• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

Incest बदलते रिश्ते......

I
सुगंधा तैयार हो चुकी थी और रोहन के साथ अंगूर के बाग देखने के लिए निकल पड़ी। वैसे तो सुगंधा के साथ मुंशी जी भी आने वाले थे लेकिन उनके रिश्तेदार के वहां शादी में जाने की वजह से वह आ नहीं सके। और इसलिए सुगंधा रोहन को लेकर अंगूर के बाग देखने चल दी।
सुगंधा ट्रांसपेरेंट पीली रंग की साड़ी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी ट्रांसपेरेंट साड़ी की वजह से उसका गोरा बदन पीले रंग की साड़ी में भी साफ-साफ नजर आ रहा था। सुगंधा की गहरी नाभि एक छोटी सी बुर के समान बेहद मनमोहक और कामुक लग रही थी जिस पर नजर पड़ते हैं रोहन के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी। सुगंधा आगे आगे चल रही थी और रोहन पीछे पीछे वैसे रोहन जानबूझकर अपनी मां के पीछे पीछे चल रहा था क्योंकि पीछे चलने में उसे आगे का नजारा देखने को जो मिल जा रहा था ऊंची नीची पगडंडियों पर चलते हुए सुगंधा के पेड़ इधर उधर हो रहे थे जिसकी वजह से उसके नितंबों में एक अजीब सा भारीपन और थिरकन नजर आ रहा था और वह फिर कल साड़ी के अंदर होने के बावजूद भी साफ साफ महसूस हो रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे सुगंधा के कमर के नीचे दो बड़े-बड़े गुब्बारे पानी से भरे हुए बांधे हो और चलने पर इधर-उधर हो रहे हैं। रोहन को अपनी मां की मटकती हुई गांड बहुत ही खूबसूरत लग रही थी जिसकी वजह से पजामे में सोया हुआ उसका लंड हरकत कर रहा था।
सुगंधा ऊंची नीची पगडंडी पर संभाल संभाल कर अपने पैर रखते हुए आगे बढ़ रही थी। आसपास के खेतों में काम कर रहे गांव के लोग चोर नजरों से सुगंधा की मदमस्त जवानी से भरपूर बदन का रस पी रहे थे। सुगंधा पहले इन सब बातों पर बिल्कुल भी गौर नहीं करती थी लेकिन अब उसे मर्दों की नजरों के सिधान का पता चलने लगा था उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि मर्दों की नजर अधिकतर उसके कौन से अंगों पर ज्यादा घूमती रहती थी। उसे इस तरह से मर्दों का घूरना खराब भी लग रहा था और अच्छा भी लगने लगा था सुगंधा अपने अगल-बगल आने जाने वाले गांव वासियों की नजरों को तो भाप ले रही थी लेकिन उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसके पीछे चल रहा उसका ही बेटा उसके भराव दार बड़ी बड़ी गांड को घूर रहा है।
वैसे भी सुगंधा के जमीदारी में जितने भी गांव आते थे उन सारे गांव में हरियाली हरियाली छाई हुई थी चारों तरफ बड़े बड़े पेड़ अपनी ठंडक फैला रहे थे छोटे छोटे तालाब गांव की सुंदरता को और भी ज्यादा बढ़ा दे रहे थे । सुगंधा अपनी जमीदारी पर बहुत गर्व महसूस कर रही थी।
कुछ देर के बाद सुगंधा अपने अंगूर के बाग पर पहुंच गई।
रोहन और सुगंधा दोनों एक छोटी सी मिट्टी के ऊंचे ढेर पर खड़े होकर देख रहे थे जहां से दूर दूर तक सिर्फ अंगूर के बाद ही नजर आ रहे थे रोहन तो यह सब देखकर एकदम दंग रह गया अंगूर के बाद उसे बहुत ही अच्छे लग रहे थे जगह जगह पर ढेर सारे अंगूर के गुच्छे लगे हुए थे जिसे देखने में बहुत ही मनमोहक नजारा लग रहा था रोहन खुश होता हुआ अपनी मां से बोला।
देखो तो मम्मी कितने अच्छे लग रहे हैं ये अंगूर।
इसीलिए तो तुम्हें यहां लाई हूं मुझे मालूम था कि तुम अभी तक अंगूर के बगीचे को नहीं देखे हो।
हां तुम सच कह रही हो मम्मी मैंने अभी तक अंगूर के बगीचे को देखा ही नहीं था नाही अंगूर के पौधे को आज में पहली बार अंगूर के गुच्छो को यूं तने से लगा हुआ देख रहा हूं।
( सुगंधा रोहन के चेहरे पर उत्सुकता और खुशी देखकर अंदर ही अंदर प्रसन्ना हो रही थी उसे रोहन की मासूमियत बहुत ही सुख प्रदान कर रही थी वह कभी रोहन को तो कभी अंगूर के बाग को देख रही थी रोहन अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।)
मम्मी यह सारे के सारे अंगूर के बाग अपने है?
यह सारे के सारे नहीं बल्कि जहां तक तुम्हारी नजर जा रही है वह सारे के सारे अपने ही हैं इसीलिए कहती हूं कि थोड़ी बहुत अपनी जमीन जायदाद के बारे में मालूमात रखो लेकिन तुम हो कि अपने आवारा दोस्तों के साथ इधर-उधर में ही समय बिगाड़ रहे हो।
रोहन अपनी मां की बात सुनकर बोला कुछ नहीं बस आश्चर्य से जहां तक नजर जा रही थी वहां तक देखने की कोशिश कर रहा था और अपने फैली हुई जमीदारी से बहुत खुश हो रहा था मौसम भी काफी सुहावना था रह रह कर धूप हो जा रही थी तो कभी अच्छा हो जा रही थी इसलिए रोहन का मन लग रहा था सुगंधा अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर अपनी हथेली में हथेली रखकर उसे नितंबों के उभार पर आराम से छोड़ कर खड़ी थी और वह भी अपनी फैली हुई जमीदारी को गर्वित होते हुए देख रही थी रोहन की नजर अपनी मां पर पड़ी तो वह अपनी मां के मदमस्त उभार लिए हुए नितंबों पर आराम से रखी हुई हथेलियों को देख रहा था और कलाई में चमक रही उसकी घड़ी देखकर और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था तभी रोहन की नजर ऊपर की तरफ आई तो अपनी मां के दोनों बड़े-बड़े संतरो को देखकर रोहन का मन उत्तेजना से भर गया।
क्योंकि सुगंधा के दोनों संतरो पर लगे हुए काले जामुन किसी चॉकलेट की तरह ब्लाउज के अंदर एकदम तनी हुई थी और बहुत ही ज्यादा नुकीली लग रही थी। जो कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि ब्लाउज फाड़कर बाहर आ जाएंगे। सुगंधा का इस तरह से खड़ा रहना भी बेहद कामुक असर कर रहा था कुछ देर तक यूं ही मिट्टी के ढेर पर खड़े रहने के बाद सुगंधा बोली।
आओ रोहन अंगूर के बाग के अंदर चलते हैं देखो तो सही कि करम सिंह किस तरह की रखवाली कर रहे हैं।
करम सिंह कौन मम्मी?
करम सिंह हमारे अंगूर के बगीचे की देखरेख करते हैं यह सब उन्हीं के जिम्मे है।
( इतना कहकर सुगंधा टेकरी पर से उतर कर अंगूर के बगीचे के अंदर जाने लगी चारों तरफ अंगूर के दानों के गुच्छे लटके हुए थे अंगूर के तने को संभाल सके इस तरह से जगह-जगह पर बड़े-बड़े बांस गड़े हुए थे जिस पर लिपटकर अंगूर की लताएं चारों तरफ बिछी पड़ी थी और बहुत ही सुंदर नजारा लग रहा था लेकिन अंदर की तरफ जाने के लिए अंगूर के बाग के नीचे सिर झुका कर जाना पड़ रहा था और सुगंधा थोड़ा सा झुक कर अंदर की तरफ जा रही थी और पीछे पीछे रोहन भी अंदर जा रहा था झुकने की वजह से सुगंधा की बड़ी बड़ी गांड कुछ ज्यादा ही हुई हुई नजर आ रही थी वह हम तो अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर औरों अभी इस तरह से झुककर कर चलने की वजह से नितंबों का जो घेराव था वह कुछ ज्यादा ही दमदार लगने लगा था जिसे देखकर रोहन का लंड सलामी भरने लगा रोहन के मुंह में पानी आने लगा उसके जी में आ रहा था कि इसी तरह से वह अपनी मां को पीछे से पकड़ ले और अपना पूरा लंड उसकी बुर में घुसा कर उसकी चुदाई कर दें लेकिन यह सिर्फ कपोल कल्पना ही थी क्योंकि वह जानता था कि ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है और थोड़ी ही देर में सुगंधा अंगूर के बगीचे के बीचोबीच आ गई जहां पर थोड़ी दूर तक खाली जगह थी और उसमें झुग्गी सी बनी हुई थी जिसमें करम सिंह रहता था और यहीं से अंगूर के बगीचों की देखरेख करता था।
सुगंधा वहीं खड़े होकर चारों तरफ नजर घुमाकर करम सिंह को देखने लगी लेकिन झोपड़ी के बाहर कहीं भी करम सिंग नजर नहीं आया तो वह उसे आवाज लगाने लगी। लेकिन उसे कोई भी जवाब नहीं मिला तो वह समझ गई की झोपड़ी के अंदर करम सिंह नहीं है।
पता नहीं कहां चला गया अंगूर के बगीचे को छोड़कर ऐसा कहते हुए सुगंधा पास में पड़ी खाट को गिरा दी और पेड़ की छांव में खाट पर बैठ गई और रोहन को भी बैठने के लिए बोली रोहन भी उसी खाट पर बैठ गया।
कितना अच्छा नजारा लग रहा है ना मम्मी।
हां बेटा नजारा तो बहुत ही अच्छा है लेकिन यह करम सिंह कहां मर गया देख नहीं रहे हो अंगूर अब एकदम से तैयार हो गए हैं अगर ऐसे ही छोड़ कर जाता रहा तो गांव के लोग सारे अंगूर तोड़ ले जायेंगे।
हो सकता है कहीं काम से गया हो।
हां तुम ठीक कह रहे हो रोहन हो सकता है कहीं काम से गया हो क्योंकि ऐसी लापरवाही वह बिल्कुल भी नहीं करता है चलो कुछ देर तक यहां बैठकर उसका इंतजार करते हैं।
( रोहन और सुगंधा वहीं बैठ कर इधर-उधर की बातें करने लगे सुगंधा मार्केट में अंगूर के खरीदी बिक्री के बारे में समझाने लगी क्योंकि अंगूर की बिक्री के लिए भी वह रोहन को ही भेजने वाली थी ताकि धीरे-धीरे उसे सब कुछ समझ में आने लगे कुछ समय बीतने के बाद सुगंधाको प्यास महसूस होने लगी तो वह रोहन से बोली। )
रोहन बेटा मुझे प्यास लगी है यही पास में अंगूर के बाग से लगके हेडपंप होगा तू वहां से पानी भरला।
ठीक है मम्मी मुझे भी प्यास लगी है। ( और इतना कहकर रोहन वहां से उठकर जहां पर सुगंधा बताई थी उसी और चल दिया अभी कुछ ही देर बीता ही था कि सुगंधाको खूब जोरो की पेशाब लग गई ।
सुगंधा को बहुत जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह अपने आप पर बहुत ज्यादा संयम रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन u उसके लिए इस समय मोचना बेहद आवश्यक हो चुका था। क्योंकि ज्यादा देर तक वह अपनी पेशाब को रोक नहीं पा रही थी पेट में दर्द सा महसूस होने लगा था। सुगंधा खाट पर से उठी और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करते हुए अपने पेशाब को रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन कोई भी इंसान ज्यादा देर तक पेशाब को रोक नहीं सकता था इसलिए सुगंधा को भी मुतना बेहद जरूरी था। इसलिए वह ना चाहते हुए भी अंगूर की डालियों के नीचे से होकर धीरे-धीरे पेशाब करने के लिए जाने लगी और एक जगह पर पहुंच कर वह इधर उधर नजरे दौरा कर देखने की कोशिश करने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उस अंगूर के बागान में दूसरा कोई नजर नहीं आ रहा था सुगंधा जहां पर खड़ी थी वहां पर कुछ ज्यादा ही झाड़ियां थी और वहां पर किसी की नजर पड़ने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी और वहीं पास में ही एक छोटी सी झुग्गी बनी हुई थी।
दूसरी तरफ रोहन हेड पंप के पास पहुंचकर वही पर रखे बर्तन में पानी भरने लगा और खुद भी पानी से हाथ मुंह धो कर अपने आप को ठंडा करने की कोशिश करने लगा जब वह वहां से चलने को हुआ तभी उसकी आंखों के सामने से एक खरगोश का बच्चा भागता हुआ नजर आया और रोहन उसके पीछे पीछे जाने लगा रोहन उसे पकड़ना चाहता था उसके साथ खेलना चाहता था इसलिए जहां जहां खरगोश जा रहा था रोहन उसके पीछे पीछे चला जा रहा था।
दूसरी तरफ से सुगंधा अपने चारों तरफ नजर दौड़ा कर संपूर्ण रूप से निश्चिंत होने के बाद धीरे-धीरे अपनी सारी ऊपर की तरफ उठाने लगी और ऐसा करते हुए वह बार-बार अपने चारों तरफ देख ले रही थी लेकिन चारों तरफ सिर्फ सन्नाटा ही नजर आ रहा था लेकिन उसे इस बात का डर भी लगा था कि कहीं रोहन उसे ढूंढता हुआ यहां तक ना पहुंच जाए इसलिए वह इससे पहले पेशाब कर लेना चाहती थी वैसे भी पेशाब की तीव्रता उसके पेट में ऐठन दे रही थी सुगंधा धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी यह नजारा बेहद ही कामुकता से भरा हुआ था लेकिन इस नजारे को देखने वाला वहां कोई नहीं था धीरे-धीरे सुगंधा पूरी तरह से अपनी कमर तक अपनी साड़ी को उठा दी थी उसकी नंगी चिकनी मोटी मोटी जांगे पीली धूप में स्वर्ण की तरह चमक रही थी बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ यह नजारा देखने वाला वहां कोई नहीं था और वैसे भी सुगंधा यही चाहती थी कि कोई उसे इस अवस्था में ना देख ले सुगंधा साड़ी को अपनी कमर तक उठा कर एक हाथ से अपनी पीली रंग की पैंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगी धीरे धीरे सुगंधा अपनी पैंटी को अपनी मोटी चिकनी जांघों तक नीचे कर दी और तुरंत नीचे बैठ गई मुतने के लिए।
दूसरी तरफ रोहन लड़कपन दिखाते हुए खरगोश के पीछे पीछे भागता चला जा रहा था और तभी खरगोश उसकी आंखों के सामने एक घनी झाड़ियों के अंदर चला गया रोहन उस खरगोश को पकड़ लेना चाहता था इसलिए दबे पांव वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा उसके सामने घनी झाड़ियां थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था उसे मालूम था कि इसी झाड़ियों के अंदर खरगोश दुबक कर बैठा हुआ है इसलिए वह घनी झाड़ियों के करीब पहुंचकर धीरे धीरे पत्तों को हटाने लगा लेकिन उसे खरगोश नजर नहीं आ रहा था वह अपनी चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा लेकिन वहां खरगोश का नामोनिशान नहीं था वह निराश होने लगा वह समझ गया कि खरगोश भाग गया है और अब उसके हाथ में नहीं आने वाला लेकिन फिर भी अपने मन में चल रही इस उथल-पुथल को अंतिम रूप देते हुए वह अपने मन की तसल्ली के लिए अपना एक कदम आगे बढ़ाकर घनी झाड़ियों को अपने दोनों हाथों से हटाकर देखने की कोशिश करने लगा लेकिन फिर भी परिणाम शून्य ही आया वह उदास हो गया वह अपने दोनों हाथों को झाड़ियों पर से हटाने ही वाला था कि उसकी नजर थोड़ी दूर की घनी झाड़ियों के करीब गई और वहां का नजारा देखकर एकदम सन्न रह गया।
रोहन को एक बार फिर से अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी बड़ी नंगी गांड थी उसका दिमाग काम करना बंद है कर दिया क्योंकि मैं जा रहा है उसके सामने इतना गरमा गरम था कि उसकी सोचने समझने की शक्ति ही खत्म होने लगी थोड़ी देर में उसे इस बात का अहसास हो गया कि उसकी मां वहां पर बैठकर मुत रही थी।
रोहन बार-बार अपनी आंखों को मलता हुआ उस नजारे की हकीकत को समझने की कोशिश कर रहा था।
सुगंधा तैयार हो चुकी थी और रोहन के साथ अंगूर के बाग देखने के लिए निकल पड़ी। वैसे तो सुगंधा के साथ मुंशी जी भी आने वाले थे लेकिन उनके रिश्तेदार के वहां शादी में जाने की वजह से वह आ नहीं सके। और इसलिए सुगंधा रोहन को लेकर अंगूर के बाग देखने चल दी।
सुगंधा ट्रांसपेरेंट पीली रंग की साड़ी में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी ट्रांसपेरेंट साड़ी की वजह से उसका गोरा बदन पीले रंग की साड़ी में भी साफ-साफ नजर आ रहा था। सुगंधा की गहरी नाभि एक छोटी सी बुर के समान बेहद मनमोहक और कामुक लग रही थी जिस पर नजर पड़ते हैं रोहन के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी। सुगंधा आगे आगे चल रही थी और रोहन पीछे पीछे वैसे रोहन जानबूझकर अपनी मां के पीछे पीछे चल रहा था क्योंकि पीछे चलने में उसे आगे का नजारा देखने को जो मिल जा रहा था ऊंची नीची पगडंडियों पर चलते हुए सुगंधा के पेड़ इधर उधर हो रहे थे जिसकी वजह से उसके नितंबों में एक अजीब सा भारीपन और थिरकन नजर आ रहा था और वह फिर कल साड़ी के अंदर होने के बावजूद भी साफ साफ महसूस हो रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे सुगंधा के कमर के नीचे दो बड़े-बड़े गुब्बारे पानी से भरे हुए बांधे हो और चलने पर इधर-उधर हो रहे हैं। रोहन को अपनी मां की मटकती हुई गांड बहुत ही खूबसूरत लग रही थी जिसकी वजह से पजामे में सोया हुआ उसका लंड हरकत कर रहा था।
सुगंधा ऊंची नीची पगडंडी पर संभाल संभाल कर अपने पैर रखते हुए आगे बढ़ रही थी। आसपास के खेतों में काम कर रहे गांव के लोग चोर नजरों से सुगंधा की मदमस्त जवानी से भरपूर बदन का रस पी रहे थे। सुगंधा पहले इन सब बातों पर बिल्कुल भी गौर नहीं करती थी लेकिन अब उसे मर्दों की नजरों के सिधान का पता चलने लगा था उसे अच्छी तरह से समझ में आ रहा था कि मर्दों की नजर अधिकतर उसके कौन से अंगों पर ज्यादा घूमती रहती थी। उसे इस तरह से मर्दों का घूरना खराब भी लग रहा था और अच्छा भी लगने लगा था सुगंधा अपने अगल-बगल आने जाने वाले गांव वासियों की नजरों को तो भाप ले रही थी लेकिन उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसके पीछे चल रहा उसका ही बेटा उसके भराव दार बड़ी बड़ी गांड को घूर रहा है।
वैसे भी सुगंधा के जमीदारी में जितने भी गांव आते थे उन सारे गांव में हरियाली हरियाली छाई हुई थी चारों तरफ बड़े बड़े पेड़ अपनी ठंडक फैला रहे थे छोटे छोटे तालाब गांव की सुंदरता को और भी ज्यादा बढ़ा दे रहे थे । सुगंधा अपनी जमीदारी पर बहुत गर्व महसूस कर रही थी।
कुछ देर के बाद सुगंधा अपने अंगूर के बाग पर पहुंच गई।
रोहन और सुगंधा दोनों एक छोटी सी मिट्टी के ऊंचे ढेर पर खड़े होकर देख रहे थे जहां से दूर दूर तक सिर्फ अंगूर के बाद ही नजर आ रहे थे रोहन तो यह सब देखकर एकदम दंग रह गया अंगूर के बाद उसे बहुत ही अच्छे लग रहे थे जगह जगह पर ढेर सारे अंगूर के गुच्छे लगे हुए थे जिसे देखने में बहुत ही मनमोहक नजारा लग रहा था रोहन खुश होता हुआ अपनी मां से बोला।
देखो तो मम्मी कितने अच्छे लग रहे हैं ये अंगूर।
इसीलिए तो तुम्हें यहां लाई हूं मुझे मालूम था कि तुम अभी तक अंगूर के बगीचे को नहीं देखे हो।
हां तुम सच कह रही हो मम्मी मैंने अभी तक अंगूर के बगीचे को देखा ही नहीं था नाही अंगूर के पौधे को आज में पहली बार अंगूर के गुच्छो को यूं तने से लगा हुआ देख रहा हूं।
( सुगंधा रोहन के चेहरे पर उत्सुकता और खुशी देखकर अंदर ही अंदर प्रसन्ना हो रही थी उसे रोहन की मासूमियत बहुत ही सुख प्रदान कर रही थी वह कभी रोहन को तो कभी अंगूर के बाग को देख रही थी रोहन अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।)
मम्मी यह सारे के सारे अंगूर के बाग अपने है?
यह सारे के सारे नहीं बल्कि जहां तक तुम्हारी नजर जा रही है वह सारे के सारे अपने ही हैं इसीलिए कहती हूं कि थोड़ी बहुत अपनी जमीन जायदाद के बारे में मालूमात रखो लेकिन तुम हो कि अपने आवारा दोस्तों के साथ इधर-उधर में ही समय बिगाड़ रहे हो।
रोहन अपनी मां की बात सुनकर बोला कुछ नहीं बस आश्चर्य से जहां तक नजर जा रही थी वहां तक देखने की कोशिश कर रहा था और अपने फैली हुई जमीदारी से बहुत खुश हो रहा था मौसम भी काफी सुहावना था रह रह कर धूप हो जा रही थी तो कभी अच्छा हो जा रही थी इसलिए रोहन का मन लग रहा था सुगंधा अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर अपनी हथेली में हथेली रखकर उसे नितंबों के उभार पर आराम से छोड़ कर खड़ी थी और वह भी अपनी फैली हुई जमीदारी को गर्वित होते हुए देख रही थी रोहन की नजर अपनी मां पर पड़ी तो वह अपनी मां के मदमस्त उभार लिए हुए नितंबों पर आराम से रखी हुई हथेलियों को देख रहा था और कलाई में चमक रही उसकी घड़ी देखकर और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रहा था तभी रोहन की नजर ऊपर की तरफ आई तो अपनी मां के दोनों बड़े-बड़े संतरो को देखकर रोहन का मन उत्तेजना से भर गया।
क्योंकि सुगंधा के दोनों संतरो पर लगे हुए काले जामुन किसी चॉकलेट की तरह ब्लाउज के अंदर एकदम तनी हुई थी और बहुत ही ज्यादा नुकीली लग रही थी। जो कि ऐसा प्रतीत हो रहा था कि ब्लाउज फाड़कर बाहर आ जाएंगे। सुगंधा का इस तरह से खड़ा रहना भी बेहद कामुक असर कर रहा था कुछ देर तक यूं ही मिट्टी के ढेर पर खड़े रहने के बाद सुगंधा बोली।
आओ रोहन अंगूर के बाग के अंदर चलते हैं देखो तो सही कि करम सिंह किस तरह की रखवाली कर रहे हैं।
करम सिंह कौन मम्मी?
करम सिंह हमारे अंगूर के बगीचे की देखरेख करते हैं यह सब उन्हीं के जिम्मे है।
( इतना कहकर सुगंधा टेकरी पर से उतर कर अंगूर के बगीचे के अंदर जाने लगी चारों तरफ अंगूर के दानों के गुच्छे लटके हुए थे अंगूर के तने को संभाल सके इस तरह से जगह-जगह पर बड़े-बड़े बांस गड़े हुए थे जिस पर लिपटकर अंगूर की लताएं चारों तरफ बिछी पड़ी थी और बहुत ही सुंदर नजारा लग रहा था लेकिन अंदर की तरफ जाने के लिए अंगूर के बाग के नीचे सिर झुका कर जाना पड़ रहा था और सुगंधा थोड़ा सा झुक कर अंदर की तरफ जा रही थी और पीछे पीछे रोहन भी अंदर जा रहा था झुकने की वजह से सुगंधा की बड़ी बड़ी गांड कुछ ज्यादा ही हुई हुई नजर आ रही थी वह हम तो अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर औरों अभी इस तरह से झुककर कर चलने की वजह से नितंबों का जो घेराव था वह कुछ ज्यादा ही दमदार लगने लगा था जिसे देखकर रोहन का लंड सलामी भरने लगा रोहन के मुंह में पानी आने लगा उसके जी में आ रहा था कि इसी तरह से वह अपनी मां को पीछे से पकड़ ले और अपना पूरा लंड उसकी बुर में घुसा कर उसकी चुदाई कर दें लेकिन यह सिर्फ कपोल कल्पना ही थी क्योंकि वह जानता था कि ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है और थोड़ी ही देर में सुगंधा अंगूर के बगीचे के बीचोबीच आ गई जहां पर थोड़ी दूर तक खाली जगह थी और उसमें झुग्गी सी बनी हुई थी जिसमें करम सिंह रहता था और यहीं से अंगूर के बगीचों की देखरेख करता था।
सुगंधा वहीं खड़े होकर चारों तरफ नजर घुमाकर करम सिंह को देखने लगी लेकिन झोपड़ी के बाहर कहीं भी करम सिंग नजर नहीं आया तो वह उसे आवाज लगाने लगी। लेकिन उसे कोई भी जवाब नहीं मिला तो वह समझ गई की झोपड़ी के अंदर करम सिंह नहीं है।
पता नहीं कहां चला गया अंगूर के बगीचे को छोड़कर ऐसा कहते हुए सुगंधा पास में पड़ी खाट को गिरा दी और पेड़ की छांव में खाट पर बैठ गई और रोहन को भी बैठने के लिए बोली रोहन भी उसी खाट पर बैठ गया।
कितना अच्छा नजारा लग रहा है ना मम्मी।
हां बेटा नजारा तो बहुत ही अच्छा है लेकिन यह करम सिंह कहां मर गया देख नहीं रहे हो अंगूर अब एकदम से तैयार हो गए हैं अगर ऐसे ही छोड़ कर जाता रहा तो गांव के लोग सारे अंगूर तोड़ ले जायेंगे।
हो सकता है कहीं काम से गया हो।
हां तुम ठीक कह रहे हो रोहन हो सकता है कहीं काम से गया हो क्योंकि ऐसी लापरवाही वह बिल्कुल भी नहीं करता है चलो कुछ देर तक यहां बैठकर उसका इंतजार करते हैं।
( रोहन और सुगंधा वहीं बैठ कर इधर-उधर की बातें करने लगे सुगंधा मार्केट में अंगूर के खरीदी बिक्री के बारे में समझाने लगी क्योंकि अंगूर की बिक्री के लिए भी वह रोहन को ही भेजने वाली थी ताकि धीरे-धीरे उसे सब कुछ समझ में आने लगे कुछ समय बीतने के बाद सुगंधाको प्यास महसूस होने लगी तो वह रोहन से बोली। )
रोहन बेटा मुझे प्यास लगी है यही पास में अंगूर के बाग से लगके हेडपंप होगा तू वहां से पानी भरला।
ठीक है मम्मी मुझे भी प्यास लगी है। ( और इतना कहकर रोहन वहां से उठकर जहां पर सुगंधा बताई थी उसी और चल दिया अभी कुछ ही देर बीता ही था कि सुगंधाको खूब जोरो की पेशाब लग गई ।
सुगंधा को बहुत जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह अपने आप पर बहुत ज्यादा संयम रखने की कोशिश कर रही थी लेकिन u उसके लिए इस समय मोचना बेहद आवश्यक हो चुका था। क्योंकि ज्यादा देर तक वह अपनी पेशाब को रोक नहीं पा रही थी पेट में दर्द सा महसूस होने लगा था। सुगंधा खाट पर से उठी और कुछ देर तक इधर-उधर चहल कदमी करते हुए अपने पेशाब को रोकने की कोशिश करने लगी लेकिन कोई भी इंसान ज्यादा देर तक पेशाब को रोक नहीं सकता था इसलिए सुगंधा को भी मुतना बेहद जरूरी था। इसलिए वह ना चाहते हुए भी अंगूर की डालियों के नीचे से होकर धीरे-धीरे पेशाब करने के लिए जाने लगी और एक जगह पर पहुंच कर वह इधर उधर नजरे दौरा कर देखने की कोशिश करने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उस अंगूर के बागान में दूसरा कोई नजर नहीं आ रहा था सुगंधा जहां पर खड़ी थी वहां पर कुछ ज्यादा ही झाड़ियां थी और वहां पर किसी की नजर पड़ने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी और वहीं पास में ही एक छोटी सी झुग्गी बनी हुई थी।
दूसरी तरफ रोहन हेड पंप के पास पहुंचकर वही पर रखे बर्तन में पानी भरने लगा और खुद भी पानी से हाथ मुंह धो कर अपने आप को ठंडा करने की कोशिश करने लगा जब वह वहां से चलने को हुआ तभी उसकी आंखों के सामने से एक खरगोश का बच्चा भागता हुआ नजर आया और रोहन उसके पीछे पीछे जाने लगा रोहन उसे पकड़ना चाहता था उसके साथ खेलना चाहता था इसलिए जहां जहां खरगोश जा रहा था रोहन उसके पीछे पीछे चला जा रहा था।
दूसरी तरफ से सुगंधा अपने चारों तरफ नजर दौड़ा कर संपूर्ण रूप से निश्चिंत होने के बाद धीरे-धीरे अपनी सारी ऊपर की तरफ उठाने लगी और ऐसा करते हुए वह बार-बार अपने चारों तरफ देख ले रही थी लेकिन चारों तरफ सिर्फ सन्नाटा ही नजर आ रहा था लेकिन उसे इस बात का डर भी लगा था कि कहीं रोहन उसे ढूंढता हुआ यहां तक ना पहुंच जाए इसलिए वह इससे पहले पेशाब कर लेना चाहती थी वैसे भी पेशाब की तीव्रता उसके पेट में ऐठन दे रही थी सुगंधा धीरे-धीरे अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी यह नजारा बेहद ही कामुकता से भरा हुआ था लेकिन इस नजारे को देखने वाला वहां कोई नहीं था धीरे-धीरे सुगंधा पूरी तरह से अपनी कमर तक अपनी साड़ी को उठा दी थी उसकी नंगी चिकनी मोटी मोटी जांगे पीली धूप में स्वर्ण की तरह चमक रही थी बेहद खूबसूरत और मादकता से भरा हुआ यह नजारा देखने वाला वहां कोई नहीं था और वैसे भी सुगंधा यही चाहती थी कि कोई उसे इस अवस्था में ना देख ले सुगंधा साड़ी को अपनी कमर तक उठा कर एक हाथ से अपनी पीली रंग की पैंटी को नीचे की तरफ सरकाने लगी धीरे धीरे सुगंधा अपनी पैंटी को अपनी मोटी चिकनी जांघों तक नीचे कर दी और तुरंत नीचे बैठ गई मुतने के लिए।
दूसरी तरफ रोहन लड़कपन दिखाते हुए खरगोश के पीछे पीछे भागता चला जा रहा था और तभी खरगोश उसकी आंखों के सामने एक घनी झाड़ियों के अंदर चला गया रोहन उस खरगोश को पकड़ लेना चाहता था इसलिए दबे पांव वह धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा उसके सामने घनी झाड़ियां थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था उसे मालूम था कि इसी झाड़ियों के अंदर खरगोश दुबक कर बैठा हुआ है इसलिए वह घनी झाड़ियों के करीब पहुंचकर धीरे धीरे पत्तों को हटाने लगा लेकिन उसे खरगोश नजर नहीं आ रहा था वह अपनी चारों तरफ नजर दौड़ाने लगा लेकिन वहां खरगोश का नामोनिशान नहीं था वह निराश होने लगा वह समझ गया कि खरगोश भाग गया है और अब उसके हाथ में नहीं आने वाला लेकिन फिर भी अपने मन में चल रही इस उथल-पुथल को अंतिम रूप देते हुए वह अपने मन की तसल्ली के लिए अपना एक कदम आगे बढ़ाकर घनी झाड़ियों को अपने दोनों हाथों से हटाकर देखने की कोशिश करने लगा लेकिन फिर भी परिणाम शून्य ही आया वह उदास हो गया वह अपने दोनों हाथों को झाड़ियों पर से हटाने ही वाला था कि उसकी नजर थोड़ी दूर की घनी झाड़ियों के करीब गई और वहां का नजारा देखकर एकदम सन्न रह गया।
रोहन को एक बार फिर से अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी बड़ी नंगी गांड थी उसका दिमाग काम करना बंद है कर दिया क्योंकि मैं जा रहा है उसके सामने इतना गरमा गरम था कि उसकी सोचने समझने की शक्ति ही खत्म होने लगी थोड़ी देर में उसे इस बात का अहसास हो गया कि उसकी मां वहां पर बैठकर मुत रही थी।
रोहन बार-बार अपनी आंखों को मलता हुआ उस नजारे की हकीकत को समझने की कोशिश कर रहा था।
मेरा क्या है जो भी लिया है नेट से लिया है और नेट पर ही दिया है- (इधर का माल उधर)
शरीफ़ या कमीना....
Incest बदलते रिश्ते...
DEV THE HIDDEN POWER ...
Adventure of karma ( dragon king )
 ritesh 
Gold Member
Re: Incest बदलते रिश्ते
 27 May 2019 15:12
उसे अपनी किस्मत पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि अब तक तो अपनी मां को नंगी देख चुका था लेकिन उसे बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि वह अपनी मां को अपनी आंखों से पेशाब करता हुआ देख रहा है। रोहन के मुंह में पानी आने लगा उसकी लार टपकने लगी खुशी अपनी किस्मत पर नाज होने लगा क्योंकि कुछ दिनों से उसकी किस्मत उसके पक्ष में चल रही थी जो वह सोचता था उसकी आंखों के सामने वैसा ही होता जा रहा था इस समय रोहन की आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी-बड़ी गोरी गांड थी। जिसे सुगंधा हल्के से उठाए हुए थे और सुगंधा की इस हरकत का उसके बेटे पर बुरा असर पड़ रहा था पलभर में ही उसका लंड पजामे के अंदर तन कर लोहे के रोड की तरह हो गया था। जिसे रोहन अपने हाथों से मसलने लगा था सुगंधा की गुलाबी पुर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी जिसकी वजह से उसमें से एक सीटी सी बजने लगी थी और इस समय सुगंधा की बुर से निकल रही सीटी की आवाज रोहन के लिए किसी बांसुरी के मधुर धुन से कम नहीं थी रोहन उस मादकता से भरे नजारे और बुर से आ रही है मधुर धुन में खोने लगा सुगंधा अपनी तरफ से पूरी एहतियात बरतते हुए अपनी चारों तरफ देख ले रही थी लेकिन अपने पीछे नजर नहीं बढ़ा पा रही थी वह इस बात से पूरी तरह से निश्चिंत थी कि उसे इस समय पेशाब करते हुए कोई नहीं देख रहा है लेकिन इस बात से अनजान थी कि उसका ही बेटा झाड़ियों के पीछे से चुपके से खड़ा होकर उसे पेशाब करते हुए देख रहा था। थोड़ी देर में सुगंधा पेशाब कर ली लेकिन उठते उठते वह अपनी गुलाबी पुर की गुलाबी पतियों में से पेशाब की बूंद को गिराते हुए हल्के हल्के अपने नितंबों को झटकने लगी।
लेकिन सुगंधा की यह हरकत बेहद ही कामुकता से भरी हुई थी क्योंकि रोहन खुद अपनी मां की इस हरकत को देखकर एकदम से चुदवासा हो गया था और जोर से अपने लंड को मसलने लगा था।
सुगंधा पेशाब करके खड़ी हो गई और एक हाथ से अपनी पीली रंग की पैंटी को ऊपर चढ़ाने लगी रोहन तो यह नजारा देखकर एकदम कामुकता से भर गया थोड़ी ही देर में सुगंधा अपनी साड़ी को नीचे गिरा दी और अपने कपड़े ठीक कर के जाने को हुई ही थी कि झुग्गी मैं से आ रही खिलखिला ने की आवाज सुनकर उसके कदम रुक गए वह एक पल के लिए झुग्गी की तरफ देखने लगी। तुरंत उसकी आंखों में चमक आ गई उसे वह दिन याद आ गया जब वह गेहूं की कटाई वाले दिन खेतों में आई थी और इसी तरह से झुग्गी मैं से आ रही हसने की आवाज सुनकर उत्सुकतावस अंदर झांकने की कोशिश की थी और अंदर का नजारा देखकर एकदम से सन में रह गई थी। उसे उस समय इस बात का बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि झुग्गी के अंदर उनके खेतों में काम कर रहा मजदूर किसी औरत के साथ चुदाई का खेल खेल रहा है और आज ठीक उसी तरह की आवाज सुनकर एक बार फिर से सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा।
दूसरी तरफ रोहन अपनी मां को देखते हुए अपने लंड को मसल रहा था लेकिन उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां आखिर वापस जाते जाते वहीं रुक क्यों गई उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और वह उन्हीं झाड़ियों के पीछे छुप कर देखने लगा
एक अजीब सा अहसास सुगंधा के तनबदन को झकझोर रहा था। सुगंधा की आंखों के सामने वही दृश्य नजर आने लगा जो उस दिन खेतों में हुआ था उसे लगने लगा कि जरूर झुकी में आज भी वही दृश्य हो रहा होगा इसलिए वह धीरे-धीरे उस छोटी सी झोपड़ी की तरफ जाने लगी और पीछे झाड़ियों में छिपा हुआ रोहन अपनी मां के इस हरकत को देख रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां कर क्या रही है।
एक तो पहले से ही अपनी मां की नंगी गांड उस और उसे पेशाब करता हुआ देखकर उसकी हालत खराब थी अजीब लंड था कि बैठने का नाम नहीं ले रहा था और उसकी इस तरह की शंका स्पद हरकत रोहन के तनबदन को अजीब सी उत्तेजना प्रदान कर रही थी धीरे धीरे सुगंधा उस झोपड़ी की तरफ आगे बढ़ रही थी और जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी वैसे-वैसे अंदर से आ रही आवाज उसके कानों में साफ-साफ सुनाई दे रही थी।
आहहहहह आहहहहहहह करमुआ आहहहहहह और जोर जोर से धक्के लगा।
( जैसे ही उस झोपड़ी में से आ रही एक औरत के मुंह से इस तरह की आवाज सुगंधा के कानों में पड़ी सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई उसे समझते देर नहीं लगी की झोपड़ी के अंदर क्या चल रहा है और अंगूर के बागानों की रखवाली करने वाला करण सिंह झोपड़ी के अंदर ही किसी औरत की चुदाई कर रहा था अब तो सुगंधा से रहा नहीं जा रहा था वह दबे कदमों से झोपड़ी के बिल्कुल करीब पहुंच गई और अंदर झांकने की कोशिश करने लगी दूर खड़ा रोहन अपनी मां की इस हरकत से बेहाल हुए जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां करके आ रही है लेकिन इतना तो समझ में आ गया था कि जरूर कुछ ना कुछ झोपड़ी के अंदर चल रहा है जिसे देखने के लिए उसकी मां उत्सुक है।
इधर उधर नजर दौड़ाने पर उसे एक छोटी सी जगह दिख गई जहां से थोड़ी सी दरार बनी हुई थी और सुगंधा तुरंत उस दरार से अपनी आंख लगाकर अंदर के नजारे को देखने लगी और अंदर के नजारे को जैसे ही देखी उसका दिमाग सन्न रह गया उसकी टांगों के बीच हलचल होने लगी। उसे साफ साफ नजर आ रहा था कि झोपड़ी के अंदर एक चारपाई पर एक औरत लेटी हुई थी जिसके बदन पर मात्र एक ब्लाउज था जो कि उसके सारे बटन खुले हुए थे और करम सिंह उस पर लेटा हुआ था और जोर जोर से उसके दोनों खरबूजे को दबाता हुआ उनका रस मुंह लगाकर निचोड़ रहा था। और वह औरत गरम-गरम सिसकारियां लेते हुए उसका जोश और बढ़ा रही थी और करम सिंह अपनी पूरी ताकत लगाते हुए अपनी कमर को जोर जोर से हिला रहा था।
यह नजारा देखकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी। पलभर में ही सुगंधा के बदन में गर्माहट फैलने लगी उसकी सांसों की गति तेज होने लगी कर्म सिंह की हिलती हुई कमर को देखकर सुगंधा का अंदाजा गलत नहीं था कि उस औरत को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही है वह जानती थी कि जिस तेजी से कर्म सिंह अपनी कमर हिला रहा है उतनी ही रफ्तार से उसका लंड उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा होगा और उसकी रगड़ से वह औरत मस्त हो रही है तभी तो उसके मुंह से गरम गरम सिसकारियां निकल रही थी।
कसम से कमली जो मजा तेरी बुरी में है वह किसी और बुर में नहीं जब जब मैं तेरी बुर में अपना लंड डालता हूं तो मुझे लगता है मुझे स्वर्ग का मजा मिल रहा है।।
आहहहहहब आहहहहहह और जोर से रे सच करमुवा मुझे भी तेरे साथ में मजा आता है मेरा मरद तो बस दिन-रात दारू और जुआ में ही लगा हुआ है उसका तो ठीक से खड़ा भी नहीं होता तभी तो मुझे तेरे पास आना पड़ता है और तू तो मुझे मस्त कर देता है देखना तेरे लिए एकदम नंगी तेरे नीचे लेटी हूं और बहुत जोर जोर से धक्के लगा मेरा होने वाला है ।
मेरा भी होने वाला है
( और इतना कहने के साथ ही कर्म ने अपने कमर को और जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया इतने में तो सुगंधा पसीने से तरबतर हो गए उससे यह नजारा बहुत ही मनमोहक लग रहा था उसका गला सूखा जा रहा था और जिस तरह से कर्म सिंह अपनी कमर हिला रहा था वह समझ गई थी कि दोनों का काम होने वाला है इसीलिए उसका वहां खड़े रहना ठीक नहीं था और वह दबे पांव वापस लौट गई लेकिन वहां से पीछे हटते समय वह आश्चर्य से अपने मुंह पर हाथ लगा दी जिसे देख कर रोहन समझ गया की झोपड़ी के अंदर जरूर कुछ ना कुछ ऐसा हो रहा है जो कि उसकी मां के लिए आश्चर्य से कम नहीं था सुगंधा वापस लौट चुकी थी रोहन कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा उसके मन में हो रहा था कि वह भी झोपड़ी तक जाए और देखें कि अंदर क्या हो रहा है और ऐसा सोचकर वह झाड़ियों से बाहर निकलने वाला था कि तभी अंदर से एक औरत निकली जो कि अपने कपड़ों को व्यवस्थित कर रही थी और साथ ही उसके पीछे पीछे एक लंबा तगड़ा आदमी निकला जो कि अपने पर जाने की डोरी बाद रहा था इतना देखकर रोहन को समझते देर नहीं लगी की झोपड़ी के अंदर दोनों की चुदाई चल रही थी।
यह रोहन के लिए बेहद आश्चर्यजनक तो था ही उससे भी ज्यादा उत्तेजित कर देने वाली बात यह थी कि उसकी मां चोरी-छिपे झोपड़ी के अंदर के नजारे को देख रही थी और यह तय था कि उसकी मां कुछ देर तक वहां खड़े होकर उन दोनों की चुदाई देख रही थी। यह ख्याल मन में आते ही रोहन का लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा।
थोड़ी देर बाद रोहन पानी लेकर उस जगह पर गया वहां देखा तो उसकी मां चारपाई पर बैठी हुई थी और करम सिंह वहीं नीचे बैठा हुआ था और उससे सुगंधा बोल रही थी।
कहां चले गए थे करम सिंह मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं।
कहीं नहीं मालकिन रात को जंगली जानवर परेशान करते हैं इसलिए अपने बगीचे के किनारे किनारे कटीली झाड़ियां लगाने गया था।
( हरामखोर कटीली झाड़ियां लगाने गया था कमली के मैदान पर हल चलाने गया था हरामखोर चुदाई करके आ रहा है और यह झूठ बोल रहा है सुगंधा मन ही मन में बोली। और यही बात रोहन भी मन ही मन में कह रहा था । सुगंधा उसकी बात सुनकर बोली।)
अब तुम्हें अंगूरों के बाद का ज्यादा देखभाल करना होगा क्योंकि अंगूर तैयार होने वाले हैं अगर जरा सा भी चूक हुई तो गांव वाले सब तोड़ ले जायेंगे इसलिए यहां वहां मैं जाकर तुम बगीचे की देखभाल करो ।
जी मालकिन ऐसा ही होगा।
और तुम कहां चले गए थे बेटा मैं तुम्हारा यहां बैठकर कब से इंतजार कर रही हूं तुम्हें पता है कितनी जोरों की प्यास लगी है अगर इंसान तुम्हारे भरोसे रहे तो वह प्यासा ही मर जाए।
( अपनी मां की बात सुनकर रोहन मन ही मन में बोला कितना झूठ बोल रही है साली वहां अपनी बड़ी बड़ी नंगी गांड दिखाते हुए कैसे मूत रही थी और झोपड़ी में चल रही चुदाई देख कर मस्त हो रही थी और मुझे कह रही है कि मैं यहां बैठकर कब से इंतजार कर रही हूं। )
मम्मी में आने ही वाला था कि( करम सिंह को नमस्ते करते हुए) मुझे खरगोश नजर आ गया और उसे पकड़ने के चक्कर में देर हो गया ।
रोहन की बात सुनकर सुगंधा हसदी और हंसते हुए करम सिंह को देखने लगी और मन ही मन में बोली साला कितना हरामी है इसकी बीवी घर में इसका इंतजार करती होगी और मम्मी सोचती होगी कि उसका पति खेतों में काम कर रहा है लेकिन उस बेचारी को क्या माल है कि यहां पर किसी और औरत के साथ रंगरेलियां मना रहा है क्या किस्मत है।
एक तरफ सुगंधा कर्म सिंह की करतूत से क्रोधित होकर उसे मन ही मन में कोर्स भी रही थी तो दूसरी तरफ उसकी किस्मत पर जल भी रही थी क्योंकि एक यह मर्द था जो कि घर में पत्नी होने के बावजूद भी दूसरी औरतों को मौका मिलते ही अपने नीचे लाने में जरा भी कसर बाकी नहीं रखता था और जिस पागलपन से वह औरत की चुदाई करता था उसे देखकर सुगंधा की टांगों के बीच अभी भी सुरसुरा हाट महसूस हो रही थी कुछ देर तक सुगंधा वहीं बैठी रही काफी समय बीत गया था रोहन भी काफी मस्त नजर आ रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मां ने जबरदस्त नजारा पेश की थी जिसे देख कर रह रह कर उसका लंड अभी भी अंगड़ाई ले रहा था।
थोड़ी देर बाद दोनों घर वापस लौट आए।

