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ओहह जय! मुझे चोद ना! देखता नहीं मेरा तन कैसा गरम हो रहा है! बहनचोद, अपना लौड़ा मेरी चूत के अन्दर डाल ना !”
सोनिया के भाई ने अपनी जीन्स को उतार दिया। अपने बायें हाथ में अपने फड़कते लन्ड को दबोच कर बहन के पीछे खड़ा हो गया।
“जानेमन, अभी डालता हूं। बस तू तू सिंक को पकड़ कर आगे झुक जा, और फिर देख भैय्या के लन्ड का जलवा !”, जय ने चेतावनी भरे स्वर में कहा, और अपने लिंग का सुपाड़ा उसकी गाँड के बीच टेक कर टटोलता हुआ अपनी बहन की चिकनी हो चुकी योनी के पवित्र द्वार को लन्ड से खोजने लगा।
सोनिया ने अपनी टांगे अच्छी तरह पाट कर फैला दी थीं, और आगे की ओर झुक कर अपनी योनि में होने वाले भाई के लन्ड के शक्तिशाली गोते की प्रतीक्षा करने लगी। सोनिया की गाँड का छेद तो चूतड़ों से ढका हुआ था पर जय अपनी बहन की रिसती हुई, गुलाबी कमल की पंखुड़ियों जैसी योनि को उसके योनि - रोमों के जंगल में से झाँकते हुए देख सकता था। योनि की लालिमा और प्रचुर नमी इस बात का संकेत दे रही थी कि वो जय के लन्ड के साथ संभोग के लिये एकदम तैयार है।
जय का लिंग भी रौद्राकार लिये हए था। सुपाड़े को रक्त-धमनियों ने लाल कर दिया था। सुपाड़े के ऊपर का माँस पीछे खिंच गया था। जैसे जय ने आगे दबा कर सूजे हुए सुपाड़े को योनि के होंठों के पाश में झोंक दिया, सोनिया ने एक गहरी आह भरी। । “ऊऊह, भैय्या! अममम, बहुत मोट है! जरा धीरे से जाना चुतियन में !”, कामुक यौवना ने विनती के स्वर में कहा।
जय ने सोनिया की कमर को हाथों से पकड़ कर आगे दो झटका दिया और अपने विशाल लन्ड को जड़ तक अपनी बहन की सुलगती योनि में घोंप दिया। सोनिया ने योनि में अचानक हुए इत श्रारती अतिकरमण के वेग से विचलित हो कर एक चीख मारी और पीठ को तान कर किसी तरह सिंक की दीवार के सहारे सम्भली। उसके भाई जय ने पाशविक मुद्रा में अपनी बहन के साथ काम-क्रीड़ा शुरू कर दी।
ऊँह उँह उँह ! ओह, मादरचोद, लन्ड है या त्यूबवेल !”, अपने भाई को दिये कामदेव के वरदान स्वरूप अंग के भरपूर वारों को झेलती हुई सोनिया बोली।
जय हुंकारा और अपने भीमकाय लिंग को पीछे खिंच कर, केवल सुपाड़े को को योनि के पाश में छोड़ दिया। बहन की योनी के चिपचिपे रसाव से सना हुआ काला लम्बा लिंग, उसे कोबरा नाग जैसा लिसलिसा रूप दे रहा था। सोनिया की खिंची हुई योनि - कोपलें बाहर को उभर आयी थीं और जय के मोटे पौरुषांग पर लिपट कर दृष्य को बड़ा ही कामुक कर रही थीं। इससे पहले कि सोनिया कुछ कह पाती, जय के कूल्हों ने फुर्ती से आगे को एक झटका दिया और अपना सारा बल लगाकर लिंग की पूरी लम्बाई को यौवना की योनी के पाश में घोंप दिया।
“आअह! बहन, इतनी टाईट चूत !”, अपने घुसपैठिये लिंग पर सोनिया की तन्ग योनी के दबाव का अनुभव करके जय कराहा।
“मम्मी से भी टाईट ?”, सोनिया हाँफ़ती हुई बोली। आशा कर रही थी कि माँ-बेटे के बीच मेज पर हुई आँख-मिचौली का तात्पर्य वो ठीक समझी थी।
हाँ सोनिया, मम्मी से कहीं टाइट ! ओहहह !” सोनिया मन ही मन मुस्कायी। उसका अनुमान बिलकुल सही था, और उसकी पुष्टी हो जाने से उसे अब आगे का काम बहुत आसान लगने लगा था। अपने जिस्म के आवेग में जय को अपनी स्वीक्रोक्ति का पूर्ण अर्थ समझ नहीं आया था। सोनिया की जाँघों के बीच उमड़ती हुई आनन्दकर अनुभूतियाँ भी इतनी उग्र थीं कि उसे अधिक विचार करने का अवसर नहीं मिला। इस समय तो उसकी केवल एक ही इच्छा थी कि उसक ताकतवर भाई उसे चोदता रहे!
