहुल अजीब सी परिस्थिति में फंसा हुआ था। उसके अंदर मनो मंथन सा चल रहा था। वह अपनी ओर।अपनी मम्मी के हालात के बारे में गौर करने लगा क्योंकि यह सारी परिस्थिति उसकी मां ने ही पैदा की थी। उसका इस तरह से उसके सामने साड़ी उतार कर बारिश में नहाना अपने अंगो का प्रदर्शन करना और जान बूझकर अपनी पेटीकोट उतार फेकना , और तो और सीढ़ियां उतरते समय अपने बदन से चिपका लेना। यह सब यही दर्शाता था कि खुद उसकी मां भी वही चाहती थी जो कि राहुल खुद जाता था यह सब सोचकर राहुल का दिमाग और खराब होने लगा।. अब उसी से यह कामुकता की हद सही नहीं जा रही थी तीन-चार सीढ़ीया ही बाकी रह जा रही थी। इस समय जो बातें राहुल के मन में चल रही थी वही बातें अलका के मन में भी चल रही थी अलका भी यही चाहती थी कि कैसे भी करके उसके बेटे का लंड उसकी बुर में प्रवेश कर जाए। उसको भी यही चिंता सताए जा रहे थे की बस तीन चार सीढ़ियां ही रह गई थी। जो होना है ईसी बीच हो जाता तो अच्छा था। एक तो पहले से ही राहुल के लंड ने उसकी बुर को पानी पानी कर दिया था। कामातूर होकर अलका ने ज्यों ही अपने कदम को नीचे सीढ़ियों की तरफ बढ़ाई और राहुल था की इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था इसलिए वह अपनी मां को पीछे से अपनी बाहों में भरे हुए हल्के से अपनी कमर को नीचे की तरफ झुकाते हुए वह भी अपनी मां के साथ साथ नीचे कदम बढ़ाया ही था कि उसका खड़ा लंड उसकी मां की बुर के सही पोजीशन में आ गया और जैसे ही राहुल के कदम सीढ़ी पर पड़े तुरंत उसके लंड का सुपाड़ा उसकी मां की पनियाई बुर मे करीब आधा समा गया' और जैसे ही सुपाड़े का करीब आधा ही भाग बुर में समाया अलका का समुचा बदन बुरी तरह से गंनगना गया। उसकी आंखों से चांद तारे नजर आने लगे। एक पल को तो उसे समझ में ही नहीं आया कि क्या हुआ है आज बरसों के बाद उसकी बुर में लँड के सुपाड़े का सिर्फ आधा ही भाग गया था। और वह सुपाड़े को अपनी बुर में महसूस करते ही मदहोश होने लगी उसकी आंखों में खुमारी सी छाने लगी। और एकाएक उसके मुंह से आह निकल गई, अपनी मां की आह सुनकर राहुल से रहा नहीं गया और वह अपनी मां से पूछ बैठा।

क्या हुआ मम्मी।

( अब अलका अपने बेटे के इस सवाल का क्या जवाब देती, जबकि राहुल भी अच्छी तरह से जानता था कि उसका लंड किसमे घुसा है फिर भी वो अनजान बनते हुए अपनी मां से सवाल पूछ रहा था। तो अलका भी तो अभी इतनी बेशर्म नहीं हुई थी कि अपने बेटे को साफ साफ कह दें कि तेरा लंड मेरी बुर में घुस गया है। जब राहुल सब कुछ जानते हुए भी अनजान बना हुआ था तो उसे भी अनजान बने रहने में क्या हर्ज था और वैसे भी अनजान बने रहने में ही ज्यादा मजा आ रहा था। इसलिए वह कांपते स्वर में बोली।)

कककककक.... कुछ नहीं बेटा .....पाव दर्द करने लगे हैं।

( अपनी मां की बात सुनकर राहुल अनजान बनता हुआ बोला।)

आराम से चलो मम्मी कोई जल्दबाजी नहीं है वैसे भी अंधेरा इतना है कि कुछ देखा नहीं जा रहा है।

( राहुल तो इसी इंतजार में था कि कब उसकी मम्मी अगलीे सीढ़ी उतरे और वह अपना आधा लंड उसकी बुर में डाल सके। और तभी अलका अपने आप को संभालते हुए वह भी यही सोचते हुए की शायद अगले सीढ़ी उतरते समय उसके बेटे का पूरा सुपाड़ा उसकी बुरमें समा जाए। और यही सोचते हैं उसने सीढ़ी उतरने के लिए अपना कदम नीचे बढ़ाई और राहुल भी मौका देखते हुए अपनी मां को यूंही बाहों में दबोचे हुए अपनी कमर को थोड़ा और नीचे ले जाकर हल्का सा धक्का लगाया ही था कि, अलका अपने आप को संभाल नहीं पाई उत्तेजना के कारण उसके पांव कांपने लगे और वह लड़खड़ाकर बाकी की बची दो सीढ़ियां उतर गई और राहुल के लंड का सुपाड़ा जितना घुसा था वह भी बाहर आ गया। दोनों गिरते-गिरते बचे थे राहुल का लंड डालने का मौका जा चुका था और अल्का का भी लंड डलवाने का मौका हाथ से निकल चुका था।

अलका अपनी किस्मत को कोस रही थी कि अगर ऐन मौके पर उसका पेर ना फिसला होता तो अब तक उसके बेटे का लंड उसकी बुर में समा गया होता और राहुल भी खड़े लंड पर ठोकर लगने से दुखी नजर आ रहा था। दोनों सीढ़ियां उतर चुके थे और राहुल अपनी मां से पूछा।

क्या हुआ मम्मी आप ऐसे लड़खड़ा क्यों गई?

( कुछ देर पहले लंड के एहसास से वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी उसके सांसे अभी भी तेज चल रही थी। उत्तेजना उसके सर पर सवार थी यह नाकामी उससे बर्दाश्त नहीं हो रही थी। लेकिन फिर भी अपने आप को संभालते हुए वह बोली।)

कुछ नहीं बेटा एकाएक मुझे कुछ चुभता हुआ महसूस हुआ और मुझे दर्द होने लगा इसलिए मैं अपने आप को संभाल नहीं पाए और गिरते गिरते बची और तुझे तो चोट नहीं लगी ना बेटा।

नहीं मम्मी मुझे चोट नहीं लगी है लेकिन यह बताओ क्या चुभ रहा था और किस जगह पर। ( अलका यह अच्छी तरह से जानतीे थी कि राहुल भोला बनने की कोशिश कर रहा था वह सब कुछ जानता था, वरना यूं इतनी देर से उसका लंड खड़ा नहीं रहता। वैसे भी इस समय पहले वाली अलका नहीं थी यह अलका बदल चुकी थी। शर्मीले संस्कारों और मर्यादा में रहने वाली अलका इस समय कहीं खो चुकी थी उसकी जगह वासना मई अलका ने ले ली थी। जिसके सर पर इस समय वासना सवार थी। इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी कि रिश्ते नाते सब कुछ भूल चुकी थी और अपने बेटे के सवाल का जवाब देते हुए बड़े ही कामुक अंदाज में बोली।)

अब क्या बताऊं बेटा तुझे की ं क्या चुभ रहा है और कौन सी जगह चुभ रहा है। इतने अंधेरे में तो तुझे दिखाई भी नहीं देगा। ( वैसे भी शीढ़ी वाली गैलरी में अंधेरा कुछ ज्यादा ही था बारिश अभी भी तेज बरस रही थी बादलों की गड़गड़ाहट लगातार सुनाई दे रही थी। अलका हाथ में आए मौके को गंवाते हुए देखकर अंदर ही अंदर झुंझलाहट महसूस कर रही थी। उसके हाथ से एक सुनहरा मौका निकल चुका था। वह फिर से कोई रास्ता देख रहे थे कि फिर से कोई काम बन जाए। इसलिए और राहुल से बोली।)

चलो कोई बात नहीं बेटा हम दोनों काफी समय से भीग रहे हैं, अब हम दोनों को बाथरूम में चलकर अपने गीले कप्प......( इतना कहते ही अलका थोड़ा रुक कर बोली।)

बेटा जब तु मेरे बदन से चिपका हुआ था तो मुझे ऐसा एहसास हो रहा था कि बेटा तू बिल्कुल नंगा था।

( अलका अब खुलेपन से बोलना शुरू कर दी थी अपनी मां के इस बात पर राहुल हड़बड़ाते हुए बोला।)

वो...वो...मम्मी ....वो टॉवल.... ऊपर तेज हवा चल रही थी तो छत पर ही छूट गई और अंधेरे में कहां गिरी दिखाई नहीं दी..... लेकिन मम्मी मुझे भी ऐसा लग रहा है कि नीचे से आप पूरी तरह से नंगी है। आप तो पेटीकोट पहनी हुई थी....तो.....

अरे हां उपर कितनी तेज बारिश गिर रही थी वैसे भी मुझसे तो मेरी साड़ी भी नहीं संभाले जा रही थी। और शायद तेज बारिश की वजह से मेरी पेटीकोट सरक कर कब नीचे गिर गई मुझे पता ही नहीं चला। वैसे भी तू तो देख ही रहा है कि अंधेरा कितना घना है हम दोनों एक दूसरे को भी ठीक से देख नहीं पा रहे है. तो वह क्या खाक दिखाई देती। इसलिए मैं भी बिना पेटीकोट पहने ही ईधर तक आ गई। ( तभी धीमी आवाज में बोली।) तुझे कुछ दिख रहा है क्या?

नहीं मम्मी कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है अगर दिखाई देता तो सीढ़ियां झट से ना उतर गया होता, यू आपसे चिपक कर क्यों उतरता ।

( दोनों जानते थे कि दोनों एक दूसरे को झूठ बोल रहे थे दोनों की हालत एक दूसरे से छिपी नहीं थी। दोनों इस समय सीढ़ियों के नीचे नंगे ही खड़े थे। अलका कमर से नीचे पूरी तरह से नंगी थी और राहुल तो संपूर्ण नग्नावस्था में अंधेरे में खड़ा था तभी अलका बोली।

चल कोई बात नहीं बाथरूम में चलकर कपड़े बदल लेते हैं ( इतना कहते ही अलका अंधेरे में अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे का हाथ पकड़ना चाहि कि तभी ) ज्यादा देर तक अगर ऐसे ही भीगे खड़े रहें तो तबीयत खरा......( इतना तो ऐसे ही हो आश्चर्य के साथ खामोश हो गई और हड़ बड़ाते हुए बोली....)