उसे अपनी किस्मत पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि अब तक तो अपनी मां को नंगी देख चुका था लेकिन उसे बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि वह अपनी मां को अपनी आंखों से पेशाब करता हुआ देख रहा है। रोहन के मुंह में पानी आने लगा उसकी लार टपकने लगी खुशी अपनी किस्मत पर नाज होने लगा क्योंकि कुछ दिनों से उसकी किस्मत उसके पक्ष में चल रही थी जो वह सोचता था उसकी आंखों के सामने वैसा ही होता जा रहा था इस समय रोहन की आंखों के सामने उसकी मां की बड़ी-बड़ी गोरी गांड थी। जिसे सुगंधा हल्के से उठाए हुए थे और सुगंधा की इस हरकत का उसके बेटे पर बुरा असर पड़ रहा था पलभर में ही उसका लंड पजामे के अंदर तन कर लोहे के रोड की तरह हो गया था। जिसे रोहन अपने हाथों से मसलने लगा था सुगंधा की गुलाबी पुर के गुलाबी छेद में से पेशाब की धार बड़ी तेजी से निकल रही थी जिसकी वजह से उसमें से एक सीटी सी बजने लगी थी और इस समय सुगंधा की बुर से निकल रही सीटी की आवाज रोहन के लिए किसी बांसुरी के मधुर धुन से कम नहीं थी रोहन उस मादकता से भरे नजारे और बुर से आ रही है मधुर धुन में खोने लगा सुगंधा अपनी तरफ से पूरी एहतियात बरतते हुए अपनी चारों तरफ देख ले रही थी लेकिन अपने पीछे नजर नहीं बढ़ा पा रही थी वह इस बात से पूरी तरह से निश्चिंत थी कि उसे इस समय पेशाब करते हुए कोई नहीं देख रहा है लेकिन इस बात से अनजान थी कि उसका ही बेटा झाड़ियों के पीछे से चुपके से खड़ा होकर उसे पेशाब करते हुए देख रहा था। थोड़ी देर में सुगंधा पेशाब कर ली लेकिन उठते उठते वह अपनी गुलाबी पुर की गुलाबी पतियों में से पेशाब की बूंद को गिराते हुए हल्के हल्के अपने नितंबों को झटकने लगी।
लेकिन सुगंधा की यह हरकत बेहद ही कामुकता से भरी हुई थी क्योंकि रोहन खुद अपनी मां की इस हरकत को देखकर एकदम से चुदवासा हो गया था और जोर से अपने लंड को मसलने लगा था।
सुगंधा पेशाब करके खड़ी हो गई और एक हाथ से अपनी पीली रंग की पैंटी को ऊपर चढ़ाने लगी रोहन तो यह नजारा देखकर एकदम कामुकता से भर गया थोड़ी ही देर में सुगंधा अपनी साड़ी को नीचे गिरा दी और अपने कपड़े ठीक कर के जाने को हुई ही थी कि झुग्गी मैं से आ रही खिलखिला ने की आवाज सुनकर उसके कदम रुक गए वह एक पल के लिए झुग्गी की तरफ देखने लगी। तुरंत उसकी आंखों में चमक आ गई उसे वह दिन याद आ गया जब वह गेहूं की कटाई वाले दिन खेतों में आई थी और इसी तरह से झुग्गी मैं से आ रही हसने की आवाज सुनकर उत्सुकतावस अंदर झांकने की कोशिश की थी और अंदर का नजारा देखकर एकदम से सन में रह गई थी। उसे उस समय इस बात का बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि झुग्गी के अंदर उनके खेतों में काम कर रहा मजदूर किसी औरत के साथ चुदाई का खेल खेल रहा है और आज ठीक उसी तरह की आवाज सुनकर एक बार फिर से सुगंधा का दिल जोरो से धड़कने लगा।
दूसरी तरफ रोहन अपनी मां को देखते हुए अपने लंड को मसल रहा था लेकिन उसे यह समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां आखिर वापस जाते जाते वहीं रुक क्यों गई उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और वह उन्हीं झाड़ियों के पीछे छुप कर देखने लगा
एक अजीब सा अहसास सुगंधा के तनबदन को झकझोर रहा था। सुगंधा की आंखों के सामने वही दृश्य नजर आने लगा जो उस दिन खेतों में हुआ था उसे लगने लगा कि जरूर झुकी में आज भी वही दृश्य हो रहा होगा इसलिए वह धीरे-धीरे उस छोटी सी झोपड़ी की तरफ जाने लगी और पीछे झाड़ियों में छिपा हुआ रोहन अपनी मां के इस हरकत को देख रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां कर क्या रही है।
एक तो पहले से ही अपनी मां की नंगी गांड उस और उसे पेशाब करता हुआ देखकर उसकी हालत खराब थी अजीब लंड था कि बैठने का नाम नहीं ले रहा था और उसकी इस तरह की शंका स्पद हरकत रोहन के तनबदन को अजीब सी उत्तेजना प्रदान कर रही थी धीरे धीरे सुगंधा उस झोपड़ी की तरफ आगे बढ़ रही थी और जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी वैसे-वैसे अंदर से आ रही आवाज उसके कानों में साफ-साफ सुनाई दे रही थी।
आहहहहह आहहहहहहह करमुआ आहहहहहह और जोर जोर से धक्के लगा।
( जैसे ही उस झोपड़ी में से आ रही एक औरत के मुंह से इस तरह की आवाज सुगंधा के कानों में पड़ी सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई उसे समझते देर नहीं लगी की झोपड़ी के अंदर क्या चल रहा है और अंगूर के बागानों की रखवाली करने वाला करण सिंह झोपड़ी के अंदर ही किसी औरत की चुदाई कर रहा था अब तो सुगंधा से रहा नहीं जा रहा था वह दबे कदमों से झोपड़ी के बिल्कुल करीब पहुंच गई और अंदर झांकने की कोशिश करने लगी दूर खड़ा रोहन अपनी मां की इस हरकत से बेहाल हुए जा रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी मां करके आ रही है लेकिन इतना तो समझ में आ गया था कि जरूर कुछ ना कुछ झोपड़ी के अंदर चल रहा है जिसे देखने के लिए उसकी मां उत्सुक है।
इधर उधर नजर दौड़ाने पर उसे एक छोटी सी जगह दिख गई जहां से थोड़ी सी दरार बनी हुई थी और सुगंधा तुरंत उस दरार से अपनी आंख लगाकर अंदर के नजारे को देखने लगी और अंदर के नजारे को जैसे ही देखी उसका दिमाग सन्न रह गया उसकी टांगों के बीच हलचल होने लगी। उसे साफ साफ नजर आ रहा था कि झोपड़ी के अंदर एक चारपाई पर एक औरत लेटी हुई थी जिसके बदन पर मात्र एक ब्लाउज था जो कि उसके सारे बटन खुले हुए थे और करम सिंह उस पर लेटा हुआ था और जोर जोर से उसके दोनों खरबूजे को दबाता हुआ उनका रस मुंह लगाकर निचोड़ रहा था। और वह औरत गरम-गरम सिसकारियां लेते हुए उसका जोश और बढ़ा रही थी और करम सिंह अपनी पूरी ताकत लगाते हुए अपनी कमर को जोर जोर से हिला रहा था।
यह नजारा देखकर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी। पलभर में ही सुगंधा के बदन में गर्माहट फैलने लगी उसकी सांसों की गति तेज होने लगी कर्म सिंह की हिलती हुई कमर को देखकर सुगंधा का अंदाजा गलत नहीं था कि उस औरत को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही है वह जानती थी कि जिस तेजी से कर्म सिंह अपनी कमर हिला रहा है उतनी ही रफ्तार से उसका लंड उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा होगा और उसकी रगड़ से वह औरत मस्त हो रही है तभी तो उसके मुंह से गरम गरम सिसकारियां निकल रही थी।
कसम से कमली जो मजा तेरी बुरी में है वह किसी और बुर में नहीं जब जब मैं तेरी बुर में अपना लंड डालता हूं तो मुझे लगता है मुझे स्वर्ग का मजा मिल रहा है।।
आहहहहहब आहहहहहह और जोर से रे सच करमुवा मुझे भी तेरे साथ में मजा आता है मेरा मरद तो बस दिन-रात दारू और जुआ में ही लगा हुआ है उसका तो ठीक से खड़ा भी नहीं होता तभी तो मुझे तेरे पास आना पड़ता है और तू तो मुझे मस्त कर देता है देखना तेरे लिए एकदम नंगी तेरे नीचे लेटी हूं और बहुत जोर जोर से धक्के लगा मेरा होने वाला है ।
मेरा भी होने वाला है
( और इतना कहने के साथ ही कर्म ने अपने कमर को और जोर जोर से हिलाना शुरू कर दिया इतने में तो सुगंधा पसीने से तरबतर हो गए उससे यह नजारा बहुत ही मनमोहक लग रहा था उसका गला सूखा जा रहा था और जिस तरह से कर्म सिंह अपनी कमर हिला रहा था वह समझ गई थी कि दोनों का काम होने वाला है इसीलिए उसका वहां खड़े रहना ठीक नहीं था और वह दबे पांव वापस लौट गई लेकिन वहां से पीछे हटते समय वह आश्चर्य से अपने मुंह पर हाथ लगा दी जिसे देख कर रोहन समझ गया की झोपड़ी के अंदर जरूर कुछ ना कुछ ऐसा हो रहा है जो कि उसकी मां के लिए आश्चर्य से कम नहीं था सुगंधा वापस लौट चुकी थी रोहन कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा उसके मन में हो रहा था कि वह भी झोपड़ी तक जाए और देखें कि अंदर क्या हो रहा है और ऐसा सोचकर वह झाड़ियों से बाहर निकलने वाला था कि तभी अंदर से एक औरत निकली जो कि अपने कपड़ों को व्यवस्थित कर रही थी और साथ ही उसके पीछे पीछे एक लंबा तगड़ा आदमी निकला जो कि अपने पर जाने की डोरी बाद रहा था इतना देखकर रोहन को समझते देर नहीं लगी की झोपड़ी के अंदर दोनों की चुदाई चल रही थी।
यह रोहन के लिए बेहद आश्चर्यजनक तो था ही उससे भी ज्यादा उत्तेजित कर देने वाली बात यह थी कि उसकी मां चोरी-छिपे झोपड़ी के अंदर के नजारे को देख रही थी और यह तय था कि उसकी मां कुछ देर तक वहां खड़े होकर उन दोनों की चुदाई देख रही थी। यह ख्याल मन में आते ही रोहन का लंड फिर से अंगड़ाई लेने लगा।
थोड़ी देर बाद रोहन पानी लेकर उस जगह पर गया वहां देखा तो उसकी मां चारपाई पर बैठी हुई थी और करम सिंह वहीं नीचे बैठा हुआ था और उससे सुगंधा बोल रही थी।
कहां चले गए थे करम सिंह मैं कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं।
कहीं नहीं मालकिन रात को जंगली जानवर परेशान करते हैं इसलिए अपने बगीचे के किनारे किनारे कटीली झाड़ियां लगाने गया था।
( हरामखोर कटीली झाड़ियां लगाने गया था कमली के मैदान पर हल चलाने गया था हरामखोर चुदाई करके आ रहा है और यह झूठ बोल रहा है सुगंधा मन ही मन में बोली। और यही बात रोहन भी मन ही मन में कह रहा था । सुगंधा उसकी बात सुनकर बोली।)
अब तुम्हें अंगूरों के बाद का ज्यादा देखभाल करना होगा क्योंकि अंगूर तैयार होने वाले हैं अगर जरा सा भी चूक हुई तो गांव वाले सब तोड़ ले जायेंगे इसलिए यहां वहां मैं जाकर तुम बगीचे की देखभाल करो ।
जी मालकिन ऐसा ही होगा।
और तुम कहां चले गए थे बेटा मैं तुम्हारा यहां बैठकर कब से इंतजार कर रही हूं तुम्हें पता है कितनी जोरों की प्यास लगी है अगर इंसान तुम्हारे भरोसे रहे तो वह प्यासा ही मर जाए।
( अपनी मां की बात सुनकर रोहन मन ही मन में बोला कितना झूठ बोल रही है साली वहां अपनी बड़ी बड़ी नंगी गांड दिखाते हुए कैसे मूत रही थी और झोपड़ी में चल रही चुदाई देख कर मस्त हो रही थी और मुझे कह रही है कि मैं यहां बैठकर कब से इंतजार कर रही हूं। )
मम्मी में आने ही वाला था कि( करम सिंह को नमस्ते करते हुए) मुझे खरगोश नजर आ गया और उसे पकड़ने के चक्कर में देर हो गया ।
रोहन की बात सुनकर सुगंधा हसदी और हंसते हुए करम सिंह को देखने लगी और मन ही मन में बोली साला कितना हरामी है इसकी बीवी घर में इसका इंतजार करती होगी और मम्मी सोचती होगी कि उसका पति खेतों में काम कर रहा है लेकिन उस बेचारी को क्या माल है कि यहां पर किसी और औरत के साथ रंगरेलियां मना रहा है क्या किस्मत है।
एक तरफ सुगंधा कर्म सिंह की करतूत से क्रोधित होकर उसे मन ही मन में कोर्स भी रही थी तो दूसरी तरफ उसकी किस्मत पर जल भी रही थी क्योंकि एक यह मर्द था जो कि घर में पत्नी होने के बावजूद भी दूसरी औरतों को मौका मिलते ही अपने नीचे लाने में जरा भी कसर बाकी नहीं रखता था और जिस पागलपन से वह औरत की चुदाई करता था उसे देखकर सुगंधा की टांगों के बीच अभी भी सुरसुरा हाट महसूस हो रही थी कुछ देर तक सुगंधा वहीं बैठी रही काफी समय बीत गया था रोहन भी काफी मस्त नजर आ रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने उसकी मां ने जबरदस्त नजारा पेश की थी जिसे देख कर रह रह कर उसका लंड अभी भी अंगड़ाई ले रहा था।
थोड़ी देर बाद दोनों घर वापस लौट आए।
 
