| माता की वासना से बावली चीखों ने जय की कामोत्तेजना की अग्नि में घी का काम किया। पाठकों, आप ही बतायें, ऐसी स्त्री, जो साधरणतय कुलीनता की मूर्ती हो, यदि आपके साथ सम्भोग के समय, वही स्त्री, अपने मुख से ऐसी गन्दी और निर्लज्ज बातें करे, तो क्या आपका पौरुष चुनौती पाकर नहीं भड़केगा ? क्या आपको सैक्स के आनन्द में कोटि-कोटि वृद्धि नहीं होगी ? दोस्तों, अगर आप भी जय की तरह भाग्यवान होते और अपनी सगी माता के संग प्रणय क्रिया के समय उनके श्रीमुख से ऐसे गन्दे वचनों द्वारा अपने परुष को उकसाते हुए सुन लेते, तो आपका लिंग भी जय ही की तरह सूज कर दैत्यकारी आकर ले चुका होता।
"बिलकुल चोदूंगा, मम्मी! तेरे दूध का कर्ज मैं तेरी ही कोख को चोद कर उतारूंगा! मेरी रन्डी मम्मी, तू मेरे बाप की चुदाई भूल जायेगी !", जय नथुने फुला कर मस्त साँड की तरह अपनी माँ की उठी हुई योनि के भीतर लिंग के क्रमवार प्रहार करता हुआ बोला।
टीना जी जय की कहानी में कमलाबाई की मुँहफट अश्लील बाषा से बड़ी उत्तेजित हुई थीं। साथ ही कुछ ईष्र्या भी थी कि भंगिन ने किस तरह उनके पुत्र को अपनी अश्लीलता से रिझा लिया था। अपनी कुलीन शिक्षा और सभ्य व्यव्हार को त्याग कर टीना जी भी आज वेश्या अवतार में उतर कर अपने सैक्स जीवन में एक नवीन अनुभव पाना चाहती थीं। साथ ही पुत्र के समक्ष अपनी पाश्विक वासना का प्रदर्शन कर अपने व्यक्तित्व के रूद्र पहलू को उजागर करने और खुद को सर्व-गुण सम्पन्न दिखलाने का ध्येय भी रखती थीं वे । वो स्त्री ही है जो पुरुष को रिझाने के वास्ते खुद को किसी भी रूप में ढाल सकती है। आज तो उनके त्रिया-चरित्र का पात्र पुरुष स्वयं उनका पुत्र था!
"आँह :: अबे तेरे बाप ने जिस चूत को चोदकर तुझे पैदा किया है, आज तू उसे ही चोद रहा है! : 'आँह 'ऐंह 'ई' 4 : 'आँह ऊँह जिस लन्ड से जमादारिन की गाँड मारी, ''आइँह उसी से मम्मी को चोदता है!"
अबे उचक! मादरचोद जब लन्ड चूत में अन्दर घुसाता हैं तो एड़ी को उचका कर अन्दर झटका दे! 'आँह कमलाबाई ने तुझे नहीं सिखाया ?"
"ऊँह 'आँह मादरचोद, तेरी मम्मी की चूत को छोड़ कर परायी जमादारिन को चोदता है? आँह फिर मम्मी को चुदवाने वास्ते क्या बाजार जाना होगा ? ''आँह ऊँह आँह ऊँह बोल साले, धंधा करवायेगा माँ से
"राँड, मैं तेरी चूत चोदूंगा, और तेरी गाँड को किराये पर उठा दूंगा!", जय ने भी हिम्मत दिखायी।
"जा सूअर, तुझसे नहीं चुदने की!' 'आह' 'भोंसड़ी चोद कर शेर बनता है ? ' 'ईयाँह 'टीना की कसैल चूत चोदते - चोदते बड़े-बड़े पहलवान झड़ गये ईयाँह 'आँह मादरचोद, तेरे टट्टे सूख जायेंगे 'ऐंह, जय तो गाली-गलौज का आदी था, पर टीना जी का रक्त अपने पुत्र के एक ही वाक्य को सुन कर खौलने लगा था।
"बिलकुल चोदूंगा, मम्मी! तेरे दूध का कर्ज मैं तेरी ही कोख को चोद कर उतारूंगा! मेरी रन्डी मम्मी, तू मेरे बाप की चुदाई भूल जायेगी !", जय नथुने फुला कर मस्त साँड की तरह अपनी माँ की उठी हुई योनि के भीतर लिंग के क्रमवार प्रहार करता हुआ बोला।
टीना जी जय की कहानी में कमलाबाई की मुँहफट अश्लील बाषा से बड़ी उत्तेजित हुई थीं। साथ ही कुछ ईष्र्या भी थी कि भंगिन ने किस तरह उनके पुत्र को अपनी अश्लीलता से रिझा लिया था। अपनी कुलीन शिक्षा और सभ्य व्यव्हार को त्याग कर टीना जी भी आज वेश्या अवतार में उतर कर अपने सैक्स जीवन में एक नवीन अनुभव पाना चाहती थीं। साथ ही पुत्र के समक्ष अपनी पाश्विक वासना का प्रदर्शन कर अपने व्यक्तित्व के रूद्र पहलू को उजागर करने और खुद को सर्व-गुण सम्पन्न दिखलाने का ध्येय भी रखती थीं वे । वो स्त्री ही है जो पुरुष को रिझाने के वास्ते खुद को किसी भी रूप में ढाल सकती है। आज तो उनके त्रिया-चरित्र का पात्र पुरुष स्वयं उनका पुत्र था!
"आँह :: अबे तेरे बाप ने जिस चूत को चोदकर तुझे पैदा किया है, आज तू उसे ही चोद रहा है! : 'आँह 'ऐंह 'ई' 4 : 'आँह ऊँह जिस लन्ड से जमादारिन की गाँड मारी, ''आइँह उसी से मम्मी को चोदता है!"
अबे उचक! मादरचोद जब लन्ड चूत में अन्दर घुसाता हैं तो एड़ी को उचका कर अन्दर झटका दे! 'आँह कमलाबाई ने तुझे नहीं सिखाया ?"
"ऊँह 'आँह मादरचोद, तेरी मम्मी की चूत को छोड़ कर परायी जमादारिन को चोदता है? आँह फिर मम्मी को चुदवाने वास्ते क्या बाजार जाना होगा ? ''आँह ऊँह आँह ऊँह बोल साले, धंधा करवायेगा माँ से
"राँड, मैं तेरी चूत चोदूंगा, और तेरी गाँड को किराये पर उठा दूंगा!", जय ने भी हिम्मत दिखायी।
"जा सूअर, तुझसे नहीं चुदने की!' 'आह' 'भोंसड़ी चोद कर शेर बनता है ? ' 'ईयाँह 'टीना की कसैल चूत चोदते - चोदते बड़े-बड़े पहलवान झड़ गये ईयाँह 'आँह मादरचोद, तेरे टट्टे सूख जायेंगे 'ऐंह, जय तो गाली-गलौज का आदी था, पर टीना जी का रक्त अपने पुत्र के एक ही वाक्य को सुन कर खौलने लगा था।