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Incest अपनों का प्यार या रिश्तों पर कलंक [ ड्रामा + सस्पेंस ] (completed)

में रूम में आ चुका था और अपने कपड़े उतार कर सिर्फ़ एक बारमोडा पहन कर बेड पर लेट गया...थोड़ी ही देर बाद नीरा रूम में आ गयी उसके हाथ में पानी की बोतल के साथ स्नॅक्स और ड्राइ फ्रूट्स की प्लॅट्स...उसने वो मेरे पास रखी टॅबेल पर रख दिया और मुझे देखने लग जाती है...

में--क्या हुआ ऐसे क्यो देख रही है...

नीरा--आप अपनी कसम कब पूरी करने वाले हो....

में उस पर पिल्लो फेंकते हुए...

में--बदमाश पहले तो मुझे कसम में फसा लिया और अब बेशर्मो की तरह खुद की ही शादी के बारे में पूछ रही है...जब तक तेरी पढ़ाई ख़तम नही होती....तब तक उस बारे में सोचना भी नही...अब चल भाग यहाँ से और खाना खा कर पढ़ने बैठ जा...

नीरा--अगर पढ़ाई हे की बात है...तो में कल ही स्कूल से. अपना नाम कटवा लेती हूँ...ना रहेगा बाँस और ना बजेगी बाँसुरी...

में उसके पीछे भागते हुए...उसे पकड़ लेता हूँ...

में--बाँसुरी की बच्ची मेरे सामने अपना दिमाग़ कम चलाया कर....

तभी नीरा पलट कर मेरे गले से लग जाती है और मेरी नंगी पीठ पर अपने हाथ घुमाते हुए कहती है....
नीरा--- में आपका इंतजार पढ़ाई क्या...अपनी जान के जाने तक करूँगी...बस मुझे कभी अकेला मत छोड़ना...उसके बाद नीरा मेरे गाल पर एक जोरदार किस करती है और बाहर भाग जाती है...

रात के 11.30 हो रहे थे तभी अचानक मेरा मोबाइल बजने लगता है...

ये कॉल डॉक्टर आलोक का था...में एक पल कुछ सोचता हूँ और वो कॉल पिक कर लेता हूँ...

डॉक्टर--जय मैने वो डीयेने रिपोर्ट्स रेडी कर ली है, और ...वो सारे डीयेने एक दूसरे से मच कर रहे है जैसे एक ही परिवार के हो...मुझे लगा शायद ये जानना तुम्हारे लिए इम्पोर्टेंट होगा इसीलिए टेस्ट ख़तम होते ही मैने तुम्हे फोन कर दिया...

में--सर आपका बहुत बहुत शुक्रिया जो आपने इस समय कॉल करके ये न्यूज़ सुनाई है...ये मेरे एक दोस्त के परिवार के सॅंपल थे जो मैने आपको टेस्ट करने के लिए दिए थे...कुछ ग़लतफ़हमियाँ होगयि थी उन सभी को इस लिए वो टेस्ट आपसे करवाने पड़े...

डॉक्टर--ठीक है जय मेरा काम अब ख़तम हुआ...कल किसी भी वक़्त आकर तुम वो रिपोर्ट्स ले जा सकते हो...
बाइ गुड नाइट.......

मैने अब तक उस बोतल में से केवल 3 हे पेग बना कर पिए थे...डॉक्टर. के फोन आने के बाद खुशी की अधिकता की वजह से जो भी पिया उसका थोड़ा भी नशा मुझ पर नही हुआ....

तभी मेरे दरवाजे पर दस्तक होती है..में उठ कर दरवाजा खोलने से पहले वो सारा सामान अपने बेड के नीचे सरका देता हूँ...और दरवाजा खोल देता हूँ...

सामने मम्मी खड़ी थी...उन्होने उस वक़्त एक साधारण सा साड़ी ब्लाउस पहन रखा था....लेकिन मम्मी उस में से भी मुझे काफ़ी सुंदर लग रही थी...

मम्मी को देखते ही मैने उन्हे अपनी बाहो में भर लिया और उनके गालो पर किस करने लगा..
 
उदयपुर में.....

हम सीधा घर पहुँच जाते है....वहाँ आकर में दीक्षा. के और कोमल के चुपके से बाल तोड़ लेता हूँ....और वापस घर से बाहर निकल कर अपने फॅमिली डॉक्टर आलोक कुमार के पास बढ़ जाता हूँ...

में--सर मुझे कुछ बालो का डीयेने टेस्ट करवाना है...क्या आप के यहाँ ऐसा करना पासिबल है...

डॉक्टर--अरे ...अरे....आते ही इतने सवाल पहले बैठ तो जाओ आराम से...

में वहाँ रखी एक चेयर पर बैठ जाता हूँ...

