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Incest पहाडी आम (इन्सेस्ट)

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सुनैना एक बार फिर से कल्लू के हाथ से बच गई थी,,, कल्लू के इरादे को सुनैना आप अच्छी तरह से समझ गई थी जिस तरह से उसने उसे खींचकर अपनी बाहों में कस लिया था और उसके नितंबों कहां कर रखा था वह जान गई थी कि वह उसकी इज्जत से खेलना चाहता है,,,,, उसकी हरकत को देखकर और जंगल जैसे एकांत में वह घबरा गई थी,,, उसे लगा था कि आज उसकी इज्जत नहीं बचेगी लेकिन तभी सुझ-भुज दिखाते हुए अपने घुटने का वार कल्लू के गुप्तांग पर की थी,,, जिसकी वजह से वह चारों खाने चित हो गया था,,,।

लेकिन इस बारे में सुनैना ना तो सोनु की मां को कुछ बताइ और ना हीं अपनी पड़ोसन को,,, क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि कोई उसके बारे में गलत समझे उसकी बदनामी हो और उसके साथ कल्लू का नाम जोड़कर गांव भर में चर्चा हो,,, क्योंकि वह जानती थी कि अगर कल्लू का नाम उसके साथ जुड़ गया तो लोग तरह-तरह की बातें बनाने लगेंगे और सबको यही लगने लगेगा कि सुनैना में ही दोष है जो ऐसे आदमी के साथ उसका नाम जुड़ रहा है,,,। इसलिए वह नहीं चाहती थी की बात का बतंगड़ बने,,,।

घर पहुंचते पहुंचते अंधेरा हो चुका था,,,, लेकिन जब वह रसोई घर में पहुंची तो अच्छी रानी चुल्हा जलाकर रोटी पका रही थी यह देखकर सुनैना को भी संतोष हुआ और वह तुरंत सामान का थैला रखकर ,, हाथ पैर धोने लगी,,,, रानी भी अपनी मां को देखकर बहुत खुश हुई क्योंकि वह जानती थी कि उसकी मां उसके लिए समोसे जरूर लाई होगी इसलिए रोटी को तवे पर रखते हुए वह खुश होते हुए बोली,,,,।

मां तुम समोसे तो लाई होना,,,

हां हां जरूर लाई हूं,,,,

तब तो अच्छा है,,, मैं तुम्हारा बहुत इंतजार करी जब अंधेरा होने लगा तो मैं खुद ही चुल्हा चला दी,,,।

चल बहुत अच्छा की तुने,,,(अपनी साड़ी में हाथ को पोछते हुए बोली,,,)

लेकिन मैं इतना देर क्यों लगा दी ऐसा तो पहले कभी नहीं होता था,,,,।

तेरे समोसे के चक्कर में ही देर हो गए,,,, उसके पास तैयार पडा नहीं था और वह ताजा-ताजा बना रहा था इसलिए बैठना पड़ा,,,, अब तू हट जा सब्जी काट दे मैं बना देती हूं,,,,

ठीक है,,,(इतना कहने के साथ ही रानी अपनी जगह से उठकर रसोई घर से बाहर आ गई और सुन लेना रसोई घर में जाकर रानी की जगह बैठ गई और रोटी पकाने लगी तभी वह रोटी को तवे से हटाते हुए बोली,,,।)

अरे सूरज कहां चला गया,,,,!

भैया कुछ देर पहले ही आया था,,,,, वापस चला गया,,,,।

कहां चला गया,,,? कुछ बताया है कि नहीं...?

भैया कहां कुछ बताता है बस आया और गया,,, ।(सब्जी काटते हुए रानी बोली)

चल अच्छा सब्जी काट कर तू समोसे खा ले,,, और अपने भाई के लिए भी रख देना,,,।

ठीक है मां,,,,(इतना कहते हुए वहां जल्दी-जल्दी सब्जी काटने लगी क्योंकि उसे समोसे खाने की जल्दबाजी मची हुई थी उसे समोसे बहुत पसंद थी और अगर समोसे के साथ जलेबी मिल जाती तो उसकी खुशी दुगनी हो जाती थी,,,, थोड़ी देर में सब्जी काटने के बाद वह जल्दी से थैले में से सामान निकालने लगी,,, समान निकालते हुए रानी बोली,,)

क्या-क्या लाई हो मां,,,,।

अरे ज्यादा कुछ नहीं लाई हूं बस मुझे चूड़ियां खरीदना था और घर का सामान लाई हूं नमक मिर्च तेल धनिया यही सब है,,,।

हां मां यही सब तो दिख रहा है,,,,,।

( धीरे-धीरे करके रानी थैले में से सारा सामान बाहर निकाल ली यह देखकर सुनैना बोली)

अरे सारा सामान क्यों बिखेर रही है,,,।

कुछ नहीं बस देख रही हूं,,

सिर्फ समोसे बाहर निकाल ले बाकी सब सामान रख दे,,,,।

ठीक है,,,,।

(रानी सारा सामान वापस थैले में रखकर केवल समोसे निकाल कर खाने लगी,,, तभी सूरज भी वहां आ गया,,,,, आते ही उसकी नजर सबसे पहले रानी पर पड़ी रानी को देखते ही वह बोला,,,,)

मां आ गई क्या,,,?

वह तो कब से आई है खाना भी बना रही है तेरा ही ठिकाना नहीं रहता,,,।

अरे मैं कहां गांव से बाहर चला गया हूं यही तो हुं,,,(और इतना कहने के साथ ही वहीं पर बैठ गया और समोसे खाने लगा,,,, दोनों को खाते हुए देखकर सुनैना मन ही मन खुश हो रही थी और अपने मन में सोचने लगी कि उसका परिवार इसी तरह से एकदम खुशहाल था जब उसका पति हमेशा उसकी परवाह करता था उससे प्यार करता था लेकिन अपना जाने क्या हो गया है कि वह घर पर रहता ही नहीं,,,। तभी सूरज बोला,,)

समोसे तो बहुत स्वादिष्ट हे मा,, बस थोड़ा गर्म होता तो मजा आ जाता,,,,

अरे अब इतनी दूर से लाने में ठंडा हो ही जाता है गरम थोड़ी ना रहेगा,,,, वैसे तुम दोनों के लिए जलेबी भी लाई हूं,,,,।

(जलेबी का नाम सुनते ही रानी एकदम से अपनी मां की तरफ देखने लगी और प्रसन्नता भरे स्वर में बोली,,,)

क्या जलेबी,,,,!

हां जलेबी,,,, (मुस्कुराते हुए सुनैना बोली)

लेकिन अभी तक बोली क्यों नहीं और थैली में से तो जलेबी निकाली ही नहीं,,,,(रानी परेशान होते हुए खोली सूरज भी कभी रानी की तरफ तो कभी अपनी मां की तरफ देख ले रहा था)

मैं जानती हूं तुझे जलेबी बहुत पसंद है और मैं देखना चाहती थी कि जलेबी के बारे में पूछता है कि नहीं,,,।

क्या मां मैं तो समझी कि तुम सिर्फ समोसे हि लाई हो और मैं थैली में से जलेबी ही ढूंढ रही थी बस बोली नहीं थी,,,।

लेकिन जलेबी है कहा मां,,,(सूरज भी हैरान होते हुए बोला)

जा दरवाजे के पास टांग कर आई हूं,,, जब मैं आ रही थी तभी ठेले में से निकाल कर उसे वही टांग दी थी,,,।

(सुनैना की बात पूरी भी नहीं हुई थी की रानी एकदम से उठकर खड़ी हो गई और जल्दी से दरवाजे की तरफ चली गई और थोड़ी ही देर में जलेबी लेकर आई,,,, सबसे पहले जलेबी का टुकड़ा मुंह में डालकर उसे खाने लगी और फिर उसमें से एक टुकड़ा लेकर सूरज की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोली,, )

लो भाई तुम भी खाओ,,,,।

(अपनी बहन की आवाज सुनते ही सूरज अपने मन में ही बोला मुझे यह जलेबी नहीं खाना है मुझे तो तुम दोनों की टांगों के बीच वाली जलेबी खाना है उसका रस पीना है,,,, मुझे मालूम है तुम दोनों बहुत मजा दोगी,,,,,, अपनी बहन रानी के लिए भी सूरज के मन में गलत भावना जाग चुकी थी क्योंकि वह अपनी बहन को पेशाब करते हुए जो देख चुका था उसकी मदमस्त जवानी से भरी हुई गांड के जो दर्शन कर लिया था,,, अपने भाई को इस तरह से सोच में डूबा हुआ देखकर रानी फिर से बोली,,)

क्या हुआ भैया लो जलेबी खा लो,,,।

(रानी की बात सुनकर जैसे वह नींद से जगा हो इस तरह से हड़बड़ा गया और बोला,,)

ननननननन,,,,हुआ क्या,,,,,?

अरे हुआ कुछ नहीं सो गए थे क्या लो जलेबी खा लो,,,,।

नहीं मैं नहीं खाऊंगा मेरे हिस्से का तू ही खा ले और मां को भी दे दे,,,।

नहीं नहीं मैं नहीं खाऊंगी,,, मैं तुम दोनों के लिए ही लेकर आई थी,,,।

और बाबूजी के लिए,,,(जलेबी खाते हुए रानी बोली,,)

घर पर आते हैं तेरे बाबूजी 15 20 दिन तो हो गए हैं कोई ठिकाना नहीं है न जाने क्या हो गया है,,,,

काम के चक्कर में इधर-उधर घूम रहे होंगे,,,(सूरज अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,)

अरे दुनिया काम करती है लेकिन अपना घर अपना घर होता है शाम को लौटकर इंसान अपने घर पर ही आता है लेकिन तेरे बाबूजी तो उन्हें तो ऐसा लगता ही नहीं है कि उनके घर परिवार है,,,। इस इंसान को बिल्कुल भी फिक्र नहीं है ना अपनी बीवी की ना अपने बच्चों की,,,,।

अब आए तो उनसे बात किया जाए आखिर हो क्या रहा है यह सब,,,।(सूरज भी चिंता दर्शाते हुए बोला,,,,, फिर थोड़ी ही देर में खाना बनाकर तैयार हो गया था इस बीच सूरज लगातार इस इंतजार में था कि तब उसकी बहन बाहर जाकर पेशाब करती है क्योंकि ना जाने क्यों अपनी बहन को पेशाब करते हुए देखने का नशा उसके दिलों दिमाग पर छा चुका था,,, लेकिन रानी इस बीच घर से बाहर गई ही नहीं,,,,।

तीनों साथ मिलकर खाना खाए,,, और बर्तन साफ करके और घर की सफाई करके सब लोग अपने-अपने कमरे में चले गए सूरज बहुत चाहता था कि उसकी बहन घर के बाहर जाए पेशाब करने के लिए लेकिन वह गई ही नहीं इसलिए वह भी मन मार कर अपने कमरे में चला गया,,,,।

सुनैना अपने कमरे में बिस्तर पर पडते ही करवट बदलने लगी,,, उसे बाजार में पंडित जी की बात याद आ रही थी पंडित जी ने सोनू की चाची का हाथ देख कर साफ-साफ कह दिया था कि उसके हाथ में संतान सुख तो है लेकिन उसके पति से बिल्कुल भी नहीं है किसी और का सहारा लेना पड़ेगा,,, इस बारे में जानकर सुनैना अपने मन में यही सोच रही थी कि सोनू की चाची अपने भाग्य के बारे में जानकर क्या सोच रही होगी क्या सच में वह किसी दूसरे के साथ संबंध बनाएगी क्योंकि पंडित जी ने तो साफ-साफ कह दिया था कि उसके पति से उसकी संतान नहीं होगी और पंडित जी की बात कभी गलत नहीं निकलती,,,,।

सुनैना यह सोचकर विचार में पड़ गई थी कि अपने भाग्य के बारे में जानकर सोनू की क्या सोच रही होगी उसके मन में क्या चल रहा होगा वह दुखी हो रही होगी या इस बात से खुश हो रही होगी,,, सुनैना अपने मन में सोच रही थी कि अपने पति की हालत देखकर तो एक तरह से उसे एक नया जीवन मिल गया था एक नया सहारा मिल गया था एक बहाना मिल गया था दूसरे के साथ संबंध बनाकर अपने जीवन में बहार लाने का क्योंकि उसके तो भाग्य में ही लिखा था दूसरी मर्द से संतान सुख तो ऐसे में दूसरे मर्द के साथ शारीरिक संबंध बनाकर वह अपनी प्यास भी बुझा सकती थी,,, तुमने इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अपने पति से वह बिल्कुल भी खुश नहीं थी नहीं उसका पति उसे शारीरिक सुख दे पता था और नहीं संतान सुख तो उसके नसीब में साथ लिखा ही नहीं था।

ऐसे में इस मौके का सोनू की चाची को पूरा फायदा उठाना चाहिए अपनी जवानी की प्यास भी बुझा लेना चाहिए और मां बनने का सुख भी प्राप्त कर लेना चाहिए,,,, सोनू की चाची के बारे में इस तरह की बातें सोचकर वह है अपने मन में अपने बारे में सोचने लगी की खास उसकी किस्मत भी ऐसी होती तो मजा आ जाता,,,, लेकिन तभी उसे एहसास हुआ कि नहीं यह गलत है,,, मुझे कौन सी कमी है पति भी है संतान भी है,,, लेकिन तभी उसे अपने वर्तमान स्थिति का भान हुआ तो वह अपने मन में ही बोली,,, पति होने पर भी कौन सा पति का सुख मिल रहा है रात करवट बदलकर ही गुजर जाती है,,,, मुझे अच्छी तो किस्मत वाकई में सोनु की चाची की है क्योंकि उसके तो भाग्य में ही दूसरे मर्द का साथ लिखा है दूसरे मर्द के साथ संभोग करना लिखा है,,, और वह इस बारे में इंकार भी नहीं कर सकती ना जाने वह क्या सोच रही होगी किसके साथ संबंध बनाएगी किसके साथ संबंध बनाकर मां बनेगी यह भी तो एक विचार विमर्श का ही अध्याय है न जाने किसकी किस्मत में उसकी भरी हुई जवानी लिखी होगी,,,।

सुनैना यह सब सो ही रही थी कि तभी उसे सूरज की याद आ गई उसकी पड़ोसन सोनू की चाची को बार-बार सूरज के साथ संबंध बनाने के लिए बोल रही थी सूरज से चुदवाने के लिए बोल रही थी,,, इस बारे में सोच कर सुनैना की हालत खराब हो गई वह अपने मन में सोचने लगी कि क्या वाकई में उसकी पड़ोसन के कहे अनुसार अगर सोनु की चाची सूरत के साथ संबंध बना ली तो क्या होगा सूरत तो उसका दीवाना हो जाएगा जवान लड़के को और क्या चाहिए जवानी में एक खूबसूरत औरत और उसकी बुर चोदने के लिए और वाकई में सोनू की चाची में किसी बात की कमी नहीं है पूरी तरह से जवानी से भरी हुई है उसका बेटा तो उसे पाकर पागल ही हो जाएगा,,,। क्योंकि सूरज भी अब बड़ा हो चुका था और जिस तरह का अनुभव उसने उसे गले लगा कर अपनी दोनों टांगों के बीच महसूस की थी उसे देखते हुए सुनैना अच्छी तरह से समझ गई थी कि उसका बेटा पूरी तरह से मर्द बन चुका था,,, जो वाकई में सोनू की चाची की बुर में उसके बेटे का लंड घुस गया तो वह मां बने बिना नहीं रह पाएंगी और उसका बेटा उसकी जवानी का गुलाम बन जाएगा यह तो सही नहीं होगा,,,।

लेकिन वह कर भी कर सकती है कब तक उसे पर नजर रखेगी दिनभर से बाहर घूमता है और जिस तरह से जवान हो रहा है जिस तरह की उसकी हरकत हो रही है जिस तरह से वह घूरने लगा है। उसे देखते हुए वहां सोनू की चाची के संपर्क में बहुत जल्दी आ जाएगा और वह उसे रोक नहीं पाएगी है भगवान क्या होगा अगर सच में सोनू की चाची उसके बेटे से मां बन गई तो,,,, यही सब सोते हुए वह रात भर अपनी बिस्तर पर करवट बदलती रही वैसे भी जवानी की प्यास उसकी आंखों में नींद नहीं आने देती थी और इसीलिए ही अपने पति की बेरुखी को देख कर ही उसके मन में सोनू की चाची की किस्मत को देखकर जलन हो रही थी,,,।
 
एक तरफ सुनैना परेशान थी तो दूसरी तरफ सूरज की आंखों से भी नींद कोसों दूर जा चुकी थी क्योंकि उसकी नजर में उसकी बहन बस गई थी,,,,,, आंखों को बंद करते हैं उसकी आंखों के सामने उसकी बहन पेशाब करते हुए दिखाई देने लगती थी उसकी गोल गोल गांड गोरी गोरी मखमली बदन नजर आने लगता था,,, अपनी बहन की चढ़ती जवानी का वह दीवाना होता जा रहा था,,,।

एक दिन दोपहर के समय घर पर कोई नहीं था और वह घर में प्रवेश किया तो देखा कि उसकी बहन घर की सफाई कर रही थी वह झुकी हुई थी और उसकी जवानी से गदराइ गांड देखकर सूरज की हालत खराब होने लगी वह धीरे से कमरे का दरवाजा बंद किया और सीधे अपनी बहन के पास पहुंच गया और उसके पास पहुंचते ही अपनी बहन की बड़ी-बड़ी गांड को हाथ से जोर-जोर से दबाने लगा यह देखकर रानी एकदम से चौंक गई और अपने भाई की तरफ देखकर बोली,,,।

