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अब विभा उठी और नंगे ही हम सब को कोल्ड-ड्रिंक सर्व की, फ़िर बाथरूम में जा कर नहा कर नंगी ही आई और हम सव के सामने ही कपड़े पहने। हम सब भी बारी-बारी से नहाए और अपने-अपने कपडे पहने और फ़िर सब साथ में करीब ५.३० बजे बाहर घुमने निकल पड़े। इसके बाद हमने ६-९ के शो में फ़िल्म देखी और फ़िर एक होटल में खाना खाया और एक-दूसरे को अपना-अपना नम्बर दिया। इसके बाद मैं और विभा अपने कमरे में आ गये।
अगले दिन शाम में हमारी वापसी की टिकट थी, और हम थक भी गए थे सो बिना सेक्स की बात भी किये हम सो गए। सुबह करीब ७ बजे हम दोनों सो कर उठे और आरम से नहा-धोकर करीब ९ बजे नाश्ता करके शाम को लौटने से पहले बाजर से कुछ ऐसे ही सामान वगैरह खरीदने का प्लान करने लगे
। बाजार वैसे भी ११ बजे के पहले खुलने वाला नहीं था तो कमरे में ही टीवी चला कर हम दोनों लेट गए। तभी मेरे किरायेदार अंकल का फ़ोन आया। वो जानना चाह रहे थे कि मेरा आज वापस जाना हो रहा है कि नहीं। अगले दिन रविवार था सो छुट्टी के दिन वो हमें खाने पर बुलाने के लिए फ़ोन किए थे। मुझे यहाँ आए आज एक सप्ताह हो गया था और अब मेरा वापस जाना जरूरी हो गया था, बिजनेस को ऐसे बहुत दिन नहीं छोडा जा सकता है। मैंने उन्हें मना कर दिया।
मुझे उनके बात से लगा कि वो थोडा निराश हो गए हैं। उन्होंने कहा, "वोह... कोई बात नहीं... मुझे लगा शायद इस बार विभा बेटा से मिलूँ तो कुछ और चीज मिल जाए। पिछली बार रुमाल मिला था। आज तक वैसे हीं है, बिना धुले... मेरे कपड़ों की आलमारी में सबसे नीचे"। मैं उनके इस ठरकीपने को समझ सकता था। करीब ६० साल की उम्र थी, सो साठा तो पाठा वाली बात थी उनके साथ। अचानक मुझे जाने क्या सुझा तो मैं कहा, "आज तो अंकल दिन में बाजार से कुछ ऐसे भी सामान खरीदने का प्रोग्राम है, बाकि कुछ खास नहीं। आप अगर आज अपनी छुट्टी कर सकें तो होटल ही आ जाईए, हम सब साथ में बाजार चल चलेंगे और आपको भी विभा का साथ कुछ घंटों के लिए मिल जाएगा। अगर आपलोग का मन गप्पे मारने का होगा तो आप दोनों यहीं रुक जाना और मैं बाजार से दो घंटे में घुम आउँगा"। मेरी बात सुन कर अंकल खुश हो गए और बोले, "ठीक है, मैं करीब ११ बजे तक आता हूँ, एक बार औफ़िस जाकर सब को काम समझाने के बाद। हम सब साथ में बाजार चलेंगे, मेरी गाड़ी है हीं, परेशानी नहीं होगी"।
विभा पास बैठी हम दोनों की बातें सुन रही थी। वो बोली, "अब जब अंकल गाड़ी ले कर आ रहे हैं तो आराम से दोपहर में निकलेंगे, बाजार में भीड़ कम मिलेगा दोपहर में"।
मैंने उसको बताया कि अंकल यहाँ उससे मिलने हीं आ रहे हैं, उनको उस दिन का रुमाल आज तक मस्त किए हुए हैं, तो विभा हँस पड़ी, "अजीब हाल है मर्द सब का, अब इस उम्र में भी उनका यह हाल है तो मैं समझ सकती हूँ कि आप क्यों ऐसे सेक्स के लिए बेचैन रहते हैं"।
मैंने अब उसको बताया कि मर्द कभी बुढा नहीं होता, और अगर वो अपना फ़िटनेस ठीक रखे तो किसी भी उम्र में लडकी चोद सकता है।
