• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Fantasy बॉलीवुड की मस्त सेक्सी कहानियाँ

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
करीब दस मिनट तक वैसे ही पड़े रहने के बाद मैं धीरे से साक्षी के बदन से नीचे उतर गया. मेरा लण्ड ढीला हो कर पुच्च से साक्षी की चूत से बाहर निकल गया. मैं एकदम थक गया था और वही उनके बगल में लेट गया. साक्षी ने अभी भी अपनी आंखे बंद कर रखी थी. मैं भी अपनी आँखे बंद कर के लेट गया और पता नहीं कब नींद आ गई. सुबह अभी नींद में ही था की लगा जैसे मेरी नाक को साक्षी की चूत की खुसबू का अहसास हुआ. एक रात में मैं चूत के चटोरे में बदल चूका अपने आप मेरी जुबान बाहर निकली चाटने के लिए…ये क्या…मेरी जुबान पर गीलापन महसूस हुआ.

URL]


मैं ने जल्दी से आंखे खोली तो देखा साक्षी अपने पेटिकोट को कमर तक ऊँचा किये मेरे मुंह के ऊपर बैठी हुई थी और हँस रही थी. साक्षी की चूत का रस मेरे होंठो और नाक ऊपर लगा हुआ था. हर रोज सपना देखता था की साक्षी मुझे सुबह-सुबह ऐसे जगा रही है. झटके के साथ लण्ड खड़ा हो गया और पूरा मुंह खोल साक्षी की चूत को मुंह भरता हुआ जोर से काटते हुए चूसने लगा. उनके मुंह से चीखे और सिसकारियां निकलने लगी.

उसी समय सुबह सुबह पहले साक्षी को एक बार फिर चोदा और चोद कर उनको ठंडा करके बिस्तर से नीचे उतर बाथरूम चला गया. फ्रेश होकर बाहर निकला तो साक्षी उठ कर रसोई में जा चुकी थी. रविवार का दिन था मुझे भी कही जाना नहीं था. मौसी साक्षी ने उस दिन लाल रंग की टाइट समीज और काले रंग की चुस्त सलवार पहन रखी थी. नाश्ता करते समय पैर फैला कर बैठी तो मैं उसकी टाइट सलवार से उसके मोटे गुदाज जांघो और मस्तानी चुचियों को देखता चौंक गया.

दोनों फैली हुई जांघो के बीच मुझे कुछ गोरा सा, उजला सफ़ेद सा चमकता आया नज़र आया. मैंने जब ध्यान पूर्वक देखा तो पाया की साक्षी की सलवार उनके जांघो के बीच से फटी हुई. मेरी आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा. मैं सोचने लगा की साक्षी तो इतनी बेढब नहीं है की फटी सलवार पहने, फिर क्या बात हो गई.

तभी साक्षी अपनी जांघो पर हाथ रखते अपने फटी सलवार के बीच ऊँगली चलाती बोली “क्या देख रहा है बे….साले…..अभी तक शान्ती नहीं मिली क्या….घूरता ही रहेगा….रात में और सुबह में भी पूरा खोल कर तो दिखाया था….”

मैं थोड़ा सा झेंपता हुआ बोला “नहीं साक्षी वो…वो आपकी…सलवार बीच से…फटी…”

साक्षी ने तभी ऊँगली दाल फटी सलवार को फैलाया और मुस्कुराती हुई बोली “तेरे लिए ही फाड़ा है….दिन भर तरसता रहेगा…सोचा बीच-बीच में दिखा दूंगी तुझे…”

मैं हसने लगा और आगे बढ़ साक्षी को गले से लगा कर बोला “हाय…साक्षी तुम कितनी अच्छी हो….ओह…तुम से अच्छा और सुन्दर कोई नहीं है….ओह साक्षी….मैं सच में तुम्हारे प्यार में पागल हो जाऊंगा…” कहते हुए साक्षी के गाल को चूम उनकी चूची को हलके से दबाया.

साक्षी ने भी मुझे बाँहों में भर लिया और अपने तपते होंठो के रस का स्वाद मुझे दिया. उस दिन फिर दिन भर हम दोनों मौसी बेटा दिन भर आपस में खेलते रहे और आनंद उठाते रहे. साक्षी ने मुझे दिन में दुबारा चोदने तो नहीं दिया मगर रसोई में खाना बनाते समय अपनी चूत चटवाई और दोपहर में भी मेरे ऊपर लेट कर चूत चटवाया और लण्ड चूसा.

