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Incest पापी परिवार की पापी वासना complete

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साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
55 निम्न वर्ग

* मैं चढ़ कर कमोड पर कमलाबाई के सामने बैठ गया और उसकी जाँघों को फैला कर अपनी जाँघों के ऊपर रख दीं। कमलाबाई को तो जैसे किसी बात की सुध नहीं थी, बस सिर्फ अपनी वैसलीन से चिकनी हो चुकी भोंसड़ को मेरी उंगली पर मसलती जा रही थी।” ।

“मैने मौका देखकर अपने लन्ड को उसकी गरम भोंसड़ी पर दबाया, अपनी उंगली के नीचे लन्ड को छुपाया और पलक झपकते ही उंगली बाहर निकाली और उसके बदले अपना लौड़ा अन्दर घुसा डाला। फिर तो हरामजादी ऐसी चीखी की अगर मैं उसके मुंह को अपनी हथेली से नहीं दबाता तो सारे पड़ोसी घर आ जाते। कुतिया छह महीने बाद पहली बार किसी लन्ड को अपनी चूत में लिये थी। पर मिनटों में उसे जवानी की यादें ताजा हो गयीं और फिर पेशेवर रन्डी की तरह लन्ड का मजा लेने लगी।”

“जल्द ही कमलाबाई अपनी झाँटेदार चिकनी चूत को ऐसे उचकाने लगी, कि मैने सोचा बुढ़िया को अपनी जवानी के दिन याद आ गये !” टीना जी ने अपना मुँह खोला तो, परन्तु कोई स्वर नहीं निकला, उनकी स्वयं की योनि से उनके पुत्र की रगड़ती ठोड़ी पर द्रवों का प्रवाह प्रारम्भ हो गया था। मम्मी, सच, बुढ़िया की भोंसड़ी में ग़जब का जादू था। मेरा लन्ड ऐसा लग रहा था कि किसी गरम भट्टी में घुसा हुआ है !”

“साली आवारा कुतिया की तरह बिलबिला रही थी, और मैं उसे मजे से चोद रहा था। मैने नीचे देखा तो मेरा लन्ड उसकी भोंसड़ी में अन्दर-बाहर, अन्दर-बाहर चले जा रहा था। उसकी भोंसड़ी के झोल भी मेरे लन्ड के साथ फच्च - फच्च करते हुए अन्दर बाहर हिल रहे थे। जब लन्ड को बाहर खींचता तो रन्डी ऐसी स्टाइल से मेरे लन्ड पर भोंसड़ी जकड़ती थी कि सोलह साल की कुंवारी चूत हो! क्या कस के निचोड़ती है हमारी भंगिन अपनी चूत से ! साथ-साथ अपने मुंह से ऐसी गन्दी गाली-गलौज करती जा रही थी। अरे मम्मी, आप तो ऐसी गालियाँ सपने में भी नहीं सोच सकतीं !”

परन्तु टीना जी अच्छी तरह से अनुमान लगा सकती थीं कि नीच कुल की महिलायें कैसी भद्दी भाषा का उपयोग कर सकती हैं। जय अपनी माँ के हर हाव-भाव को ताड़ता हुआ आगे कहने लगा।

कहती थी, “अबे सूअरनी की औलाद, तेरी माँ ने भी संदास पर चुद कर तुझे पैदा किया है! ऍह ... ऍह ... तुम शर्मा लोग हम भंगियों से ही तो सीखे हो संडास पर चोदना! :: ऍह :: आँह ::अपनी सुअरनी माँ की चूत समझ रखी है क्या जो लन्ड से खुजा रहा है। चोद साले चोद! खैर मना, मेरा मरद जिन्दा नहीं,... आँह :: ‘नहीं तो ऐसी कमजोर चुदाई देख कर तेरी अभी गाँड मार लेता। बस मम्मी, मुझे ऐसे ही रन्डी की तरह चैलेंज दे-दे कर पागल कर रही थी हरामजादी!”

“फिर उसने मेरी गाँड पर अपनी उंगलियों के नाघूनों को गाड़ना शुरू कर दिया और मेरे लन्ड को अपनी भोंसड़ी में और अन्दर डालने की कोशिश करने लगी। मेरा लन्ड अब पूरा का पूरा अब अन्दर घुस चुका था। और मम्मी मेरे टट्टे झूल झूल कर कभी उसकी गन्डी गाँड पर टकराते तो कभी कमोड पर। पर कमलाबाई तो चुप होने का नाम नहीं लेती थी। जानती हो क्या बोली वो ?”, जय ने कुटिलता से मुस्कुराते हुए पूछा।

 
“कः ‘क्या बेटा ?”, टीना जी हकलाते हुए बोलीं। वे अपनी जाँघों के बीच पनपती हुई कामुकता की तरंगों का असफ़ल विरोध कर रही थीं, इस प्रयास में कि इस असाधारण रूप से लज्जाहीन प्रसंग की अवधि को किसी तरह से लम्बा करें।

“वो राँड मुझसे अपनी गाँड में उंगली डालने को कहने लगी, मम्मी। मम्मी, तुम मानोगी नहीं, पर वो साली, मेरी दादी की उमर की बुढ़िया, मुझी से अपनी गाँड में उंगल करने को कह रही थी !”

