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Hindi Sex Stories By raj sharma

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पिज्जा डेलिवरी

लेखक- अज्ञात

मैनेजर- “आशफ...”

आशफ- “जी सर...”

मैनेजर- “यह लो पता, और आधे घंटे में आपने यहाँ डेलिवरी देनी है। और हाँ देखो इस बार लेट नहीं होना, वरना नौकरी से जाओगे...”

आशफ- “जी सर, इस बार कोई शिकायत नहीं होगी..” कहकर मैंने मालिक से पता लिया और काउंटर से अपना आर्डर लेने लगा। मैं बी.काम. का छात्र हैं और अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए शाम को पिज्जा की दुकान पर डिलिवरी-मैन का काम करता हूँ। अंतिम बार जब पिज्जा डेलिवर करने पहुँचा तो लेट हो गया था, जिसकी वजह से बास ने मुझे इस बार वार्निग दी थी कि समय पर पहुँचना, वर्ना यह नौकरी चली जाएगी।

मैंने जल्दी-जल्दी आर्डर लिया और बाइक स्टार्ट करके गंतव्य की ओर दौड़ा दिया। बास ने जो पता दिया था वह क्षेत्र अमीरों का क्षेत्र था, जहां लोग ज्यादातर फास्ट फूड खाते थे। समय से पहले ठीक पते पर पहुँच गया और दरवाजा बजाने लगा, लेकिन कोई नहीं आया। फिर मैं बगल में लगी बेल, फोनबेल बजाई।

तब अंदर से किसी लड़की की आवाज आई- “कौन है?”

मैंने कहा- “जी पिज्जा लेकर आया हूँ, जो आपने आर्डर किया था...” मैंने पते की स्लिप पर नाम देखा तो लड़की का नाम अंजली था। मैंने पूछा- “आप मिस अंजली हैं?

वो बोली- “जी मैं ही हूँ...” फिर मिस अंजली ने अंदर से बटन दबाया और दरवाजा खुल गया। उन्होंने मुझे अंदर आने के लिए कहा और रिसीवर रख दिया।

मैं अंदर गया और फिर अंदर वाला दरवाजा बजाया तो एक खूबसूरत लड़की ने दरवाजा खोला, वही अंजली थी। उसने मुझे अपने साथ अंदर आने को कहा। मैं उसके पीछे-पीछे चला गया। वह सीढ़ियों से मुझे नीचे अंडरग्राउंड स्विमिंग पूल पर ले गई। वहाँ पहले से दो लड़कियां स्विमिंग सूट में स्विमिंग कर रही थीं। उनका सूट बहुत टाइट था, जिसमें से उनकी ब्रा और रंग के निशान दिखायी दे रहे थे। मैं थोड़ा घबरा भी रहा था कि पिज्जा लेना था तो ऊपर ही रिसीव कर लेतीं, मुझे यहाँ लाने की क्या जरूरत थी?
 
वह मुझे पूल के किनारे बने हुए रूम में ले गई . यहाँ भी पहले से एक लड़की मौजूद थी जिसके हाथ में पिस्टल थी उसने मेरे अंदर आते ही पिस्टल मेरे ऊपर तान दी . और मुझे पिज़्ज़ा टेबल पर रखने को कहा मैने पिज़्ज़ा टेबल पर रखा , इतने मे दरवाजे से वे दोनों लड़कियाँ भी

अंदर आ गई जो पूल में स्विम्मिंग कर रही थी .

अब मुझे एसी की ठंडी हवा में भी पसीने आने लगे . मैने कहा '' मैडम मैने क्या किया है मैं तो पिज़्ज़ा देने आया था जो आपने ऑर्डर किया था

प्लीज़ मुझे जाने दीजिए वरना मेरी नौकरी चली जाएगी .

लड़की १- '' शटअप '' चुपचाप खड़े रहो और जैसा हम कहते हैं वैसा करो वरना यहाँ से तुम्हारी लाश ही बाहर जाएगी .