यह क्या कर रहे हो भैया यह गलत है।

कुछ भी गलत नहीं है मेरी रानी तेरी गांड कितनी बड़ी-बड़ी हो गई है तेरे पर तो जवान छा रही है,,,, कसम से आज तुझे नहीं छोडूंगा,,,,(और ऐसा कहते हुए आप अपनी बहन की गांड को दोनों हाथों से जोर-जोर से दबाने लगा और रानी उससे दूर जाने की कोशिश करते हुए बार-बार बोलरही थी)

नहीं भैया मुझे जाने दो मां को पता चलेगा तो गजब हो जाएगा,,,,।

मां को बिल्कुल भी पता नहीं चलेगा कमरे में सिर्फ में और तू है तेरी जवानी का मैं पागल हो चुका हूं तेरी जवानी का दीवाना हो गया हूं तेरा खूबसूरत बदन मुझे पागल कर रहा है,,,,।

नहीं भैया रहने दो यह क्या कर रहे हैं मेरे कपड़े क्यों उतार रहे हो,,,, जाने दो भैया मेरी सलवार मत उतारो,,,,।

सलवार उतारे बिना तो काम ही नहीं बनेगा मेरी जान,,,(और ऐसा कहते हुए सूरज अपने हाथों से अपनी बहन की सलवार की डोरी खोलकर उसे नीचे की तरफ से पानी लगा कुछ देर तक रानी भी उसका विरोध करती रहे लेकिन सूरज की हरकत की वजह से उसमें भी मस्ती छाने लगी और वह विरोध करना एकदम से बंद कर दे इसका फायदा उठाते हुए सूरज अपनी बहन की नंगी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे जोर-जोर से मचल रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह दही से मक्खन बना रहा हो,,,, अपनी बहन की नंगी गांड को मसलने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,।)

रानी मुझे बहुत मजा आ रहा है मन को तुम बिल्कुल भी मत बताना अभी देखना थोड़ी देर में तुम एकदम मस्त हो जाओगी,,,।

भैया मुझे भी कुछ कुछ हो रहा है लेकिन मुझे डर भी लग रहा है ऐसा मैंने पहले कभी नहीं करी,,,।

सब काम जिंदगी में पहली बार ही होता है तु चिंता मत कर,,, कुछ भी नहीं होगा बस मजा आएगा,,,।

(इतना कहने के साथ ही सूरज अपनी बहन को दीवार के सामने खड़ी कर दिया और उसकी कमर में हाथ डालकर उसे आगे की तरफ खींच कर उसकी गांड को थोड़ा ऊपर कर दिया रानी का दिल बड़े जोरों से धड़कता है क्योंकि बार-बार उसकी नजर अपने भाई के अंदर पर चली जा रही थी और उसकी बहन का लंड बहुत ज्यादा ही लंबा और मोटा था,, ।

सूरज पहली बार रानी के साथ शारीरिक संबंध बनाने जा रहा था और वह भी जल्दबाजी में रानी उसके लिए तैयार भी नहीं थी लेकिन सूरज अपनी हरकतों की वजह से उसे भी गर्म कर दिया था इसलिए वह भी तैयार हो चुकी थी,,, सूरज अपने दोनों हाथों से अपनी बहन की टांग को खोलकर उसके गुलाबी छेद पर ढेर सारा थुक लगाने लगा और फिर अपने सुपाड़े पर भी थूक लगाकर उसे चिकना कर दिया,,, और फिर उसे अपनी बहन के गुलाबी छेंद पर रखकर हल्के से अपनी कमर आगे बढ़ाकर उसे अंदर डालना शुरू कर दिया और देखते ही देखते धीरे-धीरे सूरज का लंड उसकी बहन की बुर की गहराई नापने लगा बहुत सफलतापूर्वक बड़े आराम से पहली बार में ही वह अपनी बहन की बुर में झंडा गाड़ चुका था ,,।

रानी की गरमा गरम सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थी सूरज घचाघच अपनी बहन की चुदाई कर रहा था उसकी बुर में से फच फच की आवाज आ रही थी,,, अपनी बहन की बुर में लंड डालकर सूरज बहुत खुश था मुखिया की बीवी के बाद यह दूसरी औरत थी जो उसके जीवन में आई थी जिसके साथ वह शारीरिक संबंध बना रहा था,,,,, रानी कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह अपने भाई के साथ ही चुदवाएगी,,,, लेकिन आज उसका सोचा ना सोचना सब एक बराबर हो गया था उसके भाई ने खड़ी दुपहरी में अपनी मां की गैर मौजूदगी में उसे दबाच दिया था और उसके साथ रंगरेलियां बना रहा था जिसमें आप उसकी बहन भी अपनी गांड को पीछे की तरफ ठैल ठैल कर उसका साथ दे रही थी,,,,।

सूरज जी भर कर अपनी बहन की चुदाई कर रहा था कभी पीछे से कभी आगे से तो कभी एक टांग को हाथ में लेकर,,, जहां से हो सकता था वहां से वहां अपनी बहन की चुदाई कर रहा था और उसकी बहन भी उसका पूरा साथ दे रही थी तो पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उत्तेजना उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी और देखते-देखते दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी और दोनों एक साथ झड़ गए लेकिन तभी भडाक की आवाज के साथ दरवाजा खुला और दोनों के होश उड़ गए ,,,,,।

सूरज एकदम से बिस्तर पर उठकर बैठ गया था उसकी सबसे बड़ी तेजी से चल रही थी और उसकी नजर दरवाजे पर टिकी हुई थी,,,, सूरज की सांस ऊपर नीचे हो गई थी वह पूरी तरह से पसीने से तरबतर हो चुका था दरवाजे पर दस्तक हो रही थी और दरवाजे के बाहर उसकी बहन उसे जोर-जोर से आवाज देकर जगा रही थी,,, सूरज इधर-उधर देखने लगा कुछ देर तक तुमसे समझ में नहीं आया कि क्या हुआ वह बड़ी गौर से अपने चारों तरफ देख रहा था और थोड़ी देर बाद उसे एहसास हुआ कि वह तो अपने कमरे में सो रहा था वह सपना देख रहा था तब उसकी जान में जान आई,,,।

भइया उठो कब तक सोते रहोगे आज तो बहुत देर कर दिए हो,,,।

हां आया,,,,,(इतना कहकर वह अपनी ही कमीज से पसीना पोंछने लगां,,, उसकी नजर जैसे ही अपनी दोनों टांगों के बीच गई तो वह हैरान रह गया उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था और उसके लंड से वीर्य बात हो चुका था कमर के नीचे हो पूरी तरह से नंगा था उसे याद आया कि रात में वह अपनी बहन को याद करके उसी अवस्था में सो गया था और इस समय अपनी बहन का रंगीन सपना देखकर उसका वीर्य पात हो गया था कुछ देर तक तो उसे समझ में नहीं आया कि वाकई में सपना देख रहा था की हकीकत में सब कुछ हो रहा था कि सपना इतना रंगीन और इतना साफ था कि वाकई में यकीन करना बड़ा मुश्किल था वह बहुत खुश नजर आ रहा था क्योंकि हकीकत में ना सही सपने में ही वह अपनी बहन के साथ चुदाई का सुख भोग चुका था,,,।)

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आंख खुली तो सूरज के होश उड़ चुके थे,,,, उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि वह सपना देख रहा था,,, क्योंकि उसका सपना भी एकदम हकीकत जैसा ही था वह अपनी बहन से सपने में भी एकदम रूबरू संभोग रत हुआ था,,, ऐसा बिल्कुल भी नहीं लग रहा था कि वह कोई सपना है ऐसा ही लग रहा था कि बिल्कुल हकीकत ही है तभी तो वह आंख खुली तो पल भर के लिए अचंभित हो गया था,,, दरवाजे पर दस्तक की आवाज आ रही थी जो कि उसकी बहन ही दे रही थी,,,।

कुछ देर बाद उसे सब कुछ हकीकत लगने लगा वह समझ गया कि वह जो कुछ भी देख रहा था बस इतना ही था जो कुछ भी अपनी बहन के साथ कर रहा था बस सपने में कर रहा था,,, कमर के नीचे वह पूरी तरह से नंगा था,, जब अपनी दोनों टांगों के बीच अपने हथियार की तरफ देखा था उसका वीर्य पात हो चुका था वह समझ चुका था कि जो कुछ भी अपनी बहन के साथ किया था वहां सपने में हुआ था,,, दरवाजे पर दस्तक देकर उसकी बहन जा चुकी थी और जब उसे हकीकत का एहसास हुआ तो उसके चेहरे पर मुस्कान करने लगी लेकिन जो गर्मी उसकी बहन की बदन से उसे सपने में महसूस हुई थी उसके चलते उसका पूरा बदन पसीने से तरबतर हो चुका था,,,, एक अद्भुत एहसास मे वह पूरी तरह से डूब चुका था,,,।

कुछ देर तक सूरज अपने बिस्तर पर ही बैठा रह गया और सपना के मनमोहक दृश्य को याद करने लगा,,, वह बार-बार अपने मन से पूछ रहा था क्या सच में वह सपना देख रहा था सब कुछ तो हकीकत जैसा लग रहा था उसकी बहन घर की सफाई कर रही थी उसकी उभरी हुई गांड देखकर कर वह उत्तेजित हो गया था,,, उसे पर बिल्कुल भी काबू नहीं रह गया था और वह दरवाजा बंद करके सीधे अपनी बहन के पास पहुंच गया था और जब वह घर की सफाई कर रही थी तो सीधा अपने हाथ को उसकी गांड पर रखकर जोर से दबाना शुरू कर दिया था,,,।

इतना भी नहीं सोचा कि उसकी हरकत से उसकी बहन गुस्सा हो सकती है उसकी इस हरकत से शर्मिंदा हो सकती है उसकी इस हरकत को अपनी मां से बता सकती हैं,,, लेकिन उसे समय तो न जाने कैसी मदहोशी छाई हुई थी आंखों में तुम्हारी छाई हुई थी अपनी बहन में वह एक औरत देख रहा था जो की बहुत खूबसूरत थी और सीधा उसकी गांड को मसलना शुरू कर दिया था किसी भी परवाह नहीं थी कि उसकी सरकार का उसकी बहन पर क्या प्रभाव पड़ेगा वह क्या जवाब देगी,,, लेकिन ऐसा लग रहा था कि जैसे सूरज की किस्मत बहुत तेज थी उसकी हरकत का उसकी बहन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ रहा था वह तेजी तुम्हें जा रही थी बस ऊपरी मन से उसे रोकने की कोशिश कर रही थी,,,।

और फिर सूरज अपनी मनमानी करना शुरू कर दिया,,, जबरदस्ती तो बिल्कुल भी नहीं कहा जा सकता था क्योंकि उसकी बहन उसे रोकने का बिल्कुल भी प्रयास नहीं कर रही थी और सूरज देखते-देखते उसकी सलवार की डोरी खोलकर सलवार को नीचे खींच दिया था,,, अपनी बहन की नंगी कोरी गांड देखकर सूरज की दिलो दिमाग पर वासना पूरी तरह से अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था और वह देखते ही देखे अपनी बहन की नंगी गांड को मसलते हुए,,, उसके हाथों में अपना हथियार थमा दिया था,,,, और जैसे ही रानी अपने भाई के लंड को अपने हाथ में पकडी सूरज को तो लगा जैसे वह जन्नत में पहुंच गया हो,,, वह आनंद के सागर में गोते लगाने लगा,,,।

और फिर दीवार से उसकी बहन को सटाकर उसे घोड़ी बना दिया,, और फिर पीछे से उसकी चुदाई करना सब कर दिया क्या सपना इतना हकीकत था कि उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि वह सपना देख रहा था,,, अपनी आलस को अंगड़ाई लेकर मरोड़ते हुए,, गहरी सांस लेने और फिर अपने बिस्तर से नीचे उतर गया और फिर अपने पजामे को पहनने लगा ,,, और फिर घर से बाहर निकल गया,,,। इधर-उधर घूमता हुआ वहां खेतों से गुजर रहा की तभी उसके कानों में आवाज सुनाई थी जो की कोई उसका ही नाम लेकर पुकार रहा था,,,, अपना नाम सुनकर सूरज वहीं रुक और इधर देखने लगा,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था की आवाज कहां से आ रही है क्योंकि चारों तरफ बड़ी-बड़ी झाड़ियां थी,,, लहलहाते खेत थे,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था तभी वह आवाज एकदम नजदीक आने लगी और उसे इतना तो समझ में आने लगा कि उसका नाम पुकारने वाला कोई आदमी नहीं बल्कि कोई औरत है,,,।

अरे सूरज कब से तुझे आवाज लगा रही हूं सुनाई नहीं देता क्या,,,?(एकदम से गहरी गहरी सांस लेते हुए सोनू की चाची बोली,,,,, आवाज ठीक उसके पीछे से आ रही थी सिलेबस तुरंत पीछे मुड़कर देखने लगा तो सामने सोनू की चाची को देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,,)

अरे चाची तुम,,,,

अरे हां मैं ऐसा लग रहा है कि तुझे तो सुनाई ही नहीं देता,,,(गहरी गहरी सांस लेते हुए बोली,,)

अरे चाची ऐसी बात नहीं है आवाज तो सुनाई दे रही थी लेकिन समझ में नहीं आ रहा था कि कहां से आ रही है आवाज,,,, वैसे बताओ क्या काम था ऐसा लग रहा है कि जैसे भागते हुए आई हो,,,,।

(इस बीच लगातार सोनू की चाची गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,)

हां ऐसा ही है,,,, मैं कब से किसी का इंतजार कर रही थी तो कोई तुम्हारे और घास का ढेर उठा कर मेरे सर पर रखें लेकिन इतनी देर से खड़ी हुं कोई दिखाई नहीं दिया,,,तु दीखाई दिया तो तुझे तो कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा है,,,,।

(सूरज सोनू की चाची को गौर से देखने लगा,,, और सोनू अपने मन में अंदाजा लगाने लगा कि सोनू की चाची की उम्र उसकी मां से लगभग 7 साल कम ही है लेकिन बदन से भारी जिससे अगर मां को और सोनू की चाची को खड़ा कर दिया जाए तो दोनों बहने ही लगेंगी दोनों की उम्र में बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ेगा,,,, सूरज बड़ी गौर से सोनू की चाची को देख रहा था उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर उसकी निगाह ठीक जा रही थी गोल चेहरा एकदम गोरा भारी बदन की होने की वजह से गांड भी एकदम जानदार थी,,, और भाग कर यहां तक आने की वजह से कंधे से साड़ी का पल्लू नीचे सड़क गया था और हाथ की कोनी में जाकर टिक गया था जिसकी वजह से उसकी मलाईदार छाती एकदम समझ कर हो गई थी और सूरज उसी पर अपनी निगाहें गड़ाए हुआ था,,,। सोनू की चाची की बात सुनकर सूरज बोला,,,)

नहीं चाहिए ऐसी कोई भी बात नहीं है मुझे आवाज सुनाई दे रही थी लेकिन मैं अपनी ही धुन में था इसलिए समझ में नहीं आया की आवाज कहां से आ रही है,,,,(सोनू की चाची की चूचियों की तरफ देखते हुए बोला,,,)

चल कोई बात नहीं कहीं काम से जा रहा था क्या ,,,?

नहीं तो ऐसे ही टहलने निकला था,,,,।

चल तब तो ठीक है,,,,(एकदम खुश होते हुए सोनू की चाची बोली)

वैसे काम क्या है चाची,,,(फिर से सोनू की चाची की मलाई दार चूचियों की तरफ देखते हुए बोला,,)

अरे ज्यादा कुछ नहीं करना है बस घास का ढेर उठा कर मेरे सर पर रख देना मैं घर पर लेकर चली जाऊंगी,,,,।

अरे चाचा मेरे होते हुए भला आपको बोझ उठा कर चलना पड़े ऐसा कैसे हो सकता है मैं हूं ना,,,,(सूरज उत्तेजना में गहरी सांस लेते हुए बोला उसकी नजर अभी भी सोनू की चाची की चूचियों पर टिकी हुई थी और जैसे ही सोने की चाची फेस बात का एहसास हुआ वह अपनी साड़ी के पल्लू को एकदम से ठीक करने लगी,, और उसे इस तरह से साड़ी का पल्लू ठीक करते हुए देखकर सूरज अपनी बात करने की दिशा को बदलते हुए बोला,,,)

चलो चाची कहां रखी हो घास का ढेर,,,!

