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Incest डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका

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अपडेट 96

इधर माँ के जाते ही में माँ के कमरे में गया और बाथरूम में जा के माँ की पेन्टी और ब्रा ढूँढ़ने लगा, माँ ने एक ही पेअर बाथरूम में रक्खी थी, कल पेहनने के लिए बाकि का पता नहीं शायद अल्मारी में रक्खी होगी. तो जो मिली उसको मैंने लिया और माँ की तरह सूँघने लगा, फिर अपने शॉर्ट्स को निचे किया और माँ की पेन्टी को अपने अंडरवेअर में दाल के रगड़ने लगा, स्टोरीज में ऐसे करते पढ़ा था पर एक्चुअल करने में अच्छा लग रहा था एक जोश सा आ गया था मेरे हाथ रुक ही नहीं रहे द, में माँ की पेन्टी में मूठ नहीं मारना चाहता था क्यूँकि माँ के रिएक्शन के बारे में जानता नहीं था इसिलिये, लेकिन उस टाइम माँ के बारे में सोच सोच के और माँ के सन को याद कर कर के और भी जोश आ गया और में बस माँ की पेन्टी और ब्रा को अपने लंड से रगड़ने लगा..आहे आहे इसमें भी अच्छा लग रहा था और फिर में दो मिनट में झड गया और क्या मस्त लिक्विड निकला था माँ की ब्रा और पेन्टी वाइट डॉट्स से रंग गयी थी. और पेन्टी तो खास.

मैन फिर उसे साफ़ कर ही रहा था की एक फ्रेंड का कॉल आ गया और उसे एक मेल फॉरवर्ड करने बैठ गया. और फ्रेंड को मेल भेजने के लिए खोला तो माँ का रिप्लाई भी आया था

“हु आर यू? एंड व्हाई आरे यु सेंडिंग मि सच स्टोरीज.?

डैम गुड अच्छा लगा, की माँ का रिप्लाई आ गया. माँ ने इस बार भी सिर्फ स्टोरीज ही लिखा वर्ना वो गन्दी स्टोरीज, वल्गर स्टोरीज भी लिख सकती थी. मतलब माँ को भी इन स्टोरीज पढ़ने का मज़ा आया होगा. मुझे तो अब माँ के माइन्ड को पढ़ने का मज़ा आ रहा था लेकिन मैंने इस बार कोई रिप्लाई नहीं किया, बस थैंक्स लिखा और सेंड कर दिया. कोई स्टोरीज भी नहीं भेजि..कुछ नही, और जैसे ही मैंने मेल भेजा की माँ का रिप्लाई फिर से आ गया था

“व्हाटटटटट....? पता था की यही रिप्लाई आयेगा, अब मेरे दिमाग में माँ बैठ चुकी थी. लेकिन मैंने अब कोई रिप्लाई नहीं किया और लैपटॉप बंद कर दिया. मैं अब जाने के बारे में सोच रहा था दो घंटे हो भी गये और माँ के आने का टाइम हो गया. मैं घड़ी को देख रहा था की माँ का कॉल आया

“हल्लो, रेशु जल्दी से सोसाइटी के बाहर आ जाओ..मंदिर के पास,मेरा एक्टिवा ख़राब हो गया हे.. हमारी सोसाइटी के बाहर ही एक मंदिर हे, बस १० मिनिट का रास्ता हे, और में झट से बाहर निकला तो पता चला की बाहर तो बारिश हो रही हे, बारिश के सीजन में बारिश तो कभी भी हो सकती हे , मैंने झट से माँ के परेशानी के बारे में सोचा और भागा. मैंने देखा की माँ का एक्टिवा मंदिर के पास भीग रहा हे और माँ मंदिर के अंदर हे, लेकिन पूरी भीगी हुयी. यह भगवान भी आज पता नहीं कितना मेहरबाँ हो रहा था मुझ पे, में माँ के पास गया.

“रेशु..ये ऑन नहीं हो रहा.. मैंने माँ की चाबी ली और बहुत ट्राय किया पर नहीं हुआ, में भी पूरा भीग चुक्का था फिर माँ बाहर मेरे पास आ के बोली

“चलो रेशु, घर पास में ही ऐसे ही ले के चलते हे.. मैं भी ठीक हे कह के धक्का मार के चलने लगा. बारिश भी चल रही थी और माँ भी मेरे साथ साथ चल रही थी. मेरा ध्यान ऑफ़ कोर्स भीगी हुई माँ को देखने में था हालाँकि रिहाइशी इलाक़ा था इसीलिए कुछ आने जाने वाले नहीं थे,रस्ते पर हम ही दिख रहे थे.

माँ का ब्लाउज पूरा चिपक गया था और सारी भी गांड से चिपक गयी थी, और पेट् के पास भी साडी चिपक गयी थी और ऊपर से हलकी आस्मानी कलर की साड़ी थी और कुछ ट्रांसपेरंट थी तो चिपकी साड़ी से माँ के बेल्ली का पार्ट भी मस्त लग रहा था माँ मेरे साथ चलते चलते मुझे उन्हें देखते हुए पकड़ तो रही थी पर कुछ कह नहीं रही थी. माँ को किसी के देख लेने की चिंता बड़ी हो रही थी तो वो थोड़ी जल्दी घर पहूंचना चाहती थी, तो मुझे माँ को ऐसे और भी देखना था तो में आराम से एक्टिवा को धक्के लगा रहा था माँ फिर घर पास आते ही जल्दी चलने लगी और पीछे से पूरा चिपका हुआ ब्लाउज मुझे देखने को मिला, सच में पूरी बैक दिखाई दे रही थी, और माँ ने ब्लैक ब्रा पहन रक्खी थी वो भी साफ़ दिखाई दे रही थी. एक दो बार तो में भी बिना धक्के लगाए बस माँ को देखने के लिए रुक गया.

जैसे तैसे न चाहते हुए भी घर पहूंचना पडा, और मैंने ठीक से एक्टिवा को लगाया और घर में आ के मैंने अपने रूम में जा के फ़टाफ़ट चेंज किया और इतने में ही एक बिजली सी मेरे दिमाग में चमकी और सोचा की कहीं माँ अपने बाथरूम में तो नही..और सारे गीले कपडे चेंज करने को, तो माँ इनरवेर भी चेंज करेंगी.मैं झट से माँ के रूम में चला गया, माँ ने लॉक रूम नहीं किया था में माँ के रूम में पहुंच, लाइट्स ऑन थी पर माँ नहीं थी, और इतने में माँ बाथरूम में से, बाहर निकली..माँ को अंदाज़ा नहीं था की में उनके रूम में होऊँगा तो वो ब्रा और पट्टिकोट पहन के बाहर आ गयी और मुझे देख के झट से अपने दोनों हाथ अपने सीने पर रख लिए.उन्हें मुझे देख के शॉक तो लगा था पर इससे पहले की माँ कुछ कहें में उनके रूम से बाहर चला आया. माँ ने मेरे वीर्य वाली ब्रा पहनी है ये देख के ही में खुश हो गया और बाहर आ के नाचने लगा. बॉस माँ ने वो पेन्टी पहनी की नहीं वो तो पता नहीं पर, माँ ने ब्रा तो पहनी वो तो साफ़ पता चल गया, और ब्रा ब्लैक कलर की थी, मतलब माँ को दिखा तो सब होगा.

फिर माँ १५ मिनट में, साडी चेंज कर के बाहर आयी, अब की माँ ने मस्त येलो कलर की साडी पहनी थी, मैंने सोचा काश्..मॉम आपने बारिश में ये साडी पहनी होती तो..और भी कुछ देखने को मिल जाता माँ फ़ोन पे थी और बात करते करते वो किचन में चलि गयी और बड़ी लम्बी बात चलि किसी से.

