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Fantasy अनदेखे जीवन का सफ़र

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वीर- ए.सी.पी. सर, ऐसे लोगों के साथ मैं तो यही करता हैं। और हाँ आज के बाद वो गन्हें आपको तंग नहीं करेंगे। मैं आपसे एक और बात कहना चाहता हूँ की मैं इन गुन्डा के साथ जो भी कगा, आपकी पोलिस मेरे काम में दखल नहीं देंगी। आप निशु के पापा हो इसलिए आपका कह रहा हैं। बस आप गुन्डों को जेल में रखने के लिए तैयार रहिए।

ए.सी.पी.- वीर बेटा, कैसी बात करते हो? मैं तुम्हारे साथ हूँ। तुम कुछ भी करो तुम्हें कोई परेशान नहीं करेंगा। मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ की मुझे तुम पे और तुम्हारे दोस्तों पे अटूट विश्वास है।

वीर- थैक्स सर। और हाँ सर, आपको लंच यही करना होगा हमारे साथ।

ए.सी.पी.- जर बेटा।

फिर सब मिलकर लंच करते हैं। और इधर-उधर की बातें करते रहते हैं। लंच करने के बाद ए.सी.पी. और उसकी

बेटी वहां से चल देते हैं।

डैड ; आई प्राउड आफ यू बेटा। ऐसे ही सबकी मदद करते रहना।

वीर- अब तो आप सबके पास पावर्स है। अगर आपको पावर्स मिली है तो इसका मतलब आपको जिम्मेदारियां भी मिली हैं। इससे आपका दिमाग आम इंसानों से 100 गुना तेज चलने लगा है। और मैं चाहता हूँ आप और चाचाजी मिलकर हमारी कोम्पनी को विश्व की नम्बर एक कंपनी बनायें।

डॅड- ठीक है बेटा, मैं और तेरे चाचा पूरी मेहनत करेंगे।

उधर बच्चा यादव को खबर मिल जाता है की उसके आदमी मारे गये, और वो किसी तरह जल से भागने में कामयाब हो जाता है। बच्चा अपने दूसरे आदमियों के पास पहुँच जाता है।

बच्चा- जाओ और पता लगाओं यह किसका काम है?

इधर वीर और बाकी सब अपने-अपने रूम में चले जाते हैं। शाम को वीर फ्रेश होकर बाहर आता है। यहां सब बैठे

गप्प मार रहे थे।

डैड- आ बेटा उठ गया?

वीर- "जी इंड। क्या बात है सब हँस-हँस के लाट-पोट हो रहे हो?"

डैड- कुछ नहीं बेटा जस्सी और निशु की बातें हो रही हैं।

वीर- ओह्ह... हाँ मैं तो भूल ही गया था पट्ठे को तो देखते ही प्यार हो गया।

चाचाजी- वीर बेटा, हम कल यू.एस.ए. जा रहे हैं, एक कोम्पनी से मीटिंग है। अगर वो सफल रही तो हमें बहुत प्राफिट होगा, और जो इस डील से प्राफिट होगा वो हम अनाथ बच्चों के लिए इस्तेमाल करेंगे।

वीर- यह तो बहुत अच्छी बात है। और चाचाजी यह टेंडर हमें ही मिलना चाहिए।

मोम- बेट अभी तो 4:00 बजे हैं, क्यों ना सब बाटर पार्क चलें। बड़ा मन कर रहा है घूमने का।

वीर- चलो मोम डार्लिंग।

डॅड. खोतेया। तेरी माँ है बा।

वीर- "हाहाहाहा... डैड डार्लिंग किस आंगले से माँ दिख रही है वो अब? अब तो वो आपकी बेटी की उमर की है। हाहाहाहा.." वीर की बात में सब हँसने लगते हैं।

डैड- "ऐसा क्या अब देख?"

