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होली में खोली जीजा ने चोली

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होली में खोली जीजा ने चोली



होली का मौसम ,गर्मी की शुरुवात और ठंड का अंत,ये मौसम ही बना ही मौज मस्ती के लिए इसीलिए शायद हमारे पूर्वजो ने होली की शुरुवात की ,रंगों का त्यौहार,मस्ती का त्यौहार,लेकिन बदलते हुए सालो में और परिस्थितियों ने इस त्यौहार के स्वरूप को ही बदल दिया है ,आज होली में दारू पीने वालो,नशे में हुल्लड़ करने वालो और मस्ती के नाम पर सामाजिक मर्यादाओ को भंग करने वालो की जमात ही दिखाई देती है ,परिवार के लोग इन सबसे थोड़ा दूर ही रहते है ,लेकिन गांव में नही वहां का मौहोल आज भी उतना ही निर्दोष बना हुआ है,लेकिन इस शराब ने वहां का माहौल भी खराब किये हुए है,लेकिन फिर भी पारिवारिक लोग भी इसका मजा उठाते है,और खासकर मेरे गांव में तो खूब होली खेली जाती है,ये कहानी मेरे उस होली की है जिसे मैं कभी भूल नही सकती ,जिसमे एक दीवार गिरी और मैं लड़की से एक औरत बनी……

मेरा नाम सोना है ,अभी अभी मेरी बड़ी दीदी सपना की शादी राज नामक लड़के से हुई जो की पास के ही गांव का रहने वाला है लेकिन शहर में रहकर जॉब करता है,शादी को अभी 5 महीने ही हुए थे की होली ने दस्तक दी ,मेरे जीजा और दीदी बहुत ही अच्छे और मुझे बहुत ही प्यार करने वाले है,मैं अभी कालेज में हु जो की पास के ही कस्बे में पड़ता है,मेरी दीदी ने मुझे आगे की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया था ,जबकी मेरे घर वाले लड़की को पढ़ना ठिक ही नही समझते,घर वालो के इसी रवैये का भुगतान मेरी दीदी ने भी किया था,उन्हें कालेज जाने ही नही दिया गया,लेकिन उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ किया और घर वालो से लड़कर मुझे कालेज भेजा,जीजू भी बहुत ही ओपन माइंड के है ,वो मेरे गांव के पहले दामाद थे जिन्होंने दहेज नही लिया,हमारे परिवार में उनकी इज्जत इसी बजह से बहुत ही ज्यादा होती है,दूसरी ओर हमारे समाज में लड़के वाले हमेशा से ही अपनी मनमानी करते रहे है खासकर दामाद तो जैसे लड़की के घरवालों के लिए भगवान ही होता है,वो कुछ भी गलत करे सब माफ,यहां तक की मैंने कई लोगो को लड़कियों को मरते ही देखा है और घरवाले लड़की को ही डांट लगा देते है की पति है थोड़ा मार भी दिया तो क्या हो गया,मर्द है किसी दूसरी लड़की के साथ संबंध बना भी लिया तो क्या हो गया...मुझे इन सब चीजो से और ऐसे सोच से घिन सी आती है लेकिन क्या करे समाज में सोच ऐसे घर कर गई है की इसे युही तो मिटाया नही जा सकता इसके लिए लड़कियों को पढ़ना और आत्मनिर्भ बनना पड़ेगा,ऐसे इस मामले में जीजू जी का कोई जवाब नही वो दीदी को थोड़ी भी तकलीफ नही देते,बल्कि हमारे घर वालो की मदद को भी तैयार रहते है,और कोई भी नखरा नही दिखाते,सच कहु तो मेरे जीजू सोना है,...

सपना दीदी और मैं दोनो ही बहुत ही गोरी और गांव की भरी हुई लडकिया है,गांव में घूमना और खेतो और घर के काम करना हमे पसंद रहा,गांव वालो की गंदी नजर हमेशा से ही हम पर रही लेकिन सपना दीदी के रहते कोई भी आंख उठाकर देखने की हिम्मत नही करता वो किसी को भी माँ बहन की गली देने से नही चूकती थी ,लेकिन मेरा स्वभाव थोड़ा शांत है और उनके जाने के बाद ही मुझे पता चला की मैं जवान हो गई हु और मर्दो के लिए इतनी आकर्षक हो गई हु ,मेरे उजोरो की चोटी छुपे नही छुपती और गोल नितम्भ जैसे सब कुछ कहना चाहती हो,गोरा बदन और मदमस्त यौवन की वजह से मेरे पीछे गांव के हर आवारा लड़के पड़े रहते है,यहां तक की अधेड़ और बुड्ढे भी मेरी जवानी को निहारे बिना नही रहते,मेरे रिस्ते के चाचा और ताऊ भी नजर बचा कर मुझे निहार ही लेते है,पहले तो मुझे कुछ समझ नही आता था लेकिन उनका यू देखना या तो मेरे मन में उनके लिए घृणा भर देता या मैं थोड़ी मचल जाती ,आखिर जवानी का उफान थो मेरे अंदर भी था लेकिन ये कब फूटने वाला था और कैसे फूटने वाला था ये तो मैंने सपने भी नही सोचा था….

मेरे जीजू राज भी किसी से कम नही थे और किसी से मैं सबसे पहली बार आकर्षित हुई थी तो उनसे ही ,वो सचमे एक गजब की व्यक्तित्व के मालिक थे,हा काले थे लेकिन सच्चे मर्द थे,बलशाली भुजाए,चौड़ा बालो से भरा हुआ सीना ,गजब के आकर्षक,सभी से प्यार से मिलने और बोलने वाले और सबसे बड़ी बात महिलाओं की इज्जत करने वाले,उनका केयर करने वाले ….वाह आई लव माय जीजू…..मेरे सपने में अगर पति की कोई छबि थी तो वो मेरे जीजू ही थे,मैं उस दिन का बेसब्री से इंतजार करने लगी जब वो आएंगे,दीदी से मिलने की बेचैनी से ज्यादा जीजू से मिलने की खुसी मेरे अंदर मचल रही थी ,और मैं जानती थी की वो होली में दीदी के साथ ही घर आने वाले है,दीदी की पहली होली थी तो वो मायके में ही मनाने वाली थी और जीजू उन्हें छोड़कर अपने घर जाते लेकिन फिर शाम तक हमारे घर आने वाले थे,मैं जीजू से मिलने और उनके साथ होली में खूब मस्ती करने के मूड में थी,मेरी बेताबी को देखकर चाची में यहां तक कह दिया की सम्हलकर जीजा और साली का रिश्ता बहुत ही नाजुक होता है,थोड़ी भी चूक हुई तो तू साली से घरवाली बन जाएगी,मेरी माँ और चाची इसपर खूब हँसे थे लेकिन मुझे ये वहां तो अच्छा नही लगा और मैं अपने कमरे में मुह फुला कर आ गई लेकिन चाची की बात को सोचकर पता नही क्यो एक अजीब सी बेचैनी मेरे मन में होने लगी और मेरे होठो में इस बात को सोच सोच कर ही मुस्कुराहट सी आने लगी………..

“जीजू …”मैं दौड़कर जीजा जी के गले से लग गई जब दीदी और जीजा जी होली के एक दिन पहले घर आये,एक एक फ्रॉक में थी जिसे मैं सिर्फ घर में ही पहनती थी ,जीजा जी के मजबूत सीने से जैसे ही मेरे बड़े स्तन ठकराये मैं थोड़ा पीछे हटने को हुई लेकिन तब तक तो जीजू ने भी मुझे कस लिया था ,अब तो मेरे स्तन उनके मजबूत सीने में धंस गए थे,और उनके हाथ मेरे पीठ पर थे जो ही उसे हल्के हल्के सहला रहे थे,मैं उसके कंधे में अपना सर रख कर थोड़ी देर तक खड़ी रही लेकिन जीजू ने मुझे थोड़ा दबा कर ही छोड़ दिया,मैं उनसे अलग हुई तो मेरे चहरे में लाली साफ थी मैं थोड़ी सी नर्वस हो गई थी ना जाने क्यो इस वाकये ने मुझे थोड़ा उत्तेजित कर दिया था,मैं अब जवान हो चुकी थी और मचलती हुई जवानी को सम्हालना ऐसे भी थोड़ा मुश्किल ही होता है,

“अच्छा पूरा प्यार बस जीजू पर ही उतार दे दीदी के लिए भी कुछ बचा है की नही “

सोनिया दीदी ने मुझे छेड़ा

“क्या दीदी आप भी “मैं उनके गले से जा लगी,

“ओह मेरी बेटी कितनी बड़ी लग रही है”दीदी ने मेरे गालो को खिंचा उन्हें तो अब भी मैं बच्ची ही लगती हु,जबकि वो मुझसे बस 2 साल की ही बड़ी है,

“क्या दीदी अभी तो 1 महीने पहले ही देखा था मुझे,”

“ये उम्र ही ऐसी है अभी तो इसके बढ़ने के दिन है”जीजू ने थोड़े अजीब अंदाज में कहा ,उनकी नजर मेरे वक्षो को घूर रही थी लेकिन उन्होंने जल्द ही नजर हटा ली,जिसे दीदी ने पकड़ लिया ..

“ह्म्म्म आप का इशारा तो मैं समझ रही हु,लेकिन खबरदार ये मेरी प्यारी बहन है”दीदी ने जीजू को आंखे दिखाई जो की हमारे समाज में कम ही होता है खासकर जब घरवाले भी मौजूद हो,

“ओह मेडम जी माफ कर दीजिये “जीजू ने कान पकड़कर बड़े ही मजाकिया अंदाज में कहा जिससे मैं और दीदी हँस पड़े लेकिन माँ ने दीदी को हल्के से मारा ,

“पति से ऐसे बात करते है ,वो भी सब के सामने “लेकिन दीदी और जीजू और मैं हंसते रहे वही पापा ,माँ थोड़े नर्वस हो गए,

 
जीजू दीदी को छोड़ अपने गांव को निकल गए थे उनके जाते ही पापा दीदी के ऊपर भड़क गए ,

“तुझे शर्म हया है की नही अपने पति से सबके सामने ऐसे बात करती है ,वो तो सीधा साधा पति मिल गया है तुझे वरना अभी तेरे गालो में दो झापड़ लगा देता”पापा मेरी तरफ मुड़े

“और तुझे शर्म हया है की नही ऐसे कपड़े पहन के घूम रही है और कैसे राज से लिपट गई थी,हमारे परिवार में कोई अपने भाई से भी ऐसे लिपटता है क्या वो तेरा जीजा है,कुछ उल्टा सीधा हो गया तो...अब जवान हो गई है और “पापा का गुस्सा इतना तेज था की मेरे आंखों में आंसू आ गए लेकिन दीदी पापा के ऊपर ही चढ़ गई ,

“आप लोग इस घटिया सोच से कब बाहर आओगे,वो तो मेरी किस्मत है की बिना ज्यादा पढ़े लिखे भी मुझे राज जी जैसे समझदार पति मिल गए वरना आप लोग तो मुझे भी किसी गवार के साथ ही बांध देते जो मुझे आपके सामने भी मारता तो आप लोग चुप चाप देखते और मेरी बहन को गंदी नजरो से देखता छेड़छाड़ करता फिर भी उसकी आवभगत करते”

दीदी गुस्से में लाल हो गई थी ,माँ को समझ आ गया की बात ज्यादा बढ़ सकती है उन्होंने दीदी को प्यार से समझने की सोची ,

“अरे बेटी हमारा समाज ही ऐसा है की लड़की को झुक कर रहना पड़ता है,अब हम समाज के बनाये हुए नियमो से तो बाहर नही जा सकते”

“समाज के नियंम हमारी सुविधा के लिए बनाये गए थे माँ,ना की इस लिए की लड़कियों का शोषण किया जाय,लड़कियों को जानवरो जैसे रखा जाय,क्या हम लडकिया बस मर्दो की गुलामी करने के लिए ही बनी है,क्या हम इंसान नही है,समाज के ठेकेदारों ने हमे ऐसा बना दिया है वरना हम भी लड़को से किसी भी मुकाबले में कम नही है,गार्गी,मैत्रियी भी तो लड़की ही थी,लक्ष्मी बाई,आनंदी(इंडिया की पहली महिला डॉक्टर),

भी तो ….”