सुगंधा जो कि अभी तक अपने आप को वासना में हवा से से बचाए हुए थी वह मादकता भरी हवा अब उसके जेहन को झकझोर ने लगी थी ना चाहते हुए भी सुगंधा उस खुशबू की तरह आकर्षित हुए जा रही थी जिस खुशबू को वह बिस्तर पर बरसों पहले छोड़ चुकी थी और वैसे भी किसी भी महिला के सामने अगर बार-बार इस तरह के कामोत्तेजक नजारे देखने को मिल जाए तो वह कितनी भी संस्कारी और मर्यादामई क्यों ना हो उसके पांव फिसल ना लाजमी हैं।
खेत में पहले ही वह चुदाई के दृश्य को देख चुकी थी जैसे बड़ी मुश्किल से वह भुला पाई थी कि तभी अनजाने में ही उसकी आंखों के सामने उसके ही बेटे के खड़े मोटे तगड़े और लंबे लंड को देखकर टांगों के बीच सुरसुराहट महसूस करने लगी थी। और उस पर से आज जो अंगूर के बगीचे में झोपड़ी में उस औरत की करम सिंह के द्वारा ताबड़तोड़ कमर हिलाते हुए जबरदस्त चुदाई देखकर उस पल का एहसास अभी तक उसकी जांघों के बीच महसूस हो रहा था घर पर आकर सुगंधा को इस बात का अहसास हो गया था कि उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी एक पल के लिए तो उसे अपने आप पर ही गुस्सा आने लगा था कि ऐसा क्यों हो रहा है लेकिन अगले ही पल उसे अपनी किस्मत सबसे बेकार नजर आने लगती क्योंकि वह इतनी अत्यधिक खूबसूरत होने के बावजूद भी शरीर सुख का आनंद बरसों से धरा का धरा रह गया था और गांव की ऐसी वैसी जो की खूबसूरत भी नहीं थी उस तरह की औरतों को खूब मजे लेकर चुदवाते हुए देखकर उनकी किस्मत से सुगंधाको जलन सी महसूस होने लगी थी और अपने पति पर उसे गुस्सा भी आने लगा था वह यही सब सोच रही थी कि तभी बाहर दरवाजे पर दस्तक की आवाज सुनाई दी बाहर रोहन खड़ा था और बार-बार वह अपनी मां को आवाज दे रहा था दरवाजे पर हो रही खटखट की आवाज सुनकर उसका ध्यान टूटा। तो वह बिस्तर पर से उठकर दरवाजे की करीब गई और दरवाजे की कुंडी खोल दी लेकिन इस हड़बड़ाहट में वह वह साड़ी का पल्लू ठीक करना भूल गई जो कि उसके कंधे से नीचे गिरी हुई थी। दरवाजा खुलते ही रोहन कुछ बोलने वाला था कि उसके शब्द मुंह में अटक गए आंखें खुली की खुली रह गई ऐसा लग रहा था कि मानो उसकी आंखें पलक झपकाना ही भूल गई हो। लेकिन जिस तरह के हालात उसकी आंखों के सामने थे ऐसे हालात में रोहन करता भी तो क्या करता दरवाजा खोल दे उसकी आंखों के सामने जो बड़े बड़े खरबूजे दिखाई दिए उसको देखते ही उसकी आंखों की चमक बढ़ गई थी उसके मुंह में पानी आने लगा था इसमें सारा दोष सुगंधा का ही था वह ख्यालातो मैं इस कदर डूब गई थी कि वह अपने ब्लाउज के दो बटन बंद करना ही भूल गई थी और तो और वह अपने साड़ी के पल्लू को कंधे पर रखना भूल गई थी रोहन की प्यासी नजरें तो वैसे ही इस तरह के मालिक ने चारों की प्यासी थी और आंखों के सामने प्यास बुझाने का कुआं नजर आते ही वह सब कुछ भूल कर बस उसी तरफ देखने लगा एक तो पहले से ही सुगंधा के दोनों खरबूजे एकदम पके हुए थे और गोलाई में भी काफी कसे हुए नजर आते थे और ऊपर से उन दोनों खरबूजे को कैद में रखने वाले वस्त्र के ऊपर के दो बटन खुले होने की वजह से आधे से ज्यादा चुचियां ब्लाउज के बाहर झलक रही थी । यह देखकर तो रोहन के मुंह से लार टपकने लगी जी मैं आ रहा था कि दोनों हाथों से अपनी मां के खरबूजे को दबाकर उनका रस निचोड़ डाले।
गजब का नजारा बना हुआ था एक तरफ कमरे के बाहर दरवाजे पर रोहन खड़ा था तो दूसरी तरफ कमरे के अंदर दरवाजे पर उसकी मां खड़ी थी जिसके अस्तव्यस्त वस्त्रों की वजह से रोहन की मां बेहद कामुक लग रही थी इस अवस्था में कोई भी मर्द अगर औरत को अपनी आंखों के सामने देख ले तो वह उसे अपनी बाहों में भर कर उनके दोनों खरबूजो को मुंह में भर कर पीना शुरू कर दे लेकिन रोहन में अभी इतनी हिम्मत नहीं थी दरवाजा खुलते ही सामने रोहन को देखकर सुगंधा बोली
क्या बात है बेटा?
( इतना सुनकर भी जैसे सुगंधा की बातों का रोहन पर बिल्कुल भी असर नहीं हुआ वह तो आंखें फाड़े अपनी मां की दोनों गोलाईयो को देखे जा रहा था इस बात का एहसास है जब सुगंधाको हुआ कि उसका बेटा आंखें फाड़े ब्लाउज में से जांच की उसकी दोनों चूचियों को देखे जा रहा है तो वो एकदम से सकपका गई। वह तुरंत अपनी साड़ी से अपने स्तनों को ढकते हुए कंधे पर रख ली और जैसे ही एक खूबसूरत मादक नजारे पर पर्दा पड़ते ही जैसे रोहन को होश आया हो इस तरह से हड़ बढ़ाते हुए बोला। )
ममममम मम्मी मुझे कुछ पैसे चाहिए।
पैसे चाहिए क्यों पैसे चाहिए और इतनी जल्दी जल्दी तुम पैसे लेते हो पैसों का करते क्या हो( रोहन को आंखें फाड़े अपनी चूचियों को देखता हुआ पाकर सुगंधा थोड़ा गुस्से में थी )
मम्मी मुझे जरूरत है इसलिए चाहिए।
हां मुझे मालूम है तेरी जरूरतों के बारे में उन आवारा लड़कों के पीछे खर्चा करना ही तेरी जरूरत है ना । (इतना कहते हुए सुगंधा कमरे के अंदर अलमारी की तरफ जाने लगी रोहन अभी भी दरवाजे पर खड़ा था और अपनी मां को जाते हुए देखा तो उसकी नजर अपनी मां की कमर के नीचे भराव दार नितंबों पर चली गई जो कि मटकते हुए और भी ज्यादा मादक लग रही थी रोहन थोड़ा हिम्मत जुटा ते हुए कमरे के अंदर गया और अपनी मां को पीछे से उसके गले में अपनी दोनों बाहें डालकर दुलार करते हुए बोला ।)
मेरी प्यारी मम्मी आप खर्चा करने वाला दूसरा कोई है क्या अब मैं ही हूं तो मुझे दे दिया करो।
( सुगंधा अपने बेटे को इस तरह से दुलार करते हुए देखकर पिघल गई कुछ देर पहले जो कि उसकी हरकत की वजह से क्रोधित थी पल भर में उसका गुस्सा फुर्र हो गया और अपने बेटे की हरकत की वजह से सुगंधा मुस्कुरा दी और अलमारी खोलने लगी लेकिन रोहन के तन बदन में उत्तेजना का सैलाब उठने लगा क्योंकि जिस तरह से वह अपनी मम्मी को पीछे से पकड़ कर उसके गले में बाहें डाल कर खड़ा था इस अवस्था में अपनी मां के नरम नरम और बड़े-बड़े गांड का स्पर्श ठीक उसके मोटे तगड़े लंड पर हो रहा था जो कि पलभर में ही तन कर लोहे का रोड हो गया रूम की हालत खराब हो रही थी उसे अपनी मां की तरफ से डर भी लग रहा था लेकिन जिस तरह का आनंद उसे मिल रहा था वह अपने आप को रोक नहीं पा रहा था सुगंधा की बड़ी बड़ी गांड उसके लंड से स्पर्श हो रही थी इस बात से अनजान सुगंधा अलमारी खोलकर डा्ॉअर में से अपना पर्स निकाली और उसमें से सो सो के नोट निकालने लगी लेकिन इतने में उसे इस बात का अहसास हो गया कि उसके नितंबों के बीचो बीच कुछ चुभ रहा है लेकिन इस बात पर उसने ज्यादा ध्यान ना देकर बटुए के पैसे को गिनने लगे और दूसरी तरफ रोहन थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए अपनी कमर के नीचे वाले भाग को हल्के से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर दबाया ।
और इस बार अपनी गांड पर हो रहे कुछ ज्यादा चुभन की वजह से सुगंधा को समझते देर नहीं लगी कि जो चीज उसकी गांड के बीच भी चुभ रही है वह कुछ और नहीं बल्कि रोहन का लंड है और इस बात का अहसास होते ही उसका पूरा बदन उत्तेजना से गन गना गया। उसे समझ में नहीं आया कि क्या करें रोहन अभी भी उसे उसी अवस्था में पकड़े हुए था बल्कि उसके नथुनों से निकल रही उसकी गर्म गर्म सांसे सुगंधा के गर्दन पर महसूस हो रही थी जिसकी वजह से उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी। पल भर में सुगंधा की सांसे तेज चलने लगी उसे अब यह समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे की इस हरकत पर वह गुस्सा करें या इसका आनंद लें लेकिन उसका दिमाग उसे कुछ कहता इससे पहले ही उसके बदन की जरूरत रोहन की इस हरकत को अपनाने लगी जिस तरह से रोहन अपनी मां को बाहों में भर कर अपने लंड के कठोर बन का एहसास उसकी मदमस्त गांड पर करा रहा था उस हरकत को महसूस करके सुगंधा को अपने जवानी के दिन याद आने लगे थे सुगंधा जानबूझकर अब धीरे-धीरे नोट को गिनने लगी। सुगंधा को इस बात का एहसास अच्छी तरह से हो रहा था कि रोहन बार बार अपनी कमर के नीचे वाले भाग को उसके नितंबों पर दबा दे रहा था । रोहन की पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगाने को तैयार था रोहन अपनी मां के रुई से भी नरम बदन और गुदाज नशीले नितंबों का अनुभव बहुत अच्छी तरह से कर रहा था। उसके जी में तो आ रहा था कि वह अपने दोनों हाथों में अपनी मां की दोनों चुचियों को दबाता हुआ उसकी साड़ी ऊपर उठाकर पूरा लंड उसकी बुर में पेल दे। जिस तरह से उसकी मां बटुए में से ने नोट गिनने में देरी कर रही थी रोहन को समझ में आ रहा था कि उसकी मां को भी उसकी हरकत अच्छी लग रही थी। इसलिए वह अपने मन में ही बोला।
अगर यह सब तुम्हें अच्छा लग रहा है मम्मी तो अपने मुंह से हां क्यों नहीं बोल देती बस एक बार मुझे इशारा तो कर दो मैं तुम्हारी प्यासी बुर को अपने लंड से चोद कर एकदम तृप्त कर दूंगा तुम मस्त हो जाओगी मम्मी बस एक बार हल्का सा इशारा कर दो।
रोहन अपने आप से ही अपने मन में यह सब बातें करके अपने अंदर की भावना को प्रकट कर रहा था लेकिन उसकी मां को क्या मालूम था कि वह क्या चाहता है लेकिन जिस तरह की हरकत वा कर रहा था इतना तो सुगंधा समझ गई थी कि रोहन अब जवान हो गया था कुछ देर तक सुगंधा भी अपने बेटे की इस हरकत का पूरी तरह से आनंद उठाते हुए खड़ी रही लेकिन उसके मन में यह ख्याल आया कि कहीं उसका बेटा उसके बारे में गलत धारणा ना बांध ले इसलिए वह रोहन को अलग करते हुए बोली।
बस बस इतना मस्का लगाने की जरूरत नहीं है मैं तुझे दे रही हूं कैसे अगर तुझे नहीं दूंगी तो किसे दूंगी ।
(इतना कहकर सुगंधा खुद ही रोहन से अलग हो गई और रोहन को सांसों की 5 नोट थमाते हुए चोर नजरों से उसके पजामे की तरफ देखी तो सन्न रह गई पजामे के अंदर रोहन का लंड बुरी तरह से खडा था जो कि पजामे के अंदर तंबू सा बनाया हुआ था यह देखकर सुगंधा की बुर उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी सुगंधा अपने बेटे को इस बात का एहसास बिल्कुल नहीं होने दी की जो हरकत उसने किया था उसका अहसास उसे जरा सा भी हुआ है वह एकदम सामान्य तरीके से उससे बातचीत कर रही थी और जानबूझकर अपना ध्यान घर के काम में लगा रह
सुगंधा अपने बेटे को इस बात का एहसास बिल्कुल नहीं होने दी की जो हरकत उसने किया था उसका अहसास उसे जरा सा भी हुआ है वह एकदम सामान्य तरीके से उससे बातचीत कर रही थी और जानबूझकर अपना ध्यान घर के काम में लगा रही थी ताकि वह कमरे से बाहर चला जाए और ऐसा ही हुआ रोहन अपनी मां के हाथों से पैसा लेकर कमरे से बाहर चला गया रोहन को जाते हुए सुगंधा देखती रह गई और उसके बारे में सोचने लगी कि क्या सच में वह खुद की मां को देखकर इस तरह से उत्तेजित हो जाता है क्योंकि जिस तरह से वह हरकत किया था अगर उसके बदन में उत्तेजना बिल्कुल भी नहीं होती तो उसका लंड खड़ा नहीं होता इतना तोड़ सुगंधा समझ गई थी कि वह जानबूझकर अपने लंड का दवा उसकी गांड पर बढ़ा रहा था क्योंकि अगर अनजाने में ऐसा होता तो बार-बार रह-रहकर उसके कमर के नीचे वाला भाग उसके गांड पर दबाव ना बना रहा होता कुछ देर तक सुगंधा अपने बेटे के बारे में सोचते हुए बिस्तर पर बैठी रही लेकिन इस बात से वह इंकार भी नहीं कर सकती थी कि जिस तरह का एहसास उसने करा दिया था उसकी सोई हुई उन्माद उसकी वासना कुछ कुछ जागरूक हो रही थी एक तरफ उसे अपने बेटे की हरकत से प्रसन्नता भी हो रही थी तो किस बात की ग्लानि भी हो रही थी कि एक बेटा अपनी मां के साथ ऐसा कैसे कर सकता है वह इस बारे में सोचती हुई वहीं बैठी रह गई इस बात का एहसास सुगंधा को बिल्कुल भी नहीं था कि रिश्तो में भी आकर्षण बराबर बना रहता है भले वह रिश्ता मां बेटे भाई बहन का हो क्योंकि मर्द को हर रिश्ते में सबसे पहले एक औरत ही नजर आती है रोहन के साथ भी ऐसा ही हो रहा था सुगंधा उसकी मां होने के बावजूद भी रोहन उसे एक औरत के रूप में देखने लगा था क्योंकि उसके नजरिए में आकर्षण ने जन्म ले लिया था और सुगंधा तो वैसे भी खूबसूरती की मिसाल थी
 