तभी वीर के डैड के इर्द-गिर्द रोशनी चमकने लगती है, और देखते ही देखते वीर के डैड अपनी जवानी के रूम में

आ जाते हैं। जो हूबहू वीर के जैसे ही दिखते थे।

संज- ओह माई गोड.. डेंड आप तो बिल्कुल वीर के जैसे दिखते हो।

.. बेटा जवानी में में वीर के जैसा ही था। बाप हूँ उसका तो उसी के जैसा ही दिखंगा।

वीर- तो इन रहा हुँड, अब आप इसी रूप में रहेंगे।

डैड ; "क्यों क्या कहती हो जानेमन?" डैड की बात पे सच हँसने लगते हैं। वहीं मोम शर्मा जाती हैं।

प्रीत- अच्छ... मोम तो शर्मा रही हैं।

डैड ; तो चलो बच्चा सब तैयार हो जाओ, बाटरपार्क चलते हैं।

सब तैयार हो निकलते हैं वाटरपार्क की तरफ।

***** *****

 
कड़ी 58

वाटर पार्क पहुँचकर सब टिकेट लेते हैं, और चले जाते हैं कपड़े चेंज करने। थोड़ी देर में सब एक जगह खड़े होते

वीर- ही तो देवियों और सज्जनों खेल शुरू किया जाए।

सब एक साथ- हाँ।

मोम- बैटू तू मेरे साथ रहना।

डैड ; "मुझ में काँटे लगे हैं?" डैड की बात पे सब हँसने लगते हैं।

चाचाजी- भाई साहब यह गलत बात है। आप सब यंग लग रहे हो और यहां हम दोनों मियां बीवी बूटे।

डैड- यार तू भी ना। जाओं दोनों वाशरूम और गेटप चेंज करके आओ।

वीर- "कहीं जाने की जरूरत नहीं, एक मिनट..." और वीर एक चुटकी बजाता है। जिसके चलते पलक झपकते ही चाचा और चाची दोनों यंग हो जाते हैं।

जैना- वाओ... आप दोनो बहुत हाट लग रहे हो।

सच में बहुत हाट जोड़ी है।

परी की बात सुनकर चाची शर्माने लगती है।

वीर- "वाह... चाची जान आप तो शर्मा रहे हो... चलो सब वाटर स्लाइड और राइड का मजा लेते हैं..."

फिर सब ऐसे ही मस्ती मजाक करने लगते हैं।

एक घंटे बाद।

चाची- "रिया कहां है?" चाची की बात पर सब रिया को तलाशने लगते हैं।

तभी वीर आँख बंद करके रिया को तलाशता है। जब रिमा दिखती है तो पहले तो वीर को गुस्सा आने लगता है। हवाएं तेज चलने लगती हैं। बदल गरजने लगते हैं। लेकिन थोड़ी देर बाद है वीर के चेहरे पे स्माइल आ जाती है।

कुछ टाइम पहले हवा यह था की जब सब अपनी-अपनी मस्ती में लगे हुए थे तब तीन आदमी चुपके सं रिया को उठाकर ले जाते हैं। रिया को उठाकर वो बच्चा यादव के अड्डे पे ले जाते हैं। पर रिया तो रिया है। वो सब रिया को बांध देते हैं। पर रिया आसानी से रस्सी से आजाद हो जाती है।

यह देखकर आदमी बोला- "अबे आये ठीक से बांध.."

रिया- मुझे यहां क्यों लाए हो?

आदमी- "ओं छोरी चुपचाप बैठ। तेरे बड़े भाई वीर ने हमारे 4 आदमियों को मारा है। हम बहुत बुरी मौत मारेंगे तेरे भाई को..."

 
रिया ने जैसे ही यह सुना उसे गम्सा आ जाता है, और वो चीखती है- "मेरे भाई को मारोगे। तुम लोगों की इतनी हिम्मत?" इतना बोलकर पिया उस आदमी को आँखों से ही उठाकर दूर फेंक देती है, और बाकी बचे आदमियों को भी आँखों से उठा-उठाकर जमीन पर पटकने लगती है। सबके सब बेहोश हो जाते हैं।

इधर वीर- "चलो रिया के पास चलते हैं." और पलक झपकते ही रिया के पास पहुँच जाते हैं।

चाची भागकर रिया को गले लगा लेती है- "तू ठीक तो है ना मेरी बच्ची."

रिया- मुझे क्या होगा मम्मी? आप बेफिकर रहो।

चाची की नजर आस-पास पड़े बेहोश गुन्डों पर पड़ती है- "यह सब किसने किया?"

वीर- "और किसने इस नटखट ने..."

