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Incest घर की मुर्गियाँ

बातें कर जय और टीना ने खाना खा लिया था। टीना बरतन लेकर किचेन में चली गई। रात के 11:30 बज चुके थे। विजय अपने बेड पर लेटा हालीवुड मूवी देख रहा था।

थोड़ी देर बाद टीना अपनी नाइटी उतारकर सिर्फ ब्रा पैंटी में बर्थ-डे केक और गिफ्ट लेकर पापा के रूम में पहुँचती है, और कहती है- “हैपी बर्थ-डे टु यू.. हैपी बर्थ-डे टु यू पापा... हापी बर्थ दे टु पापा..."

विजय- थॅंक यू बेटा।

विजय टीना को इस हालत में देखकर देखता ही रह गया। टीना ने केक और गिफ्ट पापा को पकड़ाया और एक केक का टुकड़ा अपने हाथों से पापा को खिलाया। पापा ने बचा हुआ टुकड़ा टीना को खिला दिया। फिर टीना अपने पापा के सामने सोफे पर बैठ गई। विजय बस टीना को निहारे जा रहा था।

टीना मुश्कुराते हुए- “कैसी लग रही हूँ पापा?"

विजय- बहुत ही खूबसूरत लग रही हो। ऐसा लग रहा है जैसे आसमान से कोई परी आई हो। जी करता है बस इस परी को देखता रहूँ? ना तू कुछ कहे ना मैं कुछ कहूँ।

टीना- अच्छा जी... आज से पहले तो आपने इतनी तारीफ नहीं की।

विजय- पहले कभी इस रूप में देखा भी तो नहीं।

टीना- पापा आपको मेरा ये रूप इतना पसंद है?

विजय- हाँ, इतना पसंद है की मेरा बस चले तो अभी बाँहो में भर लूँ।

टीना कुछ सोचकर फैसला लेती है, और सोफे से उठते हुए लाइट आफ कर देती है। और फिर पापा के बराबर में लेटकर अपनी बाँहे पापा की गर्दन पर लपेट लेती है। विजय भी अपनी बाँहो में टीना को जकड़ लेटा है।

विजय- आहह.. बेटी आई लव यू।

टीना- आई लव यू टू पापा।

फिर विजय में भी हौसला बढ़ जाता है, और अपने हाथों से टीना के जिश्म को सहलाने लगता है। टीना के अंदर भी सेक्स की भूख जागने लगती है, और अपने आपको पापा के जिश्म में समाने को आतुर हो जाती है। विजय धीरे-धीरे हल्के हाथों से टीना के जिश्म को सहलाता हुआ अब टीना के ऊपर आ गया था। टीना की धड़कनें बढ़नी शुरू हो गई। विजय के होंठ बिल्कुल टीना के होंठों के सामने थे। दोनों की सांसें एक दूसरे में घुल रही थीं।

विजय टीना के बालू में अपने हाथ फिराते हुए- “कितने प्यारे होंठ है टीना के... जी करता है इन्हें प्यार कर लूँ.."

टीना की हालत भी कुछ ऐसी ही थी। विजय की कछ ऐसी ही थी। विजय अपने होंठों को टीना के होंठों से लगा देता है, और जाने कितनी देर दोनों बाप बेटी एक दूसरे को लिप-लाक किए पड़े रहे।

विजय के लण्ड में अकड़ाहट बढ़ती जा रही थी, जो टीना की चूत साफ महसूस कर रही थी और टीना की चूत इस वक्त बुरी तरह गीली हो चुकी थी। टीना ने पापा की कमर को जोर से जकड़ लिया। विजय टीना की हालत समझ चुका था, और टीना को चूमता हुआ नीचे बढ़ने लगता है। इस वक्त विजय के लण्ड का सुपाड़ा बिल्कुल टीना की चूत पर था।

टीना चाहती थी पापा अपने कपड़ों की दीवार हटा दे। अभी टीना ये सोच ही रही थी की विजय टीना के ऊपर से हट गया और अपनी शर्ट के बटन खोलने लगता है, और फिर पैंट भी उतार फेंकी। सिर्फ अंडरवेर में टीना से लिपट जाता है। टीना की धड़कनें सिसकियों में बढ़ने लगी। विजय टीना को भी नंगी करना चाहता था, तो अपने हाथों से टीना की पैंटी नीचे सरका दी, फिर ब्रा की स्ट्रैप भी खोल दी।

विजय का लण्ड स्टील की रोड की माफिक हो चुका था। टीना को अपनी गाण्ड की दरार में लण्ड का साप-साफ अहसास हो रहा था। विजय तो टीना के साथ इस तरह पेश आ रहा था जैसे ये खेल दोनों बरसों से खेलते आ रहे हैं। पहली बार में इतनी जल्दी लण्ड और चूत मिलन हो जायेगा, ये तो दोनों में किसी ने नहीं सोचा था

चंद मिनटों में दोनों बिल्कुल नंगी अवस्था में एक दूजे से लिपटे हुए लेटे थे। विजय की पोजीशन ऐसी थी की लेटे हए लण्ड सीधा गाण्ड की छेद पर था। टीना को गाण्ड की छेद पर लण्ड होने से फरफरी सी दौड़ने लगी थी। टीना लण्ड को वहां से हटाना चाहती थी, मगर हिम्मत नहीं थी की कुछ बोल सके।

विजय भी जुबान से बिल्कुल खामोश था। मगर विजय के हाथ टीना के जिश्म को सहलाए जा रहे थे। टीना की नंगी चची जैसे ही विजय के हाथों से टकराई. विजय को बडा ही ठोस अहसास हुआ. और विजय गोल- गोल चूचियों को अपने हाथों में भर लेता है। लण्ड का दबाव लगातार गाण्ड की दरार में धंसता जा रहा था. और टीना की सांसें अटकती जा रही थीं, जैसे कोई अनहोनी होने वाली है।

टीना अभी इस बारे में सोच ही रही थी की तभी टीना को अपनी गाण्ड के छेद में अहसहनीय पीड़ा होने लगी। टीना की दर्द भरी चीख निकाल गई- “उईईई... मर गईई...”

विजय के लण्ड का सुपाड़ा बिना चिकनाई के गाण्ड के छेद में घुस गया था। विजय टीना की दर्द भरी चीख से घबरा गया, और फौरन लण्ड को बाहर खींच लेता है, और फिर टीना को अपनी तरफ पलटता है, और टीना के चेहरे को अपने हाथों से सहलाता हुआ कहता है।

विजय- तू ठीक तो है मेरी बच्ची?

