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Guest
दूसरे दिन भोला को किसी रिश्तेदार के घर जाना था तीन-चार दिनों के लिए और वह काफी जल्दबाजी में था,,,, इसलिए वह अपने बेटे से बोला,,,।
सूरज बेटा मैं तीन-चार दिनों के लिए रिश्तेदारी में जा रहा हूं वहां पर शादी है वहां पर सबको लेकर जा नहीं सकता इसलिए मुझे अकेले ही जाना है और तो यह बात मालकिन को बता देना कि मैं तीन-चार दिन तक नहीं आ पाऊंगा और कोई छोटा-मोटा काम हो तो तू कर देना,,,,,
ठीक है पिताजी मैं यह बात मुखिया जी को बता दूंगा और उनकी बीवी को भी,,,,, लेकिन शादी किसकी है,,,?
अरे हे एक रिश्तेदार उसी के वहां जा रहा हूं ठीक है बता देना,,,,(इतना कहकर भोला चलता बना,,,, कुछ देर खड़े होकर सूरज अपने पिताजी को देखता रहा जब तक कि वह दूर उसकी आंखों से ओझल नहीं हो गए और अपने पिताजी को देखते हुए वह कमरे के दृश्य के बारे में सोचने लगा और अपने मन में ही बोलने लगा कि देखने पर उसके मन और बाबुजी इसे बिल्कुल भी नहीं दिखते जैसा कि उसने कमरे में देखा था और फिर वह भी मुखिया की बीवी के घर की तरफ निकल गया खबर पहुंचाने के लिए,,,,।
थोड़ी ही देर में वह उसे जगह पर पहुंच गया जहां पर खेतों में काम हो रहा था मजदूर लगे हुए थे उसे पूरा यकीन था कि यही मुखिया और मुखिया की बीवी भी मिल जाएंगे और ऐसा ही हुआ दूर बड़े से पेड़ के नीचे मुखिया और उसकी बीवी बैठे हुए थे सूरज जल्दी-जल्दी उन दोनों के पास किया और नमस्कार किया मुखिया की बीवी तो सूरज को देखते ही मन ही मन मुस्कुराने लगी और बोली,,,)
क्या हुआ रे सुरज,,,, तेरे पिताजी नहीं आए आज काम पर,,,,
की मालकिन यही तो बताने आया हूं कि पिताजी जरूरी काम से दो-तीन दिनों के लिए किसी रिश्तेदार के वहां गए हैं और यही खबर में देने आया हूं,,,,
ओहहहह ,, इसके बारे में तो कभी जिक्र भी नहीं किया भोला ने,,,, चलो कोई बात नहीं,,,,(मुखिया की बीवी गहरी सांस लेते हुए बोली और गहरी सांस लेने की वजह से उसकी उन्नत चुचीया एकदम से बाहर की तरफ निकल गई क्योंकि वह जानबूझकर की थी सूरज को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए और सूरज की भी नजर एकदम से उसकी चूचियों पर चली गई थी यह देखकर मुखिया की बीवी मन ही मन प्रसन्न होने लगी थी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)
तेरे पिताजी का काम तू कर देना,,,
वह तो ठीक है मालकिन लेकिन मुझे तो कुछ आता ही नहीं है,,,,,(सूरज एकदम मासूमियत भरे श्वर में बोला,,,)
हां शोभा ठीक तो कह रहा है यह इस कहां कुछ आता है,,,,
हां यह तो ठीक है लेकिन मैं सोच रही हूं कि कुछ दिनों से अपने आम के बगीचे में से आम की चोरी हो रही है रात को वहां रख वाली के लिए मुझे जाना होगा मैं सोच रही थी कि साथ में सूरज को ले जाती तो अच्छा होता,,,।
हां हां क्यों नहीं,,,, यह तो बहुत अच्छा है तुम्हें साथ भी मिल जाएगा और आम के बगीचे की रखवाली भी हो जाएगी,,,, ।
(मुखिया की बीवी के साथ रात को रख कर आम की रखवाली करने के बारे में सुनकर ही सूरज के बदन में रोमांच बढ़ गया उसके बदन में अच्छी सी हलचल होने लगी मुखिया की बीवी अपने फैसले पर मुस्कुरा रही थी उसके मन में बहुत कुछ चल रहा था,,,, वह सूरज की तरफ देखकर बोली,,,)
