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Incest बदलते रिश्ते......

क्या रोहन शादी के बाद भी अपनी बीवी से यही कहोगे जब वह तुम्हें ब्लाउज की डोरी बांधने के लिए कहेगी तो.....
मम्मी तब की बात तब है.....
( रोहन अपनी मां के ब्लाउज की डोरियों को अपनी उंगली में उलझाए हुए बोल रहा था पल पल उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी क्योंकि वह अपने मां के बेहद करीब था और सुगंधा के खूबसूरत बदन मै से खास करके उसके गीले बालों में से भीनी भीनी खुशबू आ रही थी जोकि रोहन की उत्तेजना को बढ़ा रही थी। सुगंधा खुद जानबूझकर अपने दोनों पैर को बारी-बारी से हल्के से हीला रही थी जिसकी वजह से उसकी मदमस्त गांड में अजीब सी थकान हो रही थी जो कि रोहन की आंखों से छुपी नहीं थी और एक तो वैसे ही सुगंधा ने आज अपनी साड़ी को एकदम कमर के हल्के से नीचे की तरफ बांधी थी जिसकी वजह से उसके नितंबों की गोलाई साफ साफ झलक रही थी..... यह सब देखकर रोहन का लंड पजामे के अंदर तन कर खड़ा हो गया...... उसके तो जी में आ रहा था कि अपनी मां को पीछे से पकड़ कर उसकी मत मस्त गोरी गोरी गांड पर अपना लंड रगड़ दै लेकिन यह मात्र विचार ही था... )
ऐसे कैसे तब की बात तब है आखिर वह भी तो औरत ही होगी ना वहां तो नहीं सिखाना पड़ेगा झट से बांध देगा।
( सुगंधा जानबूझकर रोहन से इस तरह की बातें कर रही थी और उसे भी इन सब बातों में मजा आ रहा था सुगंधा भी अपने बेटे को अपने इतने करीब पाकर एकदम उत्तेजित हो गई थी वह जानबूझकर गांड को इधर उधर रही थी....)
क्या मम्मी आप भी.....
बेटा देर मत कर जल्दी से बांध दें काफी दूर जाना है वहां पहुंचते पहुंचते रात हो जाएगी (इतना कहते हुए सुगंधा पीछे की तरफ नजर करके रोहन के पजामे की तरफ चोर नजर से देखली और उस पर नजर पड़ते ही उत्तेजना के मारे सुगंधा की बुर फुदकने लगी। सुगंधा से रहा नहीं जा रहा था उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह किसी भी तरह से आप अपने बेटे के लंड को अपनी गांड पर महसूस करना चाहती थी... इसलिए अपनी युक्ति आजमाते हुए वह जानबूझकर नीचे की तरफ झुकी और बेवजह ही अपनी साड़ी का पल्लू पकड़ ली ताकि रोहन को लगे कि वह साड़ी के पल्लू को उठा रही है लेकिन ऐसा करने में वह झुकी और झुकने की वजह से उसकी मदमस्त गोल-गोल गांड सीधे रोहन के लंड से जाकर सट गई रोहन ब्लाउज की डोरी पकड़े हुए था इसलिए सुगंधा के झुकने की वजह से रोहन भी डोरी पकड़े पकड़े मां के ऊपर ही चूक गया और उसका मोटा तगड़ा लंड जौकी पजामे के अंदर एकदम खड़ा था। वह सीधे जाकर उसकी मां की गांड के बीचोबीच साड़ी सहित दरार में फंस गया ...
कुछ पल के लिए मानो समय ठहर गया हो दोनों को कुछ समझ में नहीं आया कि यह क्या हुआ सुगंधा तो यह हरकत जानबूझकर की थी लेकिन उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि रोहन के पजामे में तना हुआ तंबू सीधे उसकी गांड के बीचो-बीच उसकी रसीली बुर के द्वारा पर ठोकर मारने लगा..... सुगंधा अपनी उत्तेजना को संभाल नहीं पाई उसकी बुर हल्के से खुल गई मानो अपने बेटे के लंड को अंदर आने का आमंत्रण दे रही हो लेकिन इस समय बुर के आमंत्रण को लंड स्वीकार नहीं कर पा रहा था। क्योंकि दोनों के मिलन में मां बेटी दोनों का वस्त्र बाधा बन रहे थे पर दोनों कुछ देर इसी अवस्था में ज्यों का त्यों स्थिर हो गए मानो उनके लिए सारी दुनिया छूट गई हो इस पृथ्वी पर केवल वही दो विहर रहे हो। उत्तेजना के मारे सुगंधा की बुर से नमकीन पानी की बूंदें टपक रही थी अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी अपनी मर्यादा मैं बंधी होने के कारण वह अपने मन की बात अपने बेटे को पता नहीं पा रही थी अगर उसकी जगह कोई और मर्द होता तो शायद इस तरह की स्थिति पैदा ही नहीं होती और इस तरह की स्थिति पैदा भी होती तो सुगंधा उससे अपने लंड को बुर में डालने का आमंत्रण दे चुकी होती लेकिन यहां तो अपना खुद का बेटा था इसलिए सुगंधा से बोला नहीं जा रहा था लेकिन कुछ देर तक यूं ही झुके होने की वजह से सुगंधा अपने बेटे की मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर पर साफ तौर पर महसूस कर रही थी...... रोहन की तो हालत खराब थी इस समय बाद घोड़ी बनाकर चोदने वाली पोजीशन में खड़ा था ऐसा लग रहा था कि उसकी मां घोड़ी बनी हुई है और उसके हाथों में उसकी ब्लाउज की डोरी नहीं बल्कि उसकी लगाम हो बस उसे धक्के लगाने की जरूरत थी और अपनी इस घोड़ी को मंजिल की तरफ ले जाने में कोई कसर बाकी नहीं रखता रोहन लेकिन वह भी मजबूर था वह भी एक बेटा था अपने आप पर संयम रखे हुए था एक खूबसूरत औरत कितने करीब होने के बावजूद भी वह अपने आप को ना जाने कैसे संभाले हुए था यह तो एक उन दोनों के बीच में रिश्ते की वजह से सब कुछ संभला हुआ था वरना यह ड़ोर ना जाने कब से टूट चुकी होती। लेकिन फिर भी रोहन इस स्थिति का पूरा फायदा उठाते हुए अपनी मम्मी की ब्लाउज की ड़ोरी को संभालने का बहाना करते हुए अपनी कमर को आगे की तरफ ठेल दिया था जिससे उसे एक औरत को चोदने का एहसास प्राप्त हो रहा था। वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था लेकिन अगले ही पल सुगंधा अपने आप को संभालते हुए अपना पल्लू ठीक करते हुए खड़ी हुई और इस बार जल्दी से ब्लाउज की डोरी बांधने के लिए रोहन को बोली और रोहन भी गलती ना करते हुए इस बार झट से बड़ी अच्छी तरह से अपनी मां के ब्लाउज की डोरी बांध दिया यह देखकर सुगंधा बोली।
अब देख कितना अच्छा बांध लिया है मुझे तो लग रहा था तू बांध ही नहीं पाएगा...
मुझे भी ऐसा ही लग रहा था मम्मी....
दोनों अपनी इस हरकत की वजह से काफी शर्मिंदगी महसूस कर रहे इसलिए दोनों एक-दूसरे से नजरें मिलाए बिना ही घर के बाहर आ गए सुगंधा बेला घर की अच्छी तरह से देखभाल करने को कह कर मोटर गाड़ी में बैठ गई काफी समय बाद आज वह मोटर चलाने वाली थी.... रोहन कि आज पहली बार मोटर गाड़ी में अपनी मां के साथ कहीं जा रहा था वैसे तो वो काफी बार मोटर गाड़ी में बैठ चुका था लेकिन आज पहली बार वह अपनी मां को एक ड्राइवर के रूप में देखने जा रहा था.... दोनों गाड़ी में बैठ चुके थे और सुगंधा एक बार अपने बेटे की तरह मुस्कुराहट भरी नजरों से देखी और गाड़ी में चाबी लगाकर गाड़ी स्टार्ट कर दी सुगंधा के लिए आज मैं सब नया नया सा लग रहा था उसे काफी अच्छा महसूस हो रहा था मौसम भी बहुत खुशनुमा था ठंडी हवा चल रही थी वैसे भी सुबह का समय था इसलिए हवा में भीनी भीनी खुशबू मिली हुई थी जो कि हल्की हल्की बारिश की वजह से थी लेकिन इस समय बारिश का नामोनिशान नहीं था मौसम काफी खुला हुआ था.... गाड़ी स्टार्ट हो चुकी थी सुगंधा गाड़ी को चलाना अच्छी तरह से जानती थी एक कुशल मोटर चालक की तरह गाड़ी का गेर बदलकर एक्सीलेटर दबाई और मोटर आगे बढ़ चली...
मौसम बड़ा ही सुहाना था इसलिए रोहन और सुगंधा भी काफी खुश नजर आ रहे थे.... आजयह पहली बार था कि रोहन अपनी मां के साथ कहीं मोटर गाड़ी में बैठकर जा रहा था और उसकी मां खुद गाड़ी चला रही थी यह बात रोहन को की काफी अच्छी लग रही थी वह बार-बार अपनी मां की तरफ देख ले रहा था और उसकी मां भी मुस्कुरा कर उसकी तरफ देख ले रही थी और गाड़ी चला रही थी सुगंधा वैसे तो खूबसूरती की मिसाल थी लेकिन आज कुछ ज्यादा ही खूबसूरत लग रही थी बार-बार उसके रेशमी जुल्फों की लडे उसके गाल के साथ अठखेलियां कर रही थी..... जिसे वह बार-बार अपनी नाज़ुक उंगलियों से कान के पीछे कर दे रही थी लेकिन यह जुल्फें उसकी खूबसूरती देखकर गुस्ताख हो रहे थे..... रोहन को भी अपनी मां की यह अदा खूब जच रही थी.... तकरीबन एक आध घंटे जैसा समय गुजर गया था लेकिन दोनों के बीच मात्र एक दूसरे को देख कर मुस्कुराहटों का ही दौर चल रहा था रोहन यह चुप्पी तोड़ते हुए बोला.....
मम्मी हम किसकी शादी में जा रहे हैं.. ?
अपने ही पहचान के जमीदार हैं उनकी लड़की की शादी है और हमें जल्दी पहुंचना है क्योंकि आज ही बारात आएगी...
मतलब कि कल हमें वापस आना है..
हां और क्या हमें वहां रुकने थोड़ी है... तुम्हारा रुकने का मन है क्या...
नहीं मम्मी मैं तो ऐसे ही कह रहा था भला मैं वहां किसी को जानता थोड़ी हूं तो वहां अच्छा तो लगेगा नहीं....

मुझे मालूम है अच्छा तो नहीं लगेगा लेकिन शादी का माहौल है तो तुम्हारा मन लगा रहेगा क्योंकि अब तुम्हारी भी उम्र शादी की हो गई है मुझे ऐसा लग रहा है.... ( सुगंधा अपने बेटे की तरफ मुस्कुराकर देखते हुए बोली सुगंधा के होठों पर लाल रंग की लिपस्टिक लगी हुई थी जो कि बहुत ही जांच रही थी और रोहन का ध्यान भी अपनी मां के लाल लाल हो तो पड़ता स्थिति में तो आ रहा था कि अपनी मां के लाल होठों को मुंह में भर कर उसका सारा रस चूस डालें लेकिन अभी शायद उस के नसीब में ऐसा नहीं था वह अपनी मां की बात सुनकर बोला...)
मम्मी तुम्हें ऐसा क्यों लगता है मेरी उम्र अभी शादी की नहीं है और ना ही मैं बड़ा हो गया हूं अभी तो मैं बच्चा ही हूं (रोहन जानबूझकर ऐसी बातें कर रहा था जबकि वह खुद जानता था कि उसका हथियार अब सुहागरात मनाने लायक हो गया था)
मुझे तो कहीं से नहीं लगता कि तुम अभी बच्चे हो...
( सुगंधा अपनी नजर अपने बेटे के माथे से लेकर नीचे तक घुमाते हुए बोली और खास करके उसकी नजर रोहन की टांगों के बीच अटक सी गई थी और यह आभास करो हमको होते हैं रोहन अपने पैरों को शर्म के मारे सिकुड़ने लगा... अपने बेटे की हालत देखकर सुगंधा मन ही मन खुश होने लगी ....)
क्या मम्मी आप भी बस ऐसे ही बातें बनाती हो....
( रोहन जानबूझकर अनजान बनने की कोशिश कर रहा था लेकिन यह बात उसे भी अच्छी तरह से मालूम थी कि उसकी मां उसके नंगे खड़े लंड को देखकर ही यह बात कर रही थी शायद उसके लंड़ की ताकत का अंदाजा उसकी मा नें उसे देखकर उसे छूकर महसूस कर ली थी।)
बातें नहीं बना रही हूं बेटे मुझको मालूम है कि तुम अब बड़े हो गए हो भला अपने बेटे के रोम-रोम से एक मां वाकिफ नहीं होगी तो कौन होगा.......
( दोनों के बीच बातों का दौर शुरू हो चुका था सुगंधा जानबूझकर इस तरह की बातें कर रही थी बड़ा ही अजीब माहौल बन चुका था सुगंधा के लिए..... एक सीधी-सादी मर्यादा से बंधी हुई संस्कारों में लिपटी हुई नारी वासना की हवा लगते ही कैसे अपने आप को शारीरिक आकर्षण में बंध कर अपनी जरूरतों को पूरा करने हेतु किस तरह से अपनी मर्यादा को तार-तार करती है.... आसमान में हल्के हल्के बादल फिर से छाने लगे थे। ... मौसम बिल्कुल ठंडा खुशगवार हो चुका था.... सुगंधा जब तक बड़े आराम से गाड़ी चला रही थी अब थोड़ी रफ्तार बढ़ाना शुरू कर दी। क्योंकि वह जानती थी कि अगर बरसात तेज होने लगी तो वहां पहुंचना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि वहां का रास्ता उबर खाबर पगडंडियों वाला था और पानी भर जाने के कारण वहां पहुंचना मुश्किल हो जाता इसलिए वह अपनी गाड़ी की रफ्तार बढ़ाकर गाड़ी आगे बढ़ाने लगी..... अपनी मां को इस तरह से गाड़ी चलाता देखकर रोहन बहुत खुश हो रहा था और वह अपनी मां से बोला....
मम्मी आप इतना अच्छी तरह से गाड़ी चलाती है मुझे तो मालूम ही नहीं था आपने गाड़ी चलाना कहां से सीखी.....
जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी तभी सीख ली थी और आज देखो काम आ रहा है..... ( सुगंधा मुस्कुरा कर जवाब देती हुई गाड़ी चला रही थी बाहर हवा तेज चलने लगी थी अभी एक हवा का झोंका कांच खुला होने की वजह से गाड़ी के अंदर आया और सुगंधा के कंधे का पल्लू पूरा कर दूसरी तरफ कर दिया जिससे उसकी पूरी छाती उजागर हो गई गाड़ी चलाने की वजह से सुगंधा अपना पल्लू ठीक नहीं कर पा रही थी बड़ा ही रोमांचक दृश्य नजर आने लगा था सुगंधा की गोल-गोल बड़ी-बड़ी छातियां नजर आ रही थी। सुगंधा अपने एक हाथ से पल्लू पकड़ कर ठीक करना चाह रही थी लेकिन कर नहीं पा रही थी सुगंधा की गोलाईयां ब्लाउज के अंदर छुपी हुई थी। ब्लाउज इतनी ज्यादा कसी हुई थी कि चुचियों के बीच की पतली सी लकीर ज्यादा ही गहरी और लंबी बन चुकी थी। रोहन तो सब कुछ भूल कर आंखें फाड़े बस अपनी मां की बड़ी-बड़ी चुचियों को ही देखे जा रहा था। सुगंधा गाड़ी चलाते हुए और एक हाथ से अपने साड़ी के पल्लू को ठीक करने के प्रयास में रोहन की तरफ देखी तो उसकी प्यासी नजरे अपनी चूचियों की तरफ केंद्रीत हुई देखकर शर्म से पानी-पानी हुए जा रही थी। सुगंधा करती भी तो क्या करती ना तो उसके साड़ी समझ पा रही थी और ना ही रोहन को कुछ बोल पा रही थी गाड़ी संभाल कर चलाने के प्रयास में वह अपनी चुचियों को अनजाने में ही अपने बेटे के सामने प्रदर्शित कर रही थी। हालांकि दोनों कबूतर ब्लाउज में ही कैद थे लेकिन उनका आकार कटाव इस तरह का था कि देखने वाले बिना ब्लाउज हटाए भी चुचियों के आकार और गोलाई को नजर भर कर महसूस कर सकते थे। सुगंधा की गाड़ी कच्चे रास्ते से होकर गुजर रही थी इसलिए सुगंधा बड़े संभालकर गाड़ी चला रहे थे क्योंकि कच्चे रास्ते के दोनों तरफ हल्के हम के तकरीबन दो दो तीन तीन फीट के गड्ढे थे जिसमें गाड़ी उतरने का डर बना हुआ था कारण सुगंधा अपना पल्लू ठीक नहीं कर पा रही थी और अपने बेटे के प्यासे नजरों की प्यास बुझा रही थी सुगंधा को भी अंदर ही अंदर मजा आने लगा था इस तरह से अपनी चूचियों को ब्लाउज के अंदर से भी प्रदर्शित करने में बार-बार व तिरछी नजर से अपने बेटे की तरफ देख रही थी जो की बिना डरे बिना शर्माए उसके ब्लाउज की तरफ देखें जा रहा था.... उसके देखने की अंदाज से यही लग रहा था कि अगर उसे थोड़ी सी छूट दी जाए तो वह उसकी चूचियों पर झपट पड़ेगा और दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर उनका दूध निचोड़ कर पी जाएगा लेकिन सुगंधा अपने बेटे की यह प्यास देखकर खुद भी मचलने लगी उसे इस तरह से अपनी चूचियों की तरफ घूरना अच्छा लग रहा था.... लेकिन तभी उसके मन में यह ख्याल आया कि कहीं उसके बेटे को यह न लगे कि वह जानबूझकर अपने पल्लू को ठीक नहीं कर रही है..... उसे लगने लगा कि उसका बेटा उसके बारे में क्या सोचेगा इसलिए वह बोली. ....
अरे खाली आंख फाड़ कर देखते ही रहोगे कि इसे ठीक भी करोगे....
( अपनी मां की बातें सुनकर रोहन को ऐसा लगा कि जैसे किसी ने एक बाल्टी पानी उसके ऊपर डाल दिया और वह नींद से चटपटा कर उठ कर बैठ गया हो इस तरह से हड़ बढ़ाते हुए बोला।)
हंहंहं हाँ मममम मम्मी मैं ठीक करता हूं .... (इतना कहकर वहां साड़ी के पल्लू जोकि गाड़ी के सीट की दूसरी तरफ चला गया था उसे हाथ से पकड़ कर अपनी मां के दोनों चुचियों को देखते हुए कंधे पर ले गया अपनी मां का पल्लू ठीक कर रहा था और सुगंधा संभाल कर गाड़ी चला रही थी लेकिन अपनी मां के इतने करीब खास करके उसकी आंखों के सामने उसकी मां की दोनों बड़ी बड़ी चूचियां पाकर रोहन मदहोश होने लगा और इस मदहोशी के आलम में अपनी मां के पल्लू को ठीक करते करते अपनी मां की नजर बचाकर अपनी पूरी हथेली अपनी मां की दाई चूची पर रख कर हल्के से उसे दबा दिया... और कुछ सेकंड तक उस पर अपनी हथेली रखकर वापस हटा दिया और अपनी जगह पर बैठ गया... एक अद्भुत एहसास अतुल्य पल एक रोमांचकारी अनुभव रोहन अपने अंदर महसूस करके अपनी सीट पर बैठ गया था उसे लगा था जैसे कि रुई के कोमल ढेर पर अपनी हथेली रख दिया हो उसे समझ में नहीं आया कि आखिर कार यह चीज है क्या इससे पहले वह बेला की चुचियों को जमकर दबा चुका था इसका आनंद ले चुका था लेकिन जो नरमाहट और कोमलता का अनुभव उसे अपनी मां की चूची को स्पर्श कर के मिला था इस तरह का अनुभव उसे बेला की चूचियों से जरा सा भी नहीं प्राप्त हुआ था..... पल भर में उत्तेजना के परम शिकार पर पहुंच गया था रोहन उसे लग रहा था कि उसने अपनी मां की नजरों से बचाकर यह हरकत किया था लेकिन यह सच था कि सुगंधा अपने बेटे की हरकत को देख नहीं पाई थी लेकिन अपने बेटे की हथेली को अपनी चूची पर वह महसूस अच्छी तरह से कर ली थी उस इस बात का अंदाजा लग गया था कि वह जानबूझकर पल्लू ठीक करने के बहाने उसकी चूची को दबाने का आनंद ले चुका था उसे तो पहले अजीब लगा लेकिन जिस तरह की हरकत और हिम्मत करके उसने उसकी चूची को स्पर्श किया था उसे देखकर सुगंधा का दिल बाग-बाग हो गया था उसे अंदर ही अंदर प्रसन्नता का अनुभव रहा था लेकिन जैसे ही रोहन की हथेलियों का स्पर्श चुचियों पर हुआ था सुगंधा अंदर तक सिहर उठी थी उसे एक पल को तो ऐसा लगा कि रोहन उसकी चूची को दबाना शुरू कर देगा लेकिन बड़ी होशियारी से बस उसे हल्का सा दबाकर मजे लेकर अपनी जगह पर बैठ गया था.... सुगंधा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि इस बारे में वह रोहन से कुछ कहे या नहीं इस बात का डर भी था किया करो हमको कुछ कहेगी तो हो सकता है कि वह इस तरह की हरकत करना छोड़ दें या ऐसा भी हो सकता है कि वह डरकर इस तरह की हरकत करें ही नहीं और ऐसा ना करने पर घाटा सुगंधा का ही था क्योंकि अपने बेटे की तरह की हरकत में उसे भी मजा आने लगा था इसलिए वह कुछ बोली नहीं पर खामोश रहे क्योंकि एक औरत होने के नाते उसे अपनी बेटी की हरकत तो अच्छी लग रही थी लेकिन एक मां होने के नाते शर्म के मारे वह अपने बेटे से आंख नहीं मिला पा रही थी ..... और ने
दिन बीत चुका था अपनी गाड़ी को मुख्य सड़क से उतारकर गांव की सड़क पर चलाने लगी थी अब गांव आने वाला था आसमान साफ हो गया था यह देखो कैसे बनता को अच्छा ही लगा कि शादी का माहौल है ऐसे में बारिश का होना ठीक नहीं था.....
थोड़ी ही देर बाद जमीदार के घर पहुंच गए जमीदार ने सुगंधा का अच्छी तरह से स्वागत किया....
रोहन और सुगंधा जमीदार के घर पर पहुंच चुके थे जमीदार के घर पर तो जैसे मेला लगा था और वैसे भी शादी का माहौल था इसलिए घर की रौनक कुछ ज्यादा ही फैली हुई थी चारों तरफ रंगीन छोटी-छोटी लाइटें जगमग आ रही थी पेड़ पौधों तक को रोशनी से ढक दिया गया था जमीदार का घर कौसौ दूर से भी साफ साफ नजर आ रहा था। अंधेरे की वजह से दूर दूर से जमीदार की हवेली रोशनी में नहाई हुई नजर आ रही थी ।.... जमीदार की पत्नी रोहन और उसकी मां सुगंधा को आदर पूर्वक घर के अंदर ले आई और चाय नाश्ता का बंदोबस्त कर के उन लोगों का नहाने का भी बंदोबस्त कर दी...
कुछ ही देर में सुगंधा और रोहन नाश्ता करके नहाने के लिए तैयार हो गए वैसे भी बड़ा लंबा सफर तय करके दोनों यहां तक पहुंचे थे इसलिए नहाए बिना चैन नहीं मिलता....
मम्मी पहले आप नहा लो उसके बाद मैं नहा लूंगा.....
ठीक है बेटा पहले मैं नहा लेती हूं ...... (इतना कहने के साथ ही सुगंधा चाय के प्याले को टेबल पर रख कर कुर्सी से खड़ी हुई और कमरे से ही सटे हुए बाथरूम में घुस गई... रोहन कुर्सी पर बैठ कर गरम-गरम चाय की चुस्की मजा ले रहा था और अपनी मां को बाथरूम में जाते हुए देख रहा था खास करके रोहन की नजरें उसकी मां की मटकती हुई गांड पर टिकी हुई थी जो कि चलते समय दाएं बाएं किसी पानी से भरे गुब्बारे की तरह लचक रही थी..... गरम गरम चाय की गर्माहट से ज्यादा अपनी मां की खूबसूरत बदन के आकर्षण की गर्मी रोहन के तन बदन को ऊर्जा प्रदान कर रही थी....... और वैसे भी सुगंधा जानबूझकर अपनी बड़ी बड़ी चौड़ी गांड को कुछ ज्यादा ही मटका कर चल रही थी और बाथरूम का दरवाजा खोल कर अंदर जाते जाते एक बार पीछे मुड़कर रोहन की तरफ जरूर देख ली और वह भी यह जानने के लिए कि रोहन की नजरें कहां है अपनी बेटे की नजरों को अपने नितंबों के घेराव पर पाकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न होने लगी और अंदर जाकर दरवाजा बंद कर दी लेकिन कड़ी नहीं लगाई दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था.. वह जानबूझकर दरवाजे की कड़ी नहीं लगाई थी बाथरूम के अंदर जाते ही वह अपनी साड़ी उतारने लगी... वह चाहती तो कुछ वस्त्र बदन पर होने के बावजूद नहा सकती थी लेकिन सुगंधा के मन में भी कुछ और चल रहा था और वह अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो गई बाहर रोहन अभी भी कुर्सी पर बैठकर बाथरूम के दरवाजे की तरफ ही देख रहा था.... मानो बाथरूम का दरवाजा ना होकर उसकी मां नंगी होकर अपने जलवे दिखा रही हो रोहन मन ही मन में यह सोच रहा था कि उसकी मां बाथरूम के अंदर अपने कपड़े उतार रही होगी धीरे धीरे नंगी हो रही है जी लेकिन उसके विचार और सोच की कल्पना से पहले ही उसकी मां बाथरूम के अंदर नंगी हो चुकी थी..... रोहन का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि बाथरूम के अंदर से सुगंधा के चूड़ियों की खनक की आवाज रोहन को साफ-साफ सुनाई दे रही थी.... और मधुर खनक कानों में पड़ते ही रोहन का 8 इंच का मुसल खड़ा होने लगा क्योंकि अपनी मां की चूड़ियों की खनक की आवाज सुनकर उसे उम्मीद थी कि उसकी मां अपने हाथों से कुछ हरकत कर रही होगी अपने कपड़े उतार रही होगी या अपने बदन को साबुन लगा रही होगी.... रोहन बैठे-बैठे ही ना जाने किस दुनिया में बिचरने लगा था। अपनी मां को लेकर ढेर सारी रंगीन कल्पनाओं के घोड़े दौड़ा रहा था....
 
