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Badla बदला compleet

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गतान्क से आगे..

"ये जगन्नाथ जी हैं,कामिनी जी.",शिवा कामिनी को 1 बुज़ुर्ग से मिलवा रहा

था,"ये सहाय एस्टेट के खेतो का काम देखते हैं & मुझे इन्पर उतना ही भरोसा

है जितना खुद पे."

"जगन्नाथ जी,आप जानते हैं ना आपको क्या करना है?"

"जी हां.आप बेफ़िक्र रहें.मैं आपको अपने घर मे जगह दे दूँगा.मेरी बीवी &

बेटी को मैं सब समझा दूँगा.बाहर वालो के लिए आप मेरे भतीजे की बहू

हैं.भतीजा काम से बाहर गया है इसलिए आपको देख भाल के लिए मेरे परिवार के

साथ छ्चोड़ गया है."

"बहुत अच्छे.आपको मुझे एस्टेट के चप्पे-2 के बारे मे बताना है & हो सके

तो आप अपने मनेजर के बारे मे भी कुच्छ पता लगाइए मगर बिना उसे कोई भी शक़

दिलाए."

"ठीक है.अब मैं चलता हू,शाम ठीक 5 बजे मैं आपको लेने आऊंगा.".जगन्नाथ

जाने लगा,"..अरे हां..",वो पलटा जैसे की कुच्छ भूल गया था,"..शिवा

भाई,मेडम को कपड़ो का इंतेज़ाम करने को बोल देना."

"हां-2 ज़रूर.",शिवा मुस्कुराया.

"कपड़े?कैसे कपड़े?",जगन्नाथ के जाते ही कामिनी ने शिवा से पुचछा.

"कामिनी जी,आपको जगन्नाथ जी की बहू का भेस बदलना होगा & उसके लिए कपड़े

चाहिए जोकि मैने सुखी भाई को लाने के लिए बोला है.बस शाम का इंतेज़ार

कीजिए.",शिवा की असलियत जानने के बाद सुखी & उसकी काफ़ी छनने लगी थी.

"..& ये रखिए.",शिवा ने 1 चाभी कामिनी को थमाई,"..ये चाभी बंगले के पीछे

रसोई के दरवाज़े की है."

"थॅंक्स,शिवा मगर अभी भी 1 परेशानी है?"

"क्या?"

"इंदर के घर का ताला कैसे खुलेगा?"

"इस से मेडम.",मोहसिन जमाल & सुखी कमरे मे दाखिल हुए.

"ये लीजिए,कामिनी जी.",मोहसिन ने चाभियो का 1 बड़ा सा गुच्छा कामिनी को

थमाया,"दुनिया का शायद ही कोई ऐसा ताला हो जो इस गुच्छे की चाभियो से ना

खुले."

"मगर मोहसिन इस गुच्छे मे से चाभी ढूढ़ने मे तो बड़ा वक़्त लगेगा?"

"नही कामिनी जी,ये देखिए हर ताले के साइज़ के हिसाब से चाभीया हैं.सुखी

आपको ये बता देगा की कौन सी चाभीया गुच्छे मे कैसे लगी हैं.बस फिर आप

ताला देखिए & फिर गुच्छे मे से उसमे लग सकने वाली चाभीया अलग कीजिए & बस

मुझे 1 मिनिट से भी कम समय लगता है,आपको शायद 5 लगे."

"ओके,मोहसिन.थॅंक्स.",अब इंदर का बचना नामुमकिन था.कामिनी ने चाभीया अपने

बॅग मे डाली & शाम का इंतेज़ार करने लगी.

रात के 10 बजे से कामिनी सहाय एस्टेट के सर्वेंट क्वॉर्टर्स के सामने बनी

पार्किंग मे खड़ी 4 गाडियो मे से 1 मे च्छूपी बैठी थी.उसका इरादा था की

12 बजे के करीब वो कार से निकल के 1 बार बंगल के अंदर जाए.उसे उमीद नही

थी कि बंगल के अंदर से कोई सुराग मिलने वाला था मगर फिर भी वो 1 बार अंदर

जाके देखना चाहती थी.

कार की पिच्छली सीट पे लेटे-2 उसे नींद आ रही थी मगर किसी तरह उसने उसपे

काबू पाया & जैसे ही रात के 12 बजे वो कार से निकलने लगी मगर तभी आँखो के

कोने से उसे कुछ दिखा.उसने गर्दन घुमाई तो देखा इंदर अपने क्वॉर्टर से

निकल के बाहर आ गया था.कामिनी फ़ौरन झुक गयी & कार के शीशे से उसे देखने

लगी.

इधर-उधर देखता इंदर तेज़ी से बंगल की तरफ बढ़ा & थोड़ी ही देर मे वो बंगल

के पीछे था.कामिनी ने 1 पल इंतेज़ार किया & वो भी फुर्ती से कार से उतर

के उसके पीछे हो ली.

जब वो बंगल के पीछे पहुँची तो देखा की पीछे का रसोई का दरवाज़ा जिसकी

चाभी उसकी जेब मे थी बंद हो रहा था..इंदर के पास यहा की चाभी कैसे आई?..&

आख़िर वो इतनी रात गये घर के अंदर किस लिए गया था?..कही वो आज रात फिर

कुच्छ बुरा तो नही करने वाला?!

कामिनी ने किसी तरह 5 मिनिट इंतेज़ार किया & शिवा की दी चाभी से दरवाज़ा

खोल अंदर दाखिल हो गयी.घर मे इस वक़्त 4 लोग थे देविका,रोमा,इंदर & रोमा

का भाई संजय & चारो उपरी मंज़िल के कमरो मे थे. ये सब उसे जगन्नाथ ने

पंचमहल से आते वक़्त बता दिया था.

कामिनी दबे पाँव उपर गयी.वो पहले भी यहा आ चुकी थी & उसे पता था की

देविका का कमरा आख़िरी वाला है....कही इंदर & रोमा का कोई चक्कर तो

नही?..ख़याल आते ही उसने सबसे पहले उसी के कमरे का दरवाज़ा खोलने की

कोशिश की मगर दरवाज़ा अंदर से बंद था & कोई आवाज़ भी नही आ रही थी.अगले

कमरे मे संजय गहरी नींद मे सोया था & तीसरा कमरा खाली था.

चौथे कमरे के पास पहुँचते ही कामिनी ठिठक गयी-अंदर से रोने की आवाज़ आ

रही थी.कामिनी ने दरवाज़े को धकेला तो पाया कि वो खुला था.दरवाज़े को

थोड़ा सा खोल उसने अंदर देखा तो सन्न रह गयी.बिस्तर पे देविका इंदर की

बाहो मे सूबक रही थी & वो उसे दिलासा दे रहा था.

"चुप हो जाओ,देविका.बस..अब और मत रो.मैं हू ना तुम्हारे साथ. इस मनहूस

जगह से बहुत जल्दी छुट कारा दिलाउन्गा मैं तुम्हे."

"मगर कैसे इंदर?ये सब....",देविका रोते हुए कह रही थी,"..इस सारी जयदाद

का क्या होगा?"

"सब रोमा के नाम कर दो & हम दोनो यहा से चलते हैं."

"क्या?",देविका की सिसकिया अभी भी जारी थी,"..वो बेचारी कैसे संभाल पाएगी ये सब."

"संभाल लेगी. इस तरह ए क्यू नही सोचती.उसका गम तुमसे ज़्यादा नही तो कम

भी तो नही है.कारोबार चलाने से वो मसरूफ़ हो जाएगी & उसका मन भी इस हादसे

से उबर जाएगा."

"बात तो तुम्हारी ठीक लगती है.",देविका की रुलाई अब रुक गयी थी,"..मैं

कामिनी शरण से बात करती हू."

"वो तुम्हे मना कर देगी?"

"मगर क्यू?मेरी जयदाद मैं जिसे मर्ज़ी दू."

"वीरेन सहाय भी तो है,उसे कैसे भूल गयी.या तो बँटवारा हो या फिर वो

तुम्हारी बात मान जाए."

"वो क़ातिल है मेरे बच्चे का!",देविका की आवाज़ तेज़ हो गयी थी.

"& कामिनी शरण उसे ज़मानत दिलवा चुकी है.",इंदर ने अपनी बाहो को थोड़ा और

कसा तो देविका अब उस से पूरी तरह से चिपक गयी.काई दीनो बाद देविका को

अपने बदन मे वही सनसनी महसूस हुई जोकि किसी मर्द के करीब आने से होती

थी,"..& सभी जानते हैं की दोनो के बीच क्या रिश्ता है.ऐसे मे वो तुम्हारी

बात क्यू मानने लगी भला?!"

"तो क्या करू?वकील बदल लू?"

"नही मगर वसीयत तुम्हारी मर्ज़ी की चीज़ है.तुम चाहो सब कुच्छ दान कर

दो,चाहो सब बेच दो.अगर अदालत मे ये साबित हो जाए की वीरेन ने प्रसून का

क़त्ल किया है तो फिर उसे जयदाद से बेदखल करना कोई बड़ी बात नही.उसके बाद

तुम सबकुच्छ रोमा को दे देना & हम दोनो यहा से कही दूर चले जाएँगे..ऐसी

जगह जहा इस दुनिया का शोर-शराबा ना हो ना ही उलझने हो."

"ओह्ह,इंदर.",डेविका ने उसे बाहो मे भर लिया & उसके सीने मे अपना चेहरा

च्छूपा लिया.इंदर भी उसके बाल चूम रहा था.

ऐसी जगह तो 1 ही है & वो इस दुनिया मे नही है..कामिनी मन ही मन

बुदबुदाई..देविका,बेवकूफी मत करो..ये तुम्हे सच मे वाहा भेजेगा जहा

दुनिया की कोई तकलीफ़ नही होती-जन्नत!..कामिनी जैसे आई थी वैसे ही वापस

जाने लगी.उसका दिल कर रहा था की अंदर जाके इंदर का मुँह नोच उसे 4-5

तमाचे जड़ दे.उसकी ज़ाति ज़िंदगी मे वो कुच्छ भी करती हो मगर अपने पेशे

मे वो कभी कोई समझौता नही करती थी & ये गलिज़ इंसान वीरेन को क़ातिल &

उसे बेईमान बना रहा था देविका की नज़रो मे!अब तो वो इसे सज़ा दिलवा के ही

रहेगी!
 
