• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest घरेलू चुते और मोटे लंड

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
छेदी भी ऊपर चढ़ जाता है. बैग को सिरहाने रख कर खुशबू अंदर की ओर, उस तरफ पलट कर लेट जाती है. छेदी बैग से एक चादर निकाल कर खुशबू को ओढा देता है और फिर खुद भी वही चादर ओढ़ कर खुशबू के पीछे चिपक कर लेट जाता है. छेदी धीरे-धीरे अपना हाथ खुशबू की जांघों पर फेरने लगता है. तभी कोई कम्पार्टमेंट की एकमात्र बत्ती भी बुझा देता है और अन्दर अँधेरा छा जाता है. अँधेरा होते ही छेदी अपना हाथ खुशबू की टॉप में घुसा कर उसके मोटे दूध पकड़ लेता है और दबाने लगता है.तभी ट्रेन भी चल पड़ती है.

खुशबू: (धीमी आवाज़ में) सीईई....!! भैया. बहुत जोर से दबाते हो आप मेरे दूध.

छेदी: (धीमी आवाज़ में) बहनों के दूध दबाने में ही तो भाइयों को सबसे ज्यादा मजा आता है बहना (और छेदी अपनी कमर खुशबू की चूतड़ों में सटा देता है )

खुशबू: (धीमी आवाज़ में) उफ़ भैया...!!

छेदी खुशबू के गाल पर हाथ रखकर अपनी तरफ घुमा देता है और सर उठाकर उसके रसीले ओंठों को अपने मुहँ में भर कर चूसने लगता है. खुशबू भी छेदी के मुहँ में अपनी जीभ निकाल कर घुमाने लगती है तो छेदी भी अपनी जीभ खुशबू की जीभ से लड़ाने लगता है. कुछ देर दोनों भाई-बहन एक दुसरे के ओंठों का जी भर के रसपान करते है. फिर छेदी अपनी पैंट खोलकर निचे कर लेता है और खुशबू की स्कर्ट पीछे से उठाकर अपना मोटा लंड उसकी चूतड़ों के बीच रख देता है. खुशबू भी अपना एक पैर हल्का सा ऊपर उठा देती है तो छेदी लंड पकड़ कर उसकी बूर में घुसा देता है. कमर को एक झटका देते ही छेदी का लंड खुशबू की बूर में समां जाता है. ट्रेन तेज़ गति पकड़ चुकी थी और पटरी की तेज़ आवाज़ के साथ डिब्बा जोर-जोर से हिल रहा था. डब्बे के हिलने के साथ छेदी भी अपनी कमर जोर-जोर से हिलाने लगता है. उसका लंड खुशबू की बूर में तेज़ी से अन्दर बाहर होने लगता है. छेदी खुशबू की टॉप में हाथ डाले, उसके दूध दबाते हुए उसकी चुदाई कर रहा था. ट्रेन का डब्बा जितना ज्यादा हिलता, छेदी भी उतनी ही जोर से खुशबू की चुदाई कर देता. ३० मिनट तक खुशबू की अच्छी तरह से चुदाई करने के बाद छेदी अपना पानी उसकी बूर में गिरा देता है. दोनों भाई-बहन थक कर आँखे बंद कर लेते है. चादर ओढ़े धीरे-धीरे दोनों की आँख लग जाती है.

शाम के ५ बज रहे थे. अपने प्लान के मुताबीक उर्मिला सोनू और पायल के साथ माखनपुर से गोलू और कम्मो को साथ ले कर अपने भाई के घर की और निकल पड़ती है. सोनू गाड़ी चला रहा था और उसके साथ गोलू बैठा हुआ था. पीछे उर्मिला, पायल और कम्मो हंसी मजाक कर रहे थे. तीनों में कुछ इशारे होते है और फिर उर्मिला पायल से कहती है.

उर्मिला: अरे वाह पायल. आज तो तुने लाल रंग की कच्छी पहनी है.

पायल दीदी की लाल रंग की कच्छी का नाम सुनते ही सोनू झट से पीछे मुड़ कर देखता है. पायल अपने दोनों पैरों को सीट पर रखे हुए थी और उसकी उठी हुई स्कर्ट और जाँघों के बीच लाल रंग की पैन्टी दिख रही थी. सोनू आँखे फाड़े अपनी दीदी की बूर पर कसी हुई लाल पैन्टी को देखने लगता है. तभी उर्मिला चिल्ला पड़ती है.

उर्मिला: अरे सोनू...!! वो सामने गाड़ी देख...!!

सोनू हडबडा के आगे देखता है तो सड़क खाली होती है. पीछे उर्मिला, कम्मो और पायल खिलखिला कर हँसने लगती है.

उर्मिला: (हँसते हुए) बुद्धू...!! नज़रे अपनी दीदी की पैन्टी पर नहीं, आगे सड़क पर रख, नहीं तो एक्सीडेंट हो जायेगा.

पायल: वैसे भाभी, लाल कपड़ा देखकर तो सांड पागल हो जाता है ना? (तीनो फिर से हँसने लगते है)

उर्मिला: हाँ पायल, और अपने मोटे-मोटे सिंग खड़ा करके दौड़ा चला आता है.

तीनो फिर से खिलखिलाकर हंसने लगते है
 
तीनो फिर से खिलखिलाकर हंसने लगते है. गोलू जो चुपचाप सब सुन रहा था बोल पड़ता है.

गोलू: वो तो ठीक है भाभी. पर जब सांड अपने मोटे सिंग लिए दौड़कर आता है तो लाल कपडे को फाड़ देता है और फिर अपना मोटा सिंग अन्दर भी घुसा देता है.

गोलू की इस बात पर सोनू जोर-जोर से हंसने लगता है. सोनू को हँसता देख गोलू को भी हंसी आ जाती है. उर्मिला, पायल और कम्मो का मुहँ उतर जाता है. पायल अपनी स्कर्ट ठीक करती है और एक चपात गोलू के कंधे पर मारते हुए कहती है.

पायल: चुप कर गोलू....!! बड़ा आया सोनू की तरफदारी करने वाला. कम्मो भी अपने सांड को सफ़ेद कपडा दिखाने वाली थी पर अब कुछ नहीं देखने मिलेगा.

पायल की बात सुनकर गोलू का मुहँ उतर जाता है. वो पीछे घूमकर धीरे से कहता है.

गोलू: अरे वो तो मैं ऐसे ही बोल गया था पायल दीदी. मुझे माफ़ कर दो. (कम्मो की तरफ देखकर) कम्मो दीदी, एक बार दिखा दो ना सफ़ेद कपडा.