टीना- हाँ पापा... मेरी तो जान ही निकलने लगी थी।

विजय- सारी बेटा, मैंने सोचा जब तू नकली लण्ड ले सकती है तो असली भी चला जायेगा।

टीना अपने पापा के मुँह से नकली लण्ड की बात सुनकर फिर खामोश हो गई।
 
विजय- क्या हुआ चुप क्यों है बता ना? क्या नकली लण्ड से दर्द नहीं होता?

टीना- वो पापा... मैंने वहां पर कभी ट्राई नहीं किया।

विजय- वहां मतलब?

टीना- पीछे।

विजय- पीछे का नाम नहीं मालूम?

टीना फिर चुप।

विजय- देखो ऐसे चुप रहोगी तो मैं प्यार कैसे करूँगा? अगर तुम्हें नाम नहीं मालूम तो मुझसे पूछ लो। पीछे को

गाण्ड कहते है और आगे का तो तुम्हें मालूम ही होगा।

टीना को अपने पापा का इस तरह बोलना बड़ा ही अजीब लग रहा था। टीना बोली- “पापा प्लीज़्ज़... ऐसी गंदी

गंदी भाषा में मत बोलो, मुझे शर्म आती है..."

विजय- “अच्छा चल अब नहीं बोलूँगा। पर ये तो बता तूने नकली लण्ड... ऊहह... सारी नाम नहीं लेना। तूने

नकली पेनिस कहां पर डाला है?"

टीना अपने पापा का एक हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख देती है- “यहां पर..."

विजय- “आहह.. चल आज तुझे असली पेनिस का मजा दिलाता हूँ कैसा लगता है?" और विजय टीना का हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख देता है- “देख इसे छूकर बता कैसा है? तेरे प्लास्टिक से छोटा तो नहीं है?"

इस वक्त विजय का लण्ड टीना के हाथों में था। एकदम स्टील की रोड की तरह सख्त, और जैसे अभी-अभी किसी भट्टी में गरम किया हो। टीना बोली- “ओहह... नहीं तो..."

विजय फिर बिस्तर से उठकर नारियल तेल की शीशी ले आता है, और टीना को डोगी स्टाइल में करके खूब सारा तेल गाण्ड के छेद में लगाने लगता है।

टीना- पापा ये क्या कर रहे हो?

विजय- तुझे प्यार करना सिखा रहा हूँ।

टीना- मुझे तो बहुत डर लग रहा है।

विजय- “डरो नहीं, कुछ नहीं होगा। में हूँ ना... बस थोड़ी हिम्मत रखो..” और फिर थोड़ा तेल लण्ड पर लगाया। फिर पापा ने गाण्ड के छेद में लण्ड को टिका दिया।

टीना सांसें रोके पापा के लण्ड को महसूस करने लगी। विजय अपने लण्ड को गाण्ड के छेद पर दबाने लगता है,

और टीना दर्द में अपने होंठ भींच लेती है, दोनों हाथों से बेड की चादर पकड़ लेती है।

विजय के लण्ड का दबाव गाण्ड के छेद पर बढ़ता जा रहा था, और फिर एक बार और लण्ड का सुपाड़ा गाण्ड में दाखिल हो गया।

टीना फिर से दर्द में बिलबिला गई। मगर इस बार टीना की चीख गले में ही रह गई। मगर टीना अपनी सिसकियों को नहीं रोक पाई- “अहह... मर गई हाईई आअहह... ओहह... आअहह... ऊहह... पापा..."

विजय का लण्ड टीना की गाण्ड में था। विजय अपने दोनों हाथों से टीना की चूचियां सहलाने लगा, और लण्ड भी आगे-पीछे करने की कोशिश करता रहा।

टीना का दर्द से बहुत बुरा हाल था। बस अपने दांत भींचे पीड़ा सहन किए जा रही थी, और विजय लण्ड को सरकाता हुआ आधे से ज्यादा घुसा चुका था।

टीना- “बस्स बस्स छोड़ दो पापा और नहीं सहा जाता आअहह... आईईई... उऊऊ...”

विजय यहीं रुक जाता है और टीना की कमर को चूमने सहलाने लगता है। टीना को गाण्ड के छेद में अभी तक दर्द हो रहा था। टीना की आँखों से आँसू झरने की तरह बह रहे थे। बहुत देर बाद टीना का दर्द कम हो जाता है,

और टीना की सिसकियां भी अब कम हो चुकी थीं।

विजय को भी अब टीना की सिसकियां सुनाई देनी बंद हो गई थीं। फिर विजय अपने लण्ड को टीना की गाण्ड से हल्का सा बाहर खींचता है और एक तेज धक्के के साथ अंदर कर देता है। टीना कसमसाती है, मगर विजय अब टीना की परवाह किए बगैर अपने लण्ड को स्पीड दे देता है, और लण्ड गाण्ड में अंदर-बाहर होने लगता है।

टीना- "अहह... आअहह... ओहह... उईई उम्म्म्म

... आअहह... पापा ऐसे ही.."

विजय एकदम निढाल टीना की कमर पर झूल जाता है। टीना की गाण्ड में विजय का वीर्य भर चुका था, और फिर टीना सीधी होकर लेट जाती है, और अपने दर्द को कंट्रोल करने की कोशिश करती है। विजय भी थोड़ी देर

यूँ ही लेटा रहा। 15-20 मिनट बाद दोनों को कुछ हल्का-हल्का महसूस होता है।

विजय- टीना बेटा, तू ठीक तो है?

टीना- पापा आपने तो आज मेरी जान ले ली थी।

विजय- अरें... बेटा भला प्यार करने से भी कोई मरता है। कैसा लगा मेरा प्यार?

टीना- बहुत ही दर्द भरा।

विजय- “अच्छा तो फिर अबकी बार सुख भरा प्यार करता हूँ..” कहकर फिर विजय टीना के ऊपर चढ़ जाता है,

और चूचियों में अपना मुँह दे देता है। आधी चूची विजय के मुँह में समा गई, और लण्ड इस बार बिल्कुल चूत के छेद पर था।

टीना भी चाहती थी की अब जल्दी से लण्ड अंदर घुस जाये। चूत गीली होकर बहने लगी थी। विजय के लण्ड को

भी चूत की हालत दिखाई दे रही थी। टीना से अब कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था, और टीना ने अपने पापा की कमर पकड़ ली, और अपनी चूत को लण्ड पर दबाने की कोशिश करने लगी।
 
टीना भी चाहती थी की अब जल्दी से लण्ड अंदर घुस जाये। चूत गीली होकर बहने लगी थी। विजय के लण्ड को

भी चूत की हालत दिखाई दे रही थी। टीना से अब कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था, और टीना ने अपने पापा की कमर पकड़ ली, और अपनी चूत को लण्ड पर दबाने की कोशिश करने लगी।

विजय टीना की हालत समझ गया, और विजय ने एक जोरदार शाट मार दिया। लण्ड एक ही बार में जड़ तक घुस गया। टीना को बड़ा सकन मिला और अपनी गाण्ड भी ऊपर उठाकर विजय की कमर को भींचे रखा। ऐसा लग रहा था जैसे टीना धक्के मारना चाहती हो।

विजय धक्के मारता हआ जैसे ही रुका, नीचे से उछाल-उछालकर टीना धक्के मारने लगी। दोनों की सिसकियां कमरे में गूंज रही थीं।

टीना- अहह... पापा, आई लव यू पापा.. मजा आ रहा है... उईईई... आहह... अहह... अहह..."

