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लाइयन - मैं कहीं से पिक नही करूँगा. आपको डाइरेक्ट आना होगा वहाँ पे. और प्लीज़ एक रिक्वेस्ट और है.

स्मृति - बोलो

लाइयन - कोई भी शॉर्ट ड्रेस पहन कर आइए गा. जो आपकी थाइस से नीचे ना हो.

स्मृति - इतनी कंडीशन तो कभी मैने अपने बाप की भी नही सुनी. मैं नही आने वाली करले जो करना है.

लाइयन - मुझे पता था कि आप ऐसे ही गुस्सा हो जाएँगी. लेकिन सुन तो लीजिए कि मैने उस ड्रेस के लिए क्यूँ बोला?

स्मृति - भोंक जल्दी

लाइयन - ये उस पार्टी का ड्रेसा कोड है. मेरा बस चले तो मैं बुर्क़ा पहन के आपको वहाँ बुलाऊ लेकिन क्या करे जब ऐसे नही हो सकता है.

स्मृति - मेरे पास कोई ऐसी ड्रेस नही है.

लाइयन - मैने कहा ना कि आपके बारे मे मुझे सब डीटेल्स है. मुझे पता है कि एक शॉर्ट ड्रेस और एक लोंग ड्रेस भी खरीदी है आपने. अरे आपने तो वो ड्रेस भी खरीद ली जो मैने आपको पहले बताई थी. कमाल है आप भी वैसे मुझसे लड़ती भी है और मेरी बातो को इतना ध्यान रखती है.

स्मृति अपने मन मे सोचा रही थी कि ये हरामी इतनी बाते कैसे जानता है.

स्मृति - अपनी बकवास बंद करो. मुझे अब नहाने जाना है. लेट हो रही हू.

लाइयन - ठीक है तो वेडनेसडे ईव्निंग मिलते है.

स्मृति - अब कितनी बार कहु की आ जाउन्गि.

लाइयन - अभी तक तो एक बार भी नही कहा.

स्मृति - चलो अब कह दिया कि आ जाउन्गि. बस!!!

लाइयन - एक बात कहु?

स्मृति - जल्दी बक मुझे नहाने जाना है.

लाइयन - ठीक है तो जाओ.

स्मृति - जल्दी बक कि क्या बात है..

लाइयन - बताऊ?

स्मृति - जल्दी बता...

लाइयन - इतनी प्यारी चूत तुम्हे उपर वाले ने दे कैसे दी. उपर वाला भी पक्ष पात करता है.

स्मृति - बस हो गयी ख़तम बकवास. अब मैं नहाने जाउ?

लाइयन - जी हाँ जाइए प्लीज़. बाइ

स्मृति - बाइ

लाइयन - टेक केअर

स्मृति साइंड ऑफ......

स्मृति का सर अभी तक चकरा रहा था कि आख़िर ये कैसे हो गया. एक लड़के ने उससे चॅट करनी शुरू और नौबत यहाँ तक आ गयी.

खैर अब वो इस मॅटर को वेडनेसडे को ख़तम करना चाहती थी तो रिलॅक्स होकर नहाने चली गयी.

आराधना कॉलेज पहुँच गयी थी. आज उसे पिक करने सिमरन नही आई थी. घर पर कुच्छ ना खाने की वजह से आराधना सीधा कॅंटीन मे जाती है. कॅंटीन मे घुसते ही उसकी निगाहे सबसे पहले सिमरन से मिलती है लेकिन सिमरन अपने चेहरा फिरा लेती है.

आराधना जूस ऑर्डर करती है और सिमरन से थोड़ी दूरी पर बैठ जाती है. थोड़ी देर बस सिमरन उठ कर चल देती है. लेकिन आराधना उसे आवाज़ लगाती है -

आराधना -" कहाँ चली?"

सिमरन -" तुझसे मतलब"

आराधना -" ओये होये आज तो मेडम का पारा कुच्छ ज़्यादा ही हाइ है".

सिमरन -" तो तेरी क्या पूजा करू"

आराधना -" कर ले पूजा, हो सकता है माता खुश हो जाए" आराधना अपना एक हाथ ऐसे उठाते हुए बोलती है जैसे कोई आशीर्वाद दे रही हो.

सिमरन -" किया ना कल माता ने खुश, इतनी बाते सुना कर".

आराधना सिमरन का हाथ पकड़ कर प्यार से उसे बिठाती है.

आराधना -" आ गया था गुस्सा लेकिन तू मेरी पक्की दोस्त है तो मैं माफ़ कर देती हू". इतनी बात सुन कर सिमरन को फिर गुस्सा आ जाता है.

सिमरन - " बड़ी आई माफ़ करने वाली. ऐसी क्या ग़लती कर दी मैने जो तूने मुझे माफ़ कर दिया."

आराधना -" क्या दोबारा वो तीन कॉंडम लाकर दिखाऊ"

सिमरन - " ओह्ह्ह तो अभी तक उसी बात के पीछे पड़ी है. हाँ मैने सेक्स किया, तीन बार किया और करती रहूंगी. कर ले जो करना है. अगर नही रखनी तुझे दोस्ती तो कोई बात नही. "

आराधना-" ऐसा नही है मुझे दोस्ती नही रखनी. लेकिन तू सोच क्या शादी से पहले ये सब करना सही है"

सिमरन -" महारानी साहिबा, आप अपनी पुसी को बचा कर रखो. मुझे मत सिखा ये सब, मैं तो अपने बॉय फ्रेंड के साथ खूब एंजाय कर रही हू और करती रहूंगी".

आराधना - " बॉय फ्रेंड क्या, एंजाय तो तू और मर्दो के साथ भी कर रही है"

सिमरन उसकी इस बात से शॉक्ड रह जाती है.

सिमरन -" किस मर्द के साथ?"

आराधना -" क्या तूने मेरे डॅड को ब्लो जॉब नही दी".

ये बात सुनते ही सिमरन के चेहरे का रंग जैसे फीका पड़ गया.

सिमरन -" तुझसे ये बात किसने बोली"?

आराधना -" मैने खुद देखा था तुझे".

सिमरन -" अपने बॉय फ्रेंड के साथ मैने सेक्स किया तो तूने इतना बड़ा ड्रामा कर दिया और तूने मुझे तेरे डॅड को ब्लो जॉब दी और तू देख कर चुप रह गयी. इतनी भोली तो तू नही लगती. सच सच बता कि कैसे ये कहानियाँ बना रही है तू"

आराधना सिमरन का हाथ पकड़ कर अपने सर पर रखती है.

आराधना -" खा मेरी कसम कि तूने मेरे डॅड को ब्लो जॉब नही दी?"

सिमरन अपने हाथ हो हटा कर उससे थोड़ा पीछे होकर बोलती है.

सिमरन -" ज़्यादा तेज मत बन. हाँ मैने ब्लो जॉब दी, और ब्लो जॉब ही नही, तेरे डॅड का सारा रस चूसा मैने लेकिन मैं ये जान ना चाहती हू कि तू कैसे जानती है?" सिमरन का गुस्सा उसके चेहरे पे दिख रहा था

आराधना -" मैने खुद देखा था......" अब आराधना खूब घबरा रही थी और उसकी आवाज़ हकलाने लगी थी.

सिमरन -" मैने तो सच बता दिया तुझे लेकिन तू सच नही बोल रही. अब अगर सुन ना चाहती है तो सुन.... एक लड़की होने के नाते अगर मैने तेरी डॅडी की हेल्प कर दी तो क्या बुरा करा."

आराधना -" हेल्प? ऐसे करती है तू हेल्प सबके डॅडी की"
सिमरन -" तुझे चाहे समझ आए ना आए लेकिन मुझे तो दिखता है ना. देखा नही था तूने उस दिन कि तुझे कैसी नज़रो से देख रहे थे जब तूने वो साड़ी पहनी थी. आदमी की सबसे बड़ी कमज़ोरी लड़की ही होती है, तेरे डॅड किसी के लिए तरस रहे थे तो मैने अपना थोड़ा प्यार उन्हे दे दिया तो क्या बुरा किया. और मुझे डर नही किसी का कि मैने कुच्छ ग़लत किया."

आराधना -" अगर यही प्राब्लम तेरे डॅडी के साथ होती तो क्या तू उन्हे भी ब्लो जॉब दे देती?"

सिमरन -" ब्लो जॉब? अबे अपना सब कुच्छ दे देती. तू अपने ये ड्रामे अपने पास रख, मेरा लाइफ स्टाइल अलग है. एक बाहर का लड़का आता है, हमे फाँसता है और हमारा काम कर के भाग जाता है तो इससे तो अच्छा है कि प्यार की दो बूंदे हम अपने डॅड को दे दे लेकिन तू ये सब क्यू पुच्छ रही है. मुझे तो लग रहा है कि तेरा दिल ही तेरे डॅड पे आ गया है?"

आराधना -" तुझे ऐसी बाते करते हुए शरम आनी चाहिए?"

सिमरन -" हम सब लड़कियो मे यही परेशानी है. शरम शरम और शरम. जहाँ कहीं पे किसी को अच्छी बात समझता है तो तुझे शरम आनी चाहिए. वैसे ये सब बाते छोड़ और प्लीज़ बता ना कि तुझे कैसे पता चला कि तेरे डॅड और मेरे बारे मे"

आराधना -" बस मुझे पता है." और आराधना वहाँ से उठ कर चल देती है.

सिमरन -" कहीं ऐसा तो नही कि तूने अपने डॅड के साथ कुच्छ ट्राइ किया और उन्होने तुझसे कह दिया कि उन्हे सिमरन पसंद है". सिमरन उसके पीछे से बोलती है उसको उकसाने के लिए. ये बात सुनकर आराधना रुक जाती है और पीछे मूड कर बोलती है -

आराधना -" तुझे बहुत प्राउड है अपने उपर? "

सिमरन -" क्यू ना हो. उपर वाले ने बनाया बहुत नाप तोल के है". सिमरन ने अपनी टी-शर्ट के कॉलर पकड़ कर खड़े करते हुए कहा

आराधना -" आज के बाद अगर मेरे डॅड की तरफ देखा भी तो सही नही होगा." आराधना उसे उंगली दिखाती है.

सिमरन -" अच्छा तो तूने फ़ैसला कर लिया है कि तू ही देखेगी अपने डॅडी की तरफ". सिमरन उसकी तरफ आँख मारते हुए बोलती है.

आराधना -" अगर ज़रूरत पड़ी तो मैं वो सब कर सकती हू जो तूने किया मेरे डॅड के साथ. लेकिन अब तेरी परच्छाई भी नही पड़ने दूँगी उन पर".

सिमरन -" अगर तेरे मे गट्स होते तो वो भला मेरे पास आते ही क्यू. भूखे को खाना नही दोगि तो ऐसा ही होगा". सिमरन उसे चॅलेंज करते हुए बोलती है

आराधना -" अब उन्हे इतना खाना मिलेगा कि अगर तू अगर अपने सेकेंड हॅंड खाने के साथ पैसे भी देगी ना तो वो तेरे पास नही आएँगे".

सिमरन -" रात रात मे क्या जादू हो गया मेरी सहेली पे. बड़ा प्यार उमड़ रहा है अपने डॅडी के लिए. सच बता अगर कुच्छ बात है तो शायद मे तेरी हेल्प कर पाऊ".

आराधना -" मुझे तेरी किसी हेल्प की ज़रूरत नही"

सिमरन - " जैसी तेरी मर्ज़ी लेकिन मुझसे क्यू गुस्सा हो रही है".

आराधना - " नही गुस्सा नही हू". और फिर दोनो नॉर्मल हो जाते हैं. लेकिन सिमरन के माइंड मे चल रहा था कि कुच्छ तो बात है तभी इसे वो ब्लो जॉब वाली बात पता चल गयी.
प्रीति अपने रूम मे उठ चुकी है और नींद की ही हालत मे अपने रूम से बाहर निकल कर टाय्लेट की तरफ चल देती है. जैसे ही टाय्लेट के गेट को खोलने वाली थी तो खुद ही उसका गेट खुल जाता है और उसमे से कुशल बाहर निकल कर आता है. प्रीति की नींद थोड़ी खुल जाती है क्यूंकी उसे उम्मीद थी कि कुशल थोड़ी बदतमीज़ी कर सकता है.

लेकिन उसका सोचना ग़लत साबित हुआ. क्यूंकी कुशल निकलते ही सीधा अपने रूम मे जाता है. यहाँ तक कि वो प्रीति की तरफ देखता भी नही.

प्रीति को होश आता है तो उसे लगता है कि इसे क्या हुआ. इतना शरीफ कैसे हो गया ये. वो सोचने पे मजबूर हो जाती है और कुशल को अपने रूम मे जाते हुए देखती रहती है लेकिन वो पीछे मुड़कर नही देखता है

प्रीति सोचते सोचते ही टाय्लेट मे घुस जाती है. उसको ये भी लग रहा था कि उसे कोई ग़लत फ़हमी हुई है. खैर वो अपने आप को फ्रेश करती है और बाहर आ जाती है. अपनी रूम की तरफ धीरे धीरे जाते हुए वो कुशल के रूम मे झाँक कर देखती है. कुशल बेड पर अपना मोबाइल हाथ मे लेकर बैठा हुआ था और वो किसी गहरी सोच मे था. प्रीति उसकी तरफ रुक कर देखती है लेकिन वो बाहर नही देखता.

प्रीति वहाँ से आगे बढ़ने की सोचती है लेकिन तभी उसके माइंड मे एक प्लान आता है. " उन्न्ह उन्न्नह, वो ऐसे खाँसती है जैसे गले मे कुच्छ अटक गया हो. कुशल उसकी तरफ देखता है और प्रीति हंस कर पलके झपका झपका कर देखने लगती है.

कुशल -" लगता है तुझे तो टीबी हो गया, तेरा टाइम पूरा हुआ". ये बात सुन कर प्रीति को तो जैसे झटका ही लग गया और वो पाँव पटक कर अपने रूम मे भाग जाती है. और बेड पर उल्टा लेट जाती है. उसको यकीन नही हो रहा था कि ये क्या हो गया है कुशल को.

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स्मृति नहा चुकी थी और मॉर्निंग मेक ओवर कर रही थी. उसके माइंड मे यही चल रहा था कि लाइयन कितना हरामी निकला, मुझे अपना फ्रेंड बनाया, मेरा पीछा किया, मैने क्या क्या खरीदा ये अब देखा उसने आंड लास्ट मे स्केरी हाउस मे मुझे अपना विक्टिम बनाया. कमाल की प्लॅनिंग करता है ये हरामी. लेकिन अब वो सॅटिस्फाइ थी कि वेडनेसडे को उससे मिल कर ये सारा गेम ही ख़तम कर देगी और उसके बाद अपनी फ़ेसबुक प्रोफाइल को भी चेंज कर देगी.

" लेकिन पंकज से क्या बोल कर जाउन्गि?". उसके माइंड मे यही सवाल चल रहा था. उसने प्लान बनाया क़ी आज बच्चे भी सोए हुए है और आराधना भी बाहर गयी हुई है, क्यू ना पंकज को पटाउँ वेडनेसडे नाइट पर्मिशन के लिए. यही सोचकर वो अपने आप को तैयार करने लगती है. उसने आज लाइट पिंक कलर का सूट पहना और लाइट लीप स्टिक आंड आइ शॅडो लगाने के बाद वो चाइ बनाने के लिए किचन मे चली जाती है. स्मृति की बॉडी की सबसे खास बात उसकी हाइट आंड उसकी स्लिम बॉडी थी. पंकज बाहर हॉल मे अभी तक न्यूज़ पेपर ही पढ़ रहा था.

थोड़ी देर बाद स्मृति ट्रे मे चाइ लेकर आ जाती है. वो स्लो वाय्स मे गाना गुन गुना रही थी. काफ़ी हॅपी नज़र आ रही थी वो. वो पंकज को मुस्कुराते हुए चाइ देती है. पंकज बिना न्यूसपेपर से आँखे हटाए उससे चाइ ले लेता है. स्मृति बाते करना शुरू करती है -

स्मृति -" क्या बात है आज कल बहुत हॅंडसम होते जा रहे हो". स्मृति उसे खुश करना चाहती थी.

पंकज -" क्या बात है, तुम भी बिजली गिरा रही हो चारो तरफ. दिन पे दिन औरत कम और लड़की ज़्यादा लगती हो". पंकज की निगाहे स्मृति के बूब्स पर थी.

स्मृति -" और बताओ, सब सही चल रहा है बिज़्नेस वग़ैरा".

पंकज -" उपर वाले की दुआ से सब सही है"

स्मृति -" अच्छा क्या वेडनेसडे को आप फ्री है?"

पंकज -" क्यूँ?"

स्मृति -" नही वो मेरी एक फ्रेंड ने एक पार्टी रखी है. अगर आप फ्री हो तो मेरे साथ चलो". स्मृति ने अंधेरे मे तीर छोड़ा.

पंकज -" अरे नही यार. तुम किसी और के साथ चली जाओ. ये लॅडीस पार्टी हमारे समझ से बाहर है. " स्मृति की तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी

स्मृति -" लेकिन मैं किसे लेकर जा सकती हू?" स्मृति ने नकली गुस्सा करते हुए कहा

पंकज -" कुशल को ले जाओ. " पंकज ने न्यूसपेपर पढ़ते हुए कहा

स्मृति -" मैं एक अडल्ट पार्टी की बात कर रही हू. वहाँ बच्चो का क्या काम. वहाँ ड्रिंक, डॅन्स और पता नही क्या क्या होगा. बच्चो पर इसका क्या फ़र्क पड़ेगा". स्मृति का टारगेट अकेले जाना था इसीलिए वो इतनी बाते बना रही थी.
पंकज - " अगर अडल्ट पार्टी है तो क्या कुशल बच्चा है? कम ऑन डियर, अब सब बच्चे बड़े हो गये है. अगर तुम उससे कंफर्टबल नही हो तो आराधना को ले जाओ".

स्मृति -" आराधना ओल्ड आइडियास वाली है, उसे वो पार्टी पसंद नही आएगी".

पंकज -" हा हा हा हा हा".

स्मृति -" हंस क्यू रहे हो".

पंकज -" नही तुम कह रही हो कि आराधना ओल्ड आइडियास वाली लड़की है. वो तुमसे भी अड्वान्स है बस थोड़ा गाइड करो उसे".

स्मृति -" आप ही गाइड करो. मैं तो अकेले ही चली जाउन्गि और जल्दी आ जाउन्गि

पंकज -" इससे बेहतर तो कुच्छ हो ही नही सकता. "

स्मृति -" आप तो चाहते ही मुझे अकेले भेजना हो". स्मृति ने झुटे नखरे दिखाते हुए कहा लेकिन उसकी खुशी का कोई ठिकाना नही था.

पंकज -" इस बार चली जाओ, अगली बार से मैं साथ ही चलूँगा... ओके".

स्मृति झूठा गुस्सा दिखाते हुए चाइ पीने लगती है लेकिन उसके मन मे लड्डू फुट रहे थे. चाइ ख़तम करने के बाद स्मृति वापिस किचन मे चली जाती है और प्लॅनिंग करने लगती है कि कैसे जाना है और कैसे आना है. लेकिन उसके चेहरे पर टेन्षन नही दिख रही थी.

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उधर उपर प्रीति को टेन्षन खाए जा रही थी कि आख़िर कुशल को क्या हुआ है. " कहीं वो मुझसे सच मे तो गुस्सा नही हो गया?" उसके दिल मे बहुत सारे सवाल चल रहे थे और टेन्षन मे वो बहुत पागल सी हुए जा रही थी.

उसने फिर से प्लान बनाया कि क्यू ना उसके रूम मे जाया जाए और पता किया जाए कि आख़िर क्या चल रहा है उसके दिमाग़ मे. वो नहाने चली जाती है, और बाथरूम मे अपनी बॉडी को अच्छे बॉडी वॉश टॉनिक से धोती है. बालो को भी शॅमपू करती है. जो उसकी सबसे बेस्ट ब्रा थी, नहाने के बाद वो उसे पहनती है.

उसका एक मन कहता है कि चल देखा जाएगा जो होगा लेकिन आज ब्रा पहन कर ही उसके रूम मे चलती हू वैसे भी आराधना दीदी भी अपने रूम मे नही है. लेकिन फिर से वो डर जाती है कि कहीं दाव उल्टा ना पड़ जाए और वो कहीं उसे दबोच ना ले.

फाइनली उसने पिंक टाइप स्ट्रिंग वेस्ट पहनी जिसमे उसके शोल्डर्स विज़िबल थे. बहुत ही ज़्यादा सेक्सी लग रही थी वो. उसने अपने बालो को हेर ड्राइयर से सूखाया और उन्हे खुला ही रहने दिया. लिप्स पे लिप बॉम लगाया लेकिन लिपस्टिक नही और वैसे भी उसके लिप्स ऑलरेडी पिंक ही थे.

अब वो अपने रूम से निकल कर कुशल के रूम की तरफ चल देती है. उसका दिल धक धक कर रहा था, पाँव काँप रहे थे. वो जाते जाते रुक जाती है और फिर से सोचने पे मजबूर हो जाती है -" सोच ले बेटा, वैसे भी बहुत परेशान कर चुकी है तू. कुशल अभी एक भूखे शेर की तरह है, अगर अकेले मे मिल गयी तो बच नही पाएगी.". उसका माइंड उसे रुकने के लिए बोलता है लेकिन अगले ही पल उसका स्ट्रॉंग माइंड जागता है " ऐसे कैसे कुच्छ भी कर देगा वो. आइ आम ऑल्सो ए फ्री गर्ल, मेरी बिना मर्ज़ी के वो कुच्छ नही कर सकता " और वो कॉन्फिडेन्स के साथ उसके रूम की तरफ चल देती है.
उसके गेट पे पहुँच कर वो रुक जाती है. उसका गेट खुला हुआ था. प्रीति थोड़ा सा आगे बढ़ती है और देखती है कि कुशल अभी भी बेड पे बैठा हुआ है और मोबाइल मे देख कर कुच्छ सोच रहा है. एक सेक्सी स्टाइल मे प्रीति उसके गेट से चिपक कर बोलती है.

प्रीति उसी पोज़िशन मे कुशल से बोलती है -

प्रीति -" कुशल...... कुशल..... ?" प्रीति बहुत ही लो वाय्स मे उसे आवाज़ लगाती है. कुशल का ध्यान एक दम से झटका ख़ाता है और वो प्रीति की तरफ देखता है

कुशल -" हाँ क्या बात है?"

प्रीति -" इतना गुस्से मे क्यू है?"

कुशल -" तुझसे मतलब, तू बता कि तुझे क्या चाहिए?"

प्रीति -" ओह्ह्ह इतना आटिट्यूड..."

कुशल -" सीधी बात करो तो आटिट्यूड. नखरे तो ऐसे दिखाती है कि जैसे मेरी बीवी हो".

प्रीति -" ( बहुत ही लो वाय्स मे) - आधी बीवी तो बना ही लिया है".

कुशल -" क्या कहा तूने?"

प्रीति -" कुच्छ नही.... मैं तो बस इतना कह रही थी कि नखरे तो तू दिखा रहा है".

कुशल -" मेरे पास बहुत कुच्छ है तुझे दिखाने के लिए लेकिन अब मन नही है".

प्रीति -" क्यूँ ऐसा क्या हो गया ".

कुशल -" तू सही कहती थी. तेरे पीछे टाइम खराब करने से कुच्छ फ़ायदा नही. "

प्रीति -" पीछे टाइम खराब करने से कुच्छ फ़ायदा वाकई मे नही है, अगर करना है तो आगे टाइम खराब कर ना". प्रीति फिर से लो वाय्स मे बोलती है.

कुशल -" क्या कहा तूने?"

प्रीति -" मैने कहा कि ऐसा क्या हो गया कि तू ये कह रहा है कि टाइम खराब करने से कुच्छ फ़ायदा नही है."

कुशल -" ज़्यादा भोली मत बन. तुझे नही पता कि मेरा टाइम कैसे खराब हो रहा है"

प्रीति -" कैसे हो रहा है.........." प्रीति बहुत ही कामुक आवाज़ मे बोलती है

कुशल -" चाहू तो अभी तेरी चूत को अपने लंड से खोल दू. और इतना खोल दू कि उसके बाद तेरी चूत मे अगर कोई लंड भी जाएगा तो तुझे पता भी नही चलेगा. लेकिन अब मूड नही है. "

प्रीति -" कितनी गंदी गंदी बाते करता है तू. "

कुशल -" तो किसने बोला कि मुझसे बात कर. तू अपनी चूत को बचा के रख, और मुझसे दूर रहा कर नही तो सच मे तुझे एक दिन दोनो साइड से चोद दूँगा. अब अगर मे चुप हू तो खुद आकर मुझे छेड़ रही है."

प्रीति -" अगर तुझसे बात करने आ गयी तो क्या मैं तुझे छेड़ रही हू?"

कुशल -" अँधा नही हू मैं. तुझे खुद शरम नही आती मेरे जज़्बातो से खेलते हुए."

प्रीति -" आज तो कुच्छ ज़्यादा ही गुस्सा आ रहा है तुझे. देख तू कभी मेरी मजबूरी भी समझ..." इससे पहले की प्रीति अपनी बात पूरी कर पाती की कुशल चिल्ला कर पड़ता है.

कुशल -" मजबूरी, मजबूरी, और मजबूरी. भाड़ मे जाए तू और तेरी मजबूरी. चूत की कमी नही है इंडिया मे, तू कोई स्पेशल नही है. सच बोल रहा हू कि तरसेगी लंड को तू. घर बैठे बिठाए तुझे वो प्यार देने को तैयार था जिसके लिए अब तू बाहर धक्के खाएगी लेकिन तुझे समझ नही आया."

प्रीति उसके करीब जाती है उसे शांत करने के लिए.

प्रीति - " चल तू गुस्सा मत हो. ग़लती तुझसे हुई और ग़लती मुझसे भी हुई, हमे कुच्छ ऐसा करना ही नही चाहिए था.".

कुशल -" फिर से एक नया ड्रामा. कहाँ सीख के आती है तू ये सब, मुझे कुच्छ नही सुन ना ये सब."

प्रीति -" देख मैं भी एक इंसान हू लेकिन हू तो लड़की ही."
कुशल -" अगर तू लड़की है तो तूने ये जब क्यू नही सोचा जब मेरा लंड चूस रही थी और अपनी चूत मुझे दिखा रही थी. जब चूत मरवाने की बारी आई तो लड़की होना याद आ गया तुझे. " कुशल का चेहरा लाल होता जा रहा था

प्रीति -" ओके......... ओके!! मैं सोच के बताउन्गि इस बारे मे."

कुशल -" हा हा हा हा. किसी ग़लत फ़हमी मे मत रह. मुझे तेरी चूत की कोई ज़रूरत नही है. तू वर्जिन रह".

कुशल गुस्से मे रूम से बाहर भाग जाता है. और प्रीति उसकी इस आक्टिविटी से शॉक्ड रह जाती है. वो सोचने पर मजबूर हो जाती है कि अब तक मेरा इतना बड़ा दीवाना आज मुझसे बात करने को ही तेय्यार नही है.

उसके चेहरे पर टेन्षन के सॉफ भाव दिखाई दे रहे थे. उसको ऐसा लग रहा था जैसे उसके हाथ से कुच्छ खो गया हो. समझ नही आ रहा था उसे कि वो क्या करे और क्या ना करे.
आराधना पता नही क्यू आज कॉलेज मे अपना मन नही लगा पा रही थी. और जैसे ही लास्ट सेशन की बेल बजती है वो तुरंत तेज़ी से अपने मस्त हिप्स मटकाते हुए कॉलेज के गेट की तरफ भागने लगती है. उसको सिमरन गेट पर अपनी कार मे मिल जाती है.

सिमरन -" आजा स्वीटी... मैं ड्रॉप कर दूँगी.". आराधना अपने अधूरे मन के साथ उसकी कार मे बैठ जाती है. आज सिमरन कार कुच्छ स्लो चलाती है.

आराधना -" क्यू इसे साइकल की तरह चला रही है. इससे अच्छा तो मैं पेदल ही चली जाती." आराधना गुस्सा दिखाते हुए बोलती है.

सिमरन -" कार स्लो नही लेकिन हाँ तुझे घर पहुँचने की कुच्छ ज़्यादा ही जल्दी है. क्यू आज कोई तुझसे मिलने आ रहा है क्या "

आराधना -" नही.... नही ऐसा कुछ... नही है". आराधना सिमरन की बात सुनकर घबरा जाती है. सिमरन स्लो स्पीड पे जाते जाते आराधना को घर छोड़ देती है.