तुझे कोई एतराज तो नहीं है ना बदले में तुझे पैसे भी मिलेंगे और पके हुए आम भी,,,(आम बोलते हुए वह अपनी छाती को थोड़ा सा और उभार दी थी,,, हालांकि उसके इस मतलब को सूरज समझ नहीं पाया था लेकिन उसे इनकार भी नहीं था उसे पैसे और पके हुए आम का लालच नहीं था बल्कि उसे मुखिया की बीवी के साथ रहना अच्छा लगता था इसलिए वह इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था,,,)
जी मुझे कोई एतराज नहीं है वैसे कब से रखवाली करने जाना है,,,(सूरज मुखीया और मुखिया की बीवी की तरफ देखते हुए बोला,,,,,)
आज से ही,,,, शाम ढलते ही आ जाना मेरे घर पर वहीं से मैं तुम्हें ले चलूंगी आम के बगीचे पर,,,
हां यह तुम ठीक कह रही हो शोभा ,, घर से ही इसे ले जाना तब सही रहेगा,,,,,
ठीक है सूरज अभी तो कोई काम नहीं है जाकर घर पर आराम कर सकते हो लेकिन समय पर आ जाना,,,
ठीक है मालकिन में समय पर आ जाऊंगा,,, नमस्ते,,,
(इतना कहकर दोनों का अभिवादन करके वह अपने घर की तरफ निकल गया लेकिन वह बहुत खुश था मुखिया की बीवी के साथ समय बिताने के नाम से ही उसके बदन में हलचल हो रही थी और मुखिया की बीवी उसे जाते हुए कुटिल मुस्कान बिखेर रही थी,,, आम के बगीचे की रखवाली करना तो उसके लिए केवल बहाना रहता था वह जब कभी मन होता था तो आम की रखवाली के बहाने अपनी जवानी की प्यास जवान लड़कों से बुझाती थी,,, इस बात को भोला भी नहीं जानता था मुखिया की बीवी को भी रात होने का इंतजार बड़ी बेसब्री से होने लगा,,,,।)
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सूरज बेटा मैं तीन-चार दिनों के लिए रिश्तेदारी में जा रहा हूं वहां पर शादी है वहां पर सबको लेकर जा नहीं सकता इसलिए मुझे अकेले ही जाना है और तो यह बात मालकिन को बता देना कि मैं तीन-चार दिन तक नहीं आ पाऊंगा और कोई छोटा-मोटा काम हो तो तू कर देना,,,,,
ठीक है पिताजी मैं यह बात मुखिया जी को बता दूंगा और उनकी बीवी को भी,,,,, लेकिन शादी किसकी है,,,?
अरे हे एक रिश्तेदार उसी के वहां जा रहा हूं ठीक है बता देना,,,,(इतना कहकर भोला चलता बना,,,, कुछ देर खड़े होकर सूरज अपने पिताजी को देखता रहा जब तक कि वह दूर उसकी आंखों से ओझल नहीं हो गए और अपने पिताजी को देखते हुए वह कमरे के दृश्य के बारे में सोचने लगा और अपने मन में ही बोलने लगा कि देखने पर उसके मन और बाबुजी इसे बिल्कुल भी नहीं दिखते जैसा कि उसने कमरे में देखा था और फिर वह भी मुखिया की बीवी के घर की तरफ निकल गया खबर पहुंचाने के लिए,,,,।
थोड़ी ही देर में वह उसे जगह पर पहुंच गया जहां पर खेतों में काम हो रहा था मजदूर लगे हुए थे उसे पूरा यकीन था कि यही मुखिया और मुखिया की बीवी भी मिल जाएंगे और ऐसा ही हुआ दूर बड़े से पेड़ के नीचे मुखिया और उसकी बीवी बैठे हुए थे सूरज जल्दी-जल्दी उन दोनों के पास किया और नमस्कार किया मुखिया की बीवी तो सूरज को देखते ही मन ही मन मुस्कुराने लगी और बोली,,,)
क्या हुआ रे सुरज,,,, तेरे पिताजी नहीं आए आज काम पर,,,,
