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Incest चक्रव्यूह

“ एक बात बताओ, 3 दिन पहले तक सब कुछ नॉर्मल था. फिर ऐसा क्या हुआ जो तुमने अपनी ही मा को चोद डाला.” मॉम ने पूछा.

“मॉम..” मैं जवाब देने लगा तो वो बात काटते हुए बोली, “जब एक शादीशुदा औरत अपने पति क अलावा किसी दूसरे से संबंध बनती है तो वो सिर्फ़ एक रंडी होती है सिर्फ़ एक कुतिया. इसलिए मुझे अबसे वही बुला”

“लेकिन रंडी तो वो होती है जो कई लोगो से सेक्स करती हो, तुमने अब तक कितने…”

“ मादर चोद, नेवेर अस्क एनी वुमन ओर गर्ल दिस क्वेस्चन. नोट ईवन युवर वाइफ. अब तुम मुझे बताओ की तुम्हे अपनी मा को चोदने का आइडिया किसने दिया.”

“ओके तो सुन मेरी प्यारी कुतिया…” फिर मैने उसे शुरू से लेकर अब तक के सारे इन्सिडेंट्स बता दिए.

“तो अब आगे क्या” मॉम ने पूछा.

“अगर तुम साथ दो तो…” मैं हिचकते हुए बोला

“जो तुम चाहो, जैसे तुम चाहो”

“मैं तुझे और ममता को एक साथ चोदना चाहता हूँ, बल्कि मैं चाहता हूँ जब मैं ममता को चोदु तो साथ ही तुम भी सुनील से चुदवाओ. साथ ही मैं नेहा को भी चोदना चाहता हूँ.” मैने सब उगल दिया.

कुछ पल सन्नाटा. फिर कुछ सोचते हुए वो बोली, “सुनील का लंड कैसा है.” साथ ही मेरा लंड मुट्ठी मे पकड़ के सहलाने लगी. मैने खुशी के मारे उसे किस किया और बोला “ कुतिया, उसका भी मेरे जैसा है, वो भी तुझे जमकर चोदेगा..”

“ओके देन, बुला लेंगे उन्हे किसी दिन मौका देख कर. अभी तो तू एक ट्रिप और लगा” बोलकर कर मुझे कस कर चिपका लिया. मैने भी अपने फिर खड़े हो चुके लौड़े को उसकी बुर में घुसा कर फिर धक्के स्टार्ट कर दिए.

“ओह राजा ज़ोर ज़ोर से मारो मेरी बुर ..आ बहुत मज़ा आ रहा है… कल रात जब तूने मुझे नंगा किया तभी अपना लॉडा मेरी बुर मे क्यू नही पेल दिया. आ… आ… ”

नाउ वी वर क्लिमॅक्सिंग. हमने एक दूसरे को कस के खुद से जकड़ लिया था. धक्को से पूरा बेड हिल रहा था. उसने अपनी टांगे मेरी कमर के गिर्द लपेट ली और लगी झरने. मैने उसकी बुर में अपना माल छोड़ दिया. हम कुछ देर ऐसे ही चिपके रहे, एक दूसरे को चूमा, कुछ देर एक दूसरे को सहलाया.

“रंडी, कैसा लगा मेरा लंड ? खुश किया या नही..?”
 
“यस, राजा, यूं आर गुड. पुट ओं सम मोर वेट फिर कोई भी औरत तेरे नीचे आएगी तो मस्त हो जाएगी.” वो बोली और उठ क जाने लगी “नाउ आई विल गो.”

“साली, यहीं सो जा ना. पूरी रात झप्पी डालके सोएंगे.”

कपड़े पहन कर उसने मेरे लंड पर किस किया और बोली “ कल फिर चोद लेना अपनी कुतिया को और हाँ सुबह झरना की चूत ज़रूर मारना, मैं बाहर से चुपके से देखूँगी.” फिर वो अपने रूम मे चली गयी और मैं घोड़े बेच कर सो गया.

अगले दिन सुबह मैं झरना का इंतज़ार कर रहा था, जब वो मेरे रूम मे मे आई मैने तुरंत जाकर उसे पीछे से जकड़ लिया, अपना लंड बाहर निकाल के उसकी गान्ड पर रगड़ने लगा.

“कुतिया अब इसे बर्दाश्त नही हो रहा अब चोदने दे ना.”

वो मेरा लंड हाथ मे लेकर मुठियाते हुए बोली “थोड़ा सबर कर राजा, मुझे भी तेरा ये लंड बहुत भा गया है. अभी तेरी मा नहाने जाएगी तो मैं आउन्गी, फिर जो चाहे कर लेना” बोलकर फटाफट अपने काम मे लग गयी. तकरीबन आधे घंटे बाद वो आके सीधे मेरे बेड पर लेट गयी और बोली, “राजा, तेरी कुतिया बहुत भूखी है…. जल्दी ठंडा कर…”

मैने झटपट दोनो के कपड़े उतारे और उसपे पिल गया, पापा ऑफीस और दी अपने कॉलेज के लिए निकल चुके थे. मॉम खुद छिप कर हमारी चुदाई देख रही होंगी सो डर कोई था नही इसलिए मैं ज़्यादा ही अग्रेसिव हो रहा था.

“कुतिया चल जल्दी से पोज़िशन ले, आज तेरा कुत्ता तुझे चोदेगा.”

