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बातें कर जय और टीना ने खाना खा लिया था। टीना बरतन लेकर किचेन में चली गई। रात के 11:30 बज चुके थे। विजय अपने बेड पर लेटा हालीवुड मूवी देख रहा था।
थोड़ी देर बाद टीना अपनी नाइटी उतारकर सिर्फ ब्रा पैंटी में बर्थ-डे केक और गिफ्ट लेकर पापा के रूम में पहुँचती है, और कहती है- “हैपी बर्थ-डे टु यू.. हैपी बर्थ-डे टु यू पापा... हापी बर्थ दे टु पापा..."
विजय- थॅंक यू बेटा।
विजय टीना को इस हालत में देखकर देखता ही रह गया। टीना ने केक और गिफ्ट पापा को पकड़ाया और एक केक का टुकड़ा अपने हाथों से पापा को खिलाया। पापा ने बचा हुआ टुकड़ा टीना को खिला दिया। फिर टीना अपने पापा के सामने सोफे पर बैठ गई। विजय बस टीना को निहारे जा रहा था।
टीना मुश्कुराते हुए- “कैसी लग रही हूँ पापा?"
विजय- बहुत ही खूबसूरत लग रही हो। ऐसा लग रहा है जैसे आसमान से कोई परी आई हो। जी करता है बस इस परी को देखता रहूँ? ना तू कुछ कहे ना मैं कुछ कहूँ।
टीना- अच्छा जी... आज से पहले तो आपने इतनी तारीफ नहीं की।
विजय- पहले कभी इस रूप में देखा भी तो नहीं।
टीना- पापा आपको मेरा ये रूप इतना पसंद है?
विजय- हाँ, इतना पसंद है की मेरा बस चले तो अभी बाँहो में भर लूँ।
टीना कुछ सोचकर फैसला लेती है, और सोफे से उठते हुए लाइट आफ कर देती है। और फिर पापा के बराबर में लेटकर अपनी बाँहे पापा की गर्दन पर लपेट लेती है। विजय भी अपनी बाँहो में टीना को जकड़ लेटा है।
विजय- आहह.. बेटी आई लव यू।
टीना- आई लव यू टू पापा।
फिर विजय में भी हौसला बढ़ जाता है, और अपने हाथों से टीना के जिश्म को सहलाने लगता है। टीना के अंदर भी सेक्स की भूख जागने लगती है, और अपने आपको पापा के जिश्म में समाने को आतुर हो जाती है। विजय धीरे-धीरे हल्के हाथों से टीना के जिश्म को सहलाता हुआ अब टीना के ऊपर आ गया था। टीना की धड़कनें बढ़नी शुरू हो गई। विजय के होंठ बिल्कुल टीना के होंठों के सामने थे। दोनों की सांसें एक दूसरे में घुल रही थीं।
विजय टीना के बालू में अपने हाथ फिराते हुए- “कितने प्यारे होंठ है टीना के... जी करता है इन्हें प्यार कर लूँ.."
टीना की हालत भी कुछ ऐसी ही थी। विजय की कछ ऐसी ही थी। विजय अपने होंठों को टीना के होंठों से लगा देता है, और जाने कितनी देर दोनों बाप बेटी एक दूसरे को लिप-लाक किए पड़े रहे।
विजय के लण्ड में अकड़ाहट बढ़ती जा रही थी, जो टीना की चूत साफ महसूस कर रही थी और टीना की चूत इस वक्त बुरी तरह गीली हो चुकी थी। टीना ने पापा की कमर को जोर से जकड़ लिया। विजय टीना की हालत समझ चुका था, और टीना को चूमता हुआ नीचे बढ़ने लगता है। इस वक्त विजय के लण्ड का सुपाड़ा बिल्कुल टीना की चूत पर था।
टीना चाहती थी पापा अपने कपड़ों की दीवार हटा दे। अभी टीना ये सोच ही रही थी की विजय टीना के ऊपर से हट गया और अपनी शर्ट के बटन खोलने लगता है, और फिर पैंट भी उतार फेंकी। सिर्फ अंडरवेर में टीना से लिपट जाता है। टीना की धड़कनें सिसकियों में बढ़ने लगी। विजय टीना को भी नंगी करना चाहता था, तो अपने हाथों से टीना की पैंटी नीचे सरका दी, फिर ब्रा की स्ट्रैप भी खोल दी।
विजय का लण्ड स्टील की रोड की माफिक हो चुका था। टीना को अपनी गाण्ड की दरार में लण्ड का साप-साफ अहसास हो रहा था। विजय तो टीना के साथ इस तरह पेश आ रहा था जैसे ये खेल दोनों बरसों से खेलते आ रहे हैं। पहली बार में इतनी जल्दी लण्ड और चूत मिलन हो जायेगा, ये तो दोनों में किसी ने नहीं सोचा था
