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होता है जो वो हो जाने दो complete

राहुल से रसोई घर के अंदर का नजारा देखकर बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था। अपनी मां की मटकती हुई गांड को देख कर उसे पहले की बात याद आ गई और वह अपने आप को रोक नहीं पाया और रसोई घर में घुस गया। आटा गूथने के साथ ही अलका के भजन में हो रही हरकत की वजह से उसके कमर के नीचे के नीचे के भाग मैं अजीब तरह की थिरकन हो रही थी जिसकी वजह से अलका की भराव दार गांड ऊपर नीचे होते हुए मटक रही थी जोकि साड़ी के ऊपर से भी साफ-साफ महसूस हो रही थी। अलका यह नहीं जानती थी कि राहुल रसोईघर में आ चुका है , वह तो आटा गूथ होते हुए भी अपने सर पर आई मुसीबत के बारे में ही सोच सोच कर परेशान हो जा रहे थे वह उसे यकीन नहीं आ रहा था कि राहुल उसे इस बड़ी मुसीबत से छुटकारा दिला देगा वह परेशान सी रसोई घर में रसोई बनाने में जुटी थी, लेकिन उसका मन रसोई बनाने में बिल्कुल भी नहीं लग रहा था। दूसरी तरफ राहुल कुछ दिनों से अलकां के साथ कुछ भी नहीं कर पाया था। राहुल विनीत की भाभी और नीलू के साथ जमकर चुदाई का मजा लेने के बावजूद भी उसकी प्यास बुझी नहीं थी उसकी प्यास अभी भी अधूरी थी, क्योंकि जब तक वह अपनी मां को जमकर चोद नहीं लेता था तब तक उसकी प्यास बुझती नहीं थी। इसीलिए तो अपनी मां की भरावदार और मटकती हुई गांड को देखकर उसकी दबी हुई प्यास और ज्यादा बढ़ गई और अपनी प्यास को भुझाने के लिए वह अपनी मां की तरफ बढ़ने लगा। दूसरी तरफ अलका अपने ही ख्यालों में खोई हुई थी तभी उसे अचानक अपनी कमर के इर्द-गिर्द हथेलियों की पकड़ का एहसास होते ही जोर से उछल पड़ी लेकिन राहुल अपनी मां को कमर से कस के पकड़ कर अपने बदन से सटा दिया, अलका कुछ समझ पाती इससे पहले ही राहुल की पेंट मे बना तंबु सीधे उसके भरावदार गांड के बीचो-बीच जाकर चुभने लगा , अपनी गांड पर कड़क और मोटे वस्तु की चुभन को महसूस करते ही उसे समझते देर नहीं लगी कि वह वस्तु क्या है लेकिन फिर भी एकाएक इस तरह की हरकत से वह उछल पड़ी थी। वह नजरें घुमा कर पीछे देखी तो राहुल उसे पीछे से अपनी बाहों में भर कर गर्दन को चूम रहा था वह कुछ कहती इससे पहले ही राहुल ने अपने दोनों हथेलियों को ऊपर की तरफ ले जाकर ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को अपनी हथेली में भरकर जोर जोर से दबाने लगा और लगातार अपने तंबू को गांड की दरारों के बीच साड़ी के ऊपर से ही रगड़ने लगा। एकाएक हुए राहुल की इस हरकत से अलका एकदम से हड़बड़ा गई थी और हड़ब़ड़ाते हुए ही अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करते हुए वह बोली।

क्या कर रहा है राहुल एक तो वैसे ही सर पर इतनी बड़ी मुसीबत है । मेरा कहीं भी मन नहीं लग रहा है और तू है कि इस हाल में भी मस्ती करने की सूझ रही है और मुझे काम करने दे। ( इतना कहने के साथ वह अपने आप को छुड़ाने की पूरी कोशिश करने लगी लेकिन राहुल था कि आज मानने वाला बिल्कुल भी नहीं था। वह आज पूरी तरह से अपनी मनमानी करने पर उतारू हो चुका था इसलिए वह चुचीयों को दबाते हुए ही ब्लाउज के बटन खोलने लगा। अपने बेटे को ब्लाउज के बटन खोल के देख वह उसे रोकते हुए बोली।)

यह क्या कर रहा है बेटा मेरा मूड बिल्कुल भी नहीं है अभी रहने दे जब तक इस मुसीबत से छुटकारा नहीं मिल जाता तब तक मेरा मन कहीं भी नहीं लगेगा। ( अलका राहुल को ब्लाउज के बटन खोलने से रोकती रही हो राहुल खाकी उसके बोलते बोलते हैं ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया, किस्मत भी शायद राहुल के साथ ही थी क्योंकि शायद गर्मी की वजह से उसकी मां ने ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी। इसलिए ब्लाउज के बटन खुलते ही, अलका की दोनों बड़ी-बड़ी पके हुए आम की तरह गोल गोल चुचियां तुरंत राहुल की हथेलियों में आ गई। अपनी मां की नंगी नंगी बड़ी बड़ी चुचियों का स्पर्श हथेलियों में होते ही राहुल का लंड पेंट के अंदर ही फुंफकारने लगा। राहुल से बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था पेंट के अंदर तना हुआ तंबू वह लगातार अपनी कमर को अपनी मां की मादक भराव दार गांड पर रगड़ते हुए स्तन मर्दन का आनंद लेने लगा। अलका फिर भी उसे रोकते हुए बोली।

रहने दे राहुल मेरा मूड बिल्कुल भी नहीं है । छोड़ मुझे काम करने दे।

मम्मी मुड़ का क्या है? अभी 2 मिनट में तुम्हारा मूड बन जाएगा और हां आप किसी के बारे में भी तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। ( इतना कहने के साथ ही वह अपनी पेंट के बटन को एक हाथ से खोलने लगा। अपने बेटे की बात सुनकर अलका थोड़ी सी शांत होते हुए बोली ।)

क्या मतलब?

मतलब वतलब सब बाद में बताऊंगा मम्मी मुझे बस अपना काम करने दो। ( इतना कहने के साथ ही राहुल पेंट के बटन को खोल कर पेंट को घुटनों तक सरका दिया। अलका सोच में पड़ गई आखिर राहुल उसे चिंता ना करने के लिए कह रहा है तो जरूर कोई बात होगी। लेकिन वास्तव में उसका हाल इस समय बेहाल होने लगा था ना चाहते हुए भी राहुल ने उसके बदन में मदहोशी का आलम भर दिया था। वह भी करके आ सकती थी बदन की मस्ती होती ही कुछ ऐसी है कि लाख मुसीबत हम लाख परेशानी क्यों ना हो एक बार जब बदन के अंदर काम की मस्ती चढ़ती है तो सब कुछ भुला देती है यही हाल अलका का भी हो रहा था धीरे-धीरे उसकी आंखों में चुदास का सुरूर छाने लगा था।

उसके बेटे ने उसकी बड़ी बड़ी चूचियां को मसल मसल कर और उसके मस्ताए लंड की रगड़ को अपनी गांड के बीचो-बीच महसूस कर के वह भी चुदवासी होने लगी थी की तभी राहुल उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए अपने नंगे लंड को अलका की गांड के बीचों-बीच टीकाकर उसे फिर से अपनी बाहों में भरते हुए जोर-जोर से चूचियों को दबाने लगा जिसकी वजह से अलका की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई और उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी निकल गई।

सससससससहहहहहह.....राहुल , यह क्या कर रहा है राहुल दरवाजा भी खुला है कहीं सोनु ना आ जाए। ( अलका के बदन में पूरी तरह से उत्तेजना जा चुकी थी, राहुल ने फिर से उसके बदन में काम को जगा दिया था।

वैसे भी कुछ दिनों से अलका की बुर भी सूखी पड़ी थी विनीत के द्वारा दी गई धमकी की वजह से अलका का कहीं भी मन नहीं लगता था। हालांकि राहुल ने बहुत बार कोशिश किया अलका को चोदने का , लेकिन अलका ने हीं तबीयत ना ठीक होने का बहाना बनाकर राहुल को अपने से दूर करती रही लेकिन आज राहुल ने उसका मूड बदल दिया था अपनी कामुक हरकतों की वजह से एक बार फिर से अलका के बदन में चुदास की लहर भर दिया था। कुछ दिनों से सूखी पड़ी बूर की नहरो मे फिर से मदनरस का झरना फूट पड़ा था। उसकी बुर गीली होने लगी थी। अलका को डर था कि कहीं उसका छोटा बेटा सोनू रसोईघर में ना आ जाए लेकिन राहुल ऊसके डर को दूर करते हुए बोला।)

सोनू जब तक आएगा तब तक अपना काम हो जाएगा मम्मी बस आप जल्दी से अपनी साड़ी को उठा कर के थोड़ा सा झुक जाओ।( राहुल एकदम से चुदवासा हो चुका था। वह थोड़ा सा भी सब्र नहीं कर सकता था। वह अपने लंड को पकड़ कर आगे पीछे करके हिलाने लगा। उसकी मां की प्यासी थी इसलिए राहुल के कहने के साथ ही अपनी साड़ी को पकड़ कर ऊपर की तरफ उठाने लगी, अपनी मां को साड़ी ऊपर की तरफ उठाते हुए देखकर उसके कामुक अंदाज को देखकर राहुल का लंड उसकी हथेली में ही उत्तेजना के कारण ठुनकी मारने लगा। अगले ही पल देखते ही देखते राहुल की मां अपने हाथों से ही अपनी साड़ी को उठाकर कमर तक ऊठा दी , कमर तक साड़ी के उठते ही जो नजारा राहुल की आंखों के सामने आया उसे देखकर उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई। एक तो वैसे भी वह काफी दिनों के बाद अपनी मां की भरावदार बड़ी-बड़ी गांड को देख रहा था और उस पर भीे उसकी मां ने पैंटी नहीं पहनी थी। अपनी मां के बिना पैंटी पहनी हुई गांड को देखकर राहुल और ज्यादा चुदवासा हो गया था। उससे रहा नहीं गया और उसने एक चपत अपनी मां की गोरी गांड पर लगा दिया । चपत के पड़ते ही उसकी मां आउच की आवाज के साथ उछल पड़ी।

आहहहहहह क्या कर रहा है , लगती है।

मम्मी तुम तो आज बहुत सेक्सी लग रही हो ना तो आज तुमने ब्रा पहनी हो और ना ही चड्डी पहनी हो लगता है आज पहले से ही चुदवाने का इरादा था' इसलिए पहले से ही सारी तैयारी करके रखी थी। ( राहुल यह कहते हुए दो चार चपत और अपनी मां की गांड पर लगा दिया। जिसकी वजह से उसकी मां के मुंह से करारी आह निकल गई।)