आराधना घर मे आने के टाइम बहुत हॅपी थी. " हाई डॅडी". वो बहुत एनर्जी के साथ अपने डॅडी को ग्रीट करती है और उन्हे पहुँच कर हग कर लेती है. पूरी जान से अपने बूब्स उनके सीने मे दबा देती है.

पंकज -" कैसा रहा कॉलेज का दिन?"

आराधना -" पता नही क्यू मन नही लगा". आराधना हंसते हुए अपने डॅड को बताती है

पंकज -" पढ़ाई मे मन लगाना ज़रूरी है". पंकज सीरीयस होते हुए बोलता है. आराधना को उसकी इस बात से बहुत झटका लगता है.

इतने मे स्मृति भी वहाँ आकर पूछती है आराधना से -" बेटे थक गयी होगी तो खाना खा ले".

"मुझे भूख नही है". और आराधना गुस्से मे उपर अपने रूम मे भाग जाती है. वो अपने डॅड के रिएक्ट से हॅपी नही थी. खैर इतने टाइम वो अपने कपड़े चेंज करती है और फ्रेश होती है.

कुशल घर के बाहर जा चुका था और स्मृति अपने रूम मे थी. अब ग्राउंड फ्लोर पे बाहर बस पंकज ही बैठा हुआ था. आराधना को कॉलेज से आए हुए भी एक घंटे से ज़्यादा हो चुका था.

तभी मेन गेट से एक और एंट्री हुई. वाइट टॉप और वाइट मिनी स्कर्ट मे, बेल्ली पिन भी लगाई हुई थी. खुले हुए बाल और एक स्टाइलिश चाल मे एक लड़की एंट्री लेती है. हॉल फिर से मादक खुसबु से भर गया. शी वाज़ नन अदर दॅन सिमरन. डॅम हॉट... क्या लुक्स थे आज उसके.

पंकज को अपनी सीट से उठने पे मजबूर होना पड़ा. उसका मूँह खुला हुआ था.

सिमरन -" हाई अंकल!!!!ल"

पंकज -" आओ बेटा, आख़िर आ ही गयी याद तुम्हे". सिमरन के चेहरे पे एक सेक्सी स्माइल थी.

वो अंदर आते ही सोफे पे बैठ जाती है.

पंकज -" और सुनाओ".

सिमरन -" कुच्छ नही अंकल, बस ऐसे ही घर पे कोई नही था तो सोचा कि आराधना से मिलने आ जाउ".

पंकज -" कभी हम से भी मिलने आ जाया करो ". पंकज फिर से उसकी तरफ भूखी नज़रो से देखता है.

लेकिन सिमरन बस स्माइल करके चुप हो जाती है. तभी पंकज की निगाहे सिमरन की नेक पर बने ड्रॅगन टॅटू पर जाती है.

पंकज -" क्या तुम्हे ये टॅटूस पसंद है?"

सिमरन -" यस अंकल, आइ लाइक टॅटूस. इससे मेरी लुक्स और भी स्टाइलिश और सेक्सी हो जाती है".

पंकज मन मे सोचता है कि और कितना सेक्सी बनेगी. तभी बीच मे ही सिमरन खड़े होते हुए फिर बोलती है.

सिमरन -" मेरे बॉडी के अलग अलग पार्ट मे टॅटूस बने हुए है, क्या आप देखना चाहेंगे".

पंकज -" क्यूँ नही ......" पंकज तो जैसे सम्मोहित होता जा रहा था.

और डिफरेंट सी अदा मे सिमरन खड़ी होती है और अपना साँस अंदर लेते हुए और मिनी स्कर्ट को थोड़ा नीचे करती है. टी - शर्ट को थोड़ा सा उपर करती है. उफफफ्फ़ क्या सीन था.

पंकज का हाथ ऑटोमॅटिकली सिमरन के सपाट पेट की तरफ बढ़ने लगता है.

" सिमरन........" उपर से नीचे आती हुई आराधना पूरी जान से चिल्लाति है. पंकज अपना हाथ पीछे खींच लेता है
 
स्मृति पागल हुए जा रही थी और उसे डर भी लग रहा था. उसने हिम्मत से पेश आने का फ़ैसला किया. और टाइपिंग दोबारा शुरू करती है.

स्मृति - क्या बकवास कर रहे हो तुम. कौन सा स्केरी हाउस?

लाइयन - स्मृति जी आप मुझे ग़लत मत समझिए. हम तो आपके...... ओह सॉरी आपकी बॅटरी के दीवाने है. मुझे पता है कि आप सनडे को शॉपिंग करने कहाँ गयी, क्या क्या खरीदा और स्केरी हाउस मे क्या हुआ.

स्मृति - तुम्हे कैसे पता कि हम सनडे शॉपिंग करने के लिए गये?

लाइयन - आपने ही तो बताया था.

स्मृति - तो इसका मतलब तुम हमारा घर भी जानते हो?

लाइयन - आप जैसी ब्यूटिफुल. सेक्सी, और हॉट फ्रेंड का घर क्या, सब कुच्छ पता होना चाहिए.

स्मृति - सॉफ सॉफ बोलो कि स्केरी हाउस वाली बात कैसे जानते हो?

लाइयन - क्यूंकी मैने ही वो सब किया.

स्मृति - क्या

लाइयन - अगर एक बार टाइपिंग किया समझ नही आया तो दोबारा टाइप कर देता हू कि मैने ही वो सब किया.

स्मृति - यू सोन ऑफ आ डॉग. मैने तुम्हे अपना दोस्त समझा, तुम्हारी इतनी बेहूदा बातो के बावजूद तुमसे दोस्ती रखी और तुमने मुझे ये सिला दिया. तुम्हे पता है कि तट वाज़ अटेंप्ट ऑफ रेप, तुम लाइफ टाइम के लिए जैल जा सकते हो.

लाइयन - स्मृति जी रिलॅक्स. अगर मे चाहता तो ये बात आपको कभी नही बताता और ना ही आप पोलीस स्टेशन जाती रिपोर्ट लिखाने कि आपका रेप करने की कोशिश की गयी है. लेकिन मैने आपको बताया क्यूँ कि मैने भी आपको दोस्त माना है.

स्मृति - दोस्त के साथ कभी कोई ऐसी हरकत करता है जैसी तुमने करी.

लाइयन - अगर मैं आपसे आकर ये कहता कि आपकी बॉडी मुझे अच्छी लगती है. आपकी चूत को मैं टच करना चाहता हू तो क्या आप अग्री हो जाती. मैने वोही किया जो सही लगा. माँगने से भीख भी नही मिलती तो मैने छीन लिया.

स्मृति - अच्छा!! तुम्हे क्या मिला ये सब कर के.

लाइयन - तुम्हारी रसीली चूत का टेस्ट. और मेरा लंड तुम्हारे हाथ मे था तो मुझसे लकी कौन हो सकता है. वैसे आपके हज़्बेंड है बहुत लकी, एक दम पटाखा वाइफ मिली है.

स्मृति - देखो मुझसे ये गंदी गंदी बाते ना किया करो. मैं एक शरीफ लेडी हू, तुमने मेरे साथ बहुत ग़लत किया है. अब तुम मुझसे क्या चाहते हो?

लाइयन - मैने पहले भी कहा है कि चूत को अगर चूत ना काहु तो क्या कहु. वैसे भी आपकी वाली रियल चूत है, बाकी तो सब एक छेद लेकर घूमती है.

स्मृति - मुझे तुम्हारी ये बकवास नही सुन नि है. मुझे ये बताओ कि तुम्हे मुझसे क्या चाहिए.

लाइयन - बस एक बार मिलना. जिसमे तुम मेरी गर्ल फ्रेंड बन कर मुझसे मिलो.

स्मृति - मैं तीन बच्चो की मा और तेरी गर्ल फ्रेंड. बस्टर्ड किसी और को ढूँढ ले ना. मैं तेरी गर्ल फ्रेंड कैसे बनके आ सकती हू.

लाइयन - आपको ग़लत फ़हमी है कि आप कोई आंटी टाइप लेडी लगती है. आप तो आज भी ऐसे लगती है जैसे कोई कुँवारी कली. पिंक लिप्स, वाइट चीक्स, टाइट बूब्स, सॉलिड गान्ड और मस्त स्लिम हाइट. ये चीज़े आज कल लड़कियों मे कहाँ मिलती है.

स्मृति - ज़्यादा बाते ना बनाओ. मुझसे मिलना क्यू चाहते हो?

लाइयन - बस एक बार तुम्हारी खूबसूरती को बहुत करीब से देखना चाहता हू. डरो मत कुच्छ ग़लत नही होगा.

स्मृति - अगर मैं ना आना चाहू तो?

लाइयन - बेकार मे फिल्मी सीन बनाने से क्या फ़ायदा. मैं कोई रिक्शा वाला या ऑटो वाला नही जो आपको ब्लॅक मैल करे. और मैं ये बोलू कि मैं ये कर दूँगा और वो कर दूँगा तो क्या वो सही है.

स्मृति - क्या गॅरेंटी है कि तुम दोबारा मिलने की ज़िद नही करोगे. और क्या गॅरेंटी है कि तुम मेरे साथ कोई बद तमीज़ी नही करोगे.

लाइयन - मैं कोई आइटम तो हू नही जो गॅरेंटी कार्ड दे सकु, लेकिन हाँ एक प्रॉमिस है कि दोबारा मिलने की ज़िद नही करूँगा. रही बात बद तमीज़ी की तो वो नही करूँगा. तुमने मेरे लंड को इतनी ज़ोर से दबाया मैने तो शिकायत नही करी कि तुमने बद तमीज़ी करी.

स्मृति - मेरा बस चलता तो काट ही देती.

लाइयन - चलिए आप गुस्सा थूक दीजिए और ये बताइए कि कब मिलना है.

स्मृति - तुम बताओ?

लाइयन - बुधवार ईव्निंग? 8 PM

स्मृति - कहाँ?

लाइयन - मेरे फ्रेंड के फार्म हाउस पे एक पार्टी है वेडनेसडे ईव्निंग को वहीं पे.

स्मृति - फार्म हाउस ही क्यू?

लाइयन - मुझे कोई ऐतराज नही है अगर आप कहीं और मिलना चाहे तो लेकिन बस मे यही सोच रहा था कि फार्म हाउस शहर की भीड़ से दूर है. अगर कहीं और मिले और आपको किसी ने देख लिया तो मुश्किल हो जाएगी. वैसे भी एक ही बार मिलना है तो मैं भी नही चाहता कि आपके परिवार पे कोई मुश्किल आए.

स्मृति - लगता तो नही है कि इतना अच्छा सोचते हो मेरी फॅमिली के बारे मे. लेकिन छोड़ो और बताओ कि मुझे कहाँ से पिक करोगे?
 
ये एक ऐसी सिचुयेशन थी जिसको शब्दो मे तो बयान किया ही नही जा सकता. पंकज ने अपने दोनो लिप्स आराधना के लिप्स पर टिकाए और जैसे आराधना तो बेहोश ही हो गयी. उसके जुवैसी लिप्स को टच करते ही तो पुछो मत कि पंकज की क्या हालत थी. बहुत सॉफ्ट्ली ही वो उसके उपर के होठ को ऐसे चूसने लगा जैसे कोई बहुत ही आराम से ऑरेंज खा रहा हो. ऐसे टाइम मे कंट्रोल करना बेहद मुश्किल होता है लेकिन पंकज अपनी सीमाए नही तोड़ सकता था. आराधना अपनी जवानी के फुल शबाब पर थी, आज उसकी लाइफ का एक खास दिन था- पहली बार इतनी शॉर्ट नाइटी, पहली बार अपने बाथरूम मे किसी मर्द के साथ और पहली बार उसके अनटच लिप्स को किसी ने छुआ था. उसकी आँखे बंद हो चुकी थी लेकिन उसके लिप्स मे अभी तक कोई मूव्मेंट नही थी, वो भी मजबूर थी. जवानी का ये दिन भी आया तो अपने फादर ही साथ. अभी तक उसको ना तो आइडिया था और ना ही उसे कोई गाइड करने वाला था कि आख़िर वो कैसा रिएक्ट करे.

आराधना धीरे धीरे और करीब जाती जा रही थी पंकज के. लेकिन एक चीज़ ऐसी थी जो उनके बीच की दूरी को मेनटेन किए हुए थी - पंकज का तना हुआ लंड जो की आराधना के पेट से टच हो रहा था. पंकज ने बहुत कोशिश की रोकने की लेकिन धीरे धीरे उसके दोनो हाथ आराधना के चेहरे पर पहुँच गये थे और अब उसने आराधना का चेहरा अपने दोनो हाथो मे पकड़ लिया था. पंकज धीरे धीरे उसके होंठो को चूसने की स्पीड बढ़ा रहा था. और अब उसने आराधना के नीचे वाले लिप्स को भी चूसना शुरू कर दिया था. आराधना के बूब्स ऐसे उपर नीचे हो रहे थे जैसे पता नही उसे कितना साँस चढ़ रहा हो. आराधना ने भी लास्ट टाइम तक वेट किया लेकिन एक जवान उमर की लड़की कब तक वेट करे, आराधना ने भी अब पंकज को सपोर्ट करना शुरू कर दिया. दोनो के होंठो का बेहद ही गहरा मंथन चल रहा है.

" ऊन्ह..... ऊन्न्नह की आवाज़े आराधना के मूँह से आनी शुरू हो गयी थी. पंकज अपना एक हाथ आराधना के चेहरे से हटाता है और बाथरूम के डोर को धक्का दे देता है. बाथरूम का गेट धड़क से बंद हो जाता है और अब वो दोनो एक ही रूम मे और बाथरूम मे बंद थे. आराधना ने भी वो आवाज़ सुनी लेकिन कोई ऑब्जेक्षन नही किया. पंकज वापिस अपना हाथ ले जाकर उसके चेहरे पर रख लेता है. पंकज अब उसके होंठो को बहुत मजबूती से चूस रहा था और आराधना भी फुल सपोर्ट कर रही थी. किस करते करते ही पंकज अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाने लगता है और ले जाकर सीधा आराधना के बूब्स पे रख देता है. आराधना को जैसे 440 वॉल्ट का करेंट लग गया हो. वो एक झटके के साथ पंकज से अलग हो जाती है. और उससे थोड़ी दूरी पर खड़ी हो जाती है.

उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी और बूब्स उपर नीचे हो रहे थे. वो इसी हालत मे पंकज से नज़रे मिलाती है और नीचे की तरफ ले जाती है. पंकज का लंड अब और भी बाहर आ गया था. पॅंट की ज़िप मे भी जितनी ताक़त थी उतनी ताक़त वो लगा चुकी थी. आराधना आइडिया लगा भी और नही भी कि आख़िर क्या साइज़ होगा उसका. पंकज की भी हालत खराब होती जा रही थी और ज़्यादा खराब आराधना के हार्ड, सॉलिड बूब्स को टच करने से हो गयी थी.

" आराधना तुम वाकई मे बड़ी हो चुकी हो" पंकज ने बहुत स्लो वाय्स मे आराधना के बूब्स की ओर देखते हुए कहा.

आराधना शरमा कर अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लेती है और थोड़ी देर बाद घूमी हुई सिचुयेशन मे ही पंकज के लंड की तरफ तीर्छि निगाहो से देखती हुई बोलती है -" शायद इतनी बड़ी नही हुई हू". उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी. बहुत सॉफ्ट वाय्स मे पंकज को ये मेसेज देना चाहती थी कि वो शायद तैयार नही पंकज का लंड लेने के लिए.

पंकज -" कुच्छ चीज़े ऐसी होती है खुद अपनी जगह बना लेती है". पंकज का हाथ अपने लंड पर पहुँच चुका था और उसका इशारा अपने लंड की तरफ ही था . आराधना खड़ी खड़ी तीर्छि निगाहो से ये सब देख रही थी

आराधना -" मुझे नही लगता कि जगह बनेगी. जगह बिगड़ने के ज़्यादा आसार लग रहे है". आराधना ने फिर से लो वाय्स मे पंकज को समझाना चाहा.

पंकज -" आराधना अगर तुम बुरा ना मानो तो क्या मे एक काम कर सकता हू?"

आराधना -" क्या?" आराधना बहुत घबराई हुई थी

पंकज -" मुझे पॅंट मे बहुत परेशानी हो रही है. क्या मे इसे उतार लू?"

आराधना की पीठ अभी अपनी डॅडी की तरफ थी. लेकिन जब उसने अपने डॅडी के मूँह से ये बाते सुनी तो बिना कुच्छ सोचे हुए ही आराधना के मूँह से " यस" निकल गया. फिर से उसकी आँखे बंद हो गयी थी. पंकज टाइम ना वेस्ट करते हुए अपनी पॅंट की ज़िप खोलता है और उपर से खोल कर उतार देता है. अब वो बस एक फ्रेंची मे था, एक डॅशिंग हॉट मॅन लग रहा था वो. आराधना फिर से तीर्छि निगाहो से देखती है और - " ऊऊऊऊऊओ". उसका मूँह आश्चर्य से खुला रहा जाता है क्यूंकी लंड का फ्रंट हिस्सा फ्रेंची से बाहर आ चुका था. वो इतना भयानक लग था जैसे किसी मिज़ाइल का फ्रंट हिस्सा हो. " क्या ये रियल है" वो अपने मन मे सोचती है.

" क्या....... क्या आप कपड़े भी सही साइज़ के नही पहनते है". आराधना ने शिकायत करते हुए कहा. उसका इशारा पंकज की फ्रेंची की तरफ था

पंकज -" आराधना, बहुत से मौको पर कोई भी साइज़ छोटा पड़ जाता है." ये बात बोल कर पंकज आराधना की तरफ कदम बढ़ाता है. आराधना की तो जैसे साँसे रुक जाती है. लेकिन हिम्मत करके वो अपनी जगह से हट जाती है और डोर के पास पहुँच कर खड़ी हो जाती है. अब पंकज के सामने आराधना नही मिरर था जिसमे वो खुद भी अपने विकराल लंड को देख सकता था.

पंकज अपनी नज़रे मिरर से हटा कर आराधना पे डालता है. जो कि उसके साइड मे ही खड़ी थी, पंकज की भी हालत खराब थी. उसके चेहरे पे लस्टी भाव अब क्लियर थे, आराधना की नज़रे भी लस्टी थी.

पंकज -" आराधना, अब तुम बच्ची नही हो सब समझती हो. प्लीज़ अब मेरा और इम्तिहान मत लो". पंकज ज़्यादा टाइम नही लगाना चाहता था और वैसे भी उसकी हालत बहुत खराब होती जा रही थी.

आराधना -" डॅड, ऐसी बाते ना करो प्लीज़.......". वो एक लंबी सी साँस लेती है.

पंकज आराधना की तरफ दोबारा बढ़ता है लेकिन आराधना बाथरूम के डोर की तरफ अपना फेस कर लेती है और अब उसकी पीठ पंकज की तरफ थी. पंकज ठीक उसके पीछे जाकर खड़ा हो जाता है और उसी कमर पे हाथ रखता है. -" आआहह......." एक बहुत बड़ी सिसकारी के साथ आराधना पंकज की तरफ घूम जाती है. अब पंकज उसके इतने करीब था की आराधना के बूब्स पंकज के सीने से टच हो रहे थे.
दोनो की नज़रे मिलती है और जैसे एक दूसरे के होंठो से लिपट जाते है. बाथरूम मे फिर से लव गेम स्टार्ट हो जाता है. आराधना भी अपनी पूरी जान लगा कर पंकज के होठ चूस रही थी. पंकज अपने हाथ को बढ़ा कर आराधना के बूब्स तक ले जाता है. और धीरे से दबा देता है. वाउ क्या फीलिंग थी दोनो के लिए, आराधना किस करने मे लगी हुई थी लेकिन अपने एक हाथ को ले जाकर पंकज का हाथ अपने बूब्स से हटा देती है.

पंकज फिर से अपना हाथ उसके बूब्स पे रख देता और इस बार फिर से आराधना उसके हाथो को हटा देती है. लेकिन फिर भी वो पंकज के होंठो को चूसने मे पूरी एनर्जी के साथ लगी हुई थी. पंकज फिर से एक बार ट्राइ करता है और अपना हाथ उसके बूब्स तक ले जाता है लेकिन सेम रिज़ल्ट.

पंकज अपना एक हाथ नीचे ले जाकर फ्रेंची नीचे कर देता है और इसका अहसास आराधना को नही होने देता. इस बार पंकज आराधना का हाथ पकड़ता है और सीधा अपने लंड पे रख देता है. आराधना तो जैसे बेहोश ही हो गयी, उसे लगा कि जैसे उसने अपना हाथ किसी जलती हुई रोड पे रखा दिया हो. वो फिर से अपना हाथ हटा लेती है और इस बार अपना कनेक्षन किस से भी तोड़ लेती है. और फिर से दूसरी तरफ घूम जाती है. सांसो की स्पीड बहुत तेज हो चुकी थी.

पंकज -" आराधना क्या हुआ?"

आराधना -" आपके साथ मे ये सब नही कर सकती". वो खुल के बोल ही गयी आख़िर

पंकज -" लेकिन हम ने क्या किया है आराधना. दो जवान बॉडी मिली और दोनो को ही प्यार की ज़रूरत थी सो हमारे बीच हो गया. तुम घबरा क्यू रही हो".

आराधना -" आप क्या चाहते है कि अपनी वर्जिनिटी मे आपके साथ खो दू. अपने शरीर को आपको सोन्प दू. जज़्बात मेरे अंदर भी है और मे भी चाहती हू कि अब मे.... लेकिन ये सब मे आपक्से साथ नही कर सकती".

पंकज -" किसने कहा कि तुम अपनी वर्जिनिटी खो दोगि. वी अरे हॅविंग फन ओन्ली. "

आराधना अब पंकज की तरफ घूम जाती है

आराधना -" आपका ये अपने अंडरवेर से बाहर आ गया है. मे भी काफ़ी आगे जा चुकी हू आपके साथ तो अब वर्जिनिटी खोने मे कितना टाइम लगेगा. क्या पता मे खुद ही सारा कंट्रोल खो दू इसीलिए प्लीज़ ये सही नही है." आराधना की नज़रे पंकज की लंड की तरफ थी.

पंकज -" इसे टच करना चाहोगी?".

आराधना -" मेरे सब्र का इम्तिहान मत लो. मे भी जवान हू लेकिन आप समझो.". पंकज ने अब आब देखा ना ताव आराधना का हाथ पकड़ा और उसे अपने लंड पे रख दिया.

आराधना -" आइ आम आ वर्जिन गर्ल. ये मॉन्स्टर है और मुझे इससे डर लग रहा है".

पंकज -" ये तेरी पुसी मे नही जाएगा. बस ऐसे ही थोड़ी शांति मिल जाएगी". अपने डॅड के मूँह से पुसी जैसे शब्द सुन कर आराधना शॉक्ड हो गयी लकिन वो समझ भी सकती थी कि वो अभी एग्ज़ाइटेड भी है तो ऐसी बाते मूँह से निकल रही है.

पंकज -" इस ब्यूटिफुल नाइटी मे तेरा बदन वैसे भी कुच्छ खास छुप नही पा रहा क्यूँ तू इसे अपने शरीर से अलग ही कर दे. जैसे मुझे आराम मिला है अपने कॉक के आज़ाद होने के बाद तो तुझे भी तेरे बूब्स आज़ाद होने से बहुत चैन मिलेगा".

आराधना -" आआअहह.... वैसे ही इतनी छोटी नाइटी है. इसे उतार कर मे रिस्क नही लेना चाहती."

बातो बातो मे पता भी नही चला कि कब आराधना पंकज के लंड को खिलाने मे बिज़ी हो गयी थी. सच तो ये था कि उसकी चूत इतना पानी छोड़ रही थी कि बॉटल भर जाए लेकिन वो शो नही कर रही थी.

" अब तू इतनी जवान हो चुकी है कि इसका टेस्ट चख सकती है" पंकज ने इशारा किया अपने लंड की तरफ.

" क्यूँ मोम से टेस्ट करा के मन नही भरा". आराधना ने नखरीले अंदाज़ मे कहा

" काश इस कॉक को तेरे जैसे ब्यूटिफुल और जवान लिप्स नसीब हो पायें". पंकज तो जैसे फ़ैसला कर चुका है था कि ऐसी बातो को बंद नही करेगा.

" आपको मैं कब से ब्यूटिफुल लगने लगी. आपको तो मोम और सिमरन ही अच्छी लगती है". आराधना ने पंकज के लंड को खिलाते खिलाते बोला

" बेटे अब मे तुझे कैसे बताऊ?". पंकज ने भी फिर से आराधना को पास खींचते हुए कहा. आराधना ने अपने हाथ पंकज के लंड से नही हटाए

" क्या मुझे और भी फ्रॅंक होना पड़ेगा. अब तो शायद आप हर बात शेर कर सकते है". आराधना ने पंकज की आँखो मे झाँकते हुए कहा

" बेटे सिमरन मे तो एक बात है. लेकिन तेरी मों के साथ अब वो बात नही है. मैं उसको फक करता हू लेकिन वो पहले वाला टेस्ट नही है". पंकज ने अब फक जैसे शब्द यूज़ करने शुरू कर दिए थे

" तो क्या आप सिमरन को भी.....". आराधना बीच मे रुक जाती है

" सिमरन को भी क्या?". पंकज ने उससे पुछा

" मेरा मतलब है कि क्या सिमरन और आपके बीच फिज़िकल रीलेशन बने है. क्यूंकी आप कह रहे है कि सिमरन मे एक बात है".

" अब तुझसे क्या छुपाना. सिमरन एक बार मुझे ब्लो जॉब दे चुकी है. लड़की स्टाइलिश है". पंकज ने कहा

" ओह...... तो वो मेरे डॅड को ब्लो जॉब दे रही थी और मुझे कुच्छ आइडिया भी नही था."

" सब अचानक हो गया था एक दिन. उसके बाद कभी चान्स ही नही मिला. बेटा नाराज़ मत होना लेकिन तुम भी ट्राइ करो ना" पंकज ने प्यार से कहा

आराधना -" क्या ट्राइ करना है"

पंकज -" ब्लो जॉब"

आराधना -" आपको इसे देख के समझ नही आता कि ये पासिबल नही है". आराधना का इशारा लंड की तरफ था. पंकज थोड़ा सा हॅपी भी था क्यूंकी आराधना का इशारा साइज़ की तरफ था. अगर यानी साइज़ इश्यू ना हो तो वो अग्री हो जाएगी.

फिर पंकज के माइंड मे एक अलग प्लान ने जनम लिया

पंकज -" लेकिन पता है कि सिमरन की एक चीज़ बहुत मस्त है?"

आराधना -" क्या????"

पंकज -" उसकी पुसी??"

आराधना -" ओह्ह्ह्ह, तो आप देख चुके है......."

पंकज -" नही उस दिन ही मेने भी उसके साथ ओरल सेक्स किया था तो देखी थी".

आराधना -" क्य्ाआआ...... आपने उसकी पुसी को..... "

पंकज -" क्या गजब की पुसी है उसकी बता नही सकता"

आराधना -" ऐसा क्या खास है उस सेकेंड हॅंड पुसी मे"

पंकज -" सेकेंड हॅंड? नही नही तुम्हे कुच्छ ग़लत फ़हमी हुई है. उसकी तो एक दम फ्रेश है".

आराधना -" लगता है आपको पता ही नही कि फ्रेश होती क्या है. आपने तो मोम और सिमरन की ही देखी है और मुझे तो पूरा यकीन है कि दोनो ही सेकेंड हॅंड है. " आराधना अब अपनी जेलासी अपनी मोम पे भी निकाल रही थी.
पंकज -" आराधना ज़रूर तुम्हे कुच्छ ग़लत फ़हमी हुई है. सिमरन जैसी पुसी तो किस्मत से दिखती है" पंकज अपने सारे हथियार यूज़ कर रहा था

आराधना -" मुझे तो पहले से ही शक था कि वो बिच आप पे कुच्छ ऐसा जादू करेगी कि थाउज़ंड टाइम सेकेंड हो चुकी पुसी भी फ्रेश लगने लगेगी". आराधना ने गुस्सा सा दिखाते हुए कहा.

पंकज -" तुम्हारा क्या मतलब है थाउज़ंड टाइम सेकेंड हॅंड हो चुकी पुसी से".

आराधना -" थाउज़ंड टाइम फक्ड पुसी. अब तो समझ आ गया होगा अगर नही आया तो इससे ज़्यादा मे समझा नही सकती".

पंकज - "सिमरन और फक्ड.... ज़रूर तुम्हे कुच्छ ग़लत डाउट्स है. वो फ्रेश है और मैं एक एक्सपीरियेन्स्ड मेन हू. मेने खुद देखा है उसकी ब्यूटिफुल पुसी को. ऐसी पुसी है जो वन्स इन आ लाइफ टाइम दिखती है.".

