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होली में खोली जीजा ने चोली
होली का मौसम ,गर्मी की शुरुवात और ठंड का अंत,ये मौसम ही बना ही मौज मस्ती के लिए इसीलिए शायद हमारे पूर्वजो ने होली की शुरुवात की ,रंगों का त्यौहार,मस्ती का त्यौहार,लेकिन बदलते हुए सालो में और परिस्थितियों ने इस त्यौहार के स्वरूप को ही बदल दिया है ,आज होली में दारू पीने वालो,नशे में हुल्लड़ करने वालो और मस्ती के नाम पर सामाजिक मर्यादाओ को भंग करने वालो की जमात ही दिखाई देती है ,परिवार के लोग इन सबसे थोड़ा दूर ही रहते है ,लेकिन गांव में नही वहां का मौहोल आज भी उतना ही निर्दोष बना हुआ है,लेकिन इस शराब ने वहां का माहौल भी खराब किये हुए है,लेकिन फिर भी पारिवारिक लोग भी इसका मजा उठाते है,और खासकर मेरे गांव में तो खूब होली खेली जाती है,ये कहानी मेरे उस होली की है जिसे मैं कभी भूल नही सकती ,जिसमे एक दीवार गिरी और मैं लड़की से एक औरत बनी……
मेरा नाम सोना है ,अभी अभी मेरी बड़ी दीदी सपना की शादी राज नामक लड़के से हुई जो की पास के ही गांव का रहने वाला है लेकिन शहर में रहकर जॉब करता है,शादी को अभी 5 महीने ही हुए थे की होली ने दस्तक दी ,मेरे जीजा और दीदी बहुत ही अच्छे और मुझे बहुत ही प्यार करने वाले है,मैं अभी कालेज में हु जो की पास के ही कस्बे में पड़ता है,मेरी दीदी ने मुझे आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया था ,जबकी मेरे घर वाले लड़की को पढ़ना ठिक ही नही समझते,घर वालो के इसी रवैये का भुगतान मेरी दीदी ने भी किया था,उन्हें कालेज जाने ही नही दिया गया,लेकिन उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ किया और घर वालो से लड़कर मुझे कालेज भेजा,जीजू भी बहुत ही ओपन माइंड के है ,वो मेरे गांव के पहले दामाद थे जिन्होंने दहेज नही लिया,हमारे परिवार में उनकी इज्जत इसी बजह से बहुत ही ज्यादा होती है,दूसरी ओर हमारे समाज में लड़के वाले हमेशा से ही अपनी मनमानी करते रहे है खासकर दामाद तो जैसे लड़की के घरवालों के लिए भगवान ही होता है,वो कुछ भी गलत करे सब माफ,यहां तक की मैंने कई लोगो को लड़कियों को मरते ही देखा है और घरवाले लड़की को ही डांट लगा देते है की पति है थोड़ा मार भी दिया तो क्या हो गया,मर्द है किसी दूसरी लड़की के साथ संबंध बना भी लिया तो क्या हो गया...मुझे इन सब चीजो से और ऐसे सोच से घिन सी आती है लेकिन क्या करे समाज में सोच ऐसे घर कर गई है की इसे युही तो मिटाया नही जा सकता इसके लिए लड़कियों को पढ़ना और आत्मनिर्भ बनना पड़ेगा,ऐसे इस मामले में जीजू जी का कोई जवाब नही वो दीदी को थोड़ी भी तकलीफ नही देते,बल्कि हमारे घर वालो की मदद को भी तैयार रहते है,और कोई भी नखरा नही दिखाते,सच कहु तो मेरे जीजू सोना है,...