कम्मो: तू बहुत बोलता है ना. अब कुछ नहीं देखने को मिलेगा.

गोलू का मुहँ पूरा उतर जाता है और वो आगे देखने लगता है. गोलू की हालत देखकर तीनो फिर से हंसने लगती है. हंसी मज़ाक करते हुए गाड़ी अपनी मंजिल तक पहुँच जाती है. उर्मिला के भाई का बड़ा सा फार्महाउस था जो शहर से दूर था. गाड़ी फार्महाउस में आ कर रूकती है. सभी सामान ले कर निचे उतारते है. फार्महाउस ऊँची दीवार से घीरा हुआ था. आसपास बड़े-बड़े पेड़ थे और जगह काफी सुनसान और हरिभरी थी.

उर्मिला दरवाज़े की घंटी बजाती है तो कोई दरवाज़ा खोलता है. "अरे दीदी, आ गए आप लोग...!!"

पायल और सोनू उस आदमी को देखते है तो उनके होश उड़ जाते है.

पायल: भाभी...!! ये...ये तो आपके सगे भाई राजू भैया है....!

उर्मिला: (हँसते हुए) हाँ पायल, ये मेरा छोटा भाई राजू है.

पायल: पर आपने तो कहा था की वो ...जिसके साथ आप रक्षाबंधन में....वो...वो आपका चचेरा भाई था.

उर्मिला: (हँसते हुए) मेरा कोई चचेरा भाई नहीं है. मेरा एक ही भाई है और वो ये है, राजू. कभी-कभी कुछ पत्ते आखरी चाल के लिए छुपा कर रखने पड़ते है.

पायल: (हँसते हुए) आप बड़ी वो हो भाभी...

राजू: अरे आप लोग बाहर ही रहोगे या अन्दर भी आओगे.

सभी अन्दर चले जाते है. फार्महाउस काफी विशाल था जिसमे कई कमरे थे. सभी सामान एक तरफ रख कर हॉल में सोफे पर बैठ जाते है. उर्मिला राजू के पास जाती है.

उर्मिला: इसे तो सभी पहचान ही गए होगे? ये मेरा छोटा भाई है, राजू.

सोनू: हाँ भाभी याद है. आपकी शादी में ही तो मुलाकात हुई थी राजू भैया से.

उर्मिला: हाँ. हम दोनों हर रक्षाबंधन में साथ रहे है. शादी के बाद पिछले रक्षाबंधन में हमने एक दुसरे को बहुत मिस किया था. इस बार हम दोनों फिर से साथ है.

उर्मिला और राजू एक दुसरे को आहें भरते देखने लगते है. कुछ हे क्षण बाद पायल जोर से खांस देती है. पायल की खांसी सुनकर उर्मिला और राजू चौकन्ने हो जाते है.

पायल: लगता है दो बिछड़े भाई-बहन का प्यार उमड़ रहा है.

उर्मिला: क्यूँ? इसमें बुराई ही क्या है? दो भाई-बहन जब सालो बाद मिलते है तो भावुक तो होते ही हैं.

सोनू: हाँ भाभी. और दिल में कई अरमान भी तो होते है ना.

उर्मिला: हाँ हाँ, तू तो रहने ही दे सोनू. तेरे दिल के अरमान मैं अच्छी तरह से जानती हूँ.

उर्मिला की इस बात पर सभी लोग हँस पड़ते है. तभी उन्हें किसी गाड़ी की आवाज़ सुनाई पड़ती है. खिड़की से देखने पर उन्हें छेदी और खुशबू गाड़ी में बैठे दिखाई पड़ते है. उर्मिला दरवाज़ा खोलती है तो दोनों भी अन्दर आ जाते है. उर्मिला दोनों का परिचय राजू से करवाती है. सभी हाल में बैठकर हंसी मजाक करने लगते है. उर्मिला, पायल, कम्मो और खुशबू की आपस में खूब जमने लगती है. दूसरी तरफ राजू, सोनू, गोलू और छेदी भी अच्छी तरह से घुल-मिल जाते है जैसे पुराने यार हों. कुछ ही देर में वहाँ दो गुट बन जाते है. एक गुट - उर्मिला, पायल, कम्मो और खुशबू - यानी बहनों का और दूसरा गुट - राजू, सोनू, गोलू और छेदी - यानी भाइयों का. हंसी मजाक करते हुए ६ बज जाते है.

उर्मिला: अच्छा अब बहुत हंसी मज़ाक हुआ. अब हमे मार्किट जाना है.

सोनू: (उठते हुए) हाँ चलिए भाभी. मैं गाड़ी निकालता हूँ.

उर्मिला: (सोनू को रोकते हुए) आप कहाँ चल दिय सोनू जी? आप बैठिये अपने भाइयों वाले गुट में. ये काम हम बहनों का है.

राजू: क्या हुआ उर्मिला दीदी? कहाँ जा रही है ये बहनों की टोली.

उर्मिला: (अकड़ते हुए) ये बहनों की टोली रक्षाबंधन की शौपिंग करने जा रही है. वहां तुम भाइयों का कोई काम नहीं. ओके गर्ल्स...फॉलो में...!!
 
उर्मिला जान बुझकर मुहँ बनाये, राजू के सामने अपने दूध उठाकर इठलाते हुए जाने लगती है. उसके पीछे सभी लड़कियां अपना सीना उठाये, अपने-अपने भाई को देखकर मुहँ बनाते हुए चल देती है. सोफे पर बैठे सभी भाई अपनी-अपनी बहनों के टॉप में उठे हुए दूध देखकर लंड मसल देते है. उनके जाते ही सभी एक दुसरे को देखकर हँस पड़ते है. रक्षाबंधन कल था पर उस पर रंग अभी से चड़ने लगा था. सारे भाई जानते थे की ये रक्षाबंधन बड़ा ही रंगीला, रसीला और धमाकेदार होने वाला है.