फिर माँ बाहर आई और किसी से कॉल करने लगी, मुझे लगा की ये हो क्या रहा हे, माँ इतनी हडबडी के क्यों हे.

“हेलो..सुनिये जी.. वो अपनी कमला चाची की तबियत ख़राब हे और शायद वक़्त भी कम हे,तॉ जाना पडेगा”.. पापा से बात चल रही थी. फिर पापा से सारी बात कर के माँ ने कहा

“रेशु.,.अभी मुझे भी तुम्हारे साथ आने पड़ेगा, तुम्हारी बड़ी चाची का कॉल था कमला चाची सीरियस हे..तो हम अभी साथ चल रहे हे”.. मैं तो ये सुन के खुश हो गया की माँ के साथ चलने का मज़ा ही आ जायेगा. और भी वक़्त मिल जायेगा मुझे. ये बड़ी चाची का कॉल ऐंन मौके पे आ गया वर्ना माँ आ के यही पूछती की तुम मेरे रूम में क्या कर रहे थे, और में बातें बना बना के माँ को सिड्यूस कर लेता, खैर माँ साथ आ रही हे,ए कहते ही माँ अपने रूम में चलि गयी पैकिंग करने, और में भी माँ के पीछे पीछे उनके कामरे में चला गया.

 
मैं आप सब दोस्तो का बहुत आभारी हूं दोस्तो अगर आपको मेरी कोई स्टोरी बोर कर रही हो या पसंद ना आ रही हो तो कृपया बताये ता की मैं वह स्टोरी बंद कर सकू और कोई नई स्टोरी शुरू कर सकू...सतीश
 


अपडेट 97

मै माँ के पास जा के बैठा.अब की बारी में माँ के बहुत क्लोज जा के बैठा..इतना क्लोज में माँ से कभी नहीं बैठा.माँ ने सारे कपडे बेड पे रक्खे थे और चूस कर रही थी..में माँ की मदद करने लगा. माँ के बैग में मैंने माँ की पसंद की साड़ी रखने में मदद करने लगा, फिर माँ ने एक डार्क रेड कलर की साड़ी छोड़ दी तो मैंने माँ से कहा

“माँ आप ये साडी क्यों नहीं लेति, आप इसमें बड़े ही मस्त लगोगी”. में चाहता तो सेक्सी शब्द भी यूज़ कर सकता था पर नहीं किया, या यूँ कहे..मुझसे हुआ ही नही. “रेशु..में बिमार पेशेंट को देखने जा रही हू, मौज मज़े करने नहीं”. तो मैंने फिर उस साड़ी को छोड़ दिया पर माँ ने मेरी और देखा और फिर उसे बैग में रख दिया , मैंने उनकी और देखा तो वो मेरी और देख के मुस्कुरायी और कहा “खुश्”..तो मैंने पहली बार डेरिंग कर के माँ के गाल पे किस कर दिया. माँ ने ये एक्सपेक्ट नहीं किया था.न ही मैंने भी सोचा था

“खुश्..मॉम”. मैंने किस कर के जैसे ही माँ से कहा, तो माँ मेरे किस से शॉक तो हो ही गयी थी, पर असली शॉक की बारी अब मेरी थी, में माँ को किस कर के माँ की और नहीं देख रहा था पर माँ ने मेरे चेहरे पे प्यार से हाथ रक्खा और मुझे अपनी और करते हुए मेरे गाल पे किस किया और कहा

“एनीथिंग फॉर माय डार्लिंग सन”. बॉस मेरी तो चांदी लग गयी थी. फिर माँ किस कर के उठ के अल्मारी में जा के खड़ी हो गयी, उन्हें कुछ लेना नहीं था पर वो मुझे किस कर के शर्मा गयी थी. लेकिन माँ ने थोड़ी देर बाद अपने अंडरगार्मेन्ट्स बाहर निकाले.. और बेड पे मेरी और फ़ेंके और फिर से अल्मारी में मुँह कर के कुछ ढूंढ ने लगी. कल तक ऐसा लग रहा था की माँ को कैसे एप्रोच करू, पर आज कुछ ख़ास किये ही लग रहा था की माँ खुद ब खुद मेरे पास आ रही थी, शायद ये मेरी भेजीं हुई..एरोटिक स्टोरीज का असर भी हो सकता हे. लेकिन इस हलके से खुले पण का मतलब ये भी नहीं की माँ सेक्स के लिए रेडी हो जाएंगी..जब की में ये सोचता भी नही. ४ ब्रा और चार पेन्टी थी, उससे भी माँ के स्ट्रेंज बिहेवियर के बारे में पता चल रहा था क्यूँकि उसमे से दो जोड़ी थी वो सिंपल थी, जब की दूसरी दो थी ओ..डैम गुड नई पैटर्न थी.

“मोम..इन्हे बैग में रख दु”.. मैंने माँ से इनोसेंट बनते हुये, और इनोसेंट टोन में पूछा. माँ ने मेरी और पलट के देखा और मेरे हाथ में उनकी ब्रा देख के मुस्कुरायी और कहा हाँ रख दो. और मैंने झट से एक दो बार उसे सूंघा, और रख दि, मेरा ध्यान उस वक़्त माँ पे नहीं था पर मुझे ऐसा महसूस हुआ की शायद माँ ने तिरछी नज़र से मुझे देखा. और मैंने जैसे ही बैग में माँ के अंडरर्गारमेंट रक्खे की माँ ने अल्मारी में से ऑर्नामेंट्स निकाले और उसे बैग में रख ने लागी. जैसे की वो मेरी राह देख रही थी की कब में बैग बंद करू और वो पलटे.

मों ने मेरी और कई बार देखा, और अपने ऑर्नामेंट्स रखने लगी. इतने में पापा का कॉल आ गया और उन्होंने कहा की आप लोग निकलो, उन्हें देर लग जायेगी और वैसे भी मानसून हे , तो आराम से और अँधेरा होने से पहले पहूंचना सेफ हे. तो माँ ने ठीक हे कहा और मुझसे कहा की तुम रेडी हो, तो मैंने ओके कहा और हम माँ की कार में निकलपडे हाँ माँ के पास होण्डा सिटी हे, पर वो रेगुलरली इस्तेमाल नहीं करति. स्टार्टिंग में मैंने माँ से ड्राइविंग करने देणे के लिए कहा पर माँ ने मना कर दिया और कहा वो खुद ही ड्राइव करेंगी, और थोड़ी बहस के बाद हम शांत हो गये. लेकिन में बात नहीं कर रहा था या मुझे अभी क्या बात करनी चहिये, वो समझ में नहीं आ रहा था तो चुप बैठा था तो माँ ने ऐसा माना की में नाराज़ हो गया हूँ तो उन्होंने मेरे सर पे हाथ रक्खा और हाथ घूमाते हुये कहा

“अरे रेशु, इसमें नाराज़ होने वाली क्या बात हे? तुम्हारे पास लाइसेंस नही, तो ड्राइविंग भी नही.. माँ ने सिम्पली कहा और मैंने भी स्माइल दे के ये इशारे में कहा की कोई बात नही. और मैंने म्यूजिक चला दिया, बाहर बारिश हो रही थी, और मैंने मस्त रोमांटिक सांग्स स्टार्ट कर दिये, माँ को भी म्यूजिक पसंद हे तो वो भी एन्जॉय करने लगी. ऐसे ही राह कटती जा रही थी. ५ घंटे का रास्ता था और हमने आराम से तीन घंटे बिता दिए थे, पर अचानक बीच में कार धक्के खाने लगी और बंद हो गयी, माँ परेशान हो रही थी, बाहर बारिश हो रही थी, मैंने माँ से कहा की में देखता हू, में इंजन में देखने लगा, कुछ खास प्रॉब्लम नहीं था बस एक वायर निकला था उसे मैंने लगा दिया, लेकिन माँ से कार स्टार्ट करने को नहीं कहा, और जानबूझ के देर करने लगा. अबतक अँधेरा हो गया था रस्ते पे बारिश से कुछ ट्रैफिक नहीं था मुझे देर लगते देख माँ से रहा नहीं गया, वो अंदर से मुझे पुकारने लगी, पर मैंने जवाब नहीं दिया तो माँ बाहर आ ही गयी, मुझे बस माँ को बाहर लाना था माँ झट से उतरी और बारिश से बचने के लिए झट से मेरे पास इंजन कवर के निचे आ के खड़ी हो गयी, जाहिर सी बात हे की उसमे सिर्फ में ही खड़ा रह सकता था तो में नाटक करने लगा और माँ भीगने लगी.