की मालकिन यही तो बताने आया हूं कि पिताजी जरूरी काम से दो-तीन दिनों के लिए किसी रिश्तेदार के वहां गए हैं और यही खबर में देने आया हूं,,,,
ओहहहह ,, इसके बारे में तो कभी जिक्र भी नहीं किया भोला ने,,,, चलो कोई बात नहीं,,,,(मुखिया की बीवी गहरी सांस लेते हुए बोली और गहरी सांस लेने की वजह से उसकी उन्नत चुचीया एकदम से बाहर की तरफ निकल गई क्योंकि वह जानबूझकर की थी सूरज को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए और सूरज की भी नजर एकदम से उसकी चूचियों पर चली गई थी यह देखकर मुखिया की बीवी मन ही मन प्रसन्न होने लगी थी और मुस्कुराते हुए बोली,,,)
तेरे पिताजी का काम तू कर देना,,,
वह तो ठीक है मालकिन लेकिन मुझे तो कुछ आता ही नहीं है,,,,,(सूरज एकदम मासूमियत भरे श्वर में बोला,,,)
हां शोभा ठीक तो कह रहा है यह इस कहां कुछ आता है,,,,
हां यह तो ठीक है लेकिन मैं सोच रही हूं कि कुछ दिनों से अपने आम के बगीचे में से आम की चोरी हो रही है रात को वहां रख वाली के लिए मुझे जाना होगा मैं सोच रही थी कि साथ में सूरज को ले जाती तो अच्छा होता,,,।
हां हां क्यों नहीं,,,, यह तो बहुत अच्छा है तुम्हें साथ भी मिल जाएगा और आम के बगीचे की रखवाली भी हो जाएगी,,,, ।
(मुखिया की बीवी के साथ रात को रख कर आम की रखवाली करने के बारे में सुनकर ही सूरज के बदन में रोमांच बढ़ गया उसके बदन में अच्छी सी हलचल होने लगी मुखिया की बीवी अपने फैसले पर मुस्कुरा रही थी उसके मन में बहुत कुछ चल रहा था,,,, वह सूरज की तरफ देखकर बोली,,,)
तुझे कोई एतराज तो नहीं है ना बदले में तुझे पैसे भी मिलेंगे और पके हुए आम भी,,,(आम बोलते हुए वह अपनी छाती को थोड़ा सा और उभार दी थी,,, हालांकि उसके इस मतलब को सूरज समझ नहीं पाया था लेकिन उसे इनकार भी नहीं था उसे पैसे और पके हुए आम का लालच नहीं था बल्कि उसे मुखिया की बीवी के साथ रहना अच्छा लगता था इसलिए वह इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था,,,)
जी मुझे कोई एतराज नहीं है वैसे कब से रखवाली करने जाना है,,,(सूरज मुखीया और मुखिया की बीवी की तरफ देखते हुए बोला,,,,,)
आज से ही,,,, शाम ढलते ही आ जाना मेरे घर पर वहीं से मैं तुम्हें ले चलूंगी आम के बगीचे पर,,,
हां यह तुम ठीक कह रही हो शोभा ,, घर से ही इसे ले जाना तब सही रहेगा,,,,,
ठीक है सूरज अभी तो कोई काम नहीं है जाकर घर पर आराम कर सकते हो लेकिन समय पर आ जाना,,,
ठीक है मालकिन में समय पर आ जाऊंगा,,, नमस्ते,,,
(इतना कहकर दोनों का अभिवादन करके वह अपने घर की तरफ निकल गया लेकिन वह बहुत खुश था मुखिया की बीवी के साथ समय बिताने के नाम से ही उसके बदन में हलचल हो रही थी और मुखिया की बीवी उसे जाते हुए कुटिल मुस्कान बिखेर रही थी,,, आम के बगीचे की रखवाली करना तो उसके लिए केवल बहाना रहता था वह जब कभी मन होता था तो आम की रखवाली के बहाने अपनी जवानी की प्यास जवान लड़कों से बुझाती थी,,, इस बात को भोला भी नहीं जानता था मुखिया की बीवी को भी रात होने का इंतजार बड़ी बेसब्री से होने लगा,,,,।)
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