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Guest
मैंने ससुर जी से पूछा- कुछ इंतजाम हुआ?
तो बोले- नहीं, तुम्हारे सिवा किसी को नहीं!
मैं- 'ठीक है, फिर मैं काम निपटा कर आती हूँ।
पापाजी- "ओ॰के॰' कहकर पापाजी ने फोन काट दिया।
जीवन एक कुर्सी पर अपनी टांगों को फैला कर बैठ गया और अपनी जांघ को थपथपाते हुए हम दोनों को अपनी जांघ पर बैठने के लिये बोला। मैं और मोहिनी उसकी जांघ पर बैठ गई और उसके होंठ को बारी बारी से चूसने लगी। हम तीनों एक दूसरे के होंठों का रसपान करने लगे। जीवन बारी बारी से हम दोनों की चूचियों को भी मसल रहा था।
मोहिनी के होंठ चूसते हुए बोला- शर्माना नहीं, बहुत मजा आयेगा।
मोहिनी- 'ठीक है, जैसा आप दोनों करेंगे, मैं भी करूंगी।'
इतना कहना था कि जीवन ने मोहिनी की कुर्ती को उतार दिया, वह जालीदार ब्रा पहने हुये थी।
फिर जीवन ने मेरे भी कमीज को खोल कर अलग किया और फिर बारी-बारी से दोनों की ब्रा भी जिस्म से अलग कर दिया। मोहिनी की चूची वास्तव में काफी टाइट लग रही थी और निप्पल तो काफी बड़ी लग रही थी। मुझे ऐसा लगा कि जीवन या उसके दूसरे दोस्तों ने उसका दूध खूब पिया है। ब्रा उतार कर मोहिनी अपने मम्मों को जीवन के मुंह में डालकर उसे चूसाती रही। इधर मैंने जीवन की पैन्ट उतार कर उसको नंगा कर दिया और उसके लंड को अपने मुंह में भर लिया। मोहिनी अपने मम्मे उसको पिला रही थी, मैं उसका लंड अपने मुंह में लिए हुई थी और उसके अंडों को अपनी हथेली में कैद करके उसकी गांड को उंगली से खुजा रही थी।
मुझे उसका लंड चूसते हुए मोहिनी देखने लगी। मैंने जीवन को थोड़ा सा अपनी ओर खींचा, अब मैं उसकी गांड को भी चाटने लग गई थी और उसके जांघ के आस-पास के हिस्से को भी चाट रही थी। मोहिनी काफी देर तक मुझको देखती रही, जबकि जीवन का हाथ लगातार मोहिनी के चूतड़ को सहला रहा था। फिर मोहिनी ने मुझे हटने का इशारा किया, मैं हट गई और जीवन की तरफ आकर झुक गई।
मोहिनी भी ठीक उसी तरह से जीवन के लंड और गांड से खेल रही थी, जैसा मैं जीवन के साथ कर चुकी थी। मैं अपनी पैन्टी उतार और जीवन की तरफ पीठ करके झुक गई। थोड़ी देर तक वो मेरे मुलायम चूतड़ को सहलाता रहा फिर जीवन की जीभ मेरी चूत और गांड पर चलने लगी। कुछ देर तक तो ऐसा ही चलता रहा, फ़िर जीवन उठा और बिस्तर पर इस तरह लेट गया कि उसके कमर के नीचे का हिस्सा बिस्तर से बाहर था और बाकी बिस्तर के ऊपर था। मोहिनी ने तुरन्त ही लंड का क्षेत्र चुना और मैं मोहिनी की तरफ अपने मुंह को करके जीवन के मुंह के ऊपर बैठ गई। अभी तक मोहिनी ने अपनी पैन्टी नहीं उतारी थी, वो लगातार जीवन के लंड और जांघ को चूस व चाट रही थी। इधर मैं भी उससे अपनी गांड खूब चटवाना चाह रही थी। काफी देर तक मोहिनी उसके लंड से खेलती रही, फिर हम दोनों