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Incest पापी परिवार की पापी वासना (Completed)

25 एक से भले दो

डॉली तय नहीं कर पा रही थी कि उसे ज्याद मज़ा किस खयाल में आ राहा था - अम्मी की चूत चाटने से या फिर भाई के लन्ड को चाटने से! कराहते हुए डॉली ने अपनी नाईटी के बटन को खोल कर हथेली में एक मुलायम चूची को दबाया था। दूसरा हाथ अपनी गीली पैन्टी के अंदर अन्दर सरका और सुलगती चूत के होंठों को फैलाता हुआ उन्हें मसलने लगा था।

उसका ये मसालेदार सपना और भी चटपटा बन गया था जब डॉली ने देखा की वो अपने मुँह से अम्मी की रसीली चूत को पुचड़- पुचड़ कर चूस रही है और साथ ही उसका भाई उसकी टाइट चूत को अपने लन्ड से दनादान चोद रहा है। डॉली अपनी सपनों की दुनिया में, जहाँ सब कुछ मुमकिन था, और सब कुछ नमकीन था, खोई हुई थी। इतनी तल्लिन थी कि उसने इस बात पर गौर नहीं किया कि राज के बेडरूम से आती आवाजें अब थम चुकी थीं। वो अपनी सख्त चूचीयों के निप्पलों को निचड़ते और अपनी भीगी चूत को रगड़ते हुए, जिस्म में उबलती मस्ती के आगोश में धीमे-धीमे कराहती जा रही थी। अचानक अपने अन्धेरे रूम में हॉल से आती रोशनी से उसकी आँखें खुल पड़ी थीं। दहलीज पर राज खड़ा उसके अधनन्गे बदन को ललचाई आँखों से घूर रहा था। सोनिया के सामने बस राज का एक साया ही दिख रहा था, पर उसे यकीन था की राज की आँखें अपनी बहन के चूत को बेरहमी से मसलते हाथों पर टिकी हुई थीं। राज बेडरूम के अन्दर आया और डॉली के पास बिस्तर पर बैठ गया। । "बहन, तुम ठीक-ठाक तो हो ना ?" राज की चिन्ता वजा थी। उसने अपनी बहन के चेहरे पर जो बौखलाहट देखी थी, और उसे सुकून देना चाहता था। डॉली ने अपनी बाहें राज के चौड़े कन्धों पर डाल कर उसे गले लगा लिया था।

राज ! तू और अम्मीजान ... ऐसी हरकत ?" उसकी सिसकियो.म में गहरा इल्जाम था। राज ने उसे प्यार से गले लगाया था। साथ ही उसके तने हुए निप्पलों को अपने सीने पर महसूस भी किया था। । "ओह डॉली !", वो फुसफुसाया था, "मैं तो खुद पर शर्मिंदा हूं। पर अम्मीजान की बेसब्री ने मुझे ये गुनाह करने पर मजबूर कर दिया था !" बहन के जवाँ जिस्म में इन्तेहाई गर्मी थी जिसका फ़ौरी एहसास उसे पागल बनाये देता था।

"तू तो मजबूरी के बड़े मजे ले रहा था!", डॉली ने उसकी नशीली हरी आँखों मे आँखें डाल कर सवाल किया था।
 

"डॉली, मैं भी एक हाड़-माँस का इन्सान हूं। आदम की औलाद ही हूँ! मेरी जगह कोई भी जवाँ मर्द होता तो ऐसा ही करता। बस !" वो बोला था।

डॉली ने किसी तरह हिम्मत कर के भाई से और तफ़तीश की थी।

"क्या तूने अम्मीजान के अन्दर ही ::: याने .. " वो हकलाई। इतना कुछ देखने के बाद भी ऐसे अल्फ़ाज अपने भाई के सामने कहने में हिचकती थी।

अम्मी की चूत में झड़ा था ?" राज ने खुलासा किया। हाँ, हाँ क्या तू चूत के अन्दर ही झड़ा था ?" "नहीं डॉली, अम्मी की बेसब्री इतनी थी की इससे पहले कि मैं झड़ पात, वे ही झड़ गयीं !" राज अपनी बहन के चेहरे को देख कर मुसुराया था। । "ओह्ह राज । तुम दोनो को वहाँ तेरे बिस्तर पर ये सब करते देख कर, मैं ::: मेरे जिस्म में आग लग रही है राज !" अपने हाथों को प्यार से अपने भाई की मजबूत पीठ पर फेरती हुई बोली थी वो।।

आग इतनी तेज़ लगी थी मेरी चूत में कि अपने बेडरूम मे आकर मुझे अपने हाथों से ही इसका इलाज करना पड़ा।"

मैं भी अभी वही देख रहा था।" राज मुस्काया था, "पर मज़ा तो तब है जब चूत की मालिश किसी दूसरे के हाथ हो। ला बताऊं कैसे।" ।

