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और ठीक उसके कुच्छ मिनिट बाद हॉल पंकज की आआअहह से गूँज गया
और सिमरन का मूँह उसके वीर्य से भर गया.


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सिमरन अभी हार नही मान रही थी और उसने लंड को जब तक नही छोड़ा जब तक कि उसके लंड से आख़िरी बूँद ना निकल गयी हो. और फाइनली सिमरन खड़ी हो जाती है, पंकज के चेहरे पर सॅटिस्फॅक्षन के भाव थे.

पंकज -" आज तुमने मुझे वो गिफ्ट दिया है जो आज तक मुझे अपनी आधी लाइफ मे नही मिला. आइ आम सो हॅपी". और सिमरन के लिप्स को किस करने के लिए आगे बढ़ता है. लेकिन सिमरन उसके छूट कर पीछे भाग जाती है. अपना दुपट्टा उठाती है और उपर वाले फ्लोर की तरफ भागने लगती है.

पंकज -" स्वीटी अभी काम पूरा नही हुआ.".

सिमरन -" मे जितना आपके लिए कर सकती थी मेने कर दिया इसके आगे कुच्छ नही". और उसे चुटकी बजा कर उंगली दिखाती है. और फिर वो उपर भाग जाती है. आराधना अपने रूम मे जाग चुकी थी. जैसे ही आराधना सिमरन को देखती है उसके होश उड़ जाते है.

आराधना -" तू और यहाँ, और ये कैसे कपड़े पहन रखे है तूने".

सिमरन-" क्यू ये भी अच्छे नही है क्या. तूने ही तो कहा था कि पूरे कपड़े पहन कर मेरे घर आया कर सो पूरे कपड़े पहन कर ही आई हू".

आराधना -" चल छोड़ इन बातो को, और सुना क्या हो रहा है".

सिमरन -" कुच्छ नही मे उपर आ रही थी तो तेरे डॅडी ने ये पोलिबॅग दिया और कहा कि ये मे आराधना के लिए लाया हू". सिमरन ने उसे वो पोलिबॅग दिया जिसे वो अपने घर से लाई थी.

आराधना -" ओह माइ गॉड, डॅडी मेरे लिए गिफ्ट लाए है, दिखा तो ज़रा". वो छीन लेती है पोलिबॅग सिमरन के हाथ से. उस बॅग को खोल कर देखती है, उसमे एक ब्लू कलर की ट्रॅन्स्परेंट साड़ी, एक स्लीवेलेस्स ब्लाउस, एक ब्लॅक ब्रा आंड एक ब्लॅक पैंटी थी. आराधना शॉक्ड मे थी कि क्या उसके डॅडी ही लाए है ये उसके लिए. वो भाग कर रेलिंग पे जाती है और आवाज़ लगा कर डॅडी से पूछती है कि डॅडी क्या जो आराधना ने मुझे दिया वो आप ही लाए है. पंकज के साथ ये डील पहले ही सिमरन कर चुकी थी. तो पंकज भी हाँ हाँ जवाब दे देता है. और आराधना भाग कर वापिस अपने रूम मे आ जाती है. वो आज बहुत हॅपी थी. ब्रा उठाती है और उसमे साइज़ देखती है 36सी.

आराधना -" लेकिन डॅडी को कैसे पता चला कि मेरा साइज़ क्या है".

सिमरन- " यार इस साइज़ मे बड़ी बात क्या है, तीन तीन बच्चे पैदा कर दिए उन्होने स्मृति आंटी के साथ खेलते खेलते. आइडिया तो रहता ही है फादर्स को."

आराधना -" तो तेरे फादर को भी पता है कि तेरा साइज़ क्या है"

सिमरन -" मेरी जान तू सवाल बहुत करती है. हाँ मेरे फादर को भी मेरा साइज़ पता है, यहाँ तक कि मेरी पैंटी का भी." सिमरन उसके गालो पे चिकोटी काट के बोलती है.

सिमरन -" चल अब देर मत कर, अंकल ने बोला है कि आराधना से बोलो कि वो इन कपड़ो को पहन कर मुझे दिखाए".

आराधना -" सच मे डॅडी ने ऐसे बोला है".

सिमरन -" तुझे यकीन नही है तो पुच्छ ले". इस बार आराधना पुच्छने नही जाती है, और भाग कर बाथरूम मे उन कपड़ो को लेकर घुस जाती है. करीबन 10 मिनिट तक वो अंदर ही कपड़े पहनती रहती है.


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फिर उसकी आवाज़ आती है.

आराधना-" यार सिमरन, कपड़े तो अच्छे है लेकिन साड़ी कुच्छ ज़्यादा ही ट्रॅन्स्परेंट है, ब्लाउस कुच्छ ज़्यादा ही टाइट है".

सिमरन -" मेरी जान तूने कभी साड़ी और ब्लाउस नही पहना है ना तो तुझे ऐसा लग रहा है.
ब्लाउस पहन कर एक बार अंगड़ाई लेगी ना तो सब अड्जस्ट हो जाएग."

आराधना -" तू सच कह रही है ना".

सिमरन -" अब जल्दी बाहर आ जा, मे झूठ नही बोल रही हू". 10 मिनिट के बाद आराधना बाहर आ जाती है और खुद सिमरन उसे देख कर शॉक्ड रह जाती है. ब्लू कलर की ट्रॅन्स्परेंट साड़ी,


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स्लीवेलेस्स ब्लाउस वो भी इतना टाइट, पेटिकोट भी फिटिंग का था. ब्लाउस के अंदर से बूब्स जैसे बाहर आने को तैयार थे, इतना टाइट था वो. पेटिकोट की लेंग्थ कम थी तो एक दम लो वेस्ट आ रहा था, जिससे कि आराधना की नाभि क्लियर विज़िबल थी. सिमरन को खुद भी आशा नही थी कि वो इतनी सेक्सी लगेगी.

सिमरन -" ओये मे मर जावां. क्या कयामत लग रही है. अंकल ने सही कपड़े चुने अपनी जवान और सेक्सी बेटी के लिए".

आराधना -" तू फिर शुरू हो गयी, चल अब नीचे चल डॅडी के पास".

सिमरन -" मेरी जान रुक तो सही, अभी थोड़ा मेक अप तो कर दू तेरा." सिमरन उसके बाल खोल देती है, उसके लिप्स पर सेक्सी लिपस्टिक लगाती है, गोरे हाथों मे चूड़ीयाँ देती है पहन ने के लिए. और उसके बाद दोनो नीचे आने लगते है.

आराधना -" यार मुझे ब्लाउस बहुत टाइट लग रहा है". नीचे उतरते हुए आराधना सिमरन के कानो मे कहती है.

सिमरन -" एक अंगड़ाई लेगी सब सही हो जाएगा". और दोनो नीचे आ जाते है. " देखो डॅडी मे कैसी लग रही हू". आराधना अपने डॅडी से पूछती है, पंकज ये देख कर सोफे से आश्चर्यचकित होकर खड़ा हो जाता है.

सिमरन -" अंकल देख लीजिए अपनी बच्ची...... को". सिमरन पीछे खड़े होकर एक आँख मारते हुए पंकज से कहती है. बच्ची शब्द पे आज सिमरन ने कुच्छ ज़्यादा ही ज़ोर दिया क्यूंकी उसे भी पता था कि आज आराधना बेहद गदराई हुई बॉडी वाली लड़की लग रही है.


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पंकज का मूँह खुला का खुला रह गया. आराधना उसके सामने एक चुटकी बजाती है

आराधना -" डॅडी, डॅडी...

पंकज -" ये... ये... यस बेटा". पंकज होश मे वापिस आता है.

आराधना -" बताइए तो मे कैसी लग रही हू?". इससे पहले कि पंकज कुच्छ जवाब देता, आराधना को ब्लाउस मे कुच्छ प्राब्लम लगती है और वो इशारे मे सिमरन से पूछती है कि क्या करू. सिमरन उसे इशारे मे बताती है कि एक छोटी सी अंगड़ाई ले.

वो अपनी गोरी गोरी बाँहे उपर करके एक अंगड़ाई लेती है, उसकी बिना बालो वाली गोरी गोरी अंडरआर्म्स पंकज के सामने थी. उसके अंगड़ाई लेते ही कटक कटक की दो आवाज़े आती है और ब्लाउस के बटन बाहर.

सोचो दोस्तो ये क्या हो गया.....आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
 
सिचुयेशन ऐसी है कि आराधना के ठीक सामने उसके डॅडी यानी पंकज खड़ा है और आराधना के ठीक पीछे सिमरन खड़ी है. ब्लाउस के बटन टूटने से आराधना के बूब्स बस ब्लॅक ब्रा मे रह जाते है.

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एक जवान लड़की जो अपने गले से नीचे भी कभी किसी को नही देखने देती, एक जवान लड़की जो पूरी कोशिश करती है कि फुल स्लीव कपड़े पहने, एक जवान लड़की जिसने अपने हुस्न को सब की नज़रो से बचा कर रखा हुआ था, आज वो ओपन हो गया वो भी अपने डॅडी के सामने. साड़ी का पल्लू अभी भी उपर था लेकिन ब्लाउस खुल चुका था, ब्लॅक ब्रा मे उसके वाइट हार्ड बूब्स बेहद ही ज़्यादा खूबसूरत दिख रहे थे. उसके बटन टूटने से हॉल मे एकदम सन्नाटा हो जाता है जैसे पिन ड्रॉप साइलेन्स. बड़ी मुश्किल से और शरमाते हुए आराधना अपने दोनो हाथ अपने बूब्स पे रख कर उन्हे कवर करती है पंकज का मूँह खुला का खुला रह गया. उसको ज़रा सा भी आइडिया नही था कि मासूम सी कपड़ो मे धकि रहने वाली काली एक सेक्स बॉम्ब बन चुकी है.

आराधना को कुच्छ समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे, वो शरम के मारे ज़मीन मे गढ़े जा रही थी. दूसरी तरफ उसने राहत की साँस भी ली क्यूंकी ब्लाउस कुच्छ ज़्यादा ही टाइट था. उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसे आज आज़ादी मिल गयी हो.

जैसे ही सब होश मे आते है, आराधना घूम जाती है और उसकी पीठ अब पंकज की तरफ है


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आंड फेस सिमरन की तरफ. पंकज को अब उसके ब्लाउस की बस स्ट्रिप नज़र आ रही है
और उसकी नंगी पीठ. उसका पेटिकोट उसके हिप्स से बस थोड़ा ही उपर बँधा हुआ था
तो उसके ब्लाउस और पेटिकोट मे बीच की खाली नंगी जगह का पंकज दीदार बखूबी कर रहा था
. जैसे ही आराधना घूमती है, वो इशारे मे सिमरन से पूछती है कि वो क्या करे.
सिमरन उसे इशारा करती है कि सिचुयेशन सही नही है और तू उपर भाग जा.
आराधना शरमा के उपर जाने लगती है, वो ज़्यादा तेज नही चल सकती है
क्यूंकी उसे ये डर है कि कहीं पेटिकोट मे भी कुच्छ ना हो जाए.
पंकज की निगाहे बस उसके मटकते हुए चुतडो पर ही जमी हुई है,

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जाते जाते आराधना पीछे मुड़कर देखती है और पंकज को अपने चुतडो को घूरते हुए पाती है.
लेकिन पंकज मस्त है और उसे अहसास नही है कि उसकी जवान बेटी उसको देख रही है.
थोड़ी ही देर मे उपर अपने रूम मे पहुँच जाती है. सिमरन इस सन्नाटे को तोड़ती है.

सिमरन -" उन्ह, उन्ह" वो जैसे गले मे खराश हो ऐसा रिएक्ट करती है. इससे पंकज का ध्यान वापिस सिमरन की ओर आता है.

पंकज -" काफ़ी अच्छी लग रही थी". पंकज ने ऐसा रिएक्ट किया जैसे सब नॉर्मल है

सिमरन-" इसे अच्छी नही, डॅम सेक्सी कहते है अंकल. अब भी आप कहोगे कि वो बच्ची है. उसकी बॉडी मे अब कुच्छ ऐसा नही जो बच्चो की मे होता है."

पंकज -" वो तो तुम सही कह रही हो लेकिन अभी भी मेरा ध्यान तुम्हारी ही तरफ है". ये कहते हुए पंकज सिमरन की तरफ बढ़ने लगता है, सिमरन उसे अंगूठा दिखाते हुए घर से बाहर भाग जाती है. पंकज का हैडेक बहुत बढ़ चुका है, उसे कुच्छ समझ नही आ रहा है.
आराधना उपर अपने रूम मे पहुँचती है और अंदर आते ही अपना गेट लॉक करती है. वो अपने साड़ी के पल्लू को अपने कंधे से हटा कर नीचे गिराती है, अपने हॉट आंड सेक्सी बूब्स का क्लीवेज़ देख कर वो खुद सन्न है. मिरर मे अपने आप को देखते हुए वो शरमा रही है. मिरर मे देखते देखते हुए अपना ब्लाउस उतारती है, अभी नीचे सारी और पेटिकोट ही था लेकिन उपर बस ब्रा.

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वो धीरे धीरे साड़ी को खोलना शुरू करती है. इसके बाद वो पेटिकोट की निट खोलने के लिए अपने हाथ नीचे ले जाती है,
अपनी नाभि पर अपने हाथ लगने से ही वो मदहोश सी हो रही है.
पेटिकोट की नाट खोलने के बाद भी उसे नीचे उतारने मे बहुत मेहनत लगी
वो भी हिप्स पर से, पेटिकोट ऐसे उतर रहा था जैसे कोई फिटिंग की जीन्स हो.
अब आराधना बस पैंटी और ब्रा मे है.
आज पहली बार ऐसा हुआ है कि बाथरूम से बाहर आराधना ब्रा और पैंटी मे है.
वो घूम घूम कर अपने आप को मिरर मे देख रही है,
साइड पोज़ मे अपने बाहर निकले स्लॉपी हिप्स को देखती है.
उसके चेहरे से मुस्कान जाने का नाम नही ले रही है.

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लेकिन सिमरन अपने मकसद मे कामयाब हो चुकी थी
वो बस पंकज को असली आराधना दिखाना चाहती थी
बल्कि वो आराधना नही जो कपड़ो मे धकि रहती है.
पंकज पागलो की तरह खोया हुआ है, सिमरन उसकी अंतर आत्मा को भड़का चुकी थी,
वो अभी भी बॉक्सर शॉर्ट मे ही था उसके उपर टी-शर्ट पहन लेता है.
सोफे पे बैठ कर वो सोचने लगता है कि कैसे सिमरन उसकी तरफ बढ़ी थी
और उसकी सकिंग करनी स्टार्ट कर दी थी. ये सोचते ही उसके अंग अंग मे एनर्जी आ गयी,
लंड सूपर हार्ड हो गया और उसके शॉर्ट मे से बाहर निकलने को तैयार हो रहा था.

आदमी की भूख जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे वैसे बढ़ती जाती है. वो भी इस सोच मे पड़ गया था कि ये क्या हो रहा है लाइफ मे, स्मृति उसको कुच्छ करने नही देती है और वो है कि चूत के बिना नही रहा जा रहा है. थोड़ा स्ट्रेस को मिटाने के लिए सोफे पे पड़ा सिगरेट बॉक्स उठाता है और एक सिगेरेट सुलगा लेता है. स्मोकिंग करते करते और धुँआ हवा मे उड़ाते उड़ाते उसे फिर से सिमरन का ख्याल आता है. " क्यू ना आराधना से सिमरन का मोबाइल नंबर लिया जाए" पंकज के माइंड मे ये ख्याल आता है. और उसके कदम उपर की तरफ बढ़ने लगते है.

उपर पहुँच कर वो आराधना के रूम का डोर नॉक करता है.
आराधना रूम के अंदर ये सोचती है
कि शायद प्रीति आई होगी और टवल लपेट कर गेट खोलती है.


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सामने उसके डॅडी खड़े थे, शॉर्ट और टी-शर्ट पहने हुए.
स्मोकिंग करने के अंदाज़ से ही लग रहा था कि वो काफ़ी टेन्स है,
लेकिन फिर भी वो एक सेक्सी पर्सनॅलिटी का मालिक था दोनो की नज़रे मिलती है,
पंकज पहले बार अपनी जवान बेटी के नंगे शोल्डर्स,
और नंगी टांगे देखता है क्यूंकी टवल बस उसको थाइस तक कवर कर रहा था.

