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.पता नही कौन था उसकी ख्यालो क़ी दुनिया मे जो उसके बदन के साथ खेल रहा था, पता नही कौन था जो ख्वाबो मे उसके कुंवारे भड़कते यौवन की आग बुझा रहा था, कौन था जो खवाबो मे उसके कोमल बदन को रोन्द रहा था. वो जो भी था लेकिन उसने आराधना को चोंका दिया था, एक तरफ वो एग्ज़ाइटेड थी कि आज वो मास्टरबेट करने मे सक्सेस्फुल हो गयी और उसने वो सूख देख लिया जिससे वो अंजान थी. उसके चेहरे की ग्लो बता रही थी के उसने बहुत एंजाय किया, चेहरा चमक उठा था. चेहरे की शाइनिंग देखते ही बनती थी, पहला मास्टरबेशन कुच्छ ऐसा ही अहसास है जैसे किसी इंडिविजुयल ने अंतरिक्ष मे कोई रॉकेट उड़ा दिया हो. उसको अहसास हो गया था कि फर्स्ट टाइम सेक्स कितना पेनफुल हो सकता है क्यूंकी मास्टरबेशन के दौरान उसकी पुसी मे उसकी दूसरी फिंगर एंट्री नही ले पाई.

आराधना उठती है और वॉशरूम मे जाकर अपने हाथ हो धोने लगती है. तभी उसकी नज़रे सामने वाले मिरर पे पड़ती है, अपनी नज़रो से खुद नज़रे मिलते ही वो शरमा जाती है. फिर से मिरर मे चारो और घूम घूम कर अपने आप को देखती है, वो थोड़ा सा मॅक्सी को उठाती है और फिर नीचे कर देती है. और फाइनली बिस्तर मे आकर शांति से सो जाती है. वो एक ऐसी चैन की नींद थी जिसे वो ही समझ सकती थी. जवानी मे ये बदन वैसे ही नही सोने देता है जब तक की इसकी भूख ना मिटाई जाए.

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सनडे मॉर्निंग, सबसे पहले स्मृति उठ गयी है. आज ईव्निंग मे उन्हे शॉपिंग के लिए जाना है लेकिन अभी मॉर्निंग मे स्मृति ने उठ कर घर के ग्राउंड फ्लोर को क्लीन करना शुरू कर दिया. सफाई करते करते वो मीठी मीठी आवाज़ मे सॉंग गुनगुनाती रहती है. सफाई के दौरान अपने स्मार्टफॉन को चेक करती है, जिससे पे करीब 1 घंटे पहले ही उस ट्रिपल ऐक्स_लाइयन के नोटिफिकेशन्स आए हुए थे. " क्या ये सोता भी है या नही". स्मृति अपने मन मे बॅड बड़ाती है. और फोन को साइड मे रख कर फिर से सफाई मे लग जाती है. ठीक 10 मिनिट बाद फिर से एक नोटिफिकेशन आता है, नोटिफिकेशन साउंड को सुनकर वो भाग कर फोन के पास आती है लेकिन इस बार ये एरटेल की तरफ से स्मस था. वो अपने माथे पे हाथ मारती है कि क्या हर टाइम यही लगता है कि वो लाइयन ही परेशान कर रहा होगा. और फोन को रखने ही वाली थी कि फिर से एक नोटिफिकेशन दिखाई दिया, उसने तुरंत देखा और ये लाइयन का ही था.

लाइयन - यू देअर?

लाइयन - हेलो, एनी ब्यूटिफुल लेडी ईज़ देअर?

स्मृति - क्या बात है बताओ. क्या रात को सोते नही हो क्या?

लाइयन - सो क्या जब मेरे फ्रेंड्स के पास मेरे लिए टाइम ही नही है.

स्मृति - ओह्ह्ह तो इतने गम है तुम्हारी लाइफ मे. वैसे कौन दोस्त है जिसके पास तुम्हारे लिए टाइम है.

लाइयन - है एक बहुत ब्यूटिफुल आंड स्वीट लेडी. अपने घर मे ही बिज़ी रहती है, दोस्त चाहे भाड़ मे उसे किसी का ध्यान नही है.

स्मृति समझ गयी थी कि लाइयन का इशारा खुद उसी की तरफ था.

स्मृति - ऐसा भी हो सकता है कि उस ब्यूटिफुल लेडी पे और भी रेस्पॉन्सिबिलिटीस हो. और उसे टाइम ना मिल पाता हो, क्यू?

लाइयन - क्या हमारी ही इतनी बुरी किस्मत है कि हमे दोस्त भी वो मिली जो सबसे ज़्यादा रेस्पॉन्सिबल है सबके लिए बस अपने दोस्त के लिए ही नही.

स्मृति - हा हा हा हा हा

लाइयन - मेरा दोस्त स्माइल करता है तो मुझे बहुत अच्छा लगता है.

स्मृति उसकी बात पढ़ कर शरमा सी जाती है.

स्मृति - लेकिन दोस्त ने इतनी बाते बनानी कहाँ से सीखी?

लाइयन - किस्मत सीखा देती है स्मृति जी. कौन सा हम मा के पेट से सीख कर आते है
.स्मृति - तुम्हारी बाते तो बस उपर वाला जाने. खैर और बताओ अब क्या कर रहे हो.

लाइयन - कपड़े उतार रहा हू.

स्मृति - तुम फिर से शुरू हो गये.

लाइयन - स्मृति जी अगर मे सच भी बोलू तो आपको लगता है मे शुरू हो गया. पता नही आपको तो मे ही सबसे बुरा लगता हू.

स्मृति - तो सुबह के 9 बजे है और तुमने मुझसे चाटिंग शुरू कर दी, पहले नहा ही लेते ना. किसने ज़बरदस्ती करी है.

लाइयन - वो स्मृति जी मे नहाने के लिए नही बल्कि सोने के लिए कपड़े उतार रहा था.

स्मृति - हा हा हा हा. फिर से सो रहे हो. गुड, सो जाओ.

लाइयन - फिर से नही, दर असल मे रात को सो ही नही पाया. इसीलिए अब सो रहा हू, अगर रात को सो गया होता तो अब नही सोता.

स्मृति - ठीक है अब चाटिंग बाद मे करना. कपड़े उतारो और सो जाओ, वैसे भी रात को मज़दूरी करी है बेचारे ने.

लाइयन - एक ही कपड़ा था बॉडी पे वो मे उतार चुका हू. और रात को मज़दूरी नही मेहनत करनी पड़ गयी थी स्मृति जी, जो मे पूरी मेहनत से करता हू.

स्मृति उसकी एक कपड़े वाली बात सुनकर शॉक्ड रह जाती है. उसके मन मे ये ख्याल आ रहा था कि क्या अब इसने कुच्छ नही पहना है. लेकिन शरम की वजह से वो पुछ नही सकती थी. चाटिंग करते करते कुच्छ दिन हो भी गये थे तो वो और धमकिया देना नही चाहती थी उसे.

स्मृति - ऐसी क्या मेहनत कर दी इस नालयक ने. पहाड़ तोड़ दिया क्या कहीं?

लाइयन - नही स्मृति जी, कल रात एक पार्टी मे गया था. वहाँ आप की जैसी एक भाभी से मुलाकात हो गयी और पूरी रात उसी के साथ मेहनत करने मे गुजर गयी.

लाइयन ने ये बात लिख तो दी लेकिन इस बात से स्मृति का पारा सातवे आसमान पे पहुँच गया.

स्मृति - यू ईडियट, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई उसको मेरा जैसे कहने की. कई बार मुझे लगता है कि उन्मेच्योर लड़का है लेकिन दिल का सॉफ है लेकिन तुम एक बेहद गंदे लड़के हो.

स्मृति का चेहरा गुस्से मे लाल हो चुका था.

लाइयन - स्मृति जी, क्या आप अपना सारा गुस्सा मेरे लिए ही बचा कर रखती है. मेरे कहने का मतलब था कि वो भाभी आप की तरह बेहद सुंदर और अट्रॅक्टिव लग रही थी. मेरा इमॅजिनेशन ऐसा था जैसे मे आपसे ही मिल रहा हू.

अपनी तारीफ सुन कर स्मृति थोड़ा रिलॅक्स हुई और अपने आप पर इतराती है.

स्मृति - ओके. तो घुमा फिरा कर बात मत किया करो. एनी वे लेकिन उसने तुमसे मेहनत कैसे कराई?

लाइयन - क्या स्मृति जी, कहीं आप दोबारा गुस्सा ना हो जाना लेकिन आप मेरी दोस्त है तो आपसे तो मे दिल की बात शेर कर ही लेता हू. आक्च्युयली कल एक फ्रेंड की बर्तडे पार्टी मे गया था. काफ़ी कलर्फुल पार्टी थी.

स्मृति- ह्म्*म्म्मम......
लाइयन - बिल्कुल आपके जैसी एक भाभी उस पार्टी की जान थी. ब्लॅक कलर की लोंग पार्टी ड्रेस मे वो एक अप्सरा लग रही थी. ड्रेस भी बॅकलेस थी तो उसकी नेक से लेकर कमर तक बॉडी का पूरा दीदार हो रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसी स्मृति जी ही उतर कर इस पार्टी मे आ गयीं हो. क्या बला की खूबसूरत थी वो. अगर मॅरीड ना होती तो कसम से शादी का पहला प्रपोज़ल मे ही देता. वो बात अलग है कि हम जैसे ग़रीबो के नसीब मे आप जैसे यानी उस भाभी जैसी खूबसूरती नही होती.

स्मृति इनडाइरेक्ट्ली अपनी तारीफ सुनकर पागल हुए जा रही थी. लाइयन भी मँझे हुए खिलाड़ियो की तरह पेश आ रहा था.

स्मृति - ह्म्*म्म.........

लाइयन - फिर क्या स्मृति जी, अपने हज़्बेंड के साथ खड़े होकर ड्रिंक ले रही थी लेकिन निगाहे चारो और ज़्यादा उजाला फेला रही थी. जैसे ही उसकी निगाहे मुझसे मिली, आदत से मजबूर हमारी एक आँख दब गयी उसकी तरफ.

स्मृति - कितने जूते पड़े फिर. मेरी जैसी शरीफ लेडी के साथ बद तमीज़ी करोगे तो जूते ही पड़ेंगे.

स्मृति भी ऐसे पेश आने लगी थी जैसे वो खुद फील कर रही हो कि सब कुच्छ उसके साथ ही हो रहा हो.

लाइयन- बचपन से आदत है जी, खूबसूरत माल को देखते ही आँख खुद दब जाती है. ड्रिंक करते हुए जब उसने मुझे आँख मारते हुए देखा तो उसे यकीन नही हुआ यानी वो श्योर नही थी. तिरछी निगाहो से उसने फिर देखा तो फिर से एक बार आँख दबा दी.

स्मृति खूबसूरत माल जैसे शब्द सुनकर और हॅपी हो रही थी लेकिन लाइयन को दिखा नही रही थी.

स्मृति - अच्छा....

लाइयन - उसके मूँह से एक हल्की सी स्माइल निकली और उस स्माइल पे तो मे मर मिटा. आख़िर वो मुझे अपने बेस्ट फ्रेंड जैसी लग रही थी यानी आपके जैसी.

स्मृति - ज़्यादा मक्खन मत लगाओ और आगे बताओ.

लाइयन - बस नैन मिलते रहे और जितनी बार भी मिले, हमारे नैन तो अपना कमाल दिखाते ही रहे. जब खूबसूरत आपके जितनी तो एक दो बार फ्लाइयिंग किस भी दे दी.

स्मृति - अगर मे होती तो कस के थप्पड़ जमाती.

लाइयन - आपके जैसी ब्यूटिफुल, स्वीट, हॉट, सेक्सी बॉम्ब मुझे थप्पड़ मारे तो जिंदगी भर ख़ाता रहू कसम से.

स्मृति - खैर बाते बनाने मे तो तुम्हारा कोई जवाब नही है अब आगे बताओ.

लाइयन - फिर क्या था मेने इशारे मे उससे उसका फोन नंबर माँगा लेकिन उसने चारो तरफ देख कर और सही मौके पे मुझे स्माइल करते हुए मना कर दिया.

स्मृति - गुड लेडी....

लाइयन - प्लीज़ मुझे गालियाँ मत देना लेकिन उसकी खूबसूरती से पागल हो चुका था मे. वो अकेले चलते वहाँ पहुँच गयी जहाँ डीजे स्टेज लगा हुआ था. चलने मे जो बात थी क्या बताऊ, उसके ,,,,, ऐसे मटक रहे थे जिससे सॉफ पता चल रहा था कि कितनी गदराई हुई बॉडी की मालकिन है.

स्मृति - गुड बॉय, अच्छा है कि सॉफ सॉफ नही लिखा.

लाइयन - आप बताएए ना कि चलते हुए क्या मटक रहे थे.

स्मृति - हप!!!! आगे बताओ
 
]कुशल बाहर जाना चाहता तो नही है लेकिन अपने डॅडी के सामने उसे बाहर आना पड़ जाता है. कुशल के बाहर आते ही प्रीति अपना गेट बंद कर लेती है.

पंकज स्टेर्स की तरफ बढ़ता है, उसका चेहरा आराधना के रूम के की ओर है. आराधना भी फाइनल सोने की तैयारी कर रही थी, इसलिए नाइट गाउन पहन चुकी थी. हालाँकि नाइट गाउन पूरी बॉडी का था लेकिन मेटीरियल बहुत ही थिन था, पंकज स्टेर्स की तरफ बढ़ रहा है और आराधना अपने रूम के गेट पर खड़ी है उसे बंद करने के लिए लेकिन अपने डॅडी को जाते हुए देख कर रुक जाती है. दोनो की नज़रे मिली हुई है, पंकज की निगाहे उपर से नीचे तक जाती है, आराधना अपनी जगह से हील नही रही है और कंटिन्यू स्माइल किए जा रही है. धीरे धीरे पंकज स्टेर्स पर पहुँच जाता है और नीचे चला जाता है. आराधना भी अपना गेट बंद कर लेती है. वो बिस्तर पर लेट जाती है लेकिन उसे नींद नही आ रही है. वो अपना टीवी ऑन करती है, काफ़ी चॅनेल चेंज करती है लेकिन फिर एक जगह रोक देती है क्यूंकी मूवी अमिताभ बच्चन की है जो कि उसका फेवोवरिट आक्टर है. लेकिन मिड नाइट मूवी "निशब्द " आ रही थी.

वो मूवी मे खोई हुई है तभी उसके मोबाइल की बेल बजती है. वो एक दम चोंक जाती है, जैसे किसी सपने से जागी हो. मन मे सोचती है कि इतनी रात को किसका फोन हो सकता है. मोबाइल उठाती है और देखती है कि फोन सिमरन का है. वो फोन पिक करती है.

आराधना-" हाई सिमरन, इतनी रात को क्यू परेशान कर रही है"

सिमरन -" मेरी जान मुझे यकीन था कि तू जाग रही होगी. और क्या कर रही है?"

आराधना -" कुच्छ नही यार मूवी देख रही हू"

सिमरन -" कौन सी मूवी चल रही है इतनी रात मे. पॉर्न है क्या"

आराधना -" अपने जैसा समझ रखा है क्या, मे अमिताभ जी की मूवी निशब्द देख रही हू".

सिमरन -" ओई मेरी जान क्या मूवी है, इतनी रात को ये मूवी कैसे पसंद आ गयी तुझे. अमित जी के चुम्मे वाली"

आराधना -" मुझे नही पता इसमे क्या है क्यूंकी मेने तो अभी शुरू की है. तू बता कि क्या बात है, फोन क्यू किया है".

सिमरन -" मेरी जान तो कल का प्रोग्राम पक्का है ना तुम्हारी शॉपिंग का. मे अपने बॉय फ्रेंड से प्रॉमिस कर चुकी हू".

आराधना -" क्यूँ इतना उतावली हो रही बॉय फ्रेंड से मिलने के लिए. वैसे हम सब कल जा रहे है और तू आ सकती है"

सिमरन -" लव्ली, थॅंक यू सो मच आरू. यू आर माइ बेस्ट फ्रेंड. चल कीप डूयिंग मास्टरबेशन, हे हे हे हे. बाइ"

आराधना -" क्या कहा तूने अभी"

सिमरन -" मेने कहा बाइ"

आराधना -" नही उससे पहले"

सिमरन -" उससे पहले मेने क्या कहा"

आराधना -" तूने कुछ मास्टरबेशन के लिए कहा ना"

सिमरन -" ओह्ह्ह मास्टरबेशन, कर ले अगर दिल है तो. वैसे भी अमित जी की सेक्सी मूवी चल रही है".

आराधना -"मे ऐसी लड़की नही हू, समझी".

सिमरन -" कैसी लड़की नही है? यार कभी तो ट्रॅक पर रहा कर. मे करती हू मास्टरबेशन और डेली करती हू. तो क्या इससे मे खराब लड़की हो गयी. सब करते है, तू नही करती इसीलिए गुस्से मे रहती है. अपनी इस बॉडी पे रहम कर, मास्टरबेशन एक नॅचुरल चीज़ है जो तेरी मा और मेरी मा ने भी किया होगा" सिमरन ने आज थोड़ा स्ट्रिक्ट होते हुए कहा
आराधना -" देख तू मा बाप तक ना पहुँचा कर".

सिमरन -" मे तो बस मा तक पहुँची थी, बाप के मास्टरबेशन के बारे मे क्या पता". सिमरन ने हंसते हुए कहा

आराधना -" सिमरन, ऐसी बाते करते हुए तुझे शरम नही आती. "

सिमरन -" यार क्यू अपना ब्लड प्रेशर बढ़ा रही है, मस्त रहा कर. और फिर कह रही यही कि अपनी बॉडी पे रहम कर, इसे और कुच्छ तो नसीब नही होने देगी तू कम से कम एक बात मास्टरबेट कर लिया कर. चल अब रखती हू, बाइ"

आराधना -" बाइ" और फोन कट जाता है.

आराधना के कानो मे सिमरन का एक एक शब्द गूँज रहा था. वो आज तक अंजान थी कि ये मास्टरबेशन फील क्या चीज़ होती है. ये बात उसके दिमाग़ पे हावी होती जा रही थी, इतने मे अमिताभ का किस्सिंग सीन आ जाता है. एक जवान लड़की अपने फादर के उमर के आदमी को यूँ लीप किस करते हुए देख कर आराधना का अंग अंग भड़क जाता है.

उसका चेहरा लाल पड़ जाता है और बॉडी मे जैसे ब्लड बहुत तेज स्पीड से दौड़ने लगता है. वो नही समझ पा रही थी कि आख़िर ये क्या हो रहा है.

उसका आँखे बंद हो जाती है और हाथ धीरे धीरे नीचे की तरफ जाने लगता है. उसने अपनी चूत को कभी किसी और तरीके से टच नही किया था. बहुत धीरे धीरे वो अपने नाइट गाउन को उपर करती है. उसके दिमाग़ मे लाखो सवाल चल रहे थे कि क्या ये सही है. लेकिन फिर उसके माइंड मे सिमरन के शब्द भी गूंजते है कि हर कोई करता है और हर लड़की करती है. वो दुविधा मे थी लेकिन अब रोका नही जा सकता था क्यूंकी उसकी बॉडी उसके कंट्रोल से बाहर हो रही थी.
नाइट गाउन को उपर करके वो अपने दोनो हाथ अपनी पैंटी पे ले जाती है. और दोनो हाथो से नीचे करने लगती है, उसे ऐसा फील हो रहा है जैसे कोई लड़का नीचे कर रहा हो उसकी पैंटी. वो एग्ज़ाइटेड भी है और उसे शरम भी आ रही है. धीरे धीरे अपने सीधे हाथ को वो अपनी पुसी पे ले जाती है और पहले टच मे ही. "आहह...... उसकी आँखे बंद हो चुकी थी और वो अब जैसे धरती पे नही थी. अपनी गोरी गोरी एक फिंगर को अपनी पुसी मे थोड़ा सा अंदर घुसाती है. "ओह......." वो ऐसे इमॅजिन कर रही है जैसे ये फिंगर उसकी नही बल्कि किसी मर्द की हो. उसकी फिंगर जैसे ही अपनी पुसी मे जाती है, पुसी लिक्विड से भीग जाती है. आज आराधना के अंदर का बीस्ट जाग रहा था, वो अपनी फिंगर को अपनी पुसी से हटाती है और अपने मूँह के पास ले जाकर उस फिंगर को चूसने लगती है. वो एक इमॅजिनरी वर्ल्ड मे थी जहाँ वो फील कर रही थी कि उसकी चूत मे कोई फिंगर डाल कर उसे खुद चूस रहा हो. उसकी बॉडी की ऐसी हालत हो रही थी जैसे जल बिन मछ्ली. चूत से पानी बहने लगा था. उसको जैसे बहुत गर्मी लगने लगी थी और बदन पसीने मे भीगने लगा था. वो फिर से अपना हाथ नीचे ले जाती है, और फिंगर से एक फिंगर अंदर आंड ज़्यादा अंदर " फक......... मी.......," आराधना के होंठो से खुद ब खुद निकल गया, वो आज जैसा फील कर रही थी वैसे कभी नही किया. उसको खुद यकीन नही हो रहा था कि उसके मूँह से आज ऐसे एरॉटिक शब्द निकल रहे है. उसने अपनी फिंगर की स्पीड बढ़ा दी थी, उसका मूँह आसमान की तरफ खुल चुका था और बाल बिस्तर मे फेल गये थे. आराधना की धीमी धीमी सिसकारियो से रूम गूँज रहा था " ओह, आआअहह, नो........." फिंगर अंदर बाहर और अंदर बाहर. अब आराधना का उल्टा हाथ ऑटोमॅटिकली अपने बूब्स पे पहुँच जाता है. दूसरी तरफ फिंगर अपनी फुल स्पीड पे थी, आराधना अपने बूब्स को पागलो की तरह प्रेस करने लगती है. उसके इमॅजिनरी वर्ल्ड मे कोई मर्द है जो उसके साथ खेल रहा है. " ऐसे ही...., प्यार करो मुझे...... आराधना के मूँह से खुद ही शब्द निकल रहे थे. उसकी बंद आँखो की इमॅजिनेशन से वो और ज़्यादा एग्ज़ाइटेड होती जा रही थी. फिंगर अंदर और ज़्यादा अंदर होती जा रही थी, तभी वो अपनी दूसरी फिंगर भी ट्राइ करती है. " औचह.........." उसे पेन हुआ और वो जैसे मन ही मन कहती है कि प्लीज़ आराम से, एक प्योर् सील पॅक चूत की मालकिन थी वो. अब वो एक ही फिंगर से लगी हुई थी, उसकी उत्तेजना फुल पीक पे थी. वो मर्द उसकी बॉडी को बुरी तरह रोंदे जा रहा था, उसकी इमॅजिनरी दुनिया उसको और एग्ज़ाइटेड कर रही थी. उसको खुद भी पता था कि उसके साथ कौन है उसकी ख्यालो की दुनिया मे. " आहह........ ओह.......... और उसकी बॉडी बुरी तरह अकड़ जाती है , पहली बार आराधना को अपने एंडिंग पॉइंट का अहसास हुआ था. जैसे ही उसका एंडिंग पॉइंट हुआ , उसको वो चेहरा दिखाई दे गया जो सपनो की दुनिया मे उसकी चुदाई कर रहा था और जो उसे इतना एग्ज़ाइटेड कर रहा था. वो चेहरा देखते ही उसकी आँखे एक दम खुल जाती है और हड़बड़ा कर वो अपनी नाइटी नीचे करती है और स्लोली स्लोली अपनी पैंटी उपर करती है.... आख़िर ये किसका चेहरा था....