(कहानी जारी है. अब तक कैसी लगी कृपया कर के बतायें )
 
ऑटो में बैठकर उर्मिला, पायल, कम्मो और खुशबू एक छोटे से बाज़ार में पहुँच जाते है जहाँ छोटी-छोटी दुकानों में बहुत सी औरतें और लडकियां अपने भाइयों के लिए राखी खरीद रहीं थी. ऑटो से उतरकर सभी एक दूकान के पास पहुँच जातीं है. दूकान में बहुत सी रंग-बिरंगी, बड़ी-छोटी राखियाँ और रेशमी धागे लटक रहे थे. सभी एक नज़र आस-पास डालते है तो लडकियां अपने हाथ में राखी ले कर देख रही थी और उनके चेहरे पर हलकी मुस्कान भी थी. उनकी मुस्कान के पीछे का रहस्य समझते ही उर्मिला, पायल और खुशबू एक दुसरे की ओर देखकर मुस्कुरा देती है. कम्मो उनके चेहरे की मुस्कान को देखकर समझने का प्रयत्न करती है पर कुछ समझ नहीं पाती है.

उर्मिला: अच्छा चलो, अब अपने-अपने भाइयों के लिए सभी राखी और रेशमी धागे पसंद कर लो.

सभी राखी और रेशमी धागे देखने में व्यस्थ हो जाते हैं. कम्मो दूकान में टंगी राखियाँ और धागे देखते हुए आस-पास भी नज़र दौड़ा रही थी. तभी उसकी नज़र कुछ दूर खड़ी एक २०-२१ साल की लड़की पर पड़ती है जो किसी १८-१९ साल के लड़के के साथ खड़ी थी और राखियाँ देख रही थी. वो लड़का देखने में उसका छोटा भाई लग रहा था. कम्मो गौर से देखती है तो वो लड़की एक बड़ी सी राखी उठाती है, कुछ सोचती है और फिर दुकानदार से उसका दाम पूछती है. कम्मो उस बड़ी सी राखी को देखती है और जोर-जोर से हँसने लगती है. साथ खड़ी उर्मिला, पायल और खुशबू जब उसे इस तरह से हँसते हुए देखती है तो वो सभी हैरान हो जाती है.

उर्मिला: क्या हुआ री कम्मो? ऐसे क्यूँ हँस रही है?

कम्मो: (अपनी हँसी पर काबू पाते हुए, धीरे से) भाभी, वो पास वाली लड़की को देख रहे हो? वही जो पीले रंग की सलवार में है.

उर्मिला: (देखते हुए) हाँ देख रही हूँ. तो क्या हुआ?

कम्मो: भाभी वो पतला सा लड़का जो उसके साथ खड़ा है वो शायद उसका भाई है.

उर्मिला: हाँ तो होगा उसका भाई. तुझे क्या हुआ?

कम्मो: भाभी, उस लड़की ने अपने भाई के लिए देखिये कितनी बड़ी राखी ली है, और उसके भाई की कलाई देखिये कितनी पतली है.

ये कहकर कम्मो फिर से अपने मुहँ पर हाथ रखे जोर-जोर से हँसने लगती है. उसकी बात सुनकर उर्मिला, पायल और खुशबू एक दुसरे की तरफ देखकर धीरे से मुस्कुरा देते है. उर्मिला कम्मो के कान में धीरे से कहती है.

उर्मिला: (धीमी आवाज़ में) तुझे कैसे पता की वो लड़की उस बड़ी राखी को अपने भाई की पतली कलाई में ही बाँधेगी?

कम्मो: (हँसना बंद कर देती है और आश्चर्य के साथ उर्मिला को देखते हुए) राखी भाई की कलाई पर नहीं तो और कहाँ बाँधते है भाभी?

उर्मिला: होती है कुछ बहने तेरे जैसे बेवकूफ जो रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के पवित्र त्यौहार पर राखी भाइयों की कलाई पर बाँधती है.

कम्मो: (आँखे और भी ज्यादा बड़ी करते हुए) तो फिर राखी कहाँ बाँधनी चाहिए भाभी?

उर्मिला: (धीरे से कम्मो के कान में) भाइयों के लंड पर....!!

उर्मिला की बात सुनकर कम्मो सट्टे में आ जाती है. हालाकीं वो कई सालों से गोलू के साथ रक्षाबंधन का त्यौहार मना रही थी पर लंड पर राखी बाँधना ये वो पहली बार सुन रही थी.

कम्मो: (धीमी आवाज़ में) ये आप क्या कह रहे हो भाभी? भाई के लंड पर भला कोई बहन राखी बाँधती है क्या?

उर्मिला: (धीरे से कम्मो के कान में) क्यूँ? जब बहन दो भाइयों का लंड अपनी बूर और गांड में एक साथ ले सकती है तो लंड पर राखी बाँधने में क्या हर्ज़ है?

उर्मिला की बात सुनकर कम्मो शर्मा जाती है. कम्मो को शर्माता देख सभी हँस पड़ते है.

उर्मिला: चल अब जल्दी से गोलू के मोटे लंड को याद कर और एक अच्छी सी राखी देख.

सभी अपने-अपने भाइयों के लिए राखी और रेशम की डोर खरीद लेते है. दूकान वाले को पैसे दे कर सभी थोडा आगे जाते है. उर्मिला उन्हें एक रेडीमेड कपड़ो की दूकान में ले जाती है. उर्मिला ने पहले से ही सब कुछ सोच रखा था. अपने प्लान के मुताबीक सभी कपडे खरीद लेते है. दूकान से निकलकर सभी कुल्फी लेते है और पास ही एक पेड़ की छाओं में बैठ जाते है. सभी आपस में बातें करने लगती है.
 
सभी अपने-अपने भाइयों के लिए राखी और रेशम की डोर खरीद लेते है. दूकान वाले को पैसे दे कर सभी थोडा आगे जाते है. उर्मिला उन्हें एक रेडीमेड कपड़ो की दूकान में ले जाती है. उर्मिला ने पहले से ही सब कुछ सोच रखा था. अपने प्लान के मुताबीक सभी कपडे खरीद लेते है. दूकान से निकलकर सभी कुल्फी लेते है और पास ही एक पेड़ की छाओं में बैठ जाते है. सभी आपस में बातें करने लगती है.

खुशबू: भाभी मेरे दिल में एक बात है जो मैं आपसे पूछना चाहती हूँ.

उर्मिला: हाँ बोल क्या बात है.

खुशबू: भाभी, बहने अपने भाई की कलाई में राखी इसलिए बाँधती है क्यूंकि वो उसकी रक्षा कर सके.

उर्मिला: हाँ सही बात है.

खुशबू: तो फिर भाभी, बहने रक्षाबंधन के दिन अपने भाइयों के लंड पर राखी क्यूँ बाँधती है?