बिना कुच्छ बोले आराधना घूमती है और धीरे धीरे रूम के अंदर जाने लगती है,
जैसे पंकज को अपने पीछे इन्वाइट कर रही हो.
उसके सिल्की हेर उसके हिप्स तक आ रहे थे,
उन्ही को देखता देखता पंकज उसके रूम मे एंटर हो जाता है.
चलते चलते आराधना पीछे देखती है
और पंकज की तरफ एक स्माइल देती है.
थोड़ा आगे बढ़ कर आराधना बेड के कोने पे बैठ जाती है,
उसके बहुत ही करीब पंकज बेत जाता है.

आराधना( नज़रे झुकाए हुए और शरमाते हुए). - " तो कैसी लगी आज मे आपको". उसकी आवाज़ मे कंपन थी.

पंकज -" मुझे सच मे पता नही था कि मेरी बेटी इतनी बड़ी हो चुकी है." पंकज ने एक झटके मे बोल दिया.

आराधना- "धात". शरमाते हुए एक हाथ अपने डॅड के पाँव पे मारती है. आराधना फिर से बोलती है.

आराधना -" लेकिन अचानक ये सर्प्राइज़ कैसे दिया और इसमे सिमरन को क्यू शामिल किया."

पंकज -" ऐसे ही बेटी, आज तक मेने अपने बच्ची को कभी कोई गिफ्ट नही दिया तो सोचा अब की बार दे दू.". ये बात पंकज ने बहुत रोमॅंटिक अंदाज़ मे सिगेरेट का कश लेते हुई कही, और सारा स्मोक ठीक आराधना के चेहरे पर गया. स्मोकिंग से इतनी नफ़रत करने वाली आराधना आज इस स्मोक से भी नही घबराई बल्कि पंकज के इस मर्दाना स्टाइल से वो थोड़ी और इंप्रेस सी लगी. स्ट्रेट हेअर, डार्क लिपस्टिक और बॉडी पे बस टवल, आराधना आज कुच्छ अलग ही बिजली गिरा रही थी.

आराधना -" मुझे आपका गिफ्ट बड़ा पसंद आया लेकिन आपको मेरे बारे मे इतना कैसे पता चला." आराधना ने शरमाते हुए कहा.

पंकज -" तुम्हारे बारे मे क्या पता चला".

आराधना -"यही कि कैसे कपड़े मुझे फिट आएँगे".

पंकज -"मे समझ नही पा रहा कि क्या बोलना चाहती हो".

आराधना -" आपको मेरा साइज़ कैसे पता चला". आराधना ने क्लियर शब्दो मे पंकज की आँखो मे आँखे डालते हुए कहा.

पंकज - " साइज़ कौन सा साइज़". पंकज ने अंजान बनते हुए कहा.

आराधना -" डॅडी यू आर सो नॉटी, आपको सब पता है मे कौन से साइज़ की बात कर रही हू".

पंकज -" नही मुझे सच मे नही पता". पंकज ने भी अंजान बनते हुए कहा.

आराधना -" आप बताते है या नही". आराधना ने उसे फिंगर दिखाते हुए कहा.

पंकज -" मे बताऊ क्या जब मुझे पता ही नही कि तुम कौन से साइज़ की बात कर रही हो". तभी आराधना गुस्से मे खड़ी होती है और बेड से थोड़ा डिस्टेन्स बनाती है, टवल पे दोनो हाथ लगाती है और एक झटके से...... उसे खोल देती है.

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आराधना -" ये साइज़ कैसे पता चले?"आराधना का इशारा अपनी ब्रा से बाहर आते हुए बूब्स की तरफ था. पंकज का मूँह खुला का खुला रह गया, आराधना ने उसे अपना टवल ओपन करके अपनी बॉडी ब्रा और पैंटी मे दिखा दी. पंकज को तो जैसे काटो तो खून नही. बाहर निकले हुए बूब्स, सपाट पेट, गहरी नाभि, चिकनी टांगे- जितनी भी तारीफ की जाए उतनी कम है. आराधना ये सब दिखाने के बाद टवल को वापिस लपेट लेती है. पंकज वापिस होश मे आते हुए -

पंकज - "तुम्हारा साइज़ तो कोई भी देख कर ही पता कर ले". पंकज ने फिर से रोमॅंटिक अंदाज़ मे सिगेरेट के कश लगाते हुए कहा.
 
आराधना -" लेकिन पापा मे तो हमेशा पूरे कपड़े पहन के रहती हू फिर कैसे आपने मेरा..." आराधना ने नज़रे झुका कर शरमाते हुए पुछा. पंकज रूम के चारी तरफ नज़रे फेलाता है जैसे वो कुच्छ ढूंड रहा हो. तभी उसे एक छोटा खरबूजा दिखाई देता है वॉर्डरोब के साइड मे, स्मृति ने आराधना को खाने के लिए दिया था. पंकज उसे उठाता है और उसे बेड पर रखता है, और एक बारीक सी चादर उठा कर उसके उपर डाल देता है.

पंकज-" देखो इस खरबूजे को क्या ये ढक गया". आराधना इस बात का मतलब समझते ही शरम से लाल हो जाती है और धात कह कर बाथरूम मे भाग जाती है.

पंकज -" आराधना इतनी जल्दी क्या है, फ्रेश बाद मे हो जाना".

आराधना-" आज आप बहुत नॉटी मूड मे है, हम बाद मे बात करेंगे". आराधना ने बाथरूम के अंदर से ही कहा.
पंकज -" अरे, यू आर सो स्वीट गर्ल. लगता है मेरे खरबूजे वाले मज़ाक से तुम बुरा मान गयी हो".

आराधना -" बुरा नही बल्कि आपने मुझे अच्छे तरीके से सच्चाई बता दी है, मुझे ही ग़लत लगता था कि पूरे कपड़े पहन ने से ......" आराधना बीच मे ही चुप हो जाती है

पंकज -" पूरे कपड़े पहन से क्या"

आराधना -" कुच्छ नही, आप जाओ यहाँ से". आराधना ने शरमाते हुए कहा

पंकज -"डोंट अफ्रेड ऑफ मी माइ डियर. आइ आम युवर डॅड आंड युवर बेस्ट फ्रेंड. बताओ मुझे कि पूरे कपड़े पहन से क्या?"

आराधना -" आपको पता तो है कि मे क्या कहना चाह रही हू".

पंकज -" मुझे नही पता सच मे"

आराधना -" मुझे लगता था कि पूरे कपड़े पहनने से मेरी बॉडी का कोई आइडिया नही लगा सकता लेकिन मे ग़लत थी. आपको तो मेरे बारे मे सब कुच्छ और सही सही पता है".

पंकज -" हा हा हा हा. चलो देर आए दुरुस्त आए. अब तो तुम्हे यंग लड़कियो की तरह कपड़े पहनने चाहिए आँटी की तरह नही".

आराधना -" तो यानी जैसे कपड़े आपने लाकर दिए वैसे पहन ने चाहिए मुझे". आराधना ने मज़ा लेते हुए कहा

पंकज -" एग्ज़ॅक्ट्ली, इसमे बुराई क्या है. सिमरन को देखो वो भी तो यंग लड़की है".

आराधना -" ताकि अबकी बार कहीं बाहर बटन टूट जाए".

पंकज -" स्वीटी ग़लती मेरे गिफ्ट किए हुए ब्लाउस की नही बल्कि ...." पंकज बीच मे ही चुप हो जाता है

आराधना -" बल्कि क्या". वो बहुत धीमी आवाज़ मे बाथरूम के अंदर से ही पूछती है

पंकज -" ग़लती ब्लाउस की नही बल्कि तुम्हारे फुल जवान बूब्स की है, जो उसमे समा ही नही पाए पूरी कोशिश के बावजूद". ये बात बोलते ही दोनो तरफ पिन ड्रॉप साइलेन्स था. काफ़ी देर तक कोई नही बोला. आराधना का शरम के मारे बुरा हाल था, वो बोले तो क्या बोले. पंकज ही उस साइलेन्स को तोड़ता है.

पंकज -" अरे बेटा मे तो भूल ही गया, मुझे सिमरन का मोबाइल नंबर चाहिए था".

आराधना -" क्यूँ आपको उससे क्या काम है".

पंकज -" नही वो ऐसे ही, तुम्हारी फ्रेंड है ना कभी कोई ज़रूरत हो तो बात कर लूँगा". आराधना उसे नंबर बता देती है.

पंकज -" ओके, अब मे नीचे जा रहा हू"

आराधना -"ओक"

पंकज -" चला जाउ"

आराधना -" हाँ जाइए ना".

पंकज -" पक्का चला जाउ". तभी फिर से बाथरूम का गेट खुलता है और टवल लपेटे आराधना फिर से बाहर निकलती है. पंकज का हाथ पकड़ कर वो उसे अपने बेड रूम के बाहर ले जाती है, और उसे बाहर छोड़ते ही गेट बंद कर लेती है. गेट बंद करने के टाइम उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी.

स्मृति बाजार से सामान लेकर घर लौट आती है और आते ही किचन मे पहुँच जाती है. उसने पिंक सूट आंड सलवार पहना हुआ था, बाहर की गर्मी से उसकी बॉडी पसीने मे भीग गयी थी जिससे उसकी पिंक ब्रा विज़िबल थी. घर मे एंट्री होते ही पंकज और उसकी निगाहे मिल जाती है लेकिन पंकज उसे इग्नोर कर देता है क्यूंकी उसका काम सिमरन कर चुकी थी, और वैसे भी उसका ध्यान आराधना के टवल खोलने वाले सीन पर था स्मृति के किचन मे चली जाती है.
थोड़ी देर बाद कुशल जाग जाता है और नीचे आकर सोफे पे अपने डॅड के साथ बैठ जाता है.

कुशल -" मोम चाइ मिलेगी". वो वहॉं से चिल्लाता हुआ बोलता है.

स्मृति -" नही मिलेगी". उसके इस जवाब से पंकज को हँसी आ जाती और इससे कुशल को गुस्सा आ जाता है और वो किचन की ओर चल देता है. किचन मे घुसते ही वो पॉट उठाता है और गॅस पे रख देता है.

कुशल -" मे खुद बना लूँगा चाइ". वो गुस्से मे अपनी मम्मी से बोलता है. और लाइटर ढूँडने लगता है, लाइटर मिलने पर वो गॅस को जलाने की कोशिश करता है लेकिन गॅस नही जलती. ये देख कर स्मृति को हँसी आ रही है. कुशल और ज़्यादा जी जान से लाइटर को क्लिक करने लगता है. अब कुशल का चेहरा स्मृति की ओर था और तभी गॅस जल जाती है. "आआओउुुुउउ" कुशल चिल्ला कर पड़ता है क्यूंकी उसकी एक फिंगर गॅस मे जल जाती है. ये देखार स्मृति भाग कर कुशल की तरफ जाती है और उसका हाथ पकड़ कर देखती है, वो खींच कर उसके हाथ वॉश बेसिन मे पानी नीचे ले आती है.

स्मृति एक मा है जिसे अपने बेटे के हाथ जलने पर दूख हो रहा है. वो वॉश बेसिन मे उसकी फिंगर्स पे पानी डालते डालते उसे डाँट लगाती है.

स्मृति -" कभी तेरे पापा ने भी चाइ बनाई है जो तू बना लेगा. इतने स्किल्ड होते तुम लोग तो बात ही क्या थी". और वॉश बेसिन से हाथ हटाने के बाद कुशल अपना हाथ खुद देखता है, उसकी फिंगर्स पे बर्निंग साइन्स थे.

कुशल -" ओह, फक्क". ऑटोमॅटिकली इसके मूँह से अपनी जले हुए निशान देख कर निकल जाता है. स्मृति ये बात सुन कर शॉक हो जाती है.

स्मृति -" क्या कहा तूने अभी?". स्मृति ने उसे गुस्से मे आँखे दिखाते हुए पुछा

कुशल -" ओह..ह लक्क, माइ बॅड लक आक्च्युयली". कुशल ने बात पलटने की कोशिश की.

स्मृति -" मुझे पागल समझता है तू, तो अब स्कूल मे ये गंदी चीज़े सीखने लगा है" स्मृति ने उसके कान पकड़ते हुए कहा

कुशल-" मोम वो खुद ब खुद निकल गया मूँह से. पता नही कैसे". कुशल ने भोला बनते हुए कहा

स्मृति -" ज़्यादा इंग्लीश सिख गया है तू लगता है". स्मृति अबकी बार थोड़ा लाइट हो गयी थी और थोड़ा सा मुस्कुराते हुए कहा

कुशल -" ठीक है मोम, मे हिन्दी ही सीख लेता हू". कुशल ने नॉटी स्टाइल मे कहा. स्मृति नॉर्मल हो चुकी थी लेकिन जब उसे समझ आया कि कुशल क्या कहना चाहता है तो वो फिर से कुशल के पीछे भागी और कुशल भाग कर अपने डॅडी के पास आ जाता है.

स्मृति -" आपको आइडिया भी है कि ये कितना बिगड़ गया है". स्मृति ने पंकज की तरफ देखते हुए कहा

पंकज -"कितना?"

स्मृति -" गंदी गंदी बाते निकालता है मूँह से"

पंकज -" क्या कह दिया मेरे भोले बेटे ने". पंकज कुशल के सर मे हाथ घुमाता हुआ बोलता है

स्मृति -" हा हा हा हा, भोला और ये. आपका बेटा है ना".

पंकज -" किसी और का भी हो तो लेकिन है तो भोला है ही बेचारा". पंकज ने नॉटी स्टाइल मे कहा. स्मृति गुस्से मे पाँव पटकती हुई किचन मे भाग जाती है. थोड़ी देर बाद स्मृति चाइ लाती है दोनो के लिए, उसे पीकर कुशल उपर चला जाता है. किसी बहाने से पंकज घर से बाहर निकलता है और सिमरन को फोन मिलाता है. सिमरन कॉल पिक करती है.

सिमरन - हेलो

पंकज - हाई सिमरन, हाउ आर यू?
सिमरन - आइ आम ओके, हू ईज़ दिस?

पंकज - क्या मेरी आवाज़ भी भूल गयी हो. आइ आम पंकज, आराधना'स फादर.

सिमरन - ओककक अंकल. सॉरी आइ आम इन वॉशरूम, तो आवाज़ क्लियर नही थी.

पंकज - क्या कर रही हो वॉशरूम मे.

सिमरन - टीवी देख रही हू. सिमरन ने मजाकिया अंदाज़ मे कहा.

पंकज - यू आर आ नॉटी गर्ल.

सिमरन - आप क्वेस्चन ही ऐसे पुच्छ रहे है. वॉशरूम मे गर्ल्स क्या करती है, नही पता तो आराधना से पुछ लो वो बता देगी. बाइ दा वे, आइ वाज़ पेयिंग आंड नाउ आइ आम गोयिंग आउट.

पंकज - ओके ओके. और सूनाओ क्या चल रहा है.

सिमरन - कुच्छ खास नही आप बताइए कि क्या चल रहा है.

पंकज - बस याद आ रही थी तुम्हारी. आज तुमने जो ब्रेकफास्ट मुझे कराया वो मे कैसे भूल सकता हू.

सिमरन - हा हा हा हा. वैसे आदमी मस्त है आप.

पंकज - लड़की तुम भी कमाल हो. चलो कभी प्लान बनाओ ना लंच या डिन्नर का.

सिमरन - अंकल ब्रेकफास्ट का ही जमाना है आज कल. लंच ऑर डिन्नर नो गारंटी.

पंकज - ऐसा ना बोलो यार. ब्रेकफास्ट अधूरा है अगर लंच या डिन्नर ना हो तो.

सिमरन - हा हा हा हा. अंकल मुझे बस ब्रेकफास्ट करना ही आता है. इसके अलावा मुझे कुच्छ नही आता.

पंकज - कौन मा के पेट से सीख कर आता है. जहाँ एक बार लंच किया तुमने वहाँ एक्सपर्ट बन जाओगी.

सिमरन - वेरी फन्नी. हे हे हे हे

पंकज - वैसे जान ना चाहता हू कि क्या आज तक तुमने लंच किया है कि नही. या आज तक बिना लंच के ही गुज़ारा चल रहा है.

सिमरन - अंकल मेरी ओपन नेस से हो सकता है कि सबको लगे कि मे लंच कर चुकी हू लेकिन सच मे आज तक बस ब्रेकफास्ट से ही गुज़ारा चल रहा है. ब्रेकफास्ट भी खुद ही करना पड़ता है.

सिमरन का इशारा मास्टरबेशन की तरफ था.

पंकज - सो सॅड. क्या कोई ऐसा मिला नही जो तुम्हे लंच करा सके.

सिमरन - अंकल मिला तो है लेकिन कभी लंच करने के लिए सूटेबल प्लेस नही मिला. और वैसे भी मेरी फ्रेंड आराधना बिल्कुल कॉपरेट नही करती.