मैं - प्लीज़ मेडम मुझे जाने दीजिए

इतने मैं दूसरी लड़की आगे आई और मुझे एक जोरदार थप्पड़ मारा

मैं रोने लगा और रोते हुए कहने लगा '' प्लीज़ मेडम मुझे जाने दीजिए प्लीज़ मेडम ''

लेकिन इन लड़कियों के इरादे ही ग़लत थे . जो लड़की स्विम्मिंग करके अंदर आई थी उसने अपना सूट उतारना शुरू कर दिया .

मैं ये देख कर हैरान था और ये देख कर और भी घबराने लगा कि पता नहीं ये मेरे साथ क्या करेंगी और आज तो मेरी नौकरी भी जाएगी

थोड़ी देर मे दोनो लड़कियों ने भी अपने सूट उतार दिए और वो दोनो अब केवल ब्रा और पैंटी में थी मैं दहशत से उन्हें देख रहा था . एक

लड़की तो दुबली पतली थी और उसके चुचे भी छोटे थे . लेकिन दूसरी वाली मुझे दहशत में भी सेक्सी दिखाई दे रही थी उसके मम्मे उसकी ब्रा से बाहर हो रहे थे

फिर पहली लड़की बोली ; '' अब क्या करना है क्या अब भी जाना चाहते हो ''

मैं - मेडम आप लोग मुझसे क्या चाहते हो प्लीज़ मुझे जाने दीजिए .

यह बोल ही रहा था कि वह लड़की जिसने थप्पड़ मारा था, वो मेरे पास आई और मेरे हाथ मेरी कमर पर मोड़कर पकड़ लिया और दूसरी लड़की ने मुझे बांधना शुरू किया। मैं उछलने लगा, लेकिन जिसके हाथ में पिस्तौल थी उसने मुझसे कहा- “अगर जरा भी हिले तो गोली मार दूंगी...”

 
मैं अब सीधा खड़ा हो गया और उन्होंने मेरे हाथ पीछे किए लेकिन फिर उन्हें कुछ विचार आया तो उन्होंने मुझे शर्ट उतारने को कहा।

मैंने नहीं उतारी, तो पिस्तौल वाली लड़की ने चीखकर कहा, तो मैंने तुरंत अपनी शर्ट उतार दी। अब उसने मेरे दोनों हाथ पीछे करके बांध दिए।

इतने में अंजली एक गिलास पानी और दो कैप्सूल लेकर आई। अंजली ने मुझे मुँह खोलने को कहा, लेकिन मैंने नहीं खोला।

पिस्तौल वाली लड़की मेरे पास आई और पिस्तौल मेरे मुँह में घुसा दी। अब मैं बोल भी नहीं पा रहा था। उसने कहा- “अगर यह कैप्सूल नहीं खाए तो यह गोली खानी पड़ेगी..." यह कहकर उसने पिस्तौल निकाल ली।

फिर अंजली ने मेरे मुँह में दोनों कैप्सूल डाल दिए और ऊपर से पानी पिला दिया। मैं दोनों कैप्सूल पी गया। मुझे नहीं पता था कि किसका कैप्सूल था। मैं अब बहुत घबरा रहा था। फिर वे लोग मुझे बाहर स्विमिंग पूल के पास ले गई और बेंच पर बिठा दिया। अब वह चारों लड़कियां मेरे सामने आ गई। और जो दोनों पैन्टी में थी एक दूसरे के गले लगकर प्यार करने लगीं। वे दोनों एक दूसरे की चूचियां दबाने लगीं और लिप-टु-लिप किस करने लगीं।

मैं यह सब देखकर घबरा तो रहा था, लेकिन उनके सेक्सी बदन मेरे अंदर भी कुछ हलचल मचा रहे थे। फिर उन दोनों ने एक दूसरे की कमर में हाथ डालकर ब्रा के हुक खोल दिए। फिर दोनों ने अपनी-अपनी ब्रा पकड़कर उतार दिए। मैं यह सब बड़ी हैरानी से देख रहा था। मेरी पैन्ट में मेरा लण्ड अकड़ने लगा था, लेकिन अंडरवेर की वजह से वह खड़ा नहीं हो पा रहा था। अब मेरी बेचैनी बढ़ रही थी।

