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Incest बदलते रिश्ते......

सुगंधा विवश हो चुकी थी इस तरह के कदम उठाने के लिए जो कि नैतिकता के तौर पर ठीक नहीं था एक मां अपने बेटे के साथ इस तरह के संबंध नहीं बना सकती थी। क्योंकि यह खुद की नजर और समाज की नजर में अपराध था लेकिन जिस्म की प्यास बुझाने के लिए कोई और तरीका सुगंधा के पास नहीं था। सुगंधा का
व्यक्तित्व समाज में बेहद आदरणीय और ऊंचे दर्जे पर था ऐसे में किसी और के साथ संबंध बनाने में सुगंधा की इज्जत पर बना दी और समाज में बदनामी होने का डर था इसलिए ना चाहते हुए भी वह अपने बेटे के साथ संबंध बनाने के लिए लालायित हो गई
सुगंधा अपने मन में आगे का विचार सोचने लगी। कैसे अपने बेटे को अपनी खूबसूरती के जाल में फंसा कर उसे पूरी तरह से कामांध बनाकर शारीरिक संबंध स्थापित किया जाए इस बारे में वह विचार करने लगी।

ऐसे ही एक दिन सुबह से खूब बारिश हो रही थी और बारिश बंद होने का नाम नहीं ले रही थी और अक्सर बारिश में मर्द को स्त्री संसर्ग और स्त्री को पुरुष संसर्ग की जरूरत कुछ ज्यादा ही महसूस होने लगती है। सुगंधा और रोहन भी इससे बाकात नहीं थे। बरसात की वजह से रोहन भी अपने अंदर इस तरह की काम भावना का अनुभव कर रहा था उसे अच्छी तरह से महसूस हो रहा था कि जब जब वह अपनी मां की तरफ देख रहा था या अपनी मां के बारे में सोच रहा था तब तब उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हो जा रहा था और यही हाल सुगंधा का भी हो रहा था।
बरसात का मौसम उसे शूल की तरह चुभ रहा था वह अपने कमरे में खड़ी होकर खिड़की से बाहर का नजारा देख रही थी और बरसात की फुआरे उसे तड़पा रही थी। अपनी टांगों के बीच बुर के अंदर की कुलबुलाहट उसे साफ महसूस हो रही थी। उसे एक मोटे लंड की आवश्यकता जान पड़ रही थी जो कि इस समय उसके घर में उसके बेटे के लंड से उसकी प्यास बुझ सकती थी ऐसे में वह अपने बेटे से शारीरिक संबंध बनाने के लिए लालायित होने लगी।

धीरे-धीरे शाम ढलने लगी बारिश बंद होने का नाम नहीं ले रही थी रोहन भी अपनी मां के इर्द-गिर्द ही घूम रहा था बार-बार और जो नजरों से अपनी मां के खूबसूरत बदन को निहार ले रहा था वैसे भी सुगंधा भी काफी रोमांटिक हुए जा रहे थे जहां भी खड़ी रहती थी वह जानबूझकर अपने नितंबों को बाहर की तरफ उभार पर खड़ी रहती थी ताकि उसके बेटे की नजर उसके उस गोलाकार भूगोल पर जरूर पड़े वैसे भी अगर वह नहीं भी चाहती तो रोहन की नजर उसकी गांड पर ही पड़ती क्योंकि मर्दों की नजर औरतों के बदन पर सबसे पहले उनकी गांड पर ही पड़ती है। मर्दों की नजर औरतों की गांड पर पड़ते ही मर्द तुरंत और उसके बदन की संरचना का अंदाजा लगा लेते हैं औरतों की मदमस्त गांड से ही उनकी खूबसूरती की परिभाषा प्रदर्शित होती है और यही रोहन भी कर रहा था बार-बार वह चोर नजरों से अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को निहार ले रहा था जोकि उसके तन बदन में हलचल मचा दे रही थी। रोहन से रहा नहीं जा रहा था वह धीरे धीरे चलते हुए अपनी मां के करीब आ गया और वह भी खिड़की से बाहर की तरफ देखने लगा ।

मम्मी लगता है कि आज बारिश बंद होने वाली नहीं है। ( रोहन एक बार अपनी मां की कमर के नीचे उसके नितंबों की तरफ नजर डालकर खिड़की से बाहर झांकते हुए बोला,, और सुगंधा अपने बेटे की इस नजर को पहचान ली थी और इसलिए वह मन ही मन प्रसन्न होते हुए अपने बेटे की इस हरकत पर अपने दोनों कोहनी का टेका खिड़की पर रखकर अब कुछ ज्यादा ही अपनी गांड को उभार कर खड़ी होते हुए बोली।)

मुझे भी ऐसा ही लग रहा है कितनी तूफानी बारिश हो रही है (इतना कहते हुए सुगंधा बाहर देखने का नाटक करने लगी जबकि उसकी तिरछी नजर रोहन को देख रही थी और जिस तरह की हरकत उसने की थी दुनिया का कोई भी मर्द औरत की इस कामुक हरकत को देखे बिना नहीं रह सकता था वह इस बेहद काम उत्तेजना से भरपूर नजारे से अपनी नजर को फेर नहीं सकता था और वही काम रोहन ने भी किया था अपनी मां की इस हरकत को वह अपनी नजरों से देख लिया था और इस हरकत को देखने के बाद तो उसके तन बदन में उत्तेजना का संचार काफी तेजी से हो रहा था और उसके लंड की अकड़ बढ़ती जा रही। अपने बेटे की हालत देखकर सुगंधाको मजा आ रहा था जिस तरह से उसका बेटा कामज्वर में जल रहा था उसी तरह से सुगंधा भी तप रही थी।।
रोहन को ऐसी घनघोर बारिश में अपने बेहद करीब खड़े देखकर सुगंधा के तन बदन में काम भावना पैदा होने लगी वह अपने बेटे की उपस्थिति में असहज हुए जा रहे थे उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें वह अपने बेटे को अपनी तरफ लुभाने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन इतने से कुछ भी होने वाला नहीं था यह भी अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि रोहन उसका बेटा था वह बिना इशारा पाय आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं रखता था अगर उसकी जगह कोई और मर्द होता तो शायद इतने से ही उसका इशारा समझ जाता और अब तक उसके पीछे खड़े होकर उसकी साड़ी को उसकी कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड से खेलना शुरु कर देता।
इसीलिए सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करें कैसे अपने बेटे को अपनी तरफ पूरी तरह से आकर्षित कर दें ताकि वह खुद ही आगे बढ़ कर उसके वस्त्र को उसके बदन से अलग करना शुरू कर दें।

इसी ताक में खिड़की से बाहर की तरफ देख रही थी जहां पर अब धीरे-धीरे पानी भरना शुरू हो गया था कभी उसकी नजर सूखी हुई लकड़ियों के ढेर पर पड़ी जो कि छोटी सी झुग्गी में इंधन के लिए रखे हुए थे अब उसे बहाना मिल गया था अपने आप को पूरी तरह से अपने बेटे के सामने प्रदर्शित करने के लिए इसलिए वह अपने बेटे से बोली।

बेटा बाहर देखो पानी भरना शुरू हो गया है अगर पानी और आगे आ गया तो सूखी हुई लकड़ियां भीग जायेंगी और हमें इंधन के लिए तकलीफ पड़ जाएगी इसलिए हमें उसे हटाना होगा (इतना कहने के साथ ही वह घर से बाहर की तरफ जाने लगे यह देखकर रोहन भी उसके पीछे पीछे चल दिया)
 
बरस रही बारिश में सुगंधा घर से बाहर निकल रही थी। उसके तन बदन में एक अजीब सी हलचल मच रही थी क्योंकि वह जानबूझकर बारिश में बाहर जा रही थी उसके मन में कुछ और चल रहा था अपनी मां को बारिश में बाहर जाता देख कर रोहन भी उसके पीछे-पीछे घर से बाहर आ गया बारिश इतनी तेज थी कि घर से बाहर निकलते ही पानी की मोटी मोटी बूंदें दोनों के बदन को भिगोने लगी कुछ ही सेकंड में दोनों पानी से तरबतर हो गए।
सुगंधा की अच्छी तरह से जानती थी की सूखी लकड़ी उसके कोई काम की नहीं थी वह तो बस एक बहाना था अपनी खूबसूरत बदन को भीगा कर उसकी जवानी अपने बेटे को दिखाने की सुगंधा सूखी लकड़ी को एक जगह से हटाकर ऊंचाई पर रख रही थी और उसकी मदद करते हुए रोहन सुखी लकड़ी को एक जगह से हटाकर उनकी जगह पर रख रहा था लेकिन इस बीच उसकी नजर उसकी मां के भीगे बदन पर बराबर बनी हुई थी जोकि सुगंधा के कपड़े गीले हो जाने की वजह से उसके खूबसूरत मांसल बदन से एकदम चिपक से गए थे जिसकी वजह से उसके बदन का खूबसूरत कटाव एकदम साफ साफ ऊपसता हुआ नजर आ रहा था। रोहन अपनी मां के बदन के कामुक कटाव को देखकर मदहोश होने लगा। उसके तन बदन में हलचल मच गई और यह बात सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि लकड़ी को इधर-उधर करते हुए उसकी नजर उसके बदन पर चिपकी हुई थी यही तो वह चाहती थी इसलिए मन ही मन प्रसन्न हो रही थी वह इससे भी ज्यादा कुछ दिखाना चाहती थी इसलिए अपने बेटे को जल्दी-जल्दी हाथ चलाने को कहकर अपनी साड़ी के पल्लू को कंधे पर से हटा कर उसे सीधे अपनी कमर पर लपेट ली जिसकी वजह से उसकी बड़ी बड़ी छातियों एकदम उजागर हो गई बस केवल ब्लाउज ही था जो उसके दोनों फड़फडाते हुए कबूतर को कैद में रखे हुए थे।.... रोहन के तो होश उड़े जा रहे थे पल पल उतेजना का पारा बढ़ता ही जा रहा था अपनी आंखों के सामने वह अपनी मां की जवानी को अंगड़ाई लेते हुए देख रहा था उस पर सुगंधा अपनी हरकतों जो कि बेहद कामुक थी हर एक अदा पर अपने बेटे पर ही बिजलियां गिरा रही थी तभी वो जानबूझकर उसके सामने अपने दोनों हाथों में बड़ी-बड़ी लकड़ी लेकर उसे ऊपर की तरफ उठाए हुए ऐसे खड़ी हो गई कि उसके बेटे की आंखों के सामने ही उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां सीना ताने नजर आने लगी ब्लाउज पूरी तरह से गीला हो जाने की वजह से सुगंधा की चूचियों की ब्राउन कलर की निप्पल नुकीली हो चुकी थी जोकि गीले ब्लाउज में दोनों तरफ से ऐसे उप सी हुई थी मानो कोई भाले की नोक हो।
रोहन यह नजारा देखा तो देखता ही रह गया उसकी आंखें फटी की फटी रह गई गीले कपड़ों में से उसकी मां की जवानी खिली खिली सी नजर आ रही थी। रोहन भी अपने दोनों हाथों में लकड़ी उठाए हुए था अपनी मां की मदमस्त जवानी और कातिल अदाओं को देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था नतीजन उसका लंड पजामे के अंदर गदर मचाए हुए था जो कि एक तंबू के शक्ल में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा था ।जिस पर सुगंधा की नजर पड़ना स्वाभाविक ही था और सुगंधा तिरछी नजरों से अपने बेटे के पजामे की तरफ देख भी ले रही थी और उसके उठे हुए भाग को देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रहीे थी। सुगंधाको यह समझते बिल्कुल भी देर नहीं लगी कि उसके खूबसूरती का जादू उसके बेटे पर चलने लगा था। सुगंधा यह भी देख रही थी कि उसके बेटे की नजर उसकी भराव दार छातियों पर ही टिकी हुई थी जोकि इस समय केवल ब्लाउज में ही थी।
जब वासना का भूत एक औरत के सर पर सवार होता है तो इसका यही अंजाम होता है सुगंधा जिस छाती से दूध पिलाकर उसकी भूख मिटाती थी अब जब वह जवान हो गया है तो उसे अपनी वही बड़ी-बड़ी छतिया दिखाकर उसकी शारीरिक भूख भड़का रही थी। सुगंधा यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि एक जवान लड़के की जरूरत क्या होती है और उसी जरूरत के मुताबिक सुगंधा अपने खूबसूरत बदन की नुमाइश अपने बेटे के सामने कर रही थी। रोहन अभी भी हाथ में लकड़ियां था मैं अपनी मां की छातियों की तरफ देखे जा रहा था और खास करके उसकी नजर दोनों गोलाइयों के बीच में बनी पतली सी गहरी लकीर पर टिकी हुई थी जोकि सुगंधा की जवानी का थर्मामीटर था इसी पतली लकीर से ही पता चलता था कि सुगंधा के बदन में जवानी कितनी कूट-कूट के भरी हुई थी। सुगंधा के चेहरे पर बरसात की बूंदे अठखेलियां खेल रही थी सुगंधा मंद मंद मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए अपने बेटे से बोली।

ऐसे क्या देख रहा है जल्दी-जल्दी हाथ चला देख नहीं रहा है पानी बढ़ता ही जा रहा है।
( रोहन के तो जैसे होश उड़ गए थे उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इस समय वह क्या करें उसकी आंखों के सामने खूबसूरती की मिसाल उसकी मां अपने बदन की नुमाइश कर रही थी जिसे देखकर जवान हो रहा रोहन अपने आप पर काबू कर पाने में असमर्थ लग रहा था उसका लंड था की पजामे के अंदर बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था बस तंबु बनाए खड़ा था। रोहन इस समय किसी प्यासे की तरह अपनी मां की चुचियों के बीच की गहरी पतली कुंवानुमां घाटी को देख रहा था जोकि अपनी मां की आवाज सुनकर होश में आते हुए बोला।

कककक,,,,, कुछ नहीं मम्मी में यह देख हूं कि तुम पूरी तरह से भीग गई हो कहीीं तुम्हें सर्दी ना हो जाए बीमार पड़ गई तो सारा काम रुक जाएगा।

चल मुझे कुछ नहीं होगा तू जल्दी-जल्दी हाथ चला मुझे सब मालूम है कि तू क्या देख रहा था।
( इतना सुनकर रोहन एकदम से सन्न रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां यह बात कह गई थी उसे अपने कानों की यकीन नहीं हो रहा था वह घबरा सा गया था उसकी घबराहट देखकर उसकी मां समझ गई कि उसके मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बात को बदलते हुए बोली।)

तू यही देख रहा था ना कि इतनी बारिश में मै भीगते हुए काम कर रही मुझे कुछ नहीं होगा इतना तो मै हमेशा भीगते आ रही हूं। अब जल्दी-जल्दी हाथ चला पानी बढ़ रहा है।

( अपनी मां की यह बात सुनकर रोहन को राहत हुई। उसे लगने लगा कि शायद उसकी मां ने उसकी नजर पर ध्यान नहीं दी वरना कोई भी औरत समझ जाती कि वह क्या देख रहा था। वह अपनी मां के बारे में सोचते हुए फिर से लकड़ियां उठाकर दूसरी जगह रखने लगा और अपने बेटे की हालत पर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न हो रही थी उसे इस तरह से अपने बेटे को तड़पाने और तरसा ने में बहुत ही मजा मिल रहा और बारिश में इस तरह से भीगने में उसके तन बदन में उतेजना का असर अत्यधिक मात्रा में बढ़ता जा रहा था।
सुबह से बारिश पड़ रही थी इसलिए घर पर कोई भी नौकर चाकर नहीं था बेला भी नहीं आई थी इसलिए सुगंधा को इस तरह से अपने अंग का प्रदर्शन करने के लिए खुला दौर मिल गया था वह पूरी तरह से लगाई थी अपने बेटे को अपने अंग दिखाने के लिए ताकि वह पूरी तरह से कामेच्छा के वशीभूत हो जाए और उससे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर हो जाए।

सुगंधा यह सोचते हुए फिर से काम में जुट गई थी वह मन ही मन प्रसन्न और उत्तेजित नजर आ रही थी तभी उसके मन में एक और विचार आया उसकी जवानी ने अंगड़ाई ली और वह अपने बेटे से नजरें बचाकर अपने ब्लाउज के ऊपर के दोनों बटन को खोल दी जिससे उसकी आधी से ज्यादा चूचियां बाहर को नजर आने लगी अब वह लकड़ी लेकर आते जाते इस तरह से चलती थी कि रोहन की नजर उसके खुले हुए ब्लाउज के बटन पर पड़े और ऐसा हो भी रहा था रोहन तो यह देखकर एकदम कामांध हो गया और ना चाहते हुए भी अपनी मां के सामने ही व अपने पेट में बने तंबू को अपने हाथों से मसल दिया यह क्षणिक पल के लिए था । लेकिन यह कुछ सेकेंड का नजारा सुगंधा की आंखों में चमक पैदा कर गया उसकी आंखों में उम्मीद की किरण नजर आने लगी उसका सपना साक्षात्कार होने लगा उसे लगने लगा था कि अब काम बन जाएगा और इस नजारे को देखकर उसके तन बदन में उत्तेजना की ऐसी लहर दौड़ी कि उसकी बुर से नमकीन रस की दो बूंदें टपक गई जो कि बारिश के पानी में वह नमकीन के समान अमृत मई बूंदे घुल गई । सुगंधा तो उत्तेजना से सराबोर हो चुकी थी उसके बस में होता तो इसी समय ही वह अपने बेटे के मोटे लंड को अपनी बुर में डलवा कर चुदवाली होती लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकती थी उसे अपनी मंजिल पाने के लिए इस राह पर धीरे-धीरे ही आगे बढ़ना था। रोहन की हरकत की वजह से इतना तो तय था कि सुगंधा के मन में जो चल रहा था वही रोहन के मन में भी चल रहा था दोनों एक दूसरे को भोगने के लिए लड़ाई थे लेकिन शुरुआत कौन करेगा इसी प्रश्न पर यह सारा वाकया रूका हुआ था।

तेज बरसती बारिश में भीगने का मजा ही कुछ और होता है जिसका आनंद सुगंधा पूरी तरह से उठा रही थी और इस समय तो उसके मन में कामुक विचार की भी वर्षा हो रही थी जिससे बरसात में भीगने का आनंद दोगुना होता जा रहा था।