यययययय......ये.....ककककक.....क्कया....है।

( अलका ने अंधेरे में अपने बेटे का हाथ पकड़ने के लिए अपना हाथ बढ़ाई थी लेकिन उसके हाथ में उसके बेटे का टनटनाया हुआ खड़ा लंड आ गया और एकाएक हाथ में आया मोटे लंड की वजह से अलका एकदम से हड़बड़ा गई थी। अलका को अपने बेटे कां लंड हथेली में कुछ ज्यादा ही मोटा लग रहा था। अल्का पुरी तरह से गनगना गई थी। जब उसे यह एहसास हुआ कि उसके हाथ में राहुल के हाथ कीे जगह क्या आ गया है तो वह एकदम से रोमांचित हो गई और उत्तेजना के मारे उसकी बुर फूलने पीचकने लगी। राहुल जी उत्तेजना के समंदर में गोते लगाने लगा, अपनी मम्मी के हाथ में अपना लंड आते ही राहुल भी पुरी तरह से गनगना गया था।

अलका से अब बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था वह एकदम से चुदवासी हो चुकी थी। इसलिए वह तुरंत उसका लंड छोड़कर राहुल का हाथ थाम ली और बाथरुम की तरफ जाते हुए बोली।

चल बाथरूम में चलकर अपना बदन पहुंचकर कपड़े बदल लेते हैं वरना सर्दी लग जाएगी।

अंधेरा इतना था तुमसे कोई दिखाई नहीं दे रहा था फिर भी रह-रहकर बिजली चमकने की वजह से खिड़की से उस की रोशनी अंदर आ रही थी। जिससे बाथरूम कहां है यह थोड़ा-थोड़ा दिखाई दे रहा था। थोड़ी ही देर में दोनों बाथरुम के अंदर थे, यहां भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और बाथरूम की खिड़की की वजह से आती रोशनी में हल्का-हल्का झलक रहा था। तभी अचानक

राहुल के कानों में वही उस दिन वाली बाथरूम में से आ रही है सीटी की आवाज सुनाई देने लगी राहुल का माथा ठनक गया , उसे समझते देर नहीं लगेगी उसकी मम्मी के सामने ही भले ही नहीं दिखाई दे रहा है फिर भी पास में बैठ कर पेशाब कर रही थी। राहुल एकदम मदहोश होने लगा है उससे रहा नहीं जा रहा था उसके लंड का कड़क पन बढ़ता ही जा रहा था। वह सब कुछ जानते हुए भी अपनी मां से बोला।

क्या हुआ मम्मी क्या कर रही हो?

अलका जानती थी कि पेशाब करते वक़्त उसकी बुर से

सीटी की आवाज बड़े जोरों से आ रहे थे और यह आवाज राहुल भी साफ साफ सुन रहा था और राहुल जानता भी था कि वह क्या कर रही है लेकिन फिर भी वो जानबूझकर पूछ रहा था इसलिए अलका भी मादकता लिए चुदवासी आवाज में बोली।

क्या बेटा यह भी कोई पूछने वाली बात है बड़े जोरों की आई थी इसलिए यहीं बैठ कर पेशाब कर रही हूं अगर तुझे भी लगी हो तो ले कर ले इस अंधेरे में कहां कुछ दिखने वाला है।

अपनी मां की सी बातें सुनकर राहुल और ज्यादा उत्तेजित हो गया। उससे रहा नहीं गया और वह भी वही खड़े होकर पेशाब करने लगा कि तभी लाइट आ गई।

 
prakash wrote: mast likh rahe ho, par ghar ka maal bahar mat dena

matlab alka ko rahul ke alawa kisi aur se mat chudwana to maja bana rahega.
 
लाइट आ चुकी थी बाथरूम का भी बल्ब चमकने लगा बाथरूम में रोशनी ही रोशनी हो गई। राहुल की नजर अपनी मां पर गई तो उसका दिल धक्क से रह गया।

अलका भी अपने बेटे की तरफ देखी तो चौक गई। दोनों हतप्रत हो गए थे। गजब का नजारा बना हुआ था अलका बैठ कर पेशाब कर रही थी और राहुल साफ-साफ देख पा रहा था कि उसकी मां की पेशाब की धार सामने दीवार से टकरा रही थी, और उसकी बुरसे लगातार मधुर मई संगीत की धुन बज रही थी जिसे सुन सुनकर राहुल कामातूर हुए जा रहा था। बल्ब के जलते ही अलका की नजर सीधे अपने बेटे पर गई थी जो कि उसके ही नजदीक खड़ा होकर पेशाब कर रहा था उसका टनटनाया हुआ लंड उसकी ऊंगलियों मे फंसा हुआ था। और उसमें से भी पेशाब की तेज धार फूट रही थी जोकि सामने की दीवार से टकरा रहीे थी। दोनों की नजर एक दूसरे की पेशाब की तेज धार पर ही टिकी हुई थी दोनों कुछ समय के लिए सब कुछ भूल चुके थे।

कुछ देर पहले अंधेरे का फायदा उठाते हुए दोनों ने जो

वासनामई क्रिया का प्रारंभ किया था वह इससे में उजाले में और ज्यादा भड़क चुका था। दोनों एक दूसरे के अंगों को देखे जा रहे थे हालांकि राहुल को उसकी मां की बुर नजर नहीं आ रही थी लेकिन उसमें से निकलीती हुई पेशाब की तेज धार साफ साफ नजर आ रही थी। अलका का मुंह खुला का खुला रह गया था उसकी मदहोश आंखें अपने ही बेटे के मोटे लंड पर टिकी हुई थी। अंधेरे में जिसे देखकर मचल उठी थी इस समय उजाले में उस के दर्शन करके पागल सी होने लगी थी उसके सर पर वासना का भूत सवार हो गया था उससे रहा नहीं जा रहा था वह मन में ठान ली थी की, आज चाहे जो हो जाए अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में पूरा का पूरा डलवा कर उससे चुदवा कर ही रहेगी।

पेशाब करते हो दोनों की नजरें आपस में टकराई तो दोनों शर्म से पानी पानी हो गए दोनों ने अपनी नजरों को शर्म के मारे दूसरी तरफ फेर लिए। अलका मन में तो चुदवाने की ठान ली थी लेकिन बल्ब के उजाले में अपने बेटे से नजर मिलते ही उसकी आंखों के सामने पेशाब करते हुए शर्म से पानी-पानी हुए जा रही थी। उसे इस तरह से अपने बेटे के सामने बैठकर मुंतने में शर्म महसूस होने लगी, लेकिन कुछ देर पहले अंधेरे में आगे चलकर उसी में जानबूझकर अंधेरे का फायदा उठाते हुए अपने बेटे के सामने पेशाब करने बैठी थी। ताकि बुर से आ रही सीटी की आवाज को सुनकर राहुल एकदम से चुदवासा हो जाए और उसे चोदने के लिए मजबूर हो जाए लेकिन इस समय अलका के चेहरे पर शर्मो हया की लाली छाई हुई थी। राहुल अपनी नजरों को शर्म के मारे दूसरी तरफ फेरकर पेशाब तो कर रहा था लेकिन अपने आप को अपनी मां को नंगी होकर जो बैठकर पेशाब करते हुए देखने का लालच रोक नहीं पा रहा था इसलिए बार-बार तिरछी नजरों से अपनी मां की भरावदार गांड ओौर बुर से निकल रही पेशाब की तेज धाार को देख ले रहा था। दोनों इस समय एकदम चुदवासे हो चुके थे। पर मर्यादा की और शर्म की पतली चादर को जो कि तार तार हो चुकी थी फिर भी हटा नहीं पा रहे थे।

अलका दूसरी तरफ मुंह फेरे पेशाब करते हुए सोचने लगीे की, यह क्या कर रही है, बरसों से जो प्यास बनने लिए प्यासी तड़प रही थी और आज उस प्यास को बुझाने का समय आया तो शर्म के मारे नजर फेर ले रही है। वह मन ही मन में अपने आप से ही बोले जा रही थी। अगर आज अपने बदन की प्यास नही बुझा पाई तो यह प्यास हमेशा के लिए उसके सीने में दफन हो जाएगा और औरत जिस सुख की हकदार रहती है उस सुख से वह हमेशा के लिए वंचित रह जाएगी। अलका मन ही मन में अपने आप को समझा रही थी। यह सुनहरा मौका आज हाथ से जाने मत देना( उसके अंदर से आवाज आ रही थी वह भी सोचने लगी कि आखिरकार इसमें हर्ज ही क्या है। राहुल उसका सगा बेटा है और वह भी चोदने के लिए तैयार है तभी तो उसके सामने पूरी तरह से नंगा खड़ा था। वह मन में सोच रही थी कि सब कुछ माहौल के हिसाब से बना हुआ है मैं भी तैयार हूं और मेरा बेटा भी तैयार है। और इसमे किसी के सामने बेईज्जत होने का डर भी नहीं रहेगा।

यह सब सोच सोच कर अलका की बुर को फुलने पिचकने लगी दोनों पेशाब कर चुके थे। अलका ने अपनी नजरों को अपने बेटे की तरफ घूमाई , वह पहले से ही अपनी मां को एकटक देख रहा था। अलका की नजरें फिर से अपने बेटे की नजरों से मिली लेकिन इंतजार अलका की आंखों में शर्मिंदगी का एहसास रत्ती भर भी नहीं था। वह अपने आप को वासना के रास्ते पर चलने के लिए पूरी तरह से तैयार कर चुकी थी।

अलका की नजर अपने बेटे के चेहरे से होती हुई नीचे की तरफ आने लगी राहुल भी अपनी मां को वासना की नजरों से हो रहा था।

धीरे-धीरे नीचे की तरफ आती हुई नजरें राहुल के लंड पर टिक गई। अलका एकटक अपने बेटे के खड़े ल** को देख रहे थे और राहुल इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुका था की लं के ऊपर उसकी नसें उभर चुकी थी जिसे देखकर अलका की बुर से मदन रस की बूंद नीचे टपक पड़ी। अलका यह सोचकर और अत्यधिक उत्तेजित हुए जा रही थी थी जब यह ऊभरी हुई नसों वाला लंड ऊफ्फ्फ...... उसकी कसी हुई बुर में जाएगा तो कितना रगड़ता हुआ जाएगा, अलका उसकी कल्पना करके ही चरम सुख का अनुभव कर रही थी।