“क्या हुआ, रेशु..?

“अरे मोम, आप बाहर क्यों आयी, में अभी कर देता हू, अभी हो जायेगा. आप अंदर बैठिये. बस ये वायर निकल गया था इसिलिये”..

 


अपडेट 98

लेकिन माँ में क्या कर रहा हूँ वो देखने के लिए खड़ी रही, वो भीग तो चुकी थी, आह येल्लो ब्लाउज चिपक गया था फिर मैंने माँ से कहा, माँ अब स्टार्ट करो, और माँ ने अंदर बैठ के स्टार्ट किया और कार स्टार्ट हुई. मैंने इंजन बंद किया और कार की विंडो के पास आ के माँ से कहा

“मोम, जरा एक मिनट,. और थोड़ा झाड़ी के पास जा के पैंट खोल के पेशाब करने लगा.

कार तो पहले से ही साइड में थी, और जिस पेड़ के निचे में था वो थोड़ा सा जमीन की और झुका था और ऊपर से अँधेरा भी था तो में आराम से पी करने लगा और मेरे दिमाग में आईडिया आया. क्यूँ न माँ से थोड़ा सा खुल के कहा जाए, में कार की तरफ आया और माँ से कहा

“माँ आप्को..अगर जाना हो तो”.. माँ को ऐसे ओपन बोलने की आदत तो नहीं थी, पर वो हैरान तो हुई, मेरी बात सुन के, और सोचने भी लगी की जाऊं की नही, पर उन्होंने कह्

“नही..नही आई एम फाइन, और तुम अंदर बैठो, बहुत भीग रहे हो.. मैं फिर कार में बैठा और माँ ने कार स्टार्ट कर दी.

“सॉरी बेटा, पता नहीं कार को क्या हो गया था”.

“इट्स.ओके माँ.होता हे”. माँ ने फिर डैशबोर्ड में से एक नैपकिन दिया और मुझे अपने आप को पोंछने को कहा. मैंने उसे माँ को ही दे दिया और कहा माँ आप भी तो भीग गयी हे.और सच में भीगने के बाद जब कपडे सूखने लगते हे, और ठंडी पवन लगती हे, तो इतनी कातिल ठण्डी लगती हे.हालाँकि कार का शीशा बंद था पर बाहर के माहौल का असर हो रहा था मुझे ठण्डी लग रही थे और माँ को भी शायद, और मैंने देखा की माँ का एक हाथ बार बार वो अपनी चुत पे रख रही थी.

एक कार में अपने बेटे के सथा लांग जर्नी पे औरत कभी ऐसा नहीं कर सकती, पर मुझे समझ में आ गया की माँ को बड़ी जोर से पेशाब लगी हे और वो अपनी चुत पे प्रेशर फील कर रही हे, माँ जब भी अपनी चुत पे हाथ रखती तो वो मेरी और देखति की कहीं में देख तो नहीं रहा, पर में माँ के देखने से पहले ही मुँह फेर लेता, पर जब माँ ने ४-५ बार ऐसा किया तो मैंने माँ की और देखा और कहा

“मोम..आप कम्फर्टेबले तो हे ना”?.

“हा..रेशु.

“लग नहीं रहा माँ”. अब माँ से रहा नहीं गया, जब तक में उस टॉपिक पे बात नहीं कर रहा था तब तक तो ठीक था पर में उस टॉपिक पे बात की तो माँ से रहा नहीं गया और उन्होंने कहा

“रेशु..तुने सही कहा था एक तो बारिश्, ऊपर से भीगना और ठण्ड.मुझे एक नंबर जाना हे.. बस अब मैंने झट से एक साइड में देखा, तो एक घणा पेड़ दिखाई दिया,मैने पॉइंट कर के माँ से कार रोकने को कहा, माँ ने भी कार रोकि और उतर के उस पेड़ की और चल दि, पर फिर रुक गयी, मेरी और देख, पर कुछ कहा नहीं तो में संमझा नही, फिर वो चल दी और वहा जा के बैठ गयी. मेरी और ओफ़्कौर्से अपनी गांड कर के बैठी थी, दिख तो नहीं रहा था पर माँ ने अन्धेर में पेन्टी उतारी और बैठ के पेशाब करने के बाद, पेन्टी ऊपर की वो साफ़ पता चल रहा था फिर माँ मेरी और आई और मुझे ड्राइविंग सीट पे बैठने को कहा और वो मेरी सीट पे बैठ गयी.

“हाश.अब जा के चेन आया.. माँ ने कार में बैठते ही कहा. मैंने माँ को स्माइल दिया और कार चलाने लगा. और स्पीड में भगा के झट से घर पहुंचा दिया..दो तीन बार माँ ने टोका तो मैंने कहा की माँ चिंता मत करो, मुझे ठण्ड लग रही हे, और एक दो बार स्पीड ओवरटेक के टाइम माँ ने मेरा हाथ पकड़ लिया. हम फिर जैसे तइसे घर पहुंचे..८ बज रहे थे.

 
अपडेट 99

बड़ी चाची राह ही देख रही थी..ऑफ कोर्स मेरी. माँ साथ में थी मैंने उनके पाँव छुऐ, फिर उन्होंने गले लगा लिया और गाल पे एक मस्त खिंच के किस किया और कहा

“बड़ा लम्बा इंतज़ार करवाया तून, इतना भी कोई गाँव में रुकता हे क्य...?

“अरे चाची..गांव में मज़ा आ गया.. और कह के मैंने चाची की और देखा तो वो समझ गयी की मैंने जरूर गाँव में कुछ घोटाला किया हे. लेकिन बाद में मैंने और माँ ने झट से चेंज किया और मैंने माँ का सामान अपने ही कामरे में लगा दिया. बड़ी चाची भी बड़ी तेज़ थी, वो एक सेकंड में समझ गयी और जैसे ही माँ चेंज करने मेरे रूम के बाथरूम में गयी तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे रूम से बाहर निचे किचन में ले गयी और अपनी सारी इन्तेज़ारी मेरे लिप्स को चूस के उतारने लगी. मज़ा आ रहा था मैंने भी चाची को अपने सीने में समेट लिया और उनकी बैक को सहलाने लगा. मेरे हाथ चाची के सर से ले के निचे गांड तक ऊपर निचे हो रहे थे, चाची ने झट से मेरी जीभ को चूसना शुरू किया और मैंने भी उनकी जीभ से मेरी जीभ को लपेट लिया.बड़ा मज़ा आ रहा था मेरे सहलाने से चाची के सारे बाल भी खुल गए और वो बिखर गये, फिर मैंने अपने हाथसे चाची की गांड के निचे चुत पे रक्खा और उसे रगड़ने लगा. चाची भी अपने पाँव को उठा के मुझे सपोर्ट करने लगी, मैंने फिर चाची को गांड से पकड़ के उठा के किचन के प्लेटफार्म पे बिठा दिया और चूमने लगा, चाची ने भी मेरी गांड की और अपने पाँव से पलटि मार के मुझे अपनी और खीच लिया. फिर चाची ने ही मुझे छोड़ा और कहा की अभी नही, तेरी माँ आ जायेगी, और मैंने भी चाची को छोड़ दिया और चाची निचे उतर के अपने बाल बाँधने लगी.