वह बड़े से पेड़ के नीचे,,,(उंगली के इशारे से दूर बड़े से पेड़ की तरफ दिखाते हुए सोनू की चाची बोली,,, लेकिन सुरज की निगाहों को पहचान कर,,, सोनू की चाची का दिल जोरो से धड़कने लगा था,,,, सोनू की चाची के मन में अजीब सी हलचल होने लगी उसे दिन की बात याद आने लगी जब घास का बोझ उठाते समय सूरज उसकी कलाई थाम लिया था उसकी पकड़ को महसूस करके उसके तन बदन में अजीब सी उलझन हो रही थी जो की खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली कार में हलचल मचा रही थी और इस समय भी सोनू की चाची को यही महसूस हो रहा था वह एकदम से अजीब सी उलझन में होती जा रही थी इसलिए उंगली से इशारा करने के बाद तुरंत आगे आगे चलने लगी और उसे आगे चलता हुआ देखकर सूरज भी पीछे-पीछे चल दिया,,,,, और बोला,,,)

क्या चाची सोनू को बुला ली होती तो बेवजह इधर-उधर घूमता रहता है,,,,।(सूरज जानबूझकर सोनू का जिक्र कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि उसकी चाची सोनू से िचढ़ती है क्योंकि सोनू कोई काम का नहीं था,,,, इसमें सोनू का जिक्र होते ही उसकी चाची बोली।)

अरे वह हरामजादा अगर काम का होता तो उसे साथ में नहीं ले जाती वह कोई काम का ही नहीं है,,,,।(सोनू की चाची इतना कहने के साथ ही सुनैना की पड़ोसन की बात के बारे में सोचने लगी वह बार-बार उसे सोनू का नाम लेकर उकसा रही थी,,, वह बार-बार उसे कह रही थी कि सोनू के साथ चुदवा कर मां बन जा,,, यह बात याद आते ही सोनू की चाची के मन में हलचल होने लगी और उसे यह भी याद आने लगा कि सुनैना की पड़ोसन सूरज का भी नाम ले रही थी जो कि उसके साथ ही चल रहा है,,,, और सूरज का ख्याल उसके मन में आते हैं न जाने की उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान तैरने लगी और अपने आप ही उसके दिमाग में ख्याल आ गया कि सूरज उसके लिए बेहतर है,,,, और तभी उसे बाजार में पंडित जी की बात याद आ गई कि उसे संतान सुख तो है लेकिन उसके पति से नहीं है और यह ख्याल मन में आते ही,,, वह सोचने लगी की क्या वाकई में उसकी किस्मत में किसी गैर मर्द का साथलिखा है,,,,।
 
वह अपने मन में सोचने लगी थी पंडित की कहानी बात कभी गलत नहीं हुई है इसीलिए तो जब भी कोई जरूरत पड़ती है तो लोग बाजार में पंडित जी के पास ही जाते हैं और उनसे अपना भविष्य जानते हैं क्योंकि आज तक सब कुछ सच होता आ रहा था तो यह बात भी क्या सच है कि दूसरों के साथ चुदवा कर ही वह मां बन पाएंगी,,, अभी वह अपने मन में यही सब सोच रही थी कि सूरज बोला,,,)

बात तो तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो चाची,,, सोनू हमेशा आवारा लड़कों की तरह घूमते रहता है उसे आज तक मैं घर का कोई काम करते नहीं देखा और जब देखो तब अगर खेलते भी है तो कहेगा कि मैं थक गया हूं मैं थक गया हूं उसे चलाने जा रहा है मुझे खेल नहीं जा रहा है इसलिए उसके साथ खेलने में भी मजा नहीं आता,,,।

(सूरज इस बात को जानबूझकर उसकी चाची को बता रहा था क्योंकि वह जानता था कि औरत और मर्द के बीच में थकान नाम की कोई चीज नहीं होनी चाहिए अगर जो मर्द औरत के साथ थक गया वह औरत के काबिल नहीं इसलिए वह सोनू की चाची को एहसास दिख रहा था कि सोनू उसके बिल्कुल भी काबिल नहीं है क्योंकि सूरज की नजर सोनू की चाची पर बदलने लगी थी सूरज सोनू की चाची के साथ हम बिस्तर होना चाहता था उस संबंध बनाना चाहता था क्योंकि आगे वह है जिस तरह से ऊंची नीची पगडंडी पर पैर रखकर चल रही थी उसके चलने के कारण उसकी बड़ी-बड़ी गांड आपस में रगड़ खाते हुए साड़ी के ऊपर से उभार लिए हुए नजर आ रही थी,,, जिसे देखकर सूरज उत्तेजित हुआ जा रहा था और अपने मन में यही सोच रहा था कि अभीभले सोनू की चाची साड़ी पहनी हुई है लेकिन उसकी यही बड़ी-बड़ी गांड को वहां एक दिन नंगी देख चुका है उसे पेशाब करते हुए देख चुका है और यह पूरा से उसके भतीजे कोई जाता है जिसने इतना मदहोश कर देने वाला दृश्य उसे दिखाया था और उसके जीवन को बदल कर रख दिया था,,,, सूरज की बात सुनकर सोनू की चाची बोली,,,)

बात तो तु सही कह रहा है सूरज,,, घर का एक काम नहीं करता है कोई भी कम करो बस ना कह देता और भाग जाता है बिल्कुल अपने चाचा की तरह ही है मरीयल यहां तक कि जब भी मैं नहाने जाती हूं तो उसे रहती हूं कि एक बाल्टी पानी पहुंचा दे तो उससे इतना भी नहीं होता,,,।

(सोनू की चाची की है बात सुनकर सूरज सोनू को अपने मन में ही गाली देने लगा कि साला इतना अच्छा मौका होने के बावजूद भी मौके का फायदा नहीं उठा पाता,,, साला मैं अगर होता तो,,, पानी पहुंचाने के बहाने सीधा गुसलखाने में बहुत ज्यादा और एक बहाने से नहला भी देता वाकई में सोनू एकदम नकारा है,,,, सोनू की चाची की बात को सुनकर सूरज बोला,,)

पागल है सोनू ,,,चाची,,, मैं अगर सोनू की जगह होता तो मैं तुम्हारा सारा काम कर देता तुम्हें हाथ चलाने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ती,,,,(गहरी सांस लेते हुए सोनू की चाची की बड़ी-बड़ी गांड को घूरते हुए वह बोला और उसकी बात सुनकर सोनू की चाची एकदम खुश हो गई और नजर पीछे घूमाकर सुरज की तरफ देखने लगी और उसकी तरफ देखकर एकदम से दंग रह गई क्योंकि उसे एहसास होगया कि सूरज उसकी बड़ी-बड़ी गांड को ही देख रहा था एकदम से सोनू की चाची वापस अपनी नजर को घुमा ली और हैरान होते हुए अपने मन में सोचने लगी कि यह सूरज उसके बारे में क्या सोच रहा हैं कभी उसकी चूची की तरफ तो कभी उसकी गांड की तरफ देख रहा है ऐसा तो मर्द औरत की तरह आकर्षित होने के बाद ही करते हैं क्या यह मेरी कृपा आकर्षित हो रहा है क्या यह मुझे कुछ चाहता है,,,, हे भगवान को समझ में नहीं आ रहा है कि सूरज के मन में चल क्या रहा है कहीं पंडित की कही बात सच तो नहीं हो जाएगी,,,, यही सब सोते हुए दोनों बड़े से पेड़ के पास आ गए थे सूरज ने देखा कि सोनू की चाची बड़ा सा घास का ढेर करके रखी हुई थी,,,, वहां पहुंचते ही सोनू की चाची बोली।

इसे बांध कर तू मेरे सर पर रख दे मैं घर लेकर चली जाऊंगी,,,,।

क्या बात कर रही है चाची मेरे होते हुए तुम्हें उठाना पड़े तो फिर मेरा होना ही बेकार है,,, मैं उठा कर ले जाऊंगा,,,,।

तू इतना बड़ा ढेर उठा लेगा,,,,!(जानबूझकर आश्चर्य जताते हुए सोनू की चाची बोली)

क्या बात कर रही हो चाची ,,,, इतना मजबूत शरीर क्यों बनाया हूं कहो तो तुम्हें भी उठा कर तुम्हारे घर तक ले चलु,,,।

(सूरज शरारत करते हुए बोला लेकिन उसकी इस बात को सुनकर सोनू की चाची की दोनों टांगों के बीच हलचल होने लगी,,,, क्योंकि सूरज एकदम मर्दों की तरह बात कर रहा था जो कि अपनी बात से ही उसे पानी पानी कर रहा था और इस बात से ही सोनू की चाची ना जाने क्यों उसकी तरफ आकर्षित हो जा रही थी एक तरफ पंडित जी की कही बात थी उसकी भविष्यवाणी थी और दूसरी तरफ का सूरज जो उसकी तरफ आकर्षित हुआ जा रहा था यह सब देखकर सोनू की चाची को न जाने क्यों ऐसा लगने लगा था की हालत इशारा कर रहा था पंडित की कही बात बिल्कुल सच होने जा रही थी सोनू की चाची को लगने लगा था कि कहीं उसका संबंध सूरज से ना बन जाए,,,। सूरज की बात सुनकर शरमाते हुए बोली,,,)

धत् कितना बेशर्म है तू,,,, कोई औरत को उठा कर ले जाता है क्या,,,!

अरे चाचा तुम्हें विश्वास नहीं है इसलिए कह रहा था आखिरकार मर्दानगी तो औरत पर ही दिखाई जाती है ना असली मर्द तो वही होता है जो औरत को हर हाल में खुश रखें,,,,।

तो तू मुझे खुश रखना चाहते हैं लेकिन यह काम तो पति का होता है,,,,।

होता तो है चाची,,, लेकिन जब जरूरत पड़े तो किसी को भी सहारा बन जाना चाहिए,,,।

तेरी बातों से तो ऐसा लग रहा है कि बहुत बड़ा हो गया है तू,,,।

(सोनू की चाची की बात को सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला मैं क्या चाची मेरा लंड भी बड़ा हो गया है एक बार लेकर तो देखो,,,, फिर भी वह औपचारिकता निभाते हुए बोला,,,)

सही बोलु तो चाची समय के साथ इंसान को बड़ा हो जाना चाहिए,,,,। अब रुको जरा में घास को बांध दु,,,(और इतना क्या कर रहा है रस्सी ढूंढने वाला और सोनू की चाची को सही देख रही थी उसकी बात को सुनकर खास करके मर्दानगी वाली बात पर न जाने क्यों उसकी आंखों के सामने ऐसा नजर आने लगा कि जैसे वह उसे अपनी गोद में उठाकर उसे खटिया पर ले जाकर पटक दिया और उसका ब्लाउज खोलने की जगह जोर से खींच कर फाड़ दिया उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दोनों हाथों में भरकर जोर-जोर से दबाते हुए उसके लाल होंठों का रस पीने लगा,,,,,,, यह सब सो कर उसे कुछ-कुछ होने लगा था लेकिन न जाने किस तरह की कल्पना करने से बहुत मजा आ रहा था,,,,।

और वह फिर से अपनी कल्पना को आगे बढ़ाते हुए सोचने लगी की बिस्तर पर उसकी चूचियों से खेलने के बाद सूरज उसकी साड़ी को बिना खोले बिना उसकी पेटिकोट उतारे,,, सीधा एक झटके नहीं उठा कर उसे कमर तक खींच दिया और फिर दोनों टांगों को दोनों हाथों से पकड़ कर बड़ी ही बेरहमी से फैला दिया और फिर अपने मोटे तगड़े लंड को एक झटके में उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया यह एहसास या कल्पना उसे पूरी तरह से पानी पानी कर दिया था वह मदहोश हो गई थी,,,, उसकी टांगों में कंपन हो रहा था बहुत तेज सेवा के परम शिखर पर केवल कल्पना करके ही पहुंच चुकी थी,,,,,।

वह कल्पना में तल्लीन थी और सूरज रस्सी ढूंढ कर घास के ढेर को बांध चुका था,,,, और फिर बिना सोनू की चाची का सहारा लिए वह अपने हाथ से ही उठाकर उसे अपने सर पर रख लिया था यह देखकर सोनू की चाची भी हैरान हो गई थी उसकी मर्दाना ताकत उसे पूरी तरह से मोहित कर रही थी,,,,, सर पर बोझा उठाए हुए वह सोनू की चाची से बोला,,,।

ले चलु चाची घर,,,,।

अब तुझे इनकार करूंगी तो भी तू माने वाला नहीं है,,,, काश सोनू की जगह तू होता तो मेरा कितना काम कर देता,,,(ऐसा मन में सोते हुए वह अपने आप से ही बोली मां बनने का भी सुख तेरे से ही प्राप्त हो जाता,,,)

क्या हो गया चाचा सोनू और मुझ में कोई फर्क है क्या सोनू की जगह ही मुझे समझो हमेशा मैं तुम्हारी मदद करते रहूंगा,,,,।

सोनू और तुझ में जमीन आसमान का फर्क है रे,,,,

मैं कुछ समझा नहीं चाची,,,,।

समय आएगा तो समझ जाएगा,,,,,,अब चल,,,, नहीं तो खड़े-खड़े थक जाएगा,,,।

क्या चाची तुम भी,,,, मुझे क्या समझी हो,,, मैं कभी भी नहीं दिखने वाला खड़े-खड़े या लेटे-लेटे चाहे जैसे कहो,,,,।

(सूरज कि ईस बात पर सोनू की चाची एकदम से शर्म से पानी पानी हो गई सोनू की चाची समझ रही थी कि सूरज क्या कहना चाह रहा है इसलिए अपने आप को सहज करते हुए बोली लेकिन इतने में भी उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,)

अच्छा चल,,,, बातें बना रहा है जब समय आएगा तो ढेर हो जाएगा,,,,।

अरे चाची,,, जब समय आएगा तो खुद ही देख लेना ढेर हो जाता हूं या ढेर कर देता हूं,,,।

(अब सोनू की चाची कुछ बोल नहीं पाई बस उसे चलने का इशारा की और सुरज आगे आगे चलने लगा ,, सूरज की बातें उसे झकझोर कर रख दे रही थी,,, बरसों बाद किसी ने उसे के साथ इस तरह की बातें किया था और इस तरह की बातें सुनकर उसका रोम रोम पुलकित हो गया था,,,।)

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सूरज सोनू की चाची से बातों का आनंद ले रहा था सोनू की चाची से बात करने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,, यह वही सूरज था जब सोनू को कभी उसके घर बुलाने जाता था तो सोनू की चाची की तरफ देखता तक नहीं था,,, उसे समय भी सोनू की चाची उसे छोटे-मोटे काम करने के लिए बुलाती थी लेकिन वह भाग जाता था लेकिन आज ऐसा था कि सूरज खुद सोनू की चाची की तरफ आगे बढ़ता जा रहा था,,,,।

सर पर घास का ढेर लिए सूरज आगे आगे चल रहा था और सोनू की चाची पीछे-पीछे चल रही थी सोनू की चाची के मन में उसके तन बदन में अजीब सी हलचल मची हुई थी उसके मन में बहुत सारे सवाल उठ रहे थे खास करके बाजार में कही गई पंडित की बात को लेकर तो उसका मन बड़ा व्याकुल हो रहा था,,,। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या करना चाहिए शादी को काफी समय गुजर गया था लेकिन ना तो शरीर सुख मिल रहा था और नहीं संतान सुख,,,, सोनू की चाची अपने आप से ही सवाल करते हुए पूछ रही थी,,,।

क्या मैं बुढी हो गई हूं,,, क्या मेरी ख्वाहिश नहीं है क्या मैं शरीर सुख पानी की हकदार नहीं है क्या मुझे संतान सुख नहीं चाहिए,,,, मेरी उम्र ही क्या है शादी को सात आठ साल तो हुए हैं लेकिन फिर भी सब कुछ अधूरा सही है पति ऐसा मिला कि जो ना तो शरीर सुख दे पा रहा हूं नहीं संतान सो और जब शरीर सुख नहीं दे पा रहा है तो संतान सुख कहां से देगा,,, ओर हो सकता है शायद भगवान को भी यही मंजूर हो तभी तो पति ही ऐसा मिला है एकदम मरीयल सा,,, ना तो उसे औरतों को खुश करने की ताकत है और ना ही मां बनाने की क्षमता,,, और उसके किए की सजा मुझे मिल रही है मेरा क्या कसूर है क्या बिगाड़ा है मेने किसी का,,, जो मुझे इस तरह की सजा मिल रही है,,,।

दूसरी औरतों को देखती हूं तो सोचती हूं खास मेरा भी जीवन औरतों की तरह होता तो कितना अच्छा होता छोटे-छोटे बच्चे,,, जो दिन रात मां मां कह कर पुकारते,,, रात को मर्दाना ताकत से भरा हुआ पति हर धक्के में स्वर्ग का सुख देता,,,, काश ऐसी मेरी किस्मत होती तो मजा आ जाता,,,,, लेकिन कर भी क्या सकते हैं,,,,,(अपने आप से इस तरह की बात कर रही थी कि अपने ही सवाल में उसे जैसे जवाब मिल गया हो और वह एकदम से खुश होते हुए अपने आप से ही बोली)

हो सकता है क्यों नहीं हो सकता पंडित जी ने भी तो यही कहा था कि उसके हाथ की रेखा में संतान सुख जरूर है लेकिन उसके पति से नहीं किसी गैर मर्द से इसका मतलब साथ है कि ऊपर वाले ने ही उसे इजाजत दिया है दूसरे मर्द से संबंध बनाने के लिए अपनी खुशी ढूंढने के लिए मां बनने के लिए हर तरह का सुख पाने के लिए तो क्यों ना ऊपर वाले की मर्जी को सम्मान दिया जाए,,,, लेकिन किसके साथ,,,।

सोनूके साथ,,,, नहीं नहीं सोनू बिल्कुल भी नहीं वह भी तो अपने चाचा की तरह ही मरियल सा है घास का बोझ तो उठाया नहीं जाता वह उसे कैसे उठाएगा,,,, कहीं वह भी अपने चाचा की तरह ही निकल गया कि पहले ही धक्के में ढेर हो गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,, सारा मजा कीरकीरा हो जाएगा और अगर किसी तरह से वह सोनू से गर्भवती हो भी गई तो बच्चा भी उसी की तरह ही होगा मरियल सा नहीं नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं होने दूंगी,,, सोनू तो बिल्कुल भी नहीं,,,,।

यह सूरज कैसा रहेगा हट्टा कट्टा जवान बांका है ,, इसकी शरीर की कद काठी को देखकर ऐसा लगता है कि यह जरूर मुझे दुनिया की खुशी देगा शरीर सुख देगा और मुझे मा भी बनाएगा,,,, सूरज का नाम तो सुनेना दीदी की पड़ोसन भी ले रही थी,,, वही तो सही थी की सूरज के साथ संबंध बनाकर मां बन जा कोई बात सूरज की मां भी गई थी भले ही मजाक में कहीं हूं लेकिन कहीं तो थी ही क्योंकि शायद लोग भी जानती हैं कि उसके लिए सूरज से अच्छा लड़का कोई भी गांव में नहीं होगा जो उसकी जरूरत को पूरा कर सके,,, सूरज भी तो उसे टुकुर-टुकुर देखता हैं पहले तो पास में नहीं आता था नजर मिलाने से डरता था भाग जाता था उसे दिन तो घास का बोझ उठने के बहाने किस तरह से कलाई पकड़ लिया था उस समय तो मेरे बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,, उसकी पकड़ ही इतनी गजब की थी,,, और अभी भी तो उसकी नजर उसकी चूची ऊपर और बड़ी-बड़ी गांड पर ही है,,, यह सब ऐसे ही थोड़ी हो रहा है हो सकता है ऊपर वाले का इशारा है अगर ऊपर वाले ने किस्मत में कुछ और लिखा है तो इसके साथ संबंध बनाकर मां बनना लिखा है उसे भी तो मिलाना भी उसकी जिम्मेदारी है,,,,।

कहीं यह सब जो भी हो रहा है सूरज का उसके साथ मिलना जुलना उसके बदन को निहारना उसकी तरफ आकर्षित होना यह सब ऊपर वाले का ही तो इशारा नहीं है क्या ऊपर वाला खुद चाहता है कि मैं सूरज के साथ संबंध बनाऊं,,, वरना इतना बदलाव एक लड़के में कैसे आ सकता है जो लड़का कुछ दिन पहले औरतों से डरता था घबराता था उनके पास नहीं आता था आज वह खुद आगे चलकर मदद करने को तैयार है किसी भी तरह की मदद करने को हाजिर है,,,, सोनू की चाची अपने मन में यही सब सो रही थी और काफी देर तक खामोशी छाई रहने की वजह से सूरज बोला,,,।

क्या हुआ चाची खामोश क्यों हो,,? कुछ बोलती क्यों नहीं,,!