ने अपना-अपना स्थान बदल लिया, मोहिनी लंड चूसना छोड़ खड़ी हो गई और अपनी पैन्टी उतार दी। उसकी चूत क्या उभरी हुई थी, पुतिया उसकी काफी बड़ी थी और सबसे अहम यह था कि उसके भूरी चूत के ऊपर छोटे-छोटे बाल थे। मोहिनी सीधा जीवन के मुंह के ऊपर आई और अपनी गांड को जीवन के हवाले कर दी। मैं जीवन के लंड पर चढ़ गई और लंड चूत में लेकर उछलने लगी। बारी बारी से हम दोनों लड़कियाँ जीवन के लंड से खेल रही थी।
तभी जीवन बोला- मैं झड़ने वाला हूँ।
मैं उसके लंड पर हट गई, जीवन उठा और मोहिनी के मुंह में लंड पेल दिया। मोहिनी को शायद यह अच्छा नहीं लगा, वो गूं-गूं करने लगी।
जीवन बोला- तुम्हीं ने तो कहा था, आज मेरे मन का करोगी।
लेकिन मोहिनी तैयार नहीं हुई। फिर मैंने जीवन के लंड को अपने मुंह में लिया और जीवन मेरे मुंह को चोदने लगा। जब जीवन का निकलने वाला था, तो उसने मुझे मेरी जीभ बाहर करने को कहा, मैंने अपनी जीभ बाहर निकाल दी।
जीवन लंड को हिलाते हुए अपने वीर्य को धीरे-धीरे मेरे जीभ के ऊपर गिराने लगा। जब दो-चार बूंद मेरी जीभ पर गिर जाती तो वो अपने लंड को दबा देता और जब मैं वीर्य का स्वाद चख लेती तो वो फिर मेरी जीभ में अपना माल गिरा देता। मोहिनी मुझे ये सब करते हुए बड़े ध्यान से देख रही थी,
जीवन उसकी तरफ देखते हुए बोला- देखने से नहीं, इसको मुंह में लो और इसका स्वाद चखो, उसके बाद तुम दोनों की चूत से निकलते हुये मलाई मैं भी चखूंगा।
तो बोले- नहीं, तुम्हारे सिवा किसी को नहीं!
मैं- 'ठीक है, फिर मैं काम निपटा कर आती हूँ।
पापाजी- "ओ॰के॰' कहकर पापाजी ने फोन काट दिया।
जीवन एक कुर्सी पर अपनी टांगों को फैला कर बैठ गया और अपनी जांघ को थपथपाते हुए हम दोनों को अपनी जांघ पर बैठने के लिये बोला। मैं और मोहिनी उसकी जांघ पर बैठ गई और उसके होंठ को बारी बारी से चूसने लगी। हम तीनों एक दूसरे के होंठों का रसपान करने लगे। जीवन बारी बारी से हम दोनों की चूचियों को भी मसल रहा था।
मोहिनी के होंठ चूसते हुए बोला- शर्माना नहीं, बहुत मजा आयेगा।
मोहिनी- 'ठीक है, जैसा आप दोनों करेंगे, मैं भी करूंगी।'
इतना कहना था कि जीवन ने मोहिनी की कुर्ती को उतार दिया, वह जालीदार ब्रा पहने हुये थी।
फिर जीवन ने मेरे भी कमीज को खोल कर अलग किया और फिर बारी-बारी से दोनों की ब्रा भी जिस्म से अलग कर दिया। मोहिनी की चूची वास्तव में काफी टाइट लग रही थी और निप्पल तो काफी बड़ी लग रही थी। मुझे ऐसा लगा कि जीवन या उसके दूसरे दोस्तों ने उसका दूध खूब पिया है। ब्रा उतार कर मोहिनी अपने मम्मों को जीवन के मुंह में डालकर उसे चूसाती रही। इधर मैंने जीवन की पैन्ट उतार कर उसको नंगा कर दिया और उसके लंड को अपने मुंह में भर लिया। मोहिनी अपने मम्मे उसको पिला रही थी, मैं उसका लंड अपने मुंह में लिए हुई थी और उसके अंडों को अपनी हथेली में कैद करके उसकी गांड को उंगली से खुजा रही थी।