फिर विजय के लण्ड ने टीना की चूत को अपने वीर्य से भर दिया। जैसे ही दोनों झड़ते हैं, नींद की आगोश में

चले जाते हैं।

* …………………………………..

आज सनडे को समीर के घर सुबह से ही बड़ी रौनक थी। विजय और टीना भी सुबह-सुबह पहुँच गये। राहल और उसके मम्मी पापा भी आए थे। मस्ती भरा माहौल चल रहा। सभी लोग खाने में लगे थे।

तभी काजल ने समीर को इशारे से ऊपर आने को कहा। सबकी नजरों से बचकर समीर ऊपर रूम में

तो एकदम से काजल समीर से लिपट जाती है, और समीर के चेहरे पर चुंबनों की बौछार कर देती है।

काजल- जीजू, आज मैं जा रही हूँ। तुम्हारी बहुत याद आयेगी।

समीर- “मुझे भी तुम बहुत याद आओगी साली साहिबा.." और समीर काजल की गोलाईयों को जोर से मसल देता है।

काजल- हाय जीजू, धीरे से... क्या करते हो दर्द होता है।

समीर- प्यार कर रहा हूँ।

काजल- जयपुर कब आओगे?

समीर- बस दो-चार दिन में।

काजल- “आई लव यू जीजू..” और फिर से काजल समीर को बाँहो में भर लेती है।

समीर भी काजल को अपनी गिरफ्त में जकड़ लेता है- "आई लव यू टू काजल..” और थोड़ी देर दोनों यूँ ही लिपटे रहे।

राहुल नेहा और काजल को लेकर चला गया। और टीना भी अपने मम्मी पापा के साथ जा चुकी थी।

सूबह समीर भी कंपनी चला गया

हिना ने भी कंपनी जान कर ली थी और बड़ी ही मेहनत से अपने काम में लगी रहती थी। हिना सभी से बहुत कम बोलती थी। समीर हिना से बातें करने की कोशिश भी करता तो हिना सिर्फ हाँ ना में जवाब देती।

यूँ ही वक्त गुजर रहा था की एक दिन समीर संजना मेडम की कार से मार्केट जा रहा था। तभी बस स्टाप पर उसकी नजर हिना की छोटी बहन हुमा पर पड़ी, जो शायद बस का इंतेजार कर रही थी।

समीर एकदम ब्रेक लगता है- "माफ कीजिये मेडम..."

हुमा समीर को पहचान जाती है- “अरे सर आप..."

समीर- कहां जा रही हो। आओ मैं छोड़ देता

हुमा- नहीं सर, आप परेशान ना हों मैं चली जाऊँगी।

समीर- अरे... बैठो ना इसमें परेशानी की क्या बात है?

हमा झिझकती हुई गाड़ी में बैठ जाती है। समीर को हुमा की मासूमियत पहली नजर में ही भा गई थी। समीर बार-बार हुमा की खूबसूरती को निहारता रहा।

समीर- कहां जा रही हैं आप?

हुमा- जी स्कूल।

समीर- क्या तुम पढ़ती हो?

हुमा - नहीं सर, वो कल पेपर में पढ़ा था। गोविंद प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के लिए टीचर की जगह खाली है।

समीर- अरे... ये तो बड़ी अच्छी बात है। उसमें तो मेरा दोस्त अनुभव भी टीचर है। चलो मैं भी चलता हूँ। तुम्हारी जाब तो समझो पक्की।

हुमा- ओ थॅंक यू सर।

समीर- खाली थॅंक यू से काम नहीं चलेगा मिस हुमा, पार्टी देनी पड़ेगी।

हुमा- अरे क्यों नहीं सर?

और फिर समीर के कहने पर हुमा को स्कूल में टीचर की जाब मिल जाती है। हमा समीर से बहुत प्रभावित हो जाती है, और फिर समीर हुमा को वापस घर छोड़ने जाता है।

हुमा- सर, आप मेरी वजह से इतने परेशान हुए।

समीर- तुम हो ही इतनी खूबसूरत की तुम्हारी हेल्प के लिए अपने आपको रोक नहीं पाया।

हुमा अपनी तारीफ सुनकर मुश्कुरा देती है। समीर हुमा को घर छोड़कर कंपनी चला जाता है। वहां पर समीर को हिना दिखाई देती है, जो एकदम गुमसुम सी बस अपने काम में लगी रहती है।

समीर सोचने लगा- "दोनों बहनों में कितना फर्क है? हुमा का चेहरा हर वक्त खिला रहता है, और हिना का एकदम मुरझाया हुआ.."

रात को समीर अपने बेड पर लेटा हुआ हिना और हुमा के बारे में ही सोच रहा था। हुमा का मुश्कुराता हुआ चेहरा बार-बार समीर के सामने आ जाता। जाने कब जाकर समीर की आँख लगी।

अंजली सुबह समीर से बोलती है- “बेटा दिव्या को ले आ.."

समीर- “जी मम्मी, दिव्या से बात हुई थी। फ्राइडे को आने को बोल रही है। मम्मी जल्दी से नाश्ता लगा दो मुझे आज थोड़ा जल्दी जाना है..." समीर ने जल्दी-जल्दी नाश्ता किया।

हुमा के स्कूल जाने के टाइम समीर अपनी बाइक से बस स्टाप पहुँचता है। हमा पीले रंग के सूट में बस का इंतजार कर रही थी। समीर हमा के सामने बाइक रोकता है।

हुमा- अरें... सर आप।

समीर-आइए हम आपको स्कूल तक लिफ्ट दे दें।

हमा समीर की बाइक पर बैठ जाती है- “सर, आप हमारे लिए इतना परेशान ना हुआ कीजिए.."

समीर- क्यों क्या तुम्हें अच्छा नहीं लगता, या हम आपको विलेन टाइप लगते हैं?

हुमा- अरे... नहीं सर, ऐसी बात नहीं है।

समीर- फिर क्या बात है?

हुमा खामोश हो जाती है।

समीर- हमारी पार्टी भी तो तुम पर उधार है।

हुमा - जी सर... बताइए कब आयेंगे आप?

समीर- हम पार्टी घर पर नहीं लेते।

हुमा- फिर कहां लोगे सर?