पंकज - हा हा हा हा. अपनी मा पे गयी एक दम, एक दम स्ट्रिक्ट.

सिमरन - तो स्मृति आंटी को तो आप सही से ब्रेकफास्ट और डिन्नर कराते होंगे. हे हे हे हे

पंकज - याद नही लास्ट टाइम कब कराया था. आज कल पता नही स्मृति को ब्रेकफास्ट से क्या परहेज हो गया है.

सिमरन - कहीं लंच कहीं और तो नही चल रहा है आंटी का. हा हा हा हा

पंकज - हर किसी की अपनी लाइफ है. लंच करना तो मे भी कहीं और चाहता हू लेकिन बात नही बन पा रही.

सिमरन - सब्र का फल मीठा होता है अंकल. तो थोड़ा सब्र रखिए.

पंकज - तो ठीक है बेटा. हम इंतेज़ार करेंगे.

सिमरन - ओके अंकल. अब मे इजाज़त चाहती हू. बाइ, टेक केर आंड सेक्सी ड्रीम्स. ओह्ह्ह आइ मीन स्वीट ड्रीम्स.

पंकज - ओके स्वीटी, गुड नाइट आंड स्वीट ड्रीम्स.
कॉल डिसकनेक्ट हो जाता है. और पंकज दोबारा घर मे आ जाता है. किचन मे जाकर रेफ्रिजरेटर से एक बियर निकालता है और हॉल मे आकर पीने लगता है. उसके माइंड से सिमरन निकल ही नही थी, रह रह कर उसके हाथ अपने लंड पर पहुँच रहे थे.

आज सॅटर्डे नाइट है. कुशल अपने रूम मे है और बोर हो रहा है, वो नीचे आता है और अपने डॅड को बियर पीते हुए देखता है. उसने आज तक कभी स्मोकिंग या ड्रिंकिंग नही की है लेकिन उस के दिल मे हमेशा क्वेस्चन्स रहते थे कि लोग अक्सर ये सब क्यू करते है. आज उसके दिल मे ये क्वेस्चन के जवाब जान ने की इच्छा थी. वो किचन मे जाता है जहाँ स्मृति खाना बनाने की तैयारी कर रही थी.

कुशल -" मोम आज बहुत गर्मी है". कुशल बात स्टार्ट करता है

स्मृति -" हाँ है तो, वो माथे से पसीने हटाते हुए बोलती है".

कुशल -" मोम मेरा फ्रेंड मोहित बोलता है गर्मी मे बियर बहुत हेल्पफुल रहती है". ये बात सुन कर स्मृति काम रोक कर उसकी तरफ देखती है.

स्मृति -" तो मोहित ही है जो तुझे वो सब बोलना सिखाता है".

कुशल -" वो बोलना? क्या बोलना मोम?"

स्मृति - " ज़्यादा स्मार्ट मत बन, वो जो तू अभी फक बोल रहा था". स्मृति ने उसे डाँट लगाते हुए कहा

कुशल -" तो बोला तो आपने भी मोम अभी".

स्मृति -" चल ज़्यादा बाते मत बना और भाग यहाँ से".

कुशल -" मोम एक बियर दो ना फ्रीज से". स्मृति उसकी तरफ देखती है, वो पसीने मे नहाई हुई थी, उसके चेहरे पर भी पसीने की बूंदे थी. दुपट्टा उसने कमर से बाँधा हुआ था, काम करने के लिए.

स्मृति -" तुझे नही मिलेगी".

कुशल -" आप नही दोगि तो कौन देगा मुझे मोम". स्मृति इस बात का डबल मीनिंग सोच कर हँसने लगती है.

कुशल -" हंस क्यूँ रही है आप मोम"

स्मृति -" मेने कहा ना कि तुझे बियर नही मिलेगी".

कुशल -" मोम आप भी तो पीती हो, फिर मुझे क्यूँ मना कर रही हो".

स्मृति - "आइ आम ऐन अडल्ट. मे पी सकती हू".

कुशल -" तो क्या मे अडल्ट नही?".

स्मृति-" नो"

कुशल -" तो आप कहाँ से अडल्ट है".

स्मृति - " मे एक मॅरीड लेडी हू, मेरे तीन बच्चे है. क्या इतना काफ़ी नही है अडल्ट होने के लिए".

कुशल-" मोम क्यू पागल बना रही हो. आप मोम है तो इससे अडल्ट होने का क्या लिंक है. आपकी शादी हो गयी तो आप मोम है, अगर मेरी हो गयी होती तो मेरे भी बच्चे हो गये होते". इस बात को सुन कर स्मृति की फिर से हँसी छूट जाती है.

स्मृति " अच्छा तो तू इतना बड़ा हो गया है कि तुझे बच्चे कैसे होते है ये पता चल गया है".

कुशल -" मोम वाकई मे मेरा बड़ा हो गया है".

स्मृति - " क्या? क्या कहाँ तूने अभी". स्मृति काम छोड़ कर उससे पूछती है.

कुशल -" मोम मेने कहा क़ी वाकई मे मे बड़ा हो गया हू". कुशल ने बात पलट दी.

स्मृति -" मुझे पागल समझता है". स्मृति उसके कान पकड़ते हुए बोलती है.

कुशल -" मोम आपने क्या सुना वैसे".

स्मृति -" ज़्यादा स्मार्ट मत बन".

कुशल -" तो दे दो ना अब". कुशल उसकी आँखो मे देखते हुए बोलता है. उसकी इस बात से स्मृति घबरा जाती है, और उसका कान छोड़ कर दूसरी तरफ घूम कर पूछती है

स्मृति -" क्या?". ये बात वो बहुत लो वाय्स मे पूछती है
कुशल -"बच्चा. ओह सॉरी आइ मीन बियर. आपने भी दिमाग़ को हिला दिया है".

स्मृति -" बस एक मिलेगी. बोल अगर ओके है तो".

कुशल -" मोम यू अरे ग्रेट". और भाग कर वो अपनी मोम को हग कर लेता है और उनके गाल पर एक किस कर देता है.

स्मृति - " और कुच्छ खा भी लियो इसके साथ, नही तो नुकसान करेगी." स्मृति उसे फ्रीज से निकाल कर एक बियर दे देती है और वो उसे लेकर उपर जाने लगता है.

स्टेर्स पे ही उसकी मुलाकात प्रीति से हो जाती है जो कि नीचे जा रही थी. उसकी हाथ मे बियर की बॉटल देख कर प्रीति उससे पूछती है

प्रीति -" ते क्या पीने की प्लॅनिंग कर रहा है."

कुशल -" तेरा दूध, आइ मीन तेरा खून. तू भी पीएगी". ये बात बोलते बोलते कुशल लगभग सारी सीढ़ियाँ क्रॉस कर चुका है और प्रीति नीचे वाली सीढ़ियों पे रह जाती है. प्रीति उसकी ये बात सुनकर उसके पीछे भागती है. " मेरा खून पिएगा". ये कहते हुए वो उसके पीछे भागती है. कुशल भाग कर अपने रूम मे घुस जाता है और डोर के साइड मे खड़ा हो जाता है. प्रीति जैसे ही गुस्से मे भाग कर आती है, कुशल उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लेता है. " धड़क्क्क" की आवाज़ के साथ दोनो के सीने आपस मे टकरा जाते है और कुशल प्रीति को कस कर पकड़ लेता है. कुशल एक मजबूत शरीर वाला लड़का था और प्रीति एक चुलबुली लड़की
 
इस टाइम दोनो के सीने आपस मे मिले हुए थे और कुशल ने प्रीति को कमर पर से कर पकड़ रखा था. सीना दबने से प्रीति के बूब्स और उपर की तरफ आ गये थे. वैसे भी प्रीति भाग कर आई थी जिस वजह से उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी प्रीति अपने आप को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी.

प्रीति - "छोड़ मुझे, मेरा खून पिएगा". प्रीति उसकी आँखो मे देखती हुई और उसकी चेस्ट मे आराम से मुक्का मारते हुए बोलती है

कुशल -" पिला दे, कम नही होगा कसम से". प्रीति उसकी बात सुनकर शरम से लाल हो जाती है और अपना विरोध कम करते हुए साइड मे देखती है. अब भी वो दोनो उसी पोज़िशन मे है

प्रीति -" क्या पीने की बात कर रहा है". प्रीति लो वाय्स मे साइड मे देखे हुए बोलती है

कुशल -" खून के सिवाय ऐसा तो कुच्छ दिखाई नही देता जो पीने के लायक है". कुशल ये बात उसके बूब्स की तरफ देखता हुआ बोलता है

प्रीति ( शरमाते हुए)-" क्यू क्या कमी है बाकी चीज़ो मे". प्रीति उसकी आँखो मे देखती हुई बोलती है. तभी प्रीति उससे एक झटके के साथ अलग हो जाती है. उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी, वो थोड़ी घबराई हुई भी थी. उसके बूब्स उसकी सांसो के साथ उपर नीचे हो रहे थे.

प्रीति ( दूसरी तरफ मूँह फिराते हुए) - " ये क्या कर रहा है". उसके चेहरे पे एक मुस्कान थी. दर असल प्रीति के इतने करीब आ जाने से कुशल का लंड विकराल रूप मे आने लगा था और फाइनली उसके बूब्स को देख कर उसका लंड प्रीति के पेट पर वाइब्रेशन करने लगा था.

कुशल -" क्या हुआ प्रीति?" कुशल ने भोला बनते हुए कहा

प्रीति -"तो तू मुझे इस नज़र से देखता है". प्रीति ने दूसरी तरफ मूँह रखते हुए ही कहा.

कुशल -" क्या बात कर रही है, किस नज़र से देखता हू मे तुझे".

प्रीति -" ज़्यादा बन मत, ये मेरे पेट पे क्या चुभ रहा था? पता नही है तुझे?".

कुशल -" चुभ तो कुच्छ मेरे सीने भी रहा था. लेकिन क्या मेने कहा कि तू मुझे किस नज़र से देखती है. लेकिन वैसे क्या चुभ गया तेरे पेट मे."

प्रीति घूमती है ये देखने के लिए की आख़िर उसके पेट मे क्या चुभ रहा था. जैसे ही वो घूमती है, एक और झटका. कुशल का लंड उसके शॉर्ट मे टेंट की तरह तना हुआ था, ऐसा लग रहा था जैसे कि उसने कोई नकली रोड लगा ली हो शॉर्ट मे. " ओह माइ गॉड". प्रीति के मूँह से खुद ब खुद निकल जाता है.

प्रीति की तो जैसे साँसे ही रुक जाती है. वो दूसरी तरफ मूँह करके तेज तेज साँसे लेने लगती है. कुशल दूर खड़ा हुआ ही उससे पूछता है.

कुशल -" क्या हुआ प्रीति, क्यूँ इतना डर रही है".

प्रीति ( निगाहे नीचे किए हुए) - " तुझे क्या हुआ है, नॉर्मल तो है तू".

कुशल -" ये कैसी बहकी बहकी बाते कर रही है. ऐसा क्या देख लिया तूने".

प्रीति -" इसे क्या हुआ है?". वो दूसरी तरफ देखते हुए उसके लंड की ओर इशारा करती है.

कुशल -" ओह ये, ये तो शायद मुझे पेशाब आ रहा है". कुशल ने हंसते हुए कहा.

प्रीति -" तो जा कर के आना, खड़ा क्यो है". प्रीति का चेहरा बिल्कुल लाल हो चुका था, थोड़ा थोड़ा पसीना भी आ रहा था.

कुशल -" ओह मेरी प्यारी बहना, इससे डर गयी. ऐसे डरेगी तो हम तेरी शादी कैसे करेंगे". ये कहते हुए कुशल उसके ठीक पीछे आकर खड़ा हो जाता है और पीछे से प्रीति को हग कर लेता है. प्रीति एक दम सकपका जाती है लेकिन ऐसे शो करती है जैसे वो नॉर्मल है. कुशल का लंड अब ठीक उसकी गान्ड के उपर था.

प्रीति -" मुझे नही करनी शादी वादी. ये को बेकार के काम है". उसकी गान्ड पर धीरे धीरे कुशल के लंड का दवाब बढ़ता जा रहा था.

कुशल -" तो ज़िंदगी भर कली ही बनी रहेगी, फूल नही बन ना है तुझे?". कुशल अपने फेस को प्रीति के कान के पास ले जाकर ये बात बोलता है. प्रीति की आँखे बंद हो चुकी थी और दिल की धड़कने बढ़ चुकी थी.

प्रीति -" वो... वो भाई.... मुझे कुच्छ चुभ रहा है".

कुशल -" तुझे कुच्छ ग़लतफहमी है, कुच्छ नही ऐसा चुभने वाला". ये बात सुनकर प्रीति धीरे धीरे हाथ पीछे ले जाती है. और उसके होश उड़ जाते है जैसे ही उसका हाथ कुशल के लंड पर पहुँचता है. आगे से टच करने से उसे पूरा अहसास नही होता तो वो अपने हाथ को पीछे तक ले जाती है.

कुशल -" कैसा लगा?". कुशल का ये क्वेस्चन प्रीति को अंदर तक झकझोड़ देता है.

प्रीति -" क्या?"
कुशल -" वही, जहाँ तेरा हाथ है". और प्रीति उसकी ये बात सुनकर अपना हाथ हटा लेती है.

प्रीति -" मेरा हाथ... मेरा हाथ तो कहीं भी नही है". प्रीति ने बनते हुए कहा. लंड के टच से वो अंदर तक पिघलती जा रही थी. एक कुँवारी और जवान लड़की के लिए इतना काफ़ी होता है. वो पूरी कोशिश कर रही थी कि कुशल को ये दिखाए कि वो नॉर्मल है लेकिन उसकी हालत खराब होती जा रही थी. कुशल अपने एक हाथ से प्रीति को हग करके रखता है और दूसरे हाथ से अपने शॉर्ट और अंडरवेर को नीचे कर देता है. अब उसका लंड एक दम नंगा था लेकिन प्रीति उसे नही देख सकती थी. वो अब नंगा ही प्रीति की गान्ड पर चुभ रहा था. कुशल अब अपने एक हाथ से प्रीति का एक हाथ पकड़ता है और फिर उसे ले जाकर अपने लंड पर रख देता है. प्रीति का हाथ जैसे ही नंगे लंड को टच करता है, वो पागल जैसी हो जाती है और एक झटके से कुशल से अलग हो जाती है.

प्रीति की हालत शब्दो मे बयान नही की जा सकती. एक जवान लड़की ने आज उसे टच कर ही लिया जिसकी उसे सबसे ज़्यादा ख्वाहिश होती है. उसका सीना उपर नीचे हो रहा है, उसकी पीठ अभी भी कुशल की तरफ है लेकिन उन दोनो के बीच मे कुच्छ डिस्टेन्स है. उसके दिल मे लखो सवाल थे कि मेरा सगा भाई ऐसा क्यू पेश आ रहा है और दूसरी तरफ उसके दिल मे एग्ज़ाइट्मेंट था.

दोनो आपस मे कुच्छ बाते नही कर रहे है और दोनो की ही हालत बेहद खराब है. प्रीति को भी अहसास होने लगा है कि उसकी पैंटी मे कुच्छ लिक्विड आ रहा है. कुशल की निगाहे अब भी प्रीति की मोटी मोटी गान्ड पर है जिसे देख कर उसका लंड और भी हार्ड होता जा रहा है. प्रीति वहीं खड़े खड़े उसे तीर्छि निगाहो से देखती है, कुशल उसकी तरफ एक कदम बढ़ाता. प्रीति ये देख कर आँखे बंद कर लेती है, उसका दिल धड़क रहा है कि अब क्या होने जा रहा है. कुशल ठीक उसके पीछे आकर खड़ा हो जाता है, प्रीति अपने शोल्डर्स के करीब उसकी सांसो को फील कर रही है. कुशल अपने हाथ को बढ़ा कर प्रीति की टी-शर्ट मे डाल देता है और उसके नंगे पेट को टच करता है. धीरे धीरे उसका हाथ उसकी नाभि पेर पहुँच जाता है.

" आआआहह............. प्रीति के मूँह से एक जबरदस्त सिसरी निकल जाती है.
 
इस सिसकारी ने कुशल को सारे जवाब दे दिए कि प्रीति कि क्या हालत है. उसका पेट ऐसे काँप रहा है जैसे उसको एलेक्ट्रिक करेंट लगा हो, नाभि ऐसे हिल रही है जैसे पेट मे मछ्ली कूद रही हो.

कुशल अपने होंठ प्रीति की गर्दन पर फिराना शुरू करता है.