चंद मिनटों में दोनों बिल्कुल नंगी अवस्था में एक दूजे से लिपटे हुए लेटे थे। विजय की पोजीशन ऐसी थी की लेटे हए लण्ड सीधा गाण्ड की छेद पर था। टीना को गाण्ड की छेद पर लण्ड होने से फरफरी सी दौड़ने लगी थी। टीना लण्ड को वहां से हटाना चाहती थी, मगर हिम्मत नहीं थी की कुछ बोल सके।
विजय भी जुबान से बिल्कुल खामोश था। मगर विजय के हाथ टीना के जिश्म को सहलाए जा रहे थे। टीना की नंगी चची जैसे ही विजय के हाथों से टकराई. विजय को बडा ही ठोस अहसास हुआ. और विजय गोल- गोल चूचियों को अपने हाथों में भर लेता है। लण्ड का दबाव लगातार गाण्ड की दरार में धंसता जा रहा था. और टीना की सांसें अटकती जा रही थीं, जैसे कोई अनहोनी होने वाली है।
टीना अभी इस बारे में सोच ही रही थी की तभी टीना को अपनी गाण्ड के छेद में अहसहनीय पीड़ा होने लगी। टीना की दर्द भरी चीख निकाल गई- “उईईई... मर गईई...”
विजय के लण्ड का सुपाड़ा बिना चिकनाई के गाण्ड के छेद में घुस गया था। विजय टीना की दर्द भरी चीख से घबरा गया, और फौरन लण्ड को बाहर खींच लेता है, और फिर टीना को अपनी तरफ पलटता है, और टीना के चेहरे को अपने हाथों से सहलाता हुआ कहता है।
विजय- तू ठीक तो है मेरी बच्ची?
टीना- हाँ पापा... मेरी तो जान ही निकलने लगी थी।
विजय- सारी बेटा, मैंने सोचा जब तू नकली लण्ड ले सकती है तो असली भी चला जायेगा।
टीना अपने पापा के मुँह से नकली लण्ड की बात सुनकर फिर खामोश हो गई।
थोड़ी देर बाद टीना अपनी नाइटी उतारकर सिर्फ ब्रा पैंटी में बर्थ-डे केक और गिफ्ट लेकर पापा के रूम में पहुँचती है, और कहती है- “हैपी बर्थ-डे टु यू.. हैपी बर्थ-डे टु यू पापा... हापी बर्थ दे टु पापा..."
विजय- थॅंक यू बेटा।
विजय टीना को इस हालत में देखकर देखता ही रह गया। टीना ने केक और गिफ्ट पापा को पकड़ाया और एक केक का टुकड़ा अपने हाथों से पापा को खिलाया। पापा ने बचा हुआ टुकड़ा टीना को खिला दिया। फिर टीना अपने पापा के सामने सोफे पर बैठ गई। विजय बस टीना को निहारे जा रहा था।
टीना मुश्कुराते हुए- “कैसी लग रही हूँ पापा?"
विजय- बहुत ही खूबसूरत लग रही हो। ऐसा लग रहा है जैसे आसमान से कोई परी आई हो। जी करता है बस इस परी को देखता रहूँ? ना तू कुछ कहे ना मैं कुछ कहूँ।
टीना- अच्छा जी... आज से पहले तो आपने इतनी तारीफ नहीं की।
विजय- पहले कभी इस रूप में देखा भी तो नहीं।
टीना- पापा आपको मेरा ये रूप इतना पसंद है?
विजय- हाँ, इतना पसंद है की मेरा बस चले तो अभी बाँहो में भर लूँ।
टीना कुछ सोचकर फैसला लेती है, और सोफे से उठते हुए लाइट आफ कर देती है। और फिर पापा के बराबर में लेटकर अपनी बाँहे पापा की गर्दन पर लपेट लेती है। विजय भी अपनी बाँहो में टीना को जकड़ लेटा है।
विजय- आहह.. बेटी आई लव यू।
टीना- आई लव यू टू पापा।
फिर विजय में भी हौसला बढ़ जाता है, और अपने हाथों से टीना के जिश्म को सहलाने लगता है। टीना के अंदर भी सेक्स की भूख जागने लगती है, और अपने आपको पापा के जिश्म में समाने को आतुर हो जाती है। विजय धीरे-धीरे हल्के हाथों से टीना के जिश्म को सहलाता हुआ अब टीना के ऊपर आ गया था। टीना की धड़कनें बढ़नी शुरू हो गई। विजय के होंठ बिल्कुल टीना के होंठों के सामने थे। दोनों की सांसें एक दूसरे में घुल रही थीं।
विजय टीना के बालू में अपने हाथ फिराते हुए- “कितने प्यारे होंठ है टीना के... जी करता है इन्हें प्यार कर लूँ.."