बाकी की दो लड़कियां भी धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगी। वे दोनों भी पैन्टी और ब्रा में आ गई और एक दूसरे को प्यार करने लगीं। अब वह चारों मेरे सामने थी। और मेरी नजरें उनके सेक्सी बदन को घूर रही थीं। एक साथ चार-चार लड़कियां मेरे सामने बारी-बारी नंगी हो रही थीं। अब मेरा अंडरवेर गीला हो रहा था।

इन चारों में से दो लड़कियां पैर खोलकर खड़ी हो गई और शेष दो अपने-अपने घुटनों पर बैठकर उनकी चूत को चाटने लगीं। यह दृश्य देखकर मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मैं अंदर ही खत्म हो जाऊँगा। अब मुझे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। आधे घंटे से अधिक हो गया था। अब मुझे पता चला था कि वह कैप्सूल किसके थे। मेरा लण्ड मेरे अंडरवेर में अकड़कर सर्वोपरि हो गया था और आज तक वो इतना सख्त नहीं हुआ था। मुझे खुद महसूस हो रहा था जैसे मेरा अंडरवेर फट जाएगा।

 
अब वह मुझे दूसरे कमरे में ले गईं जो बेडरूम था। उन्होंने मुझे बेड पर लेटने को कहा तो मैं लेट गया। एक लड़की ने मेरे बंधे हाथों को पीछे बेड से बांध दिया और दूसरी लड़की ने मेरी पैन्ट उतार दी। मैं बुरी तरह फैस चुका था। मुझे पता था अब मेरे साथ क्या होने वाला है।

वे जबरन मुझसे अपनी हवस पूरी करना चाहती थीं। यह बड़े घर की लड़कियां होती ही ऐसी हैं। और यह तो मुझे एक गंदे परिवार की लग रही थीं। बहरहाल मैं अब कुछ नहीं कर सकता था। मेरे पास दो रास्ते थे- या तो मैं खुद बारी-बारी सबकी इच्छा पूरी कर दें, या फिर वो मेरे साथ जबरदस्ती करें। मेरी पैंट हटाने के बाद अब मैं सिर्फ अंडरवेर में था, और मेरा लण्ड अंडरवेर में एकदम सीधा खड़ा हो गया, जिसे देखकर वे एक दूसरे को मुश्कुरा कर देखने लगी।

उनके खिलाए हुए कैप्सूल ने काम दिखा दिया था। मेरा लण्ड लोहे की तरह अकड़ा हुआ था और मुझे खुद भी विश्वास नहीं हो रहा था।

अब उनमें से वह लड़की जिसके हाथ में पिस्तौल थी बेड पर चढ़ गई। वह लड़की सबसे सुंदर थी। उसका गोरा बदन ऐसा था कि अगर उंगली लगाई तो निशान पड़ जाएं। मैं उसके मम्मों पर फिदा हो रहा था। उसके गुलाबी गुलाबी स्तन भी सख्ती के मारे सीधे खड़े थे। वो मेरे ऊपर आ गई और अपने हाथ की उंगलियों से मेरे होंठों को, मेरे बदन को, मेरे निप्पल को छूने लगीं, और मैं उसके चूचियों को घूरे जा रहा था।

उसने देखा तो मुझसे पूछा- “क्या उन्हें चूसना चाहते हो?”