“अच्छा..रेशु, एक बात तो बता, गाँव में किस बात का इतना मज़ा आया की इतने दिन रुक गया..? चाची को पता चल गया था की शायद मैंने छोटी चाची के साथ कुछ किया होगा. लेकिन मैंने भी नहीं कहा

“कुछ नहीं बस ऐसे ही..छोटी चाची से बहुत दिनों से नहीं मिला था.

“अच्छा..छोटी को परेशान किया या नही... अब चाची डबल मीनिंग में पूछ रही थी तो मैंने भी डॉब्लेमैनिंग में ही कहा

“अरे बहोत.इतने में तो वो रो पड़ी थी”. मेरे जवाब ने ही साफ़ कर दिया की मैंने उनके साथ भी सेक्स किया हे.. और चाची समझ भी गयी, थोड़ा सा चौंक तो गयी मेरा जवाब सुन क़र, पर फिर मुस्कुरा के मस्ती में मेरे सर पे मारा और कहा

“अच्छा, अपनी माँ को परेशान किया या नहीं..? चाची सच में डेंजर सवाल पूछ रही थी, पर मुझसे पता नहीं झूठ नहीं बोला जा रहा था

“नही...

“सच मे...? चाची ने फिर से पूछा.

“हाँ हा, सच में अभी तक परेशान नहीं किया...

“मतलब ट्राय चालू हे, ह्म्मम्...?

ओर इतने में माँ आ गयी और कहा

“क्या बातें हो रही हे चाची के साथ्...? “अरे कुछ नही, तेरे छोरे को बड़ी ठण्ड लग रही हे, तो गैस के पास आ के खड़ा हो गया हे.. वाह चाची ने बात भी बदल दी और मेरे दिमाग में एक आईडिया भी आ गया. फिर हम सब बाहर आ गये और डिनर निपटाने लगे, माँ ने चाचा के बारे में पुछा तो चाची ने कहा की वो कांफ्रेंस में कोलकता गये हे. कल सुबह तक तो आ जाएंगे. मेरी आँखें तभी चमक उठी और फिर कुछ देर बात करने के बाद सोने का टाइम हो गया तो माँ उठ के पहले मेरे रूम में गयी, और मुझे भी आने को कहा तो मैंने जाते जाते चाची से काण में कहा

“चाची..आपकी कुछ मदद की जरूर पड़ सकती हे, प्लीज् थोड़ा मदद कद दे ना. चाची समझ रही थी की में उन्हें माँ को पटाने के बारे में मदद मांग रहा हूँ पर उन्होंने कहा, सॉरी रेशु इस काम में में तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकती, और एक्चुली मुझे तो तुम्हे पनीश करना चाहिए और तू भी ऐसा मत कर, पर पता हे की तुम मेरी बात नहीं मानोगे.थीक है ट्राय करो, तो मैंने चाची से मुस्कुराके कहा की वो सब बाद में चाची, और कह के अपने रूम में चला गया. माँ का मेरे साथ में सोना, ये सोचना ही मेरे लिये, थोड़ा सा एक्ससायटिंग था माँ के बारे में सोचते सोचते ही में अपने रूम में पहुंचा और देखा तो माँ तो बेड पे लेती हुई थी, मैंने माँ को मस्त ऊपर से निचे देखा, और फिर माँ के साइड में जा के बैठा और माँ को देखता रहा. माँ मेरे सामने पहली बार ऐसे सो रही थी, पहली बार में देख रहा था मैंने भी फिर अपना कम्बल उठाया और कमर तक दाल के माँ के जस्ट साइड में सो गया.

 
अपडेट 100

मै साला सोच रहा था की जैसे दीदी से बहाना बनाया था की मुझे ठण्डी लग रही हे तो दीदी के पास आने का मौका मिला था तो में आज भी माँ से कहने वाला था की माँ मुझे ठण्डी लग रही हे तो क्या आप से नजदीक हो के सो सकता हू, और वैसे भी में आज बड़ा भिगा था तो माँ मना भी नहीं करति, पर माँ तो आते ही आँखें बंद कर के सो रही थी.और सारे प्लान्स का सत्यनाश हो गया, बाकि मुझे १० बजे तो नींद भी नहीं आती थी, में बस ऐसे ही जागता हुआ लेटा था बार बार मूड के माँ को देख लेता था लग नहीं रहा था की माँ सो रही थी, रूम में डीम लाइट की रौशनी अच्छी ख़ासी थी तो माँ को में साफ़ देख सकता था लेकिन इतने जल्दी माँ सो कैसे गयी ये सवाल मन में आ रहा था माँ को इतनी जल्दी नींद आ कैसे सकती हे.इतने में में बैठ गया और माँ की और देखा तो माँ की साइड में एक विंडो थी,ज़ो खुली थी, मैंने सोचा की माँ को जगाऊँ की माँ ये खिड़की बंद कर दो, मुझे ठण्डी लग रही हे, लेकिन फिर सोचा की नहीं माँ शायद सचमुच थक गयी होंगीं तो उन्हें सोने देना ही अच्छा हे.

बाहोत बार सोचा की माँ को डिस्टर्ब करू की नही, और फिर मेरा शैतानी दिमाग जीत गया और मैंने हलके से माँ के बाजु पे हाथ रक्खा, और माँ को हिलाते हुए आवाज़ दी की “मोम मम, और माँ उठ गयी, माँ के उठने से भी लग रहा था की माँ सोयी नहीं थी, या ट्राय कर रही थी.

“क्या हे...?

“मोम, मुझे ठण्ड लग रही हे, क्या ये खिड़की आप..

“अरे इसमें पूछ्ता क्या हे,. और माँ ने मेरी बात समझते हुए बीच में ही कहा और उठ के माँ ने खिड़की बंद की. और फिर बेड घूम के उनकी साइड जाने के बजाय मेरे पास आई और मेरी और मुस्कुराके मेरे चेहरे पे अपना हाथ घुमाय और सर पे भी हाथ घुमा के कहा

“आरे..तो फिर इतना भीगता क्यों हे... माँ की आवाज़ में मेरे लिए मस्त केयर नज़र आ रही थी. फिर मुझे माँ ने लीटा दिया और ठीक से कम्बल भी दाल दि, थोड़ा सा डर तो लग रहा था की माँ के नजदीक जाने को कहूँ की नही, लेकिन फिर माँ बाहर गयी और में फिर से सोचने लगा, माँ से पुछ्ने के बारे मे. शायद तो माँ मना नहीं करेगि, लेकिन पूछ्ने में जिझक हो रही थी, फिर माँ इतने में मेरे लिए गर्म दूध ले के आई और मुझे पीला के फिर बाहर चलि गयी. लेकिन माँ बड़ी देर के बाद भी नहीं लौटी तो थोड़ा सा शक़ होने लगा, मैंने बाहर जा के देखा तो माँ बड़ी चाची से बात कर रही थी, मुझे सुनाइ तो नहीं दे रहा था पर ऐसा लग रहा था की वो दोनों मेरे ही बारे में बात कर रहे थे, वैसे तो वो दोनों सहेलिया जैसे ही हे.

ट्राय करने पे भी सुनाइ नहीं दिया तो में फिर से अपने रूम में आ के लेट गया और माँ के आने का इंतज़ार करने लगा, वैसे भी नींद तो लेट ही आती हे मुझे. फिर काफी देर बाद, शायद आधे पौने घंटे क बाद माँ आई और मुझे जगता पा के मों ने कहा

“अरे रेशु, अभी तक सोया नहीं..?