मैं किसी तरह के फोरप्ले मे ना पड़कर सीधे उसे कुतिया बना कर चोदने लग गया. दोनो हाथ उसकी चुचियो पर कसे हुए थे. दो तीन धक्को मे ही पूरा लंड उसकी चूत मे उतार दिया. फिर ढकधक पेलने लग गया.

“बेटा इतनी जल्दी क्या है, कौन सी तेरी ट्रेन छूटी जा रही है.” मॉम पीछे से बोली. मा की आवाज़ सुनकर झरना मेरे नीचे से निकलने की कोशिश करने लगी, तो मॉम ने उसका कंधा दबाते हुए कहा, “कुतिया अब तो तूने पूरा लॉडा अंदर ले ही लिया है तो पूरा मज़ा ले ले पहले चुदाई का.”

झरना से पहले मैने दो ही चुते मारी थी, ममता और मंजू (मॉम) की, दोनो ही लेट 30स मे थी. उनकी तुलना मे झरना की 24 साल की उफनती जवानी का अलग ही मज़ा आ रहा था. अभी ज़्यादा टाइम नही हुआ था उसकी शादी को तो चूत एकदम कसी हुई थी. उसमे लंड चलाने मे अलग ही मज़ा आ रहा था. मैने धक्के लगाते हुए मॉम की और देखा, वो बाथरूम से ही आई थी और बस एक टवल मे थी. मैं मॉम से बोला, “साली कुतिया तू तो नहाने गयी थी, इतनी जल्दी बाहर कैसे आ गयी”

झरना नाराज़गी दिखाती हुई बोली, “राजा मा को गाली तो मत दो.”

मॉम, “झरना जैसे तुझे पसंद है.. मैं भी चाहती हूँ कि कोई मुझे भी कुतिया बोले, खूब गाली दे… मैं भी अभी की तरह तुझे कुतिया ही बुलाउन्गी … ये सब बस हम तीनो क बीच रहेगा”

इस बीच मेरे धक्के बदस्तूर जारी थे. मैने मॉम को इशारे से अपने पास बुलाया और पकड़ के उनका टवल खींचना चाहा तो वो पीछे हट गयी. मैं बोला “कोई कुतिया कभी कपड़े नही पहनती, तू भी ये टवल उतार. तेरी बुर और चुचियाँ देखते हुए इसे चोदूगा तो और मज़ा आएगा”

झरना फिर नाराज़गी भरी आवाज़ मे, “राजा, मैं तो तुझसे चुदवा रही हूँ….मा को एसा नही बोलना चाहिए, मा को नंगा नही देखना चाहिए…”

मैं उसे अनसुना कर के मॉम से बोला “कुतिया, तेरी चुचि और चूत ज़रूर बहुत मस्त होगी..खोल ना.. पापा और दी को नही पता चलेगा….रंडी, कुतिया दिखा दे अपनी जवानी .”

“कुतिया जो बोलेगी सब करूँगा, रात दिन तेरी बुर चाटूँगा, गान्ड चाटूँगा, अपना माल दिखा दे…”

झरना ने आँखे बंद कर ली, इन नंगी बातो से वो और भी एग्ज़ाइटेड होके अपने होंठ काट रही थी और पोज़िशन बदलते हुए वो मिशनरी स्टाइल मे चुदवाने लगी. दोनो टाँगों को फैला कर दोनो बाजुओ मे मुझे जकड़ रक्खा था.

जोश मे झरना मॉम से बोली “कुतिया, हरामी बेटा इतना खुशामद कर रहा है तो दिखा दे अपनी जवानी बेटे को…बहुत मस्त चुदाई कर रहा है , रंडी तू भी चुदवा ले कुतिया अपने बेटे से…”

मैं मॉम से “मेरी प्यारी कुतिया, नखरा क्यो कर रही है, चोदूगा नही, टच भी नही करूँगा..बस खोलकर खड़ी हो जा कुतिया…”

इस बार मॉम खड़ी हुई और एक झटके मे टवल उतार फेंक दिया, अब वो नंगी मेरे सामने खड़ी थी और मैं जोश मे दाँत भींचे हुए पूरे ज़ोर से झरना की चूत फाड़ रहा था.

“अफ कुतिया, क्या मस्त चिकनी चूत और कड़क कड़क चुचि है..”
 
वी बोथ साइड टुगेदर आंड देन किस्ड पॅशनेट्ली फॉर फ्यू मिनिट्स. व्हेन वी ओपंड और आइज़ वी सॉ दट मदर हॅज़ डिसपीयर्ड. उसे देखते हुए मॉम को चोदने का मज़ा ही कुछ और था. अफ …. मैं झड़ने लगा. मैने अपना पूरा लोड झरना की चूत मे खाली कर दिया. थक कर मैं बेड पर गिर गया.

झरना अपनी सांसो को संहालते हुए बोली,“वाह राजा मज़ा आ गया, पता है ये कुतिया आज पहली बार एक ही चुदाई मे तीन बार झड़ी है”

.........................

दिन की शुरुआत चुदाई से हुई थी. मैं जब कुछ देर बाद संभला तो फील हुआ कि मैं रूम मे अकेला था. नहा धो के मैं रूम से निकला, ब्रकेफ़स्ट करने मैं लॉबी मे जा ही रहा था की मेरे मोबाइल की बेल बजी.