आहहहहहह.... नहीं रे ऐसा बिल्कुल भी नहीं है वह तो आज करने जा रहे थे इसलिए ब्रा और पेंटी दोनों नहीं पहनी हो. बस अब बातों में वक्त जाया मत करो जल्दी से अपने लंड को मेरी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दो। कहीं ऐसा ना हो कि सोनू आ जाए और सारा मजा किरकिरा हो जाए।

( जिस तरह से राहुल बेकरार था अपनी मां को चोदने के लिए उसी तरह से उसकी मां भी अपने बेटे से चुदवाने के लिए तड़प रही थी। इसलिए राहुल भी ज्यादा देर ना करते हुए तुरंत अपनी मां को थोड़ा नीचे की तरफ झुकने का इशारा करते हुए उसकी पीठ पर हाथ रख दिया, अलका भी अपने बेटे के ईशारे को अच्छी तरह से समझ गई और खुद ही किचन पर थोड़ा सा झुक गई। अलका के झुकते ही राहुल ने अपने लिए जगह बनाई और अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की रसीली और पनियाई बुर के मुहाने पर टिका दिया, जैसे ही लंड का मोटा सुपाड़ा उसकी गरम और रसीली बुर की गुलाबी पत्तियों पर स्पर्श हुई वैसे ही अलका उत्तेजना से भर गई और उसका पूरा बदन कांप सा गया।

अलका की बुर गीली होने की वजह से राहुल का लंड धीरे-धीरे करके आराम से अलका की बुर की गहराई में धंस गया, काफी दिनों से राहुल की मां प्यासी थी' इसलिए अपने बेटे का लंड बुर के अंदर लेते ही उसकी सांसे भारी होने लगी। राहुल का लंड जैसे ही अपनी मां की बुर की गहराई नापने के लिए अंदर घुसा राहुल अपने दोनों हथेलियों से अपनी मां की चिकनी कमर को थाम कर अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए चोदना शुरू कर दिया। अलका की बुर में कुछ दिनों से लंड ने प्रवेश नहीं किया था इसलिए अपने बेटे का लंड अपनी बुर में महसुस करके अलका गदगद हुए जा रही थी। राहुल रसोई घर में अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया था उसे भी इस बात का डर लगा हुआ था कि कहीं सोनू आ ना जाए इसलिए अपने धक्कों को तेजी से लगाने लगा। अलका को भी जल्दी थी चुदाई के कार्यक्रम को खत्म करने के लिए क्योंकि उसे भी डर लगा हुआ था कि कहीं ऊसका छोटा बेटा आकर अपनी आंखों से सब कुछ देख ना ले ' इसलिए वह खुद ही अपनी भारी भरकम गांड को पीछे की तरफ ठेल ठेल कर अपने बेटे का साथ देते हुए उसका लंड अपनी बुर में ले रही थी।

गरम सिस्कारियों से पूरा रसोईघर गूंज रहा था। अलका की दोनो हथेलियां आटे में सनी हुई थी। राहुल अपनी मां की बुर में धक्के पर धक्का लगाया जा रहा था। वह भी अपनी मां की रसीली बुर को चोदते हुए मन ही मन में यह सोच रहा था कि वाकई में विनीत की भाभी कि बुर से और नीलू की बुर से कई गुना ज्यादा मजा उसकी मां की बुर से मिलता है। यह सब खयाल करके राहुल और ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था और कस कसके अपनी मां की बुर में धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था।

ससससहहहहहह..... राहुल और तेजी से चोद मुझे जल्दी जल्दी चोद मुझे मेरी बुर को पानी पानी कर दे देख ले दरवाजा खुला हुआ है कहीं तेरा छोटा भाई आकर देख लिया तो गजब हो जाएगा।

नहीं आएगा मम्मी वह भी जानता है कि उसकी मां लंड की प्यासी है। और उसकी प्यास को उसका बड़ा लड़का अपने मोटे ताजे लंड से चोदकर बुझा रहा होगा। इसलिए तो वह भी हम दोनों को इतना समय दे रहा है। ( इतना कहते हुए राहुल अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ा कर अपनी मां की बड़ी बड़ी चुचियों को थाम लिया और उसे हथेलियों में भरकर दबाना शुरु कर दिया। दोनों को बहुत मजा आ रहा था अलका की गरम सिस्कारियों को सुनकर राहुल के ऊपर मदहोशी छा रही थी।वह बहुत तेजी से अपने मां को चोदे जा रहा था। फच्च फच्च और सससससहहहहहह. आहहहहहह आहहहहहह की आवाज से पूरा रसोईघर गूंज रहा था। राहुल अभी तक अपनी मां को झुका कर चोद रहा था। उसकी दोनों टांगे नीचे जमीन पर टिकी हुई थी। राहुल ने अपने लंड को बाहर की तरफ खींचकर बाहर निकाल लिया वह अपनी जगह बदलना चाहता था लेकिन इस तरह से बुर से लंड को बाहर निकाल लेने से अलका पीछे नजरें घुमा कर तरसी आंखों से अपने बेटे को देखने लगी की अलका कुछ समझ पाती इससे पहले ही राहुल अपनी मां की एक काम को पकड़कर किचन पर रख दिया और फिर देखते ही देखते अपने लंड को फीर से अपनी मां की बुर मे पेल दीया । ईस. स्थिति में लंड सीधे बुर की गहराई मे ऊतर गया राहुल के साथ साथ उसकी मां को भी इस पोजीशन में ज्यादा मजा आने लगा राहुल तो अपनी मां की कमर पकड़ कर चोदना शुरू कर दिया। अलका की गरम सिसकारियां फिरसे रसोईघर मैं गूंजने लगी । अलका रह रहकर अपनी भारी-भरकम गांड को पीछे की तरफ ठेलकर अपने बेटे का साथ दे रही थी। कुछ देर तक किचन में जबरदस्त चुदाई चलती रही और तभी गरम सिस्कारियों के साथ अलका का बदन अकड़ने लगा और फिर तेज धक्कों के साथ दोनों एक साथ झड़ने लगे । राहुल एक बार फिर से अपनी मां को खुश कर दिया था और साथ ही अपना भी संतुष्ट हो चुका था। राहुल जल्दी से रसोई घर के बाहर आ गया क्योंकि किसी भी वक्त सोनू आ सकता था। काफी दिनों से प्यासी अलका की भी प्यास बुझ चुकी थी। अलका भी खाना बनाने में जुट गई।

राहुल और अलका दोनों का काम हो चुका था थोड़ी ही देर में सोनू के घर पर आ गया वह पड़ोस में दोस्तों के साथ पढ़ने के लिए गया था। राहुल के सिर से बहुत बड़ा बोझ हट चुका था विनीत से उसे छुटकारा मिल गया था लेकिन इस छुटकारा पाने के लिए राहुल को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी अपनी दो दो मासूकाअो को छोड़ना पड़ा था। जिनके साथ अपनी जिंदगी के बेहतरीन और हसीन पल गुजारे थे जिनको देखकर वह बदन के भूगोल को बदन की रूपरेखा को अच्छी तरह से समझा और जाना था। ऐसी खूबसूरत दोनों औरतों को अपनी मां अलका के लिए छोड़ चुका था। क्योंकि दोनों के खूबसूरत होने के बावजूद भी अलका की खूबसूरती दोनों पर भारी पड़ती थी।

थोड़ी ही देर बाद अलका ने सभी के लिए खाना परोसा और तीनो साथ में बैठकर खाना खाने लगे, खाना खाते समय अलका का ध्यान फिर से वींनीत पर चला गया

उसे फिर से उसकी दी हुई धमकी याद आने लगी। राहुल ने उसे कहा तो था कि चिंता करने की जरूरत नहीं है लेकिन फिर भी उसका मन नहीं मान रहा था। फिर जैसे तैसे करके उसने खाना खा ली सोनू के सामने उसे विनीत के बारे में बात करना उचित नहीं लगा इसलिए खाना खाने के बाद अलका राहुल से जरुरी बात करने के लिए अपने कमरे में आने को बोली। इतना कहकर वह रसोई घर की सफाई में लग गई।

कमरे में आने की बात सुन कर रहा हूं प्रसन्ना रहा था क्योंकि वही सोच रहा था कि रसोई घर की चुदाई से शायद उसकी मां की प्यास और ज्यादा बढ़ गई है जिसे बुझाने के लिए वह अपने कमरे में बुला रही है। राहुल के मन में घंटियां बजने लगी क्योंकि बहुत दिनों बाद मौका मिला था सारी रात अपनी मां की चुदाई करने का' वह बहुत खुश नजर आ रहा था और खुश होता अभी क्यों नहीं आखिर इसीलिए तो उसने दो दो औरतो को ठुकरा चुका था।

खेर अल का मन में ढेर सारे सवाल लिए अपना साफ सफाई का काम पूरा करके अपने कमरे में चलीे गई। राहुल को भी इसी पल का इंतजार था वह भी अपनी मां के पीछे पीछे उसके कमरे में चला गया। कमरे में घुसते ही वह अपनी मां को देखता ही रह गया ऊसकि मां आईने के सामने अपने कपड़े उतार रही थी वह सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में ही थी लंबे लंबे घने बाल उसकी कमर तक आ रहे थे। अलका आईने में देखते हुए अपने ब्लाउज के बटन को खोल रही थी । यह देखते ही राहुल से रहा नहीं गया और वह अपनी मां को एक बार फिर से पीछे से जाकर अपनी बाहों में भर लिया। लेकिन इस बार अलका अपने बेटे पर नाराज होते हुए बोली।

 


अब हट जा, मुझे परेशान मत कर ( इतना कहने के साथ ही अलका अपने बेटे का हाथ झटकने लगी, अपनी मां का यह व्यवहार राहुल को बिल्कुल समझ में नहीं आया और वह फिर से अपनी मां को पीछे से बांहों में भरता हुआ बोला।)

क्या हुआ मम्मी ऐसा क्यों कह रही हो?

तो और क्या कहूं। ( अलका के ब्लाउज के बटन खोल चुके हैं जिसकी वजह से उसकी बड़ी बड़ी चूचियां सामने आईने में नंगी नजर आ रही थी। राहुल की नजर सामने आईने में नजर आ रही है अपनी मां की बड़ी बड़ी चूची ऊपर पड़ी तो वह उन्हें पकड़ने से अपने आप को रोक नहीं सका और वह अपनी मां की बड़ी बड़ी चुचियों को हथेली में भरते हुए। )

मैं कुछ समझा नहीं मम्मी तुम कहना क्या चाहती हो?