दोस्तो आप लोग ही सोचो आराधना किसके ख्यालो मे मस्त हो रही थी
 
पंकज -" आरू, नीचे बोर हो रहा था तो सोचा कि क्यू ना आज उपर घूम आउ और अपने बच्चो के देख आउ. अक्सर मे उपर आता नही हू ना, वैसे भी कल सनडे है तो सोचा की घूम आउ".

आराधना -" ये तो आपने बहुत अच्छा किया डॅडी". आराधना अपने आप को और जगाती हुई बोलती है और उठ कर वॉश रूम की ओर जाने लगती है अपना चेहरा वॉश करने के लिए. उसने ट्राउज़र और टी-शर्ट पहनी हुई है.

पंकज -" रूम को काफ़ी क्लीन रखती हो तुम". पंकज रूम के चारो ओर देखते हुए बोलता है. इतने मे आराधना वॉशरूम मे घुस चुकी थी और बिना गेट बंद किए अपना फेस वॉश करने लगती है. उसके बाद फेस को टवल से क्लीन करते करते वो बाहर आती है

आराधना -" पापा, लड़किया हमेशा सफाई पसंद करती है और बाय्स..पूछो मत बस, एक बार कुशल का रूम देखोगे तो हैरान हो जाओगे"

पंकज -" हा हा हा हा. तो कुशल का रूम डर्टी है. क्या करे लड़को के पास टाइम ही नही होता". पंकज ने स्माइल करते हुए कहा

आराधना -" क्या? लड़को के पास टाइम नही होता और गर्ल्स फ्री रहती है. कमाल है डॅडी आप भी. मेरी तारीफ करने की बजाय कुशल को फेवर कर रहे हो". आराधना ने बनावटी गुस्से मे कहा

पंकज -" तारीफ तो आज मे तुम्हारी बहुत कर चुका हू". पंकज का इशारा साड़ी वाले इन्सिडेंट की तरफ था. ये सुनकर सिमरन शरमा जाती है.

आराधना -" मोम सो गयी क्या?" आराधना बात टालते हुए बोलती है

पंकज -" आज कल तुम्हारी मोम के पास टाइम ही कहाँ है मेरे लिए. उसके पास जाता हू तो पता नही क्यू दूर भाग जाती है". पंकज ने स्माइल करते हुए कहा. अब आराधना बेड के सामने चेर पर, टाँग पर टाँग रख कर बैठ जाती है.

आराधना -" तो आप ही मम्मी को परेशान करते होंगे तभी तो आपके पास से भागती है". आराधना ने हंसते हुए कहा

पंकज -" शादी के बाद तो पति का फ़र्ज़ है परेशान करना". पंकज ने बहुत लो वाय्स मे कहा

आराधना -" क्या कहा".

पंकज -" कुच्छ नही, मे तो बस ये कह रहा था कि तुम अपनी मम्मी का फेवर क्यू कर रही हो. तुम्हारी फ्रेंड सिमरन ही अच्छी है जो मेरा फेवर करती है. वो तो मज़ाक मे कह भी रही थी अंकल कहीं आंटी को कोई और तो नही मिल गया". पंकज ने ऐसे ही कह दिया

आराधना -" आप सिमरन की बात ना सुना करे. उसके विचार हमारे घर से नही मिलते हाँ लेकिन दिल की अच्छी लड़की है"
पंकज -" हाँ उसके दो बड़े बड़े दिल बहुत अच्छे है." पंकज ने फिर से साइड मे मूँह करके बहुत लो वाय्स मे कहा

आराधना -" क्या कहा आपने अभी "

पंकज -" कुच्छ नही, मे तो बस ये कह रहा था कि वाकई मे अच्छी लड़की है तुम्हारी फ्रेंड."

आराधना -" ज़्यादा अच्छी भी नही है डॅडी. पता है उसका एक बॉय फ्रेंड भी है". आराधना ने उसे ऐसे बताया जैसे कोई सीक्रेट बता रही हो

पंकज -" सच मे". पंकज ने ऐसे रिक्ट किया जैसे कुच्छ जानता ही नही

आराधना -" हाँ डॅडी, और पता है वो उससे अकेले मे भी मिलती है". आराधना की आँखे बड़ी बड़ी हो रही थी ये बताते हुए. वो ऐसे बता रही है जैसे पता नही कितना बड़ा सीक्रेट बता रही है

पंकज -" अकेले मे यानी कहाँ". पंकज ऐसा रिक्ट कर रहा है जैसे कुच्छ समझ ही नही पा रहा

आराधना -" पता है डॅडी, वो ऐसी जगह मिलती है बॉय फ्रेंड से जैसे किसी के घर या फ्लॅट मे". आराधना उसे बहुत सीरीयस होते हुए बताती है लेकिन ये नही बताती कि कल सिमरन उनके ही घर पर अपने बॉय फ्रेंड को लाने वाली है.

पंकज -" अच्छा, ऐसा करती है वो. वो तो बहुत खराब लड़की है". पंकज ने भी उसकी बात का समर्थन करते हुए कहा

आराधना -" वो तो डॅडी स्मोकिंग, ड्रिंकिंग सब करती है. लड़कियो वाली कोई बात नही है उसमे." आराधना ने कॅरी ऑन रहते हुए कहा

पंकज -" लेकिन उसके लिप्स को देख कर नही लगता कि वो स्मोकिंग करती है. एक दम पिंक लिप्स है उसके." पंकज आराधना का रिक्षन देखना चाहता था

आराधना -" ढेर सारी लिपस्टिक पोत के रखती है अपने होंठो पे. तभी तो पिंक लगते है". आराधना ने भी थोड़ा और ज़ोर देते हुए कहा

पंकज -" लेकिन कहीं तुझे मे भी तो बुरा नही लगता क्यूंकी स्मोकिंग तो मे भी करता हू". पंकज ने फिर से उसका रिक्षन जान ने के लिए ये बात कही

आराधना -" डॅडी स्मोकिंग करना तो बना ही मर्दो के लिए है. आप तो डॅशिंग लगते हो लेकिन सिमरन पे मुझे बहुत गुस्सा आता है जब वो स्मोकिंग करती है लेकिन वो अपने आप को फिल्मी हेरोयिन से कम नही समझती".

पंकज -" आज कल तो बेटी हर दूसरी लड़की स्मोकिंग करती नज़र आती है लेकिन शुक्र है कि हमारी बेटी इन सब चीज़ो से दूर है". ये बात कहते हुए पंकज उठता है और जाकर आराधना के प्यार से गाल खींच देता है

आराधना -" डॅडी मे हमेशा घर का ख्याल रखूँगी और कोई ऐसा काम नही करूँगी जो मेरे मा बाप को अच्छा ना लगे". पंकज उसकी इस बात से बहुत इंप्रेस हुआ और उसकी सर पर हाथ फिराता हुआ बाहर जाने लगता है.

आराधना -" अरे डॅडी, कहाँ चले. बैठो ना थोड़ी देर और." आराधना चेर से खड़े होते पंकज से बोलती है

पंकज -"नही बेटा अब रात बहुत हो गयी है, अब मुझे चलना चाहिए". ये कहते हुए पंकज बाहर जाने लगता है. बाहर जाते हुए पंकज ये सोचता है कि क्यू ना प्रीति और कुशल से भी मिलता चलु और उन्हे अच्छा लगेगा. और वो बाहर निकलते हुए आराधना को इशारे मे बताता है कि वो प्रीति के रूम की तरफ जा रहा है.
पंकज प्रीति के रूम की तरफ चल देता है. प्रीति के रूम के बाहर आकर वो गेट को नॉक करता है.

" तू आ गया फिर, चाहे तू कितनी भी ट्राइ कर ले मे नही दूँगी तुझे". प्रीति का गेट अंदर से बंद था और उसे ये लगा कि शायद कुशल गेट नॉक कर रहा है इसलिए उसने ऐसा बोला.

" क्या नही देगी बेटा क्या हो गया". पंकज गेट के बाहर से ही बोलता है और गेट को फिर आए नॉक करता है.

ऊऊहह, फक्क्क डॅडी... प्रीति अपने मन मे बोलती है. दर असल वो बहुत घबरा गयी थी.

" वो...वो डॅडी कुशल बहुत परेशान करता रहता है. ज़रा रुकिये मे चेंज कर रही हू और अभी गेट खोलती हू." प्रीति की स्पीड ऐसे हो गयी थी जैसे कोई एलेक्ट्रिक मशीन. वो तुरंत पूरे कपड़े पहनती और गेट खोलती है. गेट खोलते ही वो पंकज को हेलो डॅडी बोल कर ग्रीट करती है. पंकज उसके रूम मे अंदर की ओर जाते हुए बोलता है -

पंकज -" कैसे परेशान कर रहा है ये नालयक कुशल. क्या माँग रहा है तुझसे".

प्रीति - वो वो डॅडी..... मेरा वीडियो गेम." प्रीति को कुच्छ समझ नही आता तो वो ऐसे ही बोल देती है

पंकज -" बेहद नालयक हो गया है ये कुशल. वो तेरा वीडियो गेम क्यू माँग रहा है जब उसको भी मेने दिलाया हुआ है. कुशल कुशल" वो दो तेज आवाज़ लगाता है कुशल को बुलाने के लिए. कुशल जैसे ही ये आवाज़ नीचे सुनता है उसे तो ऐसे लगता है जैसे भूचाल आ गया हो.

" कहीं प्रीति ने मेरी शिकायत डॅडी से तो नही कर दी". कुशल अपने मन मे सोचता हुआ उपर भागता है. उसे आशा थी कि डॅडी आराधना दीदी के रूम मे होंगे लेकिन जैसे ही वो उधर आता है तो देखता है आराधना दीदी तो अपने रूम मे अकेली है. उसके पाँव तले से ज़मीन खिसक जाती है. उसको कदम रुक जाते है, उसको ऐसा लगा जैसे किस्मत ने क्या खेल खेल दिया उसके साथ. " हे उपरवाले आज बचा ले, अपनी बीवी की भी चूत नही मारूँगा मे". कुशल उपरवाले से हाथ जोड़ कर प्राथना करता है. इतने मे एक बार फिर से आवाज़ आती है कुशल. ये आवाज़ उसके डॅडी की ही थी जो प्रीति के रूम से आ रही थी.

कुशल धीरे धीरे कदम बढ़ाता हुआ आगे पहुँचता है. उसके चेहरे पे पसीने आ चुके थे. और प्रीति के रूम के बाहर जाकर खड़ा हो जाता है, अंदर उसके डॅडी और प्रीति थे. डॅडी आगे के साइड खड़े थे और प्रीति उनके पीछे यानी कि पंकज की पीठ थी प्रीति की तरफ.

" जी डॅडी". कुशल मरी हुई आवाज़ मे बोलता है.

पंकज -" क्यू परेशान कर रखा है तूने प्रीति को". पंकज की ये बात सुनते ही तो कुशल का तो जैसे किसी लड़की ने रेप कर दिया हो ऐसी सिचुयेशन हो जाती है. प्रीति की भी हालत खराब थी कि कहीं कुशल कुच्छ और समझ के कुच्छ बोल ना दे

कुशल -" मेने... मेने क्या किया".
पंकज -" तो जब प्रीति अपनी कोई चीज़ नही देना चाहती तो तू क्यू ज़बरदस्ती माँगता रहता है". ये बात सुन कर कुशल का चेहरा शरम से गढ़ जाता है. उसको ऐसा लगा कि जैसे जिंदगी मे कोई भूचाल आ गया हो.

" और डॅडी मेने कई बार मना किया है कि मे अपना वीडियो गेम नही दूँगी". कुशल इससे पहले कुच्छ बोले, प्रीति ने हिंट दे दिया कि वीडियो गेम की बात चल रही है. " वीडियो गेम???" कुशल सोचने पे मजबूर हो जाता है और जैसे कि उसे सब समझ आता है वो खुशी से पागल हो जाता है.

" डॅडी, वीडियो गेम, ऑश वीडियो गेम. हाँ मे इसके पीछे पड़ा रहता हू कि दे मुझे क्यूंकी प्रीति का वीडियो गेम मुझे सबसे अच्छा लगता है". कुशल प्रीति की तरफ देखते हुए बोलता है. वो सारी सिचुयेशन समझ चुका था. जब वो ये बात बोलता है कि उसे प्रीति का वीडियो गेम सबसे अच्छा लगता है तो ये सुनकर प्रीति को ऐसे लगा जैसे वो ही मिस वर्ल्ड है.

पंकज -" लेकिन तुझे भी तो दिलाया है ना मेने वीडियो गेम".

कुशल -" पता नही क्यू मुझे डॅडी प्रीति का ही अच्छा लगता है. बस एक बार लूँगा फिर दोबारा ज़िद नही करूँगा डॅडी". कुशल ने बनावटी अंदाज़ मे प्रीति की तरफ देखते हुए कहा

पंकज -" ठीक है तो, प्रीति एक बार दे देने मे कोई बुराई नही है". पंकज प्रीति की तरफ देखते हुए बोलता है. इस बात का मतलब समझ कर

प्रीति -" डॅडी मुझे पूरा यकीन है कि एक बार अगर इसे अपना वीडियो गेम दिया तो मेरा गेम दोबारा खेलने के लायक नही रहेगा." प्रीति ने नॉटी स्टाइल मे कुशल की ओर देखते हुए कहा. इससे पहले कि पंकज कुच्छ बोलता, कुशल ही बोल पड़ता है

कुशल -" डॅडी मे प्रॉमिस करता हू कि बहुत प्यार से खेलूँगा. इसके वीडियो गेम पे खरॉच तक नही आने दूँगा. बिल्कुल अपना गेम समझ कर ही खेलूँगा".

पंकज -" ठीक है, ठीक है. अब बहुत हुआ, प्रीति जब तेरा दिल करे एक बार अपना वीडियो गेम कुशल को दे दियो". पंकज प्रीति को ऑर्डर देता हुआ बोलता है.

प्रीति कुशल की तरफ शार्प आइज़ से देखती है और पूछती है " बस एक बार हाँ???" ये बात सुनकर को तो जैसे कुशल की लॉटरी लग गयी हो. वो अपने डॅडी के फ़ैसले से बहुत हॅपी था और आइ लव यू डॅडी कह कर अपने डॅडी से चिपक जाता है.

पंकज -" और दोनो लड़ा कम करो, अब बड़े हो गये हो, ठीक है". कुशल और प्रीति दोनो जी डॅडी कह कर बात मान लेते है. अब पंकज बाहर जाने लगता है, लेकिन कुशल का बाहर जाने का इरादा नही था. प्रीति मौके का फ़ायदा उठाते हुए बोलती है कि चल कुशल अब तू भी सोने जा क्यूंकी मुझे भी नींद आ रही है. पंकज भी जाते जाते कुशल से बोलता है कि जाकर सो जा अब कल सनडे है शॉपिंग करने चलेंगे.[/b]
 
प्रीति -" अभी क्या बाकी है, मुझे लगा कि तेरा एंडिंग पॉइंट हुआ था जो अभी भी मुझे अपने मूँह मे फील हो रहा है". प्रीति ने अपने रूम के अंदर से ही स्लो वाय्स मे कहा

कुशल -" हाँ वो तो हुआ लेकिन अभी...."

प्रीति -" अभी क्या????"

कुशल -" अभी वो तो नही हुआ ना जो होना चाहिए इस सब के बाद यानी......... सेक्स."

प्रीति -" कुशल हम जवान है, मे भी जवानी की दहलीज पर कदम रख चुकी हू. जोश मे आकर सब हो गया लकिन इससे आयेज कुच्छ नही होगा और प्लीज़ मुझे फोर्स मत कर."

कुशल -" तो इतना कुच्छ भी क्यू किया, क्यू मेरे जज़्बात का मज़ाक उड़ा रही है. अगर कुच्छ करना ही नही था तो ये सब किया ही क्यू". कुशल ने गुस्सा होते हुए कहा

प्रीति -" मेने कहा ना की जवानी के जोश मे ग़लती हो जाती है जो और जो मुझसे भी हो गयी. और वैसे भी जितना हुआ उतना तो चलता है."

कुशल -" वाह वाह, खुद की जो मर्ज़ी वो किया अब जो मेरे मर्ज़ी है उसमे नखरे. बन तो ऐसे रही है जैसे हमेशा अपनी चूत को सील पॅक ही रखेगी".

प्रीति -"तूने फिर से ते गंदी लॅंग्वेज शुरू कर दी ना. तू भी जानता है और मे भी कि कुँवारा कोई नही रहता. दिल हर किसी का करता है, सो मेरा भी करता है. तू अपनी किसी गर्ल फ्रेंड के साथ कर, उपर वाला जब मेरा बॉय फ्रेंड भेजेगा तो मे उसके साथ अपनी बॉडी शेर करूँगी."

कुशल -" मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नही है"

प्रीति - " तो बन जाएगी, अभी बूढ़ा नही हुआ है तू. मे विटनेस हू कि तू जवान है और तेरी बॉडी का हर पार्ट जवान है. हे हे हे हे" प्रीति हंसते हुए कहती है. प्रीति जैसे जैसे हंस रही थी वैसे वैसे कुशल का गुस्सा बढ़ता जा रहा था.

कुशल - " तो तू ढूंड ले अपना बॉय फ्रेंड. अब अगर तू खुद भी चाहेगी तो भी कुच्छ नही करूँगा. चलाती रह हाथ से काम. मे जा रहा हू"

प्रीति -" शुक्रिया कुशल, अगर कभी मे अपना होश खो भी दू तो अब तू कुच्छ नही करेगा. मुझे खुशी है, और अब प्लीज़ चला जा. मेरा नहाने का मूड है. कपड़े तो पहने है नही तो टाइम भी बच जाएगा." प्रीति उसे और छेड़ते हुए बोलती है.

कुशल उसके डोर से हट जाता है और अपने रूम की ओर जाकर खड़ा हो जाता है. अपने रूम मे एंट्री लेते ही उसकी नज़रे प्रीति की पैंटी पर पड़ती है जिसे प्रीति उसके रूम मे ही भूल गयी थी. उस पैंटी को देख कर कुशल की हालत और खराब हो जाती है और उसका लंड ज़ोर मारने लगता है. उसको अभी भी किस्मत पे यकीन नही हो रहा था कि अभी चन्द मिनिट पहले प्रीति उसकी बाहों मे थी और अब उससे दूर है
" ग़लती मेरी ही है, सारा ड्रामा छोड़ कर पहले चोद ही देना चाहिए था." कुशल अपने आप से कहता है. कुशल सारा सीन सोच सोच कर पागल होने लगता है, उसको अभी भी यकीन नही हो रहा था कि उसने प्रीति के जवान और नंगे बदन का दीदार किया है.

कुशल अपने ख्यालो मे खोया हुआ है और अपने हाथो से ही अपने लंड को खिला रहा है. तभी डोर ओपन होने की आवाज़ आती है, वो तुरंत समझ जाता है कि ये तो प्रीति का डोर है. उसका एग्ज़ाइट्मेंट आसमान पर पहुँच जाता है. वो अपने रूम से बाहर आता है.

प्रीति अपने रूम के गेट पर खड़ी हुई थी. कुशल उसके रूप को देख कर शॉक्ड हो जाता है, प्रीति ने एक बेहद शॉर्ट शिफ्फॉन ड्रेस पहनी है जो उसकी पुसी से बस थोड़ा सा नीचे है. अक्सर वो इस ड्रेस को लेगिंग के साथ पहनती थी लेकिन आज ड्रेस के नीचे कोई बॉटम नही था, सिर्फ़ उसकी पिंक पैंटी की मामूली झलक मिल रही थी. गीले और खुले बाल और जुवैसी लिप्स, एक सेक्सी गॉडेस लग रही थी वो. कुशल को तो जैसे कुच्छ समझ ही नही आ रहा था कि आज किस्मत ये क्या खेल कर रही है. प्रीति अपने रूम के डोर पर खड़े होकर कुशल को देख रही है और कुशल प्रीति को. कुशल प्रीति की नंगी टाँगो को देख कर पागल सा होता जा रहा है.

