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Incest-चुदासी फैमिली complete

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मनोहर तो दोनो मस्तानी रंडियो की मादक गंध और गर्मी पाकर पागल हुआ जा रहा था उधर सुधा की मोटी जाँघो पर पापा के हाथों के दबाव से सुधा की चूत भी फूल कर कुप्पा हो गई थी और चिकनाहट छोड़ने लगी थी और सोनू की बुर की फांके फड़फड़ाने लगी थी तभी सुधा खिलखिला कर हँसते हुए कहने लगी पापा मुझे तो बहुत डर लग रहा है तब मनोहर ने कहा बेटी आ मेरे पास आ जा और मनोहर ने सुधा के गले में हाथ डाल लिया और उसके पंजो में साइड से सुधा के मोटे मोटे बोबे आ गये और वह उन्हे हल्के हल्के मसल्ने लगा,

दूसरी और नीलम और रोहित भीड़ को चीरते हुए नीचे लगी दुकानो पर पहुच गये और नीलम झुक कर चीज़े देखने लगी भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि निकालने वाले लोग जानबूझ कर नीलम की झुकी हुई गुदाज मोटी भारी गान्ड देखते और हाथ फेर कर निकल जाते रोहित पास में खड़ा देख रहा था कि उसकी मम्मी की मोटी गदराई गान्ड को कैसे लोग सहला सहला कर निकल रहे है और मम्मी उस सब पर कोई ध्यान ना देते हुए झुके झुके समान के भाव पूछ रही है तभी दो लोंडे आए और उनमे से एक ने नीलम की गान्ड को पास में खड़े होकर बड़े प्यार से सहलाया तो उसके हाथ में नीलम की चूत वाला फूला हुआ हिस्सा भी महसूस हो गया और उस लोंडे ने अपने लंड को नीलम की गान्ड से सटा दिया और मुँह उठा कर समान के भाव पूछने लगा रोहित ने जब यह देखा कि उसकी मम्मी की मोटी गान्ड से कैसे उस लोंडे ने लंड का दबाव दिया है तब रोहित का लंड भी पॅंट में कुलबुलाने लगा, कुछ देर में उस लोंडे के साथी ने कहा जब अब आगे चलते है तब दूसरे ने कहा क्या गजब का माल है यार उसकी गुदाज गान्ड तो बहुत भारी है और रंडी ने पैंटी भी नही पहनी है, यह बात उसने अपने दोस्त से धीरे से कही लेकिन उन्हे यह नही पता था कि पास में उस औरत का बेटा उनकी बाते सुन रहा है, तब दूसरे लोंडे ने कहा तुझे कैसे पता उसने पैंटी नही पहनी है तब उस लोंडे ने कहा अभी मैने उसकी गान्ड और चूत को सहला कर देखा तो उसकी उभरी हुई पूरी चूत मेरे हाथ में आ गई, लगता है साली खूब बड़ी वाली रंडी है मैने उसकी चूत खूब कस कर दबाई लेकिन उसने पलट कर भी नही देखा तब दूसरे दोस्त ने कहा अब चल यार तू मरवाएगा कोई देख ना ले, और वह उसे खिचता हुआ आगे बढ़ गया,

रोहित खड़ा खड़ा सोचने लगा मम्मी तो वाकई पक्की रंडी है उस लोंडे ने उनकी पूरी चूत मुट्ठी में भर कर मसल दिया लेकिन मम्मी ने पलट कर भी नही देखा और वह कह रहा था कि मम्मी ने पैंटी भी नही पहनी है, रोहित बराबर अपनी मम्मी की उठी हुई गुदाज मोटी गान्ड को देख रहा था और फिर हिम्मत करके वह मम्मी की मोटी गान्ड पर हाथ रख कर हल्के हल्के दबाने लगा और जब उसका हाथ थोडा नीचे अपनी मम्मी की चूत पर गया तो मम्मी की फूली चूत का साइज़ महसूस करके उसका लंड झटके देने लगा तभी वहाँ भीड़ दुकान पर कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई हाथ को हाथ नज़र नही आ रहा था रोहित का हाथ बराबर अपनी मम्मी की पूरी चूत को सहला रहा था और एक दम बढ़ती हुई भीड़ देख कर रोहित से रहा नही गया और उसने अपनी मम्मी की पूरी चूत को अपनी मुट्ठी में भर कर कस कर दबोच लिया और फिर एक दम से हाथ हटा लिया लेकिन रोहित को यह देख कर घोर आश्चर्य हुआ कि नीलम ने एक बार भी पलट कर नही देखा और झुकी हुई समान देखती रही, रोहित का होसला बढ़ गया और उसने मन में सोचा कि मुझे तो आज पता चला कि मेरी मम्मी कितनी बड़ी रंडी है बहन्चोद खड़ी खड़ी अपनी मस्त चूत इतनी कस कस कर मसलवा रही है ज़रूर इसे खूब मज़ा आ रहा होगा तभी तो अपनी मोटी गान्ड उठाए मज़ा ले रही है और रोहित ने फिर से अपनी मम्मी की चूत को अपनी मुट्ठी में भर कर दबोच लिया और इस बार उसने हाथ जल्दी नही हटाया बल्कि अपनी मम्मी की चूत को खूब अच्छे से सहलाते और दबाते हुए जब चूत की फांको को उंगली से कुरेदा तो रोहित दंग रह गया उसकी मम्मी की चूत से खूब पानी छूट रहा था और उसकी लेग्गी गीली हो गई थी

रोहित के हाथ हल्के हल्के कांप भी रहे थे लेकिन भीड़ के चलते उसे ज़्यादा डर नही लग रहा था जब उसने हाथ को चूत से वापस गान्ड की गहरी दरार में लेकर आया तो अचानक उसकी बीच वाली उंगली लेग्गी के उस प्लेस पर चली गई जहाँ लेग्गी में छेद था और रोहित की उंगली उस छेद में घुसगई और जब रोहित की उंगली से उसकी मम्मी की गरम गुदा का छेद टच हुआ तो रोहित गन्गना उठा और वही नीलम के पेर काँपने लगे, लेकिन नीलम टस से मस नही हुई और रोहित ने हिम्मत करके उंगली को थोड़ा दबाया और उसकी उंगली का नाख़ून तक का हिस्सा गप्प से उसकी मम्मी की गुदाज मोटी गान्ड में उतर गया और रोहित अपनी मम्मी की मोटी गान्ड की गुदा की टाइटनेस्स्स को महसूस करके पागल हो रहा था, उधर नीलम का चेहरा रेड हो गया था लेकिन वह वही जमी रही लेकिन झुके झुके उसकी टाँगे दुखने लगी थी और वह एक दम से सीधी हो गई और रोहित ने बड़ी फुर्ती से अपनी उंगली निकाल ली तब नीलम नेमुसकुराते हुए रोहित की ओर देखा और कहा बेटे तुझे कुछ लेना हो तो ले ले , तब रोहित ने कहा मम्मी आप ले लो में बाद में दूसरी दुकान से कुछ खरिदुन्गा उसकी बात सुन कर नीलम थोड़ा दूसरे समान की ओर चली और दुकानदार को लिए गये समान का पैसा देने लगी इसी मोके का फ़ायदा उठाते हुए रोहित ने जब अपनी उस उंगली को सूँघा तो उसके लंड ने एक ज़ोर का झटका मार दिया रोहित अपनी मम्मी की मोटी गदराई गान्ड की मादक गंध सूंघ कर मस्त हो गया था,

अभी नीलम उस दुकान से आगे बढ़ कर एक दूसरी दुकान पर पहुच गई जहाँ घरेलू किचन सेट बिक रहा था और वह वहाँ फिर से अपनी मोटी गान्ड जैसे ही झुका कर समान देखने लगी एक बुढ्ढा अपने हाथ से उसके चुतड़ों को थपकी मारते हुए पास से निकल गया और रोहित उसे देखता ही रह गया वहाँ भी भीड़ काफ़ी थी और रोहित ने अपने हाथ से नीलम की गान्ड पर धीरे से हाथ फेरा और फिर से अपनी उंगली को उसी लेग्गी के छेद में डाला और हाल से दबाया तो उसकी नाख़ून तक की उंगली फिर से उसकी मम्मी की गुदाज गान्ड में घुस गई रोहित ने कुछ देर उंगली डाले रखा फिर धीरे से उंगली निकाल कर उसने इधर उधर देखते हुए उंगली को अपने मुँह में डाल कर उसे पूरा थूक से गीला किया और फिर उंगली को हल्के से उसी छेद में जैसे ही डाला इस बार उसकी आधी उंगली उसकी मम्मी की गान्ड की गुदा में समा गई और नीलम के मुँह से एक हल्की सी सिसकारी निकल गई, रोहित तो पागल हुआ जा रहा था क्यो कि जैसे ही उसकी उंगली उसकी मम्मी की गान्ड की गुदा में आधी घुसी नीलम ने अपनी गुदा को कस कर सिकोड लिया और रोहित की उंगली पर जब उसकी मम्मी की मोटी गदराई गान्ड की गुदा का कसाव महसूस हुआ तो वह मस्त हो गया और उंगली को वैसे ही अपनी मम्मी की गान्ड में फसे रहने दिया कुछ देर बाद नीलम ने अपनी गुदा को वापस ढीली छोड़ा तो रोहित ने अपनी उंगली को थोड़ा और आगे सरका दिया और उसकी उंगली आधे से ज़्यादा उसकी मम्मी की गुदाज गान्ड में घुस गई और नीलम ने फिर से अपनी गुदा को खूब ज़ोर से कस लिया, रोहित का लंड तो ऐसा लग रहा था मानो फट जाएगा, और नीलम को इतना मज़ा आ रहा था कि वह चूत से पानी ही पानी छोड़ रही थी,