बिस्वा- बच्चा यादव का किस्सा खतम करो। आज वो हमरी परिवार तक पहुँच गया।

फिर सब वहां से घर की तरफ निकल पड़ते हैं।

बिस्वा और आशीष उन गुन्डों को खतम करके पहुँचते हैं बच्चा यादव के घर। और वहां दोनों मिलकर बच्चा

यादव के सारे गुन्डों और बच्चा को खतम कर देते हैं।

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यह खबर पूरे शहर में फैल जाती है। ए.सी.पी. को भी पता लग जाता है की बच्चा यादव और उसकी पूरी सेना खतम हो गई है। कहीं ना कहीं ए.सी.पी. को पता था की यह काम वीर का ही है, और वो दिल ही दिल में वीर का शुक्रिया अदा करता है।

घर पहुँचकर सब डिनर करते हैं, और अपने-अपने रूम में सोने चले जाते हैं।

अगले दिन सवेरे डैड और चाचाजी को प.एस.ए. जाना था मीटिंग के लिए। इसलिए वो दोनों निकल जाते हैं मीटिंग के लिए।

वीर और टीम फ्रेश होकर नहा धोकर तैयार होकर निकलते हैं कालेज के लिए। कालेज पहुँचकर सब कैंटीन में चले जाते हैं। सब गोल टेबल पर बैठ जाते हैं।

तभी वहां निशु आती है, और सबको हाय बोलती है।

जस्सी हाथ आगे करके हाय बोलता है। दोनों के हाथ एक दूसरे के हाथ में आ जाते हैं। जस्सी एकटक निशु को ही घरे जा रहा था। निशु बैंचारी मारे शर्म के धरती में गड़ी जा रही थी।

वीर- "ओयें चैन कुली की... कुली जात छोड़.."

वीर की आवाज से जस्सी हड़बड़ा जाता है और हाथ छोड़ देता है। तभी वीर का ए.सी.पी. की काल आती है। वीर थोड़ा साइड होकर कल पिक करता है।

वीर- गुड मार्निंग सर। कैसे याद किया?

ए.सी.पी.- गुड मार्निंग वीर। मुझे पता है वीर तुमने ही मारा है उसे और बैंक यू सो मच। बस इतना कहंगा की मेरी बेटी का खयाल रखना।

वीर- "चिंता मत करो सर, आपकी बेटी महफूज रहेगी। आप चिंता ना करे। ओके सर रखता हैं। कभी भी आपको मेरी जरूरत पड़े तो याद कीजियेगा." और फोन कट करके वीर सबके पास आ जाता है।

 
निशु- वीर उस गुन्डे का काम तमाम आपने ही किया है ना?

वीर- ही निश, अब तुम लोगों को डरने की जरूरत नहीं।

निशु- कैसे चुकाऊँगी इतना एहसान?

बार- बस आप हमारे इस जस्सी का ख्याल रखिएगा। दिल का बहुत भोला है।

निश- जी जरूर इसका ख्याल ता में बहुत अच्छे से रखंगी।

हा- "चलो क्लास चलते हैं. फिर सब क्लास चले जाते हैं।

उधर एक जगह कुछ बहुत बड़ा प्लान बन रहा था हमले का। यह कोई और नहीं आधे इंसान और आधे जानवर

थे। जो वीर पर हमला करने वाले थे। पर इन्हें यह नहीं पता था की वीर अब पहले वाला वीर नहीं रहा।

***** *****

 
कड़ी_59

क्लास खतम करके वीर और बाकी सब कैंटीन में बैठ जाते हैं। तभी वहां प्रिसिपल आता है।

प्रिंसिपल- वीर बेटा तुमसे कुछ बात करनी थी। इफ यू डॉट माइंड क्या तुम मेरे आफिस चलोगे?

वीर- "क्यों नहीं सर चलिए. और वीर प्रिन्सिपल के साथ प्रिसिपल के आफिस चला जाता है।

प्रिसिपल- बैठो वीर।

वीर- जी कहिए सर, कैसे याद किया?