“नहीं मोम,नीन्द नहीं आ रही.. फिर माँ बेड पे आ के बैठी और अपने बाल खोल के लेट गयी और मेरी और लेट गयी और मेरे सर पे फिर से हाथ फेरा और कहा

“आजा मेरे पास आजा, अभी नींद आ जाएगी, और बारिश में भीगना बंद कर दे... देखा इसे माँ कहते हे, मेरे मन की बात भी समझ गयी और मुझे पास आने को कहा तो वो भी दाँट के. थोड़ा सा अजीब था माँ को समझना पर इतना तो पता था की माँ ने इतने सालों से अपने को सिंगल रक्खा हे, उनकी भी बड़ी इच्छा होती होगी, सेक्स के बारे में, शी इज ४० पर, आज भी वो इतनी सेक्सी हे की २० की उमरवाले का भी लंड खड़ा कर दे, और उन्हें जब सब मर्द घूरते होंगे, तो उन्हें भी तो सेक्स के लिए तलप लगती होंगी..

मुझे माँ ने जब कहा तब यक़ीन नहीं हो रहा था की माँ सामने से कह रही हे पर अच्छा भी लग रहा था और में अपने दोनों दोनों हाथों को मसलते हुए माँ के पास हो गया और माँ ने मुझे पकड़ के और भी खिंच लिया. माँ ने फिर मेरे सर पे किस भी किया और मेरे बैक को थपथपाया भी. सच में दीदी के पास सोने में और माँ के करीब सोने में बड़ा फर्क था में बिलकुल माँ के पास हो गया. माँ को भी अच्छा लग रहा था शायद. मैंने माँ के सीने पर जो साड़ी थी उसके अंदर अपना मुँह ले जाने की कोशिश की और माँ की बैक पे अपने हाथ से मेरे नजदीक आने को पुश भी किया. और माँ भी मेरे पास आई और मेरे सर को सहलाने लगी. फिर मैंने जानबूझ के माँ के थाय पे अपना पांव रक्खा और अपने लंड का पार्ट भी माँ के चुत के पास ले गया. इससे आगे बढ्ने की हिम्मत नहीं हो रही थी, तो में ऐसे ही माँ से चिपक के पड़ा रहा और माँ मेरे बालों को सहला रही थी, मेरी साँसे माँ के सीने को छा रही थी और मेरी साँसे तेज़ चल रही थी तो मानो, मेरी साँसे माँ के सीने में धँस रही थी. माँ को भी अच्छा नशा चढ़ रहा था माँ भी सेम फीलिंग फील कर रही थी, उनके बॉब्स मस्त ऊपर निचे हो रहे थे, माँ की साँसे भी तेज़ चल रही थी. उनके हाथ भी मेरे बैक पे तेज़ी से चल रहे थे.

“रेशु..अब अच्छा लग रहा हे”...?

 
अपडेट 101

हाँ माँ अच्छा लग रहा हे.. मैंने माँ के सवाल का जवाब दिया तो मेरे होठ माँ के सीने से चिपक के बोल रहे थे, मैंने अब धीरे से माँ की साडी हटा दी थी और अब माँ के बॉब्स का क्लीवेज मेरे लिए ओपन था और मैंने माँ के क्लीवेज पे ही अपने होठ रख दिये और माँ कुछ न कहे इसीलिए माँ का ध्यान बटाने के लिये, माँ के थाइस पे अपना पाँव दो बार हिलाया और इस दौरन मैंने माँ के बैक पे फिर से प्रेशर किया और इससे माँ के क्लीवेज पे जो गैप था उसमे मेरे होठ चले गये, ओहो, सच में ये मानने को ही मुश्क़िल था की माँ से थोड़ी झीझक थी तो अभी माँ के बॉब्स और मेरे मुँह के बीच बस ब्लाउज का ही आवरण था पर ये ब्लाउज हटाना ही मुश्क़िल था

अब तो माँ भी शायद अपने होश खो रही थी, माँ के पाँव भी मेरे पाँव पे चल्ने लगे थे, में माँ के साथ ऐसे कुछ नहीं करना चाहता था की बाद में माँ को गिल्टी फील हो, लेकिन हट्ने का भी मन नहि हो रहा था तो में ऐसे ही मज़े ले रहा था फिर माँ ने मुझे अपने से अलग किया और न चाहते हुए भी मैंने माँ के क्लीवेज से अपने होठ हटाये, और मैंने देखा की वो पार्ट गीला हो गया था माँ ने मुझे हटा के, ठीक से लिटाया और कहा

“रेशु..कुछ लगा दुं, क्या”?

“नही..मोम में ठीक हू, बस आप ऐसे ही लेटे रहो,अच्छा लग रहा हे.. मैंने हीम्मत कर के कह दिया, माँ को भी सुन के अच्छा लगा और वो मुस्कुरायी और फिर उठ के विक्स ले के आई और बेड पे बैठ गयी और मैंने जानबूझ के टी-शर्ट उतार दि, हालाँकि उसकी कोई जरूरत नहीं थी पर मेरे दिल में आया और मैंने उतार दी. माँ मेरे पास आ के बैठ गयी और मेरे सीने पे अपने मस्त हाथों से विक्स लगाने लगी, आह मस्त पल था वो बॉस, माँ ने एक दो बार मेरे निप्पल पे हाथ भी घुमाया और घूमते टाइम माँ ने मेरी और देखा, में माँ को ही देख रहा था पर मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और माँ ने फिर से एक दो बार मेरे निप्पल्स पे हाथ फिराया और मुझे हल्का सा प्रेशर भी फील हुआ. फिर माँ ने मेरे गले पे और मेरे सर पे भी विक्स लगाया, माँ भी सच में बहुत सेक्सुअली एक्टिव थी, वो चाहती तो साइड में बैठ के थोड़ा सा आगे आ के आराम से लगा सकती थी पर वो हिली नहीं और वहीँ बैठे बैठे, वो मेरे सर पे विक्स लगाने के लिए आगे झुकि और मेरे सीने पे माँ के बॉब्स आ गयी, और माँ ने हम दोनों के सीने के बीच में हवा आने की कोई गुंजाईश नहीं छोडी और वो फिर विक्स लगाने लगी. मेरी आँखें बन्द्द थी, पर वो अपने सीने पे बॉब्स का फील सच में अमेजिंग था मेरा लंड टाइट हो गया था पर अभी टाइम नहीं था

माँ ने मेरे सर पे विक्स लगा के, साइड में रक्खा और गाल पे एक किस दे के मुझे गुड नाईट कहा और लाइट्स ऑफ कर के वो मेरे साइड में सो गयी, मुझे सच में माँ के ऐसे छूने से ही नींद आ गयी. कसम से में सोना नहीं चाहता था पर माँ ने सच में माहौल ऐसा कर दिया था की नींद आ ही गयी.

मैं सुबह उठा तो भी लेट की माँ को मेरे रूम में रेडी होते देख नहीं पाया, और वो रेडी हो के चाचा और चाचीसे बात कर रही थी. मैं फ्रेश हो के बाहर आया, तो सब साथ में नाश्ता करने बैठे, चाची जानबूझ के मेरे साथ में बैठ गयी और माँ मेरे सामने, चाचा साइड में बैठे थे, वो सिर्फ चाय पीते थे. सब नाश्ता कर रहे थे, तभी चाची ने मेरे थाइस पे हाथ रक्खा और सहलाने लगी, चाची बड़ी नॉटी हो रही थी, मुझे भी अच्छा लग रहा था,ऐसे सब के सामने चुप चुप के हरक़तें करना. तो मैंने भी चाची की चुत के पास अपना हाथ रक्खा, तो चाची ने अपना हाथ हटा लिया ता की किसी को शक़ न हो जाये, पर माँ को कुछ डाउट सा लगा, लेकिन उन्होंने निचे देखा नही. फिर मैंने डर के अपना हाथ ऊपर ले लिया, तो बड़ी चाची ने अपना हाथ मेरे लंड पे रक्खा और मूठी में ले के मसलने लगी, वो खड़ा होने लगा था माँ को सच में डाउट हो गया था तो उन्होंने नैचुरली चम्मच निचे गिरायी और उठाने के लिए निचे झुकी, पर जैसे ही माँ ने चम्मच निचे गिरायी, तो चाची भी इंटेलीजेंट थी तो उन्होंने अपना हाथ हटा लिया और ऊपर कर लिया, पर मेरा इरेक्शन माँ को नज़र आ गया.लेकिन कुछ पूछ नहीं सकती थी वह. मैंने चाची की और भवे तांन कर के देखा तो चाची ने भी इशारो से सॉरी कहा फिर नाश्ता निपटा के वो तीनो, बीमार रिलेटिव के यहाँ निकल गयी..