टीना जी को जय के कथन पर विश्वास करने में कोई आपत्ति नहीं थी, उल्टे उनका मन तो किया कि वे उसे वही हरकत अपनी गुदा पर करने का प्रस्ताव दे डालें। जय ने सांकेतिक रूप से अपनी ठोड़ी को टीना जी के पेड़ पर रगड़ कर वर्णन जारी रखा।

“लो, मैने अपने हाथों पर थोड़ी और वैसलीन ली और अपनी बीच की उंगली को उसकी चौड़ी गाँड पर दबाने लगा। हरामजादी के दोनों बटक्स मेरी हथेली पर थे। मम्मी कमलाबाई की गाँड ऐसी चौड़ी थी कि मुझे विश्वास हो गया उसका पति वाकई गाँड मारने में उस्ताद था! मैने उससे पूछा भी, क्यों कमलाबाई, लगता है तेरे पति ने ही तेरी गाँड ऐसी खोल रखी है।”

बस कुतिया को मौक़ा मिल गया, ‘ऊँह ::: ऍह ::: मेरा मरद तो साला लड़कों की गाँड ज्यादा मारता था, मेरी कम। आँह • आँह ये तो मेरे मामा ने बचपन में मारी हुई है! : ‘आँह चाहूं तो तेरे और तेरे बाप, दोनों के लन्ड को एक साथ गाँड में ले लें : ‘आँह बोल सूअर, मारेगा बाप के साथ मिलकर मेरी गाँड :: हाँ ?' मैने हाँ कर दी। ‘मेरी माँ तो हाथ से मामा का लन्ड पकड़ कर मेरी गाँड में डालती थी। ‘अँह बोल, सूअर, तू भी बाप के लन्ड को हाथ में पकड़ कर घुसायेगा ना ऍह ?' मैने फिर हाँ किया। सच मम्मी, कमलाबाई से ऐसी बातें करके बड़ा मज़ा आ रहा था।”

“लगता है उसे ऐसे बोलने में और भी मज़ा आ रहा था, बस कुछ ही मिनटों में हरामजादी कमोड पर बैठी झड़ने लगी। मेरा लन्ड अब भी उसकी भोंसड़ी में कूद रहा था, और मेरी उंगली उसकी गाँड को खोद रही थी।” | टीना जी कराहते हुए अपने स्तनों को दबोच रही थीं। अत्यन्त बेसुधी की मुद्रा में अपने निप्पलों को निचोड़ रही थीं वे । कठिनाई से अपने पुत्र के सामने उनसे सम्भोग क्रिया का प्रस्ताव रखने की कामना पर वे काबू पा सकीं। आगे की कथा जो सुनना चाहती थीं। जय की कथा उनके कामानन्द को कई गुना अवृद्ध जो कर रही थी।

“साले मुस्टंडे, तू नहीं झड़ा ?”, जय की माँ ने शरारत भरे स्वर में पूछा।

“मैं भी बस झड़ ही जाता मम्मी! कमलाबाई जब झड़ी तो उसकी भोंसड़ी सौ चूतों की तरह मेरे लन्ड को पुचकारने लगी थी। उसकी चूत में ऐसा कस-कस के मैने लन्ड मारा, कि हरामजादी हाँफ़ने लगी।”

“मम्म ::: तू मुझे बता रहा है, मुझे याद है जब मैं झड़ी तो तू कैसे जानवरों से मुझे चोद रहा था! खैर आगे कः क्या हुआ ?”, टीना जी कराहीं।

 
56 उच्च वर्ग

मम्मी, उसकी अगली हरकत ने तो मुझे हैरान कर डाला। जब कमलाबाई ने मेरे लन्ड को अपनी भोंसड़ी में फूल कर उछलता हुआ महसूस किया, तो एक हाथ नीचे कर के मेरे लन्ड को दबोच कर बाहर निका लिया! हरामजादी बोली, “आ साले , तुझे गाँड मारना सिखाऊँ! फिर उसने खड़ा होकर एक हाथ को कमोड की टंकी पर टेका और दूसरे हाथ को अपनी टाँगों के बीच से पीछे लेकर मेरे लन्ड को पकड़ा और अपनी उचकी हुई गाँड में दबा कर सटाने लगी। बुढ़ापे में सूखी चूत से ज्यादा अब कमलाबाई को गाँड मरवाने में मजा आता है !”

टीना जी अपने सगे पुत्र के मुख से उसकी कामक्रीड़ा के स्पष्ट वर्णन को सुनकर मारे उत्तेजना के पागल हो रही थीं। यदि जय अब जल्द ही उनकी तड़प का निवारण नहीं करता, तो वे पुत्र के लिंग को बलपूर्वक अपनी योनि में घुसा कर बलात्कार करने का इरादा कर चुकी थीं।

| फिर मैने कुत्ती की गाँड से अपनी उंगली बाहर निकाली, और अपने लन्ड को उसकी बदबूदार गाँड में घुसेड़ डाला! साली और चीखने लगी, ‘साले तू माँ की चूत से नहीं : ‘आँह, गाँड से पैदा हुआ है।''आँह : ' झुक कर मेरे टट्टों को दबाती हुई बोली, “निकाल टट्टों से तेल, अँह तो तेरे लन्ड पर टट्टी कर देंगी !’ फिर चीख चीख कर मेरे लन्ड को अपनी गाँड से सिकोड़ने लगी, “ऍह आजा अन्दर, ऍह और अन्दर 'ऍह ऍह 'ऍह 'ऍह ऍह':'। गाँड मरवाते हुए कमलाबाई को थूकने की आदत है, बार बार कमोड मे थूके जा रही थी, ‘सूअर तेरी माँ की तो, थू!', तो कभी मुड़ कर मेरे मुँह पर ही थूक देती, ‘मादरचोद ! थू!' बस ऐसे ही चीख-चीख कर गन्दी गन्दी बातें करती रही और मैने भी उसकी गाँड में लन्ड रगड़-रगड़ कर आखिर उसकी गाँड को अपने वीर्य से भर दिया।” |