1 बात तो तय थी कि इंदर अभी जल्द ही बंगल से बाहर नही आनेवाला तो ये मौका

अच्छा था की कामिनी उसके क्वॉर्टर को छान मारे.जेब से उसने मोहसिन जमाल

का दिया ड्यूप्लिकेट चाभियो के गुच्छे वाला पाउच निकाला & पहुँच गयी इंदर

के क्वॉर्टर.4 मिनिट मे ही कामिनी क्वार्टरर के अंदर थी मगर अंदर घुसते

ही उसकी सांस अटक गयी.क्वॉर्टर की बाल्कनी का दरवाज़ा खोल कोई अंदर आ रहा

था.

कामिनी झट से मैं दरवाज़े के बाहर हो गयी.अंदर घुप अंधेरा था & उस शख्स

का चेहरा नज़र नही आ रहा था.उसने 1 टॉर्च जलाके क्वॉर्टर की बैठक का

मुआयना किया तो कामिनी ने दरवाज़ा पूरा बंद कर दिया & उसके के होल से

झाँकने लगी.कोई 2 मिनिट बाद उसे अंदर से कोई रोशनी आती नही दिखी तो वो

बड़ी सावधानी से फिर से अंदर घुसी.

वो अजनबी इंदर के सोने के कमरे को खंगाल रहा था.कामिनी ने उस कमरे के

दरवाज़े से झाँका मगर उसे कुच्छ नज़र नही आया.उसका पहला ख़याल था की ये

कोई इंदर का साथी होगा मगर साथी चोरो की तरह क्यू आएगा?..फिर उसे लगा की

ये शिवा है मगर शिवा तो उसके साथ भी आ सकता था & वैसे भी इस शख्स का

डील-डौल शिवा से छ्होटा था. तो फिर ये था कौन?

वो इंदर की अलमारी खोल कुच्छ देख रहा था.थोड़ी ही देर बाद उसने अलमारी

बंद की तो कामिनी दबे पाँव भागती हुई क्वॉर्टर से बाहर आ गयी.उसे हल्की

सी आवाज़ आई तो वो समझ गयी की वो उसी रास्ते वापस गया है जिस रास्ते आया

था.कामिनी फ़ौरन अंदर गयी & भागती हुई बाल्कनी के दरवाज़े पर

आई.लंबे-लंबे डॅग भरता वो साया पेड़ो के झुर्मुट मे गायब हो गया था.

अब क्वॉर्टर की तलाशी की बारी कामिनी की थी.वो आधे घंटे तक लगी रही मगर

उसे कुच्छ ना मिला.मायूस हो वो क्वॉर्टर से निकल गयी & 1 ठंडी सांस

भरी.अब उसे कल रात तक का इंतेज़ार करना था....ऑफ!उसे फिर से कल दिन भर

घाघरा-चोली पहनना पड़ेगा.यही वो लिबास था जिसमे जगन्नाथ के घर की औरते

रहती थी & उसके भतीजे की बीवी को भी वही पहनना था..घाघरा-चोली तो तब भी

ठीक है मगर वो 4 हाथ लूंबा घूँघट!..आज शाम को आते वक़्त वो 4-5 बार

गिरते-2 बची थी.पता नही क्या मज़ा आता था अच्छी-भली औरतो को अँधा बनाने

मे मर्दो को!कामिनी ने अपनी रफ़्तार बढ़ाई & जगन्नाथ के घर की ओर बढ़

गयी.

कामिनी के दिमाग़ मे इथल-पुथल मची हुई थी.इंदर के घर मे वो शख्स कौन

था?..होगा तो कोई इंदर का दुश्मन ही लेकिन शिवा तो मोहसिन जमाल के साथ था

फिर ये कौन था?...वीरेन तो नही?..लेकिन उसकी कद-काठी वीरेन जैसी नही

थी..तो फिर कौन था वो?

तभी उसका मोबाइल बजा & वो ख़यालो से बाहर आई,"हाई!वीरेन कैसे हो?"

"कामिनी,मैं इस तरह से चोरो की तरह नही रह सकता!"

"वीरेन,तुम चोर थोड़े ही हो. ये तो बस तुम्हारे भले के लिए ही है."

"मगर फिर भी कुच्छ तो बताओ आख़िर माजरा क्या है?"

"वीरेन,मैं तुम्हे सारी बात अभी नही बात सकती क्यूकी सारा कुच्छ तो मुझे

भी नही पता अभी तक बस इतना जान लो की शिवा का इसमे कोई हाथ नही."

"क्या?!!फिर कौन है?"

"बस आज भर सब्र रखो,वीरेन.कल सब बताउन्गि तुम्हे."

"जैसा तुम कहो कामिनी."

वीरेन के फोन के फ़ौरन बाद मोहसिन का फोन आया,शिवा उस से बात करना चाहता

था,"क्या?!!",शिवा की आवाज़ मे हैरत,गुस्सा & दर्द के भाव मिले हुए

थे.कामिनी ने उसे इंदर & देविका के बारे मे बता दिया था.

"शिवा,मैं तुम्हारे दिल का हाल समझ रही हू लेकिन तुम जज़्बाती होकर कोई

कदम ना उठा लेना."

"हूँ."

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क्रमशः.......................

 


बदला पार्ट--47

गतान्क से आगे..

"ye jagannath ji hain,kamini ji.",Shiva kamini ko 1 buzurg se milwa

raha tha,"ye Sahay Estate ke kheto ka kaam dekhte hain & mujhe inpe

utna hi bharosa hai jitna khud pe."

"jagannath ji,aap jante hain na aapko kya karna hai?"

"ji haan.aap befikr rahen.main aapko apne ghar me jagah de dunga.meri

biwi & beti ko main sab samjha dunga.bahar walo ke liye aap mere

bhatije ki bahu hain.bhatija kaam se bahar gaya hai isliye aapko dekhb

hal ke liye mere parivar ke sath chhod gaya hai."

"bahut achhe.aapko mujhe estate ke chappe-2 ke bare me batana hai & ho

sake to aap apne manger ke abre me bhi kuchh pata lagaiye magar bina

use koi bhi shaq dilaye."

"thik hai.ab main chalta hu,sham thik 5 baje main aapko lene

aaoonga.".jagannath jane laga,"..are haan..",vo palta jaise ki kuchh

bhul gaya tha,"..shiva bhai,madam ko kapdo ka intezam karne ko bol

dena."

"haan-2 zarur.",shiva muskuraya.

"kapde?kaise kapde?",jagannath ke jate hi kamini ne shiva se puchha.

"kamini ji,aapko jagannath ji ki bahu ka bhes badalna hoga & uske liye

kapde chahiye joki maine Sukhi bhai ko lane ke liye bola hai.bas sham

ka intezar kijiye.",shiva ki asliyat jaanane ke baad sukhi & uski kafi

chhanane lagi thi.

"..& ye rakhiye.",shiva ne 1 chabhi kamini ko thamai,"..ye chabhi

bungle ke peechhe rasoi ke darwaze ki hai."

"thanx,shiva magar abhi bhi 1 pareshani hai?"

"kya?"

"inder ke ghar ka tala kaise khulega?"

"is se madam.",Mohsin Jamal & Sukhi kamre me dakhil hue.

"ye lijiye,kamini ji.",mohsin ne chabhiyo ka 1 bada sa guchha kamini

ko thamaya,"duniya ka shayad hi koi aisa tala ho jo is guchhe ki

chabhiyo se na khule."

"magar mohsin is guchhe me se chabhi dhundane me to bada waqt lagega?"

"nahi kamini ji,ye dekhiye har tale ke size ke hisab se chabhiya

hain.sukhi aapko ye bata dega ki kaun si chabhiya guchhe me kaise lagi

hain.bas fir aap tala dekhiye & fir gucchhe me se usme lag askne vali

chabhiya alag kijiye & bas mujhe 1 minute se bhi kam samay lagta

hai,aapko shayad 5 lage."

"ok,mohsin.thanx.",ab inder ka bachna namumkin tha.kamini ne chabhiya

apne bag me dali & sham ka intezar karne lagi.

Raat ke 10 baje se Kamini Sahay Estate ke servant quarters ke sane

bani parking me khadi 4 gadiyo me se 1 me chhupi baithi thi.uska irada

tha ki 12 baje ke karib vo car se nikal ke 1 baar bungle ke andar

jaye.use umeed nahi thi ki bungle ke andar se koi surag milne wala tha

magar fir bhi vo 1 baar andar jake dekhna chahti thi.

car ki pichhli seat pe lete-2 use nind aa rahi thi magar kisi tarah

usne uspe kabu paya & jaise hi raat ke 12 baje vo car se nikalne lagi

magar tabhi aankho ke kone se use kcuhh dikha.usne gardan ghumayi to

dekha Inder apne quarter se utar ke bahar aa gaya tha.kamini fauran

jhuk gayi & car ke sheeshe se use dekhne lagi.

idhar-udhar dekhta inder tezi se bungle ki taraf badha & thodi hi der

me vo bungle ke peechhe tha.kamini ne 1 pal intezar kiya & vo bhi

furti se car se utar ke uske peechhe ho li.

jab vo bungle ke peechhe pahunchi to dekha ki peechhe ka rasoi ka

darwaza jiski chabhi uski jeb me thi band ho raha tha..inder ke paas

yaha ki chabhi kaise aayi?..& aakhir vo itni raat gaye ghar ke andar

kis liye gaya tha?..kahi vo aaj raat fir kuchh bura to nahi karne

wala?!

kamini ne kisi tarah 5 minute intezar kiya & Shiva ki di chabhi se

darwaza khol andar dakhil ho gayi.ghar me is waqt 4 log the

devika,Roma,Inder & roma ka bhai Sanjay & charo upari manzil ke kamro

me the. ye sab use Jagannath ne Panchmahal se aate waqt bata diya tha.

kamini dabe panv upar gayi.vo pehle bhi yaha aa chuki thi & use pata

tha ki devika ka kamra aakhiri wala hai....kahi inder & roma ka koi

chakkar to nahi?..khayal aate hi usne sabse pehle usi ke kamre ka

darwaza kholne ki koshish ki magar darwaza andar se band tha & koi

aavaz bhi nahi aa rahi thi.agle kamre me sanjay gehri nind me soya tha

& teesra kamra khali tha.

chauthe kamre ke paas pahunchte hi kamini thithak gayi-andar se rone

ki aavaz aa rahi thi.kamini ne darwaze ko dhakela to paya ki vo khula

tha.darwaze ko thoda sa khol usne andar dekha to sann reh gayi.bistar

pe devika inder ki baaho me subak rahi thi & vo use dilasa de raha

tha.