प्रीति - " आअहह....... कुशल.... क्याअ कर रहा है." प्रीति की आँखे बंद हो चुकी है और जैसे जैसे कुशल अपने होंठ उसकी गर्दन के आस पास घुमा रहा है, वैसे वैसे उसकी गर्दन भी घूम रही है. कुशल पीछे से प्रीति से बुरी तरह से चिपक चुका है, उसका विशाल लंड प्रीति की जीन्स को फाड़ कर अंदर घुस जाने के लिए तैयार हो रहा था. कुशल का एक हाथ अभी भी प्रीति के पेट पर ही घूम रहा है. कितना सॉफ्ट था उसका बदन, ये बस कुशल ही समझ पा रहा था. कुशल का हाथ उपर की तरफ बढ़ रहा था, बूब्स के, उसके अनटच बूब्स की तरफ. तभी एक झटके के साथ प्रीति उसके हाथ पर अपना हाथ मारती है और उसे उपर बढ़ने ने रोकने लगती है. प्रीति की साँसे बेकाबू हो रही थी, ये एक ऐसी फीलिंग थी जिस से वो अंजान थी. एक कुँवारी लड़की का बदन एक मोम की तरह होता है, थोड़ा गर्मी के करीब आते ही पिघलने लगता है और आज तो वो आग मे ही बैठी थी.

कुशल -" मेरा हाथ क्यू रोका प्रीति?". कुशल अभी भी उसकी गर्दन पे ही किस कर रहा था, और कभी उसके शोल्डर्स पे भी किस कर रहा था

प्रीति( तेज सांसो के साथ)-" जीसस्स....जिस जगह तू बढ़ रहा है वो तेरे लिए नही है...... आआहहुउऊउउ.....". प्रीति का इशारा अपने बूब्स की तरफ था, उसका चेहरा लाल पड़ चुका था.

कुशल ( अभी भी उसके शोल्डर और गर्दन पे किस करते हुए)-" तो क्या मुझे नीचे की तरफ बढ़ना चाहिए, तेरी चूत.....". प्रीति उसे बीच मे ही रोकते हुए बोलती है.

प्रीति -"ओह्ह्ह्ह, ये कैसी बात कर... रहा है. यू अरे ए डर्टी बोययय्यी...". प्रीति अब भी सिसक रही थी. कुशल का हाथ अब नीचे की तरफ बढ़ने लगा था. प्रीति के बूब्स उपर नीचे ऐसे हो रहे थे जैसे कोई बार बार बेलून मे हवा भर रहा हो और निकाल रहा हो. कुशल का हाथ अब उसकी नाभि से होता हुआ फिर से उसकी जीन्स तक पहुँचता है. जीन्स काफ़ी टाइट थी, जिसमे हाथ नही जा पा रहा था, कुशल पूरी कोशिश कर रहा था कि हाथ अंदर चला जाए लेकिन नही जा रहा था. तभी, वो हुआ जो कुशल ने सोचा भी नही था. प्रीति अपनी साँस अंदर खींचती है जिस से उसका पेट अंदर की तरफ हो जाता है, जीन्स थोड़ा लूज होती है और कुशल का हाथ सीधा अंदर उसकी पैंटी तक.

" कुशालल्ल्ल्ल..... प्लीज़..... प्लीज़ रुक जा". प्रीति आँख बंद किए उससे रिक्वेस्ट करते हुए बोलती है. कुशल अपना हाथ बढ़ाता जा रहा था, अब उसका हाथ सीधा उसकी पैंटी मे और सीधा उसकी वर्जिन, कुँवारी छोटी सी चूत पे पहुँच जाता है. कुशल इस बात को देख कर हैरान नही था कि उसकी पुसी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी. वो इस गीलेपन मे ही अपनी एक उंगली अंदर घुसा देता है.

"आआअहह......" प्रीति के मूँह से एक और सिसकारी निकलती है.

" मुझे....मुझे पैन्न्न्न्न हो रहा है, फिंगर बाहर निकाल". प्रीति ने कहा

" मेरी जान एक फिंगर से ये हाल है, तो जब मेरा विशाल लंड....." कुशल बोलता है लेकिन प्रीति उसे चुप करा देती है.

" ओह, कुशल ऐसा नही होगा, तू इतना डर्टी कैसे हो गयाआआ". प्रीति आँखे अभी बंद थी लेकिन अब कुशल ने अपनी एक फिंगर को धीरे धीरे उसकी पुसी मे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया था. प्रीति की हालत और भी खराब होते जा रही थी, अब प्रीति अपने सीधे हाथ को हरकत मे लाते हुए पीछे ले जाने लगती है वो भी स्लो मोशन मे. धीरे धीरे उसका हाथ फिर से कुशल के लंड पर पहुँचता है. प्रीति अपने हाथ से उसे आगे से टच करती है, प्रीति का फेस सामने की तरफ है जिस वजह से वो देख नही सकती थी उसके लंड को इसीलिए उसने पहले पीछे हाथ ले जाकर उसके लंड को आगे से छुआ. उस पर प्रीति के गोरे और सॉफ्ट हाथ लगते ही उसका लंड बेहद गुस्से मे आ गया और जैसे ही उसमे जोश आया उसे फील करके प्रीति फिर से घबरा गयी.

" इसे किययाया हो रहा है". प्रीति का इशारा कुशल के लंड की तरफ था

" तुझ जैसी सेक्सी लड़की का आज भोग लगाने की तैयारी कर रहा है ये शेर". कुशल ने ये बात कहते हुए कुच्छ ज़्यादा ही अंदर तक अपनी फिंगर घुसा दी प्रीति की पुसी मे.

" कुशल व्हाट आर यू डूयिंग, आइ आम युवर सिस्टर यार". प्रीति ने थोड़ा गुस्सा होते हुए कहा लेकिन कुशल बहुत हॅपी था क्यूंकी प्रीति ने उसे ग्रीन सिग्नल दिया कि फिंगर चलाता रह लेकिन आराम से
प्रीति फिर से उसके शेर को चेक करने लगती है, अपनी मुट्ठी मे उसे भरना चाहा लेकिन नाकाम. उसकी लंबाई चेक करने के लिए हाथ और पीछे ले जाती लेकिन हाथ और पीछे और पीछे जाता गया और फाइनली प्रीति की फिंगर्स कुशल के पेट को टच करती है जहाँ पे उसके लंड का एंड था.

" ओह्ह्ह, कुशल क्या ख़ाता है तुउुउउ..., ऐसा साइज़......... तेरी वाइफ तो गयी काम से ". प्रीति ने कुशल से कहा

" डार्लिंग, आज कुँवारी हो तो बड़ा लग रहा है. एक महीने बाद देखना, ऐसे खा जाया करोगी और पता भी नही चलेगा". कुशल ने रिप्लाइ किया

" यू आर आ वेरी डर्टी बॉय कुशल, मुझे कुच्छ खाने का शोक नहियीईई है......". प्रीति ने थोड़ा सा स्माइल करते हुए कहा.

अब कुशल अपना हाथ प्रीति की चूत से हटा लेता है और उसे बाहर निकालने की कोशिश करने लगता है. प्रीति इस सिचुयेशन को देख कर अपनी आँखे खोलती है और पीछे मूँह करके आँखो ही आँखो मे इशारे से पूछती कि क्या हुआ. कुशल बिना कुछ जवाब दिए अपने दोनो हाथ आज़ाद करता है, और प्रीति के दोनो शोल्डर्स पकड़ कर अपनी ओर घुमाता है. अब वो दोनो आमने सामने है, सामने आते ही प्रीति अपनी आँखे खोलती है और तभी " आाआईयईईईईईईई" जैसे ही प्रीति की निगाह कुशल के लंड पे पड़ती है और मूँह से चीख निकल जाती है. तुरंत कुशल अपना एक हाथ प्रीति के मूँह पे रखता है और कहता है कि क्या हुआ.

" ये, ये कितना खौफनाक है". प्रीति ने अपनी निगाहे दूसरी तरफ करते हुए कहा

" माइ डियर सिस्टर इसीलिए इसे लंड कहते है, ये डिफरेंट साइज़स मे अवेलबल होता है. यू आर सो लकी कि तुम्हे फुल ऑप्षन मिला है". कुशल ने प्रीति का चेहरा फिर से अपनी तरफ करते हुए कहा.

" छ्हि, कैसी गंदी गंदी बाते करते हो तुम कुशल. कहाँ सीखी तुमने ये बाते, और भला मे इसे क्यू आक्सेप्ट करू". प्रीति मे फिर से बनावटी गुस्से मे कहा
" लड़को वाला लंड और लड़को वाली बाते एक लड़के के पास ही होगी ना, और तू इसे इसीलिए आक्सेप्ट करेगी क्यूंकी तेरी सेक्सी बॉडी इसे डिज़र्व करती है. सच बोल रहा हू कि लकी है तू, नही तो एक से एक सेक्सी लड़की आज भी 5 या 6 इंच से गुज़ारा चला रही है". कुशल ने फिर से उसे रिप्लाइ किया. अब प्रीति का चेहरा कुशल के दोनो हाथो मे है, कुशल की निगाहे उसके गुलाबी होंठो पर है. दोनो की नज़रे मिलती है और जैसे इशारो मे कुशल पूछता है कि तेरे होंठो का रस पीना चाहता हू. जवाब देने की बजाय प्रीति अपनी दोनो आँखे बंद कर लेती है और बिना कुच्छ कहे ही कुशल को रिप्लाइ मिल जाता है. कुशल अपने चेहरे को आगे बढ़ाता है और अपने दोनो लिप्स प्रीति के लिप्स पर रख देता है. दोनो के लिप्स आपस मे मिलते ही जैसे बिजली कडकने लगी हो, मिनिट के पता नही कौन से हिस्से मे प्रीति की सारी लिपस्टिक कुशल हटा चुका था. प्रीति ने भी अपने होठ हिलाने शुरू शुरू कर दिए थे, वो भी कुशल का साथ दे रही थी. इसी दौरान कुशल अपने दोनो हाथ नीचे ले जाकर उसकी टी-शर्ट को नीचे से पकड़ता है और उसे उपर उठाने लगता है लेकिन अपने दोनो हाथो से प्रीति उसे रोकती है. कुशल काफ़ी कोशिश करता है लेकिन प्रीति नही मानती. तभी प्रीति लिप्स को अलग करती है, और कुशल से कहती है.

प्रीति -" कुशल, इस से आगे मे नही जा सकती. वैसे भी हम दोनो आज बहुत आगे बढ़ चुके है." प्रीति कुशल से थोड़ा दूर होते हुए बोलती है.

कुशल प्रीति की ओर बढ़ता है और फिर से उसके चेहरे को पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठ से लगा देता है. इस बात प्रीति ने थोड़ी कोशिश की अलग होने की लेकिन नाकाम रही. कुशल अपना एक हाथ प्रीति के राइट बूब पर टी-शर्ट के उपर से ही रख देता है. "ओह, लिट्ल सिस यू गॉट वेरी सेक्सी बूब्स". कुशल अपने मन मे सोचता है. प्रीति उसका हाथ हटाना चाहती थी लेकिन कुशल नही माना और धीरे धीरे उसके बूब्स को प्रेस करता रहा. थोड़ी देर बाद प्रीति का विरोध भी कम हो गया. अभी तक वो दोनो एक दूसरे के होठों का रस चूसने मे बिज़ी थे. इसके बाद कुशल अपना हाथ उपर की बजाय टी-शर्ट के अंदर घुसा देता है. प्रीति के होंठ कुशल के होंठो से जुड़े हुए है तो वो खुल कर विरोध भी नही कर पाई. टी-शर्ट के अंदर हाथ ले जाकर कुशल उसकी टाइट ब्रा के अंदर अपना हाथ घुसा देता है और अपना पंजा ठीक उसके राइट सेक्सी बूब्स पर टिका देता है.

ये पहला चान्स था जब प्रीति के बूब्स को किसी बॉय ने टच किया था. वो पागल हो चुकी थी, उसकी साँसे और तेज हो गयी थी. कुशल के लिप्स को अब वो बहुत जान लगा कर चूस रही थी. कुशल ने फिर से एक बार ट्राइ किया कि वो उसकी ट- शर्ट उतार सके, वो अपने दोनो हाथो से उसकी टी-शर्ट पकड़ता है और उपर की ओर उठा देता है.

इस बात कुशल का प्लान कामयाब हुआ. प्रीति आँख बंद किए हुए लीप लॉक को हटाती है और अपने दोनो हाथ उपर कर देती है जिस से कुशल टी-शर्ट को उतार सके. और एक झटके मे प्रीति बस ब्लॅक ब्रा मे रह जाती है. टी- शर्ट हटते ही प्रीति भाग कर कुशल के सीने से चिपक जाती है अपने आप को छुपाने के लिए.

उसके पेट मे अब कुशल का लंड चुभ रहा था लेकिन वो विरोध नही कर रही थी. अब प्रीति कुशल के सीने मे समाई हुई थी, कुशल ने इस मौके का फ़ायदा उठा कर, एक झटके के साथ प्रीति की ब्रा का हुक भी खोल दिया. और उसे उतारने की कोशिश करने लगा. प्रीति एक बार को सीने से अलग होती है और दोनो हाथ सामने की तरफ कर देती है.

क्या नज़ारा था. आज तक कुशल ने बस सोचा था कि प्रीति के बूब्स कैसे है लेकिन आज वो उसके सामने थे, एक दम वाइट आंड एक दम सुडोल. इससे बेस्ट बूब्स शायद ही किसी फिल्मी हेरोयिन के हो. कुशल इस मौके को नही खोना चाहता था और एक झटके मे उसने अपना मूँह प्रीति के बूब्स पर रख दिया.

" आअहह, लव...... मी........ कुशल, लव मी मोर......." उसकी जीभ का अहसास अपने बूब्स पे पड़ते ही जैसे प्रीति पिघल गयी. उसकी आँखे बंद हो गयी और वो अपने दोनो हाथ कुशल के सर मे फिरा रही थी. एक बूब को कुशल चूस रहा था आंड दूसरे हाथ से प्रीति की जीन्स का बटन खोल रहा था.

" आइ लव........ यू कुशल.................... आअहह, ओह". प्रीति की हालत बेहद खराब कर दी थी कुशल ने. वो अब तक उसकी जीन्स का बटन खोल चुका था आंड उसकी ज़िप भी. वो अपने एक हाथ से कोशिश करने लगा कि उसकी जीन उतार पाए लेकिन वो उसके चुतडो पर बहुत टाइट फँसी हुई थी. प्रीति इसी सिचुयेशन मे दोनो हाथ कुशल के सर से हटाती है और अपनी जीन्स पर ले जाकर उसे नीचे करने लगती है. कुशल इसी सिचुयेशन मे उसे पीछे सरकाता हुआ बेड पे ले जाकर गिरा देता है और खुद सीधा खड़ा होकर अपनी टी-शर्ट उतरता है आंड उसके बाद इन्नर वेर भी. अब कुशल बिल्कुल नंगा है लेकिन बेड पे पड़ी हुई प्रीति की आँखे बंद है और वो उसे देख नही सकती.

प्रीति अपने पाँव के सहारे से अपनी जीन्स को अलग कर देती है. प्रीति के शरीर पर अब बस एक ब्लॅक ट्रॅन्स्परेंट पैंटी है. कुशल आगे बढ़कर दोनो हाथो से उसकी पैंटी को पकड़ता है और एक झटके के साथ उसे उसकी बॉडी से अलग कर देता है. प्रीति शरम मे मारे अपनी दोनो टांगे जोड़ लेती है.

कुशल घुटनो के बल फ्लोर पर बैठा है, प्रीति की दोनो टांगे पकड़ता है और धीरे से उन्हे फेला देता है.

कुशल की तो जैसे लॉटरी लग गयी हो. एक छोटी सी कुँवारी चूत उसके सामने थी, वो टाइम ना वेस्ट करते हुए अपना मूँह सीधा उसकी चूत पर लगा देता है. और अपनी जीभ को अंदर घुसाने की कोशिश करने लगता है.

प्रीति के लिए एक्सपीरियेन्स बिल्कुल नया था. वो आज सातवे आसमान पर थी, इतना शारीरिक सूख मिलने के बाद कोई लड़की अपने आप को नही रोक पाती. पूरा रूम प्रीति की सिसकारियो से गूँज रहा था, लेकिन कुशल भी पूरी मेहनत के साथ लगा हुआ था. उसकी चूत से जैसे पानी की नादिया बह रही हो ऐसा महॉल था.

" ऊऊहह, आअहह......, किस मी मोर........., आआहह. कुशल डू इट प्लीज़........., फक मी टुडे.........,, प्रीति पता नही क्या क्या बोले जा रही थी.