उर्मिला: सवाल तो तेरा सही है खुशबू. देख, हर भाई का फ़र्ज़ है की वो अपनी बहन की रक्षा करे. अब तू मुझे बता की भाई अपनी बहन की किस चीज़ की रक्षा करता है?

खुशबू: बहन की इज्ज़त...

उर्मिला: हाँ सही कहा. और बहन की इज्ज़त कहाँ होती है?

खुशबू: उनकी जाँघों के बीच भाभी.

उर्मिला: हाँ सही कहा. अब बहने जिस भाई की कलाई पर राखी बाँध कर उससे अपनी इज्ज़त की रक्षा करवाती है, वो उसी भाई के लंड पर राखी बाँध कर बूर नहीं चुदवा सकती?

खुशबू: बात तो आपने सही कही है भाभी. छेदी भैया के लंड पर राखी बाँधने का सोच कर ही मेरी बूर पानी छोड़ने लगी है.

उर्मिला: ये बात सोचकर तो हर बहन की बूर गीली हो जाती है.

इस बात पर सभी जोर-जोर से हंसने लगती है. अब उर्मिला उन्हें आज रात का प्लान बताती है.

उर्मिला: अब तुम सब मेरी बात ध्यान से सुनो. आज रात हमे अपने-अपने भाइयों को बूर के लिए अच्छी तरह से तरसाना है. रात भर हम उनके लंड को खड़ा रखेंगे ताकि कल, रक्षाबंधन के दिन जब वो हमारी चुदाई करे तो बस मजा ही आ जाए.

पायल: तो क्या भाभी आज रात हम अपने भाइयों का लंड नहीं लेंगी?

उर्मिला: ओहो...!! देखो तो इसे, कितनी बेताब हो रही है सोनू का लंड लेने के लिए.

पायल: (शर्माते हुए) भाभी....!!

उर्मिला: (हँसते हुए) आज रात नहीं. आज सिर्फ खड़ा करना है और तरसाना है. अब घर चले?

सभी हामी भर देती है और ऑटो कर के घर की ओर चल पड़ती है. वहां घर पर सभी भाई बैठ कर बातें कर रहे है.

छेदी: पर कुछ भी कहो, अपनी सगी बहन को चोदने का मजा ही कुछ और है.

राजू: सही कहा छेदी भैया आपने. बहन की बूर में लंड डालने का जो मजा है वो और किसी बूर में नहीं.

सोनू: आप सभी तो अपनी बहनों की बूर पेल चुके हो. मैं तो अब तक तरस रहा हूँ.

गोलू: अरे सोनू..!! चिंता क्यूँ करता है. आज रात ही पायल दीदी को पता ले और चोद ले उनकी बूर.

राजू: और नहीं तो क्या. पायल भी तो अपने भाई के लंड के लिए तरस रही होगी.

छेदी: भाई मैं तो आज रात अपनी बहन की पटक-पटक के लेने वाला हूँ. राजू, तुम्हारा क्या प्लान है? उर्मिला की लिए हुए तो तुम्हे भी काफी वक़्त हो गया होगा?

राजू: हाँ छेदी भैया. उर्मिला दीदी की लिए हुए एक साल से ज्यादा समय हो गया है. पहले तो रक्षाबंधन के दिन हम दोनों किसी बहाने घर से निकल जाते थे और पास के जंगल जा कर खूब चुदाई करते थे.

गोलू: लंड तो मेरा भी खड़ा हो गया है कम्मो दीदी को याद कर के.

राजू: तो बस फिर क्या है. आज रात ही हम सब अपनी-अपनी बहनों की अच्छे से बूर चुदाई करेंगे.

छेदी: सही कहा राजू. आज रात तुम सब ध्यान से सुनना की कैसे खुशबू 'भैया-भैया' चिलाती है और मेरा लंड लेती है.

राजू: आज तो उर्मिला दीदी भी 'भैया-भैया' बोल कर मेरा लंड लेगी.

गोलू: तो ठीक है. आज रात कम्मो दीदी भी 'भैया-भैया' ही बोलेगी.

सोनू: मेरा भी वादा रहा. पायल दीदी भी 'भैया-भैया' बोलते हुए ही चुदेगी मुझसे.

सभी भाई एकसाथ हाथ मिलाते है और रात में अपनी-अपनी बहनों को चोदते वक़्त 'भैया-भैया' की चीखें निकलवाने का प्रण लेते है. बहनों के आने के पहले सभी भाई जल्दी से पास के बाज़ार जाते है और बहनों के लिए नाईटी खरीद कर ले आते है. राजू के प्लान के मुताबिक़ आज रात वो अपनी-अपनी बहनों को ये नाईटी पहनने देंगे और उनकी छलकती जवानी का लुफ्त उठाएंगे. यहाँ भाइयों ने आज रात ही अपनी-अपनी बहनों की चुदाई करने की ठान ली थी और वहाँ बहनों ने भाइयों से आज रात न चुदने का प्लान बना रखा था.
 
रात के ९ बज रहे थे. सभी खाना खाकर बंगले की छत पर अराम से बैठे थे. छत पर गद्दे बीचे हुए थे जिस पर एक तरफ सभी भाई बैठे थे तो दूसरी तरफ बहने. प्लान के मुताबीक भाइयों ने बहनों को नाईटी भेंट दी और उसे पहनने की जिद की जिसे बहनों ने मान लिया. सभी बहनों ने बिना बाहँ वाली, डीप-कट शोर्ट नाईटी पहनी हुई थी. सभी भाइयों की नज़रे अपनी बहनों के बड़े-बड़े दूध और उसके बीच छलकती गहराई पर टिकी हुई थी. बीच-बीच में जब बहने किसी बहाने से अपने हाथ उठा देती तो उनकी हलके बालोवाली बगल देखकर भाई शॉर्ट्स पर से अपने-अपने लंड मसल देते. बहने बातें करती हुई अच्छे से अपनी जवानी छलका रही थी. बातें करते हुए उर्मिला ने लड़कियों को इशारा किया तो सभी थोडा आगे झुक कर भाइयों को अपनी दूध के बीच की गहराई दिखाने लगी. सभी लडकियां आगे झुकी हुई ये नज़ारा अपने-अपने भाइयों को दिखा रही थी.

उर्मिला: भाई क्या जाने बहन का प्यार? सारे संसार में बहन का प्यार सबसे 'गहरा' होता है.

सभी भाई अपनी-अपनी बहनों के दूध के बीच की गहराई को आँखे फाड़े देखने लगते है. राजू भी उर्मिला की गहराई को घूरते हुए, ओंठ पर जीभ फेरते हुए कहता है.