oiरोहन अपनी मां के मुंह से इस तरह की पेशाब करने वाली बात और पेशाब करते हुए उसे घूर कर देखने वाली बात सुनकर एकदम संनृन रह गया। उसे तो अपने कानों पर भरोसा ही नहीं हुआ कि उसकी मां यह क्या कह रही है....

क्या कहीं मम्मी मैं ठीक से सुना नहीं.... ( रोहन आश्चर्य से अपनी मां की तरफ देखते हूए बोला... रोहन की बात सुनकर सुगंधा मन ही मन मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि रोहन उसकी बात को अच्छी तरह से सुन चुका था लेकिन शायद उसे अपने कानों पर भरोसा नहीं था इसलिए वह फिर से पूछना चाह रहा था.... सिकंदरा को भी इस तरह की बातें करने में और वह भी अपने बेटे के सामने मजा आ रहा था इतने से ही बात से सुगंधा को इस बात का एहसास साफ तौर पर हो रहा था कि उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.... अपनी पुर के अंदर वह मीठी-मीठी गुदगुदाहट महसुस कर रही थी।
मौसम बड़ा ही सुहाना था ऐसे में अरमान और जज्बात दोनों कामुक अंगड़ाई ले रहे थे... सुगंधा का खूबसूरत बदन कामुकता के मादक एहसास से पूरे बदन में मीठी मीठी सुईया चुभा रहा था..... सुगंधा शीशे में से बाहर झांकते हुए मंद मंद मुस्कुरा रही थी उसे यह सफर अच्छा लग रहा था। अपनी मां की बात सुनकर रोहन का लंड पजामे के अंदर अकड़ सा गया था। वह अभी भी अपनी मां की तरफ देखे जा रहा था और उसकी मां उसकी बात पर गौर नहीं कर रही थी बस उस एहसास का मजा ले रही थी..... अपनी मां की तरफ से कोई जवाब ना सुनकर रोहन फिर से अपना सवाल दोहराया और इस बार उसकी मां रोहन की तरफ देखते हुए बोली।

मम्मी आप ने क्या कहा मैं कुछ सुना नहीं....

तुम ठीक से सुने नहीं पता नहीं तुम्हारा दिमाग कहां रहता है मैं यह कह रही थी कि कल रात जब मैं घर के पीछे थोड़ी दूर पर खड़ी होकर पेशाब कर रही थी तो तुम मुझे घूर क्यों रहे थे.......

मममममम..... मैं कब घूर रहा था मैं तो वहीं खड़ा था.... लेकिन अंधेरा होने की वजह कुछ दिखाई नहीं दे रहा था (रोहन घबराते हुए बोला)

देखा ना मैं सच कही ना तुम मुझे देख रहे थे।

नहीं मम्मी में सच कह रहा हूं मैं कुछ नहीं देख रहा था....

देखो मैं सब अच्छी तरह से जानती हो मैं जहां खड़ी थी वह हल्का हल्का उजाला था और जो तुम खड़े थे वहां से तो मुझे साफ-साफ देख सकते थे और देख भी रहे थे....
( जो हमको समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी मां के एक बात का जवाब कैसे दें क्योंकि जो वह कह रही थी वह बिल्कुल सच कह रही थी वह खामोश होकर अपनी मां की बात सुन रहा था.... सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली...)

सच कहूं तो इस बात पर मेरा ध्यान बिल्कुल भी नहीं गया था कि तुम मेरे पीछे खड़े हो मुझे इतने जोरो से पेशाब लवी थी कि में सीधे आगे की ओर गई और बिना कुछ सोचे समझे अपनी साड़ी अपनी कमर तक उठा दी मुझे तब तक इस बात का एहसास नहीं हुआ कि मेरा बेटा पीछे खड़ा है और मैं पेशाब करने के लिए अपनी पेंटी तक नीचे उतार दी और सच कहूं तो तब तक मुझे नहीं पता चला लेकिन जब मैं बैठ कर पेशाब करने लगी और थोड़ी देर में जब मुझे राहत महसूस हुई तब मुझे तेज झटका लगा इस बात का अहसास हुआ कि मेरे पीछे तुम खड़े हो.... मैं एकदम से घबरा गई मेरी हालत ऐसी हो गई कि काटो तो खून नहीं पर मैं एक बार तसल्ली कर लेना चाहती थी कि सही में तुम देख रहे हो कि नहीं हो सकता है कि तुम ईधर ना भी देखते हो। लेकिन मैं शर्म से पानी पानी हो गई जब मैं पीछे मुड़कर तुम्हारी तरफ देखी हो तुम मेरी तरफ ही देख रहे थे। खास करके तुम मेरी बड़ी-बड़ी गांड ही देख रहे थे....

अपनी मां की तरह की बातें सुनकर रोहन शर्म से पानी-पानी हुआ जा रहा था लेकिन अपनी मां के मुंह से इस तरह की अश्लील बातें सुनकर उसका तन बदन उत्तेजना से गदगद भी हुए जा रहा था..... वह नीचे सिर झुकाए अपनी मां की बात चल रहा था उसे डर तो लग रहा था लेकिन मज़ा भी आ रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी मां की इस तरह की बात का वह कैसे उत्तर दें कैसे अपनी मां की आंखों में आंखें डाल कर उसको जवाब दे वह लगातार नीचे देखते जा रहा था और उसकी मां उसकी तरफ देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी और अपनी बात आगे बढ़ा रही थी रोहन में लग रही थी वही आग सुगंधा के भी तन बदन में ठंडे मौसम में गर्मी का एहसास दिला रहा था ...... सुगंधा अपनी बात कह कर फिर से अपना ध्यान गाड़ी चलाने में केंद्रित कर दी लेकिन वह अपने बेटे की तरफ से उसके जवाब का इंतजार कर रही थी लेकिन रोहन बिल्कुल खामोश हुआ बुत बना बैठा था.....

कुछ देर तक गाड़ी में खामोशी छाई रही..... सुगंधा इस खामोशी को तोड़ते हुए बोली......

मैं तुम्हें डांट नहीं रही हूं या तुमसे नाराज नहीं हूं मैं तो सिर्फ यह जानना चाहती थी कि तुम मेरी तरफ देख रहे थे या नहीं मैं तुमसे कुछ कहूंगी नहीं .... यह तो बहुत सामान्य सी बात है अगर तुम्हारी जगह कोई भी होता तो उसकी भी नजर मेरे पर ही पड़ जाती....

( सुगंधा जिस तरह से बात कर रही थी रोहन को लगने लगा था कि उसकी मां बिल्कुल भी असामान्य नहीं है वह एकदम सामान्य नजर आ रही थी अपनी मां के इस रवैयै से रोहन को राहत महसूस हो रही थी उसी तरह से उसकी मां बात कर रही थी रोहन को भी लगने लगा था कि उसे भी उस बारे में बात करना चाहिए...... वह अदर से बिल्कुल तैयार था लेकिन अपनी मां के सामने पेशाब वाली बात करने में उसे अभी भी शर्म महसूस हो रही थी जबकि सुगंधा एकदम सामान्य तौर पर अपने बेटे से पेशाब करने वाली बात खुलकर कर रही थी।.... रोहन भले ही अपनी मां से खुलकर बातें करने में शर्म आ रहा था लेकिन उसका लंड पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा हो चुका था.. .... दोनों के बीच फिर से खामोशी छा चुकी थी... सुगंधा का मन बहक रहा था। अपने बेटे के सामने पूरी तरह से खुलने के लिए अपने आपको तैयार कर चुकी थी लेकिन यहां तो उसका बेटा ही खुद अपने कदम पीछे ले रहा था और यही बात रोहन को भी समझ में नहीं आ रही थी कि आखिरकार ऐसा क्यों हो रहा है... मैं तो खुद अपनी मां से पूछना चाहता था अपनी मां के प्रति वह पूरी तरह से आकर्षित था कल रात को अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर उसके मन में यह ख्याल रात को ही आया था कि वह अपनी मां की चुदाई कर दे लेकिन इस समय रोहन घबरा रहा था शर्मा रहा था....
इसका एकमात्र कारण था दोनों के बीच का पवित्र रिश्ता मां बेटे का रिश्ता दोनों के बीच स्थिति की वजह से मर्यादा और संस्कार की दीवार बनी हुई थी जिसे गिरा पाना रोहन के लिए मुश्किल तो था ही सुगंधा के लिए भी आसान नहीं था...

लेकिन सुगंधा इस मर्यादा और संस्कार के साथ-साथ अपने और अपने बेटे के बीच के पवित्र रिश्ते की दीवार को तोड़ना चाहती थी उसे गिराना चाहती थी बरसों से संभाल कर रखें अपनी इज्जत को अपने ही बेटे के हाथों लुटवाना चाहती थी। क्योंकि अब उससे अपनी जबानी की गर्मी दबाए नहीं दब रही थी। बरसों से प्यासी और सुखी बंजर भूमि को वह पूरी तरह से अपनी बेटै के प्यार के रस से भीगो देना चाहती थी।....

गाड़ी के अंदर छाई खामोशी के बीच वह बार-बार गाड़ी चलाते हुए रोहन की तरफ देख ले रही थी और उसकी मनोसिथती को भाप ले रही थी। अच्छी तरह से समझ गई थी कि उसकी बातें सुनकर उसका बेटा एकदम गरमा गया था क्योंकि वह अपने पजामे में लंड से बने तंबू को छुपाने के लिए उस पर अपने दोनों हाथ लगाकर ढक रखा था। अपने बेटे की हरकत पर सुगंधा का भी बदन गरमा गया था क्योंकि वह जानती थी कि उसका बेटा जिस अंग को छुपा कर रखा है उसी अंग की प्यास उसके तन बदन में उठ रही थी..... सुगंधा अपने बेटे से बात करना चाहती थी लेकिन उसकी खामोशी उसे कांटे की तरह सूख रही थी वो समझ गई थी कि अगर अपने बेटे से अपने मन की प्यास अपने तन की प्यास बुझानी है तो उसे खोलना ही पड़ेगा इसलिए वह खुद ही खामोशी को तोड़ते हुए बोली....

क्या हुआ बेटा तुम बोल क्यों नहीं रहे हो मैं तुमसे बात करना चाहती हूं लेकिन तुम एकदम खामोश हो मैं जो बात कर रही हूं उसने घबराने वाली कोई बात नहीं है अरे नहीं देखे तो भी कह सकते हो कि अनजाने में ही देख लिया हेना...

( रोहन भी अब अपने हाथ आए मौके को गंवाना नहीं चाहता था उसे लगने लगा था कि शायद यह बारिश ही उन दोनों के बीच के मिलन का कारण बन जाए क्योंकि अब यह दूरी उससे भी बरदाश्त नहीं हो रही थी वह भी अपनी मां के बदन से चिपक जाना चाहता था अपनी मां के बदन की गर्मी को अपने अंदर महसूस करना चाहता था..... इसलिए वह थोड़ा शर्माते हुए धीरे से बोला...)

मैं.... .. मैं अनजाने में ही देख लिया था...
( इतना कहकर खामोश हो गया और नजरे झुका कर नीचे की तरफ देखने लगा सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखकर और उसके जवाब को सुनकर मन ही मन खुश हो रही थी....)

चलो आखिरकार तुमने करार तो किया कि तुम अनजाने में ही सही देख तो रहे थे अच्छा यह बताओ क्या क्या देखा तुमने अब बिल्कुल भी मत शर्माना यह सफर को यूं ही चलने दो और एक यादगार सफर बन जाने दो....
( रोहन अपनी मां की बात सुनकर उसकी तरफ आश्चर्य से देख रहा था क्योंकि आज उसकी मां एकदम बदली बदली नजर आ रही थी उसका व्यवहार पूरी तरह से बदल चुका था जिस तरह से वो बात कर रही थी एक मां नहीं बल्कि एक औरत ही कर सकती थी. लेकिन रोहन को अपनी मां की बात सुनकर मजा आ रहा था. .. उसे यह भीगती सड़क भीगता मौसम अच्छा लगने लगा था.... रोहन भी अब अपनी मां के सवालों का जवाब देने के लिए आतुर हुआ जा रहा था।)
 
यहां पर कहानी का कुछ अंश मिस हो गया है घर के पीछे रात में सुगंधा अपने बेटे की आंखों के सामने अपनी साड़ी उठाकर अपनी गांड दिखाते हुए बैठकर पेशाब कर रही थी .... रोहन अपनी मां को अपनी आंखों के सामने अपनी साड़ी उठाकर बड़ी बड़ी गांड दिखा कर बिना शर्मा ने बैठकर अपने ही बेटे के सामने पेशाब करते हुए अपने बेटे पर किस तरह का कहर ढा रही थी इस नजारे को देखकर रोहन पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगाने लगा था यह नजारा रोहन के लिए बेहद आनंददायक और काम उत्तेजना से भरा हुआ था सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे को अपना यह कामुक रूप दिखा रही थी.....