टेलिविज़न देखते समय भी हम दोनों एक दुसरे के अंगो से खेलते रहे. कभी मैं उनकी चूची दबा देता कभी वो मेरा लण्ड खींच कर मरोड़ देती. मुझे कभी मादरचोद कह कर पुकारती कभी बहनचोद कह कर. इसी तरह रात होने पर हमने टेलिविज़न देखते हुए खाना खाया और फिर वो रसोई में बर्तन आदि साफ़ करने चली गई और मैं टीवी देखता रहा थोड़ी देर बाद वो आई और कमरे के अन्दर घुस गई. मैं बाहर ही बैठा रहा.

तभी उन्होंने पुकारा “राजू वहां बैठ कर क्या कर रहा है…बेटा आ जा….आज से तेरा बिस्तर यही लगा देती हूँ….”

मैं तो इसी इन्तेज़ार में पता नहीं कब से बैठा हुआ था. कूद कर साक्षी के कमरे में पहुंचा तो देखा साक्षी ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठ कर मेकअप कर रही थी और फिर परफ्यूम निकाल कर अपने पूरे बदन पर लगाया और आईने में अपने आप को देखने लगी. मैं साक्षी के चुतड़ों को देखता सोचता रहा की काश मुझे एक बार इनकी गांड का स्वाद चखने को मिल जाता तो बस मजा आ जाता. मेरा मन अब थोड़ा ज्यादा बहकने लगा था. ऊँगली पकड़ कर गर्दन तक पहुचना चाहता था.

साक्षी मेरी तरफ घूम कर मुझे देखती मुस्कुराते हुए बिस्तर पर आ कर बैठ गई. वो बहुत खूबसूरत लग रही थी. बिस्तर पर तकिये के सहारे लेट कर अपनी बाँहों को फैलाते हुए मुझे प्यार से बुलाया.

URL]


मैं कूद कर बिस्तर पर चढ़ गया और साक्षी को बाँहों में भर उनके होंठो का चुम्बन लेने लगा. तभी लाइट चली गई और कमरे में पूरा अँधेरा फ़ैल गया. मैं और साक्षी दोनों हसने लगे. फिर उन्होंने ने कहा “हाय राजू….ये तो एक दम टाइम पर लाइट चली गई…मैंने भी दिन में नहीं चुदवाया था की….रात में आराम से मजा लुंगी….चल एक काम कर अँधेरे में बूर चाट सकता है….देखू तो सही…..तू मेरी चूत की सुगंघ को पहचानता है या नहीं….सलवार नहीं खोलना ठीक है….”

URL]


इतना सुनते ही मैं होंठो को छोड़ नीचे की तरफ लपका उनके दोनों पैरों को फैला कर सूंघते हुए उनकी फटी सलवार के पास उनके चूत के पास पहुँच गया. सलवार के फटे हुए भाग को फैला कर चूत पर मुंह लगा कर लफर-लफर चाटने लगा.

थोड़ी देर चाटने पर ही साक्षी एक दम सिसयाने लगी और मेरे सर को अपनी चूत पर दबाते हुए चिल्लाने लगी ” हाय राजू….बूर चाटू…..राजा….हाय सच में तू तो कमाल कर रहा है….एक दम एक्सपर्ट हो गया है….अँधेरे में भी सूंघ लिया….सीईईईइ बहनचोद….साला बहुत उस्ताद हो गया….है…..सीईईई मेरे राजा…..सीईईईइ” मैं पूरी चूत को अपने मुंह में भरने के चक्कर में सलवार की म्यानी को और फाड़ दिया, यहाँ तक तक की साक्षी की गांड तक म्यानी फट चुकी थी और मैं चूत पर जीभ चलाते हुए बीच-बीच में उनकी गांड को भी चाट रहा था और उसकी खाई में भी जीभ चला रहा था.
 