डॉक्टर--अब बोलो किस का डीयेने टेस्ट करवाना है..

में--सर 4 अलग अलग लोगो के बाल है इनका डीयेने टेस्ट करवाना है.. इन चारो बालो के डीयेने का आपस में कोई संबंध है या नही बस यही जानना है...

डॉक्टर--तूने कुछ गड़बड़ तो नही करी ना....??

में--कैसी बात कर रहे हो सर....में कैसे कुछ गड़बड़ कर सकता हूँ....बस इन बालो का डीयेने चेक करवाना था और कुछ नही...

डॉक्टर--ठीक है सुबह तक आ जाना में रिपोर्ट रेडी रखूँगा....वो लगभग मेरी आँखो में झाँकते हुए ये बात बोलने लगे......

उसके बाद में वहाँ से बाहर निकल गया शाम हो चुकी थी और में काफ़ी थकान भी महसूस कर रहा था..में कल से लगातार ड्राइव कर रहा था...अब कुछ देर आराम करना चाहता था...मेरे सारे संदेह तो वैसे भी दूर हो चुके थे जब में साधु बाबा से मिला था...लेकिन संसार सबूत माँगता है...मेरी मम्मी को यकीन दिलाने के लिए भी सबूत चाहिए....मेरी चाची से सच बुलवाने के लिए भी सबूत चाहिए....सारा खेल बस सच और झूठ का ही तो है...झूठ को झूठ साबित करने के लिए भी सबूत चाहिए होते है....और सच को भी सच साबित करने के लिए उसी सबूत की ज़रूरत पड़ती है..........

वहाँ से गाड़ी निकाल के मैने गाड़ी का रुख़ सीधा घर की तरफ़ कर लिया....लेकिन रास्ते से एक बढ़िया शराब की बोतल ले जाना नही भुला...

में घर पहुँच गया था...और मुझे देख कर नीरा चहकते हुए मेरे गले से लग जाती है...और में भी उसे अपनी गोद में उठा लेता हूँ...

में--क्या बात है आज मेरी गुड़िया इतनी खुश कैसे लग रही है...

नीरा--में तो आपको खुश देख कर ख़ुसी के मारे फूली नही समा रही...चलो आज हम मिलकर साथ में खाना खाते है सब के साथ...

में--नही नीरा मुझे अभी भूक नही है में लेट खाउन्गा...

नीरा--ये आपके इस बेग में क्या है...ज़रा दिखाना तो मुझसे क्या छुपा कर ले जा रहे हो अपने बेग में...

नीरा वो बेग मुझ से छिनने लगती है जिसमें शराब की बोतल रखी हुई थी...

में--अरे नीरा चोट लग जाएगी तुझे....तेरे काम की चीज़ नही है इसमें...

नीरा--इसमें जो भी है मुझे वो देखना है...

में उसे दिखा देता हूँ कि बेग में क्या है...

नीरा--अब ये काफ़ी ज़्यादा ओवर हो रहा है...इस तरह से रोज शराब पीना अच्छी बात नही है...
आपने कल भी पी थी और आज फिर से बोतल ले आए...

में--कल मेरे पीने की वजह कुछ और थी लेकिन आज वो वजह पूरी तरह से बदल गयी है...आज में खुश हूँ और इसी लिए ये ले आया...

नीरा--ठीक है आप रूम में चलो में आपके लिए कुछ खाने पीने का सामान लेकर आती हूँ.
 
जैसे ही दरवाजा खुलता है नीरा भाग कर मेरे सीने से लग जाती है...में उसे अपनी बाहो में कस लेता हूँ...जब कोमल और दीक्षा को भी वहाँ देखता हूँ तो इशारा करके उन्हे अपनी बाहो में समेट लेता हूँ...वही थोड़ी दूरी पर गुम्सुम सी भाभी भी खड़ी थी...लेकिन मैने अपना ध्यान वहाँ से हटाते हुए नीरा से बोलता हूँ.....

में--नीरा में दीक्षा के साथ गाँव जा रहा हूँ कल रात तक वापस आ जाउन्गा....तुम्हे कल स्कूल जाना है और वहाँ कोमल के भी आदमिशन की बात कर लेना...

कोमल--भैया क्या में आपलोगो के साथ रहने वाली हूँ...

में--हाँ कोमल अब में तुम दोनो को खुद से दूर कभी जाने नही दूँगा....दीक्षा का भी मेरे ही कॉलेज में आदमिशन करवा दूँगा...

दीक्षा --लेकिन पापा मम्मी हमे यहाँ रहने नही देंगे...

में--तुम दोनो उस बात की चिंता में करो उन्हे में समझा दूँगा...दीक्षा तुम जल्दी से रेडी हो जाओ हम लोगो को अभी गाँव के लिए निकलना है....