अपने बेटे का लंड देखकर अब उससे सब्र नहीं हो रहा था, अलका की हालत उस समय और ज्यादा खराब हो जा रही थी जब राहुल जानबूझकर अपनी मां को उकसाने के लिए अपने हाथों से लंड को पकड़ कर ऊपर नीचे करते हुए हिला रहा था, क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके लंड को ही देख रही थी और इस हरकत को देखते ही उसकी मां एकदम से चुदवासी हो गई उससे रहा नहीं गया और उसने अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर सीधे अपने बेटे के खड़े लंड को पकड़ कर अपनी मुट्ठी में भींच ली,, मुठ्ठी में भींचते ही लंड की गर्माहट से अलका की आह निकल गई। राहुल भी अपने लंड को अपनी मां की हथेली में देखकर उत्तेजना के साथ मदहोश होने लगा। अलका का तो गला ही सूखने लगा था उससे रहा नहीं जा रहा था बरसों के बाद उसकी तमन्ना उसके बदन की दबी हुई प्यास बुझने के आसार नजर आ रहे थे। अलका के लिए इस समय उसका बेटा मीठे पानी का कुआं था और वह खुद बरसों से प्यासीे थी। और अपनी प्यास बुझाने के लिए प्यासे को कुएं के पास जाना ही पड़ता है।

राहुल अपने खड़े लंड को अपनी मां की नरम नरम गरम हथेलियों की आगोश में पाकर गनगना गया था। उसका बदन अजीब से सुख की अनुभूति करते हुए कसमसा रहा था। अलका तो मुंह खोले आश्चर्य के साथ अपने बेटे का लंड पकड़े लंड के गोल सुपाड़े को ही घूरे जा रही थी। दोनों की सांसे तीव्र गति से चल रही थी। बाहर बरसात अभी भी जारी थी बादलों की गड़गड़ाहट बिजली की चमक रह रह कर अपने होने का अंदेशा दे जा रही थी। अलका अंदर ही अंदर बरसात को धन्यवाद किए जा रही थी क्योंकि इस समय जो भी हो रहा था वह इस तूफानी बारिश का ही नतीजा था वरना अब तक तो ना जाने कबसे अपनी बूर को हथेली से रगड़ते हुए सो गई होती। अलका का गला उत्तेजना के मारे इतना ज्यादा सूख चुका था गले से थूक निकलना भी मुश्किल हुए जा रहा था। राहुल उसी तरह से खड़ा था अलका भी पेशाब करने के लिए बेठी तो बेठी ही रह गई। काफी देर से दोनों के बीच वार्तालाप हो नहीं पा रही थी बस दोनों कामुकता के आकर्षण में बंध कर अपना आपा खो बैठे थे। अलका ही खामोशी को तोड़ते हुए बोली।

बाप रे इतना तगड़ा लंड ( अपनी मां के मुंह से ऐसी खुली हुई बातें सुनकर वह अपनी मां को देखने लगा' अलका को पता था कि अब उसे खुलना ही पड़ेगा , शर्म का पर्दा त्याग कर बेशर्म बनना पड़ेगा तभी वह उस परम सुख को भोग सकती है जिसकी कल्पना में रात दिन लगी हुई थी। आज वहां बेशर्म बनकर चुदाई के सारे सुखों को भोग लेना चाहती थी इसलिए वह अपने बेटे के लंड को मुट्ठी में भरकर धीरे धीरे मुट्ठीयाते हुए बोली।)

सच राहुल तेरा यह हथियार तो बहुत ज्यादा मोटा लंबा और तगड़ा है। ( इतना कहते हुए वह धीरे-धीरे अपने बेटे के लंड को हिला रही थी जिससे राहुल को परम आनंद की अनुभूति हो रही थी। लंड को हिलाते हुए अलका फिर बोली।)

बेटा तेरा लंड तो तेरे पापा से भी ज्यादा मोटा तगड़ा है।

तभी तो मुझे यह इतना ज्यादा चुभ रहा था। तुझे पता तो होगा ना कि कहां चुभ रहा था।( राहुल तो अपनी मां का यह रूप देख कर और उसके मुंह से इतनी गंदी गंदी बातें सुनकर आवाक सा रह गया था। आश्चर्य से अपना मुंह खोले अपनी मां की हरकतों को देख भी रहा था और उसका आनंद भी उठा रहा था। अपनी मां के चुभने वाले सवाल का जवाब दे भी तो कैसे दे' इतना तो वह अच्छी तरह जानता था कि उसका लंड उसकी मां के किस अंग पर चुभ रहा था। लेकिन यह बात अपने मुंह से कहे भी तो कैसे कहें इसलिए वह संकोच भाव से ना में सिर हिला दिया, और अपने बेटे का ना में सिर हिलता हुआ देखकर वह मुस्कुराते हुए बोली।)

बड़ा भोला है रे तू इतना भी नहीं जानता कि तेरा यह हथियार मेरे किस अंग पर चुभ रहा था। रुक मैं तुझे दिखाती हूं । ( अपनी मां के मुंह से दिखाने वाली बात सुनते ही उत्तेजना के मारे अलका के हाथ में ही राहुल का लंड ठुनकी मारने लगा। जिसका एहसास अलका को साफ तौर पर अपनी हथेली में हो रहा था। अलका ठुनकी लेते हुए लंड के कारण उत्तेजित हो रही थी और धीरे से खड़ी होते हुए बोली।)

रुक मैं तुझे अच्छी तरह से दिखाती हूं।( इतना कहते हुए अलका खड़ी हो गई उसके बदन पर अभी भी सिर्फ ब्लाउज ही थी। राहुल आंख फाड़े अपनी मां के नंगे बदन को ऊपर से नीचे तक देख रहा था। अलका खड़ी हो चुकी थी लेकिन अभी भी उसके हाथ में उसके बेटे का लंड था । अलका अपने बेटे को तड़पाते हो एक बार उसकी राय जानने के लिए उससे बोली।)

देखना चाहता है कहां चुभ रहा था तेरा ये ( अपनी हथेली में लंड को खींचते हुए )हथियार।

( अपनी मां की गंदी बातें सुनकर राहुल का मन मस्तिष्क मस्ती से हिलोरे ले रहा था अपनी मां की बातों को सुनकर उसको मजा आने लगा था। वह भी हामी भरते हुए सिर हिला दिया। अलका तो तड़प रही थी अपने बेटे को अपना वह बेशक़ीमती अंग दिखाने के लिए ' जिसकी तपन में तपकर वह तड़प रही थी।

अलका खड़ी थी राहुल अपनी मां को ही देख कर जा रहा था वह देखना चाहता था कि उसकी मां उसे क्या दिखाती है जबकी वह जानता था, कि उसकी मां उसे अपनी बुर ही दिखाना चाहती है लेकिन कैसे दिखाएगी यह उसे देखना था। तभी अलका ने सामने दीवार से गुजर रही छोटी सी पाईप पर अपना पैर उठाकर रख दें और पैर उठाए हुए ही थोड़ा सा अपने बेटे की तरफ घूम गई, ऐसा करने पर अलका का पूरा बदन राहुल के सामने आ गया एक खुली किताब की तरह। उसकी बुर भी दिखाई दे रही थी। लेकिन शर्म के मारे राहुल की हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह अपनी मां की बुर को देख सके। हालांकि अपनी मां के इस हरकत कर उसकी बुर देखने की इच्छा एकदम प्रबल हो चुकी थी फिर भी शर्म की वजह से अपनी नजरें अपनी मां की बुर पर नहीं ले जा पा रहा था। वह थुक को गले में निगलते हुए अपनी नजरें इधर-उधर घुमा रहा था। अलका अपने बेटे की मनोदशा को भांप गई थी। अलका को लगने लगा था कि उसका बेटा शरमा रहा है। उसे यह नहीं पता था कि यही राहुल उसे ना जाने कितनी बार नंगी देख चुका है और उसके बारे में कल्पना कर कर के मुट्ठ मार चुका है।

फिर भी अलका यह समझती थी कि अगर आगे बढ़ना है तो राहुल के डर और शर्म को भी खत्म करना होगा इसलिए एक टांग उठाई हुए वह राहुल से बोली।

बेटा देख (उंगली से दिखाते हुए )इसी जगह पर तेरा यह हथियार चुभ रहा था।

अपनी मां की बात मानते हुए राहुल अपनी नजरों को बुक की तरफ घुमा दिया, राहुल की तो सांस ही अटक गई जब उसकी नजर उसकी मां की बुर पर पड़ी बुर एकदम चिकनी थी बस हल्के हल्के रोए ही नजर आ रहे थे ऐसा लग रहा था कि तीन चार दिन पहले ही क्रीम लगाकर साफ की है। राहुल देखा तो देखता ही रह गया

उत्तेजना के मारे बुर रोटी की तरह फूल गई थी। राहुल भारी सांसो के साथ अपनी मां की फुली हुई बुर को देख रहा था, उसकी मां भी बड़े अरमान से अपने बेटे को अपनी बुर के दर्शन करा रही थी। अलका की नजर अपने बेटे पर गई तो देखें कि वह बड़े रोमांच और गौर के साथ उसकी बुर की तरफ देख रहा था इसीलिए उसको और ज्यादा उकसाते हुए उसने अपनी हथेली को धीरे से अपनी बुर पर रखकर हल्के से मसलते हुए ऊपर की तरफ हथेली को बढ़ा दी अपनी मां की यह हरकत को देखकर राहुल अत्यधिक उत्तेजना महसूस करने लगा और उत्तेजना बस उसका हाथ अपने आप उस के तने हुए लंड पर आ गया और वह उसे मुट्ठी में भींच लिया। राहुल की हालत को देख कर वह समझ गई थी की राहुल एकदम से चुदवासा हो चुका है । उसे लोहा पूरी तरह से गर्म लगने लगा था जोकि चोट मारने का बिल्कुल सही टाइम आ गया था। लेकिन उसे और गर्म करने के लिए अलका बोली।

देख बेटा ठीक से देख ले यह वही जगह है जिस पर तेरा यह हथियार( लंड की तरफ इशारा करते हुए )चुभ रहा था मुझे बड़ी परेशानी हो रही थी। ऐसे कैसे देख रहा हे छू कर देख ले देख तो अभी तक कितनी गरम है।

