"उमम्म, म्म्म!::: वाक़ई बड़ा मज़ा आयेगा!::: देखा कैसे तेरा मादरचोद लन्ड आराम से आँटी की रन्डी चूत में घुस आया!::: ऊपर वाले! शाबाश बेटा, मजा आ रहा है ! ::: ऊ ऊ ऊ ऊ!" ।
उनकी योनि की गुलाबी कोपलें जय के अतिक्रमी लिंग के चारों ओर कस के खिंचे हुए थे, और उसके लिंग पर फ़ौलादी पकड़ बनाये हुए थे, साथ ही उनके वक्राकार नितम्ब प्रेम से जय के बदन को छू रहे थे। जय का लिंग रजनी जी की रोमयुक्त योनि में गहरा :: बहुत गहरा उतरा हुआ था, उनकी योनि की सूजी हुई कोपलें चौड़ी खिंची हुई थीं, और उसके लिंग के तने और उनकी मक्खन सी चिकनी अन्दरूनी जाँघों के दरम्यान मसलती जा रही थीं। रजनी जी के नितम्ब थरथराये और वे कुलबुलाने लगीं। जय अपने गहरे गड़े लिंग को हौले-हौले आगे-पीछे हिलाने लगा।
"आहहहह, हाँ बेटा! ... शाबाश, ऐसे ही! ::. चोद अपने लन्ड को अन्दर, फिर बाहर, हाँ जय बेटा !", रजनी जी कराहीं।
• • पर डार्लिंग शुरुआत धीमे-धीमे करना नहीं तो तेरा दो किलो का लन्ड मेरी बेचारी चुतिया को फाड़ ही डालेगा !" | पहले के कुछ ठेलों के पश्चात, रजनी जी ने प्रणय क्रीड़ा का नेतृत्व सम्भाला। उन्होंने अपने नितम्बों को आगे की ओर, जय के लिंग से दूर, खींचा, उनकी योनि की भिंची हुई कोपलें उसके लिंग को किसी चूसते मुँह के समान दबोचे हए थीं। जब केवल उसका सूजा सुपाड़ा योनि के भीतर रह गया, तो उन्होंने अपनी योनि को उसके सुपाड़े पर घुमा-घुमा कर फिर पीछे की ओर पटका। उनकी भूखी ज्वलन्त योनि आतुरता से फिर एक बार उसके रौन्दते लिंग की पूरी लम्बाई को निगल जाती।
"ओहहह, रजनी आँटी:: गजब के चटके मार रही है आपकी चूत !::: और माँ क़सम, मैने सपने में भी नहीं सोचा था इतनी ज्यादा .. ?
टईट होगी। है ना?", वे मुस्कायीं, जय के वाक्य की पूर्ति उन्होंने कर दी थी। "म्म्म्म! हाँ रन्डी अहहहह, गजब की टाइट! ये मेरी हरामजादी बहन की चूत जितनी ही टाइट है!", जय
ने अचम्भित होकर कहा, क्योंकि उसी समय रजनी जी अपनी योनि की माँसपेशियों द्वारा उसके गहरे घुपे हुए लिंग को निचोड़े जा रही थीं।
उसने अपेक्षा की थी की दो बच्चे जनने पैदा करने, और उनके बरसों के यौन अनुभव के उपरांत रजनी जी की योनि ढीली और विस्तृत हो चली होती, परन्तु ऐसी कोई बात नहीं थी! अलबत्ता, रजनी जी ने अपने पुश्तैनी हुनर का प्रयोग कर योनि की माँसपेशियों पर ऐसा अद्भुत नियंत्रण क़ायम कर लिया था, कि जो भी पुरुष उनसे संभोग करता, उनकी योनि की लोच और कसाव की प्रशंसा किये बिना नहीं रह पाता था। जय उनकी योनि के उत्कृष्ट कसाव से अचम्भित था, और जब भी अपने लिंग को उनकी लालची योनि के माँस में ठेलता, तो उसकी तरल ऊष्मा से आवृत होकर निहाल हो जाता।
"पसंद आयी ना जय डार्लिंग आयेगी क्यों नहीं, कड़ी मेहनत से जो मेनटेन करा हुआ है मैने ! हम लोगों का खानदानी राज है ये।"
जय ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर लिंग को रजनी जी की योनि के भीतर पटका, और रजनी जी अपने अति - संवदनशील चोंचले पर उसके फुले जवान अण्डकोषों के मजबूत प्रहारों का अनुभव कर के कराह उठीं।
