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Incest चक्रव्यूह

तभी डोर पर नॉक हुआ, वेटर ऑर्डर के लिए आया था. मेने उन दोनो से पूछ कर चिकन सॅंडविच आंड आइस-क्रीम का ऑर्डर दिया.

उनकी बातो और हरकतों से मुझे आइडिया तो लग ही गया था की वो मस्ती के मूड मे हैं. तभी शीतल बोली, “अभी एक बात पुछु, तुमने मॉम पे क्या जादू किया है ? हमेशा तुम्हारी ही बाते करती हैं, कल रात भी बहुत तारीफ कर रही थी.”

आईशा ने फिर चुटकी ली … “और क्या किया होगा ? मॉम की खूब जमकर चुदाई की होगी.. जवान है, खूबसूरत है.. मॉम को खूब मज़ा आया होगा…”

इस बात पर शीतल उसे मारने मेरे उपर से होते हुए झपटी पर आईशा खिलखिलाते हुए तेज़ी से खिसक ली , और शीतल मेरी गोद मे गिर पड़ी

आईशा- “अभी तुम ही संभलो इन्हे वरना मैं तो गयी” और दोनो हँस ने लगी.

अभी- “तुम लोग बुरा मूत मान-ना. लेकिन सच तो यह है की तुम्हारी मा यानी ममता आंटी को देखकर हर कोई, छोटा बड़ा, सभी उनके साथ प्यार करना चाहेंगे , मुझे भी आंटी बहुत पसंद आई.. और मैं ये भी जानता हूँ की आंटी मुझे कितना पसंद करती हैं पर तुम दोनो भी कम खूबसूरत नही हो”

तभी डोर पर नॉक हुआ वेटर ऑर्डर ले आया था. उसे टिप देकर मैने कहा की अब हमे डिस्टर्ब ना करे. हमने आपस मे बाँट कर खाया. खाते खाते आईशा बोली “हाँ तुम कुछ कह रहे थे”

अभी- “पता है जब तुम्हारे घर पहली बार गया था तो उस रात घर आने के बाद से तीन राते बीत गई और मुझे नींद नही आई, मैं सोया नही…”

आईशा – “ऑरेंज ने ज़्यादा ट्रबल दिया की मॅंगो ने…”

मे – दोनो ने …कभी एक आँखों के सामने आती है तो कभी दूसरी..इस लिए आज मौका लगा तो हिम्मत कर यहाँ आ गया और किस्मत से तुम दोनो मुझे मिल गई…”

शीतल सब सुनते हुए नीचे देख रही थी पर आईशा ने नज़रे मिलाकर फिर पूछा.

आईशा – “भाई को मालूम है की तुम उनकी दोनो बहनो को चोदना चाहते हो…”

ऐसी ओपन लॅंग्वेज मे बाते करते हुए हम तीनो ही एग्ज़ाइटेड हो रहे थे,

मे – “उसे डाउट तो ज़रूर हुआ होगा ..”

आईशा – “तो…. ऑरेंज आंड मॅंगो मे कौन ज़्यादा पसंद है…”

मैने भी बोल्ड्ली जवाब दिया – “मुझे दोनो मॅंगो और ऑरेंज एक जैसा पसंद है..जितना मज़ा मॅंगो को काट कर खाने मे आता है उतना ही मज़ा ऑरेंज को चूसने मे आता है…”

आईशा – “तो फिर नमार्द जैसा बैठे क्यो हो, खाओ, चूसो…”

उसके ऐसे उकसाने पर और उसकी बात सुनकर मैने बगल मे बैठी शीतल को बाँहो मे दबोच लिया और ज़ोर से किस करने लगा. फिर शीतल भी मेरा साथ देने लगी और हमारी किस्सिंग एक पॅशनेट किस मे बदल गयी और मेरी हम एक दूसरे की टंग फाइट कर रहे थे. और साँस फूलने तक हम जुदा ना हुए. मेरा हाथ रेंगता हुआ उसके बूब्स को टटोलने लगा. अब तक जितने बूब्स से मैं खेला था(मॉम/ ममता/ झरना) ये उनमे सबसे छोटे, हल्के फुल्के पर ठोस थे. मेरा दूसरा हाथ उसकी पीठ पर रेंग रहा था.

मैने अलग होते हुए उसके और फिर अपने कपड़े उतार दिए, हम दोनो इनरवेर मे थे फिर मैने फिर से किस्सिंग करते हुए अपने दोनो हाथ उसके पीछे लेजाते हुए उसकी ब्रा के हुक खोल दिए. पीछे हटकर मैने उसे धीरे धीरे धकलते हुए बेड पर लिटा दिया. मेरी नज़र उसके छोटे छोटे संतरो से हट ही नही रही थी. धीरे धीरे उसपर झुकते हुए मैं उसकी एक चुचि को मूह मे और दूसरी को हाथ मे भर लिया और बारी बारी बदलते हुए उन्हे चूसने, चाटने और मसलने लगा, ओवर एक्सआइट होते हुए एक दो बार काट भी लिया.
 
इस बीच आईशा जो सामने ही चेयर पर बैठी हुई दूसरी बियर सीप करती हुई हमे देखते हुए खुद से खेल रही थी.

मेरा एक हाथ रेंगता हुआ उसकी पेंटी के अंदर बालो भरी चूत तक पहुच गया तो शीतल ने सिसकी ली. उसने मेरा हाथ पकड़ लिया पर मेने हाथ छुड़ाते हुए उसकी पैंटी नीचे कर दी. थोड़ा और नीचे खिसकते हुए मैने अपना मूह उसकी चूत पर लगा दिया. वो मस्ती मे पागल हो उठी.

उधर हमारा शो देखते हुए आईशा भी मस्त हो गयी थी और अपने कपड़े उतार कर खुद को फिंगरिंग करने लगी. मेरा लंड भी अंडरवेर मे फुदके रहा था.

शीतल, “एयेए….. और मत तड़पा …. बस … आहह डाल दो अंदर अब..”

उसकी बात सुनकर मैने पीछे हटा और अपने बदन से लास्ट कपड़ा यानी अंडरवेर भी उतार दिया. दोनो बहनो की नज़र मेरे लंड पर टिक गयी.