जैसे जैसे समय बीत रहा था वैसे वैसे बरसात के साथ-साथ अंधेरा भी बढ़ता जा रहा था लेकिन अभी भी हल्का-हल्का सब कुछ साफ नजर आ रहा था और इस हल्की रोशनी में सुगंधा कुछ और करने के मूड में थी वह अपने बेटे को पूरी तरह से अपने बस में कर लेने का विचार बनाई थी जिसके लिए अगला कदम उठाना बेहद जरूरी था और दूसरी तरफ रोहन की हालत खराब होती जा रही है जिस तरह की हरकत और नजारा उसकी आंखों के सामने नजर आ रहा था उसे देखकर उसकी उत्तेजना निरंतर बढ़ती जा रही थी लंड की नसें मानो फट जाएंगी इस कदर कड़क हो चुकी थी। उसकी भी इच्छा अपनी मां को चोदने के लिए प्रबलीत होती जा रही थी। वह मोटी मोटी लकड़ी उठाकर दूसरी जगह रख रहा था कामोत्तेजना का असर उसके दिमाग को भी पूरी तरह से अपने घेरे में ले लिया था तभी तो वह अपने पेंट में बने तंबू को अपनी मां की नजरों से छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था बल्कि वह तो यही चाह रहा था कि उसकी मां भी उसके पेंट में बने तंबू को देखें।
और अपनेे बेटे के पेंट मैं बनी विशाल तंबू को देखकर ही तो उसके मन में यह ख्याल आया था वह अब लकड़ियों के ढेर के लाभ मुंह करके खड़ी हो गई,,,, अब रोहन लकड़ियां लाला कर अपनी मां को सुना रहा था और सुगंधा लकड़ियों का ढेर बना रही थी उसकी पीठ रोहन की तरफ थी जो कि जानबूझकर ऐसा करके वह खड़ी थी जब-जब रोहन लकड़ियों का ढेर लाकर अपनी मां के पीछे खड़ा रहता तो जब तक वह लकड़ी नहीं थाम लेती तब तक वह नजर भर भर के अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को देखता रहता जो कि इस समय पूरी तरह से कपड़े गीले होने की वजह से उसकी मखमली गांड से चिपक गए थे। रोहन के तो मजे ही मजे थे इस तरह का नजारा वहं पहले कभी नहीं देखा था हालांकि वह अपनी मां की नंगी गांड को पहले भी देख चुका था लेकिन इस समय जो नजारा उसके सामने था वह काफी हद तक उसे उत्तेजित कर रहा था। रोहन तड़प रहा था अपनी मां को इस समय अपनी बाहों में भरने के लिए खास करके पीछे से वह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर अपना लंड रगड़ना चाहता था उसकी नरम गरम गांड को महसूस करना चाहता था लेकिन यह सब करने के लिए उसके पास हिम्मत बिल्कुल भी नहीं थी और सुगंधा भी इसी ताक में थी वह अपने नितंबों पर अपने बेटे के लंड की चुभन को महसूस करना चाहती थी और सुगंधा भी इसी मौके की तलाश में थी तभी तो वह पीछे नजर घुमाकर उस मौके इंतजार कर ले रही थी वह अपने बेटे को अपने और ज्यादा करीब आने देना चाहती थी ताकि वह अपनी योजना में कामयाब हो सके वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा उसकी हरकत पर क्या करता है।।
और रोहन भी अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को अपने अंदर महसूस करने के लिए जानबूझकर उसके और ज्यादा करीब खड़ा हो जा रहा था सुगंधा जानबूझकर लकड़ी को इधर-उधर रख रही थी। सुगंधा जिस तरह से झुकी हुई थी उस अवस्था में रोहन अपनी मां को देखकर कुछ ज्यादा ही चुद़वासा हो गया था वह एक हाथ में लकड़ी पकड़ ठीक अपनी मां के पीछे खड़े होकर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को निहारते हुए एक हाथ से अपने लंड को मसल रहा था और इसी पलका जैसे सुगंधा को भी इंतजार था वह तुरंत लकड़ी को सरकाने के बहाने कुछ ज्यादा ही एक झटके से पीछे की तरफ अपनी गांड को ले गई जिससे रोहन अपनी मां की इस हरकत से अपने आप को बचा नहीं सका और सीधे उसका लंड उसकी मां की बड़ी बड़ी गोल गांड से एकदम सट गया।
आहहहहहहहहहह अदभुत अतुल्य अवर्णनीय एहसास से पल भर में ही सुगंधा भर गई । सुगंधा मन ही मन में यह सोचने लगी कि यह पल यही रूक जाए यह पूरी दुनिया यही ठहर जाए इससे आगे का एक भी पल ना हो वह इस पल को जी भर कर जी लेना चाहती थी। अपने गीले नितंबों पर अपने बेटे के कठोर लंड का चुभन महसूस करके वह एकदम मस्त हो गई ऐसा लग रहा था कि जैसे सुगंधा की किस्मत भी उसका साथ दे रही है क्योंकि सुगंधा की हरकत की वजह से रोहन का मोटा तगड़ा लंड सीधे-सीधे सुगंधा की गांड के बीचो बीच की दरार में जाकर फंस गया था जहां से सुगंधा की बुर की दूरी महज दो अंगुल जितनी ही रह गई थी।
इस अदभुत सुखद एहसास भरे लम्हे को छह सात सेकंड जितना भर ही गुजरा था वैसे तो यह लम्हा बहुत होता है लेकिन फिर भी सुगंधा यह जताना चाहती थी कि जैसे कुछ हुआ ही ना हो वह उसी तरह से अपना काम करती रही। दूसरी तरफ रोहन की हालत पतली होती जा रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अजीब कशमकश में फंसा हुआ था अपनी मां की गोल-गोल नितंबों से अपने लंड का जबरदस्त स्पर्श महसूस करके वह किसी और और दुनिया में विचरण कर रहा था। सुगंधा अभी भी अपनी बड़ी मदमस्त गांड को अपने बेटे के लंड से सटाई. हुई थी। और बिल्कुल अनजान बनकर अपना काम कर रही थी रोहन समझ नहीं पा रहा था कि उसकी मां जानबूझकर कर रही है या अनजाने में सब कुछ हुआ है। लेकिन जो कुछ भी हुआ था वह रोहन के लिए बेहद सुख से भरा हुआ था आज तक उसने ऐसा अनुभव नहीं लिया था यह उसके लिए लगभग एक औरत के चोदने के बराबर था। सुगंधा अपने काम में मशगुल होने का नाटक कर रही थी और रोहन यह देख कर उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी उससे रहा नहीं गया एक खूबसूरत मत मस्त जवानी से भरपूर औरत की गांड उसके लंड से सटी हुई थी जिससे उसके तन बदन में काम होते दिनों की लहार तूफान का रूप धारण कर रही थी और इसी के चलते वह अपने आप को संभाल नहीं पाया और अपने हाथ में पकड़ी हुई लकड़ी को फेंक कर अपने दोनों हाथों से अपनी मां की कमर थाम लिया और हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ा दिया जिससे रोहन का लंड पजामे में होने के बावजूद भी और सुगंधा की गांड साड़ी में लिपटी होने के बावजूद भी गीले पन का एहसास लिए रोहन का लंड सुगंधा की गांड को चोड़ी करते हुए हल्के से जाकर सुगंधा की मखमली गुलाबी बुर की गुलाबी पतियों को फैला दी जो कि बेहद हल्के से ही हुआ था लेकिन इतना दोनों के लिए काफी था सुगंधा अपनी जवानी की गरमी को बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपने बेटे के इस हल्के से धक्के की वजह से उसके मुख से सिसकारी निकल गई।,,,
अपने बेटे की हिम्मत की वजह से वह काफी प्रसन्न नजर आ रही थी वह मन ही मन यह सोच रही थी कि काश उसका बेटा अपने हाथों से उसकी साड़ी कमर तक उठा कर अपने मोटे लंड को उसकी गुलाबी बुर के अंदर डालकर उसकी चुदाई कर देता लेकिन यह सुगंधा का ख्याल मात्र था इससे आगे बढ़ने की हिम्मत इस समय ना तो उसमें खुद थी और ना ही रोहन में इतना हो गया था वही बहुत था रोहन अभी भी अपनी मां की कमर थामे अपने लंड को उसकी गांड से सटाया हुआ था

सुगंधा कितनी देर तक ऐसे झुकी रहती उसे इस बात का डर था कि कहीं उसके बेटे को शक ना हो जाए कि वह जानबूझकर ऐसे झुकी हुई है। इसलिए खड़ी होने लगी लेकिन खड़ी होते होते इस बात का एहसास करा गई कि उसका बेटा उसे पीछे से पकड़े हुए हैं इसलिए वह जानबूझकर आश्चर्य जताते हुए बोली।

अरे यह क्या कर रहा है ऐसे क्यों पकड़ा है।

( अपनी मां की बात सुनकर रोहन एकदम से सन्न रह गया क्या जवाब देना है उसे समझ में नहीं आया लेकिन कुछ सेकंड तक शांत रहने के बाद वह बात को संभालते हुए बोला।)

मैं क्या करूं मम्मी तुम खुद ही एकाएक झुक गई तो मैं अपने आप को संभाल नहीं पाया गिरने वाला था इसलिए तुम्हारी कमर पकड़ लिया।

चल कोई बात नहीं सारी लकड़िया हमने ठीक जगह पर रख दी है भीगने का कोई डर नहीं है और अब रात हो गई है आज बेला आई नहीं है इसलिए खाना मुझे बनाना है चल अब चल कर कपड़े बदल ले नहीं तो सर्दी लग जाएगी इतना कहते हुए सुगंधा जाने को हुई लेकिन जाते-जाते एक नजर रोहन के पजामे में बने तंबू पर डालकर मुस्कुराते हुए घर में चली गई और रोहन अपनी मां को गांड मटकाकर जाते हुए देखता रहा।
 
बरस रही बारिश में सुगंधा घर से बाहर निकल रही थी। उसके तन बदन में एक अजीब सी हलचल मच रही थी क्योंकि वह जानबूझकर बारिश में बाहर जा रही थी उसके मन में कुछ और चल रहा था अपनी मां को बारिश में बाहर जाता देख कर रोहन भी उसके पीछे-पीछे घर से बाहर आ गया बारिश इतनी तेज थी कि घर से बाहर निकलते ही पानी की मोटी मोटी बूंदें दोनों के बदन को भिगोने लगी कुछ ही सेकंड में दोनों पानी से तरबतर हो गए।
सुगंधा की अच्छी तरह से जानती थी की सूखी लकड़ी उसके कोई काम की नहीं थी वह तो बस एक बहाना था अपनी खूबसूरत बदन को भीगा कर उसकी जवानी अपने बेटे को दिखाने की सुगंधा सूखी लकड़ी को एक जगह से हटाकर ऊंचाई पर रख रही थी और उसकी मदद करते हुए रोहन सुखी लकड़ी को एक जगह से हटाकर उनकी जगह पर रख रहा था लेकिन इस बीच उसकी नजर उसकी मां के भीगे बदन पर बराबर बनी हुई थी जोकि सुगंधा के कपड़े गीले हो जाने की वजह से उसके खूबसूरत मांसल बदन से एकदम चिपक से गए थे जिसकी वजह से उसके बदन का खूबसूरत कटाव एकदम साफ साफ ऊपसता हुआ नजर आ रहा था। रोहन अपनी मां के बदन के कामुक कटाव को देखकर मदहोश होने लगा। उसके तन बदन में हलचल मच गई और यह बात सुगंधा अच्छी तरह से जानती थी कि लकड़ी को इधर-उधर करते हुए उसकी नजर उसके बदन पर चिपकी हुई थी यही तो वह चाहती थी इसलिए मन ही मन प्रसन्न हो रही थी वह इससे भी ज्यादा कुछ दिखाना चाहती थी इसलिए अपने बेटे को जल्दी-जल्दी हाथ चलाने को कहकर अपनी साड़ी के पल्लू को कंधे पर से हटा कर उसे सीधे अपनी कमर पर लपेट ली जिसकी वजह से उसकी बड़ी बड़ी छातियों एकदम उजागर हो गई बस केवल ब्लाउज ही था जो उसके दोनों फड़फडाते हुए कबूतर को कैद में रखे हुए थे।.... रोहन के तो होश उड़े जा रहे थे पल पल उतेजना का पारा बढ़ता ही जा रहा था अपनी आंखों के सामने वह अपनी मां की जवानी को अंगड़ाई लेते हुए देख रहा था उस पर सुगंधा अपनी हरकतों जो कि बेहद कामुक थी हर एक अदा पर अपने बेटे पर ही बिजलियां गिरा रही थी तभी वो जानबूझकर उसके सामने अपने दोनों हाथों में बड़ी-बड़ी लकड़ी लेकर उसे ऊपर की तरफ उठाए हुए ऐसे खड़ी हो गई कि उसके बेटे की आंखों के सामने ही उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां सीना ताने नजर आने लगी ब्लाउज पूरी तरह से गीला हो जाने की वजह से सुगंधा की चूचियों की ब्राउन कलर की निप्पल नुकीली हो चुकी थी जोकि गीले ब्लाउज में दोनों तरफ से ऐसे उप सी हुई थी मानो कोई भाले की नोक हो।
रोहन यह नजारा देखा तो देखता ही रह गया उसकी आंखें फटी की फटी रह गई गीले कपड़ों में से उसकी मां की जवानी खिली खिली सी नजर आ रही थी। रोहन भी अपने दोनों हाथों में लकड़ी उठाए हुए था अपनी मां की मदमस्त जवानी और कातिल अदाओं को देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था नतीजन उसका लंड पजामे के अंदर गदर मचाए हुए था जो कि एक तंबू के शक्ल में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा था ।जिस पर सुगंधा की नजर पड़ना स्वाभाविक ही था और सुगंधा तिरछी नजरों से अपने बेटे के पजामे की तरफ देख भी ले रही थी और उसके उठे हुए भाग को देखकर मन ही मन प्रसन्न हो रहीे थी। सुगंधाको यह समझते बिल्कुल भी देर नहीं लगी कि उसके खूबसूरती का जादू उसके बेटे पर चलने लगा था। सुगंधा यह भी देख रही थी कि उसके बेटे की नजर उसकी भराव दार छातियों पर ही टिकी हुई थी जोकि इस समय केवल ब्लाउज में ही थी।
जब वासना का भूत एक औरत के सर पर सवार होता है तो इसका यही अंजाम होता है सुगंधा जिस छाती से दूध पिलाकर उसकी भूख मिटाती थी अब जब वह जवान हो गया है तो उसे अपनी वही बड़ी-बड़ी छतिया दिखाकर उसकी शारीरिक भूख भड़का रही थी। सुगंधा यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि एक जवान लड़के की जरूरत क्या होती है और उसी जरूरत के मुताबिक सुगंधा अपने खूबसूरत बदन की नुमाइश अपने बेटे के सामने कर रही थी। रोहन अभी भी हाथ में लकड़ियां था मैं अपनी मां की छातियों की तरफ देखे जा रहा था और खास करके उसकी नजर दोनों गोलाइयों के बीच में बनी पतली सी गहरी लकीर पर टिकी हुई थी जोकि सुगंधा की जवानी का थर्मामीटर था इसी पतली लकीर से ही पता चलता था कि सुगंधा के बदन में जवानी कितनी कूट-कूट के भरी हुई थी। सुगंधा के चेहरे पर बरसात की बूंदे अठखेलियां खेल रही थी सुगंधा मंद मंद मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए अपने बेटे से बोली।

ऐसे क्या देख रहा है जल्दी-जल्दी हाथ चला देख नहीं रहा है पानी बढ़ता ही जा रहा है।
( रोहन के तो जैसे होश उड़ गए थे उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इस समय वह क्या करें उसकी आंखों के सामने खूबसूरती की मिसाल उसकी मां अपने बदन की नुमाइश कर रही थी जिसे देखकर जवान हो रहा रोहन अपने आप पर काबू कर पाने में असमर्थ लग रहा था उसका लंड था की पजामे के अंदर बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था बस तंबु बनाए खड़ा था। रोहन इस समय किसी प्यासे की तरह अपनी मां की चुचियों के बीच की गहरी पतली कुंवानुमां घाटी को देख रहा था जोकि अपनी मां की आवाज सुनकर होश में आते हुए बोला।

कककक,,,,, कुछ नहीं मम्मी में यह देख हूं कि तुम पूरी तरह से भीग गई हो कहीीं तुम्हें सर्दी ना हो जाए बीमार पड़ गई तो सारा काम रुक जाएगा।

चल मुझे कुछ नहीं होगा तू जल्दी-जल्दी हाथ चला मुझे सब मालूम है कि तू क्या देख रहा था।
( इतना सुनकर रोहन एकदम से सन्न रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां यह बात कह गई थी उसे अपने कानों की यकीन नहीं हो रहा था वह घबरा सा गया था उसकी घबराहट देखकर उसकी मां समझ गई कि उसके मन में क्या चल रहा है इसलिए वह बात को बदलते हुए बोली।)

तू यही देख रहा था ना कि इतनी बारिश में मै भीगते हुए काम कर रही मुझे कुछ नहीं होगा इतना तो मै हमेशा भीगते आ रही हूं। अब जल्दी-जल्दी हाथ चला पानी बढ़ रहा है।

( अपनी मां की यह बात सुनकर रोहन को राहत हुई। उसे लगने लगा कि शायद उसकी मां ने उसकी नजर पर ध्यान नहीं दी वरना कोई भी औरत समझ जाती कि वह क्या देख रहा था। वह अपनी मां के बारे में सोचते हुए फिर से लकड़ियां उठाकर दूसरी जगह रखने लगा और अपने बेटे की हालत पर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न हो रही थी उसे इस तरह से अपने बेटे को तड़पाने और तरसा ने में बहुत ही मजा मिल रहा और बारिश में इस तरह से भीगने में उसके तन बदन में उतेजना का असर अत्यधिक मात्रा में बढ़ता जा रहा था।
सुबह से बारिश पड़ रही थी इसलिए घर पर कोई भी नौकर चाकर नहीं था बेला भी नहीं आई थी इसलिए सुगंधा को इस तरह से अपने अंग का प्रदर्शन करने के लिए खुला दौर मिल गया था वह पूरी तरह से लगाई थी अपने बेटे को अपने अंग दिखाने के लिए ताकि वह पूरी तरह से कामेच्छा के वशीभूत हो जाए और उससे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर हो जाए।

सुगंधा यह सोचते हुए फिर से काम में जुट गई थी वह मन ही मन प्रसन्न और उत्तेजित नजर आ रही थी तभी उसके मन में एक और विचार आया उसकी जवानी ने अंगड़ाई ली और वह अपने बेटे से नजरें बचाकर अपने ब्लाउज के ऊपर के दोनों बटन को खोल दी जिससे उसकी आधी से ज्यादा चूचियां बाहर को नजर आने लगी अब वह लकड़ी लेकर आते जाते इस तरह से चलती थी कि रोहन की नजर उसके खुले हुए ब्लाउज के बटन पर पड़े और ऐसा हो भी रहा था रोहन तो यह देखकर एकदम कामांध हो गया और ना चाहते हुए भी अपनी मां के सामने ही व अपने पेट में बने तंबू को अपने हाथों से मसल दिया यह क्षणिक पल के लिए था । लेकिन यह कुछ सेकेंड का नजारा सुगंधा की आंखों में चमक पैदा कर गया उसकी आंखों में उम्मीद की किरण नजर आने लगी उसका सपना साक्षात्कार होने लगा उसे लगने लगा था कि अब काम बन जाएगा और इस नजारे को देखकर उसके तन बदन में उत्तेजना की ऐसी लहर दौड़ी कि उसकी बुर से नमकीन रस की दो बूंदें टपक गई जो कि बारिश के पानी में वह नमकीन के समान अमृत मई बूंदे घुल गई । सुगंधा तो उत्तेजना से सराबोर हो चुकी थी उसके बस में होता तो इसी समय ही वह अपने बेटे के मोटे लंड को अपनी बुर में डलवा कर चुदवाली होती लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकती थी उसे अपनी मंजिल पाने के लिए इस राह पर धीरे-धीरे ही आगे बढ़ना था। रोहन की हरकत की वजह से इतना तो तय था कि सुगंधा के मन में जो चल रहा था वही रोहन के मन में भी चल रहा था दोनों एक दूसरे को भोगने के लिए लड़ाई थे लेकिन शुरुआत कौन करेगा इसी प्रश्न पर यह सारा वाकया रूका हुआ था।

