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अपडेट 18
सारे रास्ते बंद थे, कुछ समझ मे नही आ रहा था क्या करू. छोटी छोटी बातो पर गुस्सा करने लग गया था, मॉम भी मुझे टेन्षन मे देखकर समझाती रहती थी.
ऐसे ही एक दिन मैं बिना लंच किए अपने रूम मे लेटा हुआ हालातों के बारे मे सोच रहा था की तभी मॉम आई और बोली “अभी, इस तरह टेन्षन और गुस्से से तुम अपनी परेशानी बढ़ा रहे हो, ठंडे दिमाग़ से काम लो बेटा… और अगर हालत बदल नही सकते तो उनके हिसाब से अपना रुख़ ऐसे बदलने की कोशिश करो की उनसे तुम्हे नुकसान कम हो और फ़ायदा ज़्यादा.”
तभी मेरे मोबाइल पर नेहा का फोन आया, फॉर्मल बातों के बाद नेहा ने भी मुझे समझाया की मैं ज़्यादा टेन्षन ना लू.
नेहा-“अभी मैं तुम्हे इतने दर्द मे नही देख सकती”
अभी-“मैं क्या करू कोई रास्ता ही नही निकल रहा”
नेहा- “अगर तुम बुरा ना मानो तो एक रास्ता बताऊ, जिससे हम ना सिर्फ़ हालत का फ़ायदा उठा सकते हैं बल्कि अपना बदला भी ले सकते हैं.”
अभी-“वो कैसे”
नेहा-“अगर हम मान जाए जो वो चाहता है उसके बाद”
उसकी बात काटते हुए अभी बोला, “पागल हो गइ हो क्या”
नेहा- “पहले सुनो तो. ………………”
अभी-“नही मैं इतनी बड़ी कीमत नही चुका सकता”
नेहा-“कोई और रास्ता है तुम्हारे पास. सोचकर बताना मुझे, अभी फोन रखती हूँ बाइ आंड लव यूं”
अभी- “आई लव यूं टू”
मैं बैठकर मॉम और नेहा की बातो पर सोचने लगा. मुझे ऐसे गुमसूँम सा बैठा देखकर मॉम फिर मेरे पास आई और पूछा क्या हुआ, मैने उन्हे नेहा के साथ हुई पूरी बात बताई. थोड़ी देर सोच कर उन्होने भी हा कर दी. वैसे भी मेरे पास सिवाय अपनी किस्मत और सो कॉल्ड चुदाई के टॅलेंट के अलावा कुछ नही था जिससे मैं प्रेम अंकल से जीत पाता, उपर से डॅड की भी जिंदगी और फॅमिली के फ्यूचर का सवाल था. आख़िर मैने आगे बढ़ने की सोची.
अगले दिन मैं सुनील के साथ अड्मिशन के लिए कॉलेज गया, जो की आराम से हो गया था. फिर हम साथ ही कॉलेज के सामने एक केफे मे आकर बैठ गये.
सुनील-“अभी तुझे मॉम याद कर रही थी, उस दिन भी तू घर से ऐसे ही निकल आया.”
सुनील थोड़ा रुक कर फिर बोला, “देख यार जो भी हो रहा है तू या मैं रोक तो नही सकते तो इसे भी अपने गेम का पार्ट बना लेते हैं और एंजाय करते हैं.”
अभी ने ठंडे स्वर मे जवाब दिया”शायद तू सही कह रहा है”
सुनील चहकते हुए बोला, “तो फिर कब है नेक्स्ट सीन , आई मीन जो हमने स्वाप प्लान किया था”
मैने कॉफी का घूँट पीते हुए जवाब दिया,”मॉम से बात करके बताता हूँ.”
सारे रास्ते बंद थे, कुछ समझ मे नही आ रहा था क्या करू. छोटी छोटी बातो पर गुस्सा करने लग गया था, मॉम भी मुझे टेन्षन मे देखकर समझाती रहती थी.
ऐसे ही एक दिन मैं बिना लंच किए अपने रूम मे लेटा हुआ हालातों के बारे मे सोच रहा था की तभी मॉम आई और बोली “अभी, इस तरह टेन्षन और गुस्से से तुम अपनी परेशानी बढ़ा रहे हो, ठंडे दिमाग़ से काम लो बेटा… और अगर हालत बदल नही सकते तो उनके हिसाब से अपना रुख़ ऐसे बदलने की कोशिश करो की उनसे तुम्हे नुकसान कम हो और फ़ायदा ज़्यादा.”
तभी मेरे मोबाइल पर नेहा का फोन आया, फॉर्मल बातों के बाद नेहा ने भी मुझे समझाया की मैं ज़्यादा टेन्षन ना लू.
नेहा-“अभी मैं तुम्हे इतने दर्द मे नही देख सकती”
अभी-“मैं क्या करू कोई रास्ता ही नही निकल रहा”
नेहा- “अगर तुम बुरा ना मानो तो एक रास्ता बताऊ, जिससे हम ना सिर्फ़ हालत का फ़ायदा उठा सकते हैं बल्कि अपना बदला भी ले सकते हैं.”
अभी-“वो कैसे”
नेहा-“अगर हम मान जाए जो वो चाहता है उसके बाद”
उसकी बात काटते हुए अभी बोला, “पागल हो गइ हो क्या”
नेहा- “पहले सुनो तो. ………………”
अभी-“नही मैं इतनी बड़ी कीमत नही चुका सकता”
नेहा-“कोई और रास्ता है तुम्हारे पास. सोचकर बताना मुझे, अभी फोन रखती हूँ बाइ आंड लव यूं”
अभी- “आई लव यूं टू”
मैं बैठकर मॉम और नेहा की बातो पर सोचने लगा. मुझे ऐसे गुमसूँम सा बैठा देखकर मॉम फिर मेरे पास आई और पूछा क्या हुआ, मैने उन्हे नेहा के साथ हुई पूरी बात बताई. थोड़ी देर सोच कर उन्होने भी हा कर दी. वैसे भी मेरे पास सिवाय अपनी किस्मत और सो कॉल्ड चुदाई के टॅलेंट के अलावा कुछ नही था जिससे मैं प्रेम अंकल से जीत पाता, उपर से डॅड की भी जिंदगी और फॅमिली के फ्यूचर का सवाल था. आख़िर मैने आगे बढ़ने की सोची.
अगले दिन मैं सुनील के साथ अड्मिशन के लिए कॉलेज गया, जो की आराम से हो गया था. फिर हम साथ ही कॉलेज के सामने एक केफे मे आकर बैठ गये.
सुनील-“अभी तुझे मॉम याद कर रही थी, उस दिन भी तू घर से ऐसे ही निकल आया.”
सुनील थोड़ा रुक कर फिर बोला, “देख यार जो भी हो रहा है तू या मैं रोक तो नही सकते तो इसे भी अपने गेम का पार्ट बना लेते हैं और एंजाय करते हैं.”
अभी ने ठंडे स्वर मे जवाब दिया”शायद तू सही कह रहा है”
सुनील चहकते हुए बोला, “तो फिर कब है नेक्स्ट सीन , आई मीन जो हमने स्वाप प्लान किया था”
मैने कॉफी का घूँट पीते हुए जवाब दिया,”मॉम से बात करके बताता हूँ.”