“हेलो” मैने फोन पिक किया.

“हेलो हीरो, क्या हो रहा है” उधर से ममता की आवाज़ आई.

“बस तुम्हे ही याद कर रहा था”

“रहने दे झूठे तभी 3 दिन से फोन तक नही किया”

“ऐसी बात नही, मैं तुम्हे मिलकर बताता हूँ”

“तो आजा फिर मैं इंतज़ार कर रही हूँ”

“ओके आई एम कमिंग”

मैने नाश्ता करके मॉम के पास किचन मे गया और उन्हे किस करते हुए बताया मैं सुनील के घर जा रहा हूँ, शाम को देर से आउन्गा शायद और सुनील के घर के लिए निकल गया.

रास्ते मे ही ममता का फिर फोन आया की पहुचे नही अब तक तो मैने बताया की ऑटो मे ही हूँ बस थोड़ी देर मे पहुच रहा हूँ. जब उसके घर पहुचा तो डोर ममता ने ही खोला.

“और मेरी जान क्या हो रहा है” मैं बोला.

“बस जल रही हूँ उस आग मे जो तू जला के छोड़ गया था”

“क्या बात बड़े मूड मे है” मैने अंदर आके उसकी चुचि मसलते हुए कहा.

आह… वो आ भरती हुई बोली “कमीने थोड़ा सब्र कर ले कहीं भाग नही रही मैं”

घर मे शायद वो अकेली थी तो मैने पूछा, “घर पे कोई नही है क्या.”

“ना रे, सुनील अपने मामां के यहाँ गया है और शीतल और ईशा स्कूल. हम भी शीतल और ईशा के एग्ज़ॅम्स ख़त्म होते ही जाएँगे वहाँ.”

“क्या? वापसी कब होगी” मैने सोफे पर बैठते हुए पूछा

“20-25 दिन तो रुकेंगे ही वहाँ” जवाब मिला. तो मैने उसे अपने बगल मे खींच लिया.

“मैं तो तुम्हे और सुनील को बुलाने आया था अपने घर” फिर मैने उसके बदन सहलाते हुए अब जो पिछले 3 दिन मे हुआ सब बताया, फिर उसे अपनी फोरसम की फॅंटेसी भी बताई.

“सॉरी मेरे राजा अब तो ये सुनील और मेरे वापस आने के बाद ही पासिबल है. अभी तो तू मेरी आग बुझा”
 
बस फिर क्या था, मैं सोफे से उठा उसे अपनी बाहों मे लिया और बेडरूम मे ले गया. उसे बेड पर लिटाते हुए उसके नरम गुलाबी होंठो पर अपने होंठ टिका दिए कुछ ही देर मे हम पागलो की तरह एक दूसरे के मुंह मे जीभ डाले हुए बड़े ही जुनूनी अंदाज़ मे एक दूसरे को किस कर रहे थे. किस करते हुए ममता एक हाथ से मेरा लंड मसल रही थी और मैं दोनो हाथों से जैसे उसकी चुचियाँ निचोड़ रहा था. कुछ ही देर मे उसने मुझे छोड़ कर मेरी टी शर्ट उतार दी और मेरी छाती पर जगह जगह किस करते हुए मेरे दोनो निपल चूसने लगी. वो ट्राउज़र के उपर से ही मेरा लंड मसले जा रही थी. मैं उसे अलग करते हुए अपनी पेंट उतार फेंकी. वो मुस्कुराती हुई खड़ी हो गयी और बड़ी ही अदा से अपने कपड़े उतारने लगी.वो शायद मुझे ये स्ट्रीप शो का मज़ा देना चाहती थी, हवा मे किस्सस देते हुए बड़े ही मादक अंदाज मे एक एक कर के अपने कपड़े निकाल रही थी. और मैं ये शो एंजाय कर रहा था. कुछ ही देर मे वो पूरी न्यूड मेरे सामने खड़ी थी

मुझे बेड पर धकेलते हुए उसने मेरा लंड मूह मे भर लिया और आइस क्रीम की तरह चुसते हुए मुझे ब्लोवजोब देने लगी. मैं उसकी नंगी चुचिया मूह मे भर कर चूसने लगा. थोड़ी देर मे मुझे लगा की मैं छूटने वाला हूँ तभी उसने मेरा लंड छोड़ दिया. मैने उसे खुद पर लिटाते हुए पलट कर अपने नीचे ले लिया. उसकी पूरी बॉडी मैं चाटने लगा. चाट ते हुए मैने उसकी चूत पर होंठ टिका दिए, मैने दोनो हाथों से उसकी चूत को फैलाते हुए उसकी चूत के दाने को मूह मे भर लिया. अब तक के हर सोर्स से मिले सेक्स क तरीकों को उसके उपर आज़मा रहा था. अब बात मेरे बर्दाश्त से भी बाहर हो रही थी सो पीछे हटते हुए मेने अपना तना हुआ लंड उसकी चूत मे पेल दिया. और फिर कर दी रेलगाड़ी शुरू. उसके उपर लेटे हुए मैने उसके कान की लौ कोमुह मे भर कर चूसने लगा. वो मासी क मारे ज़ोर से सीत्कार कर उठी. कुछ ही देर मे हम दोनो झड् गये और इतना झाडे क निढाल होकर बेड पर पस्त हो गये.