प्रिसिपल- बेटा बात यह है की अगले हफ्ते से अपने कालेज में स्पोर्टस कम्पिटीशन शुरू हो रहा है। हमारा कालेज स्टडी में बहुत आगे हैं। मैंने तुम्हारी और तुम्हारे दोस्तों के सर्टिफिकेट देखे हैं। तुम सभी स्पोर्टस में बहुत अच्छे हो, और प्रिसिपल होने के नाते मैं चाहता है की इस बार यह कंपिटीशन हमारा कालेज जीते।

वीर- "ठीक है सर। आप गेम्स की लिस्ट बनवा दीजिए हम देखते हैं की क्या कर सकते हैं। ओके सर, चलता हूँ लिस्ट तैयार करवाकर भेज दीजिए। मैं कैंटीन में ही बैठा हूँ.." और वीर वहां से कैंटीन में जा रहा था की अचानक एक लड़की से टकरा जाता है।

लड़की बिना कुछ सोचे समझे वीर को थप्पड़ झाड़ देती है।

इस बात का पता अलीजा, प्रीत, संज, विश, सबको लग जाता है। जिसके चलते वो लड़कियां गुस्से से आग उगलने लगती हैं। चारों तेजी से वीर की तरफ आती हैं, और सीधा आकर उस लड़की के चेहरा पे थप्पड़ों की बरसात कर देती है। यह इतनी जल्दी हुआ की कोई कुछ समझ नहीं पाया।

वीर जल्दी से चारों को शांत करता है।

अलीजा- इस लड़की की इतनी हिम्मत की यह आप पर हाथ उठाए। जान ले लूंगी इसकी।

प्रीत- ये लड़की चली जा यहां से, वरना आज मेरे हाथों कोई अपराध हो जाएगा।

उस लड़की की तो हालत खराब हो रखी थी, बोली- "तुम्हें तो मैं अभी बताती हैं। यहीं इंतजार करो... इतना बोलकर वो लड़की किसी को फोन करती है, और सब बता देती है।

लड़की- "रुको... अभी दिखाती हैं तुम लोगों ने किससे पंगा लिया है..."

लड़की की बात में सब ही जा रहे थे।

लड़की- तुम पागल हो गये हो जो हसे जा रहे हो।

जस्सी- ओहह... मैडम जिसको आपने फोन किया है ना वो फटतू हमारा कुछ नहीं उखाड़ सकता।

तभी वहां अज्जू और उसके चमचे आते हैं। अज्जू बोला- "क्या हुआ डालिंग?"

लड़की- डालिंग, इन लड़कियों में मुझे थप्पड़ मारे।

अज्जू जैसे ही उन लड़कियों और वीर को देखता है, तो अज्जू की फट के हाथ में आ जाती है।

माहित- क्यों अज्जू, तू यहां क्या करने आया है?

अज्जू. "कुछ नहीं भाई, मैं तो बस ऐसे ही आया था। जा रहा है. इतना बोलकर अज्जू वहां से निकल जाता है।

और वो लड़की अज्जू को आवाज देती रहती है।

 
लड़की- "एक मिनट रुको। अभी के अभी तुम लोगों को कालेज में निकलवाती हैं..." और इतना बोलकर वो निसिपल के आफिस चली जाती है, और निसिपल के साथ बाहर आती है, और कहती है- "यही हैं .ड। इन लड़कियों में मुझे थप्पड़ मारे.."

अच्छा तो यह वो है। जिसकी न्यूड पिक्स वीर के साथ अज्जू में बनाई थी।

प्रिसिपल- क्या हुआ वीर बेटा यह नीलम क्या कह रही है?

वीर- "सर, हवा यह की... फिर वीर सर को सब बता देता है।

जिसे सुनकर प्रिंसिपल नीलम को बहुत डॉटता है, और फिर नीलम को उसकी करतूत भी बताता है जो अज्जू ने उसकी पिक्स के साथ की थी। जिसे सुनकर नीलम की आँखों में आँसू आ जाते हैं।

नीलम सबके सामने हाथ जोड़कर- "मुझे माफ कर दीजिए। मुझे नहीं पता था की अज्जू ने ऐसा किया। और मैंने अपने घमंड में आकर आपको थप्पड़ मार दिया.."

वीर- इट्स ओके। नीलम गलती सबसे होती है। आपके डैड की बहुत इज्ज़त है। उस अज्जू से दूर रहें।

नीलम- आप सही कहते हैं। क्या हम सब दोस्त बन सकते हैं?