समीर- किसी माल में देना, लंच और मूवी।

हुमा- नहीं सर, हमें डर लगता है। किसी ने देख लिया तो जाने क्या समझेगा?

समीर- आपकी मर्जी है, मैं आप पर दबाव नहीं डालूंगा।

तभी हुमा का स्कूल आ जाता है। और हुमा को छोड़कर समीर कंपनी चला जाता है। समीर को जाते हए हुमा देखती है। हुमा को लगता है जैसे समीर को पार्टी के लिए मना करना बुरा लगा हो। समीर ने एक बार भी हुमा की तरफ पलटकर नहीं देखा। हुमा के मन में एक अजीब सी हलचल होती है। कुछ सोचते हुए दरवाजे के अंदर चली जाती है।

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*****
 
आज नेहा और काजल को गये 3 दिन हो चुके थे। समीर का लण्ड भी सेक्स के लिए बेचैन था। आजकल टीना से भी समीर का मिलन नहीं हो पा रहा था। और कुछ सोचकर समीर संजना के आफिस में पहुँचता है। संजना को भी सेक्स किए हुए काफी दिन हो जाते हैं।

संजना ने समीर का उदास सा चेहरा देखा- क्या बात है समीर, ये चेहरा आज क्यों मुरझाया हुआ है?"

समीर- मेडम मन नहीं लग रहा।

संजना समीर का चेहरा पढ़ लेती है, बोली- “क्या बात है समीर, क्या दिव्या की याद आ रही है?"

समीर- जी मेडम।

संजना- अच्छा 4:00 बजे मेरे साथ फार्महाउस चलना। एक जरूरी काम है।

समीर की तो जैसे मन की मुराद पूरी हो गई- “जी मेडम."

शाम 4:00 बजे दोनों फार्महाउस पहुँचते हैं, और दोनों में सेक्स का खेल शुरू हो जाता है। दोनों ने फटाफट सारे कपड़े उतार फेंके। संजना ने पहले समीर के लण्ड को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया।

समीर की तो आह निकाल गई- “आईई... इसस्शह... मजा आ गया सस्सीई... सीईई.."

समीर भी लण्ड से संजना के मुँह में अंदर-बाहर धक्के मारने लगा, और अपना वीर्य संजना के मुँह में भर देता है। फिर समीर ने भी संजना की चूत को जबान से मक्खन की तरह चाट-चाटकर संजना को फारिग किया। थोड़ी देर दोनों यूँ ही एक दूसरे के ऊपर लेटे हुए, एक दूसरे के जिश्म से खेलने लगे।

समीर संजना की चूचियों के निप्पल मसल रहा था, और संजना समीर के मुरझाए लण्ड को सहला रही थी। थोड़ी देर में जब समीर के लण्ड में जान आई तो, संजना अपनी टाँगें फैलाकर चूत की फांकों को खोल देती है। समीर फौरन अपना लण्ड चूत की फांकों से लगा देता है, और एक जोरदार शाट मार देता है। लण्ड दनदनाता हुआ एक ही शाट में जड़ तक घुस जाता है।

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समीर संजना की चूत को करीब एक घंटे तक पोजीशन बदल-बदलकर चोदता रहा। तब जाकर दोनों तृप्त हुए। और यूँ ही आज का दिन गुजर जाता है।

थर्डे की सुबह हुमा बस स्टाप पर खड़ी बस का इंतेजार कर रही थी। तभी एक बस आती है। मगर जाने क्यों हमा बस में नहीं बैठी, और यूँ ही बस स्टाप पर खड़ी फिर से बस का इंतेजार करती रहती है। बार-बार हमा की नजरें किसी को तलाश कर रही थी। करीब आधा घंटा बस स्टाप पर हुमा को खड़े-खड़े हो जाता है। हुमा की 3-4 बस निकाल चुकी थी। जब हुमा को लगता है की शायद अब समीर सर नहीं आयेंगे। तब हारकर हुमा एक बस में बैठ जाती है।

आज हुमा को लग रहा था की मुझे समीर सर से एकदम मना नहीं करना चाहिए था। हुमा समीर के बारे में ही सोचते हुए स्कूल चली जाती है, और आज का दिन भी यूँ ही गुजर जाता है।

उधर काजल की चूत में भी खुजली मचनी शुरू हो गई थी। रात के 10 बजे थे। काजल समीर को मेसेज करती है- “कब आओगे?"

तभी समीर का जवाब आता है- "मेरी जान कल.."

काजल- जीजू, आपकी बहुत याद आ रही है।

समीर- साली जी वहां पर अपना मिलन कैसे होगा?

काजल- रात में हमारे यहां रुकना, मैं सब सेटिंग कर लूँगी।

समीर- “आहह... वाउ ग्रेट साली साहिबा...” और फिर समीर नींद की आगोश में चला जाता है।

सुबह समीर संजना को फोन करता है- “हेलो मेडम गुड मार्निंग..."

संजना- गुड मार्निंग। समीर क्या हाल है?

समीर- फाइन। मेम आज आपकी कार चाहिए। दिव्या को लेने जाना है।

संजना- अरे... ये भी कोई पूछने की बात है? ले जाओ।

सुबह के 7:00बजे समीर फटाफट बाथरूम में घुस जाता है, और सारे कपड़े उतारकर खुद को आईने में देखता है। लण्ड के पास लंबी-लंबी झांटें निकल चुकी थीं। पहले समीर रेजर से लण्ड को क्लीन करता है। लण्ड काजल के खयाल से खंबे जैसा खड़ा हो जाता है। समीर जल्दी से फ्रेश होकर बाहर निकलता है। मम्मी पापा नाश्ते की टेबल पर बैठे थे।

अजय- बेटा तैयार हो गये?

समीर- जी पापा।

अजय- आओ नाश्ता कर लो।

समीर नाश्ते की टेबल पर पापा के सामने बैठ जाता है।

अजय- कैसे जाओगे जयपुर?

समीर- पापा संजना मेडम की गाड़ी लेकर जाऊँगा।

उधर बस स्टाप पर खड़ी हमा आज भी समीर का रास्ता देख रही थी। तीन दिन हो गये थे समीर को देखे हए। हुमा बड़ी उदास सी लग रही थी हमा के पास समीर का मोबाइल नंबर भी नहीं था। आज हुमा को अपने ऊपर ही गुस्सा आ रहा था।

हमा मन में- “समीर सर का कितना बड़ा अहसान है मुझ पर, और मैंने एकदम उनको पार्टी के लिए मना कर दिया। क्या सोचते होंगे मेरे बारे में?" आज भी हमा समीर के इंतजार में कई बस निकाल देती है। मगर समीर का कुछ पता नहीं था। बेचारी बुझे मन से इस बार बस में बैठ जाती है।

समीर नाश्ता करके घर से बाइक लेकर संजना के घर पहुँचता है, और होंडा सिटी कार लेकर जयपुर के लिए निकाल पड़ता है। रास्ते में मार्केट से चाकलरट के दो गिफ्ट पैक ले लेता है, और कार का फास्ट म्यूजिक चालू कर देता है। गाने गुनगुनता हुआ अपनी मस्ती में गाड़ी चला रहा था। समीर करीब 12:00 बजे दिव्या के घर पहुँचता है।

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दिव्या समीर को देखकर खुश हो जाती है।

समीर- कैसी हो दिव्या?