वो मेरी छाती पर सिर रखकर बोली “इट वाज़ माइ सेक्स एक्सपीरियेन्स सो फर” फिर मेरे लंड पर झुक कर किस करते हुए वो खड़ी होकर कपडे पहनने लगी. मैं भी अपने कपड़े पहन रहा था तभी मुझे ऐसा लगा कि बेडरूम क दरवाजे पर कोई है. मैने तेज़ी से उठकर दरवाजे से बाहर झाँका पर वहाँ कोई नही था.

तभी ममता ने मुझे पुकारा, “अभी, जान इधर आओ” वो कपबोर्ड खोले खड़ी थी. ‘ये रखो’ कहते हुए उसने मुझे कुछ नोट पकड़ा दिए. मैने हैरान होते हुए पूछा ये किसलिए. तो वो बोली “जान मुझे अच्छा नही लगा कि तुम ऑटो मे आते हो, पर्चेस आ बाइक फॉर यूं”

“मैं ये कैसे ले सकता हूँ… तुम मुझे…”

“बस.. मैं कुछ नही सुनूँगी, चुपचाप रख लो”

मैने फिर भी मना किया पर वो नही मानी तो मुझे वो जेब मे रखने पड़े.” फिर आने का वादा कर के मैं घर लौट आया.
 
पिछले एक हफ्ते मे मेरी लाइफ बहुत बदल गयी थी. कहाँ छड़ों की जिंदगी और कहाँ अब 3 – 3 चुते मेरे लिए जब चाहूँ तब अवेलबल थी. अपनी तो निकल पड़ी. मॉम और झरना के साथ तो रोज़ मज़े लेता ही था, हफ्ते भर मे 2 बार ममता को भी चोद आया था. फिर ममता की बेटियो के एग्ज़ॅम्स ख़तम हो गये तो वो उन्हे लेकर अपने मायके चली गयी (सुनील पहले ही वहाँ गया हुआ था). इधर नेहा की भी छुट्टियाँ शुरू हो गयी थी. तो थोड़ा सेक्स कम हो गया.

इस बीच हमारी कॉलोनी की क्रिकेट टीम, जिसका मैं भी मेंबर था, सबने बाहर घूमने का प्रोग्राम बनाया. तो मैं भी उनके साथ घूमने निकल गया, 10 दिन का मजेदार ट्रिप था. वापसी मे मैं वही पास के सिटी मे अपनी बुआ के यहाँ रुक गया, क्योकि उनका बार बार फोन आ रहा था.

लगभग 15 दिन बाद सनडे के दिन मैं घर वापस पहुचा, अपने घर के बाहर एक लग्षुरी कार खड़ी देखकर चौंका. मैं जैसे ही मैं डोर पर पहुचा तो अंदर से सुनील के पापा निकल रहे थे, उनके पीछे पापा और मॉम खड़े थे.

“ओह हाय अभी हाउ आर यूं?”

“फाइन अंकल, आप यहाँ कैसे ?”

“बस तुम्हारे पापा से कुछ अफीशियल काम था. चलता हूँ अभी फिर आउन्गा” अलग ही ढंग से मुस्कराते हुए उन्होने जवाब दिया.

“ओके अंकल बाइ” उन्हे विश करता हुआ मैं घर मे घुसा.

सबसे मिला…पतानही क्यू मुझे मॉम डॅड के बिहेवियर मे कुछ अजीब सा लग रहा था. बट मैने इग्नोर कर दिया.

कुछ रेस्ट कर के मैं शाम क समय लॉबी मे आया तो मॉम किचन मे लगी हुई थी पर बाकी शायद कोई घर मे नही था. मैं मौका देख कर सीधा किचन मे घुस गया और जाकर मॉम को बाँहो मे भर लिया.

मे - “और मेरी कुतिया, याद आई मेरी”

अपनी नाक उसके बालो मे रब करते हुए मैं बोला “आज रात सारी कसर पूरी कर दूँगा”

मॉम को कोई हरकत ना करता देख और ना ही कुछ जवाब मिलता देख मैं बोला, “क्या हुआ मेरी रानी, जवाब क्यू नही दे रही”

जैसे ही मैने उसकी चुचियो को हाथ मे भरा उसने कोहनी के ज़ोर से मुझे पीछे धकेल दिया. मैने पीछे से एक हाथ से उसकी गान्ड मसलते हुए कहा, “क्या हुआ जानू, नाराज़ हो क्या, इतने दिन लगा दिए मैने इसलिए”

तभी अचानक वो पलटि और रख के तमाचा जड़ दिया मेरे गाल पर.

मैं अवाक एक हाथ अपने गाल पर रखे हुए उसका चेहरा देख रहा था. उसके तमाचे से ज़्यादा मुझे उसके आँसू दर्द दे रहे थे.

“क….. क… क्यों…” बस यही मेरे मूह से निकला.
 
मैं अवाक से एक हाथ अपने गाल पर रखे हुए उसका चेहरा देख रहा था. उसके तमाचे से ज़्यादा मुझे उसके आँसू दर्द दे रहे थे.

“क….. क… क्यों…” बस यही मेरे मूह से निकला.

वो कुछ ना बोली, बस रोती हुई अपने रूम मे चली गयी.

मैं सोच मे डूबा हुआ अपने रूम मे आ गया. बाकी का दिन ऐसे ही निकल गया.