राजू: ऐसी बात नहीं है दीदी. अगर बहन अपने प्यार की गहराई भाई को दिखाती है तो भाई भी उस गहराई को नज़र अंदाज़ नहीं करता.

उर्मिला लड़कियों को इशारा करती है तो सभी सीधी हो कर बैठ जाती है. सभी भाइयों के मुहँ अचानक से उतर जाते है. उनके चेहरे देखकर बहाने जोर-जोर से हंसने लगती है. लड़के समझ जाते है की आज लड़कियां उन्हें छेड़ने का प्लान बनाकर आई है. लड़के एक दुसरे की तरफ देखते है और आँखों में बातें हो जाती है. छेदी अपनी टाँगे खोलकर बैठ जाता है और खुशबू को अपने शॉर्ट्स में बने बड़े से उभार को दिखाते हुए कहता है.

छेदी: माना की भाइयों का प्यार 'सक्त' होता है पर जब बहने अपने प्यार की गहराई दिखाती है तो भाई भी बहन को पूरी गहराई तक प्यार देता है. वो इतना प्यार देता है है की बहन लेते-लेते थक जाती है पर भाई देते-देते नहीं थकता.

छेदी की इस बात पर खुशबू के साथ-साथ सभी बहनों के होश उड़ जाते है. छेदी के साथ सभी भाई भी अपनी टाँगे खोले अपने शॉर्ट्स में बने तम्बू को दिखा देते है. सभी बहनों की आँखे बड़ी-बड़ी हो जाती है और मुहँ खुल जाते है. ये देखकर सभी भाई जोर-जोर से हँसने लगते है. इस बार भाइयों का पलड़ा भारी हो गया था. कुछ क्षण तो उर्मिला भी राजू के शॉर्ट्स में उभरे हुए तम्बू को देखने में खो जाती है की तभी उसे अपना प्लान याद आता है. वो देखती है की पायल, खुशबू और कम्मो अपने भाइयों की टांगों के बीच आँखे फाड़े घुर रही है. वो समझ जाती है की अगर इन्हें अभी रोका नहीं गया तो ये सभी उच्छल कर अपने-अपने भाइयों की गोद में बैठ जायेंगी. वो जोर से खांस देती है. उसकी खांसी सुनकर सभी बहनों को होश आता है और वो संभल जाती है. अब उर्मिला के प्लान के मुताबीक सभी बहने भाइयों को रिझाने लगती है. शुरवात उर्मिला एक गाने से करती है.

उर्मिला: (राजू को देखकर अदा दिखाते हुए गाती है) चोली में सामान देखी 'टाईटी' रे, भैया ला दिए नाईटी.....!!

उर्मिला का गाना सुनकर सभी बहने भी अपने हाथों को उठा कर हलके बालोवाली बगल दिखाते हुए गाने में उर्मिला का साथ देती है और 'कोरस' में एक साथ गाती है.

बहने: चोली में सामान देखी 'टाईटी' रे, भैया ला दिए नाईटी.....!!

उर्मिला: ला दिए नाईटी, भैया ला दिए नाईटीsss...!!

बहने: ला दिए नाईटी, भैया ला दिए नाईटीsss...!!

उर्मिला: किसम-किसम के वेराइटी रे, भैया ला दिए नाईटी....!!

बहने: चोली में सामान देखी 'टाईटी' रे, भैया ला दिए नाईटी.....!!
 
सभी भाई जब ये गाना सुनते है और अपनी बहनों की बालोवाली बगल और उठे हुए दूध देखते है तो उनके मुहँ में पानी आ जाता है. सभी शॉर्ट्स के ऊपर से मुहँ खोले हुए अपने लंड को मसलने लगते है. बहने भी भाइयों को इस तरह से तरसता देख खुश हो जाती है. उर्मिला आगे गाती है.

उर्मिला: रोजे ऊ देखत रहे हमारा टॉप में, ठीक से ना जोबना भेटात रहे हाथ में....!!

बहने: रोजे ऊ देखत रहे हमारा टॉप में, ठीक से ना जोबना भेटात रहे हाथ में....!!

उर्मिला: भईले बा बिमारी कब विलाईती रे, भैया ला दिए नाईटीsss...!!

बहने: चोली में सामान देखी 'टाईटी' रे, भैया ला दिए नाईटी.....!!

अब तो भाइयों की हालत बहुत ज्यादा खराब हो जाती है. शॉर्ट्स के अन्दर सभी के लंड अंगडाई लेने लगते है और टोपे से हल्का सफ़ेद पानी बहने लगता है जिससे उनकी शॉर्ट्स हलकी गीली हो जाती है. उर्मिला के साथ जब सभी बहने ये देखती है तो वो भी मस्ती में आ जाती है. सभी बहने अपने दूध हिलाने लगती है. उर्मिला आगे गाती है.

उर्मिला: नाईटी के भीतरी के देखी फूलगेंदा...!!

बहने: देखी फुलगेंदा हो देखी फुलगेंदाssss....!!

उर्मिला: भैया के छुटे पिचकारी से पसीना....!!

बहने: छुटेला पसीना हो छुटेला पसीना....!!

उर्मिला: नाईटी के भीतरी के देखी फूलगेंदा, भैया के छुटे पिचकारी से पसीना, फुचुर-फुचुर फेके रंग ' वाईटी ' रे, भैया ला दिए नाईटी....!!

बहने: चोली में सामान देखी 'टाईटी' रे, भैया ला दिए नाईटी.....!!

**[छुटेला = छुठने लगा ; भीतरी = अन्दर का ; वाईटी = सफ़ेद जैसा ]

ये सुनकर और बहनों की कातिल अदाएं देखकर तो भाइयों को अपने-आप को रोकना मुश्किल हो जाता है. सभी आँखे फाड़े अपनी बहनों की नाईटी में उमड़ती हुई जवानी भूके भेड़िये की तरह देखने लगते है. मौका पा कर उर्मिला भी लड़कियों को इशारा करती है तो सभी अपने पैरों को घुटनों से मोड़े और थोडा फैलाकर बैठ जाती है. निचे, जाँघों के बीच सभी बहनों की बूर पर कसी हुई पैन्टी दिखने लगती है. सभी भाई एकसाथ निचे झुक कर अपनी-अपनी बहनों की फूली हुई बूर पर कसी पैन्टी देखने लगते है.