प्रीति अब अपने कदम टाय्लेट की तरफ बढ़ाती है जो उसी गॅलरी मे है, उसके एक हाथ मे कोई और कपड़ा भी है जो फोल्ड करके उसने पकड़ा हुआ था. उसकी चाल अभी ऐसी थी जैसे कोई सेक्सी मॉडेल रॅंप पर चल रही हो. प्रीति की निगाहे कुशल से मिली हुई है, और कुशल खड़ा हुआ बस उसे देख रहा है. प्रीति टाय्लेट के गेट पर पहुँचती है और टाय्लेट के अंदर जाती है और फिर से घूमती है. कुशल की तरफ 10 सेकेंड के लिए वो देखती ही रहती है. कुशल और उसके बीच की दूरी बस 10 कदम होगी.

प्रीति बिना गेट बंद किए अपने दोनो हाथ अपनी पैंटी पे ले जाती है.... और नीचे झुक कर एक स्लो मोशन स्टाइल मे पैंटी नीचे करने लगती है. नीचे करते हुए प्रीति की निगाहे बस कुशल पर ही है और एक सेक्सी कातिल मुस्कान भी. पैंटी नीचे करने के बाद वो फिर से सीधी खड़ी होती है और वो करती है जिसकी कुशल को उम्मीद भी नही थी. कुशल के सामने ही अपनी ड्रेस को उपर करती है और नीचे बैठ जाती है.

छ्ह्हीयीईयी......... एक जोरदार साउंड के साथ वो खुले दरवाजे मे ही कुशल के सामने पेशाब करने लगती है. कुशल अब पागल हो चुका है, उसने अपने कदम बढ़ाने शुरू किए और जैसे ही प्रीति से दो कदम की दूरी पर वो पहुँचा. "धदाम " और गेट बंद. कुशल को ऐसे लगा जैसे आज पता नही कितनी बार उसकी इज़्ज़त का रेप होगा
कुशल -" ये क्या नया ड्रामा है तेरा, गेट खोल". कुशल ने बाथरूम का गेट नॉक करते हुए कहा

प्रीति -" क्यू मुझे पेशाब करना अलाउ नही है, हे हे हे हे". प्रीति ने मज़ाक करते हुए कहा

कुशल -" क्या अब से पहले भी ऐसे ही अपनी चुल खोल कर पेशाब करती थी तू".

प्रीति -" हा हा हा हा, ऐसे नही करती थी लेकिन अब तू तो देख ही चुका है तो तुझसे क्या शरमाना. लेकिन तू क्यो टेन्षन ले रहा है, तूने तो प्रॉमिस कर ही लिया है कि अगर मे कुच्छ कहूँगी भी तो तू कुच्छ नही करेगा".

कुशल -" मेने कहा गेट खोल, मुझे पता है कि तू भी चाहती है मेरे लंड को लेना. नखरे मत दिखा नही तो ज़बरदस्ती चोद दूँगा तुझे". कुशल का गुस्सा बढ़ता जा रहा था

प्रीति -" ये गंदी लॅंग्वेज और ये धमकियाँ अपनी बीवी को दियो. ये मेरी लाइफ है और मे अपनी मर्ज़ी से जीना चाहती हू". इतने मे ऐसी आहट होती है जैसे को नीचे से उपर आ रहा हो, और कुशल की हालत खराब हो जाती है.

" क्या हुआ गॅलरी मे क्यू घूम रहा है". ये पंकज की आवाज़ थी जो स्टेर्स से उपर आ रहा था

"वो... वो डॅडी.... मुझे टाय्लेट जाना है लेकिन इसमे वो प्रीति घुस गयी है" कुशल ने अपने आप को बचाते हुए कहा.

पंकज-" तो बेटा अगर ज़्यादा परेशानी है तो नीचे के टाय्लेट मे चला जा". कुशल को उसकी बात मान नी पड़ती है क्यूंकी वो नही चाहता था कि उसे शक हो जाए और मरे मन से नीचे जाने लगता है.

" आज साली किस्मत ही खराब है नही तो डॅडी तो उपर आते भी नही है". कुशल अपने मन मे कहता है नीचे जाते हुए.

कुशल नीचे की ओर जाता है और पंकज आराधना के रूम मे एंटर करता है. कुशल जैसे ही नीचे पहुँचता है उसे फर्स्ट फ्लोर टाय्लेट के गेट खुलने की आवाज़ आती है " ऑश शिट" उसके मूँह से खुद ब खुद ये बात निकल जाती है. प्रीति टाय्लेट का गेट खोल कर बाहर देखती है और मैदान सॉफ देख कर अपने रूम मे भाग जाती है.

पंकज आराधना के रूम मे एंटर होता है. आराधना चादर ओढ़े सो रही है. पंकज उसके बेड के कॉर्नर मे जाकर बैठ जाता है और प्यार से उसके सर मे हाथ फिराने लगता है. आराधना की आँखे खुलती है और वो चोंक कर एक दम बैठ जाती है. " डॅडी, आआप". आराधना चोंक कर पूछती है.
 
कुशल उसकी तरफ मुड़ता है और एक गहरी मुस्कान के साथ कहता है -" सोचूँगा...."

प्रीति को तो जैसे काटो तो खून नही - " तू मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकता है......" प्रीति उससे रिक्वेस्ट करती है.

लेकिन कुशल को तो पता नही क्या भूत सवार था. वो उसे अपनी पीठ से हटाता है और सीधा रूम से बाहर.

प्रीति ने हिम्मत तो नही हारी लेकिन वो समझ गयी कि उसको सज़ा अपने पिच्छले करमो की मिल रही है. लेकिन उसके इरादे पक्के थे. फिलहाल वो अपना गेट बंद करती है.

कुशल सीधा नीचे आता है. जैसा कि आपने देखा कि वहाँ स्मृति एक रेड ट्रॅन्स्परेंट नाइटी मे बैठी थी. कुशल नीचे आकर अपनी मा को इस सेक्सी स्टाइल मे बैठे हुए देखता है -

" उफफफफ्फ़.... मोम कहाँ बिजलिया गिरा रही हो. यू लुक्स वेरी सेक्सी...." कुशल अपनी मा के सामने बैठते हुए बोलता है.

स्मृति -" तुझसे मतलब....." और वो वैसे ही बैठ कर अपनी विस्की के पेग को पीए जा रही थी.

कुशल -" मोम ऐसी नाइटी तो मैने पहले कभी नही देखी. आप ऐसी नाइटी पहना करो ना हमेशा...."

स्मृति -" आज सारे कपड़े धोने को वॉशिंग मशीन मे डाले है. बहुत दिनो से नही धोए थे तो बस यही बची हुई थी तो पहन ली."

कुशल -" क्या सारी ब्रा भी धो दी है क्या आपने....?" कुशल अपनी माँ के ट्रॅन्स्परेंट बूब्स की तरफ देखते हुए बोलता है

स्मृति -" नाइट मे मुझे ब्रा पहन ना पसंद नही है........". कुशल को ऐसे रिप्लाइ की उम्मीद नही थी. आज स्मृति ने जिस तरीके से रिप्लाइ किया उससे तो कुशल भी उसकी हिम्मत मान गया

कुशल -" नाइट मे पैंटी पहन ना कैसा लगता है......?" कुशल फिर से एक क्वेस्चन करता है स्मृति से.....

स्मृति -" मुझे....... पैंटी पहन ना भी पसंद नही है." इस बार स्मृति ने अपनी एक टाँग उठा कर दूसरी टाँग पे इस स्टाइल मे रखी कि कुशल को उसकी थाइस के अंदर तक का खाली नज़ारा दिख गया. लेकिन चूत दिखाई नही दी वहाँ तो बस अंधेरा सा दिखाई दिया.

कुशल का तो जैसे गला सूख जाता है और वो अपने अंदर थूक गटक ता है. कुशल बात को टालते हुए पुछ्ता है -

" मोम, पापा दिखाई नही दे रहे है?" कुशल अंजान बनते हुए पुछ्ता है जैसे उसे कुच्छ पता ही नही है

स्मृति -" बाहर है गार्डेन मे अभी आ रहे है....." स्मृति भी कुशल से झूठ बोलती है

कुशल -" मोम.... लेकिन प्रीति तो बता रही थी कि पापा देल्ही गये है?""

स्मृति -" तो फिर ज़्यादा स्मार्ट क्यू बन रहा है. हाँ वो गये है देल्ही 15 दिनो के लिए....."

कुशल ( मुस्कुराते हुए)- " तो आपका गुज़ारा कैसे होगा इतने दिन....."

स्मृति - " मुझे तेरी ये बकवास बिल्कुल पसंद नही......" और स्मृति उठ कर अपने रूम की तरफ जाने लगती है

कुशल उठ कर उसका हाथ पकड़ लेता है. स्मृति उसे गुस्से मे ऐसे देखती है जैसे उसे खा जाएगी.

" देख कुशल..... मेरा हाथ छोड़...." स्मृति उसे समझाती है

" मोम...... ऐसा मौका बार बार नही आएगा. ऐसे गोलडेन चान्स हमेशा नही मिलते है. आपके इस संगमरमरी बदन का मज़ा एक बार फिर से चखा दो.....". कुशल स्मृति का हाथ खींच उसे अपने सीने से लगा देता है

अब स्मृति की पीठ कुशल के सीने से चिपकी हुई थी.
" कुशल..... कुत्ते.... छोड़ मुझे..... अभी तेरे डॅड को फोन मिलाती हू....... आअह.... छोड़ मुझे....." स्मृति छॅट्पाटा रही थी

" रात को सोता हू या सुबह जागता हू.... बस एक वोही चूत दिखाई देती है. इस चूत के लिए तो चाहे मुझे पोलीस के हवाले कर दो......." कुशल अपना एक हाथ उसकी थाइस से उपर करता हुआ उसकी गान्ड पे ले जाता है.

स्मृति मे जितनी ताक़त थी उतनी ताक़त से वो छूटने की कोशिश कर रही थी लेकिन कुशल की ताक़त के सामने वो मजबूर थी.

कुशल ने अपना एक हाथ स्मृति की पैंटी तक पहुँचाया और फटक से एक हाथ अंदर घुसा दिया. अब उसका हाथ स्मृति की मखमली गान्ड पर था.

" कामीने छोड़ मुझे......... तेरा वो हाल करूँगी कि या करेगा तू......" स्मृति से जितना हो रहा था उतना वो कर रही थी छूटने के लिए

" कैसी मा हो तुम, बच्चा पैदा किया और आज जब उसका लंड फड़फदा रहा है तो नखरे दिखा रही हो....." कुशल भी उसे जवाब देता है.

" आहह........." कुशल अपनी एक उंगली स्मृति की गान्ड मे घुसा देता है जिससे कि स्मृति की चीख निकल जाती है

" कुशल मैं तुझसे रिक्वेस्ट करती हू.... मुझे छोड़ दे... जल्दी ही तेरी शादी बहुत सुंदर लड़की से करा दूँगी........." स्मृति कुशल को बहला फुसला रही थी लेकिन कुशल अपनी उंगली स्मृति की गान्ड मे चलाए जा रहा था.....

" शादी?...... मोम चूत की कमी नही है लेकिन आपके जैसी कहाँ. वैसे भी आज कल की लड़कियो मे वो नज़ाकत नही है जो आप मे है." कुशल तो जैसे दीवाना हुआ जा रहा था

स्मृति को समझ आने लगा था कि उसे ताक़त के ज़रिए नही समझाया जा सकता. स्मृति को अहसास हो गया था कि वो अपने पापा की गैर मोजूदगी का पूरा फ़ायदा उठाएगा.

" कुशल मैं तेरे जज़्बात समझ सकती हू लेकिन ये सही जगह नही है. प्लीज़ छोड़ मुझे......"

कुशल -" मोम, अब तो 15 रात आपके बेडरूम मे ही गुज़ारुँगा..... हर दिन आपका रस पीना है." कुशल अपनी मा को पूरी तरीके से गिरफ़्त मे ले चुका था

स्मृति -" सुन ये जगह सही नही है. तू मेरे साथ बेड रूम मे चल...." स्मृति रिक्वेस्ट करती है, लेकिन स्मृति के दिमाग़ मे भी कुच्छ और ही चल रहा था.

कुशल -" मोम..... मैं तो कब से तड़प रहा हू आपके बेड रूम मे जाने के लिए. लेकिन प्लीज़ कोई धोखा मत देना...."

स्मृति -" तू अपना हाथ बाहर निकाल.... और बेड रूम मे चल... प्लीज़...." स्मृति फिर से रिक्वेस्ट करती है

जैसे तैसे कुशल अपने हाथ बाहर निकालता है. स्मृति अपना हाथ कुशल के हाथो मे देकर वो धीरे धीरे बेड रूम की तरफ बढ़ती है. बीच बीच मे वो मूड कर कुशल को एक अच्छी सी स्माइल भी दे रही थी.

कुशल को तो जैसे आज स्वर्ग मिल गया हो. स्मृति बेड रूम मे घुसती है और उसे अपने सीने के करीब खींच कर बोलती है -" अब बता तुझे क्या चाहिए......?" स्मृति उसकी आँखो मे झाँकते हुए बोलती है.

कुशल -" चूत.... वो भी डेली. आइ लव यू मोम. यू आर वेरी सेक्सी.......". कुशल अपनी मोम को हग कर लेता है

स्मृति -" यू आर वेरी हॉट ऑल्सो... पर बेटा मैं एक शादीशुदा औरत हू. जिस चीज़ को तू माँग रहा है वहाँ तेरे डॅड का हक है. आज मैं तुझे वो मज़ा दूँगी जो तुझे कभी नही मिला होगा....". स्मृति धीरे धीरे नीचे की तरफ बैठ जाती है.

कुशल समझ चुका था कि उसका लंड स्मृति के मूँह मे जाने वाला है. कुशल ने भी टाइम ना लगाते हुए अपने जीन्स शॉर्ट को उतार देता है

स्मृति -" ये मेरा फ़र्ज़ है कि सब कुच्छ मैं उतारू........" स्मृति एक बार फिर से खड़ी होकर उसकी स्लीवलेस टीशर्ट को भी उतार देती है.

अब कुशल बिल्कुल नंगा है. स्मृति का बेडरूम ग्राउंड फ्लोर पर किचन के बराबर मे था. स्मृति नीचे बैठती है है और अपने मस्त लिप्स कुशल के लंड पे रख देती है.

" ओह मोम यू आर ग्रेट........ सक मी ब्यूटिफुल........ आआअहह...." स्मृति के रूम मे एक सकिंग सेशन स्टार्ट हो जाता है.

ईव्निंग से लेटे लेटे आराधना का सर अब दर्द करने लगा है. उसकी आँखो के आस पास का एरिया भी थोड़ा मोटा सा हो गया था जैसे स्वेल्लिंग आ गयी हो. वो खड़ी होती है कि कहीं बीमार ना पड़ जाए. अपने बाथरूम मे जाती है और अपने फेस को देखती है. अपने फेस को अच्छे से वॉश करने के बाद वो उसे टवल से पोंछती है.

उसको कुच्छ भी समझ नही आ रहा था. लेकिन वो फिर भी फ़ैसला करती है कि हेल्त के साथ कॉंप्रमाइज़ करने से कुच्छ नही होगा. वो नीचे आने का फ़ैसला करती है ताकि वहाँ पे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
" प्रीति ....." स्मृति उसके रूम मे घुस कर उसे आवाज़ लगाती है

प्रीति -" यस मोम...." वो बेड से खड़े होते हुए बोलती है

स्मृति -" बेटे नीचे आ जा और कुशल को भी बुला ला. तेरे डॅड देल्ही जा रहे है...."

प्रीति -" मोम आप बुला लीजिए ना कुशल को...."

स्मृति -" मैं जल्दी मे हू. तू प्लीज़ बुला ला...." और ये कह कर वो वहाँ से चली जाती है.
प्रीति थोड़ा फ्रेश होकर कुशल को बुलाने जाती है लेकिन उसका रूम बंद था और शायद वो सो रहा था. काफ़ी देर नॉक करने के बाद प्रीति भी नीचे चली जाती है. उसके थोड़े पीछे पीछे आराधना भी नीचे चली जाती है लेकिन कुशल का कहीं पता नही होता.

नीचे ग्राउंड फ्लोर पे पंकज जाने को जैसे तैयार ही खड़ा था. उसके पास स्मृति उसके थोड़ी दूरी पर प्रीति खड़ी थी. सबसे पीछे आराधना खड़ी थी. वो तो हाथ बाँध कर ऐसे खड़ी हुई थी जैसे आज उसकी जिंदगी का आख़िरी डे है.

प्रीति -" डॅडी, आप वहाँ रहेंगे कहाँ." प्रीति अपने डॅड से पूछती है

पंकज -" बेटे मेरा होटेल बुक हो चुका है. 15 दिन वहीं रहूँगा....."

प्रीति -" डॅड प्लीज़ देल्ही से कुच्छ ड्रेस लेकर आना. सुना है वहाँ बहुत हाइ फॅशन स्टोर्स है." प्रीति रिक्वेस्ट करते हुए बोलती है. उसकी आँखो मे चमक थी.

पंकज -" ज़रूर लेकर आउन्गा...." और वो बाहर आ जाता है. अपने बॅग को अपनी गाड़ी मे डालता है. आराधना तो पता नही कैसे अपने एमोशन्स को कंट्रोल कर रही थी. इसीलिए वो सबसे पहले खड़ी थी ताकि प्रीति और स्मृति उसको इस हालत मे ना देखे.

पंकज गाड़ी मे बैठने से पहले सबको हग करता है. आराधना भी इस बार भाग कर साइड मे उसे पूरी जान से हग करती है. अपने बूब्स को उसकी छाती मे जैसे बुरी तरीके से गढ़ा देती है. और लो वाय्स मे कहती है -" प्लीज़ जल्दी आना, मैं वेट करूँगी...."

और फिर सब पंकज से अलग हो जाते है. पंकज गाड़ी स्टार्ट करता है, सबको हाथ हिलाता है.

" उस सोतू कुशल से बोल दियो कि मुझे फोन करे...." पंकज जाते हुए बोलता है. कार मे गियर डालता है और कार आगे बढ़ जाती है. पंकज साइड मिरर से देखता है कि स्मृति और प्रीति अंदर जा रही है लेकिन आराधना की निगाहे अभी भी पंकज की कार पर ही थी. धीरे धीरे कार घर से बाहर चली जाती है. आराधना बहुत अपसेट थी.

प्रीति अंदर आकर उपर चली जाती है. वो अपने रूम मे जा ही रही थी कि फिर सोचती है कि एक बार फिर से कुशल को चेक कर लू अगर जगा हो तो. वो फिर से उसके गेट को नॉक करती है...." कुशल..... कुशल......."

थोड़ी देर तक कोई आवाज़ नही आती लेकिन फिर गेट खुलता है. सामने कुशल खड़ा था वो भी बस फ्रेंची मे, उसकी हालत बता रही थी कि वो सो रहा था. प्रीति की निगाहे नीचे उसकी फ्रेंची पर जाती है --" ऊप्स सॉरी ब्रो..... मोम ने बोला था तुझे जगाने को........." प्रीति नीचे उसकी फ्रेंची को देखते हुए बोलती है

कुशल -" क्यू..... मोम क्यू बुला रही है....." कुशल अपनी आँखे मलता हुआ बोलता है.

प्रीति -" वो डॅड देल्ही गये है ना 15 डेज़ के लिए......"

कुशल -( बहुत ज़्यादा एग्ज़ाइटेड होकर)- " क्या कहाँ तूने..........."

प्रीति -" डॅड 15 दिनो के लिए देल्ही गये है. यानी 15 दिनो तक वो घर पर नही है......."

कुशल ये बात सुनकर इतना एग्ज़ाइटेड हो जाता है कि प्रीति को हग करता है और उसके गाल पे एक किस करता है.

प्रीति उसे थोड़ा पीछे जाते हुए बोलती है -" ब्रो..... कुच्छ पहन ले. और डॅड गये तो तू इतना खुश क्या हो रहा है."

कुशल -" मस्ती और बस मस्ती........." कुशल घूमते हुए बोलता है.

प्रीति -" ये लड़का तो पागल है" और ये कह कर अपने रूम मे जाने लगती है. प्रीति के माइंड मे भी पता नही क्या चल रहा था लेकिन थी बहुत हॅपी आज वो.

आराधना बहुत धीमे धीमे कदमो के साथ अपने रूम मे आ जाती है और रूम बंद कर लेती है. बेड पे लेट ते ही उसकी आँखो से आँसुओ की नादिया बह जाती है. पता नही उसने क्या प्लान बनाए थे और वो सब पानी मे मिल जाते है.

कुशल अपने रूम मे डॅन्स सॉंग्स पे थिरक रहा था. अच्छा सा म्यूज़िक चला कर वो बाथरूम मे जाता है, आज उसको बिल्कुल फ्री फील हो रहा था. वो अपना रेज़र उठाता है और अपने लंड के आस पास के बालो को क्लीन करने लगता है. " आज रात तेरी सारी भूख मिटा दूँगा...... तू परेशान ना हो....." कुशल अपने लंड पर हाथ फिराता हुआ बोलता है.

कुशल अपने लंड के आस पास की जगह अच्छे से शेविंग करने के बाद, उस पर कस कर आयिल की मालिश करता है. क्या गजब लंड लग रहा था उसका. एक अलग ही शाइनिंग थी उसके लंड मे. उसके लंड की नसें क्लियर दिख रही थी. अब तक पता नही था कि आख़िर उसके माइंड मे क्या प्लान चल रहे थे लेकिन आज बहुत हॅपी था वो.इधर प्रीति भी अपनी चरम सीमा पे थी. उसके भी दिल मे पता नही क्या चल रहा था लेकिन हॅपी बहुत थी वो. उसने भी अपने रूम मे घुसते ही सारे कपड़े उतार कर फेंक दिए. बाथरूम मे जाती है और फ्रेश होती है. अपनी चूत को उसने पहले ही क्लीन किया हुआ था और वो एक वर्जिन चूत थी. एक दम मस्त..... खुशी के मारे जैसे उसकी छाती और भी बाहर आ गयी थी. एक अच्छी सी खुसबु वाला पर्फ्यूम लगाती है और एक मस्त लिप ग्लॉस. उसके होंठो मे एक अलग शाइनिंग आ जाती है. वो ब्रा पहन ने ही वाली थी कि पता नही क्या सोच कर वो अपनी ब्रा को साइड मे फेंक देती है. एक बहुत ही ट्रॅन्स्परेंट टी- शर्ट पहनती है, जो कि उसके शोल्डर्स तक थी. और नीचे एक शॉर्ट पहनती है.