सुगंधा अपने बेटे की हरकत से आश्चर्य की थी। क्योंकि जिस तरह की हरकत उसने कर दिया था उस बारे में सुगंधा कभी सोच भी नहीं सकती थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बेटे ने उसे अपनी बाहों में भर कर अपने लंड का दबाव उसकी गांड पर बढ़ा रहा था इसका मतलब साफ था कि उसका बेटा उसके प्रति पूरी तरह से आकर्षित था और जिस तरह की हरकत करते हुए अपनी कमर का दबाव उसकी गांड पर बनाया था साफ साफ शब्दों में कहा जाए तो वह उसे चोदना चाहता था सुगंधा इस बात से हैरान थी कि एक बेटा अपनी मां को कैसे इस नजर से दे सकता है कैसे हो अपनी मां को चोदने के बारे में सोच सकता है लेकिन इसका कोई भी जवाब दूर-दूर तक सुगंधा को नजर नहीं आ रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि रोहन जिस तरह की हरकत कर रहा था वह उसे चोदना ही चाहता था तो क्या सच में रोहन उसे चोदना चाहता है। क्या रोहन उसे एक औरत की तरह देखने लगा है अगर सच में ऐसा है तो यह कैसे हो गया रोहन बिल्कुल भी ऐसा नहीं था सुगंधा को इस बात का डर सताने लगा कि उसके आवारा दोस्तों के साथ रहकर रोहन पूरी तरह से बदल गया था क्योंकि आज से पहले उसने कभी भी इस तरह की हरकत बिल्कुल भी नहीं किया था।
सुगंधा अपने बिस्तर पर लेटे-लेटे यही सब सोच रही थी उसे पुरानी बातें याद आने लगी उसे वह पल याद आने लगा जिस दिन वह अपने कपड़े बदल रही थी और वह पूरी तरह से नंगी होकर अलमारी में अपने कपड़े ढूंढ रही थी। और जल्दबाजी में उसने दरवाजे की खड़ी लगाना भूल गई थी और तभी रोहन ना जाने कबसे दरवाजे पर खड़े होकर उसकी देख रहा था सुगंधा को पूरा यकीन था कि वह उसके नंगे बदन को उसकी नंगी गांड को देख चुका था हो सकता है उस दिन से उसके देखने का रवैया बदल गया हो क्योंकि मर्दों का भरोसा नहीं होता औरत के नंगे बदन के साथ जुड़े सारे रिश्ते नाते धरे के धरे रह जाते हैं उस समय एक मर्दों को उन रिश्तो में केवल एक औरत ही नजर आती है बाकी कोई भी रिश्ता उन्हें याद नहीं रहता हो सकता है उसके नंगे बदन को देख कर रोहन का दिमाग बदल रहा हो और सुगंधा को वह पल भी याद आने लगा जब वह नहाने के लिए गुसल खाने की तरफ गई थी और चोरी से अंदर झांकने पर उसे वह नजारा नजर आया था जिसके बारे में वह कभी कल्पना भी नहीं कर सकती थी रोहन पूरी तरह से महंगा था और उसका नंबर पूरी तरह से खड़ा था यह देखो कर दो उसके होश ही उड़ गए थे सुगंधाको को यह लगने लगा कि हो सकता है की उसके नंगे बदन के बारे में सोच कर ही उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया हो। इस बात को झूठ लाया भी नहीं जा सकता था लेकिन जहां एक तरफ सुगंधाको इन सब बातों को सोच कर और अपने बेटे की हरकत को देखते हुए गुस्सा आ रहा था वहीं दूसरी तरफ उसके मन का एक कोना कुछ ज्यादा ही चाहा करा था उसके मन में कहीं न कहीं प्रसन्नता भी हो रही थी क्योंकि जिस तरह की चुभन उसने आज अपने नितंबों के बीचो बीच की थी उस लंड की चुभन से उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई थी और पल भर में उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो गई थी सुगंधा को इस बात से अपने बदन में उत्तेजना का असर कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा था क्योंकि उसे अपनी बाहों में भर कर लंड उसकी गांड पर रगड़ने वाला दूसरा कोई नहीं उसका ही बैठा था इस बात को लेकर ना जाने क्यों उसकी उत्तेजना कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी। ना जाने क्यों अपने बेटे के गंदी हरकत के बावजूद भी सुगंधाको उसकी यह हरकत अच्छी लग रही थी उस पल को याद करके सुगंधा की सांसे भारी हो चली थी एक अजीब से मादकता का अहसास उसके तन बदन को झकझोर रहा था।
कुछ देर तक सुगंधा ऐसे ही अपने कमरे में इसी तरह से बैठी रही उसकी आंखों के सामने बीते हुए कुछ दिनों के सारे चित्र किसी फिल्म की तरह चलने लगे वह समझ नहीं पा रही थी कि रिश्तो के बीच इस तरह के आकर्षण को कैसे दूर करें क्योंकि कहीं ना कहीं उसे यह सब गलत लग रहा था जो कि गलत भी था लेकिन बदन की जरूरत और आकर्षण को मैं तो दिमाग रोक सकता है ना ही मन यह तो पानी की तरह होता है जहां रास्ता मिलता है चलता चला जाता है फिर यह नहीं देखता कि रास्ते में क्या आ रहा है यही सुगंधा के साथ भी हो रहा था । लेकीन सुगंधा अपने दिलो दिमाग से काफी मशक्कत करने के बाद मन में ठान ली की इस तरह क्या कर सकते वह अपने आप को दूर रखेगी और अपने बेटे को भी वह अच्छी तरह से जानते थे कि उसका जो रुतबा पूरे गांव में जमीदारी के तौर पर है वह उस पर कभी भी धक्का लगने नहीं देगी और ना ही अपने और अपने बेटे के पवित्र रिश्ते के बीच में किसी तरह की आंच आने देगी ऐसा सोचकर वह बीते हुए पल को भुलाने की कोशिश करते हुए अपना सारा ध्यान काम में लगा दी।
पर वहीं दूसरी तरफ रोहन अपनी मां से दिए हुए पैसे को दोनों हाथों से खर्च करने लगा। उसके आवारा दोस्त तो उसके पीछे इसीलिए पिछलग्गु बन कर घूमते रहते थे कि उन्हें खाने पीने को जो मिलता था। यह बात बेला को खबर पड़ गई थी कि रोहन ने फिर से जेब खर्च के लिए अपनी मां से पैसे लिए हैं इसलिए बेला के हाथ के साथ साथ उसकी बुर में भी खुजली आने लगी थी बेला रोहन का इंतजार करने लगी लेकिन रोहन उसे घर में नजर नहीं आया उसे इस बात का डर था कि कहीं ऐसा ना हो जाए कि उसके हाथ में पैसे आने से पहले ही रोहन उसे अपने दोस्तों पर लुटा दे और वैसे भी पैसे के साथ साथ बेला का मन ललच रहा था रोहन के मोटे तगड़े लंड को देखने के लिए।
उस से इंतजार करना मुश्किल हुए जा रहा था इसलिए उसे ढूंढते ढूंढते खेतों की तरफ निकल गई लेकिन उसे रोहन कहीं भी नजर नहीं आया तो वह चलते चलते खेतों के उस पार जहां से एक छोटी सी नदी बहती थी वहां की तरफ चल दी सोची कुछ देर तक वही आराम करके नहा कर वापस लौट आएगी और वह नदी के किनारे पहुंच गई यह गांव की एक छोटी सी नदी थी जिसके चारों तरफ घने वृक्ष लगे हुए थे जिसकी वजह से यहां पर अक्सर कोई आता जाता नहीं था और चारों तरफ घने पेड़ होने की वजह से धूप की हल्की सी रोशनी भी अंदर तक नहीं आ पाती रे और इसीलिए अंधेरा महसूस होता था अक्सर बेला यहां आया करती थी लेकिन यह उस समय की बात है जब उसका चक्कर गांव के एक आवारा लड़के के साथ था अक्सर वह उसे यही बुलाया करता था और बेला के साथ जी भर के खेलने के बाद वापस गांव की तरफ चले जाया करते थे बेला इस नदी के किनारे खूब एस की है और वो जानती थी कि यहां पर उसे सुकून मिलेगा इसलिए वह नदी के किनारे पहुंच गई कुछ देर पेड़ के किनारे बैठे रहने के बाद और रोहन का इंतजार करने के बाद वैसे तो वो जानती थी कि रोहन इधर आने वाला नहीं है फिर भी मन में एक आस बंधी हुई थी कि काश रोहन इधर उसे मिल जाता तो उसकी बात बन जाती। लेकिन ऐसा होना मुमकिन नहीं था यह बात बेला भी अच्छी तरह से जानती थी इसलिए कुछ देर तक वहीं पेड़ के नीचे बैठकर आराम करने के बाद वह नहाने के बारे में सोचने लगी वैसे भी गर्मी इतनी थी और नदी का पानी बहुत ठंडा था इसलिए नहाने का लालच वह रोक नहीं पाई और धीरे-धीरे अपने कपड़े उतारने लगी वह जानती थी कि यहां कोई आने वाला नहीं है इसलिए वह पूरी तरह से आश्वस्त थी इसलिए वह धीरे-धीरे करके अपने बदन से सारे कपड़े उतार कर पेड़ के नीचे रख दी बेला के बदन पर इस समय कपड़े का रेशा भी नहीं था वह पूरी तरह से नंगी थी एक नौकरानी होने के बावजूद भी उसका बदन इतना गठीला था कि कोई उसके खूबसूरत बदन के रखरखाव को देख कर बता नहीं सकता था कि यह एक नौकरानी है।
अपने सारे कपड़े उतार कर बेला एकदम नंगी होकर धीरे-धीरे नदी के पानी में पैर डालते हुए रखने लगी। दो चार कदम आगे बढ़ी ही थी कि नदी का पानी बेला की कमर तक आ गया। चारों तरफ से घने पेड़ों से घिरा होने के कारण नदी का पानी बहुत ही ठंडा था जो कि गर्मी में बेला के बदन को राहत प्रदान कर रहा था। बेला को बहुत ही मजा आ रहा था बेला धीरे-धीरे अपने कदम आगे बढ़ाने लगी और जैसे-जैसे आगे बढ़ती जाती पानी का स्तर ऊपर की तरफ बढ़ता जाता और इस तरह से धीरे-धीरे बेला की नंगी गांड पानी के अंदर डूबने लगी धीरे धीरे करके पानी कमर से ऊपर आने लगा और जैसे ही पानी उसकी दोनों चूचियों की निचली सतह पर आया बेला वहीं रुक गई उसे मज़ा आने लगा और वह अपने हथेली से पानी ले ले कर अपने ऊपर डालने लगी पानी ठंडा होने की वजह से बेला को गुदगुदी महसूस हो रही थी । बेला छप्प छप्प करके नदी के पानी में बच्चों की तरह खेलते हुए नहाने का मजा लेने लगी।
वैसे एक बेहद ही मादकता से भरा हुआ नजारा नदी में नजर आ रहा था लेकिन इसे देखने वाला वहां कोई नहीं था कितना खूबसूरत और काम होते दिनों से भरपूर नजारा होता है जब एक औरत अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर इस तरह से खुले में नदी में नहाती हो तो इस तरह का नजारा देखने वाले का तो देखते ही देखते पानी निकल जाना लाजिमी है बेला यही बात नदी के अंदर एकदम नंगी होकर नहाते नहाते सोच रही थी कि काश इधर रोहन आ जाता तो उसके लंड के दर्शन हो जाते।
शायद उसके मन की यह बात भगवान भी सुन रहा था इसलिए बेला पर प्रसन्न होते हुए वहां पर सोहन को भेज दिया बात ऐसी थी कि रोहन आज अपने दोस्तों के साथ कुछ ज्यादा दूर तक निकल गया था और आते समय अकेला ही इस रास्ते से जल्दी घर पहुंचने की उम्मीद लिए आने लगा वह नदी के किनारे पहुंचा ही था कि उसे नदी के अंदर छपाक छपाक की आवाज आने लगी उसे कुछ समझ में नहीं आया और यह देखने के लिए कि वह आवाज कैसी है वह उस आवाज की दिशा में जाने लगा धीरे-धीरे पांव बढ़ाते हुए जब वह नदी के बिल्कुल करीब पहुंच गया तो नदी के अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए।
नदी के अंदर का नजारा देखकर रोहन का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया था उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था ।नदी में बेला को इस अवस्था में देखकर रोहन का दिल गदगद हुए जा रहा था। उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था बेला का संपूर्ण बदन पानी के अंदर था केवल उसके दोनों कबूतर पानी के ऊपर फड़फड़ा रहे थे। तभी रोहन की नजर पैरों के नीचे पड़ी तो उसके होश उड़ गए पैरों के नीचे बेला के बदन के सारे वस्त्र पड़े हुए थे जिसे देखकर रोहन को समझते देर नहीं लगी कि पानी के अंदर बेला पूरी तरह से नंगी है।
यह ख्याल रोहन के मन में आते ही उसके पजामे का तंबू तानने लगा। खुशी के मारा रोहन का दिल उछलने लगा कामोत्तेजना की लहर तन बदन को झकझोर ने लगी। रोहन से अब बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा था वह अपने कदम नदी के पानी की तरह बढ़ाने लगा। उसके हाथ में समोसे और जलेबी की थैली थी।
बेला अपनी ही धुन में नदी के अंदर जल क्रीडा कर रही थी वह बार-बार अपनी हथेली में पानी भरकर अपने ऊपर डाल रही थी ऐसा करने से उसकी भारी भरकम चूचियां ऐसा लग रहा था मानो किसी पानी भरे गुब्बारे की तरह नदी में तैर रहे हो यह नजारा देखकर तो रोहन के मुंह में पानी आ रहा था ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आंखों के सामने स्वादिष्ट व्यंजन से भरी हुई थाली पड़ी हो। उसके पजामे में उसका लंड खड़ा होकर पूरी तरह से गदर मचा रहा था ।
रोहन धीरे धीरे नदी की तरफ कदम बढ़ा रहा था बेला अपने में मस्त नदी के शीतल जल में मजे ले रही थी उसे इस बात का आभास तक नहीं हुआ कि रोहन उसके खूबसूरत नंगे बदन को देखकर मस्त हुए जा रहा है तभी रोहन के कदमों की आहट सुनकर नजर घुमाई तो सामने ही उसे रोहन नजर आ गया बेला तो रोहन को देखते ही एकदम से प्रसन्ना हो गई साथ ही सीधे उसकी नजर रोहन के पजामे पर गई तो उसके होश उड़ गए उसे सारा माजरा समझ में आ गया वह समझ गई कि उसे इस तरह से नदी में नंगी होकर नहाते देख कर रोहन का लंड खड़ा हो गया है
 
I
तभी बेला रोहन से बोली।
सुनी हूं कि तुम बहुत पैसे उड़ा रहे हो अरे कुछ हमारे लिए भी बचाए हो कि सब खर्च कर दिए (बेला जानबूझकर रोहन की आंखों के सामने ही अपनी चूची पर पानी डालते हुए बोली बेला किया मस्ताना देखकर रोहन का दिल बाग-बाग हो गया उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसकी आंखों के सामने ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग से उतरी हुई कोई परी नदी में नहा रही हो। रोहन अब तक इतना तो समझ गया था कि बेला को पैसे से ही मतलब था और यह अच्छा भी था रोड के पास पैसों की कमी नहीं थी पैसा खर्च करने पर उसे कोई भी आपत्ति नहीं थी क्योंकि वह जानता था कि पैसे खर्च करके उसे औरतों के अंगों को देखने सुनने और उन्हें स्पर्श करने का मौका मिल रहा था पूरी तरह से बेला पर खर्च किए गए पैसे वसूल हो रहे थे इसलिए बेला की बात सुनते ही रोहन बोला।)
अरे नहीं नहीं तुम्हारे लिए तो मैंने पैसे बचा के रखा हूं (और इतना कहकर वह अपने पहचाने की जेब में से 100 100 की तीन नोट निकालकर बेला को दिखाते हुए बोला)
यह देखो।
( बेला की नजर 100 100 कि 3 नोटों पर पढ़ते हैं उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और जांघों के बीच की पतली सी दरार में चिंगारी उठने लगी उसकी खुशी का ठिकाना ना था वह बात को बदलते हुए बड़े ही कातिल अंदाज में अपने दोनों हाथों से अपनी दोनों चुचियों को कस के पकड़ ते हुए बोली)
रोहन बाबू तुम तो मेरा बहुत ख्याल रखते हो मुझे यहां अकेले में नहाने में मजा नहीं आ रहा है तुम भी अंदर आ जाओ।
सच बेला क्या मैं तुम्हारे साथ नहा सकता हूं।
हां क्यों नहीं बिल्कुल नहा सकते हो।
लेकिन तुम तो पानी के अंदर एकदम नंगी हो ।
तो क्या हुआ तुम भी अपने सारे कपड़े उतार कर अंदर आ जाओ और वैसे भी यहां कोई देखने वाला नहीं है इतनी गर्मी में नदी के ठंडे ठंडे पानी मैं नहाने का मजा ही कुछ और है।। आ जाओ अपने कपड़े उतार कर मे जेसे नंगी हूं तुम भी नंगे हो जाओ (बेला जानबूझ कर उसे खुले शब्दों में आमंत्रित कर रही थी इन शब्दों का रोहन पर बहुत ही बुरा और कामुक असर हो रहा था उसका लंड था की शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। इस तरह का खुला आमंत्रण भला कौन बेवकूफ था जो मना कर देता बेला की बात सुनकर रो हम तो अपने कपड़े उतारने का गम तैयार हुआ ही था कि बेला बोल पड़ी।)
रोहन पहले सारे पैसे पेड़ के नीचे पड़े मेरे ब्लाउज में रख दो और जल्दी से अपने कपड़े उतार कर आ जाओ।
रोहन तो बेला की नंगी जवानी देखकर पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो गया था इसलिए तुरंत रुपए बेला के ब्लाउज में रख दिया लेकिन ब्लाउज को अपने हाथों में लेकर एक अजीब तरह की उत्तेजना रोहन के तन बदन मे जागरूक हो रही थी वह जल्दी से ब्लाउज में पैसे रखकर अपने कपड़े उतारने लगा लेकिन अंत में अपने अंडर वियर उतारने से कतरा रहा था उसको इस तरह से शर्म आता हुआ देखकर बेटा जानबूझकर अपने कदम आगे बढ़ाकर अपने चुचियों के नीचे के नंगे बदन को दिखाने की कोशिश करते हुए आगे बढ़ने लगी और जैसे ही पानी के बाहर उसके कमर के नीचे वाले अंग नजर आया तो रोहन बेला की रसीली बुर के ऊपर हल्के हल्के बाल को देखकर पूरी तरह से चुदवासा हो गया। अब तो रोहन से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह तुरंत बेला की आंखों के सामने ही अपने अंडरवियर को उतारकर एकदम नंगा हो गया बेला तो रोहन कीमत मस्त जवानी और उसके गठीला बदन को देख कर पानी पानी होने लगी उसका लंड पूरी तरह से ऊपर आसमान की तरफ देख रहा था जिसे देखकर बेला के मुंह के साथ-साथ उसकी बुर में भी पानी आने लगा था रोहन बी अब एकदम नंगा हो चुका था इस तरह के एकांत मे जवान औरत और एक जवानी के दहलीज पर कदम रख रहा नौजवान मर्द अपनी जवानी की गर्मी निकालने को बेताब थे।
रोहन अपने सारे कपड़े उतार कर नदी के पानी में उतरने लगा यह देखकर बेला का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा बेला अच्छी तरह से जानती थी कि अभी रोहन के साथ मर्यादा की दीवार लांघना नहीं है क्योंकि वह रोहन को पूरी तरह से एकदम से अपना दीवाना बना देना चाहती थी जिसमें काफी हद तक वह कामयाब भी हो चुकी थी धीरे-धीरे करके वह रोहन से पैसे ऐंठ रही थी। जिसमें बेला को मज़ा भी आ रहा था और उसकी जरूरत भी पूरी हो रही थी मन तो उसका भी कर रहा था कि रोहन के लंड को अपने हाथों से अपनी चूत पर रख कर पूरा का पूरा अंदर जाने वाले लेकिन इस तरह की जल्दबाजी करना वह मुनासिब नहीं समझ रही थी।
रोहन धीरे धीरे चलता हुआ उसके करीब आ गया था उसका लंड चलते समय ऊपर नीचे बड़े ही भयानक रूप से हिल रहा था जो कि एक औरत के लिए बेहद कामोत्तेजना से भरपूर नजारा होता है और कुछ हद तक दर्द के अहसास से डरावना भी लेकिन एक औरत अच्छी तरह से जानती है कि मर्द का हथियार जितना दमदार होता है युद्ध करने में उतना ही मजा आता है। लेकिन इस समय बेला का युद्ध करने का विचार बिल्कुल भी नहीं था वह सिर्फ अपने पासे बिछा रही थी ताकि रोहन को पूरी तरह से घेर सके ।
बेला को ऐसा लग रहा था कि वह रोहन को अपने जाल में फंसा रही है जबकि हकीकत यह था कि बेला खुद-ब-खुद रोहन के फौलादी अंग के जाल में उसके आकर्षण में फंसती चली जा रही थी वह भले ही अपने आप को कितना भी मर्यादा की दीवार लगने से अभी रोक रही हो एक न एक दिन वह खुद ही रोहन से गिड़गिड़ाते हुए अपनी बुर में उसका लंड डालने के लिए कहेगी।
और वैसे भी यह युद्ध औरत और मर्द के बीच ऐसा युद्ध था जिसमें हार कर भी मर्द की ही जीत होती है। क्योंकि दोनों ही रूप में चाहे वह हारे या चाहे जीते आखिरकार मर्द को तो औरत की सबसे खूबसूरत हसीन बुर चोदने का मौका जो मिलता है और इसी मौके की तलाश में मर्द हमेशा इधर-उधर मुंह मारता फिरता है वेदा को भी ऐसा लग रहा था कि रोहन से पैसे ऐड कर वह रोहन को अपना दीवाना बना रही है यह हकीकत भी था कि रोहन उसके रूप जान उसके खूबसूरत नंगे बदन के आकर्षण में बंदर चला जा रहा था लेकिन यह रोहन की हार नहीं बल्कि उसकी जीत थी क्योंकि पैसों की कमी रोशनी को बिल्कुल भी नहीं थी पैसे खर्च करने के बाद उसे औरत के उन अंगों को देखने और समझने उन्हें स्पर्श करने का मौका मिल रहा था जिसे वह शायद अपनी प्रेमिका और अपनी पत्नी के द्वारा ही सीख पाता है । औरत के बेशकीमती और खूबसूरत अंगों को जानने समझने का मौका रोहन को बेला के द्वारा प्राप्त हो रहा था भले ही इसके लिए उसे पैसे खर्च करने पड़ रहे थे वैसे भी तो किसी भी प्रकार की शिक्षा प्राप्त करने के लिए पैसे तो खर्च कर नहीं पढ़ते हैं भले ही वह किताबी ज्ञान हो या अंगों का ज्ञान दोनों ही रूप में फायदा तो विद्यार्थियों का ही होता है और इस तरह के कामोत्तेजना से भरपूर अंगों का ज्ञान बेला 1 अनजाने में ही शिक्षिका बनकर अपने विद्यार्थी रोहन को दे रही थी।
नदी के पानी के अंदर बेला और रोहन के बीच की दूरी खत्म होकर केवल 1 फीट जितनी ही रह गई थी। और बेला जानबूझकर पानी की सतह के ईतने स्तर पर खड़ी थी कि जहां से रोहन को साफ तौर पर उसकी रसीली बुर के दर्शन हो रहे थे।
और यही तो बेला का ब्रह्मास्त्र था जिसे दीखाकर वह रोहन के चारों खाने चित कर चुकी थी। रोहन को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या देखें नजर को ऊपर उठा रहा था तो उसकी आंखों के सामने मौसमी दशहरी आम था और नीचे नजर कर रहा था तो मसालेदार लहसुन की कली नजर आ रही थी जिसके बिना सारे पकवान बे स्वाद लगते थे। मन तो रोहन का लालच रहा था कि दोनों को अपने हाथ में भर कर उनके स्पर्श से उनके बदन के अंगों के गर्माहट का आनंद ले लेकिन अभी तक बेला ने रोहन को इस तरह की छूट बिल्कुल भी नहीं दे रखी थी यह बात रोहन जानता था लेकिन अगर उनकी जगह कोई और होता तो अपने मन की ना जाने कबसे कर देता क्योंकि अंदर ही अंदर बेला भी यही चाहती थी।
 