कहानी का यह अंश मिस हो गया है जिसके लिए खेद है
 
बड़ा ही खूबसूरत और सुहावना मौसम हो चुका था बारिश अपने जोरों पर पड़ रही थी और सुगंधा गाड़ी को बारिश और माहौल के हिसाब से धीमी रफ्तार से चला रही थी सुगंधा के तन बदन में वासना का जोर अपना असर दिखा रहा था तभी तो वह अपने बेटे से अश्लील और गंदी सवालों का जवाब मांग रही थी रोहन पहले हिचक रहा था लेकिन जिस तरह से सुगंधा पूरी तरह से खुलकर अपने बेटे से बिना शर्माए पेशाब वाली बात पूछ रही थी और उसके यह कहने पर कि वह उसे डांटेगी नहीं और ना ही उस पर नाराज होगी तब जाकर रोहन इतना कबूल किया कि वह उसे पेशाब करते हुए देख लिया था सुगंधा उससे आगे की बात जानना चाहती थी वह अपने बेटे से यह जानना चाहती थी कि अनजाने में ही सही उसने देखा तो था लेकिन उसकी नजर उसके बदन के कौन-कौन से हिस्से पर पड़ी थी यह जानना चाहती थी। और यह सवाल पूछ कर सुगंधा अपने बेटे के जवाब का इंतजार करते हुए कार के शीशे से बाहर देख कर स्टेरिंग संभालते हुए गाड़ी चला रही थी रोहन को समझ में नहीं आ रहा था कि अपनी मां के इस सवाल का वह क्या जवाब दे वह बिल्कुल खामोश हो चुका था। कहने को तो वह कह सकता था कि वह अपनी मां के बदन के किस किस अंग को देख रहा था किस किस पर नजर पड़ी थी लेकिन अपनी मां की तरफ से पूरी तरह से आश्वस्त होने के बावजूद भी ''उसे शर्म महसूस हो रही थी। कुछ देर तक यूं ही गाड़ी के अंदर खामोशी छाई रही सुगंधा गाड़ी को धीमी रफ्तार से आगे बढ़ा रही थी। सुगंधा ही दोनों की बीच की खामोशी को तोड़ते हुए बोली।

क्या हुआ खामोश क्यों हो गया बता क्यों नहीं रहा है जो मैं पूछ रही हूं।

मम्मी अप में कैसे बता दूं कि मैंने क्या देखा सब कुछ अनजाने में हुआ में कोई जानबूझकर नहीं देख रहा था।

अरे मैं सब समझ रही हूं कि तू अनजाने में देखा था लेकिन यह तो बता दे कि क्या क्या देखा था मैं तुझे ना मारूंगी ना कुछ कहूंगी बस मैं यह जानना चाहती हूं कि तू ने क्या क्या देखा और यह सब तो बिल्कुल सामान्य है।

मम्मी मुझे शर्म आ रही है मैं कैसे कहूं।

अब देख तू मुझे गुस्सा दिला रहा है मैं तुझसे पहले भी कह चुकी हूं और बार-बार यही कह रही हूं कि मेरी तरफ से तो बिल्कुल निश्चिंत रहने तुझे कुछ नहीं कहने वाली मैं देखना चाहती हूं कि तू सामान्य तो है ना दूसरे लड़कों की तरह क्योंकि मैं जानती हूं कि तू बहुत सीधा लड़का है। मुझे यह जानना है कि और तो और लड़कियों को देखकर तेरे बदन में भी कुछ कुछ होता है कि नहीं।( सुगंधा गाड़ी का स्टैरींग संभालते हुए रोहन की तरफ मुस्कुरा कर देखी ओर मुस्कुराकर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली) देख तू बिलकुल भी मत शर्मा जो कुछ भी देखा था वह सब मुझे विस्तार से बता दे । क्योंकि मुझे बिल्कुल भी नहीं पता था कि मुझे उस हालत में तू देख लिया होगा क्योंकि उस समय मुझे इतने जोरो की पिशाब लगी थी कि कुछ सूझा ही नहीं। मुझे चेहरा भी इस बात का एहसास होता कि उस अवस्था में तू मुझे देख लेगा तो मैं कभी भी ऐसी गलती नहीं करती पर क्या करूं मुझसे गलती हो गई। ( सुगंधा इतना कहकर अपने बेटे की तरफ देखने लगी। रोहन आश्चर्य से अपनी मां की तरफ देख रहा था जिस तरह से वह खुलकर बातें कर रही थी उसे विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन अपनी मां की इस तरह की बातें सुनकर उसका लंड उसके पेंट में गदर मचा ए हुए था अपनी मां की इस तरह की गंदी बातें सुनकर और पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था वह खामोशी कर बस अपनी मां की तरफ देखे जा रहा था जो कि इस समय तेज हवा के झोंकों से उसके बालों की लट उसके गालों पर स्पर्श हो रही थी जिसे देख कर रोहन का लंड ठुनकी मार रहा था।
अपने सवालों का जवाब चाहती थी इस तरह की बातें करके उसकी पैंटी भी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी बदन में उन्माद की लहर दौड़ रही थी सुगंधा पूरी तरह से वासना मई हो चुकी थी उसकी बुर में खुजली हो रही थी और वह जानती थी कि ये खुजली कैसे मिटने वाली है उसे एक मोटा ताजा लैंड चाहिए था जो कि उसकी बुर की गहराई में उतर कर उसकी खुजली को मिटा सके और ऐसा ताजा लंड सिर्फ उसके बेटे के पास था जो कि इस समय उसके पैंट में पूरी तरह से अकड़ कर खड़ा था और बाहर आने के लिए तड़प रहा था। सुगंधा के कान तरस रहे थे अपने बेटे के मुंह से उस बारे में सुनने के लिए जिस बारे में बहुत से पूछ रही थी लेकिन रोहन पूरी तरह से खामोश था और उसकी खामोशी सुगंधा को इस समय कांटे की तरह चुभ रही थी इसलिए फिर से वो इस बार थोड़ा गुस्से में बोली।

तू ऐसे खामोश ही रहेगा या कुछ बोलेगा भी।
( रोहन को अपने आप पर गुस्सा आ रहा था क्योंकि जिस मौके का तलाश उसे महीनों से था वह मौका आज उसके हाथों में था लेकिन ना जाने क्यों उसे शर्म महसूस हो रही थी जबकि उसकी मां पूरी तरह से उससे खुलकर बातें कर रही थी और यह बात रोहन भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां ऐसी बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन जिस तरह से आज वह पूरी तरह से अपने बेटे के बीच के सारे पर्दे हटाकर वह खुलकर बातें कर रही थी और वह यह भी चाहती थी कि उसका बेटा भी उससे खुलकर बातें करें लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था आखिरकार रोहन उसका बेटा था अपनी मां के सामने इस तरह की गंदी बातें करने में शर्म महसूस हो रही थी। लेकिन वह बार-बार अपने मन को समझा रहा था कि जिस तरह से उसकी मां उससे खुलकर बातें कर रही है वह भी उससे खुलकर बातें करें लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी उसे एक अनजान है मन में बैठा हुआ था जिससे इस तरह की बातें करने से कतरा रहा था और इस बार अपने बेटे को खामोश देखकर फिर से सुगंधा गुस्से में बोली।

तुझे नहीं बताना है तो साफ-साफ इंकार कर दे मैं तुझ से दुबारा नहीं पूछूंगी बेवजह में ही परेशान हो रही हूं।

नहीं मम्मी ऐसी बात बिल्कुल भी नहीं है (अपनी मम्मी को इस तरह से नाराज होता देख रोहन झट से बोला उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां गुस्से में सारा टॉपिक ही ना बदल दे )

तो क्या बात है तू मेरे सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहा है।

मुझे डर है।

डर है ...... तुझे किस बात का डर है?

इसी बात का डर है कि मैं तुमसे सब कुछ बता तो दूं
मैं कल रात को क्या क्या देखा था लेकिन कहीं मेरी बातें सुनकर तुम नाराज हो गई तो।

( एक बार वह अपने बेटे की बात सुनकर मुस्कुरा दी और मुस्कुराते हुए बोली।)

देख रोहन मै तुझसे पहले भी बोल चुकी हूं कि मुझ से घबराने की जरूरत नहीं है तू आज कुछ भी बोलेगा मुझे बुरा नहीं लगेगा बस तू बोल डाल जो कुछ भी तूने देखा है इतना कहकर वह फिर से शीशे के पार अपना ध्यान देकर गाड़ी चलाने लगी रोहन भी अब पूरी तरह से आश्वस्त हो चुका था वह भी पूरी तरह से उत्सुक था अपनी मां से इस तरह की गंदी बातें करने के लिए इसलिए वह जानबूझकर थोड़ा शर्माते हुए बोला)

वैसे तो मम्मी ने जानबूझकर यह सब नहीं देखा था अनजाने में ही मेरी नजर तुम पर पड़ गई थी लेकिन क्या करूं अब नजरों को तो नहीं रोक सकता ना।

हां बेटा मैं जानती हूं यह सब कोई जानबूझकर थोड़ी करेगा कोई जानबूझ कर के अपनी मां को पेशाब करते हुए थोड़ी ना देखेंगा। बस बेहिचक तूने जो देखा था सब बता दे।

( अपनी मां की तरफ से हरी झंडी का इशारा पाते ही रोहन पूरी तरह से खुश हो गया था उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी खास करके उसकी टांगों के बीच कुछ ज्यादा ही हलचल मची हुई थी लंड पेंट के अंदर गदर मचाई हुए था उसका बस चलता तो पेंट फाड़ कर बाहर आ जाता वह तो बार-बार रोहन हाथ लगाकर अपने लंड को संयम में रख रहा था..... बरसात को देखते हुए और कार के अंदर के माहौल को देखते हुए बहने वाली हवा जो कि इनके तन बदन को छूकर निकल जा रही थी उन हवाओं में भी चुदास की लहर मिल चुकी थी।
Rohan aur Sugandha Dono Maa Bete is Samay
 
सुगंधा और रोहन दोनों की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी... रोहन अपनी मां के बारे में गंदी बातें अपनी मां से कहने के लिए बेकरार था और सुगंधा अपने दीदी के मुंह से अपने ही बारे में उन गंदी बातों को सुनने के लिए तड़प रही थी। सही मायने में रोहन औरतों के मन में उमड़ने वाली भावनाओं से बिल्कुल अनजान था लेकिन अपने दोस्तों के मुंह से सुनी बातें उसके दिमाग में घूम रही थी अपनी मां की बातों को सुनकर उसे इतना तो यकीन हो गया था कि उसकी मां उसके मुंह से गंदी बातें सुनना चाहती है और इसलिए अब वैसे भी कोई एतराज नहीं था बल्कि उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी इसलिए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला.....

रात को तुम और मैं मुंह धोने के लिए घर के पीछे की तरफ गए और तुम मूह धो भी चुकी थी। तभी तुम नल की ओर आगे की तरफ जाने लगी मुझे समझ में नहीं आया कि तुम कहां जा रही हो क्योंकि चारों तरफ अंधेरा था मैं कभी घर की तरफ देखता तो कभी तुम्हारी तरफ देखता एक तो बारात घर के करीब पहुंच चुकी थी और वहां जाने की भी जल्दी थी। मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं..... तुम थोड़ा आगे की तरफ निकल चुकी थी जहां पर हल्की हल्की रोशनी थी और चारों तरफ धूप अंधेरा था. ... ( सुगंधा बड़े ध्यान से अपने बेटे की बात सुन रही थी. )
तुम एक एक कदम बढ़ा कर आगे बढ़ रही थी और दूसरी तरफ धीरे-धीरे ढोल नगारा बाजे की आवाज घर के बिल्कुल करीब पहुंची जा रही थी मैं तुम्हें आवाज लगाने के लिए तुम्हारी तरफ देखा तो मेरे गले से आवाज निकल नहीं पाई....

क्यों ऐसा क्या देख लिया जो तेरे गले में आवाज अटक गई. (सुगंधा गाड़ी चलाते हुए बोली)

अब मम्मी मैं क्या कहूं कुछ समझ में नहीं आ रहा है। ( रोहन जान बुज कर शर्माने का नाटक करते हुए बोला... वह देखना चाहता था कि उसकी मां इसके आगे की बात सुनने के लिए उत्सुक है कि नहीं वैसे तो उसे पता ही था कि उसकी मां उसकी कई हर बात को सुनने के लिए तड़प रही थी लेकिन वह उसकी तड़प को देखना चाहता था इसलिए इतना कह कर चुप हो गया और तभी उसकी मां बोली... )

क्या समझ में नहीं आ रहा है कोई गणित का सवाल है क्या जो तुझे हर करना है सिर्फ बताना ही तो है इसमें समझने की क्या बात है जल्दी बता ऐसा क्या देख लिया था कि तेरे गले में अटक गए थे. .
( अपनी मां की कही बातों में उसके अंदर की उत्सुकता की तड़प रोहन को साफ-साफ समझ में आ रहा था उसे लगने लगा था कि उसके दोस्तों की कही बात आज सच होने वाली है अगर किस्मत उस पर मेहरबान रही तो आज वह अपने दोस्तों की तरह गंदी गंदी बातें करके वह अपनी मां को चोदने का रास्ता साफ कर लेगा इसलिए अपनी बातों में नमक मिर्च लगाते हुए बोला. . )

मम्मी मैं क्या मेरी जगह कोई और भी होता तो उसकी भी हालत मेरी तरह ही होती उसके शब्द भी उसके गले में अटक जाते..

क्यों ऐसा क्या तूने देख लिया था जो ऐसी तेरी हालत हो गई।( सुगंधा हंसते हुए बोली... अपनी मां को इस तरह से खिलखिला कर हंसता हुआ देखकर रोहन की उत्तेजना बढ़ने लगी और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला.... )

क्या करूं मम्मी सामने कुछ नजारा ही ऐसा था मुझे तो कुछ समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूं देखु या हट जाऊं या वहां से चला जाऊं - -
( अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा मंद मंद मुस्कुरा रही थी क्योंकि उसे इतना तो अंदाजा लग गया था कि उसका बेटा कौन से नजारे के बारे में बात कर रहा है और वह मन में सोच रही थी कि सच में अगर औरत के रूप का नजारा दुनिया का कोई भी मर्द देख ले तो वह भौचक्का हो जाए उसकी आंखें फटी की फटी रह जाए क्योंकि उस नजारे में कामुकता और मादकता का असर इतना ज्यादा होता है कि कोई भी मर्द भले ही क्यों वह उसका बेटा ही क्यों ना हो उस नजारे पर अपनी नजर को हटाना नहीं चाहता होगा और चाहे भी तो वह हटा नहीं पाएगा. . उसी नजारे के बारे में सुगंधा अपने बेटे के मुंह से विस्तार से सुनना चाहती थी इसलिए बीच में उसकी बात काटते हुए बोली.. )

अरे अब उस. नजाने के बारे में बताएगा भी या सिर्फ पहेलियां ही बुझाता रहेगा।( इतना कहकर सुगंधा कार की हेडलाइट भी चालू कर दी क्योंकि बारिश का जोर और ज्यादा बढ़ चुका था और आगे की तरफ साफ साफ नजर नहीं आ रहा था लेकिन इस बात की चिंता उसे बिल्कुल भी नहीं थी कि ऐसे माहौल में ऐसे मौसम में गाड़ी चलाना खतरनाक भी साबित हो सकता था उसे तो बस अपने बेटे के मुंह से अपने बारे में कामुकता और मादकता बड़ी बातें सुनना था इसलिए वह गाड़ी को चलाए जा रही थी...... )

अरे बता रहा हूं मम्मी मैं तो उस नजारे के बारे में अभी सोच रहा हूं तो भी ना जाने क्या हो रहा है... ( रोहन भले ही बात को बढ़ा चढ़ाकर बोल रहा था लेकिन उसे इस बात का अहसास अच्छी तरह से था कि उसने अपनी आंखों से क्या देखा था और वास्तविकता यही थी कि जब जब वह उस नजारे के बारे में सोचता था तो उसके तन बदन में कामोत्तेजना की लहर और जोर मारने लगती थी लंड की नसें इतनी ज्यादा रक्त के बहाव से कड़क हो जाती थी कि मानो अभी फट जाएगी बड़ी मुश्किल से वह अपने आप को संभाले हुए थे वह तो अच्छा था कि वह कार के अंदर था अगर घर पर होता तो वह ना जाने कितनी बार अपने हाथ से अपना लंड हिलाकर पानी निकाल दिया होता। वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला . )

मम्मी में जैसे ही तुम्हें बुलाने के लिए तुम्हारी तरफ देखा और तुम्हारै पर जेसे ही मेरी नजर पड़ी मेरी तो सांस ही अटक गई. मुझे तो कुछ समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूं..

ऐसा क्यों?

क्योंकि जब मेरी नजर तुम्हारे ऊपर पड़ी तब तुम अपनी साड़ी को अपने हाथों से अपनी टांगों के ऊपर पिंडलियों तक उठा चुकी थी...
( अपने बेटे के मुंह से अपने बारे में इतना सुनते ही सुगंधा एकदम मस्त होने लगी.. यही सब तो सुगंधा अपने बेटे के मुंह से सुनना चाहती थी एक औरत के लिए सबसे सम्मानीय पल वही होता है जब एक मर्द उसकी जवानी की उसकी खूबसूरती की तारीफ करता है और उसके बेटे का इस बात का अपने मुंह से कहना या उन बातों में अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ करना प्रकट कर रहा था सुगंधा मंद मंद मुस्कुरा रही थी और प्रसन्न में हो रही थी वह इससे आगे की बात को सुनना चाहती थी इसलिए रोहन से बोली.. )

लो इसमें ऐसा क्या हो गया जिससे तेरी हालत खराब हो गई...?

मम्मी तुम नहीं जानती थी उस समय मेरी क्या हालत हो रही थी मेरी हालत सच में खराब हो गई थी......

क्यों तुझे उस समय ऐसा क्या महसूस होने लगा कि तेरी हालत खराब हो गई....?

क्या बताओ मम्मी एक तो ना चाह रहा है कुछ ऐसा था कि मेरी नजर हटाए नही हट रही थी एक तो मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि तुम कर क्या रही हो और जिस तरह की अवस्था में तुम थी मतलब कि अपनी साड़ी को घुटनों तक उठा चुकी थी मुझे डर लग रहा था कि कहीं कोई और न देख लेंगे बार-बार मेरी नजर घर की तरफ चली जा रही थी लेकिन वहां से ज्यादा नजर तो तुम्हारे पर पड़ रही थी लेकिन एक पल को मैं अपने आप को मनाया कि इस तरह का नजारा देखना ठीक नहीं है और जेसे ही मैं अपनी नजरों को हटाना चाहता था कि तभी.... तुमने अपनी साड़ी को हल्के से और उठा दी जिससे मुझे तुम्हारी मोटी मोटी चिकनी जाघ का हलका हिस्सा नजर आने लगा.... मैं अब आपसे कुछ भी नहीं छुपाऊंगा सच कहूं तो वह नजारा देखकर मेरी नजरें तुम्हारे बदन पर गड़ गई मैं उस समय अपनी नजर को हटाना भी चाहता था तो हटा नहीं पा रहा था....
( अपने बेटे की इस तरह की खुली बातें सुनकर सुगंधा के तन बदन में रोमांच का अनुभव होने लगा... सारे बदन में उन्माद की लहर दौड़ने लगी जिसका ज्यादा असर सुगंधा को अपनी टांगों के बीच महसूस होने लगा था,,,,, उसे साफ़ साफ़ महसूस हो रहा था कि उसकी बुर से नमकीन पानी की बूंदें टपक रही थी... सुगंधा के तन बदन में उन्माद का रस घुल रहा था... वह हल्की-हल्की आहें भरते हुए बोली... )

मेरी हल्की सी जांघ देख कर तेरी हालत खराब होने लगी....

हां मम्मी मैं सच कह रहा हूं मैं बनी बनाई बातें नहीं कह रहा हूं जो मैं अपनी आंखों से देखा वही तुम्हें बता रहा हूं और जो महसूस किया वही बयां कर रहा हूं.... . ( इतना कहते हुए वह कुछ सोच में पड़ गया. वह मन ही मन में उस नजारे के बारे में सोचने लगा.. जो कि इस समय भी वह नजारा उसकी आंखों के सामने तैर जा रहा था।... रोहन कुछ देर के लिए खामोश हो गया था उसे इस तरह से खाभोस देख सुगंधा बोली ।)

इसके बाद क्या देखा. ?