"chup ho jao,devika.bas..ab aur mat ro.main hu na tumhare sath. is

manhus jagah se bahut jaldi chhutkara dilaunga main tumhe."

"magar kaise inder?ye sab....",devika rote hue keh rahi thi,"..is sari

jaydad ka kya hoga?"

"sab roma ke naam kar do & hum dono yaha se chalte hain."

"kya?",devika ki siskiya abhi bhi jari thi,"..vo bechari kaise asmbhal

payegi ye sab."

"sambhal legi. is tarahs e kyu nahi sochti.uska ghum tumse zyada nahi

to kam bhi to nahi hai.karobar chalane se vo masruf ho jayegi & uska

man bhi is hadse se ubar jayega."

"baat to tumhari thik lagti hai.",devika ki rulai ab ruk gayi

thi,"..main Kamini Sharan se baat karti hu."

"vo tumhe mana kar degi?"

"magar kyu?meri jaydad main jise marzi du."

"Viren Sahay bhi to hai,use kaise bhul gayi.ya to bantwara ho ya fir

vo tumhari baat maan jaye."

"vo qatil hai mere bachche ka!",devika ki aavaz tez ho gayi thi.

"& kamini sharan use zamanat dilwa chuki hai.",inder ne apni baaho ko

thoda aur kasa to devika ab us se puri tarah se chipak gayi.kayi dino

baad devika ko apne badan me vahi sansani mehsus hui joki kisi mard ke

karib aane se hoti thi,"..& sabhi jante hain ki dono ke beech kya

rishta hai.aise me vo tumhari baat kyu maanane lagi bhala?!"

"to kya karu?vakil badal lu?"

"nahi magar vasiyat tumhari marzi ki chiz hai.tum chaho sab kuchh daan

kar do,chahao sab bech do.agar adalat me ye sabit ho jaye ki viren ne

prasun ka qatl kiya hai to fir use jaydad se bedakhal karna koi badi

baat nahi.uske baad tum sabkuchh roma ko de dena & hum dono yaha se

kahi dur chale jayenge..aisi jagah jaha is duniya ka shor-sharaba na

ho na hi uljhane ho."

"ohh,inder.",devika ne use baaho me bhar liya & uske seene me apna

chehra chhupa liya.inder bhi uske baal chum raha tha.

aisi jagah to 1 hi hai & vo is duniya me nahi hai..kamini man hi man

budbudai..devika,bevkufi mat karo..ye tumhe sach me vaha bhejega jaha

duniya ki koi taklif nahi hoti-jannat!..kamini jaise aayi thi vasie hi

vapas jane lagi.uska dil kar raha tha ki andar jake inder ka munh noch

use 4-5 tamache jad de.uski zati zindagi me vo kuchh bhi karti ho

magar apne peshe me vo kabhi koi samjhauta nahi karti thi & ye galiz

insan viren ko qatil & use beiman bana raha tha devika ki nazro me!ab

to vo ise saza dilwa ke hi rahegi!

1 baat to tay thi ki inder abhi jald hi bungle se bahar nahi aanewala

to ye mauka achha tha ki kamini uske quarter ko chhan mare.jeb se usne

Mohsin Jamal ka diya duplicate chabhiyo ke guchhe weala pouch nikala &

pahunch gayi inder ke quarter.4 minute me hi kamini quartyer ke andar

thi magar andar ghuste hi uski sans atak gayi.quarter ki balcony ka

darwaza khol koi andar aa raha tha.

kamini jhat se main darwaze ke bahar ho gayi.andar ghup andhera tha &

us shakhs ka chehra nazar nahi aa raha tha.usne 1 torch jalake quarter

ki baithak ka muayana kiya to kamini ne darwaza pura band kar diya &

uske key hole se jhankne lagi.koi 2 minute baad use andar se koi

roshni aati nahi dikhi to vo badi savdhani se fir se andar ghusi.

vo ajnabi inder ke sone ke kamre ko khangal raha tha.kamini ne us

kamre ke darwaze se jhanka magar use kuchh nazar nahi aaya.uska pehla

khayal tha ki ye koi inder ka sathi hoga magar sathi choro ki tarah

kyu ayega?..fir use laga ki ye shiva hai magar shiva to uske sath bhi

aa sakta tha & vaise bhi is shakhs ka deel-daul shiva se chhota tha.

to fir ye tha kaun?

vo inder ki almari khol kuchh dekh raha tha.thodi hi der baad usne

almari band ki to kamini dabe panv bhagti hui quarter se bahar aa

gayi.use halki si aavaz aayi to vo samajh gayi ki vo usi raste vapas

gaya hai jis raste aaya tha.kamini fauran andar gayi & bhagti hui

balcony ke darwaze par aayi.lambe-lambe dag bharta vo saya pedo ke

jhurmut me gayab ho gaya tha.

ab quarter ki talashi ki bari kamini ki thi.vo aadhe ghante tak lagi

rahi magar use kuchh na mila.mayus ho vo quarter se nikal gayi & 1

thandi sans bhari.ab use kal raat tak ka intezar karna tha....off!use

fir se kal din bhar ghaghra-choli pehanana padega.yehi vo libas tha

jisme jagannath ke ghar ki aurate rehti thi & uske bhatije ki biwi ko

bhi vahi pehanan tha..ghaghra-choli to tab bhi thik hai magar vo 4

hath lumba ghunghat!..aaj sham ko aate waqt vo 4-5 baar girte-2 bachi

thi.pata nahi kya maza aata tha achhi-bhali aurato ko andha banane me

mardo ko!kamini ne apni raftar badhayi & jagannath ke ghar ki or badh

gayi.

Kamini ke dimagh me ithal-puthal machi hui thi.Inder ke ghar me vo

shakhs kaun tha?..hoga to koi inder ka dushman hi lekin Shiva to

Mohsin Jamal ke sath tha fir ye kaun tha?...Viren to nahi?..lekin uski

kad-kathi viren jaisi nahi thi..to fir kaun tha vo?

tabhi uska mobile baja & vo khayalo se bahar aayi,"hi!viren kaise ho?"

"kamini,main is tarah se choro ki tarah nahi reh sakta!"

"viren,tum chor thode hi ho. ye to bas tumhare bhale ke liye hi hai."

"magar fir bhi kuchh to batao aakhir majra kya hai?"

"viren,main tumhe sari baat abhi nahi bat sakti kyuki sara kuchh to

mujhe bhi nahi pata abhi tak bas itna jaan lo ki shiva ka isme koi

hath nahi."

"kya?!!fir kaun hai?"

"bas aaj bhar sabra rakho,viren.kal sab bataungi tumhe."

"jaisa tum kaho kamini."

viren ke fone ke fauran baad mohsin ka fone aaya,shiva us se baat

karna chahta tha,"kya?!!",shiva ki aavaz me hairat,gussa & dard ke

bhav mile hue the.kamini ne use inder & Devika ke bare me bata diya

tha.

"shiva,main tumhare dil ka haal samajh rahi hu lekin tum jazbati hokar

koi kadam na utha lena."

"hun."

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kramashah.
 
गतान्क से आगे..

रात कामिनी फिर से इंदर के पीछे-2 बंगल के अंदर थी.देविका फिर से इंदर की

बाहो मे थी लेकिन आज वो रो नही रही थी.आज फिर वही बात हो रही थी दोनो के

बीच मे.कामिनी को समझ नही आ रहा था की आख़िर इंदर क्यू चाहता था की रोमा

के नाम जयदाद कर दी जाए.कही रोमा भी तो नही मिली हुई इस साज़िश

मे?..लेकिन शिवा क्या 1 ही ग़लती 2 बार कर सकता है?उसने इंदर को पहचानने

मे थोड़ी देर की पर क्या रोमा भी....

इंदर देविका के होंठ चूम रहा था & कामिनी ने देखा की देविका भी बड़ी

बेचैनी से अपने हाथ इंदर की पीठ पे घुमा रही थी.दोनो करवट से लेटे हुए थे

कि इंदर ने करवट बदल देविका को अपने नीचे किया & उसके उपर चढ़ गया.देविका

इंदर की कमीज़ को उसकी पॅंट से निकाल अपने हाथ उसके अंदर घुसा उसकी पीठ

पे चला रही थी.कामिनी समझ गयी की अब आज रात उसे इन दोनो की आहो & मस्त

आवाज़ो के सिवा और कुच्छ सुनने को नही मिलने वाला.वो वाहा से जाने लगी की

तभी रोमा के कमरे के पास उसके कदम ठिठक गये.

रोमा के कमरे से बातो की आवाज़े आ रही थी..इतनी रात गये उसके कमरे मे था

कौन?कामिनी पलटी तो देखा की संजय अपने कमरे मे नही है.दोनो भाई-बेहन इतनी

रात गये क्या बात कर रहे थे.लकड़ी के भारी-भरकम दरवाज़े के बंद होने के

कारण उसे कुच्छ सुनाई नही दे रहा था.कामिनी का दिमाग़ तेज़ी से दौड़ने

लगा तो उसे याद आया की पीछे के लॉन की तरफ उपरी मंज़िल के 2 कमरो की

बाल्कनी दिखती थी,1 पहले कमरे की & 1 आख़िरी कमरे की.पहला कमरा रोमा का

था & आख़िरी देविका का.

कामिनी फ़ौरन बंगल के बाहर गयी & लॉन मे खड़ी हो रोमा के कमरे को देखने

लगी.बाल्कनी का दरवाज़ा खुला था....किसी तरह वो बाल्कनी पे पहुँच

जाए..बस!वो इधर-उधर देखने लगी तो उसे 1 छ्होटा सा स्टोर रूम दिखा जिसमे

बाग़बानी का समान रखा था.वाहा उसे 1 सीढ़ि मिल गयी.कामिनी ने सीधी को

बाल्कनी से लगाया & कुच्छ ही देर मे वो बाल्कनी पे थी.हवा से हिलते पर्दे

की ओट से उसने अंदर का नज़ारा देखा तो उसकी आँखे फटी रह गयी.

