सुगंधा विवश हो चुकी थी इस तरह के कदम उठाने के लिए जो कि नैतिकता के तौर पर ठीक नहीं था एक मां अपने बेटे के साथ इस तरह के संबंध नहीं बना सकती थी। क्योंकि यह खुद की नजर और समाज की नजर में अपराध था लेकिन जिस्म की प्यास बुझाने के लिए कोई और तरीका सुगंधा के पास नहीं था। सुगंधा का
व्यक्तित्व समाज में बेहद आदरणीय और ऊंचे दर्जे पर था ऐसे में किसी और के साथ संबंध बनाने में सुगंधा की इज्जत पर बना दी और समाज में बदनामी होने का डर था इसलिए ना चाहते हुए भी वह अपने बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए लालायित हो गई
सुगंधा अपने मन में आगे का विचार सोचने लगी। कैसे अपने बेटे को अपनी खूबसूरती के जाल में फंसा कर उसे पूरी तरह से कामांध बनाकर शारीरिक संबंध स्थापित किया जाए इस बारे में वह विचार करने लगी।
ऐसे ही एक दिन सुबह से खूब बारिश हो रही थी और बारिश बंद होने का नाम नहीं ले रही थी और अक्सर बारिश में मर्द को स्त्री संसर्ग और स्त्री को पुरुष संसर्ग की जरूरत कुछ ज्यादा ही महसूस होने लगती है। सुगंधा और रोहन भी इससे बाकात नहीं थे। बरसात की वजह से रोहन भी अपने अंदर इस तरह की काम भावना का अनुभव कर रहा था उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि जब जब वह अपनी मां की तरफ देख रहा था या अपनी मां के बारे में सोच रहा था तब तब उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो जा रहा था और यही हाल सुगंधा का भी हो रहा था।
बरसात का मौसम उसे शूल की तरह चुभ रहा था वह अपने कमरे में खड़ी होकर खिड़की से बाहर का नजारा देख रही थी और बरसात की फुआरे उसे तड़पा रही थी। अपनी टांगों के बीच बुर के अंदर की कुलबुलाहट उसे साफ महसूस हो रही थी। उसे एक मोटे लंड की आवश्यकता जान पड़ रही थी जो कि इस समय उसके घर में उसके बेटे के लंड से उसकी प्यास बुझ सकती थी ऐसे में वह अपने बेटे से शारीरिक संबंध बनाने के लिए लालायित होने लगी।
धीरे-धीरे शाम ढलने लगी बारिश बंद होने का नाम नहीं ले रही थी रोहन भी अपनी मां के इर्द-गिर्द ही घूम रहा था बार-बार और जो नजरों से अपनी मां के खूबसूरत बदन को निहार ले रहा था वैसे भी सुगंधा भी काफी रोमांटिक हुए जा रहे थे जहां भी खड़ी रहती थी वह जानबूझकर अपने नितंबों को बाहर की तरफ उभार पर खड़ी रहती थी ताकि उसके बेटे की नजर उसके उस गोलाकार भूगोल पर जरूर पड़े वैसे भी अगर वह नहीं भी चाहती तो रोहन की नजर उसकी गांड पर ही पड़ती क्योंकि मर्दों की नजर औरतों के बदन पर सबसे पहले उनकी गांड पर ही पड़ती है। मर्दों की नजर औरतों की गांड पर पड़ते ही मर्द तुरंत और उसके बदन की संरचना का अंदाजा लगा लेते हैं औरतों की मदमस्त गांड से ही उनकी खूबसूरती की परिभाषा प्रदर्शित होती है और यही रोहन भी कर रहा था बार-बार वह चोर नजरों से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को निहार ले रहा था जोकि उसके तन बदन में हलचल मचा दे रही थी। रोहन से रहा नहीं जा रहा था वह धीरे धीरे चलते हुए अपनी मां के करीब आ गया और वह भी खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगा ।
मम्मी लगता है कि आज बारिश बंद होने वाली नहीं है। ( रोहन एक बार अपनी मां की कमर के नीचे उसके नितंबों की तरफ नजर डालकर खिड़की से बाहर झांकते हुए बोला,, और सुगंधा अपने बेटे की इस नजर को पहचान ली थी और इसलिए वह मन ही मन प्रसन्न होते हुए अपने बेटे की इस हरकत पर अपने दोनों कोहनी का टेका खिड़की पर रखकर अब कुछ ज्यादा ही अपनी गांड को उभार कर खड़ी होते हुए बोली।)
