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बाजी जोया ने कहा- "चलो मैं चलती हैं तुम्हारे साथ.."
फिर मैं और बाजी ऊपर चले गये। छत का एक चक्कर लगाकर स्टोररूम के पास खड़े हो गये। मैं झिझक रहा था बाजी से पहल करने में। बाजी में मेरी तरफ हवस भरी नजरों से देखा तो मुझे कुछ हिम्मत हुई। मैं बाजी के करीब हुवा और उनका हाथ पकड़ लिया।
बाजी ने कहा- "आखीर में हम दोबारा मिल रहे हैं..." और बाजी में मुझे झप्पी डाल ली।
मैने बाजी को बाहों में भर लिया। हमारे होंठ करीब आए और आपात में मिल गये। एक जज़बाती किस कर के मुँह हटाया तो हमने एक दूसरे को देखा। मैं बाजी को स्टोर रूम में ले गया। इससे पहले मैं ऊपर के दरवाजे की कुण्डी लगा चुका था। स्टोर रूम में जाते ही मैंने बाजी को दुबारा पकड़ लिया। यहां स्टोर रूम में अंधेरा था, लेकिन थोड़ा नजर आ रहा था।
मॅन बाजी के भारी चूतड़ मुट्ठी में भर लिए तो बाजी में मेरा लण्ड पकड़ लिया जो अभी अच्छी तरह खड़ा भी नहीं हुआ था। बाजी के हाथ में लण्ड आते ही एक मिनट बाद खड़ा हो गया और झटके लेने लगा।
मैंने बाजी के चूतड़ दबाते हुये उनको कहा- "बाजी बहुत याद किया तुमको। याद कर-कर के लण्ड हाथ में पकड़कर तुमको याद करता था..."
बाजी ने कहा- "भली मेरा भी यही हाल था। मेरी फुद्दी बहुत पानी छोड़ती थी जब तुम्हारा टाइट लण्ड याद आता था..' कहकर बाजी में मेरी सलवार नीचे की और नंगे लण्ड पे ऊपर से नीचे तक हाथ को एक खास अंदाज में फेर रही थी, जिससे लण्ड में जोश पैदा हो रही थी।
मैं बाजी के गले से जा जंगी मम्मे नजर आ रहे थे इनको यहां से चूमने लगा। मम्मों का नरम गोस्त मेरे होंठों में भर जाता तो में उनको चूस लेता। मैं और बाजी बहुत गरम हो गये थे। कुछ जल्दी भी थी सेक्स करने की ताकी कोई आ ना जाएग सो देर ना करते हुये बाजी ने सलवार उतार ली और मैंने भी उतार ली।
वहां एक पुराने सोफे पे बाजी को लिटाया और बाजी की गुदाज टाँगें उठाकर चौड़ी कर ली जिसमें बाजी की फुद्दी नुमाया हो गई। मैंने बाजी की टांगें पकड़ी हुई थी। ऐसे ही लण्ड को फुद्दी के करीब किया तो बाजी ने
मेरे लण्ड पे अपना भूक मला और लण्ड को फुद्दी के सुराख पें सेंट किया। मैंने धक्का मारा तो लण्ड फिसलता हुवा अंदर जा घुसा।
बाजी की नरम गरम फुद्दी का एक अलग ही मजा आने लगा। मैंने टांगें छोड़ी और बाजी के ऊपर लेट गया। कमीज उनकी पहले ही ऊपर थी। मैंने मम्मे नंगे किए और उनको चूसते हुये फुदी मारने लगा। फुद्दी के साथ मम्मे चूसना इससे हम दोनों की जोश बढ़ गई। बाजी की सिसकियां निकलने लगी।
फिर मैं और बाजी ऊपर चले गये। छत का एक चक्कर लगाकर स्टोररूम के पास खड़े हो गये। मैं झिझक रहा था बाजी से पहल करने में। बाजी में मेरी तरफ हवस भरी नजरों से देखा तो मुझे कुछ हिम्मत हुई। मैं बाजी के करीब हुवा और उनका हाथ पकड़ लिया।
बाजी ने कहा- "आखीर में हम दोबारा मिल रहे हैं..." और बाजी में मुझे झप्पी डाल ली।
मैने बाजी को बाहों में भर लिया। हमारे होंठ करीब आए और आपात में मिल गये। एक जज़बाती किस कर के मुँह हटाया तो हमने एक दूसरे को देखा। मैं बाजी को स्टोर रूम में ले गया। इससे पहले मैं ऊपर के दरवाजे की कुण्डी लगा चुका था। स्टोर रूम में जाते ही मैंने बाजी को दुबारा पकड़ लिया। यहां स्टोर रूम में अंधेरा था, लेकिन थोड़ा नजर आ रहा था।
मॅन बाजी के भारी चूतड़ मुट्ठी में भर लिए तो बाजी में मेरा लण्ड पकड़ लिया जो अभी अच्छी तरह खड़ा भी नहीं हुआ था। बाजी के हाथ में लण्ड आते ही एक मिनट बाद खड़ा हो गया और झटके लेने लगा।
मैंने बाजी के चूतड़ दबाते हुये उनको कहा- "बाजी बहुत याद किया तुमको। याद कर-कर के लण्ड हाथ में पकड़कर तुमको याद करता था..."
बाजी ने कहा- "भली मेरा भी यही हाल था। मेरी फुद्दी बहुत पानी छोड़ती थी जब तुम्हारा टाइट लण्ड याद आता था..' कहकर बाजी में मेरी सलवार नीचे की और नंगे लण्ड पे ऊपर से नीचे तक हाथ को एक खास अंदाज में फेर रही थी, जिससे लण्ड में जोश पैदा हो रही थी।
मैं बाजी के गले से जा जंगी मम्मे नजर आ रहे थे इनको यहां से चूमने लगा। मम्मों का नरम गोस्त मेरे होंठों में भर जाता तो में उनको चूस लेता। मैं और बाजी बहुत गरम हो गये थे। कुछ जल्दी भी थी सेक्स करने की ताकी कोई आ ना जाएग सो देर ना करते हुये बाजी ने सलवार उतार ली और मैंने भी उतार ली।
वहां एक पुराने सोफे पे बाजी को लिटाया और बाजी की गुदाज टाँगें उठाकर चौड़ी कर ली जिसमें बाजी की फुद्दी नुमाया हो गई। मैंने बाजी की टांगें पकड़ी हुई थी। ऐसे ही लण्ड को फुद्दी के करीब किया तो बाजी ने
मेरे लण्ड पे अपना भूक मला और लण्ड को फुद्दी के सुराख पें सेंट किया। मैंने धक्का मारा तो लण्ड फिसलता हुवा अंदर जा घुसा।
बाजी की नरम गरम फुद्दी का एक अलग ही मजा आने लगा। मैंने टांगें छोड़ी और बाजी के ऊपर लेट गया। कमीज उनकी पहले ही ऊपर थी। मैंने मम्मे नंगे किए और उनको चूसते हुये फुदी मारने लगा। फुद्दी के साथ मम्मे चूसना इससे हम दोनों की जोश बढ़ गई। बाजी की सिसकियां निकलने लगी।