राज के हाथ बढ़ कर अपनी बहन के नंगे जिस्म पर चलते हुए उसकी भीगी, गर्म चूत की मखमली चिकनाहट को सहलाने लगे थे। जैसे ही भाई का हैवानी इरादों लिया हाथ उसकी चूत पर फैली हरियाली को छुआ था, डॉली के मुंह से चौंकी सी आवाज निकली थी और खुद-ब-खुद उसकी जाँघे अलग होने लगी थीं। जाँघों के अन्दर की चिकनी -चिकनी चमड़ी पर रेंगता हुआ उसका हाथ जैसे चूत पर पड़ा तो गहरी-गहरी आहें भरने लगी थी वो।

बड़ी मोहब्बत से डॉली ने भाई राज की चड्ढी के अन्दर हाथ डाल कर उसके लन्ड को बाहर निकाला था। अभी-अभी अम्मी की चुदाई कर चुका था पर फिर भी बाँस सा तना हुआ था। डॉली उसकी लम्बाई का जाजजा करते हुए अपनी उंगलियों को उसके तने पर जड़ से सुपाड़े तक फेर रही थी। अपने हाथ में डॉली को लन्ड पहले से कहीं लम्बा लग रहा था। राज ने भी अपनी बहल की पैन्टी की इलास्टिक को एक तरफ़ कर के अपनी एक शैतानी उंगली उसकी टाइट और रसीली चूत में डाल दी थी।
 
26 नायाब जाम

ऊहहूहहूह !" राज की लम्बी उंगली के गहरे एहसास ने उसे कराहाने पर मजबूर कर दिया था, "राज ! मम्मी की तरह आज मुझे भी चोद! मेरी चूत तेरे लन्ड के लिये तड़प्प रही है! तुझे मेरी कसम, चोद डाल मुझे !" | बहन डॉली उससे चुदने की भीख माँग रही थी।

मम्मी से ज्यादा बेटाबी तो उसे हो रही थी। इस बात ने राज हैवानी इरादों को और पक्का कर दिया था। उसका लन्ड बहन डॉली के नाजुक हाथों मे धड़कने लगा था। एक ही रात के दर्मयान अपनी मम्मी और बहन को चोदने का मौका हम में से भला कितनों को मिलता है। बहरहाल, उसने डॉली से एक बात, मारे शरम के, छिपा ली थी। दरसल, चन्द ही मिनटों पहले वो अपनी मम्मी की चूत में झड़ा था। उसने अपनी मम्मी की कोख को अपने गरम, खौलते वीर्य से लबालब कर दिया था, और चूत से छलक कर उसके गाढ़े पीले रंग के वीर्य की कैई धारें जाँघों पर नीचे बहने लगी थीं। उस वक़्त तो झड़ने पर आये हुए जन्नत जैसे लुफ्त पर बड़ा शर्मिन्दा हुआ था। पर अब उसकी शरम पूरी हवा हो चुकी थी और जुड़वाँ बहन को चोदने की सुलगती प्यास उसके जेहन में घर कर चुकी थी।

राज का लन्ड अभी-अभी मम्मी की कोख में गन्गा-जमुना बहा चुका था। पर फिर भी उसका मर्दाना बदन बहन डॉली को चोदने की पूरी काबिलीयत रखता था। उसके जोरदार टट्टे जल्द ही लबालब भर कर वीर्य उड़ेलने को फिर तैयार हो गये थे। राज ने अपनी एक और उन्गली डॉली की टपकती चूत में डाली थी और उसे पीछे तकियों पर लिटा दिया था। कमसिन डॉली ने अपनी नाजुक टांगें पूरी तरह फैला कर भाई के लिये चूत का रास्ता साफ़ किया था। उसकी चूत गर्मा-गरम रोमांच से फड़कती हुई लगातार अपने भाई की गुदगुदाती उंगलीयों पर बहे जा रही थी। डॉली को अब सिर्फ उसके लन्ड का इन्तजार था।
भाई की टटोलती उंगलियों की हरकत के साथ-साथ डॉली भी कूल्हे उचका-उचका कर अपने चूत को उन पर मसलती थी। उसका तड़पता हुआ चोचला चूत के होंठो के बीच झूल रहा था। उसकी जाँघों के बीच बिजली के अनगिनत करंट से दौड़ रहे थे। डॉली अब बेहद ताव में आ गयी थी और चुदे बिना रह नहीं सकती थी। गिड़गिड़ाती हुई बोली:
"राज भाइ! मैं तुझसे चुदना चाहती हूं! अपना लम्बा, मोटा, काला लन्ड मेरी चूत मे डाल और चोद मुझे ! ऊउहहहह! मम्मी जैसे मुझे भी चोद !"
 