सपना दीदी और मैं दोनो ही बहुत ही गोरी और गांव की भरी हुई लडकिया है,गांव में घूमना और खेतो और घर के काम करना हमे पसंद रहा,गांव वालो की गंदी नजर हमेशा से ही हम पर रही लेकिन सपना दीदी के रहते कोई भी आंख उठाकर देखने की हिम्मत नही करता वो किसी को भी माँ बहन की गली देने से नही चूकती थी ,लेकिन मेरा स्वभाव थोड़ा शांत है और उनके जाने के बाद ही मुझे पता चला की मैं जवान हो गई हु और मर्दो के लिए इतनी आकर्षक हो गई हु ,मेरे उजोरो की चोटी छुपे नही छुपती और गोल नितम्भ जैसे सब कुछ कहना चाहती हो,गोरा बदन और मदमस्त यौवन की वजह से मेरे पीछे गांव के हर आवारा लड़के पड़े रहते है,यहां तक की अधेड़ और बुड्ढे भी मेरी जवानी को निहारे बिना नही रहते,मेरे रिस्ते के चाचा और ताऊ भी नजर बचा कर मुझे निहार ही लेते है,पहले तो मुझे कुछ समझ नही आता था लेकिन उनका यू देखना या तो मेरे मन में उनके लिए घृणा भर देता या मैं थोड़ी मचल जाती ,आखिर जवानी का उफान थो मेरे अंदर भी था लेकिन ये कब फूटने वाला था और कैसे फूटने वाला था ये तो मैंने सपने भी नही सोचा था….
मेरे जीजू राज भी किसी से कम नही थे और किसी से मैं सबसे पहली बार आकर्षित हुई थी तो उनसे ही ,वो सचमे एक गजब की व्यक्तित्व के मालिक थे,हा काले थे लेकिन सच्चे मर्द थे,बलशाली भुजाए,चौड़ा बालो से भरा हुआ सीना ,गजब के आकर्षक,सभी से प्यार से मिलने और बोलने वाले और सबसे बड़ी बात महिलाओं की इज्जत करने वाले,उनका केयर करने वाले ….वाह आई लव माय जीजू…..मेरे सपने में अगर पति की कोई छबि थी तो वो मेरे जीजू ही थे,मैं उस दिन का बेसब्री से इंतजार करने लगी जब वो आएंगे,दीदी से मिलने की बेचैनी से ज्यादा जीजू से मिलने की खुसी मेरे अंदर मचल रही थी ,और मैं जानती थी की वो होली में दीदी के साथ ही घर आने वाले है,दीदी की पहली होली थी तो वो मायके में ही मनाने वाली थी और जीजू उन्हें छोड़कर अपने घर जाते लेकिन फिर शाम तक हमारे घर आने वाले थे,मैं जीजू से मिलने और उनके साथ होली में खूब मस्ती करने के मूड में थी,मेरी बेताबी को देखकर चाची में यहां तक कह दिया की सम्हलकर जीजा और साली का रिश्ता बहुत ही नाजुक होता है,थोड़ी भी चूक हुई तो तू साली से घरवाली बन जाएगी,मेरी माँ और चाची इसपर खूब हँसे थे लेकिन मुझे ये वहां तो अच्छा नही लगा और मैं अपने कमरे में मुह फुला कर आ गई लेकिन चाची की बात को सोचकर पता नही क्यो एक अजीब सी बेचैनी मेरे मन में होने लगी और मेरे होठो में इस बात को सोच सोच कर ही मुस्कुराहट सी आने लगी………..