आराधना का पारा अब बहुत हाइ हो चुका था. उसने गुस्से मे अपने हाथ पंकज के लंड से हटा लिए. और फिर से दूसरी साइड घूम जाती है. "मेरी ही ग़लती है कि मेने उसे घर आने दिया. पता नही कौन सा मेक अप करती है अपनी पुसी का जो मेरे डॅड को मेरी बात का यकीन ही नही हो रहा. या फिर मेरे डॅड को पता ही नही है कि फ्रेश पुसी होती क्या है. वैसे भी आज तक आपने सिमरन और मोम की पुसी को देखा है और मुझे तो पूरा यकीन है कि दोनो ही सेकेंड हॅंड है". आराधना अपनी फ्रस्ट्रेशन को मिटाते हुए बोलती है.

पंकज -" बेटी ऐसा तो चलता ही रहता है. लड़कियो मे ये जेलस तो चलती ही रहती है, तभी तो सिमरन भी मुझे कह रही थी कि आराधना भी अब वर्जिन नही है.". पंकज अपना आख़िरी दाव खेल चुका था

आराधना के तो जैसे पाँव तले ज़मीन ही खिसक गयी. उसका चेहरा लाल पड़ गया गुस्से से. " अभी फोन मिलाती हू उस कुतिया को. उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरे डॅड को ये झूठ बोलने की. पूरा कॉलेज जानता है कि आइ आम स्टिल वर्जिन, लेकिन ये तो मेरी इज़्ज़त की धज्जिया उड़ाने मे लगी हुई है". आराधना गुस्से मे बाथरूम का गेट खोलने लगती है लेकिन पंकज उसका हाथ पकड़ लेता है.

पंकज -" क्या कहोगी उससे कि तूने मेरे डॅडी से ऐसी बात क्यू कही. पता है वो सबसे पहली बात ये बोलेगी कि तुझे किसने बोला. सोच क्या इज़्ज़त रह जाएगी तुम्हारी और मेरी." पंकज ने उसे समझाते हुए कहा

आराधना को ये बात समझ आती है तो वो थोड़ा शांत हो जाती है. लेकिन तभी पंकज के मूँह से जो शब्द निकलते है उनसे आराधना की गुस्से की सीमा टूट जाती है.

पंकज -" तुम रिलॅक्स रहो बेटा. किसी से लड़ने की ज़रूरत नही है. और मे सच कह रहा हू कि अगर तुमने किसी के साथ कुच्छ कर भी लिया है तो इसमे बुराई क्या है. ओल्ड टाइम ख़तम हो चुका है, आज कल शादी तक कौन वेट करता है. फिज़िकल नीड्स हर किसी की होती है, लेकिन प्लीज़ मुझे तो बता दो कि वो कौन खुश नसीब है जिसने तुम्हे चखा है". पंकज अपने एमोशनल टॉर्चर से आराधना को और एग्ज़ाइटेड कर चुका था.

आराधना ने ऐसा रिएक्ट किया जिसकी कभी पंकज ने उम्मीद भी नही की थी. वो गुस्से मे बाथटब की तरफ चलती है और वहाँ पहुँच कर अपने दोनो हाथ अपनी पैंटी पे ले जाती है और एक झटके मे उसे उतार देती है. उस छोटी सी और कोमल सी पैंटी को वो पंकज के चेहरे पर फेंक कर मारती है. पंकज ये सब बहुत मासूमियत के साथ देख रहा था, उसे अपना प्लान सक्सेस्फुल होता नज़र आ रहा था.

अब आराधना बिना पैंटी के थी. वो गुस्से मे पता नही क्या कर चुकी थी. वो बाथटब के एक कॉर्नर पे बैठती है और दोनो गोरी गोरी और स्लिम टाँगो को खोल देती है. अपनी आखे बंद करके और चेहरा साइड मे करके वो पंकज से कहती है-

आराधना -" आओ, देखो इसे. क्या आपको लगता है कि ये फक्ड है, सेकेंड हॅंड है. क्या आपको लगता है कि मेरा कोई बॉय फ्रेंड डेली मुझे कॉंडम लगा के फक करता है जैसे वो बिच खुद करती है. खड़े क्यू है, आइए देखिए. आपको तो एक्सपीरियेन्स है ना पहचान करने का कि कौन सी पुसी फ्रेश है और कौन सी नही". आराधना गुस्से मे सब बोल देती है.
आराधना की दोनो टाँगो के बीच, उसकी कोमल, मुलायम, कुँवारी, अनटच पुसी थी. मामूली से बाल भी थे उस पर, पंकज ये सब देख रहा था और उसे पूरा यकीन था कि उसने कभी ऐसी टाइट पुसी नही देखी है. अपनी लेग फैलाए हुए आराधना सूपर सेक्सी लग रही थी.

पंकज थोड़ा सा बढ़ता है और आराधना की पुसी के करीब आकर रुक जाता है. आराधना की आँखे बंद थी लेकिन वो फील कर सकती थी कि पंकज उसकी तरफ बढ़ रहा है. पंकज थोड़ा सा आगे बढ़ता है और अपना हाथ उसकी फुल टाइट पुसी पे रख देता है.

"आाऐययईईईईईईईईई.......... ये क्या कर रहे है..........." आराधना ने आँखे बंद रखते हुए ही कहा

" फील कर रहा हू, लेकिन दिखने मे तो सब पुसी एक जैसी होती है. मुझे इसकी गहराई और चौड़ाई नापनी पड़ेगी". ये बात बोलते ही पंकज अपनी एक उंगली उसकी चूत मे घुसा देता है. फुचह...... उसकी चूत पूरी तरीके से भीगी हुई थी, पंकज एक मजबूत इंसान था और उसकी फिंगर भी मोटी थी. आराधना की चूत पे ये पहला मर्दाना टच था, वो तो जैसे पागल हो गयी लेकिन अपने आप को कंट्रोल किए हुई थी.

" आआईयईईई.......ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ज..... डॅड..... क्या कर रहे है....... मुझे पेन हो रहा है". आराधना ने आँख बंद करते हुए शिकायत करी

" एक फिंगर से ही तुम्हारी ये हालत है तो शादी कैसे करोगी. हज़्बेंड बहुत डेंजर होते है, हर पोज़िशन और हर जगह मंथन करते है वो अपनी वाइफ के साथ... वैसे मान गया कि तुम्हारी पुसी बहुत टाइट और फ्रेश है".

" तो....... प्लीज़ अब बाहर निकाल....... लीजिए...... इसे...... आअहह"

पंकज इस मौके को खोना नही चाहता था. उसने आराधना की दोनो टाँगो को कस कर पकड़ा और अपने मूँह को उसकी पुसी वाली जगह पर लगा दिया. उसने आराधना की पुसी को ऐसे मूँह मे भर लिया जैसे उसे खा जाएगा.

" दद्द्द्डदयययययी....... आआईयईईईईईईई.............. आआहह..... ये..... क्या कर...... रहे है. मुझे छोड़ दीजिए........ ओह......" आराधना का चेहरा जैसे उत्तेजना से भर गया था. लेकिन पंकज नही हटा और उसकी चूत को चाटने लगा ही रहा. बीच बीच मे अपना मूँह हटा कर वो अपनी एक फिंगर को अंदर फक घुसा देता था और फिर बुरी तरीके से उसकी चूत का मंथन करता था.

" आआआआ........ प्लीज़.......... औहह........". आराधना तो जैसे धरती पे थी ही नही.

पंकज उसकी चूत को दीवानो की तरह चाट रहा था. साथ ही पंकज खुद भी बहुत एग्ज़ाइटेड हो रहा था. वो किसी भी चीज़ मे टाइम वेस्ट नही करना चाहता था तो एक हाथ से अपने मोटे लंड को खुद भी हिलाने लगता है. आराधना की चूत मे बेहद ज़्यादा कम्पन्न्न्न्न आने लगी थी. पंकज अपनी जीभ को ऐसे हीला रहा था उसकी चूत मे जैसे कोई बच्चा अपनी मा का दूध पीता है.

" प्लीज़....... स्टॉप इट..... मर जाउन्गि......... आअहह........ डर्टी मॅन प्लीज़ स्टॉप........." आराधना की चूत से पानी की नादिया बह रही थी. वो सूख की चरम सीमा पे थी और पंकज भी अपने लंड को खुद ही हिलाने मे लगा हुआ था.

आराधना का एक हाथ ऑटोमॅटिकली अब अपने लेफ्ट बूब्स पर पहुँच गया था. वो धीरे धीरे उसे दबाने लगती है. पंकज को पता चल चुका था कि वो पूरी गरमा चुकी है. पंकज भी अपने लंड को हिलाने मे और उसकी चूत को चाटने मे बिल्कुल पीछे नही हट रहा था. ना जाने क्या हुआ कि आराधना अपना एक हाथ बढ़ाकर पंकज का एक हाथ पकड़ लेती है और सीधा ले जाकर अपने बूब्स पे रख देती है. पंकज ने तो जैसे पता नही क्या सोच रखा था और तुरंत ही हाथ उसके बूब्स से हटा लेता है. आराधना की बॉडी मे तो जैसे आग लगी हुई थी और वो फिर पंकज का हाथ पकड़ती है और फिर से अपने बूब्स पे रखती है लेकिन सेम रिज़ल्ट.

उसकी आँखे अभी भी बंद थी. " लव....... मी..... डॅड प्लीज़......... आहह........ आाऐययईईईईईईईईईईई....... यू ........... आर वेरी ....... सेक्सी ............ आअहह......... उंह................". आराधना ने खुद भी अपना हाथ अपनी चूत पे पहुँचा दिया और खुद भी अपने भंगूर को हिलाने लगी. वो जितनी टांगे खोल सकती थी उतनी उसने खोल ली थी. लेकिन वो जितनी एग्ज़ाइटेड थी कि बताया नही जा सकता. पंकज खूद भी बहुत एग्ज़ाइटेड हो चुका था. और तेज़ी से अपने मोटे लंड को हिला रहा था.

" मे......... आअहह............ दड्दयययययययी........ फकक्क्क्क्क्क्क्क...... मी....................... आअहह. आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.... आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..... आहह ..... आ.... आअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ..... आअह ....." और आराधना को अपना स्वर्ग प्राप्त हो जाता है. उसकी टांगे कांप रही थी. पंकज अपने लंड को तेज़ी से हिलाने मे लगा हुआ और तभी... पिच्छ... पिच... पिचह.... पिचह. 5 शॉट्स मे सारा वीर्य आराधना के चेहरे पे गिर जाता है. लेकिन आराधना तो जैसे होश मे ही नही थी.

आराधना की साँसे तेज चल रही थी. लेकिन धीरे धीरे वो नॉर्मल हो रही थी. अब उसने अपनी आँखे खोली और पंकज के चेहरे की तरफ देखा और एक प्यारी सी स्माइल दी. पंकज अपनी फ्रेंची और पॅंट उपर कर चुका था.

आराधना उसकी तरफ सवालिया निगाहो से देखती है लेकिन कुच्छ बोलती नही. पंकज अपनी पॅंट को बाँध लेता है और अपने हॅंड वॉश करता है. हॅंड वॉश करके वो बाथरूम के गेट को खोलने लगता है. आराधना उसके एक हाथ को पकड़ती है लेकिन वो छुड़ा लेता है और बाथरूम के बाहर आ जाता है. आराधना बिना पैंटी के ही भाग कर बाहर आती है, जब तक पंकज मेन गेट तक पहुँच गया था. वो मूड कर आराधना की तरफ देखता है. आराधना बिना पैंटी के बिल्कुल शरमा नही रही थी और उसे एक सेक्सी स्माइल देती है. लेकिन पंकज गेट खोलता है और बाहर.

दोनो के दिलो मे हज़ारो सवाल के साथ ये रात कट जाती है. आराधना को समझ नही आ रहा था कि क्या कोई मर्द इतना भी शरीफ हो सकता है कि बस इतना ही करके छोड़ देता है. लेकिन आराधना को मर्दाना टच मिल चुका था.

नेक्स्ट मॉर्निंग - स्मृति सफाई कर रही है और उपर आराधना कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी. उसके फेस पे एक शानदार ग्लो थी, पूरे मन के साथ वो कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी. पंकज भी उठ कर हॉल मे आ जाता है और न्यूसपेपर पढ़ने लगता है.

आराधना नीचे उतर कर आने लगती है. उसने आज फिटिंग का येल्लो सूट आंड चुस्त पाजामी पहनी हुई थी उसे नीचे आता हुआ देख पंकज देखता है और आराधना उसे फिर से एक स्माइल के साथ इशारे मे गुड मॉर्निंग बोलती है. पंकज अपना चेहरा न्यूसपेपर की तरफ कर लेता है. आराधना को उसका ये बिहेवियर बड़ा अजीब लगा.

" बेटी ब्रेकफास्ट कर ले". स्मृति आराधना से कहती है.

" मुझे भूख नही है". आराधना गुस्से मे बोलती है. और मैन डोर की तरफ बढ़ने लगती है. वो एक दम से पीछे मूड कर देखती है तो पंकज की निगाहे उसके हिप्स पर ही थी. आराधना फिर से एक स्माइल दे कर बाहर जाते हुए बोलती है -" मोम, आज मे जल्दी आ जाउन्गि कॉलेज से". ये बोलते हुए उसकी निगाहे पंकज की तरफ ही थी. और आराधना कॉलेज चली जाती है

स्मृति सफाई करके अपने बेडरूम मे जाती है और नहाने की तैयारी करती है. जब वो वॉर्डरोब से कपड़े निकाल रही थी तो वैसे ही उसको फ़ेसबुक मसेज की टोन आती है. वो मेसेज चेक करती है तो ये उस लाइयन का ही था

लाइयन - सेक्सी, यू देअर?

स्मृति - मेरे पास टाइम नही है, नहाने जा रही हू. जल्दी बको क्या बकना है.
लाइयन- क्या बात है मेडम बहुत गुस्से मे लग रही है?

स्मृति - तुमसे मतलब. जल्दी बोलो क्या बात है?

लाइयन - स्मृति जी. अब तो हमे चॅट करते हुए इतने दिन हो गये हैं लेकिन फिर भी आप हम से ऐसे बात करती है जैसे हम कोई अंजान है.

स्मृति - है तो अंजान ही. फ़ेसबुक प्रोफाइल भी ऐसा है जो फेक ही लगता है. मुझे क्या पता कि तुम कौन हो.

लाइयन- एक शरीफ लड़का हू.

स्मृति - वाह वाह!! शरीफ और तुम? भूल गये पार्टी मे अपनी भाभी वाली बात. शरीफ लोग ऐसा काम करते है?

लाइयन - स्मृति जी शरीफ हू इसीलिए तो उस भाभी का भला कर दिया. नही तो मुझे क्या शौक है समाज सेवा का.

स्मृति - बड़े आए समाज सेवा वाले. उस दिन चॅट के बीच से कहाँ गायब हो गये थे? यू आर आ फ्रॉड रियली. मेरे बारे मे सब जानते हो लेकिन अपने बारे मे कभी कोई हिंट नही देते.

लाइयन - पता है आपसे चॅट करने के लिए कितने पापड बेलता हू और आप है कि मुझे ही फ्रॉड कह रही है. क्या मैं कभी आप जान के कहीं जा सकता हू, उस दिन मेरी बॅटरी ख़तम हो गयी थी.

स्मृति - बहुत लो पॉवर है तुम्हारी बॅटरी मे.

स्मृति अक्सर ऐसी बाते करती नही है लेकिन आज थोड़े फन्नी मूड मे थी तो उसने ये टाइप कर दिया.

लाइयन - मेरी बॅटरी की पॉवर देखना चाहोगी?

स्मृति - मुझे कोई शौक नही है. मेरी खुद की बॅटरी भी बहुत स्ट्रॉंग है.

स्मृति उसकी डबल मीनिंग बातो को समझ रही थी.

लाइयन - आज कल तो सब दो दो बॅटरी रखते है, खास कर लॅडीस तो आप क्यू नही ट्राइ करती.

स्मृति - ज़रूरत नही है मुझे.

लाइयन - लो वोल्टेज रिक्वाइर्मेंट है तुम्हारी, तभी तो एक बॅटरी से ही काम चला लेती हो. मेरी जानकारी मे तो ऐसी ऐसी लॅडीस है जो होल नाइट मुझसे बॅटरी चार्ज करती है.

स्मृति - और तुम कर देते हो?

लाइयन - समाज सेवक हू ना. आप कहें तो आपकी बॅटरी भी फुल चार्ज कर दू. सच बोल रहा हू कि आपको ज़रूरत है.

स्मृति - किस की?

लाइयन - एक बड़े चारजर की जो आपकी मे फिट आ सके.

स्मृति - मुझे ज़रूरत नही है.

लाइयन - तो ऐसे ही स्केरी हाउस मे अपनी गान्ड रगड़ रही थी आप उसके लंड को हाथ मे लेकर.

स्मृति को ऐसे लगा जैसे कहीं बॉम्ब ब्लास्ट हो गया हो. उसके हाथ से मोबाइल छूट जाता है और वो अपने बेड पे ऐसे बैठ जाती है जैसे उसमे जान ही ना हो. एसी रूम मे उसे पसीने आने को हो जाता है. माइंड काम करना बंद कर देता है. उसके दिमाग़ मे बहुत सारे सवालो ने जनम ले लिया था जैसी कि -

1. इसको कैसे पता चला कि स्केरी हाउस मे क्या हुआ?

2. कहीं ये ही तो नही था वो जिसने मेरे साथ वो हरकत करी.

3. अगर ये मुझे जानता है तो कहीं हमारे घर मे ये किसी और को तो नही जानता.

4. कुशल भी स्केरी हाउस मे ही था. कहीं कुशल को इस लाइयन ने कुच्छ बता तो नही दिया.

5. अगर वो ये ही था तो ये कुच्छ बोला क्यू नही. क्या इसका टारगेट बस मास्टरबेशन करना था?
 
आराधना के पास से गुज़रता हुआ पंकज सीधा रूम मे जाता है. आराधना गेट पे ही खड़ी ही थी, उसके नेचर मे सिमरन और प्रीति ने एक आग डाल दी थी तभी तो उसमे इतनी हिम्मत आ चुकी थी कि आज वो अपने डॅडी के सामने मिडनाइट मे सेक्सी, ट्रॅन्स्परेंट, और सेमी न्यूड नाइट सूट मे थी.

पंकज बिना आराधना की ओर देखते हुए अंदर जाने लगता है. आराधना की निगाहे सिर्फ़ पंकज पे ही टिकी हुई थी, दूसरी तरफ आराधना की बॉडी से भीनी भीनी खुसबु भी पंकज को अच्छी तरीके से पागल कर रही थी.

अब पंकज रूम मे आ चुका है. पता नही क्यू वो आराधना से नज़रे नही मिला पा रहा था और रूम मे चारो तरफ देख रहा था. दोनो चुप थे और रूम मे सन्नाटा था. धीरे धीरे चल कर आराधना भी रूम मे अंदर आ जाती है.

" आज बताती हू कि लड़की क्या चीज़ होती है". आराधना ने सिमरन की बात को याद करते हुए मन मे सोचा. पंकज बेड पे बैठ जाता है और अपनी बियर की एक सिप लेता है, उसकी निगाहे बस आराधना पे है अब. आराधना वॉर्डरोब से एक नेल पैंट की शीशी निकालती है, एक चेअर् लेकर पंकज से बस 2 हाथ की दूरी पर बैठ जाती है. पंकज के हाथो मे जैसे कंपन हो रही थी लेकिन वो कुच्छ बोल नही रहा था. कुर्सी पे बैठते ही आराधना वो करती है जिसका आइडिया पंकज को भी नही था, कुर्सी पे बैठते ही आराधना नेल पैंट अपने पाँव की फिंगर्स पे लगाने के लिए झुक जाती है. ओह माइ गॉड..... खुद आराधना भी नही जानती थी कि ये सीन किसी भी इंसान की भावनाओ को किस हद तक भड़का सकता है. उसके सेक्सी बूब्स नाइट सूट से ऐसे बाहर आ जाने तैयार हो गये थे, वैसे भी नाइटी उसने खुद ही उसने बेहद टाइट ली थी. वो इस तरीके से झुकी तो पंकज क्या किसी भी इंसान का ध्यान पहले बॉडी और बाद मे रिश्तो पे जाएगा. पंकज खो चुका था.

आराधना -" मोम सो गयी क्या"? आराधना ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा लेकिन पंकज का माइंड वहाँ नही कहीं और ही घूम रहा था. दूसरी तरफ से रिप्लाइ ना मिलने पे आराधना ने नज़रे उठा कर देखा तो पंकज एक टक उसके बूब्स को ही देखे जा रहा था. ये देख कर आराधना की थोड़ी सी हँसी छूट गयी और वो सीधा होते हुए पंकज की आँखो के सामने चुटकी बजाती है और दोबारा पूछती है

" मोम सो गयी क्या?" आराधना ने दोबारा पुछा

पंकज -" क्या..... क... ओह्ह्ह्ह मोम..... वो तो सो गयी" पंकज हड़बड़ा गया था

आराधना -" तो आपको नींद नही आ रही क्या". आराधना दोबारा उसी सिचुयेशन मे आ जाती है जिसमे पहले थी और दोबारा नेल पैंट लगाना शुरू कर देती है.

पंकज -" नही वो बेटी नींद नही आ रही थी तो सोचा कि उपर घूम आउ?"

आराधना -" आपने अच्छा किया, वैसे मे भी बोर हो रही थी". आराधना ने फिर ने थोड़ी सी नज़रे उपर करी तो देखा कि पंकज की निगाहे अभी भी उसके बूब्स पे ही थी

पंकज -" कभी तुम भी नीचे घूमने आ जाया करो. क्या हमेशा उपर रहती हो या घर से बाहर कॉलेज चली जाती हो". पंकज ने शिकायत करते हुए कहा

आराधना -" रहने दो डॅड, मैं आपकी पर्सनल लाइफ मे प्राब्लम नही देना चाहती. क्या पता आप हसबैंड वाइफ......"

पंकज -" ओह्ह कम ऑन आराधना. अब तुम एक अडल्ट हो, उस दिन का अहसास मुझे भी है लेकिन मे आशा करता हू कि तुम समझ सकती हो."

आराधना -" किस दिन की बाते कर रहे है है आप?" आराधना ने अंजान बनते हुए कहा

पंकज -" तुम्हे सब पता है कि मैं किस दिन की बात कर रहा हू".

आराधना -" नही डॅडी मुझे नही पता".

पंकज -" वो ही दिन जब तुम्हारी मोम और मैं..... तुम्हे अब पता तो है". पंकज बीच मे ही बात को छोड़ते हुए बोला.

आराधना -" ओह्ह वो दिन....... सब सही है डॅडी लेकिन एक बात बोलू?"

पंकज -" हाँ बेटे बोलो ना. वैसे तुम एक समझदार और बड़ी लड़की हो, जो भी कहोगी सही ही कहोगी".

आराधना -" डॅड, क्या आप लोग गेट बंद नही कर सकते थे. अगर थोड़ा बहुत होता तो चलता लेकिन आप लोग तो....." आराधना ने बीच मे ही बात छोड़ते हुए कहा

पंकज -" थोड़ा बहुत से क्या मतलब है तुम्हारा?"

आराधना -" डॅडी अब कैसे बताऊ. आप समझदार है"

पंकज -" नही मुझे बताओ ना. हो सकता है कि तुम कुच्छ ही चीज़ सिखा दो".

आराधना -" तो मैं आपकी बताती हू डॅडी. अगर आप लोग किस कर रहे होते तो बात भी थी कि गेट खुला रह गया लेकिन मोम तो आपके वहाँ........" आराधना बीच मे चुप हो गयी

पंकज -" वहाँ क्या". पंकज ने स्लो वाय्स मे कहा

आराधना -" आपको पता है कि मैं क्या कहना चाहती हू". आराधना की आवाज़ मे कंपन्न थी

पंकज -" मुझे नही पता कि तुमने क्या देखा. मेरा ध्यान तो कहीं और था. तो मुझे बताओ ना कि क्या हो गया था" पंकज ने अंजान बनते हुए कहा

आराधना -" गेट खोल कर आपको मोम को अलाव नही करना चाहिए था कि वो वहाँ किस करे.". आराधना की हालत बेहद खराब होती जा रही थी, आवाज़ काँपने लगी थी, टिट्स खड़े होने लगे थे आख़िर उसने ऐसी बाते कभी किसी से नही की थी.

पंकज -" बेटा सब अचानक हो गया. नही तो गेट तो डेली बंद रहता है".

आराधना -" तो डेली मोम से मेहनत कराते हो." आराधना ने थोड़ा हंसते हुए कहा

पंकज -" वो... नही. गेट डेली बंद होता है लेकिन हम डेली ऐसा नही करते." आराधना के उस एरॉटिक रूप और बियर का नशा धीरे धीरे पंकज पे चढ़ने लगा था और उसका लंड आकार लेने लगा था.

आराधना -" क्यूँ डेली मोम सुंदर नही लगती क्या आपको?". आराधना ने बहुत नशीले अंदाज मे पंकज की तरफ देखते हुए कहा

पंकज -" तुम्हारी मोम बिल्कुल ऐसी थी जैसी तुम आज हो अपनी जवानी मे". ये बात बोलते हुए पंकज की निगाहे बस आराधना के गोरे गोरे बूब्स पे हो थी

आराधना -" हप!! यू आर सो नॉटी.". आराधना ने भी शरमाते हुए कहा
पंकज को भी समझ नही आ रहा था कि ऐसा क्यूँ हो रहा है लेकिन उसका लंड अब बुरी तरीके से अकड़ चुका था. उसकी पॅंट मे तंबू बन चुका था लेकिन अभी तक आराधना की निगाहे वहाँ नही पड़ी थी क्यूंकी वो नीचे झुक कर नेल पैंट लगाने मे लगी हुई थी. पंकज को समझ नही आ रहा था कि वो क्या करे और वो बड़ी ही अनकंफर्टबल सिचुयेशन मे था लेकिन ज़्यादा हिल भी नही सकता था नही तो आराधना को शक होने का चान्स था.

आराधना आज सारे गजब ढाने मे लगी हुई थी. नेल पैंट लगाने के बाद वो चेर से खड़ी होती है और वॉर्डरोब की तरफ जाती है नेल पैंट को रखने के लिए. पहले आराधना ने आइ लेवेल से उठाया था नेल पैंट को लेकिन इस बार उसने फ़ैसला किया कि वॉर्डरोब मे नीचे रखेगी. इसके लिए वो नीचे झुकती है. उफफफ्फ़...., और कितना ज़ुल्म होना था पंकज पे. अब उसकी छोटी सी पैंटी मे गान्ड विज़िबल थी पंकज की तरफ, वो एक टक देखा ही जा रहा था और करता भी ऐसी सिचुयेशन मे. पैंटी भी ज़्यादा हार्ड मेटीरियल की नही थी तो अंदर का हिस्सा भी थोड़ा थोड़ा विज़िबल हो रहा था. पंकज अपने जज़्बातो को कंट्रोल मे किए हुए था लेकिन अब उसका लंड ऐसी हालत मे आ चुका था जहाँ उसका पानी बिना कुच्छ किए निकल सकता था. लेकिन पंकज को अपनी इज़्ज़त प्यारी थी, जैसे आराधना का चेहरा दूसरी तरफ था पंकज ने अपने लंड को अड्जस्ट करने का फ़ैसला किया जिससे कि अगर वो रूम से बाहर जाए तो कुच्छ भी आराधना को दिखाई ना दे. लेकिन जैसे ही उसने अपनी पॅंट के उपर से अपने लंड पे हाथ लगाया उसके मूँह से एक आआहह निकल गयी.

आराधना -" डॅडी क्या हुआ?". आराधना सीधा खड़े होते हुए अपने डॅड से बोलती है. पंकज अपना हाथ एक झटके मे हटा लेता है. लेकिन अब आराधना की निगाहे सीधी उसके लंड पे जाती है. वो ऐसे खड़ा हुआ था कि अंदर कुच्छ छुपा रखा हो, बेहद सख़्त और बेहद ही स्ट्रॉंग. आराधना तो क्या कोई बच्चा भी देख कर आइडिया लगा लेता कि पंकज की क्या हालत है. आराधना एक जवान लड़की थी, मिड नाइट मे उसके कमरे मे एक मर्द और उसका लंड अगर इस सिचुयेशन मे होगा तो कोई भी जवान लड़की पागल हो सकती है. जैसे ही आराधना की निगाहे उस लंड की उठी हुई जगह पर पड़ी उसकी तो जैसे साँसे ही रुक गयी. उसका सीना उपर नीचे होने लगा, पाँव जैसे काँपने लगे. दोनो मे से किसी को कुच्छ समझ नही आ रहा था कि क्या बोले - आराधना की निगाहे उसके लंड वाली जगह पर और पंकज की निगाहे आराधना के चेहरे पर टिकी हुई थी.