हाथ कंगन को आरसी क्या, राज ने इस बार फुर्ती से अपनी चड्ढी उतार फेंगी। बहन डॉली की भीगी पैन्टी को अपने दोनों अगूठों से उसकी लम्बी चिकनी टंगों पर से नीचे खींच कर उतार डाला। फिर बहन की जाँघों को चौड़ा फैला कर बीच में जैसा आ गया। अपनी सगी बहन की चूत का नूरानी हुस्न देख कर उसके मुँह से दबी सी सीटी निकल गयी। चूत अन्दर से सुर्ख रन्ग की थी और ग़ज़ब की टाईट! मम्मी की चूत से कहीं ज्यादा टाइट! मम्मी की झांटेदार चूत के होंठों ने खुद-ब-खुद फैल कर चूत के होंठो और अन्दर की टपकती, लल्वाति गहराईयों का नजारा उस पर जाहिर कर दिया था। पर डॉली की चूत के होंठ, उसकी जांघे पूरी तरह से फैली होने के बावजूद, बस जरा से खुल कर जन्नत की झलक भर दिखा रहे थे। बाहर से चूत पर दूब की तरह हल्के सुनहरे रन्ग के झांटे थे।

पहली बार बहन की चूत देखने पर राज के चेहरे की इबारत डॉली को आज भि याद थी। उस रोज़ से जब भी राज ने उसकी चूत चाटी थी, डॉली ने वही इबारत उसके चेहरे पर देखी थी।

"माशाल्लह! तेरा हुस्न तो लाजवाब है डॉली !" राज चूत पर झुकता हुआ बोल उठा था, "एक बार तो चख कर देखें जमजम का पानी !" कह के उसने होंठों को डॉली की खुली चूत पर कस दिया था। उसकी चूत के होंठो को चूसता हुआ अपने प्यासे मुँह में ले लिया था उसने। अपने दोनों हाथों को बहन की गाँड के नीचे रख कर उसकी चूत को अपने मुँह मे लगा-लगा कर चाट रहा था राज । जैसे रसीले तबूजे को खा रहा हो। जैसे ही उसाने जीभ चूत के अन्दर घुसा कर मुलायम चूत के अन्दर फेरी, तो डॉली मारे मस्ती के चीख पड़ी।

"ऊउहुहुह! शरीर! बहनचोद, और चूस! चाट साले बहन की चूत !" भाई की लार टपकाती जीभ की सनसनाती फुदकन उसकी टपकती गरम चूत को बड़ी मस्ती से कुरेद रही थी। बहन की जुबान से ऐसे बेलगाम गन्दे अल्फ़ाज़ सुनकार राज और ताव खाने लगा था। जीभ सुपड़ - सुपड़, सुडुप- सुडुप्प बहन की जायकेदार चूत में और गहरे चला रहा था। उसकी नाक डॉली के चोचले पर दब रही थी। इसके जवाब में डॉली ने अपनी छोटी सी चूत और दबा कर भाई के मुँह पर कस दी थी। राज की जीभ साँप की जीभ जैसी लहरा रही थी, और डॉली की कमर भी नागिन के मदमस्त बदन जैसी हवा में थीरक रही थी।
 
"सोनिया, साथ-साथ, अपना अंगूठा चूत में डाल !", डॉली ने नसीहत दी, "लन्ड जैसा ही मजा आता है !" सोनिया ने कहे अनुसार किया। चूत की चिकनी गुफ़ा में अपना अंगूठा डाल और उसकी बीच की उंगली से अपनी गाँड में खुजली जारी रखी।

"आह! मममम ! ओह! आहा !", जवान लौन्डिया अपने दोनो छेदों को एक साथ भर कर कराह रही थी। सोनिया तो जैसे सातवें आसमान पर थी! आँखें मूंद कर अपने हाथ से खुद को चोद रहि थी। अपनी गाँड और चूत पर दनादन रफ़्तार में रगड़ते हुए लगातार चीख और कराह रही थी। अपनी हवस से तैश खाकर ऐसी बेहूदी हरकतें करती हुई सोनिया को देख कर राज और डॉली ने भी अपने जिस्मों की मशक़्क़त में और जोश और फुर्ती दिखायी। डॉली की टांगें ऊंची उठी और फैली थीं, और उसके भाई का लन्ड उसकी बेसब्र चूत में बार बार अपना लन्ड गहरा घुसाता, फीर सुपाड़े तक बाहर खिंचता और फुर्ती से अंदर ठूस देता। राज के टट्टे फिच्च आवाज के साथ डॉली की चूतड़ों से टकराते।