क्या बोलूं,,,,?

अरे कुछ भी बोल बोलने का कहां पैसा लगता है,,,।

मुझे मालूम है बोलने का पैसा नहीं लगता लेकिन कोई सुनने वाला भी तो होना चाहिए,,,,।

कैसी बातें कर रही हो चाची मैं हूं ना सुनने वाला तुम बोलो मैं सुन रहा हूं,,,(घास का बोझ सर पर उठाएं आगे आगे चलते हुए सूरज बोला,,,, पीछे पीछे सोनू की चाची अपने अरमानों को पंख देने की चाह में बहुत कुछ सोच रही थी,,, और सुरज की बात सुनकर बोली,,,)

तेरे सुनने से क्या होता है जिसको सुनना चाहिए वो तो सुनता ही नहीं है,,,।

क्या मतलब,,,, कहीं तुम सोनू की बात तो नहीं कर रही हो,,,,।

नहीं रे,,, सोनू तो निठल्ला है,,, बिल्कुल उसके चाचा की तरह,,, वह दोनों तो बिल्कुल भी नहीं सुनते,,,।

(सोनू की चाची की बातों का दर्द कुछ कुछ सूरज समझ रहा था,,, क्योंकि मैदान में सौच करते समय सोनू की चाची के साथ-साथ अपनी मां और अपनी पड़ोसन की बातों को उसने चोरी छिपे सुना था वह जानता था कि सोनू की चाची का दर्द क्या है क्या चाहती है ना तो उन्हें सभी सुख मिल रहा था और उसी का फायदा सूरज उठाना चाहता था,,,, इसलिए सोनू की चाची की बात को सुनकर वह बोला,,,)

क्या कह रही हो चाची क्या चाचा भी तुम्हारी बात नहीं सुनते,,, सोनू का तो मैं जानता हूं वह एकदम बेकार है लेकिन मुझे नहीं लगता कि चाचा के बारे में तुम्हारा कहना सही होगा,,,, मैं उन्हें जब भी देखता हूं तब वह खेतों में काम करते रहते हैं,,,,,।

हां बस खेतों में ही काम करते रहते हैं खेत की जुताई उन्हें अच्छी तरह से पता है लेकिन औरत की चू,,,(इतना कहकर वह एकदम से खामोश हो गई उसकी दिल की बात अचानक उसके होठों पर आते-आते रुक गई थी लेकिन सूरज उसकी बात के मतलब को समझ गया था,,,, उसके इस तरह से इकाई खामोश हो जाने की वजह से सूरज जानबूझकर बोला,,,)

क्या हुआ चाची,,, चुप क्यों हो गई चाचा की क्या गलती है,,,!

उनकी गलती यही है सूरज की वह सिर्फ खेतों के बारे में जानते हैं एक औरत के मन को नही जानते हैं और ना ही समझते हैं,,,।(सोनू की चाची थोड़ा गुस्से में बोल रही थी,,, और सूरज उसके कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था लेकिन जानबूझकर अनजान बनने की कोशिश कर रहा था इसलिए वह बोला)

औरत को समझने में कौन सी पढ़ाई करनी पड़ती है चाची मैं तो औरतों की बातों को अच्छी तरह से समझ जाता हूं देखो तुम दूर से मुझे बुलाई मैं जल्दी से आ गया ना तुम्हारे पास तुम्हारी मदद करने,,,,

तू भी सोनू के चाचा किसी तरह है बातों को भी ना तो समझ पा रहा है या नहीं और उसके मन को समझ पा रहे हैं तुझे भी नहीं मालूम की औरत क्या चाहती है क्या जरूरत है,,, औरत का मन क्या- होता है,,, तू भी एकदम निठल्ला ही है,,,।

ऐसा क्यों कह रही हो चाची मैं तो सब कुछ समझता हूं,,,।

चल रहने दे,,,, दिखाई देता है तु कितना समझता है,,,।

( सोनू की चाची को ऐसा लगने लगा था कि सूरज भी उसके पति की तरह ही बेकार है वह भी उसके मन को नहीं समझ सकता,,, वरना इस तरह की बातें ना करता सीधे मतलब की बात पर आ जाता,,,, उसकी बातों को सुनकर उसे लगने लगा कि शायद सूरज उसके लिए ठीक नहीं है भले लंबा तगड़ा चौड़ा हो गया है लेकिन दिमाग से अभी बच्चा ही है,,, कहीं ऐसा ना होगी उसके साथ सभी संबंध बनाकर बदनामी उठाना पड़े अगर वह अपनी बालबुद्धि का प्रदर्शन करते हुए उसके बारे में किसी को कुछ भी बता दिया तो बदनामी हो जाएगी इसलिए पल भर के लिए सूरज का ख्याल सोनू की चाची के मन से निकलने लगा और इसी बीच उसका घर भी आ गया था,,,,।

दरवाजा बंद था इसलिए सोनू की चाची जल्दी से दरवाजे के पास आई और बोली,,,।

रुक रुक ,,,, यहां नहीं रखना मैं दरवाजा खोलती हूं,,,

(और इतना कहने के साथ ही सोनू की चाची लपक कर दरवाजे की कुंडी खोलने लगी,,, कुंडी खोलने के लिए उसने अपना हाथ थोड़ा सा ऊपर उठे और उसके हाथों पर उठाने की वजह से उसकी कमर की गहरी लकीर एकदम साफ दिखाई देने लगी जिसे देखकर सूरज का लंड करवट लेने लगा,,, सूरज के सर पर बोझ था उसका दोनों हाथ खाली नहीं था वरना इस समय वह यही सोच रहा था कि अपना हाथ उसकी कमर पर रखकर जोर से मसल दे क्योंकि वह जानता था कि सोनू की चाची को क्या चाहिए और वह बिल्कुल भी इनकार नहीं कर पाती,,,,।

सोनू की चाची जल्दी से दरवाजा खोल दी और फिर खुद अंदर प्रवेश करते हुए उसे अंदर आने के लिए बोली,,,,, घर का आंगन पूरी तरह से खुला हुआ था एक तरफ हेड पंप था जहां पर नहाने धोने का काम किया जाता था और दूसरे कोने पर ईंधन रखा हुआ था वहीं पर इशारा करते हुए सोनू की चाची बोली,,,)

यहां पर रख दे सूरज,,,,।

ठीक है चाची,,,,(और इतना कहने के साथ ही उसे कोने में वह घास का ढेर नीचे गिरा दिया और गहरी गहरी सांस लेने लगा यह देखकर सोनू की चाची बोली)

थक गया ना सूरज,,,।

नहीं चाची बिल्कुल भी नहीं,,, अगर तीन कोश और चलना होता तो भी मैं आराम से चल लेता,,,,।

चल इतना तो सही है मेहनत करने में अच्छा है लेकिन अभी भी तू नादान है,,,,।

नादान नहीं हुं चाची बड़ा हो गया हूं,,,,।

हां हां जानती हूं बड़ा हो गया है,,,, अब तो यहीं बैठ मैं तेरे लिए पानी लेकर आती हूं,,,,।

(इतना कहकर वह घर में चली गई,,, और सूरज जो दीवाल के सहारे खटिया खड़ी थी उसे गिराकर उसे गिराकर बैठ गया,,, और सोनू की चाची की उसे बात पर गौर करने लगा जब खेत की जुताई के बारे में बात कर रही थी साथ में ही औरत की चुदाई की भी बात उसके मुंह से अनजाने में निकल गई थी वह पूरी बात नहीं कर पाई थी लेकिन उसके कहने का मतलब यही था सूरज को पक्का यकीन हो गया था कि सोनू की चाची चुदवाने के लिए तड़प रही है,,, और यह ख्याल उसके मन में आते ही सूरज के पजामे में उसका लंड करवट लेने लगा,,, और वहां खटिया पर से खड़ा हो गया,,,, और जहां सोनू की चाची गई थी उसके पीछे चल दिया अपने मन में यह सोचकर कि आज सोनु की चाची से अपने मन की बात कह कर रहेगा,,,
 
धीरे-धीरे वह घर में प्रवेश कर गया घर सीधा-सीधा बना हुआ था एक कमरे से दूसरे कमरे में वह पहुंच चुका था लेकिन कहीं भी सोनू की चाची नजर नहीं आ रही थी बाहर से उजाला आ रहा था तो सोनू समझ गया कि शायद पीछे वाली जगह खुली हुई है वहीं पर होगी धीरे से घर के पीछे वाली जगह पर आ गया जहां पर चुल्हा रखा हुआ था,,, उसे देखकर सूरज समझ गया कि यहां पर ही रसोई बनती है,,, लेकिन फिर भी वह यहां वहां खड़ा होकर देख रहा था लेकिन कहीं भी सोनू की चाची नजर नहीं आ रही थी घर के पीछे की तरफ थोड़ी बहुत सब्जियां उड़ा रखी थी यहां पर कुछ अमरूद के पेड़ थे कुछ बैर के पेड़ थे,,, वह यह सब देख ही रहा था कि तभी उसे झाड़ियां के पीछे थोड़ी सी हलचल और चूड़ियों की आवाज सुनाई दी,,,, और वह उसे दिशा में अपने कदम आगे बढ़ा दिया,,,,।

जैसे ही झाड़ियों की दूसरी तरफ सूरज ने नजर बढाया तो उसकी आंखों के सामने जो नजारा दिखाई दिया उसे देखकर एक बार फिर से उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,,, ऐसा नहीं था कि सूरज पहली बार सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देख रहा हूं वह पहले भी दो-तीन बार सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देख चुका था इसमें नयापन कुछ भी नहींथा,,,, लेकिन आज हालात बदल चुके थे क्योंकि जितनी बार भी वह सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देखा था वह घर के बाहर खेतों में ही देखा था लेकिन आज माहौल पूरी तरह से बदल चुका था वह सोनू की चाची को उसके ही घर में पेशाब करते हुए देख रहा था और वह भी एकदम नजदीक से उसकी बड़ी-बड़ी गांड सुनहरी धूप में चमक रही थी जिसे देखकर सुरज का लंड अपनी औकात में आ चुका था,,,।

सूरज फटी आंखों से सोनू की चाची को पेशाब करते हुए देख रहा था उसके मन में जरा भी डर नहीं था कि अगर सोनू की चाची उसे देख लेगी तो क्या होगा क्योंकि सोनू की चाची के मन में क्या चल रहा है यह सूरज अच्छी तरह से जानता था वह जानताथा कि सोनू की चाची उसे कुछ नहीं बोलेगी बल्कि उसकी यह हरकत पर मदहोश हो जाएगी,,,,, इसीलिए सूरज हिम्मत दिखाकर वहीं पर खड़ा रहा और इस बात से अनजान की सूरज एकदम नजदीक से उसे पेशाब करते हुए देख रहा है अचानक ही उसे परछाई दिखाई दी और वह एकदम से घबरा गई जब नजर उठाकर देखी तो ठीक उसके पीछे सूरज खड़ा था और उसे पेशाब करते देख रहा था उसकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी उसकी नंगी गांड एकदम दिखाई दे रही थी यह देखकर वह एकदम से सन्न रह गई,,, और एकदम से उठकर खड़ी हो गई लेकिन खड़े होने के बावजूद भी वह साड़ी को कमर से नीचे गिराना भूल गई और इस अवस्था में खरीदा गई और अभी भी सूरज उसकी नंगी गांड को प्यासी आंखों से देख रहा था,,,।

सूरज सोनु की चाची को दो-तीन बार पेशाब करते हुए उसकी नंगी गांड को देख चुका था लेकिन यह बात सोनू की चाची नहीं जानती थी उसे क्या मालूम था कि सूरज उसकी जवानी की झलक को पहले भी देख चुका है वह तो यही जानती थी की पहली बार सूरज उसे इस अवस्था में देख रहा है इसलिए एकदम से शर्म में से पानी पानी हुई जा रही थी,,, जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि साड़ी अभी तक कमर तक उठी हुई है वह एकदम से साड़ी को नीचे छोड़ दी और एक खूबसूरत नाटक पर पर्दा पड़ गया और वह हड़बड़ाते हुए बोली,,,।

तततत,,, तु यहां क्या कर रहा है,,, तुझे तो मैं वहां देखने के लिए बोली थी ना,,,,।

बोली तो थी चाची,,, लेकिन मैं यह कहने के लिए आया था कि तकलीफ की कोई जरूरत नहीं है मुझे जरुरी काम से जाना पड़ेगा इसलिए मैं रुक नहीं सकता,,,,,।

(और इतना कहने के साथ ही सूरज बिना सोनू की चाची का जवाब सुने वहां से चलता बना क्योंकि जिस तरह से उसे देखकर वह हड़बड़ाई थी सूरज अपने मन में सोचने लगा कि अगर सोनू की चाची चुदवाना चाहती है तो इस तरह से घबराती नहीं और इसीलिए उसे इस बात का डर था कि कहीं लेने के देने ना पड़ जाए इसलिए वह वहां से चलता बना,,, सोनू की चाची उसे रोकना चाहती थी लेकिन इस समय उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं फूट रहे थे और देखते ही देखते सूरज चला गया था,,,।)

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सूरज सोनू की चाची के घर से वापस आ चुका था और अपने घर ना जाकर सीधा बगीचे में चला गया था जहां पर उसकी मुलाकात नीलू से हुई थी और नीलू की चुदाई होते होते रह गई थी,,,, अब उसे पक्का यकीन हो गया था कि सोनू की चाची जल्द ही उसके नीचे आ जाएगी,,, सोनू को एहसास हो गया था कि वाकई में सोनू की चाची काफी प्यासी एक तो मर्द की तड़प दूसरी मां बनने की चाहत दोनों उसे उसके नीचे ले आने पर मजबूर कर देगी,,,,। अंदर ही अंदर सूरज बहुत खुश हो रहा था और बगीचे में इधर-उधर घूम रहा था क्योंकि यहीं पर वह नीलु का इंतजार करेगा ऐसा कहा था लेकिन इस बात पर वह पक्का नहीं था कि नीलू वहां पर दोबारा आएगी,,, लेकिन फिर भी जहां चाह होती है वहीं राह होती है यही सोचकर वह इधर-उधर घूमता रहता था,,,।

लेकिन शाम हो गई नीलू का कोई पता नहीं था इस तरह से सूरज तीन-चार दिन तक उसका इंतजार करता रहा,,,, लेकिन नीलू उधर नहीं आई,,, तब सूरज को लगने लगा कि शायद वाकई में वे ईधर नहीं आने वाली,,,, इसलिए एक दिन घूमता फिरता हुआ वह उसके घर के पास पहुंच गया,,, सुबह का समय था मौके पर मुखिया और मुखिया की बीवी दोनों वहीं पर मौजूद थे घर के बाहर कुर्सी डालकर दोनों बैठे हुए थे और मजदुरों को उनके काम के बारे में समझा रहे थे,,, और लोग अपने काम के बारे में पूछ कर वहां से काम करने के लिए निकल जा रहे थे तभी मुखिया की नजर सूरज पर पड़ी तो वह बोला,,,।

अरे सूरज आओ,,,आओ,,,, वहां खड़े क्या कर रहे हो,,,,।

कुछ नहीं मालिक बस घूमता हुआ इधर आ गया,,,(नमस्कार करते हुए सूरज बोला,,, पास में ही बैठी मुखिया की बीवी सूरज को देखते ही उसे उसे दिन वाली घटना याद आ गई जब वह खाना बना रही थी पास ही गुशल खाने में उसकी बड़ी लड़की नहा रही थी और सूरज अपनी हरकतों से उसे पूरी तरह से गर्म करके उसे चुदवाने पर मजबूर कर दिया था,,,, सूरज की हिम्मत और उसकी मर्दाना ताकत कि वह पूरी तरह से कायल हो चुकी थी बगीचे में तो वह जी भर कर सूरज के मर्दाना अंग का मजा ले चुकी थी लेकिन वह नहीं जानती थी कि सूरज इस तरह से घर में घुसकर उसकी चुदाई करके चला जाएगा उसकी यही अदा तो मुखिया की बीवी को उसका दीवाना बना दी थी,,, सूरज की तरफ मुस्कुरा कर देखते हुए मुखिया बोले इससे पहले ही वह बोली,,,,)

काम के लिए आया है क्या,,,?

