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अपडेट 19
“हल्लो सरमेरा नाम अंकित है मैं सुस का बाय्फ्रेंड हू “
मेरे ऐसे बोलते ही सुस जोरो से हंस पड़ी थी
मैं, सुस, अज्जु और मोनिका के साथ एक माल मे आया हुआ था, वो लोग मेरे लिए कपड़े खरीद रहे थे ताकि मुझे तिवारी से इंट्रोड्यूस करवाया जा सके ..
ऐसे मुझे भी पता नही था की मैं वहाँ जा कर क्या करूँगा लेकिन फिर भी,
ऐसे वो भी नही जानते थे की मैं तिवारी के सामने जा कर क्या उखाड़ लूँगा लेकिन वो भी मुझे उसके सामने भेजने को तैयार हो गये थे क्योकि उन्हे अपनी शादी तोड़ने का यही एकलौता अवसर दिख रहा था ..
“तुम तो पूरे कार्टून लग रहे हो यार “
सुस ने हसते हुए कहा
“पापा या भाई लोग अगर तुम्हे देखेंगे तो तुम्हे छोड़ो मुझे ना मार दे “
मैने एक महँगी ब्रॅंडेड जीन्स पहनी थी लेकिन वो कमर से इतनी नीचे थी की मुझे बड़ा ही अनकंफर्टबल लगा सो मैने उसे उठा उँचा करके पहन लिया लगभग मेरे पेट पर, और शर्ट भी इन कर ली थी ..
“अरे भाई इसे कमर से थोड़ा नीचे पहनते है और देख मैं दिखाताहू “
लेकिन मुझे वो पसंद नही आया क्योकि फ्यूषन अपनी जाग थी मुझे तो अपना कॉमफोर्टब्लेन सुस चाहिए था..
लगभग पूरा दिन घूमने पर कुछ कपड़े मुझे पसंद आए थे वही सुस और मोनिका ने मुझसे दुगुना कपड़े खुद के लिए ले लिए थे, और उनका शॉपिंग जारी ही था ..
“भाई ये लड़किया तो आज मरवाएँगी “
अज्जु ने तब कहा जब वो दोनो सेंडल लेने चले गये और हम कॉफी शॉप मे बैठे कॉफी पी रहे थे
“भाई ये लोग पूरे साल का समान आज ही लेंगी क्या ??”
मैं भी थक चुका था
“क्या पता यार जब शॉपिंग की बात आती है तो सभी लड़कियो का हाल एक जैसा ही हो जाता है, इन्हे कोई भी चीज़ जल्दी पसंद आता ही नही है फिर अलग अलग चीज़ो के लिए अलग अलग शॉप मे जाती है हर शॉप मे एक दो घंटा तो लगा ही देती है … अब देखो ना कहने को तो मोनिका को सुस बिल्कुल भी पसंद नही है लेकिन आज देखो कैसे बेस्ट फ्रेंड बनी फिर रही है दोनो इनकी दोस्ती तो शॉपिंग ने ही करवा दी …”
हम दोनो ही हसने लगे थे
तभी मेरे दिमाग़ मे भाभी का ख्याल आया, उनकी साड़ी पुरानी हो गयी थी , कोई दो साड़ी ही होंगी उनके पास वही बदल बदल कर पहनती है, शायद उन्हे भी शॉपिंग करना पसंद आए …
नही शॉपिंग का मज़ा लेना अमीरो का काम था ना की ग़रीब लोगो का, सबसे पहली ज़रूरत तो रोटी और छत की होती है फिर कपड़ो का नंबर आता है, और इस तरह की शॉपिंग … भाभी तो सोच भी नही सकती ये सब ..
लेकिन फिर भी मेरे दिल मे आया की क्यो ना उनके लिए कुछ लिया जाए शायद एक साड़ी ..
