परन्तु टीना जी का अनुभवी मुंह भी उसके प्रबल प्रवाह का मुकाबला न कर सका, जब तक की राज के सशक्त वीर्य स्खलन की प्रक्रिया थमने लगी, टीना जी के मुँह के कोनों से मलाईदार वीर्य की अनेक धारायें बाहर टपकने लगी थीं। एक सैकन्ड के लिये टीना जी ने अपने होठों को उसके लिंग से अलग किया और होठों पर अपनी जीभ फेरकर वीर्य चाटा। फिर हौले-हौले उसके लिंग को चूसना तब तक जारी रखा, जब तक उनके मुँह में उसका लिंग पुनः जागृत न होने लगा।
“हे ईश्वर, ऐसे जवान लौड़ों की ही तो मैं दीवानी हूँ !” टीना जी के मन में यह विचार उठा, और राज के तीव्रता से पुनर्जागृत होते लिंग की मोटाई से ठुसे उनके मुँह पर एक मुस्कान छाने लगी।
100 तीन तिलंगे
इस दौरान जैकूजी में रजनी जी और सोनिया नवयुवा जय के संग प्रणय लीला में मगन थे और उसे अविस्मरणीय कामानन्द प्रदान कर रहे थे। लड़का टब में अपनी पीठ के बल लेटा हुआ था और उसकी बहन की कोमल योनि उसके मुख पर सपटी हुई थी। उधर मोहतरमा रजनी शर्मा जी सोनिया की ओर मुंह कर अपनी योनि को जय के तने हुए लिंग पर ऊपर से नीचे कुदा रही थीं।
“अममम, देखिये आँटी, मेरा बहनचोद भाई कैसे मस्ती से चूत चाटता है !” सोनिया ने उखड़ी साँसों के बीच कहा, उसकी कंपकंपाती योनि अपने भाई की जिह्वा के प्रतिवादस्वरूप दमकती गर्माहट बिखेरने लगी। । “ओहहहह, हाँ जय! मुझे चूसो भैया! मुझे चूसो और आँटी को चोदो भैया! ऊऊहहह, देखिये आँटी साला रन्डी की औलाद कैसे हम दोनो के मजे ले रहा है! बहनचोद, उचका अपने चूतड़, चोद रजनी आँटी की चूत को, माँ के पिल्ले !” ।
“ओहहह, या ऊपर वाले, दे मार कस के अंदर, जय !” रजनी जी उत्तर में कराहीं, उन्होंने अपनी जाँघों को जरा फैला कर अपनी योनि के भीतर उसकी कड़क और लम्बी छड़ के एक और अंश को निगल लिया। “सोनिया बेटी, तेरे बहनचोद भाई ने पहलवान का लन्ड पाया है! देख ना, अपनी माँ का दूध पी-पी कर साले का लन्ड कैसा तगड़ा हो चुका है! ओहहह, जय, तेरा ये मुस्टन्डा लन्ड तो अब मुझे झड़ा कर ही छोड़ेगा !” । |
सोनिया ने अपनी आँखों के समक्ष रजनी जी के स्तनों को लुभावने अंदाज में झूमते हुए देखा तो आगे जुखकर वयस्का के निप्पलों को चूसना आरम्भ कर दिया। कितना रोमांचकारी था यह अनुभव, एक ओर उसके बड़े भैया' उसकी योनि को चूस रहे थे, तो दूसरी ओर रजनी आँटी के साथ सम्भोग कर रहे थे। जैसे वो रजनी जी के स्तनों को निचोड़- निचोड़ कर चूसने लगी, सोनिया ने अचानक अपने कल्पनालोक में स्वयं को अपनी माँ के साथ इसी मुद्रा में यही क्रिया अपने पिता के ऊपर बैठकर करते हुए देखा। इस विचार मात्र से उसकी कोमल योनि अपने भाई के मुँह में मादा द्रवों का संचार करने लगी।
ऊँहहह! आहहहहह !” रजनी जी चीख पड़ीं, और अनियंत्रित जुनून का प्रदर्शन करती हुईं ऐंठती हुई अपने कूल्हों को ऊपर से नीचे झटकने लगीं। वे अपनी योनि को निर्ममता से जय के जकड़े हुए लिंग पर उठा-उठा कर मारने लगीं। “ओ मेरे ऊपर वाले, जय, घुसा अंदर बेटा! चोद मुझे कस के, मेरे पहलवान लड़के! उम्मममम ! वाह! अब गया रन्डी की औलाद तेरा लन्ड चूत के अंदर !”