( अपनी मां की बात सुन कर राहुल हक्का-बक्का रह गया उसकी मां उसे बुर छूने के लिए उकसा रही थी। जबकि राहुल को खुद ही उसकी बुर छुने के लिए तड़प रहा था। अपनी मां के इस आमंत्रण से वह पूरी तरह से गनगना गया था। वह अच्छी तरह से जान लिया था कि वासना की आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी। अलका ने एक बार फिर उसे ज़ोर देते हुए उसकी बुर छुने के लिए कही। और इस बार राहुल अपनी मां की बुर को स्पर्श करने के लिए अपने हाथ को आगे बढ़ाया लेकिन उत्तेजना की मारे उसका हैंथ कांप रहा था। यह देखकर अलका मुस्कुराने लगी। अपने बेटे का डर दूर करने के लिए उसने खुद ही उसका हाथ पकड़ कर उसकी हथेली को अपनी बुर पर रख दी। अपनी मां की बुर पर हथेली रखते ही राहुल के मुंह से आह निकल गई और जब उत्तेजना के कारण राहुल ने अपनी मां की बुर को अपनी हथेली में दबोचा तो अलका की सिसकारी फुट पड़ी।

स्स्स्स्स्हहहहहहह.......आहहहहहहहहहह.....राहुल

राहुल अपनी मां की ब** को अपनी हथेली में दबोचे हुए अलका के एकदम करीब आ गया दोनों उत्तेजना में करो बोर हो चुके थे। वीनीत की भाभी और नीलू के साथ चुदाई का अनुभव ले चुका राहुल औरत को खुश करने का तरीका जान चुका था इसलिए वह अपनी हथेली को अपनी मां की बुर पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा। इससे हल्का की सिसकारी फूटने लगे उत्तेजित हुए जा रही थी साथ ही उसके चेहरे का रंग सुर्ख लाल होता जा रहा था राहुल अपनी मां के बिल्कुल करीब पहुंच चुका था और जैसे ही राहुल के होठ अलका के होंठ के बिल्कुल करीब पहुंचे राहुल से रहा नहीं गया वह अपनी मां के गुलाबी होंठों को चूसने का लालच दबा नहीं पाया और तुरंत अपने होंठ को अपनी मां के हॉठ पर सटा दिया, होठ से हॉठ सटते ही जेसे दोनों बरसों के प्यासे हो इस तरह से एक दूसरे के होठों पर टूट पड़े। राहुल अपनी मां के होंठ को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा उसकी मां भी अपने बेटे के होंठ को अपने मुंह में भर कर चूसने लगी दोनों बारी बारी से एक दूसरे के मुंह में जीभ डाल कर एक दूसरे के थुक तक तो चाट जा रहे थे। दोनों पागल हो चुके थे वासना के नशे में अंधे हो चुके थे अपनी बदन की प्यास के आगे वह दोनों को रिश्ते नाते कुछ दिखाई नहीं दे रहे थे राहुल तो अपनी मां की बुर को अपनी हथेली से रगड़ते हुए मस्त हुआ जा रहा था वाकई में उसकी बुर ज्यादा ही गर्म थी।

अलका उसी तरह से अपनी एक टांग पाइप पर रखकर अपनी बुर काे मसलवा रही थी, और एक दूसरे के होटो को चुसने का मजा ले रहे थे राहुल के करीब आने की वजह से राहुल का तना हुआ लंड अलका के पेट पर रगड़ खाने लगा। जिससे अलका की उत्तेजना में और ज्यादा बढ़ोतरी हो रही थी और उसने तुरंत पेट पर रगड़ खा रहे अपने बेटे के लंड को अपनी मुट्ठी में भरली और धीरे-धीरे मुठीयाने लगी। अपनी मां की हरकत पर राहुल से रहा नहीं गया ओर बुर को मसलते मसलते ऊसने अपनी एक उंगली को धीरे से बुर में प्रवेश करा दिया, बरसों से प्यासी अलंका की बुर में जेसे ही उसके बेटे की उंगली कैसी अलका एकदम से मचल उठी, उत्तेजना और मदहोशी के कारण उसके पैर कांपने लगे लेकिन अपने बेटे के इस हरकत से वह समझ गई थी राहुल को जितना नादान समझती है उतना नादान वह था नहीं।

राहुल अपनी मां के होठों को चूसते हुए धीरे-धीरे अपनी ऊंगली को बुरके अंदर बाहर करने लगा। इससे अलका का चुदासपन पल पल बढ़ता जा रहा था। वह अपने बेटे के बदन से और ज्यादा चिपक गई। पाइप पर से अपने पैर नीचे करके अपने बेटे को अपनी बाहों में भर ली राहुल लगातार अपनी उंगली से अपनी मां की बुर चोद रहा था। अलका की गरम सिस्कारियों से पुऱा बाथरुम गुंजने लगा था। साथ ही साथ बादलों की गड़गड़ाहट लगातार हो रही थी। दोनों ऐसा लग रहा था एक दूसरे के होटो को चूस नहीं बल्कि चबा रहे हैं।

अलका सिसकारी लेते हुए बोली।

आहहहहहहहहह......स्सहहहहहहहहहहहह.... बेटा मुझे कुछ हो रहा है। ऊफ्पफ्फ....... मुझ से रहा नहीं जा रहा है बेटा।

राहुल अपनी मां की गर्दन को चूमते हुए एक हादसे उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को दबाते हुए बोला।

क्या हो रहा है मम्मी? ( इतना कहने के साथ ही ब्लाउज के बटन को खोलने लगा।)

(अपने बेटे के लंड को हिलाते हुए )पता नहीं बेटा मुझे क्या हो रहा हैैं मुझसे रहा नही जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि मेरी बुर में चींटीया रेंग रहीे हैं मुझे बुर में खुजली हो रही है।

( अलका के बात पूरा करते ही राहुल ने ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया। उसका लंड अलका के बूर के इर्द-गिर्द ही रगड़ खा रहा था। जिससे अलका की बुर की खुजली और ज्यादा बढ़ने लगी थी। ब्लाउज के बटन खुलते ही राहुल तो चुचियों पर ही टूट पड़ा। वह तो अच्छा हुआ कि अभी भी अलका की दोनों चूचियां ब्रा मे कैद थी। वरना ऐसा लग रहा था कि राहुल तो अपनी मां की दोनों चूचियों को खा ही जाएगा। अपने बेटे को इस तरह से अपनी चूचियों पर टूटता हुआ देखकर अलका एक दम मस्त हो गई उसकी आंखो में खुमारी छाने लगी। राहुल था कि ब्रा के ऊपर से ही दोनों चुचीयो को हथेली में भरकर उस पर मुंह मारने लगा। अलका सिसकारी भरते हुए खुद ही एक हाथ से अपनी बुर को मसलते हुए और दूसरे हाथ से अपने बेटे के लँड को मुट्ठीयाये जा रही थी। दोनों गर्म हो चुके थे अलका भी यही चाहती थी कि उसका बेटा उसकी चूचियों को मुंह में भरकर चुसे उसे पिए और इसलिए वह खुद ही अपने ब्लाउज को उतारने के लिए अपनी बुर पर से हाथ हटा ली और लंड को भी अपने पेट पर रगड़ता हुआ छोड़कर ब्लाउज उतारने लगी। यह देखकर राहुल एकदम से चूचियो को पीने के लिए तड़प उठा और ब्रा के ऊपर से ही दोनों चुचियों को हथेली में भर भर कर दबाने लगा। यह देखकर अलका कामुक मुस्कान बिखेरते हुए अपने दोनों हाथ को पीछे ले जाकर अपनी ब्रा के हुक को खोलते हुए बोली।

इतना उतावला क्यों हुआ है बेटा मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूं। जी भर के पी ना मेरी चूचियों को।

अपनी मां की ऐसी बात सुनकर राहुल भी हंस दिया लेकिन अपने लंड को थाम कर हिलाते हुए अपनी मां की बुर पर रगड़ने लगा। बुर पर लंड का सुपाड़ा रगड़ खाते ही अलका कामोत्तेजना में मदहोश होने लगी। वह अपनी ब्रा के हुक खोलते खोलते सिसकारी लिए जा रही थी। उससे लंड के सुपाड़े की रगड़ अपनी बुर * पर बर्दाश्त नहीं हो रही थी। तभी बुर पर सुपाड़े को रगड़ते हुए राहुल बोला।

इसी जगह खुजली हो रही है ना मम्मी......( अलका से तो उत्तेजना के मारे मुंह से आवाज ही नहीं निकल रही थी इसलिए वह सिर्फ हां मे सिर हिला दी। और अपनी मां की हामी सुनते ही वह बुर पर लंड को रगड़ते हुए बोला।

रुक जाओ मम्मी मैं अभी तुम्हारी बुर की खुजली मिटा देता हूं। ( इतना कहने के साथ ही जैसे ही वह सुपाड़े को बुर के गुलाबी छेद पर टिकाया वैसे ही अलका अपनी ब्रा भी उतार चुकी थी और राहुल ने बुर के छेद पर लंड के सुपाड़े को टीकाकर हल्के से कमर को आगे की तरफ धक्का दिया तो बुर की चिकनाहट पाकर लंड का सुपाड़ा हल्का सा बुर में प्रवेश करने लगा। सुपाड़े को हल्का सा बुक में प्रवेश होते ही दर्द के मारे अलका छटपटाने लगी और साथ ही उसकी सिसकारी भी छूटने लगी।

 
राहुल का लंड का सुपाड़ा जैसे ही उसकी मां की बुर में

हल्का सा प्रवेश किया वैसे ही अलका की चीख निकल गई साथ ही उसकी गरम सिसकारी भी फूट पड़ी इतने से ही अलका समझ गई कि उसके बेटे का लंड उसकी बुर में गदर मचा देगा। अलका तड़प रही थी लंड को अपनी बुर में घुसवाने के लिए, लेकिन बाथरूम में नहीं इसलिए वह राहुल आगे बढ़ता इससे पहले ही बोली।

बेटा इधर नहीं चल कमरे में चलते हैं। ( अलका कामुक स्वर में बोली' राहुल भी अपनी मां की बात मानते हुए अपने लंड को वापस बुर के ऊपर से हटा लिया लेकिन गरम बुर के ऊपर से लंड हटते ही उत्तेजना के मारे ऊपर नीचे होकर ठुनकी ले रहा था। जिस पर नजर पड़ते ही अलका के चेहरे पर कामुक मुस्कान बिखर गई और अपने बेटे के लंड की ठुनकी को देख कर उसकी बुर पसीजने लगी। राहुल तो अपना लंड बुर में डालने के लिए बेताब था लेकिन उसकी मां ने उसे कमरे में चलने की बात कहकर रोक दी थी वरना उसने तो अपना काम कर ही चुका था।

कमरे में जाने के लिए प्यासी अलका मचल रही थी क्योंकि वह जानती थी कि कमरे में जाकर इत्मीनान से अपनी प्यास बुझा सकेगी' इसलिए वह बाथरुम में टँगी टावल को लेकर अपने बदन पर लपेटने चली ही थी कि

राहुल ने अपनी मां के हांथ से टावल लेकर नीचे फेकं दिया। राहुल के इस हरकत पर हैरान होते हुए वह उसे देखने लगी तो राहुल बोला।

मम्मी इतनी रात को यहां कौन देखने वाला है सोनू भी अपने कमरे में सो रहा है।( राहुल की बात अलका समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या कहना चाह रहा है। वह आश्चर्य से अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली।)

मतलब....

