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टीना लपक कर अपने होंठ समीर के होंठों पर रख देती है, और समीर की आवाज दब जाती है। समीर मस्ती में इब गया। शहद सी मिठाश टीना के होंठों में थी। मगर समीर किरण के डर से अपने होंठ छड़ा लेता है।
समीर- थॅंक यू मेरे घर पर आकर बोलना पड़ेगा।
टीना- जी सरकार।
फिर समीर होटल से खाना लेकर अपने घर पहुँच गया। नेहा को अपने हाथों से खिलाया समीर ने। नेहा भी एक टुकड़ा तोड़कर समीर को खिलाती है। नेहा का प्यार समीर पर बढ़ता जा रहा था।
समीर- एक बात कहूँ नेहा?
नेहा- जी भइया बोलिए।
समीर- दिव्या के चाचा का लड़का राहल तेरे लिए कैसा रहेगा?
नेहा का मूड खराब हो जाता है- “भइया, मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी..."
समीर- देख शादी करके सबको जाना पड़ता है।
नेहा- भइया मुझे अपने से दूर मत करो। मैं आपके बिना नहीं जी पाऊँगी।
समीर- पगली मैं कहां तुझसे दूर रहूँगा। तू एक आवाज देना बस... हमेशा मुझे अपने पास पायेगी। नेहा समीर की बाँहो में समा जाती है।
समीर- पहले ठीक से खाना खा ले, फिर आराम से गोद में बैठ जाना।
नेहा- आई लव यू भइया।
समीर- लव यू टू।
नेहा को जाने क्या हुआ की एक पल में अपनी टी-शर्ट उतार दी और अंदर बिन ब्रा की चूचियां आजाद हो गई। समीर कुछ समझ ना पाया की नेहा अब क्या चाहती है। नेहा समीर का हाथ पकड़कर खड़ा करती है और समीर की भी शर्ट उतार देती है। दोनों टापलेश हो गये। और नेहा ने अपनी छाती समीर की छातियों से मिला दी और समीर को जोर से भींच लिया।
समीर का लण्ड पहले से खड़ा था। नेहा की बाँहो में आने से और अकड़ गया, और कपड़ों के ऊपर से ही नेहा की चूत में घुसने की कोशिश कर रहा था।
नेहा- भइया इससे क्या हुआ?
समीर- तुझे फिर प्यार करना चाहता है।
नेहा- तो आपने इस बेचारे को कैद क्यों किया है?
समीर- कहीं हमारी नाजुक सी कली को फिर ना जख्मी कर दे इसलिए?
नेहा- “भइया अब ये नाजुक कली फूल बन चुकी है। चलिये बाहर निकालिये इसे, और जो ये चाहता है करने दो इसे..” कहकर नेहा समीर के बाकी कपड़े भी उतार देती, फिर अंडरवेर नीचे खींचती चली गई। लण्ड स्प्रिंग की तरह लहराता बाहर आ गया। नेहा ने अपने हाथों में पकड़ लिया।
समीर सोचता है- “पहले कितना डरती थी देखकर ही, आज तो हाथ में भी थाम लिया..."
समीर- “अब तो नेहा बड़ी बहादुर हो गई है। क्या अब डर नहीं लग रहा?"
नेहा- "जब प्यार किया तो डरना क्या?" कहकर नेहा ने गप्प से आधा लण्ड मुँह में भर लिया और अंदर-बाहर करके चूसती रही। समीर को इतना मजा आज तक किसी ने नहीं दिया, जो मजा नेहा से मिल रहा था।
समीर- “आअहह... इसस्स्स... ऐसे ही चूसती रहो बहना मजा आ रहा है आह्ह... हाई उम्म्म्म
..."
नेहा समीर को कितना मजा देना चाहती थी। समीर भी नेहा का अपने लिए प्यार देखक श हो रहा था। समीर का जोश बढ़ता जा रहा था नेहा के इस तरह चूसने से। 10 मिनट ऐसे ही चूसने के बाद समीर का लण्ड स्टील रोड की तरह बन चुका था। समीर ने एक मिनट और लण्ड बाहर नहीं निकाला तो पानी का सैलाब आ जायेगा। ये सोचते हुए जल्दी से समीर ने एक झटके से अपना लण्ड बाहर खींच लिया। पुच्च की आवाज से साथ लण्ड बाहर आ गया।
समीर अब अपना लण्ड चूत में डालना चाहता था। मगर फिर सोचकर नहीं डालता। शायद समीर नेहा से खुद कहलवाना चाहता था। इसलिये नेहा को उठाकर बेड पर लिटाया और नेहा की टाँगें फैला दी। चूत एकदम हसीन लग रही थी। अब तो चूत के होंठ भी बाहर को निकल आए थे। चूत की झिरी भी बड़ी हसीन लग रही थी। समीर का लण्ड तो यही चाहता था की मैं घुस जाऊँ। मगर समीर चूत पर अपने होंठ टिका देता है।
नेहा तड़प उठती है। इस बार जो फीलिंग आ रही थी चुसवाने में वो पहली बार से भी कई गुना ज्यादा आई। नेहा का मजा अब कई गुना बढ़ गया। समीर के इतने प्यार से चूसने से नेहा तो इस प्यार में पूरी डूब चुकी थी।
नेहा- "अहह... अहह... अहह... सस्स्स
..."