टीना जी अब और आत्मनियंत्रण की क्षमता नहीं रखती थी। वे तुरन्त खड़ी होकर औंध मुँह मेज पर लेट गयीं और अपनी सुडौल गोरी टांगों को फैला कर पाश्विक मुद्रा में पुत्र की वासना से बोझिल आखों के समक्ष अपनी सराबोर योनि और गुदा को प्रदर्शित करने लगीं।

“जय, मुझे चोद! मादरचोद, तुने मुझे अपनी बातों से बड़ा गर्मा डाला है, अब नहीं सहा जाता! चोद मेरे लाल ! उस राँड कमलाबाई को जैसे चोदा था, वैसे ही अपनी बेचारी मम्मी को भी तू आज चोद !”

जय फुर्ती से माता के पीछे जा खड़ा हुआ और उनके पटे हुए योनि - कोपलों पर अपने विशाल लिंगोभार को रगड़ने लगा। जैसे ही उन्होंने अपने पुत्र के नग्न, बलिष्ठ तन का आभास पाया, टीना जी के तन में पापी वासना की एक उमंग जाग गयी।

 
‘मेरा पहलवान चोदू बेटा।', अपने वक्राकार नितम्बों को प्रतिक्रिया में उसके तन पर मसलते हुए टीना जी ने सोचा। जय भी कंपकंपा उठा था, अपनी सुरूपा, कामाक्षी माता के संग पीछे से सम्भोग क्रिया के लिये तैयार होता हुआ, वो तीव्र दैहिक इच्छा के प्रभाव से सिहर रहा था। इस समय तक टीना जी आतुर ही नहीं बल्कि पुरुष लिंग की चाह के मारे तड़प रही थीं। एक पल की प्रतीक्षा भी अब असम्भव थी! अपनी टाँगों के बीच से हाथ पीछे बढ़ा कर, उन्होंने अपने पुत्र के लिंग को दबोचा और उस वासना-उदिक्त गौरवांग को अपनी भीगी योनि के प्रवेश द्वार का दिशा-दर्शन करवाया। माँ ही तपती उंगलियों को अपने लिंग पर लिपटते हुए पाकर, जय उतावला होकर कराहने लगा। । “वाह मम्मी! एकदम रन्डी स्टाइल है ये! अपने प्यारे हाथों से मेरे लन्ड को अपनी चूत में डालिये, फिर आपका लाडला बेटा आपको चोदेगा !” |

टीना जी की योनि से तीव्र प्रवाह हो रहा था, योनि से निकल कर द्रव उनकी जाँघों के भीतरी भाग पर बहता हुआ दोनों के गुप्तांगों को परस्पर सोख रहा था। जय के लिंग पर चुपड़ा हुआ द्रव एक प्राकृतिक चिकनाहट का काम कर रहा था जो माँ-बेटे के मध्य में होने वाली सम्भोग क्रिया के लिये अत्यन्त आवश्यक था। जय ने एक कदम आगे बढ़ कर अपने लिंग को प्रविष्टि की मुद्रा में तैयार कर लिया। टीना जी भी अधीर हो चली थीं।

हँ! पहलवान, आजा मैदान में ! डाल अपने मादरचोद लन्ड को मम्मी की चुतिया में और मुझे कस के चोद ! देखें मेरे दूध में कैसा असर है !” अपने पुत्र - लिंग के फूले हुए सुपाड़े का आभास अपनी काँपती योनि के भीगे हुए पटों पर पाकर टीना जी चीखीं। जय ने आज्ञाकारी पुत्र की तरह माँ की आज्ञा का पालन किया। |

माँ के चौड़े कूल्हों को जकड़ कर उनका सहारे लेते हुए, बलिष्ठ नौजवान जय ने एक आगे की ओर बलशाली झटका दिया, और अपने कामास्त्र लिंग को माता की टपकती, चूसती योनि के भीतर अपने अण्डकोष तक झोंक डाला।

“ऊँह हह ऊँह! ओह, मादरचोद! ऊह, चोद मुझे, जय! हे भगवान : ईंह, बेटा तेरा इतना मोटा है! • ईंह, टीना जी चिल्लायीं और अपने पुत्र के ठेलते लन्ड पर पीछे को दबाने लगीं। जय ने अपनी माँ की लिसलिसी योनि को कमलाबाई की अधेड़ योनि की भाँति कुशल शैली में लिंग पर जकड़ते हुए महसूस किया। उसने नोट किया कि माँ की योनि कमलाबाई से कहीं अधिक गहन थी, लाख प्रयत्न के बावजूद वो अपने लिंग से उसकी तह तक नहीं पहुँच पा रहा था। टीना जीन ने गर्दन घुमायी और पलट कर अपने पुत्र को वासना और ममता से सम्मिश्र भाव से देखा। । “ओह , शाबाश बेटा! दिखा अपनी माँ को तू कैसा मर्द है! आँह