लेकिन नीलम के मन में यह सवाल भी खड़ा हो रहा था कि उसकी मोटी गान्ड में उंगली कोई और कर रहा है या फिर उसका अपना बेटा रोहित, उसने एक झटके से सीधे होते हुए रोहित की ओर देखा और रोहित की उंगली नीलम की मोटी गान्ड में फसि ही रह गई और रोहित की गान्ड फट गई अब नीलम गान्ड को कस कर सिकोडे हुए रोहित से कहने लगी बेटे यह किचन सेट कैसा है और रोहित घबराते हुए कहने लगा बहुत अच्छा है मम्मी लेकिन रोहित अपनी उंगली निकालने की पोज़िशन में नही था और नीलम ने मुस्कुराते हुए कहा ठीक है फिर ले लूँ यह किचन सेट तब रोहित ने कहा जी मम्मी और नीलम ने जैसे ही दुकान दार की ओर देखा रोहित ने ताक़त लगा कर सट से उंगली जैसे ही बाहर खींची नीलम के मुँह से आह निकल गई, और रोहित की जान में जान आई, नीलम यह जान चुकी थी कि उसका अपना बेटा उसकी मोटी गान्ड में गहराई तक उंगली भर कर मज़े ले रहा है और वह मन ही मन बहुत खुस थी, उधर रोहित भी समझ गया था कि मम्मी जान चुकी है कि उसकी मोटी गान्ड में उसी की उंगली थी लेकिन रंडी नाटक कैसे कर रही है जैसे उसे पता ही ना हो फिर भी रोहित कॉन्फिडेंट नही था कि उसकी मम्मी यह जान चुकी है कि वो ही उसकी गान्ड में उंगली कर रहा था, भीड़ बहुत थी तो रोहित ने सोचा उसकी मम्मी ने उसके हाथ की ओर तो देखा नही इसलिए कह नही सकते हो सकता है उसकी मम्मी दूसरे का हाथ अपनी मोटी गान्ड में सोच रही हो,

 
अभी नीलम थोड़ा आगे जाकर एक दुकान के सामने फिर से झुक गई और उसकी मोटी गान्ड के उभार को देख कर रोहित ने धीरे अपनी पूरी उंगली को थूक में भिगो लिया और इस बार बिना डरे उसने धीरे से उंगली अपनी मम्मी की मोटी गान्ड में डाल कर जैसे ही उंगली को अंदर दबाया थूक की चिकनाहट से उसकी उंगली पूरी की पूरी उसकी मम्मी की मोटी गान्ड में गुदा में समा गई और नीलम के मुँह से आह सीई जैसी कराह निकल गई, रोहित अपनी मम्मी की गान्ड में उंगली धीरे धीरे चलाने लगा और नीलम झुकी हुई आनद के सागर में गोते खाने लगी, रोहित नीलम की मोटी गान्ड के बिल्कुल पीछे खड़ा हुआ था ताकि किसी की नज़र ना पड़े और अब उसकी उंगली गपगाप उसकी मम्मी की गुदाज गान्ड में अंदर बाहर हो रही थी, तभी दो लोग रोहित के पास से निकले और एक भाई का धक्का रोहित की कोहनी में लगा और उसकी पूरी उंगली सट से नीलम की मोटी गान्ड में जड़ तक समा गई और नीलम के मुँह से ओह्ह की आवाज़ निकली तब दुकानदार ने पूछा क्या चाहिए बहन जी, नीलम ने अपने माथे का पसीना पोछते हुए कहा यह मथानी कैसी दी तब रोहित ने वापस अपनी उंगली को बाहर खिचते हुए फिर से अपनी मम्मी की गुदाज गान्ड में पेल दी और नीलम आनद से दोहरी हो गई रोहित को अपनी मम्मी की कसी हुई गुदा में उंगली पेलने से एक अनोखा मज़ा मिल रहा था और उसका लंड फटा जा रहा था उधर नीलम की चूत पूरी पानी पानी हो गई थी,

दूसरी तरफ सुधा और सोनू की चूत भी काफ़ी गीली हो गई थी और झूला झूलते हुए दोनो ने कई बार डरने का बहाना करते हुए मनोहर को पकड़ने की आक्टिंग करते हुए उसके खड़े और मोटे लंड को दबा दबा कर महसूस किया और मनोहर ने सुधा और सोनू की मोटी जाँघो और बड़े बड़े बोबो को उन्हे पकड़ने के बहाने से खूब सहलाया उसका लंड पूरी औकात में खड़ा था फिर कुछ देर बाद वह झूले से नीचे उतर आए, तभी सोनू की निगाह सामने जूस सेंटर पर गई और वह मनोहर से मुस्कुराते हुए कहने लगी पापा मुझे जूस पीना है, मनोहर ने एक दम से चौुक्ते हुए उसकी ओर देखा तो सोनू ने हँसते हुए जूस सेंटर की ओर इशारा किया तब मनोहर भी मुस्कुरा कर सुधा और सोनू के चुतड़ों को थामे हुए जूस सेंटर की ओर चल दिया, जूस पीते हुए सुधा और सोनू एक दूसरे को देख देख कर मुस्कुरा रही थी उसके बाद मनोहर पैसे देने गया तब सुधा ने कहा भाभी कुछ खास मज़ा नही आ रहा है, कुछ करो ना, सोनू उसकी बात सुनते हुए कहने लगी रुक जा में कुछ सोचती हूँ, फिर सोनू के दिमाग़ में एक आइडिया आया और उसने मुस्कुराते हुए कहा सोच लिया तब सुधा ने कहा बताओ ना भाभी क्या सोचा है, तब सोनू ने कहा तू पापा को आने दे फिर तू खुद ही समझ जाएगी उसके बाद मनोहर वापस आया और कहने लगा हाँ भाई अब कहाँ चलना है,

सोनू ने कहा पापा एक प्राब्लम है तब मनोहर ने कहा क्या हुआ बेटे तब सोनू ने मनोहर के कान के पास आते हुए धीरे से कहा पापा सुधा को बहुत तेज पेशाब लगी है, यह सुनते ही मनोहर ने सुधा की ओर देखा तब सुधा ने भी ऐसा मुँह बना लिया जैसे उससे अभी मूत आ आएगा, तब मनोहर ने कुछ सोचते हुए कहा बेटी यहाँ तो कॉंप्लेक्स नही मिलेगा हमे मेले के आख़िरी छोर पर जाना पड़ेगा तब सोनू ने कहा तो चलिए ना पापा मुझे भी बहुत तेज लगी है, सोनू ने भी मुँह बनाते हुए कहा तब मनोहर ने नज़र बचाते हुए अपने खड़े लंड को सहलाया और कहने लगा ठीक है चलो और फिर तीनो मेले के एंड पॉइंट की ओर जाने लगे,

उधर रोहित ने अपनी मम्मी की मोटी गान्ड अपनी उंगली से मार मार कर उसे बहाल कर दिया था, लेकिन नीलम के पेर झुके होने की वजह से दर्द करने लगे थे और वह धीरे से सीधी हुई तब रोहित ने सट से अपनी उंगली बाहर निकाल ली और नीलम ने उसकी ओर देखा तो उसका चेहरा लाल पड़ा हुआ था और उसने रोहित से कहा बेटे मेरे तो पेर दर्द कर रहे है चल कही बैठ कर कुछ खाते पीते है तब रोहित उसे एक रेस्टोरेंट में ले गया और वहाँ खाने की चीज़ो का ऑर्डर कर दिया और साथ में चाइ भी,

रोहित की नज़रे बार बार नीलम के भारी मोटे मोटे दूध पर जा रही थी जिसे नीलम ने नोटीस किया और जब दोनो की नज़रे मिली तो दोनो एक दूसरे को देखते हुए मुस्कुरा दिए तभी उनकी टेबल पर नाश्ता आ गया और दोनो खाने लगे,

नीलम : रोहित को मुस्कुराते हुए देख कर, बेटे तू कहीं सोनू को मिस तो नही कर रहा क्योकि मेले जैसे महॉल में तो लोग अपनी बीबी के साथ घूमना फिरना पसंद करते है

रोहित : नही मम्मी मुझे तो आपके साथ अच्छा लग रहा है, नीलम ने उसकी बात सुन कर एक स्माइल दी और फिर से खाने लगी

रोहित : मम्मी एक बात कहूँ

नीलम : बोल बेटे

रोहित : मम्मी उस दिन आपके पेट को सहलाते हुए चूमने पर बहुत अच्छा लगा था सच में आपका पेट बहुत अच्छा है

नीलम: रोहित को आँखे फाड़ फाड़ कर देखती हुई स्माइल देकर कहने लगी बेटे अब तो तेरे पास सोनू जैसी अप्सरा है फिर तुझे अपनी मम्मी का पेट क्यो पसंद आया है

रोहित : मम्मी आपके पेट के आगे सोनू की तुलना कहाँ

नीलम ; क्यो सोनू अच्छी नही लगती तुझे

रोहित : नही वो बात नही है मम्मी बस वह थोड़ी स्लिम है और मुझे.........

