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वीर- हाँ क्यों नहीं। बिस्वा, इन्हें हार्ड से हार्ड ट्रेनिंग करवाओ।
अज्जू- क्या भाई। फिर तो हम ऐसे ही ठीक थे।
वीर- पगले, अगर अब दुख झेलेगा तो आगे जाकर तुझे ही आसानी होगी। दो दिन में तुझे सब सीखना होगा। हम लोगों के पास दो दिन ही बचे हैं।
रूही- ठीक है वीर जी। हम तैयार हैं।
वीर- “ठीक है जाओ..."
आशीष और बिस्वा वीर के कहे उनसार चारों जिन्न-लोक चले जाते हैं।
तभी वीर के पास रिया और लारा आती हैं
वीर- कैसी हो मेरी गुड़िया?
दोनों- हम ठीक हैं। हमें चाकलेट चाहिए।
वीर- अच्छा आपकी चाकलेट चाहिए। जाओ एक काम करो संजू से ले लो जाकर।
दोनों वहां से चल देती हैं।
वीर वहां से निकलकर अपने रूम में आ जाता है। वीर रूम में आकर तांत्रिक के बारे में सोचने लगता है की उसे कैसे मारा जाए? ऐसा नहीं था की वीर उससे कम ताकतवर था। लेकिन तांत्रिक को बल से नहीं दिमाग से मारा जा सकता था। और वीर उसी के बारे में सोच रहा था।
बस एक आखिरी जंग फिर यह दुनियां खुशहाल जिंदगी जिएगी। वीर सोचता-सोचता सो जाता है। शाम को उसकी आँख नन्ही ड्रैगन्स की उछल कूद से खुलती है। जो वीर के ऊपर मस्ती कर रही थी।
वीर- अरे मेरा बच्चा, आज मेरे पास कैसे?
बेबी ड्रैगन- “आप तो मुझसे खेलते ही नहीं। फिर मैंने सोचा चलो आज मैं ही आपसे थोड़ी मस्ती कर लूं..."
वीर को ड्रैगन्स बेबी पर बहुत प्यार आता है और वो उसे गले लगा लेता है, और कहता है- “बस मेरे बच्चे 3 दिन इंतेजार करो। फिर मैं हमेश तुमसे खेलूंगा..”
ड्रैगन्स बेबी- “क्या इस बार मैं जंग में हिस्सा ले सकती हँ..."
वीर- नहीं बेटा अभी तुम छोटे हो। तुम रिया और लारा के साथ रहो। उनकी मदद के लिए।
ड्रैगन्स बेबी- ठीक है।
फिर हम रूम से बाहर आ गये। ऐसे ही दो दिन निकल गये। तीसरा दिन- आज फैसले का दिन था। मैं भी जिन्न-लोक पहुँच गया था। मैं जहाँ पे सारी सेना इकट्ठी थी, वहाँ पे चला गया।
मैं- मेरे साथियों, तुम लोग तैयार हो ना? आज हमारी आखिरी लड़ाई होगी। आज की लड़ाई फैसला करेगी की दुनियां में अच्छाई की ताकत का राज होगा या बुराई की। तो आज हम सबको डट के मुकाबला करना होगा। क्या आप लोग मेरे साथ हो?
सभी- हाँ हम सब आपके साथ हैं। \
फिर हम सब लोग जिन्न-लोक की सीमा की ओर चल पड़े। हम लोग जल्दी ही पहुँच गये। कुछ देर बाद काला धुंआ उड़ता हुआ हमारे सामने आ खड़ा हुआ कुछ दूरी पे। कुछ देर बाद अंधेरे में से तांत्रिक निकलकर बाहर आ गया।
तांत्रिक- “हाहाहाहा... आज मैं अपना राज्य कायम कर रहा हूँ। तुम सबकी बलि देकर हाहाहाहा... अपने शैतान पिता को खुश करूँगा हाहाहाहा.."
वीर- ख्वाब देखना छोड़ दे तांत्रिक, नहीं तो पछतायेगा। यहीं मिट्टी में मिल जाएगा।
तांत्रिक- “यह तो वक्त ही बताएगा। चलो शुरू करते है तुम्हारी बलि हाहाहाहा.."
वीर- यह घमंड बहुतों के ले डूबा। आज से तेरी भी गिनती उन्हीं में से होगी।
ऐसा नहीं था की तांत्रिक वीर से ज्यादा ताकतवर था। पर तांत्रिक कोई कम नहीं था। उसके पास आत्माएं थीं, जिन्हें उसने आजाद करवाया था। यह आत्माएं काफी पुरानी और ताकतवर थी।
फिर युद्ध की शुरुवात का बिगुल बजा।
तांत्रिक की तरफ से काला धुंआ उड़कर हमारी ओर आने लगा। वीर ने सेना को आगे बढ़ने का आदेश दिया। सैनिक कुछ आगे गये। धुंए में घुसते ही उनके टुकड़े होने लगे। वीर ने सेना को रोक लिया। फिर ड्रैगन को आदेश दिया।
वीर- आकाश अपने पंखों से हवा चलाओ, और उसे दूर करो।
अज्जू- क्या भाई। फिर तो हम ऐसे ही ठीक थे।
वीर- पगले, अगर अब दुख झेलेगा तो आगे जाकर तुझे ही आसानी होगी। दो दिन में तुझे सब सीखना होगा। हम लोगों के पास दो दिन ही बचे हैं।
रूही- ठीक है वीर जी। हम तैयार हैं।
वीर- “ठीक है जाओ..."