दीक्षा--गाँव क्यो जाना है भैया...

में--पापा का कुछ सामान लेना है...इसलिए अब जल्दी चल...

और उसके बाद हम वहाँ से निकल जाते है और रात तक गाँव भी पहुँच जाते है...में दादी की अलमारी खोल देता हूँ...अलमारी और घर की चाबियाँ दीक्षा के पास ही थी....वहाँ थोड़ी देर ढूँढने पर मुझे दो बॉक्स दिखाई देते है....उन दोनो बोक्शो में बाल भरे पड़े थे...अब मेरी समझ में ये नही आरहा था कि पापा वाला बॉक्स कौनसा है और चाचा वाला कौनसा....

में तुरंत चाचा. को फोन लगा देता हूँ...

में--हेलो चाचा जी में गाँव पहुँच गया हूँ...लेकिन अलमारी में दो बॉक्स है दोनो में से पापा वाला बॉक्स कौनसा है...

चाचा--जय बेटा जो बड़ा वाला बॉक्स है उसमें ही तेरे पापा के बाल है....और दूसरे वाले में मेरे...

में--ठीक है चाचा जी में दूसरे वाले को वापस अलमारी में रख देता हूँ ....क्या में पापा वाला बॉक्स अपने साथ ले जा सकता हू...

चाचा--अरे ये भी कोई पुच्छने वाली बात है क्या.....अच्छा सुन हम लोग आज निकल रहे है यहाँ से कल रात तक घर पहुँच जाएँगे...अच्छा अब में फोन रख रहा हूँ...

और उसके बाद फोन कट जाता है...में वापस अलमारी को ताला लगा देता हूँ और घर को पहले की तरह बंद करके वापस उदयपुर की तरफ निकल जाता हूँ......
 
में--मम्मी में आपसे नाराज़ नही हूँ...इसलिए आप रोना बंद करो...और जो में पूछना चाहता हूँ उसका सही सही जवाब आप याद करके दो...

मम्मी ने अपने आँसू पोछ लिए...बोल जय क्या पूछना है...

में--जब आपको पता चला कि में आपकी कोख में आ चुका हूँ...तब आपने ये जानने की कोशिश नही करी कि आपकी कोख में पलने वाला बच्चा किसका है...

मम्मी--मैने ऐसा कुछ नही सोचा...और जो उस समय हुआ था में उस से काफ़ी घबरा गयी थी...

में--जब पापा बाहर गये थे कुछ दिनो के लिए....तब आप लोगो के बीच में कुछ हुआ था क्या...???

मम्मी--हाँ मुझे अच्छे से याद है जब तेरे पापा टूर पर गये थे हम लोग पूरी रात वो सब करते रहे थे...

में--तब आपने कोई प्रोटेक्षन लिया था क्या...

मम्मी--नही बेटा मैने ऐसा कुछ नही किया था और उसके अगले ही दिन राज के साथ वो घटना हो गयी थी....

ये बात सुनकर मैने चैन की साँस ली.

में--मम्मी एक बात बताओ जिस तरह से आपने हम सभी के पहली बार सिर मुंडवाने के टाइम पर जो बाल उतारे वो आपने आज भी संभाल कर रख रखे है....क्या वैसे ही पापा के बाल भी संभाले हुए है....

( दोस्तो राजस्थान में बच्चो के मुंडन होने के बाद उनके बाल संभाल कर रखे जाते है यहाँ तक कि जब बच्चा पैदा होता है और बच्चे और माँ को जोड़े रखने वाली नाल को भी संभाल कर रखा जाता है...यहाँ बालो को और गर्भ नाल को काफ़ी मान देते है...बाकी राज्यो में ऐसा कोई रिवाज है या नही इसका मुझे पता नही है ...लेकिन राजस्थान में ये हर घर में होता है...)

मम्मी--हाँ संभाले हुए तो होंगे लेकिन यहाँ नही है...वो बाल सिर्फ़ माँ बाप के पास ही रहते है...लेकिन तू ये सब कुछ क्यो पूछ रहा है...

में--इसका मतलब वो बाल आज भी गाँव में संभाल कर रखे हुए होंगे...

में तुरंत चाचा को फोन लगा देता हूँ...

चाचा--हाँ जय बेटा कैसे हो...

में--चाचा में ठीक हूँ लेकिन इस समय मैने आपसे एक बात पूछने के लिए फोन किया है...

चाचा--हाँ बेटा बोल क्या बात है...

में--चाचा पापा के मुंडन के समय के बाल क्या आज भी संभाल कर रखे हुए है...