नीलम : रुक क्यो गया और तुझे क्या स्लिम लड़की पसंद नही है

रोहित : मुस्कुराते हुए मम्मी अब में आपसे कैसे कहूँ

नीलम : आखे दिखाते हुए अरे तू फिर शरमाने लगा, में सब जानती हूँ तू क्या कहना चाहता है

रोहित : मम्मी को मुस्कुराते हुए देख कर कहने लगा अच्छा तो बताइए में क्या कहना चाहता हूँ

नीलम ; बाइट मुँह में डालती हुई, यही कि तुझे सोनू जैसी स्लिम लड़की की बजाय मेरे जैसे मोटी तगड़ी औरते पसंद है यही ना

रोहित : मुस्कुराते हुए इधर उधर देख कर अग्री करता है

नीलम : सही कहा ना , आख़िर तेरी माँ हूँ अपने बेटे के दिल का हाल नही समझूंगी क्या

तब रोहित ने मन ही मन में कहा मम्मी काश तुम यह भी समझ जाती कि में तुम्हारी मोटी गुदाज गान्ड को पूरी नंगी करके पहले खूब चूसना चाहता हूँ और फिर तबीयत से अपने मोटे लंड से तुम्हारी मोटी गान्ड मारना चाहता हूँ

नीलम : क्या सोचने लगा में सही कह रही हूँ ना

रोहित : मम्मी आप तो अंतर्यामी है रोहित ने हँसते हुए कहा

नीलम : अच्छा सोनू को पता है कि तुझे गदराए बदन की औरते ज़्यादा अच्छी लगती है

रोहित पानी मम्मी के मुँह से गदराए बदन जैसे शब्द सुन कर पागल हुआजा रहा था और उसका लंड फिर से खड़ा हो गया था

 
रोहित : नही मम्मी मैने उससे कभी ऐसा कुछ कहा नही

नीलम: क्यो ऐसी बाते तो लोग अपनी बीबी से कर लेते है कहीं तू सोनू से भी लड़कियो की तरह तो नही शरमाता है

रोहित : मुस्कुराते हुए नही मम्मी ऐसी बात नही है

नीलम : अच्छा बता मेरा फिगर तुझे कैसा लगता है

रोहित : मम्मी आपकी तो बात ही अलग है

नीलम : मुस्कुराते हुए अच्छा इसीलिए तेरा मन मेरा पेट चूमने और सहलाने का कर रहा है

रोहित : हँसते हुए नही मम्मी बस मुझे उस दिन बहुत अच्छा लगा था इसलिए आप से कह दिया

नीलम : फिर से सहलाएगा, नीलम ने रोहित की आँखो में कातिल निगाहे डालते हुए पूछा

रोहित : रोहित शरमाते हुए मम्मी आप कहेगी तो सहला दूँगा

नीलम : मुस्कुराते हुए, अच्छा ठीक है घर चल कर जितना मन करे सहला लेना और चूम लेना

रोहित : मुस्कुराते हुए मम्मी यू आर वेरी स्वीट

नीलम : हँसते हुए में स्वीट हूँ या मेरा पेट

रोहित : मम्मी आप तो उपर से लेकर नीचे तक पूरी स्वीट है

नीलम : मुस्कुराते हुए, बस बस अब ज़्यादा तारीफ ना कर और चल पैसे देकर आ और चल कर देखते है तेरे पापा दोनो को कहाँ लेकर घूम रहे है और फिर दोनो रेस्टोरेंट से बाहर वापस भीड़ में आ जाते है, और दूसरी तरफ सोनू और सुधा मनोहर को लेकर मेले के आख़िरी छोर पर पहुच जाते है जहाँ सुनसान था लेकिन मेले की रोशनी वहाँ आ रही थी लेकिन वहाँ कोई आड़ नही थी और पूरा मैदान दिखाई दे रहा था,

सोनू : पापा आप उधर मुँह कर लीजिए हम पेशाब करके आती है और सोनू ने सुधा का हाथ पकड़ा और थोड़ा आगे जाने लगी तब मनोहर ने कहा बेटी ज़्यादा आगे मत जाओ यहाँ कोई नही देख रहा है जल्दी से कर लो, खेत में कोई कीड़ा वग़ैरह ना हो तब सोनू ने मुस्कुराते हुए मनोहर को देखा और सुधा से कहा सुधा यहीं कर ले सुधा तो रंडी तैयार ही थी उसने अपनी स्कर्ट उपर उठा दी और मनोहर ने कनखियों से जब अपनी बेटी सुधा की मोटी भारी गान्ड और उसके खुले हुए पाटो को देखा तो उसका लंड भनभना गया, सोनू बराबर मनोहर को कनखियो से देख रही थी कि मनोहर अपने लंड को कैसे पॅंट के उपर से मसल्ते हुए अपनी बेटी सुधा की गुदाज मोटी गान्ड को देख रहा है सुधा नीचे बैठ गई और उसकी चूत से फव्वारे के साथ पेशाब निकलने लगा और उसकी पेशाब के साथ निकलने वाली सीटी की आवाज़ जब मनोहर के कानो में पड़ी तो वह पागल हो उठा और किसी पागल कुत्ते की भाँति अपनी बेटी की चूत से निकलने वेल पेशाब की मोटी धार को देखने लगा, कुछ देर तक सुधा ने पेशाब की और फिर धीरे से खड़ी हो गई

उसके बाद उसने मुस्कुरा कर पापा की ओर देखा तो मनोहर ने दूसरी ओर मुँह कर लिया तब दोनो ननद भाभी मुस्कुराने लगी तब सुधा ने कहा भाभी आप भी मूत लो, तब सोनू ने बड़े आराम से अपनी सलवार का नाडा खोला और उसे अपने भारी चुतड़ों से नीचे सरका कर अपनी गुदाज गान्ड को अपने ससुर जी को दिखाते हुए मूतने के इए बैठ गई उसकी चूत से भी खूब मोटी पेशाब की धार निकलने लगी और एक सीटी की आवाज़ जब हुई तो मनोहर ने अपनी बहू के चतड़ो को घूरते हुए अपने लंड को खूब मसला सुधा अपने पापा की प्यासी निगाहो को देख कर स्कर्ट के उपर से अपनी रसीली बिना बालो वाली चूत को मसलने लगी कुछ देर बाद सोनू मूत कर उठी और सुधा को मुस्कुराते हुए देखने लगी और अपने स्कर्ट को उपर कर लिया और फिर दोनो मनोहर के पास आई तब सोनू ने मनोहर के पॅंट में बने हुए टॅट को देखते हुए कहा पापा आप को लगी हो तो आप भी कर लीजिए तब मनोहर ने कहा हाँ बेटी में भी कर ही लेता हूँ और मनोहर ने आगे जाकर अपने लंड को चैन खोल कर बाहर निकाला और लंड के टोपे को पीछे सरका कर लंड को मसल्ने लगा,

उसका लंड और भी तन कर खड़ा हो गया और उसे खड़े लंड में पेशाब आ ही नही रही थी कुछ देर तक वह लंड को मसल्ते रहा फिर बड़ी मुश्किल से लंड को चैन के अंदर ठुसने की कोशिश करने लगा सुधा और सोनू मुँह फाडे मनोहर की हरकते देख रही थी और दोनो समझ रही थी कि पापा का मोटा लोला खड़ा है और उन्हे मूत आया ही नही फिर मनोहर ने जैसे तैसे लंड को अंदर लिया और उन दोनो के करीब आने लगा दोनो लोन्डियो की निगाहे मनोहर के लंड पर ही टिकी हुई थी और जब मनोहर पास आ गया तब दोनो मुस्कुरा दी और मनोहर ने कहा चलो अब चलते है रोहित और नीलम भी हमे ढूँढ रहे होंगे और फिर तीनो मेले की ओर जाने लगे

 
कुछ देर बाद सभी मिल जाते है और सोनू अपनी सास के चुतड़ों की ओर देख कर धीरे से कहती है मम्मी जी लगता है आप बहुत मज़े ले कर आ रही है नीलम कहती है क्यो तब सोनू कहती है आपकी लेग्गी बहुत गीली हो रही है तब नीलम उसकी ओर देख कर मुस्कुरा देती है, मेले में सोनू सुधा और नीलम की मोटी मोटी गान्ड और बोबो को भीड़ में बहुत से लोगो ने सहलाया और दबाया और मोका मिलने पर मनोहर और रोहित ने भी खूब मज़े लिए पूरे मेले में तीनो रंडियो की चूत बराबर पानी छोड़ती रही और दोनो मर्दो के लंड पूरे समय टाइट रहे रात को 12 बजे तक उन्होने मेले के भरपूर आनद लिए फिर वापस स्कॉर्पियो में आकर बैठ गये इस बार मनोहर ने कहा यार मुझे तो थकान हो रही है गाड़ी कौन चलाएगा तब नीलम ने कहा में चला लेती हूँ आप पीछे आराम से बैठ जाओ सोनू और सुधा पीछे बैठी थी मनोहर के आने पर सुधा बाहर आ गई और मनोहर को बैठने दिया और फिर वह भी बैठ गई अब मनोहर बहू और बेटी के बीच फसा हुआ था और दोनो के जिस्म से आती महक उसके लंड को फिर से खड़ा करने लगी थी, सभी लोग थके हुए थे इसलिए कोई भी बात नही कर रहा था नीलम गाड़ी चला रही थी और रोहित उसके पास बैठा हुआ था, नीलम ने पीछे देखा तो सुधा सोनू और मनोहर तीनो आँखे बंद किए हुए बैठे थे नीलम ने एक नज़र रोहित की ओर डाली और फिर उसके हाथ को पकड़ कर अपने गुदाज पेट पर रख दिया रोहित ने मम्मी को मुस्कुरा कर देखा और उसके मखमली पेट और गहरी नाभि को सहलाने लगा उधर मनोहर का एक हाथ सुधा की मोटी जाँघो को सहला रहा था और दूसरा हाथ सोनू की जाँघो को सहला रहा था,