आराधना के दिल मे कोई एग्ज़ाइट्मेंट नही था. वो तो अपने रूम मे पड़े पड़े रो रही थी. ऐसे ही करीबन रात के 10 बज चुके थे. स्मृति ने भी कोई सफाई वग़ैरा नही की क्यूंकी कुच्छ परिवार मे किसी मर्द के बाहर जाने बाद उस ईव्निंग सफाई नही करते. वो भी फ्रेश हो चुकी थी. वो उसी सोफे पे बैठी हुई थी जिस पर अक्सर पंकज बैठा रहता था. उसने एक बहुत ही थिन मेटीरियल की रेड कलर की नाइटी पहनी हुई थी, बाल खुले हुए थे और सबसे खास बात ये कि उसके कपड़ो मे भी ब्रा का अहसास नही था.

स्मृति के हाथ मे एक विस्की का पेग था औट वो बहुत ही मस्त स्टाइल मे बैठी हुई पता नही क्या सोच रही थी. शायद उसे अपने हज़्बेंड की याद आ रही थी. लेकिन कभी उसने खुले आम ऐसी नाइटी नही पहनी थी जैसी आज पहनी हुई थी. घर मे अक्सर वो पूरे कपड़े पहन कर ही रहती थी.

सिर्फ़ एक इंसान के जाने से सभी के दिमाग़ मे पता नही क्या क्या चलने लगा था. सभी फॅमिली मेंबर्ज़ के दिल मे अलग अलग प्लान थे लेकिन क्या थे ये किसी को नही पता.

कुशल एक स्लीव्ले टी- शर्ट आंड जीन्स शॉर्ट मे बाहर आता है. वो पहले नीचे जाने की सोचता है लेकिन पता नही क्या सोच कर प्रीति के रूम की तरफ चल देता है.

कुशल जैसे ही गेट पर पहुँचता है तो दोनो एक दूसरे को देख कर शॉक्ड रह जाते है. दोनो ही काफ़ी सेक्सी लग रहे थे, प्रीति के तो बूब्स जैसे झलक दिखला रहे थे.

कुशल -" आज क्या तेरा बॉय फ्रेंड आ रहा है जो इतनी बिजलिया गिरा रही है?". कुशल उसे छेड़ने वाले अंदाज़ मे बोलता है

प्रीति -" मुझे बॉय फ्रेंड का शोक नही है....." प्रीति स्टाइल मे बोलती है

कुशल -( बहुत लो वाय्स मे)-" बॉय फ्रेंड का नही बस लंड का शोक है....."

प्रीति -" क्या कहा तूने अभी....."

कुशल -" मैने...... मैं तो पुच्छ रहा था कि सच बता कि अगर डॅड चले गये है. कहीं मज़ाक तो नही कर रही."

प्रीति -" तू क्या मेरा जीजा लगता है जो तुझसे मज़ाक करूँगी.... डॅड चले गये और उन्होने तुझे बोलने को बोला तो तुझे बता दिया......"

कुशल -" अच्छा बोल ना कि आज कहाँ जा रही है. बहुत ही गजब लग रही है."

प्रीति -" गजब तो मैं हमेशा ही लगती हू...." और वो स्टाइल मे एक वॉटर बॉटल उठाती है.

कुशल -" आज कल अंडर गारमेंट्स पहन ने छोड़ दिए है?"

प्रीति -" मुझे गर्मी बहुत लगती है................." और इसके बाद प्रीति ने वो किया जो कुशल ने सोचा भी नही था. वो उस वॉटर बॉटल से पानी अपनी टी- शर्ट पे गिरा लेती है. उफ्फ ये क्या हो रहा था. प्रीति के टॉप पे पानी गिरते ही वो कुच्छ ऐसी दिख रही थी. ये एक ऐसा सीन था कि कोई सेक्सीयेस्ट से सेक्सीयेस्ट हेरोयिन भी प्रीति से शरमा जाए......

कुशल का लंड फिर से ऐसा हो गया जैसे गरम लोहा. कुशल को कुच्छ समझ नही आ रहा था, और प्रीति तो उसे ऐसे देख रही थी की जैसे कब से प्यासी है.

दोस्तो ऐसा लगता है कि इन 15 दिनो मे खूब धमा चौकड़ी होने वाली है ................................................
कुशल के साथ तो जैसे किस्मत पता नही कैसे मज़ाक कर रही थी. प्रीति की निगाहे बस कुशल के उभरते लंड पे ही थी. कुशल एक पागल घोड़े की तरह होता जा रहा था, लेकिन पता नही क्यू अभी भी वो प्रीति की तरफ नही बढ़ रहा था. प्रीति की आँखो मे वासना सॉफ दिखाई दे रही थी.

कुशल के तो पाँव जैसे पत्थर के हो गये हो. वो अपनी जगह पर खड़ा पता नही क्या सोच रहा था.

प्रीति अब और भी एरॉटिक होती जा रही थी. उसके बूब्स और टिट्स दोनो क्लियर दिख रहे थे उसकी टीशर्ट मे. कुशल को एक जगह खड़े हुए देख कर प्रीति बहुत ही सेक्सी स्टाइल मे बोलती है -

प्रीति -" क्या सोच रहा है?????" प्रीति अपना एक हाथ अपने बूब्स पे रखते हुए बोलती है.

कुशल को तो जैसे होश ही नही था. और पता नही कि वो प्रीति की बात सुन भी रहा था या नही. तभी प्रीति दोबारा तेज आवाज़ मे वही बात बोलती है.

कुशल चोंक जाता है -" क्या...... क्या..... वो मैं तो कुच्छ नही सोच रहा......" कुशल घबराते हुए बोलता है.

प्रीति -" तो इतनी........ इतनी गौर से मुझे क्यू देख रहा है......?" प्रीति अपनी निगाहे नीचे करते हुए बोलती है.

कुशल -" कसम से प्रीति, तूने चाहे जो भी किया लेकिन जवानी फूट फूट कर आ रही है तेरे उपर..... तेरा पति तो मस्त हो जाएगा......."

प्रीति -" ऐसा..... ऐसा क्या है मुझमे......." प्रीति अपनी निगाहे नीचे करके बड़ी स्टाइल मे पूछती है.

कुशल उसकी ये अदा देख कर तेज़ी से दो कदम आगे बढ़ाता है. वो इतनी तेज़ी से आगे बढ़ता है कि जैसे उसे खा जाएगा लेकिन पता नही क्या सोच कर रुक जाता है.

प्रीति उसे फिर देखती है और बहुत ही सेक्सी वाय्स मे बोलती है -

" रुक क्यूँ गया............?" ये बात बोलते बोलते प्रीति अपनी टीशर्ट उतारने लगी थी. लेकिन कुशल के मन मे पता नही क्या चल रहा था. वो वहीं खड़े खड़े दरवाजे की तरफ घूम जाता है. अब उसकी पीठ प्रीति की तरफ थी.

कुशल -" मैं नही चाहता कि मेरा डिन्नर फिर से अधूरा रह जाए....." और ये बोल कर वो दो कदम फिर से बाहर की तरफ बढ़ाता है. बाहर की तरफ यानी प्रीति के रूम के दरवाजे की तरफ.

प्रीति बीच मे ही बोलती है. वो वहीं खड़ी हुई थी जहाँ पहले -"

" ग़लतियाँ होती रहती है. लेकिन अबकी बार डिन्नर तो डिन्नर तेरा ब्रेकफास्ट और लंच भी डेली कराउन्गि वो भी मक्खन मार के...." प्रीति ने इनडाइरेक्ट्ली सारी बात बोल दी

कुशल -" अच्छा.... भाई कितना भूखा है ये तुझे आज दिखाई दे रहा है. लेकिन तबसे कितना तडपा है उसका हिसाब. कौन करेगा......" कुशल अभी भी उल्टा ही खड़ा हुआ था, उसकी पीठ प्रीति की तरफ थी.

प्रीति -" हाई, तेरा ये मर्दाना स्टाइल. कह तो रही हू कि डेली तुझे इतना खाना खिलाउन्गि की तेरा पेट हमेशा भरा रहेगा..... और हाँ फ्रेश आंड अनटच खाना है मेरे पास....". कुशल पीछे मूड कर देखता है तो प्रीति का इशारा अपनी चूत की तरफ था.

कुशल फिर से प्रीति की तरफ बढ़ता है. वो चलते चलते प्रीति के बहुत करीब पहुँच जाता है. दोनो की नज़रे एक दूसरे से मिलती है. कुशल की निगाहे प्रीति के जुवैसी लिप्स पे और प्रीति की निगाहे कुशल की निगाहो पर थी. प्रीति कुशल को बड़े प्यार से देखे जा रही थी, धीरे धीरे कुशल अपने आप को झुकाता है और अपने लिप्स प्रीति के बूब्स की तरफ ले जाता है. सीन ऐसा था जैसे वो प्रीति के बूब्स को किस करने जा रहा है. प्रीति ने भी बेजीझक होकर अपने दोनो बूब्स को और थोड़ा बाहर की तरफ कर दिया जिससे कुशल उन्हे सही के चूस पाए. लेकिन कुशल फिर से सीधा खड़ा होता है और उसके चेहरे पर एक कातिल मुस्कान थी.

प्रीति भी उसके चेहरे के भाव को समझ नही पाती. प्रीति के दिमाग़ मे हज़ारो सवाल उमड़ रहे थे उन सेकेंड्स मे...

प्रीति -" क्या हुआ.....?" प्रीति कुशल की आँखो मे देखती हुई बोलती है

लेकिन कुशल फिर से कुच्छ नही बोलता और तेज़ी से मूड कर बाहर जाने लगता है. प्रीति के साथ तो पता नही किस्मत अब कैसा खेल खेल रही थी. जैसे जैसे कुशल के कदम बाहर की तरफ बढ़ रहे थे वैसे वैसे प्रीति के दिल की धड़कने बढ़ती जा रही थी. प्रीति ने सेकेंड के हजारवे हिस्से मे डिसिशन लिया- और भाग कर वो कुशल की पीठ से चिपक जाती है. प्रीति के नंगे बूब्स अब कुशल की पीठ से चिपके हुए थे-

प्रीति -" क्या हुआ राजा..... कहाँ जा रहा है..... अपनी मर्दानगी की दो बूँद हमारी ज़मीन पर भी गिरा दे...." प्रीति तो जैसे अपना कंट्रोल खो चुकी थी.
 
प्रीति उसे अपनी उंगली दिखाती हुई बोलती है -" बता कि तुम दोनो कहाँ से आ रहे हो. कहाँ गयी थी मोम आधी नंगी होकर, और तू कहाँ गया था. दोनो ने ड्रिंक कहाँ करी. जल्दी बता नही तो पापा से जाकर पुछ्ना पड़ेगा". प्रीति के मूँह से पापा की बात सुन कर कुशल थोड़ा घबरा जाता है और प्यार से प्रीति को समझाता है.

" देख मेरी प्यारी बहना.... मैं तो अपने दोस्त के साथ पी रहा था. आते टाइम रोड पे मोम मिल गयी तो उसके साथ आ गया. तू इतना टेन्षन क्यू ले रही है. तू मस्त रह..." कुशल प्रीति के गालो पर चिकोटी काट ते हुए बोलता है.

प्रीति -" इससे पहले तो तू कभी बाहर पी कर नही आया, और ये तेरे गालो पे ये निशान कैसे है". प्रीति कुशल के गालो पर हाथ लगा कर उससे पूछती है. दर असल आज कुशल बहुत थप्पड़ खा चुका था अपनी मा के हाथ तो ये उसी के निशान थे.

कुशल फिर से एक बार घबरा जाता है कि कहीं प्रीति को शक ना हो जाए. वो फिर से एक नयी स्टोरी बनाता है.

" प्रीति अब तुझसे क्या च्छुपाना. मेरी एक फ्रेंड बनी थी, आज उसने मुझे अपने फ्लॅट पर बुलाया था. हम दोनो ने मिल कर ड्रिंक करी, और साली को जब चोदना चाहा तो उसने मुझे एक थप्पड़ मार दिया..."

प्रीति -" हे हे हे हे हे.... सही हुआ. तो इसीलिए तू इतने भाव खा रहा था मेरे लिए.". ये बोल कर प्रीति अपनी बाँहे कुशल के गले मे डाल देती है.

कुशल उन बाँहो को अपने गले से हटाते हुए बोलता है -

" प्रीति मुझे नींद आ रही है. प्लीज़ तू जा यहाँ से".

प्रीति उसके और करीब आते हुए बोलती है -" आख़िर ऐसी कैसी नींद है तेरी जो तू इतना गुस्सा हो रहा है......." और कस कर अपने बूब्स उसकी पीठ मे गढ़ा देती है.

" स्टॉप इट प्रीति ......." कुशल गुस्से मे उसे अपनी पीठ से हटाता हुआ बोलता है.

प्रीति -" आख़िर बात क्या है..... तू बताता क्यूँ नही"

कुशल -" साली मेरा दिमाग़ खराब मत कर...... बच्ची है तू अभी. एक दिन ज़बरदस्ती चोद दूँगा फिर रोती फ़िरेगी. मैं तुझे पहले भी समझा चुका हू कि मुझसे दूर रहा कर....." कुशल प्रीति को अपनी उंगली दिखाता हुआ बोलता है.

" कुशल.... कुशल" तभी नीचे से तेज तेज आवाज़े आती है जो कि स्मृति की थी. ये आवाज़े सुन कर कुशल जैसे भागा चला जाता है नीचे की तरफ और प्रीति रूम मे अकेले रह जाती है.

प्रीति को अभी भी कुच्छ समझ नही आ रहा था कि आख़िर बात क्या है. खैर वो अपने रूम मे चली जाती है और गेट बंद कर लेती है.

कुशल नीचे पहुँचता है, पंकज हॉल मे बैठा था और स्मृति किचन मे थी. कुशल सीधा किचन मे भागता हुआ जाता है - " जी मोम......."

स्मृति -" खाना खाएगा......?"

कुशल -" मोम मैं तो दिन रात ख़ाता रहू आप खिलाओ तो सही.." कुशल फिर से डबल मीनिंग बाते करता है

स्मृति थाली पटकते हुए उसे देती है और बोलती है कि उपर ले जा और खा ले. मैं सोने जा रही हू.

कुशल अपसेट माइंड से उपर आ जाता है. खाना ख़ाता है और सो जाता है.

नेक्स्ट मॉर्निंग.....

पंकज हॉल मे बैठ कर चाइ पी रहा है. उसे ऐसी आवाज़ सुनाई देती है जैसे कोई उपर से हाइ हील पहन कर उतर कर आ रहा हो -" ख़त खत...." वो उपर निगाहे करता है तो जैसे..... ओह्ह्ह्ह वो आराधना थी जिसने एक डिफरेंट टाइप की ड्रेस पहनी हुई थी. खुले बाल वो भी स्ट्रेट करे हुए, शॉर्ट ड्रेस जिसमे क्लियर दिख रहा था कि आज उसने अंदर ब्रा नही पहनी है. लाइट मेक अप किया हुआ था, पंकज का मूँह खुला का खुला रह जाता है ये सब देख कर लेकिन वो किसी तरह कंट्रोल करता है.

पंकज के लिए वाकई मे ये एक गुड मॉर्निंग थी. आराधना धीरे धीरे नीचे उतर आती है.

आराधना -" गुड मॉर्निंग डॅडी..." एक स्माइल के साथ वो डॅड को ग्रीट करती है

पंकज -" गुड मॉर्निंग बेटा. क्या आज बिल्कुल डिफरेंट लुक, नया अंदाज़. क्या बात है भाई..."

पंकज के मूँह से अपनी तारीफ सुनकर वो शरमा जाती है. और आप जान कर पंकज के टेबल के सामने रखे एक ग्लास को झुक कर उठाती है. उफफफफफ्फ़..... उसके कयामत जैसे बूब्स बाहर निकलने को तैयार हो जाते है. और वैसे भी उसने ब्रा नही पहनी थी. पंकज ये सब देख कर शॉक्ड रह जाता है. उसके अंदर का आदमी बाहर आने को तैयार हो जाता है लेकिन आराधना सीधा खड़ा होती है और कहती है.

" ओके डॅडी... कॉलेज जा रही हूँ...." और ये बोलते बोलते वो गेट तक आ जाती है. पंकज की निगाहे अब तक नही हटी थी. वो पीछे मूड कर देखती है और पंकज की निगाहे फिर से आराधना से मिल जाती है. आराधना को हँसी आ जाती है.

" आरू बेटी........" पंकज पीछे से बोलता है.

" जी डॅडी......" आराधना बिना मुड़े बोलती है.

" आज कॉलेज से कितने बजे तक आएगी...." पंकज आराधना से पूछता है.

आराधना की खुशी का ठिकाना नही था क्यूंकी पहली बार पंकज ने ऐसे पुछा था.
" जी बहुत जल्दी आ जाउन्गि....." और ये कह कर वो एक स्माइल के साथ बाहर चली जाती है.

पंकज की निगाहे गेट पर ही थी. किसी को पता नही कि उसके दिमाग़ मे क्या चल रहा था.

प्रीति रात भर सही सो नही पाई. उसको समझ नही आ रहा था कि आख़िर क्या हो रहा है. वो सुबह उठ कर नहाई और नॉर्मल कपड़े पहन कर बैठी है. उसके बाल गीले थे क्यूंकी अभी थोड़ी देर पहले ही वो नहा कर आई थी.

कुशल ब्रश करते करते अपने रूम से बाहर निकलता है. और साइड मे से प्रीति के रूम मे से झाँकता है. उसे एक दम फ्रेश प्रीति बैठी हुई दिखाई देती है. वो साइड मे से देख रहा था और ये प्रीति भी देख चुकी थी लेकिन प्रीति ऐसे रिएक्ट कर रही थी जैसे कि उसको पता नही कि कुशल देख रहा है.

" ओह्ह ये कपड़े अच्छे नही है. मुझे चेंज कर लेने चाहिए.." प्रीति अपने आप से बात करते हुए कुशल को ये बात सुनाती है. कुशल प्रीति के ये बात सुनकर और साइड मे हो जाता है और दरवाजे की दरार मे से देखने लगता है.

प्रीति को पता था कि कुशल देख रहा है. वो उसी जगह पर बैठे हुए घूम जाती है. सब से पहले अपना पयज़ामा नीचे करती है और उसके थोड़ी देर बाद स्लो मोशन मे अपनी पैंटी को भी.

ऊफ्फ क्या सीन था..... कुशल का लंड तो जैसे दीवार तोड़ने के लायक हो गया था. अब प्रीति का पयज़ामा भी नीचे था और पैंटी भी.

प्रीति जिस हालत मे थी वो हालत किसी भी जवान मर्द को भड़का सकती थी. भड़का क्या आग लगा सकती थी सो वैसा ही कुशल के साथ भी हो रहा था लेकिन पता नही क्यू वो अभी भी बाहर दरवाजे के किनारो मे से देख रहा था. प्रीति अब नीचे से बिल्कुल नंगी थी और उसकी गान्ड सॉफ दिखाई दे रही थी कुशल को.

प्रीति को पता था कि कुशल बाहर खड़ा है और आप जान कर वो लड़की होने के सारे फ़ायदे उठा रही थी. प्रीति अब एक हाथ अपनी चूत के नीचे से ले जाते हुए अपनी गान्ड तक ले जाती है. फिर उस हाथ को वापिस लाकर उस की एक उंगली अपने मूँह मे देती है और उसे अच्छे से गीला कर के फिर से पीछे लाती है. उस सीधी गीली उंगली को वो अपनी चूत पर मसलती है. और फ़चककक...... और सीधा अपनी गीली चूत मे घुसती है. कुशल पर तो जैसे अटॅक पर अटॅक हो रहे थे, वो फिर से इधर उधर देखता है कि कहीं और कोई तो नही है फ्लोर पर लेकिन पूरा फ्लोर खाली पड़ा था.

कुशल भाग कर पीछे की साइड जाता है और देखता है कि कहीं आराधना दीदी तो अपने रूम मे नही है. लेकिन वो रूम खाली पड़ा था, कुशल वापिस भाग कर आता है और फिर से दीवार के किनारो मे से झाँक कर देखने लगता है. उसकी कुँवारी चूत को देख कर वो एक बार फिर से पागल हो जाता है. प्रीति कुच्छ कर सके या नही लेकिन उसने कुशल को ऐसा तो कर दिया था कि उसका लंड उसके शॉर्ट से बाहर आने को फड़ फाडा रहा था. कुशल अपनी निगाहे और गढ़ा देता है उस दरवाजे के किनारो मे. वो क्लियर देखता है कि प्रीति अपनी पूरी उंगली चूत मे घुसाती है और बाहर निकालती है.

कुशल का चेहरा लाल हो चुका था. और ब्लड प्रेशर हाइ हो चुका था. उसने शायद लास्ट मोमेंट तक वेट किया लेकिन जब उससे नही रहा गया तो उसने अपना लंड शॉर्ट के बाहर निकाल लिया.

" काश मैने इसकी इन्सल्ट ना की होती तो आज इसे चोद देता...... कसम से इसकी चूत कितनी मस्त है." कुशल अपने आप मे बड़बड़ाता है.