रोहन की आंखों के सामने जन्नत का नजारा था रोहन कोई समय ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे कोई स्वर्ग की अप्सरा नीचे धरती पर आकर उसके सामने अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होकर नदी के पानी में जब कीड़ा कर रही है जिसे देखकर रोहन का मन मचल जा रहा है। बेला बहुत ही चालाक औरत थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि मर्दों को किस चीज की जरूरत पड़ती है। और वह उसी चीज को रोहन के ठीक आंखों के सामने पानी के ऊपरी सतह पर स्थिर की हुई थी वह चाहती है तो शर्म के मारे पानी के अंदर जा सकती थी लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही थी वह जानबूझकर अपनी बुर रोहन को दिखा रही थी क्योंकि रोहन भी बेला के उसी अंग का दीवाना था जिसे देखकर इस समय रोहन का लंड पूरी तरह से किसी लोहे के रोड की तरह टाइट हो गया था जिसे देख कर बेला के मुंह में भी पानी आ रहा था मन तो उसका कर रहा था कि रोहन के लंड को मुंह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूस डाले लेकिन इस समय ऐसा करना उसकी नजर में वर्जित नहीं था वह रोहन को और ज्यादा तड़पाना चाहती थी इसलिए जानबूझकर रोहन की तरफ देखकर अपने एक हाथ को नीचे की तरफ ले जाकर अपनी पूरी हुई बुर पर रखकर उसे हल्के हल्के से रगड़ते हुए खुजलाने का नाटक करने लगी। और बेला का यह नाटक रोहन के तन बदन पर छुरिया चलाने लगा खास करके उसके लंबे तगड़े लंड पर।
रोहन की हालत पानी बिन मछली की तरह हो रही थी वह ललचाए आंखों से विला की बुर की तरफ देख रहा था और यह देखकर बेला मन ही मन प्रसन्न हो रही थी और इसीलिए अभी भी वह लगातार अपनी बुर को अपनी हथेली से रगड़ दी जा रही थी जिससे उसके तन बदन में भी उत्तेजना की चीटियां चिकोटी काट रही थी। जिस तरह की हालत रोहन की थी ठीक उसी तरह की हालत बेला की भी थी आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी बस फर्क इतना था कि बेला अपने आप को संभाले हुए थी और रोहन था की बेला के इशारे का इंतजार कर रहा था। बेला पल पल रोहन को तड़पाए जा रही थी एक हाथ से अपनी बुर तो दूसरे हाथ से अपनी चूची को मसलते हुए बोली।
काफी दिनों से अच्छी तरह से नहाई नहीं हूं आज पूरे बदन को मलमल कर नहाउंगी।( ऐसा करते हुए वह रोहन की तरफ देखते हुए अपने कदम पीछे की तरफ हटाते हुए वह धीरे-धीरे कातिल मुस्कान बिखेरते हुए धीरे-धीरे अपने कदमों कों पीछे की तरफ ले रही थी। रोहन बेला के मादक अंगों के थीरकन को देखकर नशे में डूबता चला जा रहा था। और वह भी उन अंगों को देखकर अपने कदम आगे बढ़ा रहा था पानी के ऊपरी सतह पर रोहन का मोटा तगड़ा लंड ऊपर नीचे हिलता हुआ टन टना रहा था जिसे देखकर उत्तेजना के मारे बेला की बुर फुल पचक रही थी। बहुत ही गजब का मादकता से भरा हुआ नजारा नदी के अंदर बना हुआ था जिसके गवाह केवल बेला और रोहन के अलावा शीतल बह रही हवा और प्रकृति थी। और दूसरा कोई भी इस नजारे को प्रत्यक्ष दर्शन करने वाला वहां कोई नहीं था इसीलिए तो दोनों बेझिझक बिना कपड़ों के नदी के अंदर उतर गए थे बेला के चेहरे पर कामुक मुस्कान तैर रही थी। पीछे कदम रखते हुए वह थोड़ा सा डगमगाए और गिरने को हुई लेकिन वह पानी में गिर पाती इससे पहले ही रोहन उसके करीब पहुंचकर एक हाथ उसकी कमर में डाल कर उसे पकड़ लिया लेकीन बेला को गिरने से बचाने के लिए रोहन की तरफ से जो अफरा-तफरी हुई कुछ पल में ही बेला पूरी तरह से रोहन की बाहों में थी बेला का बदन रोहन के गठीला बदन से से एकदम सट गया था।
हालात कुछ इस तरह से हो गए थे की बेला की गोल-गोल चूचियां रोहन की छातियों से बिल्कुल चिपक से गए थे रोहन के तन बदन में एकाएक उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी बेला के नंगे बदन से चटनी से ऐसा लग रहा था कि जैसे वह किसी बिजली के तार को छू लिया हो और वैसे भी उसका मेन पावर बेला को इस तरह से पकड़ने की वजह से सीधे बेला के ट्रांसफार्मर पर इस पर सो रहा था जिसकी वजह से रोहन के साथ साथ बेला के तन बदन में भी कामोत्तेजना की चिंगारी भड़कने लगी थी दोनों एक दूसरे की आंखों में देखने लगे । पल भर में ही दोनों के सांसो की गति तेज होने लगी गांव के बीच से बहती इस नदी के किनारे खेली असीम शांति को केवल इन दोनों की तेज चल रही सांसो की गति की आवाज ही भंग कर रही थी रोहन का लंड बराबर बेला की रसीली बुर पर ठोकर मार रहा था जिसकी वजह से। बेला अपना आपा खोते जा रही थी ।रोहन पूरी तरह से मदहोश हो चुका था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है उसके तन बदन में उत्तेजना के साथ-साथ आनंददायक एहसास महसूस हो रहा था । रोहन और बेला के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव कम उत्तेजना का असर ज्यादा दिख रहा था पलभर में ही बेला का चेहरा लाल हो गया बार-बार उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि कोई उसकी बुर की दीवार पर हथोड़ा मार रहा है क्योंकि बार-बार रोहन के लंड का मोटा सुपाड़ा बेला की बुर की दीवार पर रगड़ खा जा रहा था। बेला के मन में तो हो रहा था कि वह रोहन के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी बुर की दीवार से हटाकर उसके छेद पर रख दे और उसे डालने के लिए बोले।
पर पैसे के लालच ने उसे ऐसा करने से रोक रखा था फिर भी पूरी तरह से चुदवाती हो चुकी बेला अपने चेहरे के इतने करीब रोहन के चेहरे को पाकर अपने आप को रोक नहीं पाई और खुद ही अपने होंठ को उसके होंठ पर रखकर चूसने शुरू कर दी रोहन तो बेला की इस हरकत से पूरी तरह से गनगना गया उसे समझ में नहीं आया कि क्या करें कुछ से कह देता को वह वैसे ही बेला की हरकत का आनंद उठाता रहा लेकिन एक मर्द होने के नाते सुबह अपने आपको ज्यादा देर तक रोक नहीं पाया और बेला को कसकर अपनी बाहों में भर कर उसके होठों को उसी प्रकार से चूसना शुरू कर दिया।
बेला की दोनों चूचियां रोहन की चौड़ी छाती पर पीस रही थी बेला के तनबदन में काम ज्वर फैल रहा था वह ना जाने कैसे अपने आप को संयम में रखे हुए थी वरना उसकी जगह कोई और औरत होती तो कब का रोहन लंड को अपनी बुर के अंदर उतार ली होती। रोहन के होठों को चूसते चूसते बेला को ना जाने क्या सूझी हुआ उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी चूची पर रख कर उसे दबाने का इशारा की रोहन तो जिंदगी में पहली बार किसी औरत की चूची पर हाथ रख रहा था औरत के गोल गोल स्तनों का नरम नरम स्पर्श हथेली पर पड़ते ही रोहन का तन बदन उत्तेजना से गदगद होने लगा। ऐसा लग रहा था कि जैसे एक छोटे से बच्चे को खेलने के लिए गेंद पकड़ा दी गई हो और बच्चा उसमें पूरी तरह से अपना मन लगाकर गेंद को पकड़ रहा हो इसी तरह से रोहन के साथ भी हो रहा था वह देला की चूची को कभी दबाता कभी खींचता तो कभी उसे सहला रहा था लेकिन बेला में एक हाथ ऊंची पर रखी थी और रोहन उत्तेजना के चलते अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को दबा रहा था साथ ही बेला के नरम नरम होंठों को चूसने का आनंद भी ले रहा था। बेला के बदन में काम उत्तेजना का नशा छा रहा था वह पूरी तरह से पागल हुए जा रही थी अभी भी दोनों के गुप्तांग पानी की सतह से ऊपर ही थे जिस पर रोहन का मोटा तगड़ा लैंड बार बार ठोकर मार रहा था या यूं समझ लो कि जबरदस्ती दरवाजे को खोलकर घुसना चाहता था रोहन पागलों की तरह बेला की चूचियों से खेल रहा था।
सससहहहहह आहहहहहहहहह यह क्या कर रहे हो रोहन बाबू कोई देख लेगा तो क्या होगा मेरी तो इज्जत चली जाएगी साथ ही नौकरी भी चली जाएगी ।सससहहहहह आहहहहहहहह
(जोर से चुची दबाने पर )
 
यहां हम दोनों को देखने वाला कोई भी नहीं है।
( रोहन जोर जोर से बेला की चुचीयो को दबाते हुए बोला। )
जिस तरह से रोहन बेला की चूचियों को दबा रहा था उससे बेला को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह एकदम मस्त हुए जा रही थी उससे बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर रोहन के मोटे तगड़े लंड को पकड़ लिया और उसे अपनी खुली हुई पूर्व पर रगड़ना शुरू कर दी जिससे उसकी उत्तेजना और आनंद में निरंतर वृद्धि होती जा रही थी और उसके मुख से तो गरम गरम सिसकारी की आवाज भी आना शुरू हो गई थी जिसे वहां सुनने वाला कोई भी नहीं था इसलिए वह बेफिक्र होकर जोर जोर से सिसकारी ले रही थी रोहन बेला की इस हरकत से एकदम कामातुर हो गया वह पानी बिन मछली की तरह तड़प रहा था उसके मन में बस यह़ हो रहा था कि कैसे भी करके ऊसका लंड बेला की जवानी का दरवाजा खोल के उसके अंदर घुस जाए लेकिन ऐसा करने से पैदा रोक दे रही थी हालांकि उसकी भी हालत खराब थी वह खुद रोहन के मोटे तगड़े लंड को गपक जाना चाहती थी।
रोहन जिस तरह से बेला के होंठों को चूस रहा था और उसकी दोनों चूचियों को दबा दबा कर मजे ले रहा था साथ ही अपने लंड की ठोकर उसकी बुर के द्वार पर दे रहा था उसी से वह थोड़ा-थोड़ा खुलने लगा था इसलिए वह हिम्मत जुटा कर अपने मन की बात बेला के दोनों स्तनों का आनंद लेते हुए बोला।
बेला मैं चाहता हूं कि तुम मेरे लंड को अपने इसके अंदर घुसा लो।
( बेला को ईस बात की ऊम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि रोहन इतनी हिम्मत दिखाते हुए यह बात कह देगा लेकिन रोहन की बात सुनकर मन ही मन प्रसन्न होने लगी। लेकिन वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि अब भी रोहन के लंड को बुर का द्वार खोल कर अंदर लेने का समय नहीं आया है अभी तो वह रोहन से और अधिक पैसे ऐठने के चक्कर में थी। ा इसलिए वह अपने आप को सैया में रखते हुए और रोहन की उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाने के उद्देश्य से एक हाथ आगे की तरफ घुमा कर रोहन की कमर पर रख कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए और दूसरे हाथ से रोहन के मोटे तगड़े लंड को पकड़ कर अपनी बुर पर जोर जोर से रगड़ते हुए पीछे की तरफ पानी की गहराई मैं बढ़ने लगी। रोहन को समझ नहीं पा रहा था कि बेला क्या कर रही है और देखते ही देखते हैं वह दोनों के गुप्तांग पानी के अंदर डूबने लगे दोनों के छाती जितना पानी आ गया तो बेला वहीं रुक गई लेकिन अभी भी अपने कार्य को वह जारी रखी थी वो जोर जोर से रोहन के लंड को अपनी बुर के ऊपर रगड़ रही थी जिसकी वजह से उत्तेजना के मारे बेला की बुर फुल कर कचोरी की तरह हो गई थी।
बेला गरम गरम सिसकारी छोड़ रही थी जिसकी मदहोश भरी आवाजें सुनकर रोहन की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह जोर-जोर से बेला की चूचियों को दबा ते हुए मसल रहा था जिसकी वजह से उसकी दोनों गो लाइयां लाल टमाटर की तरह हो गई थी।
डालने दो ना बेला एक बार। सिर्फ एक बार मुझसे रहा नहीं जा रहा है।
मैं जानती हूं रोहन बाबू तुमसे क्या किसी से भी रहा नहीं जाता क्योंकि औरत की बुर चीज ही ऐसी होती है कि अच्छे-अच्छे इसमें डूब जाते हैं जैसे कि तुम इतने बड़े जमीदार के लड़के होकर भी अपनी ही नौकरानी के पीछे लट्टू बनकर घूम रहे हो।
बेला यह तुम क्या कह रही हो मैं तुम्हे कभी भी अपने घर की नौकरानी नहीं समझता मैं तुम्हें अपने घर का सदस्य समझता हूं और सच कहूं तो तुमसे मुझे ना जाने कैसा लगावहो गया है।
बेला रोहन की बातें सुनकर मन ही मन प्रसन्न हो रही थी दोनों नदी के बीचों-बीच खड़े थे लेकिन नदी की चौड़ाई कुछ ज्यादा नहीं थी जिसकी वजह से दोनों की तरफ लगे हुए पेड़ आपस में मिले हुए थे और नदी के अंदर धूप का नामोनिशान नहीं था हल्का हल्का अंधेरा ही नजर आता था । बेला के चेहरे का हाव भाव पूरी तरह से कामोत्तेजना के ज्वर में ढलता चला जा रहा था।
और सच कहूं तो मैं तुम्हारा पूरी तरह से दीवाना हो चुका है बस एक बार मेला एक बार मुझे अपने लंड को तुम्हारी बुर में डाल लेने दो।
( अपने दोस्तों की संगत और बेला के खुले रवैया के वजह से रोहन में काफी हिम्मत आ गई थी .. इसलिए वह यह बात बेला को बोल गया बेला उसके मुंह से इतनी गंदी बात सुनकर एकदम से चुदवासी हो गई मन तो कर रहा था कि उसकी यही बात पर से कह दे कि ले जी भर के चोद ले । लेकिन बेला ना जाने कौन सी मिट्टी की बनी थी कि अपनी वासना और चुदासपन के असर को दबा ले गई। लेकिन फिर भी उसके मोटे तगड़े लंड को अपनी फुली हुई कचोरी जैसी बुर पर जोर जोर से रगड़ ती रही।
तुम बहुत शरारती हो गए और रोहन बाबू मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम इतने बड़े हो गए हो । हां लेकिन तुम्हारे इस मोटे तगड़े लंड को देखकर लगता है कि तुम अब बड़े हो गए हो (पानी के अंदर अपने हाथ में पकड़े हुए लंड की तरफ इशारा करते हुए बेला बोली। बेला के मुंह से लंड शब्द सुनकर रोहन पूरी तरह से उत्साहित और उत्तेजित हो गया। बेला अब रोहन के जोश को बढ़ाने के उद्देश्य से उसकी बढ़ाई करते हुए बोली)
रोहन शायद तुम यह बात नहीं जानते कि तुम्हारा लंड औरों के मुकाबले कुछ ज्यादा बड़ा और मोटा तगड़ा है। सच कहूं तो इसे अपनी बुर के अंदर लेने के लिए मेरा मन भी तड़प रहा है।
तो लेती क्यों नहीं बेला ले लो ना मैं भी बहुत तड़प रहा हूं।
अभी नहीं मेरे रोहन बाबू सही समय आएगा तो मैं जरूर तुम्हारा लंड अपनी बुर के अंदर लेकर तुमसे चुदवाऊंगी ।
(बेला जानबूझकर इतने खुले शब्दों में रोहन से कह रही थी ताकि वह अंदर ही अंदर तड़पता रहे और एक दम से उसका दीवाना हो जाए। और ऐसा हो भी रहा था बेला की बात सुनकर । रोहन अपने बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और साथ ही उसकी सांसों की गति तीव्र होते जा रही थी उसकी हथेलियों का दबाव मेला की चुचियों पर कसता चला जा रहा था साथ ही वह हल्के हल्के अपनी कमर को आगे की तरफ खेल रहा था जिससे बेला को भी अपनी बुर पर हो रहे कठोर दस्तक का अनुभव एकदम से दीवाना बना रहा था। बेला और रोहन दोनों पूरी तरह से उत्तेजना के पानी में उतर गए थे जहां से वापस लौट आना नामुमकिन था लेकिन बेला अपने आप को संभाले हुए थी रोहन को जरा भी ईसारा मिलता तो अपना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में डालकर भोसड़ा बना दिया होता। उसने भी अपनी जवानी के उबाल को संयम में रखे हुए था वरना एकांत में ऐसी नंगी औरत पाकर कौन मस्त ना हो जाता। ।
बेला कब आएगा वह समय जब मैं तुम्हारी बुर के अंदर अपना लंड डालकर तुम्हें चोदूंगा।
चिंता मत करो मेरे राजा वह समय बहुत ही जल्दी आएगा मैं जानती हूं कि तुम्हारी जवानी गरम पानी छोड़ने के लिए तड़प रही है। जब तक तुम्हारा लंड पानी नहीं छोड़ देता तब तक तुम ऐसे ही तड़पते रहोगे लाओ में हाथ से हिला तुम्हारा पानी निकाल दूं। ( रोहन को समझ में नहीं आ रहा था कि बेला क्या कह रही है और इससे पहले वह कुछ समझ पाता बेला अपना हाथ पानी के डालकर रोहन के मोटे तगड़े लंड को पकड़ लिया और जोर-जोर से हिलाते हुए मुट्ठी आने लगी रोहन को मजा आने लगा वह जोर-जोर से बेला की चूची को मसलने लगा उसके चेहरे पर छाई वासना की लाली को देखकर बेला बोली)

सिर्फ दबाने और मसलने से काम नहीं चलेगा इसे अपने मुंह में भर कर जैसे छोटे बच्चे पीते हैं वैसे ही तुम भी चूसो ( रोहन को समझ पाता इससे पहले ही बेला अपना हाथ रोहन के सर के पीछे की तरफ ले जाकर खुद ही उसके मुंह को अपनी चूची से सटा दी बेला की हरकत से रोहन एकदम मदमस्त हो गया और खुद ही उसकी चॉकलेटी रंग की निप्पल को मुंह में भर भर कर चूसने शुरू कर दिया दोनों को बहुत ही ज्यादा आनंद की प्राप्ति हो रही थी। बेला का हाथ रोहन के लंड पर बड़ी तेजी से चल रहा था साथ ही उसके मुंह से गर्म सिसकारी बाहर आ रही थी जिससे वातावरण और भी ज्यादा कामुक बन गया था और कुछ ही देर में रोहन के मुंह से गर्म सिसकारी की आवाज आई और एक झटके में रोहन के लंड में गर्म पानी की पिचकारी पानी के अंदर फेंकना शुरू कर दिया रोहन के साथ साथ बेला भी झड़ चुकी थी क्योंकि एक हाथ से वह रोहन के लंड को हिला रही थी तो दूसरे हाथ से अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों को जोर जोर से मसल रही थी जिससे उसका भी पानी निकल चुका था। दोनों शांत हो चुके थे बेला और जो हम दोनों पानी से बाहर आ गए और अपने अपने कपड़े पहनने लगे बेला जैसे ही अपने पेटीकोट के अंदर अपने पांव डालने के लिए नीचे की तरफ झुकी तो उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर रोहन मदहोश होने लगा और ना चाहते हुए भी एक चपत जोर से बेला की मदमस्त गांड पर लगा दिया जिसके कारण वो एकदम से चौंक गई।
आहहहहहहहहह क्या कर रहे हैं रोहित बाबू अब तुम बहुत शरारती हो गए हो ऐसा भी कोई करता है क्या कितनी जोर से लगी दर्द करने लगा। ( बेला अपनी गांड सहलाते हुए बोली यह देख कर लो हम मंद मंद मुस्कुरा रहा था और अपनी पेंट पहनते हुए बोला।)
क्या करूं बेला तुम्हारी गांड इतनी बड़ी बड़ी है कि उनको देखते ही मुझे ना जाने क्या होने लगता है।
तो तुम्हारी मां की भी गांड देख लिया करो उनकी गांड भी तो मुझसे ज्यादा बड़ी बड़ी और गोल गोल है । (बेला पेटीकोट की डोरी बांधते हुए बोली रोहन कुछ बोला नहीं बस मुस्कुरा दिया क्योंकि वह भी जानता था कि उसकी मां की गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी और गोल-गोल एकदम मक्खन जैसी गोरी है। दोनों अपने अपने कपड़े पहन कर तैयार हो चुके थे रोहन बेला को समोसे और जलेबी के हथेली थमाते हुए बोला।)
एलो बेला अपने घर ले जाकर खा लेना और हां अपना वादा भूलना नहीं।
कौनसा वादा ? ( रोहन के हाथों से हथेली पकड़ते हुए बोली)
अरे इतनी जल्दी भूल गई तुम्हारी बुर में मेरा लंड डालने का वादा।
( रोहन के मुंह से गंदी बात सुनकर बेला प्रसन्न हो गई और मुस्तुरातो हुए बोली।)
मैं भूली नहीं हूं मुझे सब कुछ याद है समय आने पर मैं अपना वादा जरुर पूरा करूंगी ( इतना कहकर दोनों गांव की तरफ चल दिए)
 