सोनू और सुधा आँखे बंद किए हुए थी लेकिन उनकी चूत काफ़ी गरम हो रही थी, तभी सुधा ने कहा पापा में आपकी गोद में सर रख लूँ तब मनोहर ने कहा क्यो नही बेटे और सुधा ने अपने सर को मनोहर के गोद में रखा तो उसके दिल की धड़कने बढ़ गई उसका सर मनोहर के खड़े लंड पर रखा हुआ था और उसने अपने गालो को लंड के उपर लाकर रख लिया जिससे मनोहर के कड़क लंड पर दबाव पड़ा और उसकी उत्तेजना और भी बढ़ गई अब मनोहर ने सुधा की कमर पर हाथ रख लिया और दूसरे हाथ से सुधा के गोरे गोरे भरे हुए गालो को सहलाने लगा और दूसरे हाथ से सुधा की कमर से हाथ धीरे से उसकी मोटी गान्ड के उपर रख कर हल्के हल्के अपनी बेटी की गदराई गान्ड को सहलाने लगा, सोनू ने उन दोनो की पोज़िशन को देखते हुए कहा मम्मी पीछे की लाइट ऑफ कर दीजिए ना आँखो में पड़ रही है तब नीलम ने पीछे की लाइट ऑफ कर दी अब मनोहर ने सुधा के रसीले होंठो पर उंगलिया फिराते हुए उसकी स्कर्ट जो कि उसकी मोटी गुदाज जाँघो पर चढ़ि हुई थी को हल्के से सरका दिया और सुधा के नंगे मक्खन की तरह चिकने और भारी चुतड़ों को हल्के हल्के दबोचने लगा,

सुधा की चूत तो उसकी इस हरकत से पूरी रसीली हो गई थी और जब मनोहर ने हाथ को और आगे लेजा कर सुधा की मोटी गान्ड की दरार में हाथ फेरा तो उसके लंड के ज़ोर से सुधा का सर उठाने लगा तब सुधा ने एक हाथ को अपने गालो के नीचे रख कर अपने हाथ में पापा के मोटे लंड को दबा लिया पापा के मोटे लंड की मोटाई ने सुधा को पागल कर दिया और वह हल्के हल्के मनोहर के लंड को दबाने लगी तभी मनोहर का हाथ सुधा की गान्ड की गहरी दरार में पहुच गया और उसने जब अपनी उंगलियो से सुधा की गुदा को कुरेदा तो सुधा मस्ती में पागल हो गई, अब मनोहर ने अपने हाथ से सुधा की गान्ड के छेद में उंगली पेली और जब उसकी थोड़ी सी उंगली सुधा की टाइट गान्ड के छेद में घुसी तो सुधा के मुँह से हल्की सी कराह निकल गई,

तब मनोहर ने अपनी उंगली को उसकी मोटी गान्ड से निकाल कर सूँघा और उसके लंड ने सुधा की मोटी गदराई गान्ड की मादक गंध के चलते झटके देना शुरू कर दिया मनोहर ने पूरी उंगली को अपने मुँह में भर कर उसे अपने थूक से पूरी गीली कर लिया और फिर इस बार मनोहर ने अपनी उंगली को धीरे धीरे अपनी बेटी सुधा की गुदाज गान्ड में दबाना शुरू किया उसकी उंगली फिसलती हुई जैसे जैसे सुधा की गान्ड में घुसने लगी सुधा के हाथो की पकड़ अपने पापा के लंड पर और मजबूत होती जा रही थी, सुधा की मोटी गान्ड की टाइटनेस मनोहर को पागल किए जा रही थी और मनोहर ने थोड़ी कोशिश कर के अपनी पूरी उंगली अपनी बेटी सुधा की मोटी गदराई गान्ड के छेद में पेल दी,

सुधा का मन कर रहा था कि वह खूब ज़ोर ज़ोर से सीसीया दे उसको मीठा मीठा दर्द उसे पागल किए जा रहा था फिर मनोहर ने एक हाथ से सुधा के मोटे मोटे दूध को दबोच लिया उसकी बेटी पूरी तरह उसके काबू में थी और उसके लंड को खूब दबा दबा कर मसल रही थी हल्की रोशनी में सोनू उन दोनो की मस्ती भरी हरकत देख देख कर पागल हो रही थी मनोहर ने अपनी उंगली को सुधा की मोटी गान्ड से थोड़ा बाहर खींचा और फिर से उसे उसकी गुदाज गान्ड में ठूंस दिया अब मनोहर लगातार सुधा की मोटी गान्ड में उंगली अंदर बाहर करता जा रहा था उसकी गान्ड का कसाव मनोहर को पागल कर रहा था और अपनी बेटी के पत्थर की तरह कठोर बड़े बड़े बोबो को दबाने में उसे बहुत मज़ा मिल रहा था,

सुधा अपनी मोटी गान्ड में कभी अपने पापा की उंगली पूरी कस लेती और कभी गान्ड की गुदा को एक दम ढीला छोड़ देती थी लेकिन वह उस समय गन्गना उठी जब मनोहर ने अपनी दूसरी उंगली को सुधा की चूत की फांको में रगड़ते हुए उसकी चूत के छेद में उंगली लगा दी अब वह उसकी गान्ड में उंगली पेलते हुए उसकी चूत की फांको को खोल कर उनकी मसाज भी कर रहा था और सुधा अपने पापा के मोटे लंड को दबा दबा कर मसल्ने के लिए मजबूर थी लेकिन मनोहर ने जब सुधा के मोटे मोटे दूध को एक बार कस कर दबा दिया तो सुधा के मुँह से आह की आवाज़ निकल पड़ी, मनोहर की उंगली काफ़ी सुख गई थी और बहुत मुश्किल से सुधा की गान्ड में घुस रही थी उसने एक बार सुधा की गान्ड से सट से उंगली बाहर निकाली और उसे पहले सूंघते हुए सुधा के दूध को कस कर दबाया और फिर उसने उस उंगली को एक बार और अपने मुँह में डाल कर अपनी लार से पूरी गीली कर ली और फिर से उसने सुधा की गुदा में घुसा दी, सुधा का बदन काँपने लगा उसे लग रहा था कि उसका मूत निकल जाएगा, उसने पापा के लंड को कस कर अपनी मुट्ठी में भींच रखा था तभी सुधा को एक दूसरा हाथ उसके हाथ पर पड़ता महसूस हुआ सुधा को समझते देर ना लगी कि उसकी भाभी भी अंधेरे का फ़ायदा उठा कर पापा के मस्त लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर मसलना चाहती है उसने अपने हाथ को हटा कर भाभी के हाथ को पकड़ कर पापा के मोटे लंड पर रख दिया सोनू के हाथ में जैसे ही पापा का लंड आया उसने उनके लंड को अपनी मुट्ठी में कस लिया और सलवार के उपर से अपनी चूत को सहलाते हुए पापा के लंड की मोटाई को महसूस करने लगी,

 


उधर रोहित मम्मी के पेट और गहरी नाभि को सहला रहा था फिर उसने अपना हाथ हटा लिया शायद वह कंफर्ट महसूस नही कर रहा था नीलम ने भो उचका कर मुस्कुराते हुए उससे इशारे में पूछा कि वह उसके मसल पेट को क्यो नही सहला रहा है, तब रोहित ने धीरे से उसके कानो के पास जाकर कहा मम्मी घर पहुच कर करेगे यहाँ मज़ा नही आ रहा है, तब नीलम ने कहा ओके हम सोने से पहले छत पर जाकर घूमेगे ओके, रोहित ने अपनी मम्मी के मुस्कुराते हुए गालो की पप्पी ले ली, उधर मनोहर के लंड को सोनू बुरी तरह सहला और दबा रही थी उसे लग रहा था कि उसका लंड मज़े में फट जाएगा और उसे जितना जोश आता उतने ही जोश से वह सुधा के बोबे मसलता और उसकी मोटी गान्ड में गहराई तक उंगली पेल रहा था, सुधा को अब बहुत मज़ा आ रहा था उसकी चूत बुरी तरह गन्गना उठी थी और फिर एक ब्रेकर आया और नीलम ने ब्रेक मारा और मनोहर ने इस बार कस कर सुधा की गान्ड में अपना पूरा हाथ उंगली सहित दबा दिया और सुधा की चूत से पानी छूट गया और उसकी साँसे बहुत तेज़ी से उपर नीचे होने लगी उसकी छातियाँ फूल कर डबल हो गई थी जिन्हे मनोहर अभी भी खूब कस कस कर मसल रहा था, तभी नीलम ने गाड़ी अपनी कॉलोनी के अंदर मोड़ दी और जैसे ही सामने घर आया मनोहर ने अपनी उंगली बाहर निकाल कर उसे कस कर सूँघा और तब तक सोनू भी अपने हाथ को मनोहर के लंड से हटा चुकी थी और गाड़ी का ब्रेक लग गया और नीलम ने कहा उठो भाई घर आ गया और सुधा और सोनू उबासी लेते हुए उठ गई, सभी लोग नीचे उतर आए और घर के अंदर एंटर हो गये घर में आते ही मनोहर ने कहा सोनू बेटे चाइ की नीड है गरमा गरम चाइ हो जाए उसके बाद सोते है सोनू ने कहा जी पापा और वह सुधा का हाथ पकड़ कर किचन की ओर चल पड़ी और मनोहर नीलम और रोहित सोफे पर धँस गये,

सोनू : सुधा के बोबे दबोचते हुए क्यो ननद रानी तेरी चाल क्यो बदली हुई लग रही है

सुधा : मुस्कुराते हुए भाभी चुप करो ना मुझे बहुत खुजली हो रही है पीछे

सोनू : धीरे से उसे कहने लगी पापा ने पूरी उंगली डाल दी थी क्या तेरी गान्ड में

सुधा : मुस्कुराते हुए हुउऊँ..