अभी मैं घुटनो के बल बेड पर आगे बढ़ा ही था और कुछ करता शीतल के साथ की आईशा ने चार्ज लेते हुए बेड पर मेरे पास आकर मेरा लंड पकड़ लिया और कुछ देर सहलाने के बाद झुककर मूह मे भर लिया और लगी चूसने.

उफ़फ्फ़… अलग ही मज़ा था. वो जैसे चूस रही थी ऐसा मज़ा मुझे आज तक नही आया था. मूह मे अंदर तक लेकर और पूरे सुपाडे पे जीभ घुमा रही थी.

इस बीच शीतल ने आईशा के पीछे से आते हुए उसकी चूत पर अपने होन्ट टिका दिए और अपनी जीभ से उसकी चुदाई करने लगी.

आईशा हट ते हुए “आअहह….,दी… प्यार से…. काटो मत.” फिर मुझसे बोली, “मज़ा आ गया यार, तेरा पप्पू तो बहुत मोटा और कड़क है”

ये सुनकर शीतल ने सिर उठा कर मेरी और देखा और मुझे लिटाते हुए मेरे लंड के उपर आके बैठ गयी. धीरे धीरे पूरा लंड अंदर ले लिया उसने, बड़ी ही टाइट फुददी थी उसकी, लंड बड़ा फस कर जा रहा था. उसके भी चेहरे पर दर्द के भाव सॉफ सॉफ दिखाई दे रहे थे. वो सचमुच ज़्यादा चुदि हुई नही थी. मैं दोनो हाथों से उसकी जांघे सहला रहा था. कुछ ही देर मे वो नॉर्मल हो गयी, फिर क्या था पूरे जोश मे वो गान्ड हिलाने लगी. कुछ ही देर मे हर धक्के के साथ वो कुछ ना कुछ चिल्ला रही थी जिससे मेरा जोश भी बढ़ रहा था. फिर वो एक चीख के साथ झड़ने लगी. और इसके साथ ही निढाल होकर बिस्तर पर गिर पड़ी और मैं पलट कर आईशा के उपर आ गया और बिना देर किए उसकी चूत मे लंड घुसा दिया क्योकि अब मुझसे भी कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था, थोड़ी ही देर मे हम दोनो एक साथ झड् गये.

कुछ देर लेटे हुए तीनो ने अपनी अपनी साँस नॉर्मल होने तक रेस्ट किया फिर आईशा बोली “दी, बहुत मस्त लंड है..बहुत मज़ा आया…”

शीतल – “हाअ, लेकिन अब जल्दी उठ घर जाने का टाइम पहले ही ओवर हो गया है.” फिर मुझे किस किया और बोली, “अभी, आई लाइक्ड इट वेरी मच. आज थर्स्डे है…सॅटर्डे को हमारा हाफ डे है, हम स्कूल बंक कर लेंगे यहीं मिलना…”

फिर हम उठे और अपने अपने कपड़े पहन कर तैयार हो गये. एक दूसरे को गुडबाइ किस दी और हग किया और अपने अपने घर की ओर निकल पड़े.
 
मैं घर पहुचा तो थका हुआ था और कुछ नशा भी था तो मॉम को लंच के लिए मना कर के सोने चला गया. शाम को देर से उठा तो फ्रेश होके मॉम के पास पहुच गया. मॉम किचन मे काम कर रही थी, मैने जाके पीछे से हग कर लिया और धीरे धीरे मॉम के बदन को सहलाने लगा. मॉम भी बीच बीच मे काम रोक कर मज़े ले रही थी.

मॉम-“ उम्म्मह…. आजकल कहाँ गायब रहता है दिन भर. आहह … ममता का फोन आया था तुझे पूछ रही थी”

मे – “उसी कुतिया की दोनो बेटियाँ चोदने गया था”

मॉम एकदम पलटी और हैरान होके मूह खोले मुझे देखने लगी.

मॉम- “त… तू… तू करना क्या चाहता है”

मैने मॉम को बाँहो मे लेकर एक स्मूच दिया. फिर बोला “मैं उस प्रेम से उसका पैसा उसका स्टेटस उसकी पवर सब छीन लेना चाहता हूँ और इसके लिए मैने और नेहा ने मिलकर एक प्लान बनाया है.”

मॉम , “कैसा प्लान”

फिर मैने मॉम को पूरा प्लान बताया.

मॉम- “लेकिन इसके लिए तो तुम अपनी और नेहा दोनो की लाइफ दाँव पर लगा रहे हो, क्या कोई और रास्ता नही है.”

अभी – “मॉम ये सब मैने नही शुरू किया और जो मैने किया भी उसमे नेहा या आपका क्या दोष था. मिस्टर प्रेम ने अपना कमीना पन दिखाया अब मैं उसे भी एक हद आगे का कमीना पन दिखाउन्गा. तू ही कहती है ना इंसान जो बोता है वही काट ता है”

थोड़ा रुककर अभी फिर बोला,”वैसे भी मॉम तुम जानती हो मैं नेहा से कितना प्यार करता हूँ, पूरी जिंदगी उसी के साथ बिताना चाहता हूँ, ऐसे मेरा वो मक़सद भी पूरा हो जाएगा.”

मॉम “वो कैसे”

अभी- “उसके लिए मैं ******************************* ”

मॉम- “ऐसा है तो मैं भी तेरे साथ हूँ, मैं भी चाहती हूँ के उस कमीने को ऐसी ही सज़ा मिले, बस जो करे सोच समझ कर करना”

मॉम की अप्रूवल मिलने से मैं खुश हो गया. और मॉम को गले लगा किस के भींचते हुए बोला “लव यूं मॉम आंड डॉन’ट वरी मैं नेहा का पूरा ख्याल रखूँगा बस आप जितना हो सके उतने समय के लिए उसे प्रेम अंकल से दूर रखो ताकि अपने प्लान के नेक्स्ट स्टेप को सही से लागू करने के लिए मुझे थोड़ा वक़्त मिल जाए.”