" आअहह, आअहह..... ओह, और अंदरररर.......... प्रीति का इशारा कुशल की जीभ की तरफ था जो प्रीति की छोटी सी चूत के अंदर घुसने की कोशिशी कर रही थी.

आआआआअहह ब्रो........ आइ..........म ......कुम्मींगगगग................और ठीक इसके दो मिनिट बाद प्रीति अपना पूरा पानी कुशल के मूँह मे छोड़ देती है. उसकी चूत का मूँह बार बार खुल रहा था और बंद हो रहा था. आज प्रीति बहुत मस्त हो गयी थी. कुशल अब भी उसकी चूत को चाटे जा रहा था. प्रीति अपने दोनो हाथो से इशारा करती है कि उसका काम हो गया है.
" कुशल...... मेरा हो गया है......, प्लीज़ अब रुक जा". प्रीति ने लेटे लेटे कहा. कुशल एक विजयी मुस्कान के साथ खड़ा हो जाता है. प्रीति बेड शीट से अपने को ढकने की कोशिश करती है.

कुशल -" मेरी जान, आज पता चला कि जवानी की आग कैसी होती है". कुशल प्रीति की तरफ देखते हुए बोला

प्रीति -" दिख रही है कि जवानी की आग कैसी होती है". प्रीति कुशल के विशाल लंड की ओर देखते हुए बोली.

कुशल -" तो अब इसे भी शांत कर दो ना".

प्रीति -" क्या करना होगा मुझे?"
कुशल -" सकिंग"
 
प्रीति-" क्याआ? कुशल मे अभी इतनी बड़ी भी नही हू कि सकिंग कर पाउ. इसे देख ये कितना बड़ा है, मुझे नही लगता कि इसे सक कर पाउन्गि. तेरा मास्टरबेशन करने की कोशिश कर सकती हू". प्रीति ने कुशल को समझाते हुए कहा

कुशल -" मेरी लिट्ल सिस्टर, तुम चुदने के लिए रेडी हो चुकी हो. अगर इसे मूँह मे नही ले पओगि तो चूत मे कैसे लोगि."

प्रीति -" कुशल मुझे ये गंदी लॅंग्वेज बिल्कुल पसंद नही". प्रीति उसे फिंगर दिखाती हुई बोलती है

कुशल -" सिस, अभी तुम्हारी चूत का पानी निकाला है तभी मेरी लॅंग्वेज गंदी लग रही है. थोड़ी देर बाद देखना मुझपे फिर से प्यार आने लगेगा." ये बात सुनकर प्रीति के चेहरे पर एक स्माइल आ जाती है. अब धीरे धीरे कुशल अपने खड़े हुए लंड के साथ प्रीति की तरफ बढ़ता है. प्रीति करीब आते ही उसके लंड को दोनो हाथो मे पकड़ लेती है.

कुशल -" यार मेने तेरे लिए इतनी मेहनत की तो क्या तू नही कर सकती." ये बात सुनते ही प्रीति अपनी बेड शीट हटा देती है और स्टाइल मे खड़े होकर कुशल के लंड के सामने बैठ जाती है और अपने होठ उस पर रख देती है.

" ओह, सेक्शययययी.... कुशल प्रीति के इस अंदाज़ पे फिदा हो गया. प्रीति अपना मूँह खोल कर उसका सुपाडा अपने मूँह मे लेना चाहती थी लेकिन परेशानी हो रही थी. वो कुशल की आँखो मे देखती है और कुशल जैसे उसे आँखो से ही रिक्वेस्ट करता है कि प्लीज़ कर दे ना आज सकिंग.

प्रीति स्टाइल मे अपने बालो को पीछे करती है और अपना मूँह पूरा खोल कर कुशल के लंड को अपने मूँह मे ले लेती है. उसके मूँह मे बस अभी उसका सुपाडा ही गया था.

कुशल के एग्ज़ाइट्मेंट का कोई ठिकाना नही था. वो अपना मूँह आसमान मे किए हुए मस्त था. प्रीति उसके लंड को धीरे धीरे और अंदर ले रही थी और अपने हाथो से उसकी बॉल्स को खिला रही थी. जब भी कुशल नीचे देखता, उसे 19 साल की जवान प्रीति वो भी नंगी अवस्था मे अपना लंड चूस्ते हुए दिखाई देती.

" उ र्र्र्र्र्ररर ग्रेअतत्त,,,,,,, प्रीतीईईईईईई, ऊऊहह. ऐसे हीईीई" कुशल बॅड बड़ाये जा रहा था.

प्रीति अपनी स्पीड बढ़ा चुकी थी, उसके मूँह मे अभी भी बस आधा ही लंड था. उसके सॉफ्ट लिप्स, कुशल के हार्ड लंड को पूरी जान से चूस रहे थे.

" प्रीतीिई, ईईइ लव यू.............. ओह, आइ........एम............" और एक तेज पिचकारी प्रीति के गले से टकरा गयी. प्रीति ने कोशिश की लंड को निकालने की लेकिन जैसे वो उसके मूँह मे फँसा हुआ था.

जैसे ही वो प्रीति की मूँह से बाहर आया, प्रीति सीधा बाथरूम मे भाग गयी और खांसने लगी.

कुशल बहुत रिलॅक्स था. उसने आज जन्नत की सेर कर ली थी. उसे यकीन नही हो रहा था कि प्रीति जैसी सेक्सी गर्ल उसके साथ न्यूड कंडीशन मे है. प्रीति बाथरूम के अंदर अपने आप को रिलॅक्स कर रही थी. और थोड़ी देर बाद वो कुशल का टवल लपेट कर बाहर आती है. दोनो की नज़रे मिलती है, प्रीति एक अच्छी सी स्माइल देती है उसे.

वो कुशल के ड्रेसिंग टेबल के सामने आकर अपने हेर कोंब करने लगती है. कुशल उसकी बॅक पर मज़ाक मे एक चपत लगाता है. प्रीति उसे नॉटी स्माइल के साथ देखती है. कुशल अब वॉशरूम के अंदर जाता है और गेट बंद कर लेता है.

वो बहुत हॅपी है कि आज रात उसका सपना पूरा होने जा रहा है. ये सोच कर ही उसके लंड मे फिर से एनर्जी आती जा रही है. वो फ्रेश होकर बाहर निकलता है लेकिन ये क्या. प्रीति रूम मे नही है और नही उसके कपड़े. कुशल पागलो की तरह उसे देखता है लेकिन वो दिखाई नही देती.

कुशल कपड़े पहन कर बाहर आता है और प्रीति के रूम के बाहर आकर देखता है कि रूम अंदर से लॉक है. कुशल उसके डोर को नॉक करता है.

प्रीति - (स्माइल करते हुए) " कौन है"

कुशल -" ओपन दा डोर प्रीति".

प्रीति -" आज सारे डोर ओपन कर दिए लेकिन अब ये डोर ओपन नही होगा". वो रूम के अंदर से ही हंस हंस कर बोल रही थी.

कुशल -" लेकिन अभी तो, अभी तो....."

प्रीति -" अभी तो क्या?"

कुशल -" अभी तो बहुत कुच्छ बाकी है"
 
दरअसल इस सीन से पहले जब स्मृति अपने पति के रूम में गई थी तो तब तक उसकी हालत लॉयन खराब कर चुका था, सेक्स किए हुए उसे भी बहुत दिन हो चुके थे और लॉयन जैसे किसी अनजान ने उसके जज्बातों को भड़का दिया था,

स्मृति जब अपने रूम में पहुंची थी तो उसने पंकज को जगा हुआ पाया, तभी उसने डिसाइड कर लिया कि आज वह पंकज के साथ सेक्स करके ही रहेगी नहीं तो बहुत मुश्किल हो जाएगी, पंकज की हालत सिमरन पहले ही खराब कर चुकी थी और तभी से उसे भी कुछ नसीब नहीं हुआ था, इधर स्मृति कमरे में पहुंचकर बेड़ पर जा चढ़ी और पंकज के ठीक सामने आकर खड़ी हो गई, पंकज की दोनों सीधी टांगे स्मृति के टांगों के बीच में थी और फिर उसे स्मृति ने एक स्माइल दी जिसने पंकज को समझा दिया की स्मृति को आज प्यार की जरूरत है ,पंकज स्मृति का हाथ पकड़ कर खींचता है और अपने सीने से लगा लेता है ,आज स्मृति पंकज कि वह ख्वाहिश भी पूरी कर देना चाहती थी जो उसने कभी नहीं की थी यानि उसके लंड को चूसने की इच्छा ,थोड़ी देर के लिए उनके हाथों का मंथन चला और उसके ठीक बाद स्मृति ने पंकज का लंड निकाला और उसे अपने मुंह में ले लिया ,पंकज को ऐसे लगा जैसे ऊपर वाले ने उसकी कैसे सुन ली ,

इसी दौरान आराधना तैयार होकर नीचे आ गई और उसने पंकज और स्मृति को इस हालत में देख लिया था ,आराधना उन दोनों के बेडरूम के गेट पर साइड में खड़ी थी ,उसने अपनी पीठ दीवार से लगा दी थी और आंखें बंद थी ,उसको जैसे पंकज का लंड देखकर चक्कर सा आ गया हो , जिसे स्मृति खूब मन से चूस रही थी, आराधना की यह अवधारणा बन चुकी थी कि शायद मम्मी इसे रोज ऐसे ही चुस्ती होगी, लेकिन उसे भी पता नहीं था कि आज स्मृति भी किस आग से गुजर रही है जो लॉयन भड़का चुका था, बड़ी हिम्मत करके आराधना ने फिर से अंदर झांकने की कोशिश की ,अंदर का नजारा और भी हॉट था, पंकज अपनी टी-शर्ट उतार रहा था और उसका आधा लंड अभी भी स्मृति के मुंह में था ,आधा लंड मुह में होने के बावजूद भी काफी लंड बाहर ही था ,पंकज ने जैसे ही अपनी टी शर्ट उतारी उसकी बालों से भरी मजबूत छाती नंगी हो गई, एकदम माचो मैन लग रहा था,

स्मृति अपना मुंह ऊपर नीचे करके उसके लंड को पूरा अंदर लेने की कोशिश कर रही थी ,लेकिन वह जा नहीं रहा था ,उसके लंड की नसों को देखकर आराधना को ऐसा लग रहा था जैसे वह अभी फटने वाला है, लेकिन उसे नहीं पता था कि लंड की यह खासियत होती है

आराधना फिर से अपने आप को पीछे कर लेती है ,उसके पांव कांप रहे थे, दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई थी, सर चकरा रहा था ,कल रात ही उसने पहली बार हस्तमैथुन किया और आज सुबह ही उसे एक मजबूत लंड दिखाई दे गया ,उसे भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसकी जिंदगी में किस्मत ये कैसा खेल रहे खेल खेल रही है,

तभी उसे अंदर से पंकज की आवाज सुनाई देती है वह कान लगाकर गौर से सुनने की कोशिश करती

पंकज - "पूरा अंदर लेना डार्लिंग" पंकज स्मृति से कह रहा था
स्मृति - "यह कोई बच्चों का लोलीपोप नहीं है ,मुझे ही पता है कि मैं इसे कैसे अंदर ले रही हूं, इससे ज्यादा मुझसे नहीं होगा "स्मृति ने अपने मुंह से पंकज के लंड को हटाकर यह बात कही
पंकज - " मेरी जान मर्दों के लंड तो ऐसे ही होते हैं, कहो तो बाहर से कोई छोटा खिलौना ले कर आता हूं" पंकज स्मृति को चिढ़ाते हुए कहते हैं
स्मृति - "मुझसे यह गंदी लैंग्वेज में बात मत किया करो" और फिर से स्मृति ने अपना मुंह उसके लंड पर दोबारा लगा दिया

बाहर खड़ी आराधना ने जब अपने पिता के मुह से लंड शब्द को सुना तो वह भी शॉक रह गई, और वह रोमांचित भी थी, शायद उसे यह सब अच्छा भी लगा और शायद उसने यह भी सोचा होगा कि पति पत्नी कितने पर्सनल होते हैं ,बाहर तो किसी के रूप का कोई पता नहीं चलता और असलियत में वह कैसी भाषा में बात करते हैं, पता नहीं आज वहां खड़ा रहना आराधना के लिए बहुत मुश्किल हो रहा था, उसके बर्दाश्त से सब चीजें बाहर होते जा रहे थे, उसका कुंवारा और जवान मन पागल होता जा रहा था, उसके चेहरे पर कुछ गंभीर भाव भी थे ,लेकिन यह क्यों थे पता नहीं ,उसे अब रुकना बेहद मुश्किल सा हो रहा था, लेकिन वह अपने कदम भी नहीं हिला पा रही थी ,बड़ी हिम्मत करके वह थोड़ा आगे को बढ़ी , वह दबे पांव निकलने की सोच रही थी कि तभी उसके पांव उसे धोखा दे गए और एक मामूली सी आवाज ने पंकज का चेहरे को बाहर की तरफ घुमा दिया ,जब नियति कोई चीज होती है तो उसे कोई भी नहीं टाल सकता ,जैसे ही थोड़ी आवाज हुई आराधना ने अपने कदम रोक लिए

और रूम की तरफ देखा और उनकी तरफ देखते ही पंकज और आराधना की नजर मिल गई, आराधना इस टाइम साइड पोज़ में पंकज के सामने थी जिससे उसके बूब्स की शेप पंकज को क्लियर दिखाई दे रही थी, आराधना को Idea था कि अब शायद वो घबरा जाएंगे और मां को वहां से हटाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ ,पंकज की तरफ से कोई रिएक्शन नहीं था ,उसने अभी दोनों हाथों से स्मृति के चेहरा पकड़ा हुआ था जो उसके लंड को चूसने में मस्त थी ,करीबन 10 सेकंड तक दोनों की नजरें मिली रही और पता नहीं कितने टाइम में दोनों की नज़रों ने एक दूसरे से क्या कहा ,आराधना की सांसे ऐसी ऊपर नीचे हो रही थी कि मानो पता नहीं क्या हो गया हो, कुंवारी लड़की का लंड देखना ठीक ऐसा ही जैसे किसी ने अपने बेडरुम में कोई सांप या बिच्छू देख लिया हो ,आराधना और पंकज की नजरें अभी भी मिली हुई थी, कमाल की बात यह थी कि कोई सिचुएशनल ड्रामा नहीं हो रहा था, जैसे कोई शर्मा कर नजरे चुराई या फिर पंकज उठकर गेट बंद करें,

आराधना फाइनली अपनी नजर निचे करती है और ऊपर की ओर जाने लगती है, उसके चेहरे पर ना जाने क्यों गुस्से के भाव थे, वह धीरे धीरे ऊपर आ जाती है और डायरेक्ट बाथरुम में घुस जाती है, बाथरूम में जाते ही वह अपनी टी-शर्ट उतार कर फेंक देती है और बाथ टब के कोर्नर में बैठ जाती है, उसने अब ऊपर कुछ नहीं पहना हुआ था ,रह रह कर उसको वह सब याद आ रहा था जो उसने नीचे देखा था, बोटम में वह कंफर्टेबल फील नहीं कर रही थी तो उसे भी उतारने का फैसला किया उसने,

उसको ऐसा फील हो रहा था जैसे सिर दर्द हो रहा हो, बॉडी में मीठा मीठा दर्द हो रहा था ,वह ख्यालों में खोई हुई थी, उसको अभी भी यकीन नहीं हो रहा था कि उसने मॉम डैड को ऐसे ओपन में यह सब करते हुए देख लिया था ,जबकि तीन जवान बच्चे घर में ही है, और क्या वह यह सब रात से ही कर रहे हैं, क्या सेक्स ऐसी चीज है कि रात में भी पेट नहीं भरता उनका ,यह सब सवाल उसके दिमाग में घूम रहे थे,

जरुर ज्यादा आग मां को ही लगी हुई है ,तभी तो कितने प्यार से हो पापा का लंड ........वह सोचते हुए रुक जाती है,
"हां शायद मैं सही हूं डेड तो नॉर्मल थे लेकिन माँ ज्यादा उतावली हो रही थी, रात में उनका पेट नहीं भरा इतने बड़े साइज को भी वह बार-बार लेने की हिम्मत रखती है " स्मृति की एक इमेज उसके मन में बनती जा रही थी पता नहीं क्या सोचते सोचते उसका एक हाथ अपने पहुंच गया और जैसे ही उसी को टच किया उसे समझ आ गया कि उसका बेहद ज्यादा असर हुआ है