मम्मी.....( इतना कहते ही राहुल अपनी मां की नंगे बदन को ऊपर से नीचे की तरफ देखते हुए) ऐसे ही चलो ना बिल्कुल नंगी यहां कौन देखने वाला है।

( राहुल की बात सुनकर अलका को शर्म सी महसूस होने लगी लेकिन फिर भी बोली।)

अगर सोनू जाग गया तो। ( राहुल की बात सुनकर अलका का भी मन मचलने लगा था नंगी जाने के लिए वह भी कमरे में नंगे घूमने का आनंद लेना चाहती थी इसलिए थोड़ा सा एतराज जताते हुए बोली थी।)

कोई नहीं देखेगा मम्मी और सोनू तो कमरे में घोड़े बेच कर सो रहा है अगर जग ना होता तो बादलों की गड़गड़ाहट सुनकर ना जाने कब से जाग गया होता।

( इतना कहने के साथ ही दोनों एक दूसरे की आंखों में देखने लगे दोनों इस पल का भरपूर आनंद उठाना चाहते थे। बाथरूम में इस समय दोनों मां-बेटे संपूर्णता नग्नावस्था में थे उनके बदन पर कपड़ा नाम भर का भी नहीं था। अलका की चुचीयां इस उम्र में भी तनकर खड़ी थी उनमे जरा भी लचक नहीं था। दोनों एक दूसरे के नंगे बदन को निहार रहे थे।

तभी अलका बिना कुछ बोले बाथरूम के दरवाजे की तरफ बढ़ने लगी और राहुल अपनी मां को जाते हुए देख रहा था खास करके उसकी नजर इसकी मां की बड़ी-बड़ी भरावदार गांड पर ही टिकी हुई थी। राहुल अपनी मां की मटकती हुई गांड को देखने का लुफ्त ओर ज्यादा उठा पाता इससे पहले ही अलका बाथरूम का दरवाजा खोलकर बाहर जाते जाते अपने चेहरे पर कामुक मुस्कान बिखेरते हुए वह राहुल की तरफ नजरें घुमा कर देखी और आंखों से इशारा करके उसे अपने पीछे आने को कहीं, राहुल भवरे की तरह पीछे-पीछे हो लिया। गजब का नजारा था। राहुल की मां बिल्कुल नंगी होकर एकदम बेशर्म औरत की तरह अपनी गांड को कुछ ज्यादा ही मटकाते हुए चल रही थी और रह रहकर वह पीछे मुड़कर अपने बेटे को भी देख ले रही थी राहुल को वह पूरी तरह से उकसा रही थी। इतनी ज्यादा रंगीनियां तो वह शादी की पहली रात को अपने पति के सामने भी नहीं बिखेरी थी जितनी रंगीनियां वह अपने बेटे के सामने बिखेर रही थी। अपनी मां को नंगी चलते हुए देखकर राहुल का लंड और ज्यादा कड़क हो गया मौसम बारिश की वजह से एकदम ठंडा हो गया था लेकिन फिर भी राहुल और अलका के बदन में वासना की गर्मी मौसम की ठंडी को पछाड़ दे रही थी। अभी भी बारिश अपने जोर पर ही थी बादलों की गड़गड़ाहट बीजली की चमक' वातावरण को और ज्यादा रंगीन बना रही थी। राहुल का लंड बार-बार अपनी मां की गांड को देखकर उछाल मार रहा था। अलका के बदन में कामुक्ता का सुरूर चढ़ा हुआ था वह अपने हाथों से बालों को खोल दी थी जिससे उसके लंबे बाल उसकी कमर तक लहलहा रहे थे। गीले बालों में अलका की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ चुकी थी इस समय अलका काम की देवी लग रही थी। मां बेटे दोनों संपूर्ण नग्नावस्था में चहलकदमी करते हुए कमरे की तरफ बढ़ रहे थे। अलका की भरावदार गांड की फांक चलते समय इधर उधर फैल रही थी। सब कुछ मिलाकर बहुत ही कामोत्तेजक नजारा था। थोड़ी ही देर में अलका अपने कमरे का दरवाजा खोलकर अंदर प्रवेश कर गई और पीछे-पीछे राहुल अपनी मां के नंगे बदन को देखकर उत्तेजित होता हुआ लंड हिलाते हुए वह भी कमरे में प्रवेश कर गया। जैसे ही राहुल कमरे में प्रवेश किया वैसे ही उसके कानों में उसकी मम्मी की आवाज आई।

दरवाजा बंद कर दो राहुल( राहुल देखा तो उसकी मम्मी कमरे में जाते हैं एक टावल अपने बदन से लपेट ली थी,

और दीवार की तरफ मुंह करे खड़ी थी, कुछ देर पहले अपने बेटे के सामने अपने बदन की नुमाइश कर रही अलका को इस समय शर्म महसूस हो रही थी।

राहुल टॉवल में अपने बदन को छुपाती अपनी मां को देखते हुए दरवाजे को बंद कर दिया।

कमरे में खामोशी छाई हुई थी। कुछ भी हो रह रहे कर दोनों के बीच में शर्म और मर्यादा का एहसास हो ही जा रहा था। अलका कुछ देर पहले यही सोचकर कमरे में आई थी थी वह खुल कर जी भर के अपने बेटे के साथ अपने बदन की प्यास बुझाएगी लेकिन इस समय शर्म सी महसूस कर रही थी।

राहुल भी कमरे का दरवाजा बंद कर के दरवाजे पर ही खड़ा था उसे भी शर्म महसूस हो रही थी उसके लंड का तनाव कुछ कम होने लगा था। अलका वही खड़े खड़े फिर सोचने लगी अपने आप से बातें करने लगी।

यह क्या कर रही है अलका ऐसे तो हाथ में आया हुआ यह सुनहरा मौका चला जाएगा जब तक शर्म के बादल रहेंगे तब तक तेरी प्यास नहीं बुझने वाली। शर्मा और मर्यादा में रहकर ही तू अपने अंदर दबाए रखी प्यास को अपने अंदर दबाए रखी, वरना आज तेरी भी सूखी हुई जमीन हरी भरी होती। बेशर्म बन जा , यूं ही शर्म की चादर ओढ़े हुए कब तक अपनी जिंदगी तड़प तड़प कर बितााएगी। आज मौका है पर यह मौका हाथ से मत जाने दे तेरा लड़का भी पूरी तरह से तैयार है तेरे को चोदने के लिए शर्म मत कर आगे बढ़ वरना तेरी तरह तेरा बेटा भी शर्मा कर रह जाएगा आगे बढ़ अलका । तोड़ दे इस रिश्ते और मर्यादाओं की दीवार को और बुझा ले अपने बदन की प्यास को।

अलका के अंतर आत्मा से आवाज आ रही थी जिसको सुनकर अलका ने भी मन में ठान ली, और उसने तुरंत अपने बदन पर से टावल निकाल कर बिस्तर पर फेंक दें और फिर से नंगी हो गई। राहुल यह देख कर मन ही मन प्रसन्न होने लगा और वह भी अपनी मां की तरफ बढ़़ा।

अलका घूम कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी जोंकि उसकी तरफ ही बढ़ रहा था। दोनों एक दूसरे की आंखों में देखने लगे राहुल अपनी मां के बिल्कुल करीब पहुंच चुका था । इतना करीब कि उसका खड़ा लंड उसकी मां के पेट पर फिर से रगड़ खाने लगा। अपने पेट पर खास करके नाभि के बीचो-बीच लंड के सुपाड़े का स्पर्श पाकर अलका फिर से मस्त हो गई। उसके बदन में वापस कामोत्तेजना की लहर दौड़ ने लगी। अलका से रहा नहीं गया और वह अपना हाथ आगे बढ़ा कर अपने बेटे के लँड को थाम ली। अपना खड़ा लंड अपनी मां के हाथ में आते ही राहुल भी उत्तेजना से सराबोर हो गया और तुरंत अपने होठों को फिर से अपनी मां के होठ पर रखकर उसे चूसना शुरू कर दिया। दोनों एक बार फिर से वासना के सागर में गोते लगाते हुए एक दूसरे को चूमने चाटने लगे।

राहुल अपनी मां के होठों का रसपान करते हुए उसे अपनी बाहों में दबोच लिया राहुल के दोनों हाथ उसकी मां की नंगी पीठ से होते हुए कमर और कमर से नीचे उभरे हुए नितंब पर फिरने लगे , राहुल अपनी मां के चिकने बदन से और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था वह अपनी मां की गांड को दोनों हथेलियों में भर भर कर दबा रहा था। अपनी मां की गांड को दबाते हुए वह इतना ज्यादा उत्तेजित हो रहा था कि ऐसा लग रहा था कि आज वो अपनी मां की गांड को खींच कर खा जाएगा। राहुल और अलका दोनों मां बेटे एक दूसरे को बेतहासा चुमे चाटे जा रहे थे। राहुल रह रह कर अपनी मां की गुदाज गांड को दोनों हथेलियों से आमने सामने की तरफ खींचता जिससे उसे तो मजा आ ही रहा था अलका भी एक दम मस्त हो जा रही थी। एक हाथ से अलका अपने बेटे का लंड पकड़ कर धीरे धीरे मुठीयाये जा रही थी . अलका के बदन में चुदवाने की ललक बढ़ती जा रही थी। अलका भी एक हाथ अपने बेटे के पीठ पर ले जाकर उसे अपनी बाहों में भरने लगी जिससे उसकी बड़ी बड़ी चूचियां राहुल के सीने पर लगने लगे उत्तेजना के मारे चुचियों की निप्पल इतनी ज्यादा कड़क हो चुकी थी की राहुल के सीने में सुइयों की तरह चुभ रही थी। वह जब जब अपने बेटे को की एक हाथ से ही बाहों में भर कर अपने सीने पर दबाती तो उसकी बड़ी बड़ी चूचियां एेसे ही दब जा रही थी।