फिर एक हाथ से मॉम की सारी उठा कर मैं मॉम की चूत को रगड़ने लगा. मॉम मुझे किस करने लगी. और मेरी फिंगर्स पैंटी को साइड करती हुई उसकी चूत की फांको मे पंहुच गयी.

अभी-“मॉम क्या मैं सॅटर्डे को शीतल और आईशा को यहीं घर पर बुला लू”

“आअहह….. “ मॉम सिसकी लेते हुए बोली “झरना को मैं छुट्टी दे दूँगी सॅटर्डे को पर तेरे पापा उनका क्या , क्या मा की तरह उनकी बेटियो को भी अपने पापा से चुदवाएगा.”

हाहाहा हँसते हुए मैने मॉम की चूत मे फिंगरिंग तेज करते हुए कहा“नोट आ बॅड आइडिया, लेटस सी. लेकिन अगर इस बार अगर डॅड ने शेरिंग की तो मैं भी आपको उनके सामने चोदूगा, वैसे भी पर्मिशन तो ममता ने दिलवा ही दी है”

“कितना बड़ा वाला कमीना है तू…. आअहह…” इसके साथ मॉम झड़ने लगी

“जैसा भी हूँ तेरे सामने हूँ मेरी कुतिया” और मॉम को एक लोंग किस देकर अपने रूम मे आ गया.
 
सॅटर्डे मॉर्निंग मैं जल्दी उठ गया था, मैने शीतल को पहले ही इनफॉर्म कर दिया था घर आने को. मैं फ्रेश हुआ ही था की झरना आ गयी, वो चुदाई के मूड मे थी पर मैने किस कर के टाल दिया. मॉम ने उसे आज जल्दी बुलाया था , पापा के ऑफीस जाने के बाद फटाफट काम ख़तम करवा कर मॉम ने झरना को छुट्टी दे दी.

थोड़ी देर मे वो दोनो आ गयी मैने उन्हे वेलकम किया और मॉम से मिलवाया. मॉम उनसे बोली, “बेटी, तुम दोनो अपनी मा से भी ज़्यादा सुंदर हो…”

मैने उन्हे बताया की मॉम लास्ट वीक ममता आंटी से मिल चुकी हैं. वो दोनो मॉम की मौजूदगी मे थोड़ा अनकर्म्टेबल फील कर रही थी.

शीतल ने मॉम को जवाब दिया, “आंटी, मेरी अम्मी बहुत सुंदर है, जन्नत की हूँर जैसी , कोई उनके जैसी नही हो सकती लेकिन आपके बेटे अभी ने उन् पर जादू कर दिया है, रात दिन उसी का नाम जपती रहती है…”

इस बात पर सब हँसने लगे, फिर मॉम ने उन्हे सोफे पर बिठा या और कोल्ड ड्रिंक लेने चली गयी. आईशा ने मुझसे नाराज़गी वाले टोन मे कहा, “तुम्हारी मॉम घर पर हैं तो सब कैसे मॅनेज हो पाएगा. इससे तो अच्छा हम होटेल ही चलते हैं.”

अभी- “डॉन’ट वरी यार, शी इज वेरी को ऑपरेटिव, वैसे भी मैं उनसे कुछ नही च्छूपाता, उन्हे हमारे पिछले सेक्स एनकाउंटर के बारे मे भी पता है”

शीतल, “वॉट!!!, आर यू आउट ऑफ युवर माइंड”

मैं बस मुस्करा दिया. तो आईशा बोली, “दी जब इन्हे कोई प्राब्लम नही है तो डोंट मेक आ इश्यू, वैसे भी यहाँ हम ज़्यादा सेफ हैं होटेल की जगह”

“दट’स दा पॉइंट” मॉम कोल्ड ड्रिंक की ट्रे लेकर आती हुई बोली “इस आगे मे अब अगर तुम तीनो अपनी वर्जिनिटी खो ही चुके हो तो मैं कहूँगी की जो करो हमारी नज़र मे रहकर करो ताकि कोई ग़लत संगत या बीमारी के चंगुल मे ना पड़ जाओ.”

सबने कोल्ड ड्रिंक पी फिर मॉम बोली, “रिलॅक्स बच्चो जाओ अभी के रूम मे जाके बैठो मैं तब तक लंच रेडी करती हूँ.” और ग्लासस लेकर हँसते हुए किचन मे चली गयी

दोनो सुनकर थोड़ा शर्मा गयी, फिर मैने आँखो मे ही इशारा किया आईशा को और हम दोनो खड़े हो गये, हमे देख कर शीतल भी खड़ी हो गयी. फिर हम तीनो मेरे रूम मे आ गये. मैने तो डोर खुला ही छोड़ दिया था पर शीतल ने वापस मूड कर पहले डोर लॉक किया.

अभी- “तो कहाँ से स्टार्ट करे”

आईशा- “अभी, तुमने ही कहा था ना की ऑरेंज का रस चूसने के बाद आम/ मॅंगो खाने मे बहुत मज़ा आता है तो पहले ऑरेंज चूसो फिर मॅंगो खाना. दी मुझसे बड़ी है, पहले उनका मज़ा लो, फिर मैं तो हूँ ही..मैं देखूँगी की आप क्या करती है…”

मैं मुस्काया ऑर आगे बढ़कर शीतल को बाँहो मे ले लिया और उसे किस करने लगा, वो भी पूरा साथ देने लगी.

कुछ ही देर मे हमारे कपड़े फर्श पर थे और हम दोनो गुत्थम गुत्था बेड पर. मैं उसके उपर चढ़ उसकी चुचिया पीने मे लगा हुआ था. शीतल मस्ती मे मोन कर रही थी और उसकी बॉडी थरथरा रही थी. अब जिनके साथ भी उसने सेक्स किया था सिर्फ़ अपने मज़े के लिए किया था, लेकिन अब ही उन्हे ज़्यादा मज़ा दे रहा था.

चुचियो को काफ़ी देर चूसने के बाद अभी ने अपने होंठ शीतल की चूत पर टिका दिए. एक झटके के साथ शीतल सीत्कार कर उठी. मैं कुत्ते की तरह चाटे जा रहा था.