“जीजू …”मैं दौड़कर जीजा जी के गले से लग गई जब दीदी और जीजा जी होली के एक दिन पहले घर आये,एक एक फ्रॉक में थी जिसे मैं सिर्फ घर में ही पहनती थी ,जीजा जी के मजबूत सीने से जैसे ही मेरे बड़े स्तन ठकराये मैं थोड़ा पीछे हटने को हुई लेकिन तब तक तो जीजू ने भी मुझे कस लिया था ,अब तो मेरे स्तन उनके मजबूत सीने में धंस गए थे,और उनके हाथ मेरे पीठ पर थे जो ही उसे हल्के हल्के सहला रहे थे,मैं उसके कंधे में अपना सर रख कर थोड़ी देर तक खड़ी रही लेकिन जीजू ने मुझे थोड़ा दबा कर ही छोड़ दिया,मैं उनसे अलग हुई तो मेरे चहरे में लाली साफ थी मैं थोड़ी सी नर्वस हो गई थी ना जाने क्यो इस वाकये ने मुझे थोड़ा उत्तेजित कर दिया था,मैं अब जवान हो चुकी थी और मचलती हुई जवानी को सम्हालना ऐसे भी थोड़ा मुश्किल ही होता है,
“अच्छा पूरा प्यार बस जीजू पर ही उतार दे दीदी के लिए भी कुछ बचा है की नही “
सोनिया दीदी ने मुझे छेड़ा
“क्या दीदी आप भी “मैं उनके गले से जा लगी,
“ओह मेरी बेटी कितनी बड़ी लग रही है”दीदी ने मेरे गालो को खिंचा उन्हें तो अब भी मैं बच्ची ही लगती हु,जबकि वो मुझसे बस 2 साल की ही बड़ी है,
“क्या दीदी अभी तो 1 महीने पहले ही देखा था मुझे,”
“ये उम्र ही ऐसी है अभी तो इसके बढ़ने के दिन है”जीजू ने थोड़े अजीब अंदाज में कहा ,उनकी नजर मेरे वक्षो को घूर रही थी लेकिन उन्होंने जल्द ही नजर हटा ली,जिसे दीदी ने पकड़ लिया ..
“ह्म्म्म आप का इशारा तो मैं समझ रही हु,लेकिन खबरदार ये मेरी प्यारी बहन है”दीदी ने जीजू को आंखे दिखाई जो की हमारे समाज में कम ही होता है खासकर जब घरवाले भी मौजूद हो,
“ओह मेडम जी माफ कर दीजिये “जीजू ने कान पकड़कर बड़े ही मजाकिया अंदाज में कहा जिससे मैं और दीदी हँस पड़े लेकिन माँ ने दीदी को हल्के से मारा ,
“पति से ऐसे बात करते है ,वो भी सब के सामने “लेकिन दीदी और जीजू और मैं हंसते रहे वही पापा ,माँ थोड़े नर्वस हो गए,
होली का मौसम ,गर्मी की शुरुवात और ठंड का अंत,ये मौसम ही बना ही मौज मस्ती के लिए इसीलिए शायद हमारे पूर्वजो ने होली की शुरुवात की ,रंगों का त्यौहार,मस्ती का त्यौहार,लेकिन बदलते हुए सालो में और परिस्थितियों ने इस त्यौहार के स्वरूप को ही बदल दिया है ,आज होली में दारू पीने वालो,नशे में हुल्लड़ करने वालो और मस्ती के नाम पर सामाजिक मर्यादाओ को भंग करने वालो की जमात ही दिखाई देती है ,परिवार के लोग इन सबसे थोड़ा दूर ही रहते है ,लेकिन गांव में नही वहां का मौहोल आज भी उतना ही निर्दोष बना हुआ है,लेकिन इस शराब ने वहां का माहौल भी खराब किये हुए है,लेकिन फिर भी पारिवारिक लोग भी इसका मजा उठाते है,और खासकर मेरे गांव में तो खूब होली खेली जाती है,ये कहानी मेरे उस होली की है जिसे मैं कभी भूल नही सकती ,जिसमे एक दीवार गिरी और मैं लड़की से एक औरत बनी……
