अपडेट 72
मै अभी भी शायद उन हसीन पलो को याद कर रहा था और चाची सारा सामान चेक कर रही थी की चाचा ने जो भी मँगवाया था वो ले लिया की नही..और इतने में उन्हें लगा की में कहीं खोया हुआ हूँ तो उन्होंने, मेरे चेहरे को अपनी और घुमाया और मेरी और देखने लगी. तो मैंने चाची से पूछ लिया
“चाची आप ठीक है ना...?
“घनचक्कर, में तो ठीक हू, पर तुझे क्या हुआ हे, क्यों इतना खोया खोया हे..?
“कुछ नहीं चाची..बस ऐसे हि, कुछ सोच रहा था”.
“अच्छा अभी सोचना बंद कर, मुझे पता हे तेरी सोच कहाँ तक जा रही हे.. और चाची ऐसे डबल मीनिंग बात कह के हंस पडी और में भी चाची को ऐसे नॉर्मली खुश हो के हँसता देख हंसपडा तब मुझे लगा की चाची सच में खुश हे और अब तो बड़ा मज़ा आने वाला हे. फिर तो चाची बस में बहुत खुल के बात करने लगी और आधे घंटे में हम चाचा के हॉस्पिटल पहुँच गए और चाचा से मिले, फिर चाचा ने मुझसे पूरा अस्पताल घुमने को कहा और में बाहर निकल के हॉस्पिटल में घुमने लगा, चाची भी बाहर निकल के लेडीज वार्ड में चक्कर लगाने लगी.
एक घंटे तक घुमने के बाद में बोर होने लगा, तो फिर से में लौट आया. चाची ने भी कहा की वो भी बोर हो रही हे, पर चाचा ने कहा की थोड़ा रुको तो सब साथ में चलते हे. और हम वही बैठे रहे, पर चाचा फ्री नहीं हुए, आखिर फिर से एक घंटा बीत गया तब चाचा ने कहा की वो आ नहीं पायेंगे, तो तुम लोग निकलो, वैसे भी बड़ा लेट हो गया हे, और बारिश का सीजन हे. मुझे सच में चाचा पे गुस्सा आ गया था एक तो दोपहर का सीन बिगाडा और अब दो घंटे ऐसे ही वेस्ट कर दिये. फिर से हम दोनों बाहर निकले और बस का वेट करने लगे,वैसे चाचा का हॉस्पिटल शहर से बाहर था, पर हाईवे पे होने से कोई कोई बस रुक जाती थी, तो हम ऐसे ही बाहर खड़े रहे और बस के आने का इंतज़ार करने लगे, दो बस आई और चलि गयी पर कोई रुकि नही.
“शिटयार” मुझे बड़ा गुस्सा आ रहा था और जब तीसरि बस भी निकल गयी तो मेरे मुँह से ये निकल गया और मुँह से निकलने के बाद चाची का ख्याल आया तो मैंने चाची की और देखा तो वो मेरे ग़ुस्से पे जोर से हंस पड़ी और कहा
“गुस्सा मत करो, अक्सर जब कुछ अच्छा होने वाला होता हे तो, कुछ बुरा भी सहना पडता हे”.. और इतना कहना ही था की एक बस आई और मैंने हाथ फ़ैलाया तो बस रुकि भी सा₹हि, पर बस में बड़ी भीड़ थी. तो चाची ने चड़ने से मना कर दिया, लेकिन इतने में हलकी सी बारिश भी होने लगी तो वो भी चढ़ गयी. बस में जगह बिलकुल नहीं थी, और ऊपर से शाम का पैक टाइम तो भीड़ तो होनि ही थी. लेकिन ड्राइवर कुछ भला आदमी लगा तो उसने हमें उसकी केबिन के पीछे बैठने को कहा और हम वहीँ बैठ गये. थोड़ी जगह काम थी पर दोनों को कस के बैठने में झिझक नहीं थी..उलटा मुझे तो मज़ा आ रहा था चाची खिड़की के पास बैठी थी और बारिश तेज़ हो रही थी, तो वो खिड़की से दूर होने के चक्कर में मेरे करीब हो रही थी, और में भी मौके का फ़ायदा उठाते हुए चाची को अपनी और खिंच रहा था चाची ने मेरी और देखा और मैंने भी चाची की और देख, कुछ कहा नहीं पर ड्राइवर की और इशारा करते हुए चाची ने कहा की ड्राइवर यहाँ बैठा हुआ हे तो कुछ मत करना. तो मैंने भी इशारे से कहा की ड्राइवर की परवा कौन करें? और अपना हाथ चाची की गांड पे रख दिया. चाची इशारे से मना कर रही थी, पर में चाची की गांड से खेलने लगा. फिर मैंने हाथ गांड से हटाया और धीरे से चाची के बॉब्स के साइड में रख दिया, चाची ने चौंकते हुए मेरी और देखा पर मुझे रोकने की बजाये अपनी साड़ी से मेरे हाथ को धक लिया और मेरी और देखते हुए इशारे से आँख मारी, और चाची का इशारा पाते ही मैंने चाची के बॉब्स को मस्त अपनी पकड़ में ले लिया और मस्त बूब दबाने लगा. हम दोनों को मज़ा आ रहा था लेकिन एक बात मुझसे चाची की निप्पल जोर से अचानक दब गयी और चाची के मुँह से आह निकली, तो ड्राइवर ने अचानक मूड के देखा पर सिचुएशन सम्हालते हुए में दूसरी तरफ देखने लगा और चाची दूसरी और, सच में बड़ा मज़ा आया, ऐसे चोरी छुपे बचने का. ड्राइवर के फिर से आगे देखते ही चाची ने और मैंने एक दूसरे की और देखा और हंसपडे इतने में हमारा उतार ने का स्टेशन आ गया और हम उतर गये.