मैंने हाँ में गर्दन हिला दी। फिर वह मेरे पास आई और अपने मम्मे मेरे मुँह के पास ले आई और जैसे ही मैंने मुँह खोला उसने पीछे हटा लिया। फिर वे चारों जोर-जोर से हँसने लगीं। मैं शर्मिंदा सा हो गया। फिर वह मेरे पैरों के पास आई और मेरा अंडरवेर नीचे कर दिया। मेरा लण्ड भी एक छड़ी की तरह अकड़ा हुआ था, जो लहराता हुआ बाहर निकल आया। अब वह लड़की मेरे लण्ड को मसलने लगी। फिर उसने दूसरी लड़की से एक बोतल ली जिसमें कोई तेल या लोशन था, जो उसने बोतल से निकालकर मेरे पूरे लण्ड पर मसल दिया।

उधर अंजली मेरे पास आ गई और अपने मम्मे मेरे मुँह के आगे कर दिए, लेकिन मैंने उन्हें नहीं चूसा।

अंजली बोली- “मैं पीछे नहीं करूंगी, लो चूसो इन्हें प्लीज...” फिर उसने खुद ही मेरे मुँह में जबरन अपने मम्मे घुसा दिये और मचलने लगी।

अब मैंने मुँह खोला और उन्हें चूसने लगा। अंजली के मम्मे मेरे मुँह में थे जिन्हें मैं मस्ती में चूसे जा रहा था। अंजली की आहें निकलने लगीं। मेरे हाथ बंधे हुए थे, नहीं तो मैं उसकी चूत को सहलाता। अंजली ने सफाई नहीं की हुई थी। उसके बालों ने उसकी चूत को छुपाया हुआ था।

बाकी की दो लड़कियां सोफे पर लेटी हुई एक दूसरे को प्यार कर रही थीं। वह अपनी बारी का इंतजार कर ही थीं।

अंजली अब मेरे ऊपर मेरे पेट पर बैठ गई। मुझे कुछ गीला-गीला महसूस हो रहा था कि शायद अंजली की चूत का पानी था। वह बुरी तरह परेशान थी। मैंने उसकी चूचियों को चूस-चूसकर पूरा गीला कर दिया था।

उधर गोरी वाली लड़की ने मेरे लण्ड पर कंडोम चढ़ाया और मेरे ऊपर मेरे लण्ड पर बैठने लगी। उसने अपने हाथ से मेरा लण्ड पकड़कर अपनी चूत के छेद पर रखा और अपने शरीर को नीचे करने लगी। मेरा लण्ड स्लिप होता हुआ उसकी चूत में चला गया और उसके मुँह से केवल आहहह... निकली।

शायद यह लड़कियां यह काम पहले से करती रही हैं। क्योंकी इस लड़की की चूत से खून नहीं निकला और मेरा लण्ड भी आसानी से अंदर चला गया।

उधर अंजली पूरी तरह बेचैन थी। अंजली बेड पर खड़ी हुई थी और मेरे मुँह पर अपनी चूत ले आई। उसने दोनों हाथों से अपनी चूत को खोला तब मुझे उसकी चूत दिखी। वह अंदर से गुलाबी-गुलाबी थी। उसने चूत मेरे मुँह पर मसलना शुरू कर दिया। मैं न चाहते हुए भी उसकी चूत चाटने लगा। उसका नमकीन-नमकीन स्वाद मुझे अच्छा नहीं लगा रहा था लेकिन मैं कुछ भी नहीं कर सकता था।

 
उधर गोरी लड़की मेरे लण्ड पर उछल रही थी। उसके मम्मे गेंद की तरह उछल रहे थे और वह दोनों हाथों से अपने मम्मे पकड़ रखी थी। वह काफी देर तक मेरे लण्ड पर उछलती रही लेकिन मैं झड़ा नहीं था। बल्की मुझे तो लगता ही नहीं था कि मेरा लण्ड उसकी चूत में जा रहा था। मेरा लण्ड एकदम सुन्न हो चुका था। शायद वह तेल इसीलिए लगाया था कि मैं देर तक चारों को चोद सकें।

थोड़ी ही देर में अंजली की आहें तेज हो गईं। मैंने चाट-चाटकर उसे झड़ा दिया। वह मेरे मुँह पर ही झटके लेने लगी। वह मस्ती में अपने हाथों से अपने मम्मे दबाती रही और आआआ... उम्म्म्म ... करती हुई अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ती रही। उसने मेरा पूरा मुँह गंदा कर दिया था।