अनजाने में ही बेला रोहन के लिए एक शिक्षिका बनकर उसे संभोग रस के अध्याय में सहायक बनती जा रही थी वह एक तरह से रोहन का मार्गदर्शक के रूप में मार्गदर्शन करा रही थी हालांकि इसमें दोनों को ही बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और दोनों का अपना अलग ही लालच बांधा हुआ था रोहन बेला के कहने पर उसे बार-बार पैसे दे रहा था लेकिन बदले में बेला उसे पृथ्वी का सबसे हसीन और परमानंद से भरपूर आनंद प्रदान कर रही थी और साथ ही पैसे लेकर के भी अपने आप को भी आनंद के सागर में गोते लगवा रही थी.... ।
रोहन आज बहुत खुश था क्योंकि आज उसके लंड में औरतों के बेहद नाजुक कोमल अंग कि उन गुलाबी पत्तियों से इस पर से जो कर लिया था जिस को स्पर्श करने के लिए जवानी का दौर शुरू होकर बुढ़ापे पर ही खत्म होता है .....एक अजीब सी हलचल उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रही थी.... आज बेला को वह चोदते चोदते रह गया था रोहन ने अपने लंड को बुर के उस मुख्य द्वार तक पहुंचा कर वापस लौटा दिया था जिस द्वार पर आकर दुनिया का कोई भी मर्द वापस लौटना नहीं चाहता है बुर की गहराई से आ रही मादक खुशबू को उसके लंड के सुपाड़े ने भी महसूस किया होगा तभी तो वह उत्तेजना के मारे तन कर एकदम उस लोहे का रॉड की तरह हो गया था।
आज दिनभर की गतिविधि खास करके नदी के पानी के अंदर जो कुछ भी बेला के साथ उसने किया और बेला ने उसके साथ किया उन हसीन लम्हों को याद करते करते रोहन कब नींद की आगोश में चला गया उसे पता ही नहीं चला.....
सुगंधा भी कुछ दिनों से बेहद परेशान नजर आ रही थी और उसकी परेशानी का कारण था शारीरिक आकर्षण और खास करके रोहन के लंबे तगड़े मोटे लंड को देखकर जो उसके तन बदन में हलचल हो रही थी उस हलचल से वह अपने आप को बचाने में असमर्थ साबित हो रही थी बार-बार उसका मन उसे समझाने की कोशिश करता कि जो वह अपने मन में विचार कर रही है वह बहुत ही गलत है समाज के लिए और खुद उसके लिए भी लेकिन शारीरिक जरूरत के चलते उसका मन इधर उधर भटक रहा था और बार बार रोहन के तगड़े लंड को लेकर उसके मन में कल्पनाओं का दौर अपनी तीव्रता से कदम भर रहा था और वह अपने उन विचारों पर अपनी रंगीन कल्पनाओं पर लगाम नहीं लगा पा रहे थे जिसके चलते उसे खुद से भी घृणा हो रही थी लेकिन कुछ पल की यह घटना आनंद में तब्दील हो जाते थे बार-बार उसके साथ ऐसा ही हो रहा था ना चाहते हुए भी बिस्तर पर लेटे-लेटे उसका हाथ साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर पर चला जा रहा था जिसे वह अपने बेटे का लंड को याद करके बार-बार मसल दे रही थी और ऐसा करने में उसकी प्यास बढ़ती जा रही थी और उसे मज़ा भी आ रहा था एक अजीब सी कशिश एक अजीब सा आकर्षण उसके खुद के बेटे के लंड के प्रति उसकी बढ़ती आकर्षण मैं वह बंधती चली जा रही थी......
अपनी कल्पनाओं के घोड़े का लगाम कसने में वह असमर्थ साबित हो रही थी इसका सबूत इस बात से ही पता चलता था कि वह रात भर में 3 बार अपने बेटे के लंड को याद करके संखलित हो चुकी थी। संस्कार और मर्यादा से परिपूर्ण नारी होने के बावजूद भी सुगंधा का मन बहक रहा था उसके पांव आकर्षण के चिकनी माटी में फीसलते चले जा रहे थे।
सुगंधा की पेंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी उसे कुछ कसमसाहट सा महसूस हो रहा था इसलिए वह खुद ही अपनी साड़ी को पकड़ के ऊपर की तरफ सरकाने लगी... देखते ही देखते सुगंधा अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी। उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जो कि उसे साफ साफ नजर आ रहा था उसे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि वह खाली कल्पना करके ही इतना सारा पानी फेंक चुकी है उसकी बुर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना महसूस कर रही थी क्योंकि उसकी फुली हुई बुर पेंटी के ऊपरी सतह पर किसी गरम कचोरी की तरह नजर आ रही थी। सुगंधा पैंटी के ऊपर से ही अपनी पुर की हालत को देखकर एकदम उत्तेजित हो गई वह धीरे धीरे अपनी गीली वाली जगह पर अपनी हथेली रखकर अपने बुर को रगड़ना शुरू कर दी कुछ ही पल में सुगंधा को मज़ा आने लगा और उसके मुख से गरम-गरम सिसकारी की आवाज भी आने लगी सुगंधा के चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे थे उसका गोरा गाल लाल टमाटर की तरह हो गया था कुछ देर तक यूं ही वह पैंटी के ऊपर से ही अपनी बुर को मसलती रही। यह सब करते हुए भी उसके मन के एक कोने में यह सब बड़ा ही घृणित लग रहा था लेकिन अपने आनंद के वश में होकर वह रुकने का नाम नहीं ले रही थी... वह कभी अपनी बुर मसल रही थी तो दूसरे हाथ से कभी अपनी नंगी चिकनी मक्खन जैसी जांघों को सहला रही थी तो कभी उसी हाथ से ब्लाउज के ऊपर से ही अपने फड़फड़ाते दोनों कबूतरों को शांत करने की कोशिश कर रही थी।
सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी सही गलत सोचने का उसके पास समय बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि इस समय वह आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे और उसके जेहन में उस आनंद का केंद्र बिंदु उसका
अनजाने में ही बेला रोहन के लिए एक शिक्षिका बनकर उसे संभोग रस के अध्याय में सहायक बनती जा रही थी वह एक तरह से रोहन का मार्गदर्शक के रूप में मार्गदर्शन करा रही थी हालांकि इसमें दोनों को ही बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और दोनों का अपना अलग ही लालच बांधा हुआ था रोहन बेला के कहने पर उसे बार-बार पैसे दे रहा था लेकिन बदले में बेला उसे पृथ्वी का सबसे हसीन और परमानंद से भरपूर आनंद प्रदान कर रही थी और साथ ही पैसे लेकर के भी अपने आप को भी आनंद के सागर में गोते लगवा रही थी.... ।

रोहन आज बहुत खुश था क्योंकि आज उसके लंड में औरतों के बेहद नाजुक कोमल अंग कि उन गुलाबी पत्तियों से इस पर से जो कर लिया था जिस को स्पर्श करने के लिए जवानी का दौर शुरू होकर बुढ़ापे पर ही खत्म होता है .....एक अजीब सी हलचल उसके तन बदन को झकझोर कर रख दे रही थी.... आज बेला को वह चोदते चोदते रह गया था रोहन ने अपने लंड को बुर के उस मुख्य द्वार तक पहुंचा कर वापस लौटा दिया था जिस द्वार पर आकर दुनिया का कोई भी मर्द वापस लौटना नहीं चाहता है बुर की गहराई से आ रही मादक खुशबू को उसके लंड के सुपाड़े ने भी महसूस किया होगा तभी तो वह उत्तेजना के मारे तन कर एकदम उस लोहे का रॉड की तरह हो गया था।
आज दिनभर की गतिविधि खास करके नदी के पानी के अंदर जो कुछ भी बेला के साथ उसने किया और बेला ने उसके साथ किया उन हसीन लम्हों को याद करते करते रोहन कब नींद की आगोश में चला गया उसे पता ही नहीं चला.....
सुगंधा भी कुछ दिनों से बेहद परेशान नजर आ रही थी और उसकी परेशानी का कारण था शारीरिक आकर्षण और खास करके रोहन के लंबे तगड़े मोटे लंड को देखकर जो उसके तन बदन में हलचल हो रही थी उस हलचल से वह अपने आप को बचाने में असमर्थ साबित हो रही थी बार-बार उसका मन उसे समझाने की कोशिश करता कि जो वह अपने मन में विचार कर रही है वह बहुत ही गलत है समाज के लिए और खुद उसके लिए भी लेकिन शारीरिक जरूरत के चलते उसका मन इधर उधर भटक रहा था और बार बार रोहन के तगड़े लंड को लेकर उसके मन में कल्पनाओं का दौर अपनी तीव्रता से कदम भर रहा था और वह अपने उन विचारों पर अपनी रंगीन कल्पनाओं पर लगाम नहीं लगा पा रहे थे जिसके चलते उसे खुद से भी घृणा हो रही थी लेकिन कुछ पल की यह घटना आनंद में तब्दील हो जाते थे बार-बार उसके साथ ऐसा ही हो रहा था ना चाहते हुए भी बिस्तर पर लेटे-लेटे उसका हाथ साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर पर चला जा रहा था जिसे वह अपने बेटे का लंड को याद करके बार-बार मसल दे रही थी और ऐसा करने में उसकी प्यास बढ़ती जा रही थी और उसे मज़ा भी आ रहा था एक अजीब सी कशिश एक अजीब सा आकर्षण उसके खुद के बेटे के लंड के प्रति उसकी बढ़ती आकर्षण मैं वह बंधती चली जा रही थी......
अपनी कल्पनाओं के घोड़े का लगाम कसने में वह असमर्थ साबित हो रही थी इसका सबूत इस बात से ही पता चलता था कि वह रात भर में 3 बार अपने बेटे के लंड को याद करके संखलित हो चुकी थी। संस्कार और मर्यादा से परिपूर्ण नारी होने के बावजूद भी सुगंधा का मन बहक रहा था उसके पांव आकर्षण के चिकनी माटी में फीसलते चले जा रहे थे।
सुगंधा की पेंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी उसे कुछ कसमसाहट सा महसूस हो रहा था इसलिए वह खुद ही अपनी साड़ी को पकड़ के ऊपर की तरफ सरकाने लगी... देखते ही देखते सुगंधा अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी। उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जो कि उसे साफ साफ नजर आ रहा था उसे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था कि वह खाली कल्पना करके ही इतना सारा पानी फेंक चुकी है उसकी बुर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना महसूस कर रही थी क्योंकि उसकी फुली हुई बुर पेंटी के ऊपरी सतह पर किसी गरम कचोरी की तरह नजर आ रही थी। सुगंधा पैंटी के ऊपर से ही अपनी पुर की हालत को देखकर एकदम उत्तेजित हो गई वह धीरे धीरे अपनी गीली वाली जगह पर अपनी हथेली रखकर अपने बुर को रगड़ना शुरू कर दी कुछ ही पल में सुगंधा को मज़ा आने लगा और उसके मुख से गरम-गरम सिसकारी की आवाज भी आने लगी सुगंधा के चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे थे उसका गोरा गाल लाल टमाटर की तरह हो गया था कुछ देर तक यूं ही वह पैंटी के ऊपर से ही अपनी बुर को मसलती रही। यह सब करते हुए भी उसके मन के एक कोने में यह सब बड़ा ही घृणित लग रहा था लेकिन अपने आनंद के वश में होकर वह रुकने का नाम नहीं ले रही थी... वह कभी अपनी बुर मसल रही थी तो दूसरे हाथ से कभी अपनी नंगी चिकनी मक्खन जैसी जांघों को सहला रही थी तो कभी उसी हाथ से ब्लाउज के ऊपर से ही अपने फड़फड़ाते दोनों कबूतरों को शांत करने की कोशिश कर रही थी।
सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी सही गलत सोचने का उसके पास समय बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि इस समय वह आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे और उसके जेहन में उस आनंद का केंद्र बिंदु उसका ही खुद का बेटा था जिसके जबरदस्त हथियार को याद करके उसकी बुर कुछ ज्यादा ही पानी छोड़ रही थी सुगंधा अपने दोनों हाथों की नाजुक उंगलियों से अपनी पैंटी की छोड़ पकड़ कर हल्के से अपनी मदमस्त भारी-भरकम गांड को उठा दी और धीरे-धीरे अपनी पेंटी को उतारने लगी यह नजारा बेहद ही काम उत्तेजना से भरपूर था एक औरत जब खुद ही अपनी पैंटी को उतारती है तो उस हरकत में उसकी पूरी तरह से रजामंदी होती है और सुगंधा भी अपने आनंद के वशीभूत होकर आज अपने ही कपड़ों को खुद उतार रही थी। हालांकि अभी वह किसी मर्द के लिए अपने कपड़े उतार कर नंगी नहीं हो रही थी लेकिन कपड़े उतारने में भी उसका खुद का आनंद और रोहन की कल्पना जवाबदार थी देखते ही देखते सुगंधा अपनी लंबी चिकनी टांगों में से अपनी गुलाबी रंग की पैंटी उतार कर बिस्तर पर फेंक दें और कमर से नीचे वह पूरी तरह से नंगी हो गई वह हल्के से कमर के ऊपरी भाग को उठाकर अपनी पूर्व की तरफ देखने लगी क्योंकि इस समय उसकी बुर तवे पर फूली हुई रोटी की तरह नजर आ रही थी जोकि बेहद गर्म और स्वादिष्ट थी..... हल्के हल्के बाल उसकी सुंदरता को बढ़ा रहे थे सुगंधा के चेहरे का रंग लाल टमाटर की तरह हो गया था जिसमें शर्मिंदगी का अहसास बिल्कुल भी नहीं था और उत्तेजना का असर अत्यधिक मात्रा में नजर आ रहा था

था सुगंधा अपनी हथेली को अपनी नंगी बुर पर रखकर हल्के हल्के दबाने लगी और ऐसा करने में उसे बहुत मजा आ रहा था और देखते ही देखते वह अपनी बीच वाली उंगली को हल्के से अपनी पूर्व की गहराई में उतार दी और एक हल्की चीख के साथ अपनी आंखों को बंद करके उस उंगली से बुर के अंदर अंदर बाहर हो रही रगड़ का आनंद लेने लगी सुगंधाको मजा आने लगा कुछ देर तक वह अपनी एक ही उंगली से अपनी बुर को चोदती रही। लेकिन एक उंगली से उसकी बुर की खुजली शांत होने वाली नहीं थी इसलिए वह अपनी दूसरी उंगली भी अपने बुर के अंदर डाल दी और अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड की कल्पना करने लगी वह ना चाहते हुए भी ऐसी कल्पना कर रही थी कि उसका बेटा उसकी दोनों टांगों को फैला कर अपने मोटे लंड को उसकी बुर के अंदर डालकर चोद रहा है और जैसे-जैसे अपनी उंगली को बड़ी तेजी से बुर के अंदर-बाहर करती वैसे वैसे उसकी कल्पनाओं का घोड़ा उसके बेटे की हिलती हुई कमर को देखती रहती और उस नजारे की कल्पना करके सुगंधा का तन बदन एक अद्भुत सुख के एहसास से भर जा रहा था..... उसके मन में यही विचार उमड़ रहा था कि जैसे-जैसे वह अपनी उंगलियों की गति को बुर के अंदर बाहर करते हुए बढ़ाती वैसे वैसे उसका बेटा जोर जोर से अपनी कमर हिलाते हो गए अपने लंड को उसकी बुर के अंदर बाहर करते हुए उसे चोद रहा है उसकी उत्तेजना का आलम इस कदर उस पर हावी हो चुका था कि अपनी उंगली से अपनी बुर चोदते हुए वह पूरी तरह से बिस्तर पर छटपटा रही थी उसकी साड़ी उसके बदन से अलग हो चुकी थी और उत्तेजना ग्रस्त सुगंधा ना जाने कब अपनी उंगली से हस्तमैथुन करते हुए रोहन रोहन करके मजे लेने लगी इस बात का उसे पता भी नहीं चला और थोड़ी देर बाद उसकी बुर ने ढेर सारा पानी फेंक दी। एक अद्भुत आनंद के साथ से वह गुजर चुकी थी काफी वर्षों के बाद उसे इस एहसास ने काफी आनंदित किया था कुछ देर तक वह यूं ही बिस्तर पर लेटी रही लेकिन थोड़ी ही देर बाद जब वासना का तूफान उसके दिमाग से गुजरा उसके तन बदन को तहस-नहस करके गया तब उसे इस बात का अहसास होने लगा कि जो वह कि वह बिल्कुल गलत था और खास करके अपनी उंगली से अपनी पूरी चोदते हुए वह अपने बेटे का ख्याल कर रही थी वह बिल्कुल ही गलत था
सुरेंद्र को अपनी हरकत की वजह से आत्मग्लानि होने लगी वह अंदर ही अंदर पछताने लगी क्योंकि जिस तरह की हरकत व कर रही थी एक मां बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते को तार-तार करने वाला था इस बात से वाकिफ थे कि वह सिर्फ कल्पना की थी हकीकत ने अपनी हरकत को अंजाम नहीं दी थी वरना वह अपने आप को ही मुंह दिखाने के काबिल नहीं रखती अब आइंदा से ऐसी गलती नहीं होगी ऐसी कसम खाकर वह सो गई..... रात देर तक जाग कर अपनी बुर की खुजली मिटाने के बाद सुबह उसकी आंखें देर से खुली आज काफी देर हो चुकी थी उठते ही वह कमरे से बाहर आई उसे इस बात का अहसास हो गया कि रोहन भी अभी नहीं उठाया इसलिए उसे जगाने के लिए उसके कमरे की तरफ जाने लगी लेकिन कमरे का दरवाजा खुला हुआ था वह सोचे कि शायद रोहन उठ गया है और बिना ही दरवाजे पर दस्तक दिए वह कमरे के अंदर चली गई लेकिन कमरे के अंदर बिस्तर के ऊपर का नजारा देखते ही वह दंग रह गई बिस्तर के ऊपर रोहन पूरी तरह से नंगा लेटा हुआ था वह पीठ के बल सो रहा था लेकिन उसका लंड पूरी तरह से टन टना कर कमरे की छत नाप रहा था वह धीरे-धीरे अपनी कदम आगे बढ़ाने लगी थी वह रोहन का नाम लेकर उसे पुकारी उसे इस बात का डर था कि कहीं रोहन जाग रहा होगा तो क्या सोचेगा क्योंकि जिस अवस्था में वह कमरे के अंदर आ गई थी उसे नहीं आना चाहिए था लेकिन दो बार पुकारने पर भी वह टस से मस नहीं हुआ तो उसे पक्का यकीन हो गया कि वह गहरी नींद में सो रहा है।
रात देर तक जाग कर अपनी बुर की खुजली मिटाने के बाद सुबह उसकी आंखें देर से खुली आज काफी देर हो चुकी थी उठते ही वह कमरे से बाहर आई उसे इस बात का अहसास हो गया कि रोहन भी अभी नहीं उठाया इसलिए उसे जगाने के लिए उसके कमरे की तरफ जाने लगी लेकिन कमरे का दरवाजा खुला हुआ था वह सोचे कि शायद रोहन उठ गया है और बिना ही दरवाजे पर दस्तक दिए वह कमरे के अंदर चली गई लेकिन कमरे के अंदर बिस्तर के ऊपर का नजारा देखते ही वह दंग रह गई बिस्तर के ऊपर रोहन पूरी तरह से नंगा लेटा हुआ था वह पीठ के बल सो रहा था लेकिन उसका लंड पूरी तरह से टन टना कर कमरे की छत नाप रहा था वह धीरे-धीरे अपनी कदम आगे बढ़ाने लगी थी वह रोहन का नाम लेकर उसे पुकारी उसे इस बात का डर था कि कहीं रोहन जाग रहा होगा तो क्या सोचेगा क्योंकि जिस अवस्था में वह कमरे के अंदर आ गई थी उसे नहीं आना चाहिए था लेकिन दो बार पुकारने पर भी वह टस से मस नहीं हुआ तो उसे पक्का यकीन हो गया कि वह गहरी नींद में सो रहा है। वह धीरे धीरे बिस्तर की तरफ बढ़ने लगी उसकी सांसो की गति तेज होने लगी रोहन को पहली बार गुसल खाने में लगना अवस्था में देखकर वह पूरी तरह से बाहर गई थी और आज दूसरी बार उसे अपने ही बिस्तर पर एकदम नंगी अवस्था में देखकर सुगंधा एकदम धराशाई हुए जा रही थी रात को गुलामी का अनुभव करते हुए जो कसम खाई थी वह कसम वासना की उमंगों की ओट में धुधली हुए जा रही थी।
सुगंधा अपने बेटे के कमरे में थी और उसका बेटा बेसुध होकर सो रहा था वह पूरी तरह से नंगा था और उसका लंड छत की ओर मुंह उठाए ताक रहा था यह नजारा सुगंधा के दिल की धड़कनें बढ़ा रहा था सुगंधा धीरे-धीरे अपने बेटे के करीब जा रही थी उसके दिल की धड़कन घोड़े कि टापू की तरह आवाज करते हुए चल रही थी। सुगंधा अपने बेटे के करीब खड़ी होकर ऊपर से नीचे तक उसे एकटक देख रही थी रोहन का गठीला बदन सुगंधा के बदन में हलचल मचा रहा था और उसका लंड सुगंधा की बुर में पानी का सैलाब उठा रहा था जबरदस्त नजारा बना हुआ था एक बेटा बिस्तर पर नंगा लेटा हुआ था जिस के लंड को देखकर उसकी खुद की मां उत्तेजित हो रही थी आज बहुत करीब से वह अपने बेटे के खड़े लंड को देख रहे थे और अपने बेटे के लंड को देखकर सुगंधा इतना तो समझ गई थी कि उसके बेटे को कुदरत का वरदान रूपी लंड मिला था जो कि किसी भी औरत और लड़की को संपूर्ण रूप से संतुष्टि प्रदान करने में सक्षम था सुगंधा अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर यही सोच रही थी कि अगर इस लंड को अपनी बुर में ले ले तो उसके गुलाबी पत्तियां किसी ककड़ी की तरह फैलती चली जाएंगी यह सोचकर ही उसकी बुर पानी फेंकना शुरू कर दी सुगंधा के सांसो की गति तीव्र होती जा रही थी। उसने कभी सोची भी नहीं थी कि वह इस अवस्था में अपने बेटे को देखेगी और तो और वह कभी जिंदगी में नहीं सोची थी कि अपनी बेटे को लेकर उसके मन में इस तरह की हलचल होगी कि उसे पाने के लिए उसका मन तड़प उठे गा सुगंधा से रहा नहीं जा रहा था। वह कभी अपने बेटे के मासूम चेहरे को तो कभी उसके खड़े लंड को जो कि उसकी जवानी की गाथा कहने को मचल रही थी कुछ देर तक सुगंधा अपने बेटे की जवानी को अपनी आंखों से पीती रही लेकिन भला जो अंग महसूस करने के लिए होता है ।वह आंखों से देख कर मन कहां पर ले देता है। बल्कि आंखें तो प्यास को और भी ज्यादा बढ़ावा देती है और यही सुगंधा के साथ भी हो रहा था सुगंधा के तन बदन से वासना की चिंगारियां फूट रही थी।
सुगंधा का चंचल मन तड़प रहा था अपने बेटे के लंड को अपने हाथ में लेने के लिए उसकी गर्माहट को अपने अंदर महसूस करने के लिए लेकिन उसे डर भी लग रहा था लेकिन वह अपने चंचल मन के आगे मजबूर हो गई एक अजीब सा डर अपने अंदर होने के बावजूद भी अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर हल्के से रोहन के लंड के सुपाड़े पर अपनी ऊगली का स्पर्श करा दी ।
सससससससहहहहहहहह.... .. आहहहहहहहहहहहह.........
( अपने बेटे के लंड़ के सुपाड़े पर अपनी ऊगली का स्पर्श कराते ही सुगंधा के मुंह से गर्म सिसकारी छूट गई। अपने बेटे के लंड को हाथ लगाते ही सुगंधा समझ गई कि उसका लंड बहुत ज्यादा गर्म है जो कि यह गर्मी उसकी जवानी की थी जैसे ही अपनी उंगली का स्पर्श लंड पर कराई थी वैसे ही तुरंत अपना हाथ वापस खींच ली उसे इस बात का डर था कि कहीं रोहन जागना जाए और वह अपनी इस हरकत के बाद तुरंत रोहन के चेहरे की तरफ देखने लगी लेकिन रोहन टस से मस नहीं हुआ वह सोता रहा कुछ सेकंड तक सुगंधा रोहन की तरफ देखती रही लेकिन किसी भी प्रकार की हलचल ना होने की वजह से उसकी हिम्मत बढी और वह इस बार अपना हाथ आगे बढ़ा कर रोहन के लंड को अपनी हथेली में पूरी तरह से भरली। एक अजीब सा एहसास उसके तन बदन में फैलने लगा। कुछ पल के लिए सुगंधा की सांसे अटक गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें सुगंधा की हथेली में उसके ही बेटे का लंड भरपूर मात्रा में भरा हुआ था। उसकी गर्माहट सुगंधा के तन बदन में हलचल मचा रहे थे खास करके उसकी टांगों के बीच किस छोटी सी पतली सी दरार के अंदर तो बवंडर सा उठने लगा था यह वह क्षण था जिसमें सुगंधा अपनी मर्यादा लगने के लिए पूरी तरह से तैयार हो गई थी उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था अच्छे बुरे का तात्पर्य भूल चुकी थी दिल जोरों से धड़क रहा था कमरे का वातावरण पूरी तरह से गर्म हो चुका था रोहन के चेहरे की तरफ देखकर उसे इस बात का दिलासा था कि रोहन नींद में था लेकिन यह उसकी भूल थी पहली बार ही जब उसने अपने बेटे की लंड के सुपाड़े को उंगली से स्पर्श की थी तभी उसकी नींद खुल चुकी थी लेकिन वह नींद में होने का बहाना बना कर लेटा रहा।
वह देखना चाहता था कि उसकी मां करती क्या है लेकिन वह अपनी मां की हरकत की वजह से मन ही मन प्रसन्न हो रहा था उसे लगने लगा था कि अपनी मां को हासिल करने का रास्ता उसकी मां खुद उसे दिखा रही थी वह चाहता तो इसी वक्त अपनी मां का हाथ अपने लंड पर पकड़ कर अपनी मनमानी कर सकता था हाजी उसकी हसरत पूरी हो जाती है आज ही अपने कमरे में अपने बिस्तर पर अपनी मां की बुर पर पूरी तरह से कब्जा जमा देता लेकिन ऐसा करने में उसे डर लग रहा था और इतनी हिम्मत भी नहीं थी कि वह इस तरह की हरकत कर सकें इसलिए वह चुपचाप आंखें बंद करके अपनी मां की हरकतों का मजा लेता रहा उसे इस बात की तसल्ली थी कि आज नहीं तो कल वह अपनी मां को हासिल कर लेगा क्योंकि उसकी मां के अंदर भी चुदवाने की इच्छा जागरूक हो चुकी थी....
 