चटाक ….

एक जोरदार आवाज आयी ,पापा ने दीदी के गालो में एक थप्पड़ जड़ दिया था,

“शहर क्या चले गई ,अच्छा पति क्या मिल गया हमे ज्ञान दे रही है,”

पापा इतना बोलकर बाहर चले गए,दीदी के आंखों में आंसू आ गए थे,वो बिना कुछ बोले ही अंदर चले गयी……..

रात दीदी अपने कमरे में खामोश बैठी थी,कल ही होली थी और दीदी का मुड़ बहुत ही खराब था,

“दीदी क्या हुआ आप तो इन लोगो को जानती हो ना फिर भी …”मैं दीदी के पास पहुची

“ह्म्म्म जानती हु ,लड़की कुछ भी बोले तो उन्हें मार के चुप करा देते है,सच में सोनी आज तक मैंने तेरे जीजा जैसा मर्द नही देखा जो की लड़कियों की इतनी इज्जत करता हो,वो मुझे अपने पलको में बिठाकर रखते है,मेरा बहुत ख्याल रखते है”दीदी का चहरा जीजू के याद में खिल गया,

“अच्छा दीदी आप ने जीजू को उस समय क्यो डांट दिया था “अब दीदी के चहरे में मुस्कान आ गई

“अच्छा पहले तू बता की तेरा चहरा उस समय लाल क्यो हो गया था”

दीदी की बात से मैं शर्म से पानी पानी हो गई,

“क्या दीदी आप भी “

“अरे बता ना दीदी से क्या छुपा रही है”

“मुझे क्या पता बस कुछ अजीब सा लगा जब जीजू ने मुझे अपने सीने में दबाया “

दीदी मेरे गालो को प्यार से सहलाई और मेरे ठोड़ी को पकड़कर मेरा चहरा ऊपर किया जो की अभी शर्म से नीचे हो गया था,

“वह मेरी बिटिया अब सचमे बड़ी हो गई है,जीजू के सीने से तेरा ये टकराया ना “उन्होंने मेरे उजोरो को जोरो से दबाया

“आह दीदी छि “मैं और भी शर्मा गई थी लेकिन सच पूछो तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा

“क्यो बोल ना “दीदी ने जोर दिया लेकिन मैं सर नीचे किये ही ना में सर हिलाया

“ओहो ..समझ गई बदमाश सब समझ गई ,तेरे जीजू भी समझ गए थे और इसी लिए तेरे इन कबूतरों को देख रहे थे ,इसलिए उन्हें डांट पड़ी ,”

“क्यो “मैं पागलो जैसा प्रश्न कर बैठी ,जिसपर दीदी जोरो से हँसी

“क्योकि मेरी रानी उनका हक तेरे नही मेरे कबूतरों पर है”दीदी फिर से खिलखिलाई

“वो मेरे जीजू है देख लिया तो क्या हुआ “मैंने थोड़े शांत स्वर में कहा

“अच्छा तो कल इन्हें मसलवा भी लेना अपने जीजू से ,बड़ी आयी जीजू की साली “दीदी ने तोड़े मजाक में ही कहा था लेकिन मुझे ये सोच के ही कुछ अजीब सा लगा की जीजू का हाथ मेरे उजोरो को मसल रहा है,

“छि दीदी मैं क्यो मसलवाउ आप ही ऐसा करो “दीदी फिर से हँसी

“वो तो मैं रोज ही करवाती हु”दीदी ने हंसते हुए कहा ,लेकिन मेरी आंखे बड़ी हो गई

“दीदी आपको दर्द नही होता “मैं आश्चर्य में थी

“तू सच में अभी बच्ची ही है,तेरे जीजू को बोलकर तुझे थोड़ा बड़ा करना पड़ेगा नही तो यंहा के कमीने लड़को के ही जाल में फंस जाएगी “दीदी के बातो में थोड़ी गंभीरता थी जिसे मैं नही समझ पाई

“तुझे अभी बहुत पढ़ना है बहुत आगे जाना है ,इन लोगो को दिखाना है की एक गांव की लड़की क्या कर सकती है,और इसमें मैं और तेरे जीजू हमेशा तेरे साथ रहेंगे”दीदी अब सच में पूरी तरह से गंभीर थी,

“लेकिन दीदी पढ़ाई तो मैं कर ही रही हु,फिर मैं क्यो बिगडूंगी”

दीदी थोड़ी शांत हो गई

“तुझे नही पता की ये लोग कैसे है,जवान लड़की के पीछे हाथ धोकर पड़ जाते है ,और तेरी तो जवानी झलक रही है,पता नही अगर तुझे सबका चस्का लग गया तो फिर क्या होगा,साले तुझे बदनाम भी करेंगे और तेरा मजा भी उठाएंगे,....नही नही तू मेरे साथ ही रहना ,अब शहर में ही पड़ना ,”

दीदी जैसे अपने आप से ही बाते कर रही थी,जो की मेरे समझ के बाहर थी ,

“दीदी ...दीदी “मैंने थोड़े जोर से कहा

“ह्म्म्म ओह मैं तो ना जाने कहा खो गई थी,चल जल्दी सो जा कल होली है ना तेरे जीजू भी शाम तक आ जाएंगे …”

“मैं तो उनसे बहुत होली खेलूंगी “मैं बहुत ही एक्साइटेट थी,

“हम्म पता नही होली के अलावा और क्या क्या खेलने वाली है तू “दीदी की अजीब बात से मेरा मुह बन गया लेकिन दीदी हँस पड़ी

होली ,आज मेरे जीवन की सबसे हसीन होली होने वाली थी ,आज मैं अपने नए जीजू के साथ होली खेलने वाली थी,वो जीजू जिनसे मैं बहुत ही प्यार करने लगी थी ,जाने अनजाने ही उनमे अपना पति और अपनी मोहोब्बत देखने लगी थी,वो ही एक मेरे लिए मर्द थे बाकी के लोगो पर तो मेरी नजर ही नही जाती और कल के वाकये के बाद से ,और दीदी के मुह से उनकी इतनी तारीफ सुनने के बाद मैं तो उनसे मिलने को पागल ही हो रही थी,पापा के डर से आज मैंने फ्रॉक नही पहनी थी बल्कि एक सफेद सलवार सूट पहन लिया था,मेरे यौवन की आहट को इसमें भी छिपाना मुश्किल ही था,तने हुए उजोर साले सूट में ऐसे कस रहे थे की मैं बेचैन हो जाती थी,ऊपर एक ब्रा भी पहनो ,मैंने थोड़ा ढीला सा सूट पहनना ही उचित समझा ,लेकिन क्या करू ये निगोड़ी जवानी ……

 
दिन भर सहेलियों और परिवार वालो से होली खेली जो की आम होली की तरह ही थी दोपहर होते होते थककर घर आ गई दीदी भी साथ ही थी,ऐसे भी दोपहर के बाद होली के दिन हमारे गांव में लडकिया बाहर नही निकला करती क्योकि गांव के मर्द दारू के नशे में dj लगाकर झूमने लगते है,गली में घूमते रहते है और महिलाओं खासकर लड़कियों के लिए ऐसे माहौल में जाना उचित नही समझा जाता ,होली की दोपहर सबसे बोरिंग होती है लेकिन आज नही क्योकि आज तो मेरे जीजू आने वाले थे,पापा रात से पहले घर नही आने वाले थे वो भी दारू पीकर कही पड़े होंगे,वही माँ अधिकतर अपनी सहेलियों के घर ही रुक जाती थी जंहा सभी औरते एक साथ होली खेलती और भांग पीकर मस्त रहती,दीदी को ये सब कभी पसंद नही था इसलिए वो हमेशा मुझे दोपहर को ही घर ले आती थी,मैंने जीजू के स्वागत की तैयारी के लिए घाघरा चोली पहनी मेरी ब्रा मुझे बहुत ही परेशान कर रहा था इसलिए मैंने उसे ना ही पहनने का निर्णय किया,और बाल्टी में रंग घोलकर भी रख लिया,दीदी थक चुकी थी और कमरे में जाकर सो गई थी लेकिन मुझे कहा नींद थी,मैं तो बेचैनी से इधर उधर टहल रही थी,3 बजने को थे की कार के हॉर्न से मैं दरवाजे की तरफ दौड़ी ,दरवाजा खटखटाने की आवाज आयी लेकिन मैं दरवाजे के पास ही खड़ी हुई बस इंतजार कर रही थी,

“अरे कौन है दरवाजा तो खोलो “जीजू की आवाज में थोड़ी लड़खड़ाहट थी ,मैंने बाल्टी पास ही रखी और दरवाजा खोलकर उसके पीछे ही छिप गई जीजू अंदर आये और चोरों तरफ देखने लगे,मैंने हल्के से दरवाजा बंद किया , किसी को ना पाकर वो पलटे ही थे की मैंने पूरी बाल्टी ही उनके ऊपर डाल दी

“हैप्पी होली “”मैं भागने ही वाली थी की उन्होंने मेरे हाथो को पकड़ लिया और मुझे अपने से सटा लिए ,वो पूरी तरह से गीले थे और उनके गीले कपड़े के कारण मेरे कपड़े भी गीले हो रहे थे,मेरे उजोर उनके सीने से दबे हुए थे और मैं कसमसा रही थी,