“तेरे लन्ड को अपनी छाती के दूध से सींच कर मैने बड़ा किया है, 'इँह देखें कितना दम है मेरे मादरचोद बेटे! 'ईंह ऍह ईंह ऍह :)

| माता की वासना से बावली चीखों ने जय की कामोत्तेजना की अग्नि में घी का काम किया। पाठकों, आप ही बतायें, ऐसी स्त्री, जो साधरणतय कुलीनता की मूर्ती हो, यदि आपके साथ सम्भोग के समय, वही स्त्री, अपने मुख से ऐसी गन्दी और निर्लज्ज बातें करे, तो क्या आपका पौरुष चुनौती पाकर नहीं भड़केगा ? क्या आपको सैक्स के आनन्द में कोटि-कोटि वृद्धि नहीं होगी ? दोस्तों, अगर आप भी जय की तरह भाग्यवान होते और अपनी सगी माता के संग प्रणय क्रिया के समय उनके श्रीमुख से ऐसे गन्दे वचनों द्वारा अपने परुष को उकसाते हुए सुन लेते, तो आपका लिंग भी जय ही की तरह सूज कर दैत्यकारी आकर ले चुका होता।

“बिलकुल चोदूंगा, मम्मी! तेरे दूध का कर्ज मैं तेरी ही कोख को चोद कर उतारूंगा! मेरी रन्डी मम्मी, तू मेरे बाप की चुदाई भूल जायेगी !”, जय नथुने फुला कर मस्त साँड की तरह अपनी माँ की उठी हुई योनि के भीतर लिंग के क्रमवार प्रहार करता हुआ बोला।

टीना जी जय की कहानी में कमलाबाई की मुँहफट अश्लील बाषा से बड़ी उत्तेजित हुई थीं। साथ ही कुछ ईष्र्या भी थी कि भंगिन ने किस तरह उनके पुत्र को अपनी अश्लीलता से रिझा लिया था। अपनी कुलीन शिक्षा और सभ्य व्यव्हार को त्याग कर टीना जी भी आज वेश्या अवतार में उतर कर अपने सैक्स जीवन में एक नवीन अनुभव पाना चाहती थीं। साथ ही पुत्र के समक्ष अपनी पाश्विक वासना का प्रदर्शन कर अपने व्यक्तित्व के रूद्र पहलू को उजागर करने और खुद को सर्व-गुण सम्पन्न दिखलाने का ध्येय भी रखती थीं वे । वो स्त्री ही है जो पुरुष को रिझाने के वास्ते खुद को किसी भी रूप में ढाल सकती है। आज तो उनके त्रिया-चरित्र का पात्र पुरुष स्वयं उनका पुत्र था!

“आँह :: अबे तेरे बाप ने जिस चूत को चोदकर तुझे पैदा किया है, आज तू उसे ही चोद रहा है! : ‘आँह ‘ऐंह 'ई' 4 : ‘आँह ऊँह जिस लन्ड से जमादारिन की गाँड मारी, ''आइँह उसी से मम्मी को चोदता है!”

अबे उचक! मादरचोद जब लन्ड चूत में अन्दर घुसाता हैं तो एड़ी को उचका कर अन्दर झटका दे! 'आँह कमलाबाई ने तुझे नहीं सिखाया ?”

“ऊँह ‘आँह मादरचोद, तेरी मम्मी की चूत को छोड़ कर परायी जमादारिन को चोदता है? आँह फिर मम्मी को चुदवाने वास्ते क्या बाजार जाना होगा ? ''आँह ऊँह आँह ऊँह बोल साले, धंधा करवायेगा माँ से

“राँड, मैं तेरी चूत चोदूंगा, और तेरी गाँड को किराये पर उठा दूंगा!”, जय ने भी हिम्मत दिखायी।

“जा सूअर, तुझसे नहीं चुदने की!' 'आह' ‘भोंसड़ी चोद कर शेर बनता है ? ' 'ईयाँह 'टीना की कसैल चूत चोदते - चोदते बड़े-बड़े पहलवान झड़ गये ईयाँह ‘आँह मादरचोद, तेरे टट्टे सूख जायेंगे ‘ऐंह, जय तो गाली-गलौज का आदी था, पर टीना जी का रक्त अपने पुत्र के एक ही वाक्य को सुन कर खौलने लगा था।

लगी शर्त कुतिया! मैं झड़ा तो गाँड मरवा दूंगा!” । ६ : ‘आइंह 'ऐ ऐंह डैडी से मरवानी होगी !” “ओके! तू झड़ी तो मेरा वीर्य पियेगी !”