इस चुप्पी तो को पंकज तोड़ता है.

" वो अरू, तुम्हारा वॉशरूम यूज़ करना है. ज़रा हाथ गंदे है वो धो लेता हू" पंकज ने आराधना से कहा

ऑफ... कॉर्स डॅड" आराधना उसे बाथरूम डोर की तरफ इशारा करते हुए कहती है. अब पंकज खड़ा होता है तो सारी पोल खुल जाती है. पता नही कैसे अभी तक ज़िप बंद थी लेकिन करीबन 6 इंच बाहर निकला हुआ था पॅंट का हिस्सा बाहर की तरफ. इस बार आराधना के हाथ अपनी मूँह पे पहुँच जाते है आश्चर्य मे.

पंकज -" क्या हुआ अरू?". पंकज आराधना से पुछ्ता है

आराधना अपना मूँह दूसरी तरफ फिरा लेती है और कहती है -

आराधना -" वो.... डॅडी..... डॅडी... वो... वो...."

पंकज -" बोलो ना बेटा क्या बात है"

आराधना -" वो... डॅडी आपके इसको..... क्या.... क्या हुआ है......".

पंकज-" अरू मजबूर हू, मर्द हू ना. आशा करूँगा कि तुम माइंड नही करोगी". पंकज जैसे थोड़ा शर्मिंदा हो रहा था

आराधना -" इट ईज़ ओके डॅड. मे कोई ईडियट नही हू और समझ सकती हू. लेकिन ये ... ये ...."

पंकज -" बोल ना अरू"

आराधना -" वो वो डॅड... ये तो कुच्छ ज़्यादा ही बड़ा है...... नही?" आराधना एक झटके मे बोल गयी.

पंकज -"शादी के बाद तुम्हारी मोम बहुत परेशान रही लेकिन धीरे धीरे उसके सारे रास्तों को मेने इस ट्रक की आदत डाल दी".

आराधना की हँसी छूट गयी ये बात सुनकर. " आप को बियर चढ़ गयी है, आप प्लीज़ बाथरूम मे जाइए". आराधना पंकज को धक्का देते हुए बाथरूम मे भेजती है लेकिन पंकज एक झटके से छूट जाता है और आराधना के दोनो बूब्स पंकज की पीठ से टकरा जाते है और फिर से एक चुप्पी छा जाती है.

पंकज बिना कुच्छ बोले बाथरूम मे चला जाता है. बाथरूम मे घुसते ही वो अपनी पॅंट खोलता है और अपने लंड को बाहर निकालता है. "ओह". पंकज को जैसे अब आराम मिला है काफ़ी देर के बाद. पंकज पेशाब करने लगता है. इधर आराधना को अपना लीप ग्लॉस लगाना था जो वो शॉपिंग करके लाई थी लेकिन वो भी बाथरूम मे ही था.

लेकिन पंकज तो जैसे बाथरूम से निकलने का नाम ही नही ले रहा था. पेशाब करने के बाद वो अपने हाथो को भी धोने लगा.

" डॅडी क्या टाइम लगेगा" आराधना बहुत ही स्लो वाय्स मे बाथरूम के बाहर से पूछती है

पंकज -" हाँ थोड़ा और लगेगा, क्यू?"

आराधना -" मेने एक लिप ग्लॉस खरीदा था वो अंदर ही रख दिया है मेने"

पंकज -" तो बाथरूम का डोर खुला है, तुम आ सकती हो"

आराधना -" शुवर?? आप क्या कर रहे है?"

पंकज -" जो तुम सोच रही हो वो मे कर चुका हू, तुम अंदर आ जाओ".

आराधना गेट खोल कर बाथरूम के अंदर चली जाती है. बाथरूम मे लो लाइट थी लेकिन आराधना का गोरा बदन सॉफ चमक रहा था. पंकज बाथ टब पे बैठ कर अपने हाथ पावं धो रहा था.
आराधना बहुत स्लो स्पीड मे अपना लिप ग्लॉस उठाती है और मिरर मे देख कर उसे लगाने लगती है. पंकज उसे मिरर मे देख रहा था.

पंकज -" ऐसा क्या खास है इस लिप ग्लॉस मे?"

आराधना -" ये फ्लवॉरड है - स्ट्रॉबेरी". आराधना ने लो वाय्स मे फिर से कहा

पंकज - " ऐसे भी लिप ग्लॉस आते है क्या. मे नही मानता?". पंकज ऐसे ही मज़े ले रहा था लेकिन उसके लंड ने फिर से हलचल शुरू कर दी थी क्यूंकी लो लाइट मे आराधना का दूधिया बदन सॉफ चमक रहा था

आराधना -" नही डॅड , सच मे. ये स्ट्रॉबेरी फ्लेवर है और एक्सपेन्सिव भी है". आराधना उसे अपने लिप्स पे लगाने मे लगी हुई थी

पंकज -" तुम्हारी तो हर चीज़ ही एक्सपेन्सिव है. फ्लवॉरड लिप ग्लॉस? चलो आज ये भी सुन लिया"

आराधना -" आप तो यकीन नही करोगे". आराधना अब लिप ग्लॉस लगा कर घूम चुकी थी. उसके होंठो मे एक अलग शाइनिंग थी. खुले बाल, चमकता बदन और उसके बाद उसने लिप्स भी और जुवैसी कर लिए.

पंकज -" नही मुझे तो यकीन नही है".

आराधना -" तो यहाँ मेरे पास आइए". बहुत ही सेक्सी वाय्स मे आराधना ने पंकज से कहा. पंकज अपनी जगह से खड़ा हुआ और आराधना की तरफ चल दिया. उसका लंड अभी भी तंबू बने ही खड़ा हुआ था और आराधना सॉफ देख रही थी. वो आराधना के बहुत करीब जाकर खड़ा हो जाता है.

पंकज -" यस" पंकज आराधना जी आँखो मे झाँकते हुए बोलता है. वो आराधना के इतने करीब था कि उसका खड़ा लंड आराधना की थाइस को टच करने लगा था.

आराधना पंकज के एक हाथ हो पकड़ कर अपने लिप्स तक लाती है और उसकी एक उंगली पकड़ कर अपने लिप्स लगाती है. दोनो की आँखे एक दूसरे को ही देख रही है. पंकज अपनी एक फिंगर को अच्छी तरीके से आराधना के लिप्स पे घुमाता है. आराधना की आँखे बंद हो गयी थी इस मर्दाने टच से.

पंकज अब उंगली को हटा कर अपने मूँह मे ले जाता है. और ऐसे रिक्ट करता है जैसे कुच्छ सोच रहा है फिर आराधना से बोलता है

पंकज -" स्ट्रॉबेरी जैसा तो कुच्छ लगा नही".

आराधना अपना चेहरा पंकज के बहुत करीब ले जाती है. दोनो के लिप्स के बीच की दूरी बस अब सेनटी मीटर्स मे रह गयी थी.

" आप खुद ही चेक कर लीजिए कि स्ट्रॉबेरी है या नही" बहुत ही सॉफ्ट वाय्स मे आराधना पंकज से बोलती है. ये बोलते बोलते आराधना ने अपनी आँखे बंद कर ली थी,

पंकज ने अपने लिप्स अब आराधना के लिप्स पर रख दिए. उफफफफफफ्फ़.......

अर्र्र्रररीईईईईई ये क्या कर दिया भाई मुझे तो लगता है मामला कुछ और जाने वाला है दोस्तो आपको नही लगता क्या...........
 
उसके हाथ में अभी भी उस इंसान का वीर्य भरा हुआ था ,वह अपना हाथ छुपाकर वॉशरूम में आ गई और वॉश बेसिन में जाकर धोने लगी ,जैसे जैसे वह वीर्य उसके हाथ से हट रहा था ,स्मृति को भी टेंशन से आजादी मिल रही थी, स्मृति अपने हाथ को धोकर जैसे ही नैपकिन लेने के लिए पलटी उसकी नजरें आराधना से मिल गई जोकि उसी वॉशरूम में आई हुई थी

स्मृति - "अरे आराधना तुम यहां "
आराधना - "मैं यहां नहीं तो क्या जेंट्स वॉशरूम में जाऊं क्या "
स्मृति- " अरे मेरा मतलब था कि बाकी सब कहां है" स्मृति ने नॉर्मल होते हुए कहा
आराधना - "फ़ूड कोर्ट में सब तुम दोनों का वेट कर रहे हैं, मुझे लगा कि तुमने ज्यादा टाइम लगा देना है इसलिए मैं यहां आ गई"
स्मृति - "ठीक है तो तू चल मैं बस हाथ धोकर आती हूं "
आराधना - "पर आपने यह हाथ पर क्या लगा लिया था" आराधना ने उसे हाथ धोते हुए देखे लिया था

स्मृति - "वह ...वह... कुशल ने कोई गम चिपका दी थी" स्मृति में घबराहट में और कोई बात नहीं निकली
आराधना - "चलिए तो साथ ही चलते हैं ,आप हाथ पोंछ ले मैं बाहर इंतजार करती हूं "

स्मृति ने अपना फेस वाश किया और आराधना के साथ वॉश रुम से बाहर आ गई, वो अभी वाशरूम से थोड़ी ही दूर चले थे कि दूर से कुशल आता हुआ दिखाई दिया
कुशल - "अरे मा आप कहां रह गई थी" यह कहकर कुशल अपनी मॉम से जा लिपटा

स्मृति - " बेटे मैं तो तुझे ढूंढ रही थी लेकिन तू कहीं दिखाई ही नहीं दिया" स्मृति ने नॉर्मल सा जवाब दिया

"और तु मोम को परेशान क्यों करता है गम वगरह लगा कर" आराधना कुशल को डांटते हुए बोली
"अब छोड़ भी पहले खाना खा लेते हैं फिर बात करना" इससे पहले कि कुशल कुछ समझ पाता स्मृति ने बात को डालते हुए उसे जवाब दे दिया
आराधना भी कोई बच्ची नहीं थी ,वो समझ गई की दाल में जरुर कुछ काला है,
" कहीं मोम किसी और के साथ तो ......"आराधना के दिल में ख्याल आ रहे थे ,खैर वो फ़ूड कोर्ट पहुंचे और खाना खाया

सभी लोग थक चुके थे तो घर के लिए रवाना हुए, थोड़ी देर में वो सभी घर पहुंच गए ,सब थक चुके थे, वो सभी अपने अपने रुम में चले गए ,आराधना को जैसे सर दर्द हो रहा था क्योंकि उसे तो यही लगने लगा था कि मोम कुछ गलत कर के आ रही है,

आराधना अपने रूम में पहुंची और गेट को लॉक किया, सारा सामान बेड पर फेंक कर आराधना वॉशरूम में घुस गई क्योंकि उसका शावर लेने का दिल था ,वो शुरू में घुसने के बाद उसने अपना फेस वाश किया और तोलिया लेने के लिए बाहर जाने लगी कि तभी उसकी नजरें बाथरूम के कोने में रखें डस्टबिन पर पड़ी,उसमें कुछ बैलून टाइप चीजें पड़ी हुई थी ,

आराधना देखते ही समझ गई कि वो कंडोम है, आराधना ने करीब जाकर देखा तो वो तीन थे जिनमें वीर्य भी भरा हुआ था

आराधना का तो जैसे खून खौल उठा, वो वाश रूम के बाहर आई तो देखा कि बेड शीट भी अस्त व्यस्त थी ,उसका चेहरा गुस्से में इतना लाल हो चुका था जैसे उसमें खून उतर आया हो, वो एक ही झटके में समझ गई कि जरूर सिमरन ने कुछ गलत किया है क्योंकि वही अपने बॉयफ्रेंड के साथ यहां आने का प्लान बना रही थी

उसने एक झटके में फोन उठाया और तुरंत सिमरन को मिला दिया

सिमरन -" हाय जान"
आराधना -" तू घर आई थी"
सिमरन -"हां स्वीटी आई थी ,अभी थोड़ी देर पहले ही हम निकले हैं वहां से"
आराधना -"मेरे बेडरुम में भी आई थी?"
सिमरन -"तेरे ही बेडरूम में थी मैं ,क्यों क्या हुआ?"
आराधना -"यू बिच, तेरी हिम्मत कैसे हुई हमारे घर में ये सब करने की"
सिमरन -"कंट्रोल योर टंग आराधना ,मैं हमेशा हलके में लेती हूं लेकिन आज तो तू कुछ ज्यादा ही बोल रही है"
आराधना -"लेकिन तुझे मेरा ही घर मिला था अपना मुंह काला करने को और ये अपनी गंदगी तुम मेरे बाथरुम में फेंक कर चली गई, किसने दिया तुम्हें ये अधिकार?"

सिमरन - "आरू मेरी दोस्त सुन, मैंने कोई मुंह काला नहीं किया है, मैंने बस वही किया है जो जवानी में करना चाहिए, सभी लड़कियां करती हैं तो मैंने भी किया तो इसमें इतना ओवर रिएक्ट करने वाली कौन सी बात है, यह मेरी जिंदगी है और मेरा जो दिल आएगा मैं वही करूंगी, हाँ तेरे घर पर जो कुछ कंडोम रह गई वह मेरी गलती है और वह मैं मानती हूं ,अगर तू कहेगी तो मैं खुद आकर उन्हें फेंक दूंगी"

आराधना - "अगर तुझे इतनी ही आग लगी है तो अपने घर वालों से बोलती क्यों नहीं कि तेरी शादी कर दे"

सिमरन - "लिसन डियर, मैं फिजिकल रिलेशन के लिए तैयार हूं ना की शादी के लिए, शादी एक फाइनल स्टेप है और सेक्स के लिए मैं शादी तक का इंतजार नहीं कर सकती तो इसमें गलत क्या है और मैं तुझ से पूछती हूं कि आज कोई तेरे शरीर को आकर प्यार करे तो क्या तेरी चुत ये बोलेगी कि नहीं तू तो शादीशुदा है ही नहीं, फिजिकल नीड और मोरल इन्वायरमेंट में फर्क होता है, तू इतना फ्रस्टेट क्यों रहती है क्योंकि यू आल्सो नीड सेक्स ,लेकिन यह एसी अनजान सिचुएशन है जिसे तू कभी नहीं समझ सकती"

आराधना - " चल मान भी लिया कि मेरा दिल करता है लेकिन मैं फिर भी शादी तक इंतजार कर सकती हूं, तेरी तरह नहीं की अभी अपनी इज्जत लुटाती फिरु और सेकंड हैंड बनकर हस्बैंड के पास जाऊं"

सिमरन - "तू कर ले इंतजार और जीतले नोबेल प्राइज, मुझे तो अपनी ऐसी ही जिंदगी पसंद है, आज ही सेक्स की फुल डोज दी है मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे, सो प्लीज़ मूड ऑफ मत कर, सच बोल रही हूं कि तेरा पति भी तेरी लेते हुए डरेगा, तू मदर टेरेसा टाइप है लेकिन पतियों को कुछ और ही स्टाइल की वाइफ पसंद होती है"

आराधना - "तू कोई मेरी गॉड फादर नहीं है जो मेरा टाइप बताइगी "

सिमरन - "मुझे भी कोई शौक नहीं है लेकिन तू मेरी फ्रेंड है तो तुझे सलाह दे रही हूं ,तुझे लगता है कि सब बुरे हैं और तू अच्छी है ,यार मेरी बात मान लड़की है तो लड़की की तरह रह ,नहीं तो लोग तेरी पहचान भूल जाएंगे, मैं तुझे याद कराना नहीं चाहती लेकिन तेरे डैडी को भी यह एहसास मैंने ही दिलाया कि तू एक लड़की है नहीं तो उन्हें भी यह एहसास नहीं था" सिमरन थोड़ा सा उत्तेजित होकर एक साँस में सब बोल जाती है

आराधना - "क्या कहा तूने डैडी के बारे में?"

सिमरन -"मैंने वही कहा जो तूने सुना, मैं तेरे घर आई और तेरे घर को गंदा किया इसके लिए मुझे माफ कर दे लेकिन आज जो मैंने तेरे से बोला है उन सब बातों पर ध्यान दें "और यह बात बोलते ही वो फोन कट कर देती है
आराधना हेलो हेलो करती रह जाती है लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता ,सिमरन की इस 5 मिनट की टॉक ने आज आराधना को एक आइना दिखा दिया था और आराधना सोचने पर मजबूर हो गई थी

बार-बार वो उन कंडोम को देख रही थी ,वो भी एक लड़की थी तो कल्पना करना शुरु कर दिया था कि कैसे उसके बॉयफ्रेंड ने उसे प्यार किया होगा ,उसे गुस्सा भी आ रहा था कि उसने ऐसी बात क्यों बोली कि मेरे डैडी को भी मेरे लड़की होने पर शक है,

"लगता है अब दिखाना ही पड़ेगा कि मैं भी एक लड़की ही हूं "आराधना ने अपने आप से फैसला किया, वो तैयार थी कुछ भी करने के लिए

शॉपिंग से आने के बाद आराधना थक चुकी थी लेकिन उसने सिमरन को फोन करने के बाद जो अपने दिमाग के तारों को छोड़ दिया उससे वो बेचैन हो गई, उसको समझ नहीं आ रहा था कि आखिर क्या हो रहा है, उसको यह लगने लगा था कि कहीं उसकी लाइफ स्टाइल गलत तो नहीं ,कही सिमरन जैसी ही लड़कियां सही तो नही जो सेक्स करती करती हैं

वो अपने आप से बात कर रही थी,

"उसने डैडी के बारे में ऐसी बात क्यों कही ,डैडी ने मुझे वो साड़ी और ब्लाउज क्यों गिफ्ट किया ?, कहीं ऐसा तो नहीं कि खुद मेरे डैडी ही मुझे नहीं सिमरन को पसंद करते हैं ,कहीं वाकई में मेरा एटीट्यूड गलत तो नहीं ,कहीं मेरा टाइप वाकई में मदर टेरेसा तो नहीं " यह वो सारे सवाल थे जो उसके दिमाग में घूम रहे थे, उसका सिर दर्द बढ़ता ही जा रहा था ,वो उठी और पानी की बोतल उठा कर पानी पीने लगी

इतने में उसने देखा कि सामने से प्रीती जा रही थी, शायद वो वॉशरूम जा रही थी ,आराधना ने फैसला किया कि क्यों ना थोड़ी देर प्रीति से ही बात कर ली जाए शायद उसका सर दर्द थोड़ा कम हो

आराधना -" प्रीति ?" आराधना प्रीति को आवाज देती है

प्रीति -"हां दीदी " प्रीति ने बाहर खड़े रहकर ही पूछ लिया

आराधना -"कहां जा रही है, आ थोड़ी देर बैठते हैं "

प्रीति ने आराधना को एक कार्नर फिंगर दिखाते हुए इशारा किया की सूसू लगी है

प्रीति -" बस दीदी 1 मिनट में आती हूं, मैं नहीं चाहती कि आपका रूम गंदा कर दूँ" प्रीति ने तेज तेज वॉशरूम की तरफ चलते हुए कहा
थोड़ी देर बाद प्रीति अपनी दीदी के रूम में आ जाती है

प्रीति -" दीदी अब बताओ क्या बात है"
आराधना -" कुछ नहीं ऐसे ही सोचा कि अपनी बहन से थोड़ी देर बात कर लूँ , आज थोड़ा अच्छा फील नहीं हो रहा "
प्रीति -" क्या बात है भाई, आज रात में सूरज कहां से निकल रहा है" प्रीति ने थोड़ा मजाकिया अंदाज में कहा
आराधना -" क्या यार तुम सब लोग मुझे हिटलर क्यों समझते हो, मेरे दिल में भी तुम सबके लिए प्यार है, लेकिन पता नहीं तुम सब क्यों नहीं समझते" आराधना ने थोड़ा सीरियस होते हुए कहा

प्रीति -" दीदी ये टाइम हमें प्यार करने का नहीं बल्कि अपना प्यार ढूंढने का है" प्रीति ने एक आंख मारते हुए उसे कहा

आराधना -" तू बहुत बड़ी हो गई है कहीं ऐसा तो नहीं है कि तूने ही अपना प्यार ढूंढ लिया हो"

प्रीति -" हाय मेरी ऐसी किस्मत कहां, काश ऐसा हो गया होता " प्रीति ने मजाक में अपना सर पर हाथ मारते हुए कहा

आराधना -" हा हा हा फनी गर्ल है तू काफी, अच्छा सीरियस होकर बता कि मेरे अंदर क्या-क्या कमियां हैं" आराधना ने सीरियस होते हुए कहा

प्रीति -" अंदर? कमियां? मुझे तो सब फिट हिट दिखाई देता है" प्रीति ने फिर से मजाक में आराधना के बूब्स की तरफ देखते हुए कहा

आराधना -" मारूंगी एक, सीरियस होकर बता, क्योंकि आज मेरा दिल दुखी है ,तू ही तो है जो मेरे करीब है, सो प्लीज मेरी हेल्प कर "

प्रीति -" क्या दीदी आज तो शॉपिंग करके आई हो मस्त वाली, इतनी सीरियस क्यों हो रही हो, सब ठीक तो है ना"

आराधना -" सब ठीक है, बस ऐसे ही आज मुझे किसी ने एहसास दिलाया कि शायद मैं एक अच्छी पत्नी ना बन पाउं और यहां तक बोला कि मेरा टाइप मदर टेरेसा टाइप है और शायद यही कारण है कि मैं एक अच्छी पत्नी का किरदार निभा सकती " आराधना ने फिर से सीरियस होते हुए कहा

प्रीति -" दीदी अब मैं क्या बोलूं, आपसे छोटी हूं लेकिन......"

आराधना -" लेकिन... क्या ......बोलना "

प्रीती -" दीदी हां बात सच है कि आपका टाइप आजकल की लड़कियों से मैच नहीं करता और आजकल के लड़के भी बहुत एडवांस हैं ,उन्हें ऐसी ही वाइफ पसंद आती है जैसी कि आप हो लेकिन सिर्फ बाहर की दुनिया को दिखाने के लिए, लेकिन दीदी आजकल के लड़कों को ऐसी पत्नी भी चाहिए जो बेड में शर्माए ना, माइंड मत करना लेकिन शायद आपका स्टाइल एक मॉडर्न वाइफ वाला नहीं है और शायद लड़के तुम्हें एक गर्ल फ्रेंड के तौर पर भी एक्सेप्ट ना करें"

आराधना -" तो क्या मैं अपने आप को सिर्फ इसीलिए बदल दूं कि कोई मेरा बॉयफ्रेंड बने, तुझे भी पता है कि ये सब मुझे पसंद नहीं ,हां लेकिन पति को खुश रखना हर पत्नी का फर्ज़ है ,वैसे तेरी नॉलेज कमाल की है, कहीं तेरा ही तो कोई बॉय फ्रेंड नहीं बन गया "

प्रीति -" दीदी अभी तो मैं बस 19 साल की हूं, अभी तो मेरी चीजों में आकार लेना शुरु किया है" प्रीति का इशारा अपने बूब्स की तरफ था

आराधना -" हा हा हा हा वाकई में बहुत फनी है तू, लेकिन और कितना आकार बदलेगी तेरी चीजें, वैसे ही इतना........."

प्रीति -" दीदी आपको पता है, आप हमें हिचकिचाहट बहुत ज्यादा है, आप बिल्कुल मस्त रहा करो, एक बिंदास लड़की बनो, बॉयफ्रेंड और पति ही सब कुछ नहीं है, ये तुम्हारी लाइफ है इसे जीना सीखो, वैसे इतना क्या .........आप बीच में क्यों रुक गई"

आराधना -" अरे नहीं, वो तू कह रही है ना कि अभी तो तेरी चीजों ने आकार लेना शुरु किया है, मुझे लगता है कि आकार काफी सही हो गया है तेरा 19 साल की उम्र में ही" आराधना का इशारा प्रीति के बूब्स की तरफ था

प्रीति -" हाय मैं मर जावा, आज मेरी दीदी मेरे बूब्स की तारीफ कर रही है " प्रीति ने खिलखिलाते हुए कहा

आराधना -" छी ,फिर से ऐसी बातें शुरु कर दी तूने"

प्रीति -" आपके चेहरे का रंग बता रहा है कि ऐसी बातें तो आपको भी अच्छी लगती हैं, लेकिन आप शर्माती बहुत हैं, खैर ये मेरा फर्ज नहीं है कि मैं आपकी बॉडी को देखूं या तारीफ करूं, ये तो आपके बॉयफ्रेंड या आपके पति का ही हक़ होगा "

आराधना -" चुप कर पागल कहीं की, मुझे तो लगता है कि तेरा ही कोई बॉयफ्रेंड बन गया है, कहीं ऐसा तो नहीं है कि तू कुछ कर भी चुकी है, क्योंकि तेरी बॉडी भी ठीक सिमरन जैसी है" आराधना ने थोड़ा मजाकिया अंदाज ने कहा

प्रीति -" हाय दीदी अगर बॉडी से ही पता चलता तो सबसे बड़ी हिट तो आप हैं, कहां सिमरन ओर कहां मैं, कहीं ऐसा तो नहीं कि आप ही कुछ कर चुकी हैं" प्रीति ने भी मजाक में तीर छोड़ दिया

आराधना -" चुप कर ऐसा क्या है मेरी बॉडी में?"

प्रीति -" अरे दीदी अच्छे अच्छे जवानों के छक्के छुड़ाने की हिम्मत रखती हैं, आप बस ड्रेसिंग सेंस बदलिए, मधुबाला से मल्लिका शेरावत पर आइए और फिर देखिए"

आराधना -" कोशिश करुंगी अगर तू कहती है तो"

प्रीति -" ओए मेरी ग्रेट दीदी" प्रीति भास्कर आराधना से लिपट जाती है, वो आज बहुत खुश थी क्योंकि आराधना ने पहली बार उसे इतना स्पेस दिया था बात करने का

"अच्छा दीदी अब रात काफी हो चुकी है मैं चलती हूं" प्रीति ने आराधना से कहा

"ओके चल प्रीति अब तू सो जा" प्रीति अपने रूम में चली जाती है, आराधना उन सारे कपड़ों को बाहर निकलती है जिन्हें वो लेकर आई थी

सबसे पहले वो अपने हाथ में उस आइटम को लेती है जो पंकज ने स्मृति को ऑफर किया था ब्लैक नाइटी, ये नाइटी आराधना ने मार्केट से सबकी नजरें बचाकर ले ली थी, वैसे तो आराधना ने किसी को पता ही नहीं चलने दिया था कि उसने क्या क्या लिया है, आराधना उस ब्लैक नाइटी को अपने दोनों हाथों में पकड़ कर देखती है, इतनी छोटी सेक्सी और पारदर्शी नाइटी को देखकर आराधना शर्म से लाल हो जाती है,

स्मृति आज थक गई थी तो जल्दी सो गई, पंकज बाहर हॉल में टहल रहा था, रात काफी हो चुकी थी लेकिन उसके चेहरे पर नींद के नामो निशान नहीं थे, वो तो स्मोकिंग करता हुआ हॉल में इधर से उधर घूम रहा था, थोड़ी देर पहले ही वो किचन में जाता है और शायद इस उम्मीद में कि उसे नींद आ जाएगी वो एक बीयर निकालता है और फिर से हॉल में आकर बैठ जाता है

टेबल पर रखी मेग्जीन को उठाकर पड़ने लगता है, लेकिन उसका दिमाग कहीं और ही था, उसकी बॉडी लैंग्वेज से ही पता चल रहा था कि उसका मन नहीं लग रहा है,

उसने फैसला किया कि "चलो क्यों ना ऊपर घूम कर आया था, लेकिन 12 से ज्यादा बज गए हैं और बच्चे सो गए होंगे "उसके दिमाग में ख्याल आता है
"लेकिन ऊपर जाने में क्या परेशानी है घूमने आऊंगा और एक्सरसाइज भी हो जाएगी "वो फिर से ये सोचकर ऊपर की ओर चल देता है

हाथ में बियर को लिए हुए धीरे-धीरे हो ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है ,उसको यही Idea था कि सभी सो चुके हैं लेकिन फिर भी वो उपर जा रहा था, जैसे जैसे सीढियों से ऊपर आता है तो देखता है कि कुशल और प्रीति के रूम और लाइट दोनों बंद हैं लेकिन आराधना का गेट अभी भी खुला हुआ है और लाइट भी जली हुई है

वो धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, गेट के करीब पहुंचने वाला ही होता कि वो बोलना शुरू कर देता है "आराधना बेटा.... आराधना बेटा....." ये बोलते बोलते वो गेट के बिल्कुल करीब पहुंच गया और तीसरी बार बोलने ही वाला था "आराधना बे........" और उसकी सांसें वही की वही रुक जाती है

पता नहीं क्यों उसके हाथ से बीयर की बोतल छूट जाती हैं और नीचे गिर कर टूट जाती है, अंदर का नजारा ही कुछ ऐसा था

दरअसल आराधना को भी आईडिया नहीं था कि कोई आ सकता है और वो अपनी नाइटी को टाई करने के लिए पहन चुकी थी, आराधना का गोरा सुडोल और मांसल बदन अभी उस सेक्सी नाइटी में पूरा विजिबल था, नाइटी की लंबाई बस आराधना की चुत से थोड़ा सा ही नीचे तक थी, नीचे उसकी गोरी गोरी चिकनी टांगे बिल्कुल विजिबल थी, नाइटी का साइज थोड़ा फिट था इसलिए बूब्स की जगह तो ऐसे लग रहा था जैसे जबरदस्ती बंद किया गया हो उन्हें, नाइटी में ब्रा ऑलरेडी थी और पेंटी एडिशनल थी जो की आराधना ने पहनी हुई थी,

ब्रा के ऊपर से आराधना के बूब्स का ऐसा क्लीवेज दिख रहा था कि बस पूछो ही मत, ब्रा के एरिया से नीचे नाइटी ट्रांसपेरेंट थी तो आराधना का पेट साफ साफ नजर आ रहा था और साथ में उसकी नाभि भी, आराधना के बाल खुले हुए थे और फेश वॉश था, वो सुंदर और सेक्सी दोनों का ही परफेक्ट मिक्सचर लग रही थी

दोनों की नजरें मिलती हैं, आराधना साइड पोज में खड़ी थी मिरर के सामने, जैसे ही उसे अपने डैडी की आवाज आती है तो वो अपना चेहरा डोर की तरफ कर देती है और डैडी को देखती है
पंकज उसे देखकर घबरा जाता है, उसे समझ नहीं आता कि क्या करें, लेकिन नजरें नहीं हटा पाता और आराधना भी अपनी जगह से नहीं हिल रही थी
खैर इस चुप्पी को पंकज तोड़ता है और कहता है "सो..... सॉरी ....बेटा, मैं बाद में आता हूं"

पर आराधना आज पता नहीं किस मुड में थी, आराधना आगे गेट की ओर चलती है और डोर पर जाकर खड़ी हो जाती है

पंकज न चाहते हुए भी उस सेक्सी ब्यूटी को देखे बिना नहीं रह पाता

आराधना -" क्यों कहां जा रहे हैं?" आराधना ने थोड़े एटीट्यूड में कहा
पंकज -" नहीं... वो ...वो....... शायद तुम सोने की तैयारी कर रही थी, तो सो जाओ " पंकज बात टालने की कोशिश करता है

आराधना -" नहीं मुझे नींद नहीं आ रही, और साफ साफ बोलिए ना कि आप मुझे इन कपड़ो में देख कर डर गए है"

पंकज -" नहीं वो बेटा ऐसी बात नहीं है, ये तो शायद वही नाइटी है जो मैंतुम्हारी मां को दिलवा रहा था" पंकज ने नाइटी की तरफ देखते हुए कहा

आराधना -"कपड़े पहनने के लिए होते हैं ,यह लड़कियों के कपड़े हैं ,सो मैंने पहने, क्यों बुरा किया मैंने?"