वो बोली, "हाँ, दिख रहा है मुझे... आपका बस चले तो आप आज मुझे अंकल से भी चुदवा दीजिए, राजन और विजय से तो चुदा ही दिए यहाँ ला कर"।
मैंने उसकी बात पकड़ ली, "क्यों नहीं... बहुत मजा आएगा, तुम एक बार कोशिश कर ही लो, अगर अंकल चाहे तो कर लेना उनके साथ सेक्स"।
वो मुझे झिडकते हुए बोली, "हट्ट... आप भी न, अंकल बेचारे इतने बुजुर्ग आदमी... वो यह सब क्यों करेंगे... ऐसे बात कर लेना, मजाक कर लेना अलग बात है और सेक्स करना अलग बात"।
मैंने भी उसको उसकाया कि वो बस हल्के से थोडा अंग-प्रदर्शन करे और उनको थोड़ा उकसाये, जरा मैं भी तो देखूँ कि इस ठरकी में कितना जिगर है...वैसे भी तुम यहाँ पर अब तक सब कुछ मेरी मर्जी से की हो तो यह भी एक बार कर लो ना।
विभा बोली, "ठीक है, अंग प्रदर्शन में क्या है... वो तो उस दिन भी उनके सामने ही पैन्टी पहनी ही थी तो मेरा असली अंग तो वो देखे हुए हैं, अब इसमें क्या लाज... अभी तक आपकी बात मानी हूँ से आज भी वही करुँगी जो आप कहेंगे"।
मैंने उसको बाँहों में बह कर चुम लिया, "मेरी डार्लिंग विभा, तुम बहुत अच्छी हो"।
वो मुझे जोर से अपने बाहों में भींचती हुई बोली, "चलिए न किशनगंज उसके बाद आपको बताती हूँ, यहाँ तो मैं आपकी बात मानने का कसम खाई हुई हूँ, पर एक बार किशनगंज पहुँची कि मैं आजाद हुई और तब आपसे सब बदला लुँगीं"।
हम दोनों अब हँसने लगे। फ़िर विभा हटी और जल्दी से अपने कपडे उतारने लगी,
"भैया, जल्दी से मेरा काँख और चूत पर का बाल साफ़ कर दीजिए न। जब अंकल को यह सब दिखाना ही है तो ठीक से साफ़ ही आज दिखाती हूँ, उस दिन तो सब कुछ बाल से भरा हुआ था।"
मुझे भी उसका आइडिया पसंद आया सो मैं भी पानी और रेजर ले कर आ गया और फ़िर रेजर को सीधा और फ़िर उल्टा चला कर अपनी छोटी बहन विभा की काँख और चूत को एक दम चिकनी सफ़ाचट बना दिया। पिछले सप्ताह भर की लगातार चुदाई से उसकी चूत की फ़ाँक बहुत सुन्दर तरीके से खुल गई थी और भीतर के होठ अब थोडा सा बाहर लटक रहे थे, क्योंकि म्रेरे द्वारा उसके बदन को छुने से वो गर्म हो रही थी। वो अब एक सेक्सी वाली लाल माईक्रो-पैन्टी और गुलाबी ब्रा पहनने के बाद एक बिल्कुल शुद्ध देसी घरेलू लड़की की तरह सफ़ेद सलवार सूट पहन लिया और सज्जन की तरह एक दुपट्टा भी ले लिया। बाल वगैरह भी सेट करके हल्का सा काजल और लिपस्टिक लगा कर बहुर सुन्दर तरीके से सज गई।
समय बीताने के लिए हमने चाय और पकौडे का आर्डर कर दिया और रूम सर्विस वाला वही लड़का यह सब लाया जो उस दिन लाया था जिस दिन मैंने विभा की झाँट पहली बार बनाई थी। वो कनखियों से विभा को बार-बार देख रहा था पर आज कि विभा एक दम घरेलू लड़की थी। वो बेचारा चला गया तो हम दोनों पिछली बार को याद करके जोर से हँस पडे। हम अब टीवी देखते हुए उस ठरकी किरायेदार का इंतजार करने लगे।
विभा अब आराम से बोली, "भैया, आप इस एक सप्ताह में मुझे क्या से क्या बना दिए, सोचने पर कैसा लगता है"।
मैंने बात की गंभीरता को समझा पर बात को हल्का करते हुए बोला, "क्या बना दिए क्या... तुम लडकी थी, जवान हो गई थी तो औरत बना दिए। इसमें ऐसा-वैसा लगने वाली क्या बात है?"