अब गोरी वाली लड़की भी तेज-तेज उछलने लगी। वह भी झड़ने वाली थी, और एक जोरदार आह्ह्ह... के साथ वह भी झड़ गई, उसकी गति कम हो गई। उसका पूरा बदन झटके ले रहा था। मैं दो लड़कियों को झड़ा चुका था। अब गोरी लड़की बिस्तर से उतर गई। लेकिन अंजली नहीं उतरी।

अंजली मेरे लण्ड पर बैठने लगी। अंजली की चूत टाइट थी। जब वह अंदर ले रही थी तब उसकी चीख निकल रही थी, और बड़ी मुश्किल से उसने मेरा लण्ड अन्दर लिया। वह कुछ देर ऐसे ही मेरा लण्ड अन्दर लिए बैठी रही। फिर उसने हिलना शुरू किया। उसके मम्मे भी उसके उछलने के साथ-साथ हिलने लगे। वह भी दोनों हाथों से उन्हें पकड़ने लगी। अंजली अब मेरे ऊपर झुक गई। वह मुझे चोदने लगी और अपने कूल्हे उछाल-उछालकर अपनी चूत को मेरे लण्ड पर मारने लगी। वह बुरी तरह मुझे किस कर रही थी। उसकी चूत का पानी जो मेरे होंठों पर लगा था वह अब उसके होठों पर था, और वह उसे जीभ से चाटने लगी।

फिर अंजली मेरे लण्ड से उतर गई और बेड के पीछे जाकर मेरे हाथ खोले। वह बिस्तर पकड़कर झुक गई और मुझे पीछे से चोदने को कहा। मेरे हाथ बंधे थे। मैं अंजली के पीछे गया और गोरी वाली लड़की ने मेरे लण्ड को पकड़कर अंजली के पीछे वाले छेद पर रख दिया और मुझे झटके मारने को कहा। मैंने जैसे ही झटका मारा अंजली चिल्ला उठी। उसकी चीख पूरे कमरे में गूंज गई। मैंने तुरंत अपना लण्ड निकाल लिया।

अंजली ने चैन की सांस ली और पीछे मुड़कर मुझे एक थप्पड़ मारा। उसने मुझे पीछे वाले छेद में डालने की वजह से मारा था।

मैंने कहा- “मेरे तो हाथ बंधे हैं मुझे तो उसने कहा था अंदर डालने को..."

फिर अंजली ने गोरी वाली लड़की को घूरकर देखा और बोली- “यह क्या हरकत थी? तुम्हें पता है मुझे कितना दर्द हुआ?”

गोरी वाली लड़की सारी कहने लगी।

फिर अंजली फिर से झुक गई और गोरी लड़की ने इस बार मेरा लण्ड चूत पर रखा। मैंने झटका नहीं मारा बल्की धीरे-धीरे अंदर डालने लगा। अंजली फिर से आहें भरने लगी। मैंने धीरे-धीरे गति बढ़ा दिया। अब अंजली पागल होने लगी। उसने बेड की चादर को जोर से पकड़ रखा था। जैसे वह तड़प रही हो। अंजली कुछ ही देर में फिर झटके लेने लगी। उसके मुँह से आह्ह्ह... ओह्ह्ह... निकलने लगी। मैंने गति दी, और अंजली का शरीर अकड़ने लगा। वह थोड़ी ही देर में ठंडी आहें भरने लगी और उसका शरीर ढीला पड़ गया।

 
अंजली बेड पर इसी तरह झुकी रही, और मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया। मैं दो लड़कियों को चोद चुका था। लेकिन मेरा लण्ड पहले से अधिक अकड़ चुका था। मैं झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था।

अब बाकी की दो लड़कियों की बारी थी। इन दोनों ने मुझे सोफे के पास बुलाया और मैं चला गया।