अपने भाइयों को इस तरह से पैन्टी घूरते हुए देख उर्मिला के साथ सभी बहनों की बूर भी बहने लगती है. अब उनकी पैन्टी पर भी एक लम्बी गीली लकीर दिखने लगती है. बूर के पानी से बहनों की पैन्टी गीला होते देख सभी भाई शॉर्ट्स से अपने मोटे लंड निकाल लेते है और बहनों के सामने उनकी पैन्टी देखते हुए हिलाने लगते है.

ये देखकर बहने का भी मन डोलने लगता है. सभी बहने अपने भाइयों का मोटा लंड देखते हुए हाथ से अपने दूध दबाने लगती है. बदन की गर्मी बढ़ने से उनकी बूर फड़कने लगती है जिसे निचे झुके हुए भाई पैन्टी के ऊपर साफ़ देख रहे थे. मामला गड़बड़ा गया था. उर्मिला, जो सभी लड़कियों का मार्गदर्शन किया करती थी, वो इस वक़्त खुद दिशाहीन हो चुकी थी. भाइयों के मोटे लंड अपना कमाल दिखा रहे थे.

(कहानी जारी है. अब तक कैसी लगी कृपया कर के बतायें )
 
अपडेट ४०:

छत पर सभी भाई अपनी बहनों के सामने, शॉर्ट्स से मोटे लंड निकाले बैठे थे. बहने भी उनके सामने अपनी टाँगे फैलाए जाँघों के बीच कसी हुई पैन्टी दिखाते हुए बैठी थी. भाइयों के मोटे लंड देख सभी बहने अपने होश खो बैठी थी. यहाँ तक उर्मिला भी राजू का मोटा लंड १.५ साल के बाद देखकर मदहोश हो चुकी थी. सभी भाई अपने लंड मसलते हुए बहनों को दिखा रहे थे. लंड के मोटे टोपे से रिसता हुआ पानी देख बहने अपनी जीभ ओंठों पर फेरने लगी थी. सभी बहने अपने ओंठ दांतों टेल दबाकर धीरे से भाइयों के लंड की ओर बढती है.

बहनों को अपनी तरफ बढ़ता देख सभी भाई अपने लंड की चमड़ी पूरी निचे खींच कर मोटा टोपा बाहर निकाल देते है. मदहोश बहने अपने भाइयों के लंड के पास पहुँच कर एक बार घूरकर लंड को देखती है और धीरे से अपना सर लंड पर झुकाने लगती है. सभी बहने जैसे ही झुक कर भाइयों के लंड को मुहँ में लेने जाती है, पास की सड़क पर एक कुत्ता जोर-जोर से भोंकने लगता है. कुत्ते के भोंकने से उर्मिला के साथ-साथ पायल, कम्मो और खुशबू भी होश में आ जाती है. चारों झट से खड़ी हो जाती है और एक दुसरे की तरफ देखने लगती है. आँखों में कुछ इशारे होते है और फिर उर्मिला बोल पड़ती है.

उर्मिला: (इतराते हुए) हूँ...!! लंड दिखाकर आप लोग हमने पटा नहीं पाओगे. चलो गर्ल्स... चलकर सोते है.

ये कहकर सभी लडकियां अपने भाइयों को जीभ और अंगूठा दिखाकर जाने लगती है. सभी भाई एक आखरी बार अपने मोटे लंड दिखाकर बहनों को पटाने की कोशिश करते है लेकिन सभी बहने मुहँ बनाकर वहां से चली जाती है. लड़कियों के जाते ही राजू की आँखों में खून उतर आता है. वो गुस्से में यहाँ-वहाँ छत पर देखने लगता है.

राजू: (गुस्से में) साला मादरचोद....!! आज इस कुत्ते को मैं नहीं छोडूंगा.

गुस्से में राजू छत पर पड़े २-३ पत्थरों को उठाकर सड़क पर खड़े उस कुत्ते की ओर फेकने लगता है. कुत्ता भी एक पेड़ के पीछे छुपकर राजू पर भोंकने लगता है. राजू बहुत गुस्से में था. उसका गुस्सा देखकर सोनू, छेदी और गोलू उसे रोकने लगते है.

सोनू: अरे रहने दो राजू भैया, कुत्ता है बेचारा....

राजू: (गुस्से में) ये साला कुत्ता नहीं, मादरचोद है. साला दिन रात अपनी माँ-बहन की चुदाई करता है और यहाँ डेढ़ साल बाद मेरी दीदी आई है तो साले की गांड जल रही है.

छेदी: जाने दे राजू. अपनी-अपनी किसमत है. थूक दे गुस्सा.

राजू अपने गुस्से पर किसी तरह से काबू करता है. कुत्ता भी १-२ बार भोंकता है और फिर भाग जाता है. कुत्ते को २-३ गालियाँ दे कर राजू कहता है.

राजू: खड़े लंड पर धोका हो गया भाइयों. साला सारा प्लान चौपट हो गया.

छेदी: अभी प्लान चौपट नहीं हुआ है भाई. देखा नहीं? हमारी बहने पूरी गरमा गयी थी. एक बार उनके कमरे में चलते है. शायद कुछ बात बन जाए.

छेदी की बात से सभी सहमत हो जाते है और निचे जाने लगते है. वहाँ निचे कमरे में सभी बहने एक बड़े से बिस्तर पर लेटे हुए बातें कर रही थी.

पायल: आज तो बच गए. अगर वो कुत्ता एन वक़्त पर न भोंकता तो इस वक़्त हम सभी अपने भाइयों से चुद रही होती.

खुशबू: हाँ पायल दीदी. भगवान भला करे उस कुत्ते का. छेदी भैया तो पुरे जोश में लग रहे थे. आज तो मेरी जम के बूर चुदाई हो जाती.

कम्मो: हाँ दीदी. गोलू तो मेरे पिछवाड़े को शाम से ही घुर रहा था. वो तो मुझे घोड़ी बना देता आज.

बिस्तर पर लेटी, सभी लडकियां अपने भाइयों के बारें में सोचने लगती है. उर्मिला भी राजू के लंड को याद करते हुए धीरे-धीरे अपनी पैन्टी में हाथ डाले बूर को सहलाने लगती है. सभी का एक जैसा हाल था. छत पर सभी ने जो भाइयों के लंड के दर्शन किये थे वो नज़ारा उनके बदन का तापमान बढ़ा रहा था. सभी के हाथ अपनी पैन्टी के अन्दर चले जाते है. कुछ ही क्षण में कमरे में गर्मी बढ़ जाती है. सभी की पैन्टी टांगो से निकल जाती है और टाँगे फैलाए सभी बहने अपनी बालोवाली बूर में उंगलियाँ चलाने लगती है.
 