. इसके बाद.... इसके बाद... ... कैसे बताऊं मम्मी मुझे तो शर्म आ रही है.. ( और रोहन जानबूझकर नाटक कर रहा था बल्कि वह भी अंदर से अपनी मां को अपने ही शब्दों में बताने के लिए व्याकुल हुए जा रहा था लेकिन वह अपनी मां की हालत देखना चाहता था जो कि इस समय काफी मादकता का एहसास लिए हुए थी)

अब बताता है कि लगाऊ थप्पड़।

नहीं नहीं बताता हूं थप्पड़ मत मारना... ( रोहन मन ही मन में खुश होता हुआ बोला क्योंकि अब उसे पक्का यकीन हो गया था कि अब वह जो भी बोलेगा उसकी मां उसे नाराज नहीं होगी बल्कि और भी ज्यादा पसंद होगी और उसे भी अपना रास्ता साफ होता नजर आ रहा था उसे लगने लगा था कि आप उसके दोनों हाथों में उसकी मां की दोनों बड़ी-बड़ी चूचियां होंगी इसलिए वो फिर से अपनी बात को नमक मिर्ची लगाते हुए बोला.. )

मम्मी उस समय मेरी हालत एकदम खराब हो गई थी मेरी नजर कभी घर की तरफ जाती तो कभी तुम्हारी तरफ तुम्हारे पर से नजर हटाने का दिल नहीं कर रहा था और कोई यह नजारा देख ना ले इसलिए मेरी बार-बार नजर घर की तरफ चली जा रही थी.... एक तो मुझे यह समझ में नहीं आ रहा था कि तुम इस तरह से साड़ी उठाकर करने क्या जा रही हो...
.
अच्छा तुझे यह भी नहीं पता कि औरतें साड़ी उठाकर क्या करती हैं मुझे बुद्धू समझा है ना....

मैं एकदम सच कह रहा हूं मम्मी मुझे तब तक बिल्कुल भी नहीं पता था कि तुम साड़ी उठाकर करने क्या जा रही हो इसलिए तो मैं भी उत्सुकता बस तुम ही को देख रहा था....

तो क्या सच में तुमसे पहले किसी औरत को साड़ी उठाते भी नहीं देखा.....

तुम्हारी कसम मम्मी मैं एकदम सच कह रहा हूं मैंने पहले कभी औरत को साड़ी उठाते हुए देखा नहीं था कल तुमको देखा तो मैं दंग रह गया और मुझे सच कह रहा हूं बिल्कुल भी पता नहीं था कि तुम क्या करने जा रही हो वरना मैं वहां से नजरें फेर लेता....

अच्छा तू नजरे फेर लेता ..... अगर तुझे फेरना होता तो मैं जब हल्के से साड़ी ऊपर की तरफ उठाई थी तभी फेर लेता और तू समझ जाता कि मैं क्या करने जा रही हूं.... लेकिन तू देखना चाहता था।

मैं क्या देखना चाहता था मम्मी मैं सच कह रहा हूं मुझे नहीं मालूम था कि तुम क्या करने जा रही हो अगर मुझे सच में पता होता कि तुम मुतने जा रही हो.... तो मै कसम खाकर कहता हूं कि उस समय तुम्हारी तरफ नहीं देखता। ( रोहन जानबूझकर इस समय मुंतना शब्द का प्रयोग किया था। वह अपनी बातों से अपनी मां को पूरी तरह से मदमस्त कर देना चाहता था और ऐसा हो भी रहा था क्योंकि सुगंधा के कानों में जैसे ही अपनी बेटी के मुंह से मुटनी वाली बात सुनाई दी वैसे ही तुरंत वह अपने बेटे की तरफ देखी और हल्के से मुस्कुरा दी रोहन अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला. )

मेरी बातें सुनकर तुमको गुस्सा आ रहा है मम्मी अब मैं नहीं बताऊंगा कि आगे मैंने क्या देखा वरना आप नाराज हो जाओगी।

नहीं नहीं मैं नाराज नहीं होंगी मैं तो बस ऐसे ही कह रही थी. (सुगंधा तुरंत रोहन से बोली थी कि वो जानती थी कि अगर रोहन को लगेगा कि वह नाराज हो रही है तो वह ऐसी बातें नहीं करेगा और सारा मजा किरकिरा हो जाएगा इसलिए वह रोहन को समझाने की कोशिश करने लगी.. रोहन अपनी मां की हालत से पूरी तरह से वाकिफ हो चुका था जिस तरह से वह तुरंत उसे बोलने के लिए बोली थी रोहन को उसकी अदा बहुत अच्छी लगी थी जी मैं तो आ रहा था कि वह अपनी मां को साफ साफ बोल दे की... तुम्हारी बड़ी बड़ी गांड देखकर मैं मस्त हो गया था और सच कहूं तो मैं तुम्हें चोदना चाहता था मैं तुम्हारी बुर के अंदर अपना मोटा लंड डालकर मस्त हो जाना चाहता था...
लेकिन ऐसा कहने की हिम्मत उसने अभी नहीं थी काश वह इतनी हिम्मत दिखा पाता तो शायद उसे उसकी मां चोदने को मिल जाती लेकिन शायद यह कल्पना ही कर सकता था और वैसे भी जिस तरह से वह अपनी मां से बातें कर रहा था और उसकी मां उसे से बातें कर रही थी... उसे देखते हुए अगर कोई और होता तो शायद कब का अपनी मंशा सुगंधा के सामने जाहिर कर चुका होता लेकिन रोहन उसका ही बेटा था और एक बेटा अपनी मां को कैसे कह सकता है कि वह उसे चोदना चाहता है अभी भी रोहन मर्यादा की दीवार की ओट में था उसे बाहर निकलने में अभी वक्त था..... तभी सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली...

मैं तुझे कुछ भी नहीं कहूंगी बस तू बोलता जा...

नहीं मम्मी मुझे तो डर लग रहा है कि कहीं मेरे मुंह से ऐसा वैसा निकल गया तो आप नाराज हो जाओगी और बेवजह मुझे भी शर्मिंदा होना पड़ेगा इसलिए तुम मुझे यह सब मत पूछो कहीं मेरे मन की बात सामने आ गई तो यही सोच कर डर लगता है । (रोहन जानबूझकर यह सब तो बोला था ताकि अपने मन की बात अपनी मां को बता सके और सुगंधा भी अपने बेटे की बात सुनकर उसका ठाडा ढाढस बंधाते हुए बोली।)

तुम मुझ पर यकीन कर मैं तुझे कुछ भी नहीं कहूंगी और अब जल्दी-जल्दी बोल डाल कि तू क्या क्या देखा और उसे देख कर मन में क्या चल रहा था...

ठीक है तुम इतना कह रही हो तुम्हें बताता हूं और सब सच सच बताता हूं मैं तुम्हारी तरफ एकटक देखे जा रहा था तुम अपनी साड़ी को अपनी जांघों तक उठा चुकी थी... और मेरे देखते ही देखते तुम अपनी साड़ी को अपनी कमर तक उठा दी... इसके बाद तो मेरी आंखों में जो नजारा देखा है... उसे बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है..

शब्द भले ही नहीं है लेकिन बताना तो पड़ेगा ही (सुगंधा बीच में बात काटते हुए बोली.. )

हां जानता हूं.... मैं तो देख कर दंग ही रह गया..

क्यों..?

क्यों क्या.... मैं पहली बार ऐसा नजारा ही देख रहा था..

ऐसा क्या देखा था .....? सुगंधा उत्सुकता वस बोली....

अरे मेरी तो नजर ही नहीं हट रही थी जिंदगी में पहली बार मैंने किसी औरत की इतनी गोल गोल और बड़ी गांड देखा था और वह भी बिना कपड़ों के बस केवल तुम्हारी नंगी गांड पर गुलाबी रंग की कच्छी...

गुलाबी नहीं लाल रंग की कच्छी..... ( सुगंधा अपने बेटे की तरफ मुस्कुरा कल देखते हुए बोली... सुगंधा का इस तरह से बीच में और वह भी खुलकर बोलना और रोहन की हिम्मत बढ़ाने लगा और रोहन को अच्छा भी लगा और जिस तरह से सुगंधा मुस्कुरा कर यह शब्द बोली थी रोहन पूरी तरह से मादकता का अनुभव करने लगा और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला... )

हां लाल रंग की कच्छी वह क्या है कि रात की वजह से ठीक से कलर समझ में नहीं आया.... लेकिन एक बात कहना चाहूंगा...

क्या. ..?

तुम्हारी गोरी गोरी गांड पर लाल रंग की कच्ची बहुत अच्छी लग रही थी....

धतृ पागल.... (सुगंधा स्टेरिंग को संभाले हुए हंसते हुए बोली)

नहीं मम्मी सच कह रहा हूं तुम्हारी गोरी गोरी गांड़ पर लाल रंग की कच्छी मुझे बहुत अच्छी लग रही थी । (रोहन जानबूझकर अपनी मां की बात बताते हुए खुली बातों का प्रयोग कर रहा था और जिसका असर रोहन पर तो बुरी तरह हो ही रहा था कि गंदा की भी हालत खराब कर रहा था सुगंधा की पेंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी जिसकी चिपचिपाहट उसे अपने मुलायम मखमली बदन पर महसूस हो रही थी और वह बार-बार असहज महसूस करते हुए अपना हाथ अपनी टांगों के बीच ले जाकर साड़ी के ऊपर से अपनी पेंटी को व्यवस्थित कर रही थी... सुगंधा अपने बदन में उत्तेजना का तूफान महसूस कर रही थी जो कि बाहर तेज हवाओं के साथ बरस रही बारिश सुगंधा के बदन में उठ रही तूफान के आगे कुछ भी नहीं था.... सुगंधा उत्तेजना के महासागर में गोते लगा रही थी.. उसका मन मोटे लंबे लंड को अपनी बुर के अंदर महसुस करने के लिए तड़प रहा था। वह रोहन के मुंह से आगे की बात सुनने के लिए लालायित हुए जा रही थी इसलिए रोहन से बौली।

इसके आगे तूने क्या देखा..?
 
सुगंधा का मन मचल रहा था आगे की बात जानने के लिए... क्योंकि सुगंधा ने अब तक अपने बेटे के मुंह से जितना भी सुनी थी वह सब उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठा रहा था... अब तक अपने बेटे के मुंह से अपने ही बारे में कामुकता से भरी बातें सुनकर उसकी बुर नमकीन पानी से लबालब भर चुकी थी । और उस नमकीन पानी के रिसाव की वजह से उसकी चड्डी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी उसके मन में यही मनसा जाग रही थी कि काश कोई ऐसा मर्द होता जो उसकी टांगे फैला कर उसकी बुर में अपनी जीभ डालकर उसके सारै रस को पी जाता। ओर ऐसा मर्द उसकी नजर में सिर्फ उसका बेटा ही था लेकिन अभी मंजिल बहुत दूर थी.. ओर सुगंधा की ऊतेजना दबाए नहीं दब रही थी। एक अजीब सी तड़प सुगंधा अपने तन बदन में महसूस कर रही थी लेकिन यह तड़प उसे दर्द नहीं बल्कि अंदर ही अंदर आनंद प्रदान कर रही थी जिसमें सुगंधाको बहुत मजा आ रहा था.

और यही हाल रोहन का भी था रोहन अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला मम्मी मेरी आंखों के सामने तुम्हारा जो रूप था उसे देखकर मैं अपने होश खोने लगा था गजब की खूबसूरती भरी है तुम्हारे अंदर तुम मेरी तरफ पीठ करके खड़ी थी और अपनी साड़ी पर दोनों हाथों में उनका कमर तक लाकर उसी अवस्था में खड़ी थी तुम्हारी चड्डी तुम्हारे गोरे बदन की खूबसूरती को ज्यादा बढ़ा रही थी मेरी मंशा सच कहूं तो तूमे नंगी देखने की हो रही थी।( अपने बेटे की मनसा जानकर सुनंदा की बुर में गुदगुदी हो रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका मन भी यह सब करता है जैसे दूसरे मर्दों का एक औरत को देखकर करता है लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर उसे बुरा नहीं लग रहा था बल्कि अच्छा लग रहा था.. )

तू सच कह रहा है क्या तेरी भी ईच्छा ऐसी होती है।

मम्मी मैं तुमसे झूठ नहीं पाऊंगा उस समय जो मेरी हालत थी मैं वही कह रहा हूं हमेशा तो ऐसा नहीं होता है लेकिन जिस तरह की हरकत में अपनी आंखों से तुम्हें करते हुए देख रहा था उस समय तो मेरी इच्छा ऐसी ही हो रही थी मैं तुम्हें एकदम नंगी देखना चाहता था मैं तुम्हारी खूबसूरती को देखना चाहता था मैं देखना चाहता था कि तुम बिना कपड़ों के कैसे दिखती हो.
(. रोहन जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव अपने अंदर कर रहा था उससे उसको हिम्मत मिल रही थी और वह जानबूझकर अपनी बातों को नमक मिर्च लगाकर अपनी मां से कह रहा था वह अपनी मां के अंदर उन्माद जगाना चाहता था जो कि एक औरत के अंदर उन्माद और उत्तेजना का असर किस तरह से होता है वह उसके दोस्तों को देखकर उनकी बातों को सुनकर उसे समझ में आ रहा था। वह इंसान खुद ही बातों के जरिए जैसे राशि उनके दोस्त अपनी भाभी और अपनी प्रेमिका की चुदाई करते हैं उसी तरह से ऐसी बातें करके वह अपनी मां को उत्तेजित करना चाहता था... ताकि उसकी मां उत्तेजित होकर उन्माद में आकर अपने बेटे को ही अपनी बुर परोस दे। रोहन इसी ताक में लगा हुआ था और अपनी बातों को बढ़ा चढ़ाकर बोल रहा था. . )

मम्मी सच कहूं तो मुझे बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि अब क्या होने वाला है लेकिन जिस तरह से तुम खड़ी थी उसे देखने के बाद तो मेरा दिमाग काम करना बंद हो गया था मैं बार-बार पीछे की तरफ देख ले रहा था कि कहीं कोई आ ना जाए....

क्यों तुझे किस बात का डर था अगर कोई आ जाता तो ।

मम्मी मैं उसमें नहीं चाहता था कि कोई उधर आए और तुम्हें उस हालत में देखें..

ऐसा क्यों.. ?

मम्मी सुनने में थोड़ा तुम्हें गलत लगेगा लेकिन मैं सच कह रहा हूं मैं नहीं चाहता था कि तुम्हें उस अवस्था में कोई भी देखे ना जाने क्यों मेरे मन में ऐसा हो रहा था कि मेरी मम्मी को इस रूप में सिर्फ मैं ही देख सकता हूं और दूसरा कोई नहीं देख सकता...

मैं फिर पूछना चाहूंगी ऐसा क्यों...?

क्योंकि तुम मेरी मम्मी हो और तुम पर मेरा हक है तो मैं नहीं चाहता कि तुम्हें उस अवस्था में कोई और भी देखें और एक बात और थी...... ( इतना कहकर रोहन जानबूझकर चुप हो गया वह देखना चाहता था कि उसकी मां क्या कहती है... )

कौन सी बातें थी तू चुप क्यों हो गया बताना... ( सुगंधा स्टेरिंग संभालते हुए बोली।)

जाने दो मम्मी थोड़ी वैसी बातें हैं मैं बता नहीं सकता...

अरे क्यों नहीं बता सकता इतना कुछ तो बता रहा है वह भी बता दें इसमें शर्माने की क्या बात है...

मम्मी बात ही कुछ ऐसी है कि मुझे शर्म आ रही है बताने में...

देख अब मुझसे शर्माने की जरूरत नहीं है बता दे जो भी तेरे मन में है.. (अब तो सुगंधा की भी उत्सुकता बढ़ते जा रही थी.. क्योंकि जिस तरह से रोहन ना नुकुर कर रहा था उससे इतना तो साफ था कि कुछ ऐसी बात जरूर थी जो उसे बताने लायक नहीं थी। इसलिए तो अब उस बात को सुनने के लिए सुगंधा तड़प रही थी उसकी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी.. )

मम्मी जाने दो ना कहीं आपको बुरी लग गई तो...

अरे नहीं लगेगी तो बता तो सही देख बातों बातों में आधे से ज्यादा सफर गुजर गया है ऐसे ही जल्दी हम अपने गांव पहुंच जाएंगे तु बता।

अच्छा बताता हूं लेकिन तुम नाराज मत होना क्योंकि बात ही कुछ ऐसी है...

नहीं मैं नाराज नहीं होंगी तू बता।

मम्मी जब तुम शादी में नाच रही थी तो तुम्हारा नाच देखने वालों में कुछ ऐसे लोग भी थे जो बहुत गंदे थे जिनकी बातें सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया था..

कैसे लोग थे और कौन सी बातें सुनकर तुझे गुस्सा आ रहा था (सुगंधा को समझ में आ गया कि वह लोग उसके बारे में जरूर कुछ उल्टा उल्टा बोले होंगे जिससे रोहन को गुस्सा आया था)

मम्मी वो लोग बहुत गंदी थै उन लोगों की बातें सोच कर मुझे अभी भी बहुत गुस्सा आता है।

बता तो वो लोग क्या बातें कर रहे थे।

मम्मी वौ लोग तुम्हारा नाच देखकर तुम्हारे बारे में गंदी गंदी बातें कर रहे थे...

अब बताएगा भी कि वह लोग क्या बातें कर रहे थे या ऐसे ही पहेलियां बुझाता रहेगा।( सुगंधा इस बार थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

बता रहा हूं मम्मी वह क्या है ना कि बात ही कुछ ऐसी है कि बोलने में शर्म आ रही है...

अब ज्यादा शर्माने की जरूरत नहीं है बता....

मम्मी जब तुम नाच रही थी.. तो कुछ लोग तुम्हारा नाच और तुम्हें देखकर गंदी गंदी बातें कर रहे थे वह लोग कह रहे थे कि कितनी खूबसूरत औरत है अगर एक रात के लिए मिल जाए तो..... तो......
( रोहन बोलते हुए जानबूझकर हकलाने का नाटक कर रहा था वह देखना चाहता था कि उसकी मां क्या बोलती है और उसे इस तरह से हक लाते हुए देखकर सुगंधा बोली. )

क्या तो तो लगा रखा है ठीक से क्यों नहीं बोल रहे हो....

क्या करूं मम्मी आगे की बात ही कुछ ऐसी है कि मुझे सच में बोलने में शर्म आ रही है...

अब तो ज्यादा नाटक मत कर और बोल कि वह लोग क्या बोल रहे थे मेरे बारे में...

( रोहन के मुंह से उन लोगों की गंदी बात सुनने के लिए सुगंधा लालायित हुए जा रही थी उसकी तड़प उसके चेहरे पर साफ नजर आ रही थी वैसे भी आग दोनों जगह बराबर लगी थी.. सुगंधा सुनने के लिए तड़प रही थी और रोहन बोलने के लिए दोनों का सफर अच्छे से कट रहा था बारिश बंद होने का नाम नहीं ले रही थी मौसम पूरी तरह से ठंडा हो चुका था लेकिन मोटर गाड़ी के अंदर इस तरह की बातें करके दोनों मां-बेटे तप रहे थे। और यह तपीश वासना की थी उन्माद की थी औरत और मर्द के बीच उमड़ रही भावनाओं की थी जिसमें दोनों मां-बेटे गर्माहट का अनुभव कर रहे थे अपनी मां की तरफ से हरी झंडी पाते हैं रोहन अपनी बातों को नमक मिर्ची लगाते हुए बोला.... )

मम्मी वह लोग तुम्हारा नाच देख कर बोल रहे थे कि अगर यह औरत एक रात के लिए मिल जाए तो इसकी ब.. ब.. ब. ब. बुर में लंड डालकर सारी रात पड़ा रहूं।( रोहन अपनी मां के सामने इस तरह से बुर शब्द बोलने ने पूरी तरह से हाफ गया था। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि वह अपनी मां के सामने यह शब्द बोलकर से किया लेकिन हकीकत यही थी कि वह अपनी मां के सामने ही एक औरत के बेशकीमती अंग के नाम को बोल दिया था और उसका असर रोहन पर बहुत ही ऊन्मादक तरीके से हो रहा था उसका लंड पूरी तरह से अकड़ गया था। सांसो की गति तेज हो गई थी और यही हाल से बंदा काफी था उसी उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा उसके सामने बुर शब्द को एकदम खुल कर बोल देगा और आलम यह था कि अपने बेटे के मुंह से ही यह शब्द सुनकर सुगंधा के तन बदन में वासना की ज्वाला भड़कने लगी सुगंधा एकदम से चुनाव से भर गई उसकी आंखों के सामने उसकी ही बेटे का लंड झूलने लगा उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी सांस की गति उसकी भी तेज हो गई थी बुर अपना अलग ही कमाल दिखा रही थी.. बुरनुमा कटोरी नमकीन नुमा मदनरस से लबालब भर चुकी थी। सुगंधा भी जानबूझकर दिखावा करते हुए बोली

बाप रे बो लोग ईतना गंदा बोल रहे थे मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि मेरे बारे में बो लोग यह सब सोच रहे थे।

मम्मी उसमें से एक तो इतना गंदा बोल रहा था कि उस बारे में सोच कर अभी भी मुझे गुस्सा आ रहा है।

इससे भी गंदा... ( सुगंधा आश्चर्य के साथ बोली)

हां मम्मी ईससे भी गंदा...