“साली जी ऐसे कैसे भगोगी अभी तो हमने आपको भिगोया ही नही है”

“जीजू छोड़ो ना “जीजू के मुह से शराब की थोड़ी बदबू आयी

“अपने शराब पी है”

“हा और तुम्हारे और तुम्हारी दीदी के लिए भी लाया हु ,लेकिन पहले तुम्हे भिगोने तो दो”मैं हंसते हुए छटपटाने लगी जीजू ने मुझे अपने गोद में उठा लिया और सीधे पास ही पड़े एक रंग से भारी बाल्टी के पास ले जाकर उतारा ,मैं समझ गई थी वो क्या करने वाले है लेकिन मैं भाग भी तो नही सकती थी ,सच में जीजू थे तो बड़े ही स्ट्रांग ,उन्होंने मेरे हाथो को एक हाथ से पकड़े रखा और दूसरे से बाल्टी को उठाकर मेरे उपर उढेल दिया ,अब मैं पूरी तरह से गीली थी और मेरे कपड़े रंगों से सराबोर थे,सबसे ज्यादा शर्म तो मुझे तब आयी जब मेरे स्तन मेरे कपड़े से चिपक गए और ऐसे दिखने लगे जैसे की वो नंगे ही हो ,ब्लाउज़ का कपड़ा थोड़ा पतला था और मेरे मोटे मोटे स्तनों उसमे से झांक रहे रहे,थे ,मैं शर्म से दोहरी हो रही थी लेकिन जीजू उसे घूरे जा रहे थे,उन्होंने मुझे फिर से खीचकर अपने सीने से लगा लिया ,इसबार मेरे लिए एक और तूफान आ गया था उनके कमर के नीचे से मेरे कमर के नीचे कुछ चुभ रहा था ऐसा लगा जैसे कोई लकड़ी चुभो रहा हो.

“जीजू ये क्या चुभ रहा है”मैं थोड़ी मचली लेकिन जीजू ने मेरे कमर के नीचे मेरे नितम्भो में हाथ फेरा और उसे अपनी ओर खिंच लिया जिससे वो लकड़ी जैसा कुछ मेरे जांघो के बीच पहुच गया और वही पर रगड़ खाने लगा,आज जीवन में पहली बार मुझे ऐसी उत्तेजना का अहसास हुआ था,मैं उनसे दूर होने को छटपटाने लगी थी,लेकिन वो अपने लकड़ी को मेरे जांघो के बीच रगड़े ही जा रहे थे,मुझे लगा जैसे की मेरे योनि से कुछ रिसाव सा हो रहा है,मुझे जोरो की पेशाब की लगने लगी थी,मैंने खुदको थोड़ा सम्हाला

“जीजू प्लीज छोड़ो ना अजीब लग रहा है,”मैं थोड़ी शांत हो गई थी लेकिन मैं सच में छूटना चाहती थी

“अच्छा लेकिन एक शर्त में ,मुझे रंग लगाने दे “

“भिगो तो चुके हो “मैं थोड़ी शरारत भरे लहजे में कहने लगी

“अरे मेरी साली जी अभी तो आपको असली पिचकारी से भिगोना बाकी है लेकिन तब तक रंग ही लगाने दो “जीजू की बात मुझे समझ तो नही आयी लेकिन मैंने पिंड छुड़ाने के लिए हामी भर दी ,जीजू जेब से रंग निकाले और मेरे चहरे से लगाना शुरू कीया उन्होंने लाल रंग का गुलाल निकाल कर मेरे गालो पर मलना शुरू किया ऐसी मालिस तो किसी ने आज तक नही की थी वो बहुत ही आराम और इत्मीनान से मेरे गालो में अपने हाथ चला रहे थे,मेरे फुले हुए गोर गालो में उनके सख्त हाथो के स्पर्श ने मेरे होठो में एक अनजानी सी मुस्कान खिला दी ,वो थोड़े नीचे होते हुए मेरे गले में रंग लगाने लगे,मैंने केयर किया की उनकी सांसे थोड़ी तेज हो रही थी,उन्होंने मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे उरोजों को पकड़ा मैं मचली,

“जीजू नही “इस बार मेरी आवाज में एक सिहरन भी थी,मैं मादकता में डूबती जा रही थी,जीजू का ऐसा करना मुझे बहुत सुकून दे रहा था लेकिन फिर भी मुझे बहुत ही शर्म आ रही थी ,जीजू ने मुझे पलटा और मेरी पीठ को अपने सीने से लगा लिया ,मैं मचलती हुई हल्के हल्के नही नही बोल रही थी जबकि मेरे मन में बस हा ही हा थी ,वो मेरे उजोरो को हल्के हल्के दबाने लगे मेरी आंखे भी बंद हो गई थी ,ना जाने जीजू ये कैसी होली खेल रहे थे,लेकिन मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और मेरे होठो से बस सिसकिया ही निकल रही थी,

“आह जीजू “उनके हाथो का अहसास मेरे वक्षो पर ऐसे हो रहा था जैसे मैंने कपड़े पहने ही ना हो ,वैसे भी मैंने जो पहना था उसका कोई मतलब नही रह गया था,जीजू के हाथ मेरे पीछे आये और उन्होंने मेरे ब्लाउज़ के पीछे लगे चैन को खोल दिया ,उनके सामने अब मेरी नंगी पीठ थी जिसे पर वो हाथो से नही अपने होठो से अपने थूक को लगा रहे थे ,उनके कमर के बीच की वो लड़की जिसे लिंग कहते है तन कर सच में किसी रॉड की तरह हो चुका था और मेरे नितम्भो को धीरे धीरे से ठोकर लगा रहा था ,वो थोड़े उत्तेजित होने लगे थे उन्होंने मेरी कमर को अपने कमर से सटा लिया और अपने लिंग को मारे गद्देदार नितम्भो में रगड़ना शुरू कर दिया,मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा था,थोड़ी शर्म और बहुत सा मजा ,मैं पागल हुए जा रही थी ,मुझे लगने लगा की मैं सच में जवान हो गई हु और कई ऐसी चीज है जो मुझे अभी सीखना है,वो अपने होठो से मेरे पीठ के कोने कोने को चूम रहे थे और उनके होठ गीले होकर अपने लार छोड़ रहे थे,मैं मचल रही थी जीजू मचल रहे थे ,और सबसे ज्यादा उनके जांघो के बीच वो रॉड मचल रहा था ………

उन्होंने रंग से मेरी पीठ को रंग दिया और उनके हाथ मेरे बांहो से होते हुए मेरी नंगी पीठ पर चलते हुए मेरे उरोजों तक पहुच गए,मेरे नंगे उरोजों को वो इतने प्यार सहला रहे थे की मैं पागल ही हो गई,मेरे निप्पल कड़े हो चुके थे और वो उन्हें अपनी उंगलियों से सहला रहे थे,उन्होंने फिर के रंग लिया और मेरे उरोजों में मलने लगे,मेरे योनि का गीलापन भी बढ़ रहा था उससे ज्यादा उसमे एक अजीब सी खुजली का अहसास हो रहा था,जो मुझे और भी बेचैन कर रही थी,मैं अपने दोनो जांघो को आपस में रगड़ने लगी ,जीजू बहुत ही ज्यादा समझदार निकले उन्होंने एक हाथ मेरे उरोजों से हटाया और मेरे जांघो के बीच लाकर रख दिया मेरे घाघरे के ऊपर से ही उन्होंने मेरे योनि को सहलाना शुरू किया

“आह जीजू क्या कर रहे हो ,मर जाऊंगी ओह माँ ,नही “लेकिन वो कहा मानते एक हाथ से मेरे स्तनों की हालत बुरी कर रखी थी तो दूसरे से मेरे योनि को मसलने लगे थे ,उनका मन अब भी नही भरा उन्होंने मेरे घाघरे का नाडा ही खोल दिया वो सरक कर जमीन में ही गिर जाता अगर मैं अपने हाथो से उसे नही पकड़ती मैं सर उठाकर जीजू को देखने या उन्हें रोकने की हालत में ही नही थी,उन्होंने ढीले घाघरे के अंदर से अपना हाथ घुसा दिया ,मैं अगर उन्हें रोकने को अपना हाथ उठाती तो घाघरा जमीन में ही गिर जाता मैं मचलती हुई खड़ी रही मुझे अजीब सी गुदगुदी हो रही थी ,

“जीजू प्लीज् ना नही “

“मेरी जान होली के दिन जीजू को कभी भी नही नही बोलते”उन्होंने मेरे गालो को भरकर चूमा और मेरे पेंटी के इलास्टिक को थोड़ा सरका कर मेरे नग्न योनि में अपने उंगलियों को ठिका दिया,वो अपनी उंगलियों से उसे नापने को हुए लेकिन योनि का मुह अभी पूरी तरह से बंद था वो ऊपर की त्वचा को ही सहलाने लगे ,मेरा गीलापन उनकी उंगलियों को भिगोने लगा ,मेरे लिए ये सब सहन करना ही मुश्किल था और मैं ऐसे झड़ी जैसे कोई बांध टूट गया हो,जैसे जोरो से पेशाब कर दी हो.,तो अब खड़े नही हो पा रही थी मेरे पाव लड़खड़ाने लगे ,उन्होंने मुझे सम्हाला और अपने हाथो को निकालकर मेरे कमर को पकड़ लिया मुझे अपनी ओर किया ,मैं उसके बांहो में खुद को छोड़ चुकी थी जैसे मैं बेहोश ही हो गई हु,उन्होंने मेरे गिरे हुए सर को उठाया और मेरे होठो को अपने होठो में मिला कर चूसने लगे,मैं इतनी भी शक्ति नही जुटा पाई की अपने प्यारे जीजू का साथ दे सकू ,

“आई लव यू साली जी “

उन्होंने बड़े ही प्यार से कहा

“लब यू जीजू “मैं इतना ही बोल पाई मेरे होठो में मुस्कान खिल गई थी मुझे आज मेरे जीजू का इतना प्यार जो मिला था मुझे लगने लगा जैसे मैं उनके ही लिए हु ,मेरा सब कुछ उनका ही है,मैं थोड़ी संहली तो उनसे नजर ही नही मिला पाई ,मैं अंदर जाने को हुई उन्होंने फिर से मुझे अपनी ओर खिंच लिया और मेरे होठो में अपने होठो को भर लिया ,मैं एक हाथ से घाघरे का नाडा लगा रही थी उसे कसकर मैंने अपना हाथ उसके सर पर रख दिया हम दोनो बहुत देर तक एक दूसरे के होठो को चूसते रहे मेरे लिए ये सब पहली बार था लेकिन अब कोई भी डर मेरे अंदर नही था ना ही कोई संकोच ही बचा था,मुझे समझ आ गया था की मेरे जीजू मुझे कितना प्यार करते है और मुझे कितनी खुशिया दे सकते है,शायद इसी लिए दीदी इनकी इतनी दीवानी थी ,जब हमारा चुम्मन टूटा मैं शर्मा कर अपना सर उनके मजबूत कंधों पर ठिका दिया ,उन्होंने मेरे मांसल नितम्भो को सहलाया ,