ऊंघ! मेरी रन्डी बहन! कैसे फड़का रही है हरामजादी! चूत है या पटाखा ? क्या ये हुनर मम्मी ने सिखाया है ?", डॉली ने जैसे ही अपनी चूत की माँसपेशियों को सिकोड़ कर भाई के लंबे लन्ड को अंदर -ही-अंदर मसला, राज चीक उठा। डॉली मुस्कायी। उसने अपने तुरुप का पत्ता फेंका था। जानथी थी अब राज ज्यादा देर मैदान में नहीं टिक सकता। पर राज भी कच्चा खिलड़ी नहीं था। अपने मजबूत हाथों से बहन ही टांगों को ऊपर उठा कर अपने कन्धों पर टेक दिया और उसके कमसिन चूतड़ों को दोनों हाथों मे जकड़ कर अपनी पूरी ताकत से आगे ठेलने लगा। अब राज का लन्ड अपनी बहन की ऊपर उठी चूत में पहले से भी ज्यादा गहरा चोद रहा था। अपने भाई के ताबड़तोड़ बरसते लन्ड के हर झटके के साथ शबनमे के कान बज रहे थे। डॉली अपने पंजों से कुरेदती हुई अपने नाखूनों को राज की पीठ में गाड़ रही थी। उसके लन्ड को अपनी चूत के हर कोने में थूसने की चेष्टा में बिस्तर पर उचक-उचक कर चूं-चू आवाज कर रही थी।

चोद राज ! और कस के! और गहरा! उंघहहह! बहनचोद !", डॉली चीखी, उसकी आवाज अपनी हैरतंगेज़ मेहनत के मारे घर्रा रही थी।

राज ने बहन के चूतड़ों को आपस में भींच कर अपने ठोकते लनंद पर उसकी चूत के माँस के शिकंजे को और कसा। अपने लन्ड के हर जबरदस्त झटके के साथ वो डॉली की ऐंठती गाँड को बिस्तर के गद्दे में और टूसे देता था। सोनिया भाई-बहन के बीच होती इस बेहतरीन रस्सा-कशी को गौर से देख रही थी। दोनों पूरा दम लगा कर दूसरे को झड़ाने की कोशिश कर रहे थे पर खुद और अपने जिस्मों के उबाल पर मुश्किल से क़ाबू कर पा रहे थे। बहुत ही कड़ा मुक़ाबला था, दोनों खिलाड़ी एक दूसरे के जिस्मों से अच्छी तरह वाक़िफ़ थे और सैक्स के हर हुनर में माहिर भी। पर धीरे-धीरे राज का पलड़ा भारी लग रहा था, डॉली अब बहुत देर तक खुद पर क़ाबू नहीं रख रकती थी। उसके पेड़ में से एक जबरदस्त सैलाब उठ रहा था, जिसे कोई भी ताक़त नहीं रोक सकती थी।

"हाँ राज ! ओह्ह्ह , मैं झड़ी! उंहहह! चोद डाला साले! आँहुहुहुहुहुहुहुहुह !"

अपने भाई के मोटे थूषे हुए काले लन्ड के दोनो तरफ़ डॉली की पतली गोरी टंगें कसी हुई थीं। उसके जिस्म में उबलते हुए जुनून के असर से उसकी गोश्त से भरी चूत रह-रह कर फड़क रही थी।

अपनी ऐथती बहन के ऊपर झुका हुआ राज भी अब ज्यादा देर सब्र नहीं रख सकता था। अपने अंदर खौलते हुए वीर्य को बहन की जकड़ती चूत में उडेलने की तड़प के मारे उसके टट्टे कुम्हला रहे थे। पर किसी तरह उसने चन्द और पलों के लिये सब्र किया।

"शाबाश डॉली! रन्डी! देखी मेरे लन्ड की ताक़त! तुझे झड़ा दिया !", राज चीखता हुआ वहशी की तरह कूल्हे झटक-झटक कर अपने काले लन्ड से बहन की सुलगती सुख़ चूत को चोद रहा था।
 
सोनिया ये देख कर हैरान थी कि किस जंगली जोश से राज अपनी सगी बहन को चोद रहा है! उसे ये पूरा हादसा गैर - काबिल-ए-यक़ीन सा लगता था। उसका गीला, लिसलिसा लन्ड इतनी फुर्ती डॉली की तसल्ली से फैलायी हुई चूत में सिलसिलेवार हरक़त कर रहा था कि उसे जाँघों के बीच बस एक मोटी, काली धुंधलाहट सी ही धिख पा रही थी। राज का लन्ड उस टाइट म्यान की गिरफ्त में कैद था, और सोनिया बड़ी हैरात से चूत के सुर्ख होंठों को राज के लम्बे, मोटे अंग को एक छोटे से मुंह की तरह चूसते हुए देख रही थी। बेखुदी से सिसकियाँ भरते हुए डॉली अपने भाई के रौंदते लन्ड के हर झटके के साथ अपने कूल्हे ऊंचे उठा कर अपनी फैल कर खोली हूई चूत को उस पर धकेलती जा रही थी।