बता तो इससे भी गंदा क्या था? ( सुगंधा उत्सुकता बस बोली। रोहन अपनी मां की आंखों में इससे भी गंदा सुनने की चमक को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह भी मौके का फायदा उठाते हुए बोला. )

मम्मी उन लोगों में से एक बोल रहा था कि अगर यह औरत चोदने को मिल जाए तो इसकी बुर का भोसड़ा बना दूं। कसम से मैंने आज तक इतनी खूबसूरत औरत नहीं देखा इसकी सूची कितनी गोल-गोल और बड़ी-बड़ी है जो ब्लाउज में से बाहर लपक रही है उसकी गांड कसम से इतनी मदमस्त गांड देखकर तो मेरा लंड खड़ा हो गया है... काश औरत हम से चुदवाती तो हमारी किस्मत बदल जाती...
( रोहन बिना शर्माए बिना हिचकीचाए एक सांस मे हीं सब कुछ बोल गया था यह सब बोलते हुए उसे इतनी असीम आनंद की अनुभूति हो रही थी कि जिसे वह बता नहीं सकता था उत्तेजना का असर उसके बदन में इतना अत्यधिक हो चुका था कि उसे लग रहा था कि कहीं उसके से पानी ना निकल जाए बार बार वह अपने हाथ से पेंट के अंदर अपने खड़े लंड को दबा दे रहा था सुगंधा तो अपने बेटे के मुंह से इतनी गंदी बात सुनकर आश्चर्य से रोहन की तरफ देखने लगी वह एकदम से भौचक्की हो चुकी थी। आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया था सुगंधा हैरान थी अपने बेटे के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर लेकिन इसमें उसे मजा ही आ रहा था आज उसे यकीन हुआ था कि उसके पीठ पीछे लोग उसके बारे में कैसे ख्यालात रखते हैं इतनी गंदी ख्यालात रखने वालों मर्दों के इर्द-गिर्द वरना जाने कब से घूम रही थी। उसे इतना तो आप आता है कि उसकी खूबसूरती को देखकर लोग तरह-तरह की बातें करते थे लेकिन किस हद तक इतनी गंदी बातें मन में सोचते थे इस बात का एहसास ऊसे आज ही अपने बेटे के मुंह से सुनकर हुआ था।)

क्या सच में बेटा ऐसा वह लोग कह रहे थे...?

हां मम्मी इसमें शत प्रतिशत सच्चाई है ऐसा ही वह लोग कह रहे थे तभी तो मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था...

बाप रे इतनी गंदी बातें मेरे बारे में सब लोग सोचते हैं मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है और रोहन वह लोग जो यह सब बातें कर रहे थे उसका मतलब क्या तुझे समझ में आ रहा था...

मम्मी मैं अगर उन लोगों की बातों को समझता नहीं तो गुस्सा कैसे आता...

मतलब तुझे औरतों की चुदाई और उनके अंगों के बारे में समझ में आता है।( सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे से यह सवाल कर रही थी)

मम्मी मै अब बड़ा हो चुका हूं ज्यादा कुछ समझ में नहीं आता लेकिन दोस्तों के मुंह से सुना हूं इसलिए इतना तो जानता हूं कि यह सब बातों का मतलब क्या होता है... ( रोहन भी खुले शब्दों में अपनी मां को जवाब देते हुए बोला)

हां वह तो मैं देख ही रही हूं अच्छा हुआ हम लोग वहां से जल्दी चले आए वरना उन लोगों की खराब नजर से ना जाने कब तक बचते ' रहते।

हां मम्मी मै भी यही सोच रहा था तभी तो रात को जब तुम अपनी साड़ी को कमर तक उठा कर अपनी बड़ी बड़ी गांड उजागर किए हुए थी तभी तो मैं बार-बार घर की तरफ देख ले रहा था कि कहीं वो लोग उधर आना चाहिए और तुम्हें इस हालत में देख कर कुछ गड़बड़ ना कर दें...

गड़बड़..... कैसी गड़बड़ बेटा.. ( सुगंधा की अच्छी तरह से जानती थी कि उसका बेटा किस बारे में बात कर रहा है लेकिन फिर भी जानबूझकर उससे बोली.. )

मेरा मतलब है कि मम्मी वह लोग तुम्हारे बारे में इतनी गंदी गंदी बातें कर रहे थे और घर के पीछे की तरफ आकर अगर तुम्हें उस अवस्था में देख लेते तो हो सकता है कि तुम्हारे साथ गड़बड़ कर देते....

वही तो पूछ रही हूं कि कैसी गड़बड़....

(रोहन समझ गया की ऊसकी मा जानबूझकर ना समझने का नाटक कर रही है वह उसके मुंह से खुले शब्दों में सुनना चाहती थी तो रोहन अब कहां पीछे हटने वाला था। इसलिए वह भी खुले शब्दों में बोला.. )

गड़बड़ मतलब मम्मी वह लोग तुम्हारा नाच देखकर तुम्हें चोदने की इच्छा जाहिर कर चुके थे अगर घर के पीछे आकर तुम्हें इस अवस्था में देखते तो हो सकता है लोग अपना संयम खो देते और अपनी मनमानी कर लेते मतलब कि तुमे चोद देते..... ( रोहन खुले शब्दों में अपनी मां से बोल दिया. और रोहन के मुँह से इतनी गंदी बाते शंकर सुगंधा के मुंह से हल्की सी आह निकल गई वह पूरी तरह से गर्मा गई थी उसे रोहन कि कहीं हर गंदी बात मस्त कर दे रही थी। वह रोहान की बात सुनकर बोली।)

मुझे उस हाल में देखकर तेरा संयम नहीं खोया...
( सुगंधा अपने इस सवाल से सीधे-सीधे रोहन की मनसा जानना चाहती थी और रोहन भी अपनी मां के सवाल का जवाब देते हुए बोला.. )

सच कहूं या झूठ मुझे डर लगता है कि कहीं आप सच जानकर मुझसे नफरत ना करने लगे या मेरे बारे में कुछ गलत ना समझने लगे...

झूठ क्यों कहेगा सच ही बता मैं तुझसे नाराज नहीं होने वाली....
( सुगंधा अपने बेटे की मनसा जानना चाहती थी बचाना चाहती थी कि वह उसके बारे में क्या सोचता है और उसे उम्मीद थी कि रोहन जो अब तक सब कुछ बता रहा था अभी भी सच सच बताएगा रोहन भी अपनी मां की बात सुनकर खुद में लगा था और वह बोला... )

सच कहूं तो मम्मी तुम्हें उस अवस्था में देखकर मेरी भी हालत खराब होने लगी थी मेरा भी सही जवाब देने लगा था जब तुम्हें तुम्हारी साड़ी कमर तक उठा कर खड़े हुए देखा था तुम्हारी चड्डी तुम्हारे गोरे गोरे गांड पर बहुत ही खूबसूरत लग रही थी... ( यह सब बोलते हुए रोहन अपनी मां की तरफ ना देख कर सीसे से बाहर बरश रही बारिश को देख रहा था... और सुगंधा तिरछी नजरों से अपने बेटे की तरफ देख ले रही थी और उसकी बातें सुनकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी.. ) सच कहूं तो मम्मी जैसे ही तुम अपनी छाती पकड़कर नीचे की तरफ सर खाने लगी मेरी तो सांसे अटक गई मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि तुम क्या करने जा रही हो एक पल को तो लगा कहीं जानबूझकर तुम मेरे सामने यह सब तो नहीं कर रही हो मुझे जानबूझकर अपनी गांड तो नही दिखा रही हो..

नहीं ऐसा अनजाने में हुआ था.. (सुगंधा अपने बेटे को गलत सफाई देते हुए बोली जबकि वह जानबूझकर अपने बेटे को दिखाने के लिए ही ऐसी हरकत कर रही थी)
 
अपनी मां की बात सुनकर बोला...

मम्मी मैं तो एकदम मदहोश होने लगा जब तुम धीरे-धीरे करके अपनी पैंटी को अपने घुटनों तक सरका दी।

क्यों ऐसा क्या हो गया.. ?

ऐसा क्या हो गया अरे यह पूछो कि क्या क्या नहीं हुआ मेरा तो होश उड़ गया... जब मेरी नजर तुम्हारी पेंटी हटते ही नंगी गोरी गोरी और गोल गोल गाड़ पर पड़ी। ( सुगंधा अपने बेटे की ऐसी खुली बातें सुनकर मस्त हो रही थी) सच कहूं तो मैं मम्मी पहली बार किसी औरत की नंगी गांड को देख रहा था और वह भी अपनी खुद की मम्मी की और ऐसी गोरी गोरी नंगी गांड इतनी खूबसूरत होती होगी इसकी तो मैंने कभी कल्पना भी नहीं किया था मैं तो एकदम मस्त हो गया था तुम्हारी नंगी गांड को देखकर.... मेरा तो वो.... ( इतना कहते ही रोहन बोल नहीं पाया और चुप हो गया)

रोहन को फिर से खामोश देखकर सुगंधा बोली..

क्यों क्या हुआ ऐसे चुप क्यों हो गया बोलना तेरा क्या..?

मम्मी..... मेरा...... मेरा.... वो...

हकलाता ही रहेगा कि इससे आगे भी बोलेगा बोल नहीं तो लगाओ दो थप्पड़।

बोलता हु....... मम्मी मैंने पहली बार किसी औरत की नंगी गांड को देखा था इसलिए मुझसे अपने आप पर कंट्रोल नहीं हुआ और ना चाहते हुए भी मेरा लंड़। खड़ा हो गया।
( इतना सुनते ही सुगंधा का मुंह खुला का खुला रह गया वह अपने बेटे की तरह आश्चर्य से देखने लगी और अपने आप ही उसकी निगाह उसके पेंट की तरफ चली गई जो कि इस समय उसकी पैंट में तंबू सा बना हुआ था कुछ देर तक वह आश्चर्य से अपने बेटे को देखती रही रोहन एकदम शांत हो गया शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका दिया था लेकिन तभी सुगंधा मुस्कुराने लगी और बोली.. )

फिर क्या हुआ रोहन?
( रोहन अपनी मां की बात सुनकर थोड़ा राहत महसूस करने लगा उसे लग रहा था कि इस बार उसकी मां शायद नाराज होगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था उसके बाद बिल्कुल सामान्य होकर पूछ रही थी इसलिए उसकी हिम्मत खुलने लगी और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।)

फिर क्या मम्मी मेरे सामने तो ऐसा लग रहा था जैसे आसमान से उतरी हुई कोई परी खड़ी है..
( अपने बेटे के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर सुगंधा को अच्छा लग रहा था वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी।) मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं अपनी आंखों से यह सब कुछ देख रहा हूं मुझे तो ऐसा ही लग रहा था कि या कोई सपना है लेकिन वह सपना नहीं था वह हकीकत थी जो कि मेरी जिंदगी का बेहद अनमोल तोहफा ही था तुम्हारी तरफ से..

तोहफा मेरी तरफ से ऐसा क्यों... मैं तो तुम्हें जानबूझकर दिखा नहीं रही थी फिर ऐसा क्यों बोल रहा है (सुगंधा आश्चर्य जताते हुए बोली)

मैं जानता हूं कि मम्मी तुम जानबूझकर नहीं दिखा रही थी लेकिन उस समय देख तो मैं ही रहा था और अगर तुम उस तरह की हरकत नहीं करती तो मैं कभी जिंदगी में तुम्हारा वह रूप नहीं देख पाता कल वाली बात मुझे जिंदगी भर याद रहेगी..

तू तो एकदम बावला हो गया है... nअच्छा यह बता कि इसके आगे क्या हुआ?

इसके आगे मम्मी मेरे देखते ही देखते तुम नीचे बैठ गई और कुछ ही सेकेंड बाद मेरे कानों में सीईईईईई सीईईईईई करते हुए सीटी की आवाज आने लगी और तब जाकर मुझे पता चला कि तुम पेशाब करने बेठी हो...
( अपने बेटे के मुह से इतना सुनते ही जैसे सुगंधा के कान से धुआं निकलने लगा हो उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसका बेटा यह भी बोल जाएगा लेकिन अपने बेटे के मुंह से पेशाब करने वाली और पेशाब करने से बुर में से आ रही सीटी की आवाज की बात सुनते ही सुगंधा के तन बदन में वासना की लहर दौड़ने लगी उसका मन मचलने लगा मोटे लंड को अपनी बुर के अंदर लेने के लिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे की इस बात का क्या जवाब दें । वह सिर्फ सुने जा रही थी और रोहन इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए अपनी मन की सारी बातें अपनी मां के सामने बोल दे रहा था.. )
मम्मी उस समय मेरे बदन में ना जाने कैसी हलचल हो रही थी मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था मेरी सांसें उखड़ने लगी थी ऐसा नजारा मैंने जिंदगी में कभी नहीं देखा था आज तक मैंने कभी भी किसी औरत को पेशाब करते हुए नहीं देखा था मैं बता नहीं सकता कि वह समय में कैसा महसूस कर रहा था.....

कैसा महसूस कर रहा था क्या तू भी उन लोगों की तरह महसूस कर रहा था जो मेरा नाच देखकर मेरे बारे में गंदी गंदी बातें सोच रहे थे और मुझे चोदने का मन बना रहे थे..... ( सुगंधा खुद यह शब्द चोदने बोलकर एकदम से चकपक आ गई थी लेकिन जब उसके मुंह से यह शब्द निकला तो उसके तन बदन में उत्तेजना का एहसास कुछ ज्यादा ही होने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके मुंह से यह शब्द निकल गया है लेकिन जिस तरह के हालात थे उस तरह के हालात में सुगंधा के मुंह से ऐसे शब्द निकलना लाजमी है क्योंकि वह पूरी तरह से उन्माद से भरी हुई थी उत्तेजना उसके तन बदन को अपनी गिरफ्त में ले चुका था... रोहन भी अपनी मां के मुंह से इस तरह के असली एक शब्द सुनकर उसे देखता ही रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था ऊसकी मा ईस तरह के शब्द बोल सकती है लेकिन उसे बहुत अच्छा लग रहा था। इस तरह के शब्द सुनकर रोहन के मन में हो रहा था ईसी मोटर गाड़ी के अंदर ही अपनी मां की चुदाई कर दे और सही मायने में देखा जाए तो ऐसा हो भी सकता था क्योंकि उसकी मां भी पूरी तरह से तैयार थी लेकिन रोहन को इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह आगे बढ़ सके... लेकिन अपनी मां के इस तरह के सवाल में अपनी मनसा जाहिर करते हुए वह बोला)

सच कहूं तो तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो मेरी भी इच्छा हो वैसी हो रही थी जैसा कि आपका नाच देखकर उन लोगों की हो रही थी... मम्मी मैं बार-बार सोच रहा था कि उस तरह के गंदे ख्याल मेरे मन में ना आवे लेकिन मेरे आंखों के सामने ऐसा नजारा था कि मैं चाह कर भी अपने मन को रोक नहीं पा रहा था...

मुझे पेशाब करता हुआ देखकर क्या क्या सोच रहा था तू अपने मन में...

मम्मी मैं तुम्हारी बड़ी बड़ी गोरी गांड देखकर पागल हो गया था और तो और तुम्हें पेशाब करता हुआ देखकर मेरे तन बदन में ना जाने कैसी हलचल मची रही थी मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया था और सच कहूं तो मैं तुम्हें चोदना चाहता था लेकिन मैं यह नहीं जानता कि कैसे चोदा जाता है बस यही इच्छा हो रही थी पूछो एक मर्द एक औरत के साथ करता है वही मैं भी तुम्हारे साथ कर्।

( सुगंधा अपने बेटे की मनसा जानकर मनी मन प्रसन्न होने लगी उसे लगने लगा कि अब उसकी भी मनसा उसकी भी प्यासे तन बदन को सावन की फुहार मिलने वाली है... जिसके आज कोवा बरसों से अपने सीने में दबाए हुए थे आज उस प्यास को बुझाने का समय आ गया है उसे अच्छा लग रहा था कि उसका बेटा अपने मन उसे चोदने की कामना कर रहा था और सही मायने में सुगंधा भी खुद अपने बेटे का लैंड अपने दूर के अंदर महसूस करना चाहती थी इसलिए इस वह बात को आगे बढ़ाते हुए... )
. बाप रे तुझे देखकर यकीन नहीं हो रहा है कि तू इतना बड़ा हो गया है कि औरत को देखकर खुद अपनी मां को देखकर इस तरह की मनसा तेरे अंदर जागरूक होती है अच्छा एक बात बता तू मेरी नंगी बड़ी बड़ी गांड को तो दिख नहीं रहा था क्या तूने वह देखा जहां से पेशाब निकलती है।

अब चौक ने की बारी रोहन की थी क्योंकि उसकी मां सीधे-सीधे अपनी बुर के बारे में पूछ रही थी भले ही वह सीधे नाम लेकर नहीं बोल पाई थी.. लेकिन उसका इशारा साफ था रोहन भी कहां पीछे हटने वाला था वह भी बोला ....

मतलब मैं समझा नहीं.... ( रोहन भी अनजान बनता हुआ बोला.. )

अरे मेरा मतलब है कि जहां से में पेशाब कर रही थी तूने उस अंग को देखा था या नहीं...

नहीं मम्मी मैं नहीं देख पाया था क्योंकि वहां अंधेरा भी तो था इसलिए नहीं देख पाया..

मतलब तेरी इच्छा उसे देखने की थी... ( सुगंधा गहरी सांस लेते हुए बोली.. )

मम्मी अब तुमसे क्या छुपाना जब इतना कुछ मेरी आंखों के सामने दिखाई दे रहा था को मेरा मन उस चीज को भी देखने को कर रहा था लेकिन अंधेरे की वजह से देख नहीं पाया... ( रोहन उस अंग को नहीं देख पाया यह एकदम साफ तौर पर बता दिया जबकि वास्तविकता भी यही थी कि उसने चाह कर भी अपनी मां की बुर को नहीं देख पाया था क्योंकि वहां अंधेरा भी था और इतनी दूर से उसे वह दो इंच का अंग दिखाई नहीं दे रहा था।)

वैसे एक बात पूछूं सही सही बताना वैसे तो तुझसे उम्मीद नहीं है कि तो सही ही बोलेगा क्योंकि अब तक तुने सच ही बताते आ रहा है।

हां हां तुम पूछो तो सही मैं जानता हूं गा तो जरुर बताऊंगा..