तुझे जैसे मालूम ही नहीं कि मैं क्या कहना चाहती हूं मैं उसी विनीत के बारे में कह रही हूं। उसके बारे में सोच सोच कर मेरी मुसीबत बढ़ी जा रही है मेरा कहीं मन नहीं लग रहा है और तू है कि बस मुझ पर टूट पड़ता है अपनी प्यास बुझाने के लिए कुछ मेरे बारे में तो ख्याल कर कैसे छुटकारा पांऊ ऊस मुसीबत से। कहीं ऐसा ना हो कि तेरी आंखों के सामने ही हो मेरे साथ सब कुछ.....( इतना कहने के साथ ही अलका खामोश होकर राहुल को आईने मे देखने लगी। राहुल अपनी मां की बात को सुनकर और उसकी खूबसूरती को आईने में देखकर जोर से अपनी हथेलियों का दबाव चुचियों पर बढ़ाते हुए हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर अलका आश्चर्य से राहुल को घुरने लगी लेकिन राहुल हंसता हुआ बोला।)

अच्छा आप विनीत को ले करके इतना चिंतित हैं तो एक बात कहूं अब तुम विनीत के बारे में बिल्कुल भी सोचना बंद कर दो।

क्या मतलब मैं तेरी बात को समझीे नहीं?

मतलब यह कि अब तुम्हारे सिर से विनीत नाम की मुसीबत बन चुकी है अब वह हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता उसे मैंने रास्ते पर ला दिया है। ( राहुल अपनी मां की तनी हुई निप्पल की उंगलियों के बीच मसलते हुए बोला।)

अलका यह सुनकर एकदम चौंक गई और खुशी के मारे राहुल की तरफ घूमते हुए बोली।

सच राहुल तू सच कह रहा है ना ।

हां मम्मी मैं बिल्कुल सच कह रहा हूं।

खा मेरी कसम कि यह सच है कि तुम मुझे उससे छुटकारा दिला दिया।

तुम्हारी कसम मम्मी ने बिल्कुल सच कह रहा हूं अब वह दिन हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता मैंने आज ही उसको अच्छी तरह से समझा दिया हूं आइंदा से वह तुम्हारे रास्ते में भी नहीं आएगा।

ओह मेरे लाल तू नहीं जानता कि तूने मुझे कितनी बड़ी मुसीबत से निजात दिला दिया। ( इतना कहने के साथ ही अलका राहुल को अपनी छाती से लगा ली ओर उसे कसके अपनी चुचियों पर दबा दी । अलका बहुत खुश नजर आने लगी वह लगातार अपने बेटे के ऊपर चुंबनों की बारिश करने लगी। राहुल तो अपनी मां की हरकत एकदम उत्तेजना के मारे गदगद हुआ जा रहा था। अलका थी की रुकने का नाम ही नहीं ले रहीे थी। आखिरकार उसके बेटे ने महीनों के बाद उसे इस मुसीबत से छुटकारा दिलाया था। जिस मुसीबत की वजह से वह महीनों से चिंताग्रस्त थी उसके बारे में सोच सोच कर वह अंदर ही अंदर टूटते जा रही थी। अलका को ऐसा महसूस हो रहा था कि वह महीनों की कैद से आज आजाद हुई है उसकी चुंबनों की बारिश राहुल के ऊपर रुक ही नहीं रही थी। राहुल तो अपनी मां की खुशी भरी कामुक हरकत की वजह से उत्तेजना के परम शिखर पर पहुंच गया उसके पेंट मै ऊसका टनटनाया हुआ लंड तंबु बनाए हुए था। अलका अपने बेटे के चेहरे पर कोई भी कोना बाकी नहीं रहने देना चाहती थी वह सब जगह पर चुंबन की बारिश कर रही थी कि तभी राहुल अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाया और उसने तेरी मां के चेहरे को दोनों हाथों में भरकर अपने होठ को उसके होठ पर रखकर चूसना शुरू कर दिया। मुसीबत से छुटकारा पाने की खुशी और अपने बेटे के रसीले चुंबन की वजह से उसके बदन में भी उत्तेजना का संचार होने लगा और वह भी अपने बेटे का साथ देते हुए उसे अपनी बाहों में भर कर अपनी जीभ को अपने बेटे के मुंह में डाल कर चूसने लगी।

थोड़ी ही देर में दोनों मां-बेटे कामोतेजना में सराबोर हो गए। अलका एक तरफ चुंबन का मजा लेते हुए अपने हाथ से अपने बेटे के पेंट के बटन को खोलना शुरू कर दी और अगले ही पल उसने पेंट के बटन खोल कर उसे नीचे घुटनों तक सरका दी । लंड को पेंट की कैद से आजाद होते हैं अलका बिना एक पल भी बनाए तुरंत खुद नीचे घुटनो के बल बैठ गई और अपने बेटे के लंड को अपने हाथों से पकड़कर उसके सुपाड़े को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दी। इतनी तेज गति से यह सब हुआ था कि राहुल को कुछ पता ही नहीं चला लेकिन जैसे ही उसका लंड उसकी मां के मुंह में गया वैसे ही राहुल का पूरा बदन उत्तेजना के मारे झनझना गया। इस समय सबकुछ बड़ी तेजी से हो रहा था राहुल और अलका दोनों एक पल भी गवारा नहीं चाहते थे इसलिए अलका भी जल्दी जल्दी अपने बेटे के लंड को आइसक्रीम कौन की तरह मुंह के अंदर डालकर जीभ को गोल-गोल घुमाते हुए चूसने लगी। राहुल भी अपनी मां के मुंह को ही बुर की तरह अपनी कमर को आगे पीछे करके चोदने लगा। अलका को बहुत मजा आ रहा था आज अपने बेटे का लंड चूसने में। उसके मुंह से गगगगगगगगगग. की आवाजें आ रही थी। राहुल अपनी कमर को आगे पीछे हिलाता हुआ बोला।

ओहहह मम्मी बहुत मजा आ रहा है तुम बहुत सेक्सी हो तुम कितनी अच्छी तरह से मेरा लंड चूस रही हो देखो तो सही मेरे लंड का साईज और ज्यादा बढ़ गया है।

राहुल अपनी मां के द्वारा लंड चुसाई का मजा लेते हुए गंदी गंदी बातें बोले जा रहा था और उसकी मां अपना सारा ध्यान बस अपनी बेटे का लंड चूसने में लगा रही थी। कुछ देर तक दोनों मां बेटे इस तरह से मजा लेते रहें लेकिन आज अलका खुद कुछ ज्यादा मूड में नजर आने लगी थी इसलिए वह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकालकर खड़ी हो गई और फिर से अपने बेटे के होठ को चूसते हुए उसे बिस्तर के करीब ले जाने लगी जैसे ही बिस्तर करीब आया वह राहुल को धक्का देकर बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दी। राहुल अपनी मां की इस कामुक रूप को देखकर बहुत ही ज्यादा उत्तेजना से भर चुका था। उसका लंड भी अपनी औकात में आ चुका था। राहुल बिस्तर पर पेट के बल लेटा हुआ अपनी मां के कामुक रूप को देख रहा था और उसकी मां अपनी पेटीकोट की डोरी को खोलते हुए राहुल से बोली

आज तू नहीं बल्कि मैं तुझे चोदूंगी। (इतना कहने के साथ ही अलका अपनी पेटीकोट की डोरी को खोलकर अपनी पेटीकोट को नीचे गिरा दी। पेटीकोट के नीचे गिरते ही अलका पूरी तरह से नंगी हो गई क्योंकि आज उसने सुबह से ही पेंटी भी नहीं पहनी थी। राहुल अपनी मां के नंगे बदन को देख कर एकदम से चुदवासा हो गया और अपने हाथ से लंड को पकड़कर मुठियाने लगा। अपने बेटे को लंड हिलाते हुए देखकर अलका मुस्कुराई और खुद भी अपनी हथेली को अपनी रसीली बुर पर मसलते हुए बिस्तर पर अपने घुटनों को रखकर चढ़ते हुए बोली ।

आज बेटा मैं तेरा पूरा पानी नीचोड़ लुंगी, आज देखना मैं तुझे कैसे चोदती हूं।

( इतना कहने के साथ ही अलका अपने बेटे के ऊपर सवार हो गई उसने अपने एक पैर के घुटने को उसकी दांई कमर के करीब रखी और दूसरे घुटने को बांए।

राहुल को कुछ करने की जरूरत नहीं थी वह बस आंख फाड़े अपनी मां को देखे जा रहा था। उसके देखते ही देखते अलका ने अपनी बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसके गरम सुपाड़े को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच टीकाई और अपने भारी भरकम गांड का दबाव लंड पर बढ़ाना शुरू कर दी। देखते ही देखते राहुल का लंड कचकचाते हुए उसकी मां की रसीली बुर में घुसने लगा।

देखते ही देखते राहुल का समुचा लंड उसकी मां की बुर की गहराई में कहां खो गया उसे पता ही नहीं चला। अलका पूरी तरह से अपनी बेटे के लंड को अपनी बुर में ले चुकी थी वह अपने बेटे की जांघो पर बैठ चुकी थी।

अलका धीरे धीरे अपने बेटे के लंड के ऊपर उठना बैठना शुरु कर दी थी। अलका को आज एक नया ही अनुभव हो रहा था आज पहली बार बार कुछ ज्यादा ही खुल कर अपने बेटे के सामने आई थी। यह निश्चित रुप से विनीता से छुटकारा दिलाने का इनाम था राहुल के लिए। और राहुल भी अपनी मां के द्वारा दिए गए इस ईनाम का पूरी तरह से लाभ उठाते हुए अपनी मां की बड़ी बड़ी चुचियों को अपने हथेली में भरकर दबाने लगा है अलका भी धीरे-धीरे अपने बेटे के लंड पर उठक बैठक करने की गति को बढ़ा रही थी। थोड़ी ही देर में अलका अपनी लय पकड़ ली और गर्म सिस्कारियों के साथ अपने बेटे को चोदने लगी। राहुल भी रह रह कर नीचे से अपनी कमर को उछाल दे रहा था।

दोनों को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी। अलका के उठने-बैठने की वजह से उसकी बड़ी बड़ी चूचियां हवा में उछल रही थी जिसे राहुल अपनी हथेलियों में दबाकर उसे जोर जोर से मसल रहा था।

