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Guest
सब एक साथ ही चाय पिए और फ़िर विभा खाना बनाने चली गई और नाज बिस्तर पर सिकुड कर बैठ गई। वो अभी भी नंगी ही थी। मैंने अब उसको नहा कर अपना बदन साफ़ करने को बोला और कहा कि आज रात को मैं उसको फ़िर से चोदुँगा तो बेचारी सहम गई।
मैंने उसको समझाया कि अब उसको परेशानी नहीं होगी, "देखी थी ना विभा को चुदाते समय कुछ दर्द हुआ था, बस पहली बार ही दर्द होता है... तुम अब बिना दर्द के जब भी चाहो चुद सकती हो"।
वो मेरी बात सुन कर चुप-चाप बाथरूम की तरफ़ चल पडी।
रात में मैंने उसको एक बार और चोदा और इस बार उसको ज्यादा परेशानी नहीं हुई पर फ़िर भी वो जैसे थक कर निढ़ाल हुई जा रही थी।
फ़िर यह सुन कर कि अभी मेरा मन नहीं भरा है वो अब बहुत कातर स्वर में बोली, "अब छोड़ दीजिए न सर, अब थकान से लग रहा है कि मर जाउँगी"।
मुझे उस पर दया आ गई तो मैंने कहा, "ठीक है पर कल तुम्हारी नहीं चलेगी और तुमको लगातार चुदना होगा जैसे मैं चाहूँ, समझ रही हो। अभी तो तुम्हारी गाँड़ भी मारना है मुझे... विभा गाँड मरवाती नहीं है, तो रंडी की ही गांड मार कर संतोष करना होगा ना"।
वो फ़िर बोली, "ठीक है.... कल आप जो कहे जैसे कहे करवा लूँगी, पर अब प्लीज मुझे सोने दीजिए"।
उसकी मजबूरी देख कर मैंने उसको विभा के साथ सोने भेज दिया और कहा कि कल सुबह उठते ही उसको मेरे पास आ जाना है मैं उसको चोदने के बाद ही बिस्तर से निकलुँगा। मैं खुद भी अपना ताकत कल के लिए बचा के रखना चाहता था, क्योंकि रविवार को पूरा दिन और पूरी रात मेरी थी।
मैं सोने के लिए बिस्तर पर चल दिया कि तभी प्रभा का फ़ोन आ गया। इधर-ऊधर की बातों के बाद वो बताई कि इस सप्ताहान्त में वो और उसका पति एक न्युडिस्ट कल्ब में बीताने वाले हैं और उसने अपना नाम भी उन लडकियों में लिखवा दिया है जो वहाँ स्वैपिंग गेम में हिस्सा लेगी। उस क्लब में दोपहर में लौटरी निकाल कर जोड़ों को बदल दिया जाता था और फ़िर दो घन्टे सब मर्द अपनी लड़की को छोड कर किसी और के साथ रहते थे और रात में रोज देर रात तक और्जी पार्टी होती थी जिसमें एक बड़े से हौल में सब जोडे इकट्ठा हो कर आपस में सेक्स करते थे। जिनको सेक्स करने का मन नहीं होता वो पार्टी का मजा देख कर लेते थे।
किसी भी मर्द को सेक्स करने के लिए उसके साथ की लडकी का नाम भी सेक्स करने वाली के रूप में डलवाना जरूरी थी। पिछले सप्ताहान्त में भी प्रभा और प्रभात वहां रहे थे पर वो सिर्फ़ दर्शक की तरह ही वहां रहे थे क्योंकि वो जानते नहीं थे कि क्या सब स्पेशल वहाँ होता है। और्जी पार्टी में दर्शक होने के लिए एक्स्ट्रा १०० डौलर देना होता था, जिसमें ड्रिंक फ़्री मिलता था, पर अगर आप पार्टी में हिस्सा लीजिए तो सिर्फ़ २० डौलर लगता था। इसी तरह का हिसाब स्वैपिंग गेम के लिए भी था, अगर आप हिस्सा ले तो २० डौलर और न लें तो ६० डौलर पर्ति मर्द।
इसबार मजा और किफ़ायत को देख कर प्रभा और प्रभात ने इस दोनों स्पेशल इवेन्ट में नाम डलवा लिया था। वो बहुत खुश लग रही थी और क्लब जाने से पहले वो मेरा आशीर्वाद लेना चाहती थी। प्रभा में एक बात थी कि वो जब भी कुछ नया करती तो मेरा पैर छूकर मुझसे आशीर्वाद जरूर लेती, चाहे वो एक नया कपडा ही क्यों न पहनी हो। मुझे थोडा अजीब तो लगा कि मेरी बहन मुझसे ऐसे काम के लिए आशीर्वाद ले रही है पर अच्छा भी लगा कि उसको मुझ पर भरोसा कितना है। मैंने उसको हमेशा खुश रहने का आशीर्वाद दिया और कहा, "हो सके तो वहाँ कि कुछ फ़ोटो भेजना"।
वो बोली, "जरूर भैया, वहाँ दो फ़ोटो वो फ़्री में देते हैं सब को, और अगर आप और फ़ोटो लेना चाहते हैं तो कीमत दे कर ले सकते हैं। इस बार कुछ ज्यादा समझ में आएगा, पिछली बार तो पहली बार था तो ज्यादा पता नहीं चला, अबकि बार वहाँ का फ़ुल मेम्बरशिप ले कर जा रहे हैं तो अब सब पता चल जाएगा"। प्रभात की किस्मत से मुझे इर्ष्या हुई, कि उसको बिल्कुल उसके मन के लायक सेक्सी बीवी मिली है, पता नहीं मेरा क्या होगा। यही सब सोचते हुए मुझे नींद आ गई।