तेज बरसती बारिश में भीगने का मजा ही कुछ और होता है जिसका आनंद सुगंधा पूरी तरह से उठा रही थी और इस समय तो उसके मन में कामुक विचार की भी वर्षा हो रही थी जिससे बरसात में भीगने का आनंद दोगुना होता जा रहा था।

जैसे जैसे समय बीत रहा था वैसे वैसे बरसात के साथ-साथ अंधेरा भी बढ़ता जा रहा था लेकिन अभी भी हल्का-हल्का सब कुछ साफ नजर आ रहा था और इस हल्की रोशनी में सुगंधा कुछ और करने के मूड में थी वह अपने बेटे को पूरी तरह से अपने बस में कर लेने का विचार बनाई थी जिसके लिए अगला कदम उठाना बेहद जरूरी था और दूसरी तरफ रोहन की हालत खराब होती जा रही है जिस तरह की हरकत और नजारा उसकी आंखों के सामने नजर आ रहा था उसे देखकर उसकी उत्तेजना निरंतर बढ़ती जा रही थी लंड की नसें मानो फट जाएंगी इस कदर कड़क हो चुकी थी। उसकी भी इच्छा अपनी मां को चोदने के लिए प्रबलीत होती जा रही थी। वह मोटी मोटी लकड़ी उठाकर दूसरी जगह रख रहा था कामोत्तेजना का असर उसके दिमाग को भी पूरी तरह से अपने घेरे में ले लिया था तभी तो वह अपने पेंट में बने तंबू को अपनी मां की नजरों से छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था बल्कि वह तो यही चाह रहा था कि उसकी मां भी उसके पेंट में बने तंबू को देखें।
और अपनेे बेटे के पेंट मैं बनी विशाल तंबू को देखकर ही तो उसके मन में यह ख्याल आया था वह अब लकड़ियों के ढेर के लाभ मुंह करके खड़ी हो गई,,,, अब रोहन लकड़ियां लाला कर अपनी मां को सुना रहा था और सुगंधा लकड़ियों का ढेर बना रही थी उसकी पीठ रोहन की तरफ थी जो कि जानबूझकर ऐसा करके वह खड़ी थी जब-जब रोहन लकड़ियों का ढेर लाकर अपनी मां के पीछे खड़ा रहता तो जब तक वह लकड़ी नहीं थाम लेती तब तक वह नजर भर भर के अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को देखता रहता जो कि इस समय पूरी तरह से कपड़े गीले होने की वजह से उसकी मखमली गांड से चिपक गए थे। रोहन के तो मजे ही मजे थे इस तरह का नजारा वहं पहले कभी नहीं देखा था हालांकि वह अपनी मां की नंगी गांड को पहले भी देख चुका था लेकिन इस समय जो नजारा उसके सामने था वह काफी हद तक उसे उत्तेजित कर रहा था। रोहन तड़प रहा था अपनी मां को इस समय अपनी बाहों में भरने के लिए खास करके पीछे से वह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर अपना लंड रगड़ना चाहता था उसकी नरम गरम गांड को महसूस करना चाहता था लेकिन यह सब करने के लिए उसके पास हिम्मत बिल्कुल भी नहीं थी और सुगंधा भी इसी ताक में थी वह अपने नितंबों पर अपने बेटे के लंड की चुभन को महसूस करना चाहती थी और सुगंधा भी इसी मौके की तलाश में थी तभी तो वह पीछे नजर घुमाकर उस मौके इंतजार कर ले रही थी वह अपने बेटे को अपने और ज्यादा करीब आने देना चाहती थी ताकि वह अपनी योजना में कामयाब हो सके वह देखना चाहती थी कि उसका बेटा उसकी हरकत पर क्या करता है।।
और रोहन भी अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को अपने अंदर महसूस करने के लिए जानबूझकर उसके और ज्यादा करीब खड़ा हो जा रहा था सुगंधा जानबूझकर लकड़ी को इधर-उधर रख रही थी। सुगंधा जिस तरह से झुकी हुई थी उस अवस्था में रोहन अपनी मां को देखकर कुछ ज्यादा ही चुद़वासा हो गया था वह एक हाथ में लकड़ी पकड़ ठीक अपनी मां के पीछे खड़े होकर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को निहारते हुए एक हाथ से अपने लंड को मसल रहा था और इसी पलका जैसे सुगंधा को भी इंतजार था वह तुरंत लकड़ी को सरकाने के बहाने कुछ ज्यादा ही एक झटके से पीछे की तरफ अपनी गांड को ले गई जिससे रोहन अपनी मां की इस हरकत से अपने आप को बचा नहीं सका और सीधे उसका लंड उसकी मां की बड़ी बड़ी गोल गांड से एकदम सट गया।
आहहहहहहहहहह अदभुत अतुल्य अवर्णनीय एहसास से पल भर में ही सुगंधा भर गई । सुगंधा मन ही मन में यह सोचने लगी कि यह पल यही रूक जाए यह पूरी दुनिया यही ठहर जाए इससे आगे का एक भी पल ना हो वह इस पल को जी भर कर जी लेना चाहती थी। अपने गीले नितंबों पर अपने बेटे के कठोर लंड का चुभन महसूस करके वह एकदम मस्त हो गई ऐसा लग रहा था कि जैसे सुगंधा की किस्मत भी उसका साथ दे रही है क्योंकि सुगंधा की हरकत की वजह से रोहन का मोटा तगड़ा लंड सीधे-सीधे सुगंधा की गांड के बीचो बीच की दरार में जाकर फंस गया था जहां से सुगंधा की बुर की दूरी महज दो अंगुल जितनी ही रह गई थी।
इस अदभुत सुखद एहसास भरे लम्हे को छह सात सेकंड जितना भर ही गुजरा था वैसे तो यह लम्हा बहुत होता है लेकिन फिर भी सुगंधा यह जताना चाहती थी कि जैसे कुछ हुआ ही ना हो वह उसी तरह से अपना काम करती रही। दूसरी तरफ रोहन की हालत पतली होती जा रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अजीब कशमकश में फंसा हुआ था अपनी मां की गोल-गोल नितंबों से अपने लंड का जबरदस्त स्पर्श महसूस करके वह किसी और और दुनिया में विचरण कर रहा था। सुगंधा अभी भी अपनी बड़ी मदमस्त गांड को अपने बेटे के लंड से सटाई. हुई थी। और बिल्कुल अनजान बनकर अपना काम कर रही थी रोहन समझ नहीं पा रहा था कि उसकी मां जानबूझकर कर रही है या अनजाने में सब कुछ हुआ है। लेकिन जो कुछ भी हुआ था वह रोहन के लिए बेहद सुख से भरा हुआ था आज तक उसने ऐसा अनुभव नहीं लिया था यह उसके लिए लगभग एक औरत के चोदने के बराबर था। सुगंधा अपने काम में मशगुल होने का नाटक कर रही थी और रोहन यह देख कर उसकी हिम्मत बढ़ती जा रही थी उससे रहा नहीं गया एक खूबसूरत मत मस्त जवानी से भरपूर औरत की गांड उसके लंड से सटी हुई थी जिससे उसके तन बदन में काम होते दिनों की लहार तूफान का रूप धारण कर रही थी और इसी के चलते वह अपने आप को संभाल नहीं पाया और अपने हाथ में पकड़ी हुई लकड़ी को फेंक कर अपने दोनों हाथों से अपनी मां की कमर थाम लिया और हल्के से अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ा दिया जिससे रोहन का लंड पजामे में होने के बावजूद भी और सुगंधा की गांड साड़ी में लिपटी होने के बावजूद भी गीले पन का एहसास लिए रोहन का लंड सुगंधा की गांड को चोड़ी करते हुए हल्के से जाकर सुगंधा की मखमली गुलाबी बुर की गुलाबी पतियों को फैला दी जो कि बेहद हल्के से ही हुआ था लेकिन इतना दोनों के लिए काफी था सुगंधा अपनी जवानी की गरमी को बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपने बेटे के इस हल्के से धक्के की वजह से उसके मुख से सिसकारी निकल गई।,,,
अपने बेटे की हिम्मत की वजह से वह काफी प्रसन्न नजर आ रही थी वह मन ही मन यह सोच रही थी कि काश उसका बेटा अपने हाथों से उसकी साड़ी कमर तक उठा कर अपने मोटे लंड को उसकी गुलाबी बुर के अंदर डालकर उसकी चुदाई कर देता लेकिन यह सुगंधा का ख्याल मात्र था इससे आगे बढ़ने की हिम्मत इस समय ना तो उसमें खुद थी और ना ही रोहन में इतना हो गया था वही बहुत था रोहन अभी भी अपनी मां की कमर थामे अपने लंड को उसकी गांड से सटाया हुआ था

सुगंधा कितनी देर तक ऐसे झुकी रहती उसे इस बात का डर था कि कहीं उसके बेटे को शक ना हो जाए कि वह जानबूझकर ऐसे झुकी हुई है। इसलिए खड़ी होने लगी लेकिन खड़ी होते होते इस बात का एहसास करा गई कि उसका बेटा उसे पीछे से पकड़े हुए हैं इसलिए वह जानबूझकर आश्चर्य जताते हुए बोली।

अरे यह क्या कर रहा है ऐसे क्यों पकड़ा है।

( अपनी मां की बात सुनकर रोहन एकदम से सन्न रह गया क्या जवाब देना है उसे समझ में नहीं आया लेकिन कुछ सेकंड तक शांत रहने के बाद वह बात को संभालते हुए बोला।)

मैं क्या करूं मम्मी तुम खुद ही एकाएक झुक गई तो मैं अपने आप को संभाल नहीं पाया गिरने वाला था इसलिए तुम्हारी कमर पकड़ लिया।

चल कोई बात नहीं सारी लकड़िया हमने ठीक जगह पर रख दी है भीगने का कोई डर नहीं है और अब रात हो गई है आज बेला आई नहीं है इसलिए खाना मुझे बनाना है चल अब चल कर कपड़े बदल ले नहीं तो सर्दी लग जाएगी इतना कहते हुए सुगंधा जाने को हुई लेकिन जाते-जाते एक नजर रोहन के पजामे में बने तंबू पर डालकर मुस्कुराते हुए घर में चली गई और रोहन अपनी मां को गांड मटकाकर जाते हुए देखता रहा।
 
बारिश के मौसम में एक मर्द और औरत की भावनाएं कुछ ज्यादा ही जोर मारती हैं और तब तो यह भावनाएं और भी ज्यादा मचल उठती हैं । और यही हाल रोहन और सुगंधा का भी हो रहा था दोनों इस समय उस्मा के प्यासे थे जो कि एक मर्द और औरत के बदन से ही प्राप्त होता है सुगंधा मर्द के संसर्ग के लिए तड़प रही थी तो रोहन स्त्री संसर्ग का प्यासा था और दोनों मां बेटी एक दूसरे में अपनी जरूरत ढूंढ रहे थे।
दोनों एक दूसरे के बदन से खेलना चाहते थे दोनों अपनी प्यास बुझाना चाहते थे ऐसी तेज तूफानी बारिश में एक औरत की चाह भावना और हसरत यही होती है कि वह एक मजबूत गठीले बदन वाले मर्द की बांहों में हो जिससे उसे संपूर्णता सुरक्षात्मक संतुष्टि का अहसास हो।

सुगंधा अपने प्रयास में लगभग सफल होती जा रही थी क्योंकि जिस तरह से उसने तूफानी बारिश मे अपने तन बदन को भिगोकर अपनी जवानी भरे एक एक अंग के कटाव और उठाव को दिखाते हुए ं अपने बेटे के सीने पर पांव रखकर मयूर नृत्य की थी उस कामुकता भरे अपनी मां के खूबसूरती का जवानी से भरपूर मयूर नृत्य देखकर रोहन अपनी मां का दीवाना हो गया था और उसे भोगने के लिए तड़प रहा था।

सुगंधा बारिश में भीग कर नहा चुकी थी उसके वस्त्र के साथ-साथ उसकी बुर भी उसके नमकीन रस से भीग कर गीली हो चुकी थी। सुगंधा अपने कमरे में गीले वस्त्र को अपने बदन से अलग कर रही थी अपने बेटे के कठोर लंड की चुभन उसे अभी भी अपनी गांड की दरार के बीचो बीच महसुस हो रही थी। इस बात का भी अहसास उसे अच्छी तरह से था कि सारी हरकत उसकी तरफ से भी नहीं हुई थी क्योंकि जिस अवस्था में वह झुकी हुई थी उसके नितंबों का घेराव उसके जवान बेटे के अग्रभाग से सटा हुआ था और ऐसे भी उसका जवान बेटा एक मदमस्त गांड के स्पर्श को वह बर्दाश्त नहीं कर पाया और खुद ब खुद अपने दोनों हाथ को आगे बढ़ा कर अपनी मां की कमर पर रख दिया और उसे कसकर पकड़ते हुए ना चाहते हुए भी अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ा दिया और उसकी हरकत से ऐसा हुआ कि उसका लंड पजामे में होने के बावजूद भी उसकी मां की साड़ी में लिपटी हुई मदमस्त गांड कि दरार को चीरते हुए आगे की तरफ बढ़ने लगी और रुक गया जो कि इतना कुछ होने के बावजूद भी एक शर्म और मर्यादा की दीवार अपने संस्कार की वजह से रुक गया था वरना रोहन का बस चलता तो वह साड़ी सहित अपने लंड को अपनी मां की बुर के अंदर उतार दिया होता।

और अपने बेटे की इस हरकत की वजह से ही सुगंधा की बुर ईस समय फुदक रही थी। सुगंधा को इस बात का एहसास अब अच्छी तरह से हो रहा था कि उसकी बुर एक मोटे तगड़े लंड के लिए तड़प रही थी जिसकी वजह से उसकी बुर की अंदरूनी दिवारे पसीजकर पानी पानी हुए जा रही थी। सुगंधा के सांसो की गति सामान्य बिल्कुल भी नहीं थी। सुगंधा की सांसे काफी गहरी चल रही थी और हर एक सांस पर कामुकता छाई हुई थी सुगंधा काफी हद तक अभी भी उत्तेजित अवस्था में थी उसके रोम-रोम से मादकता की खुशबू उठ रही थी।
सुगंधा के होठों पर वासना की लालास उपस गई थी इस समय उसके होंठ इतने लाल हो चुके थे मानो जैसे कि किसी का लहू लगा हो। तभी हवा का तेज झोंका आया और तेज आवाज के साथ खिड़कियां खुल गई और खिड़की पर लगे पर्दे हवा में उड़ने लगे एक ठंडी हवा का झोंका कमरे में आया और वासना की गर्मी से भरी हुई सुगंधा के तन बदन में ठंडे पवन की लहर का स्पर्श दे गया। सुगंधा इस ठंडी लहर के झोंके से सिहर उठी और अपने आज खुले वस्त्रों के साथ अपने कदम खिड़की की तरफ बढ़ा दी खिड़की के करीब पहुंचते ही अपनी नजरों को वह चारों तरफ घुमाने लगी चारों तरफ केवल तेज बारिश का ही नजारा था दूर-दूर तक कुछ भी नजर नहीं आ रहा था साथ में बादलों की गड़गड़ाहट मौसम को भयानक बना रहे थे लेकिन सुगंधा के लिए यह मौसम भयानक नहीं बल्कि एक अरमानों से भरा हुआ समय लेकर आया था जिसमें सुगंधा अपनी मंशा अपने सपने को पूरा करना चाहती थी अपनी प्यास बुझाना चाहती थी सुगंधाको यह बादलों की गड़गड़ाहट अच्छी लग रही थी तेज बारिश की आवाज उसे मधुर धुन की तरह लग रही थी उसे ऐसा लग रहा था कि यह बारिश उसके लिए सुख का द्वार खोलने आई है।

सुगंधा के मन में एक ही समय में ना जाने कितने अरमान मचल रहे थे उत्तेजना का पारा इस कदर बढ़ गया था कि थर्मामीटर के सेल्सियस से मापना नामुमकिन सा था। वैसे भी आज तक जवानी का तापमान नाप सके ऐसा थर्मामीटर बना ही नहीं सुगंधाको अपनी दुनिया बदलते हुए नजर आ रही थी अब तक की जिंदगी का अध्याय कुछ और था लेकिन अब उसकी जिंदगी का एक अलग पृष्ठ खुलने जा रहा था या यूं कह लो कि अब वह अपनी जिंदगी का अध्याय ख़ुद लिखने जा रही थी। सुगंधा अभी भी खिड़की से बाहर की तरफ झांक रही थी। तेज चल रही हवाएं बार-बार खिड़की को हिला दे रही थी और उसकी आवाज में सुगंधा के कामुक विचार भी भंग हो जा रहे थे जिसकी वजह से उसे परेशानी हो रही थी और वह खिड़कियों को बंद करके पर्दे लगा दी। शाम ढल रही थी लेकिन बरसात की वजह से अंधेरा फैल चुका था और कमरे में काफी हद तक अंधेरा हो चुका था जिसकी वजह से सुगंधा टेबल पर पड़ी लालटेन को जलाकर रोशनी फैलाने की कोशिश करने लगी और लालटेन के जलते ही अंधेरा जैसे दूर भाग खड़ा हुआ और कमरे में उजाला फैल गया।