मेरा नाम सोना है ,अभी अभी मेरी बड़ी दीदी सपना की शादी राज नामक लड़के से हुई जो की पास के ही गांव का रहने वाला है लेकिन शहर में रहकर जॉब करता है,शादी को अभी 5 महीने ही हुए थे की होली ने दस्तक दी ,मेरे जीजा और दीदी बहुत ही अच्छे और मुझे बहुत ही प्यार करने वाले है,मैं अभी कालेज में हु जो की पास के ही कस्बे में पड़ता है,मेरी दीदी ने मुझे आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया था ,जबकी मेरे घर वाले लड़की को पढ़ना ठिक ही नही समझते,घर वालो के इसी रवैये का भुगतान मेरी दीदी ने भी किया था,उन्हें कालेज जाने ही नही दिया गया,लेकिन उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ किया और घर वालो से लड़कर मुझे कालेज भेजा,जीजू भी बहुत ही ओपन माइंड के है ,वो मेरे गांव के पहले दामाद थे जिन्होंने दहेज नही लिया,हमारे परिवार में उनकी इज्जत इसी बजह से बहुत ही ज्यादा होती है,दूसरी ओर हमारे समाज में लड़के वाले हमेशा से ही अपनी मनमानी करते रहे है खासकर दामाद तो जैसे लड़की के घरवालों के लिए भगवान ही होता है,वो कुछ भी गलत करे सब माफ,यहां तक की मैंने कई लोगो को लड़कियों को मरते ही देखा है और घरवाले लड़की को ही डांट लगा देते है की पति है थोड़ा मार भी दिया तो क्या हो गया,मर्द है किसी दूसरी लड़की के साथ संबंध बना भी लिया तो क्या हो गया...मुझे इन सब चीजो से और ऐसे सोच से घिन सी आती है लेकिन क्या करे समाज में सोच ऐसे घर कर गई है की इसे युही तो मिटाया नही जा सकता इसके लिए लड़कियों को पढ़ना और आत्मनिर्भ बनना पड़ेगा,ऐसे इस मामले में जीजू जी का कोई जवाब नही वो दीदी को थोड़ी भी तकलीफ नही देते,बल्कि हमारे घर वालो की मदद को भी तैयार रहते है,और कोई भी नखरा नही दिखाते,सच कहु तो मेरे जीजू सोना है,...
सपना दीदी और मैं दोनो ही बहुत ही गोरी और गांव की भरी हुई लडकिया है,गांव में घूमना और खेतो और घर के काम करना हमे पसंद रहा,गांव वालो की गंदी नजर हमेशा से ही हम पर रही लेकिन सपना दीदी के रहते कोई भी आंख उठाकर देखने की हिम्मत नही करता वो किसी को भी माँ बहन की गली देने से नही चूकती थी ,लेकिन मेरा स्वभाव थोड़ा शांत है और उनके जाने के बाद ही मुझे पता चला की मैं जवान हो गई हु और मर्दो के लिए इतनी आकर्षक हो गई हु ,मेरे उजोरो की चोटी छुपे नही छुपती और गोल नितम्भ जैसे सब कुछ कहना चाहती हो,गोरा बदन और मदमस्त यौवन की वजह से मेरे पीछे गांव के हर आवारा लड़के पड़े रहते है,यहां तक की अधेड़ और बुड्ढे भी मेरी जवानी को निहारे बिना नही रहते,मेरे रिस्ते के चाचा और ताऊ भी नजर बचा कर मुझे निहार ही लेते है,पहले तो मुझे कुछ समझ नही आता था लेकिन उनका यू देखना या तो मेरे मन में उनके लिए घृणा भर देता या मैं थोड़ी मचल जाती ,आखिर जवानी का उफान थो मेरे अंदर भी था लेकिन ये कब फूटने वाला था और कैसे फूटने वाला था ये तो मैंने सपने भी नही सोचा था….