सुगंधा अपनी मान मर्यादा एक मां बेटे का रिश्ता बोलकर धीरे-धीरे अपने बेटे के लंड को से लाते हुए उसे ऊपर नीचे करके मुट्ठी आने लगी ऐसा करने में सुगंधा को तो मजा आ रहा था लेकिन रोहन की हालत खराब हो रही थी वह बड़ी मुश्किल से अपने आप पर काबू बनाए रखा था क्योंकि जिस तरह की हरकत उसकी मां कर रही थी वह हरकत को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था वह क्या कोई भी होता तो एक खूबसूरत औरत की इतनी कामोत्तेजना से भरपूर हरकत को बर्दाश्त नहीं कर पाता और रोहन की जगह कोई और होता तो अब तक उसे बिस्तर पर लिटा चुका होता..
रोहन अपनी मां के मुंह से निकल रही कर्म सांसो की आह को बड़ी अच्छी तरह से सुन पा रहा था और यह गर्म है उसकी उत्तेजना को बढ़ा रही थी मन तो कर रहा था कि वह अपनी मां का हाथ पकड़ लिया और उसे अपने ऊपर खींच कर उसके कपड़े उतार कर उसे नंगी कर दे लेकिन यह सब केवल रोहन की कल्पना भर्ती वह हकीकत में ऐसा करने से डर रहा था सुगंधा की सांसें उखड़ रही थी वह आहिस्ता आहिस्ता अपने बेटे के लंड को हिला रही थी आज बरसों बाद उसने किसी के लंड को पकड़ा था और वो किसी और का नहीं बल्कि उसके ही बेटे का लंड था उसे यकीन नहीं आ रहा था कि जिस बेटे को उसने जन्म दिया था आज वह बेटा इतना बड़ा हो गया था इतना जवान हो गया था कि उसके ही लंड को अपनी बुर में लेने के लिए तड़प रही थी दो-तीन मिनट तक अपने बेटे के लैंड को हिलाते रहे एक खूबसूरत औरत जो कि उसकी माहिती उसके नरम नरम हाथों में अपने लंड को महसूस कर के रोहन पूरी तरह से उत्तेजित हो रहा था और तो और उसे डर था कि कहीं उसका पानी निकल ना जाए और वैसे भी उसने रात को एक बार नींद खुलने पर अपने लंड को हिला कर सोया था जिससे अभी तक उसका पानी उसके लंड पर लगा हुआ था इस बात को सुगंधा भी महसूस कर रही थी क्योंकि उसकी हथेली पर कुछ चिपचिपा सा महसूस हो रहा था उसके मन में जो बात उमड़ रही थी वह हकीकत ही थी उसे इस बात का अंदाजा लग गया था कि जो पदार्थ उसके हाथ पर चिपक रहा था वह रोहन के लंड़ से निकला हुआ पानी था उसे इस बात का अंदाजा लग गया कि रोहन अपने हाथ से अपना लंड़ हिला कर मजे लेता है। यह सोचकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न होने लगी क्योंकि इस हरकत की वजह से उसे लगने लगा था कि उसका बेटा औरतों की प्यास बुझाने लायक हो गया था कुछ ही देर में उत्तेजना के मारे लोहान के लंड का पानी तो नहीं निकला लेकिन सुगंधा की बुर पानी फेंक दी...... सुगंधा इतनी अधिक उत्तेजित हो गई थी कि कुछ ही पल में उसकी बुर से पानी निकलने लगा था.....
सुगंधा कोई इस बात का ख्याल आते हैं कि ज्यादा देर तक रुकना ठीक नहीं है और इतना सोच कर वह तुरंत रोहन को जगाए बिना ही कमरे से बाहर चली गई ....... सुगंधाको कमरे से बाहर जाते ही रोहन अपनी आंखें खोल दिया वह कमरे से बाहर निकलते हुए अपनी मां को देख लिया था और उसकी नजरें ठीक अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर ही गई थी जिसे देखते ही वह गर्म आहें भरने लगा वह बहुत खुश नजर आ रहा था वह बड़े ध्यान से अपने लंड को देख रहा था क्योंकि कुछ पल पहले ही उसकी मां की नरम नरम हथेलियां उसकी उंगलियां इस लंड को कस रही थी.......
अपनी मां की चुदास से भरी हरकत की वजह से रोहन पूरी तरह से चुदवासा हो गया था। उससे रहा नहीं गया और अपनी मां के अधूरे काम को पूरा करते हुए अपने लड़ को हिलाना शुरू कर दिया। अब उसकी कल्पना में उसकी नंगी मां अपनी दोनों टांगें उसके कमर के इर्द गिर्द करके अपनी छोटी सी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद को अपने बेटे का लंड पर रख रही थी और रोहन अपने हाथों से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पकड़ कर उसकी मदद कर रहा था। देखते ही देखते रोहन के कल्पना में उसकी मां की बुर के अंदर रोहन का लंड पूरी तरह से अंदर घुस गया और उसकी मां धीरे-धीरे अपनी गांड को ऊपर नीचे करते हुए रोहन के लंड से चोदने का मजा लूटने लगे और रोहन भी अपनी मां की गांड पकड़कर नीचे से धक्के लगाते हुए मुठ मारने लगा और थोड़ी देर में उत्तेजना और उसकी मां की कल्पना का ऐसा मिलाजुला जबरदस्त असर था कि रोहन के लंड ने ढेर सारा पानी फेंक दिया......... उसे इतना तो समझ में आ गया था कि उसकी मां उसके लंड के प्रति पूरी तरह से आकर्षित थी और उसका रास्ता साफ होता नजर आ रहा था....... रोहन के लिए बात बड़ी ही खुशी की थी उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था क्योंकि उसे पूरा यकीन हो गया था कि.... बहुत ही जल्दी से उसकी मां की बुर चोदने को मिलने वाली है........
दूसरी तरफ सुगंधा भी अपने बेटे के लंड को पकड़ कर पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी उसकी बुर पानी पानी हो गई थी ।और उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। वह तुरंत बाथरूम मे दूसरी तरफ सुगंधा भी अपने बेटे के लंड को पकड़ कर पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी उसकी बुर पानी पानी हो गई थी ।और उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। वह तुरंत बाथरूम में गई और बाथरूम में घुसते ही वह अपने बदन से सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई उसका मन उसके काबू में बिल्कुल भी नहीं था ।उसकी आंखों के सामने उसके बेटे का खड़ा लंड़ नाच रहा था। सुगंधा अपने बेटे के खड़े लंड को याद करके अपनी बुर जोर जोर से मसलने लगी उसकी सांसे की गति तेज होने लगी और एक साथ अपनी दो उंगली अपनी बुर में डालकर यह कल्पना करने लगे कि उसका बेटा उसकी दोनों टांगें फैलाकर उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथ में भर कर अपना लंड उसकी बुर में डालकर उसे चोद रहा है वह जैसे जैसे अपनी उंगली की रफ्तार बढ़ाती जाती वैसे वैसे वह यह महसूस करती कि उसका बेटा उसे जोर जोर से चोद रहा है और वह इतनी मस्त कल्पना करके पलभर में ही पानी पानी हो गई वह पूरी तरह से झाड़ चुकी थी..... एक बार फिर से वासना का तूफान गुजरते ही सुगंधा को यह सब खराब लगने लगा एक बार फिर से उसका मन अपराध भाव से भर गया और फिर से अगली बार ऐसी गलती ना करने की कसम खा कर अपने काम में लग गई.......i
rite
दिन गुजरने लगा मौसम बदलने लगे लेकिन रोहन के मन में उसकी मां को चोदने का प्यास बढ़ता ही जा रहा था हालांकि सुगंधा अपने आप पर अपने मन पर बड़ी मुश्किल से काबू करके रखे हुए थी। जिस दिन से उसने अपने बेटे के खड़े लंड को हाथ में लेकर हीलाई थी उस कुछ पल के अंदर जो उसने अपने तन बदन में अपने बेटे के लंड़ की गर्मी को महसूस की थी वह गर्मी अभी भी उसकी टांगों के बीच उसकी बुर में खलबली मचाती रहती थी। अब वह ज्यादातर अपने बेटे से दूरी बनाए रखती थी क्योंकि अपने बेटे को सामने पाकर वह उत्तेजित हो जाया करती थी और उस समय वह अपने बेटे के लंड़ को अपनी बुर में घुसवाकर चुदवाने के लिए कमजोर पड़ती जाती थी। उत्तेजनातृमक स्थिति में सुगंधा की खूबसूरती और भी ज्यादा निखरती जा रही थी। अपने बेटे से दूरी बनाते हुए भी सुगंधा रोज अपने बेटे के मोटे खड़े लंड को याद करके अपनी उंगली से अपनी दूर की गर्मी शांत करने की कोशिश कर रही थी और यही क्रम रोहन का भी था जिस दिन से उसकी मां ने खुद अपने हाथों से उसके लंड को पकड़ कर ही लाई थी उस दिन से उसके तन बदन में एक अजीब सी हलचल मचने लगी थी अपनी मां को पाने के लिए वह तड़प रहा था अपनी मां की प्यासी नजरों को अच्छी तरह से पहचानने लगा था रोहन पूरी तरह से अपनी मां का दीवाना हो चुका था आए दिन हुआ अपनी मां को नंगी देखने का अवसर ढूंढता रहता था लेकिन उसे वह अवसर प्राप्त नहीं हो पा रहा था जिसकी वजह से वह अपनी मां को लेकर काफी परेशान था इतना तो वह समझ ही गया था कि उसकी मां भी प्यासी औरत थी और उसके लंड के प्रति पूरी तरह से आकर्षित हो चुकी थी वरना वह उसके कमरे में आकर उसके लंड को पकड़ कर हिलाती नही। वह मन ही मन में यह सोच कर परेशान हो रहा था कि क्या उसकी मां उसके लंड को अपनी बुर में डलवाना चाहती है लेकिन उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां बहुत ही संस्कारी औरत थी लेकिन जिस दिन से अपनी मां की हरकत को देखा था उस दिन से अपनी मां के प्रति उसका यह ख्याल धुंधला होता जा रहा था उसे पक्का यकीन हो गया था कि उसकी मां भी चुदवाना चाहती है ।लेकिन शायद अपने मुंह से बोल नहीं पा रही है और बोलती भी कैसे भला कोई मां अपने बेटे को कैसे कहां सकती है कि वह उससे चुदवाना चाहती है ।यह तो बेटे को ही करना पड़ेगा । रोहन यही बात अपने मन में सोच रहा था कि आप उसे ही ऐसा कुछ करना होगा कि उसकी मां खुद नंगी होकर उसके बिस्तर पर आ जाए और उसे चोदने के लिए बोल दो लेकिन क्या किया जाए यह उसे बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था हर दिल बड़ी मुश्किल से गुजर रहा था रोहन पढ़ाई-लिखाई बिलकुल छोड़ चुका था बस दिन-रात अपनी मां के नंगे बदन के बारे में सोच कर अपनी प्यास को और बढ़ा रहा था....
बेला भी कुछ दिन से रोहन की प्यास बुझाने का नाम नहीं ले रही थी .....
रह-रहकर रोहन थोड़ा हिम्मत दिखाते हुए अपनी मां से दो अर्थ वाले शब्द में बातें करने लगा था जिसका अंदाजा उसकी मां को भी लग चुका था . लेकिन वह कुछ बोल नहीं रही थी बल्कि अपने बेटे की इस तरह की बात का आनंद लेते हुए अपनी बुर को बार-बार गीली कर दे रही थी.... ऐसे ही एक दिन बेला के ना आने पर सुगंधा खुद ही रसोई घर में खाना बना रही थी. . शाम ढल चुकी थी रात धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी सुगंधा भोजन पकाने में व्यस्त थी रोहन घर लौट कर इधर उधर अपनी मां को ना पाकर सीधे वह रसोई घर में चला गया....... रसोई घर में घुसते ही रोहन की नजर सीधे अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर पड़े जो कि इस समय साड़ी कमर में बांधने की वजह से उसकी साड़ी का कसाव नितंबों के घेरे पर कुछ ज्यादा ही कस गई थी जिसकी वजह से उसकी मां की गांड का उभार कुछ ज्यादा ही नजर आ रहा था..... और साड़ी थोड़ी ऊपर की तरफ खींच कर बात होने की वजह से उसकी गोरी गोरी मांसल पिंडलिया नजर आ रही थी। यह नजारा देखते ही रोहन का लंड ठुनकी मारने लगा। रोहन अपनी मां की मदमस्त गांड को देखते हुए पानी के मटके के पास गया और पानी निकाल कर पीने लगा लेकिन लगातार उसकी नजर उसकी मां की बड़ी बड़ी गांड पर टिकी हुई थी रसोई घर में रोहन के आने की आहट सुगंधाको महसूस हो गई थी इसलिए वह पीछे मुड़कर देखे तो रोज ही था लेकिन उसकी नजरें उसकी मदमस्त गांड पर टिकी हुई थी और यह बात जानते ही सुगंधा के बदन में सुरसुरी सी दौड़ गई.. सुगंधा जान गई कि उसका बेटा उसकी गांड देख रहा है... एक मां के लिए बड़ी शर्म की बात होती है जब उसका बेटा प्यासी नजरों से उसकी गांड को देख कर मस्त हुआ जाता है लेकिन यहां पर आलम कुछ और था वहां पर सुगंधा को अपने बेटे का इस तरह से उसकी गांड ताड़ना बेहद रोमांचक और उत्तेजना से भरपूर लग रहा था इस बात का सबूत उसकी पैंटी थी जो कि धीरे-धीरे उसकी बुर से निकल रहे मदन रस के रिसाव से धीरे-धीरे उसकी बुर से निकल रहे मदन रस के रिसाव से धीरे-धीरे गिली हो रही थी। पानी पी लेने के बावजूद भी रोहन जानबूझ कर मटके के करीब खड़ा था क्योंकि उस जगह से उसकी मां की मदमस्त गांड बहुत ही बेहतर तरीके से नजर आ रही थी सुगंधा भी अपने बेटे की प्यासी नजरों को उतारकर पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी वह रोटियां सेंक रही थी लेकिन वह इस बात को नहीं जानती थी कि गर्म तवे पर रोटी या सेकने से रोटी फूलती तो है लेकिन उसे बिना खाए भूख नहीं लगती जो कि यही हाल उसकी बुर का भी था जो कि बार-बार जवानी के तवे पर पाव रोटी की तरह फूल जा रही थी जो कि यह इसका इलाज बिल्कुल भी नहीं था गरम पूरी हुई बुर का सच्चा और सचोट इलाज मोटा तगड़ा टनटनाता हुआ लंड ही था जो कि उसके बेटे के पास था। सुगंधा के बदन पर मस्ती का आलम चढ़ता जा रहा था वासना की परतें उसकी आंखों को ढकती चली जा रही थी वह जानबूझकर अपने नितंबों को दाएं बाएं करके मटका रही थी जो कि उसकी यह हरकत उसके ही बेटे पर छुरियां चला रही थी.... धीरे-धीरे अपने बदन का मदन रस पिलाते हुए वह अपने बेटे को पूरी तरह से कामोत्तेजना के दलदल में खींचते चली जा रही थी जो कि इसमें ना तो सुगंधा की गलती थी और ना ही रोहन की गलती थी दोनों के भावनाओं की दोनों के विचार के और उनके हालात की सुगंधा जो कि बरसों से एक प्यासी औरत की तरह जिंदगी जी रही थी उसकी दूधली जिंदगी में रोहन के गठीला बदन और उसके दमदार लंड की वजह से थोड़ी बहुत रंगीनियत आ रही थी। उसे भी इस खेल में मजा आने लगा था साथ ही रोहन जोकि जवान हो रहा था और अपनी उम्र के हिसाब से उसका मन औरतों के अंगों के प्रति आकर्षित होना औरतों को चोदने के लिए मन तड़पना यह सब लाजिमी था......
सुगंधा रोटी बनाते बनाते ही बड़ी चंचलता से कभी दाया पैर हल्के से उठा लेती तो कभी बायां पैर एक अजीब सी कशिश उसकी इस हरकत में भरी हुई थी जो कि रोहन के लिए अपने मन पर संयम कर पाना बड़ी मुश्किल कर रही थी सुगंधा की यह अदा यह हरकत ऐसा लग रहा था मानो कोई नवविवाहित पत्नी अपने पति को अपनी हरकतों से रिझा रही थी
....
रोहन के पेंट में तंबू बन गया था जोकि सुगंधा तिरछी नजर से देख ली थी और पेंट में बने तंबू को देखते ही उसकी आंखों के सामने वह दृश्य नाचने लगा जब वह रोहन के कमरे में गई थी और रोहन बेसुध होकर एकदम नंगा सो रहा था और उसका दमदार लंड छत की तरफ मुंह उठाए खड़ा था उस नजारे को याद करके एकदम मस्त होने लगी ऐसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें और अनजाने में ही वह अपनी गांड़ जानबूझकर मटका रही थी।
रोहन का रोम-रोम उत्तेजना से झनझना रहा था। करता भी क्या उसकी आंखों के सामने नजारा जो इतना मादकता से भरा हुआ था रोहन की आंखों के सामने सिर्फ और सिर्फ उसकी मां की बड़ी बड़ी चौड़ी ग़दराई हुई गांड ही नजर आ रही थी। कुछ देर तक यूं ही ताका झांकी चलती रही तो सुगंधा ही खामोशी को तोड़ते हुए बोली....
यहां क्या कर रहे हो बेटे?..
कुछ नहीं मम्मी प्यास लगी थी तो चला आया। (इतना कहते हुए रोहन अपनी मां के करीब जाने लगा उसे अपनी तरफ आता देखकर सुगंधा का तन बदन उत्तेजना से सुरसुरा ने लगा क्योंकि उसे वह दिन याद आ गया जब वह अपने कमरे में कपड़े बदल रही थी और रोहन इसी तरह से आकर उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया था और अपना मोटा तगड़ा लंड उसकी गांड पर जोर जोर से रगड़ रहा था सुगंधा को यह लगा कि शायद आज भी वह ऐसा ही करेगा लेकिन ऐसा कुछ रोहन ने नहीं किया मैं सीधे अपनी मां की बगल में खड़ा होकर किचन टेबल पर रखा हुआ दूधी उठा लिया और बोला....)
आज क्या बना रही हो मम्मी. ...
आज दूधी बना रही हूं रोहन तुम्हें पसंद है ना.....
मुझे तो बिल्कुल भी नहीं पसंद है मम्मी हां तुम्हें जरूर पसंद होगा लंबा लंबा और मोटा मोटा दूधी.... ( रोहन ऐसा कहते हुए अपने अंगूठे और उंगली से गोल बनाकर धोती को उसने से अंदर बाहर करते हुए बोला रोहन जानबूझकर इस तरह की दो अर्थों वाले बात कर रहा था जिसका मतलब सुगंधा को समझ में आते ही उसकी बुर फूल ने पीचकने लगी। जिस अंदाज से रोहन अपनी गोलियों के बीच में से दूधी को अंदर बाहर कर रहा था उसका अर्थ साफ था.... ऐसा कहने के बाद रोहन तिरछी नजर से अपनी मां की तरफ देख रहा था जिसके चेहरे को देख कर उसे भी साफ पता चल रहा था कि उसके कहने के मतलब को उसकी मां समझ गई थी इसलिए वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी और वह भी मजे लेते हुए बोली ...)
हां मुझे मालूम है तुम्हें यह दूधी जैसी लंबी लंबी चीजें पसंद नहीं है तो मैं तो आम संतरे नारंगी या यही सब पसंद है क्योंकि यह सब तुम्हारे काम की है ना. ..
मेरे काम की है .. मैं कुछ समझा नहीं.... ( रोहन जानबूझकर अनजान बनते हुए बोला)
अरे इन्हीं चीजों से तो तुम्हें ताकत मिलती है ना .... (सुगंधा रोटी बेलते हुए बोली)
तुम्हें कैसे मालूम कि मुझे गोल-गोल चीज ही पसंद है.....
जैसे तुम जानते हो कि हमें लंबा लंबा चीज पसंद है..... ( सुगंधा रोहन की तरफ देखकर मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली अपनी मां की इस तरह की बातें सुनकर रोहन पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया अच्छी तरह से जान रहा था कि उसके बातों का मतलब उसकी मां समझ रही थी और उन मतलब के हिसाब से ही जवाब भी दे रही . . .)
मम्मी तुम तो बहुत समझदार हो गई हो क्या करूं बेटा आजकल के लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए चालाक बनना पड़ता है.... ( सुगंधा तवे पर रोटी सेकते हुए बोली.. और चोर नजरों से रोहन के पेंट की तरफ से कह रही थी जो की पूरी तरह से तंबू से तना हुआ था यह देख कर सुगंधा की बुर गीली होने लगी इस तरह की बातें करने में सुगंध को भी मजा आ रहा था एक अजीब तरह का सुकून और प्यास का एहसास हो रहा था सुगंधा बात को आगे बढ़ाते हुए बोली)
तुम चलो हाथ मुंह धोकर बैठो मैं खाना लेकर आती हूं......
ठीक है मम्मी लेकिन दूध मैं नहीं पियूंगा.....
ऐसे कैसे नहीं पियोगे मेरा दूध है....... (अपनी मां के मुंह से इतना सुनते ही रोहन का सारा ध्यान उसकी नजर अपनी मां की बड़ी-बड़ी गोल गोल छातियों पर चली गई जो कि इस समय ब्लाउज के अंदर कैद होने के बावजूद भी बहुत ही मादक और उत्तेजना से भरपूर लग रही थी.. रोहन आंखें फाड़े अपनी मां की ब्लाउज में कैद चूचियों को देखता ही रह गया खास करके बड़ी बड़ी चूचियों के बीच की पतली दरार को जिसने वह समा जाना चाहता था सुगंधा ने जब अपने बेटे की प्यासी नजरों को अपनी चूचियों पर इस्तीफा ही तो अंदर ही अंदर उत्तेजना से सिहर उठी और अपनी बात को संभालते हुए बोली ...)मेरा मतलब है कि इतनी अच्छी तरह से काजू बादाम डालकर पका रही हूं तुम्हें पीना ही होगा तभी तो तुम्हें ताकत मिलेगी.....
( सुगंधा के इस तरह की बात सुनकर रोहन उत्तेजना से गदगद हुए जा रहा था क्योंकि अनजाने में उसके मुंह से मेरा दूध है ऐसा निकल गया था जिसको सुनकर रोहन पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था लेकिन अगले ही पल सुगंधा के इस तरह की बात सुनकर रोहन उत्तेजना से गदगद हुए जा रहा था क्योंकि अनजाने में उसके मुंह से मेरा दूध है ऐसा निकल गया था जिसको सुनकर रोहन पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था लेकिन अगले ही पल सुगंधा अपनी बात को संभालते हुए बात पूरी कर दी थी रोहन इतना तो समझ गया था कि... इस तरह की बातें उसकी मां को भी पसंद आ रही है... ऐसा लगने लगा था कि दोनों तरफ आग बराबर लगी हुई थी रोहन भी रसोई घर से बाहर चला गया और थोड़ी देर में दोनों भोजन करके अपने अपने कमरे में चले गए
 
