15 माता-पुत्र मिलन
जय के हाथ अब मिसेज शर्मा के नितंबों पर थे। उनके स्तनों को के बाद अब उनकी छिकनी गोल गाँड के माँस को निचोड़ कर दबाने का मजा वो ले रहा था। उसका लन्ड टिन्ना जी की पैन्टी लिप्त चूत पर और भी टाईट रगड़ रहा था। अपनी माँ की मटकेदार गाँड को हाथों में भर कर अपने तने लन्ड को उनकी चूत पर ठेलते हुए उसके जिस्म में जानवरों सी सैक्सोत्तेजना जाग रहीं थी।
गाँड़ पर जय के हाथ पाकर टीना जी के मुँह से दबी सी चीख निकल गई और वो पीछे बिस्तर कि तरफ़ जय को अपनी तरफ़ खेंचते हुए ले गयीं। जैसे ही टीना जी के तलुवे बिस्तर के किनारे को छुए तो वे पीठ के बल बिस्तर पर गिर पड़ी और जय को अपनी देह के करीब झुकाते हुए नीचे को खींच दिया। औरत जैसे ही ताकतवर पुरुष को जांगों के बीच पाती है तो खुद-ब-खुद टांगें खोल देती है। लिहाजा बेटे के लिये टीना जी ने मचलते हुए जाँघों को चौड़ा कर चूत के कपाट का ताला जय के दनदनाते लन्ड के लिये खोल दिया।
जय ने गर्व से अपने विशाल लन्ड के साये में अपनी माँ के मचलते जिस्म को, जिसे आज उसके लन्ड ने फ़तह किया था, एक नज़र देखा। उनका सल्वार सूट कमर पर इकट्ठा हुआ पड़ा था, गोरे-गोरे मम्मे उसके निचोड़ने से लाल होकर दो रसीले खरबूजों की तरह बाहर झांक रहे थे। अपने सर को माँम की छुहाति पर झुका कर निप्पलों को चूसता हुआ मातृ प्रेम का रसास्वादन करने लगा। । "ओह ! जय चूस ले मम्मी के स्तन। मुझे निहाल कर दे मेरे लाल ।" टीना जी ने जंगली लहजे में अपने कुल्हों को बेटे के घोड़े जैसे लन्ड पर रगड़ते हुए कहा।
जय का लन्ड ने साँप की तरह अपने बिल की टोह खुद ही ले रहा था। और इस बार लन्ड से चूत के अलौकिक स्पर्श के दैवी आनन्द ने कामोत्तेजित जय के सब्र का बाँध ही तोड़ दिया। वो अपनी माँम की पैन्टी से लिपटी चूत पर दे लगा मारने अपना लन्ड। टीना जी ने पैन्टी के महीण सैटिन के कपड़े से अपनी चूत के चोचले पर अपने बेटे के शक्तिशाली लन्ड के प्रहारों को पड़ते हुए महसुस्स किया।
"मादरचोद ने बैल जैसा ताकत्वार लन्ड पाया है! पैन्टी को चीर कर जैसे अभी चूत में घुसा जाता है !" इस बेहयाई से भरे खयाल ने उसके सब्र के बाँध को भी तोड़ दिया।
"ऊह्ह जय !!" अपनी चूत की गहरयीं मे अब मस्ती की लहरें उछलती महसूस कर रही थी।
"जय बेटे! हे ईश्वर! मैं तो ..! जय! मम्मी अब झड़ रही है !"
जय के हाथ अब मिसेज शर्मा के नितंबों पर थे। उनके स्तनों को के बाद अब उनकी छिकनी गोल गाँड के माँस को निचोड़ कर दबाने का मजा वो ले रहा था। उसका लन्ड टिन्ना जी की पैन्टी लिप्त चूत पर और भी टाईट रगड़ रहा था। अपनी माँ की मटकेदार गाँड को हाथों में भर कर अपने तने लन्ड को उनकी चूत पर ठेलते हुए उसके जिस्म में जानवरों सी सैक्सोत्तेजना जाग रहीं थी।
गाँड़ पर जय के हाथ पाकर टीना जी के मुँह से दबी सी चीख निकल गई और वो पीछे बिस्तर कि तरफ़ जय को अपनी तरफ़ खेंचते हुए ले गयीं। जैसे ही टीना जी के तलुवे बिस्तर के किनारे को छुए तो वे पीठ के बल बिस्तर पर गिर पड़ी और जय को अपनी देह के करीब झुकाते हुए नीचे को खींच दिया। औरत जैसे ही ताकतवर पुरुष को जांगों के बीच पाती है तो खुद-ब-खुद टांगें खोल देती है। लिहाजा बेटे के लिये टीना जी ने मचलते हुए जाँघों को चौड़ा कर चूत के कपाट का ताला जय के दनदनाते लन्ड के लिये खोल दिया।
जय ने गर्व से अपने विशाल लन्ड के साये में अपनी माँ के मचलते जिस्म को, जिसे आज उसके लन्ड ने फ़तह किया था, एक नज़र देखा। उनका सल्वार सूट कमर पर इकट्ठा हुआ पड़ा था, गोरे-गोरे मम्मे उसके निचोड़ने से लाल होकर दो रसीले खरबूजों की तरह बाहर झांक रहे थे। अपने सर को माँम की छुहाति पर झुका कर निप्पलों को चूसता हुआ मातृ प्रेम का रसास्वादन करने लगा। । "ओह ! जय चूस ले मम्मी के स्तन। मुझे निहाल कर दे मेरे लाल ।" टीना जी ने जंगली लहजे में अपने कुल्हों को बेटे के घोड़े जैसे लन्ड पर रगड़ते हुए कहा।
जय का लन्ड ने साँप की तरह अपने बिल की टोह खुद ही ले रहा था। और इस बार लन्ड से चूत के अलौकिक स्पर्श के दैवी आनन्द ने कामोत्तेजित जय के सब्र का बाँध ही तोड़ दिया। वो अपनी माँम की पैन्टी से लिपटी चूत पर दे लगा मारने अपना लन्ड। टीना जी ने पैन्टी के महीण सैटिन के कपड़े से अपनी चूत के चोचले पर अपने बेटे के शक्तिशाली लन्ड के प्रहारों को पड़ते हुए महसुस्स किया।
"मादरचोद ने बैल जैसा ताकत्वार लन्ड पाया है! पैन्टी को चीर कर जैसे अभी चूत में घुसा जाता है !" इस बेहयाई से भरे खयाल ने उसके सब्र के बाँध को भी तोड़ दिया।
"ऊह्ह जय !!" अपनी चूत की गहरयीं मे अब मस्ती की लहरें उछलती महसूस कर रही थी।
"जय बेटे! हे ईश्वर! मैं तो ..! जय! मम्मी अब झड़ रही है !"