 
अपडेट 102

कब वक़्त बड़ा बोरिंग होने वाला था घर में कोई नहीं था और सब जो गए थे वो शाम के अलावा वापस नहीं लौटने वाले थे, और मुझे और कोई काम नहीं था तो में घर से बाहर सोसाइटी के फ्रेंड्स के साथ क्रिकेट खेल्ने चला गया और एन्जॉय करने लगा, काफी अच्छे ख़ासे दोस्त थे मेरे, और सब के सब पक्के खिलाडी थे, तो मेरा टर्न आते आते दोपहर के १२ बज गये, साला गुस्सा आ गया था मुझे, फील्डिंग कर कर के थक भी गया था तो इतनी देर के बाद बैटिंग के आने से थोड़ा सा जोश में भी आ गया था तो मैंने जैसे ही बॉलर ने गेन्द फेंकि, तो जोर से घुमा के शॉट लगाया, और मेरा बदनसीब, की वो जा के सीधे आंटी को लगा. आंय गेस..साला उसी आंटी को लगा, जो चाची के सामने रहती थी और मुझे मूठ मारते हुए देख लिया था ओह्ह गोड़, मेरा तो वक़्त ही पता नहीं कैसा चल रहा था आंटी को बॉल लगा भी तो उनके बगल के निचे(आर्मपिट) के निचे लगा, आंटी तब अपने घर को जा रही थी, और सच में मैंने जोर से लगया था और, वो बिचारि, जैसे ही गेन्द लगी तो एक सेकंड के लिए तो वो चौंक गयी, लेकिन फिर तुरंत ही आंटी का हाथ अपने आर्मपिट पे गया और उनका हाथ वहा चोट की जगह पे सहलाने लगी. आंटी को सच में जोर से लगी थी, फिर आंटी ने बैट्समैन की और देखा और ऑफ़ कोर्स मेरे हाथ में बैट था और जैसे ही आंटी ने मेरी और देखा तो में तो वहीँ शर्म से पाणी पाणी हो गया, पर फिर स्टाइल मारने के लिये, आंटी के सामणे, बैट को फेंका और निचे बैठ गया.

आंटी को गुस्सा तो बड़ा आ रहा था पर उन्होंने कुछ कहा नही, और वो अपने घर में चलि गयी. लेकिन जाते जाते, मैंने ध्यान से देखा तो चोट की वजह से आंटी के आँखों में आंसू आ गए थे, फिर भी कुछ कहे बिना वो अपने घर में चलि गयी और में फिर से खेलने लगा. लेकिन कुछ देर बाद मैंने देखा तो वो अपने घर के बालकनी में आ के मेरी और ही देख रही थी,मैन समझ गया था की अब बड़ी चाची से मेरी एक और कंपलेंट आने वाली हे, लेकिन अब ख़ास परवा नहीं थी मुझे, क्यूँकि चाची खास डाँटने वाली नहीं थी, पर आज अगर माँ के सामने कंपलेंट कर दी तो माँ का शायद मूड ख़राब हो जायेगा.

आंटी ने मुझे कुछ कहा नही, तो में फिर से खेलने में लग गया, फिर जब वापस लौटा तो, वो आंटी अपने घर से बाहर आ रही थी, शायद फिर से कहीं उन्हें जाना था मैंने सोचा की सॉरी कहूँ ..या नहीं कहूँ और वो आंटी भी मुझे देख के हलकी सी रूक गयी, पर फिर मुझे अनदेखा कर के बाहर निकल गयी.मैं कहने ही वाला था की सुनिये आंटी कुछ कहना हे, पर वो झट से निकल गयी और मूड के भी नहीं देखा.

मै अपने रूम में आया, घर में टीवी देखा, लेकिन साला बोरीयत सी हो रही थी, में अपने कामरे में जा के सो गया, और लेटे लेटे माँ और चाची के बारे में सोचने लगा. बड़ी चाची ने भी मदद करने से मना कर दिया, वर्ना माँ को पटाने में थोड़ी सी आसानी हो जाति, और जब बड़ी चाची ने कहा की वो मदद नहीं करेंगी, तब सच में लगा की वो इस मामले में तो उनके बारे में सोचना बेकार हे. और माँ अगर रिलेटिव की खबर देख के जल्दी आ गयी, तो शायद आज के आज ही घर के लिए निकल जाएगी.और साला फिर पता नहीं कितना इंतज़ार करना पड़ेगा, लेकिन ये तो लग रहा था की शायद शाम के सात तो उनके बज ही जाएंगे. इतने में मेरा ध्यान माँ के बैग की और गया, और पता नहीं ख्याल आया की इसे खोल के देखूं.और में बैग उठाया, और खोला, पर उसमे कुछ नहीं था सिवाय ऑर्नामेंट्स और कपड़ों के.फिर जब मैंने माँ की ब्रा और पेन्टी देखि..कपडों के बीच में तो और एक शैतानी ख्याल आया और में झट से बालकनी में गया और माँ के इनरवेर को उठाया, जो सुबह ढोये थे वो सुख गये थे, मैंने सारे कपडे कलेक्ट कर लिए और सब ठीक से अरेंज कर दिए और लास्ट में माँ की पेन्टी उठा के उसे अपने पैंट में डाला और घीसने लगा, एक बार फिर से माँ को एहसास दिलाने के लिये, की उनका बेटा उनके बारे में क्या सोचता हे, इसीलिए मैंने माँ की पेन्टी को पैंट में डाला और घीसने लगा..आहे लंड उठ चुका था और ब्रा को मुँह पे रख के स्मेल करने लगा, अच्छा लग रहा था बड़ा घीसने के बाद मैंने माँ की पेन्टी में ही झड दिया. और फिर से सूखने रख दिया.

 
अपडेट 103

मैं बहुत बोर हो रहा था तभी मुझे एक खयाल आया कि क्यों ना कोमल दीदी को फोन किया जाये मैंने दीदी को फोन किया दीदी ने फोन उठाया

दीदी-हाय रेशु आज कैसे याद किया

मैं-क्या दीदी याद उसे किया जाता है जिसे हम भूल जाते है तुम तो मेरे दिल मे हो

दीदी-मैं सब समझती हूं मुश्किल से कभी कभी फोन करते हो आज कैसे किया बताओ?

मैं-क्या दीदी फोन करो तो भी ताने सुनने पड़ते है मैंने कितना आपको मिस किया और आप हो कि ताने दे रही हो

दीदी-वह छोड़ो क्या कर रहे हो कहा हो?

मैं-दिदी मैं कल शाम अहमदाबाद आया हु मा के साथ और आज तुमको फोन किया

दीदी-सॉरी रेशु मुझे लगा तुम अब भी सूरत में हो क्या कर रहे हो?