ऐसी कोई बात नहीं है मालकिन बस घूमता हुआ इधर आ गया काम मिल गया तो काम ही सही,,,,।

जब कोई बात नहीं समय पर आ गया है,,,, घर के पीछे वाले खेतों में पानी दिया जा रहा है देख नाली में से पानी ठीक से जा रहा है कि नहीं अगर नहीं जा रहा है तो मिट्टी ठीक से काट देना ताकि आराम से पानी चला जाए खेतों में वर्ना सारा पानी इधर-उधर चला जाएगा,,,,।

की मालकिन,,,,(इतना कहकर वह चलने वाला था की मुखिया की बीवी बोली)

अरे फरसा तो ले ले क्या हाथ से ही मिट्टी काटेगा,, ।

जी मालकिन,,,,(और इतना कहने के साथ अभी पास नहीं पड़ा फरसा अपने हाथ में उठा लिया और उसे कंधे पर रखकर घर के पीछे की तरफ जाने लगा आज उसका काम करने में मन नहीं था बल्कि वह तो आज नीलू से मिलने आया था उससे बोलने आया था कि वहां बगीचा में क्यों नहीं आता जबकि रोज वह उसका वही इंतजार करता है,,,, मन में यही सोचता हुआ वहा घर के पीछे चला गया,,, और मुखिया की बीवी उसे घर के पीछे जाते हुए देखते रह गई क्योंकि उसके मन में तो कुछ और चल रहा था,,,,।

वह जानती थी कि बुर की प्यास सूरज को यहां खींच लाई है और वह इसका पूरा मजा लूटना चाहती थी वह थोड़ी ही देर में घर के पीछे जाने के बारे में सोच रही थी क्योंकि वह जानती थी कि उस जगह पर कोई नहीं होगा और वह वहां पर जाकर चुदाई का मजा ले सकेगी,,,,, लेकिन वह जाने ही वाली थी कि तभी उसे कुछ जरूरी काम आ गया,,,, और उसे काम के सिलसिले में मजदूर लेकर दूसरे खेत की तरफ जाना पड़ा वहां जाना जरूरी था,,,,,।

सूरज चलता हुआ खेत के पास पहुंच चुका था पास में ही ट्यूबवेल चालू था उसमें से पानी निकल रहा था और खेतों में जा रहा था,,,, सब कुछ सही था तभी उसकी नजर ट्यूबवेल के ही पास बनी कच्ची दीवार पर कपड़े पर गए जो उस पर रखे हुए थे और वह किसी लड़की के थे,,, सूरज सच में पड़ गया कि यहां लड़की के कपड़े कैसे आ गए,,,, और यही देखने के लिए वह धीरे-धीरे दीवार के पास पहुंच गया दीवार सूरज की लंबाई से तकरीबन एक हाथ कम ऊंचाई की थी इसलिए सूरज दीवार के पास आते ही दीवार की दूसरी ओर देखने लगा और दूसरी और देखते ही उसके होश उड़ गए,,,,।

उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसकी नजर उस दृश्य से हटने का नाम नहीं ले रही थी,,, क्योंकि नजर ही कुछ ऐसा था दीवार के पीछे ट्यूबवेल के पानी में मुखिया की लड़की नीलू पूरी तरह से निर्वस्त्र होकर नहा रही थी उसे नंगी देखकर सूरज का लंड अपने आप एकदम से अपनी औकात में आ गया,,, इस नजारे का रसपान व अपनी आंखों से और ज्यादा कर पाता इससे पहले ही नीलू की नजर सूरज पर पड़ गई और सूरज को इस तरह से अपने आप को घूरता हुआ देखकर नीलू एकदम से डर गई और अपनी नंगी जवान को छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली,,,,)

हाय दैया तू यहां क्या कर रहा है,,,?(अपनी चूचियों पर हाथ रखकर उसे छुपाने की कोशिश करते हुए)

मैं भी यही पूछना चाहता हूं कि तुम यहां क्या कर रही हो,,,,,।

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे यह ट्यूबवेल मेरा है खेत मेरा है और तुम पूछ रहे हो कि मैं यहां क्या कर रही हूं,,,,,,।

अरे मेरा कहने का मतलब यह नहीं था मैं तो यह कहना चाह रहा था कि घर में भी तो नहाने का साधन मौजूद है फिर तुम यहां खेतों में क्या करने नहाने के लिए आई हो,,,,,, मैं तो यहां पर खेत में पानी ठीक से जा रहा है कि नहीं यह देखने के लिए मालकिन मुझे भेजि है,,,।(सूरज एकदम बेशर्मी दिखाते हुए अपनी नजर को बिल्कुल भी नीलू के निर्वस्त्र बदन पर से नहीं जाता रहा था बल्कि उसके नंगेपन का रस अपनी आंखों से लगातार पिए जा रहा था,,, यह देखकर नीलू बोली,,,)

तुमको बिल्कुल भी शर्म नहीं आती जब देख रहे हैं कि एक लड़की इस अवस्था में नहा रही है फिर भी उसे घूर-घूर कर देख रहे हो,,,,।

खूबसूरत चीज को देखना कौन सा पाप है,, मैं तो खूबसूरत लड़की को देख रहा हूं,,,।

(सूरज के मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर नीलू एकदम से शर्मा गई शर्मा के मारे उसके गोरे-गोरे गाल टमाटर की तरह लाल हो गए,,,,, फिर भी वह सहज होते हुए बोली,,)

तुमको बिल्कुल भी शर्म नहीं आती एक लड़की से इस तरह से बात करते हुए अगर मां और बाबूजी को पता चल जाएगा तो तुम्हारी खैर नहीं है,,,।

जाकर बता दो लेकिन मैं भी कह दूंगा कि मेरी गलती थोड़ी है आप लोग ने ही मुझे खेत में पानी ठीक से जा रहा है कि नहीं यही देखने के लिए भेजे थे और मैं यही देख रहा था मुझे क्या मालूम था कि वहां पर तुम्हारी लड़की नंगी होकर नहा रही होगी,,,,।

(सूरज एकदम खुले शब्दों में नंगी शब्द का प्रयोग कर रहा था जिसे सुनकर नीलू के टांगों के बीच हलचल होने लगी और वह शर्माते हुए बोली,,,)

हाय दैया एक लड़की के सामने इस तरह के शब्दों का प्रयोग करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती,,,,।

पर मैंने कौन सा गलत कह दिया है जब एक लड़की और वह भी खूबसूरत लड़की अपने सारे कपड़े उतार देती थी इस अवस्था को क्या कहेंगे तुम ही बताओ,,, नंगी ही ना कहेंगे कि कुछ और कहेंगे तुम ही बता दो,,,।

देखो सूरज अब तुम हद पार कर रहे हो,,,,,(नीलू इस तरह से अपनी छाती पर हाथ रखे हुए अपनी जवानी को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी और यह भी देख रही थी कि सूरज की नजर उसकी छतिया पर ही नहीं बल्कि उसके पूरे बदन पर इधर-उधर घूम रही थी अगर वह घूम कर सामने की तरफ मुंह करके खड़ी हो जाती है तो उसकी गंद निर्वस्त्र हो जाएगी और अगर सामने उसकी तरफ मुंह करके खड़ी हो जाती है तो उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार उजागर हो जाएगी इसीलिए वह तिरछी खड़ी थी लेकिन फिर भी वह शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी,,,।)
 
मैं हद पार नहीं कर रहा हूं तुम बहुत खूबसूरत हो और कपड़े उतारने के बाद तो तुम और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगी हो देखो तो सही तुम्हारी गोल-गोल छतिया उभरी हुई गांड और टांग के बीच की पतली दरार का तो अनुभव में उस दिन बगीचे में ले चुका था लेकिन तुम डर के भाग गई वरना तुम भी मजा ले लेती,,, ।

(सूरज एकदम बेशर्म बन चुका था वह जानता था कि नीलू अपनी मां बाबूजी को इस बारे में कुछ भी नहीं बताएगी और सूरज की बात सुनकर नीलू की हालत खराब हो रही थी जिस दिन से बगीचे में से वह सूरज की पकड़ से छूटकर भाग थी उसे दिन से आज तक वहां उसे पाल के बारे में सोच रही थी और जब भी उसे पाल के बारे में सोचती तो उसकी बुर से पानी निकलने लगता था उसे बहुत मजा आता था और अपने मन में सोचती थी कि बेवजह वहां से भाग निकली वरना चुदाई का मजा ले लेती ,,, सूरज की बात सुनकर शर्म के मारे अपनी नजर झुका कर वह बोली,,,)

भाग ना जाती तो और क्या करती तुम मेरे साथ गलत काम कर रहे थे,,,,।

तुम एकदम बेवकूफ हो वह गलत काम नहीं था बल्कि मजा लेने वाला काम था तुम भाग गई वरना मैं तुम्हें पता था कि कितना मजा आता है आखिरकार तुम भी शादी करोगी तो तुम्हारा पति तुम्हारे साथ यही सब करेगा तो क्या कहोगी कि तुम्हारा पति गंदा काम करता है तुम्हें बात अपनी मां को भी नहीं बता सकती अगर बोलोगी कि वह गंदा काम करता है तो तुम्हारी मां खुद तुम्हें बेवकूफ कहेगी और बोलेगी कि जी भर कर चुदवा ,,।

(सूरज पूरी तरह से नीलू से गंदी बातें कर रहा था और इस तरह की बातें करते हुए और एक खूबसूरत लड़की को निर्वस्त्र अवस्था में देखकर उसका लंड अपनी औकात भूल रहा था वह पूरी तरह से अपनी औकात से बाहर जाकर पजामे को फाड़ कर बाहर निकलने को अातुर हुआ जा रहा था,,,, और उसकी इस तरह की बातें सुनकर नीलू की बुर उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फूलने लगी थी जिसका एहसास उसे अच्छी तरह से हो रहा था वह अपने कपड़े भी नहीं ले पा रही थी क्योंकि कपड़ा भी उसकी पहुंच से थोड़ा दूर था इसलिए मजबूरी में उसे नंगी ही सूरज के सामने खड़ी रहना पड़ा,,,, नीलू समझ गई की सूरत जाने वाला नहीं है इसलिए वह बोली,,,)

अच्छा तो अब तुम जाओ,,, कोई आ गया तो गजब हो जाएगा,,,,।

कुछ गजब नहीं होगा इस तरह का खूबसूरत नजारा छोड़कर भला कोई बेवकूफी होगा जो जाना चाहेगा मैं तो कभी ना जाऊं मैं तो दिन-रात तुम्हें इसी तरह से देखने के लिए तैयार हूं इतनी खूबसूरत हो की सुनहरी धूप में तुम्हारा बदन एकदम सोने की तरह चमक रहा है,,,,।

(सूरज की तारीफ भरी बातें सुनकर नीलू के तन बदन में उत्तेजना की लहर उठ रही थी उसे सूरज की बातें अच्छी लग रही थी खास करके उसकी तारीफ वाली बातें उसे अंदर तक मदहोश किए जा रही थी,,,)

चले जाओ यहां से कोई देख लेगा तो,,,।

कोई नहीं देखेगा वैसे भी यहां कौन आने वाला है देखो तो सही चारों तरफ खेत ही खेत है,,,,।

फिर भी सूरज तुम यहां से चले जाओ तुम नहीं जानते अगर बाबूजी देख लिए तो गजब हो जाएगा,,,,।

तुम्हारे बाबूजी तो घर के आंगन में बैठे हैं और मजदूरों को हिदायत दे रहे हैं इसलिए उनके पास समय नहीं है कि वह घर के पीछे आ सके,,,,।

देखो तुम्हें मेरी कसम चले जाओ यहां से,,,,।

चलो कोई बात नहीं चला जाता हूं,,,,, तुम रहती हो तो,,,, लेकिन पहले एक बात बताओ मैं तुम्हारा इतने दिन से बगीचे में इंतजार कर रहा हूं तुम आई क्यों नहीं,,,,?

कैसे आती मुझे बहुत डर लग रहा था,,,,(नजर नीचे झुकाए हुए ही वह सूरज से बातें कर रही थी नजर उठाने की ताकत उसमें बिल्कुल भी नहीं थी उसकी आंखों में शर्म एकदम साफ नजर आ रही थी और उसके गाल सुर्ख लाल हो चुके थे,,,।)

डर लग रहा था लेकिन किससे और क्यों,,,?(पजामे के ऊपर से ही अपने लंड को मसलते हुआ सूरज बोला,,,)

तुमसे,,,,

(इतना सुनते ही सूरज जोर-जोर से हंसने लगा उसे हंसता हुआ देखकर नीलू को गुस्सा भी आ रहा था इसलिए वह थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

इसमें हंसने की कौन सी बात है और इतनी जोर-जोर से मत हंसो कोई सुन लेगा तो इधर आ जाएगा,,,, और अब तुम यहां से चले जाओ वरना मैं ही शोर मचा दूंगी,,,,।

अरे वाह तुम तो ऐसी धमकी दे रही हो कि जैसे मैं तुम्हारी इज्जत लूटना चाहता हूं,,,।

तुम्हारा कोई भरोसा भी नहीं है बगीचे में मैंने देख ली हूं कि तुम क्या कर सकते हो,,,,।

(सूरज अच्छी तरह से जानता था कि यहां पर नीलू के साथ कुछ करने में मजा नहीं है क्योंकि यहां कोई भी आ सकता था और यहां पर नीलू ज्यादा खुल भी नहीं सकती थी डर-डर कर आगे बढ़ाने में बिल्कुल भी मजा नहीं था सूरज नीलू की इत्मीनान से लेना चाहता था,,, इसलिए वह बोला,,,,)

चलो कोई बात नहीं मैं यहां से चला जाता हूं लेकिन एक शर्त पर,,,,।

कैसी शर्त,,,,!(सूरज की तरफ देखे बिना ही वह आश्चर्य दिखाते हुए बोली,,,)

ज्यादा कुछ नहीं बस मेरी तरफ अपनी गांड कर दो मैं तुम्हारी गांड की खूबसूरती को देखना चाहता हूं उसकी गोलाई को देखना चाहता हूं देखना चाहता हूं कि ऊपर वाले ने तुम्हारी खूबसूरती के दोनों तरबूज को किस तरह से संवारा है,,,।

(सूरज की इस शर्त को और उसकी बातों को सुनकर नीलू एकदम से शर्म से पानी पानी होने लगी,,,, उत्तेजना के मारे उसकी सांसे ऊपर नीचे हो रही थी और धड़कते दिल के साथ वह बोली,,,)

यह कैसी शर्त है,,,,।

तुम्हारी खूबसूरती देखकर तो यही शर्त वाजिब है,,,।

नहीं मुझे शर्म आती है,,,,।

शर्माने की जरूरत नहीं है नीलू इस जानती हो ना तुम्हारी बुर पर में लंड छुआ चुका था बस धक्का मारने की देरी थी और तुम्हारी बुर में मेरा पूरा लंड घुस जाता,,,, इसलिए मुझसे शर्माने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है,,,,।

(नीलू की तो हालत पल पल खराब होती जा रही थी,,,, उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि सूरज उसे इस तरह की गंदी से गंदी बातें करेगा इस तरह की बातें तो उसने आज तक अपनी बहन से भी नहीं कर पाई थी,,, इसलिए तो उसकी बुर से पानी टपक रहा था उसकी सांसों के साथ उसकी उठती बैठती चूचियों को देखकर सूरज की हालत खराब हो रही थी,,, नीलु समझ गई कि यह जाने वाला नहीं, है,,,, इसलिए वह धीरे से बोली,,)

तब तो चले जाओगे ना,,,,।

बिल्कुल चला जाऊंगा,,,,।

(उसका इतना कहना था कि नीलू इधर-उधर चारों तरफ यह देखने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन किसी के भी द्वारा देखे जाने की गुंजाइश वहां बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि चारों तरफ खेत ही खेत लहलहा रहे थे और खेत कि फसले ज्यादा ऊंचाई की थी इसलिए नीलू भी निश्चिंत थी,,,, और वह धीरे से अपनी पीठ अपनी गांड को सूरज की तरफ कर दी उसकी गांड देखकर सूरज एकदम से मदहोश हो गया और अपने लंड को जोर से दबा दिया वाकई में उसकी गांड लेने लायक थी सूरज अपने मन में ऐसा सोच कर मत हुआ जा रहा था और उसकी गांड को देखते हुए बोला,,,,)

वाह कसम से मैं आज तक इतनी खूबसूरत गांड किसी की नहीं देखी कितनी नजाकत है तुम्हारी गांड में एकदम हुई जैसी मुलायम मुलायम बस एक काम कर दो अपने दोनों हाथों को अपनी गांड पर रखकर सहलाओ,,,,।

(सूरज की यह बात सुनकर नीलू एकदम से सुंदर रह गई और गुस्सा दिखाते हुए बोली , )

अब यह क्या बेवकूफी है सूरज,,,।

बेवकूफी नहीं है नीलू मैं देखना चाहता हूं कि एक लड़की जब अपनी नंगी गांड पर हाथ रखती है तो कैसा लगता है,,,।

(नीलु जानती थी कि सूरज की बात माने बिना कोई दूसरा रास्ता नहीं है इसलिए वह धीरे से अपने दोनों हथेलियों को अपनी गांड की दोनों फांकों पर रख दी और उसे हल्के हल्के सहलाने लगी,,, यह देखकर सूरज एकदम मदहोश हो गया और बोला,,,,)

वाह ऐसा लग रहा है कि मेरी आंखों के सामने आसमान से परी उतर कर आ गई है और अपने कपड़े उतार कर नंगी होकर अपनी जवान दिखा रही है,,, कसम से मिलो पूरे गांव में तुमसे ज्यादा खूबसूरत कोई लड़की नहीं है,,,,(सूरज की बातें सुनकर नीलू एकदम गदगद हुए जा रही थी,,,, और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) अच्छा सच बताना उसे दिन तुम्हें किसी से डर लग रहा था मुझे या मेरे लंड से,,,,।

(सूरज की यह बात सुनकर नीलु एकदम से गहरी सांस लेकर मस्त हो गई,,,, और मदहोश होते हुए बोली और स्पीच लगातार वह अपनी हथेली से अपनी गांड को सहला रही थी,,,)