अगले दिन सुबह झरना काम करने मेरे रूम मे आई तो मुझे देख मुस्काराई पर मेरा मूड अभी भी ऑफ था. मैने उसे पूछा, “कुतिया एक बात बता, मेरे पीछे घर पे क्या क्या हुआ”

“कुछ ख़ास नही राजा”

कुछ तो हुआ है, शायद इसे नही पता, मैने मन मे सोचा. वो मेरे सामने झुक के अपनी चुचिया दिखाती हुई आती है तो मेरा भी मन मचल जाता है और मैं उसको पकड़ के उसकी चुचिया मसलते हुए एक ज़ोरदार स्मूच मारा. फिर मॉम का ध्यान आते ही उसे छोड़ दिया.

घर के माहौल मे एक अज़ीब सी तल्खी थी, मैं मॉम से बात करना चाहता था पर कर नही पा रहा था. आख़िरकार हिम्मत जुटा कर मैने मॉम को जब अकेला देखा तो पूछ ही लिया, “मॉम प्लीज़ बताओ क्या हुआ है, क्या मुझसे कोई ग़लती हो गयी है या कुछ और बात है प्लीज़ बताओ?”

मॉम की फिर रुलाई फुट पड़ी, “सॉरी बेटा मैं तुझे मारना नही चाहती थी पर उसका गुस्सा तुझ पर उतर गया…. सॉरी”

“मा पहले बैठो तुम” मैने उन्हे सोफे पर बिठा कर पानी पिलाया फिर पूछा “अब मुझे बताओ तो हुआ क्या है”

“सुनील के पापा जो कल आए थे वो किसी अफीशियल काम से नही आए थे”

“फिर…”

“तेरे जाने के चार दिन बाद जब रात को तेरे पापा घर आए थे वो बहुत टेन्स थे, बहुत पूछने पर उन्होने बताया की ऑफीस मे वो एक झूठे रिश्वत के केस मे फस गये हैं.” मॉम ने सुबक्ते हुए बताया

“ओह्ह्ह गॉड … फिर पापा ने क्या किया”

“उन्होने कई बार सफाई दी पर कोई फ़ायदा नही हुआ. लास्ट मे उन्होने डाइरेक्ट उस पार्टी से मिलने की सोची तो वो उसके ऑफीस मे गये. वो कोई और नही सुनील के पापा थे. बहुत मिन्नतें करने के बाद वो एक शर्त पर कंप्लेंट वापस लेने पर राज़ी हुए”

“कैसी शर्त”

“ .. वो.. वो मेरे साथ सेक्स करना चाहते थे”

“पर वो…. ऐसे कैसे…. उन्होने तुम्हे कब……… यार जहाँ तक मैं जानता हूँ वो तो तुमसे मिले भी नही हैं.” मैने परेशान होकर पूछा

“तेरे कारण” मॉम ने सपाट लहजे मे जवाब दिया. “उन्हे तेरे और अपनी पत्नी के रिश्तों के बारे मे पता है”

एक बॉम्ब सा फूटा मेरे उपर.

मॉम बोली “उन्होने तुझसे बदला लेने के लिए तेरे पापा को इस झूठे केस मे फसाया”

मैं खुद को टूटते हुए महसूस कर रहा था, मुझे एहसास नही था की इसकी ये कीमत मुझे चुकानी पड़ेगी. तभी मुझे याद आया जो मैने उस दिन ममता क बेडरूम क बाहर आहट सुनी थी वो मेरा वहम नही था.

कुछ देर वैसे ही सन्नाटा रहा. फिर मैने टूटते लहजे मे मॉम से पूछा “फ़ि.. फिर आ.. आप लोगो ने क.. क.. क्या किया”

“हुहह… क्या करते अगर ना बोलती तो ना सिर्फ़ तेरे पापा की जॉब जाती बल्कि जैल भी हो सकती थी…” मॉम ने ठंडी साँस छोड़ते हुए कहा “तबसे वो 3 -4 बार आ चुके हैं”

मैं अपनी आँखो से बहते आँसू भी नही रोक पा रहा था.

दर्द भारी आवाज़ मे बोला, “आपने मुझे बताया क्यू नही”

“उससे क्या होता. वैसे भी उसने ये सब तुझे बताने से मना किया था सब तुझे बताने से मना किया था. ये सब मैने तेरे पापा को भी नही बताया.”

“मतलब”

“उसने ये सब बाते जब मुझसे अकेले मे की तब वहाँ तेरे पापा नही थे”

“सॉरी मा… मेरी वजह से…” मैं रो पड़ा.

“संभाल खुद को… अभी तो हमे और भी बहुत सहना है शायद.”

मैं अपना मूह उठाकर मा की ओर देखने लगा.

मॉम फिर बोली, “कल वो ये कहकर गया है की नेहा को वो अपनी सेक्रेटरी बनाना चाहता है, मैं जानती हूँ उसकी नियत नेहा पर भी खराब है”

मेरे होश ओ हवास गुम थे. नेहा के बारे मे सुनकर मैं जड़ हो गया था.

मॉम- “फिलहाल तो मैने नेहा के रिज़ल्ट्स के बहाने उसे टाल दिया है, पर….”

मैं खुद को किसी चक्रव्यूह मे फसा हुआ बेबस सा फील कर रहा था.
 