रोमा बिस्तर पे नंगी पड़ी थी & संजय उसकी फैली टाँगो के बीच सर घुसाए

उसकी चूत चाट रहा था,"आन्न्न्नह.....संजू....वॉवववव..!!",रोमा उसके बाल

खींच रही थी.रोमा कमर उचका रही थी & आहे भरे जा रही थी.कामिनी समझ गयी थी

की रोमा झाड़ रही थी.उसके झाड़ते ही संजय उपर हुआ & अपना लंड उसकी चूत मे

घुसा दिया,"हाअन्न्न्न....संजू...आहह..कितने दीनो

बाद..तुम्हारा...ऊओवव्वव...लंड मेरे अंदर है जान.....!"

कामिनी की समझ मे कुच्छ नही आ रहा था.भाई-बेहन के बीच ऐसा रिश्ता.कितने

घिनोने लोग थे ये!

"ओवववव......संजू...धीरे चोदो ना!..बच्चे का तो ख़याल करो..आनह..!",रोमा

ने उसे अपने उपर से उठाया तो संजय अपने हाथो पे अपना वज़न संभाल उसके

सीने & पेट से अपने बदन को उठा धक्के लगाने लगा.

"वो पागल रोज़ चोद्ता था तुम्हे?"

"हां.",संजय के धक्के और तेज़ हो गये.

"हाईईइ..आराम से करो ना!",रोमा ने उसके निपल्स को नोच लिया.

"आह..",संजय करहा,"..तुम्हे मज़ा आता था?"

"बहुत मेरी जान.जब तक ना काहु तब तक नही झाड़ता था वो

पागल...आईइईयईए..!",संजय गुस्से से पागल हो

गया,"..संजू...प्लीज़....जानते हो ना..ये बच्चा कितना ज़रूरी है हमारे

लिए..आनह...हां..ऐसे ही करो...मैं तो छेड़ रही थी तुम्हे जानू.",रोमा ने

प्यार से उसके बालो मे हाथ फिराए & उसे अपने खींच के चूमने लगी,"..जानती

हू तुम कितना तडपे होगे पर ये ज़रूरी था ना संजू हमारे इन्तेक़ाम के

लिए."

इन्तेक़ाम..कामिनी के माथे पे बल पड़ गये पर तभी उसके सर पे पीछे से बहुत

ज़ोर से किसी ने मारा & वो बेहोश हो गयी.

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कामिनी को जैसे बहुत दूर से कोई आवाज़े आती सुनाई दे रही थी,"..सब बिगड़

दिया इसने..तो अब क्या होगा....कुच्छ नही..इसे ठिकाने लगा

देंगे....",कामिनी को जैसे-2 होश आया तो उसने पाया की वो किसी बिस्तर पे

पेट के बल पड़ी थी & उसके हाथ पीछे करके बँधे हुए थे साथ ही उसके पैर

भी.1 आवाज़ तो रोमा की थी & दूसरी संजय की मगर ये तीसरी आवाज़ किसकी

थी..ये इंदर नही था..कौन था ये?वो दिमाग़ पे ज़ोर डालने लगी तो उसे लगा

की दर्द से उसका सर फॅट जाएगा लेकिन आवाज़ थी जानी-पहचानी,उसने सुनी थी

ये आवाज़ कही.

"तो क्या करेंगे?..इसे भी देविका के साथ.."

"नही..",उस जानी-पहचानी आवाज़ ने कहा,"..इसे किसी और तरकीब से ठिकाने

लगाएँगे पर पहले इंदर को बुलाओ."

"भाय्या तो इस वक़्त देविका के साथ होगा.",रोमा ने कहा.

"तो देखो उसके कमरे मे."

थोड़ी ही देर बाद इंदर भी उनके साथ था,"ये यहा कैसे आ गयी?"

"पहले ये बताओ की देविका को तो शक़ नही हुआ अभी?"

"नही,वो तो गहरी नींद मे सो रही है."

"बहुत बढ़िया.तुमने दस्तख़त ले लिए उसके?"

"जी.ये रही उसकी वसीयत.",ये कब किया इंदर ने..कामिनी सोच रही थी.

"वेरी गुड.अब तुम लोग यही बैठो मैं अभी आता हू.",दरवाज़े के खुलने बंद

होने की आवाज़ से कामिनी समझ गयी को वो शख्स कमरे से बाहर निकल गया है.

"ओह्ह..भाय्या!आख़िर हमारा बदला पूरा हो ही जाएगा अब!",रोमा की आवाज़ से

खुशी झलक रही थी.

"हां,रोमा & इसके लिए तुझे बहुत बड़ी क़ुर्बानी देनी पड़ी है & तुम्हे भी

संजय.",तो रोमा इंदर की बेहन थी..कामिनी सब आँखे बंद किए सुन रही थी.

"भाय्या,हमारे मा-बाप को झेलना पड़ा उसके सामने तो ये कुच्छ भी नही."

"तुम्हे तो इसमे पड़ने की कोई ज़रूरत भी नही थी संजय फिर भी तुमने हमारी मदद की."

"आपने तो मुझे पल मे पराया कर दिया इंदर भाय्या.क्या रोमा का पति होने के

नाते मैं आपके परिवार का हिस्सा नही?",अब तो कामिनी की हैरत का ठिकाना ही

नही था..तो संजय रोमा का भाई नही पति था!..कितना बड़ा खेल खेला था इन

लोगो ने!

"ये बदबू कैसी?"

"हूँ.कुच्छ जल रहा है शायद.मैं देखता हू.",इंदर दरवाज़े की तरफ बढ़ा,"अरे

दरवाज़ा तो बंद है!ऐसा कैसे हुआ!"

"भाय्या,धुआँ कमरे के अंदर आ रहा है."

"ये दरवाज़ा बंद कैसे हुआ?मौसा जी को फोन लगाओ रोमा,जल्दी!",वो तीनो नही

समझे मगर कामिनी समझ गयी थी."मौसा जी" ने वसीयत ले ली थी & अब बंगले मे

आग लगा दी थी.थोड़ी ही देर मे सहाय परिवार का अंत हो जाएगा & उसके साथ ही

इस साज़िश मे शामिल सभी लोगो का भी मगर वो ये मौत नही मरना चाहती थी.

कमरे के अंदर बहुत धुआँ भर गया था....ये सब बाल्कनी के रास्ते क्यू नही

भाग रहे?कामिनी को तीनो के खांसने की आवाज़ से ख़याल आया.उसका भी बुरा

हाल था.उसने गर्दन घुमाई & ज़ोर लगाके करवट ली तो देखा कि वो रोमा के

कमरे मे नही थी बल्कि शायद संजय के कमरे मे थी जिसमे कोई बाल्कनी थी ही

नही.कामिनी चिल्ला के उन्हे अपनी रस्सी खोलने को कहने लगी मगर तीनो धुए

से बेदम थे.

उस वक़्त कामिनी को 1 फिल्म का सीन याद आया & वो घुटने मोड़ अपनी टाँगे

अपने बँधे हाथो से निकालने लगी.रोज़ की जॉगिंग & वर्ज़िश के कारण अभी भी

उसके बदन मे लोच था & थोड़ी ही देर मे टाँगे निकल गयी & उसके बँधे हाथ अब

आगे की ओर थे.कामिनी ने बँधे हाथो से ही पैरो के बंधन खोले & कमरे के

दरवाज़े को बँधे हाथो से ही खींचने लगी लेकिन कोई फ़ायदा नही.

उसने इंदर को हिलाया,"इंदर..उठो..यहा से निकलना है हमे तुम्हारे मौसा को

पकड़ना है हमे.",मगर धुआ अब इंदर के फेफड़ो मे भर चुका था.कामिनी उसकी

जेबे टटोलने लगी & उसके हाथो मे इंदर का लाइटर आ गया.कामिनी ने फ़ौरन उसे

जलाया & उसकी लौ अपने हाथो के बंधन की गाँठ पे लगाई.उसके हाथ जल रहे थे

मगर उसकी उसे परवाह नही थी.

क्रमशः......

 


बदला पार्ट--48

गतान्क से आगे..

raat kamini fir se inder ke peechhe-2 bungle ke andar thi.devika fir

se inder ki baaho me thi lekin aaj vo ro nahi rahi thi.aaj fir vahi

baat ho rahi thi dono ke beech me.kamini ko samajh nahi aa raha tha ki

aakhir inder kyu chahta tha ki Roma ke naam jaydad kar di jaye.kahi

roma bhi to nahi mili hui is sazish me?..lekin shiva kya 1 hi galti 2

baar kar sakta hai?usne inder ko pehchanane me thodi der ki par kya

roma bhi....

inder devika ke honth chum raha tha & kamini ne dekha ki devika bhi

badi bechaini se apne hath inder ki pith pe ghuma rahi thi.dono karwat

se lete hue the ki inder ne karwat badal devika ko apne neeche kiya &

uske upar chadh gaya.devika inder ki kamiz ko uski pant se nikal apne

hath uske andar ghusa uski pith pe chala rahi thi.kamini samajh gayi

ki ab aaj raat use in dono ki aaho & mast aavazo ke siva aur kuchh

sunane ko nahi milne wala.vo vaha se jane lagi ki tabhi roma ke kamre

ke paas uske kadam thithak gaye.

roma ke kamre se baato ki aavaze aa rahi thi..itni raat gaye uske

kamre me tha kaun?kamini palti to dekha ki Sanjay apne kamre me nahi

hai.dono bhai-behan itni raat gaye kya baat kar rahe the.lakdi ke

bhari-bharkam darwaze ke band hone ke karan use kuchh sunai nahi de

raha tha.kamini ka dimagh tezi se daudne laga to use yaad aaya ki

peechhe ke lawn ki taraf upri manzil ke 2 kamro ki balcony dikhti

thi,1 pehle kamre ki & 1 aakhiri kamre ki.pehla kamra roma ka tha &

aakhiri devika ka.

kamini fauran bungle ke bahar gayi & lawn me khadi ho roma ke kamre ko

dekhne lagi.balcony ka darwaza khula tha....kisi tarah vo balcony pe

pahunch jaye..bas!vo idhar-udhar dekhne lagi to use 1 chhota sa store

room dikha jisme bagbani ka saman rakha tha.vaha use 1 seedhi mil

gayi.kamini ne seedhi ko balcony se lagaya & kuchh hi der me vo

balcony pe thi.hawa se hilte parde ki ot se usne andar ka nazara dekha

to uski aankhe fati reh gayi.

roma bistar pe nangi padi thi & sanjay uski faili tango ke beech sar

ghusaye uski chut chaat raha

tha,"aannnnhhhhh.....sanju....wowwww..!!",roma uske baal khinch rahi

thi.roma kamar uchka rahi thi & aahe bhare ja rahi thi.kamini samajh

gayi thi ki roma jhad rahi thi.uske jhadte hi sanjay upar hua & apna

lund uski chut me ghusa diya,"haaannnn....sanju...aahhhh..kitne dino

baad..tumhara...ooowwww...lund mere andar hai jaan.....!"

kamini ki samajh me kuchh nahi aa raha tha.bhai-behan ke beech aisa

rishta.kitne ghinone log the ye!