सुगंधा के ब्लाउज के दो बटन अभी भी खुले हुए थे तभी सुगंधाको ख्याल आया कि उसे तो खाना भी बनाना है आज बेला आई नहीं थी इसलिए वह जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतारने लगी और अगले ही पल वह अपने कमरे के अंदर एकदम नंगी होकर खड़ी थी। अभी कुछ देर पहले ही वह अपने बेटे की आंखों के सामने अपनी खूबसूरत बदन की नुमाइश करके आई थी जिसकी वजह से अभी भी उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ रही थी जिसका सीधा असर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हो रहा था। जिसमें से अभी भी नमकीन रस अमृत की बूंद बन कर टपक रही थी सुगंधा संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में अपने कमरे के बीचो बीच खड़ी थी और उसने जानबूझकर आज अपने कमरे का दरवाजा भी खोल रखी थी क्योंकि अब उसे इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी कि इस अवस्था में उसका बेटा उसे देख लेगा जबकि वह तो यह चाहती थी कि उसका बेटा उसे इस अवस्था में उसे पूरी तरह से नंगी अपनी आंखों से देखें। वह एकदम नंगी होकर अपनी अलमारी से अपने कपड़े निकाल रही थी। उसके नितंब दरवाजे की तरफ थे ऐसा लग रहा था मानो उसकी संपूर्ण जवानी में छोड़ कर उसकी गोलाकार नितंब में भर दी गई है इस तरह से उसके गीले नितंब खूबसूरत लग रहे थे सुगंधा अलमारी में अपने कपड़े ढूंढने में व्यस्त थी और तभी उसका बेटा रोहन अपने कमरे की तरफ जाने के लिए वहां से गुजरा ही था कि अपनी मां के कमरे का दरवाजा खुला देख कर उसकी आंखें खुद-ब-खुद कमरे के अंदर की तरफ घूम गई और अपनी मां को एकदम नंगी अवस्था में खड़ी देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि वह क्या देख रहा है जवानी की मिसाल खूबसूरती की मूरत कही जाने वाली सुगंधा उसकी आंखों के सामने एकदम नंगी अवस्था में खड़ी होकर अलमारी में से अपने कपड़े ढूंढ रही थी और उसका बेटा रोहन आंखें फाड़े अपनी मां की मदमस्त गोलाकार गांड को ही घूरे जा रहा था कभी सुगंधा को इस बात का अहसास हुआ कि दरवाजे पर कोई खड़ा है और वह तुरंत पीछे पलट कर देखी तो रोहन आंखें फाड़े उसकी तरफ भी देख रहा था और यह देखकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न हो रही थी एक दूसरे की नजरें आपस में मिली लेकिन सुकिंदा की आंखों में सर में बिल्कुल भी नहीं थी जबकि अपनी मां की नजरों से अपनी नजर मिल जाने की वजह से रोहन थोड़ा सा शर्मिंदा हो गया और वहां से चलता बना।
सुगंधा मन ही मन खुश हो रही थी क्योंकि वह जो दिखाना चाहती थी उसका बेटा देख चुका था वह जल्दी से अपने कपड़े निकाल कर पहन ली और रसोई घर की तरफ चल दी।
 
सुगंधा बहुत प्रसन्न नजर आ रही थी और साथ ही उत्तेजित भी वह रसोई घर में खाना बना रही थी वह काफी खुश थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके अरमानों को पंख लग गया हो और वह आसमान में उड़ रही हो अपनी खूबसूरत अंगों को किसी मर्द को दिखाने में कितनी संतुष्टि और उत्तेजना का अनुभव होता है आज सुगंधाको इसका आभास हुआ था पर्वतों खुद अपने बेटे को अपने अंगो का प्रदर्शन कर रहीे थी। जिस वजह से उसके तन बदन में उत्तेजना का प्रसार तीव्र गति से हो रहा था वह अपने आप को संभाल नहीं पा रही थी वह रोटी को गोल गोल बेल कर उसे तवे पर रख रही थी और तवे पर रोटी गर्म होकर गोलाकार आकार में फूल जा रही थी वह बड़े ध्यान से तवे पर रोटी को फूलते हुए देख रही थी क्योंकि दोनों की स्थिति सामान थी ठंडे आटे की लोई में से गोलाकार स्थिति में बनकर गर्म तवे पर पढ़ते ही वह ठंडी रोटी गर्म होकर फूलने लग रही थी और ठीक वैसे ही सुगंधा की बुर का हाल था क्योंकि वह भी लगभग सामान्य स्थिति में वासनामई तवे पर चढ़कर कामुकता की आंच मे तपकर रोटी की तरह फूल जा रही थी और जिसकी स्थिति से अवगत होने के लिए सुगंधा बार-बार अपने हाथ को अपनी दोनों टांगों के बीच ले जाकर साड़ी के ऊपर से ही अपनी फुली हुई बुर को मसल दे रही थी जिससे उसे एक अद्भुत सुख का अहसास तो हो रहा था लेकिन तन बदन की कामवासना बढ़ती जा रही थी।
सुगंधा गहरी गहरी सांसे लेते हुए रोटियां बना रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसी स्थिति में हो क्या करें कमरे में जिस तरह से उसके बेटे ने उसके नंगे पन को अपनी आंखों से देखा था उस स्थिति में सुगंधा समझ नहीं पा रही थी कि उस हाल पर अपने आप पर गुस्सा करे या उस पल के लिए मन ही मन धन्यवाद दें क्योंकि अंदर ही अंदर तो वह भी यही चाहती थी कि जिस तरह से भी हो उसका बेटा उसके नंगे पन को अपनी आंखों से देखे। ताकि वह अपनी मंशा पूरी कर सके क्योंकि मर्द शांत स्थिति में एक औरत के साथ तब तक रहता है जब तक कि वह ऊस औरत के नंगे बदन को नहीं देख लेता। और यहां तो खुद एक औरत अपने बदन की नुमाइश कर रही थी और वह भी अपने ही बेटे के सामने तो ऐसे में एक जवान हो रहा बेटा कब तक अपनी भावनाओं पर अपनी मर्यादाओं पर काबू कर पाता यह सब्र का बांध तो एक ना एक दिन टूट ना ही था और आज तो जो कुछ भी हुआ था वह रोहन के लिए सब्र कर पाना नामुमकिन सा होता जा रहा था।

सुगंधा मन ही मन उस पल को धन्यवाद दे रही थी जिस पर वह अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर अलमारी में अपने कपड़े ढूंढ रही थी और उसी समय उसका बेटा उसके कमरे से होकर गुजर रहा था और जाते-जाते एक नजर कमरे में डालकर उसके नंगे पन को उसकी नंगी गांड को प्यासी नजरों से घूर रहा था। एक औरत के लिए अपने कपड़े उतारना और वह भी एक मर्द की आंखों के सामने बहुत ही हिम्मत की बात होती है और लेकिन उस पल एक मर्द के सामने कपड़े उतारने का सुख जो उत्तेजना होती है वह औरत के लिए चरमसुख की तरह ही होती है और वही एहसास सुगंधा आज अपने अंदर महसूस कर रही थी सुगंधा भी यह बात बहुत ही अच्छी तरह से जानती थी कि उसके बदन का कमर के नीचे वाला हिस्सा एक अद्भुत उभार और उठाव लिए हुए था और उसके बदन के इसी हिस्से पर मर्द की प्यासी नजरें सबसे पहले पड़ती हैं जिसे देखकर वह मन में ना जाने कैसी कैसी भावनाओं को जन्म दे देता है।
उसके गोलाकार ने तंबू में एक अद्भुत चमक एक अद्भुत आकर्षण था जिसे वह भली भांति जानती थी क्योंकि गांव मैं खेतों में या कहीं पर से भी जब भी वह गुजरती थी तो आने जाने वालों की नजरों का शीधान सबसे पहले उसके नितंब ही होते थे इसलिए वह पूरे आत्मविश्वास के साथ कह सकती थी कि जिस नजर से उसका बेटा उसकी मद मस्त गांड को देख रहा था उसके मन में उसे चोदने की इच्छा तीव्र रूप से प्रज्वलित हो चुकी होगी।
सुगंधा के मन में हजारों सवाल हजारों जिज्ञासाएं और भावनाओं का बवंडर उठ रहा था। जिससे सुगंधा अपने आपको बिल्कुल भी बचा नहीं पा रही थी और उस बवंडर में खींचती चली जा रही थी। सुगंधा की रसीली और प्यासी बुर से मदन रस की दो बूंदे चु कर नीचे जमीन पर गिर गई जब उसे वह पल याद आ गया जब वह जानबूझकर अपने बेटे के सामने झुककर घोड़ी बन गई थी। वह जानबूझकर अपनी बड़ी-बड़ी मदमस्त गांड को एक स्वादिष्ट व्यंजन से भरी थाली के रूप में अपने बेटे के सामने परोस दी थी जोकि वस्त्र के गीले हो जाने की वजह से सुगंधा की साड़ी और पेटीकोट उसके भराव दार मांसल बदन से एकदम चिपक गए थे जिससे उसका उभार और कटाव बिल्कुल साफ नजर आ रहा था और इस वजह से वह स्वादिष्ट व्यंजन और भी ज्यादा नमकीन हो गया था । रोहन भी अपनी लालच को दबा नहीं पाया और उसके मुंह में भी इस तरह का स्वादिष्ट व्यंजन देखकर पानी आ गया और वह लार टपका ते हुए जाने अनजाने में अपनी मां की मदमस्त बलखाती कमर को दोनों हाथों से थाम बैठा। अपने बेटे का दोनों हाथ अपनी कमर पर मजबूती से पकड़े हुए महसूस करके सुगंधा एक पल के लिए सिहर उठी थी वह एकदम संभोग नीय मुद्रा में झुकी हुई थी और जिस तरह से उसका बेटा अपने दोनों हाथों से उसकी कमर थामे खड़ा था ऐसा लग रहा था कि उसका बेटा उसे चोदने जा रहा है। सुगंधा ऐसे ही अपनी सांसें रोके उसी मुद्रा में झुकी रही उसे अपने बेटे की तरफ से कामुकता भरे हरकत का इंतजार था और रोहन आखिर कब तक इस स्थिति से अपने आप को बचाए रखता जवानी उसमें भी कूट-कूट कर भरी हुई थी भावनाएं उसकी भी मचल रही थी और अपनी मां को इस तरह से झुकी हुई देखकर वह भी अपना सामर्थ्य खो दिया और अपनी मां की कमर थामे हुए ही अपनी कमर को हल्के से आगे की तरफ ठेल दिया जैसे कि एक मर्द औरत की बुर में अपना लंड डालने के लिए ठेलता है और उसकी इस हरकत का असर यह हुआ की रोहन का मजबूत और दमदार लंड अपनी ताकत दिखाता हुआ सुगंधा की साड़ी और पेटीकोट सहित गांड के बीचो बीच की दरार के अंदर घुसता चला गया जो कि सीधे जाकर सुगंधा की गुलाबी रसीली बुर की गुलाबी पत्तियों को खोलकर बुर के गुलाबी छेद पर दस्तक देने लगा। सुगंधा को अपनी जवानी और मद भरी बदन पर इतना तो विश्वास था कि उसकी इस हरकत की वजह से उसका बेटा जरूर एक कदम आगे बढ़ेगा लेकिन इतना आगे बढ़ जाएगा उसे बिल्कुल भी यकीन नहीं था इसलिए अपने बेटे के इस तरह के एकाएक हमले की वजह से वह पूरी तरह से कामोत्तेजना से सिहर उठी।
रोहन ने जिस तरह की हिम्मत दिखाते हुए यह हरकत किया था सुगंधा का दिल कर रहा था कि अपने दोनों हाथों से अपनी गांड की दरार को फैला कर अपनी बुर के दीवान खंड में नए मेहमान का गर्मजोशी के साथ स्वागत करें लेकिन ऐसा करने में वह असमर्थ थी। दैहिक रूप से तो वह पूरी तरह से तैयार थी लेकिन मानसिक तौर पर अभी भी वह पूरी तरह से सक्षम नहीं थी कि इस तरह के कदम उठा सके। लेकिन उस पल सुगंधा अपने बेटे का मोटा तगड़ा लंड अपनी बुर के अंदर लेने के लिए मचल उठी थी। और उस पल को याद करके सुगंधा की बुर पानी पानी हो गई थी, खाना बनाते समय सुगंधा अपने बेटे से चुदवाने का कोई जुगाड़ ढूंढ रही थी और उसे कोई भी युक्ति समझ में नहीं आ रही थी जिसका उपयोग करके आज की रात वह अपने बेटे के लंड काे बुर में लेकर अपनी प्यास बुझा सके।
खाना बन चुका था लेकिन उसे कोई भी युक्ति समझ में नहीं आ रही थी अपनी मंशा को पूरी करने के लिए कोई भी उम्मीद नजर ना आता देख सुगंधा व्यतीत होने लगी वह अपने बेटे को खाना परोस रही थी सुगंधा रोशनी के लिए लालटेन जला कर रखी थी जिसकी रोशनी में सब कुछ साफ साफ नजर आ रहा था सुगंधा के गीले बाल बिखरे हुए थे जिसमें से भीनी भीनी खुशबू वातावरण को मादक बना रही थी और रोहन अपनी मां का यह रूप देखकर मन ही मन उत्तेजना का अनुभव कर रहा था रोहन नीचे बैठा हुआ था और सुगंधा थोड़ा झुक गया खाना परोस रही थी जिसकी वजह से ब्लाउज का एक बटन खुला होने से सुगंधा की आधे से ज्यादा चूचियां बाहर को लटकती हुई नजर आ रही थी जिसे देखकर रोहन का लंड खड़ा हो गया था और इस बात पर सुगंधा का ध्यान जाते हैं सुगंधा मन ही मन प्रसन्न होने लगी लेकिन मन ही मन में अपने बेटे को गाली भी दे रही थी कि यह कैसा लड़का है जो कि औरत के इतने ईसारे के बावजूद भी हाथ बांधे बैठा है इतने में कोई और लड़का होता तो ना जाने कबसे चढ़ गया होता। खेर दोनों साथ में बैठकर खाना खाने लगे पर दोनों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों एक दूसरे को कनखियों में देख रहे थे।
जिस बात को लेकर सुगंधा मन ही मन परेशान हो रही थी उसी बात को लेकर रोहन भी परेशान हो रहा था वह भी कोई जुगाड़ देख रहा था कोई युक्ति सोच रहा था ताकि वह भी आज की रात अपनी मां को चोद सकें क्योंकि वह भी पूरी तरह से कामोत्जित हो चुका था जिस तरह से उसकी मां ने बारिश में लकड़ी उठाते समय हरकत की थी और अपनी मां के भराव दार नितंबों पर अपना लंड रगड़ कर जिस तरह का अनुभव रोहन ने किया था उस वजह से उसका भी मन कर रहा था अपनी मां को चोदने के लिए इसलिए वह भी जुगाड़ में ही था लेकिन उसे भी कोई जुगाड़ नजर नहीं आ रहा था कि तभी खाना खाते खाते सुगंधा को छींक आने लगी और अपनी मां को छिंकता हुआ देखकर रोहन तुरंत बोला।

मम्मी मैं जानता था इस तरह से भिगो गी तो तुम्हें सर्दी हो जाएगी और देखो तुम्हें सर्दी हो गई।
( और तभी सुगंधा के दिमाग में एक युक्ति सूझी और वह बोली ).
हारे मुझे भी ऐसा लग रहा है और मेरा बदन भी टूट रहा है मुझे डर है कि कहीं मुझे बुखार ना आ जाए,,,, तू एक काम करना सरसों के तेल को गर्म करके मेरे कमरे में आ जाना और थोड़ी मालिश कर देना मुझे राहत मिल जाएगी,,, आएगा ना,,,,,,

हां जरूर आऊंगा,,,,,,,,,

इतना सुनकर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न होने लगी
 
सुगंधा अपने आपको तैयार करके पूरी तैयारी के साथ अपने कमरे में लेट कर अपने बेटे का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी तन बदन में वासना की तरंगे उठ रही थी। बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई सुगंधा अपने कपड़ों को अस्त-व्यस्त की हुई थी ताकि उसके बेटे की नजर उसके खुले हुए अंगों पर पड़े उसकी साड़ी घुटनों तक चढ़ी हुई थी जिससे उसकी गोरी गोरी पिंडलिया साफ नजर आ रही थी। छाती पर से साड़ी का पल्लू जानबूझकर हटा दी थी जिससे उसकी बड़ी-बड़ी भराव दार छातिया साफ नजर आ रही थी और उस पर भी कत्ल कर देने वाली बात यह थी कि उसने ब्लाउज के ऊपर के दोनों बटन को जानबूझकर खोल रखी थी। जिससे उसके दोनों कबूतर फड़फड़ा ते हुए नजर आ रहे थे आज वह पूरी तरह से अपने बेटे को अपनी आगोश में ले लेना चाहती थी अपने हुस्न का दीवाना बना देना चाहती थी और अंदाज ऐसा था कि रोहन की जवानी उसकी ही मां की मदहोश जवानी के आगे घुटने टेक दे।

बारिश अभी भी पूरे वातावरण में अपना शबाब का असर दिखा रही थी बारिश थी कि बंद होने का नाम नहीं ले रही थी चारों तरफ धूप्प अंधेरा फैला हुआ था। जोकि सुगंधा ने लालटेन की लव को एकदम हल्की करके पूरे कमरे में हल्की रोशनी फैला रखी थी जिससे सब कुछ तो नहीं लेकिन फिर भी साफ साफ नजर आ रहा था। हवा का जोर कम होने की वजह से सुगंधा ने ठंडी हवा कमरे में आ सके इसलिए खिड़की खोल दी थी जिससे रह-रहकर ठंडी हवा का झोंका कमरे में अपनी ताजगी का अनुभव करा जा रहा था। सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजित थी और उसे साफ-साफ अनुभव हो रहा था कि उसकी बुर में से धीरे-धीरे करके नमकीन रस बह रहा था। सांसो की गति सामान्य तौर पर सामान्य नहीं थी हल्की-हल्की गहरी चल रही थी सुगंधा को पूरा यकीन था कि उसका बेटा कमरे में जरूर आएगा क्योंकि दिन भर की उसकी कामुक हरकतों की वजह से उसका बेटा पूरी तरह से कामोत्तेजना के सागर में डूबता चला जा रहा था और इस मादकता से भरे कुंड में डुबकी लगाने की लालच को वह किसी भी शक्ल में रोक पाने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था और अपने बदन की मालिश की अद्भुत कहीं जाने वाली कार्य को जिस अदा से उसने अपने बेटे को सौंपकर कर उसे अपने कमरे में आने का आमंत्रण दी थी उस आमंत्रण के चलते रोहन का दिल जोरों से धड़क रहा था वह भी अपने कमरे में इधर-उधर चक्कर काट रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां के कमरे में जाए कि ना जाए।
वह अपने कमरे में इधर-उधर चक्कर काटते हुए सिर्फ अपनी मां की बातों पर सोच विचार कर रहा था यह फैसला बिल्कुल भी नहीं दिया था कि वह अपनी मां के कमरे में नहीं जाएगा बल्कि आज तो उसे उसकी तपस्या के फलस्वरूप उसे यह मौका मिला था कि वह अपनी मां के कमरे में जाकर अपनी मां के खूबसूरत बदन को अपने हाथों से छू सके उसकी मादकता को अपने अंदर महसूस कर सके अपनी मां के नरम नरम मांसल बदन की उस्मा को अपने अंदर महसूस करके उत्तेजित हो सके।
रोहन के मन में भी ढेर सारे विचार आ जा रहे थे उसका दिल किसी गुब्बारे की तरह हवा में उड़ रहा था। वह मन में यह सोच रहा था कि हो सकता है कि शायद उसे मालिश करते करते कुछ और भी देखने को मिल जाए जिसे उसकी मां ने किसी अनमोल खजाने की तरह पर्दे में कैद करके रखी है वैसे तो वह शाम को ही अपनी मां के नग्न बदन के दर्शन कर चुका था । लेकिन वह दर्शन सही मात्रा में दूर का दर्शन था क्योंकि शाम ढल रही थी अंधेरा हो रहा था और ऐसे में रोहन को उसकी मां की खूबसूरत बदन का मात्र सांचा ही नजर आ रहा था उसके बदन के छोटे-छोटे खूबसूरत अंग की बनावट उसकी संरचना को देखने का उसे लाभ प्राप्त नहीं हुआ था और इसीलिए उसके मन में यह जिज्ञासा बस गई थी कि शायद अपनी मां की मालिश करते करते एकदम नजदीक से उसे अपनी मां के खूबसूरत अंगों को देखने का मौका मिल जाए। इसी उम्मीद से वह रसोई घर में गया और सरसों के तेल को एक कटोरी में लेकर उसे लालटेन की लव के ऊपर रखकर हल्का सा कुनकुना गर्म कर दिया और धड़कते दिल के साथ वह धीरे-धीरे अपनी मां के कमरे की तरफ जाने लगा।
उत्तेजना और उत्सुकता का असर यह हुआ था कि रोहन का लंड अभी से ही पजामे मे तन कर खड़ा हो गया था और पजामे में तंबू बना दिया था। जिसे रोहन आज छुपाने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं कर रहा था और उसी अवस्था में अपनी मां के कमरे की तरफ चला जा रहा था कुछ ही देर में वह अपनी मां के कमरे के बाहर खड़ा था और दरवाजे पर लगी कुंडी को खटका ते हुए दस्तक दे रहा था। कमरे के अंदर बिस्तर पर सुगंधा अपने बेटे का इंतजार करते हुए बेसब्री से करवटें बदल रही थी और कुंडी की आवाज सुनते ही उसके चेहरे पर प्रसन्नता खिल उठी वह पीठ के बल होते हुए बोली।