दिव्या- मैं ठीक हूँ, आप कैसे हैं?

समीर- ठीक हूँ। बस तुम्हारी बहुत याद आती है।

तभी दिव्या के मम्मी पापा आ जाते हैं। समीर आगे बढ़कर उनके पैर छूता है।

मम्मी पापा- “जुग जुग जियो बेटा.."

फिर सब मिलकर नाश्ता करते हैं।

दिव्या- आज मम्मी सुबह से किचेन में लगी हुई है।

समीर- अरे... माँ जी आपको इतना परेशान होने की क्या जरूरत थी?

मम्मी- ये भी कोई परेशान की बात है? एक ही तो मेरा दामाद है, अपने हाथ का बनाया हुआ खाना खिलाऊँगी।

तभी नेहा का फोन आता है- “हेलो भइया आ गये तुम?"

समीर- हाँ नेहा, बस थोड़ी देर हुई है।

नेहा- भइया आपको रात का डिनर मेरे यहां करना है।

समीर- "अच्छा जी..." और फिर फोन काट जाता है।

थोड़ी देर बाद सब मिलकर खाना खाते हैं। बड़ा ही सवादिष्ट खाना बनाया था। समीर उंगलियां चटता रह गया।

समीर- माँ जी, आपने खाना बड़ा ही सवादिष्ट बनाया है। मजा आ गया।

मम्मी- बेटा खीर तो खाई नहीं तुमने।
 
मम्मी- बेटा खीर तो खाई नहीं तुमने।

समीर- बस मम्मी पेट फुल हो गया।

मम्मी- समीर बेटा, थोड़ा आराम कर लो सफर में थक गये होगे।

समीर- जी मम्मी।

दिव्या का रूम दूसरे माले पर था। दिव्या समीर को लेकर अपने रूम में पहुँचती है, और समीर की बाँहो में लिपट जाती है, और कहती है- “पता है, मुझे तुम्हारी बहुत याद आई..."

समीर दिव्या के होंठों पर अपने होंठों रख देता है। दिव्या फौरन समीर के होंठों को चूसने लगती है। समीर अपनी गिरफ़्त और टाइट कर लेता है। दिव्या भी समीर का पूरा साथ दे रही थी। दिव्या के हाथ सरकते हए पैंट की जिप तक पहुँच गये, और लण्ड को मुट्ठी में दबोच लिया।

समीर-आहिस्ता।

दिव्या फिर समीर की जिप खोल देती है, और नीचे बैठकर लण्ड को बाहर निकाल लेती है, बोली- “आहह... देखो तो मेरी याद में कैसे मुरझा गया है..” और गप्प से लण्ड का सुपाड़ा मुँह में भर लेती है।

समीर दिव्या के बालों को पकड़कर मुँह को लण्ड पर दबाने लगा- "अहह... दिव्या मजा आ गया..." और लण्ड पूरा दिव्या के हलक तक पहुँचने लगा। समीर भी लण्ड को आगे-पीछे करके पूरा मजा ले रहा था।

दिव्या- "आईई... इसस्स्स... आह... ओहह... सस्स्सी ... हाईई... आह.. उह्ह...” करीब 10 मिनट तक दिव्या ने लण्ड को चूसते-चूसते समीर का बाँध तोड़ दिया, और समीर का सारा सैलाब दिव्या के हलक में उतरता चला गया। दिव्या मुश्कुराते हुए सारा वीर्य पी जाती है।

फिर समीर बेड पर लेटकर आराम करता है। शाम के करीब 5:00 बजे समीर नेहा के घ काजल खोलती है।

काजल- आरे जीजू आप... बड़ी देर कर दी आने में?

समीर- क्या करें, आपकी दीदी ने जो पकड़कर रखा था।

काजल- “क्या सारा प्यार बीवी के लिए है? तोड़ा प्यार साली के लिए भी बचाकर रखा है ना?"

समीर- अंदर तो आने दो, क्या दरवाजे पर ही प्यार करोगी?

काजल- “ओह माई गोड... आइए आइए जीजू आपका स्वागत है। सब आपका ही इंतेजार कर रहे हैं।

राहुल- आओ समीर कैसे हो? और घर पर सब?

समीर- मैं भी अच्छा हूँ और घर पर भी सब अच्छे हैं।

राहुल- अरी नेहा, देखो तुम्हारे भइया आये हैं। कुछ ठंडा वंडा लेकर आओ।

नेहा- “जी अभी लाई..." और नेहा ट्रे में कोल्ड-ड्रिक लेकर आती है- “हेलो भइया कैसे हो? और मम्मी पापा कैसे है

समीर एक ग्लास उठाते हुए- “मैं भी ठीक हूँ और मम्मी पापा भी अच्छे हैं। बस तुझे याद करते रहते हैं... और यूँ ही बातों का सिलसिला चलता रहता है।

करीब 9:30 बजे सब मिलकर डिनर करते हैं। समीर खाना खाकर थोड़ा टहलने के लिए छत पर चला जाता है। रात के 10:30 बज चुके थे। राहुल के मम्मी पापा नीचे रूम में सो चुके थे।

काजल नीचे हाल में समीर का बिस्तर लगती है, और आकर अपने रूम में लेट जाती है।

राहल का रूम दूसरे माले पर था, और सिर्फ राहुल के रूम में ही एसी लगा हुआ था।

राहल- “नेहा, समीर इसी रूम में सो जायेगा आराम से। तुम आज काजल के पास सो जाना..."

नेहा- जी ठीक है।

राहुल- मैं नीचे हाल में सो जाता हूँ, तुम अपने भाई से बोल देना।

नेहा- अच्छा बोल दूंगी,

राहुल हाल में चला जाता है। नेहा ऊपर समीर के पास चली जाती है।

नेहा- “भइया चलो नीचे रात के 11:00 बजने वाले हैं.."

समीर नेहा के साथ नीचे आता है और नेहा समीर को अपने रूम में ले आती है।

समीर- राहुल कहां है?

नेहा- वो नीचे सो रहे हैं।

समीर- और तू कहां सोयेगी?