लगी शर्त, मादरचोद ! : ‘आँह ऐंह : ', टीना जी बड़ी अदा से मुँह फेर कर पलटीं, और मेज पर लेटे हुए ही प्रेमपूर्वक शरारत में अपने बेटे के मुंह पर थूक दिया, “थू! ले मादरचोद, तेरा ईनाम!: ‘आँह . ) ।

जय ने बड़ी बेतकल्लुफ़ी से माँ की थूक को चेहरे से पोंछा और लन्ड पर मल कर सैक्स क्रीड़ा को जारी रखा। टीना जी अपने पुत्र की ढीठता को देख कर एक पल स्तब्ध हो गयीं, और दूसरे ही पल शेरनी सी उत्तेजित हो गयीं। माता की पाश्विकता का जय ने ईंट से पत्थर वाला उत्तर दिया था। जय अब माँ पर अपने पौरुष का स्वामित्व स्थापित कर चुका था। प्रमाण के तौर पर उसने अपनी माँ को लम्बे काले बालों को दोनो हाथों से समेटा और एक मुट्ठी मे बाँध कर हल्के-हल्के खींचने लगा। टीना जी अब एक लाचार घोड़ी की तरह थीं, जिसकी लगाम जय के हाथों में थी। जय अपने लिंग पर भरपूर आत्म-नियंत्रण किये हुए था। पर टीना जी बेसुध होकर कामुकता के प्रवाह में बह रही थीं।

हरामजादी, बोल कितना किराया लेगी गाँड का ?” ८ : ‘आँह सौ रुपये में एक बार ।” बच्चों और बूढ़ों की फ्री एन्ट्री !”, जय गुर्राया, “यानी तेरे बाप और ससुर को फ्री है, समझी राँड ?”

* : ‘हा हा मादरचोद, मेरे बाप का लन्ड तो अब खड़ा भी नहीं होता है! : ‘आँह 'ऊँह बोल हरामी, करेगा चूस कर नाना जी का लन्ड खड़ा ?”, टीना जी कच्ची खिलाड़ी नहीं थीं। सुनकर जय ने अपने कूल्हों की गति को अधिक तीव्र कर दिया, मेज अब चूं-चू कर रही थी।

“सुअरनी, तूने होमो को नहीं जना है चूत से! रिश्ते में चोदता हूँ पर चोदता सिर्फ औरतों को ही हूँ !” जय ने कलाई का झटका देकर माँ के बालों को खींचा। टीना जी ने दाँत भींच लिये और भौहें उठा कर रणचण्डी सा आगबबूला निगाहों से पीछे देखा।

: ‘आँह लन्डचूस! आँह होमो नहीं तो झड़ता क्यों नहीं ?”, टीना जी त्रिया-चरित्र के हर दाँव को पहचानती थीं। टीना जी पसीने से तरबतर थीं, किसी भी समय सम्भोग के चरमानन्द को प्राप्त कर सकती थीं।

“थू!” इस बार थूकने वाला जय था। जय ने माँ के केश पकड़ कर उनका चेहरा पीछे फेर लिया था, और उसी चेहरे पर नटखटता से थूक दिया। “ले झड़ गया! राँड, फिर दो बार, “थू! थू!” । हर स्त्री पुरुष के स्वामित्व और संरक्षण की इच्छा रखती है। जय ने माँ की ललकारों से दबे बिना अपने पौरुष का लोहा मनवा लिया था। टीना जी के अन्तरमन ने जय के खुद पर स्वामित्व को अपने तन व मन दोनो से स्वीकर कर उसे जीवन में पुरुष का दर्जा दे दिया था। स्वीकृति की यही वो अलौकिक घड़ी होती है जब नारी सर्वोच्च आत्मिक और दैहिक सुख की प्राप्ति पाती है। सहसा इसी अनुबोध ने टीना जी को ऑरगैस्म दिला दिया। उनकी देह में एक बाँध टूटा

और जाँघों के बीच से उमंग की लहरें उठने लगीं, जो फैल कर उनके रोम-रोम को पुलकित करने लगीं। जय के पौरुष-पाश में जकड़ी हुई वे निर्बल नवयौवना की तरह कामतृप्ति के प्रभाव से चीत्कार करने लगीं।

“ऊँह 'आआह 'मेरे लालः ''आह अआआहहहः 'मेरा बेटा, मेरा मरदः ‘आँहः आँहः जय, अब मम्मी तेरी रखैल है !” जय माँ की आत्मसमर्पण भरी बातें सुनकर फूला नहीं समा रहा था। उसे अपने पौरुष बोध और माँ को ऐसा आनन्द दे पाने पर बहुत गर्व हो रहा था।

 
साथ बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तो
 
57 सवेरे वाली गाड़ी

* शर्त तो तुम हार गयी, मम्मी। कहो, कैसी रही ?”, जय ने अपनी आनन्द में घुलती माँ से पूछा।

मम्म मजा आ गया, मेरे लाल ::: लाइफ़ में ऐसी मस्ती शायद ही पहले कभी की होगी !”, उन्होंने उत्तर में कहा। टीना जी की देह अब भी उनके जबरदस्त ऑरगैस्म के झटकों के तले थरथरा रही ती। उनकी टाँगें दुर्बल होकर ढीली पड़ चुकी थीं, बस उनका धड़ केवल मेज के सहारे लेटा हुआ था।

जय ने अपने सदैव-उत्तिष्ठ लिंग को माँ की गुलाबी कोपलों वाली योनि की लिसलिसी तपन के अन्दर निरन्तर आगे-पीछे चलाना जारी रखा था। इस तरह वह अपनी माता के बदन में काम की धधकती ज्वाला को बरकरार किये हुआ था।