“मजा आया “

मैंने ना में सर हिलाया जो की बिल्कुल ही गलत था

“अच्छा तब तो तुम्हे पूरा मजा देना पड़ेगा “

मैं सर उठाकर उन्हें आश्चर्य से देखने लगी

“कैसे “मैंने मासूमियत भरा प्रश्न किया

“अपने इस लकड़ी को तुम्हारे छेद में घुसकर “जीजू जोर से हँसे

लेकिन मैं बुरी तरह से शर्मा गई ,बचपन से ही मुझे सिखाया गया था की इस छेद को किसी को नही दिखाना और मर्दो को तो बिल्कुल भी नही ,ये गंदी जगह होती है,

“छि जीजू आप कैसी बाते करते है”

“अरे मेरी जान जब तक मैं अपनी इस पिचकारी से तुम्हे भिगोउंगा नही तब तक तो साली और जीजा की होली अधूरी ही रहेगी”

“नही खेलनी ऐसी होली ,अब छोड़ो ना देखो कहा कहा रंग लगा दिए हो ,दीदी देखेगी तो डाटेंगी मैं नहाने जा रही हु आप भी नहा लो “

मैंने उनसे खुद को छुड़वाया

“नहाऊंगा पहले तेरी दीदी को तो भिगो दु अपने इस पिचकारी से “उन्होंने अपने खड़े हुए लिंग की तरफ इशारा किया ,मैं शर्माते हुए भाग गई और वो दीदी के कमरे की तरफ चले गए……...

 
काजल कमरे से बाहर आयी और थोड़ी देर में मेरे सामने की स्क्रीन बदल गई ,इस समय कमरे में नेहा भी थी ,काजल अभी बिस्तर पर लेट रही थी ,रॉकी और टाइगर उसके हुस्न को मुह फाडे हुए देख रहे थे ,वही नेहा की नजर अभी काजल को देख रही थी ,टाइगर ने अभी अभी रिमोट से मेरा विव्यु बदला था,कैमरे के तीन एंगल मेरे सामने थे ,एक से मैं काजल की पीठ और मसाज करते हुए उस व्यक्ति को देख सकता था ,ये साइड विव्यु था जिससे पूरा कमरा मुझे दिखाई दे रहा था ,दूसरा नीचे लगाया गया था जिससे मैं काजल के चहरे को आराम से देख पता अगर वो सर उठाती ,अभी उसके लेटने पर मुझे उसके बाल दिख रहे थे ,और थोड़े बाजू का चहरा लेकिन अभी उसका चहरा पूरी तरह से नीचे था ,अगर वो सर घुमाती तो मैं उसके चहरे को आराम से देख पाता,वो पेट के बल लेटे हुई थी ,तीसरा भी साइड से पूरे कमरे का विव्यु दे रहा था ,कमरा ज्यादा बड़ा नही था और कैमरे की क्वालिटी अच्छी थी जिससे मुझे आराम से सब कुछ दिख पा रहा था,उस आदमी ने काजल के चहरे को उठाकर उसकी ठोड़ी के पास कुछ छोटे गड्ढे सा रखा जिससे काजल का सर थोड़ा ऊपर हो गया,उसके चहरे को अब सभी देख सकते थे ,वो हल्के से मुस्कुराई ,उस आदमी ने उसके बालो को पीछे करते हुए उसे साइड में सरका लिया ,अब काजल का चहरा स्पष्ट था,काजल की नजर नेहा से मिली उसने आंखों ही आंखों में उससे जैसे कुछ सवाल किया ,नेहा ने हल्के से हा में सर हिलाया ,और जो कैमरा काजल के चहरे को दिखा रहा था उधर इशारा किया काजल की आंखे सीधे उस कैमरे को देखने लगी ,एक बारी तो मैं ऐसे घबराया जैसे वो मुझे ही देख रही हो ,मुझे समझ आ गया था की काजल ने नेहा से क्या पूछा था और नेहा ने उसे क्या बताया होगा,लेकिन वहां बैठे बाकी लोग इसे जान नही पाए क्योकि किसी को नही पता था की नेहा उर्फ रेहाना असल में काजल की ही सहेली है….टाइगर ने नेहा को पास बुलाया और कुछ कहा नेहा वहां से निकल गई थी,वो आदमी अपने काम में लग चुका था ,मैंने एक ड्रिंक बनाई और हल्के हल्के सिप लेने लगा..

काजल के पैरो से मालिश शुरू हुई थी ,वो उसके एड़ी को मसल रहा था,वो एक पारदर्शी तेल का इस्तमाल कर रहा था ,काजल ने एक गहरी सास भरी जैसे वो कुछ सूंघ रही हो ,शायद वो तेल की ही खुसबू होगी,मेरी बीवी पर मेरे सामने हुआ किसी गैर का वो पहला स्पर्श ,मेरे अंदर से कोई झनकार उठी वही काजल ने एक आह भरी जिसकी आवाज मेरे कानो में भी पहुची ,

काजल की बाकियों के चहरे में एक मुस्कान आ गई,ऐसे तो काजल नियत से ही बहुत गर्म थी लेकिन फिर भी ना जाने टाइगर को क्या सुझा

“बेबी एक ड्रिंक लेना चाहोगी स्पेशल तुम्हारे लिए तैयार करवाया हु,उसे पीकर जन्नत में पहुच जाओगी “टाइगर के चहरे में एक अर्थ भरी मुस्कान तैर गई ,काजल थोड़ी देर सोचती रही लेकिन उसने ना में सर हिला दिया ,

“कॉमआन यार मजा आ जाएगा तुम्हे ,वो तुम्हे और भी गर्म कर देगा “टाइगर के चहरे में शैतानी मुस्कान खिल गई ,

“मैं तो ये सोचकर ही गर्म हो रही हु की मेरा पति मुझे देख रहा ह,मुझे अब किसी भी ड्रिंक की जरूरत नही है” “उसने रॉकी के तरफ इशारा किया लेकिन मुझे लगा जैसे वो मेरे बारे में कह रही हो,मेरा दिल बैठ गया लेकिन अगले ही पल मुझे ये भी याद आया की काजल ने उसे मना क्यो किया ,वो शायद जानती थी की टाइगर उसे क्या देने जा रहा था,शायद वही ड्रग्स ड्रिंक के फार्म में,जिससे काजल अपना सुध बुध खोकर वासना की अंधेरी राहों में गुम हो जाती ,लेकिन काजल तो दूध की जली थी,वो टाइगर के प्लान को समझकर बड़ी ही खूबी से उसे चुप करा दिया था,

काजल मुस्कुराते हुए रॉकी को देख रही थी जो की अपनी आंखे बड़ी बड़ी किये उस हुस्न को देख रहा था जिसे वो भोगा करता था(मुझे तो यही लगता था),शायद उसके दिल की धड़कन भी मेरी ही तरह बड़ी हुई थी ...वही टाइगर शैतानी हँसी से मुस्कुरा रहा था उसने वहां लगे कैमरे की ओर देखा और अपनी मुस्कान और भी चौड़ी कर दी जैसे वो मुझे चिढ़ा रहा हो ,

वो आदमी अपने हाथो का जादू काजल पर चलाने लगा था,काजल की आंखे अपने ही आप बंद होने लगी थी,वो सिसकिया ले रही थी अब लड़के का हाथ उसके घुटनो तक को रगड़ रहा था,उसके मजबूत हाथो का स्पर्श काजल को पागल बना रहा था ,उसकी सांसे अनियंत्रित होने लगी थी,उसका हाथ मजबूत गोल जांघो के पास पहुचा ,काजल की मोटी जाँघे मुलायम और गद्देदार ,मैंने अपने जीवन में उसे बहुत मसला था मुझे उस व्यक्ति पर रस्क हो रहा था जो आज मेरी बीवी के जांघो में बिना किसी रोक टोक के हाथ फेर रहा था,उसके निकर से उसका मजबूत और विशालकाय काला लिंग (जो की मैं देख चुका था )तना हुआ दिखने लगा ,वो भी अब काजल के जांघो को छू रहा था,काजल को भी इसका अहसास हो रहा होगा क्योकि वो हल्के से मुस्कुराने लगी थी ,वो नाइटी को ऊपर उठा रहा था जैसे जैसे उसके हाथ ऊपर जाते वहां ढका हुआ कपड़ा ऊपर उठ जाता,

इधर मेरे लिंग का भी हाल कुछ अच्छा नही था मैं उसे बाहर निकलना चाहता था लेकिन मन में भरा हुआ वो दर्द जो मुझे ये सब देखकर हो रहा था वो मुझे इसे निकलने से मना कर रहा था ,मैं खुस की भावनाओ के द्वंद में फंसा कभी रोने तो कभी हँसने की स्तिथि में पहुच गया था,सही गलत के बीच फंसा मेरा मन एक जगह पर टिक ही नही पा रहा था,अभी अभी लड़के ने काजल के जांघो पर अपना लिंग जोर से दबाया था ,

“आह “काजल ने धीरे से कहा ,और मेरे लिंग ने फुंकार मारी,साथ में मेरी आँखों ने आंसू छोड़ दिए ,मैं एक नया पैक बना कर तुरंत ही पी गया ,काजल का कपड़ा अब उसके जांघो से पूरी तरह से ऊपर था,चूतड़ों की गोलाई और भराव अब झांकने लगे थे ,मुलायम चूतड़ पेटी में कसे हुए ,दूधिया रंग के और आपस में कसे हुए थे,उस उत्तेजक दृश्य ने रॉकी और टाइगर की हालत भी खराब कर दी थी ,वो अपने पेंट से ही लिंग को मसलने लगे थे ,टाइगर उठा और काजल के चूतड़ों से कपड़ा उठा कर उसके कमर तक ला दिया ,वो अभी पेंटी में थी लेकिन फिर भी इतनी मदमस्त रस से भरी और भारी से कसाव वाले नितम्भो को देखकर बुड्ढे का भी लिंग झटके मारने लगे,टाइगर अपने हाथो से उसे सहलाने लगा ,काजल की आंखे और भी जोरो से बंद हो गई थी ,वो हल्की हल्की सिसकिया ले रही थी जो की मेरे कानो में गूंजने लगा था,मुझसे बर्दास्त नही हुआ और मैं वँहा से उठने ही वाला था की टाइगर की आवाज मेरे कानो में पड़ी ,

“ये देख पूरी गीली हो गई है अभी से “

वो हंसा और रॉकी भी उठकर उसके पास आकर देखने लगा ,मैं फिर से वही जम गया,काजल की योनि रस से भीग चुकी थी जिसका सबूत उसकी पेंटी से झांकता हुआ वो गीलापन था जो की उसके योनि के रिसाव के कारण बना था,टाइगर अपनी उंगलिया उसके योनि के पास ले जाता और एक उंगली उसके योनि के फांको के बीच चला देता है ,

“आह नही “काजल धीरे से और लंबी सांसे ले कर बोलती है वो अपना चहरा पीछे करके झूठे गुस्से और हल्की मुस्कुराहट से टाइगर को देखती है ,रॉकी भी काजल को छूने वाला होता है लेकिन टाइगर उसे मना कर देता है

“तुम पति हो पति को छूने का नही बस देखने का अधिकार है”

रॉकी की आंखे मानो रोने को हो गई थी ,वही हाल मेरा था ,उत्तेजना और कुछ ना कर पाना बहुत ही दर्द देने वाला होता है,इसे ही तो cuckold कहते है,टाइगर झुका और काजल के गालो में अपनी जीभ चला दिया ,वो अपने हाथो को उठाकर उसके कन्धे को प्यार से मारती है,और अपने गालो से उसके लार को पोछती है ….