नेहा- “आपकी बाँहो में...” कहते हुए नेहा समीर से लिपट जाती है।

समीर- क्या करती है नेहा? यहां पर किसी ने देख लिया तो गजब हो जायेगा।

नेहा- "भइया क्यों डरते हो? किसी को पता नहीं चलेगा...” कहकर नेहा रूम की लाइट आफ कर देती है, और समीर के साथ बेड पर लिपट जाती है।
 
थोड़ी ही देर में दोनों के कपड़े जिश्म से अलग हो जाते हैं, और नेहा अपने भाई के लण्ड को अपनी चूत के छेद पर टिका देती है। समीर के हल्के से दबाव से लण्ड चूत में आराम से सरकता चला जाता है।

समीर- नेहा तेरी चूत तो काफी ढीली हो गई है।

नेहा- भइया क्या करूं? एक रात में जब 3-3 बार सेक्स करेंगे तो ढीली तो होगी ही।

समीर- “वाह नेहा तू तो तो बड़े मजे ले रही है.." और दोनों भाई बहन चुदाई का खेल खेलने लगे।

इधर काजल को जब ये अहसास हो गया की पूरा घर सो चुका है, तो धीरे से अपने रूम से निकलकर नीचे हाल में अपने जीजू समीर के पास पहुँचती है। हाल की लाइट आफ थी। राहुल चादर ओढ़े लेटा था। काजल धीरे से बिस्तर में घुसकर समीर से लिपट जाती है।

राहुल की नींद खुल जाती है, और राहुल सोचता है नेहा आई है। राहुल भी काजल को अपनी बाँहो में भर लेता है, और काजल की चूचियों को पकड़कर- “क्या बात है नेहा, नींद नहीं आ रही?"

ये तो राहुल भइया की आवाज थी। काजल की सिट्टी-पिट्टी गुम। ये सब क्या हो गया? अब क्या करे काजल? मुँह से कुछ भी बोल नहीं सकती थी, और राहुल की गिरफ़्त भी चूचियों पर बढ़ती जा रही थी, और लण्ड काजल की गाण्ड की दरार में घुस रहा था।

काजल आज कहां फँस गई?

राहुल बार-बार नेहा से बोले जा रहा था। मगर काजल बिल्कुल चुपचाप लेटी थी। राहुल ने नेहा की सलवार का नाड़ा भी खोल दिया, और सलवार को खिसका कर नीचे कर दिया, और फिर अपना लवर भी उतार फेंका। लण्ड काजल को अब क्लियर टच हो रहा था। काजल सांसें रोके लेटी थी। जाने अब क्या होगा?

राहुल ने पीछे से लण्ड को चूत के छेद पर लगाया और धक्का मारने लगा। काजल की चूत नेहा के मुकाबले टाइट थी। लण्ड चूत में चिपकते हुए घुसने लगा।

काजल को बड़ा दर्द होने लगा। मगर काजल बर्दाश्त करती रही। जैसे ही लण्ड अदर घुसता काजल तड़प जाती। और जब लण्ड बाहर की तरफ खींचता काजल को थोड़ी राहत मिलती। राहल लण्ड को चूत में धकेलता जा रहा था।

राहुल- अरें.. नेहा आज तो बहुत टाइट जा रहा है, क्या बात है?

मगर काजल चुपचाप लेटी रही। बस हूँ हाँ करती रही। कहीं राहुल को पता चल गया की मैं नेहा नहीं काजल हूँ। राहल अब थोड़ा तेज-तेज लण्ड पर दबाव डालते हुए पूरा लण्ड घुसा देता है। काजल की तो जान पर बन आई थी। इतना दर्द हो रहा था की चीख ही निकाल जाये। मगर इतना दर्द होने पर भी बर्दाश्त किए लेटी रही। और राहुल अपने लण्ड को अंदर-बाहर करना शुरू कर देता है।

काजल को भी थोड़ी देर बाद अब अच्छा लगने लगा, और अब काजल भी राहल का साथ दे रही थी। करीब आधे घंटे तक राहुल को काजल चोदता रहा। अब काजल की चूत लण्ड को आराम से अंदर-बाहर ले रही थी। जब काजल झड़ने के करीब होती है तो बस अपने आप राहुल की कमर काजल के हाथों में आ जाती है, और काजल 5-7 धक्के नीचे से मारते हुए झड़ जाती है। और फिर राहुल भी अपना वीर्य काजल की चूत में छोड़ देता है।

और फिर बिना कुछ बोले धीरे से काजल उठकर अपने रूम में पहुँच जाती है।

काजल बेड पर लेटी सोच रही थी। ये आज मुझसे क्या हो गया? अगर भइया नीचे हाल में सो रहे हैं, तो फिर समीर जीजू कहां सो रहे हैं? तभी कुछ सोचकर काजल बेड से उठकर नेहा के रूम की तरफ चल दी। दरवाजा अंदर से बंद था। मगर नेहा की सिसकियां काजल के कानों में साफ-साफ सुनाई दे रही थी।

नेहा- “आअहह... भइया मजा आ रहा है... आह्ह... सस्सीई... ओहह... उम्म्म्म

... आहह... सस्स्सी ..."

काजल- “उफफ्फ... कैसे भाई बहन हैह की यहां भी नहीं छोड़ा। काजल भी कछ सोचती है, और काजल के चेहरे पर एक मुश्कान आ जाती है। काजल के माइंड में एक प्लान आ गया था। और थोड़ी देर बाद काजल अपने बिस्तर पर जाकर सो गई।

सुबह समीर नाश्ता करके नेहा के घर से दिव्या के घर गया दिव्या भी अपना सामान पैक कर रही थी। समीर और दिव्या 11:00 बजे तक नोयेडा के लिए निकाल गये।

*****

*****
 
उधर काजल प्लान के मुताबिक नेहा भाभी से बात करती है। जब नेहा अपना रूम साफ कर रही थी। काजल रूम में पहुँचती है, और कहा- “और भाभी क्या कर रही हो? मैं कुछ हेल्प करूं आपकी?"

नेहा- अरे... नहीं काजल, मैं कर लूँगी।

काजल- एक बात पूर्वी भाभी? आप समीर को बहुत प्यार करती हो?

नेहा- हाँ तो... हर बहन अपने भाई को प्यार करती है।

अब काजल नेहा पर एक बाम्ब सा फोड़टी है- "इतना प्यार करती हो की भाई के साथ लिपटकर सो भी जाती हो?"

नेहा की ये सुनकर तो जैसे पैरों तले जमीन निकल गई- “क्या कह रही हो काजल?"

काजल- "भाभी रात को मैंने आपको और समीर को वो सब करते देख लिया है..."