टीना की हालत भी कुछ ऐसी ही थी। विजय की कछ ऐसी ही थी। विजय अपने होंठों को टीना के होंठों से लगा देता है, और जाने कितनी देर दोनों बाप बेटी एक दूसरे को लिप-लाक किए पड़े रहे।
विजय के लण्ड में अकड़ाहट बढ़ती जा रही थी, जो टीना की चूत साफ महसूस कर रही थी और टीना की चूत इस वक्त बुरी तरह गीली हो चुकी थी। टीना ने पापा की कमर को जोर से जकड़ लिया। विजय टीना की हालत समझ चुका था, और टीना को चूमता हुआ नीचे बढ़ने लगता है। इस वक्त विजय के लण्ड का सुपाड़ा बिल्कुल टीना की चूत पर था।
टीना चाहती थी पापा अपने कपड़ों की दीवार हटा दे। अभी टीना ये सोच ही रही थी की विजय टीना के ऊपर से हट गया और अपनी शर्ट के बटन खोलने लगता है, और फिर पैंट भी उतार फेंकी। सिर्फ अंडरवेर में टीना से लिपट जाता है। टीना की धड़कनें सिसकियों में बढ़ने लगी। विजय टीना को भी नंगी करना चाहता था, तो अपने हाथों से टीना की पैंटी नीचे सरका दी, फिर ब्रा की स्ट्रैप भी खोल दी।
विजय का लण्ड स्टील की रोड की माफिक हो चुका था। टीना को अपनी गाण्ड की दरार में लण्ड का साप-साफ अहसास हो रहा था। विजय तो टीना के साथ इस तरह पेश आ रहा था जैसे ये खेल दोनों बरसों से खेलते आ रहे हैं। पहली बार में इतनी जल्दी लण्ड और चूत मिलन हो जायेगा, ये तो दोनों में किसी ने नहीं सोचा था
चंद मिनटों में दोनों बिल्कुल नंगी अवस्था में एक दूजे से लिपटे हुए लेटे थे। विजय की पोजीशन ऐसी थी की लेटे हए लण्ड सीधा गाण्ड की छेद पर था। टीना को गाण्ड की छेद पर लण्ड होने से फरफरी सी दौड़ने लगी थी। टीना लण्ड को वहां से हटाना चाहती थी, मगर हिम्मत नहीं थी की कुछ बोल सके।
विजय भी जुबान से बिल्कुल खामोश था। मगर विजय के हाथ टीना के जिश्म को सहलाए जा रहे थे। टीना की नंगी चची जैसे ही विजय के हाथों से टकराई. विजय को बडा ही ठोस अहसास हुआ. और विजय गोल- गोल चूचियों को अपने हाथों में भर लेता है। लण्ड का दबाव लगातार गाण्ड की दरार में धंसता जा रहा था. और टीना की सांसें अटकती जा रही थीं, जैसे कोई अनहोनी होने वाली है।
टीना अभी इस बारे में सोच ही रही थी की तभी टीना को अपनी गाण्ड के छेद में अहसहनीय पीड़ा होने लगी। टीना की दर्द भरी चीख निकाल गई- “उईईई... मर गईई...”
विजय के लण्ड का सुपाड़ा बिना चिकनाई के गाण्ड के छेद में घुस गया था। विजय टीना की दर्द भरी चीख से घबरा गया, और फौरन लण्ड को बाहर खींच लेता है, और फिर टीना को अपनी तरफ पलटता है, और टीना के चेहरे को अपने हाथों से सहलाता हुआ कहता है।
विजय- तू ठीक तो है मेरी बच्ची?
टीना- हाँ पापा... मेरी तो जान ही निकलने लगी थी।
विजय- सारी बेटा, मैंने सोचा जब तू नकली लण्ड ले सकती है तो असली भी चला जायेगा।
टीना अपने पापा के मुँह से नकली लण्ड की बात सुनकर फिर खामोश हो गई।