ससससससहहहहहहहह आाहहहहहह राहुल आज देख मैं तुझे कैसा चोदती हु। आजा तुझे पानी पानी कर दूंगी तूने भी मुझे विनीत से छुटकारा दिला कर एक बहुत बड़ी मुसीबत से बचाया है इसलिए तू जो कहेगा वह मैं करुंगी आज तुझे मे खुश कर दुंगी।

अलका बेहद कामोतेजना से भर चुकी थी और अपने बेटे को मुसीबत से छुटकारा दिलाने के लिए आज की रात इनाम के तौर पर पेश कर रही थी। राहुल भाई मौके का भरपूर फायदा उठाते हुए चुदाई का आनंद ले रहा था। थोड़ी देर तक यह घमासान चुदाई चलती रही और इसके बाद दोनों की सांसे तेज चलने लगी । दोनों के मुंह से एक गरम आह निकली और दोनों भलभला कर झड़ने लगे। दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर बिस्तर पर उसी तरह से लेटे रहे। कुछ ही देर में दोनों की सांसे सामान्य होने लगी तो अलका बोली।

तूने मुझे आज बहुत खुशी दी है कि जिसके बारे में मैं बयां नहीं कर सकती इसलिए आज की रात में तुझे इनाम की दूर कर देती हूं तुझे मेरे साथ जो करना है सब कुछ कर लो आज मैं तुझे पूरी तरह से खुश कर दूंगी।

खुश तो तुमने मुझे हमेशा करती आई हो लेकिन यह इनाम में आज नहीं बल्कि परसों के दिन मेरे जन्मदिन पर लूंगा। ( राहुल अपनी मां की नंगी पीठ को सहलाते हुए बोला। ) लेकिन हम इस बात का वादा करो कि तुम मुझे उस दिन बिल्कुल भी ना इनकार करोगी ना नाराज करोगी ।

ठीक है मैं वादा करती हूं कि तुझे उस दिन बिल्कुल भी नाराज नहीं करुंगी तु जैसा चाहेगा जैसे चाहेगा वैसे मैं तुझे चोदने दुंगी।

कहीं उस दिन तुम अपने वादे से मुकर मत जाना।

नहीं नहीं पूरी तरह से अपना वादा निभाऊंगी मैं अपना वादा तोड़ुगी नहीं। ( इतना कहने के साथ अलका मुस्कुराते हुए अपने बेटे को चूमने लगी और उसके बाद वह दोनों मैं सारी रात बिस्तर पर घमासान चुदाई को जारी रखा।)

 
सुबह अलका जब उठी तो उसे कुछ महीनों से हो रही अजीब-अजीब ख्यालो से मुक्ति का एहसास हो रहा था उसे आज बहुत ही बेहतर महसूस हो रहा था। बहुत बड़ी मुसीबत से छुटकारा पाने का एहसास उसके तन बदन को रोमांच से भर दे रहा था। अलका की नजर अपने बिस्तर पर अपने ही बगल में निश्चिंत होकर सो रहे अपने बेटे पर गई तो, उसके चेहरे पर खुशी और संतुष्टि भरी मुस्कान तैरने लगी। अलका की नजर राहुल के मासूम चेहरे पर एक ही रह गई उसे राहुल का मासूम चेहरा देखकर यकीन नहीं हो पा रहा था कि यह वही पहले वाला सीधा साधा और शर्मिला राहुल है जो एक समय था जब लड़की और औरतों से दूर भागता रहता था। उनसे बात करने में कतराता था और तो और वह मेरे से भी बात करता था तो अपनी नजरों को मेरे बदन पर टीका नहीं पाता था उसकी नजरें हमेशा इधर उधर ही घूमती रहती थी। कुल मिलाकर वह पूरी तरह से एकदम शर्मिला बच्चा ही था लेकिन अब यही शर्मिला बच्चा औरतों के सुख का साधन बन चुका है। राहुल के चेहरे को देख कर अलका अच्छी तरह से जानती थी कि उसके हथियार का लंबाई और मोटाई का पता लगा पाना बड़ा ही मुश्किल काम है । वह राहुल के सिर पर हाथ फेरते हुए मन ही मन में सोची कि आज इसका हथियार इतना ज्यादा तगड़ा हो चुका है कि वह मेरी ही क्या किसी भी लड़की और औरत को पूरी तरह से संतुष्टि प्रदान करने में सक्षम है। अलका एक तरह से अपने बेटे पर गर्व कर रही थी। क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि अगर राहुल ना होता तो उसके पास बहुत पहले ही डगमगा गए होते और ना जाने क्या हाल होता।

अलका अपने बदन पर गौर की तो शरमा गई क्योंकि इस समय भी वह संपूर्ण नग्नावस्था में बिस्तर पर बैठी हुई थी और उसके बगल में उसका बेटा राहुल भी पूरी तरह से नंगा लेटा हुआ था। अपनी हालत और अपने बेटे की हालत को देख कर उसके चेहरे पर मुस्कुराहट फैल गई। उसे रात वाली घटना याद आ गई, उसे वापस याद आ गया जब उसने विनीत से छुटकारा पाने की खुशी में एकदम बेशर्म होकर के खुद ही अपनी बेशर्मी और कामुकता का प्रदर्शन करते हुए अपने बेटे के खड़े लंड पर सवार होकर के और खुद ही उसके तगड़े लंड को पकड़ कर उसके गरम सुपाड़े को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच रख कर के ऊपर बैठना शुरु की थी और तब तक बैठती रही जब तक की उसके बेटे का लंड उसकी बुर की गहराई में खो नहीं गया।

ऊफ्फफफ...... उस पल को याद करके इस समय भी अलका के बदन में झनझनाहट सी फैल जा रही थी।

अलका रात को खुद की ,की गई हरकत की वजह से,,,शर्मिंदगी महसुस कर रही थी । लेकीन अलका को ईस बेशर्मी से भरी हरकत में भी बहुत ही ज्यादा आनंद की प्राप्ति हुई थी। अलंका की नजर जैसे ही खुद की बड़ी बड़ी चूचीयो पर गई तो उसे वह पल याद आ गया जब राहुल दोनों हाथों में भर भर कि इसे मुंह में लेकर चूसते हुए पीता था। अलका सोच-सोचकर उत्तेजना से भरी जा रही थी। । तीन-चार दिनों से वह ऑफिस नहीं जा रही थी विनय से छुटकारा पाने की बात से वह सोच रही थी कि आज ऑफिस जा कर देख लो और रास्ते में यह भी पता चल जाएगा कि विनीत का दिमाग ठिकाने आया कि नहीं। राहुल के स्कूल जाने का भी समय हो रहा था इसलिए वह राहुल को जगा कर नहाने के लिए जाने लगी तब तक राहुल भी नींद से जाग गया था। अलका अच्छी तरह से जानती थी कि सोनू अभी सो रहा होगा इसलिए वह निश्चिंत होकर बिल्कुल नंगी हालत नहीं कमरे के बाहर जाने लगी तो बिस्तर पर लेटे हुए राहुल बोला।

रुको मम्मी मैं भी चलता हूं नहाने आज हम दोनों साथ में ही रहेंगे क्योंकि अभी सोनू सो रहा होगा तब तक हम दोनों नहइतना कहने के साथ ही राहुल भी बिस्तर पर से बिल्कुल नग्नावस्था मे हीं खड़ा हो गया अलका की नजर जब राहुल की जांगो के बीच गई तो वह मुस्कुरा दी। क्योंकि राहुल का लंड सुसुप्तावस्था में भी तगड़ा लग रहा था। साथ में नहाने की बात से अलका के भजन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई क्योंकि आज पहली बार वह अपने बेटे के साथ बिल्कुल नंगी होकर के नहाने का मजा लेने वाली थी। लेकिन यह सब जल्दी से मिटाना चाहती थी क्योंकि थोड़ी ही देर में सोनू भी जगने वाला था इसलिए वह राहुल से बोली।

तो चलो जल्दी करो राहुल सोनू के भी उठने का समय हो गया है। ( इतना कहने के साथ ही वह कमरे का दरवाजा खोल घर के बाहर निकल गई उसे मालूम था कि सोनू अभी सोया हुआ है लेकिन फिर भी वह चारों तरफ नजर घुमाकर तसल्ली करने लगी कि कहीं सोनू जग तो नहीं गया है। अलका ईस एकदम नंगी होकर चहलकदमी करते हुए बाथरूम की तरफ जा रही थी तब तक राहुल भी कमरे के बाहर आ गया और अपनी मां के पीछे पीछे उसकी मटकती हुई गांड को देखकर जाने लगा। अलका मस्ती में चलते हुए बाथरूम के दरवाजे तक पहुंच गई लेकिन जब तक राहुल बाथरूम के दरवाजे तक पहुंचता उसका सोया हुआ लंड उसकी मां की बड़ी-बड़ी गांड को मटकता हुआ देखकर धीरे धीरे जाग गया। राहुल की ईच्छा ऊसकी मां की गांड को देखकर फीर से चोदने की करने लगी । ईसलिए बाथरुम मे घुसते ही वह अपनी मां के बदन से लिपट गया ऊसकी मा भी बीते पल को याद करके पहले से ही गरमाई हुई थी । ईसलिए वह भी राहुल को चुमने चाटने लगी । राहुल का लंड तो पहले से ही पुरी तरह से तैयार था । वह एकबार फीर से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को देखकर चुदवासा हो गया था । ईसलिए बिना पल गंवाए अपनी मां की पीठ पर हथेली रखकर नीचे की तरफ दबाते हुए ऊसे नीचे झुकने का ईसारा कीया ऊसकी मां भी अपने बेटे का इशारा कहां कर तुरंत नीचे झुक गई और राहुल पीछे से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को अपनी हथेली में भरकर अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया। दोनों की सांसे एक बार फिर से तेज होने लगी दोनों एक बार फिर से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगे राहुल जोर-जोर से अपनी मां की बुर में लंड पेले जा रहा था। और राहुल के हर धक्के के साथ अलका की सिसकारी निकल जा रही थी । दोनो जमकर चुदाई का मजा लेते रहे और थोड़ी ही देर में दोनों भलभलाकर झढ़ने लगे।

इसके बाद राहुल और अलका दोनों एक दूसरे के बदन पर साबुन लगा कर बहुत ही अच्छे से नहाने का मजा लिए।

दोनों बाथरुम से बाहर आ चुके थे अलका खाना बनाने में जुट गई थी वह सबके लिए नाश्ता तैयार कर रही थी। अलका के मन में अभी भी विनीत को लेकर शंका थी इसलिए वह राहुल को नाश्ता देते समय राहुल से बोली।

राहुल क्या मैं अब ऑफिस जा सकती हूं?