समीर- थॅंक यू मेरे घर पर आकर बोलना पड़ेगा।
टीना- जी सरकार।
फिर समीर होटल से खाना लेकर अपने घर पहुँच गया। नेहा को अपने हाथों से खिलाया समीर ने। नेहा भी एक टुकड़ा तोड़कर समीर को खिलाती है। नेहा का प्यार समीर पर बढ़ता जा रहा था।
समीर- एक बात कहूँ नेहा?
नेहा- जी भइया बोलिए।
समीर- दिव्या के चाचा का लड़का राहल तेरे लिए कैसा रहेगा?
नेहा का मूड खराब हो जाता है- “भइया, मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊँगी..."
समीर- देख शादी करके सबको जाना पड़ता है।
नेहा- भइया मुझे अपने से दूर मत करो। मैं आपके बिना नहीं जी पाऊँगी।
समीर- पगली मैं कहां तुझसे दूर रहूँगा। तू एक आवाज देना बस... हमेशा मुझे अपने पास पायेगी। नेहा समीर की बाँहो में समा जाती है।
समीर- पहले ठीक से खाना खा ले, फिर आराम से गोद में बैठ जाना।
नेहा- आई लव यू भइया।
समीर- लव यू टू।
नेहा को जाने क्या हुआ की एक पल में अपनी टी-शर्ट उतार दी और अंदर बिन ब्रा की चूचियां आजाद हो गई। समीर कुछ समझ ना पाया की नेहा अब क्या चाहती है। नेहा समीर का हाथ पकड़कर खड़ा करती है और समीर की भी शर्ट उतार देती है। दोनों टापलेश हो गये। और नेहा ने अपनी छाती समीर की छातियों से मिला दी और समीर को जोर से भींच लिया।
समीर का लण्ड पहले से खड़ा था। नेहा की बाँहो में आने से और अकड़ गया, और कपड़ों के ऊपर से ही नेहा की चूत में घुसने की कोशिश कर रहा था।
नेहा- भइया इससे क्या हुआ?
समीर- तुझे फिर प्यार करना चाहता है।
नेहा- तो आपने इस बेचारे को कैद क्यों किया है?
समीर- कहीं हमारी नाजुक सी कली को फिर ना जख्मी कर दे इसलिए?
नेहा- “भइया अब ये नाजुक कली फूल बन चुकी है। चलिये बाहर निकालिये इसे, और जो ये चाहता है करने दो इसे..” कहकर नेहा समीर के बाकी कपड़े भी उतार देती, फिर अंडरवेर नीचे खींचती चली गई। लण्ड स्प्रिंग की तरह लहराता बाहर आ गया। नेहा ने अपने हाथों में पकड़ लिया।
समीर सोचता है- “पहले कितना डरती थी देखकर ही, आज तो हाथ में भी थाम लिया..."
समीर- “अब तो नेहा बड़ी बहादुर हो गई है। क्या अब डर नहीं लग रहा?"
नेहा- "जब प्यार किया तो डरना क्या?" कहकर नेहा ने गप्प से आधा लण्ड मुँह में भर लिया और अंदर-बाहर करके चूसती रही। समीर को इतना मजा आज तक किसी ने नहीं दिया, जो मजा नेहा से मिल रहा था।
समीर- “आअहह... इसस्स्स... ऐसे ही चूसती रहो बहना मजा आ रहा है आह्ह... हाई उम्म्म्म
..."
नेहा समीर को कितना मजा देना चाहती थी। समीर भी नेहा का अपने लिए प्यार देखक श हो रहा था। समीर का जोश बढ़ता जा रहा था नेहा के इस तरह चूसने से। 10 मिनट ऐसे ही चूसने के बाद समीर का लण्ड स्टील रोड की तरह बन चुका था। समीर ने एक मिनट और लण्ड बाहर नहीं निकाला तो पानी का सैलाब आ जायेगा। ये सोचते हुए जल्दी से समीर ने एक झटके से अपना लण्ड बाहर खींच लिया। पुच्च की आवाज से साथ लण्ड बाहर आ गया।
समीर अब अपना लण्ड चूत में डालना चाहता था। मगर फिर सोचकर नहीं डालता। शायद समीर नेहा से खुद कहलवाना चाहता था। इसलिये नेहा को उठाकर बेड पर लिटाया और नेहा की टाँगें फैला दी। चूत एकदम हसीन लग रही थी। अब तो चूत के होंठ भी बाहर को निकल आए थे। चूत की झिरी भी बड़ी हसीन लग रही थी। समीर का लण्ड तो यही चाहता था की मैं घुस जाऊँ। मगर समीर चूत पर अपने होंठ टिका देता है।
नेहा तड़प उठती है। इस बार जो फीलिंग आ रही थी चुसवाने में वो पहली बार से भी कई गुना ज्यादा आई। नेहा का मजा अब कई गुना बढ़ गया। समीर के इतने प्यार से चूसने से नेहा तो इस प्यार में पूरी डूब चुकी थी।
नेहा- "अहह... अहह... अहह... सस्स्स
..."