मैं-कुछ नही दीदी माँ और चाची बीमार रिलेटिव्स को देखने गये है मैं बिल्कुल अकेला हु तुम आजाओ

दिदी-मैं मेरी सहेली के यहाँ हु एक काम करो तुम मेरे घर आजाओ घर मे कोई नही तुम्हारे जीजू दूसरे शहर गये है मैं भी अकेली हु तो जल्दी आजाओ मैं भी यहां से निकलती हु मैंने ओके कहा और फोन कट कर दिया और घर को लॉक करके बाइक स्टार्ट करके दिदी के यहाँ चला आया दिदी अभी तक नही आई थी पर चाभी कहा रखी थी मुझे बताया था तो डोर खोलकर मैं अंदर आगया और फ्रेश होकर दिदी की राह देखता रहा

2 बजे के करीब कोमल दीदी आ गयी और आते ही मुझसे लिपट गई और मुझे चूमने लगी मस्त किस करने लगी हमारा किस दस मिनट चला फिर मुझसे अलग होकर मुझे देखकर मुस्कुराई बोली- बहुत गर्मी है… नहा कर आती हूँ, फिर कुछ खाएंगे… तब तक तुम दूध पीना चाहो तो पी लो… फ्रिज में रखा है.

मैंने कहा- पहले तुम नहा लो, फिर आराम से दूध पिलाना.

कोमल दीदी मुस्कुरा कर बोली- मारूँगी शैतान के बच्चे!

और बाथरूम में चली गयी.

बाथरूम में पानी गिरने की आवाज़े आने लगी. मैं बेड पर लेटा उन आवाज़ों को सुन कर ख्यालों में डूब गया. एक गोरी जवान और गदराई बिल्कुल नंगी दिदी इस कमरे के अटैच्ड बाथरूम में नहा रही है और यहाँ मेरे अलावा और कोई नहीं है.

फ़िर मैं बैठ गया, मैंने देखा कि बाथरूम के दरवाजे में छेद था। मैंने जब उस छेद से अन्दर देखा तो मेरे होश उड़ गये। कोमल दीदी अपने हाथ से अपनी चूत को सहला रही थी। यह देख कर मैं पागल हो गया, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

फ़िर मैंने देखा कि दीदी अपने हाथों से अपनी चूचियाँ सहला रही थी, उसके चेहरे के भाव देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया, मैं भी अब अपने लंड को सहला रहा था।

मैं फ़िर से अंदर देखने लगा। मुझे यकीन नहीं हो रहा था दीदी मेरे होते हुये भी ऐसा कर सकती है। तन मैंने सोचा कि हर लड़की के अंदर कामुकता तो होती ही है, उसे सेक्स की चाहत होती है।

फ़िर उसने अपने चूतड़ों को सहलाया। फ़िर दीदी शावर चला कर नहाने लगी।

मैं बाहर जाकर बैठ गया, वो ब्लाऊज पेटीकोट पहन कर जैसे ही बाहर आई, मैंने अपने लंड को सहलाया, उसने मेरे लंड के तरफ़ देखा और दीदी बाहर की ओर जाने लगी, मैं भी दीदी के पीछे पीछे गया, फ़िर मैं दीदी के कंधे पर हाथ लगाने लगा, दीदी तौलिये से बाल सुखाने लगी थी।

मैंने कहा- दीदी, लाओ मैं पीछे से बाल सुखा देता हूँ।

फ़िर मैं तौलिये से दीदी के बाल सुखाने लगा। मैं बीच बीच में दीदी की नंगी गोरी पीठ पर हाथ फिराने लगा. फिर दीदी की बगल से हाथ फिराते फिराते मैं उनकी चुची पर ले गया। वो समझ गई कि मैं क्या चाहता हूं. दीदी ने मुझे नहीं रोका तो फ़िर मैं दीदी की चुची को दबाने लगा। दीदी दिखावे के लिए मेरे हाथ हटाने लगी लेकिन मैंने दीदी को पकड़ा और उसके स्तनों को दबाने लगा।

वो मदहोश होने लगी। मैं दीदी के नंगे पेट पर भी हाथ फिराने लगा।

दीदी की कामुकता जागृत होने लगी. मैंने अपनी एक उंगली दीदी की नाभि में घुसा दी. और अपना एक हाथ दीदी के पेटीकोट के नाड़े के अंदर घुसाने लगा. नाड़ा ज्यादा कसा नहीं था तो मेरा हाथ पेटीकोट के अंदर चला गया. दीदी ने पेंटी पहनी हुई थी लेकिन बहुत छोटी सी, दीदी की चूत का छोटा सा हिस्सा ही पेंटी से ढका हुआ महसूस हो रहा था.

मैं पेंटी के ऊपर से चूत सहलाने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपनी पेंटी के अन्दर डाल दिया, मैं दीदी की चूत को सहलाने लगा, दीदी गर्म हो चुकी थी। यह सब मैं दीदी के पीछे खडा होकर ही कर रहा था. फ़िर मैं दीदी की गर्दन को चूमने लगा, दीदी पीछे चेहरा घुमा कर मुझे चूमने लगी। मैंने दीदी का हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रख दिया। दीदी घूम कर मेरे सामने आ गई और मेरे लंड को जम कर दबाने लगी.

और फ़िर वो नीचे बैठ गई, मेरी पैंट की जिप खोल कर मेरा नौ इंच लंबा लंड बाहर निकाल लिया.

दीदी तो मेरा मोटा लंड को देख कर जैसे पागल सी हो गई, वो बोली- रेशु कितना मिस किया है मैंने इसे आज तो जी भर कर चूदवाऊंगी तुमसे

मैंने कहा- मेरी प्यारी दीदी, पहले इसे मुँह में तो ले कर चूसो!

दीदी बड़े प्यार से मेरे लंड को अपनी जीभ से चाटने लगी। मेरे मुँह से आवाज़ आने लगी- सिसकारियां निकलने लगी- ओह दीदी, अच्छा लग रहा है… पूरा लंड मुंह में ले लो ना!

तभी दीदी की आवाज आई- क्या सोच रहे हो?

मैं चौंक कर अपने ख्यालों से बाहर आया- कुछ नहीं दीदी… कुछ नहीं बस ऐसे ही.

मुझे अपने ऊपर बहुत शर्म आई कि मैं ये सब क्या सोच रहा था. ख्यालों में ही दीदी की चुत सहला दी और दीदी को लंड चुसवा दिया.

 
अपडेट 104

दीदी के आने से पूरे कमरे में परफ्यूम की भीनी भीनी खुश्बू फ़ैल गयी थी. दीदी मेरे सामने खड़ी थी. चटक लाल रंग का रीबॉक का लोअर जिसमें से उनकी पैंटी की इलास्टिक दिख रही थी. ऊपर आसमानी रंग का टीशर्ट. भीगे बाल, हल्के गुलाबी होंठ, मादक आँखें!

“मैं खाना लगा रही हूँ.” कह कर मुस्कुराते हुए कोमल दीदी किचन में चली गयी.

दीदी ने खाना लगाया, दीदी को गोद मे बिठाकर हम दोनों ने खाया, खाना खाते खाते मैं दीदी के सेक्सी बदन को, उनकी चूचियों को ही मसले जा रहा था, दीदी भी मेरी इस हरकत को एन्जॉय कर रही थी.

तभी दीदी का फोन बज उठा, दीदी ने फोन उठा कर देखा और उनकी त्यौरियाँ चढ़ा गई, वो फोन लेकर अंदर चली गई, अब किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी, गुस्से में फ़ोन बिस्तर पर पटक कर दीदी बाहर आई और बोली- मेरी सास ने बुलाया है… यहीं शहर में… बोली हैं कि सफ़ेद साड़ी पहन कर आओ.उनके किसी दोस्त के यहा मौत हुई है.

कुछ देर बाद कोमल दीदी दीदी बगल वाले रूम में तैयार होने चली गयी. गुस्से में दीदी कुछ बड़बड़ाती जा रही थी और इसी वजह से कमरे की कुण्डी भी नहीं लगाईं थी. मैं बस अब कोमल दीदी के जवान बदन को बिल्कुल नंगा देखना चाहता था.