मैं दुख से ज़्यादा शरम महसूस कर रहा था. तभी अपने पीछे एक आहट सी सुनकर मैने और मॉम ने पलटकर देखा तो दोनो शॉक्ड रह गये. पीछे नेहा खड़ी थी, पता नही कब वो आई थी.

शायद नेहा ने सब कुछ सुन लिया था, उसका चेहरा अवाक था और आँखों से आँसू बह रहे थे. उसके हसीन मुखड़े पर दर्द देखकर मुझे अपना दिल फट ता हुआ लगा. मॉम भी सन्न रह गयी थी, दर्द से भरे आँसू बहाते हुए वो बस नेहा को देखे जा रही थी.

खामोसी तोड़ते हुए मैं बोला, “न… नेहा दी, .. डॉन’ट वरी दी मैं ऐसा कुछ नही होने दूँगा दी, म.. मैं सब ठीक कर दूँगा” मैं आगे बढ़कर उनका हाथ थामने लगा.

चटाआक… नेहा ने तुरंत एक थप्पड़ जड़ दिया मेरे गाल पर और रोते हुए अपने कमरे मे भाग गयी.

मैं बस खुद मे बुदबुदा रहा था, “नही मैं ऐसा नही होने दूँगा”

मैं तुरंत उठा और सबसे पहले ममता को फोन लगाया पर उसका नंबर आउट ऑफ कवरेज था फिर मैने सुनील को फोन लगाया.

“हेलो” सुनील की आवाज़ आई.

अभी- “ सुनील, यार यहाँ एक बड़ा मसला हो गया है”

सुनील- “आबे ऐसा क्या हो गया”

फिर मैने उसे सारी बात बताई वो चुपचाप सुनता रहा. मेरी बात ख़तम होने पर भी उसने कोई जवाब नही दिया तो मैने बोला, “यार क्या हुआ तू कुछ बोल क्यू नही रहा. ये सब रोकना होगा, तुझे अपने पापा से बात करनी होगी.”

सुनील- “देख यार ये थोड़ा मुश्किल है”

अभी-“मतलब”

सुनील- “जैसा की तू बता रहा है मेरे पापा को तेरे और मॉम के बारे मे पता चल गया है, पर अभी शायद उन्हे मेरे इस सब मे इन्वॉल्व होने का पता नही है, ऐसे मे तो तू ही बता मैं इस मसले पर उनसे खुल के बात कैसे करू जबकि मेरी वैसे ही उनसे फट ती है”

“तो अब मैं क्या करू”

“मेरी मान तू अपनी मॉम को साथ लेके खुद जा के पापा से मिल के सॉरी बोल, शायद वो मान जाए और ये सब रोक दे”

“पर….” मैं कुछ बोलते हुए रुक गया.

फोन काटने के बाद मैं कुछ देर मैने तसल्ली से सोचा फिर मैं खुद प्रेम अंकल से मिलने चल पड़ा.
 
मैं प्रेम अंकल के ऑफीस पहुचा तो वो अपने कॅबिन मे ही थे.

मैं बोला, “हेलो अंकल”

“ओ हेलो अभी, कैसे हो ?” उनकी आवाज़ मे एक व्यंग सा था.

“अंकल मैं आपसे कुछ बात करना चाहता हूँ”

“बोलो”

“अंकल मैं… आप… आक्च्युयली मैं आपसे माफी माँगने आया हूँ.” मन पक्का करते हुए मैने बोला. “जो कुछ भी मेरे और आंटी के बीच हुआ….. उसके लिए.”

प्रेम – “तो तेरी उस रंडी मा ने तुझे सब कुछ बता ही दिया, चलो वैसे भी इससे मुझे कोई ख़ास फ़र्क़ नही पड़ता”

“अंकल… ज़बान संभाल के वो मेरी मा है”

“साले और ममता मेरी बीबी… खैर इसकी सज़ा तो उसे भी दूँगा पर अभी तेरी और तेरे परिवार की बारी है. तेरी मा के बाद अब तेरी बेहन को भी चोदूगा, जा कर ले जो तू कर सकता है.”

“अंकल प्लीज़ मेरे किए की सज़ा उन्हे मत दो”

“दफ़ा होज़ा हरामजादे. निकल जा यहाँ से. और हाँ… बोल देना अपनी मा को आज रात आउन्गा मैं तेरे घर उसकी बजाने. हाहाहा”

मैं गुस्से और बेइज़्ज़ती का दर्द लिए निकल पड़ा वहाँ से.

घर पहुचते ही जब मैने बेल बजाई तो मॉम ने डोर खोला. मेरे डबडबाती आँखे और दर्द भरा चेहरा देखकर इससे पहले वो कुछ बोलती मैं कंट्रोल ना कर पाया और फुट फुट के रोने लग गया. मॉम मुझे बाहों मे भर कर अंदर ले गयी. कुछ देर मुझे सोफे पर साथ बिठा कर चुप करवाया , पानी पिलाया फिर पूछा की क्या हुआ.

मैने मॉम को सब बता दिया. “मॉम मैं ही इस सब का ज़िम्मेदार हूँ, मेरी वजह से ही नेहा को भी…. मॉम प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो.” और रोते हुए उनके कंधे पर सिर रखते हुए कहा

“चुप कर अभी, अब जो हो गया सो हो गया, मैं तो ये सब झेल लूँगी पर मुझे पता है की तू नेहा से कितना प्यार करता है, सच्चे दिल से उसे चाहता है, जब वो कमीना नेहा के साथ ये सब करेगा तो तुम दोनो ही पूरी तरह टूट जाओगे. संभाल खुद को, तू ऐसे करेगा तो हमारा क्या होगा.”