वो दोनों चुदाई के लिए तैयार थीं। उन्होंने आपस में प्यार करके एक दूसरे को इतना बेचैन कर लिया था कि बस अब उनको लण्ड की जरूरत थी। मैं सोफे के पास गया तो एक लड़की सोफे पर बैठ गई और उसने अपने पैर हवा में उठा लिये तो उसकी चूत मेरे सामने थी और वह मुझे चोदने का कह रही थी। मैं उसकी टांगों के बीच गया और दूसरी लड़की ने मेरा लण्ड पकड़कर उसके छेद पर रखा।

अंजली को थप्पड़ मुझे याद था। इसीलिए धीरे-धीरे डालने लगा। लेकिन दूसरी एक लड़की खड़ी हो गई और मेरे पीछे से मुझे धक्का मारा तो मेरा पूरा लण्ड उसके अंदर चला गया।

वो चिल्ला उठी- “आआआ... कमीने, बेगैरत, इतनी जोर से डाल दिया... आआआ...”

मैंने भी कहा- “मैंने कुछ नहीं किया, इस लड़की ने मुझे मारा...”

यह सुनकर दूसरी लड़की ने मुझे पीछे से कमर पर मारा और बोली- “चल झटके मार..."

मैं तुरंत हिलने लग गया। सोफे वाली लड़की आहें लेने लगी- “उफफ्फ... ओफफ्फ... साले, मेरी चूत फाड़ डाली। इतना मोटा लण्ड है तेरा। उफफ्फ... उम्म्म..." वह आहें और सिसकियां ले रही थी और मैं लगातार झटके मारे जा रहा था।

इतने में मेरे पीछे वाली भी सोफे पर अपनी टाँगें उठाकर बैठ गई और मुझसे कहा- “अब मुझे चोदो...”

मैंने लण्ड निकालकर उसकी चूत में डाल दिया। लण्ड एक ही झटके में पूरा अन्दर चला गया और लड़की की एक आह्ह..नहीं निकली। उसने अपने हाथ मेरी कमर में डाले और मुझे अपने पास खींचा तो मेरा पूरा लण्ड उसकी चूत में चला गया। वह मेरा लण्ड अंदर लेकर अपनी चूत को घुमाने लगी। मुझे बहुत मजा मिल रहा था। मैं भी और अंदर करने लगा। अब मेरी चिंता बढ़ गई थी। मैंने उसके हाथ हटाए और जोर-जोर से झटके मारने लगा। इतनी जोर से झटके मार रहा था कि सोफे के स्प्रिंग के कारण वह लड़की उछल रही थी।

कुछ ही देर में मेरे मुँह से एक जोरदार आह... निकली- “आह्ह्ह...” और मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। मेरा पानी कंडोम में भर गया। लेकिन मेरा लण्ड वैसे ही खड़ा था। मैं झड़ने के बाद भी झटके मारता रहा। मेरा शरीर तो ढीला पड़ रहा था लेकिन लण्ड अभी भी अकड़ा हुआ था, और मैं चोदता रहा। कुछ ही देर में वह लड़की भी झड़ गई।

अब बराबर वाली लड़की की बारी थी। मैंने कंडोम बदलने को कहा तो उसने यह वाला उतारकर दूसरे पहना दिया। अब मैं उसे चोदने लगा। उसकी चूत सबसे टाइट थी। इसीलिये उसे दर्द हो रहा था। शायद यह लड़की अभी तक नहीं चुदवायी थी। मैं अपनी गति से उसे चोदता रहा।

उसके मुँह से आहों के साथ चीखें भी निकल रही थीं- “ओहह... चोदो मुझे, चोदो मुझे... बास्टई..." वह बाकी लड़कियों से अधिक सेक्सी थी जिसकी आवाज मुझे फिर से मदहोश कर रही थीं। अब यह भी झड़ने करीब थी, और कुछ ही देर में झटके लेते हुए यह भी झड़ गई। उसका शरीर ढीला पड़ गया। वह मस्ती में अपने मम्मे दबाने लगी।

मैंने लण्ड बाहर निकाल लिया। अब मैं चारों को खुश कर चुका था। मैं अभी जाना चाहता था। मुझे दो घंटे हो गए थे। मेरा बास मुझे फोन कर रहा होगा लेकिन मेरा मोबाइल दूसरे कमरे में था जहां मेरे कपड़े उतरे थे।

मैंने अंजली से कहा- “मुझे जाने दो प्लीज...”