विभा बोली, "हाँ सो तो है, पर यहाँ पर मुझे आपके अलावे और भी उन दोनों लडकों के साथ सेक्स करना पड़ा सो... शुरु होने के एक सप्ताह के भीतर ऐसा नहीं होता है", वो मुस्कुरा रही थी।
मैंने भी कहा, "अरे तो तुम किस्मत वाली हो जो इतनी जल्दी अलग-अलग टाईप के लन्ड का स्वाद लेने को मिला... और अगर भगवान ने चाहा तो अब तुम्हें एक सिनियर सिटिजेन का भी स्वाद मिलेगा। देख लेना, वो ठरकी तुम्हें चोदे बिना रहेगा नहीं, अगर तुम ने जरा सा भी उसको ढ़ील दे दी"।
वो मुझसे पूछी, "आप सलाह दीजिए न भैया, उसके साथ कर लूँ कि उसी दिन की तरफ़ सिर्फ़ बदन दिखा कर रह जाऊँ?"
मैंने अब उसकी आँखों में झाँकते हुए पूछा, "तुम्हारा क्या मन है?"
वो फ़िर बोली, "यह मैं आप पर छोडती हूँ..."।
मैंने कहा, "मुझे तो तुम्हें चुदाते हुए देख कर बहुत मजा आता है। तुम्हारे चेहरे पर जो भाव आता है जब तुम चुद रही होती हो, वो देखने लायक होता है। मेरे से भी जब चुदाती हो तब भी... पर जब तुम दुसरे से चुदाते हुए मुझसे नजर मिलाती हो तो मेरा दिल धक्क से कर जाता है। एक भाई को अपनी सगी छोटी बहन को ऐसे दुसरे से चुदाते देखना नसीब नहीं होता।"
विभा मुस्कुराई, "मतलब, उस बुढ़े से मैं अब चुदा हीं लूँ ताकि आपको मजा आए... ठीक है देख लीजिए आज, कैसे उस बुढे का मैं भुर्ता बनाती हूँ"।
मैंने भी जोड दिया, "बुढे का नहीं, उसके लन्ड का भुर्ता बनाना वो भी अपनी चूत से, और देखना कहीं वो बुढ़ा ही तुम्हारी चूत का भोंसडा न बना दे"।
विभा बोली, "चुप बहेनचोद...", फ़िर उठी और कमरे के फ़्रीज में से एक सेव निकाल कर लाई और उसमें से दो पतली फ़ाँक काटी। फ़िर जल्दी से अपनी सलवार नीचे ससार कर चट पैन्टी भी नीचे की और मेरे सामने सोफ़े पर बैठ कर अपने जाँघ को खोल कर उन सेव के फ़ाँकों को अपने चूत में घुसा ली। मैं यह देख कर दंग था, और विभा आराम से तीनों टुकडों को चूत में डालने के बाद उठी और अपना पैन्टी और सलवार पहन ली। सेव की फ़ाँकें उसके चूत में चुभ रही थी सो थोड़ा कमर नचा कर और पैर को हिला-डुला कर उन फ़ाँकों को अपने चूत में आराम से सेट करके चल कर देखी और फ़िर आराम से बैठी, "हाँ अब ठीक से सेट हो गया है छेद में"। उसकी इस तैयारी को देख मेरा लन्ड फ़नफ़ना गया कि तभी रूम की कौलबेल बज गई।
अगले दिन शाम में हमारी वापसी की टिकट थी, और हम थक भी गए थे सो बिना सेक्स की बात भी किये हम सो गए। सुबह करीब ७ बजे हम दोनों सो कर उठे और आरम से नहा-धोकर करीब ९ बजे नाश्ता करके शाम को लौटने से पहले बाजर से कुछ ऐसे ही सामान वगैरह खरीदने का प्लान करने लगे