आईशा पीछे से मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए बोली, “अभी अब पेल भी दो लौडा दी की बुर में …”

मैने बिना सिर उठाए जीभ से उसकी चूत की घुंडी को छेड़ने लगा तो शीतल जैसे जंप कर उठी “ओह्ह्ह्ह अभी, सो नाइस .. डू इट अगेन…फिर से करो…” शीतल जैसे चिल्ला रही थी.

मैं और भी ज़ोर से चूसने और चाटने लग गया, आईशा पीछे से मेरे लंड को मुठियाने की कोशिश कर रही थी. शीतल- “उफफफ्फ़ डियर ….डोंट.. किल मी …आई विल ..दिए ….फक.. मी … पेलो…. लौडा.. पेलो….” वो मरी जा रही थी अंदर लेने के लिए लेकिन मैने ओरल ही जारी रक्खा.

आईशा- “अभी, छ्ची क्या कर रहे हो ..कुत्ता हो क्या….ये बहुत गंदा है….”

शीतल- “छोटी मत रोक, बहुत मज़ा आ रहा है….उफ़फ्फ़…बहुत बढ़िया अभी…आ करते रहो…”

आईशा- “दी तुम भी कुतिया हो, ठीक ही तुम दोनो की जोड़ी है, कुत्ता कुतिया की…मैं बाहर जाती हूँ….”

वो ये बोल कर पीछे हटी तो मुझे लगा की कहीं वो सचमुच बाहर ही ना चली जाए. तो मै सिर उठा कर उसे देखने लगा. वो पूरी नंगी मेरे पीछे बेड पर ही अधलेटी सी हो रखी थी और एक हाथ से अपनी चूत के साथ खेल रही थी. मैं पलटकर उसे किस करने लगा और उसके बूब्स दबाने लगा. शीतल के मुक़ाबले आईशा के बूब्स बड़े थे लेकिन मुझे शीतल के अधिक पसंद थे.

फिर उसे छोड़ कर मैं बोला “रानी बाहर जाने की ज़रूरत नही, तेरे साथ वो नही करूँगा जो तेरी बहन के साथ कर रहा हूँ…तू आराम से बैठ कर देख…” और शीतल की ओर तो शीतल बोली,”बस अभी, अब बर्दस्त नही होता…फाड़ दो बुर को, चोदो,…”
 
वो ये बोल कर पीछे हटी तो मुझे लगा की कहीं वो सचमुच बाहर ही ना चली जाए. तो मै सिर उठा कर उसे देखने लगा. वो पूरी नंगी मेरे पीछे बेड पर ही अधलेटी सी हो रखी थी और एक हाथ से अपनी चूत के साथ खेल रही थी. मैं पलटकर उसे किस करने लगा और उसके बूब्स दबाने लगा. शीतल के मुक़ाबले आईशा के बूब्स बड़े थे लेकिन मुझे शीतल के अधिक पसंद थे.

फिर उसे छोड़ कर मैं बोला “रानी बाहर जाने की ज़रूरत नही, तेरे साथ वो नही करूँगा जो तेरी बहन के साथ कर रहा हूँ…तू आराम से बैठ कर देख…” और शीतल की ओर तो शीतल बोली,”बस अभी, अब बर्दस्त नही होता…फाड़ दो बुर को, चोदो,…”

मैने उसकी गीली चूत पर लॉडा सेट किया और धकेल दिया एक ही धक्के मे पूरा अंदर. मुझे पहले भी आईशा के मुक़ाबले शीतल की चूत टाइट लगी थी. मस्त मज़ा आ गया था उसकी बुर में लंड पेलने मे.

“ओह गोडड़… गयी मैं… आहह….” शीतल बोल उठी. उसका चेहरा सफेद पड़ गया और मूह खुला, उसने सिर हिला कर रुकने का इशारा किया पर मैं रुका नही और लगातार धक्के लगाने लग गया.

आई लुक्ड अट आईशा हूँज़ फेस हॅज़ टेन्स्ड. शी आस्क्ड हर एल्डर सिस्टर वेदर इट वाज़ वेरी पेनफुल…

आईशा ने चिंता भारेआई आवाज़ मे पूछा, “दी, बहुत दर्द हुआ क्या..”

शीतल ने हाँ मे सिर हिलाया, और कहा, “उस दिन बियर के नशे मे पता नही लगा पर इसका लंड वाकई बड़ा और मोटा है”

लगातार 8-10 मीं धक्के लगाने के बाद मे झड़ कर उसी पर गिर गया. इस बीच वो दो बार झड़ गयी थी.

कुछ देर वैसे ही रहने के बाद शीतल बोली “मेरे उपर एसे ही सोए रहोगे क्या, देखो छोटी की बुर कितनी गरम है, उसे नही चोदना…अभी, जितना मैने सोचा था तुमने उस से ज़्यादा मज़ा आया…छोटी को चोदो, मैं बाद मे दुबारा लूँगी…”

मैने उसे किस करते हुए कहा “ठीक है, तुम अपनी छोटी बहन के लिए लौडा तैयार कर दो तब तक मैं इसे प्यार करता हूँ…”

शीतल के उपर से हट कर मैने अपनी पीठ बेडरेस्ट से टिका दी और आईशा को अपने बगल मे आने का इशारा किया. मेरे पास आते ही मैने उसे बाँहो मे लेकर चूमने लगा. और शीतल मेरे मुरझाए हुए लंड को मूह मे लेकर चूसने लगी. उसके चूमने चाटने पर जल्द ही फिर खड़ा हो गया. इस बीच मैं एक हाथ से आईशा की बड़ी बड़ी चुचियो और फूली हुई चूत को कभी सहलाता कभी रगड़ता तो कभी दबाता रहा. और दूसरे हाथ से उसकी पूरी बॉडी को मसल रहा था. अपनी बहन के मुक़ाबले ना सिर्फ़ वो ज़्यादा फ्रॅंक थी बल्कि थोड़ा ज़्यादा मांसल बदन की मालिक थी ये उसे शीतल से ज़्यादा हॉट बनता था. चूत तो दोनो बहनो की चिकनी थी.

शीतल- “अभी, लौडा तैयार है, आईशा को नीचे सुलाओ..”