पंकज -" नहीं बेटा.... आप तो बहुत सुंदर लग रही हो"

आराधना -"थैंक्यू डैड, अंदर आइए ना" आराधना गेट पर खड़े रहते हुए अंदर जाने का रास्ता छोड़ती है
 
दूसरी साइड से आवाज आई कि योर बॉय फ्रेंड्, प्रीती समझ गयी कि उस लड़की ने अपना काम कर दिया है, प्रीती गेट के पीछे अपने आप को छुपा कर गेट खोलती है और सामने कुशल खड़ा होता है, और कुशल के पीछे वो सेल्स गर्ल, प्रीती उससे इशारे में पूछती है कि कोई प्रॉब्लम तो नहीं है न और वो इशारे में ही बात देती है कि नो इस्यू

अब कुशल प्रीती के ट्रायल रूम में अंदर चला जाता है, और जाते ही गेट बंद कर लेता है,

कुशल -" मुझे यहाँ बुलाने का मतलब", वो प्रीती के सेक्सी स्टाइल को उस रेड हॉट ड्रेस में देखकर सदमें में आ गया था, उसकी बात सुनकर प्रीती घूम जाती है और पीठ उसके सामने कर देती है, "जीप बंद नहीं हो रही प्लीज हेल्प कर दे", प्रीती ने उसे नंगी पीठ दीखते हुए कहा, ये बात सुनकर जैसे कुशल पागल हो गया,

उसने आगे बढ़कर प्रीती को मजबूत बांहो में पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया, प्रीती की पीठ धम्म से आकर कुशल के सीने में लग जाती है, कुशल का हाथ नीचे की ओर बढ़ने लगता है,

" तेरी ज़िप बंद नहीं, आज तेरी चूत खोलूँगा अपने मुसल जैसे लुंड से", कुशल बोलता है और उसके बाल खिंच कर अपने दूसरे हाथ को उसके हिप्स की ओर ले जाता है,

" समझदारी से काम ले, ये कोई तेरा घर नहीं है, और वैसे भी में वर्जिन हूँ, और मेरे साथ सेक्स यहाँ करेगा तो ब्लड कहाँ छुपायेगा, माँ और डैड भी यहीं पर है", प्रीती ने उसे समझते हुए कहा

" तो मुझे यहाँ बुलाने का क्या मतलब है?", कुशल ने थोड़ा सा ढीला होते हुए कहा,

" मुझे लगा कि तेरी हेल्प अपने बूब्स दिखा के कर दु", प्रीती ने अपने ड्रेस को सामने से थोड़ा सा खोलते हुए कहा

प्रीति के बूब्स की झलक पाते ही कुशल पागल होकर उन पर अपना मुँह लगा देता है, " ओह्ह्ह्हह्ह्ह्,,,,,, आराम से ब्रो,,,,,,,,, प्रीती उसे समझाती है, अब कुशल का एक हाथ से उसका बूब्स प्रेस कर रहा था तो दूसरे बूब्स को अपने मुँह में भर रखा था,

" येस्सलससससस,,,,,,,,,, यु आर अमेज़िंग,,,,,,,,,, यु र अ रियल मैन,,,," प्रीती स्लो वौइस् में बड़बड़ाये जा रही थी उसकी आँखे बंद हो चुकी थी, कुशल ने अपना दूसरा हाथ उसकी चूत पर पहुँचा दिया और एक फिंगर सीधा अंदर घुसा दिया, " आआह्ह्ह्हह्हह्ह्,,,,,,, " प्रीती की ये सेक्सी सिसकारियां कुशल को और पागल कर रही थी, वो अब बूब्स को चुस रहा था है एक फिंगर को अंदर बहार किये जा रहा था,

" यू आर वेरी स्वीट एंड नॉटी ,,,,, लव मि ,,,,,, याआ,,,,,,,,, फास्टर प्लीज़,,,,,,,,,", प्रीती चरम सीमा पे थी, " लव यू,,,,,,,, माय डार्लिंग,,,,, वो पागलो की तरह अपने बूब्स कुशल के साथ रगडे जा रही थी, कुशल भी एक बार फिर से कुँवारा और जवान जिस्म अपने हाथ में आा जाने के बद बेक़ाबू हुआ जा रहा था,

" आआआह्ह्ह्ह,,,,,, आआआह्ह्ह्हह्ह्,,,,,, आह्ह्ह्हह्ह्ह्,", कुशल की फिंगर प्रीती की चूत में और तेजी से चल रही थी, वो उसके बूब्स को और सख्ती के साथ चूसे जा रहा था,
"ओह्ह्ह्ह अम्म्मम्म्म्मम्म्म्म कम्मिंग आअह्ह्ह्ह माय लव लाइक देट आह आह्ह आह आह आअह्ह्ह्ह" और प्रीती अपना पानी छोड़ देती है, अभी कुशल कुछ कहने ही वाला था की गेट कोई बहार से नोक करता है, कुशल की तो जैसे साँसे ही रुक जाती है

प्रीती हिम्मत से काम लेती है और पूछती है

प्रीती - "कौन है "
दूसरी तरफ से सेल्स गर्ल की आवाज़ आती है की प्लीज़ दरवाज़ा खोलो, प्रीती थोडा सा गेट खोलती है और कुशल उसके पीछे छुपके खड़ा हुआ था

प्रीती - हां बोलो

सेल्स गर्ल - आपकी आवाजे बाहर तक आ रही है ,मुझे लगा की आप लोग बस किस ....... प्लीज़ अगर किसी ने कुछ देख लिया तो मेरी जॉब खतरे में पड जाएगी , प्लीज़ आप अपने बॉय फ्रेंड को बाहर भेज दीजिये , सेल्स गर्ल ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा

प्रीती कुशल की ओर इशारा करती है बाहर निकलने के लिए ,कुशल की आँखे ऐसी हो चुकी थी जैसे पता नहीं किस्मत उसे कस कस के थप्पड़ क्यों मार रही है,लेकिन मरता क्या न करता , प्रीती को देखते देखते बहार आ जाता है

पंकज और स्मृति सभी चीजों को देखने में ही बिजी थे, लेकिन आराधना उनके पीछे नहीं थी, शायद वह कहीं कुछ और ही खरीद रही थी, चलते चलते स्मृति को एक ड्रेस दिखाई देती है लॉन्ग ब्लैक ड्रेस एंड बेक लेस, यह एक स्टेचू पर लगी हुई थी ,जैसे उस ड्रेस पर स्मृति का दिल आ गया
"मुझे यह चाहिए" उसने पंकज से कहा, पंकज भला उसे कैसे मना कर सकता था, दरअसल यह ड्रेस उस ड्रेस से मिलती थी जिसका जिक्र लॉयन ने किया था, इस ड्रेस के अलावा स्मृति ने कुछ और भी कपडे लिए
, इधर कुशल का मन शॉपिंग में तो नहीं था लेकिन वह फिर भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था इसलिए उसने भी कुछ टीशर्ट जींस और कुछ शॉर्ट्स सेलेक्ट कर लिए थे,

सभी लोग अपनी फाइनल शॉपिंग के साथ रेडी थे, लेकिन आराधना का कुछ नहीं पता था, इतने बड़े शोरूम में देखना भी पॉसिबल नहीं था, तभी थोड़ी देर बाद वह भी आती हुई दिखाई देती है और उसके हाथ में भी एक शॉपिंग बास्केट था

स्मृति -"तू कहां गई थी, क्या हो गई शॉपिंग"

आराधना-" हां मेरी शॉपिंग कंप्लीट हो गई है"

कुशल-" तो चलो पापा पे करो और फिर कुछ खाने चलते हैं"

और वो सब बाहर आ गये, सभी साथ चल रहे थे तो तभी वहां एक बोर्ड लगा दिखाई दिया "स्केरी हाउस" और कुशल चिल्लाता हुआ बोलता है कि मॉम चलो ना यहां चलते हैं

स्मृति -"इसमें क्या होता है"

कुशल-"इसमें अंदर घना अंधेरा होता है, सभी को एक डोर से घुसकर दूसरे से निकलना होता है, अंदर हम कुछ नहीं देख सकते हैं, और हमे ही रास्ता भी खोजना होता है और अंदर भूतिया टाइप कैरेक्टर भी होते हैं ,बड़ा मजा आएगा, चलों ना मा" कुशल रिक्वेस्ट करता है

स्मृति पंकज की तरफ देखती है और पंकज कहता है कि भाई हमें तो भूख लगी है और अगर तुम जाना चाहते हो तो चले जाओ
फिर स्मृति आराधना से पूछती है लेकिन आराधना का तो एटीट्यूड बदल चुका था इसलिए उसने साफ मना कर दिया
" तो ठीक है हम दोनों ही घूम कर आते हैं" स्मृति कुशल के साथ जाते हुए कहती है
" ओके हम फ़ूड कोर्ट में तुम्हारा वेट करेंगे" पंकज बोलता है

और कुशल अपनी मां का हाथ पकड़कर स्केरी हाउस की तरफ चल देता है, आराधना, पंकज और प्रीती टेबल पर जाकर बैठ जाते हैं,

पंकज - "तो बेटा तुमने क्या लिया" पंकज आराधना का बैग हाथ में लेते हुए बोलता है , तभी वो बैग आराधना उसके हाथ से छीन लेती है
आराधना - "आपके देखने की चीज़ नही है "
पंकज -"सॉरी बेटा "

आराधना -" थट्स ओके डैड,नो नीड टू से सॉरी "

और फिर तीनो नॉर्मल बातों में लग जाते हैं,

दूसरी तरफ कुशल स्केरी हाउस की टिकट ले चुका था और वह दोनों अंदर जाने की तैयारी कर रहे थे,

कुशल -" माँ, अंदर लोग चिल्लाएंगे, शोर मचाएंगे लेकिन आप घबराना मत और मैं भी आपका साथ नहीं दे पाऊंगा क्योंकि मैं इस थ्रील्लिंग एडवेंचर को अकेले देखना चाहता हूं "

स्मृति -"ओके, आगे जो भी होगा देखा जायेगा ,देखते हैं अंदर का माहौल क्या है"

और दोनों अंदर चले जाते हैं, एक बार तो स्मृति सकते में आ जाती है, बिल्कुल अंधेरा और लाइट का कोई नामोनिशान नहीं, अंदर घुसते ही स्मृति अपने बाएं तरफ चलने लगती है, बेहद डरावनी आवाज आ रही थी उस स्केरी हाउस में, स्मृति का तो गला सूख चुका था

उसने पीछे मुड़कर देखा तो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था, उसने धीरे से आवाज़ लगाई कुशल कुशल लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा था, वह धीरे से थोड़ा और आगे चली लेकिन तभी साइड से एक डरावना चेहरा उसके सामने आ गया और वह चिल्ला कर राइट साइड में हो गई

वहां पर और भी चिल्लाने की आवाजे आ रही थी, वह समझ गई कि यहां एक आर्टिफिशियल डरावना माहोल बनाया हुआ है, वो थोड़ा सा और आगे बढ़ी , तभी उसने देखा कि एक परछाई उसके करीब आ रही है, वो राइट में होने ही वाली थी कि अचानक उस परछाई ने उसका हाथ पकड़ लिया और एक झटके में अपनी तरफ खींच लिया

स्मृति बहुत तेज़ चिल्लाई लेकिन उस स्केरी हाउस में सबके चिल्लाने की आवाज़ में उसकी आवाज़ दब गयी ,जिस सख्श ने स्मृति को पकड़ा हुआ था उसने उसे घुमाकर पकडकर अपनी ओर खिंच लिया और अपने सीने से लगा लिया,स्मृति ने फिर चिल्लाना चाहा तो उस सख्श ने मजबूती से उसके मुंह को बंद कर दिया और उसे एक साइड में ले आया ,

वो चिल्लाने की पूरी कोशिश कर रही थी, पर इससे पहले की उसका दिमाग कुछ कम कर पाता , उस इंसान के हाथ आगे बढ़ कर स्मृति के बूब्स पर पहुँच चुके थे और उसने अपने होठों को स्मृति की गर्दन पर रख दिया था ,

स्मृति को तो ये आईडिया भी नहीं था कि ऐसा कुछ भी हो सकता है, स्मृति को लगा कि ऐसे बदतमीजी यहां का कोई स्टाफ कर देता हो और उसे पूरा Idea था कि वह जल्दी उसे छोड़ देगा, लेकिन वह इंसान नहीं रुका और उसने अपना हाथ उसके बूब्स से हटाकर उस के सूट के अंदर ले जाकर उसकी पैंटी तक पहुंचा दिया

स्मृति एक मजबूत कद-काठी वाली लेडी थी लेकिन वह इस अचानक हुई परिस्थिति के लिए तैयार नहीं थी, उसका दिमाग पता नहीं कहां से कहां पहुंच रहा था कि क्या यह नॉर्मल इंसिडेंट है जो इस स्केरी हाउस में होता रहता है या उसका रेप प्लान है, वह कुछ समझ नहीं पा रही थी

वह अभी अपने आप को छुड़ाने की पूरी कोशिश कर रही थी, लेकिन पीछे वाला भी कम मजबूत नहीं था, बिना टाइम वेस्ट करें अब उस इंसान ने अपने एक हाथ को स्मृति की पैंटी के अंदर मेन आइटम तक पहुंचा दिया यानी उसकी चुत तक,

ना कुछ दिखाई दे रहा था और बस शोर ही शोर ,इस शोर में स्मृति की आवाज को कोई सुन पा रहा था, ऐसे में स्मृति के माइंड ने भी काम करना बंद कर दिया था, उसको पता था कि डरने से काम नहीं चलेगा, यह जो भी इंसान है जिसने उसे पकड़ा हुआ है वह कोई खूनी नहीं बल्कि इसे शरीर की भूख है , लेकिन अगर वो कुछ करना भी चाहता है तो यहां कैसे कर लेगा,

इस वक्त स्मृति के दिलों दिमाग में बस यही बात घूम रही थी, वह इंसान अभी भी पागलों की तरह स्मृति की गर्दन पर किस किया जा रहा था, दूसरी तरफ उसका हाथ उसकी चुत पर पहुंच चुका था और उसने अपनी दो फिंगर्स को उसकी चुत के अंदर डालना चाहा ,पर ऐसी सिचुएशन में दो फिंगर्स भी ज्यादा थी क्योंकि न ही तो स्मृति एक्साइटेड थी और ना ही उसकी चुत में गीलापन था

इस वजह से उसे ऐसा दर्द हुआ जैसे किसी लड़की को फर्स्ट टाइम सेक्स में होता है जब उस लड़के ने अपने दो फिंगर्स उसकी चुत में जबरदस्ती घुसा दी

"ऊऊन्ह्ह............" वो बंद मुंह से ही खूब चिल्लाने की कोशिश कर रही थी और अपने दर्द को दिखाने की कोशिश कर रही थी लेकिन कोई फायदा नहीं होने वाला था

स्मृति पूरी ताकत लगाकर चिल्लाने की कोशिश कर रही थी और अपनी सांसो की ताकत से उसके हाथों को छुड़ाना चाह रही थी
उस इंसान ने तेजी से दो उंगलियां अंदर बाहर करना शुरु कर दिया

स्मृति को कुछ भी हिंट नहीं मिल रहा था कि आखिर यह क्या सीन चल रहा है, अगर वह मेरे साथ सेक्स करना चाहता है तो ये ड्रामा क्यों कर रहा है ,यह मेरी चुत की हालत खराब क्यों कर रहा है अपनी मोटी मोटी उंगलियों से

स्मृति के मंद में एक ट्रिक आई , उसने अपनी बॉडी को बिल्कुल हल्का छोड़ दिया ,ऐसे की जैसे वह बेहोश हो गई हो और छूटने की कोशिश बंद कर दी, उसका रिएक्शन थोड़ा पॉजिटिव हुआ क्यूंकि जिस इंसान ने उसे पकड़ा हुआ था उसे ऐसा लगा जैसे की स्मृति बेहोश हो गयी और उस इंसान ने अपना हाथ उसके मुंह से धीरे-धीरे हटा लिया,

लेकिन उंगलिया अभी भी उसकी चुत में ही थी, "आआआअह्हह्हह्ह ......." स्मृति ऐसे चुल्ली मानो भूकंप आ गया हो ,स्केरी हाउस के भूत भी डर गये होंगे शायद ,पर उस इन्सान ने टाइम न वेस्ट करते हुए फिर से उसको मुंह को कस के पकड़ लिया, उसको समझ आ गया की स्मृति चालाकी दिखा रही है ,स्मृति को भी एक झटके में समझ आ गया चिल्लाने से अब कोई फायदा नहीं होने वाला

उस इंसान ने अपनी उंगलियों की रफ़्तार और तेज़ कर दी, स्मृति की तो जैसे जान निकले जा रही थी , उसने एक नयी ट्रिक अपनाई, दो तिन बार स्मृति ने अपने कंधो से बेक साइड में खड़े इंसान की चेस्ट में ऐसे पुश किया जैसे वो कुछ कहना चाहती हो शुरू में तो उस इंसान ने कोई रेस्पोंस नही दिया लेकिन फिर जब ज्यादा शोर हो रहा था तो उसने एक चांस दिया स्मृति को बोलने का

"तुम पागल कुत्ते हो, तुम्हें क्या चाहिए, मेरे पति बाहर ही है, आज तेरा खून होकर रहेगा" स्मृति बहुत ही हल्की आवाज में थोड़ा सा पीछे होकर बोली, लेकिन पीछे से कोई रिस्पांस नहीं मिला और वह इंसान चुप खड़ा रहा और अपनी स्पीड को ऐसे ही जरी रखा ,स्मृति भी अब चिल्ला कर फिर से बोलने का ऑप्शन नहीं खोना चाहती थी

" मुझे तुम बताओ तुम्हें क्या चाहिए,सेक्स" स्मृति ने प्यार से काम लेना चाहा लेकिन फिर भी उस इंसान ने कोई रेस्पोंस नही दिया

"कुत्ते भोंक न " स्मृति का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था, स्मृति ने इतना ही बोला होगा की उस इंसान ने स्मृति का गत पकड़ा और सीधा पीछे ले जाकर अपने खड़े लंड पर रख दिया, स्मृति की साँसे तो ऊपर की ऊपर और निचे की निचे रह गयी , पहले २ सेकंड तो उसे समझ ही नही आया की ये चीज़ क्या है पर अगले ही पल उसे सब समझ आ गया

"ये सेक्स के लिए सही जगह नही है "स्मृति ने प्यार से उसे समझाते हुए कहा, उस इंसान ने अपने हाथ उसकी चुत से हटाया और अपने लंड पर ले जाकर रख दिया और बिना कुछ बोले ही उसके हाथ को पकड़ कर दो बार आगे पीछे करके दिखा दिया

"ओह्ह्ह यू बास्टर्ड !!!!! इस स्केरी हाउस में तूने मुझे अपने मसटर्रबेसन के लिए पकड़ के रखा है " स्मृति ने फिर एक बार स्लो वौइस् में कहा

इतना सुनते ही उस इंसान ने फिर से अपना हाथ उसकी सलवार के अंदर घुसा दिया और उसकी चुत में अबकी बार तिन उन्गलीयाँ गुसने की कोशिश करने लगा

"आईई ......"स्मृति को फिर से पैन हुआ लेकिन इस बार उसकी चुत थोडा गीलापन था तो उतनी परेशानी नहीं हुई जितनी की पहले हुई थी

स्मृति ने भी अब टाइम ना वेस्ट करते हुए सीधा हाथ उसके लंड पर ले गई और उसे चलाना शुरु कर दिया, स्मृति के टच से ही वह इंसान पागल सा हो गया और स्मृति को चूमने लगा, स्मृति को समझ आ रहा था कि यह कोई भूखा है, अब स्मृति ने अपने हाथ को और तेज चलाना शुरु कर दिया क्योंकि वह खुद भी चाहती थी कि जल्दी से इस मुसीबत से छुटकारा मिले

जैसे जैसे स्मृति अपने कोमल हाथ उसके लंड पर फिरा रही थी वैसे वैसे उसका लंड और भी विकराल होता जा रहा था और स्मृति भी अब इस परिस्थिति से गुजर रही थी क्योंकि वह रिलेक्स थी कि यह सिर्फ सेक्सुअल फ्रस्टेसन का मारा है ,वह अपने औरत होने का पूरा फायदा उठाने की कोशिश कर रही थी ताकि जल्दी से जल्दी उस इंसान का पानी निकलवा सके

उसको टेंशन भी हो रही थी लेकिन कहीं ना कहीं उसका माइंड भी काम कर रहा था कि टेंशन में जितना ज्यादा टाइम लगेगा उतनी ही मुश्किल होगी,

"क्या मैं इसे ओरल सेक्स से संतुस्ट कर दूँ,शायद यह जल्दी डिस्चार्ज हो जाएगा" स्मृति के माइंड में यही बाते आ रही थी और उसने अपना मुंग उसकी तरफ करना चाह लेकिन उसने अपनी ताकत का यूज़ करते स्मृति को घूमने नहीं दिया, वह इंसान अभी भी अपने तीन उंगलियां स्मृति की चुत में अंदर बाहर कर रहा था

"यू लोफर , गंवार ,कभी किसी के साथ कुछ किया भी है या नहीं, क्या पूरा हाथ घुसा दिया है मेरे यहां, अपनी एक या दो फिंगर यूज़ कर " स्मृति ने फिर से एक बार हल्की आवाज़ में उसे धमकाया ,उस इंसान ने इस बार स्मृति की बात को इज्जत दी और अपनी एक फिंगर बहार निकल ली और अब वो बस अपनी दो फिंगर ही यूज़ कर रहा था, स्मृति आज अपने औरत होने का फुल यूज़ कर रही थी , और यही एक तरीका था जिससे वो जल्द से जल्द उस इंसान की कैद से छुट सकती थी

स्मृति बहुत तेज़ तेज़ हाथ चला रही थी पर स्मृति का माइंड कह रहा था की ये है तो कोई अनाडी पर लंड कमाल का है इसका " मुट्ठी में भरने के बाद भी करीब पाच से छ इंच बहार होगा

अब स्मृति ने अपना ब्रम्हास्त्र फेंकना शुरू कर दिया, और अपनी गांड को उसकी बॉडी से मसलना शुरू कर दिया ,

पूरा संसार जानता है कि लडकी के पास दो ही अनबिटेबल हथियार जय जिनसे वो कुछ भी कर सकती है - बूब्स और गांड , खास कर वो भी पूरी तरीके से भरी हुई स्मृति जैसी औरत हो अगर
वो कुछ बोल नही रहा था लेकिन स्मृति ये फील कर रही थी वो उतेजित होता जा रहा है, उसके साँस लेने की स्पीड बढ़ रही थी और उसका लंड भी और पे और विकराल होता जा रहा था,

स्मृति फील नही करना चाहती थी लेकिन असल में वो भी बहुत उत्तेजित होती जा रही थी, उसकी चुत का पानी अब और तेज़ी के साथ आने लगा था, स्मृति अपनी गांड को और तेज़ी से हिलाने लगी थी,
"काम तो तूने ऐसा किया है की तुझे मौत मिलनी चाहिए लेकिन एक बात है दम है तुझमे " स्मृति ने लो वौइस् में उसको और उत्तेजित करते हुए खा , उसकी साँसे तेज़ होती जा रही थी ,उसकी धडकनों को स्मृति की पीठ फील कर रही थी, स्मृति की चुत में उसकी उँगलियाँ तेज़ी से भाग रही थी और वहीँ पे स्मृति के हाथ में उसका विशाल लंड भी था तो नेचुरल था की कोई भी लेडी उतेजित हो जाती और वी ही स्मृति के साथ हो रहा था लेकिन वो परिस्तिथि के साथ एडजस्ट नही हो पा रही थी

धीरे धीरे उसका हाथ स्मृति की चुत पे टाईट होता जा रहा था, लें वो अब ही कुछ नही बोल रहा था,स्मृति समझ गयी कि वो अब डिस्चार्ज होने के करीब ही है . स्मृति ने अपना हाथ और तेज़ी से आगे पीछे करना शुरू कर दिया और तभी -"पिछ्ह्ह्ह........"स्मृति ये देखना चाहती थी की आखिर ये कैसा है और वो अपना हाथ लंड के सामने ले जाती है, कई झटको के साथ उसका सारा वीर्य स्मृति की मुट्ठी में भर जाता है

"ओह माय गोड ......क्या सारा गुस्सा मेरे लिए ही बचा के रखा था" स्मृति लो वौइस् में उसके वीर्य के गढ़ेपन और मात्र को देखते हुए बोली, वो समझ गयी थी की ये जो भी है , सेक्स के लिए पागल है या इसके पास कोई पार्टनर नही है

उसकी पकड़ स्मृति पे ढीली पड़ती जा रही थी , और तभी स्मृति को लगा कि वो आजाद है , वो तुरंत पीछे मुड़ी पर उसे वहां कोई नही दिखाई दिया, ये अजीब सा इंसिडेंट था उसकी लाइफ में , वो यही सोच रही थी पर फिर उसने सब भूल कर बाहर जाना उचित समझा , वो जैसे तैसे बाहर निकली और सीढ़ी लेडीज वाशरूम में घुस गयी
 
स्मृति - " मैं सेक्सी होती जा रही और मुझे पता ही नही था.. गुड." स्मृति अब तक एक पेग और पी चुकी थी.
कुशल - " आपके कपड़ो मे जब भी मुझे आपके अंग दिखते तो मैं सीधा वॉशरूम जाता और हाथ से काम चलाता. आप टाय्लेट जाती तो आपको पेशाब करने का साउंड सुनता, कहीं बाहर जब सफाई करती तो दिल करता कि आपके बूब्स दिख जाए शायद, लेकिन सबसे बड़ी ख्वाहिश आपकी गान्ड देखने की ही तो जो कभी भी सही से पूरी नही हो पाई. हाँ जब भी आपने लो वेस्ट साड़ी पहनती तो टाइट गान्ड का आइडिया ज़रूर लगता था लेकिन कभी भी अंदर तक नही पहुँच पाया. लोगो से पता चला कि हाथ से ज़्यादा नही करना चाहिए नही तो लंड खराब हो जाता है. ब्लू मूवीस देखता तो इतना असर नही होता जितना की आपके बारे मे सोच कर हो जाता था." कुशल अब कुच्छ भी छिपाने की नही सोच रहा था और दूसरी तरफ उसे स्मृति भी नशीली आँखो से देख रही थी.