। बाजार वैसे भी ११ बजे के पहले खुलने वाला नहीं था तो कमरे में ही टीवी चला कर हम दोनों लेट गए। तभी मेरे किरायेदार अंकल का फ़ोन आया। वो जानना चाह रहे थे कि मेरा आज वापस जाना हो रहा है कि नहीं। अगले दिन रविवार था सो छुट्टी के दिन वो हमें खाने पर बुलाने के लिए फ़ोन किए थे। मुझे यहाँ आए आज एक सप्ताह हो गया था और अब मेरा वापस जाना जरूरी हो गया था, बिजनेस को ऐसे बहुत दिन नहीं छोडा जा सकता है। मैंने उन्हें मना कर दिया।
मुझे उनके बात से लगा कि वो थोडा निराश हो गए हैं। उन्होंने कहा, "वोह... कोई बात नहीं... मुझे लगा शायद इस बार विभा बेटा से मिलूँ तो कुछ और चीज मिल जाए। पिछली बार रुमाल मिला था। आज तक वैसे हीं है, बिना धुले... मेरे कपड़ों की आलमारी में सबसे नीचे"। मैं उनके इस ठरकीपने को समझ सकता था। करीब ६० साल की उम्र थी, सो साठा तो पाठा वाली बात थी उनके साथ। अचानक मुझे जाने क्या सुझा तो मैं कहा, "आज तो अंकल दिन में बाजार से कुछ ऐसे भी सामान खरीदने का प्रोग्राम है, बाकि कुछ खास नहीं। आप अगर आज अपनी छुट्टी कर सकें तो होटल ही आ जाईए, हम सब साथ में बाजार चल चलेंगे और आपको भी विभा का साथ कुछ घंटों के लिए मिल जाएगा। अगर आपलोग का मन गप्पे मारने का होगा तो आप दोनों यहीं रुक जाना और मैं बाजार से दो घंटे में घुम आउँगा"। मेरी बात सुन कर अंकल खुश हो गए और बोले, "ठीक है, मैं करीब ११ बजे तक आता हूँ, एक बार औफ़िस जाकर सब को काम समझाने के बाद। हम सब साथ में बाजार चलेंगे, मेरी गाड़ी है हीं, परेशानी नहीं होगी"।
विभा पास बैठी हम दोनों की बातें सुन रही थी। वो बोली, "अब जब अंकल गाड़ी ले कर आ रहे हैं तो आराम से दोपहर में निकलेंगे, बाजार में भीड़ कम मिलेगा दोपहर में"।
मैंने उसको बताया कि अंकल यहाँ उससे मिलने हीं आ रहे हैं, उनको उस दिन का रुमाल आज तक मस्त किए हुए हैं, तो विभा हँस पड़ी, "अजीब हाल है मर्द सब का, अब इस उम्र में भी उनका यह हाल है तो मैं समझ सकती हूँ कि आप क्यों ऐसे सेक्स के लिए बेचैन रहते हैं"।
मैंने अब उसको बताया कि मर्द कभी बुढा नहीं होता, और अगर वो अपना फ़िटनेस ठीक रखे तो किसी भी उम्र में लडकी चोद सकता है।
वो बोली, "हाँ, दिख रहा है मुझे... आपका बस चले तो आप आज मुझे अंकल से भी चुदवा दीजिए, राजन और विजय से तो चुदा ही दिए यहाँ ला कर"।
मैंने उसकी बात पकड़ ली, "क्यों नहीं... बहुत मजा आएगा, तुम एक बार कोशिश कर ही लो, अगर अंकल चाहे तो कर लेना उनके साथ सेक्स"।
वो मुझे झिडकते हुए बोली, "हट्ट... आप भी न, अंकल बेचारे इतने बुजुर्ग आदमी... वो यह सब क्यों करेंगे... ऐसे बात कर लेना, मजाक कर लेना अलग बात है और सेक्स करना अलग बात"।