"क्या मेरी उम्र सही है यह सब सोचने की" आराधना के दिमाग में यह सवाल आ रहे थे, कहीं इससे मेरे फ्यूचर पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा ,पता नहीं वह क्या क्या सोचने में बिजी थी

सोचते सोचते फिर से उसकी एक उंगली अंदर जा चुकी थी ,वह ऊँगली को अंदर से और अंदर तक पहुंचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसके दिमाग में बस वही सीन घूम रहा था जो वह नीचे देख कर आई थी, जो उसे और ज्यादा एक्साइट कर रहा था, बाथ टब पर बैठना से उसे कम्फ़र्टेबल नहीं लग रहा था तो बाथरूम के फ्लोर पर ही बैठ गई, उंगली अंदर और बाहर हो रही थी लेकिन उसे थोड़ा और आरामदायक करने के लिए उसने अपनी टांगे और ज्यादा फैला दी जिससे उसके उंगली और भी स्मूथ होकर अंदर जाने लगी थी ,वह बिना ब्रा और पैंटी की थी यानि बिल्कुल नंगी, ये आराधना स्टाइल नहीं था लेकिन नीचे के सीन ने उसकी आग को और बढ़ा दिया था

दूसरी तरफ स्मृति पंकज का लंड चूसने में लगी हुई थी ,लेकिन पंकज का ध्यान कहीं और ही था, वैसे भी पति को पत्नी का क्रेज एक लिमिटेड टाइम तक ही रहता है, स्मृति को ये आशा थी कि आज वह पंकज के लंड को चुसेगी तो पंकज भी उसे ओरल सेक्स का सुख देगा ,लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, स्मृति जैसे ही उसके लंड से हटी पंकज बोला कि डार्लिंग अब नहीं रात को प्लान बनाएंगे

स्मृति को तो जैसे सारे अरमान मर गए, उसे लगा कि दुनिया के सारे गम उसी पर टूट पड़े हो, एक झटके में वो बेड से उतरी और कपड़े उठाकर बाथरुम में घुस गयी ,कहा जाता है कि आग और औरत की आग को बुझाया न जाए तो पूरा घर हिला देती है

आराधना धीरे धीरे अपनी स्पीड बढ़ा चुकी थी ,उसका एक हाथ चुत पर था तो दूसरा अपने बूब्स पर पहुंच गया था ,वह बहुत ज्यादा एक्साइटेड हो गई थी और यही था जो वह कर सकती थी
आह्ह्ह ओह्ह्ह्हह के बेहद गर्म साउंड उसके गुलाबी होठों से बाहर आ रहे थे, और कुछ ही मिनटों में वो ठंडी पड़ गई, उसे अब की बार कुछ ज्यादा ही मजा आया ,उसके दिमाग में फिर से बहुत सारे सवाल आ रहे थे कि हर बार उसका मज़ा बढ़ रहा है लेकिन कहीं तो इसका एंड होगा आखिर यह कैसी प्यास है जो जितना बड़ा उतना ही बढ़ती है

कल रात से वह दो बार हस्तमैथुन कर चुकी थी और अब आराम करना चाहती थी इसलिए बेड पर आ कर लेट गई

संडे शाम को पूरी फैमिली शॉपिंग जाने के लिए रेडी थी ,लेकिन सबके माइंडसेट कहीं ना कहीं डाइवर्ट है, खैर नॉर्मल तो सभी देख रहे थे ,पंकज ने अपनी गाड़ी घर के गेट पर लगा दी ,स्मृति सबसे आगे पंकज के साथ बैठ गई ,और पीछे वाली 3 सीटों पर आराधना उसके बाद कुशल और सबसे अंत में प्रीति बैठी हुई थी, आराधना और स्मृति ने सूट पहना हुआ था जबकि प्रीति ने जींस और टी-शर्ट

गाड़ी घर से बाहर निकल गई, सब शांत हैं पंकज नॉर्मल म्यूजिक ऑन कर देता है ,पंकज अपने ड्राइविंग मिरर में पीछे देखता है और उसे आराधना के नेचुरल गुलाबी होंठ दिखाई दे जाते हैं, वह अपनी गर्दन को थोड़ा सा और नीचे करता है तो मिरर में ही उसकी नजरें आराधना से मिल जाती हैं, पंकज उसे एक नॉर्मल सी स्माइल देता है लेकिन वो ऐसे मुंह फेर लेती है जैसे उससे गुस्सा है ,पंकज को यह बड़ा अजीब लगा,

स्मृति पता नहीं किसके ख्यालों में गुम है और कुछ नहीं बोल रही है, कुशल का असली गुस्सा प्रीति पर था जो कि उसे कल से ही आ रहा था लेकिन वह कुछ बोल नहीं रहा था ,पूरी गाड़ी में एक सन्नाटा जिसे प्रीति तोड़ती है

प्रीति -"क्या भाई बड़ा अपसेट सा लग रहा है सब ठीक तो है ना , तू तो तो शॉपिंग के लिए बड़ा एक्साइटेड था" प्रीति ने कुशल को चिढ़ाते हुए कहा
कुशल - " नहीं यार बस ऐसे ही सोच रहा हू की आज क्या क्या ख़रीदूँ"। कुशल ने बात को टालते हुए कहा

प्रीति -" ठण्डा पानि, हे हे हे हे"। प्रीती ने कुशल के कान के क़रीब आकर स्लो वौइस् में कहा

कुशाल -" तेरी चूत में डालने के लिए?" कुशल ने भी उसी स्टाइल में आराम से प्रीति के कानो में कह दिया जिसे और आस पास वाले नहीं सुन सकते थे क्यूंकि म्यूजिक चल रहा था। प्रीती इस बात को सुनकर समझ सकती थी की कुशल में कितना गुस्सा है अभी भी।

" पापा आज गर्मी भी बहुत है प्लीज आइस क्रीम पार्लर पे तो जरूर लेकर चलना"। कुशल में पंकज से कहा

" हाँ हाँ क्यूँ नहीं, क्यूँ आराधना तुम्हारा क्या सोचना है" पंकज ने मिरर में देखते हुए ही आराधना से पुछा,आराधना ने भी जवाब दिया कि क्यों नही

पंकज - " क्यों स्मृति, तुम्हारा क्या ख्याल है आइस क्रीम के बारे में?" पंकज स्मृति से पूछ्ता है।

स्मृति - "मेरा मूड नहीं है", स्मृति ने जवाब दिया

" हाँ तेरा क्यों मूड होग, जब घर बेठे बेठे ही vip आइस क्रीम चूसने को मिल रही है", आराधना अपने मन में ही सोचती है, पता नहीं क्यूँ वो स्मृति के बारे में ऐसा सोच रही थी

खैर थोड़ी देर की ड्राइव के बाद वो मॉल पहुँच जाते है, सबसे आगे स्मृति और पंकज है, उनके पीछे आराधना और सबसे पीछे प्रीती और कुशल,
पंकज स्मृति का हाथ पकड़ लेता है और ये सब आराधना देख रही थी, उसके चेहरे पे स्माइल जरा भी नहीं थी

पीछे कुशल और प्रीती दोनों शांत थे, लकिन प्रीती उस चुप्पी को तोड़ती है -

प्रीति - " ओए होए कुशल आज तो हीरो बन जाएग, नए कपडे लेकर। "

कुशल -" मुझे हीरो बनने के लिए नए कपड़ो की जरुरत नहीं है" कुशल ने ऐटिटूड में आकर कहा

प्रीति - " कितनी ग़लतफ़हमी है तुझे, हा हा हा हा ह, आइना देखा कर डैली"

ये बात बोल कर प्रीती तेज तेज आगे आराधना के पास जाने लगती है, कुशल की निगाहें बस उसके मटकते हिप्स पर थी, जीन्स बेहद लो वेस्ट और टाइट थी और उसने एक शार्ट टीशर्ट पहनी हुई थी जिससे उसकी जीन्स और टीशर्ट के बीच में खाली स्पेस था, कुशल ने गौर से देखा तो खाली स्पेस में उसकी रेड पैंटी दिखाई दे रही थी जिसकी एक मामूली सी स्ट्राइप स्टाइल में जीन्स से बहार थी।

" लड़की को इतना सेक्सी भी नहीं होना चहिये" कुशल अपने मन में सोच रहा था, प्रीती की गाँड की तरफ देखते हुए, तभी प्रीती ने पीछे मुड कर देखा और कुशल को अपने हिप्स को घुरता पाया

" तेरे नसीब में नहीं है"। प्रीती ने पीछे मुड कर कुशल से कहा और है आराधना दीदी के पास भाग कर पहुँच गयी

अब कुशल पीछे अकेला रह गया था, उसकी निगाहें बस प्रीती के हिप्स पर ही जमी हुई थी और जमे भी क्यों न, जो स्लोप उसकी कमर में कुशल देख रहा था ऐसा स्लोप तो आज कल कम ही देखने को मिलता है

प्रीति को भी पूरा अहसास था कि कुशल की निगाहें कहाँ है तो वो और भी मटक मटक के चल रही थी

आगे प्रीती और आराधना चलते चलते बाते करते है -

प्रीति -" दीदी क्या बात है, कहाँ खोयी रहती हो आज कल, कोई इश्क विश्क का तो चक्कर नहीं है"प्रीती ने मजाकिया अंदाज़ में आराधना से कहा

आराधना -" मैं ऐसे चक्करो में नहीं पडती" आराधना ने रिप्लाई किया

प्रीति -" हाँ में तो भूल गयी थी कि हमारी दीदी हिटलर है, हे हे हे हे"

आराधना -" अगर मुझे ये चक्कर अच्छे नहीं लगते तो मैं हिटलर हो गयी?"

प्रीति -" दीदी अगर आप जैसी ही थिंकिंग सभी लड़कियों की हो गयी तो इन सब लड़को का क्या होगा, इनका तो जीवन ही बेकार हो जाएगा, लेकिन चलो छोडो, ये बताओ की आज क्या खरीद रही हो? आज तो कुछ ऐसा ले लो जिससे बिजली गिर जाए चारो तरफ"। प्रीती ने फिर शरारती अन्दाज़ में कहा

आराधना - " मुझे ऐसे कपडे पसन्द नहीं है जिनसे बिजलियाँ गिरे और मुझे हमेशा पुरे कपडे पहनने ही पसंद है, तेरी तरह नहीं जो है पैंटी दीखाती घूम रही है",आराधना ने प्रीती की पैंटी की विज़िबल स्ट्राइप की तरफ इशारा करते हुए कहा

प्रीति - " ओह्ह हो, कहीं ऐसा तो नहीं है की आप जेलस फील कर रहीं है, और वैसे भी दीदी क्या करु , कैसे छुपाऊँ इस बॉडी को, ये साली छिपति ही नही" प्रीती ने बड़े ही रोमांटिक अंदाज़ में कहा और फिर वो हंसने लगी

*****

आराधना - " जेलस? मैं क्यों जेलस होने लगी तेरे से, सेक्सी अगर चाहूं तो मैं भी दीख सकती हू लेकिन मैं ऐसा चाहती नहीं, "

प्रीति - " वो तो ठीक है लेकिन दीदी आज कल ब्रांड्स पुरे कपडे बनाने में भी डरते है, बिकते ही नहीं, जो बिज़नेस टिका हुआ है वो आप जैसी क्लास कस्टमर्स के दम पर ही टीका हुआ है,", प्रीती ने फिर से एक तीर छोड़ दिया,

इतने मैं आगे जाकर पंकज और स्मृति रूक गए और बच्चो का इंतज़ार करने लगे, धीरे धीरे आराधना, प्रीती और कुशल तीनो वहां पहुँच गए,

" आज हम बाते बनाने नहीं शॉपिंग करने आये है" पंकज ने मजाक में सब बच्चो से कहा, और फिर तीनो एक बहुत बड़े ब्रांडेड शो रूम में घुस जाते है, पंकज और स्मृति अभी भी साथ साथ थे और आराधना उनके पीछे चल रही थी,

प्रीति लेडीज वेस्टर्न डिपार्टमैंट में घुस गयी थी क्यूंकि वो वेस्टर्न क्लोथ्स की शौकीन थी, कुशल भी प्रीती के पीछे चलने लगता है,

प्रीति -" तू कहाँ मेरे पीछे पीछे आ रहा है?",

कुशाल -" सोचा तेरी हेल्प कर दूँ शॉपिंग मे",

प्रीति - " मैं कोई दूध पीती बच्ची नहीं हू और न ही पहली बार शॉपिंग कर रही हूँ, तू जा अपने डिपार्टमैंट में", और प्रीती कुशल के चेस्ट पर हाथ लगा कर पीछे धक्का देने लगती है,

कशाल -" मेरा डिपार्टमैंट? क्या तू नहीं है मेरा डिपार्टमैंट", ये बात सुनकर प्रीती शर्मा जाती है,

प्रीति -" कुशल हर टाइम मज़ाक़ नहीं, प्लीज तू जा अपने कपडे ख़रीद, नहीं तो अगर मदद करनी ही है तो जा आराधना दीदी की कर दे"

कशाल -" आराधना दीदी को एक बुरका गिफ्ट कर देता हूँ, उनकी शॉपिंग खत्म हो जाएगी, हा हा हा हा", और कुशल मेन डिपार्टमैंट की तरफ जाने लगता है,

****

आराधना अभी भी पंकज और स्मृति के पीछे थी, लेकिन पंकज और स्मृति को अब अहसास नहीं था और वो इस ख्याल में थे कि तीनो बच्चे जा चुके है, चलते चलते पंकज अपना एक हाथ स्मृति की कमर पे रख देता है लकिन स्मृति एक झटके में हटा देती है, आराधना ये सब देख रही थी, फिर पंकज और स्मृति दबी आवाज में बात करने लगते है, लेकिन आराधना के कान वहीपर थे -

पंकज -" क्या बात है ,मेरी जान क्यों गुस्सा है?", पंकज ने चलते चलते कहा

स्मृति - " मैं क्यों होने लगी गुस्सा",

" नख़रे तो देख, पूरी रात ऐसी तैसी करने के बाद भी नखरो की कमी नहीं है", आराधना अपने मन में ही बड़बड़ा रही थी,

पंकज - " डार्लिंग, क्या अभी तक मॉर्निंग वाली बात पे गुस्सा हो? चलो आज रात फिर मूड बना लेंगे, टेंशन क्यों लेती हो", पंकज ने स्मृति को रिलैक्स करते हुए कहा

स्मृति - " पता नहीं क्यों मेरे लाइफ में प्यार की कमी है", स्मृति ने सीरियस होते हुए कहा

आराधना का मुँह खुला का खुला रह गया ये बात सुनकर, " इतना बड़ा डण्डा लेने के बाद भी प्यार की कमी है लाइफ में, हे भगवान आखिर मेरी माँ की डिमांड क्या है, पता नहीं डैडी इतने नखरे क्यों झेल रहे है", आराधना अपने मन में सोचती है,

थोड़ा सा आगे चलने के बाद एक मॉडल गर्ल स्टेचू आती है जिसपे एक नाईट गाउन लगा हुआ था जो बेहद सेक्सी था, पिंक कलर में शिफॉन मटेरियल और वो भी बिलकुल ट्रांसपरेंट, नाईट गाउन का टॉप पोरशन ब्रा स्टाइल में ही था और नीचे एक एडिशनल पैंटी दी हुई थी, नाईट गाउन की जो लेंथ थी वो सिर्फ पैंटी तक ही थी, उस नाईट गाउन को देख कर पंकज रूक जाता है

पंकज -" स्मृति क्यों न आज तुम इसे लो" पंकज स्मृति को वो नाईट गाउन दीखाता है,

स्मृति - " अगर आपको पहनना है तो ले लो", स्मृति ने ऐटिटूड दिखते हुए कहा

पंकज - " डार्लिंग, मेरा दिल है कि मैं तुम्हे इस ड्रेस में देखु तो बुराई क्या है",

समृति - " क्या मेरे दिल की सारी बाते सुनी जाती है जो मैं सुनु",

पंकज -" गुस्सा क्यों होती हो, जो लेना है ले लो", आराधना ये सब बाते सुन रही थी,

इस तरफ प्रीति, एक बेहद सेक्सी और शार्ट ड्रेस को देख रही थी, ड्रेस का कलर रेड था, ड्रेस की लेंथ प्रीती की जांघ तक होगी, वो उस ड्रेस को लेकर एक सेल्स गर्ल के पास जाती है,

********

प्रीती -" एक्सक्यूस मी, क्या आप मुझे बता सकती है कि इस ड्रेस के साथ बॉटम कौन सा चलेगा", प्रीती ने सेल्स गर्ल से पुछा

सेल्स गर्ल - " नहीं इस ड्रेस के लिए आपको किसी बॉटम की जरुरत नहीं है, ये ड्रेस आपकी थाइज तक रहेगा,"

प्रीति -" कहीं ये ज्यादा छोटी तो नहीं है?"