नेहा काजल के पैरों में पड़ गई, और गिड़गिड़ाने लगी- "प्लीज्ज... काजल मुझे माफ कर दे, मझसे गलती हो गई। ये बात किसी से मत कहना..." और नेहा की आँखों में आँसू निकल आए थे।

काजल- “अरे... भाभी क्या कर रही हैं आप। उठो मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगी...” और काजल नेहा की आँखें साफ करती है- "भाभी ये बात मैं किसी से नहीं कहंगी- प्रामिस। बस भाभी आगे से ध्यान रखना। घर की इज्जत पर दाग ना लगे..."

नेहा का सिर शर्म से झुक जाता है।

*****

*****
 
समीर दिव्या को लेकर नोयेडा पहुँच चुका था। रात को समीर और दिव्या की जमकर चुदाई होती है। और यूँ ही वक्त गुजरता है।

सोमवार की सुबह। समीर आज थोड़ा जल्दी उठकर फ्रेश होता है। और जल्दी-जल्दी नाश्ता करके कंपनी के लिए निकाल जाता है, और फिर समीर बस स्टाप पर पहुँचता है। समीर को ब्लू कलर का शूट पहने हुमा नजर आ जाती है। और समीर अपनी बाइक हुमा के सामने रोक देता है।

हुमा तो समीर को देखकर एकदम खिल्ल जाती है। जैसे कोई बरसों का बिछड़ा मिला हो, और झट से बिना कुछ कहे बाइक पर बैठ जाती है। समीर बाइक स्कूल की तरफ दौड़ा देता है। तभी हुमा समीर से बोलती है।

हुमा - सर, क्या आप हमसे नाराज हैं?

समीर- नहीं तो, तुम्हें ऐसा क्यों लगा?

हुमा - वो हमने आपको पार्टी देने को मना कर दिया था।

समीर- कोई बात नहीं जब आपको ये सब पसंद नहीं तो भला मैं क्यों आपको फोर्स करूं?

हुमा - सारी सर। मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था। एक छोटी सी पार्टी ही तो माँगी थी आपने। बताइए कब लेंगे हमसे पार्टी?

समीर चकित हो जाता है। क्या बात है आज सूरज कैसे पश्चिम से निकलने लगा- " जब भी आपका दिल करे बोल देना, बंदा हाजिर है..."

हुमा - ठीक है तो आज हाफ-डे के बाद चलेंगे। आप आ जाना।

समीर खुशी के मारे बाइक की रफ्तार बढ़ा देता है, तो हुमा को झटका सा लगता है। हुमा एकदम से समीर की पीठ से टकराती है। हुमा की नोकदार चूचियां समीर को महसूस होती हैं। उफफ्फ... एक पल के लिए क्या मस्त अहसास मिला समीर को। हमा थोड़ा अपने को संभालकर बैठ जाती है। समीर का दिल फिर से इस अहसास को पाने को करने लगता है।

मगर हुमा अब संभलकर बैठ चुकी थी। थोड़ी देर में हुमा का स्कूल आ जाता है, और हमा समीर को बाइ करते हुए अंदर चली जाती है। समीर का दिल घायल हो चुका था। हुमा की चूचियों की प्यारी सी चुभन अब भी समीर को महसूस हो रही थी।

समीर खड़े-खड़े सोच रहा था- “कितनी फुर्सत से बनाया होगा बनाने वाले ने। कितनी प्यारी मासूम सी लड़की है ये, जी करता है बस देखता रहूँ..”

फिर समीर कंपनी पहुँच जाता है। वहां उसकी नजर हिना पर पड़ती है।

समीर- हिना आर्डर फाइल लेकर मेरे केबिन में आओ।

हिना- “जी सर, अभी आई.." और हिना आर्डर फाइल लेकर समीर के केबिन में पहुँचती है।

समीर- एक्सपोर्ट माल की डेलिवरी में सिर्फ 10 दिन बाकी है। कितना माल पैक हो चुका है?

हिना- सर फ्राइडे तक सारी पैकिंग कंप्लीट हो जायेगी।

समीर- गुड जाब हिना।

हिना- “थॅंक यू सर.." चेयर से उठते हुए।

समीर- अरे... बैठो हिना। एक बात बताओ, तुम इतना खामोश क्यों रहती हो?

हिना- नहीं तो सर, ऐसी कोई बात नहीं है।

समीर को लगता है हिना कुछ बताना नहीं चाहती- “ओके जाओ तुम.."

हिना समीर के केबिन से बाहर चली जाती है।

समीर- "शायद हिना की खामोशी की वजह हुमा को मालूम हो सकती है.."

समीर लगभग 12:00 बजे कंपनी से हुमा के स्कूल की तरफ बाइक दौड़ा देता है। 15 मिनट में समीर हुमा के स्कूल के दरवाजे पर खड़ा था। 5 मिनट इंतेजार करते ही स्कूल का लंच टाइम का घंटा बज उठा। और थोड़ी देर में नीला शूट पहने हुमा समीर को नजर आ जाती है। उफफ्फ... चलती हुई कितनी प्यारी लग रही थी। शायद ही किसी परी से कम हो।

समीर एकटक हुमा की सुंदरता निहार रहा था, और हुमा चलते हुए समीर के पास तक आ जाती है।

हुमा - चलिए सर।

समीर- “आहह... हाँ चलो..." और समीर बाइक स्टार्ट करके हुमा को लेकर पी.वी.आर. माल पहुँचता है। समीर कहता है- “क्या लोगी, वेग या नोन-वेग?"

हुमा- सर, आप बताएं। हमें तो कुछ भी चलेगा।

समीर- फिर तो आज हम भी नोनवेग ही लेंगे और चिकन टंगड़ी

दोनों सी.एफ.सी. रेस्टोरेंट में पहँचते है और एक कार्नर की टेबल पर बैठ जाते है, कोल्ड-ड्रिंक का आर्डर कर देते हैं।

समीर- एक बात कहूँ?

हुमा- कहिए सर।

समीर- तुम बहुत खूबसूरत हो।

हुमा- अरे.. कहां सर, ऐसा तो कुछ नहीं।

समीर- रियली.. मेरा मतलब सच कह रहा हूँ। मैंने आज तक तुम जैसी खूबसूरत लड़की नहीं देखी। क्या मुझसे दोस्ती करोगी?

हुमा- अरे... सर हम इस काबिल कहां हैं?

समीर- तुम तो लाखों में एक हो।

हुमा- ऐसा आपको मुझमें क्या नजर आ गया?

समीर- कहां से बताऊँ? तुम तो ऊपर से लेकर नीचे तक किसी संगमरमर की तराशी हुई मूरत हो।

हुमा को समीर का यूँ तारीफ करना अब अच्छा लगने लगा। और समीर भी हमा की तारीफों के पुल बाँधे जा रहा था। समीर की आँखें अब हमा की आँखों को ऐसे देखे जा रही थीं, जैसे कोई गहरे समुंदर को देखता है।
 
हुमा - ऐसे क्या देख रहे हो सर?