"बहनचोद! उंघ! उंघ! ओओह! रहम कर भगवान !", इस तरह डॉली चिखती रही। राज ने नीचे झुक कर अपानी एक उंगली इत्मिनान से उसकी छोटी सी टाइट गाँड में घुसा दी। राज अपनी बहन को अच्छी तरह से पहचानता था और उसे ताव देने के दो- चार शर्तिया गुर जानता था। दोनों के बीच जैसे मुक़ाबला हो रहा था, कि कौन पहले झड़ता है।

सोनिया ने राज की उंगली को डॉली की गाँड के धेद में जाते देखा और नीचे हाथ सरका कर अपनी चिकनी, गीली चूत से खेलने लगी। इस छेद का खयाल तो अब तक उसके जेहन में नहीं आया था। ताज्जुब कर रही थी कि कैसा एहसास होगा वो! सोनिया ने अपनी टांगों को पूरी तरह फैला दिया और अपनी चूत के रिसाव में एक उंगली को भिगो कर अपनी गाँड के छेद पर मलने लगी। गाँड के गुदाज छेद पर उंगली का खुशगवार एहसास पाकर उसने एक गहरी साँस भरी। अपनी नजरें चुदाई में मशरूफ़ वहशी जोड़े पर लगातार गाड़े हुए सोनिया ने धीमे-धीमे अपनी उंगली को मरोड़ते हुए गाँड के छेद में टटोला और अचानक छेद की माँसपेशी कुछ ढीली हुई और उसकी उंगली एक इन्च अपनी गाँड अंदर फिसल गयी।

"ओहह! अम्मम्म!", सोनिया शैतानी जुनून में कराह रही थी और हैरान हो रही थी कि कितनी आसानी से उंगली गाँड में घुस गयी थी। कुछ पलों बाद सोनिया हैरान हो रही थी कि गाँड में उंगली डालने में भी इतना कमाल का मज़ा मिल सकता है! संकरी सी गाँड उसकी टटोलती उंगली पर एक गर्मा-गरम, मखमली कसाव डाल रही थी और सोनिया अपनी उंगली और भी अंदर घुसाये जा रही थी। ऐसे एहसास उसके जवाँ जिस्म में आज से पहले कभी नहीं उठे थे। अपनी टाइट गाँड में उंगली घुसा - घुसा कर चोदने की उसकी इच्छा अब बर्दाश्त के बाहर हो रही थी। भाई-बहन सोनिया को अपनी गाँड के टाइट छेद में एक उंगली डाल कर अंदर बाहर हिलाते हुए देख रहे थे। राज ने मुस्कुरा कर नीचे डॉली कि तरफ़ देखा और बोला, "देख बहन ! लगता है सोनिया गाँड मरवाने की शौक़ीन है !" | डॉली ने पलट कर देखा थो सोनिया की उंगली को उसकी गाँड में पूरा घुसा हुआ पाया। सोनिया की अनछुई गाँड अब खुल कर फैल चुकी थी और उसकी उंगली एक लन्ड की तरह सोनिया की गरम, मक्खनदार गाँड को चोद रही थी।
 
सोनिया अपनी चूत को अपनी जाँघों के बीच चूसते मुंह और मचलती जीभ पर दबाती हुई राज के कुचलते चुंबन में जोर से कराहती हुई झड़ने लगी। सोनिया की चूत ने डॉली के मुँह को गरम, मलाईदार रिसाव से लबालब कर दिया, जिसे डॉली ने भी बड़ी खुशी से चाट लिया और उसकी चूत से आखिरी बूंद को भी निगल गयी।

जैसे सोनिया के जिस्म के धधकते शोले ठंडे पड़ने लगे, उसने अपनी टपकती चूत को डॉली के रिसाव से लथे हुए मुँह से उठाया और वहीं बिस्तर पर चकनाचूर हो कर पड़ गयी।

"लौन्डिया, कैसी रही चुदाई ?", राज ने पूछा।

सोनिया ने मदहोश हो कर ऊपर देख और गौर किया कि राज उसकी आनन- फानन फैली हुई चूत पर और उसकी लाल - लाल गहराईयों में से चुहुते हुए गाढ़ेरिसाव पर नजरे गाड़े था।

ओह, बढ़िया थी! चुदाई में मजा आ गया !", लौन्डिया को चुदाई के बाद वाकई बड़ा इतमिनान मिला था।

मेरा लन्ड तो रॉकेट की तरह सर्र - सर्र झड़ रहा था!", राज ने सोनिया के बचकाने उतावलेपन पर मुस्कुराते हुए कहा।