मैंने उसको समझाया कि अब उसको परेशानी नहीं होगी, "देखी थी ना विभा को चुदाते समय कुछ दर्द हुआ था, बस पहली बार ही दर्द होता है... तुम अब बिना दर्द के जब भी चाहो चुद सकती हो"।
वो मेरी बात सुन कर चुप-चाप बाथरूम की तरफ़ चल पडी।
रात में मैंने उसको एक बार और चोदा और इस बार उसको ज्यादा परेशानी नहीं हुई पर फ़िर भी वो जैसे थक कर निढ़ाल हुई जा रही थी।
फ़िर यह सुन कर कि अभी मेरा मन नहीं भरा है वो अब बहुत कातर स्वर में बोली, "अब छोड़ दीजिए न सर, अब थकान से लग रहा है कि मर जाउँगी"।
मुझे उस पर दया आ गई तो मैंने कहा, "ठीक है पर कल तुम्हारी नहीं चलेगी और तुमको लगातार चुदना होगा जैसे मैं चाहूँ, समझ रही हो। अभी तो तुम्हारी गाँड़ भी मारना है मुझे... विभा गाँड मरवाती नहीं है, तो रंडी की ही गांड मार कर संतोष करना होगा ना"।
वो फ़िर बोली, "ठीक है.... कल आप जो कहे जैसे कहे करवा लूँगी, पर अब प्लीज मुझे सोने दीजिए"।
उसकी मजबूरी देख कर मैंने उसको विभा के साथ सोने भेज दिया और कहा कि कल सुबह उठते ही उसको मेरे पास आ जाना है मैं उसको चोदने के बाद ही बिस्तर से निकलुँगा। मैं खुद भी अपना ताकत कल के लिए बचा के रखना चाहता था, क्योंकि रविवार को पूरा दिन और पूरी रात मेरी थी।
मैं सोने के लिए बिस्तर पर चल दिया कि तभी प्रभा का फ़ोन आ गया। इधर-ऊधर की बातों के बाद वो बताई कि इस सप्ताहान्त में वो और उसका पति एक न्युडिस्ट कल्ब में बीताने वाले हैं और उसने अपना नाम भी उन लडकियों में लिखवा दिया है जो वहाँ स्वैपिंग गेम में हिस्सा लेगी। उस क्लब में दोपहर में लौटरी निकाल कर जोड़ों को बदल दिया जाता था और फ़िर दो घन्टे सब मर्द अपनी लड़की को छोड कर किसी और के साथ रहते थे और रात में रोज देर रात तक और्जी पार्टी होती थी जिसमें एक बड़े से हौल में सब जोडे इकट्ठा हो कर आपस में सेक्स करते थे। जिनको सेक्स करने का मन नहीं होता वो पार्टी का मजा देख कर लेते थे।
किसी भी मर्द को सेक्स करने के लिए उसके साथ की लडकी का नाम भी सेक्स करने वाली के रूप में डलवाना जरूरी थी। पिछले सप्ताहान्त में भी प्रभा और प्रभात वहां रहे थे पर वो सिर्फ़ दर्शक की तरह ही वहां रहे थे क्योंकि वो जानते नहीं थे कि क्या सब स्पेशल वहाँ होता है। और्जी पार्टी में दर्शक होने के लिए एक्स्ट्रा १०० डौलर देना होता था, जिसमें ड्रिंक फ़्री मिलता था, पर अगर आप पार्टी में हिस्सा लीजिए तो सिर्फ़ २० डौलर लगता था। इसी तरह का हिसाब स्वैपिंग गेम के लिए भी था, अगर आप हिस्सा ले तो २० डौलर और न लें तो ६० डौलर पर्ति मर्द।
इसबार मजा और किफ़ायत को देख कर प्रभा और प्रभात ने इस दोनों स्पेशल इवेन्ट में नाम डलवा लिया था। वो बहुत खुश लग रही थी और क्लब जाने से पहले वो मेरा आशीर्वाद लेना चाहती थी। प्रभा में एक बात थी कि वो जब भी कुछ नया करती तो मेरा पैर छूकर मुझसे आशीर्वाद जरूर लेती, चाहे वो एक नया कपडा ही क्यों न पहनी हो। मुझे थोडा अजीब तो लगा कि मेरी बहन मुझसे ऐसे काम के लिए आशीर्वाद ले रही है पर अच्छा भी लगा कि उसको मुझ पर भरोसा कितना है। मैंने उसको हमेशा खुश रहने का आशीर्वाद दिया और कहा, "हो सके तो वहाँ कि कुछ फ़ोटो भेजना"।
वो बोली, "जरूर भैया, वहाँ दो फ़ोटो वो फ़्री में देते हैं सब को, और अगर आप और फ़ोटो लेना चाहते हैं तो कीमत दे कर ले सकते हैं। इस बार कुछ ज्यादा समझ में आएगा, पिछली बार तो पहली बार था तो ज्यादा पता नहीं चला, अबकि बार वहाँ का फ़ुल मेम्बरशिप ले कर जा रहे हैं तो अब सब पता चल जाएगा"। प्रभात की किस्मत से मुझे इर्ष्या हुई, कि उसको बिल्कुल उसके मन के लायक सेक्सी बीवी मिली है, पता नहीं मेरा क्या होगा। यही सब सोचते हुए मुझे नींद आ गई।