मैंने झटके से दरवाज़ा खोल दिया.

मेरे होश उड़ गए…. कोमल दीदी बेड पर अपनी जाँघें फैलाए पड़ी थी, उसने टॉप पहना हुआ था मगर लोअर उतारा हुआ था, पेन्टी नीचे सरकी हुई थी और अपनी चूत में एक उंगली अंदर बाहर कर रही थी.

मुझे देखते ही दीदी बोली- ये क्या रेशु कितना तड़पाते हो? कबसे राह देख रही हु?

अपनी पैंटी ऊपर करते हुए बोली कोमल दीदी .

“सॉरी… वेरी सॉरी…” मैं सकपका गया- दीदी, मैं तो ये कहने आया था कि अगर आपने जाना है तो मैं भी चला जाता हूँ.

कोमल दीदी थोड़ा मुस्कुरा कर बोली- मैं नहीं जा रही कहीं…

कोमल दीदी को मुस्कुराती देख मेरी जान में जान आई मैं कुछ बोल पाता कि वो फिर बोल पड़ी- देखो… अब तरसाओ मत, मुझे आज तुम्हारी जरूरत है… कितने समय से तुम्हारा इंतजार कर रही हूँ. आज तुम यहाँ हो तो… मैं कही नही जाऊंगी अब चाहे तेरे जीजू का फोन भी आये समझे.

मैंने हाँ में सिर हिलाया.

दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी बड़ी गांड को मटकाते हुए मुझे बगल वाले कमरे में ले चली. बिस्तर पर नर्म गद्दा था, बिस्तर पे ए सी का रिमोट पड़ा था, दीदी ने रिमोट से ए सी चालू किया और मुझे बिस्तर के ऊपर धक्का दिया. मैं गिरा और पूरी नंगी दीदी मेरे ऊपर आकर चढ़ गई और मेरे होंठों को चूमने लगी.

कुछ देर बाद हम दोनों 69 पोजीशन में आ गए, मैंने पहले दीदी की चूत पर पैंटी के ऊपर से ही किस किया, उसमें से हल्की सी खुशबू आ रही थी जो मुझे उत्तेजित करने के लिए काफी थी.

मैंने अपनी उँगलियों से पेन्टी एक तरफ सरका के अपनी जीभ जैसे ही चूत पर लगाई, कोमल दीदी कराह उठी. उसने मेरी पैन्ट खोल कर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और उसे मुख में लेकर कुल्फी की तरह होंठों से चूसने लगी.

इधर मैंने दीदी की चूत में जीभ से चाटा और उधर कोमल दीदी ने मेरा आधा लंड अपने मुख में भर लिया. मैंने दीदी की पैंटी पूरी उतार दी और अपनी एक उंगली कोमल दीदी की गांड के छेद पर रख दी और उसे दबाते हुए चूत को चाटने लगा.

कोमल दीदी ने मेरे आधे लंड को हाथ से पकड़ा हुआ था और बाक़ी का आधा लंड अपने मुंह में लेकर जोर जोर से चूस रही थी.

आनन्द के मारे मेरे तो होश उड़ चुके थे, कोमल दीदी मेरे लंड के चूस रही थी और मैंने दीदी की गोरी चूत को चाट कर लाल कर दिया था. मैंने कोमल दीदी दीदी की गांड में उंगली कर कर के उसे ज्यादा उत्तेजित कर दिया था, अब हम दोनों भाई बहन सेक्स के लिए एकदम तैयार थे.

कोमल दीदी ने मेरे लंड को मुख से निकाला और बोली- चल रेशु, अब दे दे अपनी दीदी को असली चुदाई के स्वर्ग का आनन्द!

मैं उठा अपने पूरे कपडे उतारे, इतनी देर में दीदी ने अपने सारे कपडे उतार दिए थे, दीदी ने बिस्तर पर लेट कर अपनी दोनों टाँगें खोली और चूत का फाटक मेरे सामने खोल के रख दिया.

कोमल दीदी की चूत काफी दिनों के बाद मेरी नज़रों के सामने थी जिसको मैं अभी कुछ पला पहले चाट चाट कर गर्म कर चुका था, मेरे चाटने से पूरी चूत लाल हुई पड़ी थी.

कोमल दीदी ने अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर सेट किया.

मैं नीचे झुका और कोमल दीदी के होंठों पर अपने होंठ लगा दिये, कोमल दीदी के होंठ चूसते हुए मैंने अपने कूल्हों से एक झटका दिया तो मेरा लंड बड़ी मुश्किल से दीदी की चूत के अन्दर आधा घुस गया.

कोमल दीदी के मुह से चीख निकल गई थी, चूत में लंड घुसते ही वो मुझे और भी सेक्सी तरीके से चूमने लगी. हम दोनों की जीभ एक दूसरे से लड़ने लगी थी.

तभी मैंने एक और झटका मारा और इस दूसरे झटके में मेरा लंड पूरा मेरी दीदी कोमल दीदी की चूत में था.दिदी की चुत बहुत कसी हुई थी जीजू ज्यादातर बाहर ही रहते थे इसलिए ज्यादा चोद नही पाते थे इसलिये चुत अब भी बहुत टाइट थी

मैंने एक मिनट तक लंड को चूत के अंदर ऐसे ही रहने दिया, और दिदी के स्तन मुह में लेकर चूसने चाटने लगा जोरसे दबाने लगा आह क्या मम्मे थे दिदी के बहुत ठोस जैसे किसीने हाथ भी ना लगाया हो ऐसा करने से मुझे बड़ा मजा आ रहा था, नीचे दीदी की गर्म चूत मेरे लंड को दबा रही थी.

अब मैं धीरे धीरे लंड को दीदी की चूत में अन्दर बाहर करने लगा. कोमल दीदी की गीली चूत में लंड हिलाना बड़ा मजेदार था.

कोमल दीदी सिसकारियाँ भर रही थी, कराह रही थी- चोद रेशु… जोर जोर से मेरी प्यासी चूत को चोद! उम्म्ह… अहह… हय… याह… जोर जोर से! बहुत मजा आ रहा है.

“ये लो… ये लो… पूरा मजा लो दीदी, ये ले लो अपने भाई का लंड अन्दर तक!” मैं भी कस कस के अपना लंड दीदी की चूत में ठोक रहा था.भाई बहन की जांघों के आपस में टकराने से कमरे में फच फच पट पट की आवाजें कोमल दीदी और मेरी चुदासी आवाजों से मिक्स हो रही थी.

“अह्ह्ह ऊऊऊह अह्ह्ह ह्ह…’ दीदी की चुदास, कामुकता बढ़ रही थी.

मैंने कोमल दीदी के मांसल कंधों को अपने दोनों हाथों से जकड़ लिया और दीदी को जोर से चोदने लगा. कोमल दीदी की साँसें उखड़ चुकी थी. और दीदी ने तभी मेरे लंड पर चूत के होंठों का दबाव बना दिया.

दीदी झड़ने को थी, एक लम्बी सांस के साथ मैंने भी अपना पानी दीदी की झड़ रही चूत में निकाल दिया. कोमल दीदी की चूत ने मेरे लंड पर जकड़ बनाये रखी और वो भी मेरे साथ झड़ गई!

मेरे वीर्य की एक एक बूंद की दीदी की गर्म चूत में निकल गयी और तब दीदी ने मेरे लंड को अपनी चूत की गिरफ्त से आजाद किया. मैंने लंड बाहर निकाला और दीदी के चेहरे को देखा, उनकी आँखों में संतुष्टि के भाव थे और मैं तो खुश था ही अपनी दीदी को चोद कर!

 
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