हां मम्मी बिल्कुल जा सकती हो।

नहीं मेरा मतलब यह था की कहीं वह फिर से मुझे परेशान तो नहीं करेगा।

नहीं मम्मी अब आप बेफिक्र रहो करो फिर जाइए वह आपको बिल्कुल भी परेशान नहीं करेगा यकीन ना आए तो शाम को ही आजमा लेना।

( राहुल की बात सुनकर अलका बहुत खुशी हुई। राहुल स्कूल जाने से पहले अपनी मां से बोला।)

मम्मी कल का दिन तुम्हें याद तो है ना कल मेरा जन्मदिन है।

हां बेटा मुझे पूरी तरह से याद है मैं भला कैसे भूल सकती हूं। ( इतना कहकर अलका मुस्कुरा दी और राहुल भी मुस्कुराकर स्कूल की तरफ चल दिया।)

 
दोनों बच्चों को स्कूल भेजकर खुद भी तैयार होने के लिए अपने कमरे में चली गई आज बहुत दिन बाद उसे ऑफिस जाने का मौका मिला था वरना विनीत के डर से वह कुछ दिनों से ऑफिस नहीं जा पाई थी और घर में ही बैठे बैठे बोर भी हो रही थी और विनीत की वजह से डरी सहमी भी रहती थी। लेकिन जब राहुल ने बताया कि वीनीत का दिमाग ऊसने ठिकाने लगा दिया है तब उसका मन प्रसन्न हुआ विनीत से छुटकारा पाने की बातों से उसे ऐसा लगने लगा कि जैसे कि उसे एक नई जिंदगी मिली हो। उसकी प्रसन्नता का ठिकाना ना था वह मन में गीत गुनगुनाते हुए आईने के सामने खड़ी होकर तैयार होने लगी।

अलका पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी संभोग के असीम सुख की प्राप्त कर करके एक अाह्लादक एहसास की वजह से उसकी खूबसूरती और उसके बदन का उठाव और कटाव दिन ब दिन ऊभरकर ओर भी ज्यादा उभरकर खूबसूरत हो गया था।

अलका अपनी छातियों का उभार और अपने भरे हुए बदन को आईने में देखकर अपनी खूबसूरती पर खुद ही शरमा गई और गर्वित होने लगी। दिन ब दिन बढ़ती उसकी खूबसूरती का राज वो अच्छी तरह से जानती थी। वह जानती थी कि उसके बेटे के साथ जबरदस्त संतुष्टि भारी चुदाई की वजह से ही उसकी खूबसूरती दिन ब दिन निखरती जा रही थी। जेसे ही उसकी नजर उसकी खुद की बड़ी बड़ी चुचियों पर गई तो अपनी चुचियों के उभार को देख कर और उसकी खूबसूरती से वह खुद ही चौंधिया गई और वह अपने दोनों हाथों को अपनी दोनों गोलाइयों पर रखे बिना ना रह सकी। एक बार अपनी दोनो चुचियों को अपनी हथेली में भरकर ब्लाउज के ऊपर से ही दबा कर वह आईने में अपने रूप को देखने लगी और खुद ही शरमा कर मुस्कुरा दी।

उसकी नजर दीवार पर टंगे घड़ी पर गई तो झट से बिस्तर पर से अपना पर्श उठाई और कमरे से बाहर आ गई। वह घर से निकल कर जल्दी-जल्दी सड़क पर जाने लगी। अलका इस उम्र में भी क़यामत से कम नहीं लगती थी आज भी वह अपनी खूबसूरती के जलवे बिखेर रही थी।

उसके बदन की बनावट और कटाव देखकर अच्छे अच्छों का पानी निकल जाता था। अपनी बेटी की उम्र की लड़कियों को भी वह बराबर का टक्कर देती थी। इसका ताजा उदाहरण राहुल ने दोनों औरतों को अपनी मां अलका के लिए ठुकरा कर दे दिया था।

अलका जल्दी-जल्दी मस्ती के साथ सड़क पर अपनी गांड मटकाते हुए चली जा रही थी। उसकी भरावदार गांड की थिरकन किसी को भी मदहोश कर देने में सक्षम थी। सड़क पर आते-जाते ऐसा कोई भी मर्द नहीं होगा जिसकी नजर अलका के मदभरे रस टपकाते बदन पर ना पड़े। आगे से आ रहे राहगीर की नजर सबसे पहले उसकी बड़ी बड़ी चुचियों पर ही जाती थी और पीछे से आ रहे राहगीर की नजर उस की भरावदार बड़ी-बड़ी मटकती गांड. पर।

अलका अपनी मस्ती में कदम बढ़ाते हुए और अपनी गांड मटका के ऑफिस की तरफ चली जा रही थी आज बहुत दिनों बाद खुली सड़क पर इस तरह से चलने पर उसे राहत महसूस हो रही थी। ऑफिस जाते समय रास्ते में ही उसे याद आया कि राहुल का जन्मदिन आने वाला था और उसने उसे पूरी तरह से खुश करने का वादा किया था। अपने किए हुए वादे का मतलब वह अच्छी तरह से जानती थी इसलिए वह उस वादे को याद करके शरमाते हुए मन ही मन में मुस्कुरा दी। थोड़ी ही देर में वह अपने ऑफिस पहुंच गई आज खुशी-खुशी में ऑफिस का काम करके अपने मन को हल्का महसूस कर रही थी।

धीरे-धीरे घड़ी की सुई अपनी धुरी पर घूमती रही और शाम का वक्त हो गया। सपने निश्चित समय पर ऑफिस छूट चुकी थी और अलंकार ऑफिस से निकल कर अपने घर की तरफ जा रही थी। सुबह तक सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन ऑफिस से छूटने के बाद उसके मन में फिर से विनीत नाम का भूत घूमने लगा उसे फिर भी नहीं कर नाम से ही चिंता होने लगी। अलका को विनीत के द्वारा दी गई धमकी बार-बार याद आने लगी। अलका मन ही मन में घबराने लगीं उसके मन में ढेर सारे सवाल ऊठने लगे। विनीत के बारे में सोचते हुए वह सड़क पर चली जा रहे थे उसे अब डर लगने लगा था क्योंकि बाजार नजदीक थी और वहीं पर अक्सर उससे मुलाकात हो जाती थी। उसके मन में यह शंका बनी हुई थी कि अगर कहीं विनीत नहीं माना और फिर से उसे धमकाने लगा और उसके साथ मनमानी करने के लिए ब्लैकमेल करने लगा तो वह क्या करेगी, लेकिन राहुल नहीं तो उसे कहा था कि विनीत का दिमाग उसनें ठिकाने लगा दिया है अब वह उसे कभी भी परेशान नहीं करेगा और उसी के कहने पर तो मैं आज ऑफिस आई थी। यही सब खयाल रह-रहकर अलका के मन में उठ रहे थे और वह परेशान भी हो रही थी यही सब सोचते सोचते बाजार आ गया उसकी दिल की धड़कनें बढ़ रही थी और वह जल्दी जल्दी अपने कदम बढ़ाते हुए बाजार से निकल जाना चाहती थी।

वह मन ही मन भगवान से दुआ कर रही थी कि वीनीत उसे रास्ते में ना मिले और वह बिना किसी मुसीबत के अपने घर चली जाए , धीरे धीरे करके वह बाजार के अंतिम छोर पर पहुंच गई जहां पर बाजार खत्म होता था उसकी चिंता कुछ कम होने लगी मुझे लगने लगा कि वहां पर ही मैं अभी नींद से उसका सामना नहीं होगा लेकिन उसका सोचना ही था कि सामने से उसे वीनीत मोटरसाइकिल पर आता दिखाई दिया उस पर नजर पड़ते ही अलका के दिल की धड़कने डर के मारे तेज हो गई। उसकी चाल कुछ धीमी हो गई ऐसा लग रहा था कि उसके पैर आगे बढ़ने से इंकार कर रहे हो धीरे धीरे विनीत करीब आ रहा था। अलका डर के मारे उसकी तरफ से अपनी नजरें फेर भी ले रही थी लेकिन रह रहकर उसकी नजरें बार बार वीनीत की तरफ चली जा रही थी। तभी कुछ करीब आया तो विनीत की नजर भी अलका के ऊपर पड़ गई उसकी नजर एक पल के लिए अलका के कामुक भरावदा़र बदन पर ही टिकी रह गई। अलका को और उसके बदन की खूबसूरती को देखकर विनीत के मन में लड्डू फूटने लगे और उसके मुंह में पानी आ गया। उसकी टांगों के बीच के हथियार में हरकत होने लगी। लेकिन तभी उसे राहुल के द्वारा दी गई शिकस्त के बारे में याद आ गया । उसे याद आ गया कि राहुल ने उसे कितना बेबस कर दिया था कि वह उसकी आंखों के सामने उसकी भाभी और उसकी होने वाली बीवी के साथ शारीरिक संबंध बना लिया और वह कुछ भी नहीं कर पाया। वह अच्छी तरह से समझ गया था कि राहुल से उलझना ठीक नहीं है।

अलका सड़क के बाएं तरफ से जा रही थी और विनीत सड़क के बाएं तरफ से आ रहा था दोनों बिल्कुल करीब आमने सामने आने ही वाले थे कि दोनों की नजरें आपस में टकराई , अलका विनीत के नजर से नजर मिलते ही सहमं गई उसकी डर के मारे पसीने छूट गए एक डर की लहर उसके पूरे बदन में ऊपर से नीचे तक फैल गई। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। ना चाहते हुए भी घबराहट की वजह से उसके पांव ज्यो के त्यों वही ठिठक गए दोनों बिल्कुल करीब आ गए थे विनीत भी अलका की आंखों में झांकते हुए करते हुए बिल्कुल उसके करीब पहुंच गया था फर्क सिर्फ इतना था कि वह सड़क के ऊस ओर था और अलका इस और।

अलका को लगने लगा कि राहुल की बातों का विनीत के ऊपर कोई असर नहीं हुआ है। उसकी घबराहट बढ़ती जा रही थी उसे यकीन हो गया कि वह करीब आ करके फिर से उसे धमकाएगा और अपने साथ सोने के लिए मजबूर करेगा वह सड़क पर बुत बने खड़ी होकर विनीत की तरफ ही देखे जा रही थी और विनीत भी उसी ही को घूर रहा था। विनीत एकदम आमने-सामने आ गया था लेकिन कभी विनीत अपनी नजर सामने की तरफ फेर लिया औअपनी मोटरसाइकिल एक्सीलेटर को बढ़ाकर तेजी से आगे निकल गया।