मैं समझ गया की अब जब साक्षी से कुछ छुपा ही नहीं है तो शर्माना कैसा अपनी जीभ को करा कर के उनकी गांड की भूरी छेद में डाल कर नचाते हुए चाटने लगा. गांड को छेद को अपने अंगूठे से पकड़ फैलाते हुए मस्ती में चाटने लगा. साक्षी अपनी गांड को पूरा हवा में उठा कर मेरे जीभ पर नचा रही थी और मैं गांड को अपनी जीभ डाल कर चोदते हुए पूरी खाई में ऊपर से नीचे तक जीभ चला रहा था. साक्षी की गांड का स्वाद भी एक दम नशीला लग रहा था. कसी हुई गांड के अन्दर तक जीभ डालने के लिए पूरा जीभ सीधा खड़ा कर के गांड को पूरा फैला कर पेल कर जीभ नचा रहा था.

URL]


सक सक गांड के अन्दर जीभ आ जा रही थी. थूक से गांड की छेद पूरी गीली हो गई थी और आसानी से मेरी जीभ को अपने अन्दर खींच रही थी. गांड चटवाते हुए साक्षी एक दम गर्म हो गई थी और सिसकते हुए बोली “हाय राजा…अब गांड चाटना छोड़ो….हाय राजा….मैं बहुत गरम हो चुकी हूँ…..हाय मुझे तुने….मस्त कर दिया है…हाय अब अपनी रसवंती साक्षी का रस चूसना छोड़ और…….उसकी चूत में अपना मुस्लंड लौड़ा डाल कर चोद और उसका रस निकाल दे…..हाय सनम….मेरे राजा….चोद दे अपनी साक्षी मौसी को अब मत तड़पा….”

URL]


साक्षी की तड़प देख मैंने अपना मुंह उनकी गांड पर से हटाया और बोला ” हाय साक्षी जब आपने राज शर्मा स्टॉरीज पढ़ी थी तो…आपने पढ़ा तो होगा ही की….कैसे गांड….में…हाय मेरा मतलब है की एक बार साक्षी….अपनी गांड….”

URL]


साक्षी इस एक दम से तड़प कर पलटी और मेरे गालो पर चिकोटी काटती हुई बोली “हाय हरामी….साला…..तू जितना दीखता है उतना सीधा है नहीं….सीईईईइ….मादरचोद ….मैं सब समझती हूँ….तू साला गांड के पीछे पड़ा हुआ है…..कुत्ते मेरी गांड मारने के चक्कर में तू….साले…यहाँ मेरी चूत में आग लगी हुई है और तू….हाय….नहीं बेटा मेरी गांड एक दम कुंवारी है और आज तक मैंने इसमें ऊँगली भी नहीं डाली है….हाय राजू तेरा लौड़ा बहुत मोटा है….गांड छोड़ कर चूत मार ले…मैंने तुझे गांड चाटने दिया….गांड का पूरा मजा ले लिया अब रहने दे….”

URL]


मैं साक्षी की विनती करने लगा. “हाय साक्षी प्लीज़….बस एक बार…किताब में लिखा है कितना भी मोटा…..हो चला जाता है…हाय प्लीज़ बस एक बार…बहुत मजा…आता है…मैंने सुना है….प्लीज़….” मैं साक्षी के पैर को चूम रहा था, चूतड़ को चूम रहा था, कभी हाथ को चूम रहा था. साक्षी से मैं भीख मांगने के अंदाज में विनती करने लगा.

URL]


कुछ देर तक सोचने के बाद साक्षी ” बोली ठीक है बेटा तू कर ले….मगर मेरी एक शर्त है….पहले अपने थूक से मेरी गांड को पूरा चिकना कर दे….या फिर थोड़ा सा मख्खन का टुकड़ा ले आ मेरी गांड में डाल कर एक दम चिकना कर दे फिर….अपना लण्ड डालना…डालने के पहले…. लण्ड को भी चिकना कर लेना….हाँ एक और बात तेरा पानी मैं अपनी चूत में ही लुंगी खबरदार जो…. तुने अपना पानी कही और गिराया….गांड मारने के बाद चूत के अन्दर डाल कर गिराना….नहीं तो फिर कभी तुझे चूत नहीं दूंगी… और याद रख मैं इस काम में तेरी कोई मदद नहीं करने वाली मैं कुर्सी पकड़ कर खड़ी हो जाउंगी…..बस….”
 
