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राज जानता था कि सोनिया अपने नख़रों से उसकी मर्दानगी को उकसा रही थी। जाहिर था कि चुदाई की प्यास में तड़प रही थी। राज अपनी गर्माती जवानी और ललचाती नीयत पर काबू पाने के उद्देश्य से पूल का एक पूरा चकार तैर गया। पर पूल के दूसरे किनारे पर हुंचा तो सोनिया के जिस्म को पनी के अन्दर अपनी टांगों पर रगड़ता हुआ पाया। जैसे ही अचानक सोनिया सतह पर उभरी तो उसके मम्मे राज के सीने पर मसल गये।
“स्विमिग तो अच्छी कर लेते हो। और कुछ भी आता क्या ?”
सोनिया ने भौहें चड़ाते हुए बोला।
जानेमन! एक बार आज़मा के तो देख !”
राज की ललकार के जवाब में सोनिया ने एक हाथ अपनी गर्दन के पीछे किया और अपनी बिकीनी के टॉप का हुक खोल दिया। उसके दोनों स्तन लायक्रा के पाश से मुक्त हो कर गुब्बरों जैसे झूलने लगे।
राज ने आँखे फाड़े नीची निगाह कर के उन्हें देखा और नोट किया किया कि अट्ठारहवें सावन में सोनिया के स्तन मीठे सन्तरों से पक गये थे। गोरी, चिकनी छाती पर ठोस और पुष्ट स्तन। जरा भी लटकाव नहीं। नवयौवना के दो रूपाबरणों को देख कर राज के टट्टों मे चाहत का दर्द उठने लगा। उसे लगा कि उसके हाथ बने ही हैं इन सन्तरों को निचोड़ने के लिये। सोनिया को खींच कर उसकी चूत में अपना लन्ड घुसा दे और तब तक चोदे जब तक वो उससे दया की भीख न मांगने लगे। पर उसे शक था कि सोनिया भी चुदने में दिलचस्पी रखती है या सिर्फ़ फ़्लर्ट कर रही है, और जैसे ही उसने कोइ हरकात की, तो रेप केस कर देगी। उसने सोनिया की नियत जानने की ठानी!
समजो तुम्हारी आजमाइश शुरू।”, सोनिया ने दोनों हथेलियों में अपने मुलायम स्तनों को भर कर राज की तरफ़ इशारा करते हुए कहा।
“सोनिया तू तो बॉम्ब निकली! क्या मम्मे हैं!” राज आह भरता हुआ बोला।।
“क्या मुझे छुईमुई समझे हो ? दाब कर देखो इन्हें ।” सोनिया ने मुसुराते हुए राज के हाथों को पकर कर अपने स्तनों पर रख दिया।
“सुभान अल्लाह !” उतावले राज अपने बड़े-बड़े खुरदरे हाथों से सोनिया के नरम, मखन जैसे स्तनों को दबाने और सहलाने लगा। सोनिया अपनी एक जाँघ को झुला झुला कर राज के जघन भाग पर दबा रही थी। दूसरी चिकनी- चिकनी टांग जमीन से ऊपर उठा कर उसकी जाँघों के बाहर रगड़ रही थी। सोनिया को अपनी रगड़ती जाँघ पर राज के लन्ड की हर लर्जिश महसूस हो रही थी। जब राज का लन्ड उस पर छूने लगा, तो सोनिया की उतावली जवान चूत एक कलि जैसे खिल कर खुलने लगी, और लन्ड उसकी सकरी कोपलों के बीच टटोलने लगा। राज ने सोनिया को अपने सीने की तरफ़ खींच कर पूछा:
सोनिया! तेरी चूत कुआँरी तो नहीं है ?” ।
“तुम्हें क्या लगता है ?” सोनिया ने आह भरते हुए कहा।
मुझे लगता है कि मैं तुझे चोद दू !” राज ने आजू-बाजू देखा। मैदान साफ़ था। पूल की ऊंची दीवारों के कारं उन्हें वहाँ कोई नहीं देख सकता था।
“स्विमिग तो अच्छी कर लेते हो। और कुछ भी आता क्या ?”
सोनिया ने भौहें चड़ाते हुए बोला।
जानेमन! एक बार आज़मा के तो देख !”
राज की ललकार के जवाब में सोनिया ने एक हाथ अपनी गर्दन के पीछे किया और अपनी बिकीनी के टॉप का हुक खोल दिया। उसके दोनों स्तन लायक्रा के पाश से मुक्त हो कर गुब्बरों जैसे झूलने लगे।
राज ने आँखे फाड़े नीची निगाह कर के उन्हें देखा और नोट किया किया कि अट्ठारहवें सावन में सोनिया के स्तन मीठे सन्तरों से पक गये थे। गोरी, चिकनी छाती पर ठोस और पुष्ट स्तन। जरा भी लटकाव नहीं। नवयौवना के दो रूपाबरणों को देख कर राज के टट्टों मे चाहत का दर्द उठने लगा। उसे लगा कि उसके हाथ बने ही हैं इन सन्तरों को निचोड़ने के लिये। सोनिया को खींच कर उसकी चूत में अपना लन्ड घुसा दे और तब तक चोदे जब तक वो उससे दया की भीख न मांगने लगे। पर उसे शक था कि सोनिया भी चुदने में दिलचस्पी रखती है या सिर्फ़ फ़्लर्ट कर रही है, और जैसे ही उसने कोइ हरकात की, तो रेप केस कर देगी। उसने सोनिया की नियत जानने की ठानी!
समजो तुम्हारी आजमाइश शुरू।”, सोनिया ने दोनों हथेलियों में अपने मुलायम स्तनों को भर कर राज की तरफ़ इशारा करते हुए कहा।
“सोनिया तू तो बॉम्ब निकली! क्या मम्मे हैं!” राज आह भरता हुआ बोला।।
“क्या मुझे छुईमुई समझे हो ? दाब कर देखो इन्हें ।” सोनिया ने मुसुराते हुए राज के हाथों को पकर कर अपने स्तनों पर रख दिया।
“सुभान अल्लाह !” उतावले राज अपने बड़े-बड़े खुरदरे हाथों से सोनिया के नरम, मखन जैसे स्तनों को दबाने और सहलाने लगा। सोनिया अपनी एक जाँघ को झुला झुला कर राज के जघन भाग पर दबा रही थी। दूसरी चिकनी- चिकनी टांग जमीन से ऊपर उठा कर उसकी जाँघों के बाहर रगड़ रही थी। सोनिया को अपनी रगड़ती जाँघ पर राज के लन्ड की हर लर्जिश महसूस हो रही थी। जब राज का लन्ड उस पर छूने लगा, तो सोनिया की उतावली जवान चूत एक कलि जैसे खिल कर खुलने लगी, और लन्ड उसकी सकरी कोपलों के बीच टटोलने लगा। राज ने सोनिया को अपने सीने की तरफ़ खींच कर पूछा:
सोनिया! तेरी चूत कुआँरी तो नहीं है ?” ।
“तुम्हें क्या लगता है ?” सोनिया ने आह भरते हुए कहा।
मुझे लगता है कि मैं तुझे चोद दू !” राज ने आजू-बाजू देखा। मैदान साफ़ था। पूल की ऊंची दीवारों के कारं उन्हें वहाँ कोई नहीं देख सकता था।