“यार चल ना एक साड़ी देखते है “
अज्जु जो की अभी अभी थोड़ा रिलॅक्स हुआ था उसने मुझे खा जाने वाली नज़र से देखा
“यार सोच रहा हू की भाभी के लिए एक साड़ी ले लू, मेरे लिए तो तुम लोगो ने ये कपड़े ले दिए भाभी के लिए मैं एक साड़ी लेना चाहता हू “
अज्जु के होठों मे मुस्कान आ गयी और वो उठ खड़ा हुआ
हम दोनो पास ही एक सेल मे चले गये जहाँ 50% ऑफ चल रहा था..
मैने अपनी जेब टटोली कोई 200र्स थे जिसे खर्च करने के लिए भाभी ने ही दिया था, मुझे एक साड़ी पसंद आई
“भैया ये कितने की है “
“500र्स “
दुकानदार ने कहा
“ऊहह सस्ती वाली दिखाओ ना “
“रेंज कितने का है “
“200र्स “
दुकानदार ने मुझे घूरा
“अबेतू ले ना मैं तो हू, पैसे की टेन्षन क्यो ले रहा है “
अज्जु की बात सुनकर मुझे अच्छा तो लगा लेकिन मैं भाभी की साड़ी के लिए उससे पैसे नही ले सकता था
“नही भाई, भाभी की साड़ी के लिए तुझसे पैसे नही ले सकता, अगर उन्हे ये पता चलेगा तो बहुत नाराज़ होगी, और गिफ्ट की कीमत नही देखते दोस्त उसमे छिपा प्यार देखते है , जितनी मेरी औकात है उसी हिसाब से मैं भाभी के लिए साड़ी ले जाउन्गा “
इसके बाद अज्जु कुछ भी नही बोला क्योकि शायद वो मेरी भावनाओ को समझ चुका था
दुकानदार ने मुझे साड़ी दिखाई और एक पसंद भी आ गयी , सच मे साड़ी यो का काम बड़ा ही अजीब होता है एक ही जैसे दिखने वाली साड़ी 3000 से 300 तक की मिल सकती है बस क्वालिटी का ही आंतर होता है , मैं ये सारी ले कर खुश था बहुत खुस ……
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“हल्लो सरमेरा नाम अंकित है मैं सुस का बाय्फ्रेंड हू “
मेरे ऐसे बोलते ही सुस जोरो से हंस पड़ी थी
मैं, सुस, अज्जु और मोनिका के साथ एक माल मे आया हुआ था, वो लोग मेरे लिए कपड़े खरीद रहे थे ताकि मुझे तिवारी से इंट्रोड्यूस करवाया जा सके ..
ऐसे मुझे भी पता नही था की मैं वहाँ जा कर क्या करूँगा लेकिन फिर भी,
ऐसे वो भी नही जानते थे की मैं तिवारी के सामने जा कर क्या उखाड़ लूँगा लेकिन वो भी मुझे उसके सामने भेजने को तैयार हो गये थे क्योकि उन्हे अपनी शादी तोड़ने का यही एकलौता अवसर दिख रहा था ..
“तुम तो पूरे कार्टून लग रहे हो यार “
सुस ने हसते हुए कहा
“पापा या भाई लोग अगर तुम्हे देखेंगे तो तुम्हे छोड़ो मुझे ना मार दे “
मैने एक महँगी ब्रॅंडेड जीन्स पहनी थी लेकिन वो कमर से इतनी नीचे थी की मुझे बड़ा ही अनकंफर्टबल लगा सो मैने उसे उठा उँचा करके पहन लिया लगभग मेरे पेट पर, और शर्ट भी इन कर ली थी ..
“अरे भाई इसे कमर से थोड़ा नीचे पहनते है और देख मैं दिखाताहू “
लेकिन मुझे वो पसंद नही आया क्योकि फ्यूषन अपनी जाग थी मुझे तो अपना कॉमफोर्टब्लेन सुस चाहिए था..
लगभग पूरा दिन घूमने पर कुछ कपड़े मुझे पसंद आए थे वही सुस और मोनिका ने मुझसे दुगुना कपड़े खुद के लिए ले लिए थे, और उनका शॉपिंग जारी ही था ..