सच-सच बताऊं तो मुझे तुम्हारे उससे बहुत डर लग रहा था,,,,।

लेकिन ऐसा क्यों लड़कियां इससे डरती नहीं है बल्कि इससे खेलती,,,,।

नहीं नहीं मुझे तो डर लग रहा था क्योंकि तुम्हारा बहुत लंबा और मोटा है,,,,,।

(नीलू की यह बात सुनकर सूरज से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह एकदम से दीवार से हटकर दूसरी तरफ से ठीक नहीं हो के सामने आकर खड़ा हो गया नीलू उसे देखते ही कम से काम आ गई क्योंकि उसके पजामी में तंबू बना हुआ था और वह एक झटके से अपने पजामी को नीचे करके अपने लंड को बाहर निकाल लिया और अपने हाथ से ऊपर नीचे करके हिलाना शुरू कर दिया यह देखकर नीलू एकदम से घबरा गई,,,,, और सूरज आगे बढ़कर उसका हाथ पकड़ लिया और सीधे उसे अपने लंड पर रख दिया,,,,।
 
सूरज की इस हरकत पर नीलू एकदम से घबरा गई उसके पसीने छूटने लगे क्योंकि उसके हाथ में सूरज का मोटा तगड़ा लंड जो था एकदम गरम,,,, सूरज मैन ही मन खुश होता हुआ उसकी हथेली पर अपना हाथ रखा हुआ था और अपने हाथ का सहारा देकर उसके हाथ से अपने लंड को मुठिया रहा था,,,, और इस हरकत को करते हुए वह बोला।।

इससे बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है नीलू इससे तो खेला जाता है देखना जिस दिन तुम्हारी बुर में जाएगा तुम खुश हो जाओगी और बार-बार इस पर उछलोगी,,,,।

मुझे डर लग रहा है सूरज चले जाओ यहां से,,,,(नीलू को भी सूरज की हरकत बहुत अच्छी लगाई थी खासकर के सूरज के लंड को पकड़ने में उसे बहुत मजा आ रहा था,,,)

चला जाऊंगा लेकिन पहले वादा करो कि बगीचे में जरूर आओगी,,, ।

नहीं,,,,,

तब तो मै,,,नहीं जाऊंगा,,,(और इतना कहने के साथ ही अपना हाथ आगे बढ़कर वह नीलू की गांड पर रख दिया और उसे दबाना शुरू कर दिया यह देखकर नीलू की हालत और ज्यादा खराब हो गई और उसके बदन में उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से होने लगा और उसे इस बात का डर था कि अगर वहां सूरज को वो नहीं भगाई तो सूरज उसके साथ मनमानी करने पर उतारू हो जाएगा,,,, यहां पर ऐसा वह नहीं चाहती थी,,, इसलिए वह बोली,,,)

ठीक है मैं बगीचे में आऊंगी लेकिन आज नहीं कल आज मुझे कुछ काम है,,, लेकिन तुम्हें भी एक वादा करना होगा,,,,।

कैसा वादा,,,(सूरज इसी तरह से नीलू के हाथ पर अपना हाथ रख कर अपने लंड को मुठियाते हुए बोला,,,)

यही कि तुम मेरे साथ वहां कुछ भी नहीं करोगे,,,,।

चलो मंजूर है मैं कुछ नहीं करूंगा बस तुम चली आना कल मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा,,,,।

जरूर लेकिन अपना वादा याद रखना,,,,।

(यह बात मुझे अच्छी तरह से जानते थे कि इस वादे को सूरज बिल्कुल भी नहीं निभाएगा,,,, सूरज मुस्कुराता हुआ अपने लंड को फिर से पजामे में डाल दिया और फिर वहां से चला गया,,,, आज उसने अपनी मजदूरी लेने की भी जरूरत नहीं थी क्योंकि उसे अपनी मजदूरी आधी मिल चुकी थी और आधी मिलना बाकी थी जो कि उसकी लड़की बगीचे में आकर चुकाने वाली थी,,,,।)

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सूरज जिस काम के लिए मुखिया के घर गया था उसका काम बन गया था,,,, वैसे तो वहां पहुंचकर मुखिया की बीवी ने उसे खेतों में पानी ठीक से जा रहा है कि नहीं यह काम देखने के लिए दे दिया था और वही काम करने के लिए वह घर के पीछे पहुंच भी गया था लेकिन घर के पीछे उसे एक अलग ही नजारा देखने को मिला था जिसके लिए वह वहां पर आया था,,,, अनजाने में उसे मुखिया की लड़की नीलू ट्यूबवेल पर एकदम नग्न अवस्था में नहाते हुए मिल गई और मौके का फायदा उठाकर सूरज उसे बगीचे में आने के लिए मनवा भी लिया था और साथ ही उसकी नंगी गांड के दर्शन करके मत हो गया था और फिर उसकी नंगी गांड देखने के बाद वह जानता था कि वहां पर वह कुछ कर नहीं पाएगा इसलिए जाते-जाते उसके हाथों में अपना मोटा लंड थमा दिया था जिसे उसकी उत्तेजना प्रज्वलित हो जाए और वह बगीचे में आने के लिए काम विवश हो जाए,,,,।

नीलू जो कि खुद जवानी की आग में जल रही थी सूरज की उस दिन की हरकत से जवानी की उमंग उसके बदन में उछल रही थी वह खुद एक बार उस अनुभव से गुजरना चाहती थी इसलिए बगीचे में जाने में उसे कोई दिक्कत नहीं थी,,, बस डर उसे इस बात का था कि कहीं किसी को कुछ पता ना चल जाए,,,, वह जानती थी कि आज घर पर काम है इसलिए वह दूसरे दिन का वादा करके सूरज को वहां से भगा दी थी क्योंकि सूरज की हरकत उसके साथ पढ़ने रखी थी और सूरज की हरकत को देखते हुए उसे इस बात का भी डर था की कहानी उसके मां बाबूजी उसे इस हालत में सूरज के साथ ना देख ले,,,।

सूरज का तो दिन बन गया था,,,, एक तरफ सोनू की चाची की बदन की प्यास बढ़ती जा रही थी जिसका एहसास सूरज को अच्छी तरह से हो गया था और दूसरी तरफ मुखिया की लड़की जो दूसरे दिन उससे आपके बगीचे में मिलने वाली थी यह सब देखकर उसकी उत्तेजना चरम सीमा पर थी,,,, वह मर्दाना तौर पर पूरी तरह से मजबूत था उसके लंड को धार की जरूरत नहीं थी वह प्राकृतिक रूप से धारदार था,,, जो कि किसी की भी बुर में जाकर खलबली मचाने में सक्षम था,,, जिसका ताजा उदाहरण थी मुखिया की बीवी,,, अगर ऐसा ना होता तो सूरज के प्रति इतना आकर्षित और उसके साथ संबंध बनाने के लिए बार-बार तैयार न होती,,,,।

इसलिए सूरज को अपनी मर्दानगी पर पूरा विश्वास था,, वह जानता था कि मुखिया की बीवी की तरह ही वह सोनू की चाची और मुखिया की लड़की नीलू को भी अपनी मर्दानगी का कायल बना देगा,,,,।

दिन भर वह इधर-उधर घूमता रहा,,, शाम होते ही वह जब घर पहुंचा तो,,,,,, घर पर खाना बन रहा था,,, उसकी मां खाना बना रही थी और उसकी बहन सब्जी काट रही थी आप मां बहन दोनों सूरज की आंखों में बस चुकी थी दोनों को सूरज वासना की नजर से देखने लगा था बार-बार उसकी आंखों के सामने उसकी बहन की नंगी गांड नाचती हुई नजर आने लगती थी उसका बार-बार इस तरह से पेशाब करना उसे ख्वाबों में भी आता था वह अपने मन में यही सोचता था कि उसकी बहन की गांड कितनी खूबसूरत है,,, अगर उसकी बहन के खूबसूरत बदन से खेलने का मौका मिलेगा तो कितना मजा आएगा,,,।

अपनी मां को तो वह दो-तीन बार नग्न अवस्था में देख चुका था एक बार तो नदी में नहाते हुए और एक बार अपने पिताजी के साथ चुदवाते हुए,,, यह सब अपने मन में सोते हुए सूरज भी उन दोनों के पास ही बैठ गया और अपने मन में अपनी मां की तरफ देखकर यही सोच रहा था कि काफी दिन हो गए हैं पिताजी घर पर नहीं है और उसकी मां अकेले ही कमरे में सोती है,,,। बिस्तर पर अकेली बिना मर्द के ,उसका मन भी तो करता होगा चुदवाने को,,, उसे भी तो मर्द की जरूरत पड़ती होगी आखिरकार भाभी से एक औरत है मुखिया की बीवी की तरह जो कि पति होने के बावजूद भी दूसरों के साथ संबंध बनाती है ताकि संतुष्ट हो सके अपनी जवानी की प्यास बुझा सके तो क्या इस तरह की प्यास उसकी मां के बदन में नहीं उठती होगी,,,, जरूर उठती होगी,,, आखिरकार औरतें भी तो एक जैसी ही होती है जिसे मुखिया की बीवी जैसे सोनू की चाची वह भी तो अपने पति से खुश नहीं है पति के होने के बावजूद भी उसे शरीर सुख नहीं मिल रहा है और यही हाल तो उसकी मां का भी है पति का ठिकाना ही नहीं है कि कहां है तकरीबन महीना गुजर गया है ऐसे में वह रात कैसे गुजारती होगी,,,।

यही सब सोच रहा था कि तभी उसकी मां बोली,,,।

अरे सूरज एक बात तुझसे कहना था,,,।

हां हां बोलो मां,,,,।

इस साल में बालों के लिए तेल नहीं बना पाई हुं ,, क्योंकि तूने इस बार आंवला लाया ही नहीं,,,,।

मुझे वहां जाने का मौका ही नहीं मिला,,,।

अरे वही तो बता रही हूं कि तुम दोनों साथ में वहां चले जाओ और वाला तोड़कर लो ताकि मैं साल भर का तेल बना सकूं सरसों का तेल भी अपने पास है पर्याप्त मात्रा में साल भर के लिए तेल बन जाएगा,,,,।

ठीक है मैं कल ही चला जाता हूं रानी को लेकर,,,(उसका इतना कहना था कि तभी उसे ख्याल आया कि कल तो उसे बगीचे में जाना है इसलिए वह एकदम से हड़बढ़ाते हुए बोला,,,) कल नहीं परसों चलेंगे कल तो मुझे काम है,,,.

कल क्या काम है तुझे,,,,?

अरे मां कल मुखिया के घर जाना है हो सकता है कुछ काम मिल जाए तो कुछ पैसे मिल जाएंगे,,,।

चल तब तो ठीक है परसों चली जाना या समय मिले तब चले जाना लेकिन जल्दी जाना ऐसा ना हो कि तेरे जाने से पहले ही अांवला के बगीचे से आंवाला खत्म हो जाए,,,,।

तुम चिंता मत करो मां मुझे मालूम है कहां-कहां आंवला का बगीचा है,,,, अगर उधर खत में भी हो गया तो दूसरी जगह से तोड़ लाऊंगा,,,।

तेरे पर मुझे पूरा भरोसा है ना जाने क्यों ऐसा लगने लगा कि तुम्हें बड़ा हो गया है जो बात मुझे तेरे पिताजी से कहानी चाहिए वह तुझसे कहनी पड़ती है,,,।

तो क्या हो गया मन बड़ा तो मैं हुई क्या पूरा मर्द हो गया,,,हुं,,(सूरज जानबूझकर मर्द शब्द का प्रयोग कर रहा था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) पर वैसे भी तुम्हारी कहीं बात में पूरा करता हूं ना टालता तो नहीं फिर दिक्कत क्या है,,,।

हां यह बात तो है,,,(तवे पर रोटी रखते हुए) तू मेरी एक भी बात काटता नहीं है सारी बातों को पूरा करता है,,, इतना तो तेरे पिताजी भी पूरा नहीं कर पाते थे अब उसे दिन तो देख ले मुझे बाजार जाने के लिए पैसे की जरूरत थी और तू मेरे हाथों में पैसा थमा दिया इतनी जल्दी तो तेरे बाबूजी भी मेरे हाथ में पैसा नहीं रखते,,,,।

तुम चिंता मत करो ना मैं तुम्हारी सारी ख्वाहिश पूरी करूंगा,,,,(इतना कह कर वह अपने मन में ही बोला एक दिन तुम्हारी चुदाई भी करूंगा तुम्हें चुदाई का सुख भी दूंगा मैं जानता हूं तुम चुदवाने के लिए तड़प रही हो,,,,)

तू बहुत अच्छा है सुरज इसलिए तो देख महीना गुजर गए तेरे बाबूजी घर नहीं आए लेकिन तेरे होते हुए तेरे बाबूजी की कमी नहीं खलती ऐसा लगता ही नहीं है कि घर पर तेरे बाबुजी नहीं है ,,,।

लेकिन मां हमें उनका पता लगाना चाहिए कि आखिरकार है कहां गांव में तो नहीं है इतना पक्का है गांव में होते तो कोई ना कोई जरूर बताता लेकिन महीना गुजर गया है बाबूजी का कोई पता नहीं है,,,,।

वैसे तो रानी तु सही कह रही है,,, लेकिन बाबूजी की हरकत तो हम सभी जानते हैं कभी-कभी तो पांच छः महीने के लिए गायब हो जाते हैं,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज अपने मन में यही सोच रहा था कि उसके बाबूजी घर पर ना आवे तो ही सही है ताकि उसे मौका मिल सके अपनी मां की जवानी का प्यास बुझाने का,,,, अपने भाई की बात सुनकर रानी बोली,,,)

बात तो तुम सही कह रहे हो भैया लेकिन फिर भी हमें पता तो होना चाहिए कि आखिरकार वह है कहां,,,,।

अगर तुझे इतनी फिक्र है तो जाकर ढूंढ,,,, ऐसे बाप का होना ना होना एक बराबर है,,,,।(सूरज ऐसी बात गुस्से में कह रहा था और ऐसा नहीं था कि उसके पिताजी के ना आने का गुस्सा उसके महीने हो उसे इस बात का गुस्सा आ गया था कि उसकी बहन उसके पिताजी को ढूंढने के लिए बोल रही थी जबकि सूरज ऐसा नहीं चाहता था क्योंकि सूरज जानता था कि उसके पिताजी के गैर हाजिरी में ही उसकी मां के साथ उसका कुछ काम बन सकेगा,,,)

ऐसा क्यों कह रहे हो भैया,,,, आखिरकार वह हमारे पिताजी हैं,,,,।

तो क्या करूं,,,,।

(भाई बहन के बीच बहस देखकर उसकी मां बीच बचाव करती हुई बोली)

अरे यार तुम दोनों क्यों लड़ रहे हो वैसे भी सूरज सच ही कह रहा है तेरे बाबूजी कभी भी जिम्मेदार पिता नहीं बन पाए अगर जिम्मेदारी होती है अपनी जिम्मेदारी समझते तो इस समय हमारे साथ होते ना की इधर-उधर घूमते रहते हैं वैसे भी जब भी वह घर पर होते भी हैं तो कहां रात को घर सकते हैं ना जाने कहां घूमते रहते हैं,,,,।

(सूरज को इस बात की खुशी थी कि उसकी मां उसका पक्ष ले रही थी,,,, और सुनैना को इस बात की खुशी थी कि उसका बेटा आप समझदार हो गया था वह जानता था कि एक जिम्मेदार बाप का कर्तव्य क्या होता है जो कि उसके पिताजी इसमें बिल्कुल भी खरे नहीं उतरे थे,,,।)

अब जाने दो यह सब बात ,,, उनके बारे में बहस करके कोई फायदा नहीं है,,,, खाना बन गया है अब जल्दी से तुम दोनों हाथ मुंह धो लो,,,।

ठीक है मां,,,,, चल रानी मेरे हाथ धुला,,,,।

ठीक है भैया,,,,,(इतना कहकर रानी अपनी जगह से खड़ी हो गई और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) बाहर चलना होगा भैया इधर पानी नहीं है,,,.