चाचा--हाँ बेटा माँ बताया करती थी कि तेरे पापा के बाल उस समय काफ़ी लंबे हो गये थे...बिल्कुल किसी लड़की के बालो की तरह...माँ ने वो संभाल कर रख रखे है...वो बाल आज भी उनकी अलमारी में एक डिब्बे के अंदर पड़े है...लेकिन तुझे उन बालो से एक दम से कैसे काम आ गया...

में--चाचा बस आप इस वक़्त कुछ मत पूछो क्या में दीक्षा दीदी को अपने साथ गाँव ले जा सकता हूँ वो बाल यहाँ ले आने के लिए...

चाचा--इसमें पूछना क्या है...वो भी तेरा ही घर है तू वहाँ से जो चाहे ले आ...

में उसके बाद चाचा से विदा लेता हूँ और फोन काट कर एक ठंडी साँस लेता हूँ........

में अब काफ़ी राहत महसूस कर रहा था...खुद को बिल्कुल तरो ताज़ा महसूस करने लगा था चाचा से बात करने के बाद...

मम्मी--जय आख़िर तू करना क्या चाहता है मेरी समझ में कुछ नही आ रहा है...क्या करेगा. तू तेरे पापा के बालो का...

में--मम्मी ये सब में अभी नही बता सकता,लेकिन जब में गाँव से आउ तो मुझे दीक्षा के और कोमल के कुछ बाल चाहिए होंगे...और इस बारे में आप किसी से कोई बात नही करोगी...

मम्मी--ठीक है बेटा जैसा तू चाहेगा वो हो जाएगा...

उसके बाद हम दोनो रूम से बाहर निकल जाते है...रूम के बाहर ही नीरा दीक्षा और कोमल दरवाजा खुलने का वेट कर रहे थे....
 
तभी वो पुजारी मेरे पास आया और उसने मुझसे पूछा...

पुजारी--क्या हुआ बेटा तुम इस तरह ज़मीन पर क्यो बैठे हो और इतनी देर से किससे बाते कर रहे थे...

में--पुजारी जी मेरे साथ में एक साधु बाबा बैठे थे और उनके साथ कुछ साधु और थे..उन्होने मुझे चिलम दी दम लगाने के लिए लेकिन जैसे ही मैने दम भरने के बाद आँखे खोली वहाँ कोई नही था...वो चिलम भी मेरे हाथ में नही थी...बस ये कट ज़रूर लगा हुआ है मेरी उंगली पर जो उन्ही बाबा ने लगाया था मेरा खून लेने के लिए....

पुजारी--बेटा जो भी तुमने देखा वो सच है...ये मंदिर ऐसे ही चमत्कारो के लिए जाना जाता है...अब में मंदिर के पट खोलने वाला हूँ तुम महादेव से आशीर्वाद लेने के बाद ही वापस जाना.......

में वहाँ महादेव के मंदिर में काफ़ी देर रहा मैने महादेव का आशीर्वाद स्वरूप प्रसाद लिया....और फिर से घर की तरफ निकल गया....

घर पहुँचते ही देखा नीरा अपना बेग लेकर घर से बाहर जा रही थी और मम्मी उसे रोकने की कोशिश कर रही थी...मेरी कार देखते ही जो जहाँ खड़ा था वो वही खड़ा रह गया....में कार से उतर कर सीधा मम्मी के पास गया और उन्हे महादेव का प्रसाद सब को बाटने की बोलने के बाद में नीरा की तरफ़ मूड गया...

में--ये बेग लेकर कहाँ जा रही है तू...

नीरा--मुझे लगा आप मेरी वजह से घर छोड़कर चले गये हो...इसलिए में भी यहाँ नही रहना चाहती थी....

में उसका बेग वापस उठाता हूँ और उस से बिना कुछ कहे घर के अंदर जाने लगता हूँ...वो भी मेरे पीछे पीछे घर के अंदर आजाती है..

में--कोई कहीं नही जाएगा इस घर को छोड़ कर...ना में कही जाउन्गा और ना तू....

मम्मी--बेटा मुझे माफ़ कर दे....

वही कौने में दीक्षा और कोमल सूबक रही थी...मैने उन दोनो को अपने पास बुलाया और अपने गले से लगा लिया...

में--मम्मी से....मुझे आप से 2 मिनट. बात करनी है अकेले में....

मम्मी--ठीक है बेटा मेरे रूम में चल वही बात करते है ....जो भी तेरे मन में सवाल है वो तू मुझ से पूछ सकता है....

उसके बाद में और मम्मी रूम के अंदर चले जाते है और वो बेड पर बैठ कर रोने लग जाती है..
 
मम्मी रूही को उठाते हुए...