अलका को बहुत मजा आ रहा था। अलका को और भी ज्यादा खुल कर मजा लेना था इसलिए वह धीरे धीरे अपने बेटे को लिए हुए ही अपने कदम को पीछे की तरफ बढ़ाते हुए बिस्तर की तरफ जाने लगी। राहुल अपनी मां को चूमते हुए उसकी जान को दबाते हुए धीरे-धीरे वह भी अपनी मां के साथ खिसकने लगा। दोनों की सांसे इतनी तीव्र गति से चल रही थी कि कमरे में ऊन दोनों की सांस की आवाज भी सुनाई दे रही थी। बारिश की आवाज कमरे के वातावरण को संगीतमय बना रही थी। तभी अलका के पैर उसके बिस्तर से टकराए तो वह जानबूझकर अपने बेटे को अपने बदन से चिपकाए हुए ही धम्म से बिस्तर पर गिरी। अलका नीचे और राहुल उसके ऊपर था। अपनी मां के हरकत पर राहुल और ज्यादा उत्तेजित हो चुका था और उसने तुरंत अपनी मां के दोनों पके हुए आम को अपनी हथेलियों में भर लिया और उसकी नजर अपनी मां की नजरों से टकराई तो अपनी मां की आंखों में शुरुर से झांकते हुए

अपने होठों पर अपनी जीभ फीराते हुए कस के चुचियों को दबाने लगा और जैसे ही राहुल ने अपनी मां की चुचियों को दबाया उसकीे मां के मुंह से हल्की सी सिसकारी भरी चीख निकल गई।

स्ससहहहहहहहह....राहुल क्या कर रहा है रे मुझे ना जाने क्या हो रहा है। ऊफ्फफ्फ..... मुझसे रहा नहीं जा रहा है।( उत्तेजना के मारे अलका के मुंह से आवाज अटक अटक के नीकल रही थी। उसका मुंह खुला का खुला रह गया था राहुल को तो खेलने के लिए जैसे खिलौना मिल गया था वह जोर-जोर से गोलाईयों को दबा दबा कर मजा ले रहा था। ईस चूची मर्दन में अलका को भी बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी ऐसा आनंद कि जिसके बारे में शायद बयान कर पाना बड़ा मुश्किल है। थोड़ी ही देर में चूची मर्दन की वजह से चूचीयो का रंग कश्मीरी सेब की तरह लाल हो गया। अलका अपने बेटे के ईस चुची मर्दन से बेहद प्रसन्न नजर आ रही थी।

आज सब कुछ वर्षों के बाद ही हो रहा था जिस तरह से उसका बेटा अपनी मां की चुचियों को दबा रहा था अलका मन में यही सोच रही थी कि इस तरह से तो उसकी चूचियों को दबाकर उसके पति ने भी इतना आनंद नहीं दिया था जितना आनंद उसका बेटा उसे दे रहा था। शर्म और मर्यादा की दीवार टूट चुकी थी इस समय राहुल अपनी मां के ऊपर लेटा हुआ था और उसकी बड़ी बड़ी तनी हुई गोल चूचियों को दबाने का सुख प्राप्त कर रहा था। राहुल का तना हुआ लंड अलका की जांघो के बीच रगड़ खाते हुए उसकी बुर के अंदर गदर मचाए हुए था अलका की बुर अंदर से पसीज पसीज कर पानी पानी हो रही थी। राहुल अपनी मां की चुचियों को दबा दबा कर मस्त हुए जा रहा था अपनी मां की चुचियों की गोलाई देखकर उससे सब्र करना मुश्किल हुए जा रहा था। अलका सिसक रही थी। उसके मुंह से लगातार सिसकारी फूट रही थी वह उत्तेजना के मारे अपने सिर को पटक रही थी।

स्स्स्स्स्हहहहहहहह......आहहहहहहहहह...... राहुल गजब कर रहा है रे तू .....।मेरे बदन मे चीटिया रेंग रही है।

( अपनी मां की गरम सिस्कारियों को सुनकर राहुल अच्छी तरह से जानता था कि वह एकदम गरम हो चुकी है वह इन गरम सिसकारीयों से वाकिफ था। इसी तरह की उत्तेजनात्मक सिसकारियां वह विनीत की भाभी और नीलू के मुंह से सुन चुका था और वह यह अच्छी तरह से जानता था कि ऐसी सिस्कारियों के बाद उन दोनों को चुदवाने की इच्छा प्रबल हो गई थी। इसका मतलब साफ था कि राहुल यही समझ रहा था कि उसकी मां भी अब उसके लंड को अपनी बुर में डलवाने के लिए तड़प रही है। लेकिन राहुल अभी अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर चोदने वाला नहीं था, आज इस रात को और ज्यादा मदहोश बनाने की सोच रहा था। वह आज रात अपनी मां को पूरी तरह से संतुष्ट करना चाहता था उसे जी भर कर प्यार करना चाहता था इसलिए वह दोनों हाथों से चूचियों को दबाते हुए झट से एक चूची पर अपना मुंह लगा दिया और उसकी कड़क निप्पल को मुंह में भरकर पके हुए आम की तरह चूसना शुरू कर दिया। अपने बेटे को इस तरह से अपनी चूची पीते हुए देखकर अलका मस्त हो गई और उसके मुंह से गर्म सिसकारियां निकलना शुरू हो गई। राहुल तो जैसे पागल सा हो गया था वह कभी ईस चूची को दबाते हुए पीता तो कभी दूसरी चुची को मुंह में लगाता जितना हो सकता था ऊतना मुंह में भर भर कर चूची को पीने का मजा लूट रहा था । बादलों की गड़गड़ाहट के साथ साथ वह दोनों के मुंह से गर्म सिस्कारियों की आवाज भी लगातार आ रही थी।

अलका पूरी तरह से कामातूर हो चुकी थी वह यह नहीं जानती थी कि का बेटा इस तरह से उसकी चूचियों को पिएगा दबाएगा मसलेगा, अलका को उसकी जवानी के दिन याद आने लगे थे जब उसका पति ऐसे ही उसकी चूचियों को दबाता था लेकिन कभी भी उसे मुंह में भरकर चूसते हुए इतना प्यार नहीं दिया था जितना कि राहुल दे रहा था।

अलका मस्त लग रही थी ठंडे मौसम में भी उसके बदन से पसीने छूट रहे थे। वह अपने दोनों हाथ को राहुल के सिर पर रख कर अपनी ऊंगलीयों को उसके बालों में ऊलझाते हुए कस के भींचते हुए उसको अपनी चूचियों पर दबा रही थी ताकि वह और जोर-जोर से उसकी निप्पल को मुंह से खींचते हुए पी सके। और राहुल अपनी मां की उम्मीदों पर खरा उतर रहा था उसके सोचने के विरुद्ध ही वह और तेजी से पागलों की तरह निप्पलों को पिए जा रहा था। उसका यू पागलों की तरह राहुल का प्यार करना उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था उसकी बुर लंड के लिए और ज्यादा तड़पने लगी थी।

इसीलिए एक हाथ को वह नीचे की तरफ ले जाकर अपने बेटे के लंड को पकड़ ली और उसे अपनी बुर पर रगड़ते हुए स्तनपान का मजा लेने लगी।

 
अपनी मां के द्वारा लंड को इस तरह से अपनी बुर पर रगड़ना राहुल से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। राहुल के बदलने और ज्यादा आग तब लग जाती है जब उसकी मां लंड के सुपाड़े को अपनी बुर के दरार के बीचोबीच रखकर ऊपर से नीचे की तरफ रगड़ती। राहुल के बदन में एकदम से झनझनाहट सी फैल जाती। कामोत्तेजना की आग में दोनों पल पल जल रहे थे दोनों के बदल पसीने में तर बतर हो चुके थे। अलका अपनी कामुक बदन की कामुक हरकतों से राहुल को परेशान कर रही थी। और राहुल अपनी परेशानी का इलाज अपनी मां की चुचियों में ढूंढ रहा था वह लगातार अपनी मां की चुचीयो को मुंह में भर कर चूस रहा था राहुल के इस तरह के स्तन मर्दन करने से अलका की चुचीया एकदम लाल लाल होकर उत्तेजित अवस्था में तन गई थी।

दोनों को असीम आनंद की प्राप्ति हो रही थी बाहर बारिश जोरों पर अपना काम कर रही थी।

अलका का बदन रह-रहकर झटके खा रहा था और हर झटके के साथ उसकी बुर मदन रस फेंक रही थी।

स्स्सहहहहहहहह.....राहुल बहुत मजा आ रहा है। आहहहहहहहह......एेसे ही.......।हां........ बस चूसता रह मेरी चूचियों को। निचोड़ डाल ईसका सारा रस दबा दबा कर पी जा। ओहहहहहह....राहुल.....

( अलका की आंखों पर वासना की पट्टी चढ़ चुकी थी वह अपने बेटे को ही उकसा रही थी उसके बदन से खेलने के लिए, और राहुल का क्या था वह तो पहले से ही तड़प रहा था अपनी मां के रसीले बदन का लुफ्त उठाने के लिए, ना जाने कितनी बार उसने अपनी मां के बारे में सोच-सोच कर मुट्ठ मार चुका है कल्पना मे उसकी चुदाई भी कर चुका है। पर यहां तो खुद उसकी मा ही उसे आमंत्रण दे रही थी उसके बदन से खेलने के लिए । राहुल भी इस आमंत्रण को स्वीकार करते हुए अपनी मां की दोनों बड़ी बड़ी चुचियों को गेंद की तरह हाथों में लेकर दबा दबा कर मजा ले रहा था। अलका जैसी खूबसूरत औरत के बारे में सोच कर भी ना जाने कितनों का लंड पानी छोड़ देता होगा। और यहां तो राहुल अपनी मां के नंगे बदन पर लेट कर उसके अंगों से खेलता हुआ मजा ले रहा था अलका से अपनी कामुकता बर्दाश्त नहीं हो रही थी वह बार-बार अपने बेटे के लंड को अपनी बुर पर रगड़कर और ज्यादा गरम होती जा रही थी।

दोनों पर अब उन दोनों के खुद का बस नहीं चल रहा था। रिश्तो के मायने बदल चुके थे। बिस्तर पर दोनों मां-बेटे संपूर्णता नग्नावस्था में एक दूसरे के अंगों से खेलते हुए मजा लूट रहे थे। राहुल काफी देर से अपनी मां की चुचियों से खेल रहा था और अलका थी कि अपने बेटे के लंड को अपनी बुर पर रगड़ रगड़ कर राहुल को और ज्यादा गर्म कर रहीे थी उस से अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था और अलका भी यही चाहती थी। राहुल का लंड इतना ज्यादा सख्त और कड़क हो चुका था कि अलका को अपने बेटे का लंड अपनी जांघों के बीच चुभता सा महसूस हो रहा था। लंड की चुभन से ही अलका को अंदाजा लग गया था कि उसकी बुर की जमकर कुटाई होने वाली है।