“मॉम…” मैं कुछ बोल नही पा रहा था बस मॉम को लिपटे हुए रोए जा रहा था. मेरी आँखे बंद किए मॉम को हग किए हुए और उनके कंधे पर सिर टिकाए हुए बैठा था की अचानक एक हाथ मेरे बालो को सहलाता हुआ फील हुआ तो मैने सिर उठा कर देखा, मॉम के पीछे नेहा खड़ी थी, उसकी आँखों से भी आँसू बह रहे थे.

नेहा- “आ.. अभी आई एम सॉरी”

अभी- “नो दी, आई एम सॉरी”

और मैने उठ कर दी को गले लगा लिया.

“जो भी हो अभी मुझे तुझ पर हाथ नही उठाना था, यूं डॉनट वरी अभी , अब जो भी होगा हम मिलकर फेस करेंगे.”
 
अपडेट 16

“यूं डॉन’ट वरी अभी , अब जो भी होगा हम मिलकर फेस करेंगे.” नेहा ने मुझे हौसला दिया. मैं भी आने वाले हालातों के लिए मन ही मन खुद को मजबूत बनाने लगा.

रात को नेहा दी को मैने अपने रूम से बाहर आने के लिए मना कर दिया था. डॅड अपनी मजबूरी पर होपलेस से शराब के नशे मे बैठे थे. शायद मॉम ने उन्हे प्रेम अंकल के आने के बारे मे बता दिया था. तभी बेल बजी, मैने डोर खोला. प्रेम अंकल आए थे, मुझे देखकर उन्होने एक व्यंग्यात्मक मुस्कान दी और जानबूझकर मुझे दिखाते हुए मॉम को बेडरूम मे ले गये. मुझे अपना दिल रोता हुआ सा महसूस हुआ. डॅड वही सोफे पर ढेर हो गये थे. मैं उन पर चादर डाली और बिना कुछ बोले अपने रूम मे चला गया और बिस्तर पर गिर कर फुट फुट कर रोने लगा.

तभी दरवाजे की आवाज़ पर मैने उठकर पीछे देखा तो नेहा दी मेरे रूम मे एंटर कर रही थी. मैं अपने आँसू पोछता हुआ खड़ा हो गया, नेहा दी ने डोर क्लोज़ किया और मेरे करीब आकर बोली, “मैं समझ सकती हूँ अभी इस वक़्त तुम्हे क्या फील हो रहा होगा. डॉन’ट वरी डियर, वी विल कम अप.” उन्होने मुझे बाँहो मे भर लिया.

कुछ देर हम वैसे ही रहे, फिर नेहा ने शायद मेरा ध्यान भटकाने के लिए मुझसे पूछा, “अभी एक बात बताओ, डू यू रेआली लव मी.”

“य… यस आई डू” मैने थोड़ा झिझकते हुए जवाब दिया.

“और वो भला कब्से” नेहा ने फिर पूछा.

“याद नही, पर शायद तुमसे से ज़्यादा कभी कुछ चाहा नही”

“आआई लव यूं टू अभी” कहते हुए नेहा ने मुझे तुरंत हग कर लिया. कुछ देर हम दोनो ऐसे ही एक दूसरे को बाँहो मे लिए हुए फील करते रहे. मैं तो सातवे आसमान पर था. फिर काफ़ी देर तक हम साथ बैठे हुए प्यार भरी बाते करते रहे , उसने मुझे हौसला दिया की इस सब से बाहर निकल आएँगे, फिर वो अपने रूम मे चली गयी और मैं जो भी आज दिन मे हुआ भूल कर नेहा के ख्यालो मे गुम हो गया और एक बार फिर मैं खुद की किस्मत को सराहता हुआ बोल उठा “लकी बस्टर्ड”

अगले सुबह मैं मॉम के पास गया, प्रेम अंकल शायद देर रात ही किसी समय चले गये थे. मैं खुद को मजबूत बनाता हुआ बोला, “मॉम, अगेन आई एम सॉरी फॉर ऑल दिस हॅपनिंग टू यू.”

मॉम- “अभी जो भी हुआ उसे अब बदला नही जा सकता बस मैं परेशान हूँ तेरे पापा को लेकर. इन दिनों वो ज़यादा ही पीने लगे हैं, बहुत डिपरेसद हैं. तुम्हारे साथ मेरे रीलेशन बने वो बस मेरी दबी हुई इच्छाए थी लेकिन वो मैं उनसे च्छूपा कर कर रही थी. पर इस सब के लिए वो खुद को दोषी मान रहे हैं. उन्हे अभी तक इस सब दिनों पीछे का रियल रीज़न नही पता.”

अभी- “मैं कोशिश करूँगा मॉम उन्हे बेटर फील कराने की”

मॉम- “एक बात और अभी, प्रेम कुछ समय के लिए आउट ऑफ कंट्री जा रहा है, तुम अगर इसका कोई फ़ायदा उठा कर कुछ कर सकते हो तो करो. रही नेहा की बात तो उसके एग्ज़ॅम्स ख़तम हो चुके है मैं उसे 1 महीने के लिए तुम्हारे मामां के यहाँ भेज रही हूँ.”