आईशा ने लंड की ओर देखा और कहा, “मेरे साथ ओरल मे टाइम खराब मत करो सीधा पेल दो”

मैं फिर देर ना करते हुए बड़ी की तरह छोटी को भी पेल दिया. उस की चूत शीतल जितनी टाइट तो नही थी फिर भी मेरे पेलने पर वो उसी की तरह छटपटा उठी. मेरे हर धक्के के साथ वैसे ही उच्छल कूद मचा रही थी. इस बार हमारा सेशन पहले से लंबा चला. पहले आईशा झड़ी और फिर कुछ मिंटो बाद मैं भी पस्त हो गया.

फिर हम तीनो साथ साथ लेट हुए बाते करने लग गये. मैने आज के अवेसम सेक्स के लिए दोनो को थॅंक्स बोला.

शीतल – “अभी, दरअसल हम कोई पैसे के लिए ये सब नही करते, आईशा को ड्रग्स के जाल मे फसा कर पूजा ने इसे इस सब मे डाल दिया. और घर मे मॉम डॅड के बीच बढ़ती दूरियो ने हमे प्यार क्या होता है भुला दिया था, शायद इसीलिए मॉम भी तुम्हारी तरफ अट्रॅक्ट हो गयी. मैं आईशा को बचाने गयी तो मुझे भी इस दलदल मे उतरना पड़ा. पर जिस दिन मैने तुम्हारे साथ सेक्स किया था उसी दिन से मैने पैसे के लिए ये सब करना छोड़ दिया. आईशा की नशे की लत छुड़ाने के लिए मैने मेडिकल ट्रीटमेंट भी स्टार्ट करवा दिया है. मैं वादा करती हूँ की अबसे हम दोनो कभी भी ये काम नही करेंगी पर कभी कभी तुम्हे हमे ऐसे ही प्यार करना होगा ताकि हम फिर उस रास्ते पे न चल पड़े.”

अभी- “आई प्रॉमिस यूं, आई विल बी ऑल्वेज़ देयर” मन ही मन मैं खुद को शीतल की ओर झुकता हुआ महसूस कर रहा था.

तभी मॉम की आवाज़ आई, वो बुला रही थी. हम लगभग 11 बजे रूम मे आ गये थे और अब 1.30 बज रहा था.
 
लंच के बाद जब शीतल और अभी का सेकेंड राउंड हुआ तो आईशा का मंजू (अभी मॉम) के साथ लेज़्बीयन सीन चला उपर से अभी के पापा आ गये तो उन्होने भी आईशा को रगड़ा पर शीतल अभी पर फिदा हो गइ तो उसने ऐसा किसी और के साथ नही किया , उधर अभी के दिल मे भी उसके लिए सॉफ्ट कॉर्नर बन गया. वो भी उसे लाइक करने लगा. ऐसे ही कुछ समय निकल गया . फिर हुई नेहा की घर वापसी....

अब आगे

मैं कॉलेज से घर आया तो लॉबी मे ही मॉम के साथ नेहा को बैठ कर बाते करता देखा. मुझे देखकर दौड़ कर वो मेरे गले लग गयी. इतने दिनों बाद मिलने पर हम दोनो ही सेनटी हो उठे. चाहे लगभग रोज हम फोन पर बात करते थे पर आज सामने मिलकर अपनी भावनाओ पर काबू ना रख पाए, दोनो ह्िॉ की आँखे नाम थी. मॉम मुस्कुराती हुई हमे देख रही थी , फिर उठकर किचन मे चली गयी मेरे लिए पानी लेने. इधर नेहा मुझे छोड़ने को तैयार नही थी तो मैं भी उसे प्यार से सहलाते हुए उसकी पीठ थपथपा रहा था. फिर मॉम को आता देखकर मैने उसे अलग किया.

फिर हम साथ बैठकर बाते करने लगे, मैने मामां के घर के सब लोगो का हाल चाल पूछा. फिर लंच करने के बाद हम अपने अपने रूम मे चले गये.

शाम को पापा के आने के बाद हम सब साथ साथ डिन्नर करने बाहर गये आख़िर मेरा और नेहा के रिज़ल्ट्स को भी तो सेलेब्रेट करना था , जोकि नेहा के मामां के घर जाने के कारण अब तक ड्यू था. फिर घर लौटकर हम कुछ देर साथ बैठे और फिर बारी बारी अपने अपने रूम मे सोने चले गये.

रात को मैं बेड पर सोने लेट गया था तभी डोर पर दस्तके हुई , मैने दरवाजा खोला तो बाहर नेहा थी.

नेहा – अभी अगर तुम्हे प्राब्लम ना हो तो आज रात मैं तूहरे साथ सो सकती हूँ.

अभी – बिल्कुल क्यो नही.

हम दोनो बेड पर अगल बगल लेट गये. नेहा- अभी आई मिस यूं आ लॉट.

अभी – आई ऑल्सो मिस यूं आ लॉट स्वीतू.

वो स्वीतू सुनकर शर्मा गयी. मैने उसे बाहो मे लेते हुए अपने सीने मे भींच लिया. वो आँखे बंद किए हुए जैसे मेरे आगोश मे मक्खन के माफिक पिघलती जा रही थी. मैं उसकी गर्म साँसे अपने चेहरे को सुलगती हुई सी महसूस कर रहा था, आगे झुक कर मैने पहले उसके माथे पर और फिर उसके गाल पर उसके नाम (भीगे से) होंठो के करीब एक चुंबन दिया, फिर ऐसे ही मैने उसके दोनो गालो को बारी बारी चूमते हुए उसके थर थराते होंठो पर होंठ सटा दिए. उफफफ्फ़ क्या मीठा एहसास था. ऐसा नही था क़ि मैने इससे पहले चुंबन का मज़ा नही लिया पर नेहा मेरा प्यार थी शायद मॉम या किसी भी और से ज़्यादा. बाकी सब से मेरे रीलेशन मे प्यार था पर कहीं ना कहीं सेक्स भी था पर आज उसे भी कहीं ज़्यादा मज़ा इस किस मे था जहाँ बस प्यार ही प्यार था कोई सेक्स नही कोई वासना नही.