“मम्मी, तेरे बेटे में अब भी बहत दमखम बाकी है! बोल तो और चोदूं ?”, टीना जी के कन्धों को चूमता हुआ और उनकी गर्दन पर गरम साँसें छोड़ता हुआ जय पूछ बैठा।

“मादरचोद ::! बेटा तू आदमी है या साँड! इतनी जल्द फिर चोदने को तैयार ? तेरा बाप तो इतने में कब का पस्त हो गया होता! चल साले, तू साँड है तो मैं वो कुतिया हूँ जिसकी चूत की प्यास कभी नहीं मिटती !”, टीना जी अपनी संज्ञा के पात्र प्राणी की तरह ही बिलबिला रही थीं, “आजा मेरे पहलवान साँड, चोद दे फिर एक बार अपनी कुतिया मम्मी को !” टीना जी का मन जय के विशालकाय लिंग से अभी कहाँ भरा था! युवावस्था में ही सैक्स कला में कैसे कौशल का प्रदर्शन किया था उसने । सम्भोग में ऐसा दिव्य आनन्द उन्होंने बरसों बाद पाया था। अपनी सन्तान को जिस प्रेम और दुलार से उन्होंने पालपोस कर बड़ा किया था, उन्हें आज अपनी ममता का सचा फल मिल गया था। उनकी स्वयं की कोख से जना लाल अपने लिंग को उसी कोख में ठेलता हुआ, टीना जी को अविस्मर्णीय दैहिक सुख की अनुभुतियाँ फलस्वरूप दे रहा था! काश यदि उनके दो पुत्र होते, तो दोनो ही से सम्भोग कर पातीं। वो भी एक ही साथ! हाँ, हाँ जरूर, एक उनकी योनि में लिंग घुसाये होता, दूसरा उनकी गुदा में लिंग डालता। “ऊउहहह, हाँ! ऐसे बड़ा मजा आता!”, सहसा उनके मुख से मन की बात निकल पड़ी।

क्या, मम्मी ? कैसे आता मज़ा ? कह तो सही, मैं करूंगा!", जय ने पूछा।

“अरे, कुछ नहीं! मैं तो यूँ ही बड़बड़ा रही थी !”, टीना जी ने झूठ बोलकर मन की इच्छा को छिपाया।

तू बस चोदता रह, जय! और इस बार तुझे भी झड़ना है। बोल मेरे लाल, मम्मी की चूत में अपना गाढ़ा और गरम वीर्य डालेगा ना ?”

 
“क्यों नहीं मम्मी, तूने ही तो अपने मम्मों से दूध पिला-पिला कर मेरे टटटों में ये वीर्य बनाया है। अब जिस चूत से पैदा हुआ था, उसमें अपने टट्टों को खाली करना तो मेरा फ़र्ज है ना, मम्मी!”, गर्वयुक्त स्वर में नौजवान जय बोला, “आज तो मम्मी, मेरे टट्टों मे तेरे वास्ते उतना ही ज्यादा दूध उबल रहा है, जितना डैडी ने आपको पिछली गर्मियों में ट्रेन के सफ़र दे दौरान दिया था। याद है, पिछली गर्मियों की छुट्टियों में हम ट्रेन में ननिहाल से घर वापस आ रहे थे, और आप और डैडी ने रात को ट्रेन में ही चुदाई चालू कर दी थी। डैडी ने इतना वीर्य निकाला था, कि आपको जाँघों पर बहने लगा था, और आपको रात को उठकर बर्थ पोंछनी पड़ी थी ?” टीना जी को वो ट्रेन का रात का सफ़र अच्छी तरह से याद था। मिस्टर शर्मा का लिंग तो उस रात खुले नल की तरह बह रहा था, पूरे दस मिनट तक लिंग से वीर्य-स्त्राव होता ही रहा था।

“मम्मी, मैं ऊपर की बर्थ पर लेटा सब देख रहा था। आप तो बिलकुल सैक्सी लग रही थीं। डैडी का काला, मोटा लन्ड कैसे आपकी गोरी चूत को चीर कर घुसा हुआ था, मम्मी! ठीक वैसी ही फ़ोटो मैने एक मैगजीन में देखी थी, जिसमे एक गोरी-चिट्टी चमड़ी की फ़िरंगिन औरत की गुलाबी चूत में एक काले हब्शी ने अपना एक फ़त का मोटा लन्ड घुसाया हुआ था। वही मैगजीन, जो घर आने के बाद आपने मेरे बिस्तर के नीचे से खोज निकाली थी।” | टीना जी को वो पत्रिका ठीक तरह से याद थी। अपने पुत्र के बिस्तर के नीचे ऐसी अश्लील पत्रिका पाकर,

और यह जान कर, की जय बहशः उन चित्रों को देख कर हस्तमैथुन करता होगा, टीना जी के हृदय में एक पाप भरी चुलबुलाहट कौंधी थी। पत्रिका के पन्नों में गोरी औरतों के साथ अति-दीर्घ लिंग के स्वामी काले हब्जियों को,

और अधेड़ उम्र की महिलाओं के संग किशोर बालकों को सैक्स करते हुए चित्रित किया गया था। चित्रों को देख कर वे ऐसी विचलित हो गयी थीं, कि जय डाँट-फटकार कर उन्होंने पत्रिका जब्त कर ली और मिस्टर शर्मा के साथ एक रात उन चित्रों का सूक्ष्म अध्ययन भी किया। उस रात मिस्टर शर्मा ने ऐसे जोश के साथ बढ़-चढ़ कर सैक्स किया था, जो सुबह की पहली किरणों के बाद जाकर थमा था। वो घटना उन्हें बड़ी अच्छी तरह से स्मृत थी!