दरवाजा खुला है अंदर चला आ।
( अपनी मां की आवाज सुनते ही रोहन का तन बदन उत्तेजना से सिहर उठा भले ही बड़े ही सामान्य लहजे में कह जाने वाली यह बात थी लेकिन यह खुले तौर पर अपने कमरे में आने का निमंत्रण था जो कि बेहद उत्तेजना से भरा हुआ था। एक मां भले ही अपने बेटे को अपने कमरे में आने के लिए बोल रही थी लेकिन इस समय इस आमंत्रण का मतलब साफ था कि एक औरत एक मर्द को अपने कमरे के अंदर बुला रही थी जिसमें किसी भी प्रकार की रिश्तेदारी मान मर्यादा की डोर नहीं थी रोहन भी अपनी मां की बात सुनते ही हल्के से दरवाजे को धक्का देकर कमरे में प्रवेश कर गया। और एक हाथ में सरसों के तेल की कटोरी लिए हुए दूसरे हाथ से दरवाजा बंद करके उसकी कुंडी लगा दिया जिसे देख कर सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की चीटियां रेंगने लगी उसे वह पल याद आने लगा जिस समय वह शादी करके इस घर में आई थी और इसी तरह से उसके पति ने कमरे में आकर अपने हाथों से दरवाजा बंद करके उसकी कुंडी लगा दी थी। जोकि एक तरह की मोहर थी जिससे वह सुगंधाको अपना बनाने के लिए कमरे में प्रवेश किया था और आज ठीक वैसे ही रोहन ने भी किया था यह जानते हुए भी कि इस समय घर पर उन दोनों के सिवा कोई भी नहीं था फिर भी उसने कमरे में प्रवेश करके कुंडी लगाना उचित समझा सुगंधा पीठ के बल लेट कर अपने बेटे को देख रही थी कि तभी उसके मन में शरारत सूझी और वह तुरंत पेट के बल लेट गई और घुटनों को मोड़ कर अपने पैर को हिलाने लगी जिससे उसकी साड़ी घुटनों तक आ गई और उसकी गोरी गोरी पिंडलिया नजर आने लगी। वह कनखियों से अपने बेटे की तरफ देख रही थी जो कि धीरे-धीरे उसकी तरफ ही बढ़ता चला आ रहा था। उसे पक्का यकीन था कि उसके बेटे की नजर उसके भरावदार बड़ी बड़ी गांड पर जरूर पड़ेगी जो कि इस समय हल्के हल्के टांग हिलाने की वजह से उसमें थीरकन सी हो रही थी। और जैसा हुआ सोच रही थी ठीक वैसा ही हुआ हाथ में कटोरी लिए रोहन जैसे-जैसे अपने मां के बिस्तर के करीब जा रहा था वैसे वैसे उसकी नजर अपनी मां के खूबसूरत बदन के ऊपर से नीचे तक पड़ रही थी खासकर के कमर के नीचे वाले भाग पर जो कि बेहद कमसिन और उत्तेजक उभार लिए हुए था।
अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर रोहन का मन लग जा रहा था रोहन को अपने बेहद करीब आता देखकर सुगंधा उसी अवस्था में लेटे लेटे ही बोली।

क्या कर रहे थे रोहन में कब से तुम्हारा इंतजार कर रही हूं।

मम्मी में तेल गर्म कर रहा था इसलिए देर हो गई ( बिस्तर के पास ही रखी हुई टेबल पर सरसों के तेल की कटोरी रखते हुए बोला)

कोई बात नहीं बेटा आप जल्दी से मेरी कमर पर तेल की मालिश कर दे बहुत दर्द कर रही है (सुगंधा उसी अवस्था में कमसिन लड़की की तरह अपने दोनों पैर को हिलाते हुए बोली रोहन अपनी मां की बात सुन रहा था और उसकी बात सुनते ही उसके तन बदन में उत्तेजना की लार दौड़ने लगी आज पहली बार वह किसी औरत की खूबसूरत बदन की मालिश करने जा रहा था और वह भी खुद की मां की जिसकी खूबसूरत बदन को देख देख कर वह कामोत्तेजना की स्थिति में ना जाने कितनी बार अपना पानी निकाल चुका था उसकी आंखों के सामने उसकी मदमस्त मा लेटी हुई थी जिसकी भारी-भरकम मादकता छलका ते हुए उसके नितंब थीरकन कर रहे थे।

ठीक है मम्मी मैं अभी आपकी कमर पर मालिश कर देता हूं जिससे तुम्हें राहत मिलेगी । (वह अपनी मां के बिस्तर पर उसके बेहद करीब बैठता हुआ बोला ,,,, वैसे वह ना जाने कितनी बार अपनी मां के बेहद करीब बैठ चुका था लेकिन आज पहली बार इस अवस्था में अपनी मां के करीब बैठते हुए रोहन की दिल की धड़कने तेज दौड़ रही थी सुगंधा भी अपनी मदमस्त मैं तुम्हारी गांड को हल्के से उठाकर थोड़ा सरक गई ताकि रोहन आराम से बैठ सके रोहन जिस तरह से बैठा हुआ था उससे उसकी कमर के नीचे वाला हिस्सा सुगंधा के मदमस्त खूबसूरत जांघो से स्पर्श हो रहा था जिससे उसकी उत्तेजना बढ़ने लगी थी । रोहन को एक बात का मलाल हो रहा था क्योंकि कमरे में रोशनी ज्यादा तो नहीं थी फिर भी पर्याप्त मात्रा में थे जिससे उसे उसके मां की खूबसूरत बदन के दर्शन करने को तो मिल ही रहे थे लेकिन रोहन की प्यास थी कि बढ़ती जा रही थी वह अपनी मां की खूबसूरत बदन को एकदम दुधिया रोशनी में देखना चाहता था लेकिन इस समय ऐसा संभव बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि तेज बारिश की वजह से घर की लाइट जा चुकी थी और ऐसे में अपनी मां के खूबसूरत बदन के दर्शन करने का एकमात्र सहारा वह लालटेन ही था जिसमें से पीली रंग की रोशनी लब लबा रही थी।,,,, रोहन अपनी मां की खूबसूरत बदन को ऊपर से नीचे की तरफ देख रहा था बाल खुले हुए थे जिसमें से भीनी भीनी खुशबू पूरे वातावरण को मादक बना रही थी जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव रोहन कर रहा था उसी तरह की उत्तेजना का अनुभव सुगंधा भी कर रही थी उसके तन बदन में भी उत्तेजना की चिंगारियां फूट रही थी अपने बेटे को इस अवस्था में अपने बेहद करीब और वह भी अपनी जांघों से सटा हुआ बैठा देख कर सुगंधा की बुर कुलबुला रही थी उसकी बुर के अंदर वासना की खुजली हो रही थी जिसे वह अपनी उंगली से खुजाना चाहती थी लेकिन अपने बेटे की आंखों के सामने वह अपनी बुर खुजलाने में भी असमर्थ थी। वैसे उसकी बुर की खुजली मिटाने का बेहद दमदार ओजार उसके बेटे के पास ही था जो कि इस समय पजामे में गदर मचाए हुए था। कुछ देर तक कमरे में यूं ही शांति छाई रही सुगंधा का तन बदन हिचकोले खा रहा था अपने बेटे के हथेलियों के स्पर्श के लिए और रोहन था कि अपनी मां के खूबसूरत बदन के दर्शन करता ही जा रहा था ना तो वह कुछ बोल रहा था और ना ही सुगंधा लेकिन कुछ देर तक यूं ही शांत रहने के बाद कमरे में फैली हुई शांति को भंग करते हुए सुगंधा बोली।

अरे अब ऐसे ही बैठे रहोगे या मालिश भी करोगे मेरी कमर में कितना दर्द हो रहा है।

हां हां मम्मी करता हूं और ऐसी मालिश करूंगा कि तुम्हारे बदन का दर्द पल भर में ही गायब हो जाएगा।

सिर्फ बातों से काम नहीं चलेगा दर्द गायब करके दिखा तब मानुंगी कि तेरे हाथों में जादू है।

ठीक है मम्मी मैं अभी अपने हाथों का कमाल दिखाता हूं इतना कहने के साथ ही रोहन टेबल पर पड़ी सरसों की कटोरी उठा लिया और अपनी मां की कमर पर हल्की धार लिए हुए सरसों के तेल को गिराने लगा जैसे-जैसे सुगंधाको अपनी कमर पर सरसों का तेल गिरता हुआ महसूस हो रहा था वैसे-वैसे उसके i तन बदन में कामोत्तेजना की लहर उठ रही थी उसे उत्तेजना के मारे अपनी बुर फूलती पिचकती हुई महसूस हो रही थी।
 
२,,, रोहन जैसे-जैसे अपनी मां की कमर पर सरसों के तेल की धार गिराता जा रहा था वैसे वैसे सुगंधा के तन बदन में कामोत्तेजना की गुदगुदी बढ़ती जा रही थी उसके चेहरे पर मादकता के भाव साफ नजर आ रहे थे । रोहन का भी दिल जोरों से धड़क रहा था आज पहली बार उसे अपनी मां के खूबसूरत बदन को स्पर्श करने का मौका जो मिला था और इस मौके को रोहन किसी भी अवस्था में गवाना नहीं चाहता था बल्कि इस मौके का पूरा लाभ उठाना चाहता था इसलिए वह तेल की कटोरी वापस टेबल पर रख कर अपने दोनों हथेली को अपनी मां की कमर पर रखकर हल्के हल्के दबाते हुए मालिश करना शुरू कर दिया। सुगंधा अपनी कमर पर एक जवान मर्द की हथेली को महसूस करते हैं मारे उत्तेजना के गदगद होने लगी क्योंकि जिस तरह से रोहन मालिश करते हुए अपनी मां की कमर को अपने दोनों हाथों से थामकर दबाए हुए था इस तरह से मर्द औरत की कमर को तभी थाम ता है जब पीछे से उसकी चुदाई कर रहा होता है इसलिए यह सोचकर ही सुगंधा की बुर उत्तेजना के मारे रोटी की तरह फूल गई।
दोनों के बीच खामोशी छाई रही रोहन उसी तरह से अपनी मां की कमर पर मालिश करता रहा और सुगंधा अपने बेटे की दमदार हथेली की उस्मा को अपने अंदर महसूस करके मस्त होने लगी हालांकि रोहन को अपनी मां की कमर पर मालिश करने में उसके कपड़े बाधित ही नजर आ रहे थे वह मन ही मन यही सोच रहा था कि, काश उसकी मां अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी हो जाती तो उसके नंगे बदन को स्पर्श करने में और उसकी मालिश करने में और भी ज्यादा मजा आता लेकिन एक बेटा होने के नाते वह अपने मुंह से अपनी मां से यह तो नहीं कह सकता था कि मम्मी तुम अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाओ तब तुम्हें मालिश करवाने में और ज्यादा अच्छा लगेगा,,,,,
रोहन को दिक्कत तो साफ महसूस हो रही थी क्योंकि कमर का हिस्सा से लेकर ऊपर तक का हिस्सा मात्र एक बिता भर ही रह जा रहा था जिस पर वह ठीक तरह से मालिश नहीं कर पा रहा था या यूं कह लो कि वह अपनी मां की खूबसूरत बदन का अच्छी तरह से दीदार नहीं कर पा रहा था यह बात शायद सुगंधा को भी महसूस हो रही थी क्योंकि जिस तरह से वह जोर लगाकर अपनी हथेली को उसकी कमर से रगड़ रहा था इससे सुगंधा की लालच जागरूक होने लगी थी वह मन ही मन चाह रहीे थीे कि रोहन अपनी मजबूत हथेलियों की रगड़ उसके बदन के हर हिस्से पर महसूस करवाएं। लेकिन वह भी शर्म आ रही थी खुलकर अपने बेटे से यह बात कहने के लिए इसलिए वह मां बेटे के बीच की झिझक को कम करने के लिए बातचीत का दौर शुरू करते हुए बोली।

तू तो बहुत अच्छी तरह से मालिश करता है रे तूने तो बेला की याद दिला दिया वह भी इसी तरह से दम लगाकर मालिश किया करती थी काश वो इधर होती तो शायद और मजा आता।
( बेला का जिक्र होते ही रोहन को उस दिन वाला सारा नजारा याद आने लगा जब वह खिड़की से अपनी मां के कमरे के अंदर बेला के द्वारा मालिश करवातै हुए देख रहा था और बेला बात ही बात में धीरे-धीरे अपनी मां के बदन से सारे उतरवाकर उसे एकदम नंगी करके उसकी मालिश कर रही थी और यह नजारा देखकर रोहन अपनी उत्तेजना को संभाल नहीं पाया और उसके लंड ने पानी फेंक दिया। अपनी मां की बात सुनकर वह बोला।)

मम्मी मेरी जगह अगर बेला होती तो वह भी इसी तरह से मालिश करती उसमें क्या मजा आ जाता है मैं भी तो अच्छी तरह से कर रहा हूं ना।,,,,,

तू समझ नहीं रहा है बेला एक औरत है और एक औरत के सामने में किसी भी तरह से मालिश करवा सकती हूं तुझसे थोड़ा पर्दा करना पड़ता है। ( सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे के सामने इस तरह से खुले शब्दों में बोल रही थी ताकि उसका बेटा उसके मन की मनसा को भी समझ सके और रोहन की अपनी मां की बात को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए वह बोला।)

मैं कुछ समझा नहीं मम्मी तुम कहना क्या चाहती हो। ( रोहन अनजान बनते हुए बोला)

अरे बेटा इतना भी नहीं समझते कि वह एक औरत है और एक औरत के सामने मुझे कपड़े उतारने में बिल्कुल भी शर्म नहीं महसूस होगी और वह तो मेरी ऐसे ही मालिश करती थी मेरे कपड़े उतार कर लेकिन तेरे सामने में ऐसा नहीं कर सकती।
( सुगंधा भी अच्छी तरह से जानती थी कि अगर आगे बढ़ना है तो दोनों के बीच की झिझक को कम करना होगा इसलिए वह बिल्कुल भी लाज शर्म छोड़कर खुले शब्दों में अपने बेटे से कह रही थी लेकिन एकदम से उसके सामने कपड़े नहीं उतार सकती थी अपनी मां की बात का जवाब देते हुए रोहन बोला।)

हां मम्मी यह बात तो है मुझे भी इस तरह से कपड़ों में मालिश करना नहीं ठीक लग रहा है और सही कहूं तो सही मायने में मालिश ठीक से हो भी नहीं रही है लेकिन कर भी क्या सकते हैं (इतना कहते हुए रोहन हल्के से अपनी उंगली को कमर के नीचे वाले पेटीकोट के अंदर घुसाते हुए उस जगह को जोर से दबाते हुए मालिश करने लगा सुगंधा को एक उंगली अपने पेटीकोट में कुश्ती हुई महसूस होते ही तन बदन में मस्ती की लहर दौड़ने लगी उसकी इच्छा हो रही थी कि अभी इसी वक्त अपने बेटे के सामने अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाए और जी भर कर उसी से मालिश करवाएं लेकिन अभी ऐसा करना उसकी नजर में उचित नहीं लग रहा था। वह अपना मन मसोसकर रह जा रही थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे के सामने ऐसा क्या करें कि वह पूरी तरह से नंगी हो जाए और अपने बेटे की वासना भरी नजरों की चुभन का आनंद ले। वह कुछ देर तक उसी तरह से अपनी कमर के इर्द-गिर्द मालिश करवाती रही और रोहन जानबूझकर मालिश करने के बहाने अपनी एक उंगली अपनी मां की पेटीकोट के अंदर हल्के से प्रवेश करा दे रहा था जिससे सुगंधा के तन बदन में आग लग जा रही थी। सुगंधा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें जिस तरह से उसका बेटा अपनी एक उंगली को उसकी पेटीकोट के अंदर घुसा रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई जबरदस्ती उसकी पेटीकोट उतारकर उसकी बुर में उंगली करना चाह रहा हो और सही मायने में रोहन का इरादा कुछ ऐसा ही था भले ही वह जानता था कि बुर की दिशा गलत है लेकिन फिर भी वह अपनी ऊंगली को पेटीकोट में डालकर अपनी मां की मधभरी बुर की गर्मी को अपने अंदर महसूस करना चाह रहा था और ऐसा करने में उसके पजामे में उसका लंड पूरी तरह से ग़दर मचाए हुए था। ईतने मे ही सुगंधा के पेटीकोट में जवानी का बवंडर उठने लगा उसकी सांसों की गति गहरी होने लगी।
वह समझ नहीं पा रही थी कि अपने बेटे की इस हरकत के बारे में वह उसी से क्या कहें उसकी तो बोलती बंद हो गई थी क्योंकि अब रोहन जानबूझकर अपनी बीच वाली उंगली को पेटिकोट के अंदर सरका दे रहा था जिससे सुगंधा के नितंबों का उभार जहां से शुरू हो रहा था वहां पर उसकी उंगली स्पर्श हो रही थी सुगंधा से बर्दाश्त नहीं हुआ और वह अपने बेटे से बोली।,,,

बेटा,,, मेरे कमर के नीचे वाले भाग पर भी दर्द हो रहा है तो उसे दबा देता तो अच्छा होता,,,,
( इतना सुनकर रोहन की बांछें खिल गई उसके तन बदन में मस्ती की लहर दौड़ने लगी क्योंकि इशारे में साफ साफ शब्दों में उसकी मां उससे अपनी गांड दबवाना चाहती थी। रोहन के लिए तो यह अपने दोनों हाथों में लड्डू के समान था क्योंकि जिस तरह का निमंत्रण और उसकी मां उसे दे चुकी थी उसे इतना तो यकीन हो गया था कि आज बहुत कुछ होने वाला है धीरे-धीरे बात गांड दबाने तक पहुंच चुकी थी लेकिन फिर भी अपनी मां की बात पर शंका जताते हुए वह बोला।)

मैं कुछ समझा नहीं मम्मी कहां दर्द हो रहा है।,,,, ( रोहन फिर से अपने हथेलियों की रगड़ दिखाते हुए अपनी बीच वाली होली को अपनी मां की पेटीकोट के अंदर सरका दिया बार-बार ऐसी हरकत पर सुगंधा उत्तेजना से सिहर उठ रही थी धीरे से अपनी नजर को पीछे की तरफ घुमाई रोहन भी अपनी मां की तरफ देखा दोनों की आंखें चार हो गई सुगंधा शर्म से पानी पानी हो गई लेकिन फिर भी हाथ के इशारे से अपने नितंबों को दिखाते हुए बोली।)

यहां पर कुछ ज्यादा ही दर्द हो रहा है इसे अच्छी तरह से दबा देता तो अच्छा होता। ( रोहन अपनी मां के हाथ के इशारे की तरफ देखकर उत्तेजना से गदगद हो गया जिस तरह से उसकी मां उंगली का इशारा अपनी गांड की तरफ करके उसे दिखा रही थी उससे रोहन का लंड पूरी तरह से टाइट हो गया। रोहन आंखें पड़े अपनी मां की गोल-गोल नितंबों को देख रहा था जो कि साड़ी के अंदर होने के बावजूद भी अपना उभार साफ-साफ लालटेन की रोशनी में महसूस करा रही थी रोहन का मन तो कर रहा था कि अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा कर उसकी नंगी गांड को अपने हाथों से मसल मसल कर मालिश करने का आनंद ले और अपनी मां को उसका पूरी तरह से आनंद भी दे।

इसको दबाना है,,,?