जाने कितनी देर मैं उसके गुलाबी होंठो को ऐसे ही चुसता रहा, वो जोश वो जुनून जो बाकियो के साथ मैं दिखाता था सब कहीं हवा हो गया था. मैं यू बिहेव कर रहा था की जैसे वो काँच की गुड़िया सी हो जो मेरे मसलने से कहीं टूट ना जाए.

“तुम बहुत खूबसूरत हो नेहा” किस तोड़ते हुए भारी आवाज़ मे मैं उसके कान मे फुसफुसा उठा “आई लव यूं जान”. उसके गाल पर किस करते हुए मैने उसके कान की लौ (रलोब) को अपनी जीभ से छेड़ने लगा तो उसके पूरे शरीर मे सिहरन सी दौड़ गयी जो मैं भी फील कर रहा था. इस दौरान उसकी आँखें बंद ही रही.

अभी-“नेहा…”

नेहा-“ह्म्मन…”

अभी- “आँखे खोलो ना जान”

उसने एक प्यारी सी स्माइल देते हुए कहा “मुझे शरम आ रही है”

अभी- “हाय मैं मर जावा…”

नेहा ने झट से आँखे खोल दी और अपनी हथेली मेरे होंठो पर रख दी. नेहा- “फिर कभी ऐसा मज़ाक मे भी मत बोलना जान, भगवान करे तुम्हे मेरी भी उमर लग जाए”

अभी- “इतना चाहती हो मुझे”

नेहा- “काश मैं तुम्हे दिखा सकती, तुम जानते हो मामां के घर हर दिन बल्कि हर पल बस तुम्हे याद कर के गुज़रा है. जब हमने अपने प्यार का इज़हार किया तभी मुझे तुमने वहाँ भेज दिया ये भी नही सोचा मैं कैसे रहूंगी तुम्हारे बिना”

अभी – “ये ज़रूरी था नेहा. मैं अभी तक इस लायक नही हूँ की तुम्हे इस दुनिया की कामिनी नज़रो से बचा सकूँ ये एहसास ही मेरे दिल को छलनी किए जा रहा था. फिर मेरे पास ऐसा भी कोई रास्ता नही था जिससे हम दोनो हमेशा के लिए एक हो सके.”

फिर कुछ रुक कर अभी फिर बोला “वैसे बदला अभी भी कुछ नही है लेकिन अब जो भी होगा हम मिलकर लड़ेंगे”

नेहा – “डॉन’ट वरी , आई एम ऑल्वेज़ वित यूं” और कसकर मुझे जकड़ लिया.

मैं भी और कुछ ना बोलते हुए उसके प्यार मे खो सा गया. पता ही नही चला कब ऐसे ही एक दूजे की बाँहो मे हम सो गये.
 
ऐसे ही लगभग 1.5 साल और बीत गया. मेरा बीबीए 2न्ड एअर कंप्लीट होने को था. इस बीच मैने सुनील के घर जाना अवाय्ड ही किया था, ममता और शीतल से मेरी मुलाक़ाते अक्सर बाहर ही होती थी, आईशा से मेरी ख़ास नही पट ती थी. सेक्स के लिए कभी होटल तो कभी कभार अकेले मौका मिलने पर मेरे घर पर मिल लेते थे.

प्रेम अंकल ने आना कम कर दिया था पर अब वो जब मर्ज़ी हो मॉम को अपनी बताई हुई जगह पर बुला लेते थे. नेहा के लिए भी वो ज़िद करते रहते थे की वो उन्हे एज अ पर्सनल असिस्टेंट जाय्न करे. पर मॉम ने स्टडी कंप्लीट होने तक उन्हे टाल दिया, की नेहा अग्री नही हो रही अभी. पर अब दीदी की भी स्टडी(ग्रॅजुयेशन) कंप्लीट होने जा रही थी.

एक दिन मैने ममता को एक रेस्टौरेंट मे मिलने बुलाया. कॉफी पीते हुए हम बात कर रहे थे.

अभी – “मुझे तुम्हे कुछ बताना था. आक्च्युयली मैं और शीतल एक दूसरे को पसंद करते हैं और मैं उससे शादी करना चाहता हूँ.”

पहले तो ममता हैरान हुई फिर मुस्कराते हुए बोली, “अगर ऐसा है तो मुझे कोई प्राब्लम नही पर अभी तुम दोनो की स्टडी भी कंप्लीट नही हुई और फिर प्रेम…. वो शायद कभी राज़ी ना हो.”

अभी- “ह्म… देखते हैं, पर तुम तो मेरे साथ हो ना”

ममता- “सच कहूं तो मैने ये एक्सपेक्ट नही किया था, पर मेरे साथ भी तो तुम जिंदगी तो बिता नही सकते”

अभी- “ऐसे मैं हमेशा तुम्हारे भी करीब रहूँगा, और शायद इस रिश्ते की बदौलत मैं प्रेम अंकल को नेहा दी से दूर भी रख पाउ”

ममता- “लेटस सी व्हाट हॅपन इन फ्यूचर. पर पहले मैं शीतल से बात करना चाहूँगी”

अभी- “नो प्राब्लम. मैं उसे बता चुका हूँ की आज मैं तुमसे बात करने वाला हूँ.”

ममता मुस्कराते हुए, “हमेशा खुश रखना मेरी बेटी को.”

उसके हाथ पर हाथ रख कर मैने कहा “आई प्रॉमिस”

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नेक्स्ट वीक…

मैं घर बैठा था की मेरे मोबाइल पर प्रेम अंकल की कॉल आई, उन्होने मुझे अपने ऑफीस मिलने के लिए बुलाया. मैं रेडी होके निकल पड़ा.

उनके ऑफीस मे,

प्रेम- “तो तुम और शीतल शादी करना चाहते हो”

अभी- “जी”

प्रेम- “और तुम ये भी सोच रहे हो की मैं इसकी पर्मिशन दे दूँगा…. नाइस कॉन्फिडेन्स”

मैने कोई जवाब नही दिया.