मम्मी--रूही जो हुआ वो ग़लत था लेकिन उसके बाद तू जो कर रही थी ये उस से भी ज़्यादा ग़लत है....अगर तू जय से प्यार करती है तो उसका दिल जीत....उसका प्यार जीत....तभी तू उसे पा सकती है....लेकिन इस तरह टोने टॉट्को से तू उसका शरीर तो पा लेगी लेकिन कभी उसका प्यार नही पा पाएगी....

बोल मुझे तुझे क्या चाहिए अगर तुझे जय का शरीर चाहिए तो मेरे बोलने भर से वो तेरे साथ वो सब कुछ कर लेगा जो तू चाहती है....लेकिन अगर तुझे उसका प्यार चाहिए तो ये काम तुझे खुद करना पड़ेगा....

अब अपने आँसू पोछ और जो तूने किया है उसके बारे में सोच.....और सोच जय का प्यार तू कैसे पा सकती है....

उसके बाद मम्मी रूही को रूम के अंदर छोड़ कर बाहर निकल जाती है...
और अंदर रूम में रूही बेतहाशा रोए जा रही थी.....बस रोए जा रही थी....
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अब सब कुछ बदल गया था...मेरा हर रिश्ता बदल गया था....जिस बहन से में अपनी जान से ज़्यादा प्यार करता था वो अब मुझे पति के रूप में देखने लगी थी....चाची के साथ जो मैने किया.....उस वजह से एक रिश्ता और बदल गया....चाची की कोख में अपना बीज रोपीत कर चुका था....कुछ रिश्ते अभी और बदलने वाले थे....लेकिन रिश्ते बदलते बदलते कहीं में तो नही बदल जाउन्गा....कहीं में उस प्यार को तो नही भूल जाउन्गा जो मुझे मेरे संस्कारों में मिले ....ये क्या बेचैनी छा गयी है मेरे जीवन में....कैसे ख़तम होगा ये अध्याय....कौन निभाएगा मेरा साथ....क्या बस यही लिखा है मेरे जीवन में.....
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मम्मी--जय उठ जा रात होने वाली है कब तक सोता रहेगा ऐसे ही....

में--मम्मी पढ़ते पढ़ते मुझे कब नींद आ गयी कुछ पता ही नही चला ....

मम्मी--चल हाथ मुँह धो ले....और जल्दी से खाना खाने आजा...

उसके बाद तेरे चाचा चाची भी थोड़ी देर में जाने वाले है....

में-- मम्मी में खाना उनके जाने के बाद खा लूँगा अभी कुछ खाने का मन नही है....

मम्मी--ठीक है तेरा जब मन करे तब खा लेना...लेकिन फ्रेश होकर बाहर तो आजा तेरे चाचा कब से तेरा वेट कर रहे है...

में--ठीक है मम्मी में थोड़ी देर में आता हूँ...

उसके बाद में हाथ मुँह धोकर बाहर चाचा के साथ सोफे पर बैठ जाता हूँ...

में--चाचा हो गया आपका काम....ले लिए खाद और बीज...

चाचा--हाँ बेटा यहाँ अच्छी किस्म के बीज मिल्गये....और अगर इस बार बारिश अच्छी हुई तो फसल भी देखने लायक होगी...

उसके बाद चाचा अपने बेग में से 10 लाख रुपये निकाल कर मेरे हाथ मे रख देते है...

में चाचा जी ये पैसे किस लिए...

बेटा ये वैसे तो तेरे पापा की अमानत थी लेकिन अब ये तेरी है....में अपने हिस्से की खेती के साथ साथ तेरे पापा वाले हिस्से में भी खेती करता था....ये उसी खेती के हिस्से के पैसे है जो में जमा करता रहता था....पहले कभी उस बात पर ध्यान नही दिया मैने लेकिन जब में यहाँ आरहा था तब मुझे अहसास हुआ कि मुझे तेरे पापा के हिस्से वाले पैसे भी देने चाहिए....

में--चाचा जी ये पैसे में नही रख सकता...ये आपकी मेहनत का फल है अगर आप उस ज़मीन पर मेहनत नही करते तो वो बंज़र पड़ी रहती....इसलिए इसे आप ही रखिए...

चाचा--बेटा हिस्से का धन चाहे मेहनत का हो या ज़मीन का वो हिस्सा ही रहता है....अगर तू ये पैसे मुझ से नही लेगा तो में हमेशा तुम्हारा कर्ज़दार ही बना रहूँगा....इसलिए तू ये पैसे रख ले....

उसके बाद चाचा ज़बरदस्ती वो दस लाख रुपये मेरे हाथो में रख देते है....
 
ये बात सुनकर नीरा मुस्कुरा देती है....और मेरे गालो पर किस करके वहाँ से चली जाती है....

नीरा का मेरे प्रति प्यार लगातार बढ़ता ही जा रहा था....वो मुझे अपनी जान से भी ज़्यादा प्यार करने लग गयी थी......