“मम्मी, मैने ट्रेन में मुठ मारी थी! नीचे डैडी आपको चोद रहे थे, ऊपर में लन्ड हाथ में लिये रगड़ रहा था! सोच रहा था, कि आपको चोदने वाला मैं ही हूँ, मम्मी!”

“मेरे बुद्भू बेटे !”, टीना जी ने मुँह पलट कर आँख मारी, “अगर तभी मुझे बता देता, तो अब तक तो हम मिलकर कितनी ऐश कर चुके होते ! बोल मादरचोद, मम्मी-डैडी की चुदाई का मन्जर देखकर क्या तू भी वहीं ट्रेन में झड़ गया था ?”

“मम्मी, एक बार नहीं, दो बार! एक बार तो डैडी और आपकी चुदाई के टाइम, फिर अगली बार जब डैडी चुदाई के बाद सो गये थे।” टीना जी ने अपनी योनि की माँसपेशियों को जय के लिंग पर कसा।

“मादरचोद, मम्मी को चुदते देख तेरा लन्ड कुलाचे भरने लगा होगा !”, गौरव-युक्त स्वर में टीना जी बोलीं।

“लो कर लो बात! मम्मी, तेरी लिसलिसाती चूत की तस्वीर तो मेरे दिमाग में बस गयी! वो सपने में भी याद आती है तो लन्ड लाल कर देती है !”, माँ से वार्तालाप करते हुए जय अपने चर्चित लिंग को उनकी योनि में निरन्तर आगे और पीछे चला रहा था। लिंग के घर्षण द्वारा टीना जी की धधकती योनि की ज्वाला में ईंधन डाल रहा था।

“जब चुदाई करके आप दोनो सो गये, तो मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैने चादर सर पर ओढ़ ली और टार्च जला कर मुठ मारने लगा। अब मम्मी मुझे अन्धेरे में मुठ मारना पसन्द नहीं। अपनी आँखों से लन्ड को देखना पसन्द करता हूँ ताकि उसे किसी भीगी चूत में ठेलते हुए कल्पना कर सकें।”

“ऊउह, मेरे पूत !”, टीना जी काँप उठीं, “एक सैकन्ड अपना लन्ड बाहर निकाल , बेटा। इस बार तू मुझे आगे से चोद। मैं अपने लाडले बेटे को गले लगा कर चोदूंगी, और झड़ते वक़्त कस के चूमूंगी !”

“ओके, मम्मी!”

 
58 छैयाँ छैयाँ

जय का लिंग मातृ योनि की चिपचिपी गिरफ़्त से ‘प्लॉप्प' की जोरदार आवाज के साथ मुक्त हुआ। टीना जी ने करवट ली और टाँगों को चौड़ा पसार कर जय के सम्मुख मेज के कोने पर बैठ गयीं। अब वे अपने पुत्र की आँखों में आँखें डाल कर सम्भोग का आनन्द उठा सकती थीं। उन्होंने जब अपनी पतली बाँहों में जय की गर्दन को लपेटा और अपनी योनि की दिशा में खींचा, तो जय ने ऐसी निरी कामुक दृष्टि से उन्हें देखा, कि वे पुत्र पर लट्टू हो गयीं। किशोर जय ने जैसे अपने श्याम वर्ण के लिंग को माँ की भाप उगलती योनि में दोबारा प्रविष्ट कराया, उनके हृष्ट-पुष्ट स्तन जय के सीने पर दब गये। कामावेग पीड़ित माता-पुत्र के भीगे होंठों का नम मिलन हुआ। सम्भोग की शुरुआत के उपरान्त पहली बार माता-पुत्र चुम्बन कर रहे थे। चुम्बन अत्यन्त आवेग-युक्त और कामुक था, दोनो पापी प्रेमियों की दैहिक तड़प से भरा हुआ। टीना जी ने हाँफ़ते हुए अपना मुख जय के चूसते होंठों से अलग किया।

“जय, तेरा लन्ड मम्मी को बहुत प्यारा है! देख कैसे मुआ मेरी चूत को फाड़ता हुआ चोंचले पर रगड़ रहा है!”, जय की माँ ने फुकारते हुए कहा, और उसके कान को अपने होंठों मे पकड़कर चबाने लगीं। टीना जी ने अपनी उचक कर जय के गहरे जुते हुए लिंग पर कसा, तो उनके उभरे हुए निप्पल उसके सीने पर चुभने लगे।

बोल जय बेटा, मैगजीन में फ़ोटो देखते हुए मुठ मारने से ज्यादा मस्ती तो मम्मी को चोदने में है ना ?”