सोनिया के भाई ने अपनी जीन्स को उतार दिया। अपने बायें हाथ में अपने फड़कते लन्ड को दबोच कर बहन के पीछे खड़ा हो गया।
“जानेमन, अभी डालता हूं। बस तू तू सिंक को पकड़ कर आगे झुक जा, और फिर देख भैय्या के लन्ड का जलवा !”, जय ने चेतावनी भरे स्वर में कहा, और अपने लिंग का सुपाड़ा उसकी गाँड के बीच टेक कर टटोलता हुआ अपनी बहन की चिकनी हो चुकी योनी के पवित्र द्वार को लन्ड से खोजने लगा।
सोनिया ने अपनी टांगे अच्छी तरह पाट कर फैला दी थीं, और आगे की ओर झुक कर अपनी योनि में होने वाले भाई के लन्ड के शक्तिशाली गोते की प्रतीक्षा करने लगी। सोनिया की गाँड का छेद तो चूतड़ों से ढका हुआ था पर जय अपनी बहन की रिसती हुई, गुलाबी कमल की पंखुड़ियों जैसी योनि को उसके योनि - रोमों के जंगल में से झाँकते हुए देख सकता था। योनि की लालिमा और प्रचुर नमी इस बात का संकेत दे रही थी कि वो जय के लन्ड के साथ संभोग के लिये एकदम तैयार है।
जय का लिंग भी रौद्राकार लिये हए था। सुपाड़े को रक्त-धमनियों ने लाल कर दिया था। सुपाड़े के ऊपर का माँस पीछे खिंच गया था। जैसे जय ने आगे दबा कर सूजे हुए सुपाड़े को योनि के होंठों के पाश में झोंक दिया, सोनिया ने एक गहरी आह भरी। । “ऊऊह, भैय्या! अममम, बहुत मोट है! जरा धीरे से जाना चुतियन में !”, कामुक यौवना ने विनती के स्वर में कहा।
जय ने सोनिया की कमर को हाथों से पकड़ कर आगे दो झटका दिया और अपने विशाल लन्ड को जड़ तक अपनी बहन की सुलगती योनि में घोंप दिया। सोनिया ने योनि में अचानक हुए इत श्रारती अतिकरमण के वेग से विचलित हो कर एक चीख मारी और पीठ को तान कर किसी तरह सिंक की दीवार के सहारे सम्भली। उसके भाई जय ने पाशविक मुद्रा में अपनी बहन के साथ काम-क्रीड़ा शुरू कर दी।
ऊँह उँह उँह ! ओह, मादरचोद, लन्ड है या त्यूबवेल !”, अपने भाई को दिये कामदेव के वरदान स्वरूप अंग के भरपूर वारों को झेलती हुई सोनिया बोली।
जय हुंकारा और अपने भीमकाय लिंग को पीछे खिंच कर, केवल सुपाड़े को को योनि के पाश में छोड़ दिया। बहन की योनी के चिपचिपे रसाव से सना हुआ काला लम्बा लिंग, उसे कोबरा नाग जैसा लिसलिसा रूप दे रहा था। सोनिया की खिंची हुई योनि - कोपलें बाहर को उभर आयी थीं और जय के मोटे पौरुषांग पर लिपट कर दृष्य को बड़ा ही कामुक कर रही थीं। इससे पहले कि सोनिया कुछ कह पाती, जय के कूल्हों ने फुर्ती से आगे को एक झटका दिया और अपना सारा बल लगाकर लिंग की पूरी लम्बाई को यौवना की योनी के पाश में घोंप दिया।
“आअह! बहन, इतनी टाईट चूत !”, अपने घुसपैठिये लिंग पर सोनिया की तन्ग योनी के दबाव का अनुभव करके जय कराहा।
“मम्मी से भी टाईट ?”, सोनिया हाँफ़ती हुई बोली। आशा कर रही थी कि माँ-बेटे के बीच मेज पर हुई आँख-मिचौली का तात्पर्य वो ठीक समझी थी।
हाँ सोनिया, मम्मी से कहीं टाइट ! ओहहह !” सोनिया मन ही मन मुस्कायी। उसका अनुमान बिलकुल सही था, और उसकी पुष्टी हो जाने से उसे अब आगे का काम बहुत आसान लगने लगा था। अपने जिस्म के आवेग में जय को अपनी स्वीक्रोक्ति का पूर्ण अर्थ समझ नहीं आया था। सोनिया की जाँघों के बीच उमड़ती हुई आनन्दकर अनुभूतियाँ भी इतनी उग्र थीं कि उसे अधिक विचार करने का अवसर नहीं मिला। इस समय तो उसकी केवल एक ही इच्छा थी कि उसक ताकतवर भाई उसे चोदता रहे!