अलका तो वहीं खड़ी खड़ी आश्चर्य से फटी आंखों से विनीत को सड़क पर दूर जाते देखती रह गई उसे यह सब एक चमत्कार सा लगने लगा। वह सड़क पर खड़ी होकर विनीत को तब तक देखती रही जब तक की वह आंखों से ओझल नहीं हो गया । पूरा खेल उल्टा पड़ गया था कुछ देर पहले अलका की दिल की धड़कन जो की बहुत ही तेज चल रही थी वह अब सामान्य होने लगी। विनीत को बिना कोई हरकत किए जाते देख कर उसकी जान में जान आ गई थी वह राहत सी महसूस कर रही थी।

अलका को उसके सर से बहुत भारी बोझ हल्का होता नजर आ रहा था। उसे राहुल की कही हुई एक-एक शब्द पर यकीन होने लगा था वह अपने बेटे पर एकदम गर्वित हुए जा रही थी। राहुल पर उसे और ज्यादा प्यार होने लगा था सड़क पर खड़े खड़े ही उसने मन में निर्धारित कर ली की वह अपने बेटे को उसके जन्मदिन पर पूरी तरह से खुश कर देगी वह जो चाहेगा उसे सब कुछ देगी।

कुछ ही देर पहले उसके चेहरे पर परेशानी के भाव नजर आ रहे थे लेकिन इस समय उसके चेहरे पर प्रसन्नता साफ झलक रही थी। वह खुशी-खुशी अपने पैर अपने घर की तरफ बढ़ा दी।

घर पर पहुंचकर वह आराम से कुर्सी पर बैठ कर राहत की सांस ली। उसे आज अपने घर में अच्छा महसूस हो रहा था। सब कुछ नया-नया सा बदला बदला सा लग रहा था। अगर राहुल घर पर मौजूद होता तो वह उसे कसके अपने सीने से लगा लेती उसे ढेर सारा प्यार करती आखिरकार उसने काम ही ऐसा कुछ कर दिया

था। विनीत जैसी मुसीबत से छुटकारा दिला कर राहुल ने अलका को बहुत बड़ी मुसीबत से छुटकारा दिलाया था । अलका को इंतजार था राहुल के घर पर आने का क्योंकि उसे मालूम था वह इधर उधर घूम कर अपना टाइम पास करते रहता है इसलिए उसने झट से हाथ बहुत होकर तरोताजा हुई और रसोई में जाकर राहुल के मनपसंद का भोजन बनाने में जुट गई।

जब तक राहुल आया तब तक खाना बन चुका था। सोनू कब से घर पर आकर अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। अलका कुर्सी पर बैठ कर राहुल का इंतजार कर रही थी कि तभी राहुल घर में प्रवेश किया उसे देखते ही अलका कुर्सी पर से उठी और तुरंत आगे बढ़कर राहुल को अपने सीने से लगा ली , और लगी उसे चुमने चाटने लगी अपनी मां के इस व्यवहार को राहुल कुछ पल तक समझ ही नहीं पाया कि आखिरकार यह हो क्या रहा है। तभी अपने बेटे को बेतहाशा चूमते हुए अलका बोली।

बेटा तूने मुझे आज बहुत खुश कर दिया है तू नहीं जानता कि तूने मेरे सर से कितनी बड़ी मुसीबत को दूर किया है। मांग बेटा मांग तुझे जो मांगना है मुझ से मांग ले में तेरी सारी इच्छाओं को पूरी करूंगी। ईसलिए बेझिझक मांग ले।

( अपनी मां की बात सुनकर राहुल को समझते देर नहीं लगी की ईतना ढेर सारा प्यार वीनीत से छुटकारा दिलाने की खुशी में है। ।।।।

अलका फिर से राहुल के गाल पर चुम्बनो का बौछार करते हुए बोली।

बोल बेटा तुझे क्या चाहिए तु जोे मांगेगा मैं तुझे वो दूंगी। ( राहुल अपनी मां की बात सुनकर बहुत खुश हुआ अपनी मां को खुश देखकर राहुल को बेहद खुशी हो रही थी। इसलिए राहुल खुश होता हुआ बोला।)

मम्मी तुम खुश रहती है तू कितनी अच्छी लगती हो। और रही बात कुछ मांगने की तो कल मेरा जन्मदिन है बस कल के दिन अपना यह वादा याद रखना।

( अपनी बेटी की बातें सुनकर अलका मुस्कुरा दी और एक बार फिर से उसे कस के अपने सीने से लगा ली . अलका की इस हरकत पर राहुल के बदन में उत्तेजना फेलने लगी। इसलिए वह बोला।)

मम्मी मुझे जो चाहिए वह में कल अपने जन्मदिन पर मांग लूंगा लेकिन तुम्हारी इस हरकत से मेरा लंड खड़ा होने लगा है।

( अपने बेटे की बात सुनकर अलका मुस्कुरा दी उसे भी इस का आभास हो चुका था। अपनी टांगों के बीच वह अपने बेटे के लंड की चुभन को महसूस कर चुकी थी इसलिए वह भी चुदवासी हो चुकी थी। अपने बेटे की लंड खड़े होने वाली बात को सुनकर वह बोली।)

तो देर किस बात की है बेटा डाल दे अपना लंड मेरी बुर में मेरी बुर भी तो तेरा लंड लेने के लिए पानी पानी हो गई है।

( अलका की बात को सुनते ही राहुल का लंड ठुनकी लेने लगा। लेकीन वह एक खेद जताते हुए बोला।)

लेकिन मम्मी सोनू .,,,,,

सोनू अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा है।( अलका राहुल की बात को बीच में ही काटते हुए बोली। अलका को भी बहुत ज्यादा ऊतावल मची हुई थी अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए। राहुल भी अपनी मां की जल्दबाजी को देखकर एकदम से जोश में आ गया। अलका के बदन में उत्तेजना और प्रसन्नता के भाव बराबर नजर आ रहे थे और इसी के चलते वह खुद ही वहीं पर ही कुर्सी पकड़कर झुक गई और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा दी यह राहुल के लिए इशारा था। वह ं अपनी गांड ऊचका कर अपनी नजरें घुमा कर राहुल की तरफ देखने लगी और उसे आंखों से इशारा करके अपनी साड़ी को ऊपर कमर तक उठाने का इशारा की,,,,, राहुल भी उत्तेजना से भर चुका था इसलिए वह भी एक पल की भी देरी किए बिना सीधे अपनी मां की साड़ी को पकड़कर एक झटके में ही कमर तक उठा दिया और पेंटी को नीचे जांघो तक सरका कर अपनी भी पेंट को खोलकर नीचे घुटनो तक सरका दिया।

राहुल और अलका दोनों कामोतेजना के बहाव में बह़ते जा रहे थे। इस समय दोनों को इस बात का भी बिल्कुल भी फिक्र नहीं थी कि वह लोग ड्राइंग रूम में ही अपनी उत्तेजना को शांत करने में लगे हुए थे जहां पर किसी भी समय सोनु आ सकता था। लेकिन अलका आज बहुत खुश थी इसलिए वह राहुल को भी खुश करना चाहती थी इसलिए किसी भी चीज की फिक्र उन दोनों को बिल्कुल भी नहीं थी। राहुल तो कुछ ही देर में अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर पूरी तरह से छा गया। राहुल अपनी मां की गरम सिसकारियों के साथ जोर जोर से धक्के लगाता हुआ चोदे जा रहा था। कुछ मिनटों की घमासान चुदाई के बाद दोनों एक साथ झड़ गए। दोनों अपनी कामोत्तेजना को बड़े सफाई के साथ मिटा चुके थे।

भोजन करते समय राहुल ने अपनी मां को कल के प्रोग्राम के बारे में बताया। कल के दिन अलका को छुट्टी रखनी थी। राहुल अपनी मां और सोनू के साथ घुमने ओर खरीदी करने का प्रोग्राम बना लिया था। कल वह अपनी मां का ब्रांडेड ब्रा ओर पेंटी के साथ साथ ट्रांशपेरेंट गाऊन भी दीलाना चाहता था., जिसके बारे मे ऊसने अपनी मां को कुछ भी नही बताया था। जो की ऊसकीमां के लिए सरप्राईज था।

 
सुबह राहुल की नींद खुली तो वह अपनी मां की कमरे में बिल्कुल नंगा उसकी मां की नंगी बाहों में लेटा हुआ था अलका और राहुल दोनों इस समय पहले की ही तरह बिल्कुल संपूर्ण नग्नावस्था में एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल कर चरमोत्कर्ष के पश्चात नींद की आगोश में लेटे हुए थे। राहुल की आंख खुलते ही वह बहुत ही पसंद नजर आ रहा था क्योंकि आज ही उसका जन्मदिन था। राहुल दीवार पर टंगी घड़ी की ओर देखा तो काफी समय हो चुका था वैसे भी आज चिंता की कोई बात नहीं थी ना तो उसे स्कूल जाना था और ना ही उसकी मां को ऑफिस। उसने कुछ देर तक बिस्तर पर ही लेटे लेटे हुए अपनी मम्मी के रेशमी बालो मे ऊंगलियो को ऊलझा कर सहला रहा था।

कुछ देर तक यूं ही लेटे रहने के बाद वह जैसे ही बिस्तर पर से उठने को हुआ, वैसे ही तुरंत अलका की भी नींद खुल गई। राहुल पर नजर पड़ते ही अलका मुस्कुराने लगी हो मुस्कुराते हुए उसे जन्मदिन की ढेर सारी बधाई देते हुए उसे गले से लगा ली। राहुल भी अपनी मम्मी की बधाई को मंजूर करते हुए अपने होठों को गुलाबी होता रखकर चुंबन करने लगा। गले मिलने के बाद राहुल अपनी मां को बोला।

मम्मी जल्दी से तुम नहा धोकर तैयार हो जाओ और सोनू को भी तैयार होने को कहो, मैं भी जल्दी से नहा धोकर तैयार हो जाता हूं क्योंकि आज हम लोगों को बाहर है खाना खाना है और सारा दिन बस घूमना है और खरीदी करना है।( राहुल की बात सुनकर अलका खुश तो हुई लेकिन उसके चेहरे पर उदासी छाने लगी अपनी मां को उदास होता हुआ देखकर वह बोला।)

क्या हुआ मम्मी तुम ऐसे उदास क्यूं हो गई?