प्रेम- “तुम क्या सोच रहे हो तुम्हे और ममता को इतनी आसानी से मैं माफ़ कर दूँगा, भूल जाउन्गा सब कुछ”

कुछ देर खामोशी के बाद वो फिर बोला “वैसे मुझे तुम्हारी शादी से कोई एतराज़ नही है पर मेरी एक शर्त है”

अभी- “कैसी शर्त”

थोड़ा रुक के वो बोला “वेल…. मुझे नेहा चाहिए”

“य… ये… ये कैसे हो सकेता है” अभी ने लरजते हुए पूछा.

प्रेम- “ये फाइनल सज़ा होगी तुम दोनो के लिए, होप यूं विल नोट माइंड इट अह…”
 
मैने सब कोशिश की के वो नेहा को भूल जाए, पर प्रेम… वो तो जैसे ज़िद पे था. नेहा की खातिर मैं पीछे हटने के लिए भी बोल दिया पर वो….

मैं हार कर घर आ गया. मॉम मेरा उतरा हुआ चेहरा देख कर मेरे पास आके बैठ गइ और मेरे बालो मे हाथ फेरते हुए बोली, “क्या हुआ अभी, तुम प्रेम से मिलने गये थे ना”

अभी चौंक कर बोला- “आपको कैसे पता”

मॉम एक ठंडी साँस छोड़ते हुए बोली- “उसका कॉल आया था, उसने कहा है 15 दिन बाद जैसे ही नेहा के फाइनल एग्ज़ॅम्स ख़तम होंगे, उसे प्रेम का ऑफीस जाय्न करना होगा. ही कॅनट वेट मोर.”

मॉम- “वो बता रहा था क़ि तुम्हे भी बोल दिया है”

अभी- “मैं क्या करूँ मॉम”

मॉम- “मैं क्या कहूं अभी, मुझे पता है तुमने अपना बेस्ट ट्राइ किया होगा उसे रोकने के लिए, लेकिन अब उस कमीने से कमीनपन्ती से ही निपटना पड़ेगा, तुम अपना प्लान आगे बढ़ा सकते हो, मैं तुम्हारे साथ हूँ.”

“और मैं भी” पीछे से नेहा की आवाज़ आई.

मैं नेहा को देख खड़ा होके उसकी तरफ बढ़ गया. उसके पास जाते ही मैने उसे बाँहो मे भर लिया और भर्राइ सी आवाज़ मे बोला, “आई एम सॉरी मैं ये सब नही रोक पा रहा.”

नेहा ने भी कस के मुझे हग कर लिया. वो बोली, “अभी डोंट ब्लेम यू सेल्फ, हम तुम्हारे साथ हैं.”

फिर नॉर्मल होके हम अपने अपने रूम मे चले गये.

वक़्त अपनी रफ़्तार से निकल रहा था. और फिर वो दिन भी आ गया जान नेहा के एग्ज़ॅम्स ओवर हो गये.

रात को डिन्नर के बाद नेहा मेरे रूम मे आई. वैसे तो हम एक दूसरे से इज़हार तो कर ही चुके थे और एक दूसरे को अक्सर हग और छोटा मोटा किस भी हो जाता था पर हम कभी इससे आगे नही बढ़े.

आज नेहा की आँखों मे मैं कुछ और ही फील कर रहा था. नेहा धीरे धीरे चलती हुई आकर मेरे पास बेड पर बैठ गयी. मेरी आँखो मे झाँकेते हुए बोली, “वो … अभी मैं… मैं कल या परसो से ऑफीस जाय्न करूँगी”

अभी- “ह्म्मन्न.. सॉरी अगेन दी”

नेहा मेरे होंठो पे उंगली रखते हुए- “स्ष… अभी आई लव यूं और मैं अब तैयार हूँ जो भी होगा उसके लिए”

“पर दी, अगर कुछ ग़लती हो गयी तो…” अभी बोला.

नेहा “डॉन’ट वरी लास्ट मे सब वैसा ही होगा जो तूने सोचा है, लेकिन…”

अभी- “लेकिन क्या दी..”

नेहा – “अभी मैं… मैं ये चाहती हूँ की… की तुम…”

अभी- “बोलो दी”
 
नेहा मेरे होंठो पे उंगली रखते हुए- “स्ष… अभी आई लव यू और मैं अब तैयार हूँ जो भी होगा उसके लिए”

“पर दी, अगर कुछ ग़लती हो गयी तो…” अभी बोला.

नेहा “डॉन’ट वरी लास्ट मे सब वैसा ही होगा जो तूने सोचा है, लेकिन…”

अभी- “लेकिन क्या दी..”

नेहा – “अभी मैं… मैं ये चाहती हूँ की… की तुम…”

अभी- “बोलो दी”

नेहा सिर झुका कर बोली– “मैं….. मैं चाहती हूँ की… की मेरा 1स्ट् सेक्स तुम्हारे साथ हो”

मैने नेहा की ओर देखा, वो बिना आँख मिलाए वहीं खड़ी नीचे देख रही थी. मैने उस की ओर बढ़ते हुए उसे अपनी बाँहो मे भर लिया और अपने होंठो से उसके थरथराते होंठो को चूसने लगा. वो जैसे आँखे बंद किए मेरी बाँहो मे पिघल सी रही थी. साँसे उखड़ने तक हम एक दूसरे को किस करते रहे. फिर मेरे होंठ उसके गालो से होते हुए उसके कान के नीचे तक ले गया. उसकी गरम साँसे मैं अपनी गर्दन के पास फील कर रहा था. मैने उसके कान की लौ (रलोब) को अपने होंठो मे भर लिया तो वो जैसे सीत्कार कर उठी.

“यू आर वेरी ब्यूटिफुल जानू, आई लव यू” भारी से आवाज़ मे मैं उसके कान मे फुसफुसाया और जीभ से उसके कान को सहलाने लगा. मारे गुदगुदी के उसका पूरा शरीर मेरी बाँहो मे कंपकंपा उठा.