कुशल अपने विशाल लंड को बाहर निकाल कर उसे आगे पीछे करने लगता है. एग्ज़ाइट्मेंट जवानी मे अँधा कर देती है और यही रीज़न था कि खुले आम गॅलरी मे वो अपना लंड निकल कर खड़ा था.

" साली क्या खाती है.... इतनी पटाखा चूत तो किसी की भी नही देखी आज तक मैने..." वो फिर से बड़बड़ाता है.

" कुशल................" बहुत तेज़ी से एक आवाज़ कुशल के कानो से टकराती है. कुशल की तो जैसे जान ही निकल जाती है. वो नज़रे फिरा कर देखता है -" मोम.............."

सीढ़ियो से उपर आकर स्मृति खड़ी थी और जैसे ही वो कुशल को देखती है कि वो खुले आम अपने लंड को ऐसे बाहर निकाल कर खेल रहा है तो वो उसे आवाज़ लगाती है.

कुशल को तो जैसे काटो तो खून नही. स्मृति तेज तेज चल कर कुशल के पास आती है. कुशल अपने लंड को तेज़ी से अपने शॉर्ट के अंदर डाल लेता है लेकिन खड़ी हालत मे इतना बड़ा लंड आख़िर कैसे समाए उसमे. लंड का उपरी हिस्सा अभी भी बाहर ही था और उसे बार बार कुशल अंदर करना चाह रहा था.

स्मृति पास आती है और कस के एक और तमाचा - "चटककक..........."

" बद तमीज़. तेरी हिम्मत इतनी बढ़ गयी कि आज तू खुले आम घर मे ये काम कर रहा है. क्या देख रहा था यहाँ से....." स्मृति फिर प्रीति के गेट के अंदर झान्कति है लेकिन वहाँ कोई नही होता. कुशल भी भगवान का शुक्रिया अदा करता है.

कुशल अपने कान पे हाथ लगाए खड़ा था. शायद थप्पड़ की गूँज अभी तक उसके कान मे थी.

" सच बता क्या कर रहा था यहाँ...." स्मृति उसे फिर से वॉर्निंग देती है

कुशल -" मोम.... मोम....वो........."

स्मृति -" क्या मोम मोम लगा रखा है. जल्दी बोल नही तो अभी तेरे डॅडी को बुलाती हू......"

कुशल -" मोम वो..... वो आपकी याद ज़्यादा आ रही थी तो ......." कुशल को उस टाइम जो ठीक लगा उसने वो बोल दिया.

ये बात सुन कर स्मृति की भी एक बार को हँसी छूट गयी लेकिन उसने कुशल को अहसास नही होने दिया.

" देख कुशल मैं तुझे पहले ही समझा चुकी हू. कल रात मुझे ये लगा कि तू नादान है और तू सुधर जाएगा लेकिन तू तो यहाँ खुले आम अपनी मा को याद कर रहा है. तेरी दो जवान बहने भी है, अगर वो देख लेती तो उन्हे कैसा लगता बता....." स्मृति उसे समझाते हुए बोलती है.

" सॉरी मोम....... अबसे अपने रूम मे ही आपको याद कर लिया करूँगा....." कुशल भी बहुत इनोसेंट बनते हुए बोलता है.
" फिर वोही बात..... देख तेरे जैसे लड़के गर्ल फ्रेंड बनाते है. तेरी उमर है, लेकिन तुझे शोभा नही देता कि तू अपनी मोम के बारे मे सोचे...." स्मृति उसे फिर समझाती है

" मोम... मैं सच बोल रहा हू. मेरी क्लास मे एक लड़की ने ट्राइ किया लेकिन मेरा लंड किसी और के साथ खड़ा नही होता लेकिन जैसे ही आपके बारे मे सोचता हू तो वैसे ही देखो खड़ा हो जाता है..". कुशल एक बार फिर से अपने लंड के दर्शन अपनी मा को करा देता है.

स्मृति -" ओह माइ गॉड. ये लड़का तो पागल हो गया है." और स्मृति नीचे जाने लगती है.

कुशल उपर वाले का शुक्र माना रहा था कि सारी सिचुयेशन कंट्रोल हो गयी. नही तो लेने के देने पड़ जाते. वो फिर से एक बार दरवाजे के अंदर झाँक कर देखता है लेकिन वहाँ कोई नही था. कुशल वापिस अपने रूम मे आता है और नहाने लगता है.

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इधर आराधना कॉलेज पहुँचती है, आज उसे सब डिफरेंट आइज़ से देख रहे थे. उसने कभी अपनो बॉडी को इतना शो ऑफ नही किया था. कॉलेज के एंट्रेन्स गेट से लेकर अंदर की कॅंटीन तक उसे सब लड़को ने ऐसे देखा जैसे इससे पहले कभी हॉट आइटम देखा ही ना हो. लड़कियो की भी हालत खराब थी, क्यूंकी उनके बाय्फरेंड्स की नज़रे आराधना से हट नही रही थी. आराधना के चेहरे पे एक अलग ही स्माइल भी थी, लड़की होने का अहसास उसे होने लगा था औट उसका कॉन्फिडेन्स भी बढ़ रहा था. चाल मे एक बात आती जा रही थी.

कॅंटीन मे जैसे ही एंट्री लेती है, एक पल के लिए तो उसे सिमरन पहचान भी नही पाती. वो एक नज़र हटा कर जब दोबारा देखती है तो उसे समझ आता है कि वाकई मे ये आराधना है. सिमरन अपनी चेर से खड़ी हो जाती है.

" मेरी जान, सारी लड़कियो की दुकान बंद कराएगी तू तो"...... सिमरन जाकर हग करती है आराधना को

आराधना " क्या मतलब है तेरा दुकान से....".

सिमरन -" तू छोड़ लेकिन बाइ गॉड यार क्या लग रही है. कॉलेज के क्लीनर से लेकर प्रोफेसर तक की निगाहे रहेंगी तुझ पर. और क्या ब्रा भी नही पहनी. मेरी जान इन अनटच बूब्स को आज कहीं कोई टच ना कर दे..."

आराधना -" किसी की हिम्मत है जो टच करे.... लेकिन सब छोड़ ये बता कि तू घर से क्यू भाग गयी थी....?"

सिमरन -" अबे यार मत पुच्छ.... मेरे डॅड की गर्ल फ्रेंड घर पर थी और मेरी मा आ गयी. मेरे डॅड घबरा गये थे तो मेरी हेल्प माँग रहे थे. इसीलिए जल्दी जाना पड़ा."

आराधना( शॉक्ड होते हुए)-" तेरे डॅड की गर्ल फ्रेंड? ओर तुझे पता भी है कि उनकी गर्ल फ्रेंड है. वो तो मॅरीड है, फिर उनकी गर्ल फ्रेंड क्यू? क्या कहा तेरी मोम ने..."

सिमरन -" अबे तू जानती नही है, आज कल तो सभी के डॅड की गर्ल फ्रेंड होती है. अपने डॅड की सेट्टिंग तो मैने ही कराई.... सिमी से. बस 19 साल की मस्त लड़की है. बिंदास रहती है एक दम मेरी तरह. वो डॅड के साथ थी तो मोम शॉपिंग करके जल्दी आ गयी, मोम ने तो बस आते ही सवाल शुरू कर दिए और डॅड को बोलना पड़ा कि ये सिमरन की फ्रेंड है."

आराधना -" 19 साल की लड़की? यार उसे क्या तेरे डॅड ही मिले बस बॉय फ्रेंड बनाने के लिए?"

सिमरन - " अब सारे सवाल अभी करेगी. तू बता कि उस रात गाड़ी कुच्छ आगे बढ़ी या नही."

आराधना शरमा जाती है और कुच्छ नही बोलती.

" ओये होये मेरी जान के लाल गाल तो देखो. शरम से एक दम लाल हो चुकी है.... बता ना कि रात को क्या हुआ?" सिमरन उसे ज़ोर देते हुए पूछती है

आराधना-" चल कैसी बाते करती है....."

सिमरन -" मेरी जान एक बात कहु?"

आराधना ( नज़रे झुकाते हुए) -" हाँ बोल?"

सिमरन -" लंड लेने के लिए थोड़ा बेशर्म बन ना पड़ता है. ये जमाना ही ऐसा है, गोल्ड मिल जाता है लेकिन लंड नही मिलता. तो मेरी जान शरमाना छोड़ और अपनी इस फ्रेंड की अगर हेल्प चाहिए तो सॉफ सॉफ बता..."

आराधना ( गुस्से मे)- "कुच्छ भी नही हुआ.... पूरी रात वेट किया लेकिन वो उपर नही आए.... ओके".

सिमरन -" तो गुस्सा क्यू होती है. सब सही हो जाएगा. लेकिन एक बात का ख्याल रख. लड़कियो को ज़ुबान से ज़्यादा बॉडी के मध्यम से बोलना होता है...."

आराधना -" देख मेरा मूड खराब मत कर. अगर हेल्प करनी है तो सॉफ सॉफ बता...."

सिमरन -" अबे तो क्या अपने डॅड से जाकर ये बोल सकती है कि मुझे चोद दो.... "

आराधना -" यार तू जो ना..... जा मुझे तुझसे बात नही करनी." और वो उठ कर चल देती है. तभी सिमरन उसका हाथ पकड़ती है और बोलती है

सिमरन -" मेरी जान, बैठ. सुन अब मेरी बात, लड़की जितनी सादगी मे रहे उतना अच्छा है. तेरे डॅड एक दम मस्त आदमी है लेकिन एक अच्छे इंसान भी. हो सकता है कि वो तुझे चोदना ना चाहते हो. तो तेरा काम है कि उनके अंदर के मर्द को इतना जगाना कि वो मजबूर होकर तुझे खुद ही चोद दे. और जहाँ उन्होने एक बार तुझे चोदा, मुझे पूरा यकीन है कि तेरी मम्मी की चूत मे उन्हे मज़ा नही आएगा फिर. लेकिन तुझे मेहनत पूरी करनी पड़ेगी. लेकिन मुझे तेरी बॉडी पे पूरा भरोसा है कि वो जल्दी ही फिसल जाएँगे...". अपनी तारीफ सुनकर आराधना शरमा जाती है.

सिमरन फिर बोलना शुरू करती है - " तेरे साथ सबसे बड़ी प्राब्लम ये है कि तेरी मोम भी बहुत सेक्सी है. हो सकता है कि वो खूब प्यार देती हो तेरे डॅड को".

आराधना -" यार मेरी मोम एक दम हॉर्नी है. वो पापा का पीछा नही छोड़ती. दिन मे भी उनके पीछे लगी रहती है..." आराधना थोड़ा एग्ज़ाइटेड होकर बोलती है

सिमरन -"ओये होये मेरी जान. मोम को पहले से ही अब्ज़र्व कर रही है. वैसे बता कि तुझे ऐसा क्यू लगा कि वो हॉर्नी है...?

आराधना -" क्या बताऊ लेकिन मैने एक बार देखा कि मॉर्निंग मे ही ....."

सिमरन -" मॉर्निंग मे ही क्या?"

आराधना -" मॉर्निंग मे ही.... मॉर्निंग मे ही प्यार कर रहे थे...."

सिमरन -" साली खुल कर नही बता सकती कि क्या कर रहे थे वो...." सिमरन गुस्से मे बोलती है

आराधना -" गाली? तूने मुझे गाली दी....."

सिमरन -" मेरी बुलबुल ये तो प्यार की गाली है.... अब बता कि कैसा प्यार कर रहे थे वो?"

आराधना -" मोम डॅड का वो पार्ट चूस रही थी.."

सिमरन -" ओये कितनी लकी है मेरी दोस्त. लंड देख भी चुकी है? कैसा है?"

आराधना -" अबे यार पुच्छ मत. ऐसा लगा जैसे नकली है. एक दम मोटा और लंबा. "

सिमरन ( एग्ज़ाइटेड होते हुए)- " तेरी तो लाइफ बन गयी. आज कल तो साले लड़के उच्छलते है बहुत और जब बेड मे पहुँचो तो पता चलता है कि 6 इंच की लुल्ली."

आराधना " क्यूँ तेरे बॉय फ्रेंड का छोटा है क्या?"

सिमरन -" देख मैं फेक लाइफ नही जीती. और झूठ भी नही बोलती. मेरा बॉय फ्रेंड अच्छा प्यार करता है बेड मे लेकिन साले का लंड बस 6 इंच होगा. लड़की को ड्रामा करना लड़ता है कि वो हॅपी है लेकिन यार उससे खुजली नही मिट ती है"

आराधना -" हे हे हे हे हे. यू आर फन्नी गर्ल."

सिमरन -" तुझे एक बात बताऊ?"

आराधना " हाँ बता."

सिमरन -" पता है मैं तेरे घर पर मिली ना उसके साथ. तो वो मेरे उपर था, उसने लंड मेरी चूत मे घुसाया. मैं बहुत एग्ज़ाइटेड थी तो मैने उसे बोला कि बेबी मोर इनसाइड, मोर इनसाइड. वो बेचारा शर्मा कर मुझसे बोला कि सिमरन मैं पूरा अंदर कर चुका हू..."

आराधना -" हा हा हा हा हा हा. व्हाट अ जोक. ग्रेट , एनीवे आज मुझे घर जल्दी जाना है.

सिमरन -" क्यू?"

आराधना -" ये मैं तुझे बाद मे बताउन्गि...."

सिमरन -" ओके जैसी तेरी मर्ज़ी...."

दोपहर हो चुकी थी. पंकज घर मे ही था तो उसे एक फोन कॉल आता है जिसे सुनकर पंकज बहुत एग्ज़ाइटेड हो जाता है. और भागा भागा स्मृति के रूम मे जाता है.

पंकज -" डार्लिंग...... डार्लिंग.....?"

स्मृति -" क्या बात है, क्यू इतना एग्ज़ाइटेड हो रहे हो?" स्मृति बेड पे बैठ कर काम कर रही थी.

पंकज -" डार्लिंग मेरा बिज़्नेस प्रपोज़ल देल्ही मे पास हो गया है." ऑर वो भाग कर स्मृति को हग कर लेता है.

स्मृति -" सच मे..... ये तो बहुत अच्छी खबर है ". स्मृति भी पंकज को हग करते हुए बोलती है.

पंकज -" मुझे आज ईव्निंग ही देल्ही जाना पड़ेगा वो भी 15 दिनो के लिए. प्लीज़ मेरे कपड़े पॅक कर देना"

स्मृति -" मैं भी साथ चलूंगी आपके.."

पंकज -" नही स्वीटी, बच्चो को अकेला नही छोड़ सकते. और वैसे भी मैं 15 दिनो के लिए ही तो जा रहा हू."

स्मृति -" लेकिन मेरा मन नही लगेगा आपके बिना." स्मृति भी उसे टाइट्ली हग करते हुए बोलती है

पंकज -" मेरी जान अगर ये प्रॉजेक्ट सक्सेस्फुल हो गया ना तो अपना अगला घर देल्ही मे ही बनेगा. चल अब टाइम कम है मेरी पॅकिंग शुरू कर दे. आज ईव्निंग मे ही निकलना पड़ेगा". पंकज उससे अलग होते हुए बोलता है
स्मृति वहाँ से उठ कर बॅग वग़ैरा निकालने लगती है. और पंकज बाहर आ जाता है, वो सोचते सोचते सोफे तक आया ही था कि तभी -

" हाई डॅडी......." आराधना भाग कर अपने डॅड को हग कर लेती है. वो कॉलेज से आ गयी थी और पूरी ताक़त से अपने डॅड के सीने से लग जाती है. उसके हार्ड स्टोन टाइप बूब्स अपने डॅड के सीने मे गढ़ रहे थे. उसके डॅड अपने हाथ उसके पीछे ले जाते है और उसकी नंगी पीठ पर पहुँच जाते है. क्यूंकी उसकी ड्रेस बॅक लेस थी. किसी भी जवान मर्द का एरेक्षन पासिबल था, कुच्छ ही सेकेंड्स मे पंकज का लंड बाहर निकल कर आराधना के पेट को टच करने लगा. आराधना को इस बात का अहसास हो चुका था और वो तुरंत अलग हो जाती है. आराधना की एक नज़र नीचे और फिर अपने डॅड के चेहरे पे जाती है. आराधना के चेहरे पे एक हल्की सी स्माइल आ जाती है. और वो बिल्कुल अलग हो जाती है. दोनो मे से अब कोई कुच्छ नही बोल रहा था, पंकज की तो जैसे हार्ट बीट ही रुक गयी थी और उसका मूँह भी खुला हुआ था.

आराधना फिर से स्टाइल मे अपने रूम की तरफ जाने लगती है. सीढ़ियो पे चढ़ने से पहले एक कॉर्नर मे वो अपनी ड्रेस को थोड़ा सा उपर कर लेती है. उफ़फ्फ़ आराधना ने भी जैसे पंकज को बिल्कुल टीज़ करने का फ़ैसला कर लिया था. सीढ़ियो पे चढ़ते टाइम, जैसे आराधना की हाफ गान्ड और पैंटी पंकज को विज़िबल हो गयी थी.

पंकज की निगाहे जैसे पत्थर की बन चुकी थी और वो अपनी नज़रे हिला नही रहा था. आराधना एक बार फिर से पीछे मूँह कर के देखती है और पंकज को अपनी गान्ड की तरफ घुरती हुई पाती है. वो फिर से एक स्माइल देती है और उपर चली जाती है. अपने रूम मे आकर चेंज करने लगती है.

थोड़ी देर बाद वो नीचे खाना खाने के लिए आती है.

आराधना -" डॅड, मोम कहाँ है मुझे खाना खाना है," आराधना अपने डॅड से पूछती है

लेकिन पंकज तो जैसे कहीं और ही खोया था. आराधना उसके चेहरे के पास जाकर चुटकी बजाती है -" डॅड..... डॅड?

पंकज -" यस.... यस बेटा...." वो होश मे आता है

आराधना -" मोम कहाँ है, मुझे भूख लगी है तो खाना चाहिए"

पंकज -" वो पॅकिंग कर रही है...."

आराधना ( बहुत हॅपी होते हुए)- " क्यू मोम कहीं जा रही है?"

पंकज -" नही मैं जा रहा हू...." पंकज उसे रिप्लाइ करता है

आराधना की तो जैसे पाँव तले से ज़मीन खिसक जाती है. उसके चेहरे से तो जैसे हँसी ऐसे गायब हो जाती है जैसे पर झाड़ मे पत्ते. फिर भी वो कंट्रोल करते हुए अपने चेहरे को दूसरी और घुमाती है और बोलती है-

" आप..... आप कहाँ जा रहे......?" आराधना पूछती है

पंकज -" वो.... वो एक बिज़्नेस डील है. देल्ही जाना है....."

आराधना -" कितने दिन के लिए.....?" आराधना की आवाज़ बहुत डाउन हो चुकी थी.

पंकज -" मिनिमम 15 डेज़ के लिए..."

आराधना की तो जैसे आँखो मे से आँसू निकलने को तेय्यार हो जाते है. वो बिना टाइम वेस्ट किए सीधा अपने रूम की तरफ भागती है. अपना रूम भड़ाक से बंद करती है और बेड पे लेट जाती है. गेट इतनी तेज बंद हुआ था कि उसकी आवाज़ नीचे पंकज भी सुन सकता था. यूँ ही टाइम बीत रहा था और उसने खाना भी खाया.

अब ईव्निंग हो चुकी थी. पंकज भी अच्छे तरह से फ्रेश होकर और खाना वाना खाकर जाने के लिए तैयार था. स्मृति का मन भी उदास था.

" मैं बच्चो को बुला कर ले आती हू...." स्मृति पंकज के बॅग को बाहर लाते हुए बोलती है.

पंकज -" ठीक है?"

स्मृति उपर जाती है. सबसे पहले आराधना का रूम पड़ता है. उसका गेट बंद था, स्मृति उसे नॉक करती है -" आरू...... आरू बेटा. " आराधना अंदर ही थी लेकिन कोई रिप्लाइ नही करती, वो तुरंत वॉशरूम मे भागती है क्यूंकी वो अपनी मा को अपने आँसू नही दिखाना चाहती थी. वो वॉशरूम मे से ही अपनी मोम को कहती है -"

" यस मोम..... मैं वॉशरूम मे हू.... बोलो क्या बात है...?"

स्मृति -" बेटे नीचे आ जा. तेरे डॅड देल्ही जा रहे है..."

आराधना -" आप चलिए मैं आ रही हू...."

स्मृति ठीक है बोल कर आगे की तरफ चली जाती है. उसके बाद कुशल का रूम पड़ता है, स्मृति उसके रूम मे जाने ही वाली थी कि पता नही क्या सोच कर रुक जाती है और सीधा चल कर प्रीति के रूम मे चली जाती है. प्रीति बेड पर बैठ कर गेम खेल रही थी.
 
कुशल -" अच्छा !!!! फिर से धमकी. अब आप बताइए पापा को. मैं भी देखता हू कि आप क्या बताती है. क्या बोलेंगी आप उन्हे कि आप लाइयन से चुदि और जब पता चला कि वो कुशल है तो गुस्सा आ गया? या ये बोलेंगी कि मैने ज़बरदस्ती चोद दिया आपको."

स्मृति उसकी बात सुनकर तोड़ा घबरा जाती है. वो उससे नज़रे चुरा कर बोलने लगती है -" मैं तुझसे कोई और बात नही करना चाहती हू."

कुशल आगे बढ़ कर अपनी मा का हाथ फिर से पकड़ लेता है. " छोड़ मेरा हाथ कमिने......". लेकिन कुशल उसकी एक बात नही सुनता और उसे खींच कर अपनी बाँहो मे फिर से भर लेता है.

" मैने कहा छोड़ मुझे...." स्मृति छटपताती है. उसकी पीठ कुशल के सीने मे गढ़ रही थी. कुशल अपना एक हाथ ले जाकर फिर से उसकी गान्ड पर रख देता है.