मैंने भी उसको उसकाया कि वो बस हल्के से थोडा अंग-प्रदर्शन करे और उनको थोड़ा उकसाये, जरा मैं भी तो देखूँ कि इस ठरकी में कितना जिगर है...वैसे भी तुम यहाँ पर अब तक सब कुछ मेरी मर्जी से की हो तो यह भी एक बार कर लो ना।
विभा बोली, "ठीक है, अंग प्रदर्शन में क्या है... वो तो उस दिन भी उनके सामने ही पैन्टी पहनी ही थी तो मेरा असली अंग तो वो देखे हुए हैं, अब इसमें क्या लाज... अभी तक आपकी बात मानी हूँ से आज भी वही करुँगी जो आप कहेंगे"।
मैंने उसको बाँहों में बह कर चुम लिया, "मेरी डार्लिंग विभा, तुम बहुत अच्छी हो"।
वो मुझे जोर से अपने बाहों में भींचती हुई बोली, "चलिए न किशनगंज उसके बाद आपको बताती हूँ, यहाँ तो मैं आपकी बात मानने का कसम खाई हुई हूँ, पर एक बार किशनगंज पहुँची कि मैं आजाद हुई और तब आपसे सब बदला लुँगीं"।
हम दोनों अब हँसने लगे। फ़िर विभा हटी और जल्दी से अपने कपडे उतारने लगी,
"भैया, जल्दी से मेरा काँख और चूत पर का बाल साफ़ कर दीजिए न। जब अंकल को यह सब दिखाना ही है तो ठीक से साफ़ ही आज दिखाती हूँ, उस दिन तो सब कुछ बाल से भरा हुआ था।"
मुझे भी उसका आइडिया पसंद आया सो मैं भी पानी और रेजर ले कर आ गया और फ़िर रेजर को सीधा और फ़िर उल्टा चला कर अपनी छोटी बहन विभा की काँख और चूत को एक दम चिकनी सफ़ाचट बना दिया। पिछले सप्ताह भर की लगातार चुदाई से उसकी चूत की फ़ाँक बहुत सुन्दर तरीके से खुल गई थी और भीतर के होठ अब थोडा सा बाहर लटक रहे थे, क्योंकि म्रेरे द्वारा उसके बदन को छुने से वो गर्म हो रही थी। वो अब एक सेक्सी वाली लाल माईक्रो-पैन्टी और गुलाबी ब्रा पहनने के बाद एक बिल्कुल शुद्ध देसी घरेलू लड़की की तरह सफ़ेद सलवार सूट पहन लिया और सज्जन की तरह एक दुपट्टा भी ले लिया। बाल वगैरह भी सेट करके हल्का सा काजल और लिपस्टिक लगा कर बहुर सुन्दर तरीके से सज गई।
समय बीताने के लिए हमने चाय और पकौडे का आर्डर कर दिया और रूम सर्विस वाला वही लड़का यह सब लाया जो उस दिन लाया था जिस दिन मैंने विभा की झाँट पहली बार बनाई थी। वो कनखियों से विभा को बार-बार देख रहा था पर आज कि विभा एक दम घरेलू लड़की थी। वो बेचारा चला गया तो हम दोनों पिछली बार को याद करके जोर से हँस पडे। हम अब टीवी देखते हुए उस ठरकी किरायेदार का इंतजार करने लगे।
विभा अब आराम से बोली, "भैया, आप इस एक सप्ताह में मुझे क्या से क्या बना दिए, सोचने पर कैसा लगता है"।
मैंने बात की गंभीरता को समझा पर बात को हल्का करते हुए बोला, "क्या बना दिए क्या... तुम लडकी थी, जवान हो गई थी तो औरत बना दिए। इसमें ऐसा-वैसा लगने वाली क्या बात है?"
