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मैंने कहा- "बस घुमता रहा, टाइम का पता नहीं चला..."
खैर, कुछ देर गपशप करके सोने के लिये लेट गया। फिर ऐसा कुछ खास नहीं हुआ। मैं सो गया और सुबह अपने टाइम में उठा। नहा धोकर नाश्ता किया और टीवी लगाकर बैठ गया।
हमको एक हफ़्ता हो गया था यहां आए, और में अब तक दो फुदिया मार चुका था माँ बेटी की। दोनों ही सेक्स
के मममले में खिलाड़ी निकली थी। मेरा इस वक़्त बड़ा दिल कर रहा था खाला से मस्ती करने का। सुबह का टाइम था हर कोई किसी ना किसी काम में बिजी था। खाला किचेन में थी। मैं उनकी तरफ ही देख रहा था की कोई मोका बने और मैं खाला को झप्पी लगाऊँ।
अचानक खाला किचेन से निकली और नानी के कमरे में अपने चूतड़ मटकाती चली गई। मेरी नजर चूंकी उन में पहले से थी इसलिए उनके भारी चूतड़ हिलते हुये मुझे दिख गये।
मैं भी मोका देखकर उठा और खाला के पीछे चला गया। खाला रूम में अपना सूट निकालकर प्रेस कर रही थी खड़ी होकर। मैं गया और खाला को पीछे से झप्पी लगा लो, और कहा- "खाला आई मिस यू...
खाला मुश्कुराई और कहा- "खैर तो है? आज सुबह ही मेरी याद आ गई। रात को तो तुम जल्दी सो गये थे। मुझे लगा था शायद तुम झप्पी लगाने आओ मेरी चारपाई पे..."
मैंने खाला को अपने साथ दबातें हमें कहा "बस खाला पता ही नहीं चला कब नींद आ गई." अब उनको क्या बताता रात को की आपका भांजा फुद्दी पे लण्ड रगड़ के आया था।
मैंने हाथ ऊपर किए और खाला के मम्मे पकड़ लिए। उनका दबाया तो खाला ने मेरे हाथों पे चपत लगाई- "क्या कर रहे हो बेटा। जगह तो देख लिया करो की हम कहां खड़े हैं। हर जगह शुरू हो जाते हो."
मैंने कहा- "खाला क्या करू? आपके बगैर रहा भी तो नहीं जाता..." और नीचे से लण्ड को खाला के चूतड़ों में घुसा दिया जो अब खड़ा हो रहा था।
खाला ने कहा "बेटा हाथ तो पीछे कर लो, कोई अचानक आ गया तो अच्छा नहीं लगेगा."
खैर, कुछ देर गपशप करके सोने के लिये लेट गया। फिर ऐसा कुछ खास नहीं हुआ। मैं सो गया और सुबह अपने टाइम में उठा। नहा धोकर नाश्ता किया और टीवी लगाकर बैठ गया।
हमको एक हफ़्ता हो गया था यहां आए, और में अब तक दो फुदिया मार चुका था माँ बेटी की। दोनों ही सेक्स
के मममले में खिलाड़ी निकली थी। मेरा इस वक़्त बड़ा दिल कर रहा था खाला से मस्ती करने का। सुबह का टाइम था हर कोई किसी ना किसी काम में बिजी था। खाला किचेन में थी। मैं उनकी तरफ ही देख रहा था की कोई मोका बने और मैं खाला को झप्पी लगाऊँ।
अचानक खाला किचेन से निकली और नानी के कमरे में अपने चूतड़ मटकाती चली गई। मेरी नजर चूंकी उन में पहले से थी इसलिए उनके भारी चूतड़ हिलते हुये मुझे दिख गये।
मैं भी मोका देखकर उठा और खाला के पीछे चला गया। खाला रूम में अपना सूट निकालकर प्रेस कर रही थी खड़ी होकर। मैं गया और खाला को पीछे से झप्पी लगा लो, और कहा- "खाला आई मिस यू...
खाला मुश्कुराई और कहा- "खैर तो है? आज सुबह ही मेरी याद आ गई। रात को तो तुम जल्दी सो गये थे। मुझे लगा था शायद तुम झप्पी लगाने आओ मेरी चारपाई पे..."
मैंने खाला को अपने साथ दबातें हमें कहा "बस खाला पता ही नहीं चला कब नींद आ गई." अब उनको क्या बताता रात को की आपका भांजा फुद्दी पे लण्ड रगड़ के आया था।
मैंने हाथ ऊपर किए और खाला के मम्मे पकड़ लिए। उनका दबाया तो खाला ने मेरे हाथों पे चपत लगाई- "क्या कर रहे हो बेटा। जगह तो देख लिया करो की हम कहां खड़े हैं। हर जगह शुरू हो जाते हो."
मैंने कहा- "खाला क्या करू? आपके बगैर रहा भी तो नहीं जाता..." और नीचे से लण्ड को खाला के चूतड़ों में घुसा दिया जो अब खड़ा हो रहा था।
खाला ने कहा "बेटा हाथ तो पीछे कर लो, कोई अचानक आ गया तो अच्छा नहीं लगेगा."