"owwww......sanju...dhire chodo na!..bachche ka to khayal

karo..aanhhh..!",roma ne use apne upar se uthaya to sanjay apne hatho

pe apna vazan sambhal uske seene & pet se apne badan ko utha dhakke

lagane laga.

"vo pagal roz chodta tha tumhe?"

"haan.",sanjay ke dhakke aur tez ho gaye.

"haiiii..aaram se karo na!",roma ne uske nipples ko noch liya.

"aah..",sanjay karaha,"..tumhe maza aata tha?"

"bahut meri jaan.jab tak na kahu tab tak nahi jhadta tha vo

pagal...aaiiiyyeee..!",sanjay gusse se pagal ho

gaya,"..sanju...please....jante ho na..ye bachcha kitna zaruri hai

humare liye..aanhhh...haan..aise hi karo...main to chhed rahi thi

tumhe janu.",roma ne pyar se uske baalo me hath firaye & use apne

khinch ke chumne lagi,"..janti hu tum kitna tadpe hoge par ye zaruri

tha na sanju humare inteqam ke liye."

inteqam..kamini ke mathe pe bal pad gaye par tabhi uske sar pe peechhe

se bahut zor se kisi ne mara & vo behosh ho gayi.

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kamini ko jaise bahut door se koi aavaze aati sunai de rahi thi,"..sab

bigad diya isne..to ab kya hoga....kuchh nahi..ise thikane laga

denge....",kamini ko jaise-2 hosh aaya to usne paya ki vo kisi bistar

pe pet ke bal padi thi & uske hath peechhe karke bandhe hue the sath

hi uske pair bhi.1 aavaz to roma ki thi & dusri sanjay ki magar ye

teesri aavaz kiski thi..ye inder nahi tha..kaun tha ye?vo dimagh pe

zor daalne lagi to use laga ki dard se uska sar phat jayega lekin

aavaz thi jani-pehchani,usne suni thi ye aavaz kahi.

"to kya karenge?..ise bhi devika ke sath.."

"nahi..",us jani-pehchani aavaz ne kaha,"..ise kisi aur tarikes e

thikane lagayenge par pehle inder ko bulao."

"bhaiyya to is waqt devika ke sath hoga.",roma ne kaha.

"to dekho uske kamre me."

thodi hi der baad inder bhi unke sath tha,"ye yaha kaise aa gayi?"

"pehle ye batao ki devika ko to shaq nahi hua abhi?"

"nahi,vo to gehri nind me so rahi hai."

"bahut badhiya.tumne dastkhat le liye uske?"

"ji.ye rahi uski vasiyat.",ye kab kiya inder ne..kamini soch rahi thi.

"very good.ab tum log yehi baitho main abhi aata hu.",darwaze ke

khulne band hone ki aavaz se kamini samajh gayi ko vo shakhs kamre se

bahar nikal gaya hai.

"ohh..bhaiyya!aakhir humara badla pura ho hi jayega ab!",roma ki aavaz

se khushi jhalak rahi thi.

"haan,roma & iske liye tujhe bahut badi qurbani deni padi hai & tumhe

bhi sanjay.",to roma inder ki behan thi..kamini sab aankhe band kiye

sun rahi thi.

"bhaiyya,humare maa-baap ko jhelna pada uske samne to ye kuchh bhi nahi."

"tumhe to isme padne ki koi zarurat bhi nahi thi sanjay fir bhi tumne

humari madad ki."

"aapne to mujhe pal me paraya kar diya inder bhaiyya.kya roma ka pati

hone ke nate main aapke parivar ka hissa nahi?",ab to kamini ki hairat

ka thikana hi nahi tha..to sanjay roma ka bhai nahi pati tha!..kitna

bada khel khela tha in logo ne!

"ye badbu kaisi?"

"hun.kuchh jal raha hai shayad.main dekhta hu.",inder darwaze ki taraf

badha,"are darwaza to band hai!aisa kaise hua!"

"bhaiyya,dhuan kamre ke andar aa raha hai."

"ye darwaza band kaise hua?mausa ji ko fone lagao roma,jaldi!",vo

teeno nahi samjhe magar kamini samajh gayi thi."mausa ji" ne vasiyat

le li thi & ab bungle me aag laga di thi.thodi hi der me sahay parivar

ka ant ho jayega & uske sath hi is sazish me shamil sabhi logo ka bhi

magar vo ye maut nahi marna chahti thi.

kamre ke andar bahut dhuan bhar gaya tha....ye sab balcony ke raste

kyu nahi bhag rahe?kamini ko teeno ke khansane ki aavaz se khayal

aaya.uska bhi bura haal tha.usne gardan ghumayi & zor lagake karwat li

to dekha ki vo roma ke kamre me nahi thi balki shayad sanjay ke kamre

me thi jisme koi balcony thi hi nahi.kamini chilla ke unhe apni rassi

kholne ko kehne lagi magar teeno dhue se bedam the.

us waqt kamini ko 1 film ka scene yaad aaya & vo ghutne mod apni tange

apne bandhe hatho se nikalne lagi.roz ki jogging & varzish ke karan

abhi bhi uske badan me loch tha & thodi hi der me tange nikal gayi &

uske bandhe hath ab aage ki or the.kamini ne bandhe hatho se hi pairo

ke bandhan khole & kamre ke darwaze ko bandhe hatho se hi khinchne

lagi lekin koi fayda nahi.

usne inder ko hilaya,"inder..utho..yaha se nikalna hai hume tumhare

mausa ko pakadna hai hume.",magar dhua ab inder ke fefdo me bhar chuka

tha.kamini uski jebe tatolne lagi & uske hatho me inder ka lighter aa

gaya.kamini ne fauran use jalaya & uski lau apne hatho ke bandhan ki

ganth pe lagayi.uske hath jal rahe the magar uski use parwah nahi thi.

kramashah......
 
गतान्क से आगे..

रस्सी जलने तक कमरे का हाल तो बिल्कुल ही बुरा हो चुका था.आग भी दरवाज़े

तक पहुँच गयी थी & वहाँ से निकलना अब नामुमकिन था मगर कामिनी हार मानने

वालो मे से नई थी.उसने पलंग पे पड़ी चादर उठाई & उसे बाथरूम मे ले जाके

पानी से पूरा भीगा के अपने मुँह पे लपेट लिया & कमरे की खिड़की के पास

गयी जिसे खोलते-2 संजय वही गिर गया था.खिड़की मे लोहे का ग्रिल लगा था &

अब कामिनी के पास बचाव के लिए चिल्लाने के अल्वा & कोई रास्ता नही था.

नीचे लोगो की भीड़ जमा थी मगर सब देखने चिल्लाने के अलावा & कुच्छ नही कर

रहे थे & तभी कमरे का दरवाज़ा गिरने की आवाज़ आई.वो पलटी तो देखा की 1

कंबल लपेटे 1 आदमी अंदर गिरता हुआ दाखिल हुआ,"चलिए कामिनी जी.",ये शिवा

था.

"मगर शिवा,आग बहुत तेज़ है!",शिवा ने साथ लाया कंबल कामिनी को ओढ़ाया &

उसे पकड़ के आग के बीच से दौड़ता हुआ कमरे से बाहर निकला.कामिनी ने देखा

की पूरा बंगला जल रहा रहा था.नीचे जाना तो नामुमकिन था क्यूकी सीढ़ियो पे

भयंकर आग थी.शिवा उसे ले उपर की तरफ भाग रहा था छत पे.कामिनी की समझ मे

कुच्छ नही आ रहा था.छत पे आ उसे राहत महसूस मिली.धुए से भरे उसके फेफड़ो

मे ताज़ी हवा गयी & आग की झुलसाहट से उसे निजात मिली.

वो अपनी सांस संभाल ही रही थी कि अचानक शिवा ने उसे गोद मे उठाया & छत से

कूद गया.कामिनी की चीख निकल गयी लेकिन अगले ही पल वो 1 बड़े से जाल पे

झूल रही थी.

"शिवा..",हान्फ्ते हुए उसने अपने कंबल & चादर को खुद से अलग किया,"..देविका जी.."

"मैं यहा हू.कामिनी जी.",आवाज़ सुन कामिनी घूमी तो देखा की कालिख & पसीने

से आटे चेहरे वाली देविका उसके पीछे खड़ी है.

"देविका जी,आपके खिलाफ बहुत बड़ी साज़िश रची गयी थी!"

"मुझे पता है.आप पहले इधर आइए.",फाइयर ब्रिगेड,पोलीस & आंब्युलेन्स बंगल

के अहाते मे आ रही थी.देविका शिवा के साथ कामिनी को आंब्युलेन्स मे ले जा

रही थी.

"मैं ठीक हू."

"हां,मैं जानती हू.मैं भी आपके साथ हॉस्पिटल चल रही हू.चेक-अप ज़रूरी है

आपका.",तीनो के बैठते ही दरवाज़ा बंद हुआ & साइरन बजाती आंब्युलेन्स वाहा

से निकल गयी.आंब्युलेन्स की खिड़की से कामिनी ने देखा की पोलीस 2 लाशो का

मुआयना कर रही है...लेकिन रोमा,संजय & इंदर तो अभी उपर कमरे मे ही थे.अभी

आग बुझी भी नही थी फिर ये.."शिवा ये कौन हैं?"