विभा बोली, "हाँ सो तो है, पर यहाँ पर मुझे आपके अलावे और भी उन दोनों लडकों के साथ सेक्स करना पड़ा सो... शुरु होने के एक सप्ताह के भीतर ऐसा नहीं होता है", वो मुस्कुरा रही थी।
मैंने भी कहा, "अरे तो तुम किस्मत वाली हो जो इतनी जल्दी अलग-अलग टाईप के लन्ड का स्वाद लेने को मिला... और अगर भगवान ने चाहा तो अब तुम्हें एक सिनियर सिटिजेन का भी स्वाद मिलेगा। देख लेना, वो ठरकी तुम्हें चोदे बिना रहेगा नहीं, अगर तुम ने जरा सा भी उसको ढ़ील दे दी"।
वो मुझसे पूछी, "आप सलाह दीजिए न भैया, उसके साथ कर लूँ कि उसी दिन की तरफ़ सिर्फ़ बदन दिखा कर रह जाऊँ?"
मैंने अब उसकी आँखों में झाँकते हुए पूछा, "तुम्हारा क्या मन है?"
वो फ़िर बोली, "यह मैं आप पर छोडती हूँ..."।
मैंने कहा, "मुझे तो तुम्हें चुदाते हुए देख कर बहुत मजा आता है। तुम्हारे चेहरे पर जो भाव आता है जब तुम चुद रही होती हो, वो देखने लायक होता है। मेरे से भी जब चुदाती हो तब भी... पर जब तुम दुसरे से चुदाते हुए मुझसे नजर मिलाती हो तो मेरा दिल धक्क से कर जाता है। एक भाई को अपनी सगी छोटी बहन को ऐसे दुसरे से चुदाते देखना नसीब नहीं होता।"
विभा मुस्कुराई, "मतलब, उस बुढ़े से मैं अब चुदा हीं लूँ ताकि आपको मजा आए... ठीक है देख लीजिए आज, कैसे उस बुढे का मैं भुर्ता बनाती हूँ"।
मैंने भी जोड दिया, "बुढे का नहीं, उसके लन्ड का भुर्ता बनाना वो भी अपनी चूत से, और देखना कहीं वो बुढ़ा ही तुम्हारी चूत का भोंसडा न बना दे"।
विभा बोली, "चुप बहेनचोद...", फ़िर उठी और कमरे के फ़्रीज में से एक सेव निकाल कर लाई और उसमें से दो पतली फ़ाँक काटी। फ़िर जल्दी से अपनी सलवार नीचे ससार कर चट पैन्टी भी नीचे की और मेरे सामने सोफ़े पर बैठ कर अपने जाँघ को खोल कर उन सेव के फ़ाँकों को अपने चूत में घुसा ली। मैं यह देख कर दंग था, और विभा आराम से तीनों टुकडों को चूत में डालने के बाद उठी और अपना पैन्टी और सलवार पहन ली। सेव की फ़ाँकें उसके चूत में चुभ रही थी सो थोड़ा कमर नचा कर और पैर को हिला-डुला कर उन फ़ाँकों को अपने चूत में आराम से सेट करके चल कर देखी और फ़िर आराम से बैठी, "हाँ अब ठीक से सेट हो गया है छेद में"। उसकी इस तैयारी को देख मेरा लन्ड फ़नफ़ना गया कि तभी रूम की कौलबेल बज गई।