संज- आके नीलम।

फिर सब एक दूसरे से हाथ मिलाते हैं, और वापिस आकर कैंटीन में आकर बैठ जाते हैं।

उधर नरभक्षी वीर पर हमले की तैयारी कर चुके थे। क्योंकी वीर का घर शहर से बाहर था और उसके पीछे जंगल था, जिसके चलते उन जर भक्षियों को हमला करना आसान था।

नरभक्षियों का बास- "आज उस जिन्न के राजा को दिखा देना है की हम किसी से कम नहीं। उन्हें भी पता चलना चाहिए की नरभक्षी क्या है?"

नरभक्षी- सरकार हमले की तैयारी पूरी हो चुकी है। बस आपकी आज्ञा चाहिए।

बास- सबर कर शिंद, हमला आज रात को करेंगे।

इधर मोहित- "नीलम, तुम कहां से आई हो? मेरा मतलब तुम्हें देखा नहीं यहां पहले...'

नीलम. मैं यू.एस.ए. में थी। आज सुबह ही यहां पहुंची हैं, ईंड को सरप्राइज देने।

जस्सी - और तुम खुद सरप्राइज हो गई।

जीलम- आज की की गई गलती से में बहुत शर्मिंदा हैं। लेकिन एक बात समझ में नहीं आई की तुम चारों लड़कियां इतना गुस्सा क्यों हो गई थी?

संजू- क्योंकी हम चारों में से तीन वीर की वाइफ हैं।

 
नीलम का इतना ही सुनना था की नीलम का मुँह खुला का खुला रह जाता है- "क्या? तीन बीवियां...'

प्रीत- हाँ। मैं और संजू तो आलरेडी इनकी वाइफ हैं, और अलीजा थोड़े दिनों में बन जाएगी।

नीलम- वीर आप सिर्फ स्टूडेंट हो या कुछ और भी?

विशु- आपने सिंह कोम्पनी का नाम सुना है?

नीलम- हाँ, जो वरूई की जम्का एक कोम्पनी है।

विशु- और वा कोम्पनी वीर की है।

नीलम यह सुनकर तो चकित हो जाती है- "ओह माई गोड... आई काट बिलीवे की मैं इतने बड़े बिज़नेस टाइकून के सामने बैठी हैं। मैं आपकी बहुत बड़ी फैन हैं."

माहित- मेरा पत्ता कट गया।

नीलम- सारी... कुछ कहा आपने?

मोहित- "यहीं की वीर के रहतं आप मुझे घास भी नहीं डालेंगी." और मोहित की बात पे सब हँस देते हैं।

नीलम- क्या बात है पहली मुलाकात में ही फ्लर्ट शुगा बुरा नहीं है। तुम भी कुछ कम नहीं हो।

माहित- सच्ची... इसका मतलब मेरा कुछ चान्स है?

नीलम- साचेंगे?

तभी वहां अज्जू आता है, और कहता है- "डालिंग तुम यहां हो, मैंने तुम्हें कहां-कहां नहीं ढूँदा.."

नीलम- अज्जू यहां आना।

अज्जू नीलम के पास आता है।

"चटावकक..."

नीलम- तेरी इतनी हिम्मत की तूने मेरी इमेज के साथ इतना गंदा काम किया।

अज्जू- "मेरे पे हाथ उठाया। तेरी तो... इतना बोलकर अज्जू नीलम को मारने ही वाला था की तभी मोहित आगे आकर अज्जू का हाथ पकड़ लेता है।

मोहित- ऐसी गलती मत कर बैठना।

अज्जू- मोहित भाई आप साइड हो जाओ। यह हम दोनों बायफ्रेंड-गर्लफ्रेंड का मामला है।

मोहित- "नीलम अब हम में से एक है। और हम सब दोस्त कम परिवार ज्यादा हैं। अगर हमारी परिवार में कोई हाथ उठाए, तो हम उसे छोड़ते नहीं.." और इतना बोलकर मोहित अन्जू का हाथ दबा देता है, तो कड़ाक की आवाज के साथ अज्जू के हाथ की हडियां टूट जाती हैं, और वो दर्द से चिल्लाने लगता है।

नीलम तो एकटक मोहित को ही देखें जा रही थी। उसे आज तक इतना केयरिंग और प्यार करने वाले दोस्त नहीं मिले थे।

अज्जू- मुझे माफ कर दो प्लीज... मेरा हाथ छोड़ा।

माहित अज्जू का हाथ छोड़ देता है, और अज्जू फौरन वहां से भाग जाता है।

वीर- ओये खाते दे पुत्तर ओहदा हाथ तोड़न दी को लोरह सी।
 
मोहित- बस भाई गुम्सा आ गया था।

तभी अलाजा वीर के कान में कुछ कहती है जिसे सुनकर वीर बोला- "गाइस लेट्स मूव। इस अजेंट.."