अच्छा हम औरतें जहां से पेशाब करते हैं तू जानता है उस अंग को क्या कहते हैं सच सच बताना..,

मैं नहीं जानता मैंने के उस अंग को क्या कहते हैं क्योंकि मैंने अभी तक उस अंग को देखा ही नहीं हूं... ( रोहन बहाना बनाते हुए बोला. )

तु सच में नहीं जानता कि ऊस अंग को क्या कहते हैं चुदाई के बारे में जानता है लेकिन उस अंग को नहीं जानता जहां से चुदाई करते हैं.... ( अपनी मां के मुंह से इतने खुले शब्दों में औरतों के अंग और चुदाई के बारे में सुनकर तो रोहन का लंड पजामे के अंदर से ही अपनी मां की जवानी को सलामी देने लगा। अपनी मां की बात सुनकर रोहन उत्तेजना के उस परम शिखर पर पहुंच गया था जहां से बिना संतुष्टि का एहसास लिए बिना वापस आना नामुमकिन सा था.... उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां इतनी कामुकता से भरी हुई है कितने खुले शब्दों में अपने बेटे से बात कर रही है लेकिन इस बात से रोहन को जरा भी खेत नहीं था बल्कि अपनी मां की बातें सुनकर उसे उत्तेजना और प्रसन्नता का एहसास हो रहा था उसे अपनी मां की बातें सुनने में मजा आ रहा था और खास करके एक औरत के मुंह से क्योंकि उसने आज तक एक औरत के मुंह से इतना क्या समझे बातें नहीं सुनी थी.. )

मैं सच कह रहा हूं मम्मी उस अंग के बारे में मैं बिल्कुल नहीं जानता मैं तो यह भी नहीं जानता कि वह अंग दिखता कैसा है...
( अपने बेटे की बातें सुनकर सुगंधाको उस पर यकीन हो रहा था कि हो सकता है उसने उस अंग को ना देखा हो क्योंकि अभी तक वह अपनी मां से सब सच सच बता रहा था सुगंधा अपने बेटे की बात सुनकर बात को आगे बढ़ाते हुए बोली... )

ठीक है मैं तुझे बताती हूं कि औरत जहां से पेशाब करती है उस अंग को क्या कहते हैं देख उस अंग को कहते हैं बुर। ( सुगंधा बिना शर्माए झट से बोल गई... उसे इस बात का जरा भी फर्क नहीं पड़ा कि वह अपने बेटे से बात कर रही है वह एकदम सहज हो चुकी थी और उसके मन में भी यही था कि घर पहुंचने से पहले बा अपने और अपने बेटे रोहन के बीच की मर्यादा और संस्कारों की दीवार को गिरा देना चाहती थी क्योंकि अब वह मन बना ली थी कि वह अपने बेटे से ही चुदवाएगी और अपनी प्यास बुझाएगी। और दूसरी तरफ रोहन अपनी मां के मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि उसे लगने लगा था कि या तो उसके लंड से उसका पानी छोड़ देगा या तो उसकी नसे फट जाएंगी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें। रोहन पूरी तरह से अनजान बनते हुए अपनी मां की कही बात को दोहराते हुए बोला.. )

बुर....... हां मम्मी मैं उसका नाम तो सुना हूं दोस्तों के मुंह से कभी मेरे दोस्त बात बात पर एक दूसरे को गाली देते हुए बोलते हैं कि...
तेरी मां की बुर में लंड डाल दूंगा तेरी बहन की बुर में लंड डालकर चोद ड़ालूंगा..... ( रोहन जानबूझकर इस तरह की गाली वाली बात क्यों रहा था और सुगंधा को अपने बेटे की इस बात पर मजा भी बहुत आ रहा था दोनों का समय काफी गुजर गया था शाम होने वाली थी लगभग लगभग धीरे-धीरे अंधेरा हो रहा था गाड़ी देने चलाने की वजह से तकरीबन अभी भी दस पंद्रह किलोमीटर का सफर तय करना बाकी था.. सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी उसकी पैंटी एकदम गीली हो चुकी थी जिसकी चिपचिपाहट उसे अपनी बुर पर महसूस हो रही थी....
यही हाल रोहन का भी था उसका लंड भी धीरे-धीरे चिपचिपा हो गया था। इसने को इतना ज्यादा उत्तेजित हो चुका था कि उसका मन मुठ मारने को कहा था एक अजीब सी असमंजस में पड़ा हुआ था उसे अपने किस्मत पर रोना भी आ रहा था कि एक बेहद खूबसूरत औरत जो कि उसकी मा ही थी जिनके बीच इतनी खुले शब्दों में बातचीत भी हो चुकी थी उसके होने के बावजूद भी वह मुठ मारने की सोच रहा था क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानता था कि उसकी हिम्मत इतनी भी ज्यादा नहीं बढ़ गई थी कि वह अपनी मां को खुले शब्दों में बोल सके कि वह उसे चोदना चाहता है... रोहन को अपने ऊपर ही गुस्सा आ रहा था बस एक आह भरकर रह जा रहा था।...

अत्यधिक गंदी बातें करके दोनों मां-बेटे एकदम गरमा चुके थे कार के बाहर का वातावरण बिल्कुल ठंडा था लेकिन कार के अंदर का वातावरण दोनों की बातचीत और दोनों की मदहोशी ने माहौल को एकदम गरभ कर दिया था।जिस तरह का माहौल सुगंधा चाहती थी उस तरह का माहौल दोनों मां-बेटे के बीच खड़ा हो चुका था अपनी बातों से वह अपने बेटे को पूरी तरह से गर्म आ चुकी थी... बस उसे इंतजार था घर पहुंचने की क्योंकि वह मन में ठान ली थी कि घर पहुंचते ही वह किसी ना किसी बहाने अपने बेटे का लंड अपनी बुर में डलवा लेगी।
सुगंधा काफी खुश नजर आ रही थी चेहरे पर उत्तेजना का असर अभी भी बराबर बना हुआ था रोहन का भी यही हाल था बार-बार वह अपने पेंट में बने तंबू को अपनी दोनों हथेलियों से दबा दे रहा था दोनों सफर से काफी खुश थे उन्हें लगने लगा था कि उनकी मंजिल अब दूर नहीं है दोनों मां बेटी एक दूसरे की बाहों में अपनी दुनिया बताना चाहते थे इसलिए सुगंधा गाड़ी की रफ्तार को थोड़ी सी बढ़ा दि... क्योंकि वह जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहती थी....
अभी भी घर के बीच का रास्ता दस 12 किलोमीटर जितना था वह मुख्य सड़क से अपनी गाड़ी को नीचे की तरफ उतार कर गांव में प्रवेश करा दी... दोनों एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा दे रहे थे दोनों आने वाले खतरे से बिल्कुल अनजान थे क्योंकि उनके पीछे रूपा सिंह बराबर लगा हुआ था दोनों अपनी मस्ती में इस तरह खो चुके थे कि 10 मीटर की दूरी पर उनका पीछा कर रही दूसरी गाड़ी के बारे में उन्हें बिल्कुल भी पता नहीं चला रूपा सिंह सुगंधा का जानी दुश्मन भी था और उसकी जवानी का आशिक भी था.... और वह भी इसी तूफानी बारिश का फायदा उठाते हुए आज सुगंधा की जवानी का रस चखना पाता था उसे बदला भी लेना था और आज ही उसे सही मौका हाथ लगा था इसलिए जैसे ही सुगंधा मुख्य सड़क से अपनी गाड़ी को नीचे की तरफ कच्ची सड़क पर उतारे वैसे ही तुरंत दूसरी तरफ से जल्दी से अपनी गाड़ी को मुख्य सड़क से नीचे उतारकर बड़ी रफ्तार से लाकर सीधे उसके सामने खड़ा कर दिया सुगंधा को जरा भी मौका नहीं मिला संभलने का और वो सीधे अपनी गाड़ी की टक्कर रूपा सिंह की गाड़ी मैं मार दी...
 
सुगंधा को तो कुछ समझ में ही नहीं आया कि आखिर यह हो क्या गया सीधे उसकी गाड़ी जाकर रूपा सिंह की गाड़ी से टकरा गई थी टककर बहुत जबरदस्त थी जिसकी वजह से रूपा सिंह की गाड़ी हच मचा गई थी लेकिन उसे बिल्कुल भी डर नहीं था कि उसकी एक गलती की वजह से उसे चोट लग सकती थी या उसकी जान भी जा सकती थी उसके सर पर तो जुनून सवार था सुगंधाको पानी का अपना बदला लेने का सुगंधा ने जो उसे गाल पर थप्पड़ मार कर सबके सामने बेज्जती की उस बेचारी का बदला लेने का जुलूस उसके ऊपर सवार था इसलिए उसे जरा भी फिक्र नहीं थी कि उसकी गलती पर उसे चोट लग सकती है या फिर अपनी जान जा सकती है वह बिना कुछ सोचे समझे ही मुख्य सड़क से अपनी गाड़ी को तेज रफ्तार से उतारकर ठीक उसकी गाड़ी के सामने ब्रेक मार कर खड़ा कर दिया और उसकी इस हरकत की वजह से सुगंधा समझ नहीं पाई कि क्या करना है और सीधे जाकर अपनी गाड़ी रूपा सिंह की गाड़ी से दे मारी थी...

कुछ सेकंड बाद सुगंधा अपने आप को संभाल पाई तो उसे बहुत गुस्सा आया और वह बाहर निकलना चाहती थी और उसके लिए उसने दरवाजे का हैंडल पकड़ कर घूम आना चाहे इससे पहले ही रूपा सिंह फुर्ती दिखाते हुए अपनी गाड़ी से नीचे उतरा और सीधे सुगंधा के पास आ गया और खुद ही गाड़ी का दरवाजा खोल कर उसकी बांह पकड़ कर उसे बाहर निकाल लिया.... रोहन तो एकदम सन हो गया था उसे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार यह हो क्या रहा है लेकिन जब देखा कि उसकी मां को कोई आदमी खींचते हुए कार से बाहर निकाल रहा है तो उसे देखा नहीं जा और वह भी गाड़ी से बाहर आ गया...

कौन हो तुम और यह क्या बदतमीजी है....? ( सुगंधा को कुछ समझ नहीं आया कि आखिरकार यह आदमी है कौन और ऐसा क्यों कर रहा है और वैसे भी अंधेरा हो रहा था और तेज बारिश की वजह से उसका चेहरा साफ नजर नहीं आ रहा था सुगंधा की बात सुनकर रूपा सिंह सुगंधा के चेहरे के सामने अपना चेहरा लाते हुए बोला....? )

ले पहचान में कौन हूं? ( रूपा जानबूझकर अपने चेहरे को सुगंधा के चेहरे के ठीक सामने स्थिर कर दिया रूपा सुगंधा को पहचानने का मौका दे रहा था लेकिन अंधेरे और तेज बारिश की वजह से सुगंधाको अभी भी रूपा का चेहरा ठीक से नजर नहीं आ रहा था लेकिन उसकी आवाज कुछ-कुछ उसे जानी पहचानी लग रही थी सुगंधा भी उसे ठीक से देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन देख नहीं पाई थी आसमान में जिस के उजाले में उसे कुछ सेकंड के लिए रूपा का चेहरा नजर आया उसे पहचानते ही एकदम सन्न हो गई पल भर में उसके बदन में डर बैठ गया.... डर के मारे जैसे उसके शब्द उसके हलक में ही कर रहे गए उसके मुंह से आवाज तक नहीं निकल पाई और सुगंधा की हालत को रूपा अच्छे से पहचान गया था इसलिए जोर से हंसते हुए बोला.... )

क्यों क्या हुआ मेरी जान आवाज गले में ही अटक गई......

रूपा तू.....

हां मेरी रानी मैं..

इस तरह से मेरा रास्ता रोकने का क्या मतलब है..

मतलब बहुत साथ है मेरी जान मैं तो तुझे देखते ही तेरा दीवाना हो गया था मैं तुझे पाना चाहता हूं लेकिन हो सकता था कि मैं अपना इरादा बदल भी देता लेकिन तूने जो मेरे गाल पर थप्पड़ मारी है उसे मैं भूल नहीं पाऊंगा मेरे मन को तभी शांति मिलेगी जब मैं तेरे खूबसूरत बदन से खेलूंगा अपनी मनमानी कर लूंगा तुझे चोदूंगा तब जाकर मेरे दिल को मेरे गुस्से को शांति मिलेगी।
( रूपा की बात सुनकर सुगंधा ड़र के मारे सिहर उठी। और उसका डरना लाजमी भी था. क्यों क्यों अच्छी तरह से जानती थी कि रूपा की नजर उसके ऊपर पहले से ही गंदी थी जिसकी एवज में उसने उसके गाल पर थप्पड़ भी मार चुकी थी और इस तरह का माहौल देखते हुए और जिस तरह से उसने बीच रास्ते में उसका रास्ता रोका था उसे देखते हुए सुगंधा के मन में डर बैठ गया था कि हो सकता है वह अपनी मनमानी कर दें क्योंकि यहां पर कोई भी नहीं था वैसे भी जिस स्थान पर उसने गाड़ी रोका था वह स्थान भूतों का डेरा के नाम से मशहूर था यहां पर दिन में भी लोग आना पसंद नहीं करते थे अभी तो रात हो रही थी और मूसलाधार बारिश ऐसे में कोई यहां भटक भी नहीं सकता था इसलिए सुगंधा मन ही मन में सोचे कि अगर ऐसे में रूपा उसके साथ जबरदस्ती करता है तो शायद वह अपने आप को बचा नहीं पाएगी लेकिन फिर भी वह हिम्मत जुटाकर गुस्से में बोली)

हरामजादे तू अगर एक कदम भी आगे बढ़ाया तो तेरा सीना चीर दूंगी तू अभी मुझे जानता नहीं है...

जानता हूं मेरी जान तुझे अच्छी तरह से जानता हूं तू बिस्तर पर बहुत ही मजा देने वाली औरत है और मैं तेरे साथ मजे करना चाहता हूं... ( इतना कहने के साथ ही रूपा उसे जबरदस्ती अपनी बाहों में पढ़ने की कोशिश करने लगा और अब तक खड़े होकर यह सब देख रहा रोहन उससे रहा नहीं गया और वहां के पढ़कर अपनी मां को रूपा के चुंगल से छुड़ाने की कोशिश करने लगा... )

कुत्ते हरामजादे छोड़ मेरी मां को छोड़ इतना डरते हो गई वह रूपा सिंह का हाथ पकड़कर जोर से खींचने लगा.... ( सुगंधा के बेटे का इस तरह से प्रतिकार देखकर रूपा को गुस्सा आने लगा... और वह एक बार जोर से रोहन को धक्का दे दिया और रोहन सीधे जाकर कीचड़ में गिरा उसे देख कर रूपा जोर जोर से हंसने वाला ऐसा करने में ऊसका एक हाथ से सुगंधा की कलाई छुट चुकी थी... और अपने बेटे की हालत को देखकर सुगंधा को गुस्सा आ गया और उसने फिर से उसी हाथ से रूपा सिंह के गाल पर जोर से थप्पड़ लगा दी थप्पड़ इतनी जोर से था कि रूपा एकदम से हड़बड़ा गया और वह भी गिर गया.... आसमान में बिजली चमकने लगी बादलों की गड़गड़ाहट बढ़ती जा रही थी माहौल पूरी तरह से डरावना हो चुका था बारिश थी कि थमने का नाम ही नहीं ले रही थी सुगंधा पूरी तरह से बारिश में भीग चुकी थी रोहन के साथ-साथ रूपा सिंह का भी यही हाल था दोनों कीचड़ में गिरे हुए थे. सुगंधा के थप्पड़ से कीचड़ में गिरा रूपा गुस्से से तिलमिला उठा और गुस्से में उठते हुए बोला..

तेरी मां की चूत मादरचोद रंडी मेरे पर हाथ उठाती है.... तेरी इतनी हिम्मत.... तेरे को अब यही बारिश ने चोद दूंगा तेरा सारा घमंड उतार दूंगा बहुत घमंड है तुझे अपनी खूबसूरत बदन पर आज मैं अपने हाथों से तेरी जवानी मसलूंगा.... ( इतना कहते हुए रूपा सुगंधा की तरफ आगे बढ़ा... जिस तरह से गुस्से में रूपा सिंह नजर आ रहा था उसे देखकर सुगंधा घबरा गई और पीछे हटते हुए गुस्से में बोली।)

हरामजादे कुत्ते कमीनी एक कदम भी आगे बढ़ाया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा... ( सुगंधा पूरी तरह से घबरा भी रही थी और अपने आप को बचाने की पूरी कोशिश भी कर रही थी... लेकिन रूपा सिंह औरतों की ताकत को अच्छी तरह से जानता था खास करके सुगंधा की वह बिना डरे आगे बढ़ा और कीचड़ में गिरा रोहन यह सब देख रहा था जिस तरह से वह गाली-गलौज करते हुए उसकी मां की तरफ बढ़ रहा था रोहन को बहुत गुस्सा आ रहा था उसका खून खोल रहा था और वह उठा और जोर से दौड़ता हुआ जाकर रूपा की कमर में दोनों हाथ डालकर उसे जोर से पटक दिया रूपा सिंह को रोहन से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी वह अपने आपको संभाल नहीं पाया और सीधा किचड़ में गिरा... ( सुगंधा तो यह देखकर हैरान रह गई उसी उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा उसे इस तरह का प्रतिकार कर सकेगा... यह देखकर सुगंधा की हिम्मत बढ़ी और वह अपने बेटे से जोर से बोली......

मार बेटा इसे और मार...

( अपनी मां की ईस तरह की बात सुनकर रोहन के बदन में जोश भर गया और वह दोबारा रूपा की तरफ आगे बढ़ा। रूपा जो कि चोट खाने के बाद और भी ज्यादा ताकतवर हो गया था अपने आप को इस तरह से एक औरत के सामने उसके बेटे के हाथों मार खाकर क्रोध से भर गया था..... सुगंधा के बेटे को अपनी तरफ आता देखकर वह चौकन्ना हो गया और वह उसके करीब पहुंचा इससे पहले ही खुद उठा और तेजी से उसकी तरफ आकर पड़ता होगा उसे जोर से पकड़ कर उसी की तरह ही कीचड़ में पटक दिया..... और शैतान की तरह उसके ऊपर बैठकर उस पर मुक्क का वार करने लगा...
हरामजादे कुत्ते के पिल्ले तेरी इतनी हिम्मत कि तूने रूपा सिंह पर हाथ उठाया तू जानता नहीं है मैं कौन हूं आज मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा हरामजादे...

रूपा रोहन को मारते जा रहा था और गंदी गंदी गालियां भी दिए जा रहा था अपने बेटे को इस तरह से मार खाता देखकर सुगंधा से रहा नहीं गया और दौड़कर रूपा के पास आई और पीछे से उसका गिरेबान पकड़कर पीछे की तरफ खींचने लगी...

छोड़ हरामजादे मेरे बेटे को छोड़.. तू शैतान हो गया है जो छोटे बच्चे पर हाथ उठा रहा है हरामजादे...... ( इतना कहकर सुगंधा उसे पीछे की तरफ खींची और रूपा भी पीछे की तरफ गिर गया इतना मौका पाकर रोहन फिर खड़ा हो गया और खड़े होते ही एक लाख रूपा के सीने पर दे मारा लाख का प्रहार इतना तेज था कि रूपा दर्द से तिलमिला गया.... वह अपनी छाती पकड़ कर बैठ गया माहौल पूरी तरह से भयानक हो चुका था बादलों की गड़गड़ाहट थी कि रुकने का नाम नहीं ले रही थी साथ में बारिश अपना कहर ढा रही थी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था जोर जोर से हवा और भी ज्यादा डरावनी लग रही थी ऐसे में दोनों मां बेटे रूपा से उलझे हुए थे। दोनों मां-बेटे कुछ पल के लिए रूपा पर पूरी तरह से हावी हो चुके थै। लेकिन रूपा एक छटा हुआ बदमाश था और काफी ताकतवर भी था। रूपा नहीं अब तक ना जाने कितने लोगों को अपनी ताकत के बल पर डराया धमकाया और उन्हें मारा भी था और आज एक औरत और एक छोटे बच्चे के हाथों मार खाकर में पूरी तरह से क्रोध से भर गया था वैसे तो वह इन दोनों से कभी मार नहीं खा पाता लेकिन वह इन दोनों को कमजोर समझ बैठा था इसलिए मा खा गया लेकिन अब दुबारा उससे ऐसी गलती नहीं होने वाली थी।.... रूपा क्रोध से भर कर बैठा था.... मोका देखकर सुगंधा आवेश में आकर रूपा की पीठ पर एक लात दे मारी इस बार फिर से रूपा कीचड़ में जा गिरा....
रूपा एकदम से आगबबूला हो चुका था एक औरत और एक छोटे बच्चों के हाथ से मार खाकर वह अपनी नजरों में ही शर्मिंदा हुआ जा रहा था वह भी एकदम क्रोध से भर चुका था और तुरंत उठा और सुगंधा के बाल जोर से पकड़ कर अपनी तरफ खींचते हुए बोला।

मादरचोद रंडी तेरी इतनी हिम्मत कि तू मुझे लात से मार रही है। मादरचोद( इतना कहते हुए जोर से दो चार थप्पड़ उसके दोनों गाल पर लगा दिया... अपनी मां को इस तरह से मार खाता देखकर रोहन तुरंत रूपा की तरफ आगे बढ़ा लेकिन इस बार रूपा पूरी तरह से चौकन्ना था... और यह भी समझ गया था कि अगर सुगंधा जैसी खूबसूरत औरत से मजे लेना है तो रोहन को यहीं रोकना होगा वरना उसकी इतनी मेहनत सब बेकार जाएगी इसलिए रूपा पूरी तरह से चौकन्ना हो गया था.... इसलिए जैसे ही रोहन उस पर वार करने के लिए उसके करीब पहुंचा वैसे ही तुरंत तीव्र गति से अपना हाथ चलाते हुए सीधा उसके गर्दन के पीछे दे मारा... रोहन ज्यों का त्यों गश खाकर वहीं जमीन पर गिर पड़ा यह देखकर सुगंधा एकदम से जैसे होश खो बैठी हो इस तरह से आंखें फाड़े अपने बेटे को देखती रह गई.. अपने बेटे को जमीन पर गिरता हुआ देखकर जोर से चिल्लाई और जैसे वह पत्थर की बन गई हो इस तरह से एकदम जड़वंत हो गई। बादलों की गड़गड़ाहट पूरे माहौल को भयानक बना रही थी ऐसे में रूपा सिंह किसी दैत्य से कम नहीं लग रहा था... रोहन को गिरता हुआ देखकर वह जोर-जोर से हंसने लगा लेकिन उसकी हंसी सिर्फ सुगंधा के कानों तक ही पहुंच रही थी क्योंकि इतनी जोर से बारिश हो रही थी कि तू दूर तक कोई जोर जोर से चीखे तो भी सुनने वाला नहीं था। रूपा सुगंधा की तरफ घुमा और बोला...