में बाहर हॉल में आकर बैठ गया था वहाँ दीक्षा भी बैठी हुई थी और टीवी देख रही थी....

में--दीदी कल कॉलेज का आपका पहला दिन है आइ थिंक आपने अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली होगी...

दीक्षा--हाँ जय भैया.,,,तैयारी तो लगभग पूरी हो गयी है....बस अब तो वहाँ जाने का वेट कर रही हूँ....

में--में आपसे एक बात कहना चाहता.....कॉलेज में और स्कूल लाइफ में काफ़ी अंतर होता है....इसलिए अपने दोस्त हमेशा चुन कर बनाना....

दीक्षा--भैया में ये बात जानती हूँ...आप चिंता मत करे...

इतनी देर में मम्मी मेरे लिए खाना लेकर आ गयी थी....और में वही बैठ कर खाना खाने लगता हूँ.......
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में तुरंत आगे बढ़ा और भाभी को अपने गले से लगा लिया.....वो भी बिल्कुल मुझ से चिपक सी गयी थी...और मेरे कंधे पर सिर रख कर सिसकने लग गयी....

मैने बड़ी मुश्किल से उन्हे संभाला....और थोड़ी देर बाद वो बाहर चली भी गयी...

कैसे कर पाउन्गा में ये सब....कैसे सब के जीवन फिर से खुशिया आ पाएँगी....कैसे फिर से मेरा घर फिर से खुशियो से भर जाएगा....क्या करूँ....क्या करूँ में....???

रात मेरी आँखो में ही कट गयी....बस यही सोचते सोचते कि कैसे में फिर से खुशिया ला पाउन्गा मेरे घर में....सुबह 11 बजे निकलना है और अभी सुबह के 4 बज चुके थे...

यही सोचते सोचते जाने कब मेरी आँख लग गयी....जो कुछ घंटी बाद रूही की आवाज़ से खुल गयी....

रूही--जय उठ जा....कितना सोएगा....चल जल्दी से उठ जा कॉलेज नही जाना है क्या....

में--नही दीदी में आज भी आप लोगो के साथ नही चल पाउन्गा....क्या मेरा एक काम कर दोगि....

रूही--तुझे मैने कभी किसी काम के लिए मना किया है जो पूछ रहा है....

में--दीदी डॉक्टर. आलोक के यहाँ से एक रिपोर्ट लेकर आनी है कॉलेज से आने के बाद आप मेरे मोबाइल पर उसकी एक फोटो भी भेज देना....

रूही--चल ठीक है....में कॉलेज से आते वक़्त तेरा ये काम कर दूँगी....वैसे तू आज कहाँ जा रहा है....कॉलेज में अटेंडेन्स शॉर्ट्स पड़ जाएँगी....वैसे ही छुट्टियाँ काफ़ी ज़्यादा हो गयी है....

में--दीदी ये काम कॉलेज से ज़्यादा ज़रूरी है...प्ल्ज़ आप मेरा वो काम ज़रूर याद से कर देना....भूल मत जाना...

रूही--नही भूलूंगी बाबा....

में--अच्छा नीरा उठ गयी क्या....

रूही--वो तो सुबह सब से पहले उठ गयी थी अभी भाभी के साथ किचन में है....

में--क्या बात है आज वो आलसी जल्दी कैसे उठ गयी....

रूही--पता नही सुबह से ही किचन में घुसी हुई है वो भी नहा धो कर....

तभी दरवाजे पर दस्तक होती है और दरवाजा खोल कर नीरा अंदर आजाती है....वो अपने साथ मेरे लिए कॉफी लेकर आई थी....

नीरा--आप उठ गये....ये लो में आपके लिए अपने हाथो से कॉफी बना कर लाई हूँ....

में--आज सूरज कहाँ से उगा है....आज तो मेरा बर्तडे भी नही है जो तू मुझे सुबह सुबह कॉफी पिलाने आ गयी है....

नीरा--अब से में ही आपके लिए सुबह कॉफी लाउन्गी और नाश्ता भी अपने हाथो से बनाया हुआ ही खिलाउन्गि....

में--मम्मी ने तुझे किचन में काम कैसे करने दिया....वो तो भाभी को भी बड़ी मुश्किल से किचन में घुसने देती है काम करने के लिए....इसीलिए घर में आज तक उन्होने कोई नोकर नही रखा....क्योकि वो घर का सारा काम खुद ही करना पसंद करती है....फिर तुझे कैसे घुसने दिया....

नीरा--वो क्या है ना....मैने मम्मी को एक बात बोली....इस वजह से मुझे वो काम करने से मना नही कर पाई और वैसे भी कॉफी बनाने के लिए तो मम्मी रूही दीदी को भी मना नही करती....तो मुझे क्यो करेगी....