“भाई ये लड़किया तो आज मरवाएँगी “
अज्जु ने तब कहा जब वो दोनो सेंडल लेने चले गये और हम कॉफी शॉप मे बैठे कॉफी पी रहे थे
“भाई ये लोग पूरे साल का समान आज ही लेंगी क्या ??”
मैं भी थक चुका था
“क्या पता यार जब शॉपिंग की बात आती है तो सभी लड़कियो का हाल एक जैसा ही हो जाता है, इन्हे कोई भी चीज़ जल्दी पसंद आता ही नही है फिर अलग अलग चीज़ो के लिए अलग अलग शॉप मे जाती है हर शॉप मे एक दो घंटा तो लगा ही देती है … अब देखो ना कहने को तो मोनिका को सुस बिल्कुल भी पसंद नही है लेकिन आज देखो कैसे बेस्ट फ्रेंड बनी फिर रही है दोनो इनकी दोस्ती तो शॉपिंग ने ही करवा दी …”
हम दोनो ही हसने लगे थे
तभी मेरे दिमाग़ मे भाभी का ख्याल आया, उनकी साड़ी पुरानी हो गयी थी , कोई दो साड़ी ही होंगी उनके पास वही बदल बदल कर पहनती है, शायद उन्हे भी शॉपिंग करना पसंद आए …
नही शॉपिंग का मज़ा लेना अमीरो का काम था ना की ग़रीब लोगो का, सबसे पहली ज़रूरत तो रोटी और छत की होती है फिर कपड़ो का नंबर आता है, और इस तरह की शॉपिंग … भाभी तो सोच भी नही सकती ये सब ..
लेकिन फिर भी मेरे दिल मे आया की क्यो ना उनके लिए कुछ लिया जाए शायद एक साड़ी ..
“यार चल ना एक साड़ी देखते है “
अज्जु जो की अभी अभी थोड़ा रिलॅक्स हुआ था उसने मुझे खा जाने वाली नज़र से देखा
“यार सोच रहा हू की भाभी के लिए एक साड़ी ले लू, मेरे लिए तो तुम लोगो ने ये कपड़े ले दिए भाभी के लिए मैं एक साड़ी लेना चाहता हू “
अज्जु के होठों मे मुस्कान आ गयी और वो उठ खड़ा हुआ
हम दोनो पास ही एक सेल मे चले गये जहाँ 50% ऑफ चल रहा था..
मैने अपनी जेब टटोली कोई 200र्स थे जिसे खर्च करने के लिए भाभी ने ही दिया था, मुझे एक साड़ी पसंद आई
“भैया ये कितने की है “
“500र्स “
दुकानदार ने कहा
“ऊहह सस्ती वाली दिखाओ ना “
“रेंज कितने का है “
“200र्स “
दुकानदार ने मुझे घूरा
“अबेतू ले ना मैं तो हू, पैसे की टेन्षन क्यो ले रहा है “
अज्जु की बात सुनकर मुझे अच्छा तो लगा लेकिन मैं भाभी की साड़ी के लिए उससे पैसे नही ले सकता था
“नही भाई, भाभी की साड़ी के लिए तुझसे पैसे नही ले सकता, अगर उन्हे ये पता चलेगा तो बहुत नाराज़ होगी, और गिफ्ट की कीमत नही देखते दोस्त उसमे छिपा प्यार देखते है , जितनी मेरी औकात है उसी हिसाब से मैं भाभी के लिए साड़ी ले जाउन्गा “
इसके बाद अज्जु कुछ भी नही बोला क्योकि शायद वो मेरी भावनाओ को समझ चुका था
दुकानदार ने मुझे साड़ी दिखाई और एक पसंद भी आ गयी , सच मे साड़ी यो का काम बड़ा ही अजीब होता है एक ही जैसे दिखने वाली साड़ी 3000 से 300 तक की मिल सकती है बस क्वालिटी का ही आंतर होता है , मैं ये सारी ले कर खुश था बहुत खुस ……
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