अब बोल रंड़ी अब क्या करेगी किसको बोला है कि जहां पर अपनी इज्जत बचाने के लिए। अब तुझे यहां मेरे हाथों से बचाने वाला कोई नहीं है अब मैं देखता हूं कि तुम कैसे मुझ से बचती है बहुत गुरूर है ना तुझे अपनी जवानी पर आज मैं तेरे गुरुर को अपने हाथों से मशलुगा.... बहुत तड़पाई है तूने मुझे मेरी जान.....
( इतना कहते हुए रूपा सुगंधाको कमर से पकड़ कर उठा लिया और अपने कंधे पर रख दिया और उसे ले जाने लगा तब जाकर सुगंधाको जैसे होश आया हो और वह जोर-जोर से उसकी पीठ पर अपने हाथ मारते हुए छोड़ने की दुहाई देने लगी लेकिन अब पंछी जाल में फंस चुकी थी। रूपा उसके साथ अब मनमानी करने वाला था उसे छोड़ने वाला नहीं था वह उसे कंधे पर लादे सामने खंडहर की तरफ जाने लगा बारिश अभी भी जोरों से पड़ रही थी ।
 
सुगंधा कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि इस खूबसूरत सफर का अंजाम इस तरह से बुरा होगा.. बादलों की गड़गड़ाहट भयानक रूप धारण कर चुकी थी सिकंदर बता रहे थे और रूपा उसे अपने कंधे पर उठाए खंडहर की ओर बढ़ रहा था। दूर-दूर तक किसी भी इंसान का नामोनिशान नहीं था सुगंधा जोर-जोर से चिल्ला रही थी कि कोई उसे बचा ले.. लेकिन वहां उसकी आवाज सुनने वाला कोई भी नहीं था बस्ती तो केवल बादलों की गड़गड़ाहट बिजली की चमक तेज बारिश की आवाज और साए साए करके तेज चल रही हवा इन सबके बीच रूपा किसी दैत्य की तरह सुगंधा को अपने कंधे पर उठाए लिए चला जा रहा था... सुगंधा जोर-जोर से उसके सीने पर मुक्के का वार कर रहे थे लेकिन वह शैतान इंसान था उस पर एक औरत के मुक्के का कोई असर नहीं हो रहा था बल्कि वह और जोर जोर से हंस रहा था।
रूपा को इस बात का एहसास हो चुका था कि आज की रात उसे बेहद आनंद मिलने वाला था क्योंकि सुगंधा को जिस तरह से उठाया था उसकी हथेली सुगंधा की गदराई और बड़ी-बड़ी नितंबों पर बराबर दबी हुई थी जिससे वह जाते-जाते भी बार-बार सुगंधा की गांड को अपनी हथेली से दबा दे रहा था और ऐसा करने से उसके तन बदन में तुरंत उत्तेजना का प्रसार हो रहा था।... नतीजन यह हुआ था कि उसका सोया हुआ लंड एक बार फिर से जाग गया था।... सुगंधा उसके हाथों में छटपटा रही थी... सुगंधा की छटपटाहट देखकर रूपा को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी बारिश अपने जोरों पर हो रही थी जिसकी वजह से दोनों पूरी तरह से भीग चुके थे सुगंधा का आंचल उसके बदन से नीचे गिर कर जमीन पर लहरा रहा था अपना तफरी में उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और रुका था कि इसी माहौल में भी सुगंधा जैसी खूबसूरत औरत के बदन से पूरी तरह से आनंद लेते हुए उसके गदराए नितंब को अपनी दोनों हथेलियों से दबाते हुए खंडहर की तरफ बढ़ रहा था और साथ में गाली देते हुए बोल रहा था कि...

साली रंडी बहुत तड़पाती है तूने मुझे तुम सबका बदला मैं गिन गिन के लूंगा साली तू नहीं जानती थी जिस दिन से तू इस घर में आई थी उस दिन से ही मेरी नजर तुझ पर है तेरी खूबसूरती कर रखने पीना चाहता था तुझे अपने लंड का मजा देना चाहता था लेकिन तू एकदम मादरचोद मजा लेना तो दूर तू मुझे हाथ भी लगाने नहीं देती थी तभी से मैं तेरे पीछे पड़ गया था लेकिन मुझे मौका नहीं मिल रहा है आज मुझे मौका मिला है आज मैं जी भर कर अपनी प्यास तेरे खूबसूरत बदन को निचोड़ कर बूझाऊंगा।

मुझे जाने दो मैं तुम्हारे हाथ जोड़ती हूं मुझे मेरे बेटे के पास जाना है ना जाने किस हाल में होगा...
( तब तक दोनों खंडहर के अंदर पहुंच चुके थे। रूपा उसे अपने कंधे पर से नीचे उतार दिया और जैसे ही उसे नीचे उतारा सुगंधा भागने को हुई ही थी कि वह उसकी कलाई पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और ऊसे अपने सीने से सटाते हुए बोला।)

चली जाना मेरी जान अपने बेटे के पास लेकिन जाने से पहले मेरे बदन की प्यास बुझा दो... ( इतना कहने के साथ ही वह उसे अपनी बाहों में कस कर भर लिया... घंटा अपनी पूरी ताकत लगाकर उससे छूटने का प्रयास करने लगी और जोर से धक्का देकर उसे भागने लगी थी तभी फिर से रूपा आगे बढ़ा और सुगंधा.. को पकड़ने के चक्कर में उसका पैर फिसला और वह गिरते-गिरते सुगंधा की टांग पकड़ लिया जिसकी वजह से सुगंधा भी गिर गई... )

भागती कहां है हरामजादी.... आज बिना तेरी चुदाई कीए तुझे जाने नहीं दूंगा।... (इतना कहते हुए सुगंधा को वह अपनी तरफ खींचने लगा... रूपा बड़ी ताकत लगाकर उसकी टांग पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच रहा था चारों तरफ को धोखा दे रहा था दिखाई कुछ दे नहीं रहा था खाली टटोलकर ही अंदाजा लगा रहा था लेकिन बिजली की चमक की वजह से उसके उजाले में रह रहे कर सुगंधा उसे नजर आ जा रही थी.... इस अफरातफरी में सुगंधा के कपड़े अस्त-व्यस्त हो चुके थे जैसे ही रूपा सुगंधा की बदन के ऊपर आया तो वह उसे अपनी बाहों में भर लिया रूपा को बेहद सुख की अनुभूति हो रही थी लेकिन सुगंधा चीख रही थी चिल्ला रही थी उससे छूटने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन रूपा काफी बलशाली था वह उसे अपनी बाहों में भर कर उसके ऊपर लेटा हुआ था।... उसे बहुत मजा आ रहा था दोनों का बदन भीगा हुआ था जो कि सुगंधा. की खूबसूरत जवानी से भरपूर बदन की गर्मी से उसका तन बदन भी गरम हो रहा था।
एक पल की देर लगाए बिना ही रूपा अपने दोनों हाथों की हथेलियों में सुगंधा की दोनों चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया।रूपा इतनी जोर से सुगंधा की चुचियों को दबाया की सुगंधा के मुंह से दर्द से कराहने की आवाज निकल गई।... रूपा तो सुगंधाको चुमना चाटना शुरू कर दिया... सुगंधा उससे छूटने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन उसके आगे उसकी एक नहीं चल रही थी फिर भी वह अपनी इज्जत बचाने के लिए पूरा दम लगा कर उसे जोर से धकेली और वह फिर से एक बार नीचे गिर गया सुगंधा तुरंत खड़ी होकर भागने लगी और रूपा की फुर्ती दिखाते हुए एक बार फिर से उसे पीछे से उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे दबोच लिया इस तरह से दबोचने से सुगंधा की बड़ी-बड़ी गाड़ सीधे उसके लंड से सट गई इसका एहसास रूपा को होते ही रूपा मस्त हो गया काफी दिनों बाद रूपा किसी औरत को अपनी बाहों में भरा था इस बार कोई गलती नहीं करना चाहता था उसका हाथ पकड़कर उसे खड़ी किया और दो चार थप्पड़ के गाल पर लगा दिया जिससे सुगंधा पूरी तरह से सनन हो गई।

मादरचोद बहुत नखरा कर रही है.. ऐसा लग रहा है कि कभी किसी से पेलवाई ही नहीं है। एक बार मेरा अपनी बुर में ले लेगी तो घिस नहीं जाएगी.....
( रूपा का बोलते हुए किसी खबर में उसी पीठ के बल लिटा दिया और साड़ी से उसका हाथ बांध दिया ताकि वह कुछ कर ना सके रूपा कुछ देर तक यूं ही सुगंधा की खूबसूरत जवानी को घुरने लगा.... सुगंधा के गाल पर रूपा ने इतनी जोर जोर से दो चार थप्पड़ जड़ दिए थे कि सुगंधा अपने होश खो बैठी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करना है और उसके साथ क्या हो रहा है वह बस पीठ के बल लेटी हुई थी हालांकि कुछ नजर तो नहीं आ रहा था क्योंकि बारिश ओर रात पुरी तरह से माहोल पर हावी हो चुके थे...

सुगंधा का चीखना चिल्लाना बंद हो चुका था वो एकदम से सुन्यमनस्क हो चुकी थी . । रुपा घुटनों के बल बैठा हुआ था रहरह कर बिजली चमक जा रही थी जिसकी उजाले मे ऊसे अब सुगंधा का बदन साफ साफ नजर आ रहा था। इस तरह की भागमभाग अफरातफरी में उसके बदन से साड़ी छोड़कर नीचे जमीन पर गिरी हुई थी जिससे वह सुगंधा के हाथों को बांधा हुआ था और उसका पेटिकोट उसकी जांघों से एकदम ऊपर की तरफ चल गई थी जिससे उसकी लाल रंग की पेंटी साफ़ नजर आ रही थी... सूगंधा का गोरा दूधिया बदन अंधेरे में भी अपनी आभा बिखेर रहा था। रूपा तो सुगंधा का खूबसूरत बदन देख कर पागल हुआ जा रहा था रूपा की आंखों के सामने अपनी सबसे ज्यादा अरमानों की रानी सुगंधा अर्धनग्न अवस्था में पड़ी थी रूपा को तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बिजली की चमक की रोशनी में वह सुगंधा के ऊपर से नीचे की तरफ देख रहा था.... सुगंधा की मोटी मोटी चिकनी जागे रूपा के लंड के कड़क पन को बढ़ा दे रही थी रूपा के बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा था वो अपनी हथेली सुगंधा के चिकनी जांघों पर रख कर ऊसे ऊपर से नीचे तक. सहलाने लगा ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी एक अजीब सा अहसास उसके तन बदन को व्याकुल बना रहा था... सुगंधा की लाल रंग की चड्डी को देख कर उसके बदन में वासना पुरी तरह से सवार हो गया क्योंकि वह भी अच्छी तरह से जानता था कि सुगंधा अपनी चड्डी के अंदर उस अनमोल और अतुल खजाने को छुपा कर रखी थी जिसे पाने के लिए दुनिया का हर मर्द तड़पता है और उसे पाने के लिए उसे हासिल करने के लिए हर वो काम कर जाता है जो कि उसके लिए नामुमकिन सा होता है और वह भी तो सुगंधा की चड्डी में छीपे उसी अनमोल खजाने को लूटने के लिए इतनी तूफानी बारिश की परवाह किए बिना ही इतनी दूर गाड़ी चला कर आया था और उसकी यह मेहनत जैसे रंग ला रही हो इस तरह से उस अनमोल खजाने को लूटने के लिए बस कुछ ही पल की देरी थी और वह अनमोल खजाना उसकी आंखों के सामने अपनी आभा बिखेर रहा था।
जब जब आसमान में बिजली चमकती तब तक वहां सुगंधा के खूबसूरत बदन को ऊपर से नीचे की तरफ देखने लगता.. सुगंधा पानी में पूरी तरह से भीग चुकी थी जिसकी वजह से उसके कपड़े तक ढीले हो चुके थे और उसकी पेंटी इतनी ज्यादा गीली हो चुकी थी कि वहां उसके अंदरूनी अंगों से चिपक सी गई थी और चड्डी पहने होने के बावजूद भी सुगंधा का खूबसूरत अंग जिसे बुर कहा जाता है। उसकी पूरी संरचना उसका आकार पूरी तरह से गीली चड्डी के ऊपर उपसा हुआ नजर आ रहा था। जिसे देखकर रूपा अपने होशो हवास खो दे रहा था... वह रूपा के उस अंग को हाथ लगाना चाहता था उसे छूकर देखना चाहता था लेकिन तभी उसके मन में ख्याल आया कि वह रूपा को एक बार पूरी तरह से अपने हाथों से नंगी कर दे... क्योंकी जिस ओरत को वह बरसों से अपने दिल में बसाएं बैठा था जिसे चोदने की ख्वाहिश रखता था आज वह उसकी आंखों के सामने थी.. और उसकी मनोकामना बढ़ती जा रही थी वह सुगंधा को पूरी तरह से नंगी देखना चाहता था इसलिए वह ऊसे नंगी करने के लिए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसके ब्लाउज के बटन खोलने लगा... जैसे ही रूपा सुगंधा के ब्लाउज के बटन खोलने के लिए अपने हाथ आगे बढ़ा कर अपनी उंगलियों से उसके बटन को खोलने लगा वैसे ही उसकी उंगलियां सुगंधा की नरम नरम र्ई जैसे चुचियों में धंसने लगी। रूपा के बदन में उत्तेजना का सैलाब उठने लगा यकीन नहीं हो रहा था कि किसी की चूचियां इतनी ज्यादा नरम हो सकती है वह जल्द से जल्द सुगंधा के वक्षस्थल को नग्न कर देना चाहता था। वैसे तो पहले से ही तेज बारिश और रूपा से उलझने की वजह से इसकी ब्लाउज के ऊपरी हिस्से के दोनों बटन खुल चुके थे जिसकी वजह से उसकी उन्नत सूचियों की गहरी घाटी लकीर के रूप में साफ नजर आ रही थी.. जैसे-जैसे वह ब्लाउज के बटन खोल ताजा रहा था वैसे वैसे सुगंधा की दोनों गोलाइयां नजर आ रही थी।... रूपा ने अब तक अनगिनत औरतों को अपने हाथों से नंगी करके उनके खूबसूरत बदन का मजा ले चुका था लेकिन ना जाने क्यों सुगंधा के वस्त्र को उतारते समय रूपा को बेहद अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसकी आंखें सुगंधा की खूबसूरत बदन को देख कर फटी की फटी रह जा रही थी। देखते ही देखते रुका अपनी का पति गोलियों के सहारे सुगंधा के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया उसकी आंखों के सामने ब्लाउज की खुलते ही लाल रंग की ब्रा नज़र आने लगी जिसे देख रूपा की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी क्योंकि अब तक जितनी भी औरतों के साथ रूपा ने शारीरिक संबंध बनाए थे इन सारी औरतों की वस्तु उतारे थे उनमें से कोई भी औरत ब्रा नहीं पहनती थी इसलिए रूपा की आंखें फटी की फटी रह गई थी उस लाल रंग की ब्रा के अंदर के छीपे सुगंधा की गोल गोल चुचियों को देखकर.. रूपा की हालत खराब हुए जा रही थी.. रूपा लालायित हो रहा था दोनों चीजों को अपनी हथेली में लेकर दबाने के लिए उसे मसलने के लिए उसे मुंह में भर कर पीने के लिए पर इसके लिए उसने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर सुगंधा की ब्रा को नीचे से पकड़ कर ऊपर की तरफ खींच के एकदम गले तक कर दिया जिससे सुगंधा की दोनों चूचियां ब्रा की कैद से एकदम आजाद हो गई....

अपनी आंखों के सामने सुगंधा की नंगी गोल-गोल चुचियों को देखकर रूपा तड़प उठा और एक हाथ से पजामे में खड़े अपने लंड को मसलने लगा। सुगंधा आपलक् सी रूपा के क्रूर चेहरे को देख रही थी उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था किसके साथ हो क्या रहा है एक सदमा सा लगा था उसे.... और दूसरी तरफ रूपा की मैंने पानी आ रहा था उसकी आंखों के सामने ऐसा लग रहा था कि सोने के कटोरे में किसी ने गुलाब जामुन परोस दीया हो और वह उस गुलाब जामुन को खाने के लिए अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा दिया....
रूपा अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मजबूत हथेलियों को सुगंधा की नरम नरम चूचीयो पर रख दिया और फिर जोर से दबा दिया.....

आहहहहहह....... ( शुन्यमनस्क हो चुकी सुगंधा रूपा की हरकत से दर्द से कराह उठी और तब जाकर उसे होश आया.... अपने आप को इस अवस्था में देखकर वह जोर से चीख ऊठी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि रूपा ने उसके कपड़ों को उतार चुका है। अपनी नंगी चूचियों को रूपा के हाथों में देखकर वहां क्रोध से भर गए और उसे मारने के लिए जैसे अपने हाथ उठाने की कोशिश की तब उसे पता चला कि उसके हाथ उसकी ही साड़ी से बंधे हुए थे.... वह अपने आप को एकदम लाचार महसूस करने लगी रूपा जोर जोर से हंसते हुए उसकी गुलाबी चुचियों को मसलने लगा....

अब क्या करें कि मेरी जान अब तो पूरी तरह से मेरी किरन है आज जी भर कर तेरे जवान और खूबसूरत हुस्न से खेलूंगा देखता हूं मुझे कौन रोकता है। शादी बहुत नखरे दिखाती थी अगर बिना किसी एतराज के तू मुझे अपना सब कुछ सौप देती तो आज यह दिन न देखना पड़ता.... आज तो मैं तुझे अपने लंड की ताकत दिखा कर ही रहूंगा.... प्ले देखेगी मेरे लंड को ले देख कितना दमदार है तेरे आदमी का भी ऐसा नहीं होगा मे यह बात अच्छी तरह से जानता था तभी तो तुझे अपनी बाहों में भरना चाहता था तुझे एक असली मर्द की मर्दानगी का स्वाद चखाना चाहता था। लेकिन तू नखरे दिखाते हुए सती सावित्री बनी रही और चुदाई का असली सुख नहीं भोग पाई। लेकिन तू चिंता मत कर आज तुझे ऐसा सुख दूंगा कि तू हमेशा मेरी बाहों में अपनी दुनिया ढुढेगी।
( इतना कहने के साथ ही रूपा अपने पजामे में से अपनै खड़े लंड को बाहर निकाल लिया और उसकी आंखों के सामने उसे एक हाथ से पकड़ कर हिलाने लगा.. सुगंधा की नजर अनायास ही उसके खाली और काले लंड पर पड़ गई और उसे देखते ही वह डर के मारे सिहर उठी.. )

मुझे जाना तो मुझे छोड़ दो कृपा करो भगवान के लिए मुझे छोड़ दो मुझे गंदी मत करो किसी को पता चलेगा तो मैं कहीं की नहीं रह जाऊंगी...

ऐसा कुछ भी नहीं होगा मेरी जान.. (. एक हाथ से अपने लंड को हिलाते हुए) ऐसा कुछ भी नहीं होगा किसी को कानों कान पता भी नहीं चलेगा और तुम्हारा कुछ घिस भी नहीं जाएगा.. बस मेरे लंड को अपनी बुर के अंदर ले लो इतना मजा दूंगा कि तुम जिंदगी भर याद रखोगी।....