में--चल ठीक है अब ये कॉफी का मग यहाँ रख और स्कूल जाने की तैयारी कर...

नीरा--वो मुझे आप से एक काम था....

में--कौनसा काम....

नीरा--बाद में बताउन्गी पहले आप फ्रेश हो जाओ और बाहर आ जाओ....

उसके बाद नीरा और रूही दोनो बाहर चले जाते है...तभी एक मिनिट बाद ही मेरे रूम का दरवाजा वापस खुल जाता है और नीरा भागते हुए मेरे बेडपर चढ़ कर मेरे उपर बैठ जाती है.....

में--ओये मोटी उठ....क्यो दबा रही है सुबह सुबह....

नीरा--पहले मुझे एक गुड मोर्निंग किस दो उसके बाद ही में यहाँ से जाउन्गि....

में--तुझे रोका किसने है जो चाहिए वो ले ले..
 
उसके बाद में और राजेश अपना अपना मोबाइल नंबर एक्सचेंज कर लेते है और फिर में वहाँ से उठ कर सीधा डॉक्टर आलोक के क्लिनिक की तरफ अपनी बाइक मोड़ लेता हूँ.....

शाम के 7 बज गये थे....में डॉक्टर आलोक के क्लिनिक में बैठा हुआ उनसे मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था....

कितना अजीब दिन था आज का...जिसे में अपना दुश्मन समझ रहा था वो तो मेरे पापा के अहसानो से वैसे ही दबा हुआ है....और फिर शमा से मिलना....जिसे देख कर मेरा रोम रोम कह रहा है....हां ये मेरी वही बहन है जो खो चुकी है....मुझे अब अपनी बहन को वहाँ से निकालने के अलावा ये भी पता करना है...कि इसकी माँ कौन है....क्या शमा का कोई और परिवार तो नही है....??

ये ही सवाल मेरे मन में लगातार हथोडे की तरह प्रहार कर रहे थे....तभी चपरासी ने आकर मुझे डॉक्टर के कॅबिन में जाने के लिए बोल दिया और में वहाँ से उठ कर सीधा कॅबिन में घुस गया.....

डॉक्टर--मुस्कुराते हुए....तुम कभी टाइम पर क्यो नही आते....में तुम्हे सुबह बुलाता हूँ तो शाम को आते हो और शाम को बुलाता हूँ तो सुबह.....

में--सर क्या करूँ....आज कल समय भी कुछ ज़्यादा ही तेज़ भागने लग गया है....देर हो ही जाती है....

डॉक्टर--कोई बात नही बोलो चाय लोगे या कॉफी...

में--सर थॅंक्स लेकिन मुझे थोड़ी जल्दी है कॉफी आपके साथ फिर किसी दिन ज़रूर पियुंगा....

डॉक्टर--अच्छा कोई बात नही....तुम वो सम्पेल्स मुझे दे दो....

उसके बाद में वो सारे लिफाफे डॉक्टर आलोक की टॅबेल पर रख देता हूँ और डॉक्टर आलोक एक एक करके सारे लिफाफे देखने लगते है.....

डॉक्टर--क्या बात है जय आज एक लिफ़ाफ़ा और बढ़ गया....तुम तो सिर्फ़ बड़े भाई वाला लिफ़ाफ़ा लाने वाले थे ये किसका सॅंपल ले आए तुम...और इन सब लिफाफो पर खून किसका लगा है....और लिफाफो पर तुम्हारे पापा भैया का तुम्हारा नाम क्यों है बाकी 3 नामो के अलावा....

में--सर कोई कन्फ्यूषन ना हो इस लिए मैने अपने घर वालो के नाम लिख दिए इस मे....और ये खून उसका है जिसका सॅंपल दूसरे लिफाफे में है....

डॉक्टर--इंट्रेस्टिंग.... लग रहा है कुछ पहेलियाँ सुलझाने में लगे हुए हो....खेर अगर मुझे तुम ना बताना चाहो तो ना सही लेकिन कुछ तो गड़बड़ चल रही है तुम्हारे दिमाग़ में....

में--सर जिस दिन ये पहेली सुलझ जाएगी....में उस दिन आपको सब कुछ सच सच बता दूँगा....अभी में आपसे इजाज़त चाहूँगा जाने की....

डॉक्टर--ठीक है....तुम कल आकर ये रिपोर्ट्‌स ले जाना....अभी तुम जा सकते हो.,..

में--कल कब आउ सर....?

डॉक्टर--जब तुम्हारा मन करे वैसे भी तुम मेरे दिए हुए वक़्त पर तो आओगे नही....