मैं राजी हो गया और तुंरत भागता हुआ रसोई से फ्रीज खोल मख्खन के दो तीन टुकड़े ले कर आ गया. साक्षी तब तक सोफे वाली चेयर के ऊपर दो तकिया रख कर अपनी आधे धर को उस पर टिका कर गांड को हवा में लहरा रही थी.

URL]


मैं जल्दी से उनके पीछे पहुँच कर उनके चुतड़ों को फैला कर मख्खन के टुकड़ो को एक-एक कर उनकी गांड में ठेलने लगा. गांड की गर्मी पा कर मख्खन पिघलता जा रहा था और उनकी गांड में घुस कर घुलता जा रहा था. मैंने धीरे धीरे कर के सारे टुकड़े डाल दिए फिर नीचे झुक कर गांड को बाहर से चाटने लगा. पूरी गांड को थूक से लथपथ कर देने के बाद मैंने अपने लण्ड पर भी ढेर सारा थूक लगाया और फिर दोनों चुतड़ों को दोनों हाथ से फैला कर लण्ड को गांड की छेद पर लगा कर कमर से हल्का सा जोर लगाया.

URL]


गांड इतनी चिकनी हो चुकी थी और छेद इतनी टाइट थी की लण्ड फिसल कर चुतड़ों पर लग गया. मैंने दो तीन बार और कोशिश की मगर हर बार ऐसा ही हुआ.

साक्षी इस पर बोली “देखा बेटा मैं कहती थी न की एक दम टाइट है….कुत्ते….मेरी बात नहीं मान रहा था…किताब में लिखी हर बात…..सच नहीं….हाय तू तो….बेकार में….उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ कुछ होने वाला नहीं….दर्द भी होगा…..हाय…..चूत में पेल ले….ऐसा मत कर….”

मगर मैं कुछ नहीं बोला और कोशिश करता रहा. थोड़ी देर में साक्षी ने खुद से दया करते हुए अपने दोनों हाथो से अपने चुतड़ों को पकड़ कर खींचते हुए गांड के छेद को अंगूठा लगा कर फैला दिया और बोली “ले मादरचोद अपने मन की आरजू पूरी कर ले….साला हाथ धो के पीछे पड़ा है….ले अब घुसा….लण्ड का सुपाड़ा ठीक से छेद पर लगा कर उसके बाद….धक्का मार…धीरे धीरे मारना…हरामी….जोर से मारा तो गांड टेढा कर के लण्ड तोड़ दूंगी…..”

मैंने साक्षी के फैले हुए गांड के छेद पर लण्ड के सुपाड़े को रखा और गांड तक का जोर लगा कर धक्का मारा. इस बार पक से मेरे लण्ड का सुपाड़ा जा कर साक्षी की गांड में घुस गया. गांड की छेद फ़ैल गई. सुपाड़ा जब घुस गया तो फिर बाकी काम आसान था क्योंकि सबसे मोटा तो सुपाड़ा ही था. पर सुपाड़ा घुसते ही साक्षी की गांड परपराने लगी.

वो एक दम से चिल्ला उठी और गांड खींचने लगी. मैंने साक्षी की कमर को जोर से पकड़ लिया और थोड़ा और जोर लगा कर एक और धक्का मार दिया. लण्ड आधा के करीब घुस गया क्योंकि गांड तो एक दम चिकनी हो रखी थी.

URL]


पर साक्षी को शायद दर्द बर्दाश्त नहीं हुआ चिल्लाते हुए बोली “हरामी….कुत्ते…कहती थी….मत कर…

मादरचोद ….पीछे पड़ा हुआ था…..साले….हरामी….छोड़….. हाय…मेरी गांड फट गई…उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़….सीईईईई….अब और मत डालना….हरामी….तेरी माँ को चोदु…..मत डाल….. हाय निकल ले…निकल ले बेटा….गांड मत मार….हाय चूत मार ले….हाय साक्षी की गांड फाड़ कर क्या मिलेगा….सीईईईईइ…आईईईईईइ……..मररररर….गईइइइ …..”

URL]


साक्षी के ऐसे चिल्लाने पर मेरी गांड भी फट गई और मैं डर रुक गया और साक्षी की पीठ और गर्दन को चूमने लगा और हाथ आगे बढा कर उनकी दोनों लटकती हुई चुचियों को दबाने लगा.
 
Back
Top