भाइयों की याद में जैसे ही सभी बहने अपनी-अपनी बूर उँगलियों से फैलाती है, पूरा कमरा बूर की गंध से भर जाता है. तभी दरवाज़े पर दस्तक होती है. सभी हडबडाकर बैठ जाती है और टाँगे बंद कर देती है. उर्मिला उठकर दरवाज़ा खोलती है तो सभी भाई खड़े एक साथ अन्दर घुस जाते है. सभी की नजर बहनों पर पड़ती है जो बिस्तर पर टाँगे बंद किये बैठी थी. उर्मिला भी लड़कियों के साथ जा कर बैठ जाती है. तभी सभी भाइयों की नाक में बूर की तेज गंध जाती है. सभी कुत्तों की तरह कमरे में भरी बूर की गंध को सूंघने लगते है. सभी बहने ये नज़ारा देखकर हँस पड़ती है.

पायल: देखिये भाभी. शिकारी कुत्ते आये है, अपने-अपने शिकार की गंध सूंघते हुए. (सभी बहने फिर से हँस पड़ती है. )

राजू: अब शिकारी कुत्ते अपने शिकार की गंद सूंघते हुए आ ही गए है तो शिकार कर के ही जायेंगे. (इस बात पर सभी भाई हँस पड़ते है)

उर्मिला: इतनी जल्दी भी क्या है? माना की शिकारी कुत्ते बड़े तेज है पर अभी तो सभी शिकार की गंध एक हो गई है. ऐसे में किसी एक शिकार की गंध का पता चलाना तुम लोगो के बस की बात नहीं है. क्यूँ गर्ल्स? सही कहा ना मैंने?

इस बात पर सभी लडकियां एक साथ हामी भर देती है. उर्मिला अपनी पैन्टी बिस्तर से उठाकर राजू की तरफ उच्छाल देती है, जिसे राजू पकड़ लेता है.

उर्मिला: ये लीजिये शिकारी जी. अच्छे से रात भर सूंघ कर गंध पहचान लीजिये और फिर कल निकलना शिकार पर.

उर्मिला की देखा-देखी सभी बहने पैन्टी अपने-अपने भाइयों की तरफ उच्छाल देती है जिसे सभी भाई पकड़ लेते है.

उर्मिला: अब चलिए अपने कमरे में. हमे भी सोना है.

अब उर्मिला के सामने किसी की कहाँ चलने वाली थी. सभी भाई मुहँ बनाकर वहाँ से चले जाते है. उर्मिला दरवाज़ा लगाकर बिस्तर पर आती है तो सभी बहने खिलखिलाकर हँसने लगती है.

कम्मो: बहुत मजा आया भाभी. आपने अच्छा सबक सिखाया लड़कों को.

उर्मिला: अभी हँस लो जितना हँसना है.आज जो हमने अपने भाइयों के साथ किया है उसका बदला वो कल हमसे जरुर लेंगे.

कम्मो: (बड़ी-बड़ी आँखों से) मतलब भाभी?

उर्मिला: मतलब ये की कल हमारे भाई हम बहनों की बूर का भोसड़ा बनाने वाले है.

खुशबू: मत बोलिए ना ऐसा भाभी..! कुछ-कुछ होता है.

उर्मिला: (हँसते हुए) अच्छा चलो...!! अब सब सो जाओ. कल सुबह जल्दी उठाना भी है.

सभी बिस्तर पर लेट जाती है. पायल बत्ती बुझाकर पास वाले साइड टेबल पर से कुछ उठाती है और उर्मिला के पास लेट जाती है. अँधेरे में उर्मिला समझ नहीं पाती की पायल ने साइड टेबल पर से क्या उठाया था. कुछ देर बाद पायल के बदन में हलकी सी हलचल होने लगती है. उर्मिला धीरे से अपना हाथ पायल के हाथ पर रखती है टी पायल डर जाती है.

उर्मिला: (धीमी आवाज़ में) क्या कर रही है पायल?

पायल: (धीमी आवाज़ में) क..कु..कुछ नहीं भाभी.

उर्मिला पायल का हाथ देखती है तो वो उसकी चूतड़ों की के बीच घुसा हुआ था. उर्मिला हैरानी से पूछती है.

उर्मिला: (धीमी आवाज़ में) ये तू क्या कर रही है पायल? अपने पिछवाड़े में हाथ डालकर तू क्या कर रही है?

पायल: (धीमी आवाज़ में) वो..वो..वो मैं तेल लगा रही हूँ भाभी.

उर्मिला को एक पल लगता है बात समझने में.

उर्मिला: (धीमी आवाज़ में) तो कल सोनू को तू ये देगी?

पायल: (धीमी आवाज़ में) हाँ भाभी....! आगे का पापा ने खोला है तो पीछे वाले पर भाई का हक़ तो बनता है ना?

पायल की इस बात पर उर्मिला को बहुत ख़ुशी होती है. वो धीरे से पायल का माथा चूम लेती है. उर्मिला दूसरी तरफ घूम कर सो जाती है और पायल धीरे-धीरे तेल से सनी हुई ऊँगली अपने गांड के छेद में घुसाने लगती है. पायल जानती थी की कल रक्षाबंधन पर सोनू उसे क्या गिफ्ट देने वाला था, पर शायद सोनू ने सपने में भी नहीं सोचा था की पायल ने उसके लिए क्या गिफ्ट सोच रखा है.

धीरे-धीरे रात गहरी होती जा रही थी. अपने-अपने घरों में न जाने कितने जवाँ भाई-बहन आने वाली सुबह के हसीन सपने आँखों में लिए सो रहे थे. वो सुबह, जिसका वो सालभर बेसब्री से इंतज़ार करते है, वो सुबह जिसमे भाई-बहन का प्यार अपनी चरम सीमा पर होता है, वो सुबह जिसमे भाई-बहन जी भर के एक दुसरे पर प्यार लुटाते है, वो सुबह जिसे सारी दुनिया भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के त्योहार, 'रक्षाबंधन' के नाम से जानती है.

(कहानी जारी है. अब तक कैसी लगी कृपया कर के बतायें )
 
अपडेट ४१:

'भैया मेरे....राखी के बंधन को निभानाssss...., भैया मेरे....छोटी बहन को न भुलानाssss......., देखो ये वादा निभाना, निभानाsssss.....भैया मेरे....राखी के बंधन को निभानाssss......!!'