" लगता है आज इस ऑडियो सीडी को दोनो साइड से बजाना पड़ेगा". कुशल का इशारा अब स्मृति की गान्ड की तरफ था.

स्मृति पूरी ताक़त लगा कर फिर से कुशल की पकड़ से बच निकल जाती है. उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी " तू..... तू ....... क्या सोचता है कि जो तू चाहेगा वो कर सकता है...." स्मृति गिड गीडाती है.

" झूठ से प्यार माँगा तो चूत मिली. लेकिन सच से सिर्फ़ गालियाँ मिल रही है. क्यूँ आपको मेरा लंड पसंद नही आया...." कुशल बोलता है

स्मृति -" मुझसे ऐसी बाते मत कर........."

कुशल -" मैं भी एक यंग अडल्ट हू. आपसे ऐसी बात कर सकता हू. आप मुझे बताइए कि क्या इस लंड मे जान नही है. आपकी चूत क्या सही नही चोदि मैने...." आगे बढ़ कर फिर स्मृति का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख देता है.

स्मृति अपना हाथ झटक कर फिर से पीछे की तरफ हो जाती है. लेकिन कुशल चुप नही होता -

" आप की चूत मे जो रस है , इस गान्ड मे जो दम है वो इस पूरे फार्म हाउस मे किसी लड़की के पास नही होगा. आपकी गदराई जवानी को देख कर मैं पागल हो रहा था. प्लान बनाया और वो सफल भी हुआ लेकिन ग़लती से लाइट जल गयी नही तो आप इस लाइयन से दोबारा मिलती...."

" मैं दोबारा नही मिलती............" स्मृति बोलती है

" खाना अपने हज़्बेंड की कसम..." कुशल उससे पुछ्ता है.

" इस घटिया लाइयन के लिए मे अपने हज़्बेंड की कसम नही खा सकती..." स्मृति बोलती है.

" लाइयन घटिया है. मे जानता हू लेकिन क्या उसका लंड भी घटिया है? क्या आप उससे सॅटिस्फाइ नही हुई?" कुशल पुछ्ता है

स्मृति चुप खड़ी हो जाती है और वो कुच्छ नही बोलती. कुच्छ सेकेंड्स के लिए रूम मे साइलेन्स हो जाता है. लेकिन कुशल फिर से बोलना शुरू करता है -

" मोम, बिलीव मी. हम एंजाय कर सकते है लेकिन किसी को पता भी नही चलेगा. आप को देख कर कोई भी नही कह सकता कि आप मेरी मा है. यहाँ तक कि जवान लड़किया भी आपके सामने पानी नही माँगेंगी. और आप अपने बेटे की हालत का तो सोचिए. भगवान ने मुझे इतना बड़ा लंड दिया है- किसलिए. सिर्फ़ सुबह उठ कर मूतने के लिए. इससे भला हो सकता है. मैं दिन रात आपकी सेवा करूँगा, बदले मे मुझे कुच्छ भी नही चाहिए. किसी और लड़की की तरफ नज़रे उठा कर के भी नही देखूँगा. प्लीज़ मुझे अपना पूरा प्यार दे दो". और कुशल अपना सर स्मृति के कंधो पे रख देता है.

" कुच्छ और कहना है या मैं जाउ...". स्मृति अपना कंधा हटाते हुए बोलती है.

" ट्राइ टू अडनरस्टॅंड मोम.... अब सब हो चुका है. हम इस रिलेशन्षिप को कंटिन्यू कर सकते है. मैने आपको टेस्ट कर लिया है और हमे एक ही घर मे रहना है. सोचिए कि मैं कैसे कंट्रोल करूँगा. आप अपने इस बेटे पे थोड़ा सा तो रहम करिए...." कुशल रिक्वेस्ट करता है.
स्मृति -" तेरे बाप से बोल कर सबसे पहले तेरी शादी करा दूँगी. फिर सब सही हो जाएगा...."

कुशल -" मैं सही कह रहा हू कि मेरा लंड भी खड़ा नही होगा चाहे पूरी रात कोई ट्राइ भी कर ले. अब ये बस मेरी मा के लिए ही खड़ा होगा.."

स्मृति -" बस बहुत हुआ.... अब मैं जा रही हू..." और कह कर वो बाहर निकलने लगती है

कुशल -" क्या आप मुझे साथ लेकर नही चलेंगी......"

स्मृति -" क्यू तू मेरे साथ आया था...."

कुशल -" मैं तो आ जाता लेकिन आप को लाइयन से मिलने मे थोड़ी परेशानी होती, इसीलिए नही आया...."

स्मृति -" मुझे नही पता और मैं जा रही हू..." और ये कह कर वो उस फ्लॅट से बाहर निकल कर ग्राउंड मे आ जाती है.

कुशल उसके पीछे पीछे चल रहा था. कुशल की निगाहे बस उसकी मतकती हुई गांद पर ही थी. कुशल पूरी बेशर्मी वाले मोड पर था. वो पीछे से ही सीटी बजाता हुआ बोलता है -" क्या मस्त गांद है............. वन इन आ मिलियन". स्मृति रुक जाती है. पीछे मुड़ती है और कहती है -

" क्या कहा अभी तुमने......."

कुशल -" मैने..... मैने कहा कि घर कैसे जाउ मे......"

स्मृति -" लुक..... कुशल!! अगर अबसे तूने कुच्छ बोला तो मुझसे बुरा कोई नही होगा.." स्मृति उंगली दिखा कर कुशल से बोलती है और फिर से आगे चल देती है

कुशल अभी भी पीछे पीछे चल रहा था लेकिन कुच्छ बोल नही रहा था. धीरे धीरे स्मृति उस फार्म हाउस से बाहर निकल जाती है. कुशल भी उसके पीछे पीछे बाहर आ जाता है. स्मृति अपनी गान्ड को मॅटकाति हुई फिर पार्किंग मे अपनी कार लेने चली जाती है.

कुशल बाहर आकर रोड पे बैठ जाता है. स्मृति वहाँ से कार लेकर आती है और कुशल को बैठते हुए देखती है. एक जोरदार ब्रेक के साथ गाड़ी उसके पास रुक जाती है. स्मृति विंडो ग्लास खोलती है और बोलती है. "यहीं मरने का इरादा है"

कुशल -" आप रहने दीजिए. मैं कैसे भी चला जाउन्गा.... अगर नही भी आया तो रात को रोड पर ही सो जाउन्गा....." कुशल बहुत मासूम बनते हुए बोलता है.

स्मृति गुस्से मे विंडो डोर बंद करती है और तेज़ी के साथ कार आगे ले जाती है. गाड़ी थोड़ी डोर ही चली थी कि एक बार फिर तेज़ी से ब्रेक लगती है और कार रिवर्स आने लगती है. कार फिर से कुशल के पास आकर रुक जाती है. लेकिन स्मृति कुच्छ बोलती नही.... हॅपी मूड के साथ कुशल खड़ा होकर गेट खोलता है और कार मे बैठ जाता है.

" आइ लव यू मोम....." कुशल स्मृति की तरफ देख कर बोलता है लेकिन तब तक स्मृति कार आगे बढ़ा चुकी थी.

कार एक सुनसान रास्ते से गुजर रही थी. स्मृति ने फुल स्पीड की हुई थी.

" मोम....... मोम......" कुशल बोलता है

" भोंक..... क्या बात है....." स्मृति बोलती है

" वो मोम..... वो.... पेशाब लगा है......." कुशल बोलता है.

पूरी ताक़त के साथ स्मृति फिर से ब्रेक लगाती है. " जा जल्दी कर के आ......" स्मृति बोलती है

कुशल गेट के बाहर निकल कर कार के ठीक सामने अपनी पॅंट खोलने लगता है. कार की हेडलाइट जली हुई थी.

" क्या यही जगह मिली है तुझे.... स्मृति चिल्लाति है

" मोम मुझे डर लगता है....." तब तक वो पॅंट खोल कर अपना लंड बाहर निकाल लेता है. और बाहर निकल कर एक स्माइल देता है.

" तो कम से कम मूँह तो दूसरी साइड कर ले...." स्मृति फिर से चिल्लाति है

ये सुनकर कुशल अपना मूँह दूसरी डाइरेक्षन मे कर लेता है.

कुशल काफ़ी देर तक ऐसे ही पेशाब करता रहता है. स्मृति भी जल्दी मे थी और बार बार उसे हॉर्न दिए जा रही थी. फाइनली कुशल अपनी ज़िप बंद करके भाग कर कार मे आकर बैठ जाता है.

स्मृति फिर से गुस्से मे तेज़ी के साथ गियर डाला और कार फिर से उस सुनसान रोड पे भागने लगी. लेकिन स्मृति का चेहरा तम तमाया ही हुआ था

" इतना टाइम लगता है तुझे पेशाब करने मे..... क्या सालो से रोक रखा था..." स्मृति गुस्से मे बोलती है.

" मोम... क्या आप तो हर बात पर ही गुस्सा हो रही है. मैने कोई टाइम वेस्ट तो किया नही. जितनी देर आया उतनी ही देर तक किया. अगर मुझे पता होता कि आप इतना गुस्सा हो जाएँगी तो मैं जाता ही नही." कुशल बोलता है

" चल अब अपने ड्रामे बंद कर..... " स्मृति कार चलाते हुए सामने देखकर बोलती है.

कार चल रही थी और दोनो शांत थे. कुशल तिर्छि निगाहो से बार बार स्मृति को देखे जा रहा था.

" मोम एक बात कहु....." कुशल बहुत ही पोलाइट स्टाइल मे स्मृति से बोलता है

" नही.... मुझे कुच्छ नही सुन ना....." स्मृति रिप्लाइ करती है

कुशल चुप होकर कार मे साद अंदाज़ मे कॉर्नर मे मूँह करके बैठ जाता है. अब कुशल का मूँह बाहर की तरफ था, स्मृति भी उसे तिर्छि निगाहो से देखती है.

" भोंक जल्दी क्या बात है....." स्मृति उसे थोड़ा सा सॅड देख कर बोलती है.

कुशल खुश होकर अपनी मा की तरफ घूमता है. और बोलता है -

कुशल -" मोम, चाहे जो भी बात है लेकिन एक बात कहु... चलो कही देता हू. आज मैने अपनी वर्जिनिटी खो दी. आज मैं कुँवारा नही रहा." कुशल सॅड स्टाइल मे अपने माथे पे हाथ मारते हुए बोलता है.

स्मृति -" तू फिर शुरू हो गया. मैने कहा ना तुझे कि मुझे ये बकवास पसंद नही है. और वैसे भी तेरा क्या भरोसा....... भूल गया वो बाते... आज मैने पार्टी मे एक लॅडीस के साथ ये किया और ये किया. फिर भी आज तक कुँवारा था तू. पता नही इतना फ्रॉड कैसे हो गया तू". स्मृति उसे वो बाते याद दिलाती है जो वो लाइयन बन कर बोलता था

कुशल -" मोम, चाटिंग मे ऐसा तो चलता ही है. लेकिन सच मे आज तक मैने किसी के साथ ..... नही किया था. आज पहली बार ऐसा हुआ."

स्मृति -" तुझे ये फार्म हाउस किसने बताया था?"

कुशल -" मेरा एक फ्रेंड है. उसका नाम सन्नी है, उसने बताया था यहाँ के बारे मे....."

स्मृति -" तो क्या तूने उसे ये भी बता दिया कि तू आज यहाँ किसके साथ आ रहा है....?"

कुशल -" मोम आप तो मुझे बिल्कुल पागल समझती है. भला ये बाते भी बताने की होती है, ऐसा तो कभी कोई नही बता सकता...."

स्मृति -" इससे पहले भी यहाँ किसी के साथ आया है तू.?" स्मृति कार चलाते हुए ये सारी बाते कर रही थी.

कुशल -" मोम मैने कहा ना कि आज पहली बार आया हू यहाँ. आप कहेंगी तो दोबारा भी आ जाउन्गा.... हाहहहाहा..."

स्मृति उसकी तरफ गुस्से भरी निगाहो से देखती है और ये देख कर कुशल की हँसी फिर से बंद हो जाती है.

थोड़ी देर बाद कुशल फिर से बात करना शुरू करता है-

" मोम एक बात पुच्छू ...." कुशल बोलता है

" हाँ बोल...." स्मृति का बिहेवियर इस बार थोड़ा पोलाइट था

" क्या आपको मेरे साथ...... यानी जो हमारे बीच हुआ अगर हम उस मे रीलेशन शिप को भूल जाए तो क्या आपको अच्छा नही लगा.... प्लीज़ प्लीज़ गुस्सा मत होना. ये एक सिंपल सवाल है" कुशल अपनी मा से पुछ्ता है.
स्मृति गाड़ी चलाने मे बिज़ी थी. उसने कुशल की इस बात का जवाब देना उचित नही समझ. लेकिन कुशल चुप हो ही नही रहा था और वो फिर से बोलता है -

" आप जितनी सेक्सी दिखती है.... उससे कहीं ज़्यादा सेक्सी आप उस दौरान हो जाती हैं जब आप..... जब आप सेक्स करती हैं...." कुशल बोलता जा रहा था लेकिन स्मृति उसकी किसी बात का जवाब देना उचित नही समझ रही थी.

लेकिन कुशल को तो जैसे भूत ही सवार था कि आज वो चुप नही होगा.

" किचन मे काम करते हुए देख कर नही लगता कि आप इतनी आक्टिव हो सकती है सेक्स के दौरान.... रियली यू आर ग्रेट मोम. हर बार मैं आपका ही बेटा बन कर पैदा होना चाहता हू."

" देख कुशल... मुझे एक और ग़लती का अहसास हो गया है कि तुझे मैं साथ लेकर आई. उससे पहले मैं एक ग़लती कर ही चुकी थी, अब मुझसे और ग़लतियाँ मत करा. मैं नही चाहती कि तू मेरे हाथो से एक थप्पड़ और खा ले" स्मृति उसे समझाती है.

" लेकिन आप इतना तेज गाड़ी क्यूँ चला रही है... मुझे डर लग रहा है..." कुशल बोलता है

" क्यूंकी मैं घर जल्दी पहुँचना चाहती हू." स्मृति रिप्लाइ करती है

" आज तक तो कभी आपको इतना तेज गाड़ी चलाते हुए नही देखा. आख़िर बात क्या है."

" क्यूंकी...... क्यूंकी...... मुझे भी बहुत तेज पेशाब लगा है.... अब समझा". स्मृति बहुत तेज चिल्ला कर कुशल से कहती है

" तो मोम, अभी तो घर पहुँचने मे बहुत टाइम लगेगा. और अगर आप ऐसे ही चलाएंगी तो शायद पहुँचनगे ही नही. अभी रोड खाली है, आप चाहे तो आप भी कर सकती है.." कुशल उसे एक आइडिया देता है

" मुझे रोड पर करना अच्छा नही लगता..." स्मृति बोलती है

कुशल -" मोम अच्छा तो किसी को नही लगता. लेकिन मजबूरी मे तो काम चलाना ही पड़ता है. प्लीज़ आप कार रोकिए, मैं वादा करता हू कि कोई परेशानी नही होगी." कुशल उसके हाथ पर हाथ रख कर बोलता है.

स्मृति - " तेरे जैसी बेशर्म नही हू. मुझसे नही होगा ये सब रोड पे. और कितनी घनी झाड़ियाँ है रोड के दोनो साइड, पता नही इनमे क्या होगा. ". स्मृति रोड के दोनो साइड देखती हुई बोलती है

कुशल -" मोम आपको झाड़ियो मे जाने की ज़रूरत ही नही है. आराम से कार के सामने जाकर कर लीजिए वैसे भी रोड पे और कोई गाड़ी दिख नही रही है. ये रोड बस उस फार्म हाउस ही जाती है जहाँ से लोग इतनी जल्दी नही आते...." कुशल सीरीयस होकर उसे समझाता है

स्मृति भी गाड़ी की स्पीड को कम कर चुकी थी, शायद वो कुशल की बातो से अग्री थी. और वैसे भी पेशाब वग़ैरा ऐसी बाते है कि जब कोई करता है तो और आता है.

वो कार को रोड के साइड मे लगा देती है. कुशल समझ जाता है कि उसको बहुत तेज पेशाब लगा है. वो कार को ऑफ करती है, हेडलाइट्स को भी ऑफ करती है.

" अच्छा तू यहीं बैठ....." स्मृति बोल कर कार का गेट खोलती है और बाहर चली जाती है. कुशल ये सब देख रहा था. स्मृति बाहर निकल कर चारो तरफ देखती है, ड्रेस को थोड़ा उपर करके अपने हाथ पैंटी तक ले जाती है और एक झटके मे पैंटी को नीचे कर देती है. कुशल कार मे बैठा ये सब देख रहा था, इस सेक्सी सीन को देख कर उसके हाथ खुद ब खुद अपने लंड पर पहुँच जाते है. स्मृति को भी आइडिया था कि शायद कुशल देख रहा होगा लेकिन वो जल्दी से पैंटी नीचे करके बैठ जाती है. उसकी गान्ड कुशल की तरफ थी, वो बैठते ही ऐसे पेशाब करती है कि उसकी आवाज़ कार मे बैठा कुशल भी सुन सकता था. कुशल समझ जाता है कि वाकई मे उसे बहुत तेज लगा है. कुशल अपने राइट हॅंड पर टर्न होमर गाड़ी की हेडलाइट ऑन कर देता है.

स्मृति की गदराई मस्त गांद, कार की दूधिया रोशनी मे बिल्कुल विज़िबल हो जाती है. लेकिन स्मृति का कोई रियेक्सन नही था, शायद वो पेशाब करने तक कुच्छ नही करना चाहती थी. थोड़ी देर बाद स्मृति खड़ी होती है, उसकी मस्त गान्ड को कुशल एक बार फिर से देखता है. स्मृति खड़े होते ही अपनी पैंटी उपर करती है और ड्रेस नीचे करती है. और वापिस मूड कर कार की तरफ तेज तेज कदमो से आने लगती है.

" कमीनेपन की सारी हदों जो तोड़ दे तू. कुत्ते कुच्छ तो लिहाज कर...." स्मृति कार मे बैठते हुए बोलती है

कुशल -" मोम जब मैं पेशाब करने गया तब भी तो लाइट ऑन थी. मैने तो नही कहा कि आप लिहाज करो. आपने तो मेरा लंड तक भी देखा...." कुशल भी एक झटके मे बोल जाता है

स्मृति -" मैने तेरा.... देखा? अबे जब तू बेशर्मो की तरह खुद ही कार के सामने आकर खड़ा हो गया तो क्या करती मैं..."

कुशल -" मोम चाहे लडो या कुच्छ भी कहो. आपकी गांद 200 आउट ऑफ 100 है. डॅड की तो निकल पड़ी है. ही ईज़ सो लकी..." कुशल अभी भी अपनी बदतमीज़ी वाली बातो से पीछे नही हट रहा था.

स्मृति ( कार को चलाते हुए) - " तेरे डॅड तेरे जैसे नही है. वो कभी मुझे इस नज़र से नही देखते..."

कुशल -" तो क्या आप अभी तक बॅक साइड से......... कुँवारी हो?"

स्मृति कुशल की तरफ देखती है गुस्से मे लेकिन कुच्छ बोलती नही. कुशल फिर से पुछ्ता है

" मोम बताइए ना कि आपको गान्ड को पापा ने चोदा है या नही...."

स्मृति का पारा एक दम से हाइ हो जाता है.

" नही...... नही ....... नही...... और कुच्छ पुच्छना चाहता है तो भोंक जल्दी"

कुशल -" सॉरी मोम... गुस्सा मत होइए प्लीज़. आप बहुत स्वीट है...." कुशल अपनी मम्मी के गालो को पकड़ते हूर बोलता है.

स्मृति -" हाँ सवाल ही ऐसे करेगा.... कि गुस्सा आता ही है"

कुशल -" नही सच मे मोम... यू आर अमेज़िंग. मैने आपको एक मर्द की निगाहो से देखा है..."

स्मृति को उसकी ये बात सुनकर थोड़ी सी हँसी आ जाती है.

" अबे ओ मर्द... अब चुप हो जा. घर आने वाला है.." स्मृति उसे बोलती है

कुशल -" मोम दूध पिलाओगी ना...घर चल कर." कुशल की निगाहे स्मृति के बूब्स पे थी.

स्मृति -" जूते खिलाउंगी.... खाएगा?"

इसी नोक झोंक मे कुच्छ ही देर मे घर पहुँच जाते है. स्मृति गाड़ी पार्क करती है और कुशल वो दोनो फाइनली गाड़ी के बाहर आ जाते है. दोनो घर के अंदर जाने लगते है - सबसे पहली एंट्री स्मृति करती है और उसके पीछे पीछे कुशल.

हॉल मे प्रीति और पंकज दोनो बैठे हुए थे.

पंकज -" क्या दोनो साथ गये थे...?"

पंकज स्मृति की तरफ देखते हुए पुछ्ता है. कुशल की तो जैसे जान ही निकल जाती है. उसके चेहरे पे डर के भाव सॉफ थे.

स्मृति -" नही ये तो आते टाइम रास्ते मे मिल गया था तो इसे भी ले आई...." और स्मृति एक स्माइल देती है कुशल को.

पंकज -" बहुत जल्दी आ गयीं, क्या मन नही लगा पार्टी मे...."

स्मृति -" नही पार्टी मे कुच्छ ऐसी आक्टिविटीस हो गयी कि मैं थक गयी और जल्दी आ गयी.".

" मोम लेकिन ऐसी कौन सी पार्टी थी जिसमे आप इतनी सेक्सी बन कर गयी थी..." प्रीति स्माइल करके अपनी मोम से पूछती है और फिर कुशल की तरफ देखती है.

" अबे क्या बाप बेटी पीछे पड़ गये हो. सेक्सी तो मैं हू ही तो बन कर क्या जाउ..... ला एक ग्लास पानी पिला." स्मृति प्रीति से बोलती है और उसे उठा कर खुद सोफे पे बैठ जाती है.