इधर वो लड़का काजल के चूतड़ों तक पहुच चुका था ,काजल की पेंटी तेल से ऊपरी तरह से भीग चुकी थी उसका हाथ चूतड़ों को मसलता हुआ उसके योनि तक आ गया लेकिन बस टच करके उसने अपना हाथ वापस ले लिया ,काजल बुरी तरह से मसली ,उसके चहरे में एक नाराजगी का भाव जागा लेकिन लड़का मुस्कुरा दिया ,अब उसका लिंग काजल के नितम्भो पर साइड से वार कर रहा था,वो लिंग को हल्के हल्के से रगड़ रहा था,उसका हाथ काजल की पेंटी तक पहुचा वो उसके इलास्टिक को पकड़ कर उतारने की मुद्रा में हुआ लेकिन टाइगर ने उसे रोक दिया

“अभी नही “

वो बिना कुछ बोले ही काजल की नाइटी को उसके सर से पूरा ही उतार दिया अब काजल बस ब्रा और पेंटी में लेटी हुई थी ,वो पीठ पर तेल की धार गिराने लगा और फिर एक ही बार में पूरे पीठ पर हाथ फेरने लगा जब तेल पूरी तरह से फैल चुका था तब वो धीरे धीरे एक एक इंच को बड़े ही प्यार से मसल रहा था ,उसने काजल की ब्रा भी पीछे से खोल दी थी ,जिससे उसका हाथ काजल के नंगे पीठ पर आराम से चल रहे थे ,उसका हाथ कभी काजल के उरोजों के एक छोर से टकराता और काजल के मुह से आह निकल जाती ,

इधर मेरा हाल और भी बुरा हो रहा था मुझे पता था की इसका अंजाम क्या होगा और मैं वहां से उठने लगा अब इसे देखना मेरे बस के बाहर था ,मैं उठकर कमरे में टहलने लगा था तभी कमरे का दरवाजा खुला जिसकी भनक मुझे नही थी,मैंने मुक्का बंदकरके जोरो से दीवार पर मारा वो मैं तीन बार किया जिससे मेरी उंगलिया ही छिल गई और उससे खून आने लगा ,मैं पीछे मुड़ा तो नेहा खड़ी थी और मुझे अजीब से नजर से देख रही थी ,मैंने खुद को सम्हाला और अपने आंसू पोछे ,मैं वँहा से जाने लगा लेकिन उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और खिंचते हुए उसी कुर्सी पर बिठा दिया ,और खुद घुटनो के बल मेरे सामने बैठ गई ,वो बड़ी ही चिंतित थी ,क्योकि मैं कोई दूसरा व्यक्ति नही था जिसके लिए वो चिंतित ना हो मैं उसकी जान से प्यारी दोस्त का पति था,बस उसे नही पता था की मैं उसके बारे में जानता हु,उसकी आंखों में एक दर्द दिखाई दे रहा था शायद उसे इस बात की उम्मीद नही थी की मैं ऐसा कुछ कर रहा होऊंगा,शायद उसे लगा होगा की मैं भी उन पतियों जैसा हु जो अपनी बीवी को इस हालत में देखकर अपना लिंग हिलाते थे,लेकिन मेरी हालत ने उसकी ये धरना बदल दी थी ,उसकी आंखों में चिंता साफ झलक रही थी ,

“मुझे लगा की आपको मजा आ रहा होगा “वो थोड़ा डरते हुए बोली

“मुझे जाने दो “

“लेकिन आप तो यही देखना चाहते थे “

“मुझे जाना है “

“लेकिन ये लड़की तो मजे कर रही है आखिर आपको क्या प्रॉब्लम है “

“बोला ना मुझे जाना है “इस बार मैं चीखा ,लेकिन इस बार वो मुस्कुराई

“वो आपकी बीवी है …..”

मैं चुप था

“है ना “

मेरी आंखों में आंसू आ गए मैं खुद को और सम्हाल नही पाया,वो उठकर मेरे आंखों से पानी पोछने लगी थी ,उसने मेरा सर खुद से जोड़ लिया जो अभी उसकी कमर में आ रहा था,वो एक स्कर्ट में थी ,भरी हुई मांसल जवानी,लेकिन मेरे लिए मेरी बीवी की दोस्त जिसे काजल बहुत प्यार करती है ,शायद मेरे ही बराबर,हा काजल मुझसे बहुत प्यार करती है,अभी स्क्रीन में वो लड़का काजल के पीठ पर अपना हाथ फेर रहा था,अभी वो उसके कंधों तक भी नही पहुचा था वो बड़े ही इत्मीनान से अपना काम कर रहा था,और मैं नेहा के कमर में अपना सर रखे रो रहा था और नेहा मेरे बालो में अपना हाथ फेर रही थी,

“आह “मेरे कानो में जोरो की आवाज गुंजी जो की मेरे इयरपीस से नही आ रही थी ,मैं चौक के देखा तो नेहा के हाथ में एक रिमोट था जिससे उसने कमरे में लगा स्पीकर चालू किया था ,वो उसी कमरे की आवाज थी जो अब बड़े स्पीकर से मुझे सुनाई दे रही थी ,मैं सर उठाकर नेहा को देखा वो मुस्कुरा तो नही रही थी तो उसने ये क्यो किया था,मैंने ध्यान दिया की उसके आंखों में भी थोड़े आंसू थे ,शायद वो अपनी भावनाओ को दबा रही थी,मैं उससे अलग हुआ

वो हल्के से मुस्कुराई …

“मुझे पता है और टाइगर को भी ये पता है की आप ही उसके पति हो लेकिन यकीन मानो उस लड़की को ये नही पता और ना ही टाइगर उसे ये बताएगा ,”

“लेकिन अब मैं ये सब नही देख सकता ,मेरे लिए ये…”उसने मेर होठो पर अपनी उंगलिया रख दी और मेरी गोद में आकर बैठ गई उसके चूतड़ मेरे जांघो के बीच थे वही उसने मेरा हाथ अपने कमर से लपेट लिया ,और मेरे सीने में खुद को डाल दी ,वो मेरा हाथ अपने हाथो से पकड़ कर अपने वक्षो पर ठिका दिया ,सामने स्क्रीन में मेरी बीवी किसी और के सामने बस खुली हुई ब्रा और झीनी सी पेंटी में तेल से सनी हुई लेटी थी वही मेरी ही बीवी की सहेली मेरे गोद में बैठे हुए मेरा हाथ अपने उजोरो पर रख रही थी ,लेकिन मेरे हाथो में कोई भी हलचल नही हुई ,

“देखिए मैं आपको पसन्द करती हु (वो झूट बोल रही थी )इसलिए मैं ये चाहती हु की आप अपने बीवी को भी मजा करने दो और मेरे साथ आप मजे करो”मेरे दिल में नेहा के लिए एक आभार आया,वो अपनी सहेली के लिए मेरे साथ ये सब करने को तैयार हो गई,शायद टाइगर को भी इसका पता ना हो ,मैं मुस्कुराया

“मैं अपनी बीवी से धोका नही कर सकता “

“वो तो कर रही है “

“शायद उसकी कोई मजबूरी हो “

“क्या मजबूरी हो सकती है ,वो साली तो मुझे रांड लग रही है “

“रेहाना मैं चिल्लाय ,अपनी औकात ने रहो ,काजल मुझे जान से ज्यादा प्यार करती है ,उसकी कोई मजबूरी होगी जो उसे ऐसा करा रही है और मैं उस मजबूरी को जान ही लूंगा ,अब हटो यहां से मुझे जाना है “

नेहा के चहरे में मुस्कान और भी गहरा गई और वो मेरे होठो पर अपने होठो को रखकर चूसने लगी ..

मैंने उसे अलग किया ,वो स्क्रीन में देखकर

“वो देखो “

वो लड़का अब काजल के कंधों से होता हुआ उसके गले में पहुच चुका था ,मेरा चहरा फिर से काजल की प्यारी सी सूरत को ऐसे कामुक होते देख स्थिर हो गया था,नेहा ने फिर से अपना हाथ पकड़कर मेरे हाथो को अपने एक एक वक्षो पर रख दिया और खुद ही उसे उनके ऊपर मसलने लगी ,मेरी हथेलियों को जब उस नरम नरम उजोरो का अहसास हुआ वो ब्रा भी नही पहने हुई थी और सामने काजल के चहरे में आये हुए भाव देखकर मैं भी थोड़ा उत्तेजित हो गया ,स्पीकर से आने वाली आवाजो के कारण कमरे में काजल की हल्की हल्की सिसकिया गूंजने लगी थी ,लड़के ने काजल के गले से हाथो को आगे ले जाकर उठा और आगे अपने हाथो को गुसाय और फिर साइड में हाथो को लेजाकर उसे पलट दिया ,काजल का ये रूप देखकर मैं क्या सभी स्तब्ध थे,ब्रा उसके बड़े उजोरो पर टिका हुआ था लेकिन उसे पूरी तरह से ढकने में असमर्थ था,वही पेंटी का गीलापन साफ झलक रहा था,नंगा पेट और गहरी नाभि ,मांग में सजा हुआ सिंदूर और हाथो में सजी हुई चूड़ियां ,आंखे बंद थी और सांसे तेज ,वो लड़का चाहे कितना भी प्रोफेशनल वो उसके मुह में भी लार आ ही गया,वो इतना उत्तेजित हो गया था की उसने अपने लिंग को काजल के चहरे में रगड़ दिए काजल ने जंहा उसे हल्के से झूठे गुस्से से देखा वही वो खुद की हरकत से ही झेप गया,क्योकि सामने बैठा हुआ टाइगर उसे घूर रहा था ,मेरे लिंग ने भी जोरो का झटका मारा और नेहा के चूतड़ों पर गड़ने लगा मैंने जोर से उसके उजोरो को दबाया ,

“आह ,”वो हल्के से पलटी और मुझे एक मुसकान दी,
 


मैं अजीब से संवेदनाओ से घिरा हुआ खुद को महसूस कर रहा था,एक तरफ काजल का प्यार था तो दूसरी तरफ ये सब देखकर उठी हुई उत्तेजना,एक तरफ मेरी खुद की बीवी थी तो दूसरी तरफ नेहा जो की कोई और नही मेरी पत्नी की सबसे अजीम सहेली थी ,एक तरफ प्यार की अंगड़ाई थी तो दूसरी तरफ हवस का तूफान ………….