सेल्स गर्ल -" आपके जैसी सेक्सी गर्ल के लिए ही तो ये बनी है, एक बार ट्राय तो करिये और अपने बॉय फ्रेंड को दिखाइये, कसम से कहती हूँ इलेक्ट्रिक शॉक लग जाएगा", सेल्स गर्ल ने एक आँख दबाते हुए कहा

प्रीति - " बॉय फ्रेंड? कौन बॉय फ्रेंड?",

सेल्स गर्ल -" वो ही जिसे आप इतने प्यार से इस डिपार्टमेंट से बाहर भेज रहीं थी, वाकई में शायद दीवाना है आपका", प्रीती समझ गयी थी कि वो कुशल की बात कर रही है और उसकी आँखे एक आईडिया के साथ चमक जाती है,

प्रीति -" क्या मैं एक बार ट्राय करके ये ड्रेस अपने बॉय फ्रेंड को दिखा सकती हूं?" प्रीती ने बहुत ही भोला बनते हुए कहा

सेल्स गर्ल-" ये भी कोई कहने की बात है, कहो तो आपके केबिन में ही भेज दूँ, वैसे भी अभी क्राउड इतना नहीं है?" सेल्स गर्ल में फिर से नॉटी स्टाइल में बोली

प्रीति - " प्लीज आप मेरा ये काम कर दीजिये, में ट्राइ कर रही हू और आप उसे अंदर मेरे केबिन में भेज दीजियेगा",

सेल्स गर्ल -" ऑफ कोर्स ,नो इस्सु, हमेशा लवर्स की हेल्प करती हू मैं, आप जाइये और ट्राय करिए",

प्रीति तुरंत उस ड्रेस को लेकर ट्रायल रूम में जाती है, एक झटके में टी-शर्ट उतार देती है, ट्रायल रूम मिर्रर्स में अपने बम टाइप बूब्स को ब्रा में देखति है, उसे खुद भी समझ आा रहा था कि वो कितनी सेक्सी है, दोनों हाथ पीछे ले जाकर ब्रा भी उतार देती है और दोनों बूब्स आाजद, उसके बाद वो है जीन्स को उतारती है, जीन्स उतरने में ही उसकी क्या किसी भी सेक्सी लड़की की सबसे ज्यादा मेहनत लगती है, जैसे तैसे वो भी उतर गयी और उसके बाद पैंटी भी, उसने बिना टाइम वेस्ट किये उस ड्रेस को अपने ऊपर ड़ाला और पीछे से ज़िप बंद करनी चाहि लेकिन फिर पता नहीं क्या सोच कर छोड़ दीं, अपने बाल उसने खोल लिए और फ्रंट से ड्रेस का व्यू थोड़ा सा खोल दिया जिससे बूब्स और थोड़े विज़िबल हो जाए, अभी वो और सेटिंग कर ही रही थी कि तभी ट्रायल रूम का गेट नॉक हुआ,
प्रीति -" हु इस दिस?
 
स्मृति मन ही मन सोच रही थी कि झूठा कहीं का. 10 मिनिट मे तो कितनी बार उसका रस निकल जाता.

लाइयन - वो मेरे बाल खींचने लगी थी, मे समझ गया था कि आग अब बहुत बढ़ गयी है और ज़्यादा करने से लॉस हो सकता है. मेने अपने होंठ हटाना ही सही समझा, थोड़ी देर बाद वो उठ कर बैठ गयी जब तक मे अपनी जीन्स खोल चुका था. वो आगे बढ़ी और और मेरी फ्रेंची के उपर से ही उसने मेरा लंड पकड़ लिया. उसकी आँखे ही बता रही थी कि उसे कितना सुकून मिला मेरे लंड का अहसास मिलने से.

स्मृति की हालत अब फाइनल स्टेज पर पहुँच गयी थी. एक जगह बीत कर उसका हाथ उपर से ही अपनी चूत पे पहुँच गया था. एग्ज़ाइट्मेंट के सागर मे वो डूबती जा रही थी. लाइयन उस पर अपना पूरा जादू चलाने मे कोई कमी नही छोड़ रहा था.

लाइयन - स्मृति जी यू देअर्?

स्मृति - यू कॅरी ऑन प्लीज़..

लाइयन - वैसे आप क्या कर रही है?

स्मृति - डॉन'ट आस्क, प्लीज़ बताओ फिर क्या हुआ.

लाइयन - प्लीज़ माइंड कीजिए अगर मे लंड चूत जैसे गंदे शब्द यूज़ कर रहा हू.

स्मृति - अब तो तुमने आदत ही डाल दी है. प्लीज़ बताओ मुझे कि फिर क्या हुआ.

लाइयन - स्मृति नीचे बैठी, मेरी फ्रेंची नीचे करी और मेरा लंड बाहर निकाल लिया. मेरे लंड को देख कर उसके फेस पे एक मुस्कुराहट थी. उसने टाइम वेस्ट नही किया और अपनी गुलाबी लिप्स को खोल कर मेरा लंड अपने मूँह मे ले लिया

स्मृति - एक बात बोलू ?

लाइयन - बोलो जी

स्मृति - यू आर सो रोमॅंटिक...

स्मृति ने ये बात टाइप करके भेजी ही थी कि ट्रिपल ऐक्स_लाइयन ऑफलाइन हो गया. स्मृति की ऐसी हालत हो गयी जैसे उसे कोई सेक्स के दौरान छोड़ कर चला गया हो.

दर असल, स्मृति अपने उपर से अपना कंट्रोल खोती जा रही थी. उसकी चूत को लाइयन बुरी तरीके से गीला कर चुका था. स्मृति की ऐसी हालत सेक्स के दौरान भी नही होती थी. वो एक शरीफ लेडी थी लेकिन उसके अंदर छुपि हुई भावनाओ को लाइयन जगा चुका था. जिसका अहसास स्मृति को नही हो पाया था. वो काफ़ी टाइम तक उसका वेट करती रही लेकिन वो ऑनलाइन नही आया. उसका मन अब सफाई मे नही लग रहा था, वो उठ कर अपने रूम की ओर चल देती है.

दूसरी तरफ आराधना उठ चुकी है. नॉर्मली सनडे को सभी बच्चे देर तक सोते है लेकिन आज एक नयी मॉर्निंग थी आराधना की लाइफ मे और इस एग्ज़ाइट्मेंट मे वो जल्दी उठ गयी थी. वो नहा कर बाथरूम से बाहर आती है. वॉर्डरोब से एक टी-शर्ट निकालती है और उसे देख कर वो वापिस रखने लगती है क्यूंकी उसे याद आ जाता है कि ये वो ही टी-शर्ट है जो उसे बूब्स पे से बेहद टाइट है जबकि वो लूस क्लोदिंग ही प्रिफर करती थी. ये इन्सिडेंट उस दिन का है जब प्रीति उसके रूम मे आई थी. फिर एक मुस्कुराहट के साथ पता नही क्यू वो ये फ़ैसला करती है आज उसी टीशर्ट को पहनेगी वो. उसके फेस पर एक मुस्कान थी जिसमे वो और भी खूबसूरत लग रही थी. बाथरूम के अंदर जाकर वो ब्रा पहनती है और पैंटी भी. पैंटी पहन ने से पहले एक बार फिर से अपनी छोटी सी पुस्सी पे हाथ लगाती और खुद ही चिहुनक जाती है. ब्रा पहन ने के बाद वो टीशर्ट पहनती है लेकिन टीशर्ट पहनते ही उसे अहसास हो जाता है कि ब्रा को उतारना पड़ेगा नही तो टी-शर्ट नही आएगी. वो बिना ब्रा के ही टी-शर्ट पहन लेती है और उसके नीचे एक बर्म्यूडा. जो कि उसके नीस तक था. नॉर्मली वो ऐसे कपड़े अवाय्ड ही करती थी.

अब वो बिना ब्रा के टी-शर्ट पहन कर नीचे आने लगती है आज मोम को सर्प्राइज़ दूँगी जल्दी उठ कर. सीढ़ियों से उतरते टाइम उसके बूब्स ऐसे हिल रहे थे मानो उनके किसी कपड़े मे समेट कर रखना पासिबल ना हो उन बूब्स को. वो नीचे आने पे देखती है कि सफाई तो की गयी है लेकिन मोम दिखाई नही दे रही है. वो किचन मे जाती है लेकिन वहाँ पर भी कोई नही था. वो मोम डॅड के बेड रूम की तरफ बढ़ती है, बेड रूम मे वो घुसने ही वाली थी एक सीन उसके कदम रोक देता है.
उसके चेहरे मे जैसे बॉडी का सारा लाल रंग उतर आया हो. ऐसा क्या देख लिया उसने? नज़ारा की कुच्छ ऐसा था, जिस टाइम वो बेडरूम मे घुसने वाली थी उस टाइम उसने देखा कि बेड पे पंकज बैठा है और उसका विशाल लंड उसकी मा स्मृति के मूँह मे था. पंकज ने सिर्फ़ टी-शर्ट पहनी हुई थी और स्मृति ने ब्रा और पैंटी. दोनो के बाकी कपड़े बेड से नीचे पड़े हुए थे. स्मृति पंकज के लंड पर झुकी हुई थी जबकि पंकज की आँखे सॅटिस्फॅक्षन से बंद थी. शायद ये पहला मौका था जब स्मृति ने उसके लंड को अपने मूँह मे लिया था. दोनो को आराधना ने क्लियर देखा लेकिन उन दोनो मे से किसी की नज़र आराधना पे नही पड़ी और उन्हे आइडिया भी नही था कि सनडे के दिन बच्चे इतनी जल्दी उठ सकते है.

ये पहला ऐसा सीन था जब आराधना ने किसी कपल को ऐसी हालत मे देखा हो वो भी तब जब वो अपनी जवानी की चरम सीमा पे थी. वो चीज़ जिसने उसको अंदर तक हिला दिया था - वो था पंकज का लंड. "क्या लंड ऐसे होते है" आराधना के मन मे शायद यही ख्याल आ रहा था. जिस तरीके से स्मृति का मूँह खुला हुआ था तो क्लियर पता चल रहा था कि उसे अपने मूँह को खोलने बहुत मेहनत करनी पड़ रही है और पंकज के लंड को मूँह मे लेने मे. आराधना साइड मे खड़े होकर तेज तेज साँसे लेने लगती है, उसको ऐसा फील हो रहा था जैसे फीवर हो गया हो. वो रह रह कर यही सोच रही थी कि कहाँ मास्टरबेशन मे दो फिंगर यूज़ नही कर पाई तो स्मृति इसे कैसे अड्जस्ट करती होगी
 
स्मृति - हे... क्यू बच्चू मज़ा आया. बड़े आए बूब्स दबाने वाले.

स्मृति भी थोड़ा ओपन हो रही थी उसके साथ.

लाइयन - थप्पड़ मारते ही वो स्लो मोशन मे आगे की ओर चल दी और किचन के गेट पर पहुँच कर फिर से एक बार मूडी और मुझे फिर से एक स्माइल दी. थप्पड़ खाने के बावजूद मे उसके बदन का भूखा था.

लाइयन - कैसी लगी मेरी चेस्ट???

स्मृति - मुझसे क्यू पुच्छ रहे हो?

लाइयन - नही मेने लिप्स को अलग करते हुए उससे पुछा कि कैसी लगी मेरी चेस्ट और वो कुच्छ नही बोली. मे समझ गया कि उसे पसंद आई. मेने अपने आपको झुकाया और अपने लिप्स को स्मृति के बूब्स पे रख दिया, मेरा स्टाइल थोड़ा अलग है तो मे उन्हे दबा भी रहा था और चूस भी रहा था. स्मृति आअहह करे जा रही थी.

स्मृति - क्या आराम से पेश नही आ सकते थे.

लाइयन - लेकिन स्मृति जी वो बोले तो सही. वो तो ऐसे पेश आ रही थी जैसे कब से अपनी चुचियाँ मुझसे ही दब्वाने को बचा कर रखी हो. ये काफ़ी देर चला फिर मेने अपने हाथ स्मृति की पैंटी की तरफ बढ़ाए. पैंटी जैसे ही थोड़ी नीचे हुई मुझे समझ आ गया कि जितनी खूबसूरत स्मृति है उतनी ही खूबसूरत उसकी चूत है. उसकी चूत पे घने बाल थे.

स्मृति - छ्ह्हि, गंदी कहीं की.

लाइयन - क्यू तुम्हे घने बाल अच्छे नही लगते.

स्मृति - वैसे मे तुम्हे क्यू बताऊ? लकिन फिर भी हिंट दे देती हू कि मुझे क्लीन रहना पसंद है.

लाइयन - बिल्कुल क्लीन?

स्मृति - यस. और अब ज़्यादा मत पुछो. बताओ क्या हुआ.

लाइयन - उसकी पैंटी नीचे होते ही मेने उसे लेटने का इशारा किया स्मृति के लेट ते ही मेने अपना मूँह उसकी चूत पे लगा दिया.

स्मृति को ऐसा लगा जैसे वो मर ही जाएगी. 3 बच्चो की मा होने के बावजूद आज वो एक कमसिन लड़की की तरह फील कर रही थी. उसको फील होने लगा था कि बॉडी मे फीलिंग आ चुकी है.

स्मृति - फिर?

लाइयन - मे स्मृति की चूत को पागलो की तरह चाट रहा था. वो बड़बदाए जा रही थी कि क़िस्स्सस्स मी....... कभी का ही अपने लिप्स वहाँ से हटा कर अपनी 2 फिंगर उसकी चूत मे घुसा देता था. कितना पानी था पता नही उसकी चूत मे. गर्दन इधर उधर पटक रही थी. मे समझ गया था कि इसको प्यार की ज़रूरत है लेकिन बदनामी से डरती है. उसकी चूत को करीब 10 मिनिट तक मे ऐसे ही चूस्ता रहा.
 
लाइयन - तो मुझे ही बताना पड़ेगा कि क्या मटक रहे थे क्यूंकी मेरी खूबसूरत दोस्त को नही समझ आया.

स्मृति - चलते हुए उसके हिप्स मटक रहे थे. अब खुश!! वैसे तुम्हारी जान कारी के लिए बता दू कि ये नॅचुरल है, कोई लेडी आप जान के ऐसा नही करती.

लाइयन - क्या आपके साथ कभी किसी पार्टी मे ऐसा हुआ है क्या?

स्मृति - जान ना ले लू उसकी जो ऐसा कर दे. तुम आगे बताओ

लाइयन - वो धीरे धीरे चल कर वहाँ पहुँच गयी जहाँ डीजे स्टेज था. दूसरी तरफ मे भी धीरे धीरे चला और डीजे स्टेज की दूसरी साइड खड़ा हो गया. अब वो और मे आमने सामने था और बीच मे डीजे स्टेज था.

स्मृति - ओके..

लाइयन - जैसे जैसे मौका मिलता मे उसे कोई ना कोई इशारा कर देता. फोन नंबर दोबारा माँगा तो उसने मना कर दिया, फ्लाइयिंग किस दी तो हंस के टाल दिया. इशारे मे उसे ये बताया कि तेरी बॉडी नही आग की भट्टी है जिसमे कोई भी जल जाए और वो धीमे धीमे स्माइल करती रही. फिर एक बार मेने उसे अपने थंब और फिंगर को गोल करके, उसके बीच मे उंगली डाल कर इशारा किया.

स्मृति - ओह माइ गॉड. क्या अब भी वो हँसती रही, उसने दो थप्पड़ नही जड़े तुम्हारे.

लाइयन - तो यानी आपको पता है कि वो इशारा किस चीज़ का होता है?

स्मृति - ज़्यादा स्मार्ट मत बनो. आगे बताओ.

स्मृति समझ गयी थी कि लाइयन ने उसकी बात पकड़ ली है.

लाइयन - थप्पड़ तो नही लेकिन धीरे धीरे वो मेरी तरफ चल कर आने लगी. सच कह रहा हू स्मृति जी मेरी तो फट गयी कि बेटा आज तो गया.

स्मृति - हा हा हा हा हा हा. गुड

लाइयन - वो धीरे धीरे चल कर मेरे तरफ आने लगी. मेरी तो साँसे ही अटक गयी थी, समझ आ गया था कि खूबसूरती बस धोका देती है.

स्मृति - गुड, ऐसा काम करोगे तो धोका ही मिलेगा.