राज का लन्ड अब भी डॉली की चूत के अंदर पुरजोर फुदक रहा था। अब जो सोनिया की चूत उसके मुंह पर नहीं दबी हुई थी, डॉली अब अपना पूरा ध्यान उसकी कोख में ठंसे हुए लम्बे मोटे लन्ड पर लगा सकती थी। राज के हैवानी लन्ड को जैसे अपनी अंतड़ियों पर महसूस कर सकती थी वो। उसकी चूत के माँस पर लन्ड की गर्मी का एहसास होता था। अपनी कोख़ के दर पर लगातार खटखटाता सुपाड़ा उसके रग रग को गुदगुदा रहा था, खासकर उसके मुंमों को। उसने अपने हाथों को ऊपर कर के राज का सर बाँहों में लिया और अपने धौंकते मम्मों के दरम्यान रख दिया। उसके चाटते मुंह को पकड़ कर एक निप्पल से दूसरे निप्पल पर लगाने लगी। जल्द ही उसके दोनों मम्मे राज की थूक से सन गये। डॉली ने हवस से भरे लहजे में कराह कर कहा, "राज , मुझे और चोद! कस के चोद! हमेशा कि तरह चोद चोद कर झड़ा दे!"

राज ने अपनी बहन के चेहरे पर बेपनाह बेटाबी देखी। मारे जुनून के डॉली उसकी पीठ पर अपने नाखून गड़ाती हुई अपने पूर बलबूते से चूत को रौंद रही थी।

बहुत हो चुका डॉली बह!", वो गुर्राया, "अपनी टांगें ऊपर कर, हम सोनिया को असली चुदाई का नमूना दिखाते हैं !"

डॉली ने बात मानते हुए अपने घुटनों को फैला कर चौरा किया और अपनी टपकती चूत को पूरी तरह से खोल दिया। सोनिया तो डर रही थी कि राज का लन्ड उसकी बहन की चूत को फाड़ ही देगा, पर डॉली तो ऐसी ताबड़-तोड़ चुदाई की आदी थी। उसे भरोसा था कि उसकी चूत भाई के लन्ड के इन्च - इन्च को झेल सकती है! राज के लन्ड के हर फुख्ता ठेले के साथ राज का पेड़ छप्प-छप्प कर के सोनिया के चोंचले से मसल रहा था जो उसके तन-बदन में हवस की लहरें उठाये देता था। |

सोनिया ये देख कर हैरान थी कि किस जंगली जोश से राज अपनी सगी बहन को चोद रहा है! उसे ये पूरा हादसा गैर - काबिल-ए-यक़ीन सा लगता था। उसका गीला, लिसलिसा लन्ड इतनी फुर्ती डॉली की तसल्ली से फैलायी हुई चूत में सिलसिलेवार हरक़त कर रहा था कि उसे जाँघों के बीच बस एक मोटी, काली धुंधलाहट सी ही धिख पा रही थी। राज का लन्ड उस टाइट म्यान की गिरफ्त में कैद था, और सोनिया बड़ी हैरात से चूत के सुर्ख होंठों को राज के लम्बे, मोटे अंग को एक छोटे से मुंह की तरह चूसते हुए देख रही थी। बेखुदी से सिसकियाँ भरते हुए डॉली अपने भाई के रौंदते लन्ड के हर झटके के साथ अपने कूल्हे ऊंचे उठा कर अपनी फैल कर खोली हूई चूत को उस पर धकेलती जा रही थी।
 
राज को जैसे इसी घड़ी का इंतजार था। उसकी बहन भी अब तैयार थी! पलक झपकाते ही उसने अपने लन्ड को निशाने पर दागा और करारा जहटका दे कर अपने हैवानी लन्ड को डॉली की चूत में गहरा उतार दिया।

"अमममम :: : उंघ! उंघ! उ उ उ उ हह, या ऊपर वाले! राज !", राज का लन्ड जैसे ही टट्टों तक उसकी चूत के आगोश में समाया, तो सोनिया की चूत में ढूंसे हुए डॉली के मुँह से चीख निकली।

राज हमेशा से अपनी जुड़वाँ बहन की चूत की टाइट गिरफ़्त का कायल था। चाहे जितनी बार उसे चोद ले, उसके लन्ड पर हर वक़्त ऐसा एहसास होता था जैसे एक गरम, मखमली म्यान में जकड़ा हुआ हो! जिस वहशियाना रफ़्तार से उसका भाई अपने कमाल के मोटे लन्ड से उसकी चूत को चोद रहा था, उसी रफ़्तार से डॉली सोनिया की लिसलिसाती चूत में अपनी जुबान चलाती हुई राज के जिस्म के नीचे कराह और ऐंठ रही थी। ऐसा लगता था कि उसकी कोख राज के मजबूत लन्ड से भर गयी यै और हर दफ़ा जब उसका फूला सुपाड़ा कोख़ पर लगता था, तो उसके सारे बदन में एक तेज और खुशगवार झटका दे जाता था।

या भगवान! राज चोद मुझे ! और तेज ! आँह आँह आँह! क्या लन्ड है!" जैसे उसका भाई उसकी कंपकंपाती चूत को लम्बे, गहरे और ताकतवर झटके मार कर चोदे जा रहा था,