स्मृति - " तो तूने जासूसी करी मेरे टाय्लेट के बाहर तक भी.. ओके अब आगे बता." स्मृति की आँखे चेंज होती जा रही थी.

कुशल -" मुझे धीरे धीरे ये लगने लगा था कि मेरा ये सपना सच नही होगा और जवान होते होते मुझे ये बिल्कुल लगने लगा था कि ये पासिबल नही है. फिर टाइम बदलता रहा, सोशियल नेटवर्किंग का जमाना आया और मैने आपको फ़ेसबुक पर कॉंटॅक्ट आड करते हुए देखा. और फिर लाइयन का जनम हो गया. लाइयन बनते हुए मेरे दिल मे ये आइडिया भी नही था कि मैं एक दिन आपको फक भी कर पाउन्गा. लेकिन फिर चाटिंग करते करते मुझे ये अहसास होने लगा था कि आप भी चाहती हो मुझसे चॅट करना लेकिन शरमाती हो या कोई और सोशियल प्रेशर आपको रोक रहा है. मैने आप जान कर आपसे गंदी गंदी बाते शुरू की और शुरू मे आपका रेस्पॉन्स नेगेटिव रहा लेकिन धीरे आप अड्जस्ट होती गयी. मैं समझ गया था कि आपको लाइफ मे एंटरटेनमेंट चाहिए लेकिन प्राइवसी के साथ. मैने आपसे चॅट करते हुए कई बार मास्टरबेट किया. लेकिन फिर ऐसा टाइम आने लगा जब फिर से मेरी इच्छाए जागने लगी और स्केरी हाउस मे मैने अपना कंट्रोल खो दिया..."

कुशल इतना बोल कर एक लंबी साँस लेता है. स्मृति अभी भी अपने पेग को पीए जा रही थी, उसकी आँखो का कलर चेंज होता जा रहा था और गालो का कलर भी लाल होता जा रहा था.

स्मृति - " तो स्केरी हाउस मे तूने मुझे फक करने की कोशिश क्यूँ नही की...?" स्मृति कुशल की आँखो मे आँखे डाल कर बोलती है.

कुशल -" स्केरी हाउस मे मेरा प्लान बस अपना लंड तुम्हारे हाथो से टच करना था लेकिन वहाँ मुझे एक नयी हिंट मिली. मुझे क्लियर अहसास हुआ कि आप भी कुच्छ चाहती है. श्योर नही था लेकिन मुझे अहसास हो गया था कि अगर मैं प्लान बनाऊ तो शायद मुझे सक्सेस मिल जाए. मुझे इतना पता था कि आपको कभी ये पसंद नही आएगा कि कोई जान कार आकर आपके साथ सेक्स करे तो इसीलिए एक लोंग सर्च के बाद उस फार्महाउस का पता चला. सब सही रहा लेकिन तभी लाइट जल गयी और पोल खुल गयी..." इतना बोल कर कुशल अपनी गर्दन नीचे कर लेता है.

स्मृति -" ह्म्*म्म्मममम... तो ये थी बात... चल तूने मुझे इतनी बाते शेअर करी तो मैं भी तुझसे अपनी दिल की बाते शेअर करती हू..." स्मृति जब ये बोल रही थी तो उसका सीना उपर नीचे हो रहा था. उसकी हालत काफ़ी खराब हो चुकी थी.

कुशल उसकी ये बात सुनकर काफ़ी एग्ज़ाइटेड था और उठ कर अपना एक और पेग बनाता है.

" बताओ ना कि क्या बताना चाहती हो..." कुशल भी अब स्मृति के करीब था.

स्मृति -" मुझे फार्महाउस जाने से पहले ही पता था कि मेरे साथ सेक्स होना है.... ईवन मैं तो शायद होल नाइट के लिए भी तैयार थी लेकिन जब मुझे पता चला कि वो तू है तो मुझे फिर से वोही झटका लगा जो हमेशा लड़कियो की लाइफ मे लगता ही रहता है...." स्मृति भी आज खुल कर पेश आ रही थी, शायद वाइन उस पर असर कर चुकी थी.

कुशल उसकी बातो को सुनकर शॉक्ड था लेकिन उसको शो नही कर रहा था.
"आपको ऐसा क्यूँ लगता है कि लड़कियो के साथ हमेशा ग़लत ही होता है....क्या ऐसा कुच्छ है जो आप बताना चाहती है" कुशल बड़े प्यार से पुछ्ता है.

स्मृति - " मेरी लाइफ बाकी लड़कियो की तरह ही रही... कॉलेज लाइफ मे एक लड़के से अफेर चला और वो मुझे बहुत पसंद था लेकिन उसे मुझसे बस सेक्स चाहिए था. उसने बहुत कोशिश की लेकिन मैं मेंटली प्रिपेर नही थी. मुझे ऐसा लगना शुरू हुआ कि जो हम चाहते है वो नही होता. धीरे धीरे मेरी बॉडी सेक्स की डिमॅंड करने लगी, लड़की होने के सारे फ़ायदे उठाए और एक लड़के को पूरा चारा डाला.."

" चारा डाला यानी....?" कुशल उसे बीच मे ही टोकते हुए बोलता है

स्मृति - " अंजाने मे उसे हर हिंट दिया कि मुझे उससे सेक्स चाहिए.. मुझे ऐसा भी लगा कि उसको समझ आ रहा है लेकिन एक दिन वो मुझसे अपने लव को प्रपोज़ करने आया और मुझसे शादी करने के लिए बोला. मुझे उस दिन भी बड़ा अजीब लगा कि यहाँ पर भी दिल की ख्वाहिश पूरी नही हुई. मेरा उससे शादी करने का कोई इरादा नही था. लाइफ मे एक बार फिर से ऐसा लगा कि जो चाहा वो नही मिला..और फिर मेरी शादी हो गयी. शादी के बाद मेरी सेक्स लाइफ बहुत स्ट्रॉंग रही लेकिन हर लड़की के खुद के आइडियास होते है की आज हज़्बेंड ये करे और आज हज़्बेंड ये करे. लेकिन हमेशा होता वही था जो हज़्बेंड चाहता था. धीरे धीरे मैं अड्जस्ट होती गयी और लाइफ बीतने लगी...फिर मेरी लाइफ मे लाइयन आया. लड़की के तरीक़ो से मैने उसे चेक किया और मुझे ये लगने लगा कि मेरी प्राइवसी बनी रहेगी और शायद मैं अपनी प्राइवेट लाइफ को मैं जी पाउन्गि. फार्महाउस तक मे मुझे ये लगने लगा कि अब मेरी सारी ख्वाहिश पूरी हो जाएँगी और मेरी पर्सनल लाइफ पर कोई फ़र्क नही पड़ेगा... लेकिन फिर से मेरा बॅड लक कि वो तू निकला."

कुशल स्मृति की बात सुनकर और सीरीयस हो गया. वो समझ गया कि हर लड़की मस्ती करना चाहती है लेकिन कभी ज़ाहिर नही होने देती है. स्मृति ने आज रात अपने दिल के सारे अरमान उसके सामने रख दिए थे.

" तो जवानी मे आप भी काफ़ी रंगीन रही हैं.." कुशल उसके पास खड़े होकर उसे उपर से नीचे तक देखते हुए बोलता है.

स्मृति - "तुझे दिखाऊ अपनी जवानी की फोटो...?" स्मृति भी एग्ज़ाइटेड होते हुए बोलती है.

कुशल -" प्लीज़ दिखाइए ना...." कुशल भी उत्सुकता के साथ बोलता है. स्मृति अपने मोबाइल मे ढूँढने लगती है और उसे एक फोटो दिखाती है जो उसके मोबाइल मे पता नही कहाँ से उसने सेव कर रखा था. पिक्चर देख कर कुशल शॉक्ड रह जाता है. उसका मूँह खुला का खुला रह जाता है,

"ओह माइ गॉड..आप तो गजब हैं सच मे. मोहित सही था कि उसकी चाय्स आप थी......" कुशल उसका फॅन बन चुका था.

कुशल -" लेकिन आप आज मुझसे गुस्सा क्यूँ हो गयी थी...?" कुशल स्मृति के पास पहुँच कर ये बात बोलता है.

स्मृति -" आज ही लाइयन को बुलाया और वो लेट हो गया. यकीन हो गया कि जो चाहो वो नही मिलता...आज मेरा भी मूड मस्ती का था..." आक्च्युयली मे कुशल प्रीति के साथ था और नीचे स्मृति उसका वेट कर रही थी.

कुशल -"सॉरी..सॉरी.सॉरी.."कुशल अपने कान पकड़ते हुए बोलता है. लेकिन अब स्मृति उसके कॉलर पकड़ती है और अपने पास खींच कर अपने होंठ उसके होंठो पर रख देती है. ऊफ्फ क्या नज़ारा था.स्मृति ने आज फ़ैसला कर ही लिया था कि वो कुशल को चूस लेगी.

" देखती हू आज इस लाइयन मे कितना दम है... प्यार है ना तुझे मेरी गान्ड से... तो चल पहले वो कर जो मैं चाहती हू और फिर तू वो कर सकता है जो तू चाहता है.. कोई बाउंडेशन नही.." स्मृति अपनी नशीली आँखो से कुशल की तरफ देखते हुए बोलती है.

कुशल की तो जैसे लॉटरी लग गयी थी, उसे यकीन नही हो रहा था कि उसने अभी जो सुना वो सच है. स्मृति ने आज अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए थे, वो भी प्यार चाहती थी लेकिन कुशल का नही बल्कि लाइयन का.

स्मृति कुशल का कॉलर पकड़ कर उसे अपने बेड रूम की तरफ ले जाने लगती है लेकिन कुशक के कदम थोड़ा धीरे धीरे आगे बढ़ रहे थे. स्मृति रुकती है और कुशल की तरफ देखती है

"क्या बात है.. लाइयन इतना डर क्यू रहा है" स्मृति फिर से अपने आँखो को मटकाती हुई कुशल से कहती है.

"नही वो.. आक्च्युयली.. पता नही...." कुशल हिचकिचा रहा था

"क्या हुआ इस लाइयन को... बेड पर क्या बोलेगा ये तो अभी घबरा रहा है...." स्मृति फिर से उसके करीब जाकर बोलती है.

"नही वो मोम.. मुझे लग रहा है कि कहीं प्रीति ना जाग रही हो..." कुशल अपने दिल की बात बता देता है.

"तो ठीक है...तू उपर चेक करके आ और इतने मे नीचे तेरा वेट करती हू.वो भी फुल एग्ज़ाइट्मेंट मे.." ये बात बोल कर स्मृति एक बार फिर से उसके लंड को टच कर देती है.

कुशल की लिए ये सेकेंड्स बहुत भारी थे. वो वहीं जम होकर खड़ा रह जाता है और स्मृति मस्ताने स्टाइल मे टर्न होती है और अपनी गान्ड मटकाती हुई अपने रूम की तरफ चली जाती है. जब तक कुशल उसे अपने रूम मे घुसते हुए नही देख लेता है तब तक वो होश मे नही आता है. अब स्मृति के अंदर जाने के बाद कुशल वापिस होश मे आता है और बिना टाइम वेस्ट करे वो उपर की तरफ भागता है.

उपर पहुँच कर उसे दूर से ही दिखाई दे जाता है कि उसके रूम की लाइट जल रही है. लेकिन प्रीति कहीं दिखाई नही दे रही थी, वो धीरे धीरे आगे बढ़ता है और देखता है कि प्रीति बेड पर लेटी हुई है. उसे डोर से दिखाई नही देता कि वो जाग रही है या सो रही है तो धीरे धीरे उसके पास जाता है. पास पहुँचने के बाद उसे पता चलता है कि अच्छे से चुदने के बाद वो तो सो चुकी है. कुशल उसे आराम से आवाज़ भी लगा कर देखता है कि कहीं वो जाग तो नही रही है लेकिन उसकी तरफ से कोई रेस्पॉन्स नही मिलता है. वो समझ जाता है कि प्रीति एक अच्छी नींद मे है और रूम से बाहर आने लगता है. रूम से बाहर आने के बाद वो फिर से नीचे की तरफ बढ़ता है लेकिन फिर से उसे कुच्छ ख्याल आता है और वो फिर से रूम की तरफ वापिस मुड़ता है, रूम के बाहर पहुँच कर वो गेट पकड़ता है और धीरे से उसे बाहर से बंद कर देता है. अब प्रीति अगर खुद भी बाहर आना चाहे तो नही आ सकती थी.

कुशल से एक एक सेकेंड बड़ी मुश्किल से काट रहा था और वो उस गेट को बंद करने के बाद बड़ी तेज़ी से नीचे की तरफ भागता है. सीढ़ियो से वो ऐसे उतार रहा था जैसे घर मे कोई आग लगी हो, अब वो स्मृति के रूम के बाहर था.

उसकी साँसे ऐसे चल रही थी मानो की बहुत लंबी रन्निंग करके आया हो. जिस टाइम कुशल रूम मे एंटर होता है, उस टाइम स्मृति अपने लिप्स पर लिपस्टिक लगा रही थी. माश्कारा बहुत अच्छे से वो लगा चुकी थी और हेर स्ट्रेट हो चुके थे. कुशल को रूम मे एंटर होते हुए वो देखती है और उसे एक प्यारी सी स्माइल देती है. सबसे कमाल बात ये थी कि उसने कुच्छ भी नही पहना था.

"कम ऑन लाइयन..." स्मृति बहुत ही सेक्सी स्टाइल मे ड्रेसिंग टेबल के सामने से हट ते हुए बोलती है.

"आप..आप मुझे बार बार लाइयन क्यूँ बोल रही है.." कुशल भी झिझकते हुए बोलता है. इस बात को सुन कर स्मृति अपने लिप्स पर एक उंगली रखते हुए शांत रहने के लिए बोलती है.

"आज तू मेरे बेड रूम मे लाइयन के तौर पर है ना की कुशल के तौर पर... यू नो... कुशल के साथ मैं खुल कर पेश नही हो पाउन्गि... लाइयन ईज़ नाउ माइ ड्रीम कॅरक्टर नाउ" स्मृति धीरे धीरे कुशल के पास आते हुए बोलती है.

कुशल की लाइफ मे ये एक डिफरेंट ही सीन था, स्मृति धीरे धीरे उसके करीब आती है और अपने जुवैसी लिप्स फिर से कुशल के लिप्स पर रख देती है. आज कुशल को कुच्छ डिफरेंट ही फील हो रहा था, स्मृति के होत चूसने का तरीका कुच्छ अलग ही था और कुच्छ ज़्यादा ही हार्ड तरीके से वो होंठ चुस्ती है. कुशल को शायद ये आइडिया भी नही था कि स्मृति के अंदर का अंदर का जानवर ऐसे बाहर आएगा.

स्मृति कुशल के होंठो को चूस्ते चूस्ते उसकी टी-शर्ट उतारने लगती है. कुशल एक कठपुतली की तरह था और जैसे जैसे स्मृति मूव हो रही थी तो कुशल भी मूव हो रहा था. एक सेकेंड के लिए जैसे ही उन दोनो के होंठ अलग होते है वैसे ही स्मृति उसकी टीशर्ट उतार देती है और अब कुशल उपर से नंगा था.

"बहुत मजबूत है.... तेरी छाती..." स्मृति अपने लिप्स को उससे अलग करते हुए और उसे अपने बेड की तरफ ले जाते हुए बोलती है. उसकी आवाज़ मे एक भारी कंपन थी. इस छोटी सी लिप किस के दौरान उसने कुशल को कुच्छ भी मौका नही दिया कि वो खुद अपनी मर्ज़ी से कर पाता.

बेड के करीब आते ही कुशल को बेड पर एक धक्का देती है. कुशल की तो जैसे आज फॅट ही गयी थी,
अब तक का रेस्पॉन्स तो ऐसा था कि जैसे कुशल कोई लड़की हो.

"बहुत बाल है तेरी छाती पे....मर्द तो जबरदस्त है तू...." स्मृति कुशल के उपर बैठते हुए और और उसकी बालो भरी छाती मे हाथ फिराते हुए बोलती है. कुशल का तना हुआ लंड अब स्मृति की गान्ड के नीचे था. स्मृति नीचे झुकती है और कुशल की बालो भरी छाती मे अपने मूँह को ले जाकर उसके निपल्स को किस करने लगती है.

"उफफफफफफफ्फ़...मोम....यू आर रियली वाइल्ड.... आअहह" कुशल उसके इस आक्षन से रोमांचित हो जाता है.

चटककककककक... और इतनी ही देर मे कुशल को अहसास हो जाता है कि उसने क्या ग़लती करी है क्यूंकी उसके कान पे एक थप्पड़ जड़ा जा चुका था.

"और कितनी बार तुझे बताना पड़ेगा कि आइ आम नोट युवर मोम टुनाइट..." स्मृति गुस्से मे बोलती है. वो अपने इमॅजिनेशन्स से कुशल को दूर ही रखना चाहती थी और पूरी रात लाइयन के साथ गुज़ारना चाहती थी.

"सॉरी..सॉरी डार्लिंग..." कुशल घबरा कर बोलता है और इस पर स्मृति स्माइल करके फिर से उसकी चेस्ट मे अपना मूँह घुसा देती है. उसकी बालो भरी छाती मे वो एक साइड वो अपने हाथ को फिरा रही थी तो दूसरी तरफ उसके निपल्स पर किस किए जा रही थी.

"ओह...ग्रेट..स्वीटी..उफफफफफफफफफफफफफ्फ़...." कुशल तो जैसे आज धरती पर नही था. स्मृति के बालो की खुसबु उसे और पागल कर रही थी. उसका लंड जैसे आज सबसे विकराल रूप मे था.
 
लेकिन स्मृति उसकी बात का जवाब नही देती और अपना हाथ झटक कर अलग कर लेती है. स्मृति आज कुच्छ ज़्यादा ही ड्रिंक करने के मूड मे थी. इतना ड्रिंक करते हुए उसे कभी कुशल ने नही देखा था. हालाँकि वो अपने पूरे होश मे थी लेकिन फिर भी वो अक्सर एक या दो पेग वाली ही खिलाड़ी थी.

कुशल वैसे ही अधूरा रह गया था प्रीति के साथ, वो अपनी आग बुझाना चाहता था. वो धीरे धीरे स्मृति की तरफ बढ़ाता है -

" वहीं रुक जा...." स्मृति के एक हाथ मे ग्लास और दूसरे हाथ से वो उंगली दिखाते हुए वो सोफे से खड़ी हो जाती है. क्लियर विज़िबल था कि वो गुस्से मे थी.

" क्या हुआ. आप इतने गुस्से मे क्यू है..." कुशल तो बस सिचुयेशन को प्यारी बातो से ही कंट्रोल कर लेना चाहता था. वो अपनी जगह रुक कर स्मृति से ये बात बोलता है.

" बकवास ना कर... और पीछे जाकर बैठ.." स्मृति फिर से गुस्से मे बोलती है. कुशल कुच्छ बोलने को होता ही है कि तभी स्मृति फिर से चिल्लाति है.

" मैने कहा की पीछे जाकर बैठ..." कुशल स्मृति की इस डाँट से शांत हो जाता है और चुप चाप जाकर बैठ जाता है. स्मृति अभी भी खड़ी हुई थी और अपने पेग को पीए जा रही थी.

" मोम.ज़्यादा पीना सही नही है.." कुशल अपनी बात ख़तम ही करता है कि..

" लेकिन मोम को फक करना सही है... है ना. सेक्स की नालेज हुए बिना उसकी बॅक साइड को फक करना सही है.. लाइयन बन कर उसे एक फार्महाउस मे फक करना सही है.... बोल ना कुत्ते.. बोलता क्यू नही..." स्मृति ने तो जैसे आज विकराल रूप धारण कर लिया था.

" वो.मोम. प्लीज़ आप गुस्सा.." ये बोलते हुए कुशल फिर से खड़े होने की कोशिश करता है.

"बैठा रह वहीं जहाँ बैठा है.. खड़े होने की कोशिश मत कर..." स्मृति फिर से चिल्लाति है. कुशल तो धीरे धीरे सेक्स तो दूर, वो तो ये सोचने लगा था कि यहाँ से बचा कैसे जाए.

" प्लीज़ आप शांत हो जाइए..और मुझे बताइए कि बात क्या है. अभी मैं उपर गया तो आप सही थी अचानक क्या हो गया आपको. प्लीज़ कंट्रोल रखिए..." कुशल बैठे बैठे स्मृति को समझाने की कोशिश करता है.

" हाँ तूने मुझे उपर से न्यूड देखा तो तुझे लगा कि मैं सही थी. मुझे जीन्स उतारते हुए देखा तो तुझे लगा कि मैं सही थी और जब अब मैं रियल बाते कर रही हू तो तुझे ये लगने लगा कि मैं आउट ऑफ कंट्रोल हो रही हू.." स्मृति फिर से एक पेग डालते हुए बोलती है.

" तो आपको..आपको पता था कि मैं देख रहा हू." कुशल अपना थूक सतकते हुए बोलता है. स्मृति उसकी बात का कुच्छ जवाब नही देती और अपना पेग पीती रहती है.

" मोम प्लीज़ कुच्छ बोलिए ना.." कुशल फिर से बैठे बैठे बोलता है.

स्मृति उसके पास आती है और धीरे से बोलती है " बोलू कुच्छ... तो सुन.. यू आर आ रियल मदर फकर..." आज तो जैसे स्मृति ने फ़ैसला ही कर लिया था कि कुशल का बॅंड बजा कर ही रहेगी. कुशल एक भीगी बिल्ली बना सोफे पर बैठा था.
" मुझे.. मुझे शायद नींद आ रही है.मैं तो उपर जा रहा हू." ये बात आराम से बोलकर कुशल उठ कर सीढ़ियो की तरफ बढ़ता है.

छ्ह्ह्हन्न्न्नक्क्क्क्क्क्क.. स्मृति अपना ग्लास ज़मीन मे फेंक कर मारती है और पूरा काँच फेल जाता है.

वो कुशल की तरफ तेज़ी से बढ़ती है और उसके कॉलर पकड़ कर फिर से उसे सोफे के करीब लाती है और उस पर बिठा देती है. " मैने कहा ना कि.. बैठा रह.. खड़ा होने की ज़रूरत नही है.." स्मृति फिर से उसे चिल्ला कर बताती है.

कुशल को तो जैसे आज हॅपी बर्तडे कर दिया स्मृति ने. वो हैरान था कि आख़िर आज क्या हो गया है.

" मोम मैं आपसे रिक्वेस्ट करता हू कि कुच्छ बताओ तो सही की बात क्या है...." कुशल अपनी आँखे स्मृति की आँखो मे डालते हुए बोलता है.

लेकिन स्मृति कुच्छ नही बोलती. वो भी कुशल के सामने वाले सोफे पर बैठ जाती है और उपर की तरफ देखने लगती है. शायद आज वो कुच्छ ज़्यादा ही परेशान थी. उसका ध्यान अपने ग्लास पर जाता है लेकिन उसे भी वो तोड़ चुकी थी. वो इधर उधर देखती है लेकिन उसे कुच्छ दिखाई नही देता. वो फिर से उपर देखने लगती है.

" मोम आख़िर आप इतना परेशान क्यूँ है.." कुशल फिर से प्यार से पुछ्ता है लेकिन कोई रिप्लाइ नही मिलता उसे.

कुशल फिर से गर्दन नीचे करके बैठ जाता है. स्मृति उसकी तरफ देखती है -

" पता है मुझे आज क्या हुआ है?" स्मृति बहुत सीरीयस होते हुए बोलती है. कुशल की थोड़ी जान मे जान आती है कि चलो वो कुच्छ बोली तो सही.

" यही तो पुच्छ रहा हू कि क्या हुआ है.. आप मुझे बता सकती है और मुझ पर भरोसा कर सकती है." कुशल भी सीरीयस होने का ड्रामा करता है.

" मुझे वोही हुआ है जो हर औरत की लाइफ मे होता है. बस मर्दो की गुलाम बन कर रहना.. यही होती है एक औरत की लाइफ. मर्द उसे जैसे चाहे उसे करता है लेकिन कभी उसकी थिंकिंग के बारे मे कोई नही सोचता है". स्मृति आज कुच्छ ज़्यादा सीरीयस थी.

कुशल धीरे से सोफे से खड़ा होता है और धीरे से जाकर स्मृति के सोफे पर बैठ जाता है. इस बार स्मृति उसे देखती है लेकिन कुच्छ कहती नही.

"मोम आप मुझे बताइए ना कि बात क्या है...आप मुझसे शेर करेंगी तो आपके दिल का बोझ हल्का हो जाएगा." कुशल उसके हाथ पर हाथ रखते हुए बोलता है.

" जा किचन से दो ग्लास लेकर आ..." स्मृति फिर से सीरीयस होते हुए बोलती है. कुशल उसकी इस बात से कन्फ्यूज़ था.

" मोम.ग्लास??? किसलिए...?" कुशल अपने क्वेस्चन को झिझकते हुए पुच्छ ही लेता है.

" क्यूँ मेरे साथ बस फार्महाउस मे ही ड्रिंक कर सकता है.. यहाँ नही...?" स्मृति की इस बात से कुशल को जवाब मिल जाता है की आख़िर स्मृति क्या कहना चाहती है. कुशल बिना टाइम वेस्ट करे वहाँ से खड़ा होता है और भाग कर किचन से दो ग्लास लेकर आ जाता है.

" प्रीति सो गयी...????" स्मृति उन दोनो ग्लस्से को अपने हाथ मे लेने के टाइम बोलती है.

" ये.यस..यस वो सो गयी..." सिचुयेशन को टलने के लिए कुशल बोल ही देता है.

कुशल सोफे पर फिर से बैठ जाता है. अब वो बहुत रिलॅक्स था क्यूंकी स्मृति भी रिलॅक्स थी, स्मृति दोनो सोफे के बीच मे रखी टेबल पर वो ग्लास रखती है. और पीछे से बॉटल को उठा कर लाती है.

स्मृति दोनो ग्लासस मे थोड़ी थोड़ी वाइन डालती है और आइस क्यूब्स डालने के बाद उसे कुशल को ऑफर करती है. कुशल उसे ले लेता है और स्मृति के साथ चियर्स करता है.

" आज मैं बहुत अपसेट हू..." स्मृति एक और सीप लेते हुए बोलती है

" मुझे बताइए ना मोम.." कुशल अपनी बात पूरी भी नही कर पाता कि स्मृति उसे टोक देती है.

"डॉन'ट कॉल मी मोम... आज की रात मैं तुम्हारी मा नही हू.." कुशल को ऐसे लग रहा था जैसे कि आज उसकी मा का माइंड हिल गया है.

" चलिए छोड़िए आप बताएए की बात क्या है.." कुशल भी अपने ग्लास मे सीप लेने लगा था.

" मैं बचपन से लेकर अब तक अपनी लाइफ सोचती आ रही थी तो मुझे दूख हो रहा था... अहसास हो रहा था कि लड़की का तो कोई रोल ही नही है." स्मृति उसे बताती है.

" ऐसी कौन सी बाते है जिनसे आपको ऐसा लगा..." कुशल भी अब इंट्रेस्टेड था जान ने के लिए की आख़िर बात क्या है.

" तुझे कोई जल्दी तो नही है ??" स्मृति पूछती है

" मुझे.. मुझे तो कोई जल्दी नही है.." कुशल तो वैसे ही थोडा नर्वस था लेकिन अब थोड़ा नॉर्मल हो रहा था.

"तो मैं चाहती हू कि तू मेरी बाते एक दोस्त बन कर सुने.. क्यूंकी ये बाते मैं अपने बेटे से नही कर सकती." स्मृति फिर से सीरीयस मूड मे बोलती है.

" मैं तो वैसे भी हमेशा आपको गर्ल फ्रेंड ही समझता हू.." कुशल साइड मे मूँह करते हुए बोलता है. उसकी बात कहने का वॉल्यूम बहुत कम था.