मैने भी कुछ सोचते हुए सहमति दे दी. “ये ठीक रहेगा मॉम. वैसे भी परसो हमारा रिज़ल्ट आ रहा है तो सुनील और उसकी मॉम भी वापस आ जाएँगी ताकि आगे अड्मिशन्स हो सके. तभी मैं उनसे बात कर के आगे के बारे मे सोचूँगा”
 
अपडेट 17

आज रिज़ल्ट का दिन भी आ गया, पिछले 3 दिन मे मॉम और मेरे बीच काफ़ी कुछ नॉर्मल हो गया था. नेहा मामा घर चली गयी थी, वो जाना तो नही चाहती थी पर मेरे समझाने पर राज़ी हो गयी. इधर मॉम के साथ फिरसे किस्सिंग और हग वगेरह शुरू हो गये थे , दो बार झरना के साथ भी सेक्स किया. इस सबसे मेरे होश ओ हवास भी नॉर्मल होने लगे थे, शॉक से बाहर आकर मैं आगे का सोच रहा था.

डॅड मेरा रिज़ल्ट चेक करने के लिए स्पेशली छुट्टी लेकर ऑनलाइन ही बैठे थे. मैने 76% स्कोर किया. मॉम डॅड दोनो बहुत खुश हुए. मैने नेहा को कॉल कर के बताया तो उसने भी मुझे कॉनग्रॅजुलेट किया फिर मैने सुनील को फोन किया, उसने बताया की उसके 72% मार्क्स आए हैं और वो लोग कल सुबह तक लौट रहे हैं. फिर मेरा रिज़ल्ट पूछा और हम दोनो ने एक दूसरे को बधाई दी. रात को डॅड हमे डिन्नर पर लेकर गये जहाँ उन्होने सेलेब्रेशन क नाम पर पहली बार मेरे साथ एक एक बियर भी पी. डॅड को खुश देख कर मॉम भी खुश थी.

देर रात मे मॉम खुद मेरे रूम मे आई और हमने सेक्स किया. अगले दिन सुबह मैने पहले झरना के साथ सेक्स किया और फिर मैं सुनील के यहाँ के लिए निकल गया.

बेल बजाते ही डोर खुद ममता ने खोला, उसका स्माइलिंग फेस देखकर एक बार तो मैं आने का कारण ही भूल गया फिर खुद को संभालते हुए मैं उसे गुड म्प्र्निंग विश करता हुआ अंदर एंटर हुआ. ममता ने मुझे हग करते हुए किस किया. फिर बैठने को कहा और मेरे लिए कोल्ड ड्रिंक लेकर लॉबी मे मेरे साथ ही आकर बैठ गयी.

“हम सुबह ही आए हैं, सुनील अभी सो रहा है.” फिर थोड़ा ठहर कर बोली “अभी… सुनील ने मुझे बताया जो भी प्रेम ने किया. मैने उनसे फोन पर बात की थी पर वो सुनने को राज़ी ही नही थे उल्टा तुम्हारे साथ रीलेशन को लेकर मुझ पर भड़क उठे”

अभी- “तो अब क्या करेंगे हम”

ममता हताश स्वर मे- “ काश मैं कुछ कर पाती पर प्रेम तो सुनने को तैयार ही नही हैं बल्कि वो तो मुझे पनिश करने के लिए दूसरी शादी करने को तैयार बैठे हैं.”

मैं सब तरफ से नौम्मीद हो चुका था अब क्या करू समझ नही आ रहा था, मेरे दिमाग़ मे प्रेम की व्यंगया भरी हसी और नेहा का मासूम चेहरा ही घूम रहा था. मैं खुद से बोल उठा, “इस सबकी बहुत बड़ी कीमत चुकाओगे तुम मिस्टर प्रेम. फिर चाहे जो भी रास्ता मुझे अपनाना पड़े ”

तभी सुनील अपने रूम से बाहर आया. “अरे अभी तू कब आया”

“बस थोड़ी देर पहले” मैने जवाब दिया.

ममता उठ कर किचन मे चली गयी. सुनील ने पास बैठते हुए मुझसे पूछा, “सॉरी भाई पापा वाले मॅटर मे तेरी हेल्प ना कर पाने के लिए, पर देख तो ये भी इतनी बड़ी बात नही है की वो अगर तेरी मॉम के साथ प्यार करे क्योकि अब सब खुलने के बाद तू भी तो जब चाहे उनकी बीबी के साथ सेक्स कर सकता है.”

मैने हिकारत भरी नज़र से उसे देखते हुए कहा, “बिना मर्ज़ी के मजबूर करके सेक्स करने को प्यार नही रेप कहते हैं”

सुनील- “सॉरी यार अगर तुझे बुरा लगा तो , मैं तो तेरा मूड सही करने को बोला था. बाकी जो तू चाहे, जैसे चाहे मैं तेरी हर हेल्प करने को तैयार हूँ.”

मैं कुछ सोचते हुए बोला “वक़्त आने पर ज़रूर आजमाउन्गा” अब मैं किसी पर भी यकीन तक नही कर पा रहा था. फिर मैं किसी ज़रूरी काम का बहाना बना कर वहाँ से निकल आया.
 
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