ओहहह, जय! माँ के बड़वे, अगर ऐसे ही अपने टट्टे मेरे चोंचले पर मारता रहा तो दो मिनट में झड़ जाऊंगी
उनकी योनि की गुलाबी कोपलें जय के अतिक्रमी लिंग के चारों ओर कस के खिंचे हुए थे, और उसके लिंग पर फ़ौलादी पकड़ बनाये हुए थे, साथ ही उनके वक्राकार नितम्ब प्रेम से जय के बदन को छू रहे थे। जय का लिंग रजनी जी की रोमयुक्त योनि में गहरा :: बहुत गहरा उतरा हुआ था, उनकी योनि की सूजी हुई कोपलें चौड़ी खिंची हुई थीं, और उसके लिंग के तने और उनकी मक्खन सी चिकनी अन्दरूनी जाँघों के दरम्यान मसलती जा रही थीं। रजनी जी के नितम्ब थरथराये और वे कुलबुलाने लगीं। जय अपने गहरे गड़े लिंग को हौले-हौले आगे-पीछे हिलाने लगा।
"आहहहह, हाँ बेटा! ... शाबाश, ऐसे ही! ::. चोद अपने लन्ड को अन्दर, फिर बाहर, हाँ जय बेटा !", रजनी जी कराहीं।
• • पर डार्लिंग शुरुआत धीमे-धीमे करना नहीं तो तेरा दो किलो का लन्ड मेरी बेचारी चुतिया को फाड़ ही डालेगा !" | पहले के कुछ ठेलों के पश्चात, रजनी जी ने प्रणय क्रीड़ा का नेतृत्व सम्भाला। उन्होंने अपने नितम्बों को आगे की ओर, जय के लिंग से दूर, खींचा, उनकी योनि की भिंची हुई कोपलें उसके लिंग को किसी चूसते मुँह के समान दबोचे हए थीं। जब केवल उसका सूजा सुपाड़ा योनि के भीतर रह गया, तो उन्होंने अपनी योनि को उसके सुपाड़े पर घुमा-घुमा कर फिर पीछे की ओर पटका। उनकी भूखी ज्वलन्त योनि आतुरता से फिर एक बार उसके रौन्दते लिंग की पूरी लम्बाई को निगल जाती।
"ओहहह, रजनी आँटी:: गजब के चटके मार रही है आपकी चूत !::: और माँ क़सम, मैने सपने में भी नहीं सोचा था इतनी ज्यादा .. ?
टईट होगी। है ना?", वे मुस्कायीं, जय के वाक्य की पूर्ति उन्होंने कर दी थी। "म्म्म्म! हाँ रन्डी अहहहह, गजब की टाइट! ये मेरी हरामजादी बहन की चूत जितनी ही टाइट है!", जय
ने अचम्भित होकर कहा, क्योंकि उसी समय रजनी जी अपनी योनि की माँसपेशियों द्वारा उसके गहरे घुपे हुए लिंग को निचोड़े जा रही थीं।
उसने अपेक्षा की थी की दो बच्चे जनने पैदा करने, और उनके बरसों के यौन अनुभव के उपरांत रजनी जी की योनि ढीली और विस्तृत हो चली होती, परन्तु ऐसी कोई बात नहीं थी! अलबत्ता, रजनी जी ने अपने पुश्तैनी हुनर का प्रयोग कर योनि की माँसपेशियों पर ऐसा अद्भुत नियंत्रण क़ायम कर लिया था, कि जो भी पुरुष उनसे संभोग करता, उनकी योनि की लोच और कसाव की प्रशंसा किये बिना नहीं रह पाता था। जय उनकी योनि के उत्कृष्ट कसाव से अचम्भित था, और जब भी अपने लिंग को उनकी लालची योनि के माँस में ठेलता, तो उसकी तरल ऊष्मा से आवृत होकर निहाल हो जाता।
"पसंद आयी ना जय डार्लिंग आयेगी क्यों नहीं, कड़ी मेहनत से जो मेनटेन करा हुआ है मैने ! हम लोगों का खानदानी राज है ये।"
जय ने अपनी पूरी शक्ति लगाकर लिंग को रजनी जी की योनि के भीतर पटका, और रजनी जी अपने अति - संवदनशील चोंचले पर उसके फुले जवान अण्डकोषों के मजबूत प्रहारों का अनुभव कर के कराह उठीं।
ओहहह, जय! माँ के बड़वे, अगर ऐसे ही अपने टट्टे मेरे चोंचले पर मारता रहा तो दो मिनट में झड़ जाऊंगी