ठीक है चल,,,।

अरे आते समय एक बाल्टी साफ पानी लेते आना पीने के लिए,,,

ठीक है मां,,, (सूरज इतना बोला और बाहर की तरफ जाने लगा उसके साथ-साथ रानी भी चलने लगी और चलते हुए सूरज से बोली,,,)

क्या भैया तुम तो खामखा गुस्सा करने लगते हो,,,,।

(दोनों अंधेरे से गुजर रहे थे और सूरज के मन में खुरा पात चल रही थी,,, इसलिए वह अंधेरे में ही अपनी बहन की नरम नरम गांड पर चपत लगाते हुए बोला,,,)

तुझे बहुत पड़ी है पिताजी की उन्हें कुछ पड़ी नहीं है और तुझे ही उनकी ज्यादा फिक्र हो रही है,,,,,(ऐसा कहते हुए सूरज दोबारा अपनी बहन की गांड पर चपत लगा दिया उसे अपनीबहन की नरम नरम गोल गोल गांड पर चपत लगाने में आनंद आने लगा लेकिन अपने भाई की हरकत पर रानी पूरी तरह से झेंप गई थी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका भाई उसकी गांड पर चपत लगा देगा,,,, इसलिए उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी,,, क्योंकि आखिरकार उसका भाई तो था एक मर्द ही और मर्द का हाथ अपने नितंबों पर महसूस करते ही उसके बदन में अजीब सी हलचल मचने लगी थी वह कुछ बोल नहीं पाई,,, और सूरज की तो हालत खराब हो गई थी चपत लगाने में ही उसे इस बात का एहसास होगी उसकी बहन की गांड कितनी गदराई है और वह अपने मन में सोचने लगा कि वाकई में उसकी बहन की गांड पर दोनों हाथों से पकड़ कर दबाने में बहुत मजा आएगा,,,।

सूरज अपनी हरकत को अंजाम देते हुए नल के पास पहुंच गया था जहां उसकी बहन हेड पंप चलने लगी थी और उसमें से पानी नीचे गिरने लगा था और उसका भाई उसे पानी से अपना हाथ मुंह धोने लगा था,,,, सूरज अपना हाथ मुंह धो कर जहां उसकी बहन खड़ी थी वहां पहुंच गया और उसे हाथ के सारे से ही हाथ में धोने के लिए बोलने लगा और वह नल चलाने लगा उसकी बहन भी अपने बदन में हो रही हलचल के साथ अपना हाथ पैर धोकर सांप की और फिर एक खाली बाल्टी को नल के नीचे रखकर उसे भरने के लिए छोड़ दी,,,, नल चलाते हुए उसका भाई बोला,,,)

अपना ऐसा उसूल होना चाहिए,,, जैसे के साथ ऐसा जैसे पिताजी हम लोगों की खबर नहीं ले रहे हैं वैसे हमें भी उनकी खबर नहीं लेना चाहिए,,,,।

लेकिन भैया वह अपने पिताजी है,,,,।

हम भी तो उनके बच्चे हैं कि नहीं उन्हें सबसे पहले हमारी खबर लेनी चाहिए अपनी बीवी बच्चों की उन्हें सोचना चाहिए कि उनकी बीवी बच्चे किस तरह से दिन गुजार रहे हैं लेकिन उन्हें तो कुछ परवाह ही नहीं है तो हम क्यों परवाह करें,,,,। अब चल बाल्टी उठा ले बाल्टी भर गई है,,,,,(सूरज खुद बाल्टी उठाना चाहता था लेकिन उसके दिमाग में कुछ और कर रहा था उसकी बात सुनते ही उसकी बहन रानी बाल्टी को उठा ली और चलने लगी और मौके का फायदा उठाते हुए सूरज पूरी तरह से अपनी बहन की गांड के एक फांक पर अपनी हथेली रखकर उसे दबाते हुए बोला,,,)

अब तू बड़ी हो गई है रानी तुझे भी सोचना चाहिए समझना चाहिए जो जैसा व्यवहार करता है उसके साथ में सही व्यवहार करना चाहिए,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज इस बीच दो बार उसकी गांड की फाग को अपनी हथेली में लेकर हल्के हल्के से दबा दिया था और यह एहसास रानी के बदन में आग लग रहा था वह एकदम आश्चर्यचकित थी,,, वह एकदम हैरान थी क्योंकि उसके भाई ने आज हरकत ही कुछ ऐसा कर दिया था पहली बार उसकी गांड पर किसी ने हाथ रखकर उसकी गांड को दबाया था,,,, लड़की की गांड पर और वह भी जवान लड़की की गांड पर मर्दों का इस तरह से हाथ रखकर दबाना इसके मतलब को वह समझने लगी थी,,, वह हैरान थी इस बात पर की उसका भाई आखिरकार उसकी गांड पर हाथ क्यों रखा ऐसी हरकत तो पहले कभी नहीं करता था लेकिन उसकी हरकत की वजह से उसके बाद में अजीब सी हलचल हो रही थी वह मदहोश हो गई थी उसे एक तरफ अजीब भी लगा था लेकिन दूसरी तरफ उसके बाद में मदहोशी छाने लगी थी वह अपने भाई से कुछ बोल नहीं पाई,,,।

और दूसरी तरफ अपनी बहन की गांड पर हाथ रख कर दबाने की वजह से सूरज का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,, वह इस बात से खुश था की उसकी हरकत का विरोध उसकी बहन बिल्कुल भी नहीं की थी,,,, और यह देखकर सूरज को लगने लगा कि उसकी हरकत की बहन को अच्छी लग रही है,,,, इसलिए रसोई के पास पहुंचते पहुंचते एक बार फिर से अपनी बहन की गांड पर रखकर उसे सहला दिया,,,, सूरज की हरकत खुद सूरज के तन बदन में आग लग रही थी वही उसकी बहन की बुर से पानी टपकने लगा था,,,, सूरज कुछ और करता था इससे पहले दोनों रसोई के पास पहुंच चुके थे और एक तरफ बाल्टी रखकर रानी बिना अपने भाई से नजर मिलाई लोटे में पानी भरने लगी और फिर तीनों साथ में बैठकर खाना खाने लगे,,,,।
 
खाना खाने के बाद सूरज इसी सोच में था कि उसकी बहन उसकी हरकत का बिल्कुल भी विरोध नहीं की थी ना ही गुस्से से उसकी तरफ देखी थी कहीं ऐसा तो नहीं उसकी बहन को उसकी हरकत अच्छी लग रही हो आखिरकार वापसी तो पूरी तरह से जवान हो चुकी थी एकदम नीलू की तरह,,,, जिस तरह से नीलू को सूरज की हरकत मदहोश कर रही थी उसी तरह से उसकी बहन को भी उसकी हरकत में मदहोश कर रही होगी इतना उसे यकीन हो रहा था वरना वह जरूर उस की तरफ गुस्से से देखती और जोर से बोलती,,, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था इसलिए अंदर ही अंदर सूरज प्रसन्न हो रहा था,,,,।

घर की सफाई करने के बाद अपने-अपने कमरे में जाने से पहले सुनैना रानी से बोली,,,।

रानी चल पीछे चलकर आते हैं,,,,।

(यह सुनकर पास में ही खटिया पर बैठा सूरज अपने मन में सोचने लगा कि ईतनी रात को उसकी मां रानी को पीछे क्यों लेकर जा रही है,,, तभी उसके दिमाग की घंटी बजी और उसे एहसास होने लगा कि उसकी मां रानी को पीछे पेशाब करने के लिए ले जा रही है दोनों सोने से पहले जरूर पीछे जाया करती थी पहले तो सूरज इन सब बातों पर ध्यान नहीं देता था लेकिन जब से अपनी बहन को पेशाब करते हुए देखा था तब से उसका ध्यान ही नहीं सब बातों पर घूमता रहता था और आज अपनी मां की बात सुनकर उसके कान खड़े होने लगे थे साथ में उसके दोनों टांगों के बीच का हथियार भी अपनी मां की बात सुनते ही रानी भी उसके साथ पीछे की तरफ चल दी,,,।

उन दोनों के जाते ही सूरज के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह अपने मन में सोचने लगा कि दोनों एक साथ अपनी साड़ी ऊपर करके और अपनी सलवार नीचे करके जब पेशाब करने बैठेंगी तो क्या नजारा होगा,,,, लेकिन यह नजारा देखा कैसे जाए,,,,।

सूरज कितने बदले में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अपनी मां और बहन दोनों को पेशाब करते हुए देखना चाहता था दोनों की नंगी गांड को देखना चाहता था इसलिए उसका मन मचल रहा था कि कैसे देखा जाए तभी आंगन में ऊपर की तरफ दीवार से लगी हुई सीढ़ी पर उसकी नजर कहीं और उसकी आंख में चमक आने लगी वह तुरंत सीढ़ी पर चढ़ने लगा क्योंकि वह जानता था की सीढ़ी पर चढ़कर पीछे का नजारा बढ़िया आराम से देखा जा सकता है क्योंकि इस जगह से पीछे का ही नजारा दिखाई देता था,,,।

सूरज जल्दी-जल्दी सीढ़ी पर चढ़ने लगा क्योंकि वह जानता था कि जल्दी दोनों पीछे पहुंच जाएंगे और सूरज जल्दी से सीडीओ से होते हुए छत पर पहुंच गया छत खपड़े का बना हुआ था जो मिट्टी से बना होता है उसे पर धीरे-धीरे चढ़कर वह पीछे की तरफ देखने लगा उसकी किस्मत अच्छी थी की चांदनी रात थीऔर उसे सबकुछ साफ दिखाई दे रहा था,,,, वह इधर देखने लगा पीछे छोटी मोटी झाड़ियां थी और थोड़ी और आगे खेत ही खेत थे लेकिन अभी तक उसकी मां और बहन दोनों नजर नहीं आ रही थी वह देखकर उसके मन में शंका होने लगी की कही दोनों वहीं कहीं पास नहीं तो नहीं बैठ गए,,, और अगर ऐसा हुआ तो जल्दी वह दोनों घर में आ जाएंगे और उसे छत पर चढ़ा देकर क्या समझेंगी और यही सोच कर वह सीधी से नीचे उतरने की फिराक में था कि तभी दोनों मां बेटी साथ में दिखाई दी और उन्हें देखकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे,,,,।

सामने के नजारे को सूरज बड़ी गौर से देख रहा था वह जानता था कि जहां पर वह चढ़कर देख रहा है वहां पर उन दोनों की नजर कभी नहीं पहुंच पाएगी ना दोनों को कभी शक हो पाएगा दोनों धीरे-धीरे झाड़ियां के पास पहुंच गई थी जहां पर वह दोनों गई थी वहां का नजारा सूरज को एकदम साफ दिखाई दे रहा था,,,,, सूरज जानता था कि कुछ ही देर में उसकी मां अपनी साड़ी ऊपर उठा देगी और उसकी बहन अपनी सलवार नीचे गिरा देगी दोनों की गांड एकदम नंगी नजर आने लगेगी और इसी पल के इंतजार में उसका लंड अपनी औकात में आकर खड़ा हो गया था,,,

सूरज का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, दोनों आपस में कुछ बातें कर रही थी लेकिन उनकी आवाज सूरज के कानों तक नहीं पहुंच रही थी और देखते ही देखते की बहन का हाथ उसकी सलवार की डोरी पर पहुंच गया वह धीरे-धीरे उसे खोल रही थी और उसकी मां अपनी साड़ी को पकड़ कर धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठा रही थी और देखते ही देखते उसकी मां अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी और उसकी नंगी गांड जो की काफी बड़ी-बड़ी थी वह एकदम से उजागर हो गई,,, और यह नजारा देखते हैं सूरज की उत्तेजना एकदम प्रज्वलित हो गई और वह अपने पजामे में से अपने लंड को बाहर निकाल लिया,,,, और उसे अपनी मुठ्ठी में भरकर हीलाना शुरू कर दिया,,,, सूरज अपनी मां की नंगी गांड देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था और उसकी मां भी अपनी गांड पर दोनों हाथ रखकर उसे हल्के हल्के सहला रही थी,,, और तब तक रानी भी अपनी सलवार की डोरी खोल चुकी थी उसकी सलवार उसकी कमर से ढीली पड़ गई थी,,,।

देखते देखते रानी भी अपनी सलवार को नीचे घुटने तक खींच दिया और उसकी नंगी गांड भी एकदम से उजागर हो गई मां बहन दोनों की नंगी गांड देखकर सूरज की उत्तेजना परम शिखर पर पहुंच गई उसके लंड का कडकपन कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा वह अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया,,,, और देखते देखते उसकी मां और बहन दोनों पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई दोनों की ओर से पेशाब की धार निकलने लगी लेकिन उन दोनों की ओर से निकलने वाली सिटी की आवाज बड़ी मुश्किल से सूरज के कानों तक पहुंच रही थी लेकिन इतना भी सूरज के लिए काफी था उन दोनों की बुर से आ रही सीटी की आवाज सुनकर सूरज की उत्तेजना अद्भुत तरीके से आगे बढ़ती चली जा रही थी और जोर-जोर से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया था मां बहन दोनों की नंगी गांड उसकी उत्तेजना और ऊर्जा दोनों में बढ़ोतरी कर रही थी,,,,।

दोनों की नंगी गांड देखकर सूरज अपने मन में सोचने लगा कि अगर मां बहन दोनों को चोदना हो तो एक ही बिस्तर पर कितना मजा आ जाएगा,,, यह एहसास उसकी उत्तेजना को बढ़ा रहा था और जब तक दोनों पेशाब करके उठकर खड़ी होती और अपने कपड़े व्यवस्थित करती तब तक सूरज झड़ चुका था उसका पानी निकल चुका था उसने अपना काम पूरा कर लिया था और तब तक उसकी मां और बहन दोनों अपनी नंगी गांड को कपड़ों में ढंक ली थी और जल्दी से सूरज नीचे उतर आया था,,,। और थोड़ी ही देर में तीनों अपने-अपने कमरे में जाकर सो गए थे,,,, लेकिन सूरज की आंखों में नींद नहीं थी क्योंकि उसके दिमाग में कुछ और चलरहा था,,,।

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सूरज ने जो नजारा देखा था वह बेहद अद्भुत और अकल्पनीय था जिसके बारे में उसने शायद कल्पना भी नहीं किया था कभी भी उसने इस बारे में सोचा ही नहीं था कि वह एक साथ अपनी मां और अपनी बहन दोनों को पेशाब करते हुए देखेगा,,, घर की छत के ऊपर से यह नजारा देखने में वह बेहद उत्तेजना का अनुभव कर रहा था जिसके चलते अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड और अपनी बहन की सीमित आकार में गोल-गोल गांड को देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था और इसीलिए उसे इस समय आंखों से अपनी मां और अपनी बहन की नंगी जवानी का रसपान करते हुए अपने लंड को हिला कर अपनी जवानी की गर्मी को शांत करना पड़ा था,,,।

मूठ मरने का यह एक अलग ही अनुभव था,,, वाकई में बन जा रहा है बेहद खास होता है जब एक जवान प्यासे भाई की आंखों के सामने उसकी मां और उसकी और यही हाल सूरजका और बहन अपनी साड़ी उठाकर अपनी सलवार नीचे गिरकर पेशाब करने बैठ गई हो और उसकी नंगी नंगी गांड को देखकर वाकई में ऐसे भाई को तो मुंह मांगी मुराद मिल जाती है ,, और यही हाल सूरज का भी था,,, ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि सूरज पहली बार इस तरह के नजारे को देख रहा हो,,, वह अपनी मां और बहन दोनों को पेशाब करते हुए देख चुका था लेकिन दोनों को एक साथ पेशाब करते हुए उसने कभी नहीं देखा था इसलिए तो उसकी उत्तेजना परम शिखर पर थी,,,,

सुबह जब सूरज उठा तो सबकुछ सामान्य सा था,,, सुनैना और रानी दोनों घर की सफाई कर रही थी पर दोनों को देखकर सूरज के मन में रात वाला दृश्य घूमने लगा दोनों इस समय सामान्य तौर पर वस्त्र पहनी हुई थी लेकिन पल भर के लिए सूरज अपनी मां और बहन दोनों को बिना कपड़ों की कल्पना करने लगा और सोचने लगा कि यह दोनों बिल्कुल नंगी होकर घर की सफाई करेंगे तो कैसी दिखाई देंगे,,,, दोनों के चेहरे का हाव-भाव कैसा होगा दोनों की चूचियां कैसी लचक रही होगी दोनों की गांड चिलचिलाती धूप में कैसी दिखाई देगी,,, यही सब सोच कर उसका लंड खड़ा हो गया और वह घर से निकल गया,,,, ।

आज वह बहुत खुश था क्योंकि वह जानता था कि बगीचे में आज उसे नीलू मिलने आने वाली है और आज उसके साथ जी भर कर रंग रलिया मनाएगा सूरज को इस बात का पक्का यकीन था कि नीतू उसके साथ शारीरिक संबंध जरूर बनाया और इसके लिए वह भी उत्सुक है अगर ऐसा ना होता तो ट्यूबवेल के पास वह उसे अपना नंगा बदन ना दिखाती,, उसकी बात मानकर अपनी गांड इंडियन के दर्शन ना करती और ना ही उसके लंड को हाथ में पकड़ जा रहा था अभी भी सही समय पर नीलु के आने में बहुत समय था,,, इसलिए बगीचे में पहुंचकर इधर-उधर घूमता रहा,,,,।

जो हाल सूरज का था वही हाल नीलू का भी था नीलू की सूरत से मिलने के लिए तड़प रही थी क्योंकि सूरज ने दो मुलाकात में जो उसके बदले में उत्तेजना भरी आग लगाया था उसे बुझाना भी जरूरी था और वह जानती थी कि इस आग को सूरज ही बुझा सकता है,,,। बार-बार उसकी आंखों के सामने सूरज का लहराता हुआ लंड घूमने लगता था उसमें से निकल रही पैसा आपकी धार को देखकर तो खुद उसकी बर पानी छोड़ रही थी पहली बार किसी मर्द को वह पेशाब करते हुए देखेगी पहली बार में किसी मर्द के इतने मोटे तगड़े लंड को देख रही थी इसलिए तो उसकी हालत भी खराब थी वह भी जल्द से जल्द सूरज से मिलना चाहती थी,,, जिस तरह से उसने अपनी मुट्ठी में सूरज के लंड को दबाई थी,,, ठंडे पानी में भीगी होने के बावजूद भी उसकी गर्मी उसे पूरे बदन में महसूस हो रही थी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच स्थिति तो बेहद नाजुक होती जा रही थी अगर उसे समय ही सूरज जल्दबाजी थोड़ी रंगबाजी दिखाता तो नीलू वही उससे चुद जाती,,,।

इधर-उधर घूमते हुए समय धीरे-धीरे गुजरने लगा और देखते ही देखते समय आ ही गया जिस समय पर सूरज ने नीलू को वहां पर बुलाया था,,,, सूरज बड़ा व्याकुल होकर इधर-उधर देख रहा था यह आम का बगीचा गांव से थोड़ा दूर था इसलिए यहां पर कोई आता जाता नहीं था,,,, चारों तरफ नजर घुमा कर देखने के बावजूद भी कोई कहीं दिखाई नहीं दे रहा है ना इसलिए सूरज को लगा कि शायद आज भी नीलू उसे बेवकूफ बना दी आई नहीं,,,, इसलिए वह निराश होकर वहीं एक बड़े से पेड़ के नीचे बैठ गया,,, लेकिन तभी उसके खानों में पायल के घुंघरू की आवाज सुनाई देने लगी जो उसके ठीक बाएं तरफ से आ रही थी सूरज जल्दी से नजर उठा कर उसे तरफ देखा तो घनी झाड़ियां के बीच से होती है नीलू आ रही थी नीलू को देखते ही सूरज के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,, क्योंकि वह निराश हो चुका था उसे लगने लगा था कि नीलू अपने वादे पर कभी खरा नहीं उतर सकती ,,।

देखते ही देखते उसके करीब आ गई उसे देखकर एकदम से उत्साहित होकर सूरज अपनी जगह से खड़ा हो गया और बोला,,,।

मुझे तो लगा था कि आज भी नहीं आओगी,,.