“अँहह! बिलकुल मम्मी, तेरी चूत की कसम, मः ‘मादरचुदाई में तो अहह बहुत मस्ती है !”, जय बोला।

“क्या मुठ मारते हुए मैं अक्सर तेरे ख्यालों में आती हैं, जय !?”, मिसेज शर्मा ने एक आगे को एक जोरदार झटका देकर, अपने पेड़ को जय के लिंग के तने पर रगड़ा।

“अः ‘अक्सर मम्मी! पर कभी-कभी कमलाबाई, अऔर मूड बना तो सोनिया के नाम पर भी मुठ मार लेता

“ओहो ! जनाब का लन्ड बहन सोनिया को देख कर भी फुदकता है ?”, टीना जी की दिलचस्पी जाग उठी थी। मेरे लाडले, बोल कब से तेरे खुराफ़ाती दिमाग में बहनचोदी का भूत चढ़ा हुआ है ?” ।

 
अरे मम्मी, उसी ट्रेन के सफ़र की रात से।”, जय अपनी माँ का कस के आलिंगन करता हुआ बोला। “मैं मजबूर था मम्मी। तुझे बाप से चुदते देख कर मेरा लन्ड शांत होने का नाम नहीं लेता था। चादर के अन्दर टार्च जला कर मैं मुठ मारने लगा था। पहले तो तेरी चूत के नाम पर मार रहा था, पर फिर अचानक मेरे सामने वाली बर्थ पर सोनिया नींद में कराहने लगी। सुनकर मैं तो चौंक गया, पर फिर देखा तो वो गहरी नींद में थी। गौर से देखा तो मम्मी, सोनिया की सैक्सी बॉडी को देख कर मेरे मन में शैतान जाग गया। उसकी नारंगी जैसे चूचियाँ नाइटी के नीचे से उभरी हुई थीं। मेरी बहन तो एकदम टोट माल है, निप्पल ऐसे कड़क, मेरा मूड तो बहनचोदी का हो गया !”

बहनचोद पापी, फिर क्या किया तूने ? मेरी बेटी को चोद डाला ?”, आशा भरे स्वर में जय की माँ ने पूछा।

“नहीं, मम्मी। मेरी हिम्मत नहीं हुई। पर लन्ड की कसम, मन तो करता था, कि लगाऊं छलांग और घोंप दू साली की चूत में अपना लन्ड! ऐसी बेशर्मी से बिना चादर ओढ़े सो रही थी, नाइटी उठकर नंगी टांगें दिखा रही थी, हरामजादी की पैन्टी तक दिख रही थी। मेरे दिमाग में तो ये नजारा देख कर बुखार चढ़ रहा था, मम्मी!” टीना जी ने अपनी अनुभवी योनि को पुत्र-लिंग पर सिकोड़ा और अपनी हथेलियों में उसके बलिष्ठ युवा नितम्बों को जकड़ा।

“बहन के बड़वे! फिर क्या किया !”, भारी साँसों के बीच मिसेज़ शर्मा ने पूछा।

“अब तो सोनिया को छुये बगैर नहीं रहा जा रहा था, मम्मी! मेरा लन्ड तो गधे की तरह दुलत्ती मार रहा था। मैने बढ़ कर अपना हाथ उसकी टांगों के बीच घुसा दिया।” टीना जी ने जय के कस के पेड़ को अपने पेड़ पर भींच लिया, और अपने चोंचले को उसके फिसलते लिंगस्तम्भ पर रगड़ती हुई सुनने लगीं।

अहहह! माँ के लवड़े! वो गरम थी क्या?”, उसकी माँ कराही, “सोनिया की चूत का टेंपरेचर कैसा था ?”

हाँ मम्मी! सोनिया की चूत में तो कोयले जल रहे थे, हालांकि मैने उसकी पैन्टी के पार से छुआ था! सोनिया जरूर कोई सैक्सी सपना देख रही होगी! मैने जैसे ही छुआ, साली ने झट से अपनी टांगें खोल दीं, फिर मैं एक हाथ से उसकी चूत मसलने लगा, दूसरे हाथ में अपने लन्ड की मालिश करता रहा। क्या मजा आ रहा था, मेरा सारा डर हवा हो गया! रगड़ते - रगड़ते, मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूत खुलती जा रही है। साली का चोंचला भी कड़ाने लगा, मम्मी। देखते ही देखते, उसकी पैन्टी भीग कर गीली हो गयी। हैं, हैं करके जोर-जोर से उसकी साँसें चलने लगीं। माँ कसम, मैं भी क्या ताव खा रहा था! फिर मेरे दिमाग में आयी कि क्यों ना सोनिया की चूत को उसकी पैन्टी उतार कर छुआ जाये। तो मैने एक सैकन्ड के लिये लन्ड से अपना हाथ हटा कर, हौले से उसकी गाँड को बर्थ से ऊपर उठाकर, उसकी नींद में खलल डाले बिना, बड़ी सावधानी से उसकी पैन्टी उतार दी।” ।

“उसकी पैन्टी बिलकुल गीली हो गयी थी, मम्मी! मैने उठा कर उसे सुंघा भी। क्या नशीली स्मैल थी मम्मी! माँ कसम, जैसे आपकी चूत की सोची थी, वैसी ही स्मैल थी, मम्मी!”, जय ने माँ के खुले होंठों का फिर चुम्बन लिया, और आगे की कहानी कहने से पहले उनके मुँह के अन्दर अपनी जिह्वा से टटोला।

 
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