समीर- कितनी गहराई है तुम्हारी आँखों में? बस यही देख रहा हूँ।

हुमा - सर, आप मेरी इतनी तारीफ क्यों कर रहे हैं?

समीर- आप हैं ही इस काबिल की तारीफ किए बिना दिल मानता ही नहीं। एक बात पूर्वी तमसे?

हुमा- जी पूछिए।

समीर- "आपकी बहन हिना कंपनी में मेरे साथ काम करती है। कभी उसके चेहरे पर मुश्कान नहीं दिखती क्या बात है?"

हुमा- “सर, आपने हमें इतना अपना समझा। आपसे कुछ नहीं छिपाऊँगी। जब पापा का आक्सिडेंट हुआ था, पापा के हार्ट की नस फट गई थी। बहुत खून निकल चुका था। डाक्टर ने फौरन आपरेशन के लिए बोल दिया। 3 लाख रुपये जमा करने को बोला। अब इतने पैसे कहां से लाते। मम्मी ने घर गिरवी रखकर पैसे उठा लिए। इतना सब कुछ करने के बाद भी पापा हमें छोड़कर चले गये.." समीर को बताते-बताते हुमा की आँखों से आँसू निकाल आया।

समीर अपनी जेब से रुमाल निकालकर हुमा के आँसू पोंछता है, और कहता है- "हुमा हिम्मत से काम लो। अब होनी को कौन टाल सकता है?"

हुमा - जी सर। मैं तो यही कोशिश करती हूँ की एक दिन सब ठीक हो जायेगा। मगर क्या करें, आज लोन का इंटेरेस्ट बढ़ते-बढ़ते करीब 4 लाखक हो चुका है। और अब लगता है की हमारा घर नीलाम हो जायेगा।

समीर- ओहह... ये तो बहुत बड़ी टेन्शन की बात है। तुम जानती हो किसके पास गिरवी रखा है मकान?

हुमा - "जी पापा के ही एक दोस्त थे..."

समीर- चलो मेरे साथ।

हुमा- कहां?

समीर- आओ तो।

हुमा - मगर सर, आपकी पार्टी?

समीर- “वो भी ले लेंगे..." फिर समीर हुमा को लेकर अपने घर के पास बाइक रोकता है, कहा- “तुम दो मिनट रुको मैं आता हूँ..” और समीर घर से चेकबुक लेकर दो मिनट में हुमा के पास आ जाता है।

समीर- चलो मुझे उस आदमी के पास लेकर चलो, जिसके पास तुम्हारा घर गिरवी रखा है।

हुमा- लेकिन सर, आप किसलिए?

समीर- मुझे अपना दोस्त मानती हो?

हुमा - जी सर।

समीर- सर नहीं, सिर्फ समीर।

हुमा - सर, मुझसे नाम नहीं लिया जायेगा आपका।

समीर- "अच्छा जी तो चलें फिर?"

फिर समीर हुमा को लेकर साहूकार के पास पहुँचता है। समीर साहूकार से पैसों का पूरा हिसाब निकलवाता है इंटेरेस्ट लगाकर। 3.75 लाख रुपये बनते हैं। समीर फौरन जेब से चेक बुक निकालता है और 3.75 लाख का चेक बनाकर साहूकार के हाथ में पकड़ा देता है, और घर के कागज ले लेता है।

हमा समीर को ऐसे देखने लगी, जैसे समीर कोई फरिश्ता बनकर आया हो, और जाने क्यों आँखों में आँसू आ जाते हैं।

समीर आगे बढ़कर जैसे ही हुमा के आँसू पोछता है, हुमा किसी टूटे पत्ते की तरह समीर के गले लग जाती है। समीर हुमा को संभलता है। दो पल यूँ ही गुजर जाते हैं। हुमा को जैसे ही ये अहसास होता है, एकदम से अपनी नजरें झुकाकर थोड़े फासला से खड़ी हो जाती है। हुमा को अपने आप पर बड़ी शर्म सी महसूस हो रही थी। समीर हुमा का हाथ पकड़कर वहां से निकल जाता है।

समीर- चलिये हम आपको घर तक छोड़ दें।

हुमा हाँ में गर्दन हिला देती है। और समीर बाइक स्टार्ट करके हुमा को उसके घर लेकर पहुंचता है।

समीर- अच्छा हुमा मैं चलता हूँ।

हुमा - अरे.. सर ऐसे कैसे जा सकते हैं? आइए अंदर..." और हमा डोरबेल बजाती है।

हुमा की मम्मी रुखसार दरवाजा खोलती है।
 
हुमा- “अंदर आइए सर..” और हुमा खुश होते हुए अपनी मम्मी को मकान के कागज दिखाती है- “मम्मी देखो ये क्या है? हमारे मकान के कागज। समीर सर ने साहूकार का सारा कर्ज उतार दिया..."

रुखसार की आँखों में भी आँसू झलक आते हैं, कहा- “लगता है तुम कोई फरिश्ता बनकर आये हो हमारी जिंदगी में।

समीर- अरे... माँजी आप लोगों से मिलकर ऐसा लगा जैसे मेरा इस घर से पिछले जन्म का नाता है।

रुखसार- बेटा तुमने मुझे माँ कहा?

समीर- माँ को माँ ही कहा जाता है।

रुखसार समीर को अपने गले से लगा लेती है।

समीर- अच्छा माँजी चलता हूँ। फिर कभी आऊँगा।

रुखसार- नहीं, ऐसे नहीं जाओगे। बैठो यहां मैं खाना लगाती हैं।

समीर को बिल्कुल ऐसा लगा जैसे समीर की मम्मी अंजली बोलती है। समीर चुपचाप सोफे पर बैठ गया। रुखसार समीर को अपने हाथों से खाना खिलाती है, और कहती है- “बेटा ये तुम्हारा ही घर है... जब भी दिल करे आ जाया करो..."

समीर- जी माँजी।

हुमा समीर को बाहर तक छोड़ने आती है।

समीर- अपना मोबाइल नंबर बातायेंगी?

हुमा - जी सर 98#########

समीर- ठीक है हुमा फिर मिलते हैं। बाइ।

हुमा - ओके बाइ सर।

समीर सीधा घर पहुँचता है।

उधर काजल की चूत में भी खारिश बढ़ती जा रही थी। काजल को लण्ड की तलब जागने लगी। अब समीर तो आ नहीं सकता था। फिर ये प्यास कैसे बुझे? काजल अपने बेड पर लेटी यही सोच रही थी। काजल का एक हाथ इस वक्त सलवार के अंदर अपनी चूत को सहला रहा था, जो चुदाई की आग में पानी छोड़ रही थी।
 
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