दूसरे दिन सुबह सुगंधा की नींद खुली तो वहां अपने आप को रोहन के कमरे में जाने से रोक नहीं पाई क्योंकि जो नजारा वह कल देख चुके थे एक बार फिर से उस नजारे को देख कर उसे अपने अंदर महसूस करने की उत्सुकता और प्यास उसके तन बदन को झकझोर ने लगी और सुगंधा एक बार फिर से अपने दिमाग में छाई वासना के वश मैं होकर रोहन के कमरे की तरफ अपने कदम आगे बढ़ा दी कमरे के करीब जैसे पहुंची तो कमरे का दरवाजा बंद था यह देखकर उसके मन में निराशा सी हो गई लेकिन वह अपने बेटे को जगाने के लिए भी आई थी इसलिए बाहर से दरवाजे पर दस्तक देने के लिए जैसे ही अपनी हथेली को दरवाजे से लगाई वैसे ही दरवाजा खुद-ब-खुद खुल गया और यह रोहन ने जानबूझकर खुला छोड़ दिया था क्योंकि उसके तन बदन में भी अपनी मां के नरम गरम हथेली का स्पर्श महसूस करने के लिए लालसा जागरूक हो रही थी और उसकी विनीत कुछ देर पहले ही खुली थी जिसकी वजह से वह अपने सारे कपड़े उतार कर बिस्तर पर नंगा लेटा था और आहिस्ता इसे अपने लंड को हिलाता हुआ अपनी मां के बारे में गंदी बातें सोच रहा था लेकिन उसे अपनी मां के आने की आहट हो गई थी इसलिए वह अपना हाथ अपने लंड पर से हटाकर जानबूझकर आंखों को बंद करके लेटा हुआ था सुगंधा ने जैसे दरवाजा खोली तो उसकी आंखों के सामने एक बार फिर से वही दृश्य दुबारा दोहराए जाने लगा जैसा कि वह पिछली सुबह देख चुकी थी फिर से उसकी नजर अपने बेटे के मोटे तने हुए लंड पर चली गई जो कि अभी भी मुंह उठाए छत की तरफ देख रहा था सुगंधा के तन बदन में वासना और जवानी की चीटियां रेंगने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें ना चाहते हुए भी वह हल्के से दरवाजे को बंद कर दी और धीरे-धीरे अपने बेटे के करीब जाने लगी जैसे-जैसे अपनी मां के पैरों की हाट को अपने करीब आता महसूस कर रहा था वैसे वैसे इसकी दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी वह देखना चाह रहा था कि आज उसकी मां क्या करती है वह आंखों को बंद करके लेटा रहा और धीरे-धीरे सुगंधा अपने बेटे के बिल्कुल करीब पहुंच गई वह कभी रोहन के चेहरे को तो कभी उसके मुंसल को देखती रहती..... सुगंधा अपने बेटे के मोटे लंड को अपनी हथेली में लेकर उसकी मोटाई और ताकत को महसूस कर चुकी थी इतना तो उसे पक्का यकीन था कि अगर उसके लंड को बुर में ले लिया जाए तो गुलाबी पत्तियों को फैलाकर चौड़ा कर देगा और यह सोच कर ही सुगंधा के माथे पर पसीने की बूंदें उसने लगी और उसकी बुर ओस की तरह नमकीन पानी को बूंद के रूप में टपका ने लगी... सुगंधा का दिल जोरों से धड़क रहा था अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को देखकर ना जाने कैसे-कैसे ख्याल आता उसके मन में उमड़ रहे थे वह अपने मन के ख्याल आंतों के भंवर में फंसती चली जा रही थी जिसमें से निकल पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था जवानी का जोश और उम्र के दरमियान शारीरिक सुख से वंचित रह चुकी सुगंधा अपने बेटे की जवानी देख कर ललचाने लगी।
रोहन बिस्तर पर पीठ के बल लेटा हुआ था अपना सिर को दीवार की तरफ फेर कर अपने दोनों हाथों को अपने चेहरे पर इस तरह से रख लिया था ताकि उसकी मां को जरा सा भी भनक न लगने पाए कि वह जाग रहा है सुगंधा अपने बेटे को सोता हुआ देखकर एक बार फिर से हिम्मत जुटा कर अपना हाथ आगे बढ़ाई वह बहुत ही सफाई से अपना काम कर रही थी लेकिन चूड़ियों की खनक और पायल की छनक कमरे संगीत में बना दे रहे थे और उसे इस बात से दिक्कत भी हो रही थी.... सुगंधा को इस बात का डर था कि कहीं उसकी चूड़ियों की खनक से उसका बेटा जाग ना जाए.... चूड़ियां तो मर्द और औरत के बीच प्रेम और आकर्षण का प्रतीक है कमरे के अंदर औरत के साथ संभोग रत या संभोग करने की तैयारी से पहले जो प्यार करता है उसमें चूड़ियों की खनक का महत्व अधिक हो जाता है... अक्सर मर्दों का जोश दुगुना हो जाता है जब प्यार करते समय उसके कानों में चूड़ियों की मधुर खनक की आवाज जाती है लेकिन इस समय सुगंधा के लिए यह चूड़ियों की खनक ना अच्छा नहीं लग रहा था वह बहुत सावधानी से अपने हाथ को आगे बढ़ाते हुए अपने बेटे के खड़े लंड को पकड़ ली।
ससससससससस आहहहहहहहहहह
अपनी बेटी की गरम लंड को हाथ लगाते ही सुगंधा के मुख से गर्म सिसकारी छूट गई और अपनी मां के नरम नरम उंगलियों और हथेली का स्पर्श पाते ही रोहन का बदन कसमस आने लगा अपनी मां के हाथ में अपने लंड को पाकर रोहन पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया और उत्तेजना के मारे उसके लंड की मोटाई कुछ ज्यादा ही बढ़ गई.....
सुगंधा कोई यकीन नहीं हो रहा था कि वह ऐसी हरकत कर रही है अपने ही बेटे के कमरे में चोरी से घुसकर अपने बेटे के लंड को पकड़ कर हिला रही थी जो कि हां तो बहुत ही आनंददायक पर उसमें डर भी बहुत था सुगंधा को इस बात का डर था कि कहीं उसके बेटे की नींद ना खुल जाए और ऐसा हुआ तो कहीं जीना हो जाए की उत्तेजना के मारे उसका बेटा उसे बिस्तर पर पटक कर उसके ऊपर ना चढ़ जाए.....
एक तरफ से इस बात का डर भी लग रहा था और उसके मन के कोने में कहीं यह बात उसे आनंददायक भी लग रही थी कि अगर ऐसा हो गया तो उसके लिए ही अच्छा है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से जिस तरह का वाक्य उसकी आंखों के सामने दिखाई दे रहा था उससे वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी अपने संस्कारों मर्यादा को एक तरफ रख कर वह अपने शारीरिक संतुष्टि को प्रधान ने दे रही थी वह चाहती थी कि उसका बेटा उसे जमकर चोदे अपने मोटे लंड को उसकी बुर में डाल कर बरसों से प्यासी उसकी बुर को अपने पानी से हरी हरी कर दे बरसों से यह जमीन सुखी बंजर की तरह पड़ी हुई है उसमें वह अपने लंड के पानी का फुहारा मारकर हरा भरा कर दे उसके मन में दबी वासना भड़कने लगी थी अपने बेटे के लंड को अपने हाथ में भरकर व हल्के हल्के हिला रही थी और मन में कल्पना कर रहे थे कि कितना संतुष्टि भरा हुआ नजारा होगा जब वह अपनी बेटे के लंड पर अपनी बुर की गुलाबी छेद रख कर धीरे धीरे बैठेगी यह नजारा सोच करें उसका दिल जोरो से उछल रहा था था सुगंधा की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी उसकी बुर पूरी तरह से गीली हो चुकी थी..... रोहन की हालत भी पल पल खराब हुई जा रही थी अपने आप को बड़ी मुश्किल से संभाले हुए था.... उसके बदन में अजीब सी कसमसाहट हो रही थी। मन तो उसका कर रहा था कि सच में वह अपनी मां को अपनी बाहों में भर कर बिस्तर पर पटक और उसके ऊपर चढ़कर जमकर उसकी चुदाई कर दे...... लेकिन रोहन के मन में भी डर बसा हुआ था ऐसा करने से वह अपने आप को रोक रहा था.....
उसे इस बात का भी डर था कि उसकी मां के हाथों से जादू में उसके इतने बदन में उत्तेजना का असर कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था उसे लगने लगा था कि कहीं उसका लंड पानी ना फेंक दें और यह नहीं चाहता था कि उसकी मां की आंखों के सामने उसके लंड का पानी निकल जाए क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो उसकी मां समझ जाएगी कि रोहन जाग रहा है इसलिए वह अपने आप को बड़ी मशक्कत करते हुए संभाले हुए था जिस तरह से उसकी मां उसके लंड को हिला रही थी उसे बहुत ही सुकून दायक और संतुष्टि प्रदान महसूस हो रहा था सुगंधा की सांसो की गति तेज हो रही थी उसकी गर्म सांसों की आहट रोहन के कानों में साफ सुनाई दे रही थी और अपनी मां की गरम सांसो को सुनकर रोहन पूरी तरह से चुदास से भर चुका था। अजीब से हालात से रोहन गुजर रहा था सब कुछ होने के बावजूद भी उसके हाथों में कुछ नहीं था एक गर्म औरत जो कि उसकी मां थी अपने हाथों से उसके लंड को हिला रही थी अगर वह चाहता तो अपनी मां का हाथ पकड़कर उसे चोद सकता था उसे चुदवाने के लिए मजबूर कर सकता था और उसे अपने नीचे लाने में कोई बड़ी बात भी नहीं थी क्योंकि उसकी मां भी खुद रोहन के लंड को अपनी बुर में लेकर चुदवाना चाहती थी। यह बात उसकी आंखों से छिपी नहीं थी वह भी साफ-साफ देख रहा था कि उसकी मां उसके लंड की दीवानी हो चुकी है और वह भी चुदवाना चाहती है तो ऐसे में रोहन की जगह कोई भी बेटा होता तो अपनी मां की इच्छा को जरूर पूरी करता लेकिन ऐसा करने में रोहन के संस्कार उसकी मर्यादा आड़े आ रहे थे जो कि मर्यादा की दीवाल भी उसके लिए बेहद पतली थी लेकिन फिर भी वह अपनी मां के साथ जबरदस्ती या तो अपनी तरफ से पहल करना उचित नहीं समझ रहा था इसलिए वह अपने आप को संभाले हुए था कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था सुगंधा अपने बेटे पर ध्यान दिए बिना ही उसके की प्रति पूरी तरह से आकर्षित होकर उसे हीलाए जा रही थी......
तभी वह इस बात पर गौर की कि उसके बेटे की सांसे बड़ी तीव्र गति से चल रही है उसके बदन में कसमस आहट भरी हुई थी उसे डर लगने लगा कि कहीं उसके बेटे की आंख ना खुल जाए और वह तुरंत अपने बेटे की लंड को छोड़कर वापस कमरे से बाहर चली गई लेकिन तन बदन में लंड लेने की प्यास एकदम से बढ़ गई थी इसलिए बात तुरंत बाथरूम में कहीं और अपने कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई एक बार फिर वह अपनी बुर में उंगली डालकर अपनी गर्मी को शांत करने की कोशिश करने लगी.... लेकिन यह कोशिश नाकाम थी भला मोटे लंड की प्यासी एक पतली सी उंगली से कैसे बुझने वाली थी उसकी प्यास और बढ़ती जा रही थी दूसरी तरफ अपनी मां के कमरे से बाहर जाते ही रोहन उठ कर बैठ गया उसकी सांसे उखड़ी हुई थी अगर कुछ सेकंड तक और उसकी मां उसके लंड को हिला देती तो उसका पानी उसकी आंखों के सामने ही बाहर निकल जाता लेकिन अपनी मां का अधूरा काम पूरा करने के लिए रोहन अपने लंड को पकड़ कर जोर जोर से ही हीलाना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में उसके लंड ने पानी का फव्वारा फेंक दिया कुछ देर बाद शांत हुआ तो वह अपनी मां के बारे में सोचने लगा वह सोचने लगा कि अगर उसकी मा चुदवाना चाहती है तो सीधे-सीधे उससे बोल क्यों नहीं देती इस तरह से कमरे में आकर उसकी प्यास बढ़ा रही थी और खुद भी प्यासी ही कमरे से बाहर जा रही थी......
लेकिन वह अपनी मां के बारे में अच्छी तरह से जानता था उसकी मां बहुत ही सीधी सादी सर्वगुण संपन्न और मर्यादा से परिपूर्ण नारी थी वह अपने मुंह से कैसे कह सकती थी कि बेटा मैं तेरे लंड की प्यासी हूं तुम मुझे चोद..... भला एक मां अपने मुंह से अपनी बेटे से चोदने के लिए कैसे कह सकती है....
यह सब विचार करके उसके मन में आ रहा था कि अगर आगे बढ़ना है तो उसे ही कुछ करना होगा वैसे भी इतना तो वह समझ ही रहा था कि उसकी मां को लंड की सख्त जरूरत है तभी तो वह उसके कमरे में आकर उसके लंड को हिला कर चली जा रही थी वह ही उसके ईसारे को नहीं समझ पा रहा था। यह ख्याल मन में आते ही रोहन के चेहरे पर मुस्कान खेलने लगी उसे समझ में आ गया कि उसकी मां की तरफ से पूरी तरह से यहां है बस उसे ही कुछ करना होगा यह बात मन में आते ही उसका दिल खुशी से झूम उठा ..... रोहन को आप उसकी मां अपने नीचे लगने लगी थी वह चित्र से जान गया था कि बहुत ही जल्द ही उसकी मां बिस्तर पर उसके नीचे होगी और उसका लंड उसकी बुर में होगा रोहन अपनी मां को ही चोदने की कल्पना करके उत्तेजना से एकदम से भर गया था और यह वास्तविकता ही थी कि अब उसकी कल्पना हकीकत में बदलने वाली थी लेकिन कैसे बदलेगी यह उसे भी नहीं मालूम था......
जैसे तैसे करके दिन बीत रहा था.... और जैसे जैसे दिन बीत रहा था वैसे वैसे सुगंधा की प्यास अपने बेटे के मोटे लंड के लिए बढ़ती जा रही थी और रोहन की प्यास अपनी मां की रसीली बुर के लिए बढ़ती जा रही थी.... आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई थी लेकिन यह आग कौन बुझाएगा इसका पहल करने में शायद किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी।
जवानी की आग सुगंधा को भी जला रही थी अब उसका भी मन काम में बराबर नहीं लगता था.... . ऐसे ही एक दिन वह मुंशी के साथ हिसाब किताब करने बैठी थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और सुगंधा की नौकरानी बेलाने दरवाजा खोली। दरवाजे पर खड़े अतिथि को वह आदर सहित अंदर लेकर आई और उसे बैठने को कहकर पानी लेने चली गई...
पानी पीने के बाद उस अतिथि ने सुगंधा को बताया कि मानसिंह जमीदार की लड़की की शादी है. . जिसमें उन्हें आमंत्रित किया गया है उस अतिथि की बात सुनकर सुगंधा खुशी-खुशी हाथ आगे बढ़ा कर उससे आमंत्रण पत्र लेकर उसका अभिवादन करके उसे विदा कर दी.....
थोड़ी देर तक मुंशी से हिसाब किताब चलता रहा और सुगंधा अपने मुंशी से ड्राइवर के बारे में पूछी तो मुंशी ने बताया कि कुछ दिनों से वह गांव से बाहर गया हुआ है और ड्राइवर मिलना बहुत मुश्किल है....
लेकिन आप तो खुद ही मोटर गाड़ी चला सकती हैं तो ऐसा करिए कि आप खुद ही मोटर चला कर ले जाइए हां मुझे मालूम है कि अच्छा तो नहीं लगेगा लेकिन कर भी क्या सकते हैं ड्राइवर मिलना गांव में बड़ा मुश्किल होता है और मानसिंह की लड़की की शादी 3 दिन बाद ही है ड्राइवर का जुगाड़ होना बहुत मुश्किल है.....
( मुंशी की बात सुनकर सुगंधा थोड़ी चिंतित हो गई कुछ देर विचार करने के बाद वह बोली. .)
मुंशी जी आप ठीक कह रहे हैं ऐसे हालात में मुझे ही गाड़ी चला कर ले जानी पड़ेगी लेकिन काफी दिन हो गए गाड़ी चलाई नहीं हूं इसलिए थोड़ी बहुत तो दिक्कत होगी लेकिन मैं सब संभाल लूंगी अब आप जा सकते हैं...
इतना सुनते ही मुंशी कुर्सी पर से उठ कर सुगंधा का अभिवादन किया और चला गया.... सुगंधा कुर्सी पर से उठ कर इधर उधर टहलते हुए कुछ सोच रही थी वह जाना तो नहीं चाहती थी लेकिन मान सिंह के साथ उसके घर के अच्छे संबंध थे और उसके घर जाना भी जरूरी था तो वह रोहन को साथ ले जाने का फैसला कर ली....
 
सुगंधा सुबह से खुश नजर आ रही थी वह रोहन को भी तैयार होने को कह दी थी रोहन भी खुश नजर आ रहा था काफी दिनों बाद वह किसी शादी में जा रहा था और उससे भी ज्यादा खुशी की बात यह थी कि वह अपने मां के बेहद करीब रहने वाला था इसी बहाने उसे अपनी मां के करीब रहने का मौका जो मिल रहा था.... नहा धोकर रोहन अपने कमरे में जाकर तैयार हो गया था अपने आप को आईने में देखकर वह काफी संतुष्ट था क्योंकि उसे यकीन था कि... औरतों की पसंद जिस तरह का वह दिखता था उसी तरह की होती है.... मासूम सा चेहरा पर चेहरे के पीछे बहुत कुछ छुपा हुआ था गठीला बदन हमेशा औरतों की पहली पसंद रही है जो कि रोहन के पास कूट-कूट के भरी हुई थी....
रोहन तैयार हो चुका था और अपने कमरे में अपनी मां का इंतजार कर रहा था कि वह तैयार होकर उसे चलने के लिए कहे लेकिन काफी देर भी चुका था वह उसी तरह से बैठा रहा और दूसरी तरफ सुगंधा तैयार होने में लगी थी आज ना जाने कि उसे अपने आपको तैयार करने में एक अजीब प्रकार की उत्सुकता आनंद का एहसास हो रहा था जोकि इसका मुख्य कारण रोहन था ना चाहते हुए भी वह रोहन को अपनी तरफ रीझाना चाहती थी। मन में दबी हुई कामवासना सावन के मेंढक की तरह उछल कूद कर रहे थे वासना मई मयूर पंख फैलाकर नाचने को मचल रहा था सुगंधा अपने आप को रोक नहीं पा रही थी एक अजीब सा एहसास तन बदन को झकझोर दे रहा था.... आईने के सामने वह संपूर्ण रूप से नंगी अवस्था में खड़ी थी अपने आप को देख कर उसे यकीन नहीं हो रहा था कि आईने में वह अपने आप के अक्स को देख रही हैं। दोनों नारंगी या सीना ताने छातियों की शोभा बढ़ा रही थी। समतल पेट जिस पर बस हल्का सा चर्बी बढ़ा हुआ था लेकिन चर्बी की वजह से चिकने पेट की खूबसूरती और ज्यादा बढ़ गई थी।
वह अपने बदन को आईने में ऊपर से नीचे बड़ी बारीकी से देख रही थी अभी भी वह संपूर्ण जवानी से भरपूर थी उसके अंगों का उतार-चढ़ाव कटाव सब कुछ उन मादक था जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही थी वैसे-वैसे सुगंधा की जवानी में निखार आता जा रहा था नितंबों का उभार मर्दों के लंड की अकड़ पन का थर्मामीटर था । अपनी कातिल जवानी को देखकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न हो रही थी गीले बालों में से सोंधी सोंधी खुशबू आ रही थी जो कि कमरे के वातावरण को मादकता से भर दे रहा था और वैसे भी औरत के बालों में से बालों को धोने के बाद एक बहुत ही गजब की कामोत्तेजना से भरपूर खुशबू आती है जिसे मर्द महसूस करके उत्तेजना से भर जाता है.....
खैर जैसे-तैसे करके सुगंधा कपड़े पहन कर तैयार हो गई उसके गोरे बदन पर लाल रंग की साड़ी और वह भी ट्रांसपेरेंट बहुत ही जानलेवा लग रही थी..... ट्रांसपेरेंट साड़ी में से सुगंधा का लाल रंग का ब्लाउज नजर आ रहा था और कसी हुई ब्लाउज पहनने की वजह से सुगंधा की बड़ी-बड़ी गोल सूची आपस में एकदम दबी हुई थी जिसकी वजह से दोनों की बीच की लकीर कुछ ज्यादा लंबी और गहरी हो चुकी थी.... कुंआ नुमा सुगंधा की गहरी नाभि ट्रांसपेरेंट साड़ी में से एकदम साफ नजर आ रही थी कुल मिलाकर सुगंधा काम की देवी लग रही थी लेकिन उससे एक चूक होती जा रही थी ब्लाउज की डोरी उससे बंद नहीं हो रही थी बहुत कोशिश करने के बावजूद भी जब उससे डोरी बंद नहीं हुई तो वह रोहन को अपने कमरे में से ही आवाज लगाई...... लेकिन रोहन को आवाज लगाने पर उसे बेहद उत्तेजना का आभास हो रहा था.. एक अजीब सी हलचल मन में हो रही थी क्योंकि वह अपने ही बेटे को अपने ब्लाउज की डोरी बांधने के लिए बुला रही थी सुगंधा के चेहरे पर शर्म की लाली उपसने लगी... आवाज से पहले कभी नहीं हुआ था लेकिन जब से वह अपने ही बेटे के प्रति आकर्षित हुई थी तब से उसके तन बदन में रोहन को अपने करीब पाकर रोहन के बारे में सोचकर अजीब सी हलचल होने लगी रोहन भी अपने कमरे में बैठा अपनी मां के बुलाने का इंतजार कर रहा था कि उसकी आवाज सुनकर वह तुरंत बिस्तर पर से उठा और अपनी मां के कमरे की तरफ जाने लगा थोड़ी देर में वह दरवाजे पर खड़ा हो गया दरवाजा बंद था वह दरवाजे पर दस्तक दिया तो उसे इस बात का आभास साफ साफ हुआ की अंदर से दरवाजे की तरफ चलने की आहट हो रही थी। रोहन को उसकी मां के पैरों की पायल की छन छन और चूड़ियों की खनखन साफ सुनाई दे रही थी जिसकी आवाज सुनकर उसके तन बदन में भी उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी...
हां आई...... ( इतना कहने के साथ ही सुगंधा दरवाजे की तरफ बढ़ी और अगले ही पल दरवाजे की कुंडी खोल दी दरवाजा खुलते ही रोहन कमरे में दाखिल होता हुआ बोला. .)
मम्मी आप तैयार हो गई कि नहीं..
हां बेटा में तैयार हो गई हूं बस में ब्लाउज की डोरी नहीं बांट पा रही हु तू थोड़ी मदद कर दे। जल्दी से मेरे ब्लाउज की डोरी बांध दे। ( इतना कहने के साथ ही सुगंधा अपने बेटे की तरफ अपनी पीठ करके खड़ी हो गई साड़ी का पल्लू नीचे गिरा हुआ था और सुगंधा का ब्लाउज इस तरह से बना हुआ था कि पीछे की लगभग पूरी चिकनी नंगी पीठ नजर आ रही थी जिसमें से हल्की-हल्की उसके लाल रंग की ब्रा की पट्टी भी नजर आ रही थी जिस पर नजर पड़ते ही रोहन के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी वैसे भी ना जाने क्यों औरतों की ब्रा हल्की सी नजर आ जाने पर मर्दों का लंड खड़ा हो जाता है उनके मन में यह बात घर कर जाती है कि ब्रा के नजर आते ही उनकी चूची तक का रास्ता साफ हो जाता है ऐसा कुछ रोहन को भी आभास हो रहा था अपनी मां की ब्रा की पट्टी को देख कर उसे ऐसा लगने लगा था कि उसकी आंखों के सामने उसकी मां के बड़े-बड़े दोनों खरबूजे सीना ताने नजर आ रहे हैं.... रोहन एक अटक अपनी मां की पिघलती हुई मदहोश कर देने वाली नंगी गोरी पीठ को देखता ही रह जाए पीठ पर हल्का सा दाग भी नहीं था ... अपनी मां की नंगी चिकनी पीठ को देखकर रोहन की इच्छा हो रही थी कि वह अपनी मां के बदन से सट जाए और उसकी नंगी पीठ पर चुंबनो की बारिश कर दे। लेकिन ऐसा सोच भर सकता था ऐसा करने की उसमें हिम्मत नहीं थी और दूसरी तरफ सुगंधा की सांसो की गति तीव्र होती जा रही थी उसके तन बदन में कामोत्तेजना की हलचल हो रही थी... अपनी सांसो को थामें अपने बेटे की ऊगलियों का स्पर्श का इंतजार कर रही थी।... सुगंधा आदम कद आईने के सामने खड़ी थी जिसमें से दोनों का प्रतिबिब साफ साफ नजर आ रहा था सुगंधा आईने में अपने बेटे की एक-एक हरकत पर बड़े ही बारीकी से नजर रखे हुए थे उसे साफ नजर आ रहा था कि उसके बेटे की नजर उसकी नंगी पीठ पर स्थिर हुई थी उसके चेहरे के हाव-भाव से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उसके बदन में कामोत्तेजना अपना असर कर रहा हो।
क्या हुआ रोहन जल्दी करो देर हो रही है....
हां मम्मी करता हूं.....
( इतना कह कर वो अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ा दिया और ब्लाउज की रेशमी डोरी को पकड़कर गिठान मारने की कोशिश करने लगा नंगी पीठ पर ऊअगलियों का स्पर्श होते ही सुगंधा सिहर उठी आज पहली बार वहां किसी गैर मर्द जो कि उसका बेटा ही था उससे अपने ब्लाउज की डोरी बंधवा रही थी शुरू शुरू में उसके पति ने ही उसकी ब्लाउज की डोरी को बांधा था लेकिन आज पहली बार अपने बेटे से यह काम करवाते हुए उसे बहुत ही ज्यादा संतुष्टि दायक और उत्तेजनात्मक लग रहा था.. यही हां रोहन का भी था अपनी मां की नंगी पीठ पर जैसे ही उसकी उगली का स्पर्श हुआ उसके तन बदन में खास करके उसके लंड में बड़ी तेजी से हरकत होने लगी उसकी उंगलीया काप रही थी।.. सुगंधाको तो इस समय उत्तेजना की वजह से रोहन की उंगलियां का स्पर्श उसके लंड का स्पर्श लग रहा था... रोहन के लिए किसी औरत की चोली की डोरी बांधना यह पहली बार का अनुभव था इससे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे बांधा जाएगा। वह बस अपनी मां की ब्लाउज की रेशमी डोरी को उंगलियों में उलझा कर इधर-उधर कर रहा था और अपने आप को उत्तेजित भी कर रहा था सुगंधाको अपने बेटे की इस हरकत पर मजा आ रहा था सुगंधा को इस बात का एहसास हो गया कि उसकी बुर पनिया रही थी..... अजीब सी कशमकश में फंसी हुई थी सुगंधा उसे मज़ा भी आ रहा था और अपनी हरकत पर पछतावा भी हो रहा था अपने आप पर क्रोध करते हुए कभी अपने आप को समझाती तो कभी अपनी जवानी और जरूरत के जोर के आगे घुटने टेक देती। सुगंधा आईने में साफ-साफ देख पा रही थी कि रोहन से डोरी बंध नहीं रही थी। इसलिए वह बोली.....
बेटा क्या कर रहे हो तुमसे ब्लाउज की डोरी नहीं बध रही है पता नहीं तुम से क्या होगा....
मम्मी आप अच्छी तरह से जानती है कि मेरा काम नहीं है और इससे पहले मैंने कभी ऐसा काम नहीं किया तो मुझे कैसे पता होगा... .
 
Back
Top