" क्या कहा अभी तूने???" स्मृति ठीक से उसकी बात सुन नही पाती तो पूछती है." नही. नही कुच्छ नही. मैं तो बस यही कह रहा था कि हाँ मैं भी आपको दोस्त मान कर ही आपकी बात सुनूँगा.." कुशल बड़े ही प्यार से स्मृति से बोलता है.

" तो सुन.. मुझे ये बता कि तू मेरे लिए लाइयन क्यूँ बना???" स्मृति अपने ग्लास का एक सीप लेते हुए और कुशल की आँखो मे झाँकते हुए बोलती है.

" क्या मोम.क्या पुछा आपने..??" कुशल सुन चुका था लेकिन फिर भी आक्टिंग करता है जैसे उसने कुच्छ ना सुना हो.

" दोबारा सुनेगा.. तो मुझे ये बता कि तू मेरे लिए लाइयन क्यू बना. और खुल कर बता. मैं तुझे ग़लत नही कहूँगी और कुच्छ नही कहूँगी. बल्कि तुझे अपने दिल की सारी बाते बताउन्गि..." स्मृति अब थोड़ी स्माइली हो चुकी थी.

" मोम.वो..वो..मोम..वो..." आक्च्युयली कुशल को एक्सपेक्टेशन नही थी कि ये रात उसके साथ कितने ड्रामे करेगी.

" देख.. मुझे फिर से गुस्सा मत दिला. तूने कहा ना कि तू ऐज आ फ्रेंड सब बताएगा. तो मैं फिर से पूछती हू कि तू लाइयन क्यूँ बना??" स्मृति फिर से सीरीयस हो जाती है.

" मोम...समझ नही आता कि कहाँ से शुरू करू. क्या शेर करू और क्या नही.. सच मे कन्फ्यूज़ हू....." कुशल बोलता है.

" तेरे पास कुच्छ भी ऐसा नही है जो तूने मुझसे शेर ना किया हो.. ईवन हम बॉडी भी शेर कर चुके है. तो अब मुझे बता और शरमा मत.. मैं भी तेरी उम्र से ही गुज़री हू तो समझ सकती हू.. लाइयन बन कर तो तू बहुत बड़ी बड़ी बाते करता है और आज जब मैं पुच्छ रही हू तो तू शरमा रहा है.." स्मृति उसे कॉन्फिडेन्स देती है.

कुशल -" अगर आप जान ना ही चाहती है तो सुनिए, ये ख्याल मेरे दिल मे जब से आने शुरू हुए जब मैं सिर्फ़ - - साल का था.."

स्मृति - " कैसे ख्याल..??" स्मृति अपने ग्लास मे एक और पेग डालते हुए बोलती है.

कुशल - " यही. आपके साथ वो करने की फीलिंग.." कुशल अभी शरमा रहा था.

स्मृति - " मेरे साथ वो करने की फीलिंग???? ओह्ह्ह यानी मुझे फक करने की फीलिंग... कॅरी ऑन कॅरी ऑन.." स्मृति उसकी हिम्मत बढ़ाती है और उसके सामने एक टाँग पर टाँग रख कर बैठ जाती है.

कुशल - "हाँ.. शायद ऐसी ही फीलिंग... लेकिन मेरे माइंड मे कभी भी ये नही था कि ऐसा हो सकता है.."

स्मृति - " लेकिन मैं यही जान ना चाहती हू की आख़िर किन चीज़ो ने तुझे फोर्स किया कि तू स्मृति को फक करे.. ??"

कुशल - " दरअसल जब किसी भी लड़के का ये खड़ा होना शुरू होता है ना तो ये एक अजीब एज होती है.. कुच्छ समझ नही आता कि आख़िर ये क्या हो रहा है..." कुशल अपने एक हाथ को लंड पर रखते हुए बोलता है.

स्मृति - " ओके..." स्मृति अपने सीप को कंटिन्यू रखते हुए बोलती है.

कुशल - " कुच्छ समझ भी नही आता कि किससे पता करे. बस एक अजीब सी फीलिंग आती है बॉडी मे. तभी कॉलेज मे एक दिन मेरे दोस्त मोहित ने बोला कि यार तू बाथरूम के बाहर खड़ा हो जा और किसी को भी अंदर मत आने दिओ.. मैं वहाँ खड़ा हो गया लेकिन वो खुद एक लड़की के साथ अंदर चला गया.. मैं उस दिन हैरान था.." कुशल भी अब सारी कहानी सुनाने लगा था.

स्मृति -" ओके. फिर क्या हुआ...?" स्मृति भी इंटरेस्ट ले रही थी अब उसकी बातो मे.

कुशल -" मैं वहाँ खड़ा रहा. किसी को अंदर नही जाने दिया. वो करीब एक घंटे के बाद बाहर निकले... दोनो बहुत हॅपी थे. मैं इतना छोटा भी नही था कि ये ना समझ पाऊ कि वो क्या करके आए है.." कुशल अपनी स्टोरी को सुनाता जा रहा था.

स्मृति - " ओके.फिर..." स्मृति अपने खुले हुए बालो मे हाथ फिराते हुए बोलती है.

कुशल - " फिर ये रेग्युलर होने लगा.. मैं उनकी पहरेदारी करता और वो मज़े करते. दिन पे दिन उसकी गर्ल फ्रेंड का निचला हिस्सा बड़ा होता जा रहा था यानी के उसके हिप्स.."

स्मृति - " वाउ. तो तेरी नज़रे थी वहाँ पर... एनीवे आगे बता..." स्मृति स्माइल करते हुए कहती है.

कुशल - " मैने कभी मोहित से कोई सेक्स रिलेटेड बात नही की थी लेकिन जब ये रेग्युलर्ली होने लगा तो एक दिन मैने अकेले मे उससे बात की. मैने उससे पुछा कि तुम लोग सेक्स करते हो ना??? तो वो मेरी बात पर बहुत हंसा.. मुझे बहुत बुरा लगा. उसने मुझे 'कमाल का ढक्कन' भी कहा तो मुझे और बुरा लगा. वो मुझसे बोला कि साले क्या बातरूम मे उसके साथ मैं खाना खाने जाउन्गा...."

स्मृति - " हा हा हा हा हा.." स्मृति को उसकी बात पर हँसी आ जाती है

कुशल - " अगर आप ऐसे हँसेंगी तो जाओ मैं कुच्छ नही बताता..." कुशल सीरीयस होते हुए बोलता है.

स्मृति -"सॉरी.सॉरी.. यू कॅरी ऑन प्लीज़.. इंट्रेस्टिंग..." स्मृति बड़ी मुश्किल से अपनी हँसी को शांत करते हुए बोलती है.

कुशल - " उसकी गर्ल फ्रेंड दिन पे दिन बदलती जा रही थी. आगे से भी और पीछे से भी.. वो ही एक ऐसी लड़की दिखाई देती स्कूल मे जो सबसे हॅपी थी. वो दोनो जब भी मौका मिलता था अपना काम कर लेते थे. स्कूल का बाथरूम तो क्या क्लासरूम मे भी उन्होने सब कुच्छ किया और हमेशा मैं बस बाहर खड़ा रहता.."

स्मृति - "गुड मिस्टर. चोकीदार.." स्मृति हंसते हुए बोलती है

कुशल -" आप फिर मेरा मज़ाक उड़ा रहीं है.." कुशल फिर से सीरीयस होते हुए बोलता है.

स्मृति - "फिर से सॉरी दोस्त. प्लीज़ रुक मत कॅरी ऑन कर. सॉरी.." स्मृति भी अब धीरे धीरे खुल रही थी.

कुशल - " एक दिन मैने मोहित से दिल की बात की कि यार मेरा पूरी रात वो खड़ा रहता है.. मैं क्या करू...."

स्मृति - " तो बाबूजी का बस - - कि उम्र मे ही खड़ा होना शुरू हो गया था..शाबाश." स्मृति कुशल के लंड की तरफ देखते हुए बोलती है.
कुशल -" मोहित मेरी बात सुन कर बहुत हंसा.. लेकिन उसने मुझे बिल्कुल भी गाइड नही किया. उसने मेरा मज़ाक उड़ा कर बात को टाल दिया.. वो जब अपना चेहरा अपनी गर्ल फ्रेंड की छातियों मे छुपाता था तो मुझे बहुत बुरा लगता था. कुच्छ ही महीनो मे मोहित की गर्ल फ्रेंड बेहद ज़्यादा गदरा गयी थी और दोनो के रीलेशन बढ़ते ही जा रहे थे."

स्मृति - "ओये होये मोहित से ज़्यादा तो तू था उसका दीवाना.. " स्मृति भी ज़्यादा इंटेरेस्ट लेने लगी थी. कुशल उसकी जानकारी के लिए अपने मोबाइल मे उसका फोटो निकाल कर दिखाता है -
स्मृति - "चल अब इस फोटो को बंद कर और आगे बता.." . शायद उस फोटो से जेलस होने लगी थी.

कुशल - " फिर स्कूल टाइम मे ही वो एक बार आपसे भी मिला और आपने उस दिन पहना हुआ था."

स्मृति - "मुझसे मिला??? मुझे याद नही..." स्मृति सोचते हुए बोलती है

कुशल -" आपको कैसे याद होगा हम सब इतने बड़े थोड़े ही थे.. वो आपको जाते हुए देखता रहा और उसकी गर्ल फ्रेंड स्कूल के फर्स्ट फ्लोर से उसे देख रही थी."

स्मृति -" लेकिन वो मुझे क्यूँ देख रहा था...??"

कुशल -" बाय्स स्कूल मे सब की मोम के टॉपिक भी होते है... और आपको बता दू कि आपको ही सबसे हॉट कहा जाता था. ज़्यादा लड़के मुझसे दोस्ती करना चाहते थे और लड़किया मुझसे जलती थी.."

स्मृति - " रियली??? कमाल है... एनीवे आगे बताओ.." स्मृति अपनी तारीफ से खुश भी हो रही थी.

कुशल - " अगले दिन जब मैं स्कूल पहुँचा तो मोहित और उसकी गर्ल फ्रेंड की लड़ाई हो रही थी. मैं दूर खड़ा होकर सुन रहा था. मोहित बोल रहा था कि हाँ देख रहा तो क्या हुआ. उसकी गर्ल फ्रेंड बोलती है कि तो उसकी उसमे घुस जा ना जाकर."

स्मृति - "किसमे घुस जा जाकर??? समझ नही आया.. सॉफ बता ना..."

कुशल -" उसकी गर्ल फ्रेंड ने बोला कि जा और उसकी गान्ड मे घुस जा अगर इतनी पसंद है तो. मुझे समझ नही आया कि वो क्या बात कर रहे थे. मोहित ने बोला कि साली अगर उस जैसी गान्ड मुझे मिल जाएगी ना तो तुझपे कोई ठुकेगा भी नही. मैं ये सब बाते सुन रहा था. उसके बाद उसकी गर्ल फ्रेंड बोलती है कि वो साली यहाँ आती ही अपनी मटकती गान्ड दिखाने के लिए है, और तुझ जैसे आशिक उस पर लट्तू हो जाते है. मैं समझ गया था कि किसी और लड़की का मॅटर है. इसके बाद मोहित बोलता है कि साली तेरी भी तो कब से चोद रहा हू तो तेरी गान्ड अभी तक ऐसी क्यूँ नही है. उसके बाद उसकी गर्ल फ्रेंड को गुस्सा आ जाता है और वो एक थप्पड़ मोहित को जड़ देती है और बाहर चली जाती है."

स्मृति - " हा हा हा हा. कुशल ने जिनके लिए पहरे दिए वो भी अलग हो गये.."

कुशल - "आप फिर से ऐसी बात शुरू कर रहीं है..." कुशल फिर से सीरीयस होता है.

स्मृति - "ओके.ओके. बताते जाओ...." स्मृति फिर से अपने आप को कंट्रोल करते हुए बोलती है.
कुशल - "फिर कुच्छ दिन मैने उन दोनो को साथ नही देखा.. एक दिन मोहित मेरे एक और क्लासमेट के साथ बैठा था, मैं क्लास मे घुसा तो वो दोनो बात कर रहे थे कि यार बड़ा गजब माल है. मैं चुप चाप सुन रहा था तो मोहित कह रहा था कि कसम से एक बार दे दे तो दुनिया की सारी खुशिया लूटा डू उसके लिए. मैं समझ गया कि ये अपनी गर्ल फ्रेंड की बात नही कर रहा है. मोहित आगे बोलता है कि माल मिले तो ऐसा मिले वरना मिले ही ना. ये झल्ली लड़कियो मे कोई दम नही होता. मैं हैरान था कि इतनी मस्त गर्ल फ्रेंड को वो झल्ली कह रहा था.."

स्मृति - "तो पहरा देते देते वो इतनी मस्त लगने लगी...?" स्मृति अपनी आँखो के इशारे से पूछती है.

कुशल उसकी इस बात से थोड़ा शर्मा जाता है.

स्मृति - " चल अब लड़कियो की तरह शरमा मत और जल्दी बता की क्या हुआ...." स्मृति को बड़ी उत्सुकता थी जान ने की.

कुशल - " इससे आगे की कहानी आपको शॉक्ड कर देगी.." कुशल सीरीयस होते हुए बोलता है.

स्मृति - " ऐसा क्या हो गया. जल्दी बता जल्दी बता..."

कुशल - " यूँ ही दिन बीत गये. एक दिन मैने देखा कि मोहित की गर्ल फ्रेंड कुच्छ फ्लवर्स लिए स्कूल के टेरेस की तरफ जा रही थी.. आकर टेरेस पर उस दौरान कोई नही होता है. मैं भी चुप चाप चल दिया उसके पीछे पीछे लेकिन उसे पता नही चलने दिया.."

स्मृति -" फिर..."

कुशल -"वो उपर पहुँची तो वहाँ पर मोहित बैठा हुआ था... वो फ्लवर लेकर उसके पास जाती है और बोलती है कि मोहित सॉरी प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो. उसका मोहित के बिना मन नही लग रहा था लेकिन मोहित उस पर चिल्लाने लगा कि तुझे मेरी नही मेरे लंड की याद आ रही थी और इसलिए वो माफी माँगने आई है. उसकी गर्ल फ्रेंड बोलती है कि ऐसी कोई बात नही, वो सिर्फ़ मोहित को चाहती है लेकिन मोहित उसकी नही सुनता.."

स्मृति -" फिर क्या हुआ....?"

कुशल -" मोहित की गर्ल फ्रेंड बहुत कोशिश करती है लेकिन मोहित नही मानता. इससे मोहित की गर्ल फ्रेंड और भी ज़्यादा गुस्से मे आकर उस पर चिल्लाने लगती है कि लगता है उसने तेरे लिए इंतज़ाम करा दिया है तभी तो इतना उच्छल रहा है.."

स्मृति -" उसने...किसने.?"

कुशल -" वो आगे बोलती है कि मैं सब समझती हू तुझे बस अब उसकी गान्ड दिखाई देती है और जब तक तू उसे नही चोदेगा जब तक तुझे चैन नही मिलेगा...."

स्मृति - "किसकी गान्ड...???" स्मृति के मूँह से अचानक निकल जाता है और जैसे ही उसे अहसास होता है वो चुप हो जाती है. "ओह सोररय्यययी..."

कुशल -" पता है वो किसकी गान्ड के पीछे लड़ाई थी..?"

स्मृति (सीरीयस होते हुए)- " किसकी....?"

कुशल -" आपकी..."

स्मृति की तो जैसे सारी पी हुई उतर जाती है. वो अपने सोफे से खड़ी हो जाती है

" क्य्ाआआआआअ...." स्मृति आश्चर्या से पूछती है.

" यस.. मुझे तो पता ही नही चला कि कब आप मेरे स्कूल मे 'मोस्ट सेक्सीयेस्ट मोम' बन गयी थी. और मुझे पता भी कैसे चलता क्यूंकी कोई मेरे सामने क्यूँ बात करता. वो तो मैने उनकी जब और बाते सुनी तो मुझे समझ आया कि कहानी क्या है." कुशल बताता है स्मृति को.

"ओह माइ गॉड.. हाउ इट ईज़ पासिबल... मोहित तो बच्चा है.. और वो मेरे बारे मे... आइ डॉन'ट बिलीव दिस..." स्मृति आश्चर्य से बोलती है.

कुशल -" इस इन्सिडेंट के बाद मैने मोहित से बात की. मैने उसे बोला कि मोहित सच बता ये क्या ड्रामा है तो थोड़ी ही देर मे उसने आक्सेप्ट कर लिया कि ये सारा ड्रामा तेरी मोम यानी आपकी वजह से है. उसने मुझे बहुत गंदी बाते की जैसे देख अपनी मा की गान्ड साले.. करोरो मे एक होती है ऐसी. उसने मेरे दिमाग़ मे आपकी एक अलग ही पिक्चर बना दी. उसने मुझे ऑफर भी दिया कि मैं आपकी सेट्टिंग कैसे ही उससे करा दू तो वो अपनी गर्ल फ्रेंड का काम मेरे से करा देगा..."

स्मृति -" तो. तूने क्या फ़ैसला किया था..." स्मृति थोड़ा सा शरमाते हुए बोलती है. अपने आप को वो बहुत वॅल्यूड फील कर रही थी.

कुशल -" मैने उसके ऑफर को आक्सेप्ट नही किया. लेकिन उस दिन से आपको मैं किसी और ही नज़र से देखने लगा. उमरा कम थी लेकिन जज़्बात बडो से भी ज़्यादा आ गये थे. आपको कई बार हिंट भी दिया जैसे आपको हग करने के टाइम आपके बूब्स को ज़्यादा प्रेस करना, आपको पीछे से हग करते हुए आपकी गान्ड का आइडिया लेना, आपकी हर आक्टिविटी मुझे पागल करती थी. चाहे मैं आपको आगे से देखु या पीछे से मुझे कुच्छ होता था. लेकिन आपको कभी कुच्छ समझ नही आया."

स्मृति - "ओह्ह तो ये काफ़ी टाइम से चलता आ रहा था और मुझे अहसास ही नही था. और आज कल ये मोहित कहाँ है...?"

कुशल -" आप मोहित के बारे मे क्यूँ पुच्छ रही है...?"

स्मृति - " नही बस ऐसे ही. लेकिन चल तू आगे बता कि तू लाइयन कैसे बना."

कुशल -" ऐसा करीबन तीन साल चला. और आप डेली और भी ज़्यादा सेक्सी होती गयी.. मुझे कुच्छ भी समझ नही आता था. अगर कोई लड़की लाइन भी देती तो आक्सेप्ट करने का मन भी नही करता था, बस आपका और आपका शौक चढ़ गया था.
 
कुशल एक बार को तो कुच्छ बोल ही नही पाया. अभी कुच्छ टाइम पहले ही उसने प्रीति की चूत फाडी थी और वो अब ऐसे कामुक कपड़े पहन कर बैठी थी.

सेक्स और ड्राइविंग, ये शायद ऐसी दो चीज़े है जो स्टार्टिंग मे हर इंसान खूब दबा के करता है. कुशल को नीचे स्मृति भड़का चुकी थी और यहाँ फिर से एक बार प्रीति भी तैयार लग रही थी.

एक तरफ सिंगल टाइम फक्ड प्रीति थी, जो की बेहद सेक्सी, यंग और बेहद टाइट थी तो वहीं दूसरी तरफ स्मृति एक मेच्यूर लेडी जो कि काफ़ी एक्सपीरियेन्स दे सकती थी.

" मैं..... मैं तो ऐसे ही मम्मी से बात कर रहा था........." कुशल घबराते हुए प्रीति की बात का जवाब देता है.

प्रीति अपनी जगह से खड़ी होती है. वो एक अच्छी हाइट वाली स्लिम गर्ल थी, सेक्सी तो वो थी ही और उपर से उसने अल्ट्रा सेक्सी क्लोद्स भी पहन रखे थे धीरे धीरे वो कुशल के पास जाती है और उसके सामने खड़ी हो जाती है, उसके कॉलर को पकड़ कर अपनी तरफ खींचती है.

"ऐसा क्याआअ कर रहा था जो तुझे मेरी याद नही आई........" प्रीति की आवाज़ ऑटोमॅटिकली बहुत ज़्यादा सेक्सी हो चुकी थी.

कुशल का चेहरा उसके बूब्स के बहुत करीब था.

" मैं तो तुझे कोई और कपड़े देकर गया था........ और तूने.... तूने बदल दिए वो कपड़े........" कुशल घबराते हुए बोलता है.

" क्याअ तुझे बस मेरे कपड़े ही दिखाई दे रहे है...... उसके अंदर कुच्छ नही........" प्रीति आज कुच्छ ज़्यादा ही रोमॅंटिक थी.

प्रीति अब उसकी टीशर्ट पकड़ती है और खींच कर अंदर उसे उसके रूम मे ले आती है.

" पुचह......" अंदर आते ही वो अपने लिप्स उसके गाल पर रख कर एक किस कर देती है.

" प्रीति...... वो.... वो....." कुशल को नीचे की भी टेन्षन थी.

" क्यूँ इतना घबरा रहा है......." ये बोल कर प्रीति अब अपने होंठ उसके होंठ पर रख देती है.

प्रीति को कोई शक ना हो इसलिए कुशल भी उसे किस मे सपोर्ट करता है लेकिन अभी भी उसका ध्यान नीचे की तरफ ही था.

प्रीति अपने वाइल्ड रूप मे आने लगी थी और उसका सीना तेज़ी से उपर नीचे हो रहा था. लेकिन कुशल की तो जैसे फटी हुई थी लेकिन वो चेहरे से नही दिखा रहा था.

प्रीति अपना हाथ सीधे उसके लंड पे ले जाती है और उस पर हाथ रखते ही प्रीति को जैसे झटका सा लगता है क्यूंकी पहले स्मृति और अब प्रीति की वजह से वो लंड अब एक महा लंड बन गया था टाइट होकर.

एक पल के लिए दोनो के होंठ अलग होते है. प्रीति स्टाइल मे अपने बाल अपने हाथ से पीछे की और करती है और लंड को टाइट भींचते हुए कहती है -

" मैं समझ सकती हू कि तेरे इसको मैं कितनी पसंद आई............" प्रीति अपनी सेक्सी आइज़ से कुशल की तरफ देखते हुए बोलती है.

" तुझसे भी ज़्यादा तेरी चूत पसंद आई........" कुशल प्रीति के टच से ज़्यादा एग्ज़ाइटेड हो रहा था.

" क्या सभी लड़के पुसी को वोही बोलते होंगे जो तू बोलता है......." प्रीति स्माइल करते हुए और उसके लंड पर हाथ फिराते हुए बोलती है.

" लड़के क्या लड़किया भी........ चूत को चूत ही बोलती है..........."कुशल का ध्यान अपने लंड की भी तरफ था. अब तक प्रीति लंड को बाहर निकाल चुकी थी.

" लड़कियो को बदनाम ना कर......." फिर से एक प्यारी सी स्माइल के साथ प्रीति कुशल से बोलती है.

" अच्छा सच बता..... कभी तुझे लंड के सपने नही आए......." पंकज प्रीति से पुछ्ता है. प्रीति अपने हाथ अब तक उसके खाली लंड पे फिराने लगी थी.

" मुझसे क्या पुछ्ता है..... लड़के नही देखते क्या पुसी के सपने....." प्रीति कुशल को रिप्लाइ करती है.

" लड़के सपने नही लेते पुसी के...... चोद देते है उसे मिलते ही......." कुशल की इस बात से प्रीति को हँसी आ जाती है.

" बाते बनाना ना तो कोई तुझसे सीखे......" ये बोलते हुए प्रीति अपने एक हाथ को अपने एक बूब्स पे ले जाती है और धीरे से उसे अपनी ब्रा से बाहर निकाल देती है.

कुशल का लंड अभी भी उसके हाथ मे था. कुशल आगे बढ़कर उसकी कमर को पकड़ता है और उसके लिप्स पर एक किस करता है.

" प्रीति... यू आर डॅम सेक्सी... अच्छा सुन मुझे लगता है की मुझे अभी नीचे जाना चाहिए क्यूंकी मोम अकेली हैं ना....." कुशल सिचुयेशन को देखते हे बोलता है.
प्रीति फिर से कुशल के करीब आकर और चिपक जाती है और बोलती है -

" बड़ी फिक्र कर रहा है मोम की....... मेरी फिक्र नही है तुझे.......?" प्रीति उसकी आँखो मे आँखे डालती हुई बोलती है.

" नही वो.. वो... मुझे डर है कि कहीं वो उपर ना आ जायें.........." कुशल फिर से बात को पलटने की कोशिश करता है.

प्रीति कुशल से थोड़ा दूर हट जाती है और बेड पर जाकर आराम से सीधा लेट जाती है.

प्रीति का एक बूब ऑलरेडी बाहर ही था. अब वो अपना हाथ पैंटी पर ले जाकर उसकी स्ट्राइप अपनी चूत से साइड मे करती है.

" लेकिन....... तेरे लिए तो ये तरस रही है मेरी जान........." प्रीति अपनी चूत मे एक उंगली घुसा देती है.

ये बहुत ही ज़्यादा एग्ज़ाइटेड कर देने वाला सीन था. कुशल अब सब भूल चुका था, उसे बस वो याद था जो अब उसके सामने था.

वो आगे बढ़ता है....... अपने दोनो हाथो से उसकी टाँगो को फेलाता है और अपने होंठ को उसको चूत पे रख देता है.

" आआहह..... कुशालल्ल्ल्ल........ आइ....... लव...... यू............" प्रीति की आँखे बंद हो जाती है. लड़कियो को इतना मज़ा सेक्स मे भी नही आता जितना की उन्हे अपनी चूत चटवाने मे आता है.

" म्*म्म्मममह.........कुशल..............." प्रीति मस्त हो चुकी थी.

प्रीति की पैंटी की स्ट्राइप को पकड़ कर कुशल अपनी जीभ को उसकी चूत मे अंदर घुसाए जा रहा था. प्रीति की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. पानी तो पहले से ही था लेकिन अब और भी ज़्यादा रसीली हो चुकी थी उसकी चुत.

" आआआआआआईयईईईई.....म्*म्म्ममममममममममममज....." प्रीति के साउंड का वॉल्यूम बढ़ता जा रहा था.

इससे पहले जब कुशल और उसका मिलन हुआ था तो एग्ज़ाइट्मेंट मे कुशल ने उसकी पुसी को अपनी जीभ से टेस्ट नही कराया था तो आज वो तमन्ना पूरी हो रही थी प्रीति की.

" कुशालल्ल्ल्ल........ माइ मॅन......ग्रेट.....लाइक दट प्लीज़.........थोड़ा और.............." प्रीति ऑटोमॅटिकली ही पता नही मूँह से क्या निकले जा रही थी. वो अपनी चूत को और उछालने भी लगी थी.

कुशल बार बार अपने होठ भी रगड़ देता था उसकी चूत से.... जिससे प्रीति की पूरी बॉडी मे झुरजुरी हो जाती थी.

" आइ.......लव.....ऊवूऊवूयूयूयुयूवयू.......आअहह......म्*म्म्मममममह...इस्शह......" प्रीति अपनी चरम सीमा पर थी.

कुशल भी अपनी जीभ को अब तेज़ी से हिलाने लगा था. प्रीति की चूत पानी पानी हो चुकी थी.

" फक्क मी....... प्लीज़......कुशल फक मी............ आअहह..... आहह....ऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ......." कुशल अपने सीधे हाथ से उसकी चूत मे उंगली भी चला रहा था.

उसकी चूत अब लंड के लिए बेचैन थी. कुशल सही मौका देख कर अपने को उसकी चूत से हटता है और अपनी टीशर्ट उतारता है.
बिना टाइम वेस्ट करे वो नीचे से भी बिल्कुल नंगा हो जाता है. उसका लंड किसी बड़े हथियार जैसा लग रहा था.

वो आगे बढ़ता है और प्रीति की कमर को पकड़ कर उल्टा कर देता है. प्रीति तो जैसे लंड के लिए भूखी थी. जैसा कुशल कर रहा था वो वैसे ही कर रही थी.

अब प्रीति पेट के बल लेटी हुई थी बेड पर और उसके हिप्स कुशल के सामने थे. कुशल एक बार फिर से उसकी कमर पर हाथ रखता है और उसके हिप्स को थोड़ा उपर उठा देता है.

अब प्रीति बिल्कुल डॉगी पोज़िशन मे थी -" अपने हिप थोड़े बाहर निकाल ......." कुशल प्रीति से बोलता है और प्रीति भी अदा मे अपनी गान्ड को बाहर निकाल लेती है. चूत जैसे एक दम से क्लियर हो जाती है कुशल को.