मेरी नजर स्क्रीन में जम चुकी थी ,सभी के खड़े हुए लिंग मुझे साफ दिख रहे थे,मेरी हसीन बीवी आज 2 जवान मर्दो के बीच ऐसे सोए हुए थी और सभी मर्द उसकी जवानी को देखकर अपना लिंग पूरे सबाब में खड़ा किये हुए थे,ये दृश्य जितना मजेदार था उतना ही दयनीय भी था,नेहा अगर मेरे ऊपर नही होती और उसके वक्षो को मैं अपने हाथो से मसल नही रहा होता तो मेरे लिए ये सब देखना असंभव था,लेकिन उत्तेजना ने मुझमे एक जड़ता ला दी थी ,

इधर वो लड़का आगे बड़ रहा था उसका हाथ काजल के उजोरो को छू रहा था वो उसके उजोरो से एक मात्र पर्दा उठाना चाहता था ताकि वो काजल के बड़े और मांसल वक्षो ले दर्शन कर पाए लेकिन टाइगर ने उसे घूरा वो डरकर बस ऊपर से ही उसे सहला पाया था,ऐसे तो कुछ भी छिपा सा नही था लेकिन सबकुछ ही छिपा सा था,

“ह्म्म्म “काजल की ये आवाज तब गुंजी जब वो उसके वक्षो से खेलने की बजाय उसके पेट पर तेल लगाने लगा ,वो नाराज थी कोई भी लड़की होती,लेकिन टाइगर के दिमाग में तो कोई और ही कीड़ा चल रहा था ,

“वो उसे तब तक नंगी नही करेगा जब तक वो हद तक उत्तेजित ना हो जाय “नेहा ने मुझे जानकारी दी ,

मैं उसके उजोरो को और भी जोरो से मसला ,

“ओह इतनी क्या बेताबी है”

मेरी आंखों में तो खून उतर आया था और नेहा को ही उसे सम्हालना था,वो सब कुछ कर रही थी अपनी वफादारी टाइगर से निभा रही थी और अपनी दोस्ती काजल से ,वो पलट कर अपने दोनो पैर मेरे जांघो से मिला दिए जिससे उसका चहरा मेरे चहरे के बराबर हो गया था,हम दोनो ही एक दूसरे की आंखों में देखने लगे,वो अपने होठो को मेरे होठो के पास लायी,

“हटो यहां से मुझसे ये नही होगा “मैं हल्के से फुसफुसाया

वो और करीब आ गई और अपने होठो को मेरे होठो से मिला दिया ,मेरे होठ खुलने लगे और उसके मुह में मेरी जीभ घुस गई ,हम दोनो एक दूसरे में खोने लगे थे ,उसने मेरे पेंट को खोला और मैं नीचे बस एक अंडरवियर में था ,वो नितम्भो को बड़ी ही अदा से मेरे खड़े हुए लिंग पर रगड़ने लगी मैं असीम सुख के सागर में था ,

इधर काजल की आवाज आनी बंद सी हो गई थी ,वो फिर से उसकी जांघो पर अपने हाथ चला रहा था ,लेकिन फिर टाइगर ने उसे इशारा किया ,

“ओह ये क्या “काजल के फुसफुसाने से हमारा ध्यान स्क्रीन की तरफ गया ,लड़के ने काजल के ब्रा को हटा दिया था,मैं नेहा को किस करना छोड़ बस उसे ही देखे जा रहा था ,नेहा भी पलटी और जैसे उसे कुछ समझ आया हो वो उठकर मेरे अंडरवियर को निकाल फेकी,मेरा लिंग मुरझा ना जाए इसका उसे बहुत ख्याल था वो जल्दी से उसे सहलाने लगी और अपने योनि से रगड़ने लगी वो अभी भी उस स्कर्ट में थी लेकिन नीचे से पूरी खुली हुई ,मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे मना किया वो भी बिना कुछ बोले ही मेरी ओर पीठ कर मेरे गोद में बैठ गई लेकिन उसके योनि से निकलते हुए रस का अहसास में अपने लिंग में कर सकता था जो की उसके योनि के ऊपर ही सोया था लेकिन अंदर नही गया था ,उसके योनि के हल्के हल्के बाल मेरे लिंग पर रगड़ खा रहे थे ,कोई भी सोच सकता है की मेरे लिए इस स्थिति में खुद को सम्हालना कितना मुश्किल था,

इधर काजल की हालत खराब होने को थी वो चिलालने को हो रही थी क्योकि उसके नंगे उजोरो में वो आदमी अपने मजबूत हाथ चला रहा था ,

“आह ,ओह आह “काजल की मादक सिसकारियों ने मेरे जिस्म का र्रोवा रोवा हिला दिया था उसकी नजारे अधमुंदी थी वही वो आदमी उसे नशीली आंखों से देखे जा रहा था उसके हालात का अहसास उसके पेंट से झांकता हुआ उसका लिंग दे रहा था जो की कभी काजल के गालो से रगड़ खाता था और काजल के होठो में एक मुस्कान सी आ जाती थी ,उसके चौड़े मजबूत हाथो में काजल के उजोरो को भरपूर नापा था ,नेहा भी उत्तेजित होकर आह ले रही थी ,वो मेरे कमर पर अपनी कमर को चला रही थी ,लेकिन मेरे लिए कुछ भी कर पाना थोड़ा मुश्किल था,मैं रोता या हंसता ये अभी भी तय नही कर पा रहा था,वो काजल के कमर पर आकर रुका ,टाइगर और रॉकी अपने लिंग को कपड़ो के ऊपर से ही बड़ी बेरहमी से मसल रहे थे,टाइगर के एक संकेत से काजल के शरीर का आखरी कपड़ा भी उतर जाने वाला था,जो संकेत टाइगर में बड़ी ही अधीरता से दिया शायद इतने देर में उसे भी अब और सह पाना कठिन हो रहा होगा,

उस आदमी ने जैसे ही काजल के इलास्टिक पर अपना हाथ रखा मेरी सांसे ही थम गई साथ ही कमरे में बैठे सभी लोगो की ,नेहा से भी अब बर्दास्त नही हो रहा था वो मेरे लिंग को पकड़ कर अपने पानी के झरने जैसे योनि में रगड़ने लगी ,वो उसे अपने छेद तक लाती जिसका गीलापन और गर्मी का मुझे अहसास होता,वो छेद के ऊपर से ही उसे थोड़ा घुमाती और फिर थोड़ा अंदर डालती,जिससे मुझे उसके मांस का अहसास होता लेकिन वो अभी भी उसे पूरा अंदर नही कर रही थी,जिससे की मेरा लिंग उसकी योनि में जकड़ ही जाय ,मेरे लिंग के सुपाडे की चमड़ी पीछे हो चुकी थी ,और मैं पागल लेकिन वो उसके आगे के भाग को ही अपने गीले मांस में मसल कर वापस ले आती ,मैं उसके कमर को पकड़ा ही था की काजल की पेंटी धीरे धीरे उतारने लगी ,उसकी चिकनी चिकनी सी योनि में एक भी बाल नही थे ,मैं ना जाने कितने बार उसे देख चुका था लेकिन फिर भी मैं सांसे रोके हुए उसके पूरे खुलने का इंतजार कर रहा था ,उसकी पेंटी अब कमर के उभरे हड्डियों के बीच आ चुकी थी सांसे अब भी रुकी हुई थी ,वो थोड़ी और भी नीचे आयी ,मेरी काजल ,मेरी प्यारी ,मेरी जान काजल की योनि के दर्शन एक साथ 4 मर्दो को होने वाला था,वो जरूर पानी से भरी हुई होगी ,शायद काम रस टपक रहा होगा,उस आदमी की मोटी मोटी उंगलिया उसके दोनो छोरो को पकड़े हुए उसे नीचे उतार रही थी ,मुझे एक दिन पुराने सेविंग किये हुए हल्के बाल काजल के योनि के ऊपर दिखाई दिए जिसे बहुत ही चिकना तो नही कहा जा सकता था ,मैं अपने लिंग पर जोर डालने लगा ,नेहा के मांस में फंसा हुआ मेरा लिंग अंदर जाने को हो रहा था ,उसके मांस का जो हिस्सा बेहद ही पलपला था वो उसकी योनि की दीवार थी ,जिसमे मेरा लिंग घुसता चला गया ,अभी मैं आधे में ही आया था की काजल की आंखे बंद हो गई ,वही वो आदमी उसके योनि को बेपर्दा कर चुका था ,मेरी बीवी अब एक कमरे में 3 मर्दो के सामने बेपर्दा था जिसे मैं एक स्क्रीन में देख रहा था ,और मेरा आधा लिंग उसकी सहेली की योनि के अंदर था ,मैं एक जोरदार धक्के से अपना पूरा लिंग उसके योनि में धकेल दिया ,नेहा और काजल दोनो की ही आंखे बंद थी ,

वो आदमी काजल की योनि पर तेल की धार डालता है ,जिससे उसकी कम चिकनी योनि भी चमकने लगती है ,उसकी मोटी उंगलियों को मैं काजल के योनि के ऊपर रेंगते देख रहा था और मेरा लिंग और भी कड़ा हो रहा था,में एक झटका लगाया ,”ओह ,मजा आ रहा है “नेहा की पनियानी हुई योनि से एक पच की आवाज आयी वो अपनी उत्तेजना के चरम को भोग रही थी ,उसने अपनी पीठ मेरे छाती में टिका दी ताकि मैं उसके आगे के शरीर का पूरा फायदा उठा सकू,वो भी अपने कमर को थोड़ा उचका के मेरी लिंग का मजा लेने लगी ,वही काजल के योनि में काली और मोटी सी उंगलिया मुझे बहुत ही उत्तेजित कर रही थी ,वो उसके दोनो ही फांको को सहला रही थी ,आदमी की नजर में इतना लालच था की लग रहा था वो अभी काजल की योनि में अपना बड़ा सा लिंग डाल देगा ,

काजल के छेद लाल लाल चमकीले से नजर आये जब उसके अपनी दो उंगलियों से उसके फांको को अलग किया ,

“नही “काजल की हल्की आवाज जिसमे पूरी सहमति थी गूंज गई ,वो अपनी एक उंगली को तेल से भीगा कर उसके छेद में घुसा दिया ..