वैसे तो तुम सही सोच रहे थे लेकिन फिर मैंने सोचा की बार-बार किसी को धोखा देना अच्छी बात नहीं है,,,,।

चलो यह तो सही हुआ कि इतना तो तुम सोचती ही हो किसी के बारे में,,,।

किसी के बारे में नहीं सिर्फ तुम्हारे बारे में तुम्हारी जगह कोई और होता तो शायद में नहीं आती,,,।

अच्छा तो ऐसा क्या खास है मुझ में,,,,।

यह तो वक्त ही बताएगा,,,, अच्छा चलो छोड़ो आम खिलाने का वादा किए थे चलो जल्दी से आम तोड़ कर दो,,,

(नीलु की बात सुनकर सूरज उसे आश्चर्य से देखने लगा और बोला,,)

क्या सच में तुम यहां आम खाने के लिए आई हो,,,।

(सूरज के खाने के मतलब को नीलू अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए मुस्कुराते हुए बोली..)

हां आई तो हूं यहां पर आम खाने ही क्या कुछ और खिलाने का इरादा है क्या,,,!

खिलाने का नहीं चूसाने का इरादा है,,,।

अगर आम पका हुआ होगा तो चुस भी लेंगे,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो दबा दबा कर चूसने लायक बना दूंगा,,,,,।

(वैसे नीलू अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज बगीचे में उसे किस लिए बुलाया है लेकिन उसके खाने के मतलब को वह समझ नहीं पा रही थी जो उसने चूसने वाली बात उसे ठीक से समझ नहीं आ रही थी उसे ऐसा ही लग रहा था कि सूरज आम के बारे में ही बात कर रहा है लेकिन सूरज चूसने दबाने के शब्द का प्रयोग करके लंड और चूची के बारे में बात कर रहा था,,

सूरज अच्छी तरह से जानता था कि धीरे-धीरे ही इस खेल में मजा आएगा जल्दबाजी दिखाने ठीक नहीं था क्योंकि समय भी पर्याप्त था इसलिए वह नीलू से बोला,,,)

चलो कोई बात नहीं तुम्हें अच्छे-अच्छे और पके आम तोड़ कर देता हूं,,,(इतना कहकर सूरज आगे आगे चलने लगा और नीलू पीछे-पीछे,,, वह देखते ही देखते सूरज आम के बड़े पेड़ के नीचे आ गया और ऊपर की तरफ नजर करके नीलू को दिखाने लगा,,,,)

देखो नीलू एक से बढ़कर एक आम है अभी मैं तोड़ कर देता हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही सूरज पेड़ पर चढ़ने लगा नीलू उसे पेड़ पर चढ़ते हुए देख रही थी सूरज कोई तरह से आम के पेड़ पर चढ़ता हुआ देखकर नीलू को थोड़ा अजीब लगने लगा क्योंकि वह जानती थी कि सूरज यहां पर किस लिए बुलाया है लेकिन यहां तो वह किसी और काम में लग गया था उसे तो लगा था कि उसे देखते ही सूरज उसे कसके अपनी बाहों में भर लगा उसकी चुचियों का दबाएगा उसकी गांड को सहलाएगा और फिर अपनी मनमानी करके अपना भी मजा लेगा और उसे भी मजा देगा,,,, लेकिन यहां तो कुछ और ही चल रहा था फिर भी नीलु कुछ बोली नहीं और सूरज को देखने लगी जो की धीरे-धीरे करके पेड़ पर चढ़ चुका था,,,,। सूरज अंदर ही अंदर बहुत उत्साहित है क्योंकि वह जानता था कि नीलू का यहां बगीचे में आना उसकी मुराद को पूरी करना था,,,।

सूरज नापतोलकर आम को तोड़ रहा था एकदम गोल-गोल जिसका आकार नीलू की चूचियों से मिलती-जुलती हो,,,, जैसे तैसे करके सूरज चार-पांच आम तोड़ लिया और उसे धीरे-धीरे करके अपने पजामे में इधर-उधर डाल दिया क्योंकि उसके मन में कुछ और चल रहा था और नीलू की उपस्थिति में वह उत्तेजित हो चुका था जिसके कारण उसका लंड अपने आकार में आ चुका था और पजामे में अच्छा खासा तंबू बना चुका था,,, सूरज जानता था कि ईतना आम काफी है और वैसे भी सूरज नीलू को बगीचे में आम खिलाने के लिए नहीं बुलाया था बल्कि अपना केला चुसवाने के लिए बुलाया था,,, जल्दी-जल्दी सूरज पेड़ से नीचे उतर गया,,, और पेड़ से नीचे उतरते ही बोला,,,।

तुम्हारे लिए बहुत ही खास आम तोड़ कर लाया हूं,,,।

(और इतना कहने के साथ ही नीलू की आंखों के सामने ही अपने पहचाने को आगे की तरफ खींचकर उसमें से आम निकालने लगा वह जानता था कि नीलू की नजर उसके पजामे में खड़े उसके लंड पर जरूर पड़ेगी और ऐसा ही हो रहा था सूरज का लंड अपनी औकात में आ चुका था और नीलू भी उसके पजामी के अंदर देख रही थी जो कि उसके लंड के आकार को देखकर उसकी मोटाई को देखकर उसकी टांगों के बीच हलचल मचने लगी,,, वही लंड था जिसे दो दिन पहले उसने ट्युबवेल पर नहाते हुए पकड़ी थी,,, सूरज धीरे-धीरे करके उसमें से सभी आम निकाल कर नीलू के हाथों में थमा दिया और वह बड़ी मुश्किल से आम को संभाल पा रही थी क्योंकि उसकी नजर को सूरज के पजामे के अंदर थी सूरज की युक्ति काम कर गई थी,,,, और फिर धीरे से उसने पहचाने को व्यवस्थित कर लिया और फिर वही आम के पेड़ के नीचे बैठ गया और नीलु भी उसके पास मे हीं बैठ गई,,, वह भी अच्छा सा आम लेकर ऊपर से थोड़ा सा तोड़कर उसे दोनों हथेलियां के बीच लेकर गोल-गोल घुमाने लगी,,,, और उसे तुरंत मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी आम वास्तव में काफी मीठा था उसका स्वाद का अहसास होते ही वह खुश होते हुए बोली,,,)

सच में सूरज आम तो बहुत रसीला है,,,।

क्यों ना हो आखिरकार मैंने जो पसंद किया है,,,(दोनों हथेली में आम लेकर नीलू की तरफ करके दिखाते हुए) देख रही हो इसके आकार को एकदम तुम्हारी चूचियों की तरह है,,,(सूरज एकदम बेझिझक बोला पर उसकी बात सुनकर नीलू एकदम से शर्मा गई थी उसके भी तन बदन में आग लग रही थी इसलिए वह मुस्कुराते हुए और हल्के से शरमाते हुए बोली,,,)

तुमको कैसे मालूम तुमने तो देखे नहीं हो,,,,(नीलू ऐसा जानबूझकर बोल रही थी जबकि उसे मालूम था कि ट्यूबवेल पर नहाते हुए सूरज से पूरी तरह से नंगी देख चुका था और बगीचे में उसे हाथ में लेकर दबा भी चुका था इसलिए उसे उसकी चूची का आकार अच्छी तरह से मालूम था,,,)

भूल गई इसी बगीचे में तुम्हारी चूची को दबाया था और अभी दो दिन पहले ही तुम्हें नंगी नहाते हुए देखा था तुम्हारे नंगे बदन का आकार मेरे आंखों में बस गया है,,।

(सूरज की बातें सुनकर नीलू के चेहरे पर शर्म की लालिमा छाने लगी,,,, और वह शर्माते हुए बोली,,)

तुम्हें देखकर लगता नहीं है कि तुम इतने शरारती होगे ,,

तुमको देख कर शरारत सुझती है,,,, वैसे भी मैं यहां पर आम खाने के लिए तुम्हें नहीं बुलाया था बल्कि तुम्हारी चुची को दबा दबा कर पीने के लिए बुलाया था,,,,,,।

ना बाबा मुझे तो बहुत डर लगता है,,,।

डर के आगे ही तो मजा ही मजा है एक बार यह डर खत्म हुआ उसके बाद स्वर्ग का सुख मिलेगा,,,,।

नहीं मुझे नहीं लेना है स्वर्ग का सुख,,,,(नीलू आम खाते हुए बोली वैसे नीलू ऊपरी मन से ऐसा बोल रही थी अंदर से वह भी इस तरह का सुख पाना चाहती थी उसकी बात सुनकर सूरत से रहा नहीं गया और वह आगे बढ़कर अपने हाथ से कुर्ती के ऊपर से ही उसकी चूची को दबा दिया उसकी हरकत से नीलु एकदम से सिहर उठी उसकी आंखें अपने आप बंद हो गई और उसके मुंह से हल्की सी सिसकारी फुट पड़ी,,, उसकी हालत देखकर सूरज अंदर ही अंदर खुश होने लगा,,,, और वह मौका देखकर अपनी उंगली को कुर्ती में डालकर उसे नीचे की तरफ खींचने लगा और दूसरे हाथ से उसकी चूची को पकड़ कर बाहर निकलने वाला यह हरकत नीलु के लिए मदहोश कर देने वाली थी उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी,,,, और देखते ही देखते सूरज कुर्ती में से उसकी एक चूची को बाहर निकाल लिया जो कि एकदम टमाटर की तरह गोल-गोल और लाल हो गई थी,,,, शर्म और मदहोशी में नीलु की आंखें बंद थी,,, सूरज चाहता था कि वह अपनी आंखों को खोलें और इतना मादकता भरे नजारे को अपनी आंखों से देखें,,, इसलिए वह हल्के से नीलू की चूची को दबाते हुए बोला,,,,)

देखो तो सही नीलु दशहरी आम से भी ज्यादा खूबसूरत तुम्हारी चुची है,,,(इतना सुनकर नीलू अपनी आंखों को खोल दी और अपनी चूची की तरफ देखने लगी जो कि सूरज के हाथों में थी और उसकी आंख खोलते ही सूरज धीरे से अपने प्यास होठों को उसकी चूची की तरफ ले गया और उसकी आंखों में देखते हुए उसकी भूरे रंग की किशमिश को अपने होठों से दबाकर चूसने लगा और यह देखकर नीलू की बुर पानी छोड़ने लगी,,,। सूरज बड़ी ही मदहोशी के साथ नीलु की किसमिस के साथ-साथ उसकी चूची को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था,,, नीलू की चूची दशहरी आम से भी ज्यादा रसीली थी,,, नीलू उत्तेजना के मारे गहरी गहरी सांस लेने लगी थी वह सूरज को रोकने में असमर्थ साबित हो रही थी क्योंकि सूरज की हरकत से उसे भी आनंद मिल रहा था और वह आम चूसना बंद कर दी थी और अपनी दशहरी आम की चुदाई को देख रही थी,,,,।

कुर्ती से एक चूची को बाहर निकालने के बाद और नीलू की मदहोशी को देखने के बाद सूरज की हिम्मत बढ़ने लगी तो वह एक सूची को मुंह में लेकर दूसरे हाथ से दूसरी चूची को भी उसकी कुर्ती से बाहर निकलने लगा जिसमें खुद नीलू उसकी मदद करने लगी और देखते-देखते उसकी दोनों चुची उसकी कुर्ती से बाहर आ गई,,,, और वह दोनों च को अपने हाथ में पकड़ कर दबाते हुए बोला,,,)

देख रही हो नीलू,,,, इसीलिए तो मैं तुम्हें यहां बुलाया हूं क्योंकि तुम्हारे दशहरी यहां पूरे बगीचे के दशहरे आम की तुलना में बेहद रसीले और खूबसूरत है,,,,(दोनों हाथों से नीलू की चूची को दबाते हुए बोला और उसकी हरकत से नीलू को तो मजा आई रहा था लेकिन जिस तरह से वह च को दबा रहा था उसे उसे हल्का-हल्का दर्द भी महसूस हो रहा था लेकिन यह दर्द मीठा था,,,, उसे इस दर्द में भी आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,, एक तरफ वह सूरज की हरकतों का आनंद ले रही थी और दूसरी तरफ वह रह रहकर आम के बगीचे के चारों तरफ नजर दौड़ा कर देख भी ले रही थी कि कहीं कोई यहां तो नहीं रहा है क्योंकि ऐसी हालत में अगर उसे कोई देख ले तो वह शर्म से ही मर जाए और हो नहीं चाहती थी कि कोई हालत में उसे देखें क्योंकि वह दोनों आम के बगीचे में खुले में पेड़ के नीचे बैठकर इस तरह की हरकत को अंजाम दे रहे थे,,,, दोनों हाथों से नीलू की चूची को दबाते हुए सूरज बोला,,,)

कैसा लग रहा है नीलू,,,,,

(जवाब में नीलू कुछ बोली नहीं बस शर्मा कर अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,, इसका मतलब साफ था कि उसे भी बहुत मजा आ रहा था और देखते ही देखते सूरज फिर से उसकी चूची को मुंह में लेकर पीने लगा हूं एक हाथ को सलवार के ऊपर से ही रखकर उसकी बुर को मसलने लगा जिससे उसका आनंद दुगना हो गया और उसकी बुर पानी पर पानी छोड़ने लगी,,,।

सूरज की हरकतों का मजा लेते हुए वह चारों तरफ नजर डालते हुए बोली,,,)

सूरज कोई आ गया तो,,,,।

यहां कोई नहीं आएगा नीलु,,,, तुमडरो मत,,,

नहीं मुझे तो डर लग रहा है अगर कोई देख लिया तो मेरे मां बाबुजी तो मुझे मार ही डालेंगे,,,।

ऐसा कुछ भी नहीं होगा,,,, क्योंकि यहां कोई नहीं होता,,,(बार-बार नीलू के सवालों का जवाब देने के लिए सूरज उसकी चूची से मुंह हटा लेता था और वापस उसकी चूची पर मुंह रख देता था,,,, लेकिन नीलू सूरज के जवाब से संतुष्ट नहीं थी इसलिए बोली,,,)

नहीं मुझे तो डर लग रहा है मैं जा रही हूं,,,,(ऐसा क्या करवा उठने वाली थी कि उसके कंधों पर दोनों हाथ रखकर उसे दबाते हुए सूरज उसकी आंखों में देखते हुए बोला,,,,)

चलो फिर ठीक है,,,,उस(उंगली के इशारे से एक झोपड़ी की और नीलू को दिखाते हुए बोला जो की थोड़ी ही दूरी पर दिखाई दे रही थी,,,) झोपड़ी में चलते हैं,,,

(नीलू भी उसे और देखने लगी जहां पर सूरज उंगली से दिख रहा था और उसे झोपड़ी को देखकर वह बोली,,,)

उसमें कोई रहता तो नहीं है ना,,,,।

नहीं इसमें कोई नहीं रहता वीरान है और वही जगह ठीक भी रहेगी हम दोनों के लिए,,,, रुको मैं ले चलता हूं तुम्हें वहां पर,,,,(इतना कहने के साथ ही वह उठकर खड़ा हो गया,,,, और नीलू भी उठकर खड़ी हो गई लेकिन वह अपने कदम आगे बढ़ाती इससे पहले ही सूरज उसे अपनी गोद में उठा लिया,,, यह देखकर नीलू एकदम से घबरा गई औरबोली,,,)

अरे अरे यह क्या कर रहे हो मैं गिर जाऊंगी,,,।

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो तुम सूरज की गोद में हो और मेरी गोद से तुम क्या तुम्हारी मां भी नहीं गिर सकती,,,,(ऐसा कहते हुए पूरी तरह से उसे अपनी गोद में उठा लिया था। एक पल के लिए सूरज के मुंह से अपनी मा का जिक्र सुनकर वह सन्न रह गई क्योंकि वह देखी थी कि सूरज उसकी मां से थोड़ा डरता ही था लेकिन उसे क्या मालूम था कि सूरज उसकी मां की न जाने कितनी बार चुदाई कर चुका था इसलिए तो उसके होंठों पर उसकी मा का जिक्र आया था,,, थोड़ा सहज होते हुए नीलू बोली,,,)

अच्छा उठा लोगे तुम मेरी मां को उसका शरीर कितना भारी है,,,।

तो क्या हुआ बोलो मेरे में दम भी तो बहुत है बढ़िया आराम से तुम्हारी मां को गोद में उठाकर इधर से उधर घूमा सकता हूं,,,,।

चलो रहने दो पहले मुझे गोद में से नीचे उतरो मुझे डर लग रहा है कहीं नीचे गिरा दिया तो लेने के देने पड़ जाएंगे,,,।

अच्छा तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है तो देखो,,,(पर इतना कहकर उसे गोद में लिए हुए वह झोपड़ी की तरफ जाने लगा,,,, नीलू यही सोच रही थी कि उसकी मां का शरीर भारी भरकम है और सूरज जिस तरह से उसे गोद में उठाया है उसकी मां को बिल्कुल भी नहीं उठा सकता जबकि उसे क्या मालूम था कि हम के बगीचे में वह उसकी मां की जवानी से जी भर कर खेल चुका था और उसे गोद में उठाकर उसकी चुदाई भी कर चुका था,,,, मां के बाद आज बेटी का नंबर था आज सूरज मुखिया की बीवी नहीं मुखिया की लड़की की चुदाई करने जा रहा था उसे गोद में उठाए हुए वह झोपड़ी की,, तरफ आगे बढ़ रहा था)

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