कुशल फिर से उसकी गान्ड मे अपना मूँह घुसा कर उसकी चूत चाटने लगता है. ये प्रीति के लिए एक नया एक्सपीरियेन्स था कि कैसे बॅकसाइड से कुशल ने अपना मूँह उसकी चूत तक पहुँचा दिया.

" आआआहह...प्लीज़ और मत तरसा....... फक मी प्लीज़.........." प्रीति अपनी गान्ड को थोडा सा बाहर करते हुए बोलती है.

कुशल वहाँ से हट जाता है. अपने हाथो पर थोड़ा थूक लगा कर अपने लंड पर लगाता है. उसका लंड थूक से भीग चुका था, लंड की हर नस क्लियर दिखाई दे रही थी.

कुशल उस लंड को उसकी चूत पर टिकाता है और एक धक्का लगाता है - फुचह....... साउंड के साथ लंड का सुपाडा अंदर पहुँच जाता है. आज साउंड कुच्छ डिफरेंट था जब लंड अंदर गया.

" आआआआआआहह........" प्रीति एक बार फिर से चिल्लाती है. लेकिन अब की बार शायद पेन इतना नही था जितना की पहली बार मे हुआ था. प्रीति को देख कर भी अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि पेन तो उसका अच्छे वाला हुआ है.

कुशल उसकी गान्ड पे दो थप्पड़ जामाता है. जैसे उसकी गान्ड पे मोजूद मांसल हिस्सा हिलता है तो उसे देख कर कुशल मस्त हो जाता है और फिर प्रीति की कमर पकड़ कर एक करारा धक्का लगाता है.

" आआऐईयाीईईईईईई....... आराम से........" शायद ये स्ट्रोक कुच्छ ज़्यादा ही स्ट्रॉंग था और लंड काफ़ी अंदर जा चुका था.

कुशल फिर से उसकी कमर को पकड़ कर लंड बाहर निकालता है और धीरे से फिर से अंदर घुसा देता है. फिर से बाहर और फिर से अंदर......

प्रीति अपने एक हाथ को अपने मूँह के पास ले जाकर उस पर थोड़ा सा थूक लगाती है और उसे अपने पेट के नीचे से ले जाकर अपनी चूत पर लगाती है.

" उफफफफफफफफ्फ़...... कुशल.............आऐईयईईईईईई.........आहह....ऊऊऊऊ" प्रीति का दर्द कम होता जा रहा था और मज़ा बढ़ता जा रहा था.

फुच....फुचह..फुचह....फुच

ऐसे साउंड फिर से आने शुरू हो गये थे रूम मे. कुशल ने स्ट्रोक लगाने शुरू कर दिए थे और यही नही प्रीति भी बार बार अपनी गान्ड को पीछे कर कर के कुशल को सपोर्ट कर रही थी.

"एसस्स्स्स्सस्स.....उफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़........ग्रेट.......फकक्क्क्क मी........ओह...." प्रीति जैसी लड़की के मूँह से निकलती हुई ऐसी सेक्सी आवाज़ो ने कुशल को और भी ज़्यादा मजबूर कर दिया था कि वो और तेज धक्के लगाए.

" फक्क्क्क माइ पुस्स्स्स्स्सययययी........ आआआआआआआहह........फाड़दे ईससीए......कुशाल्ल्ल.........."
जब करीबन 8 इंच का तगड़ा लंड बाहर निकाल कर स्रर्र्ररर से दोबारा अंदर जाता तो प्रीति की चूत तो जैसे धन्य हो जाती. उसकी चूत खुलती जा रही थी और कुशल का लंड और भी मोटा होता जा रहा था. प्रीति बार बार अपना चेहरा पीछे कर रही थी, उसकी सेक्सी आइज़ कुशल को और भी ज़्यादा स्पीड के साथ काम करने के लिए इन्वाइट कर रही थी.

प्रीति की गान्ड और कुशल की थाइस जब स्ट्रोक लगाने के दौरान आपस मे टकरा रहे थे तो ऐसा लग रहा था कि मानो कहीं कोई सीरीयस लड़ाई हो रही हो.

" आअहह.......फाड़ दे मेरी कुशल........उफफफफफफफफफफ्फ़.............आइ.....लव........यू..........अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह........"

फूच...फूच..फुच्च.फूच...फूच..फुच्च.... कुशल के बेड पर हो रही प्रीति की चुदाई से आ रहे साउंड को अगर कोई भी सुनता तो आइडिया लगा लेता कि ये कोई हार्ड फक्किंग सेशन चल रहा है.

" आआहह........ आइ.........एम.......कमिंग............ आअहह आहह आहह.........." और इसके साथ ही प्रीति की चूत अकड़ जाती है.

कुशल अभी भी फुल स्पीड मे लगा हुआ था. लेकिन प्रीति की चूत का पानी निकल चुका था.

कुच्छ सेकेंड्स के लिए सब नॉर्मल था लेकिन फिर प्रीति को जैसे परेशानी होने लगी.

" कुशल....... जल्दी कर ना प्लीज़.... कितना टाइम लगेगा....."

कुशल धक्के लगाने मे लगा हुआ था.

" कुशल... मुझे जलन हो रही है प्लीज़ जल्दी कर ना...."

लेकिन कुशल अभी भी लगा हुआ था. कुशल के लंड की मोटाई को अब झेलना तो जैसे प्रीति के बस का नही था.

" कुशल......... अब...... मुझे पेन हो रहा है........... सोर्र्र्ररयययययययययी....." और ये बोलते ही वो आगे हो जाती है और लंड बाहर.

कुशल को तो जैसे अब होश आया था. प्रीति के इस सडन रिक्षन की तो जैसे कुशल को भनक भी नही थी. कुशल का लंड बाहर और उसका चेहरा एक दम तमतमाता हुआ लाल हो चुका था.

" ये क्या बदतमीज़ी है.........?" कुशल गुस्से मे प्रीति से पुछ्ता है.

" बदतमीज़ी तो तू दिखा रहा था.... जब मुझे पेन हो रहा था तो तू जल्दी नही कर सकता था." प्रीति उल्टा लेटे लेटे जवाब देती है.

कुशल उसकी ये बात सुनकर जैसे पागल हो जाता है -

" जब तेरी चूत मे इतनी जान नही है तो क्यू लंड के पीछे भागती है.......?" कुशल बेड से खड़ा होता हुआ बोलता है.

" मुझसे बकवास करने की कोई ज़रूरत नही है.... समझ आया तुझे....." प्रीति गुस्से मे बोलती है.

कुशल उसकी इस बात से और भी ज़्यादा गुस्से मे आ जाता है. जब किसी लड़के के साथ ऐसा होता है तो वो अपना आपा वाकई मे खो सकता है और इसका आइडिया प्रीति को नही था.

कुशल गुस्से मे आगे बढ़ता है और उसके बाल पकड़ कर उपर की ओर खींच लेता है

कुशल अपना दूसरा हाथ सीधा उसकी गान्ड पर ले जाता है. इससे पहले की प्रीति कुच्छ सोचती कुशल अपनी उंगली उसकी गान्ड के छेद मे घुसा देता है. वो छेद बहुत ही ज़्यादा टाइट था.

"आआऊऊऊऊऊऊओ....." प्रीति चिल्ला पड़ती है.

" अब तो तेरी चूत फटी है...... ज़्यादा बोलेगी तो तेरी गान्ड भी मार लूँगा. एक उंगली से चिल्ला रही है तो सोच कि इतने मोटे लंड से क्या होगा." कुशल प्रीति को बोलता है.

प्रीति कुशल की इस बात का कोई जवाब नही देती क्यूंकी वो समझ चुकी थी कि इस टाइम कुच्छ भी बोलना सही नही है.
खैर पता नही क्या सोच कर कुशल अपनी उंगली को बाहर निकालता है और प्रीति को छोड़ कर अपने कपड़े पहन ने लगता है.

प्रीति अभी भी चुप थी लेकिन जब कुशल रूम के बाहर जाने लगता है तो वो पूछती है -

" कहाँ जा रहा है......." उसकी आवाज़ मे थोड़ी केर थी.

" तेरी मा चोदने............" कुशल की ये बात सुन कर फिर से प्रीति की हँसी छूट जाती है.

आक्च्युयली प्रीति इस बात को कुशल का गुस्सा समझ रही थी और कुशल ने एक अपने दिल की बात बता दी थी.

इससे पहले की प्रीति कुच्छ बोलती कुशल रूम से चला जाता है.

प्रीति का प्लान भी पता नही क्या था लेकिन उसको देख कर ये नही लग रहा था कि वो कुशल के रूम से जाने के मूड मे है.

कुशल का मूड ऑफ हो चुका था. कहाँ वो इतनी टाइट चूत मार रहा था और कहाँ उसका एंडिंग पॉइंट होने से पहले ही उसके साथ चीटिंग हो गयी.

धीरे धीरे वो नीचे आता है. लेकिन नीचे आते ही उसको हॉल मे बैठी हुई स्मृति दिख जाती है. उसने अभी भी टीशर्ट आंड जीन्स पहनी हुई थी.

वो हॉल मे सोफे पर बैठी थी और हाथ मे अगेन वाइन का ग्लास था. कुशल को थोड़ी राहत मिलती है.

" हाई मोम....." कुशल फिर से स्माइल करते हुए कहता है.

लेकिन स्मृति उसे कोई रेस्पॉन्स नही देती. वो अपने ग्लास को हाथ मे लेकर ड्रिंक करने मे बिज़ी रहती है.

कुशल उसके साथ आकर सोफे पर बैठ जाता है. लेकिन स्मृति उसकी तरफ नही देखती.

" क्या बात है मोम.... गुस्सा लग रही हो......" कुशल फिर से स्माइल करते हुए कहता है.

लेकिन स्मृति फिर भी उसे कोई रिप्लाइ नही देती. कुशल थोड़ा सा आगे बढ़कर अपना हाथ उसके हाथ पर रखते हुए बोलता है -" क्या बात है मोम.... आप बात क्यू नही कर रही हो.
 
पंकज बाथरूम में घुस जाता है और आराधना इधर अपने कुंवारेपन को खोने वाली बात सोच कर मुस्कुरा रही थी.ये काफी पेनफुल एक्सपीरियंस था लकिन आज उसे ख़ुशी थी की पंकज ने उसे अस अ फकिंग पार्टनर एक्सेप्ट कर लिया है. वो धीरे धीरे अपना एक हाथ नीचे ले जाती है और अपनी चुत पे लगाती है. चूत से ऊपर का सारा एरिया पंकज के वीर्य से भरा हुआ था. वो एक ऊँगली को उस वीर्य पे लगाती है और फिर चिपचिपाहट का आईडिया लगाती है, फेविकोल से भी मजबूत.... आराधना उसकी क्वालिटी को देख कर मन ही मन बड़बड़ाती है. उसके चेहरे पर अलग ही मुस्कान थी. वो अभी भी अपनी टाँगे फैला कर लेटी हुई थी उसको ऐसा लग रहा था की जैसे अंदर तक हवा पहुँच रही हो लकिन रियलिटी ये थी की पंकज के मुसल जैसे लंड ने उसकी चूत को अच्छे से खोल दिया था. चूत के दोनों होठ आपस में अलग हो चुके थे.वो फिर अपनी फिंगर से अपनी चूत का इंस्पेक्शन करती है. पहले एक फिंगर डालती है और फिर दूसरी. आज सटासट ऊँगली अंदर जा रही थी वो हैरान थी की कहाँ मस्टरबैशन में दोनों उँगलियाँ मुश्किल से अंदर जाती थी और आज वो ही उँगलियाँ सटक से अंदर जा रही है.पंकज के मरदाना लंड से आराधना अब और भी ज्यादा इम्प्रेस हो चुकी थी
पंकज वाशरूम में एक शावर लेकर बहार आता है. उसने टॉवल बांधा हुआ था, आराधना को थोड़ी हैरानी हुई की कहाँ वो एक दम नंगी पड़ी थी और वो भी अपनी टाँगे फैला कर और कहाँ पंकज अपने लंड पर टॉवल लपेट कर आया था, क्या..... क्या.... मैं भी कपडे पहन लू........., आराधना बहुत ही शरमाते हुए ये बात कहती है, हाँ पहन सकती हो....,पंकज वार्डरॉब से अपने कपडे निकलते हुए बोलता है. आराधना खड़ा होने की कोशिश करती है लकिन अगले ही पल उसे शर्म आने लगती है की क्या वो नंगी ही खड़ी होकर फिर से डैड के सामने जाएगी. वो बेड पर बैठ जाती है और अपने आप को ब्लैंकेट से ढक लेती है,
डैड...... क्या आप मुझे मेरे कपडे दे देंगे...... वो बैग में है..,आराधना फिर से शरमाते हुए बोलती है. उसने बूब्स तक के हिस्से को ब्लैंकेट में कवर किया हुआ था,
हाँ.... हाँ मैं देता हु...... कौन से कपडे लोगी....,पंकज आराधना के बैग में कपडे देखते हुए बोलता है,
जो.... जो भी आपको सही लगे....,आराधना फिर से थोड़ा झिझकते हुए उसे बोल देती है.
पंकज बैग को चेक करने के बाद उसमे से एक ब्लैक एंड रेड ब्रा एंड मैचिंग पैंटी निकालता है. .वो उन दोनों आइटम्स को आराधना को दे देता है. जैसे ही आराधना उन आइटम्स को देखती है तो उसे रीयलाईज़ हो जाता है की पंकज उसे किस रूप में देखना चाहता है. वो चाहती तो बैड पर लेटे लेटे वो कपडे पहन सकती थी लकिन वो बड़ी हिम्मत के साथ बेड से खड़ी होती है और साइड में आकर ब्रा को पहन में लगती है. पंकज ने जो ब्रा और पैंटी आराधना को दी थी वो कुछ डिफरेंट ही थी. ये वो कलेक्शन था जिसे स्पेशली आराधना ने इस दिल्ली ट्रिप के लिए लिया था
ये एक ऐसा सिन था जिससे रूम में टेम्परेचर बहुत बढ़ जाए. आराधना बिना कुछ पहने पंकज के सामने खड़ी थी. पंकज के सामने वो चुत थी जो उसने कुछ ही पल पहले चोदी थी.पंकज भी एक शर्ट एंड स्लीवलेस टीशर्ट पहन चूका था और फिर से एक और पेग पीने की तयारी कर रहा था
गिलास को हाथ में लेने के बाद वो आराधना की तरफ देखता है और तब तक आराधना अपनी ब्रा पहन चुकी थी. उसकी गोरी स्किन पंकज को आकर्षित कर रही थी. ब्रा पहनने के बाद आराधना नीचे झुकती है अपनी पैंटी को पहनने के लिए जब वो झुकती है तो पंकज की आँखों के सामने फिर से उसके बूब्स आ जाते है.
आराधना टांगो में अपनी पैंटी चढाने के बाद पंकज की तरफ देखती है
पंकज की निगाहें फिर से आग उगलने लगी थी और वैसे सीन भी कुछ ज्यादा ही कामुक था
"क्या अभी भी मन नहीं भरा जो ऐसे देख रहे है.???" आराधना अपनी पैंटी को पूरा ऊपर चढाने के बाद और पंकज की तरफ देखते हुए बोलती है.
दूसरी तरफ
सिचुएशन तो काफी बदल चुकी थी लकिन वहीँ से शुरू करते है जहाँ पर ख़तम किया था. प्रीती के बार बार बोलने पर कुशल नीचे का माहौल देखने चला जाता है. उसको ये आईडिया था की स्मृति बहार हॉल में बैठी होगी मगर वो वहां नहीं थी. कुशल धीरे धीरे सीढ़ियों से उतरता है और आगे बढ़ता है. जब उसे स्मृति दिखाई नहीं देती तो वो आगे की तरफ बढ़ता है. हॉल से आगे बढ़ता है और आगे किचन में भी उसे कुछ दिखाई नहीं देता. हालाँकि कोई लेट नाईट का टाइम नहीं था फिर भी पता नहीं क्यों कुशल को ऐसा लगने लगा जैसे की स्मृति सोने चली गयी है. वो धीरे धीरे उसके बेड रूम की तरफ बढ़ता है, रूम से पहले ही उसे कुछ खटपट सुनाई दे जाती है और उसे अहसास हो जाता है की रूम में स्मृति जाग रही है. वो आगे बढ़ता है और सबसे पहला सिन ही उसके लंड को फिर से खड़ा होने पर मजबूर कर देता है. कुशल को आईडिया नहीं था की स्मृति क्या तयारी कर रही थी. उसकी पूरी बॉडी पे कुछ भी नहीं था सिवाय एक जीन्स के. स्मृति को जीन्स में देख कर खुद कुशल हैरान था और जीन्स भी अल्ट्रा लौ वैस्ट थी. सबसे कमाल की बात थी की स्मृति ने ऊपर कुछ भी नहीं पहना है. वो अपने आप को मिरर में देख रही थी लिप्स पे जूसी लिपस्टिक लगी हुई थी.अगर कुशल उसका चेहरा न देख पता तो शायद उसे ये ही लगता की ये कोई और सेक्स बम है लकिन वो उसका चेहरा देख सकता था.वो अपने दोनों हाथो से अपने बालो को पकड़ कर अलग अलग पोज़ में मिरर में देख रही थी. दोनों हाथ ऊपर आ जाने से उसके बूब्स कुछ और ही ज्यादा बहार आ गए थे कुशल अभी ही प्रीती की कुंवारी चुत को फाड़ कर आया था लकिन स्मृति के इस एक्शन ने फिर से कुशल के लंड को 1000 वाट पावर दे दी. इस टाइम स्मृति इस पोजीशन में थी कुशल के सामने

वो धीरे से मिरर के पास जाती है और अपने लिप्स को गौर से देखती है. कुशल का हाथ अब तक अपने लंड पर पहुँच चूका था.स्मृति ने अभी तक कुशल को नहीं देखा था और वो अपने एक हाथ को अपने बूब्स पर ले जाकर उसे प्रेस करके देखती है. कुशल को उसके ये रिएक्शंस और पागल कर रहे थे. मिरर में अच्छे तरीके से अपने आप को देखने के बाद वो अपने रूम के लास्ट कार्नर की तरफ बढ़ती है. अब उसकी पीठ कुशल की तरफ थी. थोड़ा आगे पहुँचने के बाद वो अपनी जीन्स के बटन को दोनों हाथो से खोलने की कोशिश करती है. क्यूंकि वो थोड़ा अंदर की साइड चली गयी थी तो कुशल थोड़ा आगे होकर उसकी मस्त गांड को देखने लगता है.वो अब जीन्स का बटन खोल चुकी थी और धीरे से अपनी जीन्स को नीचे करने लगती है. उफ्फफ्फ्फ़ क्या नजारा है. स्मृति ने अपनी जीन्स के नीचे एक बारीक़ सी पैंटी पहनी हुई थी जैसे ही उसकी थोड़ी जीन्स नीचे होती है तो कुशल को उसकी मस्तानी गांड क्लियर दिखाई दे जाती है.
"Wow.......... ग्रेट......"कुशल अपने लंड पर हाथ फिरता हुआ रूम में एंटर होता है.

स्मृति उसकी प्रजेंस से शॉकेड हो जाती है और अचानक से पीछे मुड कर देखती है और अपनी जीन्स ऊपर करती हुई उसकी तरफ घूमती है
"तू......? यहाँ.... क्या कर रहा है......?" स्मृति घबराती हुई बोलती है
"माँ... आपका बेटा हूँ तो आपका अकेला कैसे सोने दे सकता हु मैं.... पापा यहाँ नहीं है तो क्या हुआ आप टेंशन न ले मैं तो हु न...." कुशल धीरे धीरे आगे बढ़ता है.
"मुझे तेरी कोई जरुरत नहीं है....." स्मृति अपनी टीशर्ट को उठा कर अपने बूब्स को ढकते हुए बोलती है. और साइड में जाकर अपनी टीशर्ट को पहन ने लगती है
"माँ आईडिया नहीं था की आप जीन्स भी पहन लेती है. वैसे क्या कमल की फिटिंग आती है आपको खास कर आपकी बैक तो ऐसी हो गयी है जैसे जीन्स इसी के लिए बानी है......" ये बात बोलते बोलते कुशल स्मृति के बहुत करीब पहुँच चूका था.स्मृति धीरे धीरे पीछे होती हैं और कुशल धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ता है. कुशल बढ़ता ही जा रहा था और स्मृति पीछे होते होते दिवार से लग जाती है. कुशल पर फिर से भुत सवार हो चूका था. कुशल जैसे ही उसके करीब पहुँचता है स्मृति वहां से अचानक साइड हो जाती है और हँसते हँसते आगे की तरफ भाग जाती है. कुशल को उसके हंसने से आईडिया मिल जाता है की स्मृति भी ट्रैक पर है

"हे हे हे हे ......." स्मृति कुशल की इस हालत पर हंसती है, कुशल को अच्छा भी लग रहा था और बुरा भी , अच्छा इसलिए लग रहा था कि उसको आईडिया मिल गया था की आज स्मृति ज्यादा नखरे नहीं करेगी और बुरा इसलिए लग रहा था की एक परिपक्व लेडी होने के बावजूद वो ऐसे भाग रही थी. कुशल उसको मुड कर जब भागते हुए देखता है तो स्मृति की जीन्स में फसी हुई गांड देख कर वो और पागल हो जाता है.
" प्लीज मुझे मत तड़पाओ........." कुशल फिर से उसकी तरफ मुड़ता है
स्मृति अपने गेट के पास खड़ी थी और स्माइल कर रही थी.
कुशल अब फिर से धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ता है, जैसे जैसे वो बढ़ता है स्मृति भी अपने पाँव बाहर की तरफ बढाती है.
" प्रीती......" कुशल चिल्ला कर बोलता है और स्मृति डर कर पीछे देखती है
पीछे देखते ही स्मृति को समझ आ जाता है कि वो कुशल की इस चाल में वो फंस चुकी है.
इससे पहले की वो पीछे मुड कर देख पाति कुशल धप्प्प से उसे पकड़ लेता है
स्मृति इस सिचुएशन के लिए तैयार नहीं थी कुशल स्मृति को पकड़ कर फिर से दीवार से लगा देता है
." आह्ह्ह्हह्ह..... छोड़ मुझे........" स्मृति चिल्लाती है लकिन अब तक कुशल उसके दोनों हाथो को पकड़ कर ऊपर की तरफ कस कर पकड़ लेता है
स्मृति के बूब्स अब उसके सीने में चुभ रहे थे.
" छोड़ मुझे..... मुझे नींद आ रही है......." स्मृति उससे रिक्वेस्ट करती है.
" ऐसी सिचुएशन में तो किसी को भी नींद नहीं आती तो आपको क्या आएगी......" कुशल ये बोलते बोलते अपने होंठ स्मृति के होंठो की तरफ बढ़ा देता है
स्मृति कभी अपनी गर्दन इस तरफ तो कभी दूसरी तरफ

पुच्च्च्चच .......... जब होंठो से लिंक नहीं हो पता तो कुशल उसके गालो पर ही स्ट्रांग किश कर देता है. इस किश के होते ही स्मृति थोड़ा अपनी मूवमेंट को कम करती है और मुड कर कुशल की तरफ देखती है.
अभी उसकी नजरे ठीक से कुशल से मिल भी नहीं पायी थी की कुशल ने अपने होंठ उसके होंठो से भिड़ा दिए.........
" उन्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह उन्ह्ह्हह्ह्ह्ह .........." स्मृति थोड़ा छटपटाती है फिर से
लेकिन कुशल उसके होठो को चूसे जा रहा था. स्मृति की सारी लिपस्टिक कुशल के होठो पर लग चुकी थी. लेकिन कुशल अभी भी उसके होंठो को चूसने में लगा हुआ था.स्मृति ने भी कुछ सेकंड के लिए विरोध किया लकिन अब उसकी बॉडी मूवमेंट से नहीं लग रहा था की वो कुशल के इस एक्शन से नाराज है.
कुशल के होठो के बीच में उसे एक जीभ आती हुई महसूस होती है और वो सीधी जाकर कुशल के होठो से मिल जाती है. ये कुशल के लिए एक नया एक्सपीरियंस था, ये जीभ स्मृति की ही थी जो अब अपने एक्सपीरियंस का फायदा उठा रही थी. कुछ सेकण्ड्स के लिए अब दोनों के होंठो का द्वन्द युद्ध चलता है जहाँ स्मृति भी अच्छे से कुशल के होठो को चुस्ती है.
कुशल की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था .धीरे धीरे कुशल अपने लिप्स अलग करता है. लिप्स अलग करने के बाद वो स्मृति की आँखों में झांकता है और स्मृति शर्मा कर अपना चेहरा दूसरी साइड कर लेती है.
" इतनी रात में ये इतनी सेक्सी लिपस्टिक किस लिए लगायी है आपने....?" कुशल स्मृति से पूछता है.
स्मृति अपना चेहरा कुशल की तरफ करती है
"तुझसे मतलब.... लगायी है किसी के लिए...." स्मृति थोड़े ऐटिटूड में बोलती है
.कुशल का तना हुआ लड फिर से स्मृति के करीब था. कुशल उसको लंड को और चुभते हुए बोलता है." बता दो जरा कौन है वो खुश नसीब..... जिसके लिए मेरी माँ ने इतना सेक्सी मेक उप किया है..." कुशल फिर से पूछता है.
" है कोई मेरा ओल्ड फ्रेंड......... लकिन तुझे क्यों बताऊ........" स्मृति फिर से ऐटिटूड में बोलती है.
" ओल्ड फ्रेंड?????? मैंने तो कभी कोई नहीं सुना......." कुशल अपने दिमाग पर जोर डालते हुए बोलता है.
" है कोई ओल्ड नेट फ्रेंड....." स्मृति हँसते हुए बोलती है.
" LION............" कुशल चिल्ला पड़ता है स्मृति के मुँह से नेट फ्रेंड वाली बात सुन कर

स्मृति को एक कस कर स्मूच करता है वो. स्मृति भी उसको पॉजिटिव रिप्लाई देती है कुशल अब कन्विंस्ड था की स्मृति की चुत उसके लंड के लिए बेक़रार है.
कुशल भी पागल हो चूका था वो पीछे होता है और अपने टीशर्ट उतरने लगता है.
" कुशल..... कुशल कहाँ है भाई......" आवाज उन दोनों के कानो में आकर टकराती है जो की प्रीती की थी.
" ओह्ह्ह्ह फ़क......" कुशल के मुँह से ऑटोमेटिकली निकल जाता है.
वो फर्स्ट फ्लोर से ही चिल्लाती रही थी.
" क्या बात है आज तेरी दुश्मन तुझे बड़े प्यार से बुला रही है....?" स्मृति स्माइल करते हुए फिर से बोलती है.
" पागल को कोई काम होगा... इससे पहले की वो नीचे आये मैं ऊपर देख कर आता हु". और कुशल बहार की तरफ भागने लगता है.
" पता नहीं कितना टाइम लगेगा लायन को आने में????" स्मृति की ये आवाज कुशल के कानो में पड़ती है और जोकि खुला इनविटेशन था.
" जल्दी ही आएगा वो........" कुशल भी रूक कर स्माइल के साथ जवाब देता है. और फिर से वो ऊपर की तरफ चल देता है.वो भाग कर ऊपर जाता है लकिन उसे प्रीती रेलिंग पर दिखाई नहीं देती. वो धीरे धीरे प्रीती की रूम की तरफ बढ़ता है लकिन उसका गेट खुला हुआ था. वो अंदर जाता है तो प्रीती उसे वहां दिखाई नहीं देती.
" शायद टॉयलेट में गयी होगी..." कुशल अपने मन में सोचता है.और वो टॉयलेट की तरफ बढ़ जाता है.टॉयलेट पहुँचने से पहले ही उसे अपने रूम में अहसास होता है की कोई है और वो अपनी निगाहें फिरा कर देखता है
." ओह्ह्ह्ह माय गॉड....." कुशल को आज झटके ही झटके लग रहे थे. प्रीती उसी के रूम में दिवार के सहारे बैठी थी.
पंकज को स्मृति वैसे ही भड़का चुकी थी और जैसे अब प्रीती जिन हालात में बैठी थी तो वो किसी का भी पानी निकलवा सकती थी.
प्रीती ने भी जैसे पिंक लाइफ का सहारा ले लिया था. कुशल के जाते ही उसने कपडे चेंज कर लिए थे और सारे ही ट्रांसपेरेंट थे.
" इतना टाइम..... क्या कर रहा था नीचे....." प्रीती बेहद ही सेक्सी वौइस् में बोलती है.
कुशल का लंड आज लोहे से भी ज्यादा टाइट हो चूका था. कामुक से भी ज्यादा कामुक लग रही थी प्रीती. उसकी जवानी कहीं पर भी आग लगा सकती थी
 
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