सोनू : यार पापा का लंड कितना मोटा और तना हुआ था, मैने तो जब अपनी मुट्ठी में लिया तो समा नही रहा था,

सुधा ; बहुत मोटा है भाभी में तो खुद पागल हुई जा रही थी

सोनू : अब काम बन सकता है हम दोनो का

सुधा : मुस्कुराते हुए, कौन सा काम

सोनू : बन मत पापा का लंड खाना है कि नही

सुधा : मुस्कुराते हुए हाँ खाना हैना

सोनू : लेकिन मम्मी और रोहित के होते कम कैसे बनेगा

सुधा : मोका देखते है उसके बाद ही काम बनेगा

सोनू ; मुस्कुराते हुए हुउऊँ....

उसके बाद सोनू चाइ लेकर हॉल में आ गई और सब बैठ कर चाइ पीने लगे, मनोहर ने चाइ ख़तम करते हुए कहा भाई मुझे तो बड़ी थकान लगी है मैं तो सोने जा रहा हूँ गुड नाइट और मनोहर उठ कर अपने रूम में आ गया तब सुधा ने कहा मुझे भी नींद आ रही है में भी जा रही हूँ और सुधा भी अपने रूम में चली गई, नीलम ने कहा सोनू मज़ा आ गया मेले में तो तब सोनू ने कहा मम्मी मैने तो आप से पहले ही कहा था बहुत अच्छा मेला लगता है, रोहित ने कहा मम्मी चलिए थोड़ा छत पर घूमते है मुझे तो अभी नींद नही आ रही है, तब नीलम ने कहा बेटे सोनू को नींद आ रही होगी, सोनू ने कहा हाँ मम्मी में तो सोने जा रही हूँ और सोनू रोहित की ओर मुस्कुराते हुए अपने रूम की ओर चली गई,

रोहित ; मम्मी चले छत पर

नीलम : मुस्कुराते हुए बेटे सोनू तेरा वेट कर रही होगी

रोहित : अच्छा आप छत पर चलिए में दो मिनिट में आता हूँ और रोहित अपने रूम में चला गया

रोहित : क्या बात है डार्लिंग बहुत थक गई क्या

सोनू: हाँ जी थकान तो लगी है पर तुम कहो तो मेहनत कर सकती हूँ, सोनू ने अपने पाजामे को उतारते हुए कहा

रोहित ; यार आज मन नही कर रहा है, तुम सो जाओ में छत पर घूम कर आता हूँ

सोनू ; अच्छी बात है और फिर रोहित रूम के बाहर आ गया, सोनू मन में सोचने लगी माँ बेटे में ज़रूर कोई खिचड़ी पक रही है और वह चुपके से छत की ओर चल दी....

 


छत के उपर नीलम बाउंड्री वॉल से अपनी कोहनिया टिका कर खड़ी थी और रोहित पिछे से जाकर उसकी मोटी भारी गान्ड से अपने लंड को टिका कर उसे पीछे से बाँहो में जाकड़ लेता है उसके दोनो हाथ अपनी मम्मी के मोटे मोटे दूध को जाकड़ लेते है, और वह अपनी मम्मी की गर्दन से लेकर उसके गालो को चूमने लगता है

नीलम : आ गया तू

रोहित : हाँ मम्मी, और रोहित ने अपने हंतो को अपनी मम्मी के उभरे हुए पेट पर लेजा कर उसकी कुरती को उपर किया और सहलाने लगा, रोहित का लंड कड़ा होने लगा और वह मम्मी के भारी चुतड़ों के गुदाज नरम नरम माँस की गर्मी पाकर जल्दी ही पूरी तरह तन गया, उसके लंड की चुभन नीलम को अपनी मोटी गुदाज गान्ड पर महसूस होने लगी,

नीलम: क्या बात है आज बड़ा प्यार आ रहा है अपनी मम्मी पर

रोहित : जिसकी इतनी अच्छी मम्मी होगी उसे अपनी मम्मी पर प्यार तो आएगा ही

नीलम : तुझे लगता है मेरा पेट कुछ ज़्यादा ही अच्छा लगता है नही तो कोई मर्द अपनी बीबी को रात को अकेली छोड़ कर थोड़े ही आता है

रोहित : आप भी तो पापा को अकेला छोड़ कर आई हो

नीलम : मुस्कुराते हुए तुझसे बातों में कोई नही जीत सकता और लगता है तुझे तेरे दोस्त शेखर ने बहुत बिगाड़ दिया है

रोहित : अपने लंड का दबाव मम्मी के मोटे चुतड़ों पर देते हुए कहने लगा वह भला क्यों

नीलम : और नही तो क्या जिस तरह वह अपनी मम्मी के पीछे पड़ा रहता है उसी तरह आज कल तू भी मेरे पीछे लगा रहता है

रोहित : मम्मी वह तो अपनी मम्मी को गोद में भी उठा लेता है

नीलम : अपनी मोटी गान्ड को हल्के से लंड पर दबाव देते हुए कहती है तो कहीं तेरा भी मन मुझे अपनी गोद में उठाने का तो नही करता है

रोहित : आप कहो तो में आप को भी गोद में उठा लेता हूँ

नीलम : आप को भी से तेरा क्या मतलब है और किसको तू अपनी गोद में उठाता है

रोहित : किसी को भी नही, रोहित ने लापने लंड को कुछ ज़्यादा ताक़त से अपनी मम्मी के चुतड़ों में दबाते हुए कहा

नीलम : झूठ क्यो बोलता है क्या तू सोनू को अपनी गोद में नही उठाता है

रोहित : हुउँ...

नीलम : अच्छा चल अब चलते है सोनू तेरा वेट कर रही होगी

रोहित : नही मम्मी वह सो गई होगी

नीलम : नही बेटे जिसका पति रात को उसके पास नही होता है उस औरत को कभी नींद नही आती है

रोहित : अच्छा ठीक है पर ज़रा मुझे अपने पेट को चूम तो लेने दीजिए और रोहित ने अपनी मम्मी को अपनी ओर घुमा लिया और नीचे घुटनो के बल बैठ कर अपनी मम्मी के भारी चुतड़ों को अपने हाथों में भर कर उसके गुदाज मखमली पेट को पहले गहरे चुंबन के साथ चूमा तो नीलम के मुँह से एक गहरी सिसकारी निकल गई, फिर रोहित ने अपनी मम्मी के मसल चुतड़ों को दबोचते हुए उसके गुदाज पेट को चूमना और चाटना शुरू कर दिया,

नीलम : आह बेटे तू कितना प्यार से चूमता है सोनू तो तेरी इस हरकत से पागल हो जाती होगी आह, नीलम ने यह कहते हुए उसके सर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया, यह सब क्रिया कलाप देख कर सोनू मंद मंद मुस्कुराते हुए अपनी चूत मसल रही थी और उसकी चूत से पानी आ चुका था, कुछ देर चूमने के बाद नीलम ने कहा बेटे अब बाद में चूमना अभी चलते है सोनू वेट कर रही होगी और जैसे ही दोनो वहाँ से चले सोनू फटाफट नीचे आकर अपने रूम में भाग गई. जब रोहित रूम में पहुचा तो सोनू नेउसकी ओर मुस्कुराते हुए कहा आ गये आप तब रोहित ने कहा तुम सोई नही तब सोनू ने मुस्कुराते हुए कहा जिसका पति आधी रात को उसकी बीबी को छोड़ कर गया हो उस औरत को नीद कैसे आ सकती है, सोनू के मुँह से यह बात सुन कर रोहित चकित रह गया और उसने कहा तुम मेरी जासूसी करती हो तुम छत पर आई थी ना

सोनू : पहले यह बताइए कि मुझे चोदेन्गे या नही

रोहित : अपने लंड को बाहर निकालते हुए सोनू को दिखाता है और उसकी ओर मुस्कुरा कर देखता है तब सोनू बेड से उतर कर नीचे आती है और रोहित के लंड को पकड़ लेती है और कहती है तुम्हारा लंड तो बड़ा बदमाश हो गया है अभी तक बहन की गुदाज गान्ड को देख कर सर उठा लेता था अब तो अपनी मम्मी की मोटी गान्ड भी फाड़ने के लिए खड़ा है, तब रोहित ने कहा सोनू मम्मी की मोटी गान्ड मारने का बड़ा मन कर रहा है यार और रोहित ने सोनू के मोटे चुतड़ों को फैला कर चाटना शुरू कर दिया, सोनू आह आह करती हुई कहने लगी, तो चोद दो ना अपनी मम्मी को तब रोहित ने कहा यार चोदना तो चाहता हूँ पर कहने की हिम्मत नही होती, तब सोनू ने कहा में कहूँ मम्मी से,