राहुल को अब कुछ और चाहिए था राहुल धीरे-धीरे चूचियों को दबाता हुआ नीचे की तरफ सरक रहा था और अलका एक हाथ से उसके बाल को भींच कर अपने बदन से दबा रही थी। अपनी मां के बदन पर नीचे की तरफ सरकते हुए राहुल हर जगह चुम्मा-चाटी करते हुए धीरे-धीरे पेट तक पहुंच गया। जैसे-जैसे राहुल के होठ अलका के बदन पर होते हुए नीचे की तरफ जा रहा था वैसे वैसे उसका बदन झनझना जा रहा था। तभी राहुल के होठ अलका की नाभि पर आकर अटक गए , राहुल के होठ अलका की गहरी नाभि पर टिके हुए थे।

अपने बेटे के होंठ का स्पर्श अपनी नाभि पर पाकर उत्तेजना के मारे अलका की सांसे और तेज हो चुकी थी वह गहरी सांसे लेते हुए ं मन ही मन में सोच रही थी कि यह राहुल क्या करने वाला है। राहुल को अपनी मां की नाभि में से आती मादक खुशबू और ज्यादा चुदवासा कर रही थी। राहुल अपने नथुनो से नाभी से आती मादक खुशबू को खींच कर अपने सीने के अंदर उन्माद की लहर भर रहा था और नाभी की मादक खुशबू से उत्तेजित होते हुए वह अपनी जीभ को उस गहरी नाभि में उतार दिया। अपने बेटे के इस हरकत पर अलका तो एकदम से गनगना गई। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि राहुल ऐसा करेगा। लेकिन अपने बेटे की इस हरकत की वजह से उसकी उत्तेजना में पल-पल बढ़ोतरी होती जा रही थी उसकी सांसे तीव्र गति से चल रहे थे और सांसो के अंदर बाहर होने के साथ साथ ही उसकी बड़ी बड़ी चूचियां मादकता लिए हुए ऊपर नीचे हो रही थी। राहुल जैसे जैसे अपनी जीभ को नाभि के अंदर गोल-गोल घुमाता वैसे-वैसे अलका सिसकारी लेते हुए कसमसाने लगती। अलका के बदन में इतना ज्यादा उत्तेजना का संचार हो रहा था कि उसकी गरम बुर फूल पिचक रही थी। अलका के बदन में उत्तेजना के कारण जिस तरह से कंपन हो रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे आज उस की सुहागरात है और आज पहली बार ही किसी मर्द के साथ बिस्तर पर मजा ले रही है। राहुल तो अपनी मां की नाभि को ही बुर समझ कर उसे चाटने का लुत्फ उठा रहा था और अलका भी मदमस्त हुए जा रही थी। तभी राहुल नाभि के अंदर अपनी जीभ को गोल-गोल घुमाते हुए एक हाथ से जैसे ही अपनी मां की बुर को मसला वैसे ही अलका के मुंह से सिसकारी छूट गई।

स्स्स्स्हहहहहहहहहह......आहहहहहहहहहहह.....राहुल

ओहहहहहहहह......राहुल..( राहुल का हाथ अपनी बुर पर महसूस करते ही अलका एकदम से चुदवासी हो गई और उत्तेजना के मारे अपना सिर दाएं बाएं पटकने लगी उससे अपनी उत्तेजना को दबाया नहीं जा रहा था इसलिए वह खुद ही अपनी चूचियों को अपने हाथ से ही दबाने लगी।

यह देखकर राहुल का जोश बढ़ गया और वह अपना में नाभि पर के हटाकर धीरे धीरे नीचे की तरफ बढ़ने लगा जैसे जैसे नीचे बढ़ रहा था अलका के बदन में कंपकपी सी फेल जा रही थी राहुल के बदन के नीचे उसका बदन कसमसा रहा था। और कसमसाते हुए वह अपनी चूचियों को खुद ही जोर जोर से दबा रही थी और अपने मुंह से गर्म सिसकारी छोड़ रही थी। अलका का आज एक नया रूप नजर आ रहा था। शर्मो हया की चादर ओढ़े जो हमेशा रहती थी वह खुद आज वासना के अंधेपन में अपनै बदन से शर्मो लिहाज की चादर को उतार फेंकी थी। अपने बच्चों को संस्कार संस्कार रिश्ते मर्यादाओं का पाठ पढ़ाने वाली आज खुद अपने ही बिस्तर पर अपने बेटे के साथ काम क्रिडा का पाठ पढ़ रही थी। राहुल धीरे धीरे नीचे की तरफ बढ़ रहा था अब वह द्वार जिसमे हर इंसान को बेतहाशा मजा मिलता है बस दो चार अंगुल हिं दूर रह गए थे। उस द्वार के करीब पहुंचते-पहुंचते राहुल की दिल की धड़कन तेज हो गई उसकी सांसे चल नहीं बल्कि दौड़ रही थी और अलका का भी यही हाल था जैसे जैसे राहुल उसर्की बुरके नजदीक आता जा रहा था, वैसे-वैसे अलका के बदलने उत्तेजना की लहर बढ़ती जा रही थी। कुछ ही पल में वह घड़ी भी आ गई जब राहुल कि नजरे ठीक उसकी मां की बुर के दो चार अंगूल ही दूर थी। राहुल फटी आंखों से अपनी मां की बुर की तरफ देख रहा था वह बुर की खूबसूरती में खो सा गया था। उसका गला सुख होने लगा था लंड का तनाव एका एक दुगना हो गया था। एक तरह से बुर पूरी तरह से चिकनी थी बस उसके ऊपर हलके हलके रोए नजर आ रहे थे ऐसा लग रहा था कि मानो अलका ने दो चार दिन पहले ही क्रीम लगाकर अपनी बुर साफ की हो। अपने बेटे को अपनी बुर की तरफ इस तरफ से प्यासी नजरों से देखता हुआ पाकर अलका शरमा गई। और शर्म के मारे दूसरी तरफ अपनी नजरों को फेर ली। दोनों की सांसे तेज चल रही थी राहुल के मन में अजीब सी खुशी का एहसास हो रहा था।

राहुल के लिए यह पल बहुत अनमोल था क्योंकि जिस दिन से उसने अनजाने में ही अपनी मां को नंगी देखा था तब से ही बात हमेशा अपनी मां को नंगी देखने का मौका ढूंढता रहता था वैसे भी उसे अपनी मां का गुदाज नंगा बदन बहुत ही ज्यादा आकर्षित करता था खास करके उसकी मदमस्त उभरी हुई गांड जिसे देख कर ओर जिसके बारे में कल्पना कर कर वह ना जाने कितनी बार मुठ मार चुका था। लेकिन हर बार उसके मन में अपनी मां की बुर देखने की ललक रहती थी। लेकिन कभी भी ठीक से देख नहीं पाया था। लेकिन आज उसे भरपूर मौका मिला था अपने मन की आस पूरी करने की, जिसे देखने के लिए वह रात दिन तड़पता रहता था। आज वह रसीली बुरर उसकी आंखों के सामने थी। इसलिए तो वह लार टपकाए बुर को देखे जा रहा था। दो दो औरतों की बुर को चोदने के बाद भी उन दोनों से ज्यादा उसे अपनी मां की बुर आकर्षित कर रही थी। जो की उत्तेजना की वजह से गर्म रोटी की तरह फूल चुकी थी राहुल उसे छु़ने की अपनी लालच को रोक नहीं पाया और अपने कांपते हाथों की कांपते उंगलियों को अपनी मां की बुर पर रख दिया। जैसे ही अलका को अपनी बुर पर अपने बेटे की उंगली का स्पर्श महसूस हुआ वह अंदर तक सिहर उठी। राहुल अपनी उंगलियों को हल्के हल्के बुर की दरार के ईद गिर्द फिराने लगा अपने बेटे की इस हरकत की वजह से अलका का बदन कसमसाने लगा। अलका मन ही मन सोच रही थी कि इस तरह से तो वहअपनी सुहागरात पर भी नहीं कांप रही थी और ना ही इतनी ज्यादा उत्तेजना महसूस कर रही थी। तो आज अपने बेटे के साथ मुझे ऐसा क्यों महसूस हो रहा है। अलका कुछ और विचार कर पाती इससे पहले ही उसका बदन असीम सुख के कारण एकदम से गंनगना गया। और एकाएक ना चाहते हुए भी उसके मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी। करती थी क्या वह राहुल ने जो हरकत किया था उसकी वजह से हल्का अपने बदन पर और मन पर बिल्कुल भी काबू नहीं रख पाई क्योंकि राहुल ने उसकी बुर पर अपने होंठ रख दिए थे। उसकी बुर से मदन रस का फुवार फूट पड़ा जब राहुल ने अपनी मां की बुर पर होठ रखने के साथ ही अपनी जीभ को भी लस लसी दरार में प्रवेश करा दिया। और उसकी बुर की नमकीन रस को जीभ से चाटने लगा। अलका कभी यकीन भी नहीं कर सकती थी थी कोई इस तरह से भी प्यार करता है । इतनी गंदी जगह पर कोई अपना मूह भी लगा सकता है उसे इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था।। राहुल अपनी मां की बुर को लगातार जीभ से चाटे जा रहा था। और अलका मदहोश हुए जा रही थी उत्तेजना के मारे वह अपने सिर को दाएं-बाएं पटक रही थी वह अपनी उत्तेजना को दबाने के लिए अपने होंठ को अपने दांत से ही काट रहे थे लेकिन फिर भी उसके मुख से गर्म सिसकारी निकल ही जा रही थी। अलका को बहुत ही मजा आ रहा था लेकिन उसे इस बात पर शर्म भी आ रही थी कि उसका बेटा कितना गंदा काम कर रहा था।

अलका को आज बहुत ही गंदा लग रहा था क्योंकि इससे पहले उसे मालूम ही नहीं था कि कोई मर्द औरत की बुर भी चाटता है और इस क्रिया में औरत को इतना बेहद आनंद की प्राप्ति होती है। क्योंकि उसके पति ने आज तक कभी भी उसके साथ यह क्रिया नहीं की थी इसीलिए उसको इस बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं था। थोड़ी ही देर में अलका को बेहद और असीम आनंद की प्राप्ति होने लगी वह अपने बेटे के सिर पर अपना दोनों हाथ रखकर उसे जोर-जोर से अपनी बुर पर दबाने लगी।