में--सर में वैसे भी कल बाहर हूँ रूही दीदी आएँगी आपसे रिपोर्ट्‌स लेने आप उन्हे ये रिपोर्ट्‌स दे देना....

डॉक्टर-ठीक है जय जैसा तुम चाहो....

उसके बाद में वहाँ से निकलकर सीधा अपनी बाइक एक शराब की दुकान के बाहर रोकता हूँ और एक स्कॉच की बोतल ले कर घर की तरफ बढ़ जाता हूँ....

घर पहुँच कर मम्मी को में वो ज्यूयलरी वाला बॉक्स दे देता हूँ....और उनसे कहता हूँ कल कोई आएगा आप उसे ये दे देना...उसके बाद में अपने रूम में आजाता हूँ और अपने कपड़े बदलने लगता हूँ....तभी रूम के दरवाजे पर दस्तक होती है...और में उसे अंदर आने के लिए कह देता हूँ....

भाभी--क्या बात है हीरो....कहाँ घूमते रहते हो आज कल सारा सारा दिन....चल क्या रहा है तुम्हारे दिमाग़ में....मम्मी से पूछती हूँ तो वो भी तेरा ही पक्ष उठाती है....कुछ मुझे भी बताएगा....

में--भाभी आपको सब कुछ बता दूँगा बस मुझे कुछ काम और करने है उसके बाद सब कुछ पहले की तरह हो जाएगा.....

भाभी--क्या सब कुछ पहले की तरह हो सकता है....??

भाभी की आँख में आँसू आ गये थे ये बात बोलते हुए.....मैने कितनी बड़ी ग़लती करदी उनके जख्म को कुरेद कर....

में तुरंत आगे बढ़ा और भाभी को अपने गले से लगा लिया.....वो भी बिल्कुल मुझ से चिपक सी गयी थी...और मेरे कंधे पर सिर रख कर सिसकने लग गयी
 
में--नही अंकल वो लड़की झूठ नही बोल रही....और मेरा दिल कहता है ये लड़की ही मेरी खोई हुए बहन है....प्लीज़ अंकल आप मेरी मदद करिए उसे वहाँ से निकालने के लिए जितना भी पैसा मुझे खर्च करना होगा में उसके लिए करूँगा....

प्रसाद--सोच लो बेटा कहीं ऐसा ना हो कि वो लड़की बाद में तुम्हे धोका देकर तुम्हारा पूरा जीवन बर्बाद कर दे....

में--मैने सोच लिया है अंकल बस आप मेरी मदद कर दीजिए....

प्रसाद--ठीक है बेटा जैसा तुम चाहो....

अंकल अपनी टॅबेल पर रखी हुई बेल बजाते है जिसे सुनकर एक चपरासी अंदर आजाता है....

उस चपरासी को इनस्पेक्टर शर्मा को बुलाने के लिए कहते है....फिर वो चपरासी. बाहर चला जाता है....

कुछ देर बाद हे दरवाजे पर दस्तक होती है....और प्रसाद अंकल उसे अंदर आने के लिए कहते है....

प्रसाद--जय बेटा ये है इनस्पेक्टर राजेश....ये तुम्हारी मदद उस लड़की को वहाँ से निकालने में करेंगे....

राजेश एक 6 फीट लंबा सुघटित जिस्म का मालिक था गोरा रंग, चेहरे पर आत्मविश्वास अच्छे से झलक रहा था उसके....

राजेश--सर किसे कहाँ से निकालना है....

पसद--राजेश....जय को तो तुम जानते ही हो....इन्होने एक लड़की को तवायफ़ के धंधे से बाहर निकालने की ज़िम्मेदारी उठाई है...और इन्होने उस लड़की को अपनी बहन भी माना है इसलिए तुम्हे जय के साथ मिलकर उस लड़की को वहाँ से आज़ाद करवाना है....

राजेश--सर....क्या इनको ये पता है कि ये धोके का शिकार भी हो सकते है उस लड़की को आज़ाद करवाने के चक्कर में....

प्रसाद--में इन्हे वो सब कुछ बता चुका हूँ लेकिन ये फिर भी उसे बचाने की रिस्क ले रहे है....इनकी नेक नियत पर भरोसा करते हुए तुम्हे उस लड़की को वहाँ से किसी भी तरह निकालना होगा...

राजेश--ठीक है सर पर जाना कहाँ है....

में--बनारस.....

राजेश--कुछ सोच कर.... लगता है उस लड़की के साथ साथ अब कुछ ज़िंदगियाँ और बर्बाद होने से बच जाएँगी....हम कल सुबह ही बनारस के लिए निकल जाएँगे सर.....मुझे खुशी है आपने मुझे इतना अच्छा काम दिया....इस भलाई के काम को में ज़रूर पूरा करूँगा...
 
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