हारे इसी को दबाना है बहुत दर्द कर रही है।

सरसों के तेल से मालिश कर दूं क्या ( रोहन अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को ललचाए आंखों से देखते हुए बोला,,, सुगंधा अपने बेटे की ऐसी बात सुनकर सोच में पड़ गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे के सवाल का क्या जवाब दे मन तो कर रहा था कि कह दे कि हां तू अपने हाथों से मेरी साड़ी उतार कर मुझे नंगी करके मेरी मालिश कर दी लेकिन अभी भी उसके अंदर चीजें को बाकी थी इसलिए वह कुछ देर सोचने के बाद बोली।

नहीं मालिश कैसे हो पाएगी तू बस अच्छी तरह से दबा दें शायद इसी से मेरे दर्द में राहत मिल जाए।

ठीक है मम्मी( इतना कहकर रोहन धीरे-धीरे अपनी हथेली को अपनी मां की कमर से रगड़ता हुआ कमर से नीचे की तरफ के उन्नत ऊभारो की तरफ ले जाने लगा जो कि इस समय गदराई हुई गांड साड़ी में लिपटी होने के बावजूद भी रोहन की हथेलियों में साफ-साफ महसूस हो रही थी। रोहन का दिल जोरों से धड़क रहा था वह अपनी हथेली को धीरे-धीरे अपनी मां के नितंबों के उभारों की ऊंचाई की तरफ ले जा रहा था जिससे सुगंधा की भी सांसों की गति तेज हो रही थी। ऐसी तेज बारिश में और खिड़की में से चल रही ठंडी हवा के बावजूद भी रोहन के माथे पर पसीने की बूंदें उपस आई थी। और यही हाल सुगंधा का भी था अपने बेटे की मजबूत हथेलियों का स्पर्श अपनी नाजुक कमर पर महसूस करते ही शरीर की वासना उस्मा का रूप धारण करके माथे पर पसीने की बूंदें बनकर बहने लगी थी।
रोहन की तो हालत खराब होती जा रही थी उसकी आंखों के सामने हुस्न का खजाना पड़ा हुआ था जिसे वह चाहे जैसे भी लूट सकता था। और इसी चाह में वह आगे बढ़ते हुए अपनी मां के बेहद खूबसूरत अनमोल खजाने पर उसकी दोनों हथेलियां जमी हुई थी जिसे वह और ऊपर की तरफ ले जा रहा था जहां पर औरत की खूबसूरती और आकर्षण का मुखारविंद होता है । रोहन अपनी कांपती हुई उंगलियों का कसाब अपनी मां के नरेंद्र नितंबों पर बढ़ाता चला जा रहा था और जैसे-जैसे सुगंधा को अपने बेटे की हथेलियों का स्पर्श उसका कसाब अपनी मदमस्त गांड पर हो रहा था वह उत्तेजना के मारे जैसे हवा में उड़ रही हो ऐसा महसूस कर रही थी अपने बेटे की उंगली और हथेलियों का कसाव उसे अपने नितंबों पर एकदम साफ महसूस हो रहा था क्योंकि आज वह जानबूझकर चड्डी नहीं पहनी थी।

रोहन अपनी मां की मदमस्त मस्त गांड की देखती हुई उस मां को अपनी हथेलियों पर बराबर महसूस कर रहा था उसके तन बदन में उत्तेजना की ज्वाला उठ रही थी अपने आप को एक दायरे में बात कर रखना उसके लिए मुश्किल हुए जा रहा था पल भर में यह वह कामोत्तेजना के असर की वजह से अपनी हथेलियों का कासा और अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड पर बनाने लगा वह जोर-जोर से अपनी मां की गांड को दबाना शुरू कर दिया ऐसा लग रहा था कि जैसे वह ढेर सारा आटा गूथ रहा हो और अपने बेटे की इस हरकत का असर सुगंधा अपने तन बदन में बेहद मादक रूप में महसूस कर रही थी उसे अपनी टांगों के बीच की स्थिति कुछ ठीक नहीं लग रही थी बार-बार उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसकी छोटी सी पतली सी दरार के अंदर बहुत बड़ा बवंडर उठ रहा हो।
सुगंधा से भी अपनी स्थिति संभाले नहीं संभल रही थी मन तो उसका बहुत कर रहा था कि अभी सब कुछ करले सारी मर्यादाओं की डोर को संस्कारों की दीवार को यही गिरा दें और खुद अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड पर अपनी बड़ी बड़ी गांड रखकर चढ़ जाए और खुद ही उसे चोद कर अपनी प्यास बुझा ले। उसकी बड़ी बड़ी गांड को चुंथ रहा था अपने हाथों से दबा रहा था मसल रहा था उस स्थिति में एक औरत को चुदवाने के सिवा और कोई रास्ता नजर नहीं आता। रोहन पागलों की तरह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को दबा रहा था जिसकी वजह से ना चाहते हुए भी सुगंधा के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ रही थी।

सससहहहह,,,,,, बहुत अच्छा लग रहा है बेटा बहुत अच्छे से तुम दबा रहे हो ऐसा लग रहा है कि सच में मेरा दर्द गायब हो जाएगा।

मैं कहा था ना कि मैं बहुत अच्छी मालिश करूंगा।

हारे मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था लेकिन अब लगने लगा है कि तू बहुत अच्छी मालिश करता है। ( इतना कहकर सुगंधा अपने बेटे के हाथों का कसाव, उसकी मजबूती को अपनी मदमस्त गांड पर महसूस करके मस्त होते हुए अपनी आंखों को मुंद ली ,, इस बात का एहसास उसे अच्छी तरह से हो गया था कि उसकी गांड को दबाने मे रोहन को भी काफी मज़ा आ रहा था, और वह उत्तेजित भी हो रहा था तभी तो वह रह-रहकर उसकी गांड को जितना हो सकता था उतना अपनी हथेली में भरकर भींच दे रहा था। सुगंधा बात को आगे बढ़ाना चाहती थी लेकिन उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था तो वह जानबूझकर ऐसी बातें करना चाह रही थी जिसे सुनकर रोहन उत्तेजित हो और दोनों के बीच की झिझक खुल जाए इसलिए वह कुछ देर शांत रहने के बाद बात को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से बोली,,,,।

मुझे तेरे ऊपर बहुत गर्व होने लगा है।,,,( बादलों की गड़गड़ाहट अभी भी शांत नहीं हुई थी आसमान से लगातार बारिश बरस रही थी चारों तरफ धूप्प अंधेरा छाया हुआ था रह-रह कर बिजली चमक जा रही थी जिसके उजाले में कुछ पल के लिए सुगंधा का खूबसूरत बदन रोहन की आंखों के आगे चमक उठता और अपनी मां को उजाले में और अच्छी तरह से देखकर रोहन का मन ललच उठ रहा था। वह अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को दबाते हुए मस्त हो रहा था और अपनी मां की बात सुनकर बोला।)

मैं कुछ समझा नहीं मम्मी तुम क्या कहना चाहती हो।

तू तो कुछ समझता ही नहीं है मैं क्या कहना चाहती हूं क्या कह रही हूं कुछ समझ नहीं पाता इतना बड़ा हो गया लेकिन बुद्धू का बुद्धू है।

मम्मी तुम बोलती ही ऐसा हो कि मुझे कुछ समझ नहीं पाता ऐसा लग रहा है कि जैसे इशारे ही इशारे मे ना जाने क्या कह देती हो,,,,,

काश तू मेरा इशारा समझ पाता तो यह सब करने की नौबत ही नहीं आती सुगंधा मन ही मन में बोली।

अरे मैं यह कहना चाहती हूं कि तू उस दिन बरसात में उस गुंडे से मेरी इज्जत बचाया था ना तब से मुझे तुझ पर गर्व होने लगा है । (सुगंधा जानबूझकर इस विषय में बात निकाल कर बोली क्योंकि वह जानती थी कि इस विषय पर बात करने से बहुत कुछ ऐसी बातें हैं जिससे दोनों की उत्तेजना मैं बढ़ोतरी होगी और इसी विषय के चलते दोनों अपने मुकाम पर पहुंच सकते हैं)

मम्मी इसमें करो करने जैसा कुछ भी नहीं है अगर मेरी जगह कोई और बेटा होता तो वह भी अपनी मां की इज्जत जरूर बचाता।,,( इतना कहते हुए रोहन फिर से सारा ध्यान अपनी मां के नितंबों पर लगा दिया अभी तक के वाक्ये से इतना तो समझ गया था कि जो कुछ भी हो रहा था वह शायद जानबूझकर ही हो रहा था क्योंकि बिना किसी वजह से कोई भी औरत अपने नितंबों पर किसी भी मर्द का स्पर्श बर्दाश्त नहीं कर सकती और ना तो उसे छूने की इजाजत दे सकती है तब तक कि जब तक कि दोनों के बीच कुछ ऐसे संबंध विकसित ना हो जाए और यहां तो एक मां खुद अपने बेटे से अपनी गांड दबवा रही थी इसका मतलब साफ था कि सुगंधा जानबूझकर अपने बेटे से यह हरकत करवा रही थी क्योंकि उसके भी मन में कुछ-कुछ हो रहा था और यह बात रोहन कुछ कुछ समझ रहा था। रोहन भी अच्छी तरह से समझ गया था कि उसकी मां भी यही चाहती थी जो वह अपने मन में चाह रहा है तभी तो आज की हरकत एक मां की नहीं बल्कि एक औरत की थी। यह सब सोचते हुए रोहन अपने तन बदन में अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगा वह इससे भी ज्यादा कुछ करने के फिराक में था । तभी तो इस बार मालिश करने के बहाने अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड की दोनों आंखों को अपनी दोनों हथेलियों में भर कर एक दूसरे के विरुद्ध खींचने लगा जिसकी वजह से पल भर में ही सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहरें उठने लगी क्योंकि रोहन की इस हरकत की वजह से सुगंधा की गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियां खुलने लगी थी और उसमें ईकट्ठा हुआ मदन रस अमृत की बूंदों की तरह नीचे टपकने लगा। जिससे सुगंधा एतदम मस्त होने लगी
 
मैं कुछ समझा नहीं मम्मी कहां दर्द हो रहा है।,,,, ( रोहन फिर से अपने हथेलियों की रगड़ दिखाते हुए अपनी बीच वाली होली को अपनी मां की पेटीकोट के अंदर सरका दिया बार-बार ऐसी हरकत पर सुगंधा उत्तेजना से सिहर उठ रही थी धीरे से अपनी नजर को पीछे की तरफ घुमाई रोहन भी अपनी मां की तरफ देखा दोनों की आंखें चार हो गई सुगंधा शर्म से पानी पानी हो गई लेकिन फिर भी हाथ के इशारे से अपने नितंबों को दिखाते हुए बोली।)

यहां पर कुछ ज्यादा ही दर्द हो रहा है इसे अच्छी तरह से दबा देता तो अच्छा होता। ( रोहन अपनी मां के हाथ के इशारे की तरफ देखकर उत्तेजना से गदगद हो गया जिस तरह से उसकी मां उंगली का इशारा अपनी गांड की तरफ करके उसे दिखा रही थी उससे रोहन का लंड पूरी तरह से टाइट हो गया। रोहन आंखें पड़े अपनी मां की गोल-गोल नितंबों को देख रहा था जो कि साड़ी के अंदर होने के बावजूद भी अपना उभार साफ-साफ लालटेन की रोशनी में महसूस करा रही थी रोहन का मन तो कर रहा था कि अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा कर उसकी नंगी गांड को अपने हाथों से मसल मसल कर मालिश करने का आनंद ले और अपनी मां को उसका पूरी तरह से आनंद भी दे।

इसको दबाना है,,,?

हारे इसी को दबाना है बहुत दर्द कर रही है।
 
रोहन जिस तरह से मालिश करने के बहाने अपनी मां की मदमस्त गांड को साड़ी के ऊपर से पकड़ कर भींच रहा था उससे सुगंधा की गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियां खुल जा रही थी जिससे एक अजीब सा अहसास तन बदन में हलचल मचा रहा था और उस हलचल को महसूस करके सुगंधा एकदम से चुदवासी हुए जा रही थी।

आहहहहहह,,,,, आहहहहहह,,,,,, बहुत अच्छा लग रहा ं है रे मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि तुम इतनी अच्छी मालिश भी कर लेता है सच में ऐसा लगने लगा है कि मेरा दर्द दूर हो रहा है बस ऐसे ही जोर जोर से दबाते रहे।
( अपनी मां की राहत भरी आवाज सुन कर लो हमको भी अच्छा लग रहा था और अपनी मां की मदमस्त गाना कोई स्पर्श करके उसे छूकर उसे मसलते हुए रोहन को एक अजीब से सुख का अहसास हो रहा था जिस सुख के लिए वह कई महीनों से तड़प रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि औरत की गांड जो कि इतनी गोल गोल खरबूजे की तरह लगती है छूने में इतनी नरम र्ुई की तरह होगी। इसलिए तो रोहन बेहद मस्ती के साथ अपनी हथेलियों की ताकत को अपनी मां की मदमस्त गांड पर दिखा रहा था। सुगंधा की हालत तो पल-पल खराब होते जा रही थी एक तो बरसों से उसके खूबसूरत बदन पर किसी मर्द का हाथ नहीं पड़ा था और जब यह शुभ अवसर आया तो, अपनी खूबसूरत बदन को अपने ही बेटे के हाथों से मसलवा रही थी जिससे उसकी उत्तेजना दोगुनी होती जा रही थी। सुगंधाको इससे भी ज्यादा मजा लेना था आज की रात उसके लिए बेहद हसीन और खूबसूरत होने वाली थी जो कि उसके ही प्रयास से ऐसा होना संभव था इसलिए उस बारिश वाली रात का जिक्र आगे बढ़ाते हुए सुगंधा बोली ।

हा में जानती हु कि कोई भी बेटा अपनी मां की इज्जत बचाने के लिए सब कुछ करता लेकिन तूने जो किया था उससे मुझे बहुत ही गर्व होता है तु सच में बहादुर बेटा है ।

मम्मी यह तो आपका बड़प्पन है जो आप ऐसा कह रही हैं क्योंकि मेरी जगह कोई भी होता तो ऐसा ही करता( इतना कहने के साथ ही वह अपना सारा ध्यान अपनी मां की गांड पर केंद्रित करते हुए फिर से दबाना शुरू कर दिया)

लेकिन मम्मी मुझे यह बात समझ में नहीं आ रही है आखिर वह आदमी था कौन मैंने उससे पहले कभी भी अपने गांव में नहीं देखा और वह तुम्हारे पीछे क्यों पड़ा था।
( अपने बेटे के द्वारा यह सवाल पूछे जाने पर सुगंधा मन ही मन प्रसन्न होने लगी क्योंकि वह भी यही चाहती थी कि उसका बेटा ऐसे ही कुछ सवाल पूछा जिसका जवाब देने में उसे मजा आए तभी तो वह अपने बेटे का सवाल सुनते ही झट से जवाब देते हुए बोली।)

बेटा मैं जानती हूं कि तुझे सुनकर तो अच्छा नहीं लगेगा लेकिन तू पूछता है तो मुझे यह बता नहीं होगा क्योंकि तुझे यह जानने का पूरा हक है क्योंकि तूने मुझे उससे जानवर के हाथों से बचाया है मेरी इज्जत पर बिल्कुल भी आंच आने नहीं दिया इसलिए मैं तुझे सब कुछ बताऊंगी।
वह आदमी तेरे पापा का बहुत अच्छा दोस्त था मैं जब शादी कर कर यहां आई थी तब यह बात मुझे पता चली थी क्योंकि वह आदमी हमेशा तेरे पापा के साथ ही रहता था और कभी-कभी तो इसी घर में कई दिनों तक रहता था।( सुगंधा मस्ती के आलम में अपने बेटे को उस आदमी के बारे में बता रहे थे और दूसरी तरफ अपनी मां की मदमस्त खूबसूरत बदन को स्पर्श करके उसे छूकर और जिस तरह से उसकी मां इस तरह की हरकत के बावजूद भी बिल्कुल भी रोहन को नहीं डांट रही थी या देखते हुए रोहन की हिम्मत खुलने लगी थी और वह इस बार अपनी मां की गांड को साड़ी के ऊपर से दबाते दबाते अपने हाथों के दोनों अंगूठे को अपनी मां की मस्त मस्त गांड को दबाते दबाते अंगूठे को अपनी मां की गांड की बीच की गहराई में हल्के हल्के साड़ी सहित दबाने लगा,,,, रोहन का अंगूठा सुगंधा की उन्नत गांड की गहराई में कुछ ज्यादा ही भीतर उतर गया था जिससे अंगूठे का छोरा सुगंधा की मदमस्त कांड के भूरे रंग के छेद पर स्पर्श हो गया जिसकी वजह से सुगंधा के तन बदन में एक सिहरन सी दौड़ गई और वह उस आदमी के बारे में बताते बताते उत्तेजना के मारे कराह उठी।)