बेटा बाहर घूमने फिरने की बात तो ठीक है लेकिन इतने सारे पैसे कहां है?

तुम चिंता मत करो मम्मी मैंने सारा बंदोबस्त कर लिया है बस आप जल्दी से तैयार हो जाइए फिर हम घूमने चलते हैं।

( अपने बेटे की कहानी सुनकर अलका को राहत हुई उसे अब अपने बेटे पर पूरा पक्का यकीन होने लगा था। अगर वह कह रहा है कि बंदोबस्त कर के रखा है तो जरूर उसने कुछ ना कुछ बंदोबस्त किया होगा तभी तो वह बाहर घूमने फिरने और खरीदी करने की बात कर रहा है। अलका खुश होते हुए बस एक चादर भर अपने बदन पर लपेटी और वैसे ही बाथरूम की तरफ चल दी।

कुछ ही देर मे राहुल और सोनू तैयार होकर नीचे बैठे हुए थे वह दोनों अपनी मां का इंतजार कर रहे थे जो कि अपने कमरे में अभी भी तैयार हो रही थी लेकिन कुछ समय ज्यादा लगने की वजह से राहुल सोनू से बोला।

तू यही बैठ मे मम्मी को बुला कर लाता हूं। ( इतना कहकर राहुल अपनी मां की कमरे की तरफ जाने लगा। कमरे के दरवाजे के पास पहुंच कर अपने हलके से दरवाजे को धक्का दिया तो दरवाजा खुद-ब-खुद खुल गया। राहुल की नजर जैसे ही कमरे के अंदर गई अपनी मां का गोरा बदन देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई। अलका की पीठ उसकी तरफ थी और वह अपने दोनों हाथ पीछे लाकर ब्रा के हुक को बंद करने की कोशिश कर रही थी। राहुल अपनी मां के इस रूप को देखकर एकदम से चुदवासा हो गया। इस समय अलका की गांड साड़ी ज्यादा टाईट बंधी होने की वजह से कुछ ज्यादा ही भरावदार लगने लगी थी। राहुल के लिए ईतना लुभावना और कामुक दृश्य को दरवाजे पर खड़े खड़े देखते रहना एक बिल्ली का दूध से भरी हुई कटोरी को बस देखते रहने के बराबर था जोकि दोनों सूरत-ए-हाल में संभव नहीं था। इसलिए राहुल कमरे में दाखिल हुआ और सीधे अपनी मां के पास पहुंच कर अपनी एक हथेली को उसकी भरावधार गांड पर रखकर कस के दबा दिया। राहुल के ईस हरकत पर अलका के मुंह से आऊच्च निकल गया।

आऊच्च,,,,,, क्या कर रहा है राहुल? ( वह फिर से अपनी ब्रा के हुक को बंद करने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली।)

क्या मम्मी हम दोनों कब से तुम्हारा नीचे इंतजार कर रहे हो और आप हैं कि अभी तक तैयार भी नहीं हो पाई हो।

अरे देख नही रहा है,,,, इस मुआा ब्रा का हुक है की बंद ही नहीं हो रहा है।

अच्छा लगे नहीं बंद कर देता हूं ।(इतना कहने के साथ ही राहुल ब्रा के दोनों स्ट्रेप को पकड़ कर खींचकर बड़ी मुश्किल से हुक में फसाते हुए बोला ।)

कहां से हुक लगेगा मम्मी ईस ब्रा का साईज देखो और आपकी चुचियों का साइज देखो। यह तब की ब्रा लग रही है जब आपकी चूचियां नारंगी की तरह गोल गोल हुआ करती थी लेकिन अब आप की चूचियां रस से भरी हुई पके हुए आम की तरह बड़ी बड़ी हो गई है।

( इतना कहने के साथ ही राहुल पीछे से अपनी मां को बाहों में भरते हुए चुचीयों को अपनी हथेली में भरकर दबा दिया। )

आऊच्च,,,, तो क्या करूं बेटा तू तो जानता है कि नई ब्रांडेड ब्रा खरीदने की मेरी तो हैसियत नहीं है। ( अपनी मां की बात को सुनकर वह बात को बदलते हुए बोला)

कोई बात नहीं मम्मी अब जल्दी करिए देर हो रही है।

बस बेटा दो मिनट ( इतना कहते ही वह साड़ी के पल्लू को अपने कंधे पर ले ली अब वह पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी। इस समय अलका का रूप देखते ही बन रहा था बला की खूबसूरत लग रही थी अलका। राहुल की नजर तो अलका के बदन के ऊपर से हट ही नहीं रही थी। अलका राहुल की नजर को भांप गई और शर्माते हुए बोली।)

तू तो ऐसे देख रहा है जैसे की पहले कभी मुझे देखा ही न हो।

मम्मी आप को खुद पता नहीं है कि आप कितनी ज्यादा खूबसूरत हैं इसलिए तो जब भी आपको देखता हूं तो बस देखता ही रह जाता हूं।

बस बस अब और ज्यादा तारीफ मत कर जल्दी चल देर हो रही है।

( दोनों कमरे से बाहर की तरफ जाने लगे लेकिन जाते जाते भी राहुल की नजर उसकी मां की भरावदार नितंबों पर ही टिकी हुई थी जिसे वह कमरे के बाहर निकलते निकलते भी अपनी हथेली से जोर से दबा दिया और अलका राहुल की तरफ देखकर मुस्कुरा दी।)

तीनों घर से बाहर निकल चुके थे घूमने के लिए। आज तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे। अलका का रूप तो देखते ही बन रहा था उसकी खूबसूरती में चार चांद लग गए थे। अपनी चुचियों के साइज से भी छोटे साईज का ब्लाउज पहनने की वजह से चुचियों का आकार कुछ ज्यादा ही बड़ा लग रहा था ऐसा लग रहा था कि अब यह दोनों कबूतर ब्लाउज फाड़कर बाहर फड़फड़ाने लगेंगे। चूच़ियों के ऊपरी हिस्से की पतली दरार कुछ ज्यादा ही लंबी और गहरी लग रही थी। जिस पर अगर किसी की भी नजर पड़ जाए तो उसका लंड बिना कहे खड़ा हो जाए। आने जाने वाले सबकी नजर अलका पर ही टिकी रह जाती थी जिसे राहुल भली-भांति समझ रहा था उसे अच्छा तो नहीं लग रहा था लेकिन कर भी क्या सकता था उसकी मां थी भी इतनी खूबसूरत और सेक्सी की किसी की भी नजर उस पर पड़े बिना रही ही नहीं जाती थी। राहुल को भी अलका का यह रूप बहुत ज्यादा भा रहा था।

आज राहुल दिल खोलकर अपने भाई सोनू और अपनी मां पर पैसे खर्च कर रहा था और उनकी हर ख्वाहिशों को पूरी कर रहा था। उन दोनों की जो इच्छा होती थी वह उन दोनों को खिला रहा था पैसे की बिल्कुल भी चिंता नहीं थी क्योंकि 10000 की नोटों की गड्डी जो वीनीत की भाभी से लिया था। राहुल अपने भाई और अपनी मां को सभी जगहों पर घुमाया। पार्क में चिड़ियाघर में जहां-जहां हो सकता था सभी जगहों पर घुमाया। राहुल ने उन दोनों को सीनेमा भी दिखाया। अलका को आज अपनी जवानी के दिन याद आ गए जब पहली बार बार शादी कर के आई थी तब उसके पति ने पहली बार उसे सिनेमा के दर्शन कर आए थे और उस दिन के बाद आज उसका बेटा उसे सिनेमा दिखाने ले गया था। अलका के साथ-साथ सोनू बहुत खुश नजर आ रहा था क्योंकि उसने आज तक इतनी आजादी के साथ ना कहीं घूमा फिरा और ना ही इतना कुछ खाया। थियेटर में ज्यादा भीड़ नहीं थी और अंधेरा होने के बाद अंधेरे का लाभ उठाते हुए राहुल और अलका एक दूसरे को चुम्मा चाटी करने का पूरा आनंद उठाते रहे , राहुल की इच्छा तो अलकां को लंड चुसवाने की थी लेकिन पास में सोनू के मौजूदगी में ऐसा संभव नहीं लगा इसलिए सिर्फ चुंबन से ही काम चलाना पड़ा।

अलका की भी इच्छा बहुत थी थिएटर में नहीं अनुभव का आनंद उठाने के लिए लेकिन वह भी ऐसा ना कर सकी. लेकिन कामुक हरकतों की वजह से अपनी बुर जरूर गिली कर ली। फील्म देखकर बाहर निकले तो शाम हो चुकी थी। राहुल अपने लिए केक खरीदना चाहता था इसलिए वह दुकान से केक भी खरीद लाया।

राहुल के मन में गुदगुदी सी होने लगी क्योंकि वह अपनी मां के लिए ब्रांडेड ब्रा और पैंटी और ट्रांसपेरेंट गाउन खरीदना चाहता था। उसकी उत्सुकता इस बात पर ज्यादा थी की यह सब ब्रांडेड कपड़े पहनने के बाद उसकी मां कैसी दिखेगी, यह सब सोच-सोच कर ही उसके लंड का तनाव बढ़ता जा रहा था।

राहुल ने सबसे पहले सोनू के लिए कपड़े खरीदने और उसके बाद उसकी मां के लिए एक नई सी सुंदर सी साड़ी खरीदा नई साड़ी पाकर के तो अलका खुशी के मारे फुले नहीं समा रही थी। तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे अलका अपने बेटे की तरफ देख कर मन ही मन अपने आपसे ही बातें करते हुए कह रही थी कि वाकई मैं ऊसका बेटा अब बड़ा हो गया है।

राहुल के बदन मे अजीब सी गुदगुदी मच रही थी क्योंकि इस समय वहं उसी दुकान के सामने खड़ा था जिस दुकान से विनीत की भाभी ने अपने लिए ब्रांडेड अंडर गारमेंट और राहुल के लिए टीशर्ट खरीदी थी राहुल को भी इसी शॉप से अपनी मां के लिए ब्रांडेड ब्रा और पैंटी के साथ-साथ ट्रांसपेरेंट गाउन भी खरीदना था। वह अपनी मां को साथ में लेकर जा नहीं सकता था क्योंकि वह उसे सरप्राइस देना चाहता था। इसलिए वह सोनू और अपनी मां को मैंगो जूस पिलाने के बहाने जूस की दुकान पर ले गया जोकि उसी शॉप के ठीक सामने ही थी। वहां जाकर वह दो ग्लास जुस का ऑर्डर कर दिया और अपनी मां और सोनु को वहीं बैठे रहने के लिए बोला। राहुल वहां से जाने लगा तो उसकी मां बोली।

तू कहां जा रहा है बेटा?