वीर में इतना ही बोला था की सभी के सभी तेजी से पाकिंग में जाते हैं और गाड़ी में बैठकर निकलते हैं घर की

और। नीलम और निशु वहां खड़ी बस उन्हें जातं देखती रहती हैं चकित होकर।

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इधर वीर और पार्टी तेजी से घर पहुँचते हैं। घर पहुँचते ही वीर घर को शील्ड से कवर कर देता है।

दादाजी- क्या हवा बेटा, घर को शील्ड में क्यों कवर कर रहे हो?

वीर- कुछ नहीं दादाजी। घर पे हमला होने वाला है रात को। सोचा घर को कवर कर दूं।

दादाजी- कोई बात नहीं बेटा। अब तो मैं भी ताकतवर हैं। मिलकर उनका सामना करेंगे।

वीर- "दादाजी, ऐसी बात नहीं है। उनका सामना तो अब मैं अकेला भी कर सकता हैं। मैंने तो शील्ड इसलिए लगाई है ताकी वो इस घर में एक किलोमीटर दूर रहें। अगर वो घर तक आते हैं तो आस-पास के लोगों को पता चल जाएगा।

मोम- हौं वीर ठीक कह रहा है।

अलीजा- वो रात को ही हमला करेंगे। हमारे पास बहुत समय है।

बिस्वा- जहां से वो हमला करेंगे वहां मैंने पहले ही गाईस लगा दिए हैं, जिससे हमें उनके आने का पता चल जाएगा।

उधर कालेज में नीलम- "इनको सबको क्या हवा? यह सब कहां भाग गये सबके सब?"

निशु- मुझे नहीं मालूम।

तभी वहां चपरासी आता है- "नीलम बेटा, वीर कहां गया? यह लिस्ट देनी थी उसे.."

नीलम- "काका वीर तो चला गया। आप ऐसा कीजिए की यह लिस्ट हमें दे दीजिए। हम उन्हें दे देंगे.."

नीलम चपरासी से लिस्ट ले लेती है, और कहती है- "चल निशु वीर के घर चलते हैं। तुझे उसका घर पता है कहां है?"

निश- ही पता है, चल।

दोनों गाड़ी में बैठकर निकलती हैं वीर के घर की तरफ। नीलम और निशु वीर के बंगले के पास पहुँचकर जब नीलम वीर का बंगला देखती है तो उसकी आँखें बड़ी हो जाती हैं।

नीलम- ओह माई गोड... क्या बंगला है। ऐसा बंगला दुनियां में कही नहीं होगा। यहां इतने बाडीगाई किसलिए?

निशु- बड़ा आदमी है तो दुश्मन भी तो होंगे। चल अंदर चलते हैं।

गेट के पास गाड़ी रोक के नीलम वाच मैन को दरवाजा खोलने के लिए बोलती है।

वाचमैन- "रुको मेम... फिर वो वाचमैन माइंड टु माइंड वीर को दरवाजा खोलने के लिए पूछता है।

वीर देखता है की नीलम और निशु बाहर हैं तो वीर अंदर आने की परमिशन दे देता है।

जैसे-जैसे नीलम अंदर आ रही थी वैसे-वैसे उसकी आँखें बड़ी होती जा रही थी। मुख्य दरवाजे के पास पहुँचकर दोनों गाड़ी से उत्तरती हैं। और एक गाई आकर गाड़ी की चाभी लेता है। दोनों बंगले के अंदर एंटर करती हैं। वीर में पहले ही सबको समझा दिया था की नीलम और निशु आ रही है। इसलिए वीर की मोम और चाची पहले वाले रूप में आ जाती हैं।
 
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