लाइयन - वो आकर मेरे सामने खड़े हुए आदमी के पास आकर रुक गयी. उस आदमी की पीठ मेरी तरफ थी, और बोली के मे टाय्लेट जा रही हू. ये बात दर असल अपने हज़्बेंड को बोल रही थी जो मेरे सामने ही खड़ा था. मेरी जान मे जान आई और मेने एक बार और हिम्मत करके इशारे मे पुछ लिया कि इस पार्टी हॉल मे टाय्लेट कहाँ है. इस इशारे के टाइम उसका हज़्बेंड मुझे नही देख सकता था क्यूंकी उसकी पीठ मेरी तरफ थी.

स्मृति - फिर??

लाइयन - फिर क्या था, वो स्टाइल मे आगे बढ़ी और अपने हज़्बेंड को हग किया. अब उसका फेस मेरी साइड था और अपने हज़्बेंड के शोल्डर पे रखा हुआ था. और धीरे से अपने हज़्बेंड के कानो मे बोला कि हनी टाय्लेट सेकेंड फ्लोर पर है. ये बोलते हुए उसकी सेक्सी आइज़ मेरी साइड थी. मे समझ गया कि ये हिंट मुझे ही दिया गया है. मे ये भी समझ गया कि इस पार्टी हॉल से वो अच्छी तरह से वाकिफ़ है.

स्मृति - ओह्ह नो. शी वाज़ आ बिच.

लाइयन - वो जो भी थी लेकिन कसम से थी जबरदस्त. सच बता रहा हू कि अभी भी सोच रहा हू तो मेरा बाबू आसमान छुने की कोशिश कर रहा है.

स्मृति को भी काफ़ी टाइम हो गया था हज़्बेंड के साथ सेक्स किए हुए. ये एरॉटिक सिचुयेशन उसके चेहरे को और लाल कर रही थी.

स्मृति - बाबू?? ये क्या है?

लाइयन - समझिए ना स्मृति जी. बाबू यानी मेरा लंड.

लाइयन ने भी तुरंत मौके को देख कर टाइप कर दिया. स्मृति को पता था क़ी वो बिना कुच्छ पहने चॅट कर रहा है. इसीलिए उसकी एक फुल पिक्चर स्मृति के माइंड मे घूम गयी.

स्मृति - रहोगे जाहिल ही. अगर चॅट करनी है तो अंडरवेर पहनो और उसके बाद ऐसी बात ना करना.

लाइयन- लेकिन स्मृति जी...

स्मृति - लेकिन क्या?

लाइयन- आप तो मॅरीड है. डेली लंड को देखती ही होंगी, जब ये खड़ा होता है तो अंडरवेर मे कैसे समाएगा. वैसे भी मे फ्रेंची पहनता हू.

स्मृति ये ऐसी बाते सुन कर पता नही क्यू परेशान हुए जा रही थी. लाइयन की इस बात से उसे ये भी याद आ गया था कि वाकई मे उसे अपने हज़्बेंड से मिले हुए कुच्छ दिन ही गये थे. लाइयन की ये गंदी लॅंग्वेज उसके माइंड पे हावी हुए जा रही थी लेकिन वो शो नही कर रही थी.

स्मृति - बेशर्मी की भी हद होती है. अभी ट्राउज़र पहनो या कुच्छ भी पहनो और तभी चॅट करना. क्या तुम्हारे घर मे कोई मा या बहन नही है अगर कोई तुम्हे बिना कपड़ो के देख ले तो.

लाइयन - जी मेडम लो पहन लेता हू. लेकिन आपकी जान कारी के लिए बता दू कि मेरे घर मे मा बहन सब है लेकिन सब अपनी अपनी लाइफ मे मस्त है और सब अपने अपने रूम मे है. रही बात देखने की तो मे खुद जाकर तो दिखा नही रहा हू, अगर वो खुद ही देख ले तो उनकी अच्छी किस्मत से मे क्यू जलु.

स्मृति मन मे सोच रही थी कि ये कोई बेहद नालयक लड़का है. लेकिन दूसरी तरफ उससे चाटिंग करने की स्मृति को आदत भी पड़ गयी थी. वो रिलॅक्स थी क्यूंकी उसे ऐसा लगता था कि चाटिंग ही तो है. कुच्छ देर तक लाइयन का कोई रिप्लाइ नही था क्यूंकी शायद वो ट्राउज़र पहन रहा था या पहन ने का बहाना कर रहा था.

लाइयन - आइ आम बॅक...

स्मृति - ओके. अब बताओ अपनी उस बिच भाभी के बारे मे.

लाइयन - अगर कुच्छ नही सुन ना तो मत सुनो लेकिन मेरी उस भाभी के बारे मे कुच्छ मत कहो स्मृति जी.

स्मृति - ओह्ह हो. तो इतना लव हो गया है उस भाभी से.

लाइयन - लव की बात नही है. दर असल उसमे मुझे आपकी छवि दिखाई देती है और कोई आपके बारे मे कुच्छ बोले तो उसकी मा....

स्मृति को ये बात सुनकर अच्छा भी लगा और गुस्सा भी आया क्यूंकी उसने फिर से गंदी लॅंग्वेज यूज़ करने की कोशिश की. लेकिन स्मृति ने अब उसकी इन हर्कतो को इग्नोर करना शुरू कर दिया था ये स्पच कर कि है ही गँवार.

स्मृति - ओके ओके. सॉरी, चलो आगे बताओ.

लाइयन - सभी लोग पार्टी के लिए ग्राउंड मे थे. वो भाभी धीरे धीरे बिल्डिंग के लिए अंदर जाने लगी. लोंग ड्रेस को उसने अपने हाथो से पकड़ा हुआ था और थोड़ा सा ज़मीन से बचाती हुई चल रही थी, धीरे धीरे सबकी नज़रो से बचते हुए मे भी पीछे चल दिया.

स्मृति - ह्म्*म्म्ममम.......

लाइयन - वो मेरे आगे थी और उसकी नंगी पीठ ठीक मेरी आँखो के सामने थी. उसने पीछे मूड कर मुझे देखा और एक स्माइल दी. कसम से मुझे ऐसा लग रहा था जैसे स्मृति जी मेरे सामने हो. मे भी पागलो की तरह पीछे चला जा रहा था.

स्मृति भी ना चाहते हुए ऐसे मुकाम पर आ गयी थी जहाँ लाइयन मे उसको ऐसा फील करना शुरू कर दिया था कि वहाँ कोई भाभी नही बल्कि स्मृति खुद ही थी. स्मृति के कान गरम हो चुके थे, आँखे मॉर्निंग टाइम मे ही लाल हो रही थी. बड़ी मुश्किल से वो अपने को संभाले हुए थी.

स्मृति - ह्म्*म्म्मम.....

लाइयन - वो धीरे धीरे बिल्डिंग की तरफ बढ़ती जा रही थी. मुझे लगता है कि उसकी गान्ड आप के जितनी ही सेक्सी होगी जिसपे मेरी निगाह पूरी लगी हुई थी. सच बोल रहा हू मे उसे ऐसे देख रहा था जैसे स्मृति को देख रहा हू. मेरा लंड खड़ा होने लगा था.

वो गंदी पे गंदी लॅंग्वेज यूज़ किए जा रहा था लेकिन आज स्मृति उसे नही रोक पा रही थी बल्कि चाटिंग मे पूरा सपोर्ट कर रही थी.

स्मृति - फिर???

लाइयन - उसने बिल्डिंग मे एंट्री ली और स्टेर्स लेकर उपर चली गयी. धीरे धीरे मे बिल्डिंग मे पहुँचा और मुझे सीढ़ियाँ दिखाई दी लेकिन स्मृति दिखाई नही दी. ओह्ह सॉरी भाभी दिखाई नही दी.

स्मृति की साँसे तेज होती जा रही थी. उसे ऐसा लग रहा था जैसे लाइयन उसी की तरफ बढ़ रहा हो.

स्मृति - फिर??

लाइयन - मे फर्स्ट फ्लोर पे पहुँचा और उसके बाद सेकेंड फ्लोर पे. लेकिन वो मुझे दिखाई नही दे रही थी. मे उसे पागलो की तरह ढूंड रहा था जैसे कोई पागल प्रेमी अपनी लैला को ढूंड रहा हो.

स्मृति - ओके... मिली या नही?

लाइयन - टाय्लेट मे ढूँढा, ईवन लॅडीस टाय्लेट मे भी ढूँढा लेकिन नही मिली. बिल्डिंग मे कोई नही था, चारो तरफ भाग भाग कर पागल हो रहा था. तभी मुझे उस बिल्डिंग की किचन मे से आवाज़ कुच्छ आवाज़ आई.

स्मृति -फिर??

लाइयन - किचन मे जैसे ही मे पहुँचा. मे रिलेक्स हो गया, वो वोही थी. बड्रे रेफ्रिजरेटर से पानी की बॉटल निकाल कर पी रही थी. वो अपने बाल खोल चुकी थी. स्मृति जी ऐसे लग रही थी जैसे सेक्स की देवी हो.

स्मृति की हालत और खराब हुए जा रही थी.

स्मृति - फिर क्या हुआ???

लाइयन - उसकी और मेरी आँखे मिली, पता नही क्यू मुझे फिर से ऐसा लगा जैसे मेरे सामने स्मृति खड़ी हो. मेने उससे पुछा पानी मिलेगा? वो घूम गयी और फिर से पीठ मेरे सामने थी. मे धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ा. उसकी मस्त मोटी मोटी गान्ड मुझे इन्वाइट कर रही थी. मे उसके बहुत करीब पहुँच गया.

स्मृति - यार बहुत स्लो टाइप करते हो. जल्दी जल्दी लिखो ना.
स्मृति भी आज उतावली हो रही थी ये जान ने के लिए कि आख़िर क्या हुआ.

लाइयन - अब मे कोई रोमॅंटिक हीरो तो था नही जो टाइम लगाता. जाकर उसकी पीठ पे दोनो हाथ रख दिए, उसकी दोनो आँखे बंद हो गयी. मे समझ गया कि लोहा गरम है. मेने अपने दोनो होठ उसकी गर्दन पे टिका दिए. क्या खुसबु आ रही थी उसके बदन से. उसको गर्दन पे किस करते करते मेने अपने दोनो हाथ उसकी ड्रेस मे घुसा दिए और उसकी चुचियों को पकड़ लिया. क्या चुचियाँ थी उसकी शायद बिल्कुल आपके जैसी साइज़ 38 डी से कम नही होगा.

स्मृति तो खो चुकी थी. उसने आज तक ऐसी चाटिंग नही करी थी.

स्मृति - जी नही, मेरा साइज़ 38 डी नही है.

लाइयन - जो भी आपका साइज़ है लेकिन उसकी चुचियो को मे यही सोच कर दबा रहा था कि वो आपकी ही है.

स्मृति - लेकिन क्यू सोच रहे थे कि वो मे हू?

लाइयन - इससे मेरे लंड मे और ताक़त आ जाती है जैसे कि अभी भी ट्राउज़र से भी बाहर निकलने को तैयार हो रहा है.

स्मृति - हा हा हा हा. तो कोई ले आओ ना जो इसे शांत कर दे.

लाइयन - कभी ना कभी आएगी ही वो. मुझे अपने प्यार पे पूरा भरोसा है.

धीरे धीरे मे भी उसके पीछे पीछे चल दिया. वो सेकेंड फ्लोर के एक कॉर्नर मे मूड गयी और थोड़ा दूर चलते ही एक रूम के अंदर चली गयी. मेरी फट तो रही थी लेकिन हिम्मत करके मे भी अंदर चला गया. वो मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी. मेरे अंदर घुसते ही वो अपने दोनो हाथ पीछे ले गयी और अपने ड्रेस की नाट खोली और ड्रेस एक दम नीचे. अब वो बस अपनी पैंटी मे थी. क्या नज़ारा था स्मृति जी, इतनी सुंदर लेडी आज बस मेरे सामने पैंटी मे थी. लड़को के लिए तो किसी लड़की की पैंटी ही देखना काफ़ी होता है यहाँ तो पैंटी मे एक खूबसूरत बदन भी था.

स्मृति - ज़्यादा पैंटी देखने का शोक है तो घर मे देख लिया करो. किसी ना किसी की दिख ही जाएगी.

स्मृति ने उसका मज़ाक उड़ते हुए कहा.

लाइयन - हर किसी की पैंटी का कलर, साइज़ , ब्रांड सब पता है मुझे.

लाइयन ने भी बेशर्मी से जवाब दिया.

स्मृति - तुम तो हो ही निकम्मे. आगे बताओ.

लाइयन - मेने आगे एक कदम ही बढ़ाया था कि वो उसी पोज़िशन मे धीमे से बोली कि क्लोज़ दा डोर. उसके ये बोलते ही मुझे समझ आ गया कि मुझे थप्पड़ क्यू पड़ा था. मेने गेट बंद करा और आगे बढ़ा, ऐसे लग रहा था जैसे आग की तरफ बढ़ रहा हू. आगे बढ़कर मेने उसे जैसे ही बाँहो मे लिया उसके मूँह से आअहह निकल गयी. मे समझ गया कि वो प्यासी है. और मुझसे बेहतर उसकी प्यास भुजाने वाला भला कौन होता.

स्मृति को पढ़ते हुए भी डर लग रहा था कि पता नही अब क्या होगा. इमॅजिनेशन इस उस दुनिया मे ट्रिपल ऐक्स_लाइयन उसे डाल चुका था जिसमे उसे यही लग रहा था कि सब कुच्छ उसी के साथ हो रहा है.

स्मृति - फिर क्या हुआ?

लाइयन - क्या मुझे तुम्हारी, सॉरी उस भाभी की प्याअ बुझा देनी चाहिए?

स्मृति - शायद वो प्यासी है ही नही.

स्मृति का इशारा अपनी तरफ था.

लाइयन - क्या अपने हुश्न की वो दो बूँद अपने आशिक के उपर नही गिरा सकती. क्या वो यही चाहेगी कि उसका आशिक पैदा हो और मर जाए बिना उसे पाए ही.

स्मृति - देखो मेरी मजबूरी समझो.

स्मृति ने जैसे ही टाइप करके भेजा उसे अपनी ग़लती का अहसास हो गया कि उसने क्या टाइप कर दिया.

स्मृति - मेरा मतलब है कि अपनी उस भाभी की मजबूरी समझो.

स्मृति ने जैसे ही टाइप करके भेजा उसे अपनी ग़लती का अहसास हो गया कि उसने क्या टाइप कर दिया.

स्मृति - मेरा मतलब है कि अपनी उस भाभी की मजबूरी समझो.

जैसे जैसे स्मृति कन्फ्यूज़ हो रही थी, वैसे वैसे लाइयन को अहसास हो रहा था कि उसका जादू चल रहा है.

लाइयन - खैर छोड़ो, आगे बताऊ?

स्मृति - हाँ बताओ

लाइयन - उसके नंगे बदन को पकड़े हुए मेने उसके कानो मे किस करते हुए पुछा की आए हुष्ण की ज्वालामुखी तेरा नाम क्या है. पता है उसने क्या जवाब दिया?

स्मृति - क्या?

लाइयन - उसने बोला कि मेरा नाम स्मृति है.

स्मृति - तुम झूठ बोल रहे हो. ये नाम तुम जान बुझ कर बता रहे हो.

लाइयन - उसने मुझे यही नाम बताया अब अगर आप कहो तो मे अपनी तरफ से बदल देता हू.

स्मृति - ये अहसान करना ज़रूरी नही है. आगे बको

लाइयन - स्मृति के कंधो को पकड़ मेने अपनी तरफ घुमाया, उसका गुलाब जैसा चेहरा मेरे सामने था और गुलाबी होठ भी. मेने अपने दोनो होंठ उसके गुलाबी होंठो पे रख दिए. उसकी दोनो चुचियाँ मेरे सीने मे गढ़ रही थी. स्मृति ने मेरे शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए थे. स्मृति मेरे साथ ऐसे पेश आ रही थी जैसे मुझे खा जाएगी. मेरी शर्ट उतार दी उसने.

लाइयन का इशारा स्मृति की तरफ था.
स्मृति - उसे क्या वो भाभी समझा है. वो कभी नही आएगी. लेकिन तुम आगे बताओ.

स्मृति को अपनी चूत की मूव्मेंट पता चल रही थी. सच तो ये है कि उसकी चूत सुबह सुबह ही गीली हो गयी थी.

लाइयन - फिर उसके लेफ्ट बूब्स पर से मेने हाथ हटाया और उसकी ड्रेस की नेक पर बनी नाट को खोलने लगा मे. स्मृति जी उसने वो ज़रा जिससे मुझे और लगने लगा कि वाकई मे वो आपके जैसी है. वो घूमी और कस के एक थप्पड़ दिया मेरे गाल पे.
 
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