डॉली को अपना मुंह सोनिया की चूत पर कायम रखने में और दिक्कत हो रही थी। डॉली ने अपने मुं से नये जोश के साथ सोनिया की चूत में खौफ़नाक हरकत जारी रखि। वो सोनिया की चूत के लाल, लिसलिसाते माँस चो चाटती हुई अपनी जुबान को चूत में गहरा घुसा रही थी। सोनिया ने अपने कुल्हे नीचे को दबा कर डॉली के ऊपार ताकते चेहरे पर और कसा और अपने मखमली पेड़ को उसकी गरम टटोलती जुबान पर मसलने लगी। । "ओहहहहह ! डॉली! बढ़िया! चाट मेरी चूत हरामजादी! मेरी चूत को अपनी जीभ से चोद !" हवस में दीवानी होती लौन्डिया ने कराहते हुए कहा।

सोनिया के नारंगी जैसे गोल पुख्ता और रसीले मम्मे राज के चेहरे के सामने ऊपर-नीचे झुलते हुए उसे ललचा रहे थे। बहन की चूत में अपने लन्ड की दनादन रफ़्तार को कम किये बगैर, राज आगे को झुका और सोनिया के एक सख्त, गुलाबी निप्पल को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा। सोनिया मस्ती से चीख पड़ी। अब उसके जवाँ जिस्म को दो मुँह चाट - चाट कर मचला रहे थे। ऐसी मस्ती उसके बर्दाश्त के बाहर थी!

"दोनों भाई-बहन कितने हरामी हैं! ओहह ओहह! उंह हा! राज मैं झड़ रही हूं! उंह आँह! डॉली चोचले को भी चूस! आँह आँम्ह आँह !" |

डॉली ने जब उसके धड़कते हुए चोंचले को अपने मुँह के अंदर लेकर एक छोटे से कड़क लन्ड की तरह चूसना चालु किया और अपने गाल पर सोनिया की जाँघों की माँसपेशियों को सिकुड़ते और कसते हुए महसूस करने लगी।

साथ ही राज ने भी अपने हाथ को सोनिया के निप्पल से ऊपर सरका कर पहले उसकी भींची हुई गर्दन पर सहलाया, फिर उसके खुले मुँह की ओर बढ़ाने लगा। सोनिया ने अपने मुँह को राज के मुँह पर झुकाया, दोनों के मुँह एक दूसरे से चिपके और दोनों जुबाने चूसने, टटोलने और आपस में रगड़ने ल गीं।
 
सोनिया भाई-बहन के बीच बे-इन्तहाँ मुहब्बात को देख कर मुस्कुराई और राज को अपनी बहन की जाँघों के बीच लपक कर पहुंचता हुआ देखने लगी। राज को बहन से चुदाई का इरादा बनाते देख कर सोनिया के चेहरे पर जो हल्की सी मायुसी छायी थी, उसे पढ़ कर डॉली ने अपना हाथ बढ़ा कर सोनिया की जाँघ पर रखा और कहा :
"मजनू मियाँ जब तक मेरी चूत पर मेहरबान हैं, क्यों न तू मेरे मुँह पर अपनी चूत स्टा कर बैठ जाती। मेरा कुछ काम अधूरा छूट गया था!", उम्र में बड़ी डॉली ने अपने हाथों को सोनिया के जिस्म पर सहलाते हुए अपने इरादों का खुलासा किया।

सोनिया एक पल गंवाये बगैर अपनी टपकती चूत को डॉली के ऊपर उठे मुंह पर सटा कर राज की तरफ़ मुँह कर के बैठ गयी। डॉली भी अपने अधुरे काम को पूरा करने के लिये उतनी ही बेताब थी।

* डॉली, तुम कितनी अच्छी हो!", सोनिया चीख पड़ी जैसे ही डॉली ने अपने मुँह को ढूंस-ठूस कर पुर - जोर पहले से जुनून के साथ उसकी चूत को चूस - चूस कर चाटना चालू किया। | इतने बरसों के बाद राज भली तरह से जानता था कि उसकी जुड़वाँ बहन को किस तरतीब से चोदने पर सबसे ज्यादा लुफ्त मिलता है। शुरुआती पलों में उसे कुछ छेड़छाड़ और शोखी पसंद थी, जिसके बाद उसकी जवाअँ चूत गर्मा कर भाई के मोटे, मजबूत लन्ड की भीख माँगने लगती थी। राज ने अपने लन्ड के सिरे को डॉली की गुलाबी चूत के होंठों के बीच टेका और फिर फूले हुए मोटे सुपाड़े को दूध-सी-लसलसाती म्यान के उपर-नीचे दर्जानों बार रगड़ा। रह-रह कर बहन की छलकती चूत में लन्ड को पूरा घुसा देता और चूत में से भीग कर लन्ड बाहर आता तो उसके धड़कते हुए छोटे से चोंचले पर दबा देता।