शिवा ने देविका को देखा.दोनो के चेहरो पे अजीब सी उलझन थी,"क्या बात

है?बोलते क्यू नही!"

"वीरेन की &..",आगे की बात सुनने से पहले ही कामिनी बेहोश हो गयी.

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वो बादलो पे लेटी थी,कितना सुकून था यहा..हर तरफ बस ठंडक & उजाला,आहट हुई

तो उसने गर्दन घुमाई,सफेद कपड़ो मे वीरेन और भी सजीला दिख रहा था.वो

मुस्कुराइ & अपनी बाहे फैला दी.वीरेन उसकी तरफ आ रहा था मुस्कुराता

हुआ,उसके बाल हवा मे लहरा रहे थे.बस थोड़ी ही देर मे वो उसकी बाहो मे

होगी....मगर वो पास क्यू नही आ रहा था.वीरेन चल रहा था मगर उसके करीब नही

आ रहा था,"..वीरेन..",वो अब धुँधला हो रहा था,"..वीरेन.."वो चीखी मगर वो

बदलो मे गुम हो चुका था,"वीरेन!"

आँखे खुली तो देखा की चंद्रा साहब उसके पास बैठे हैं & बीप-2 की आवाज़ आ

रही है.उसने गर्दन घुमा के कमरे का जायज़ा लिया.वो 1 हॉस्पिटल के कमरे मे

थी & हार्ट रेट मॉनिटर बीप कर रहा था.चंद्रा साहब डॉक्टर को बुला रहे

थे.डॉक्टर आया & उसकी आँखे देखी & उसे 1 इंजेक्षन दिया & वो फिर नींद के

आगोश मे चली गयी.

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"गुड मॉर्निंग!",1 भले चेहरे वाली नर्स उसके पास बैठी थी.

"गुड मॉर्निंग.",कामिनी ने उठने की कोशिश की तो नर्स ने उसे मना किया &

फिर लीवर दबा के उसके बेड के उपरी हिस्से को उठा दिया तो कामिनी बैठ

गयी.1 डॉक्टर आया & उसकी सेहत के बारे मे पुच्छ के उसका चेक-अप

किया,"डॉक्टर."

"कोई मेरी जान-पहचान वाला है यहा?"

"हां,मैं 1-1 करके सबको भेजता हू."

"अच्छा लग रहा है?",सबसे पहले चंद्रा साहब आए & उसके सर पे प्यार से हाथ

फेरा & उसका माथा चूमा.कामिनी को बहुत अच्छा लगा उनका एहसास मगर उसी

एहसास ने उसे वीरेन की याद दिला दी,"वीरेन.."

चंद्रा साहब ने बस हा मे सर हिलाया & कामिनी के आँसू बह चले,"इन्हे उसके

लिए ज़ाया मत करो,कामिनी.",वो उनके सीने से लगी रो रही थी पर उनकी बात

सुन वो झटके से उठी,"क्या कह रहे हैं आप?"

"हां,जिसे तुमने दिलोजान से चाहा परसो रात उसी ने तुम्हे मारने की कोशिश की थी."

"क्या?!"

"जी,हां.",क्षोटन चौबे कमरे मे आया.

"आप तो इंदर को बदमाश समझ रही थी ना?",चौबे 1 कुर्सी पे बैठ गया.

"हां & वो था भी,रोमा उसकी बेहन थी &..-"

"..संजय उसका पति.",चौबे ने बात पूरी की,"..इंदर फाइयर ब्रिगेड वालो को

जिंदा मिला था & कल दिन मे उसको थोड़ी देर के लिए होश आया तो अपना बयान

भी दे दिया ऊ."

"क्या बोला वो?"

"कहानी लंबी है,असल मे इंदर,रोमा & संजय मुफ़्त मे मारे गये."

"मतलब इंदर अब ज़िंदा नही है?"

"नही.अब सुनिए पूरा बात.इंदर & रोमा बहुत छ्होटे थे जब दोनो के माता-पिता

का देहांत हुआ.जब इंदर बड़ा हुआ तो 1 दिन उसके हाथ घर का समान ठीक करते

हुए 1 खत लगा.ये खत उसकी मा को कोई लिखा था & खत से साफ-2 पता चलता था की

उसकी मा का आशिक़ है.खत लिखने वाले के नाम के जगह बस स लिखा था.."

"..इंदर & रोमा का रिश्तेदार के नाम पे बस 1 मौसा था तो इंदर चिट्ठी लेके

उसके पास गया तो उसका मौसा उसको बताया कि उसकी मा का इस स से चक्कर था

जिसके कारण उसका बाप ख़ुदकुशी कर लिया था & बाद मे जब उसकी मा इस स से

शादी करने को बोली तो उसको दुतकार दिया.."

"..उसकी मा ये बर्दाश्त नही की & जाके रेल लाइन पे लेट गयी.इंदर ये सुन

के गुस्सा से पागल हो गया & मौसा से स का पूरा नाम पुचछा तो वो बोला की स

सुरेन सहाय था.अब इंदर & रोमा उस से बदला लेने को पागला गये तो उसका मौसा

बोला कि हम तुमलोग का मदद करेंगे.."

"..फिर ये सारा खेल हुआ.सुरेन जी को दवाई बदल के मारा..",कामिनी के चेहरे

पे सवालिया भाव उभरे,"..हां-2 शिवा भी हमलॉग को सब बता दिया है.बहुत

बहादुर आदमी है.ऊ नही होता तो आपका & देविका जी का जान बचना मुश्किल

था.."

"हां तो..मौसा का प्लान था की रोमा के पेट मे प्रसून का बच्चा आ जाएगा तो

प्रसून को मार देंगे फिर सब कुच्छ प्रसून का बच्चा का हो जाएगा.दोनो

भाई-बेहन झाँसे मे आ गये जबकि मौसा का असली प्लान था अपने पार्ट्नर के

साथ मिलके सारा जयदाद हड़प लेना & दोनो भाई बेहन & संजय को मार देना.."

"..पर 2 लोग उसका प्लान चौपट कर दिए.1 तो शिवा जोकि परसो रात आपका बात

नही माना & भला हो उसका एस्टेट आ गया."

"& दूसरा?"

"दूसरा हम.हमको मॅनेजर'स कॉटेज से 1 पॅंट का टुकड़ा मिला था & सारा छनबीन

से यही लगा था कि कोई वीरेन को फँसा रहा है तो हम कुच्छ अपना प्राइवेट

इन्वेस्टिगेशन कर रहे थे.उस रात को आप भी तो वही कर रही थी."

"तो इंदर के क्वॉर्टर मे आप थे?"

"हां & हमको भी वोही सब पता चला जो आपको.दूसरी रात हम बस इंदर का ऊ फटा

पॅंट ऐसी जगह रखने आए थे की अगले सुबह जब हम तलाशी लेने आए तो वो साला

उसे च्छूपा नही पाए.लेकिन ई सारा कांड घट गया."

"इंदर का मौसा कौन था & उसका पार्ट्नर का क्या नाम था?",पार्ट्नर का नाम

तो कामिनी को पता ही था मगर दिल के किसी कोने मे 1 उमीद थी की हो सकता है

चौबे किसी और का नाम ले ले.

"मौसा थे एस्टेट के भुत्पुर्व मॅनेजर शाम लाल जी & उसके पार्ट्नर थे

वीरेन सहाय.",कामिनी को वो जानी पहचानी आवाज़ याद आ गयी-प्रसून की शादी

के वक़्त उसने उनसे बात की थी.वो कुच्छ नही बोली बस उसकी आँखो से आँसू

बहने लगे.

"अच्छा.हम चलते हैं.सब बदमाश तो मर ही गया है जो भी काम बाकी होगा ऊ हम

आपसे मिलके बाद मे कर लेंगे.",चौबे वाहा से निकल गया.

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क्रमशः.
 


बदला पार्ट--49

गतान्क से आगे..

rassi jalne tak kamre ka haal to bilkul hi bura ho chuka tha.aag bhi

darwaze tak pahunch gayi thi & vahan se nikalna ab namumkin tha magar

kamini haar maanane valo me se nai thi.usne palang pe padi chadar

uthayi & use bathroom me le jake pani se pura bhiga ke pane munh pe

lapet liya & kamre ki khidki ke paas gayi jise kholte-2 sanjay vahi

gir gaya tha.khidki me lohe ka grill laga tha & ab kamini ke paas

bachav ke liye chillane ke alva & koi rasta nahi tha.

neeche logo ki bhid jama thi magar sab dekhne chillane ke alawa &

kuchh nahi kar rahe the & tabhi kamre ka darwaza girne ki aavaz

aayi.vo palti to dekha ki 1 kambal lapete 1 aadmi andar girta hua

dakhil hua,"chaliye kamini ji.",ye shiva tha.

"magar shiva,aag bahut tez hai!",shiva ne sath laya kambal kamini ko

odhaya & use pakad ke aag ke beech se daudta hua kamre se bahar

nikla.kamini ne dekha ki pura bungla jal raha raha tha.neeche jana to

namumkin tha kyuki seedhiyo pe bhayankar aag thi.shiva use le upar ki

taraf bhag raha tha chhat pe.kamini ki samajh me kuchh nahi aa raha

tha.chhat pe aa use rahat mehsus mili.dhue se bhare uske fefdo me tazi

hawa gayi & aag ki jhulsahat se use nijaat mili.

vo apni sans sambhal hi rhai thi ki achanak shiva ne sue god me uthaya

& chhat se kud gaya.kamini ki chikh nikal gayi lekin agle hi pal vo 1

bade se jaal pe jhul rahi thi.

"shiva..",hanfte hue usne apne kambal & chadar ko khud se alag

kiya,"..devika ji.."

"main yaha hu.kamini ji.",aavaz sun kamini ghumi to dekha ki kalikh &

pasine se ate chehre vali devika uske peechhe khadi hai.

"devika ji,aapke khilaf bahut badi sazish rachi gayi thi!"

"mujhe pata hai.aap pehle idhar aaiye.",fire brigade,police &

ambulance bungle ke ahate me aa rahi thi.devika shiva ke sath kamini

ko ambulance me le ja rahi thi.

"main thik hu."