अंजली ने कहा- “एक शर्त पे यहाँ से जा सकते हो? अगर इस बात का जिक्र किसी से किया तो अपनी जान से हाथ धो बैठोगा, और अगली बार जब भी पिज्जा आर्डर करेंगे, तुम ही डेलिवरी लाना...”

मैंने इस समय तो अंजली की सारी बातें मान ली तो एक लड़की ने मेरे कपड़े ला दिये, दूसरी ने मेरे हाथ खोले। मैं तैयार होने लगा लेकिन पैंट नहीं पहन सका। मेरा लण्ड अकड़ा हुआ था, जो पैंट में नहीं जा रहा था।

अंजली मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़कर फिर से बेड के पास ले गई। वे बेड पर झुक गई और बोली- “अब वहाँ डालो जहां पहले डाला था...”

मैं समझा नहीं तो उसने मेरा लण्ड पकड़कर पीछे वाले छेद पर रखा। उसने मुझे कंडोम उतारने को कहा। मैंने कंडोम उतारा और लण्ड उसकी गाण्ड के छेद पर रखकर अन्दर करने लगा। छेद बहुत सख्त था, वह मेरे लण्ड को भींच रहा था। धीरे-धीरे पूरा अन्दर चला गया। अंजली की तो जैसे सांसें रुक रही थीं। वह दर्द को सहन कर रही थी।

अब मैं धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। अंजली दर्द से कराह रही थी। शायद अंजली को मजे से अधिक दर्द हो । रहा था। कुछ देर अंदर-बाहर करने के बाद मुझे ऐसा लगने लगा जैसे मैं झड़ने वाला हूँ। मैंने अपनी गति बढ़ा दी। अंजली अब आराम में आ चुकी थी। वह भी मेरी तेजी से मजा कर रही थी। मैंने अचानक अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरा सारा पानी अंजली के चूतड़ों पर चला गया। अंजली की साँसें तेज-तेज चल रही थी।

अंजली बेड पर झुकी-झुकी लेट गई। अब मेरा लण्ड भी अकड़ने लगा था। मैंने तौलिये से अंजली के कूल्हे साफ किए और तैयार हो गया। मैंने अंजली से अब जाने के लिए कहा तो उसने भी कपड़े पहन लिये और मेरे साथ बाहर आ गई। बाकी की लड़कियां भी कपड़े पहनकर मेरे साथ दरवाजे तक आईं। अंजली ने मुझे अपना नंबर दिया कि अगर कभी यहाँ से गुजरना हो या हम चारों का आनंद फिर से लूटना हो तो आ जाना।

मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और दुकान के लिये निकल पड़ा। रास्ते भर मेरी नजरों के सामने इन चारों का नंगा बदन आ रहा था। मुझे इस बात की जरा भी चिंता नहीं थी कि दुकान पर पहुँचकर मेरा क्या हाल होगा? मैं दुकान पहुँचा तो मालिक का पारा सिर पर था। वह मुझपर चीखने चिल्लाने लगा और मेरे लेट आने का कारण पूछे बिना मुझसे बाइक की चाबी ली और मुझे नौकरी से निकाल दिया।

मैं अपना सामaन लेकर वहां से चल दिया लेकिन नौकरी का गम मुझे दुखी नहीं कर रहा था। मुझे तो बस इन चारों का नंगा बदन मेरी नजरों के सामने घूमता नजर आ रहा था।

***** समाप्त ***

 
दोस्तो ये कहानी कैसी लगी ज़रूर बताना
 
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