सुबह के ८ बज रहे थे. ये सुबह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और प्यार की, मतलब रक्षाबंधन की थी. आस-पास के घरों से रक्षाबंधन के गीत की मधुर आवाज़ यहाँ तक आ रही थी. ऊपर वाले बड़े से बेडरूम में सारी बहने तैयार हो रही थी. उर्मिला, पायल और खुशबू ने रक्षाबंधन के लिए जो कपडे लिए थे वो बिस्तर पर रखे हुए थे. वहीँ पास बैठी कम्मो एक-एक हाथ में दो अलग-अलग कपडे लिए कुछ सोच रही थी. कुछ देर सोचने के बाद वो उर्मिला के पास दोंनो कपड़ो को ले कर पहुँच जाती है.

कम्मो: भाभी...!! मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है. आप बताइए ना मैं कौनसी ड्रेस पहनू?

उर्मिला: (आईने में देखकर बाल बनाते हुए) अपने लिए खुद ही पसंद की थी तो अब इतना क्या सोच रही है?

कम्मो: पता नहीं भाभी. एक बार आप देखिये ना....

उर्मिला: (उसकी तरफ घूमकर) अच्छा ला, दिखा कौनसे कपडे है.

उर्मिला कम्मो के हाथों से कपड़ों को लेती है और ध्यान से देखने लगती है. कुछ देर गौर से देखने के बाद कहती है.

उर्मिला: तू आज ये कपडे पहनेगी?

कम्मो: (बड़ी-बड़ी आँखों से) हाँ भाभी...क्या हुआ?

उर्मिला: (आँखे ऊपर चडाकर लम्बी सांस छोड़ते हुए) तू भी ना कम्मो...!! रक्षाबंधन के दिन बहने क्या ऐसे कपडे पहना करती है?

कम्मो: हाँ भाभी. मैं तो रक्षाबंधन के दिन ऐसे ही कपडे पहनती हूँ.

उर्मिला: वो इसलिए कम्मो क्यूंकि तू रक्षाबंधन अपने घर में सबके सामने मनाती है. यहाँ पर घर का कोई भी नहीं है. सिर्फ हम चार बहने और हमारे भाई हैं. यहाँ पर ऐसे कपडे नहीं चलेंगे.

कम्मो: (आश्चर्य से) वो क्यूँ भाभी?

उर्मिला: अब तुझे समझाने के वक़्त नहीं है मेरे पास. (खुशबू की तरफ घूमकर) खुशबू....!!

खुशबू: जी भाभी...?

उर्मिला: तेरे पास कम्मो महारानी के लिए कोई अच्छी सी डीप कट और बिना बाहं वाली चोली है?

खुशबू: (मुस्कुराते हुए) हाँ भाभी, है ना. बैकलेस वाली चलेगी ना?

उर्मिला: (खुश होते हुए) दौड़ेगी खुशबू रानी...ला दे मुझे....!

खुशबू अपने बैग से एक चोली निकालकर उर्मिला को देती है. उर्मिला उस चोली को देखकर खुश हो जाती है और फिर कम्मो को देते हुए कहती है.

उर्मिला: ये ले...ये पहन...

कम्मो: पर भाभी....ये...? ऐसे कपडे तो मैं कभी रक्षाबंधन के दिन नहीं पहनती हूँ.

खुशबू: (हँसते हुए) अरे पहन ले कम्मो. कम से कम तुझे ये तो पहनने मिल रहा है, अगर अभी मैं भैया के साथ अपने घर पर होती तो शायद कुछ भी नहीं पहनने मिलता मुझे.

खुसबू की इस बात पर सभी जोर-जोर से हंसने लगते है. उर्मिला कम्मो के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहती है...

उर्मिला: पहन ले कम्मो....! वैसे भी बाद में तो सब उतरने ही वाला है.

इस बात पर तो सभी लडकियां खिलखिला कर हँसने लगती है. फिर सभी अपने-अपने कपडे पहनने लगती है तो उर्मिला उन्हें याद दिलाती है.

उर्मिला: याद हैं न सबको? ब्रा और पैन्टी कोई नहीं पहनेगा.....

पायल, खुशबू और कम्मो एक दुसरे की तरफ देखकर मुस्कुरा देती है और फिर एक साथ जवाब देती है, "हाँ भाभी...याद है...!!"

सभी बहने लहंगा और चोली पहन लेती है जो उन्होंने बाज़ार में पसंद किया था. शुक्र था की खुशबू की दी हुई चोली कम्मो को बिलकुल फिट आई थी और क्यूँ न आती. दोनों की चुचियाँ जो एक जैसी बड़ी-बड़ी थी. उर्मिला की नज़र पायल पर पड़ती है. उसकी चोली का डिजाईन और बनावट देखकर उर्मिला का मन प्रसन्न हो जाता है. वो पायल के पास जाती है और उसके सर पर हाथ रखते हुए कहती है.

उर्मिला: बहुत प्यारी लग रही है तू पायल. तेरी चोली तो कयामत ढा देगी. आज तो सोनू की खैर नहीं.

पायल: (शर्माते हुए) थैंक यू भाभी...!!

तभी खुशबू भी वहां आ जाती है और उर्मिला की चोली देखकर ताना मारते हुए कहती है.

खुशबू: पायल की चोली तो क़यामत ढा ही देगी भाभी, पर आज आपको क्या हुआ है?

उर्मिला: (मुहँ बनाते हुए) मुझे..? मुझे कुछ क्यूँ होने लगा..?

खुशबू: ये आपकी चोली बार-बार फिसली क्यूँ जा रही है भाभी?

उर्मिला: (शर्माकर अपनी चोली ठीक करते हुए) कहाँ फिसल रही है? कुछ भी बोलती है तू....

खुशबू की बात सुनकर अब पायल भी मैदान में कूद पड़ती है. उर्मिला भाभी को छेड़ने का उसके लिए ये अच्छा मौका था.

पायल: ओये-होय भाभी...!! आपके गालों पर ये लाली कैसी? (उर्मिला की चोली की डोर पकड़ते हुए) और ये तो देखो जरा...इतने भारी दूध का बोझ इस छोटी सी चोली पर और सबका बोझ इस अकेली पतली सी डोर पर. कहीं राजू भैया ने डोर की गाँठ छु भी दी तो चोली एक ही झटके में ज़मीन पर होगी.
 
Back
Top