"haan,main janti hu.main bhi aapke sath hospital chal rahi hu.check-up

zaruri hai aapka.",teeno ke baithate hi darvaza band hua & siren

bajati ambulance vaha se nikal gayi.ambulance ki khidki se kamini ne

dekha ki police 2 lasho ka muayana kar rahi hai...lekin roma,sanjay &

inder to abhi upar kamre me hi the.abhi aag bujhi bhi nahi thi fir

ye.."shiva ye kaun hain?"

shiva ne devika ko dekha.dono ke chehro pe ajib si uljhan thi,"kya

baat hai?bolte kyu nahi!"

"viren ki &..",aage ki baat sunane se pehle hi kamini behosh ho gayi.

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vo baadlo pe leti thi,kitna sukun tha yaha..har taraf bas thandak &

ujala,aahat hui to usne gardan ghumayi,safed kapdo me viren aur bhi

sajila dikh raha tha.vo muskurayi & apni baahe faila di.viren uski

taraf aa raha tha muskurata hua,uske baal hawa me lehra rahe the.bas

thodi hi der me vo uski baaho me hogi....magar vo paas kyu nahi aa

raha tha.viren chal raha tha magar uske karib nahi aa raha

tha,"..viren..",vo ab dhundhla ho raha tha,"..viren.."vo chikhi magar

vo badlo me gum ho chuka tha,"VIREN!"

aankhe khuli to dekha ki Chandra Sahab uske paas baithe hain & beep-2

ki aavaz aa rahi hai.usne gardan ghuma ke kamre ka jayza liya.vo 1

hospital ke kamre me thi & heart rate monitor beep kar raha

tha.chandra sahab doctor ko bula rahe the.doctor aaya & uski aankhe

dekhi & use 1 injection diya & vo fir nind ke agosh me chali gayi.

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"good morning!",1 bhale chehre vali nurse uske paas baithi thi.

"good morning.",kamini ne uthne ki koshish ki to nurse ne use mana

kiya & fir lever daba ke uske bed ke upari hisse ko utha diya to

kamini baith gayi.1 doctor aaya & uski sehat ke bare me puchh ke uska

check-up kiya,"doctor."

"koi meri jaan-pehchan vala hai yaha?"

"haan,main 1-1 karke sabko bhejta hu."

"achha lag raha hai?",sabse pehle chandra sahab aaye & uske sar pe

pyar se hath fera & uska matha chuma.kamini ko bahut achha laga unka

ehsas magar usi ehsas ne use viren ki yaad dila di,"viren.."

chandra sahab ne bas haa me sar hilaya & kamini ke aansu beh

chale,"inhe uske liye zaya mat karo,kamini.",vo unke seene se lagi ro

rahi thi par unki baat sun vo jhatke se uthi,"kya keh rahe hain aap?"

"haan,jise tumne dilojaan se chaha parso raat usi ne tumhe marne ki

koshih ki thi."

"kya?!"

"ji,haan.",Chhotan Chaubey kamre me aaya.

"aap to Inder ko budmash samajh rahi thi na?",Chaubey 1 kursi pe baith gaya.

"haan & vo tha bhi,Roma uski behan thi &..-"

"..Sanjay uska pati.",chaubey ne baat puri ki,"..inder fire brigade

valo ko jinda mila tha & kal din me usko thodi der ke liye hosh aaya

to apna bayan bhi de diya oo."

"kya bola vo?"

"kahani lumbi hai,asal me inder,roma & sanjay muft me mare gaye."

"matlab inder ab zinda nahi hai?"

"nahi.ab suniye pura baat.inder & roma bahut chhote the jab dono ke

mata-pita ka dehant hua.jab inder bada hua to 1 din uske hath ghar ka

saman thik karte hue 1 khat laga.ye khat uski maa ko koi likha tha &

khat se saaf-2 pata chalta tha ki uski maa ka aashiq hai.khat likhne

vale ke naam ke jagah bas S likha tha.."

"..inder & roma ka rishtedar ke naam pe bas 1 mausa tha to inder

chitthi leke uske paas gaya to uska mausa usko bataya ki uski maa ka

is S se chakkar tha jiske karan uska baap khudkushi kar liya tha &

baad me jab uski maa is S se shadi karne ko boli to usko dutkar

diya.."

"..uski maa ye bardasht nahi ki & jake rail line pe let gayi.inder ye

sun ke gussa se pagal ho gaya & mausa se S ka pura naam puchha to vo

bola ki S Suren Sahay tha.ab inder & roma us se badla lene ko pagla

gaye to uska masua bola ki hum tumlog ka madad karenge.."

"..fir ye sara khel hua.suren ji ko dawai badal ke mara..",kamini ke

chehre pe sawaliya bhav ubhare,"..haan-2 shiva bhi humlog ko sab bata

diya hai.bahut bahadur aadmi hai.oo nahi hopta to aapka & Devika ji ka

jaan bachna mushkil tha.."

"haan to..mausa ka plan tha ki roma ke pet me Prasun ka bachcha aa

jayega to prasun ko maar denge fir sab kuchh prasun ka bachcha ka ho

jayega.dono bhai-behan jhanse me aa gaye jabki mausa ka asali plan tha

apne partner ke sath milke sara jaydad hadap lena & dono bhai behan &

sanjay ko maar dena.."

"..par 2 log uska plan chaupat kar diye.1 to shiva joki parso raat

aapka baat nahi mana & bhala ho uska estate aa gaya."

"& dusra?"

"dusra hum.humko manager's cottage se 1 pant ka tukda mila tha & sara

chhanbeen se yehi laga tha ki koi Viren ko fansa raha hai to hum kuchh

apna private investigation kar rahe the.us raat ko aap bhi to vahi kar

rahi thi."

"to inder ke quarter me aap the?"

"haan & humko bhi vohi sab pata chala jo aapko.dusri raat hum bas

inder ka oo fata pant aisi jagah rakhne aaye the ki agle subah jab hum

talashi lene aaye to vo sala use chhupa nahi paye.lekin ee sara kand

ghat gaya."

"inder ka mausa kaun tha & uska partner ka kya naam tha?",partner ka

naam to kamini ko pata hi tha magar dil ke kisi kone me 1 umeed thi ki

ho sakta hai chaubey kisi aur ka naam le le.

"mausa the estate ke bhutpurva manager Sham Lal ji & uske partner the

Viren Sahay.",kamini ko vo jani pehchani aavaz yaad aa gayi-prasun ki

shadi ke waqt usne unse baat ki thi.vo kuchh nahi boli bas uski aankho

se aansu behne lage.

"achha.hum chalte hain.sab budmash to mar hi gaya hai jo bhi kaam baki

hoga oo hum aapse milke baad me kar lenge.",chaubey vaha se nikal

gaya.

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kramashah.
 
गतान्क से आगे..

"मैं वीरेन का पहला प्यार थी,कामिनी.",देविका उसके बेड पे उसका हाथ थामे

बैठी थी,"..लेकिन जब उसने मुझसे कहा की उसे कारोबार मे कोई दिलचस्पी नही

& वो मेरे साथ पॅरिस जाके पैंटिंग के बारे मे जितना चाहे सीखना चाहता है

तो मुझे ये बात ज़रा भी अच्छी नही लगी.मेरे लिए वीरेन से भी ज़्यादा उसकी

दौलत अहम थी.मैं ऐशोआरम की ज़िंदगी गुज़रना चाहती थी.इधर वीरेन 2 महीनो

के लिए विदेश गया,उसका प्रोग्राम था की वो सब इंतेज़ाम कर के आएगा फिर हम

शादी कर यहा से चले जाएँगे,उधर सुरेन जी मेरे इश्क़ मे पड़ गये.."

"..पहल मैने नही की थी मगर मैने उन्हे रोका भी नही & कुच्छ ही दीनो मे

हमारी शादी हो गयी.वीरेन ने इस बात का कभी मुझसे कोई शिकवा नही किया मगर

उसके अंदर ही अंदर ये लावा उबल रहा था.उसे हमेशा यही लगता रहा कि मैने ना

केवल उसे धोखा दिया बल्कि उसके परिवार को भी उस से अलग किया.."

"..इसी नफ़रत ने उस से ये सब करवाया.",देविका की आँखे नम हो गयी.

"शाम लाल जी भी लालची आदमी थे मगर सुरेन जी 1 बहुत पहुँचे कारोबारी थी &

वो उन्हे धोखा नही दे पा रहे थे.इत्तेफ़ाक़न उनकी & वीरेन की मुलाकात हो

गयी & दोनो ने 1 दूसरे से अपने दिल की बात कह दी & ये सब प्लान

बनाया.",शिवा बात आगे बढ़ा रहा था,"..वो जो इंदर को खत मिला था ना उस खत

वाला स और कोई नही शाम लाल खुद थे.अपनी साली को उन्होने शादी के पहले ही

अपने जाल मे फँसा लिया था & बाद मे जब वो अपने पति की मौत हो जाने के बाद

उनपे शादी के लिए दबाव डालने लगी तो उसे रेल लाइन पे फेंक आए.."

"तुम्हे ये सब कैसे पता?"

"वो मेरे ही हाथो मरा था इसलिए."

"क्या?"

"जी.उस रात वीरेन अपने गुस्से मे पागल देविका को अपने हाथो से मारने के

लिए एस्टेट आ पहुँचा था.इसी ग़लती ने उनका खेल बिगाड़ा.मैने वीरेन की

गाड़ी देखी तो उनके पास जाने लगा मगर जब उन्हे शाम लाल से बात करते सुना

तो मुझे सब समझ आ गया.घर मे आग लगी थी & वीरेन उसमे घुस गया.शाम लाल उसे

रोक रहा था मगर वो गुस्से मे पागल था.मैं भी दोनो के पीछे घुसा & देविका

को निकाल लाया.."

"..उसी हाथापाई मे शाम लाल मेरे हाथो मरा & वीरेन.."

"& वीरेन?",कामिनी के रुँधे गले से बड़ी मुश्किल से 2 लफ्ज़ निकले.इतना

बड़ा धोखा..उसे सब समझ आ गया था-वीरेन ने उसका इस्तेमाल किया था केवल

इसलिए की वो सहाय परिवार की वकील थी.

"मैने देविका को बचाने के लिए उसे परे धकेला तो वो गिर गया & जब मैं बंगल

से बाहर भाग रहा था देविका के साथ तो वो हमारे पीछे थे लेकिन बंगल के

दरवाज़े के पास उसका पैर कही फँसा & वो गिरा & आग की लपटो ने उसे घेर

लिया."