मुझे भी ऐसा ही लग रहा है कितनी तूफानी बारिश हो रही है (इतना कहते हुए सुगंधा बाहर देखने का नाटक करने लगी जबकि उसकी तिरछी नजर रोहन को देख रही थी और जिस तरह की हरकत उसने की थी दुनिया का कोई भी मर्द औरत की इस कामुक हरकत को देखे बिना नहीं रह सकता था वह इस बेहद काम उत्तेजना से भरपूर नजारे से अपनी नजर को फेर नहीं सकता था और वही काम रोहन ने भी किया था अपनी मां की इस हरकत को वह अपनी नजरों से देख लिया था और इस हरकत को देखने के बाद तो उसके तन बदन में उत्तेजना का संचार काफी तेजी से हो रहा था और उसके लंड की अकड़ बढ़ती जा रही। अपने बेटे की हालत देखकर सुगंधाको मजा आ रहा था जिस तरह से उसका बेटा कामज्वर में जल रहा था उसी तरह से सुगंधा भी तप रही थी।।
रोहन को ऐसी घनघोर बारिश में अपने बेहद करीब खड़े देखकर सुगंधा के तन बदन में काम भावना पैदा होने लगी वह अपने बेटे की उपस्थिति में असहज हुए जा रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह अपने बेटे को अपनी तरफ लुभाने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन इतने से कुछ भी होने वाला नहीं था यह भी अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि रोहन उसका बेटा था वह बिना इशारा पाय आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं रखता था अगर उसकी जगह कोई और मर्द होता तो शायद इतने से ही उसका इशारा समझ जाता और अब तक उसके पीछे खड़े होकर उसकी साड़ी को उसकी कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड से खेलना शुरु कर देता।
इसीलिए सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करें कैसे अपने बेटे को अपनी तरफ पूरी तरह से आकर्षित कर दें ताकि वह खुद ही आगे बढ़ कर उसके वस्त्र को उसके बदन से अलग करना शुरू कर दें।
इसी ताक में खिड़की से बाहर की तरफ देख रही थी जहां पर अब धीरे-धीरे पानी भरना शुरू हो गया था कभी उसकी नजर सूखी हुई लकड़ियों के ढेर पर पड़ी जो कि छोटी सी झुग्गी में इंधन के लिए रखे हुए थे अब उसे बहाना मिल गया था अपने आप को पूरी तरह से अपने बेटे के सामने प्रदर्शित करने के लिए इसलिए वह अपने बेटे से बोली।
बेटा बाहर देखो पानी भरना शुरू हो गया है अगर पानी और आगे आ गया तो सूखी हुई लकड़ियां भीग जायेंगी और हमें इंधन के लिए तकलीफ पड़ जाएगी इसलिए हमें उसे हटाना होगा (इतना कहने के साथ ही वह घर से बाहर की तरफ जाने लगे यह देखकर रोहन भी उसके पीछे पीछे चल दिया)
व्यक्तित्व समाज में बेहद आदरणीय और ऊंचे दर्जे पर था ऐसे में किसी और के साथ संबंध बनाने में सुगंधा की इज्जत पर बना दी और समाज में बदनामी होने का डर था इसलिए ना चाहते हुए भी वह अपने बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए लालायित हो गई
सुगंधा अपने मन में आगे का विचार सोचने लगी। कैसे अपने बेटे को अपनी खूबसूरती के जाल में फंसा कर उसे पूरी तरह से कामांध बनाकर शारीरिक संबंध स्थापित किया जाए इस बारे में वह विचार करने लगी।
ऐसे ही एक दिन सुबह से खूब बारिश हो रही थी और बारिश बंद होने का नाम नहीं ले रही थी और अक्सर बारिश में मर्द को स्त्री संसर्ग और स्त्री को पुरुष संसर्ग की जरूरत कुछ ज्यादा ही महसूस होने लगती है। सुगंधा और रोहन भी इससे बाकात नहीं थे। बरसात की वजह से रोहन भी अपने अंदर इस तरह की काम भावना का अनुभव कर रहा था उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि जब जब वह अपनी मां की तरफ देख रहा था या अपनी मां के बारे में सोच रहा था तब तब उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो जा रहा था और यही हाल सुगंधा का भी हो रहा था।
बरसात का मौसम उसे शूल की तरह चुभ रहा था वह अपने कमरे में खड़ी होकर खिड़की से बाहर का नजारा देख रही थी और बरसात की फुआरे उसे तड़पा रही थी। अपनी टांगों के बीच बुर के अंदर की कुलबुलाहट उसे साफ महसूस हो रही थी। उसे एक मोटे लंड की आवश्यकता जान पड़ रही थी जो कि इस समय उसके घर में उसके बेटे के लंड से उसकी प्यास बुझ सकती थी ऐसे में वह अपने बेटे से शारीरिक संबंध बनाने के लिए लालायित होने लगी।