हरामजादै तूने सोच भी कैसे लिया कि मैं तुझे तेरी मनमानी करने दूंगी।
( सुगंधा फिर से छुटने की कोशिश करने लगी लेकिन... हाथ बंधे होने के कारण वह पूरी तरह से लाचार थी। रूपा उसकी लाचारी देखकर जोर जोर से हंस रहा था और साथ ही अपने दोनों हंसते भी आगे बढ़ाकर दोनों हाथों से उसकी नारंगियो को जोर जोर से दबाते हुए मसलने लगा... रूपा इतनी जोर से के दोनों दूध को दबा रहा था कि उसकी दर्द के बारे चीख निकल रही थी।..... बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली का चमकना बंद नहीं हो रहा था ऐसा लग रहा था कि यह तूफानी बारिश सुगंधा को रोकने के लिए थी। दूसरी तरफ रोहन की आग धीरे-धीरे खुलने लगी थी उसे होता रहा था वह धीरे-धीरे बैठ गया हालांकि उस जगह पर पानी भरने लगा था वह पूरी तरह से भीग चुका था... तेज हवाओं के साथ तूफानी बारिश इस कदर पड़ रही थी कि वह हमको कुछ साफ-साफ नजर नहीं आ रहा था कुछ देर बाद उसे जैसे सब कुछ याद आ रहा है इस तरह से वह झटके से खड़ा हुआ और गाड़ी की तरफ भागा गाड़ी का दरवाजा खोल कर अंदर देखा तो कोई भी नहीं था दोनों गाड़ी पूरी तरह से खाली थी वो एकदम से डर गया उसका दिल जोरों से धड़क रहा था दिमाग में ढेर सारे सवाल चल रही थी अजीब अजीब से ख्याल आ रहे थे उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा क्या करें....
वह मन ही मन भगवान से मनाने लगा कि उसकी मां के साथ कुछ इतना हुआ हो वह आदमी उसके साथ कुछ ऐसा वैसा काम न कर दिया हो।

वह पागलों की तरह इधर उधर भाग रहा था वह रोने लगा और जोर-जोर से मम्मी मम्मी पर के चिल्लाने लगा वह हर तरफ ढूंढने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार वह आदमी उसकी मां को लेकर कहा गया उसे डर लगने लगा था कि जरूर उस आदमी ने उसकी मां के साथ गलत किया होगा....
जोर जोर से चिल्ला कर अपनी मां को पुकार रहा था कि कहीं से उसकी आवाज आ जाए तभी उसके कानों में उसकी मां की चीख सुनाई दी और वह तुरंत वहीं खड़े होकर सुनने लगा कि आखिरकार वह आवाज कहां से आ रही थी कुछ सेकंड उसी तरह से स्थिर खड़े रहने के बाद मुझे पक्का यकीन हो गया कि आवाज खंडहर की तरफ आ रही थी और उसी खंडार में उसकी मां भी बहुत जोर से बड़ी फुर्ती के साथ खंडहर की तरफ भागा। वह आग बबूला हो चुका था...लेकिन ऊसने जोश में होश नहीं खोया था खंडहर के अंदर जाते जाते बाहर पड़े मोटे लकड़े को उसने ऊठा लिया था.. अंदर से चीखने की आवाज तेज होती जा रही थी क्योंकि रूपा अब सुगंधा की पैंटी को उतार ले जा रहा था। गंदा फिर भी उसे छोड़ने की दुआ मांग रही थी मुझसे मिलने से कर रही थी लेकिन वह कहां मानने वाला था उस पर तो वासना का भूत सवार हो चुका था....

मेरी जान आज मैं तेरी एक भी नहीं सुनूंगा और ना ही कोई आते ही मदद करने आएगा आज मैं तुझे अपने हाथों से एकदम नंगी कर दूंगा आ तेरे जिस्म के पोर पोर को अपने होंठों से चुमूगा.....
( इतना कहते हुए रूपा अपने दोनों हाथों की उंगलियों से सुगंधा की पेंटिं को पकड़ लिया था और नीचे सरकाने की फिराक में था कि तभी यह नजारा रोहन ने अपनी आंखों से देख लिया और एकदम से आगबबूला हो गया सुगंधा तो भगवान से मनाते हुए अपनी आंखों को बंद कर ली थी इसके आगे का हादसा उससे देखा देखा नहीं जाता वह मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि तभी खटाक की आवाज आई.. और रूपा अगले ही पल जमीन पर गिर पड़ा.. )
 
रोहन जोर-जोर से सांसे ले रहा था उसके हाथ में लकड़ा था जिसे वह मजबूती से पकड़ रखा था। रोहन को समझते देर नहीं लगी थी रूपा के ढेर होते ही खतरा टल गया था आखिरकार उसने अपनी मां की इज्जत बचा ली थी और अपने अरमानों को भी बचा लिया था दूसरी तरफ सुगंधाको को बंद किए आने वाले खतरे कर रही थी रूपा की उंगलियों को पैंटी की इलास्टिक पर महसूस करते ही उसे समझ में आ गया था कि रूपा अब ऊसकी चड्डी उतार कर उसे नंगी करने वाला है उसे इस बात का आभास हो चुका था कि अब उसकी इज्जत रूपा के यहां तो नहीं बता सकती क्योंकि वहां पर उसे बचाने वाला कोई बात नहीं एक था वह तो रूपा के हाथों बेहोश हो चुका था सुगंधा मन ही मन में भगवान से प्रार्थना कर रही थी अभी भी सुगंधा पीठ के बल चित लेटी हुई थी ब्लाउज के बटन खुले हुए थे जिससे उसके दोनों खरबूजे तनकर अपनी अंदर की जवानी को प्रकट कर रहे थे इस पर रोहन की नजर पड़ गई थी लेकिन माहौल का असर उसके मन मस्तिष्क के भी पड़ा था इस समय अपनी मां के नंगे बदन को देख कर उसके तन बदन में उत्तेजना नहीं बल्कि रूपा के द्वारा की गई हरकत की वजह से रूपा के प्रति क्रोध भरा हुआ था....
सुगंधा के मन में रूपा का डर इस कदर भर गया था कि उसके बगल में ही ढेर हो कर गिरे रूपा के बारे में उसे कुछ भी पता नहीं चला था वह बस भगवान से प्रार्थना करते हुए मन ही मन बोल रही थी कि उसकी इज्जत बचा ले.... सुगंधा के चेहरे पर ड़र साफ झलक रहा था। बाल अस्त व्यस्त हो चुके थे बदन पूरी तरह से भीग चुका था।...
रोहन अपनी मां को ऊपर से नीचे की तरफ देख रहा है वाह यह देखने की कोशिश कर रहा था कि.. रूपा सिंह ने उसकी मां को कितना चोट पहुंचाया है... और ज्यादातर उसके मन में यह जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कि कहीं रूपा सिंह ने उसकी मां की चुदाई तो नहीं कर दिया है हल्की-हल्की बिजली के चमकने की रोशनी में उसे इस बात का पता चल गया था कि उसकी मां के बदन पर चड्डी अभी भी बरकरार थी मतलब साफ था कि अभी तक रुपा ने उसकी चड्डी उतारा नहीं था। बल्कि कुछ सेकेंड की देरी अगर और हुई होती तो शायद रूपा अपने हाथों से उसकी मां की चड्डी उतार कर उसे नंगी कर चुका होता लेकिन जैसे ही वह चड्डी पर हाथ रखा था रोहन पीछे से उसके सिर पर मोटा लगड़ा दे मारा था उस समय रोहन को यह नहीं मालूम था कि उसकी मां की चड्डी उतारने जा रहा है...
अपनी मां के बदन पर चड्डी को सही सलामत देखकर रोहन के मन को शांति मिली क्योंकि वह समझ गया था कि रूपा सिंह अभी तक उसकी मां के साथ कुछ कर नहीं पाया था लेकिन वह अभी भी अपनी मां की तरफ देख रहा था जो कि डर के मारे अपनी आंख तक नहीं खोल रही थी.... वह अभी भी मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि तभी उसके कानों में रोहन की आवाज सुनाई दी...

उठो मम्मी खतरा टल गया है.....
( जानी पहचानी अपने ही बेटे की आवाज को सुनते ही सुगंधा की सांसे थम गई वह बिना कुछ बोले फिर से अपने बेटे की आवाज सुनना चाहती थी इसलिए वह अभी भी अपनी आंखों को बंद किए हुए अपने बेटे की आवाज सुनने की कोशिश करने लगी जो कि रोहन फिर बोला... )

उठ जाओ मम्मी अब तुम सलामत हो एकदम सुरक्षित हो.....
( इतना सुनते ही सुगंधा झट से आंखें खोल दी और अपनी आंखों के सामने अपने बेटे को खड़ा देखकर खुशी से एकदम प्रसन्न हो गई.... वह तुरंत उठ कर बैठ गए और जोर से रोते हुए अपने दोनों बाहें फैला दी रोहन दे लगभग रोते हुए अपनी मां के बदन से लिपट गया दोनों एक दूसरे के गले लग कर रो रहे थे दोनों की आंखों से आंसू बह रहे थे लेकिन आंसू खुशी के थे क्योंकि एक बहुत बड़ा संकट टल चुका था.... सुगंधा की इज्जत बच चुकी थी रोहन खुश था कि उसने आज अपनी मां की इज्जत बचा ली थी और इससे भी ज्यादा खुशी इस बात की थी कि उसके अरमान उसका सपना अभी भी बरकरार था... रोहन को इस बात का एहसास तक नहीं हुआ कि उसकी मां की नंगी बड़ी बड़ी चूचियां उसके सीने से रगड़ खा रही थी और इस बात से सुगंधा भी अनजान थी क्योंकि इस माहौल में दोनों मन ही मन एक दूसरे को बधाई दे रहे थे इतने बड़े संकट दर्द जाने की प्रसन्नता उनकी आंखों से बह रहे आंसुओं में साफ झलक रही थी..... रोहन अपनी मम्मी को सांत्वना देते हुए बोला... n

मम्मी सब कुछ ठीक हो चुका है इस शैतान को मैं ढेर कर चुका हूं... यह देखो यह पड़ा है बगल में...
( बगल में पड़े रूपा की तरफ हाथ से इशारा करते हुए बोला और उस पर नजर पड़ते ही सुगंधा एक बार फिर से क्रोध से बौखला गई और खड़ी होकर उसके चेहरे पर अपने पैर से मारने लगी... उसका गुस्सा जायज था क्योंकि वह इंसान उसकी दुनिया उजाड़ने पर उतारू हो चुका था उसकी इज्जत लेने पर उतारू हो चुका था और उसकी सजा उसे मिल चुकी थी...... रोहन अपनी मां को अपने कपड़े को व्यवस्थित करने के लिए बोला जिस पर सुगंधा का अभी तक बिल्कुल भी ध्यान नहीं गया था... अपनी स्थिति का भान होते ही व शर्म से पानी पानी हो गई... वह तुरंत जमीन पर पड़ी अपनी साड़ी जो कि उसके हाथों से बनी हुई थी जिसे आते ही रोहन उसके हाथों से खून चुका था सुगंधा तुरंत अपनी साड़ी उठा लिया और उसे अपने बदन से लपेटने लगी.... राहत वाली बात उसके लिए मेथी की खंडार में अंधेरा बहुत था हालांकि रहने पर बिजली चमकने की वजह से अंदर उजाला हो जा रहा था लेकिन कुछ सेकंड के लिए ही लेकिन फिर भी वह अपनी बेटे के सामने अपनी हालत पर शर्म महसूस करने लगी और जल्दी से अपने कपड़े को व्यवस्थित करके खंडहर से बाहर आ गई। बाहर अभी भी तेज बारिश हो रही थी लेकिन इज्जत पर बनाई खतरे को अपने माथे से डालते हुए महसूस करके सुगंधा को यह बारिश का पानी अच्छा लगने लगा उसका मन प्रसन्नता वह तुरंत गाड़ी में बैठ गई और साथ में रोहन भी बैठ गया.... सुगंधा गाड़ी का गियर बदलकर पीछे की तरफ लिए और खेतों की तरफ घुमा कर उसे फिर से मुख्य सड़क पर ले आई और वहां से अपने घर की तरफ चल दी...

इस वाक्ये को कुछ दिन गुजर गए... सुगंधा रोज अपने बेटे के बारे में सोचकर घंटों व्यतीत कर दे रही थी खास करके रूपा से गिरने वाली उसकी अदा और उसने हिम्मत देखकर वह पूरी तरह से अपने बेटे की दीवानी हो चुकी थी उसे समझ में आ गया था कि उसके बेटे में मरदानगी पूरी तरह से छा चुकी थी। और अपने ही बेटे की मर्दानगी की पूरी तरह से सुगंधा कायल हो चुकी थी उसे इस बात की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि इस तरह के हालात उसके सामने आएंगे लेकिन ऐसे हालात में उसका बेटा एक मजबूत सहारा बनकर रूपा जैसे शैतान से लड़कर जिस तरह से उसकी इज्जत बचाया था उसकी उम्मीद उसे बिल्कुल भी नहीं थी..... सुगंधा मन ही मन अपने बेटे को धन्यवाद देती रहती थी क्योंकि उसकी हिम्मत की वजह से उसकी इज्जत सलामत है जिसे वह बरसों से सहेज कर रखी थी कभी किसी पर भी अपनी जवानी पीघलने नहीं दी थी उस इज्जत को बड़ी ही मर्दानगी दिखाते हुए बचा लिया था....
दिन गुजर रहे थे और दिन जैसे जैसे गुजर रहा था वैसे वैसे रोहन की उत्सुकता अपनी मां के प्रति बढ़ती जा रही थी अब आते जाते हैं औरतें बैठते हमेशा उसके मन में उसकी मां की छवि बसी रहती थी..... वह अपनी मां के बारे में सोच कर कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव करने लगा था और जिस तरह से उसकी मां खुलकर गाड़ी में उसे बातें कर रही थी उससे तो उसे लगने लगा था कि शायद उसकी मां की तरफ से ईसारा बिल्कुल साफ था उसे पाने के लिए लेकिन एक बेटा होने के नाते वह अभी भी मर्यादा और संस्कार की डोर में बधा हुआ था।

सुगंधा रात के समय अपने कमरे में बिस्तर पर बैठ कर अपनी बेटे के बारे में सोच रही थी और उस दिन की घटना के बारे में सोच रही थी वह मन में सोच रही थी की अगर उस दिन उसका बेटा साथ में ना होता तो शायद उसकी इज्जत सलामत ना रहती हो सकता है इससे भी ज्यादा कुछ हो सकता था हो सकता था कि वह शैतान उसकी जान भी ले लेता। लेकिन ऐसा हुआ नहीं था उसके बेटे के चलते आज वह सही सलामत और इज्जतदार औरत थी वरना रूपा तो कोई भी कसर नहीं छोड़ा था उसकी इज्जत को तार-तार करने में.... उस घटना को याद करके सुगंधा के चेहरे पर क्रोध की लकीरे उपज में लगती थी लेकिन रोहन के बारे में सोचते हैं उसका चेहरा प्रसन्नता से खिल ऊठता था। शादी में जिस तरह से उसने जानू पहुंचकर पेशाब करने के बाद ने अपने बेटे को अपनी बड़ी बड़ी नंगी गांड के दर्शन कराने थे उसे देखने के बाद उसका बेटा पूरी तरह से मदहोश हो चुका था और इस बारे में सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी तभी तो वह गाड़ी के अंदर खुलकर बातें करते हुए अपने बेटे को पूरी तरह से अपने हुस्न का दीवाना बना देना चाहती थी ताकि घर पर आते ही वह कोई ना कोई बहाने अपने बेटे के लंड को अपनी बुर के अंदर महसूस कर सके और बरसो की दबी प्यास को बुझा सके। और ऐसा हो भी जाता क्योंकि सुगंधा ने जो एक बहाने से अपने बेटे के मन में चल रही बात उसके मुंह से उगलवाई थी उसे सुनकर उसे इस बात की उम्मीद बढ़ चुकी थी कि उसके एक इशारे पर उसका बेटा उसकी चुदाई करने के लिए तैयार हो जाएगा और वैसे भी एक खूबसूरत औरत की नंगी गांड देखकर भला किसका ईमान नहीं डोलता... और उसका बेटा तो अभी अभी जवानी की दहलीज पर कदम रख रहा था ऐसे में अरमानों का मचलना वाजिब था.... सोच रही थी कि तभी उसे खंडहर वाली बात याद आ गई.... जिस तरह से रूपा गंदी गंदी गाली उसे दे रहा था उसे सुन कर दो सुगंधा की आत्मा बिगड़ने लगी थी तो ऊसके बेटे की क्या हालत होती होगी... एक गैर मर्द के मुंह से अपनी ही मां के बारे में गंदी गंदी गालियां सुनकर किस बेटे का खून नहीं खोलेगा...
रूपा ने उसके कपड़ों को अस्त-व्यस्त कर दिया था ... जिसे देखकर रोहन बैसला गया था और तभी तो खंडहर के बाहर ही उस शैतान से भिड़ गया था। ताकत और उम्र में उसे छोटा होने के बावजूद भी वह उससे बराबर की टक्कर ले रहा था लेकिन उसकी जलाकर की वजह से वह वही चित होकर ढेर हो गया था... सुगंधा अपने मन में सारी बातों को सोच ले जा रही थी क्योंकि उसने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी क्या रूपा उसी कंधे पर उठाए खंडार के अंदर ले जा रहा था उसे लगने लगा था कि अब उसकी इज्जत बचना नामुमकिन है जिसे बरसों से बचा कर रखी थी आज उसी इज़्ज़त को तार-तार कर देगा....
और अपनी इसी ना उम्मीद हो चलिए आज को एक बार फिर से उम्मीद की किरण दिखाते हुए ना जाने कैसे उसका बेटा वहां पहुंच गया और उसकी इज्जत बचा लिया था यह सब सोचकर उसके चेहरे पर मुस्कुराहट आने लगी लेकिन तभी वह उस बारे में ध्यान देते हुए अपने आप से ही बोली की...

रूपा ने जिस तरह की उसकी हालत किया था क्या उसके बेटे ने उस हालत में से देखा होगा क्योंकि जब वह उसकी आंखों के सामने खड़ा था तब इसी ब्लाउज के बटन खुले हुए थे उसकी चूचियां पूरी तरह से नंगी थी और साड़ी बदन से अलग हो चुकी थी क्या रोहन उसे देखा होगा और अगर देखा होगा तो क्या सोच रहा होगा उसके बारे में.... सुगंधा यह सब सोचकर परेशान हो रही थी कि उसके बेटे ने उसकी नंगी चूचियों को देखा कि नहीं देखा अर्ध नग्न बदन की तरफ नजर डाला कि नहीं डाला... फिर मन में यह ख्याल आते ही उसे राहत महसूस हुई कि खंडार के अंदर संपूर्णता अंधेरा छाया हुआ था बस रह-रहकर बिजली की चमक का उजाला खंड़हर में फैल जा रहा था हो सकता है उस उजाले में उसका बेटा उसे देखा भी हो और ना भी देखा हो...
सुगंधा अपने मन में यह सोच सोच रही थी कि तभी उसके दिमाग में चमक हुई और वह मन ही मन सोचने लगी कि अच्छा ही होगा अगर वह उसे उस अवस्था में देख लिया होगा क्योंकि वह भी तो यही चाहती थी वह भी किसी न किसी बहाने अपने खूबसूरत बदन को अपने बेटे को दिखाना चाहती थी ताकि वह पूरी तरह से उसकी खूबसूरती से आकर्षित होकर उसकि बरसों से दबी प्यास को अपनी मर्दानगी भरे लंड से बुझा सके.... और शादी से लौटते समय भी तो यही चाहती थी तभी तो अपने बेटे से रास्ते भर गंदी गंदी बातें कर रही थी ताकि घर पहुंचते ही वह अपने अरमान को पूरा कर सकें और बरसती बारिश में अपनी बंजर जमीन को फुहारों से भीगो सके....
यह सब सोचकर सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजित हो गई और अपने बेटे से चुदवाने के लिए अपने आपको तैयार कर ली... लेकिन सुगंधा एक मां होने के नाते अब सामने से चलकर अपने बेटे के पास जाकर यह तो नहीं कह सकती थी कि.. बेटा मैं तुझसे चुदवाना चाहती हूं....
यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि ऐसा वह नहीं कह सकती और उसके लिए माहौल बनाना होगा... और माहौल बनाने के लिए सुगंधा अपना दिमाग दौड़ाने लगी...
 
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