"प्रसून को किसने मारा?"

"सारा प्लान शाम लाल का था.रोमा ने प्रसून को नीचे भेजा & इंदर उसे फुसला

के मॅनेजर'स कॉटेज ले गया & उसका क़त्ल कर दिया.",देविका की सिसकिया कमरे

मे गूँज उठी तो शिवा ने उसे बाहो मे भर लिया.

"मैं प्रसून की शादी के बाद वीरेन के साथ उसके कॉटेज मे रुकी थी & किसी

ने कॉटेज मे झाँका था.लगता है वो इंदर ही था."

"नही कामिनी,वो शाम लाल था."

"आपको कैसे पता देविका जी?"

"क्यूकी रजनी वापस आ गयी है & उसने मुझे सब बताया है."

"रजनी कौन है?"

"मेरी नौकरानी.इंदर ने उसे अपने प्यार के जाल मे फँसाया & फिर हर रात

उसके जिस्म से खेलता.उसी ने उसकी अर्ज़ी भी यहा तक पहुचाई थी & वोही उसे

हमारी बाते भी बताती थी क्यूकी उस बेचारी को क्या पता था कि जिस से वो

शादी के सपने देख रही थी वो दर-असल बस उसका इस्तेमाल कर रहा था.."

"..प्रसून की शादी के वक़्त शाम लाल यही था & उन दीनो रजनी भी यही

थी.रजनी का कहना है कि जब तक वो यहाँ थी हर रात इंदर ने उसी के साथ

गुज़ारी थी तो और कोई बचता ही नही."

सारी बाते सॉफ हो गयी थी सारे राज़ खुल गये थे रह गया था तो सिर्फ़ दर्द

दोनो औरतो के दिलो मे.कामिनी ने देविका की ओर देखा,वो छली गयी थी लेकिन

शिवा था उसके साथ उसका सहारा बनके मगर उसके पास कौन था?..वो तो फिर अकेली

हो गयी थी..1 बार फिर छली गयी थी वो 1 मर्द के हाथो से....& फिर उसकी

निगाह पड़ी कमरे मे दोबारा दाखिल होते हुए चंद्रा साहब पे.जब देविका आई

थी तो वो बाहर चले गये थे.

यही 1 मर्द था जिसने उसे कभी धोखा नही दिया & यही 1 मर्द था जो इस वक़्त

भी उसके साथ खड़ा था.कामिनी के दिल मे फिर से उमीद जाग गयी.वो खुद को

इतना अकेला इतना कमज़ोर क्यू समझ रही थी.क्या कमी थी उसकी ज़िंदगी मे?..1

बुरा इंसान आया तो उसे भी अपने किए की सज़ा मिल गयी & चंद्रा साहब तो थे

ही उसके साथ.हमेशा.

उसने देविका को देखा.शिवा ने उसके कंधे पे हाथ रखा & दोनो उस से विदा ले

रहे थे,"..आप जल्दी से ठीक हो जाइए & मेरी सारी जयदाद को दान करने मे

मेरी मदद कीजिए.",देविका उसका हाथ पकड़े हुए थी.

"फिर आप क्या करेंगी?"

"इस बार वो ग़लती नही दोहराउंगी जो शादी के पहले की थी,कामिनी जी.उपरवाले

ने मुझे दूसरी ज़िंदगी दी है.अब ये ज़िंदगी बस शिवा की बाहो मे गुज़ार

दूँगी."

"बेस्ट ऑफ लक."

"थॅंक्स.",& दोनो प्रेमी बाहर चले गये.

कामिनी ने चंद्रा साहब को देखा & मुस्कुराइ.ज़िंदगी कितनी हसीन थी & वो

जवान.1 बुरा सपना था जो अब बीत चुका था,हक़ीक़त यहा सामने कहदी थी.उसने

अपना हाथ अपने गुरु की ओर बढ़ा दिया & उनके चेहरे पे भी मुस्कान फैल गयी.

दोस्तो कैसी लगी कहानी बताना मत भूलिएगा आपका दोस्त राज शर्मा

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समाप्त

दा एंड
 
बदला पार्ट--50

गतान्क से आगे..

"main viren ka pehla pyar thi,kamini.",devika uske bed pe uska hath

thame baithi thi,"..lekin jab usne mujhse kaha ki use karobar me koi

dilchaspi nahi & vo mere sath Paris jake painting ke bare me jitna

chahe sikhna chahta hai to mujhe ye baat zara bhi achhi nahi lagi.mere

liye viren se bhi zyada uski daulat aham thi.main aishoaram ki zindagi

guzarna chahti thi.idhar viren 2 mahino ke liye videsh gaya,uska

program tha ki vo sab intezam kar ke ayega fir hum shadi kar yaha se

chale jayenge,udhar suren ji mere ishq me pad gaye.."

"..pehal maine nahi ki thi magar maine unhe roka bhi nahi & kuchh hi

dino me humari shadi ho gayi.viren ne is baat ka kabhi mujhse koi

shikva nahi kiya magar uske andar hi anadra ye lava ubal raha tha.use

humesha yehi lagta raha ki maine na keval use dhokha diya balki uske

parivar ko bhi us se alag kiya.."

"..isi nafrat ne us se ye sab karwaya.",devika ki aankhe nam ho gayi.

"sham lal ji bhi lalchi aadmi the magar suren ji 1 bahut pahunche

karobari thi & vo unhe dhokha nahi de pa rahe the.ittefaqan unki &

viren ki mulakat ho gayi & dono ne 1 dusre se apne dil ki baat kah di

& ye sab plan banaya.",shiva baat aage badha raha tha,"..vo jo inder

ko khat mila tha na us khat vala S aur koi nahi sham lal khud the.apni

sali ko unhone shadi ke pehle hi apne jaal me fansa liya tha & baad me

jab vo apne pati ki maut ho jane ke baad unpe shadi ke liye dabav

dalne lagi to use rail line pe fenk aaye.."

"tumhe ye sab kaise pata?"

"vo mere hi hatho mara tha isliye."

"kya?"

"ji.us raat viren apne gusse me pagal devika ko apne hatho se marne ke

liye estate aa pahuncha tha.isi galti ne unka khel bigada.maine viren

ki gadi dekhi to unke paas jane laga magar jab unhe sham lal se baat

karte suna to mujhe sab samajh aa gaya.ghar me aag lagi thi & viren

usme ghus gaya.sham lal use rok raha tha magar vo gusse me pagal

tha.main bhi dono ke peehche ghusa & devika ko nikal laya.."

"..usi hathapai me sham lal mere hatho mara & viren.."

"& viren?",kamini ke rundhe gale se badi mushkil se 2 lafz nikle.itna

bada dhokha..use sab samajh aa gaya tha-viren ne uska istemnal kiya

tha kewal isliye ki vo sahay parivar ki vakil thi.

"maine devika ko bachane ke liye use pare dhakela to vo gir gaya & jab

main bungle se bahar bhag raha tha devika ke sath to vo humare peechhe

the lekin bungle ke darwaze ke paas uska pair kahi fansa & vo gira &

aag ki lapto ne use gher liya."

"prasun ko kisne mara?"

"sara plan sham lal ka tha.roma ne prasun ko neeche bheja & inder use

phusla ke manager's cottage le gaya & uska qatl kar diya.",devika ki

siskiya kamre me gunj uthi to shiva ne use baaho me bhar liya.

"main prasun ki shadi ke baad viren ke sath uske cottage me ruki thi &

kisi ne cottage me jhanka tha.lagta hai vo inder hi tha."

"nahi kamini,vo sham lal tha."

"aapko kaise pata devika ji?"

"kyuki Rajni vapas aa gayi hai & usne mujhe sab bataya hai."

"Rajni kaun hai?"

"meri naukrani.Inder ne use apne pyar ke jaal me fansaya & fir har

raat uske jism se khelta.usi ne uski arzi bhi yaha tak pahuchayi thi &

vohi use humari baate bhi batati thi kyuki us bechari ko kya pata tha

ki jis se vo shadi ke sapne dekh rahi thi vo darasla bas uska istemal

kar raha tha.."

"..prasun ki shadi ke waqt Sham Lal yahi tha & un dino rajni bhi yehi

thi.rajni ka kehna hai ki jab tak vo yahan thi har raat inder ne usi

ke sath guzari thi to aur koi bachta hi nahi."

sari baate saaf ho gayi thi sare raaz khul gaye the reh gaya tha to

sirf dard dono aurato ke dilo me.kamini ne devika ki or dekha,vo

chhali gayi thi lekin Shiva tha uske sath uska sahara banke magar uske

paas kaun tha?..vo to fir akeli ho gayi thi..1 baar fir chhali gayi

thi vo 1 mard ke hatho se....& fir uski nigah padi kamre me dobara

dakhil hote hue Chandra Sahab pe.jab Devika aayi thi to vo bahar chale

gaye the.

yehi 1 mard tha jisne use kabhi dhokha nahi diya & yehi 1 mard tha jo

is waqt bhi uske sath khada tha.kamini ke dil me fir se umeed jag

gayi.vo khud ko itna akela itna kamzor kyu samajh rahi thi.kya kami

thi uski zindagi me?..1 bura insan aaya to use bhi apne kiye ki saza

mil gayi & chandra sahab to the hi uske sath.humesha.

usne devika ko dekha.shiva ne uske kandhe pe hath rakha & dono us se

vida le rahe the,"..aap jaldi se thik ho jaiye & meri sari jaydad ko

daan karne me meri madad kijiye.",devika uska hath pakde hue thi.

"fir aap kya karengi?"

"is baar vo galti nahi dohraungi jo shadi ke pehle ki thi,kamini

ji.uparwale ne mujhe dusri zindagi di hai.ab ye zindagi bas shiva ki

baaho me guzar dungi."

"best of luck."

"thanx.",& dono premi bahar chale gaye.

kamini ne chandra sahab ko dekha & muskurayi.zindagi kitni haseen thi

& vo jawan.1 bura sapna tha jo ab beet chuka tha,haqeeqat yaha samne

kahdi thi.usne apna hath apne guru ki or badha diya & unke chehre pe

bhi muskan fail gayi.

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THE END
 
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