सससससससससहहहहहहहहह.......राहुल ...... तू यह क्या कर .......रहा है ......क्या कोई इस तरह .....भी करता है( उत्तेजना की वजह से अलका की आवाज भी ठीक से नहीं निकल पा रही थी वह अटक- अटक कर बोल रही थी। अपनी मां के सवाल पर थोड़ी देर के लिए वह अपनी मां की बुर पर से अपने होंठ हटाकर अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला। )

मम्मी मुझे तो बहुत मजा आ रहा है। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है कि बुर चाटने मे ईतना आनंद मिलता है। ( राहुल यह बात झूठ बोल गया था क्योंकि इससे पहले भी उसने नीलू और वीनीत की भाभी के बुर चाटने का स्वाद चख चुका था। )

मम्मी सच सच बताना क्या तुम्हें बुर चटवाने में मजा नहीं आ रहा है। ( अपने बेटे के खुले शब्दों में यह सवाल सुनकर अलका दंग रह गई वह समझ गई कि जितना भोला और नादान वह अपने बेटे को समझती है इतना भोला और नादान वह है नहीं। लेकिन वह अच्छी तरह से जानते थे कि मजा लेना है तो बेशर्मं बनना ही होगा। ईसलिए वह अपने बेटे की बात को ज्यादा तुलना देते हुए वह भी अपने बेटे के खुले शब्दों की तरह ही जवाब देते हुए बोली।)

( अपने हाथ से ही अपनी चूचियों को मसलते हुए) मुझे भी बेहद आनंद प्राप्त हो रहा है लेकिन तुझे कैसे मालूम कि औरतों की बुर चाटने में इतना ज्यादा आनंद आता है।

( अपनी मां के इस सवाल पर राहुल एकदम से हड़बड़ा गया उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या जवाब दे लेकीन फिर भी नमक मिर्च लगाते हुए वह बोला।)

मम्मी क्या करूं मुझे आपकी बुर देखकर रहा नहीं गया।आपकी बुर में ढेर सारा नमकीन रस भरा हुआ है और उस रस को देखकर मुझसे अपने आप को रोका नहीं गया और मैं मुंह लगाकर आप की बुर का रस चाटने लगा। ( राहुल की बात सुनकर कल का मन ही मन प्रसन्न होने लगी उसे यकीन नहीं आ रहा था कि इतने गंदी जगह को भी कोई इतनी चाव से जीभ लगा-लगाकर चाटेगा। अलका के चेहरे पर उत्तेजनाओं प्रसन्नता के भाव देखकर राहुल उसकी मां और कुछ पूछती इससे पहले ही अपना मुंह वापस बुक में डाल दिया। दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी अलका को बुर चटवाने मे मजा आ रहा था और राहुल को चाटने में

थोड़ी ही देर में बुर चटाई का आनंद लेते हुए अलका के मुख से हल्की-हल्की चीख के साथ सिसकारी की आवाज तेज होने लगी पूरे कमरे में उसकी गर्म सिसकारी गूंजने लगी, अगर बाहर बारिश और बादलों की गड़गड़ाहट का शोर ना होता तो अलका की शिसकारियों की आवाज जरूर कमरे के बाहर पहुंच रही होती।

आहहहहहहहहहह......।राहुल.......ऊम्म्म्म्म्म्म्......स्स्स्हहहहहहहहहहहह......ओहहहहहहहहह.....राहुल..... मुझसे रहा नहीं जा रहा है...... मेरी बुर में आग लगी हुई है राहुल....... बुझा दे बुझा दे इसे.......राहुल। ठंडी कर दे मेरी बुर को अपना लंड डाल कर...... चोद मुझे राहुल...... चोद अपनी मां को ......बुझा दे मेरी प्यास को राहुल.....

अलका एकदम से चुदवासी हो चुकी थी।वह इतनी गरम हो चुकी थी कि उसे अब आपनी बुर मे लंड की जरूरत महसूस होने लगी थी। उसकी बुर में खुजली मच रही थी वह अपने बेटे से मिन्नते कर रही थी चुदवाने के लिए। अपनी मां की गरम सिस्कारियों को सुनकर वह समझ गया था कि अब उसकी बुर में लंड डाल देना चाहिए। वह अपनी मां की दूरी से अपने मुंह को हटाया उस की सांसे बड़ी तीव्र गति से चल रही थी वहां हांफते हुए अपनी मां को देख रहा था, और उसकी मां प्यासी नजरों से अपने बेटे को देख रही थी उसकी आंखों में लंड की प्यास साफ झलक रही थी। अलका एकदम कामातूर हो चुकी थी। अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए वह पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी इसलिए तो बुर परसे अपने मुंह को हटाते हैं अलका ने अपनी टांगो को फैला दी। राहुल अपनी मां की जल्दबाजी को देख कर समझ गया था कि तवा पूरी तरह से गर्म हो चुका है और इस पर रोटी सेक ही लेनी चाहिए। इसलिए वह भी अपनी मां की जांघों के बीच घुटनों के बल बैठ कर अपने लिए जगह बनाने लगा अपने बेटे को इस तरह से जगह बनाते हुए दोख अलका की कामोत्तेजना बढ़ गई। और वह अपने देखते को देखते हो खुद ही अपनी चूचियों को मसलने लगी।

राहुल अपने लिए जगह बना चुका था उसने अपनी मां की जांघों को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींच कर अपनी जांघ पर अपनी मां की जांघ को चढ़ा लिया।

क्या गर्म नजारा लग रहा था जांघ से जाघ का स्पर्श होते ही दोनों की उत्तेजना बढ़ गई। राहुल ने अपने टनटनाए हुए लंड को अपने हाथ में लेकर उसके सुपाड़े को अपनी मां की बुर पर रगड़ने लगा। उत्तेजना के मारे अलका का गला सूख रहा था। बुर पहले से ही एकदम गीली थी जिसकी वजह से उस पर सुपाड़ा रगड़ने से सुपाड़ा भी पूरी तरह से गीला हो गया। थोड़ा सा अपनी मां पर झुकते हुए एक हाथ से लंड को पकड़ के बुर के गुलाबी छेद पर टिकाया और हल्के से आगे की तरफ अपनी कमर को धक्का दिया बुर एकदम गीली होने की वजह से लंड का मोटा सुपाड़ा बुर की गुलाबी पत्तियों को को फैलाते हुए अंदर की तरफ से सरकने लगा। जैसे-जैसे सुपाड़ा बुर के अंदर सरकने लगा वैसे वेसे अलका की सांस अटकने लगी उसे हल्का हल्का दर्द महसूस होने लगा। दर्द के मारे उसका मुंह खुला का खुला रह गया। राहुल की उत्तेजना इस बात से और ज्यादा बढ़ चुकी थी कि जिस बारे में वह सपना देख रहा था आज वो एकदम हकीकत हो रहा था। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह वास्तव में अपनी मां की चुदाई कर रहा था और उसकी मां उसके चुदवा रही थी। धीरे धीरे कर के लंड का पूरा सुपाड़ा अलका की बुर में उतर चुका था। उसकी सांसे टूट रहीे थी। सुपाड़ा घुसते हैं दर्द के मारे उसकी आंखों से आंसू छलक उठे पता नहीं है आंसू दर्द के थे या बरसों के बाद उसके बदन की प्यास बुझाने की खुशी के आंसू थे या पता लगा पाना बड़ा मुश्किल था कि तभी राहुल ने फिर से अपनी कमर को आगे की तरफ झटका और इस बार उसका लंड आधा बुर में घुस गया। अलका को ज्यादा दर्द महसूस होने लगा। अलका को यह समझ में आ गया था कि उसके बेटे का लंड वाकई में उसके पति से कुछ ज्यादा मोटा और लंबा है। अलका अपने दर्द को दबाने के लिए जैसे ही अपने होंठ को अपने दांतों तले दबाई तभी राहुल ने यह जोरदार झटका लगाया ओर पूरा का पूरा समूचा लंड बुर के सारे अवरोधों को धकेलते हुए सीधे बच्चेदानी से जा टकराया। और जैसे ही लंड का नुकीला सुपाड़ा अलका की बच्चेदानी से टकराया उसके मुंह से एक जोरदार चीख निकल गई। वह तो अच्छा हुआ कि बारिश का शोर इतना ज्यादा था वरना अपनी मां की चीख सुनकर सोनू जरूर कमरे तक आ जाता। अपनी मां की दर्द भरी चीख सुनकर राहुल अपने लंड को बुर की जड़ में डाले हुए बस ऊपर लेटा रहा। और दोनों चूचियों को धीरे-धीरे दबाने लगा अलका हाफं रही थी। उसे इसकी उम्मीद कतई नहीं थी कि इतना ज्यादा दर्द करेगा लेकिन धीरे-धीरे वह सामानय होती नजर आने लगी और राहुल फिर से लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। थोड़ी ही देर में अलका की चीख की जगह उसकी गरम सिसकारियां ने ले लिया। वह अब सिसकारी लेते हुए चुदाई का मजा लेने लगी। राहुल को बेहद आनंद आ रहा था अपनी मां को चोदने ने उसे उसकी मां विनीत की भाभी ओर नीलू से भी ज्यादा मजा देनेवाली लग रही थी।

पूरे कमरे में पुच्च पुच्च की आवाज गूंज रही थी और राहुल अपनी मां को अपनी बाहों में भर कर जोर जोर से कमर हिला रहा था। अलका भी अपने बेटे को बाहों में भर कर चुदाई का भरपूर मजा लेने लगेी। अलका ने ऐसी दमदार चुदाई का मजा कभी भी नहीं ली थी े इसलिए वह आज एक दम मस्त हो चुकी थी बार बार अपने बेटे का लंड उसे अपने बच्चे दानी पर महसूस हो रहा था जब की यहां तक उसके पति का भी लंड पहुंच नहीं पाया था। अलका इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी कि वह नीचे से या अपनी गांड को ऊपर उठा उठाकर अपने बेटे का लंड लेने की पूरी कोशिश कर रही थी और राहुल था की रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था।

करीब 30 मिनट के बाद हल्का की सिसकारियां बढ़ने लगी। और वह एकाएक अपने बेटे को अपनी बाहों में कस कर भलभला कर झड़ने लगी। अलका पहली बार जिंदगी में ऐसे चरमोत्कर्ष का अनुभव करते हुए झड़ी थी। थोड़ी ही देर में राहुल ने भी अपने गर्म ्रस को अपने मां की बुर में छोड़ने लगा। दोनों झड़ चुके थे अलका को लग रहा था कि बस अब पूरा हो चुका है लेकिन अभी तो पूरी रात बाकी थी।

 
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