रोहित-- हाँ लेकिन कुछ इस तरह की मम्मी को बुरा ना लगे और वह मुझसे चुदवाने को राज़ी हो जाए, तब सोनू ने कहा तुम फिकर ना करो बस में जैसा प्लान तुम्हे बताउन्गी तुम बस वैसा ही करना समझे, रोहित ने कहा ओके जानेमन, तब सोनू ने कहा तो फिर आओ मेरे राजा और मुझे चोदो लेकिन हाँ आज मुझे अपनी मम्मी समझ कर खूब रगड़ रगड़ कर चोदना, फिर सोनू ने मन में सोचा में भी आज तुम्हे पापा समझ कर खूब कस कस कर तुम्हारे मोटे लंड पर कुदूँगी, और फिर रोहित ने सोनू को अपनी मम्मी नीलम समझ कर खूब कस कर उसकी ठुकाई की और सोनू ने भी यह कल्पना करते हुए खूब गहराई तक लंड लिया कि जैसे उसे पापा चोद रहे हो,

 
अगले दिन रोज की दिनचर्या के हिसाब से वो लोग पार्क में एक्सर्साइज़ करने गये वहाँ सोनू और सुधा ने मनोहर को अपनी मोटी मोटी गान्ड दिखा दिखा कर खूब एक्सर्साइज़ की और मनोहर उनकी भरी हुई मोटी जांघे और भारी गदराए चुतड़ों को देख देख कर खूब गरम हुआ उसके बाद सुधा मनोहर के पास पढ़ने चली गई,

रोहित सुबह अपने ऑफीस की ओर निकल गया और नीलम अपनी किसी सहेली के साथ मार्केट चली गई उधर सुधा आज जीन्स और टीशर्ट पहन कर पापा के पास पढ़ रही थी मनोहर को आज कुछ देखने को मिल नही रहा था और वह सुधा से सीधे मुँह कह भी नही सकता था कि तू वही फटी लेग्गी पहनकर मुझे अपनी चूत दिखा, वह सुधा को कोई सवाल समझा रहा था जिसे सुधा ने दो बार ग़लत कर दिया तो मनोहर ने गुस्से में उसके गाल पर एक चपत लगा दी जिससे सुधा का गोरा गाल लाल पड़ गया और वह मुँह फूला कर सवाल करने बैठी थी तभी सोनू चाइ लेकर आई और मनोहर को चाइ दी और सुधा से कहा ले सुधा चाइ पी ले तब सुधा ने कहा मुझे नही पीना चाइ वाई,

सोनू : पापा इसे क्या हुआ

मनोहर : अरे बेटी एक ही सवाल को दो तीन बार समझा चुका हूँ पर इसके दिमाग़ में भूसा भरा है इसे समझ ही नही आ रहा इसलिए मैने एक थप्पड़ दे दिया गाल पर, सोनू सुधा के पास बैठ कर उसके लाल गालो को हाथों से सहलाती हुई कहने लगी पापा आप भी ना कोई जवान बेटी को मारता है क्या और फिर आपका चाँटा मारना ही था तो गाल पर क्यो मारा उसके गाल पर निशान बन गया है आगे से आप गाल की बजाय ऐसी जगह थप्पड़ मारिए जहाँ किसी को दिखाई ना दे यह बात सोनू ने मुस्कुराते हुए की, सोनू का इशारा मनोहर को समझ आ गया और सुधा भी सोनू की बातों को समझ गई जिससे उसका लाल गाल और भी लाल हो गया और सोनू अपने भारी चुतड़ों को मटकाती हुई बाहर जाते जाते यह कह गई कि आज घर में कोई नही है पापा में बाहर अकेली हूँ कुछ काम हो तो आवाज़ दे देना तब मनोहर ने सुधा को मुस्कुरा कर देखा और सुधा का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खिचते हुए उसके लाल गालोको चूमते हुए कहा ओके बाबा सॉरी माइ डार्लिंग अपने पापा को माफ़ कर दो, तब सुधा ने कहा मैने तो आपको पहले ही माफ़ कर दिया है पर अब आप मुझे गाल पर थप्पड़ नही मारेंगे,

मनोहर : मुस्कुराते हुए तो फिर कहाँ मारेंगे

सुधा ; नखरा छोड़ते हुए कहने लगी गाल को छोड़ कर जहाँ आपका मन करे मार लेना, तब मनोहर ने सुधा के मोटे मोटे चुतड़ों को दबोचते हुए कहा अबकी बार अगर तुमने सवाल ग़लत किया यो में तुम्हे यहाँ मारूँगा तब सुधा का चेहरा लाल पड़ गया और उसने कहा ठीक है मार लेना और मनोहर ने उसे सवाल दे दिया, सुधा सवाल तो समझ गई थी लेकिन इस बार उसने मुस्कुराते हुए जान बुझ कर सवाल ग़लत कर दिया तब मनोहर ने जब सवाल चेक किया तो सुधा मंद मंद मुस्कुराने लगी तब मनोहर ने कहा चलो अब थप्पड़ खाने के लिए तैयार हो जाओ तब सुधा किसी कुतिया की तरह अपनी मोटी गान्ड उठा कर बैठ पर घूम कर अपने भारी चौड़े चुतड़ों को पापा के मुँह की ओर कर दिया, मनोहर का लंड लूँगी के अंदर सुधा की गान्ड की चौड़ाई देख कर तन गया

और उसने सुधा की मोटी गान्ड को बड़े प्यार से सहलाया और गान्ड की गहराई से उस स्थान तक हाथ फेरा जहाँ सुधा की गुदाज फूली चूत का उभार भी नज़र आ रहा था, मनोहर सहला रहा था और सुधा आँखे बंद किए हुए झुकी थी,

सुधा : अब हाथ क्या फिरा रहे है मारिए ना

मनोहर : ये तो चीटिंग है इस जीन्स के उपर से मारने पर तुम्हे तो लगेगा ही नही, पहले अपनी जीन्स को अपने चुतड़ों से नीचे सरकाओ तब तो सज़ा में पड़ने वाले थप्पड़ो का असर होगा,

सुधा : पापा भाभी आ जाएगी

मनोहर : तो जाओ पहले गेट बंद करके आओ, मनोहर की बात सुना कर सुधा उठी उसका चेहरा पूरा लाल हो रहा था और जब वह अपनी गुदाज मोटी गान्ड मटकाते हुए दरवाजे की तरफ गई तो मनोहर उसकी मोटी गान्ड को देखते हुए लूँगी के उपर से अपने लंड को मसल्ने लगा और मन में सोचने लगा कि उसकी बेटी के चूतड़ और बदन तो पूरा फिल्म आक्ट्रेस आएशा टाकिया की तरह लग रहा है हाई क्या गुदाज गान्ड है आज तो पूरी नंगी करके मारूँगा इसके भारी चुतड़ों पर,

उसके बाद शुदा जब पलट कर आने लगी तो उसने देखा उसके पापा उसके टीशर्ट में खरबूजो की तरह तने दूध और पाव रोटी की तरह फूली उभरी हुई चूत को देख देख कर अपने लंड को लूँगी के उपर से मसल रहे है, उसका चेहरा लाल हो गया और वह मुस्कुराते हुए बेड पर चढ़ कर वापस कुतिया की तरह अपनी गान्ड उभार कर झुक गई, फिर जैसे उसे कुछ याद आया और वह एक पल के लिए घुटनो के बल सीधी हुई और उसने अपनी जीन्स के बटन को खोल कर अपनी ज़िप खोल ली, और फिर से झुक गई,

मनोहर उसके चुतड़ों के करीब आ गया और धीरे से सुधा की जीन्स को उसकी गदराई मोटी गान्ड से नीचे उतारने लगा जैसे ही उसने जीन्स को थोड़ा सा सरकाया उसे सुधा की गोरी गदराई गान्ड पर लाल कलर की पैंटी नज़र आई उसने जीन्स को सुधा के मुड़े हुए घुटनो तक उतार कर छोड़ दिया मनोहर की आँखो में सुधा की गदराई गान्ड और उस पर लाल कलर की पैंटी देख कर खून उतर आया,

सुधा की गोरी मसल गदराई गान्ड पर लाल पैंटी की लेस उसकी गान्ड के छेद से लेकर फूली चूत की फांको में फसि हुई थी, उसकी चूत की उभरी हुई फांके बिना बालो के काफ़ी चिकनी दिखाई दे रही थी, मनोहर ने एक बार सुधा के पूरे चुतड़ों पर हाथ फेरा फिर कस कर एक थप्पड़ सुधा के एक पाट पर जड़ दिया और सुधा आह की आवाज़ निकाल बैठी तभी मनोहर ने दूसरे पाट पर भी एक थप्पड़ मारा और सुधा आह पापा कहने लगी,