“आह ओह ऊऊऊ आह आह “काजल की आवाज आयी वो उसे उंगली से ही मजे दे रहा था ,वही मेरा लिंग भी नेहा के योनि की सैर कर रहा था,मेरी चमड़ी जब जब उसके योनि के दीवारो से टकरा कर रगड़ खाती दोनो के मुह से एक साथ ही आह निकल जाती थी ,उधर उंगली की स्पीड जोरो से बढ़ रही थी तो इधर धक्कों को ,टाइगर काजल के योनि के पास आ चुका था वो उस आदमी को हटा कर खुद उसके योनि को छूने लगा,

काजल ने टाइगर को एक मदभरे नजर से देखा और मुस्कुराई फिर थोड़ी सी शर्मा कर अपने सर को दूसरी तरफ हटा लिया

“उफ मेरी जान “टाइगर ने अपनी जीभ से काजल के योनि को जोरदार चांटा

“आह ,नही “काजल लगभग हंसते हुए बोली

“ऊऊऊ चप चप “टाइगर अपनी हरकत से बाज नही आ रहा था ,एक पराया मर्द मेरे बीवी के योनि को खा रहा था जो की तेल से सनी हुई थी ,और मैं पागलो की तरह धक्के लगाए जा रहा था ,दोनो ही ओर तूफान अपने सबाब में पहुच चुका था की मैं और काजल साथ ही झड़े ,काजल ने अपना सर पटकना बंद कर दिया था और मैं नेहा के अंदर झड़ कर खुद को कुर्सी में ही पटक दिया ………..

जीजू का घर 2 BHK का था ,मुझे एकरूम दिया गया ,जीजू के साथ कल की होली को याद कर कर के ही मैं पनिया रही थी लेकिन दिमाग में एक ही सवाल बार बार आ रहा था की आखिर ऐसा क्या हुआ था की मुझे सुबह दर्द हो रहा था और माँ इतना रो रही थी ,पिता जी मुह फुलाये बैठे थे…

आते ही जीजू अपने काम में निकल गए दिदि अभी घर को साफ करने में लगी हुई थी और मैंने थोड़ी हिम्मत दिखाई,

“दिदि कल रात को क्या हुआ था”

दिदि के चहरे में मुस्कान आया गई ,

“तुझे कुछ भी याद नही “

“याद होता तो आपसे क्यो पूछती ,और पापा इतने गुस्से में क्यो थे”

“भूल जाओ अब पापा को ,उनके दिल में हम लड़कियों की कोई इज्जत नही है,तू जानती है ना उस दिन मेरा और उनका बहस हो गया था,तेरे जीजू इतने अच्छे है इसलिए इन्हें कोई भी कदर नही है,अब समझ आएगा की जब जमाई अपने हरामी पन में उतरता है तो क्या होता है,हमे दबाने की तो कोसिस करते है लेकिन जमाई जब कुछ गलती करे तो सब कुछ स्वीकार है इन्हें …”

दीदी को तो बस समाज से लड़ने का शौक है,

“लेकिन कल हुआ क्या था”

दिदि का चहरा फिर से मुस्कुराने लगा

“अरे मेरी रानी कल तू लड़की से औरत बन गई “

मैं बुरी तरह से शरमाई

“म म मतलब “

“मतलब की तेरे जीजू ने कल अपनी पिचकारी से तुझे भिगो दीया और रात में जब माँ बाबुजी आये तो उन्हें भी ये पता चल गया लेकिन किसी ने एक लब्ज भी उन्हें नही कहा “दिदि हँसने लगी,

“लेकिन इसका क्या मतलब हुआ “

मैं फिर से थोड़ी कन्फ्यूज़ हो गई थी ,

“ओहो तू भी ना अभी तक बच्ची ही है,चल आज रात को तेरे जीजू को फिर से तुझे भिगोने बोलती हु,कल तो सील टूट ही गया तो आज तुझे भी ज्यादा दर्द नही देगा “

मैं फिर से उन्हें अजीब निगाहों से देख रही थी

“अरे तू फिक्र क्यो कर रही है,शाम को अच्छे से नहा कर तैयार रहना ,और वो जो स्कर्ट है ना तेरी वो पहन लेना,आज तुझे सब कुछ समझ आ जाएगा की कैसे तेरे जीजू ने तुझे अपनी पिचकारी से भिगोया था…..

मैं शाम का इंतजार करने लगी ,दिल में इतनी बेचैनी कभी नही थी,जीजू के आने के बाद दिदि ने उन्हें जल्दी खाना खाने को कहा और मुझे भी नहा कर तैयार होने का हुक्म दे दिया,आज फिर से मैं अपने जीजू के साथ होली खेलने जा रही थी लेकिन इस बार पूरे होशोहवास के साथ…..

मैं नहा कर तैयार हुए और एक सफेद ड्रेश पहन कर तैयार हों गई

जीजू तो मुह फाडे मुझे देख रहे थे ,मुझे बहुत शर्म आ रही थी और मैं उनसे नजर बचा रही थी लेकिन क्या करू कभी कभी तिरछी नजरो से मैं उन्हें देख ही लेती,उन्होंने कपड़े चेंज कर एक शार्ट और टी-शर्ट पहन लिया था,सबकुछ तो नार्मल ही था लेकिन पता नही क्यो मेरा ध्यान बार बार उनके मजबूत डोलो की तरफ ही जाता था,उनकी छाती के बाल जो के थोड़ी सी जगह से भी बाहर आ रही थे,और उनकी विशाल चौड़ी छाती,देखकर ही पता नही नीचे कुछ अजीब सा होने लगा था ,मैं चाहती थी की वो मुझे कसकर जकड़ ले,खाना खत्म करके हम बाते करने लगे उन्होंने बताया की उन्होंने एक अच्छे कालेज में मेरा एड्मिसन करवा दिया है…

वो अपने बेडरूम में चले गए थे मैं अब भी हाल में ही दिदि के साथ बैठी थी मुझे दिदि से कुछ पूछने की हिम्मत तो नही हो रही थी लेकिन मेरा दिल भरा जा रहा था,मैं जीजू के पास जाना चाहती थी लेकिन दिदि से कहती तो भी तो कैसे …

आखिर दिदि ने ही कह दिया ,

“ये दूध का ग्लास ले और जीजू को पिला दे ,और हा मैं काम करके आज बहुत थक गई हु आज तेरे ही कमरे में सो जाती हु ,तू अपने जीजू के साथ सो जाना,....कोई प्रॉब्लम तो नही है ना “

“नही नही दिदि कोई प्रॉब्लम नही है”मैंने इतनी जल्दी में कहा की दिदि के चहरे में एक मुस्कान तैर गई और मैं अपने किये पर शर्मा गई…..

मैं दूध का ग्लास लेकर जीजू के कमरे में गई जीजअपने मोबाइल में कुछ कर रहे थे ,मुझे देखते ही उनके चहरे की मुस्कान कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी,

“जीजू दूध “

“हम्म अच्छा है”

उन्होंने मुझे देखते हुए कहा

“अपने तो पिया ही नही है”

“वो तो देखकर ही पता चल रहा है की तेरे दूध अच्छे है पी भी लूंगा थोड़ी देर में “

मैं बुरी तरह से शर्मा गई

“छि कितने गंदे हो आप “मैं सर झुका के खड़ी रही जब तक जीजू ने दूध खत्म करके मेरे हाथो को पकड़ कर मुझे बिस्तर में पटक नही दिया ,

“आउच जीजू “मैं सीधे बिस्तर में गिरी,जीजू का चहरा मेरे चहरे के पास था,उनकी सांसो का अहसास मैं अपने चहरे में कर सकती थी उनकी सांसे बड़ी हुई थी वही हाल तो मेरा भी था,

उन्होंने मेरे चहरे को ध्यान से देखा और बड़े ही प्यार से एक किस मेरे माथे में किया मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी वही मेरी चुद भी पानी पानी हो रही थी,मैं नजाकत से मुस्कुराई और जीजू मेरे गोल गोल गुलाबी गालो को अपने दांतो से कुरेदना शुरू किया ,

“जीजू ,आह “मजे की एक लहर मेरे शरीर में दौड़ गई थी जैसे मेरे शरीर में कोई हल्का सा करेंट दौड़ गया हो ,मैं कसमसाई और अपने बांहो को जीजू के गले से लपेट लिया,,मेरे मुलायम गालो पर जीजू की दाढ़ी चुभ रही थी और वो मेरे गालो को किसी फल की तरफ चाट और काट रहे थे,उनकी ये अदा मेरे लिए और भी कातिल साबित हो रही थी,उन्होंने मेरे कमर पर अपना हाथ टिकाया और खुद मेरे ऊपर हो गए,मेरी स्कर्ट थोड़ी ऊपर हो चुकी थी उन्होंने मेरी जांघो को सहलाना शुरू किया ,मैं मादक सीसीकीया ले रही थी,उनके हाथो का आभास मुझे पागल बना दे रहा था मुझे गुदगुदी सी हो रही थी जिसके कारण मैं मचल रही थी ,मेरे शरीर से एक अजीब सी गंध उड़ रही थी वही जीजू के शरीर की महक ने मुझे पागल बना दिया था,वो एक असली मर्द की खुसबू थी,उन्होंने अपने शर्ट को निकाल फेका उनका नंगा सीना किसी भी लड़की के लिए जानलेवा था,वो बालो के भरा हुआ था वही चौड़ी छाती उनके कसरती होने का सुबूत दे रही थिजब उनके छाती के बाल मेरे मेरे शरीर के ठकराये तो मैं गनगना गई ,मैं पागल ही हो रही थी,और वो बड़े ही आराम से मुझे लूट रहे थे,मैं उनकी गुलाम सी बन गई थी,वो जैसे चाहते मुझसे खेल रहे थे,उनके शार्ट से उनका बड़ा लिंग मेरे जांघो को चोट कर रहा था,कितना बड़ा था वो ,और इतना मजबूत ,मैं तो सोच के ही शर्मा गई..हमारी आंखे मिली तो मेरा चहरा लाल था और जीजू के होठो में एक मुस्कुराहट..