आहहहहहहहह,,,,,,

क्या हुआ मम्मी,,,,( अपनी हथेलियों को और अंगूठे को उसी अवस्था में रोकते हुए रोहन बोला)

ककककककक,,, कुछ नहीं बेटा तूने जोर से दबाया तो हल्का सा दर्द होने लगा,,,,, ( सुगंधा बात को बदलते हुए बोली)

ठीक है मम्मी तो मैं जोर से नहीं दबाऊंगा,,,,,,, ( और इतना कहते हुए रोहन जानबूझकर यह देखने के लिए कि उसकी मां क्या कहती है वह अपनी हथेली अपनी मां के नितंबों से हल्के से उसका दबाव काम कर लिया और अपनी दोनों हाथों की दोनों अनूठा को अपनी मां के नितंबों के बीच की गहरी दरार में से वापस निकाल लिया,,,,,, अपने बेटे की इस हरकत से सुगंधा को इस बात का एहसास हो गया कि वह ऐसा कह कर अपने लिए भी गलती कर बैठी थी क्योंकि कराहने की आवाज उसके मुख से निकली थी और वह दर्द से नहीं बल्कि एक आनंद की अभिव्यक्ति प्रतीत कर रही थी जिसे उसका बेटा दर्द की कराह समझ लिया था। की बेटी का अंगूठा उसके गांड के भूरे रंग के छेद पर स्पर्श हुआ था तो सुगंधाको असीम सुख की अनुभूति हुई थी इसलिए वह उस स्पर्श को उसी सुख को अपने अंदर फिर से महसूस करना चाहती थी इसलिए वह झट से बोली। )

नहीं बेटा तू जैसा दबा रहा था वैसे ही दबा तू जोर जोर से दबाता है तभी तो मुझे अपना दर्द दूर होता हुआ महसूस हो रहा है तेरा मन जैसा करे वैसे ही तू दबा।

( अपनी मां की यह बात सुनते ही उसका चेहरा प्रसन्नता से खिल गया क्योंकि अब किसी भी प्रकार का शंका नहीं था कि रोहन की किसी भी हरकत से उसकी मां नाराज होगी इसलिए वह खुलकर अपनी मां के साथ किसी भी प्रकार की हरकत कर सकता था वैसे उसे भी अपने दोनों अंगुठों को अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड की दरार की गहराई में उतारने में बेहद आनंद की अनुभूति हुई थी वह उस आनंद को फिर से महसूस करना चाहता था,, इसलिए अपनी मां की बात सुनते ही रोहन फिर से अपनी हथेलियों का दबाव अपनी मां के बड़े-बड़े चूतड़ों पर बढ़ा दिया और उसी तरह से अपने दोनों हसी अंगुठो को अपनी मां की गांड की गहरी दरार को हल्के से फैलाते हुए फिर से अपनी मां की गांड की दरार के गहराई मैं उतार दीया। एक बार फिर से सुगंधाको वही अनुभव होने लगा जो कुछ मिनट पहले हुआ था अपने बेटे के अंगूठे को अपनी गांड के छेद पर स्पर्श महसूस होते ही सुगंधा का बदन उत्तेजना के मारे सिहर उठा और उत्तेजना के मारे सुगंधा के मुख से हल्की सी सिसकारी की आवाज निकल गई लेकिन इस बार रोहन ने अपनी मां की गरम सिसकारी की आवाज पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया और उसी तरह से अपनी मां की मदमस्त गांड को दबाता और मसलता रहा पूरी तरह से उत्तेजित हो चुके रोहन का लंड एकदम कड़क हो चुका था उसकी नसे रक्त के प्रवाह के कारण इतनी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव कर रही थी कि ऐसा लग रहा था कि अभी फट जाएंगी रोहन बार-बार अपनी मां की गांड को दबाते हुए एक हाथ से अपने लंड को पजामे में बैठाने की कोशिश कर रहा था जो कि एकदम नाकाम था क्योंकि हालात इस समय ऐसे थे की उसका लंड पजामा फाड़ कर बाहर आने की स्थिति में हो चुका था। और सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।

मैं शादी करके जब से इस घर में आई थी तब से मैं उसे तेरे पापा के साथ देख रही थी शुरू शुरू में उसका व्यवहार तो अच्छा ही था मैं भी उससे इज्जत से ही बात करती थी लेकिन इतनी मुझे पता चला कि वह बहुत बड़ा कमीना है।

क्यों मम्मी क्या हुआ था,,? ( रोहन उसी तरह से अपनी मां की गांड को मसलते हुए बोला।)

सससससहहहहह,,,,,, आहहहहहहहह,,, ( एक बार फिर से रोहन ने गांड के दोनों भागों को लगभग चीरने के अंदाज में मसल दिया और ना चाहते हुए भी सुगंधा के मुख से सिसकारी की आवाज निकल गई।) एक दिन में बाथरूम में नहा रही थी,,,, मैं उस दिन घर पर अकेली थी,,,( रोहन अपनी मां की बात को उसकी मालिश करते हुए सुन रहा था और सुगंधा पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी आज हुआ अपने और अपने बेटे के बीच के सारे पर्दे को हटा देना चाहती थी इसीलिए वहां सारी बातों को खोल देना चाहती थी। ) सच कहूं तो किसी के ना होने के नाते मैं उस दिन अपने सारे कपड़े उतार कर नहा रही थी (इतना कहने के साथ सिकंदर कुछ सेकंड तक शांत हो गई और उसके बाद जानबूझकर बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।)
मतलब कि मैं उस दिन एकदम नंगी होकर नहा रही थी

( अपनी मां के मुंह से नंगी शब्द सुनकर रोहन की उत्तेजना बढ़ने लगी,,,, जो कि वह इतना तो समझ गया था कि उसकी मां जानबूझकर इस शब्द का उपयोग कर रही थी कुछ भी हो रोहन तो मजा आ रहा था क्योंकि जैसे ही उसकी मां के मुख से नंगी शब्द निकला था वैसे ही तुरंत रोहन की हथेलियों की मजबूती सुगंधा की मदमस्त मस्त गांड पर एकदम से बढ़ गई थी और इसका एहसास सुगंधा को भी हुआ था। )

मम्मी क्या तुम बाथरूम में अपने सारे कपड़े उतार कर नहाती हो? ( रोहन जानबूझकर अपनी मां से यह सवाल पूछ रहा था क्योंकि वह देखना चाहता था कि उसकी मां किस हद तक उसके सामने खुल सकती है वैसे तो उसे उम्मीद थी कि उसकी मां से अब किसी भी प्रकार का पर्दा करना जरूरी नहीं था लेकिन फिर भी एक मर्यादा और एक बेटा होने के नाते इतना तो लाजमी था कि रोहन अपनी मां से थोड़ा बहुत शर्म करें,,,)

नहीं हमेशा तो मेरा मन नहीं करता लेकिन उस दिन ना जाने क्यों मेरा मन कर रहा था कि मैं अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर ना हो इसलिए मैंने उस दिन अपने सारे कपड़े उतार दिए थे ।। (सुगंधा जानबूझकर उस घटना को नमक मिर्च लगाकर और तड़ाकेदार बनाकर बता रही थी,,)

मतलब की मम्मी जब उसकी नजर तुम्हारे ऊपर पड़ी होगी तो तुम एकदम नंगी थी,,,,, ( रोहन को अपनी मां से इस तरह से बात करने में मजा आने लगा था वह भी मौके का फायदा अच्छी तरह से उठा रहा था और सुगंधा भी अपने बेटे की इस तरह से खुद ही बातों का बिल्कुल भी विरोध ना करते हुए उसके सवाल का जवाब बड़े ही अच्छे तरीके से दे रही थी सुगंधा को भी अच्छा ही लग रहा था,,,, वह यह बात अच्छी तरह से जानती थी कि दोनों की थी झिझक बातों के जरिए ही दूर हो सकती है। इसलिए अपने बेटे के सवाल का जवाब देते हुए बोली।)

हां उस समय में बिल्कुल नंगी थी मुझे क्या मालूम था कि मेरे नंगे पन को वह नीच इंसान अपनी आंखों से नाप रहा था। मेरी नजर जब उसकी नजर से टकराई तो मैं एकदम से शर्मिंदा हो गई मैं उस समय बता नहीं सकती कि कैसा महसूस कर रही थी मारे शर्म के गड़ी जा रही थी लेकिन वह नीच इंसान अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेरने के बजाय मुझे ही घुरे जा रहा था।,,,,
( अपनी मां की बात सुनने मैं रोहन को बहुत ही मजा आ रहा था और वह काफी उत्तेजित भी नजर आ रहा था क्योंकि वह जोर-जोर से अपनी मां की गांड को मसल रहा था उसकी इच्छा तो कर रही थी कि अभी इसी वक्त उसकी साड़ी को ऊपर उठाकर उसकी नंगी गांड को अपनी हथेली में ले ले कर जोर जोर से दबाए लेकिन ऐसा कर सकने में वह बिल्कुल असमर्थ था अपने बेटे के द्वारा जोर जोर से अपनी गांड दबाने पर सुगंधा को भी काफी उत्तेजना महसूस हो रही थी और वहां कुछ पद के लिए खामोश हो गई तो उसकी खामोशी को तोड़ते हुए रोहन बोला,,)

फिर क्या हुआ मम्मी,,,,,,,( इतना कहते हुए रोहन इस बार अपनी बीच वाली उंगली को अपनी मां की गांड की दरार के बीचोबीच गांड के छेद पर रखते हुए हल्के से अंदर की तरफ दबा दिया जिससे सुगंधा की गांड का वह कसा हुआ क्षेत्रफल का सब खुल गया जिससे सुगंधा उत्तेजित होते हुए एकदम से काम विभोर हो गई उसके चेहरे का रंग शुर्ख होने लगा अपने बेटे की इस हरकत की वजह से वह शर्मिंदगी का अहसास तो कर ही रही थी लेकिन उस की अपेक्षा अत्याधिक आनंद की अनुभूति हो रही थी। और अपनी भावनाओं पर काबू न कर पाने की वजह से उसके मुख से हल्की सी सिसकारी की आवाज निकल गई,,,)

आहहहहहहहह,,,,

क्या हुआ मम्मी,,, (रोहन जान-बूझकर अपनी मां से पूछा)

ककक,,, कुछ नही,,,,,

( रोहन समझ गया कि अब वह जो भी करेगा उसकी मां को अच्छा ही लगेगा वह इंकार नहीं कर पाएगी इसलिए उसकी धड़क खुलने लगी थी और उसे मजा भी आ रहा था,,, सुगंधा भी अपने बेटे की हरकत का भरपूर आनंद लूट रही थी उसे मज़ा आ रहा था शर्मिंदगी का अहसास भी हो रहा था क्योंकि उसका बेटा सीधे उसकी गांड के पूरे दिन के छेद से खेल रहा था जबकि शुरू शुरू में औरत के दूसरे अंगों से खेलकर मर्द शुरुआत करते हैं लेकिन यहां पर रोहन एक कदम आगे ही बढ़ गया था,, अपने बेटे की हिम्मत देखकर सुगंधाको फक्र महसूस हो रहा था रोहन बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।)

तुम चुप क्यों हो गई मम्मी आगे तो बताओ आगे क्या हुआ,,,?

हां,,, हां,,,,,, फिर तो मुझे समझ में नहीं आया कि मैं क्या करूं,,,, मुझे बहुत शर्म आ रही थी मैं अपने दोनों हाथों से अपने दोनों दूध को ढक ली,,,, (सुगंधा जानबूझकर खुले शब्दों का प्रयोग कर रही थी।,,, ( रोहन अपनी मां के मुंह से निकल रहे हर शब्द का मजा ले रहा था उसे अपनी मां की बातें अच्छी लग रही थी और अत्यधिक कामोत्तेजना से भरपूर भी),,, मैं वहां से भाग जाना चाहती थी लेकिन उस अवस्था में वहां से भागना भी मुश्किल था मैं उस समय खड़ी भी नहीं हो सकती थी,,,,

ऐसा क्यों मम्मी तुम खड़ी क्यों नहीं हो सकती थी । (इस बार रोहन अपनी मां के भारी-भरकम नितंबों की ऊंचाई से अपने दोनों हथेलियों को उसके नीचे की तरफ ले जाते हुए अपनी मां की कमर को दोनों तरफ से अपनी हथेली में जोर से दबाते हुए मालिश के साथ-साथ उसके बलखाती कमर के स्पर्श का आनंद लेने लगा जिससे सुगंधा को भी मजा आ रहा था।)

पागल मैं खड़ी नहीं हो सकती थी क्योंकि मैं खड़ी होने लायक नहीं थी,,,,,

मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं मम्मी तुम क्या कह रही हो तुम जल्दी से खड़ी होकर अपने कपड़े ले सकती थी उसे अपने बदन पर लपेट सकती थी जिससे आपका नंगापन ढक जाता,,,,,

मेरे कपड़े बाथरूम में नहीं थे मैं बाथरूम में केवल टावल लपेट कर आई थी जिसे धोकर में बाल्टी में रख दी थी और वह बाल्टी भी बाहर ही पड़ी हुई थी,,,,,,,

तो क्या हुआ मम्मी वहां से जल्दी से भाग जाती तो वह तुम्हारे नंगे बदन को नहीं देख पाता,,,,

मेरे मन में ऐसा ख्याल जरूर आया था लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती थी क्योंकि मेरे खड़े होने के साथ ही उसे वह दिख जाता जिसे वह देखना चाहता था,,,, (अपनी मां की बात सुनकर रोहन अच्छी तरह से समझ गया कि वह क्या कहना चाह रही है लेकिन वह अपनी मां के मुंह से खुले शब्दों में सुनना चाहता था इसलिए वह बोला)

वह क्या देख जाता और क्या देखना चाह रहा था मैं कुछ समझा नहीं मुझे ठीक से समझाओ,,,,
( अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने बेटे को कैसे समझाए कि वह क्या देखना चाह रहा था।)

क्या हुआ मम्मी तुम चुप क्यों हो गई बताओ ना,,,

अब मैं तुझे कैसे समझाऊं कि वह क्या देखना चाह रहा था मुझे शर्म आ रही है,,,,,

शर्म,,,,,, कैसी शर्म,,,, मम्मी और वह भी मुझसे,,, तुम अच्छी तरह से जानती हो कि हम दोनों के बीच काफी ऐसी कुछ बातें हो चुकी हैं जिससे हम दोनों को शर्म करना लाजमी था लेकिन अब मुझसे शर्म करना बेकार है इसलिए जो कुछ भी है खुलकर बता दो मम्मी,,,,, ( अपनी मां से इस तरह की बातचीत के दौरान रोहन काफी उत्तेजित हो चुका था जिसका असर उसके चेहरे पर और उसके लंड पर साफ महसूस हो रहा है रोहन यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां खुले शब्दों में सब कुछ बोल देगी लेकिन उससे इस तरह की बातें करने में उसे मजा आ रहा था और वह एकदम से काम होते जीत हो चुका था और उत्तेजना के चलते वह अपनी मां की गांड को मसलते हुए अपनी उंगलियों को गांड की गहरी दरार के ऊपरी सतह से लेकर के निचली सतह पर उसकी गहराई में फिराता हुआ नीचे तक लेकर आया जिससे उसकी उंगली का स्पर्श सुगंधा की बुर की गुलाबी पत्तियों पर अच्छी तरह से होने लगा और वह अपने बेटे की ऊंगली को अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर अच्छी तरह से महसूस करते हुए एकदम उत्तेजित हो गई और उत्तेजना के चलते उसके मुख से एकदम स वो निकल गया जिसे कहने में वह शर्मा रही थी।)
 
२,,, मैं अगर खड़ी हो जाती तो वह मेरी बबबब,,बुर देख लेता,,,
( सुगंधा हक लाते हुए बोली शर्मिंदगी और उत्तेजना का असर उसके बोलने के लहजे में साफ झलक रहा था,,,, पहली बार सुगंधा के मुख से इस तरह की अश्लील शब्द निकले थे जो कि उसके अंग के ही बारे में था अपनी मां के मुख से बुर शब्द सुनकर रोहन तो मानो हवा में उड़ने लगा था उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारियां फूट रही थी उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके कान अपनी ही मां के मुख से निकले गए बुर शब्द को सुन रहे थे। इस छोटे से शब्द के कारण कमरे में मादकता की गर्मी फेलने लगी जो कि मां बेटे दोनों के पसीने छुड़ा दे रहा था। गुरु शब्द को सुनकर रोहन इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया था कि अपनी उंगली को सीधे उसकी गुड़ के मुहाने पर रख कर दबाना शुरू कर दिया था,,,,,,,, सुगंधा तो पहले से ही एकदम गरम हो चुकी थी लेकिन रोहन की इस हरकत की वजह से वह पूरी तरह से चुद वासी हो गई थी रोहन की इस हरकत ने आग में घी का काम किया था सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना और वासना का मिलाजुला असर देखने को मिल रहा था वह अपने बेटे के हथेलियों के तले कसमसा रही थी।,,,,,, सुगंधा अपने मुंह से बोल शब्द निकाल कर कुछ देर तक खामोश हो गई वह माहौल का मुआयना करना चाहती थी वह अपने बेटे की हरकत को परखना चाहती थी कि इस शब्द को सुनकर उस में क्या बदलाव आता है जोकि उसे यह सांप महसूस हुआ था कि उसके मुख से बोल शब्द सुनते ही उसका बेटा काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था और अपनी बीच वाली उंगली को उसकी बुर के मुहाने पर रखकर दबा रहा था,,,,, उत्तेजना के मारे रोहन की सांसे तेज चल रही थी और यही हाल सुगंधा का भी था अपनी मां के मुख से इतना कामुक जवाब सुनकर एकदम मस्त हो गया था और वह अपनी मां का जवाब सुनकर बोला,,,,,।

क्या सच में मम्मी वह यही चाहता था वह सच में तुम्हारी बबबबबब,,,, बुर देखना चाहता था। ( रोहन के मुख से भी बुरा शब्द बतलाते हुए निकला वह जानबूझकर ऐसा सवाल अपनी मम्मी से कर रहा था और उसे यकीन हो गया था कि ज्यादा देर तक हमारे आधा में रहना ठीक नहीं था खासकर ऐसे मौके पर और सुगंधा भी दंग रह गई अपने बेटे के मुख से ऐसा सवाल सुनकर क्योंकि पहली बार बाप अपने बेटे के मुख से इस तरह का खुला शब्द सुन रही थी जिससे उसे भी मजा आ रहा था।

हां वह मेरी बुर ही देखना चाहता था,,,,

लेकिन मम्मी तुम्हें कैसे मालूम कि वह तुम्हारी बुर देखना चाहता था क्योंकि उसने तो अपने मुंह से कुछ बोला नहीं था बस तुम्हें गोरे जा रहा था,,,,,,