राज के कुल्हों की हरकत के साथ-साथ लन्ड का मजबूत सुपाड़ा लिसलिसाती चूत में आगे पीछे फिसल रहा था। अपने जिस्म की आग के असर से डॉली अपनी चूत को और धड़कता
और लिसलिसा होता महसूस कर रही थी। उसके कूल्हे अपने भाई के छेड़ते हुए लन्ड की धीमी रफ़्तार के साथ-साथ धीमे-धीमे खुद-ब-खुद चक्कर काटते हुए ऐंथ रहे थे। डॉली कि जुबान बेतहाशा सोनिया की मस्त चूत को चाट रही थी। सोनिया ने कराहते हुए अपनी बाहें राज की गर्दन पर लपेटीं और उसके मुंह को अपने मुँह पर खींच कर चिपाका दिया। डॉली उसकी जवान चूत को चाट- चाट कर बेहाल कर दे रही थी।

डॉली अब बदहवासी की हालत में थी। अपनी लाल, मखमली चूत में भाई के फिसलते लन्ड का एहसास उसके बर्दाश्त के बाहर था। पूरी तरह ताव खा चुकी डॉली सोनिया की चूत से अपना मुँह अलग कर के हवसनाक लहजे में चीखी।
* चोद राज ! चोद !", वो गिड़गिड़ायी, "बहन को और मत तड़पा। अब नहीं सहा जाता !"

बहनचोद ! प्लीज चोद मुझे ! जोर लगा के चोद !" मेरी चूत भाई के वीर्य की प्यासी है!" ।
 
उधर जैसे जैसे सोनिया के गरम लबों की रफ़्तार उसके लन्ड पर ऊपर-नीचे और तेज होती जा रही थी, राज को अपने टट्टों में वीर्य उबलता हुआ महसूस हो रहा था।

बदजुबान! इसी जुबान से गाली दी थी ना ? अब चाट लन्ड को !" * शाबाश सोनिया! रुकना मत! लगे रह सुपाड़े पर !"

बहनचोद, देखें शर्मा खानदान के टट्टों में कितना दूध है! पूरा पी जाउंगी !", सोनिया ने राज को और ताव दिया।

हरामजादी! बोला था गाली मत देना! अब किसी भी सैकन्ड झड़ जाऊंगा मैं !" राज चीख पड़ा।

सोनिया ने चूसने की रफ़्तार और तेज कर दी। वो राज के गर्मागरम वीर्य की बौछारों का अपने मुँह मे एहसास पाने के लिये और उसके गाढे-मलाईदार जायके को चखने के लिये बेताब हो रही थी। पर डॉली के इरादे कुछ और ही थे!

"नहीं बड़े भाई !", डॉली चीख कर अपने भीगे हुए मुँह को सोनिया की ऐंठती चूत से उठा कर बोली।
"आप सोनिया को पहले चोद चुके हैं। इस बार आपके मोटे और काले लन्ड पर मेरा हक़ बनता है !" डॉली लपक कर सोनिया के बाजु में अपनी लंबी गोरी जाँघे चुअड़ी फैला कर लेट गयी।

"क्या सोचते हो मजनू प्यारे ?", गुर्राती हुई डॉली बोलि , "डाल बहन की चूत में अपन लन्ड और बुलन्द कर दे शर्मा खानदान का नाम !" | डॉली ने शैतान जैसे मुस्कुरा कर ऊपर भाई कि ओर देखा और अपनी उंगलियों से अपनी फैली हुई जाँघों के बीच हवसनाक लहजे से चूत को मसला। राज भी उसे देख कर मुस्कुराया।

"तेरा हक़ कौन छीन सकता है, डॉली ।" कय कर झुका और बहन के जवाँ होंठों पर अपने सुलगते होंठ सटा दिये। "सॉरी सोनिया! लगता है तुझे जरा सब्र करना होगा। बहन की तरफ़ मेरा भी कुछ फ़र्ज बनता है।"

सोनिया भाई-बहन के बीच बे-इन्तहाँ मुहब्बात को देख कर मुस्कुराई और राज को अपनी बहन की जाँघों के बीच लपक कर पहुंचता हुआ देखने लगी। राज को बहन से चुदाई का इरादा बनाते देख कर सोनिया के चेहरे पर जो हल्की सी मायुसी छायी थी, उसे पढ़ कर डॉली ने अपना हाथ बढ़ा कर सोनिया की जाँघ पर रखा और कहा :
"मजनू मियाँ जब तक मेरी चूत पर मेहरबान हैं, क्यों न तू मेरे मुँह पर अपनी चूत स्टा कर बैठ जाती। मेरा कुछ काम अधूरा छूट गया था!", उम्र में बड़ी डॉली ने अपने हाथों को सोनिया के जिस्म पर सहलाते हुए अपने इरादों का खुलासा किया।
 
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