आशीष और बिस्वा वीर के कहे उनसार चारों जिन्न-लोक चले जाते हैं।
तभी वीर के पास रिया और लारा आती हैं
वीर- कैसी हो मेरी गुड़िया?
दोनों- हम ठीक हैं। हमें चाकलेट चाहिए।
वीर- अच्छा आपकी चाकलेट चाहिए। जाओ एक काम करो संजू से ले लो जाकर।
दोनों वहां से चल देती हैं।
वीर वहां से निकलकर अपने रूम में आ जाता है। वीर रूम में आकर तांत्रिक के बारे में सोचने लगता है की उसे कैसे मारा जाए? ऐसा नहीं था की वीर उससे कम ताकतवर था। लेकिन तांत्रिक को बल से नहीं दिमाग से मारा जा सकता था। और वीर उसी के बारे में सोच रहा था।
बस एक आखिरी जंग फिर यह दुनियां खुशहाल जिंदगी जिएगी। वीर सोचता-सोचता सो जाता है। शाम को उसकी आँख नन्ही ड्रैगन्स की उछल कूद से खुलती है। जो वीर के ऊपर मस्ती कर रही थी।
वीर- अरे मेरा बच्चा, आज मेरे पास कैसे?
बेबी ड्रैगन- “आप तो मुझसे खेलते ही नहीं। फिर मैंने सोचा चलो आज मैं ही आपसे थोड़ी मस्ती कर लूं..."
वीर को ड्रैगन्स बेबी पर बहुत प्यार आता है और वो उसे गले लगा लेता है, और कहता है- “बस मेरे बच्चे 3 दिन इंतेजार करो। फिर मैं हमेश तुमसे खेलूंगा..”
ड्रैगन्स बेबी- “क्या इस बार मैं जंग में हिस्सा ले सकती हँ..."
वीर- नहीं बेटा अभी तुम छोटे हो। तुम रिया और लारा के साथ रहो। उनकी मदद के लिए।
ड्रैगन्स बेबी- ठीक है।
फिर हम रूम से बाहर आ गये। ऐसे ही दो दिन निकल गये। तीसरा दिन- आज फैसले का दिन था। मैं भी जिन्न-लोक पहुँच गया था। मैं जहाँ पे सारी सेना इकट्ठी थी, वहाँ पे चला गया।
मैं- मेरे साथियों, तुम लोग तैयार हो ना? आज हमारी आखिरी लड़ाई होगी। आज की लड़ाई फैसला करेगी की दुनियां में अच्छाई की ताकत का राज होगा या बुराई की। तो आज हम सबको डट के मुकाबला करना होगा। क्या आप लोग मेरे साथ हो?
सभी- हाँ हम सब आपके साथ हैं। \
फिर हम सब लोग जिन्न-लोक की सीमा की ओर चल पड़े। हम लोग जल्दी ही पहुँच गये। कुछ देर बाद काला धुंआ उड़ता हुआ हमारे सामने आ खड़ा हुआ कुछ दूरी पे। कुछ देर बाद अंधेरे में से तांत्रिक निकलकर बाहर आ गया।
तांत्रिक- “हाहाहाहा... आज मैं अपना राज्य कायम कर रहा हूँ। तुम सबकी बलि देकर हाहाहाहा... अपने शैतान पिता को खुश करूँगा हाहाहाहा.."
वीर- ख्वाब देखना छोड़ दे तांत्रिक, नहीं तो पछतायेगा। यहीं मिट्टी में मिल जाएगा।
तांत्रिक- “यह तो वक्त ही बताएगा। चलो शुरू करते है तुम्हारी बलि हाहाहाहा.."
वीर- यह घमंड बहुतों के ले डूबा। आज से तेरी भी गिनती उन्हीं में से होगी।
ऐसा नहीं था की तांत्रिक वीर से ज्यादा ताकतवर था। पर तांत्रिक कोई कम नहीं था। उसके पास आत्माएं थीं, जिन्हें उसने आजाद करवाया था। यह आत्माएं काफी पुरानी और ताकतवर थी।
फिर युद्ध की शुरुवात का बिगुल बजा।
तांत्रिक की तरफ से काला धुंआ उड़कर हमारी ओर आने लगा। वीर ने सेना को आगे बढ़ने का आदेश दिया। सैनिक कुछ आगे गये। धुंए में घुसते ही उनके टुकड़े होने लगे। वीर ने सेना को रोक लिया। फिर ड्रैगन को आदेश दिया।
वीर- आकाश अपने पंखों से हवा चलाओ, और उसे दूर करो।