उसके दूध से सफेद चुतड़ों का रंग दो थप्पड़ो में ही सिंदूरी हो गया और मनोहर ने अब उसकी मोटी गान्ड पर थप्पड़ रुक रुक कर मारने लगा वह कभी सुधा के चुतड़ों को पूरा अपने पंजो में भर कर मसल देता और कभी उसकी गान्ड के पाटो को दोनो हाथों से फैला कर छोड़ देता, अब मनोहर ने सुधा की फूली हुई चूत के नीचे हाथ डाल कर उसे अपनो हाथों में भर कर दबोचा तो सुधा आह ससिईइ पापा कहने लगी, मनोहर ने सुधा के चुतड़ों को बड़े प्यार से चूमा और फिर उसकी गान्ड में फसि लेस को साइड में करके जब सुधा की कोरी गान्ड कभुरा छेद देखा तो वह अपने आप को रोक नही पाया और अपनी नाक को उसकी गुदा में लगा कर सुघने लगा हाई उसकी गान्ड की मादक गंध ने उसे पागल कर दिया था और उसने अपनी जीभ को जैसे ही सुधा की गान्ड के छेद से लगा कर चाटा सुधा आह पापा कह कर कराहने लगी उसकी बुर पूरी गीली हो चुकी थी और उसे पापा की खुदरी जीभ का एहसास अपनी गान्ड के छेद में पागल किए जा रहा था मनोहर ने दोनो हाथों से सुधा की गान्ड को फैलाया और लंबी जीभ निकाल कर उसकी गान्ड को चाटने लगा और सुधा आह सीयी पापा ओह पापा जैसे शब्द निकाल कर सीसीयाने लगी,

 
अब मनोहर ने उसकी पैंटी को भी नीचे सरका दिया और जब उसने सुधा की फूली फांको वाली चिकनी चूत देखी तो वह पागल हो गया और दोनो हाथों से सुधा की चूत की फांको को फैला कर अपनी लंबी जीभ निकाल कर सुधा की चूत की गहराई से लेकर गान्ड के भूरे छेद कर कस कस कर चाटने लगा और सुधा किसी जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी, मनोहर उसकी गान्ड को दोनो हाथो से मसल मसल कर अपनी लंबी जीभ से अपनी बेटी की गुदाज गान्ड और फूली चिकनी चूत को खूब कस कस कर दबा दबा कर चाट रहा था, और सुधा खूब सिसीकिया ले रही थी, दोनो यह नही जानते थे कि घर की खिड़की के पर्दे की साइड से सोनू उन दोनो बाप बेटी की रस लीला देख रही थी और अपनी बुर को अपने हाथों से खूब दबा रही थी,

सुधा की चूत से रस बह रहा था और मनोहर अपनी प्यारी जवान बेटी की फूली चिकनी चूत की फांको को खूब खोल खोल कर पी रहा था, सुधा कहने लगी आह सीयी ओह पापा कितना अच्छा चाटते हो आप में पागल हो जाउन्गी, आह आह आह्ह्ह सीयी ओ माँ मर गई, अब मनोहर ने अपनी एक उंगली को थूक में भिगो कर सुधा की मस्त गुदा में पेल दिया और उसकी गुदा में उंगली दबाते हुए वह उसकी बुर चाट रहा था, अब मनोहर ने सुधा की जीन्स को पूरा उतार दिया और उसकी मोटी गान्ड को पकड़ कर बेड पर सीधा लेट गया और सुधा को कहा बेटी अपने पापा के मुँह में बैठ जाओ सुधा की मोटी मोटी जांघे मनोहर के दोनो तरफ थी और उसने अपनी मोटी गान्ड को उठा कर मनोहर के मुँह में रख दिया मनोहर किसी पागल कुत्ते की तरह सुधा की गान्ड और चूत को चाटने लगा सुधा की चूत से अब पानी ज़्यादा निकल रहा था और वह सीधे मनोहर के मुँह में जा रहा था और मनोहर खूब कस कस कर अपनी बेटी की चूत पी रहा था,

सुधा की मोटी गान्ड के नीचे मनोहर का मुँह दबा हुआ था सुधा उसके मुँह में गान्ड फैलाए बैठी थी तभी सुधा की नज़र उसके पापा के लूँगी में खड़े मोटे तगड़े लंड पर पड़ी वह थोड़ा आगे झुक गई जिससे उसकी फूली चूत खुल कर मनोहर की आँखो के सामने आ गई और मनोहर ने लंबी जीभ निकाल कर जब सुधा की चूत को गान्ड के छेद से लेकर नीचे तक चाटा तो सुधा से रहा नही गया और उसने झुक कर मनोहर के लंड से लूँगी हटा दी और जब उसकी नज़र अपने पापा के मस्त काले लंड पर पड़ी तो उसकी आँखे चकरा गई अपने पापा के लंड के फूले हुए सुपाडे को देख कर सुधा मस्त हो गई और उसने अपने पापा के केले को पकड़ लिया और जब उसने उसको दबा दबा कर देखा तो उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और वह हाँफने लगी लेकिन मनोहर ने उसकी चूत को और ज़ोर ज़ोर से चूसना शुरू कर दिया, सुधा से रहा नही गया और उसने पापा के लंड को पकड़ कर सीधे अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी, यह सीन देख कर सोनू के मुँह में पानी आ गया और उसने अपनी बुर में एक उंगली डाल ली,

मनोहर तो जैसे सातवे आसमान पर उड़ने लगा और जब सुधा ने पापा के बड़े बड़े अंडकोषो को अपने हाथों में भर कर सहलाते हुए उनके लंड के टोपे को चूसा तो मनोहर पागलो की तरह अपनी बेटी की गोरी गदराई गान्ड को दबोच दबोच कर उसकी बुर पीने लगा, दोनो ने चूस चूस कर एक दूसरे के लंड और चूत को लाल कर दिया, अब दोनो का रस निकलने की कगार पर पहुच गया इसलिए सुधा अपनी मोटी गान्ड हिला हिला कर अपनी चूत को मनोहर के मुँह में रगड़ने लगी और मनोहर ने अपनी जीभ बाहर निकाले हुए उसकी चूत की रगड़ को महसूस करने लगा, सुधा खूब तेज तेज अपनी चूत अपने पापा की जीभ पर रगड़ रही थी और खूब कस कस कर पापा के आंडो को दबा दबा कर उनके लंड को चूस रही थी तभी सुधा की बुर ने एक फव्वारे के साथ पापा के मुँह में मूत दिया और उधर मनोहर के लंड को अपने मुँह में जैसे ही कसा मनोहर ने भी एक तेज पिचकारी सुधा के मुँह में छोड़ी और सुधा उसके रस को चूस चूस कर पागलो की तरह चाटने लगी और दोनो तब तक एक दूसरे का रस पीते रहे जब तक की एक एक बूँद बाकी ना रह गई हो,

सुधा अभी भी पेट के बल मनोहर के उपर उल्टी लेटी थी उसने सिर्फ़ टीशर्ट पहने हुए थी और नीचे पूरी नंगी थी उसकी साँसे तेज चल रही थी और उसके हाथ में मनोहर का लंड अभी भी था लेकिन उसकी आँखे बंद थी मनोहर सुधा की गान्ड को अभी भी हल्के हल्के सहला रहा था, उधर सोनू का मुँह खुला का खुला ही रह गया था जब उसने देखा कि सुधा ने कैसे अपने पापा का सारा रस निचोड़ निचोड़ कर चाट लिया था, तभी मनोहर ने सुधा को आवाज़ दी और सुधा एक दम से मनोहर के उपर से उतर कर बेड पर बैठ गई और उसकी नज़रे नीचे थी,

मनोहर : बेटी इधर आओ और मनोहर ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया,

मनोहर : तुम्हे मज़ा आया कि नही

सुधा : मनोहर को हल्के से धकेलते हुए मुस्कुरा कर कहने लगी पापा आप बहुत खराब है

 


मनोहर : सुधा के गालो को चूमते हुए कहने लगा बेटी मुझे नही पता था कि तुम अंदर से अपनी मम्मी से भी ज़्यादा खूबसूरत हो, आओ अपने पापा की गोद में बैठो और मनोहर ने उसकी मोटी जाँघो को पकड़ कर अपनी गोद में चढ़ा लिया सुधा की साँसे फिर से तेज होने लगी थी क्यो कि उसके पापा का लंड फिर से तन गया था और उसकी गान्ड में चुभ रहा था, मनोहर ने सुधा के दोनो मोटे मोटे कसे हुए दूध को अपने हाथो में जकड कर उसके रस भरे लाल लाल होंठो को अपने मुँह में भर लिया, सुधा के ठोस कसे हुए बोबो पर जब उसके पापा के हाथ पड़े तो उसके मुँह से आह जैसी सिसकारी निकल गई और मनोहर ने कहा बेटी मैने आज तक इतने कठोर और मोटे दूध नही दबाए कितने रसीले और मोटे मोटे है तुम्हारे दूध और मनोहर ने एक झटके में सुधा की टीशर्ट उतार कर उसे पूरी नंगी कर दिया सुधा एक दम से मनोहर की छाती से चिपक गई और मनोहर उसे पागलो की तरह चूमने लगा,

सुधा की जाँघो को उसने अपनी कमर से लपेट लिया और उसके मोटे मोटे कसे हुए दूध को पागलो की तरह मसल मसल कर लाल कर दिया और बीच बीच में वह सुधा के रसीले होंठो को भी चूस्ता जा रहा था.