तुम दोनों यहीं बैठकर जूस पीओ मम्मी मै तब तक सामने की शॉप से कुछ कपड़े खरीद कर लाता हूं।

लेकिन कपड़े तो हमने ले लिए है ना तो अब कौन से कपड़े खरीदने हैं।

मम्मी आप यहीं बैठकर जुस पीओ यह कपड़े आपके लिए ही है लेकिन सरप्राइज़ है। ( इतना कहने के साथ ही वह दोनों को वहीं छोड़ कर सड़क पार करके ऊसी शॉप मे चला गया।

 
आज दूसरी बार राहुल ईस शॉप में कदम रख रहा था। वह पहली बार भी नहीं आना चाहता था लेकिन विनीत की भाभी ं उसे जबरदस्ती शोप मे ले आई थी। उस दिन उस को ब्रा और पेंटी खरीदते देख कर उसका भी मन हो रहा था कि वह भी अपनी मां के लिए ईस तरह के ब्रांडेड ब्रा और पेंटी खरीद कर उसे पहनने को दे लेकिन उस समय उसके पास पैसे नहीं थे। लेकिन आज उसकी जेब गर्म थी और वह अपनी मां को सरप्राइज भी देना चाहता था। शॉप में आते ही राहुल की आंखें कपड़ों की चमक और उसके ब्रांडेड लक्जुरीयस डिजाइन को देखकर चाौंधीया गई। वहां लेडीज अंडर गारमेंट्स के काउंटर पर गया तो वहां पर खड़ी लड़की उसे पहचानने और मुस्कुराते हुए उसका अभिवादन करते हुए बोली।

कहीए सर आपको क्या दिखाऊं?

( उसकी बातें सुनकर राहुल को थोड़ी झिझक हुई वह थोड़ा शर्माने लगा । वह लड़की जो काउंटर पर खड़ी थी वह अनुभवी थी राहुल के असहजता का भाव वह भांप ली । इसलिए राहुल को सहज करने के उद्देश्य से वह मुस्कुराते हुए बोली।)

सर आप बिल्कुल भी मत शर्माइए बस आप मुझे इतना बता दीजिए कि आपको चाहिए क्या?

( ऊस लड़की की बात सुनकर राहुल थोड़ा सा हड़बड़ा गया और हड़बड़ाते हुए बोला।)

ममममम,,,,,,, ममममम,,,, मुझे,,,,,,,,

( राहुल के मुंह से इतना ही निकला था कि वह लड़की उसकी बात को बीच में काटते हुए बोली।)

पहली बार किसी लेडी के अंडर गारमेंट्स खरीदने आ रहे हैं ना।

हां( राहुल हां में सिर हिलाते हुए बोला।)

आप बिल्कुल भी टेंशन मत लीजिए सर पहली बार ऐसा ही होता है यहां बहुत लोग पहली बार आते हैं। तो इसी तरह से थोड़ा सा घबरा जाते हैं। वह लोंग भी पहली बार ही अपनी गर्लफ्रेंड के लिए तो कोई अपनी आंटी के लिए तो कोई अपनी भाभी के लिए और कोई तो अपनी मम्मी के लिए भी लेने आता है। कहीं आप भी तो अपनी मम्मी,,,,,,,( इतना कहते ही वह मुस्कुराने लगी।)

ननननन,,,,, नही,,,,, मैं तो अपनी पड़ोस वाली भाभी के लिए लेने आया हूं ।

कौन जो उस दिन आप उनके साथ आए थे वही भाभी।

नही नही यह दूसरी भाभी है। वह क्या है कि उनके घर कोई इस समय मौजूद नहीं है खरीदने के लिए तो उन्होंने मुझे ही भेज दी।

कोई बात नहीं सर आप बस साईज बताइए मैं आपको एक से एक ब्रांडेड ब्रा और पेंटी दिखाती हूं और जो भी आपको पसंद हो आप ले लीजिएगा।

( राहुल अपनी मां के बदन के हर एक अंग से वाकिफ था। वह अपनी मां के बदन को पूरी तरह से अवलोकन कर चुका था। वह अपनी मां की दोनो चुचियों को अपनी हथेली में ले लेकर पूरी तरह से नाप चुका था। और उसकी भरावदार नितंबों का तो वह पहले से ही दीवाना था। इसलिए उसे अपनी मां का साईज बताने मे ऊसे नहीं जरा सी भी दिक्कत नहीं हुई। और उसने अपनी मां का साइज बता दिया। वह लड़की बहुत याद आ रही थी इसलिए उसने झट से राहुल के बताए अनुसार साइज की ब्रा और पेंटी निकालकर काउंटर पर रख दी। राहुल को ब्रा की डिजाइन और पैंटी की डिज़ाइन देखकर ही मदहोश होने लगा। वह मन ही मन कल्पना करने लगा कि ईस तरह की ब्रा और पैंटी पहनने के बाद उसकी मां कैसी दिखेगी। उसके बदन में अजीब सी उत्तेजना का अनुभव हो रहा था। उसने ब्रा और पेंटी को पसंद करने में ज्यादा समय नहीं लिया और झट से पसंद कर लिया। इसके बाद उसने उस लड़की को शॉर्ट ट्रांसपेरेंट गांऊन दिखाने को कहा। और उसका उनको भी उस लड़की ने बहुत ही अच्छी डिजाइन का दिखाया तो राहुल ने झट से उसे भी पसंद कर लिया। बहुत ही जल्दी उस लड़की ने अपने तरीके से राहुल को सहज कर ली थी। इसलिए तो उसकी हड़बड़ाहट खत्म हो चुकी थी।)

मैडम आप से एक रिक्वेस्ट है।

जी बोलिए।

यह सारे अंडर गारमेंट्स आप अगर किसी गिफ्ट की तरफ पैक करके मुझे देंगीे तो कुछ ज्यादा ही अच्छा रहेगा। ( राहुल की बात सुनते ही वह लड़की समझ गई कि मामला कुछ और ही है इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली।)

ओहहहह,,,,,, तो मामला कुछ और ही है।(ईतना कहने के साथ ही वह फिर से मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली।)

कोई बात नहीं सर हो जाएगा लेकिन उसके एक्स्ट्रा चार्ज लगेंगे।

ठीक है मैं एक्स्ट्रा चार्ज दे दूंगा बस आप जल्दी से पेक कर दीजिए।

( ऊस काम करने वाली लड़की ने जल्दी से सारे गारमेंट्स और गांव में को गिफ्ट की तरह बहुत ही अच्छे तरीके से पैक करवा दी। और वह बिल बनाने लगी। ऊस लड़की ने लॉ कट टी-शर्ट पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसकी दोनों गालाइयों के बीच की लकीर साफ साफ नजर आ रही थी और हल्का हल्का दूधिया रंग के के दोनों गोलाई भी नजर आ रही थी। उस लड़की ने बिल बनाते समय तिरछी नजर से इस बात पर गौर की कि वह उसकी दोनों चुचियों की ही तरफ देख रहा है लेकिन वह इस बात को नजरअंदाज करके मुस्कुराते हुए बिल बनाने लगी।

राहुल बिल का पेमेंट करते समय उस काउंटर वाली लड़की से बोला।

अगर आप बुरा ना माने तो आपसे एक बात कहूं।

जी कहीए ।

आप उस( ऊंगली से कांच के अंदर रखी ब्रा और पैंटी की तरफ इशारा करते हुए) रंग और साईज की पहना करिए आप पर बहुत सूट करेगी।

( राहुल की उंगली जिस तरफ निर्देश कर रही थी उस लड़की की नजर वहां गई तो वहां शरमा गई । इससे पहले कि वह कुछ बोल पाती राहुल काउंटर छोड़कर जाने लगा और वह जब पीछे मुड़कर देखा तो वह लड़की राहुल की तरफ देखते हुए मुस्कुरा रही थी।)

राहुल ब्रा पैंटी और गाउन को गिफ्ट पैक कराकर शॉप के बाहर आ गया। अलका कुछ पूछ पाती इससे पहले ही वह बोल दिया कि यह उसी के लिए गिफ्ट है जो कि आप अपने कमरे में जाकर खोलिएगा और पहनकर दिखाइएगा कि कैसा लगता है। इस बात को बोलते हूंए वह इस बात का भी ध्यान रख रहा था कि सोनू उसकी बात सुन ना ले।

राहुल ने होटल से खाना भी पैक करवा लिया। अंधेरा हो चुका था जब तक वह घर पहुंचते रात के 8:00 बज चुके थे। जल्दी-जल्दी राहुल ने सारी तैयारियां कर ली और केक काट कर सबसे पहले उसने अपनी मां को खिलाया और उसके बाद सोनू को। सोनू और अलका ने बारी-बारी से राहुल को जन्मदिन की ढेर सारी बधाई दी तीनों बहुत खुश नजर आ रहे थे।

होटल से लाया खाना खाने के बाद सोनू अपने कमरे में चला गया अरे राहुल सोनू के जाने के बाद कुछ गिफ्ट के पैकेट को अपनी मां के हाथों में थमाते हुए बोला।

मम्मी यह आपके लिए है जो कि एक सरप्राइज़ है। और वादे के मुताबिक आज के दिन आप मुझे बिल्कुल भी नाराज नहीं करेंगी। इसलिए इस गिफ्ट के पैकेट को ले जाकर आप अपने कमरे में खोलिए और इसमें जो भी हो उसे पहन कर मुझे दिखाएंगे और मैं थोड़ी देर में आपके कमरे में आता हूं।

( राहुल की बातें सुनकर अलका को अजीब सा महसूस होने लगा उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार यह राहुल करना क्या चाहता है। इसलिए वह राहुल से बोली।)

लेकिन बेटा इस डिब्बे में है क्या?

अगर मैं खुद बता दूंगा तो सरप्राइज़ किस बात की रही थी। इसलिए आप बिल्कुल भी सवाल मत करिए और अपने कमरे में जा कर के खुद इस डिब्बे को खोल कर देख लीजिए कि ईसमे क्या है?

अलका आज के दिन भला कैसे इंकार कर सकती थी इसलिए उसे जाना ही पड़ा। वह अपने कमरे में उस डिब्बे को लेकर के जा चुके थी। और राहुल नीचे बैठकर अजीब सी उत्तेजना का अनुभव अपने बदन में कर रहा था।

 
आप को और आपके परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी व स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए...
 
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