मुझे उसका लंड चूसते हुए मोहिनी देखने लगी। मैंने जीवन को थोड़ा सा अपनी ओर खींचा, अब मैं उसकी गांड को भी चाटने लग गई थी और उसके जांघ के आस-पास के हिस्से को भी चाट रही थी। मोहिनी काफी देर तक मुझको देखती रही, जबकि जीवन का हाथ लगातार मोहिनी के चूतड़ को सहला रहा था। फिर मोहिनी ने मुझे हटने का इशारा किया, मैं हट गई और जीवन की तरफ आकर झुक गई।
मोहिनी भी ठीक उसी तरह से जीवन के लंड और गांड से खेल रही थी, जैसा मैं जीवन के साथ कर चुकी थी। मैं अपनी पैन्टी उतार और जीवन की तरफ पीठ करके झुक गई। थोड़ी देर तक वो मेरे मुलायम चूतड़ को सहलाता रहा फिर जीवन की जीभ मेरी चूत और गांड पर चलने लगी। कुछ देर तक तो ऐसा ही चलता रहा, फ़िर जीवन उठा और बिस्तर पर इस तरह लेट गया कि उसके कमर के नीचे का हिस्सा बिस्तर से बाहर था और बाकी बिस्तर के ऊपर था। मोहिनी ने तुरन्त ही लंड का क्षेत्र चुना और मैं मोहिनी की तरफ अपने मुंह को करके जीवन के मुंह के ऊपर बैठ गई। अभी तक मोहिनी ने अपनी पैन्टी नहीं उतारी थी, वो लगातार जीवन के लंड और जांघ को चूस व चाट रही थी। इधर मैं भी उससे अपनी गांड खूब चटवाना चाह रही थी। काफी देर तक मोहिनी उसके लंड से खेलती रही, फिर हम दोनों ने अपना-अपना स्थान बदल लिया, मोहिनी लंड चूसना छोड़ खड़ी हो गई और अपनी पैन्टी उतार दी। उसकी चूत क्या उभरी हुई थी, पुतिया उसकी काफी बड़ी थी और सबसे अहम यह था कि उसके भूरी चूत के ऊपर छोटे-छोटे बाल थे। मोहिनी सीधा जीवन के मुंह के ऊपर आई और अपनी गांड को जीवन के हवाले कर दी। मैं जीवन के लंड पर चढ़ गई और लंड चूत में लेकर उछलने लगी। बारी बारी से हम दोनों लड़कियाँ जीवन के लंड से खेल रही थी।
तभी जीवन बोला- मैं झड़ने वाला हूँ।
मैं उसके लंड पर हट गई, जीवन उठा और मोहिनी के मुंह में लंड पेल दिया। मोहिनी को शायद यह अच्छा नहीं लगा, वो गूं-गूं करने लगी।
जीवन बोला- तुम्हीं ने तो कहा था, आज मेरे मन का करोगी।
लेकिन मोहिनी तैयार नहीं हुई। फिर मैंने जीवन के लंड को अपने मुंह में लिया और जीवन मेरे मुंह को चोदने लगा। जब जीवन का निकलने वाला था, तो उसने मुझे मेरी जीभ बाहर करने को कहा, मैंने अपनी जीभ बाहर निकाल दी।
जीवन लंड को हिलाते हुए अपने वीर्य को धीरे-धीरे मेरे जीभ के ऊपर गिराने लगा। जब दो-चार बूंद मेरी जीभ पर गिर जाती तो वो अपने लंड को दबा देता और जब मैं वीर्य का स्वाद चख लेती तो वो फिर मेरी जीभ में अपना माल गिरा देता। मोहिनी मुझे ये सब करते हुए बड़े ध्यान से देख रही थी,
जीवन उसकी तरफ देखते हुए बोला- देखने से नहीं, इसको मुंह में लो और इसका स्वाद चखो, उसके बाद तुम दोनों की चूत से निकलते हुये मलाई मैं भी चखूंगा।