कुशल सीधा उपर चला जाता है. प्रीति की निगाहे कुशल पर ही थी जाते हुए. प्रीति पानी पिलाती है और खुद भी उपर चली जाती है.

कुशल अपनी टी-शर्ट उतार रहा था. प्रीति उसके रूम मे घुसती है और उसके मूँह के पास अपना मूँह लाती है और फिर दूर कर लेती है.

" मोम भी ड्रिंक करके आई है और तू भी. कहाँ से आ रहे हो तुम दोनो...." प्रीति कुशल से पूछती है.

कुशल -" तुझसे मतलब...... तू डिस्टर्ब मत कर मुझे. वैसे ही आज मूड इतना फ्रेश है और तू आ गयी मेरे रूम मे..."

प्रीति -" तो आज जनाब अपना मूड फ्रेश कर कर आए है. वैसे भी तेरे चेहरे की खुशी बता रही है कि तू कुच्छ करके आ रहा है...." प्रीति साइड मे मूँह करके बोलती है

कुशल -" क्या करके आ रहा हू.... चुदाई?"

प्रीति -" शायद........." प्रीति कुशल की आँखो मे देखती हुई बोलती है.

कुशल -" हा हा हा हा हा...... अबे लंड है मेरे पास. अगर चुदाई ना करू तो क्या गांद मराऊ. वैसे तू निकल यहाँ से अपनी चूत को लेकर...." कुशल उसे अपने डोर का रास्ता दिखाते हुए बोलता है.
 
अंदर एंटर होते ही स्मृति चारो तरफ देखती है लेकिन उसे कहीं से भी आइडिया नही लगता कि वो लाइयन है यहाँ. वो धीरे धीरे आगे बढ़ती है और एक बार काउंटर की खाली चेर पे जाकर बैठ जाती है. वो अभी भी देख रही थी कि आख़िर ये लाइयन है कहाँ.

" यू नीड एनितिंग मॅम?" वो बार गर्ल की आवाज़ से शॉक्ड हो जाती है और मूड कर देखती है.

" यस..... यस....... वन विस्की वित कोक प्लीज़...." स्मृति उस लड़की को बोलती है

" वन फॉर मी ऑल्सो". ये आवाज़ स्मृति के पीछे से आती है. स्मृति पीछे मूड कर देखती है तो एक इंसान उसकी आँखो पे अपना हाथ रख देता है. स्मृति उसका हाथ हटाती है और उसकी तरफ देखती है.

उसका फेस मास्क से ढका हुआ था, उसने बाकी बाय्स की तरह फुल मास्क पहना हुआ था. वो स्मृति की तरफ अपना हाथ मिलाने के लिए बढ़ता है. स्मृति एक बार उसे और एक बार उसके हाथ को देखती है. फाइनली उससे से शेक हॅंड करती है.

" हाई, आइ आम लाइयन....." स्मृति तो जैसे अपनी चेर से खड़ी हो जाती है. वो स्मृति के कंधो को पकड़ कर उसे फिर से उसकी राउंड चेर पे बिठाता है.

स्मृति -" तो तुम ही हो वो...."

लाइयन -" वो कौन.....?"

स्मृति -" वो ही जिससे मे चॅट करती रही"

लाइयन -" जी हम ही वो नाचीज़ है". लाइयन अपनी गर्दन झुकाता हुआ बोलता है.

इतने मे वो बार गर्ल दोनो के पेग बना कर ले आती है और उन्हे दे देती है.

" क्यू ना हम उस फ्री स्पेस मे बैठे". लाइयन स्मृति को वो खाली स्पेस दिखाता है जहाँ एक टेबल और दो चेर खाली पड़ी थी.

" हाँ ये सही रहेगा". स्मृति उसकी बात को मानते हुए बोलती है.

वो दोनो अब उन चेर पे जाकर बैठ जाते है. उस टेबल पे दो चेर थी जो कि एक ही डाइरेक्षन मे थी. यानी कि दोनो एक ही रो मे बैठ गये थे.

" हाँ जी मिस्टर. लाइयन, अब बताइए कि क्यू मिलना चाहते थे आप हम से?". स्मृति लाइयन से स्माइल करते हुए पूछती है.

लाइयन -" इस गजब की खूबसूरती को मैं पास से देखना चाहता था". लाइयन की ये बात सुनकर स्मृति शरमा जाती है.

स्मृति -" लेकिन कैसी खूबसूरती देख रहे हो जब ये फेस मास्क है". स्मृति का इशारा अपने फेस मास्क की तरफ था.

लाइयन -" फेस मास्क तो बस आपकी आइज़ पर है लेकिन अभी भी बहुत सुंदरता कवर्ड नही है. हम तो उसी से गुज़ारा चला लेंगे". लाइयन अपना फेस झुकाते हुए स्मृति के बूब्स की ओर इशारा करता है.

स्मृति - " तुम सुधरोगे नही. वैसे क्या तुम मुझे अपना फेस दिखा सकते हो, पता नही क्यू तुम्हारी आवाज़ कुच्छ पहचानी सी लग रही है. "

लाइयन -" मैं अपनी खूबसूरती की देवी से मिलने आया हू, मैं नही चाहता कि मुझे सेक्यूरिटी धक्के देकर बाहर निकाल दे. फेस मास्क हटाना सेफ नही है"

स्मृति -" जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. और सूनाओ". स्मृति अपने पेग का सीप लेते हुए बोलती है.

लाइयन -" आज आपका दिन है. आप हमरी गेस्ट है, इतनी खूबसूरत गेस्ट जो हम से पुछेगि वो मैं बताउन्गा." लाइयन फिर से अपना चेहरा झुकाते हुए बोलता है

स्मृति -" एज क्या है तुम्हारी?"

लाइयन -" अभी कुच्छ महीने पहले ही 18 का हुआ हू?"

स्मृति तो जैसे ये बात सुनकर शॉक्ड ही हो जाती है लेकिन शो नही करती.

स्मृति -" तो 18 साल की उम्र मे ही ये सब शुरू कर दिया है. ड्रिंक भी कर रहे हो, मेरी एज पता है तुम्हे?"

लाइयन -" आपकी हर चीज़ पता है मुझे ". लाइयन फिर से स्मृति के बूब्स की तरफ गर्दन करते हुए बोलता है

स्मृति -" तो बताओ क्या है.....". अपने पेग का सीप लेते हुए स्मृति बोलती है

लाइयन -" 36 ड्ड" लाइयन अभी भी उसके बूब्स की तरफ ही देख रहा था

स्मृति - " क्या कहा तुमने....."

लाइयन -" मैने.. मैने कहा कि आपकी एज 40 के करीब होगी".

स्मृति -" तो लगभग मे तुम्हारी मा की उम्र की हू. और जो तुमने मेरे साथ स्केरी हाउस मे किया क्या वो सही था".

लाइयन -" आपकी उम्र होगी लेकिन लगती तो आप अभी भी पूरी जवान है तो मुझसे ग़लती हो गयी". अपनी तारीफ फिर से सुन कर स्मृति शरमा जाती है.

स्मृति -" अभी तो तुम्हे ठीक तरीके से दाढ़ी मूंछ भी नही आई होंगी"

लाइयन -" हर जगह आ चुकी है...". लाइयन ने फिर से अपना पेग पीते हुए डबल मीनिंग बात कही.

स्मृति अपने बॅग को खोल कर उसमे से एक सिगरेट बॉक्स निकालती है. और पेग को साइड मे रखकर सिगरेट को लाइटर से जलाती है. स्मृति धीरे धीरे खुल रही थी.

लाइयन -" क्या आप स्मोकिंग भी करती हैं?".

स्मृति -" कभी कभी.....".

लाइयन -" मुझे आपके बारे मे ये बात नही पता थी कि आप स्मोकिंग भी करती है".

स्मृति -" ये बात तो मेरे घर मे भी नही पता है. कभी कभी अपने हज़्बेंड की पी लेती हू. तुम ये छोड़ो और बताओ".

लाइयन -" आप बहुत सेक्सी है......"
स्मृति को उसकी ये बात काफ़ी अच्छी लगी. वो अपनी तारीफ से खुश हो रही थी लेकिन शो नही कर रही थी.

स्मृति -" तुम जैसे लड़को को तो हर लेडी सेक्सी लगती है..." स्मृति अपने पेग को ख़तम करते हुए बोलती है.

लाइयन -" ऐसा नही है. यहाँ मे चाहता तो कोई भी लड़की मेरे साथ हो सकती थी लेकिन मुझे बस आप सेक्सी लगती हो".

स्मृति -" तुम्हे इतना यकीन है कि तुम्हारे साथ कोई भी हो सकती थी"

लाइयन -" मेरे पास वो सब कुच्छ है जो लड़कियो को अच्छा लगता है..."

स्मृति -" क्या है तुम्हारे पास....?"

लाइयन -" हाइट, बॉडी, मनी..... और....."

स्मृति -" और क्या......."

लाइयन -" लंड......"

स्मृति उसकी इस बात को फिर से इग्नोर करते हुए अपने ग्लास को उठाती है और बार की तरफ चल देती है.

" मैं एक पेग और लेकर आती हू". जैसे ही वो चेर से उठ कर चलती है, लाइयन उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचता है. स्मृति आकर उसकी गोद मे गिर जाती है और स्मृति की पीठ लाइयन मे सीने से टकराती है. लाइयन उसके कान मे कहता है-

" आप यहीं बैठिए, ज़्यादा गांद मटकाओगि तो नज़र लग जाएगी". और वो उठ कर पेग लेने चला जाता है. स्मृति उसकी इस बद तमीज़ी को देखती रह जाती है.

जब वो पेग लेकर आ रहा होता है तो स्मृति उसे ध्यान से देखती है. अच्छी हाइट, चौड़े कंधे, मजबूत जिस्म. कुल मिलाकर अच्छी पर्सनॅलिटी थी.

" ये लीजिए आपका पेग". लाइयन ऑफर करता है

" थॅंक यू......". स्मृति उसे रिप्लाइ करती है.

जैसे जैसे टाइम बढ़ रहा था, उस ग्राउंड मे लोग थोड़े थोड़े कम होते जा रहे थे.

स्मृति -" यहाँ का माहौल मुझे अच्छा लगा. लेकिन ये सोशियल और प्राइवेट क्या है".

लाइयन -" अब धीरे धीरे लोग प्राइवेट मे ही जा रहे है. अभी जहाँ हम बैठे है ये जगह सोशियल है"

स्मृति -" तो प्राइवेट मे क्या होता है"

लाइयन -" वो सब भी होता है जो स्केरी हाउस मे नही हुआ". लाइयन की इस बात से चुप्पी हो जाती है.

स्मृति अपना दूसरा पेग भी ख़तम कर चुकी थी. और उसके साथ सिगरेट का असर तो वो थोड़ी थोड़ी रंग मे आने लगी थी.

स्मृति -" अब मुझे चलना चाहिए..."

लाइयन -" इतनी जल्दी.... क्या अपना ये दोस्त इतना बुरा लगा. या अपने दोस्त का कुच्छ बुरा लगा..."

तभी ठीक स्मृति के सामने एक लड़की अपनी ब्रा उतारती है, और सामने खड़े लड़के के मूँह मे अपना राइट बूब्स चूसने को दे देती है.

स्मृति -" छ्हि, कितनी गंदी लड़की है.....". माहौल खराब कर रही है."

लाइयन -" जैसे जैसे टाइम बढ़ेगा, यहाँ पर लड़कियो के कपड़े कम ही होते जाएँगे. क्यूँ ना हम प्राइवेट मे चले".

स्मृति -" क्या पता तुम फिर से कुच्छ बदतमीज़ी करो...."

लाइयन -" आप जैसा माल साथ मे हो और बदतमीज़ी ना हो तो सब सोचेंगे कि मैं मर्द नही गे हू..."

स्मृति -" ठीक है तो बैठो यहीं ....."

लाइयन -" नही नही. प्रॉमिस कोई बदतमीज़ी नही होगी".

स्मृति -" मैं कैसे यकीन करू?"

लाइयन -" मैं बस बोल हो सकता हू और कुच्छ तो नही कर सकता.". लाइयन बड़ा मासूम बनते हुए बोलता है.

दोस्तो सोचो ये साला लाइयन कौन है शायद आज स्मृति की खैर नही,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
आराधना की आवाज़ सुनकर पंकज अपना हाथ पीछे खींच लेता है और अपना मूँह दूसरी तरफ कर लेता है. सिमरन भी अपनी टी-शर्ट नीचे कर लेती है. आराधना धीरे धीरे नीचे उतर कर आ जाती है, उसका चेहरा गुस्से से लाल हो रहा था लेकिन वो अपने गुस्से को ज़ाहिर नही कर सकती थी.

आराधना -" तू कब आई". आराधना हंसते हुए बड़े प्यार से सिमरन से पूछती है.

सिमरन -" बस अभी आई थी, सोचा कि अपनी फ्रेंड से मिल आउ".

आराधना -" फ्रेंड से या फ्रेंड के डॅड से?". आराधना बहुत ही लो वाय्स मे उसको ये ताना देती है

सिमरन -" जब जानती है तो पुच्छ क्या रही है". सिमरन भी लो वाय्स मे उसको रिप्लाइ करती है.

" अरे भाई दोनो क्या घुसर पुसर कर रही हो". पंकज पूछता है

" कुच्छ नही पापा, मैं तो बस सिमरन को उपर ले जाने के लिए कह रही थी". आराधना रिप्लाइ करती है

" अंकल आप भी चलिए ना, उपर बैठ कर बात करेंगे". सिमरन पंकज से रिक्वेस्ट करती है.

" चलो मैं थोड़ी देर मे आता हू". पंकज रिप्लाइ करता है

अब आराधना और सिमरन दोनो चुप चाप उपर की ओर चल देती है. आराधना बहुत शांत थी, और धीमे धीमे कदमो मे उपर चलती जा रही थी. वो दोनो आराधना के रूम मे एंटर करते है और रूम के अंदर एंटर होते ही आराधना अपने रूम को बहुत पॉवर के साथ बंद कर देती है. "धदमम्म्म"

आराधना -" अब तो सॉफ सॉफ बोल कि तू क्या चाहती है?". आराधना गुस्से मे सिमरन से पूछती है

सिमरन -" मैं? मैं क्या चाहती हू तू क्यू पुच्छ रही है"

आराधना -" कितनी बड़ी आक्टर है तू. कहीं फ़िल्मो मे काम ढूंड ले ना".

सिमरन -" तू दिला दे." सिमरन बहुत ही प्यार से उसके गाल पकड़ के बोलती है.

आराधना -" साली तुझे बस पॉर्न मूवी मे काम मिल सकता है. अब ये बता कि क्या दिखा रही थी मेरे डॅड को तू?"

सिमरन -" चूत"

आराधना -" क्या कहा तूने?" सिमरन की बात सुन कर आराधना अपने मूँह पे हाथ रख लेती है.

सिमरन -" चूत दिखाने की कोशिश कर रही थी कि तू आ गयी. अब खुश....."

आराधना -" मुझे तुझसे ये आशा नही थी कि तू ऐसी भी है. इतनी गंदी भाषा तो रोड के गँवार यूज़ करते है".

सिमरन -" अबे कमाल तो तूने कर रखा है. इतना शक कहाँ से आ गया तेरे दिल मे, और सबसे पहले अपने आप को पहचान कि तू क्या चाहती है. तू यहाँ छुपा कर रख ले अपने डॅड को".

सिमरन अपना हाथ आराधना के बूब्स पे रखती हुई उसे बोलती है.

सिमरन की ये बात ख़तम ही हुई थी कि गेट खुलता है. सामने पंकज खड़ा था, वो देखता है कि सिमरन का हाथ आराधना के बूब्स पे था और आराधना का फेस बिल्कुल लाल हो रहा था. आक्चुयल मे आराधना का फेस लाल गुस्से की वजह से था लेकिन पंकज कुच्छ और सोचता है.

" ओह्ह्ह सॉरी....." और पंकज बाहर जाने लगता है. तभी सिमरन उसे आवाज़ लगाती है.

सिमरन -" अरे अंकल अभी आए और अभी चल दिए. आइए ना कुच्छ बाते तो हो जाए". सिमरन उसे रूम के अंदर लाते हुए बोलती है. आराधना को अभी भी गुस्सा आ रहा था जिस वजह से उसका फेस और भी लाल हो रहा था लेकिन पंकज को ये लग रहा था कि शायद मेरे बीच मे आने से आराधना को बुरा लग रहा है.

" कहीं इनके बीच लेज़्बीयन रीलेशन तो नही" पंकज अपने मन मे सोचता है.

" नही नही ऐसा नही हो सकता. आराधना लेज़्बीयन नही हो सकती है. वो ये मुझे प्रूव दे चुकी है". वो फिर से अपने मन मे सोचता है. और आकर बेड पर बैठ जाता है. बेड के राइट हॅंड पे आराधना खड़ी थी और पंकज के ठीक सामने सिमरन चेर लेकर बैठ जाती है.
सिमरन -" और सुनाओ कुच्छ अंकल".

पंकज -" आराधना को क्या हुआ है. वो इतनी सीरीयस क्यू लग रही है".

सिमरन -" खुद ही पुछ लीजिए आप अंकल". इससे पहले कि पंकज कुच्छ बोलता आराधना खुद ही बोलने लगती है.

आराधना " कुच्छ नही डॅडी... आइ.... आम ओके.".

पंकज -" तो तेरा चेहरा इतना लाल क्यू हो रहा है?". इससे पहले कि आराधना कुच्छ बोलती-

सिमरन -" अंकल इस एज मे तो हर चीज़ लाल रहती है." ये बात सिमरन बहुत ही रोमॅंटिक अंदाज़ मे बोलती है. उसकी सेक्सी आइज़ पंकज की नज़रो से मिली हुई थी. जिस टाइम सिमरन ये बात बोलती है तो अपनी टाँग उठा कर वो दूसरी टाँग के उपर रखती है. उसकी इस छोटी सी स्कर्ट मे उसकी पैंटी सॉफ नज़र आ जाती है. उसने ब्लू कलर की पैंटी पहनी थी. अब पंकज सॉफ उसकी पैंटी देख सकता था, लेकिन आराधना को कुच्छ अहसास नही था क़ि पंकज को क्या दिख रहा है.

पंकज भी रोमॅंटिक अंदाज़ मे सिमरन से बोलता है.

पंकज -" लाल का तो पता नही लेकिन नीला ज़रूर है आज कल कुच्छ.". ये बात सुनकर सिमरन की हँसी छूट जाती है. सिमरन अपनी हँसो को कंट्रोल करते हुए कहती है

सिमरन -" अरे अरू खड़ी क्यू है, बैठ जा ना".

आराधना " नही नही मैं ठीक हू. तू बैठ आराम से".

सिमरन -" मुझे कहाँ बैठना, मुझे अब चलना चाहिए. मैं तो बस ऐसे ही अपनी फ्रेंड को देखने आ गयी थी".

पंकज -" अभी तो तुमने मुझे बुलाया और अभी तुम चल दी. ये तो कोई बात नही हुई". पंकज ने शिकायत करते हुए कहा

सिमरन -" नही अंकल. मैं फिर आउन्गि, आप बैठो और आराधना से बात करो ना". ये बात बोलते बोलते सिमरन खड़ी हो गयी थी.

पंकज -" अरे आराधना, तू ही बोल अपनी फ्रेंड को रुकने के लिए ना."

आराधना -" वो खुद ही आई और खुद ही जाना चाहती है तो हम क्या कर सकते है. आप ही रोक लीजिए वैसे भी आपके रोकने से तो ये सच मे ही रुक जाएगी". आराधना ने फिर से शब्द के तीरो को चलाया.

पंकज - " सिमरन चलो अब तो रुक ही जाओ. मैं छोड़ आउन्गा तुम्हे घर पे. बोलो क्या पीना पसंद करोगी- चाइ, कॉफी?"

सिमरन -" अंकल ग्रेट ईव्निंग है. मेरा तो घर जाकर मस्त बियर पी कर सोने का प्लान है. आप चाइ कॉफी पीजिए".

पंकज -" चलो तो ठीक है, आज तुम्हारे साथ बियर पी लेते है. तुम बैठो यही मैं लेकर आता हू".

पंकज बाहर जाने लगता है. आराधना गेट के करीब जाकर देखती है कि पंकज कहाँ है. अब वो रूम से दूर जा चुका था. आराधना फिर से सिमरन पे चिल्लाने लगती है -

" यही बाकी रह गया था कि मेरे बाप के साथ बैठ कर पीना. सच बोल रही हू कि गजब लड़की है तू". आराधना बोलती है.

सिमरन -" आराधना ग्रो अप यार. क्या हो जाएगा अगर हम बैठ कर दो बियर पी लेंगे. प्लीज़ यार अपनी मेनटॅलिटी चेंज कर. मैं अभी जा सकती हू लेकिन तेरे डॅडी ही ज़िद कर रहे है. मैं हर बात मज़ाक मे लेती हू लेकिन वाकई मे तू बहुत सीरीयस ले रही है. जो कुच्छ बात थी वो मैं तुझे बता चुकी हूँ अब तू शक करना बंद कर".

आराधना -" मुझे अच्छा नही लगता कि मेरे डॅड के इतने करीब तू जाए. अगर तू मेरी फ्रेंड है तो प्लीज़ ये गेम बंद कर." आराधना की वाय्स बहुत सॉफ्ट हो चुकी थी.

सिमरन -" अरू, यू आर माइ बेस्ट फ्रेंड. तेरे लिए तो मैं कुच्छ भी कर सकती हू. सच बता तुझे तेरे डॅड अच्छे लगते है?

आराधना -" बहुत......". आराधना एग्ज़ाइटेड होकर बोलती है.

सिमरन -" डॅड के जैसे या एक मर्द के जैसे?". सिमरन उसके दिल की सारी बात निकलवाना चाहती थी.