मेरे जीजू राज भी किसी से कम नही थे और किसी से मैं सबसे पहली बार आकर्षित हुई थी तो उनसे ही ,वो सचमे एक गजब की व्यक्तित्व के मालिक थे,हा काले थे लेकिन सच्चे मर्द थे,बलशाली भुजाए,चौड़ा बालो से भरा हुआ सीना ,गजब के आकर्षक,सभी से प्यार से मिलने और बोलने वाले और सबसे बड़ी बात महिलाओं की इज्जत करने वाले,उनका केयर करने वाले ….वाह आई लव माय जीजू…..मेरे सपने में अगर पति की कोई छबि थी तो वो मेरे जीजू ही थे,मैं उस दिन का बेसब्री से इंतजार करने लगी जब वो आएंगे,दीदी से मिलने की बेचैनी से ज्यादा जीजू से मिलने की खुसी मेरे अंदर मचल रही थी ,और मैं जानती थी की वो होली में दीदी के साथ ही घर आने वाले है,दीदी की पहली होली थी तो वो मायके में ही मनाने वाली थी और जीजू उन्हें छोड़कर अपने घर जाते लेकिन फिर शाम तक हमारे घर आने वाले थे,मैं जीजू से मिलने और उनके साथ होली में खूब मस्ती करने के मूड में थी,मेरी बेताबी को देखकर चाची में यहां तक कह दिया की सम्हलकर जीजा और साली का रिश्ता बहुत ही नाजुक होता है,थोड़ी भी चूक हुई तो तू साली से घरवाली बन जाएगी,मेरी माँ और चाची इसपर खूब हँसे थे लेकिन मुझे ये वहां तो अच्छा नही लगा और मैं अपने कमरे में मुह फुला कर आ गई लेकिन चाची की बात को सोचकर पता नही क्यो एक अजीब सी बेचैनी मेरे मन में होने लगी और मेरे होठो में इस बात को सोच सोच कर ही मुस्कुराहट सी आने लगी………..
“जीजू …”मैं दौड़कर जीजा जी के गले से लग गई जब दीदी और जीजा जी होली के एक दिन पहले घर आये,एक एक फ्रॉक में थी जिसे मैं सिर्फ घर में ही पहनती थी ,जीजा जी के मजबूत सीने से जैसे ही मेरे बड़े स्तन ठकराये मैं थोड़ा पीछे हटने को हुई लेकिन तब तक तो जीजू ने भी मुझे कस लिया था ,अब तो मेरे स्तन उनके मजबूत सीने में धंस गए थे,और उनके हाथ मेरे पीठ पर थे जो ही उसे हल्के हल्के सहला रहे थे,मैं उसके कंधे में अपना सर रख कर थोड़ी देर तक खड़ी रही लेकिन जीजू ने मुझे थोड़ा दबा कर ही छोड़ दिया,मैं उनसे अलग हुई तो मेरे चहरे में लाली साफ थी मैं थोड़ी सी नर्वस हो गई थी ना जाने क्यो इस वाकये ने मुझे थोड़ा उत्तेजित कर दिया था,मैं अब जवान हो चुकी थी और मचलती हुई जवानी को सम्हालना ऐसे भी थोड़ा मुश्किल ही होता है,
“अच्छा पूरा प्यार बस जीजू पर ही उतार दे दीदी के लिए भी कुछ बचा है की नही “
सोनिया दीदी ने मुझे छेड़ा
“क्या दीदी आप भी “मैं उनके गले से जा लगी,
“ओह मेरी बेटी कितनी बड़ी लग रही है”दीदी ने मेरे गालो को खिंचा उन्हें तो अब भी मैं बच्ची ही लगती हु,जबकि वो मुझसे बस 2 साल की ही बड़ी है,
“क्या दीदी अभी तो 1 महीने पहले ही देखा था मुझे,”
“ये उम्र ही ऐसी है अभी तो इसके बढ़ने के दिन है”जीजू ने थोड़े अजीब अंदाज में कहा ,उनकी नजर मेरे वक्षो को घूर रही थी लेकिन उन्होंने जल्द ही नजर हटा ली,जिसे दीदी ने पकड़ लिया ..
“ह्म्म्म आप का इशारा तो मैं समझ रही हु,लेकिन खबरदार ये मेरी प्यारी बहन है”दीदी ने जीजू को आंखे दिखाई जो की हमारे समाज में कम ही होता है खासकर जब घरवाले भी मौजूद हो,
“ओह मेडम जी माफ कर दीजिये “जीजू ने कान पकड़कर बड़े ही मजाकिया अंदाज में कहा जिससे मैं और दीदी हँस पड़े लेकिन माँ ने दीदी को हल्के से मारा ,
“पति से ऐसे बात करते है ,वो भी सब के सामने “लेकिन दीदी और जीजू और मैं हंसते रहे वही पापा ,माँ थोड़े नर्वस हो गए,