“क्यो मेरी रानी आज पूरे होशोहवास में खेलोगी ना मेरे साथ होली,”जीजू ने बड़े ही शरारती ढंग से पूछा “

“लेकिन जीजू रंग कहा है”

“मेरी रानी आज सफेद रंग से नहलाऊंगा तुझे ,वो भी काले पिचकारी से “

मैं कुछ समझ नही पाई लेकिन मैं शर्मा गई मेरी ये अदा शायद जीजू को बहुत पसंद आ गई उन्होंने मेरे होठो को अपने होठो में भर लिया ,मैंने खुद को उनके हवाले ही सौप दिया था,वो मेरे होठो को चूसे जा रहे थे,हमारे होठ आपस में मिल रही थी और हम दोनो ही सुख के सागर में गोते लगा रहे थे..उनके हाथ मेरे उरोजों पर पहुच गए थे वो उसे हल्के हल्के से लेकर जोरो से मसलने लगे थे,बेताबी की इंतहा हो रही थी,उन्होंने अपने हाथो को मेरे स्कर्ट के नीचे घुसा दिया और मेरी योनि के द्वार को अपनी उंगलियों से मसलने लगे,मुझे बहुत मजा आ रहा था,मेरे मुह से बस आह आह की आवाजे ही निकल रही थी,

मैं बेताबी में अपना सर इधर उधर पटकने लगी थी लेकिन जीजू मेरे होठो के पीछे ही पागल थे,उन्होंने अपना हाथ पीछे ले जाकर मेरी स्कर्ट की जीप खोल दी ,और उसे उतारने लगे ,मैं अब जीजू के सामने बस ब्रा पेंटी में लेटी हुई थी,वो उठाकर मेरी नाजुक योनि को घूरने लगे जिससे मुझे बहुत ही शर्म आयी और मैंने अपने चहरे को अपने हाथो से ढक लिया,वो मुस्कुराते हुए मेरे

योनि के पास अपना चहरा लाये,वो जगह पूरी तरह से गीली थी,उनकी सांसो का अहसास मुझे और भी गिला कर रहा था,वो बस हल्के से फूक मारे ,मेरा तो रोवा रोवा ही फड़क उठा था….

वो मेरे ऊपर आ गए और मरी ब्रा को एक ही झटके में उतार दिया अभी भी मेरी पेंटी मेरी लाज बचा रही थी लेकिन ना जाने कब तक ,मैं पूरी तरह से जीजू की गुलाम बन गई थी,वो जैसा करते मैं उनका साथ देती,वो मेरे कानो के पास अपने होठो को ले आये ,

“अपने जीजू की पिचकारी देखेगी<

“आह हम्म्म्म “मेरे होठो से बड़ी ही मुश्किल से निकल पाया मैं उनके नीचे दबी हुई थी मेरी नाजुक जिस्म इतना भार कैसे उठा पा रही थी ये तो मुझे भी समझ नही आ रहा था,

उन्होंने खड़े होकर अपनी शार्ट निकाल फेंकी और उनका लिंग पूरे शबाब में मेरे सामने झूलने लगा,मैं तो उसे देखकर ही कांप गई ,वो तो काले मोटे रॉड जैसा था,और पूरी तरह से चमकदार ,उन्होंने उसे मेरे मुह के पास लाया,मैं अभी भी उसे आश्चर्य से घूर रही थी,वो मेरे होठो से टकराने लगा,उन्होंने मेरे गालो को पकड़कर दबाया जिससे मेरा मुह थोड़ा खुल गया,वो मेरे होठो में उसे रगड़ने लगे,

“इसे प्यार दे मेरी जान ये तुझे बहुत मजे देगा ,”

उन्होंने थोड़ा और दबाव डाला ,

“चूस इसे “

मेरे होठ खुल गए मुझे नही पता था की इसे कैसे चूसना है लेकिन मैं उसे अपने मुह में भर जाने दिया और मेरे थूक से उसे सन जाने दिया,लेकिन जीजू पर जैसे शैतान चढ़ गया ,उन्होंने मेरे बालो को पकड़कर मेरे सर को अपनी कमर पर जोर जोर से दबाने लगे,उनका लिंग मेरे गले में फंस रहा था जिससे मुझे उल्टी होने लगी थी,सांसे रुकने लगी मैं छटपटा रही थी लेकिन जीजू में मुझपर कोई भी रहम नही दिखाया और जोरो से अंदर बाहर करने लगे ,मुझे लगा जैसे की मर ही जाऊंगी,तभी उन्होंने मुझे छोड़ा मैं जैसे उल्टी ही करने लगी ,मैं जोरो से सांसे ले रही थी,मैंने जीजू को देखा तो वो मुस्कुरा रहे थे,जबकि मेरी आंखों में आंसू आ गए थे,

“आप शैतान हो क्या,ये क्या था.”

मैं लगभग रोते हुए बोली,

“अरे मेरी जान फिक्र मत करो पहली बार है ना बाद में आदत पड़ जाएगी ,”वो मेरे गालो को सहलाने लगे ,और मुझे लिटा कर मेरे ऊपर आ गये,वो मेर जिस्म के हर हिस्से को चाटने लगे,जिससे मैं फिर से गर्म हो गई थी,उन्होंने मेरी पेंटी को निकाल फेका और मैं सहमी हुई आंखे बंद किये हुए जीजू के होठो का आनद ले रही थी,लेकिन इस बार उनके होठ नही थे इस बार तो उनका वो काला नाग था जो मेरी योनि में दस्तक दे रहा था,मैंने उन्हें कस लिया,मैं तडफ रही थी,ना जाने क्यो मेरी योनि इतनी खुजला रही थी ,मन करता था की कुछ अंदर ही डाल लू और कुछ नही जीजू का वो रॉड,मैं उसे अपने अंदर चाहती थी,वो उस रॉड को मेरे योनि के पानी से गिला कर रहे थे शायद अब थोड़ी ही देर में वो मेरे अंदर जाने वाला था,उन्होंने धीरे से उसे अंदर सरकाया,

“आह जीजू ,आह लव यू जीजू ,ओह “

वो रॉड मुझे अंदर जाता हुआ महसूस हुआ दर्द और मजे की एक तेज लहर मेरे शरीर में दौड़ी और ऐसा लगा जैसे की मैं अब जीजू की गुलाम ही बन गई,वो समर्पण का भाव मेरे मन में उठा और मेरे आंखों से पानी की कुछ बूंदे टपक पड़ी,जीजू रुक गए थे और उन्होंने मेरी आंखों में देखा,वो गीली थी लेकिन मेरे होठो में एक मुस्कान सी आ गई,मैं अपने मन का सारा प्यार अपनी आंखों में ले आई,मैं जीजू को ऐसे देख रही थी की अब मैं उनकी ही हु,वो मुझे देखकर बहुत ही भावुक हो गए और मेरे होठो को चूमने लगे,हम दोनो ही एक दूसरे के होठो को पागलो की तरह छुमने लगे थे वही जीजू की कमर ने हरकत शुरू की शुरवाती झटकों का दर्द मैं पीती गई ,जीजू ने मुझे मजबूती से जकड़ रखा था,और धीरे धीरे मेरे अंदर आनंद ही आनंद बचा मुझे लग रहा था की ये कभी खत्म ना हो,मैं जीजू को अपनी गहराइयों तक महसूस कर पा रही थी,मैं उन्हें चूमना भी भूल गई थी मेरी आंखे बंद हो गई थी और मैं आनंद के सागर में हिचकोले लगा रही थी,एक तेज झटके से मेरा पूरा शरीर अकड़ाने लगा और मैं झड़ी ,तेजी से झड़ी,ऐसे झड़ी जैसे जीवन ही खत्म हो गया हो, मेरा शरीर बिस्तर से ऊपर उठ गया था,एक उछाल जिसे जीजू के मजबूत बांहो ने सम्हाला,और मैं मुर्दो की तरह बिस्तर में गिर पड़ी,पता नही फिर क्या हुआ,लेकिन जब थोड़ी देर बाद मुझे होश आया तो जीजू मुझे प्यार से चूम रहे थे,सहला रहे थे और उनका वो लिंग मेरे योनि ने अब भी भरा हुआ था जो की मेरे पानी से सना हुआ था और आराम से अंदर बाहर हो रहा था,जीजू ने मेरी आंखों में देखा मेरी आंखों में उनके लिए बस आभार था,मैं उनकी दीवानी हो गई थी,मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहती थी,

“क्यो साली जी मजा आया “उन्होंने मुकुराते हुए कहा,अब मैं उन्हें कैसे बताती की मुझे क्या मजा आया,उन्हें क्या बताती की आज से मैं आपकी हो गई हु,मेरा सब कुछ आपके नाम लिख दिया है,मैं तो बस उनके सर को पकड़ कर उनके होठो में अपने होठो को भर दिया,...एक लंबी किस के बाद फिर से जीजू ने स्पीड पकड़ी और फिर के मैं उनके प्यार के लहरों में गोते लगाने लगी,इस बार जीजू भी मेरे साथ ही झरे और मुझे भर दिया,आज उन्होंने अपने वादे के अनुसार मुझे मुझे अपनी पिचकारी से नहला दिया था,लेकिन बस इतना ही नही हुआ था,मुझे मेरे पूर्ण होने का अहसास हुआ था,हम दोनो ही पसीने से भीगे हुए थे और एक दूसरे से ऐसे लिपटे थे जैसे कभी अलग नही होने वाले.तन के साथ साथ हमारा मन भी मिल गया था…………….

इसके बाद के दिनों में मुझे पता चला की दिदि असल में IAS बनने के लिए तैयारी कर रही है,मैं अपनी कालेज के साथ साथ जीजू की हर ख्वाहिस को पूरा करती थी,दिदि और जीजू महीने में एक या दो दिन ही एक दूसरे के साथ सोते थे,बाकी दिनों में मैं जीजू का और जीजू मेरा ख्याल रखते,उन्होंने मुझे प्रैग्नेंट भी कर दिया लेकिन दिदि ने उन्हें बहुत डाँटा ,लेकिन उन्हें इसमें मजा आता था और मैं तो थी ही उनकी गुलाम जो वो बोलते मेरे लिए वो पत्थर की लकीर हो जाती थी,उन्होंने अभी तक मुझे 15 बार प्रैग्नेंट किया ,हर बार तो मैंने बच्चा गिरा लिया ,लेकिन आखिर में डॉ ने भी कह दिया की अब अबॉर्शन करवाना ठीक नही होगा,तुम कभी माँ नही बन पाओगी...जीजू बात को समझ गए,मैं आज 27 साल की हु,दिदि एक IAS बन चुकी है,लेकिन उन्होंने कोई बच्चा अभी तक नही किया है,मेरी शादी को 2 साल हो गए है और जीजू की इच्छा के अनुसार मैं 15 वी बार उनके बच्चे की माँ बनी लेकिन इस बार गिराया नही ,कल ही मैंने एक लड़के को जन्म दिया,वो बिल्कुल जीजू जैसे ही दिखता है,ये मेरे और जीजू के प्यार की निशानी है,मेरे जीवन की सबसे हसीन सौगात ……….

******** समाप्त *********

 
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