आराधना -" पता नही".

आराधना अपना मूँह फिरा लेती है. उसकी साँसे तेज हो चुकी थी.

सिमरन खड़ी होकर उसके पास जाती है. उसका चेहरा अपने हाथो मे लेती है और अपनी तरफ घुमाती है.

सिमरन -" मैं तेरी फ्रेंड हू अगर मुझसे शेर करेगी तो शायद मे तेरी कुच्छ हेल्प कर पाऊ. सच बता कहीं तेरे दिल मे तेरे डॅड के लिए कुच्छ रोमॅंटिक जज़्बात उमड़ रहे है क्या?"

आराधना चुप रहती है. सिमरन अपने हाथ को उसके कान पर रख कर नीचे उसके बूब्स की तरफ ले जाकर बोलती है -

सिमरन -" कहीं तेरी इच्छा तो नही होने लगी है कि तेरे डॅड तेरी बॉडी के साथ खेले. तेरे इन मस्त बूब्स को दबाए. पूरी रात तेरे बदन को मसले और तेरी चूत....". इससे पहले की सिमरन कुच्छ और बोलती आराधना उसके मूँह पर अपना हाथ रख कर चुप करा देती है.

आराधना -" प्लीज़....... कुच्छ मत बोल."

उसकी नज़रे झुकी हुई थी और वो साँसे तेज तेज ले रही थी.

सिमरन -" तू कहेगी तो आज रात ही तेरा काम करा दूँगी. मर्दो को कैसे कंट्रोल करना होता है सब तरीके मुझे पता है. बता अगर रेडी है तो?"

आराधना -" नही...." उसकी आवाज़ मे दम नही था. ये देख कर सिमरन को हँसी आने लगती है.

सिमरन -" जैसी तेरी मर्ज़ी....." और वो मूड कर अपनी चेर पे दोबारा जाने लगती है. तभी आराधना बोलती है -

आराधना -" सुन......."

सिमरन -" हाँ बोल"

आराधना -" क्या मैं तुझपे पूरा भरोसा कर सकती हू?"
सिमरन -" तेरे सामने कोई और ऑप्षन है तो उस पर कर ले. वैसे मैं तुझे बता दू कि लाइफ मे कुच्छ भी करने के लिए किसी पे भरोसा करना ज़रूरी है. जो तू करती नही है, तुझे तो बस शरीफ बन ने का शौक है."

आराधना -"तो सुन जो तूने कहा मैं वो सब चाहती हू........". आराधना ने अपने दिल के हाल बयान कर दिए. सिमरन जैसे चिल्ला के पड़ी खुशी के मारे और जाकर उसके गले से लग जाती है. " ओये होये रानी...... ऐसा शॉट मारा कि बॉल ही बाउंड्री पर. डाइरेक्ट डॅड से ही ........" सिमरन खुशी मे ही बोलती है.

" अब तू मज़ाक मत उड़ा. मैने तुझे अपने दिल की बात बता दी है. चाहती हू कि तू मेरी हेल्प करे" आराधना बोलती है.

सिमरन -" मेरी जान अभी तू अपनी इस फ्रेंड के गट्स नही जानती है. तेरे डॅड को तेरा आशिक ना बना दिया तो कहना. लेकिन तुझे मेरी हर बात मान नी पड़ेगी. "

आराधना -" मैं कुच्छ भी करूँगी....."

तभी पंकज की एंट्री होती है रूम मे. उसके हाथ मे बियर की कुच्छ बॉटल्स थी. " क्या करने को कह रही है आराधना". पंकज बोलता है.

सिमरन -" कुच्छ नही अंकल बस ऐसे ही जनरल टॉक चल रही थी."

पंकज -" सो हियर आर दा बियर्स.". पंकज उन्हे एक छोटे से टेबल पे रखते हुए बोलता है.

रूम मे बस एक ही चेर थी और एक छोटा सा टेबल. उस चेर पे सिमरन बैठी होती है. टेबल पे बियर रखने के बाद पंकज एक बियर को खोलता है और उसे सिमरन को ऑफर करता है - " बियर टू आ ब्यूटिफुल गर्ल". सिमरन उसे ले लेती है.

" अंकल आप भी लीजिए ना...." सिमरन उसे रिक्वेस्ट करती है.

" मैं तो ज़रूर लूँगा..." पंकज डबल मीनिंग वाली बात कहता है.

"चियर्स.........." और दोनो अपनी बॉटल्स को आपस मे टकराते है.

सिमरन -" अंकल और बताइए"

पंकज -" पुछो ना"

सिमरन -" आपको क्या कुछ अच्छा लगता है?"

पंकज -" बहुत कुच्छ" पंकज की निगाहे सिमरन के बूब्स पर थी.

आराधना ये सब देख कर जले भुने जा रही थी. तभी सिमरन को एक फोन कॉल आता है और वो सीरीयस हो जाती है.

" कब ......... ओके मैं आती हू..." सिमरन कॉल डिसकनेक्ट कर देती है.

" अरू, अंकल मुझे जाना होगा. घर पे कोई प्राब्लम हो गयी है". सिमरन बोलती है

पंकज -" सब ठीक तक तो है ना बेटी"

सिमरन -" सब ठीक है अंकल लेकिन बाद मे बताउन्गि कि क्या हुआ है. ओके अंकल मैं चलती हू". सिमरन अपनी बियर टेबल पे रखती हुई बोलती है.

पंकज -" चलो मैं तुम्हे नीचे तक छोड़ देता हू".

और फिर वो दोनो नीचे चले जाते है. आराधना का मूड बिल्कुल खराब हो जाता है. उसको गुस्सा आ रहा था.

थोड़ी देर वेट करने के बाद वो सिमरन को फोन मिलाती है.

सिमरन -" हेलो"

आराधना -" तो मेरे दिल की बात लेना चाहती थी तू"

सिमरन -" यार समझा कर. एक प्राब्लम हो गयी है मैं बाद मे बता दूँगी"

आराधना -" और उसका क्या?"

सिमरन -" उसका किसका?

आराधना -" जो तूने कहा था कि आज रात करा देगी"

सिमरन -" मैं सच बोल रही हू कि करा दूँगी. भरोसा रख बस मेरे उपर. मैं कल आती हू"

आराधना -" ठीक है." और आराधना गुस्से मे फोन काट देती है.

आराधना खून के कड़वे घूँट पीकर सो जाती है.

वेडनेसडे शाम के 4 बज चुके थे. स्मृति के दिल की धड़कने बढ़ी हुई थी क्यूंकी जैसे जैसे टाइम बीत रहा था तो उसे अहसास भी होता जा रहा था कि उस लाइयन से मिलने का टाइम करीब आ रहा है. आज दोपहर खाना भी सही से नही खाया उसने, पता नही क्यूँ उसके गले से नीचे ही नही उतर रहा था.

" पता नही कौन है और कैसा है. क्या मैं उससे मिल कर ग़लत तो नही कर रही हू? कहीं वो ऐसी कोई हरकत दोबारा तो नही कर देगा जो उसने स्केरी हाउस मे करी थी?, कहीं ये कोई ब्लॅक मेलर तो नही है?". स्मृति के माइंड मे पता नही कितने सवाल आ रहे थे. उसका मोबाइल उसके हाथ मे ही था की तभी फ़ेसबुक मेसेंजर पे मेसेज रिसीव होता है. वो लाइयन ही था -
लाइयन - स्मृति जी, यू देअर?

स्मृति - हाँ जी कहो......

लाइयन - तो आज का प्लान पक्का है ना?

स्मृति - कौन सा प्लान?

स्मृति ने उसे जान बुझ कर ऐसा दिखाया जैसे वो सब भूल ही गयी हो. वो भाव खा रही थी.

लाइयन - क्या आप भूल गयी कि आज आपको मिलने आना है. वेडनेसडे ईव्निंग, फार्म हाउस, कुच्छ याद आया?

स्मृति - हाँ हाँ, तुमने बोला तो था. लेकिन मुझे याद नही.....

लाइयन - आपको घर से निकलने मे कुच्छ ही घंटे रह गये है और आप कह रही है कि कुच्छ याद नही. ऐसा ना कहो नही तो आपके इस दोस्त का दिल टूट जाएगा.

स्मृति - ओके ओके. इतनी ज़िद कर रहे हो तो आ जाउन्गि. लेकिन मैं तुम्हे पहचानूँगी कैसे?

लाइयन - आप टेन्षन ना ले. आप आ जाइए और मैं पहचान लूँगा.

स्मृति - मुझे कैसे पता चलेगा कि जो मुझे पहचानेगा वो लाइयन ही है मीन्स वो तुम ही हो.

लाइयन - पहचान ने के लिए तो बहुत सारी चीज़े है जिन्हे आप फील कर चुकी है.

स्मृति - तुम फिर से शुरू हो गये. मैं झूठे प्रॉमिस नही करती इसीलिए आ रही हू, अभी तो तुम्हारी कोई भी हरकत ऐसी नही है जिनसे इंप्रेस होकर मैं आउ. और वैसे भी ये तुमसे लास्ट मीटिंग है, उसके बाद ना चाटिंग ना मीटिंग.

लाइयन - आपसे एक मीटिंग हो जाए बस मुझे और कुच्छ नही देखना. मैं आपसे मिल कर समझ लूँगा कि मैने यहीं जन्नत यहीं देख ली मैने.

स्मृति - बाते बनाना कोई तुमसे सीखे. ठीक है मैं आ जाउन्गा लेकिन घर जल्दी आना है मुझे. समझे?

लाइयन - जी मेडम समझ गया. आप टेन्षन ना लो आप जल्दी से जल्दी घर चली जाना. लेकिन पहन कर क्या आ रही हो आप?

स्मृति - क्यू बताऊ?

लाइयन - अब इतना तो बता ही दो.

स्मृति - सर्प्राइज़.

लाइयन - चलो हम आपके सर्प्राइज़ का वेट करेंगे. बाइ

स्मृति - बाइ

दोनो की चाटिंग फिर से ख़तम हो जाती है. अब लगभग 4.45 PM हो चुके थे. अपने मोबाइल को बेड पर फैंक कर वो बाथरूम मे घुस जाती है. वो गाने गुन गुना रही थी जिससे सॉफ दिख रहा था कि वो बहुत हॅपी थी. बाथरूम मे आज अच्छा टाइम स्पेंड किया उसने, पूरी बॉडी वॉश की और हेर वॉश किए. हेर एक अच्छे ड्राइयर से सुखाए और उन्हे स्टाइल देना शुरू कर देती है. उसकी लेग्स ऐसे चमक रही है जैसे कभी उन पर कोई बाल था ही नही.

ऊम्र की झलक ना तो उसकी बॉडी पर थी और ना ही उसके फेस पर. ऐसी शाइनिंग तो जवानी मे भी लड़कियो को नसीब नही होती है. अपनी बॉडी के हर अंग को वो क्लीन कर चुकी थी, शायद ये मीटिंग के लिए नही बल्कि नॉर्मली वो क्लीन कर ही लेती थी.

वॉर्डरोब से नयी ब्रा और पैंटी का सेट निकालती है. ब्रा पॅडेड थी एक्सट्रा क्लीवेज के लिए, अक्सर छोटे बूब्स वाली लड़किया इन्हे पहनती है लेकिन पता नही स्मृति ने इसे पहन ने का फ़ैसला क्यू किया जबकि उसके बूब्स तो वैसे ही अपने मे रेकॉर्ड थे. टवल को उतार कर वो ब्रा को पहनती है, ब्रा उसको ऐसे आई जैसे बनी ही उसके लिए है. एक्सट्रा पॅडेड होने के कारण उसके बूब्स जैसे बिल्कुल उपर की तरफ आ गये थे. किसी भी मर्द के लिए ऐसा सीन देखना जैसे अपनी जवानी को भड़काना है लेकिन अनफॉर्चुनेट्ली वहाँ कोई था नही.

स्मृति अपनी पैंटी भी पहन चुकी थी. अब अपने वॉर्डरोब से वो एक येल्लो शॉर्ट ड्रेस निकालती है. उसे हॅंगर पे रहते हुए ही वो उठा कर देखती है और देख कर स्माइल करती है, वो खुद भी समझ गयी थी कि आज वो कितनी सेक्सी लगने जा रही थी.

उसने घड़ी मे फिर टाइम देखा, 5.30 हो चुके थे. " अब मुझे फाइनली रेडी हो जाना चाहिए". स्मृति अपने मन मे सोचती है और उस ड्रेस को लेकर बाथरूम मे घुस जाती है. बाथरूम मे जितना हॉट मेक अप वो कर सकती थी उसमे उसने पूरी ताक़त लगा दी. उसे खुद भी समझ नही आ रहा था कि आख़िर क्यूँ वो इतनी एग्ज़ाइटेड है.

करेक्ट 7 PM स्मृति अपने रूम से बाहर आती है. "ओह माइ गॉड....." पंकज उसे देख कर आश्चर्य से खड़ा हो जाता है. " क्या बात है, ऐसी कभी जवानी मे तो नही दिखी तू जैसी आज दिख रही है". पंकज उससे मज़ाक मे बोलता है. स्मृति ने येल्लो शॉर्ट ड्रेस पहनी हुई थी.

" देखने वाले की नज़र पे डिपेंड करता है कि क्या दिखाई देता है उन्हे और क्या नही". स्मृति भी अपने मूँह स्टाइल मे उपर करते हुए बोलती है.

" कैसी पार्टी होगी जिसमे मेरी बीवी इतनी हॉट बन कर जा रही है". पंकज फिर से बोलता है.

" वो तो मैं बचपन से ही हॉट हू..... अच्छा लाओ गाड़ी की चाबी देना". स्मृति बोलती है.

पंकज उसे गाड़ी की चाबी दे देता है और बोलता है कि आराम से जाना.

स्मृति बाहर आती है. जैसे ही गाड़ी के पास आती है तो उसे कुशल दिखाई देता है, उसने भी जीन्स और टी-शर्ट पहना हुआ था. स्मृति उसे देख कर रुक जाती है.

" कहीं जा रहा है क्या?". स्मृति कुशल से सवाल करती है

" मोम देख कर तो आपको लग रहा है कि आप कहीं जा रही है." कुशल रिप्लाइ करता है

" बाते मत बना और बता कि कहाँ जा रहा है?". स्मृति फिर से उससे बोलती है

" मोम एक फ्रेंड की बर्तडे पार्टी है, वहीं जा रहा हू और रात को आने मे थोड़ा लेट हो जाउन्गा". कुशल बोलता है.

स्मृति ने कार के डोर को अब तक ओपन कर लिया था. वो उसने बैठते हुए बोलती है -

" इटस ओके. लेकिन ड्रिंक करने की कोई ज़रूरत नही है. ओके?"

" मोम आज कल बिना ड्रिंक के भला कोई पार्टी होती है. हाँ लेकिन फिर भी मे ज़्यादा नही पीऊँगा." कुशल रिप्लाइ करता है

स्मृति -" चल ठीक है. अपना ख्याल रखियो. बाइ." और कार का गेट बंद कर लेती है. कार को वो बाहर निकाल कर उस फार्म हाउस के लिए रवाना हो जाती है.

वो उस एरिया से वाकिफ़ तो नही थी लेकिन उसको आइडिया था तो वहाँ तक ड्राइव करके चली जाती है. करीब चालीस मिनिट की ड्राइव के बाद वो उस एरिया मे पहुँच जाती है. उसके बाद वो एक छोटी सी शॉप के सामने अपनी गाड़ी रोकती है, मिरर खोलती है.

" भैया ये ------ फार्म हाउस कहाँ होगा". वो शॉपकीपर से पूछती है

" मेडम यहाँ से सीधा, टी पॉइंट से राइट और रोड बस उस फार्म हाउस पे ही ख़तम होगा". ये बात बोलते हुए उस शॉपकीपर के मूँह पे एक अलग सी ही स्माइल थी. स्मृति अपनी कार आगे बढ़ा देती है. " कितना बद तमीज़ आदमी था". वो अपने मन मे सोचती है. और उसके बताए उसे रास्ते पर चल देती है.
उस रोड पर कोई ज़्यादा पॉप्युलेशन नही थी. थोड़ी ही देर के ड्राइव के बाद वो उस रोड पर पहुँच जाती है. फार्महाउस के आउटर लुक से काफ़ी इंप्रेस होती है.

" चलो स्टॅंडर्ड तो सही है इस लाइयन का". अपने मन मे सोचती है. फार्म हाउस के चारो तरफ धीमी लाइटिंग थी जो कि काफ़ी रोमॅंटिक फीलिंग दे रही थी. फार्म हाउस के राइट साइड मे ही बहुत बड़े स्पेस मे ही पार्किंग स्पेस दिया गया था जिसमे असिस्ट करने के लिए लोग भी थे. स्मृति को एक पार्किंग गाइ असिस्ट करता है और वो अपनी कार पार्क कर देती है. पार्किंग गाइ से ही वो पूछती है कि मेन एंट्रेन्स कहाँ है और वो उसे प्रॉपर गाइड कर देता है.

स्मृति अपने हिप्स को मटकाते हुए आगे बढ़ती बढ़ती है. जैसे जैसे वो मेन एंट्रेन्स के करीब पहुँच रही थी वैसे वैसे म्यूज़िक की आवाज़ उसके कानो तक और क्लियर होती जा रही थी.

स्मृति मेन एंट्रेन्स तक पहुँच जाती है, जहाँ एक हॅंडसम लड़का और एक सेक्सी लड़की रिसेप्षन पे खड़े हुए थे. उंसके साइड मे सेक्यूरिटी गार्ड्स भी खड़े थे. रिसेप्षन के दोनो लोग स्मृति को ग्रीट करते है

रिसेप्षन - "हेलो मॅम".

स्मृति - " हाई".

रिसेप्षन - " सो मेडम प्राइवेट ऑर सोशियल?" वो स्मृति से ये सवाल पूछते है

स्मृति - " आइ डॉन'ट नो इफ़ इट ईज़ सोशियल ऑर प्राइवेट. सम्वन इन्वाइटेड मी हियर आक्च्युयली".

रिसेप्षन - " एनी आइडी रिक्वाइयर्ड मेडम दट यू आर अबव 18 यियर्ज़". स्मृति इस बात को सुनकर काफ़ी हॅपी हुई क्यूंकी उसे ऐसा लगा कि आज भी वो लोगो डाउट है कि वो 18 की है या नही.

स्मृति -" क्या आप लोगो को मुझे देख कर डाउट है कि मैं इस एज से कम हूँ."

रिसेप्षन -" नो मॅम. ये एक फॉरमॅलिटी है ऐज इनसाइड एन्वाइरन्मेंट ईज़ फॉर अडल्ट्स ओन्ली.". ये बात सुनकर स्मृति का माथा ठनकता है लेकिन वो रिसेप्षन पे कुच्छ नही दिखाती.

स्मृति - " लेकिन ये सोशियल ओर प्राइवेट क्या है?"

रिसेप्षन - " मॅम हम लोगो की प्राइवसी का ख्याल रखते है. हमारे दो सेगमेंट है. सोशियल जो कि आपके एंटर होते हो आपको दिख जाएगा -सोशियल मे सभी लोग होते है. ड्रिंक, डॅन्स, चॅट, वॉक ओर वहटेवेर लेकिन आपको सबकी प्राइवसी का ख्याल रखना पड़ेगा. किसी भी मेंबर का नाम ओर पर्सनल आइडेंटिटी पुछ्ना अलोड नही है. दिस पार्टी ईज़ फॉर फन ओन्ली. "

स्मृति - " और प्राइवेट क्या होता है"

रिसेप्षन -" प्राइवेट मीन वन सेपरेट एरिया जहाँ बस आप और आपके पार्ट्नर होंगे".

स्मृति डाउट्स मे थी कि ये चक्कर क्या है और ये कैसी पार्टी है. लेकिन वो रिसेप्षन वालो को डाउट नही कराना चाहती थी. रिसेप्षन वाले स्मृति के हाथ पर एक स्टंप लगाते है और उसे एल फेस मास्क पहन ने को देते है. उस फेस मास्क को देख कर स्मृति के माइंड मे बहुत सारे सवाल आते है -

स्मृति -" ये फेस मास्क क्यू?"

रिसेप्षन -" मेडम ये एक अडल्ट प्लेस है जहाँ लोग एंजाय करने आते है. हमे उनकी और आपकी प्राइवसी का ख्याल रखना है. अंदर जाने वाले सभी मेम्बेरा को ये पहन ना ज़रूरी है".

स्मृति -" अगर कोई ना पहने या अंदर उतार दे तो "

रिसेप्षन -" अगर कोई ना पहने तो वो अंदर नही जा सकता और अगर कोई अंदर उतारेगा तो सेक्यूरिटी उसे सस्पेंड करके बाहर भेज देगी"

स्मृति भी सोचती है कि अच्छा है किसी को पता भी नही चलेगा कि मैं कौन हू और वो उस फेस मास्क को लगा लेती है. आक्चुयल मे वो फेस मास्क नही बस आइ मास्क था.

स्मृति अंदर एंटर हो जाती है. अंदर एंटर होते ही उसे समझ आ जाता है कि ये कोई अडल्ट पार्टी है. ये एक बहुत बड़े स्पेस मे था. राइट साइड मे बार टाइप काउंटर बने हुए थे जिन पर गर्ल्स आंड बाय्स ड्रिंक कर रहे थे. बीच मे चेर आंड टेबल लगे हुए थे जिन पर काफ़ी कपल्स बैठे हुए थे. लेफ्ट साइड और स्ट्रेट म्यूज़िक डीजे लगा हुआ था जिस पर भी कपल्स डॅन्स कर रहे थे.

सभी गर्ल्स ने आइ मास्क और बाय्स ने फुल फेस मास्क पहना हुआ था. माहौल काफ़ी रंगीन था. सभी गर्ल्स ने शॉर्ट ड्रेस ही पहनी हुई थी और बाय्स ने जीन्स आंड टीशर्ट.
 
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