मैं मर्दों को अच्छी तरह से जानती हूं वह औरतों की किसी चीज को देखने के लिए बेकरार रहते हैं तड़पते रहते हैं और मौका ढूंढते रहते हैं कि कहां वह अंग उन्हें दिख जाए,,,,,

पर ऐसा क्यों कि हर मर्द औरतों की उसी चीज को देखने के लिए तड़पते रहते हैं,,,,,

क्योंकि औरतों की बुर देखकर मर्दों को मजा आता है उन्हें एक अजीब सा सुख मिलता है,,,,।

पर मैं तो यह कभी भी नहीं चाहता कि मैं औरतों कि वह चीज देखूं मुझे तो कुछ नहीं होता,,,,,,।

चलो अब झूठ मत बोल तो उस दिन जब हम शादी में गए थे तो मुझे पेशाब करते हुए देख रहा था तो जरूर तूने मेरी बुर देखा होगा,,,,,

( मां बेटे दोनों की गरमा गरम बातों से कमरे का माहौल गर्म होता जा रहा था तेज चल रही बारिश में ठंडी हवाओं के चलने के बावजूद भी कमरे का तापमान बढ़ता जा रहा था रोहन और सुगंधा दोनों को अब इस तरह की बातचीत करने में मजा आ रहा था इसलिए तो दोनों एक दूसरे के सवाल का जवाब अच्छी तरह से दे रहे थे और खुलकर दे रहे थे रोहन भी अपनी मां के सवाल का जवाब देते हुए बोला,,,,।)

मैं पहले भी बता चुका हूं मम्मी और अभी भी यही कहूंगा कि मैंने उस रात को तुम्हारी गांड जरूर देखा था लेकिन तुम्हारी बुर नहीं देख पाया था क्योंकि तुम मुझसे थोड़ी दूर पर बैठी हुई थी और वहां से तुम्हारी बुर देख पाना नामुमकिन था।,,,

क्या सच में तुमने मेरी बुर नहीं देखा था,,,, (सुगंधा जानबूझकर यह बात बोल रही थी जबकि उसे अच्छी तरह से मालूम था कि शादी से लौटते समय रोहन ने यह बात बता दिया था कि उसने सब कुछ पहले देख लिया था लेकिन उसकी बुर नहीं देख पाया था लेकिन फिर भी सुगंधा अनजान बनी हुई थी क्योंकि उसे इस तरह के खुले शब्दों का उपयोग करके बात करने में मजा आ रहा था,,,)

नहीं मम्मी मैं कसम खाकर कहता हूं कि मैंने तुम्हारी बुर नहीं देख पाया था और ना ही कभी भी किसी की देखा हूं,,,,,

क्या सच में तू अभी तक औरतों की बुर नहीं देख पाया मुझे तो यकीन नहीं हो रहा कि मेरा बेटा इतना जवान और इतना खूबसूरत होने के बावजूद भी अभी तक किसी औरत ने या लड़की ने उसे अपनी बुर नहीं दिखाई,,,,,,
( अपनी मां की ऐसी बातें सुनकर रोहन एकदम मस्त होने लगा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके पास में जिसकी वह मालिश कर रहा है जिसके मुंह से वह ऐसी अश्लील और गंदी बातें सुन रहा है वह उसकी मां है क्योंकि आज उसका व्यवहार पूरी तरह से एक अलग औरतों की तरह था और जिसमें रोहन को मज़ा भी आ रहा था सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,।)

अफसोस करने वाली बात तो है ही इसमें गलती भी तेरी है क्योंकि तुझे इतना अच्छा मौका मिला था तूने उस मौके का फायदा नहीं उठा पाया,,,,,

मेरी गलती और कैसा मौका मैं कुछ समझा नहीं,, (रोहन अपनी मां की गांड को उत्तेजना बस जोर जोर से दबाते हुए बोला)

अरे उस दिन जब मैं पेशाब कर रही थी तो तुझे ध्यान से देख लेना चाहिए था कि औरतों की बुर कैसी होती है चल कोई बात नहीं तुझे तेरी बीवी दिखा देगी तब तक सब्र कर,,,,,, ( सुगंधा इतनी बात कहकर खामोश हो गई वह जानती थी कि वह जो कुछ भी कह रही है वह बातें बेहद अश्लील और एकदम गंदी थी जो कि कोई भी औरत एक मर्द के साथ ही कर सकती है लेकिन एक मां अपने बेटे के साथ कभी भी इस तरह की बातें नहीं कर सकती लेकिन सुगंधा भी है यह बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि अगर उसे अपनी औरत होने का मजा लेना है तो अपने बेटे से नहीं बल्कि उसे एक मर्द समझ कर इस तरह की बातें करके ही वह आगे बढ़ सकती है और वह ऐसा कर रही थी जिसमें रोहन पूरी तरह से उत्तेजना का अनुभव कर रहा था अपनी मां की इस तरह की बातें सुनकर रोहन मन ही मन में बोला कि उस दिन नहीं देख पाया तो क्या हुआ मम्मी आज तुम अपनी बुर दिखा दो मैं अच्छी तरह से देख लूंगा लेकिन ऐसा सीधे-सीधे अपनी मां से कह पाना उसके लिए मुश्किल था भले ही दोनों इतना खुल चुके थे लेकिन फिर भी कहीं ना कहीं मर्यादा और रिश्तो की डोर में अभी भी शर्म की हया बची हुई थी जो कि रोहन को इस तरह से कहने के लिए रोक रहे थे,,, अपनी मां की मस्ती भरी बातें सुनकर रोहन मदहोश हुए जा रहा था और वह बात को आगे बढ़ाते हुए बोला।,,,,,

फिर तो तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल हो गया होगा मम्मी उस स्थिति में अपने आप को संभाल पाना,,,,,,,

तो क्या मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं,,, फिर ना चाहते हुए भी मुझे उठना ही पड़ा और वही हुआ जिसका मुझे डर था,,,,,,,।

क्या हुआ मम्मी,,,,?

मैं जैसे ही खड़ी हुई वह पागलों की तरह मुझे ऊपर से नीचे तक घूरने लगा मैं कभी अपने दोनों हाथों को अपनी दोनों चुचियों पर रखकर ढंकती तो कभी एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर अपनी बुर को अपनी हथेली में छुपा देती,,, लाख छुपाने के बावजूद भी वह हरामखोर मेरे अंगों को देख ले रहा था और मेरे अंगों को देखकर उसकी आंखों में नशा उतर आया था वह अपनी वासना भरी निगाहों से मुझे घूर रहा था मैं उसकी गंदी निगाहों से बचने के लिए जैसे ही भागने को चली वह आगे बढ़ कर मुझे पकड़ लिया,,,,,,( सुगंधा ज्यादातर खुले शब्दों का प्रयोग जानबूझकर कर रही थी अब यही उसके पास एक रास्ता था जिसके सहारे वह अपनी बुर की प्यास अपने बेटे के लंड से चुद़वा कर बुझा सकती थी क्योंकि रोहन की आंखों के सामने और उसके हाथों में उसका खूबसूरत बदन तो था ही बस मौके की नजाकत को समझते हुए इस तरह के शब्द और बातचीत के जरिए ही वह अपना मुकाम हासिल करना चाहती थी। रोहन भी काफी उत्सुक था,,, ऊसकी उत्तेजना भी बढ़ती जा रही थी क्योंकि उसकी उंगलियों ने सांफ साफ उसकी मां की बुर की की गर्मी को महसूस किया था।)

फिर क्या हुआ,,,, (रोहन अपनी मां की मदमस्त बड़ी बड़ी गांड को दबाते हुए बोला)

मैं उसके हाथों से छूटने की लाख कोशिश कर रही थी पर छूट नहीं पा रही थी कर भी क्या सकती थी मैं एक औरत थी और वह एक मर्द वह भी मजबूत शरीर वाला उस समय उसकी पकड़ से छूटना मुझे नामुमकिन सा लग रहा था मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं वह बार-बार कभी मेरी चूची को दबा दे रहा था तो कभी मेरी हथेली को हटाकर मेरी बुर पर रख दे रहा था वह एकदम गरम हो चुका था मैं एकदम लाचार थी कुछ कर सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी,,,, मैं रोने लगी मुझे लगने लगा कि आज मेरी इज्जत इस के हाथों से चली जाएगी लेकिन तभी मुझे बाहर बेला की आवाज सुनाई दी जोकि गाय भैंस को बांधने के लिए,,,, लिए जा रही थी।
,, ( सुगंधा अपनी बातों को नमक मिर्च लगाकर बता रही थी जो कि रोहन को बहुत ही अच्छी लग रही थी खासकर जब एक मां इस तरह की बातें अपने बेटे को बताती तो उन्हें गुस्सा आता है लेकिन यहां पर ऐसा कुछ भी नहीं था गुस्से के बजाय यहां तो रोहन को काफी उत्तेजना का अनुभव और मजा भी आ रहा था,,,,,,)

फिर बेला ने क्या की मम्मी,,,,,

बेला ने कुछ नहीं की उसकी आवाज सुनकर मुझ में हिम्मत आ गई और मैं जोर से उसके हाथ को छटा करी और तुरंत उसके गाल पर दो तमाचा जड़ दी जो कि तमाशा इतना तेज था कि उसका कान बंद हो गया उसे कुछ समझ में नहीं आया और वह गिरते-गिरते बचा और तब तक बेला अंदर आ गई लेकिन मैं इससे पहले ही तुरंत अपने कपड़े लेकर वापस बाथरूम में घुस गई और कुछ देर बाद बाथरूम से बाहर आ गई,,,,,।
( बेला अपनी कहानी बताते बताते एकदम गरम हो चुकी थी उसकी बुर पावरोटी ी की तरह फूल चुकी थी और उसमें से मदन रस बह रहा था रोहन भी काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था उसे मजा आ रहा था वह मन में सोच रहा था कि अगर उस दिन उस आदमी ने उसकी मां को चोद दिया होता तो आज उसकी मां वह भी बता देते कि उस दिन उसने उसकी चुदाई कर दिया था आज उसकी मा एकदम बेशर्म हो चुकी थी और उसे अपनी मां का यह बेशर्म अपन बहुत ही आनंददायक लग रहा था बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई सुगंधा आज उसे अपनी मां नहीं बल्कि एक औरत लग रही थी जिसके साथ वह अपने बदन की प्यास बुझा ना चाहता था,,,।)

अच्छा हुआ मम्मी की बेला आ गई वरना उस दिन अनर्थ हो जाता लेकिन तुमने यह बात पिताजी को नहीं बताई क्या,,,

तुम्हारे पिताजी से बताने का कोई फायदा नहीं था क्योंकि वह मुझ पर विश्वास ही नहीं करते और मुझे इस बात का डर था कि कहीं वह हरामखोर मेरे बारे में गलत शलत बोलकर उनके कान भर देता तो मेरा तो जीना ही दुश्वार हो जाता इसलिए मैं खामोश रही।,,,,,

(दोनों की बातचीत से कमरे का माहौल एकदम गरम हो चुका था,, सुगंधा को अपने बेटे पर बहुत गुस्सा आ रहा था क्योंकि इतनी ज्यादा छूट देने के बावजूद भी अभी तक वह कुछ कर सकने की स्थिति में नहीं था सुगंधा यही सोच रही थी कि जिस तरह से उसने अपनी बीच वाली उंगली को उसकी गांड की दरार में घुसे डा था कुछ देर बाद वह हिम्मत दिखाते हुए अपनी उंगली को,, उसकी बुर में पेन देगा लेकिन ऐसा ना हो सका सुगंधा मन ही मन बहुत क्रोधित हो रही थी अप रोहन उसे एकदम नालायक और नागवार लगने लगा क्योंकि जिस तरह की छूट बाप ने बेटे को दे रही थी अब तक उसे उसके ऊपर चढ़ जाना चाहिए था लेकिन ऐसा हो नहीं सका था इसलिए तो सुगंधा अपने मन में सोच रही थी अगर इतनी छूट किसी और लड़के को दी होती तो अब तक उसका लंड उसकी बुर की गहराई को नाप चुका होता उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,, सुगंधा मन ही मन में सोच रही थी किस मुलायम से कुछ होने वाला नहीं है इसलिए अब उसे ही कुछ करना होगा,,,, इसलिए वह अपने बेटे से बोली,,,,,।

इस तरह से मालिश करवाने में मजा नहीं आ रहा है और ना तू ठीक से कर पा रहा है रुक मैं व्यवस्था करती हूं,,, (इतना कहकर सुगंधा उठ कर बैठ गई और जानबूझकर अपने बेटे के सामने अपनी ब्लाउज के बटन को धीरे-धीरे खोलने लगी और तिरछी नजर से अपने बेटे की तरफ देख ले रही थी जो कि उसे ही देख रहा था,,,, सुगंधा बड़ी कातिलाना अंदाज में अपने ब्लाउज के बटन को एक-एक करके खोल रही थी,,, वह ब्लाउज के बटन नहीं खोल रही थी बल्कि ऐसा करते हुए वह अपने बेटे की भावनाओं को उसकी जिज्ञासा को उसकी प्यास को और ज्यादा बढ़ा रही थी,,,,, धीरे-धीरे करके सुगंधा अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दी रोहन की तो सांसे मानो ऊखड़ जाएंगी,,, वह तिरछी नजरों से अपनी मां की तरफ देख ले रहा था ब्लाउज के सारे बटन खुलते ही रोहन को लाल रंग की ब्रा नज़र आने लगी जिसके अंदर दो बड़े-बड़े पके हुए संतरे रखे हुए थे जिसे देखते ही रोहन के मुंह में पानी आ गया उसका मन लालच ने लगा उन दोनों शंतरों को लपक ने के लिए,,,,,, लेकिन इस समय उन्हें देखने के अलावा उसके पास दूसरा कोई चारा नहीं था उसे इस बात का डर भी लगा हुआ था कि कहीं उसकी मां उसे उनके बड़े बड़े दूध देखते हुए ना पकड़ ले जबकि सुगंधा तिरछी नजरों से अपने बेटे की इस हरकत को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी और उसे अपने बेटे का इस तरह से उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को घूरना बेहद लुभावना लग रहा था।,,,

कमरे के बाहर का वातावरण अभी भी पहले जैसा ही था बरसात की रफ्तार में थोड़ी सी भी कमी नहीं आई थी बादलों की गड़गड़ाहट लगातार जारी था बिजली का चमकना बंद नहीं हो रहा था लेकिन इस तूफानी बारिश से सारा वातावरण बेहद ठंडा हो चुका था केवल सुगंधा के कमरे को छोड़कर सुगंधा के कमरे का तापमान अभी भी बेहद गर्म था इसका एक ही कारण था सुगंधा की मदमस्त मस्त जवानी उसकी बदन से निकल रही जवानी की आंच पूरे कमरे को गर्माहट प्रदान कर रही थी। और सुगंधा के जवानी के तपन में रोहन बुरी तरह से झुलस रहा था रोहन के माथे पर पसीने की बूंदें साफ नजर आ रही थी।,,,, सुगंधा जैसे ही नजरें उठाकर अपने बेटे की तरफ देखी तो रोहन की नजरें उसकी नजरों से टकरा गई जिससे रोहन शर्मिंदा होकर अपनी नजरों को दूसरी तरफ फेर लिया यह देखकर सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली,,,,,,।

बेटा अब तु अच्छे से मेरे बदन की मालिश कर पाएगा नहीं तो तू मेरे बदन की अच्छे से मालिश नहीं कर पा रहा था,,,, वैसे भी मुझे पूरे बदन में दर्द महसूस हो रहा है और जहां जहां तेरा हाथ लग रहा है वहां से तो जैसे दर्द मानो हवा की तरह फुर्र हो जा रहा है।,,,,

ठीक है मम्मी जैसी आपकी मर्जी मैं भी यही सोच रहा था कि इस तरह से तो अच्छे से मालिश नहीं हो पा रहा है,,,, ।(इतना कहने के साथ रोहन उठकर तेल की कटोरी लेने के लिए टेबल की तरफ आगे बढ़ा और सुगंधा उसे देख कर एक नया दांव आजमा ते हुए अपने दोनों हाथ को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा के हुक को खोलने की नाकाम कोशिश करते हुए बोली)

बेटा यह मेरे ब्रा का हुक नहीं खुल पा रहा है तू जरा इसे अपने हाथों से खोल दे,,,,, (इतना कहकर वह थोड़ा सा घूम गई और अपनी पीठ को अपने बेटे की तरफ कर दी अपनी मां के मुंह से इस तरह की बात सुनकर उत्तेजना के मारे उसके हाथों से कटोरी छूटने ही वाली थी कि वह कसकर कटोरी को अपने हाथों में थामे रहा उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह एकटक मुंह फाड़े अपनी मां की चिकनी नंगी पीठ की तरफ देखे जा रहा था सुगंधा अपने एक हाथ से अपने घने बाल की चोटी को पकड़कर अपने आगे कर दी जिससे उसकी लाल रंग की ब्रा एकदम साफ नजर आने लगी रोहन का दिल जोरों से धड़क रहा था जिस तरह का आमंत्रण उसकी मां ने दी थी उस आमंत्रण के चलते उसके पहचाने ने एकदम से तंबू बन गया था,,,

क्या हुआ ऐसे खड़ा क्यों है जल्दी से खोलना,,,,,,( सुगंधा पीछे की तरफ नजरें घुमाते हुए अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली उसकी हालत को देखकर उसे मज़ा भी आ रहा था और तरफ भी आ रहा था कि एक औरत के कितने खुले आमंत्रण को पाकर भी वह उस आमंत्रण को स्वीकार नहीं कर पा रहा था,,,, अपनी मां की बात सुनते ही जैसे वाह नींद से जागा हो इस तरह से हड़ बढ़ाते हुए बोला।)

हं,,,, हं,,, मम्मी में खोलता हूं,,,( इतना कहकर वो आगे बढ़ा सुगंधा बिस्तर के एकदम किनारे बैठी हुई थी,,,, और रोहन इतना हड़बड़ा ते हुए आगे बढ़कर जल्दबाजी में अपने एक पाव घुटना मोड़ कर उसे नर्म नर्म बिस्तर पर रख दिया और अपनी मां की ब्रा की पट्टी को पकड़कर उसके हुक को खोलने की कोशिश करने लगा उसकी उंगलियां उत्तेजना के मारे कांप रही थी जो कि इस समय पूरी तरह से सुगंधा की नंगी चिकनी गोरी पीठ पर स्पर्श हो रही थी,,, और अपनी मां की नंगी चिकनी पीठ का स्पर्श पाते ही रोहन पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,,,,,,, तभी सुगंधा अपनी चिकनी नंगी पीठ पर नुकीली चीज की ठोकर और चुभन महसूस करते ही उत्तेजना के मारे सिहर उठी उसे समझते देर नहीं लगी कि यह चुभन किस चीज की है
 
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