मेरा एक हाथ खुद ब खुद उसके नर्म चुचि पर तो दूसरा उसकी मस्त गान्ड को सहलाने लग गया. तभी वो अचानक मुझे बेड पर धकेल कर मुझ पर चढ़ गयी और बड़े ही वाय्लेंट तरीके से मुझे यहाँ वहाँ चूमने चाटने लगी. मैने भी जोश मे एक दो बार उसे काट लिया और गान्ड पर भी चिकोटी काट ली. उसने मेरी आँखो मे देखा.

कुछ ही देर मे हम दोनो के कपड़े बदन से जुड़ा अलग पड़े थे और हम एक दूजे मे खोए हुए थे. नेहा ना सिर्फ़ मेरा पहला और दिल की गहराइयो मे बसा हुआ प्यार थी बल्कि वो मेरी लाइफ मे आने वाली पहली वर्जिन पार्ट्नर थी. मैं तो बस उसमे खो ही गया था.

उस रात हम सब बंधन तोड़ एक हो गये थे. अगले दिन मैं जब सोकर उठा तो वो शायद अपने रूम मे जा चुकी थी. मैं भी उठा तो मेरी नज़र बेडशीट पर पड़ी जो मेरे प्यार की गवाही दे रही थी और उस लगा खून नेहा के समर्पण की.

उस खुमारी के नशे से बाहर आ मैं सब समेट कर तैयार होने बाथरूम मे घुस गया. क्योकि आज का दिन मेरे लिए भूत इंपॉर्टेंट था. आज मैं शायद बना रहु जो मैं था. अपराध गुनाह पाप सब मुझे अपने बदले के आगे छोटे लग रहे थे. मैं जल्दी तैयार होकर बिना किसी के सामने पड़े चुपचाप घर से निकल गया. नेहा को पिक करने प्रेम आने वाला था और मैं खुद अपने सामने नेहा को प्रेम के साथ जाते हुए नही देख सकता था.

पूरा दिन मैने यू ही घूम फिर के काट दिया, मॉम का फोन आया तो उन्हे मैने बहाना बना दिया क़ि ज़रूरी काम है रात तक लौटूँगा. अंधेरा होने के बाद मैं घर लौटा. मॉम ने खाने को पूछा तो मैने पूरा दिन कुछ ना खाया होने के बावजूद मना कर दिया. और अपने रूम मे चला गया.

थोड़ी देर मे नेहा खाने की प्लेट के साथ मेरे रूम मे आई. मैं बेड पर सिर झुकाए बैठा था. मेरे पास बैठ मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए वो बोली “अपना गुस्सा खाने पर क्यो निकाल रहे हो, जो हुआ उसके पॉज़िटिव साइड्स देखो”

मैने धीरे से सिर उठाया , मेरी आँखो मे आँसू थे. मैं भर्राइ आवाज़ मैं बोला “पर मैने ये कभी नही चाहा था”

नेहा- “डॉन’ट वरी सब ठीक हो जाएगा, पहले खाना खा”

मे- “मुझे भूख नही है”

नेहा- “मैं जानती हूँ क्यू, पर जब तक तू नही खाएगा मैं भी नही खाउन्गी”

मे- “क्या तुमने अब तक क्यू नही खाया”

नेहा- “मुझसे ज़्यादा इस वक़्त तुझे कौन समझ सकता है, और तू भूखा रहे और मैं खा लू ऐसा कैसे हो सकता है”

फिर हम दोनो ने साथ साथ बैठकर एक दूसरे को खाना खिलाया. बाद मे नेहा बर्तन लेकर जाने लगी तो मैने उसका हाथ थाम लिया और कहा, “मैं बहुत लोन्ली फील कर रहा हूँ, क्या तुम आज भी यही सो सकती हो.”

नेहा- “अभी आई” कहकर वो बर्तन रखने चली गयी.
 
कुछ देर बाद वो आकर मेरे पास ही लेट गयी. हम दोनो काफ़ी देर चुपचाप ऐसे ही एक दूसरे की बाँहो मे लेटे रहे, इससे कुछ मूड नॉर्मल हो गया. फिर नेहा बोली “पूछोगे नही की आज क्या हुआ”

“ह्म” मैं बस यही बोला.

एक ठंडी साँस लेते हुए नेहा बोली, “वो तुम्हारी और शीतल की शादी के लिए राज़ी हैं, पर एक शर्त है”

“क्या” मैने पूछा.

नेहा- “वो चाहता है की पहले उसकी शादी मुझसे हो जाए”

नेहा- “जैसा तुमने सोचा था वो आज ही मेरे साथ सेक्स करने के पीछे पड़ गया था, मैने उसे अपने वर्जिन होने का पूरा यकीन भी दिलवा दिया. जब वो पूरे पीक पर था तब मैने उसे अपनी उसके साथ और तुम्हारी शीतल के साथ शादी की बात कहीं तो वो राज़ी हो गया. वो ममता आंटी से भी डाइवोर्स लेगा क्योकि शी ईज़ प्रेग्नेंट बट नोट बाइ हिम. पर उसकी शर्त है की पहले उसकी शादी मेरे साथ होगी”

“ठीक है और वो काम” मैने पूछा

“वो ड्रग मैने उसकी शराब मे मिला दी थी” नेहा द्रढ स्वर मे बोली.

मे- “ ऐसे ही थोड़ी थोड़ी करके डोसेज बढ़ानी होगी, शक तो नही हुआ उसे”

नेहा- “नोप….. पर क्या हम सही कर रहे हैं.”

मे- “क्या कोई और रास्ता है हमारे पास…. और इस तरह हम भी तो लाइफ्टाइम साथ रह पाएँगे”

कहकर मैने उसे अपनी बाँहो मे ले लिया.

रात मे सेक्स के बाद नेहा मेरी बाँहो मे ही सो गयी होंठो पर एक कमिनी स्माइल आ गयी. मैं कुछ देर सब हालत सोचता हुआ खुद से बोल उठा- “अब तू अपने किए भुगतने के लिए तैयार होज़ा मिस्टर. प्रेम”

तो फ्रेंड्स आपको आइडिया तो लग ही गया होगा इनके प्लान का, बाकी सब इसी तरह चलता रहा तो अब स्टोरी थोड़ा फास्ट फॉर्वर्ड मोड मे लेजा कर एंड कर रहा हूँ.
 
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