धीरे-धीरे शाम ढलने लगी बारिश बंद होने का नाम नहीं ले रही थी रोहन भी अपनी मां के इर्द-गिर्द ही घूम रहा था बार-बार और जो नजरों से अपनी मां के खूबसूरत बदन को निहार ले रहा था वैसे भी सुगंधा भी काफी रोमांटिक हुए जा रहे थे जहां भी खड़ी रहती थी वह जानबूझकर अपने नितंबों को बाहर की तरफ उभार पर खड़ी रहती थी ताकि उसके बेटे की नजर उसके उस गोलाकार भूगोल पर जरूर पड़े वैसे भी अगर वह नहीं भी चाहती तो रोहन की नजर उसकी गांड पर ही पड़ती क्योंकि मर्दों की नजर औरतों के बदन पर सबसे पहले उनकी गांड पर ही पड़ती है। मर्दों की नजर औरतों की गांड पर पड़ते ही मर्द तुरंत और उसके बदन की संरचना का अंदाजा लगा लेते हैं औरतों की मदमस्त गांड से ही उनकी खूबसूरती की परिभाषा प्रदर्शित होती है और यही रोहन भी कर रहा था बार-बार वह चोर नजरों से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को निहार ले रहा था जोकि उसके तन बदन में हलचल मचा दे रही थी। रोहन से रहा नहीं जा रहा था वह धीरे धीरे चलते हुए अपनी मां के करीब आ गया और वह भी खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगा ।
मम्मी लगता है कि आज बारिश बंद होने वाली नहीं है। ( रोहन एक बार अपनी मां की कमर के नीचे उसके नितंबों की तरफ नजर डालकर खिड़की से बाहर झांकते हुए बोला,, और सुगंधा अपने बेटे की इस नजर को पहचान ली थी और इसलिए वह मन ही मन प्रसन्न होते हुए अपने बेटे की इस हरकत पर अपने दोनों कोहनी का टेका खिड़की पर रखकर अब कुछ ज्यादा ही अपनी गांड को उभार कर खड़ी होते हुए बोली।)
मुझे भी ऐसा ही लग रहा है कितनी तूफानी बारिश हो रही है (इतना कहते हुए सुगंधा बाहर देखने का नाटक करने लगी जबकि उसकी तिरछी नजर रोहन को देख रही थी और जिस तरह की हरकत उसने की थी दुनिया का कोई भी मर्द औरत की इस कामुक हरकत को देखे बिना नहीं रह सकता था वह इस बेहद काम उत्तेजना से भरपूर नजारे से अपनी नजर को फेर नहीं सकता था और वही काम रोहन ने भी किया था अपनी मां की इस हरकत को वह अपनी नजरों से देख लिया था और इस हरकत को देखने के बाद तो उसके तन बदन में उत्तेजना का संचार काफी तेजी से हो रहा था और उसके लंड की अकड़ बढ़ती जा रही। अपने बेटे की हालत देखकर सुगंधाको मजा आ रहा था जिस तरह से उसका बेटा कामज्वर में जल रहा था उसी तरह से सुगंधा भी तप रही थी।।
रोहन को ऐसी घनघोर बारिश में अपने बेहद करीब खड़े देखकर सुगंधा के तन बदन में काम भावना पैदा होने लगी वह अपने बेटे की उपस्थिति में असहज हुए जा रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह अपने बेटे को अपनी तरफ लुभाने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन इतने से कुछ भी होने वाला नहीं था यह भी अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि रोहन उसका बेटा था वह बिना इशारा पाय आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं रखता था अगर उसकी जगह कोई और मर्द होता तो शायद इतने से ही उसका इशारा समझ जाता और अब तक उसके पीछे खड़े होकर उसकी साड़ी को उसकी कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड से खेलना शुरु कर देता।
इसीलिए सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करें कैसे अपने बेटे को अपनी तरफ पूरी तरह से आकर्षित कर दें ताकि वह खुद ही आगे बढ़ कर उसके वस्त्र को उसके बदन से अलग करना शुरू कर दें।
इसी ताक में खिड़की से बाहर की तरफ देख रही थी जहां पर अब धीरे-धीरे पानी भरना शुरू हो गया था कभी उसकी नजर सूखी हुई लकड़ियों के ढेर पर पड़ी जो कि छोटी सी झुग्गी में इंधन के लिए रखे हुए थे अब उसे बहाना मिल गया था अपने आप को पूरी तरह से अपने बेटे के सामने प्रदर्शित करने के लिए इसलिए वह अपने बेटे से बोली।
बेटा बाहर देखो पानी भरना शुरू हो गया है अगर पानी और आगे आ गया तो सूखी हुई लकड़ियां भीग जायेंगी और हमें इंधन के लिए तकलीफ पड़ जाएगी इसलिए हमें उसे हटाना होगा (इतना कहने के साथ ही वह घर से बाहर की तरफ जाने लगे यह देखकर रोहन भी उसके पीछे पीछे चल दिया)