सुधा ; ओह पापा थोड़ा धीरे दबाइए ना आप बहुत कस कर दबाते है

मनोहर: बेटी इन्हे जितना कस कर मस्लो ना लड़कियो को उतना ही मज़ा आता है सच सच बताओ तुम्हे मज़ा आ रहा है कि नही

सुधा : आह सीई ओह पापा बहुत अच्छा लग रहा है,

मनोहर पागलो की तरह सुधा के दूध को मसलता रहा और उसके गुदाज गदराए बदन को तबीयत से मसलता रहा कुछ देर बाद मनोहर ने कहा सुधा जाओ सामने की आल्मिरा से नारियल का तेल लेकर आओ, सुधा उठी और नंगी अपनी गुदाज गदराई गान्ड मटकाते हुए सामने जाने लगी और मनोहर उसकी नंगी गान्ड की थिरकन को देख कर अपना लंड मसल्ने लगा

सोनू की निगाहे कभी सुधा के मटकते चुतड़ों को और कभी मनोहर के लंड को देख रही थी उसने भी आज पहली बार अपनी जवान गदराई ननद को पूरी नंगी देखा था उसकी चूत लंड खाने के लिए बहुत तड़प रही थी लेकिन आने वाले सीन को सोच सोच कर उसके दिल की धड़कने बढ़ गई थी, सुधा अपने हाथो में नारियल के तेल की डब्बी लेकर वापस आ गई और फिर मनोहर ने उसके हाथो को पकड़ कर उसके हाथ में ढेर सारा तेल डाल कर उसे अपने लंड पर लगाने का इशारा किया और सुधा शरमाते हुए अपने पापा के केले में नारियल का तेल लगाने लगी, तेल लगते ही मनोहर का लंड विकराल हो गया और पूरा चमकने लगा

सोनू का दिल कर रहा था कि अंदर जाकर पापा के तेल में डूबे चिकने चमचमाते लंड पर बैठ जाए लेकिन वह सुधा का खेल खराब नही करना चाहती थी, जब मनोहर के लंड पर तेल लग गया तब मनोहर ने एक तकिया लिया और सुधा को तकिये पर गान्ड रखने को कहा और फिर उसे पीठ के बल लिटा दिया और फिर मनोहर सुधा की चूत की फांको को खोल खोल कर उसमे तेल लगाने लगा

सुधा : आह सी ओह पापा यह क्या कर रहे हो मुझे बहुत डर लग रहा है,

मनोहर : देखो बेटी तुम इस समय बहुत जवान हो गई हो और तुम्हारा बदन बहुत ज़्यादा गदरा गया है तुम्हारी उम्र की लोंड़िया तो दिन रात लंड ले ले कर अपनी चुदाई का मज़ा लेती है, अब में तुम्हे चोदुन्गा क्या तुम नही चाहती कि में तुम्हे खूब रगड़ रगड़ कर चोदु, मनोहर ने एक उंगली से तेल लेकर सुधा की चूत में पेल दिया और सुधा सीसीया उठी ओह पापा चोदिये खूब कस कस कर चोदिये, मुझे पूरी नंगी करके चोदिये मेरी चूत खूब कस कस कर अपने इस मोटे लंड से मारिए, आह सीई ओह...पापा में खूब चुदना चाहती हूँ आप से मुझे खूब रगड़ रगड़ कर चोदिये, अपनी बेटी के मुँह से यह बाते सुनते ही अनुभवी मनोहर ने एक बार लंड को सुधा की चूत से घिसा और फिर उसकी चूत के छेद से लंड भिड़ा कर कस कर एक धक्का मारा कि सुधा का पूरा बदन ऐंठ गया और वह खूब ज़ोर से चिल्लई ओह पापा मर गई मैं तो, अगर उस समय सोनू के अलावा कोई भी घर में होता तो दौड़ कर वहाँ आ जाता उसकी जोरदार आवाज़ से मनोहर भी सकते में आ गया लेकिन फिर उसने हिम्मत से काम लेते हुए धीरे से अपना लंड थोड़ा बाहर खींचा और फिर से एक धक्का सुधा की चूत में मार दिया और मनोहर का लंड पूरा सुधा की चूत में समा गया,

 


मनोहर ने सुधा को इस बार चीखने का मोका नही दिया और उसके होंठो को अपने मुँह में भर लिया अब मनोहर धीरे धीरे सुधा के बोबो को दबाने लगा और उसके होंठो को चूमने लगा लेकिन उसने अपने लंड को सुधा की चूत में गहराई तक ठुसे रखा,

आख़िर कार सुधा से रहा नही गया और उसने पापा के होंठो से अपने होंठो को छुड़ाते हुए कहा पापा लंड थोड़ा बाहर तो कीजिए ना मेरी जान निकली जा रही है तब मनोहर ने धीरे धीरे लंड को आगे पिछे करना शुरू कर दिया अब वह सुधा के बोबो को खूब कस कस कर मसल्ते हुए लंड के धक्के सुधा की चूत में देने लगा, अब सुधा भी सहयोग करने लगी थी आख़िर सुधा पहले से ही परिपक्व तो थी ही उपर से मनोहर इतना अनुभवी था कि उसने सुधा को ज़्यादा तकलीफ़ भी नही होने दी और उसकी चूत का उद्घाटन भी कर दिया था ,

अब मनोहर कुछ तेज तेज धक्के मारने लगा, सुधा आनद से पागल हुई जा रही थी और उसने अपनी जांघे और भी फैला ली थी और मनोहर की ओर अपनी गान्ड उछाल उछाल कर लंड ले रही थी, उधर सोनू इस सीन को देख कर मन ही मन खुस हो रही थी और उसकी चूत से अब तक दो बार पानी छूट चुका था, उधर सुधा की चूत में मनोहर तबड तोड़ धक्के मार रहा था और उसके मोटेमोटे दूध को कस कस कर दबा रहा था सुधा पूरे जोश में आ चुकी थी और खूब गान्ड उछाल उछाल कर लंड लेते हुए कह रही थी ओह पापा और मारिए खूब चोदिये कस कस कर मारिए आहह आहह सी,....................ओह माँ मर गई पापा आहह आहह सीईईईईईईईईईईईईईईईई. अब मनोहर उसके उपर से उठ कर अपने पैरो के पंजो पर बैठ गया और उसकी मोटी जाँघो को दोनो हाथो से थाम लिया और उसकी गान्ड्को और उपर उभार दिया और अब मनोहर पूरी ताक़त से अपनी बेटी की चूत ठोकने लगा और पूरे रूम में थप थप ठप थप की आवाज़े आने लगी मनोहर सटा सॅट लंड पेल रहा था और सुधा की गान्ड के छेद में मनोहर के पाव पाव भर के आंड खूब टकरा रहे थे अब मनोहर थपक थपक की आवाज़ के साथ खूब कस कस कर सुधा को ठोंक रहा था. अब सुधा पिघलने लगी थी और मनोहर को कहने लगी पापा मुझे अपने बदन से चिपका लीजिए आह आह आह ओह, मनोहर उसकी स्थिति भाँप गया और वह सुधा के उपर लेट गया और अपने दोनो हाथो को सुधा के चुतड़ों के नीचे लेजा कर उसके चुतड़ों को अपनी हथेलियो में भर लिया और उसकी चूत को कस कर अपने लंड से चिपका कर अब तबाद तोड़ धक्के मारने लगा

उसके धक्को की रफ़्तार इतनी तेज थी कि उसने 10 सेकेंड में कम से कम 25-30 धक्के मारे और फिर सुधा की पूरी गान्ड को अपनी ओर दबा कर लंड को उसकी चूत में पूरी ताक़त से दबा दिया और सुधा आह आह करते हुए पानी छोड़ने लगी और मनोहर का रस भी उसकी चूत में गहराई तक चला गया, मनोहर का लंड जब तक रस छोड़ता रहा मनोहर उसकी बुर को लंड से दबाए पड़ा रहा,

उनकी यह पोज़िशन देख कर सोनू खूब चुदासी हो गई थी, कुछ देर तक मनोहर सुधा के उपर पड़ा रहा उसके बाद सुधा ने मनोहर को हटने का इशारा किया और मनोहर उठ कर दूसरी ओर बैठ गया, करीब 5 मिनिट तक मनोहर सुधा की गान्ड को सहलाता रहा और फिर मनोहर ने नारियल तेल लिया और सुधा की गान्ड में लगाने लगा तो सुधा एक दम से उठ बैठी और कहने लगी पापा अब हो गया ना,

तब मनोहर ने कहा बेटी अभी तो मैं तेरे इन मोटे मोटे चुतड़ों को भी फाड़ुँगा,

तब सुधा ने कहा पापा आपका बहुत मोटा है मेरी गान्ड फट जाएगी, तब मनोहर ने कहा बेटी एक दो बार तूने मुझसे गान्ड मरवा ली ना तो फिर देखना तू खुद हर दूसरे रोज मुझसे आकर अपनी गान्ड खूब तबीयत से मरवाएगी, तब सुधा ने हँसते हुए कहा पापा मैं तो पहले से ही जानती थी कि आप मेरी गान्ड मारना चाहते है,

मनोहर : वो कैसे

सुधा : आपकी नज़रे जो हमेशा मेरे चुतड़ों पर ही लगी रहती थी,

मनोहर : सच कह रही है बेटी तेरे मतवाले गदराए चुतड़ों को देखते ही लंड खड़ा हो जाता है आज में तेरी गान्ड खूब तबीयत से मारूँगा, बोल मरवाएगी ना अपने पापा से अपनी गदराई मोटी गान्ड

 
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