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Incest बदलते रिश्ते......

कुछ देर तक यूं ही चलता रहा रोहन अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को अपने हाथों से मसल तरह चलता रहा और उसका भरपूर आनंद उसकी मां उठाती रही लेकिन एक कसक बार-बार उसके मन में हो रही थी कि रोहन वाकई में बहुत बुद्धू लड़का है क्योंकि स्वादिष्ट व्यंजन परोस कर रखने के बावजूद भी वह स्वादिष्ट व्यंजन से भरी थाली को हाथ तक नहीं लगा रहा है दूसरा कोई होता तो ना जाने कबसे चट कर गया होता,,,,।
रोहन भी बार-बार खुद अपने आप को ही कोस रहा था,, क्योंकि औरत के किस अंग को छूने के लिए उसे महसूस करने के लिए उसमें अपना मोटा लंड डालकर उसको चोदने के लिए तड़प रहा था उस अंग को वह आज अपने हाथों से टटोलभर पाया था उसने अपनी उंगली डालकर उसकी गर्मी को महसूस कर भर पाया था लेकिन अभी तक उसने बुर के दर्शन नहीं कर पाया था,,, वह अपनी मां की रसीली पुर के दर्शन करना चाहता था उसे अपनी आंखों से देखना चाहता था उसकी बनावट को देखना चाहता था लेकिन लालटेन की रोशनी इतनी कम थी कि उस रोशनी में उसे अपनी मां की रसीली मखमली बुर नजर नहीं आ रहे थे एक पल के लिए तो वह मन में ठान लिया कि खुद जाकर लालटेन की रोशनी को बढ़ा दे लेकिन ऐसे करने में उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,,

आधी रात का समय गुजर गया था लेकिन अभी भी सुगंधाको उसकी मन की मुराद नहीं मिल पाई थी और ना ही रोहन की मंशा पूरी हो पाई थी,,,, दोनों की मंजिल एक थी दोनों को चलना एक साथ था लेकिन मंजिल अभी भी काफी दूर थी कब पहुंचा जाएगा यह दोनों को नहीं पता था रास्ते बेहद उबड़ खाबड़ थे लेकिन दोनों को मजा आ रहा था,,,,,, वह कहते हैं ना कि मंजिल से ज्यादा मजा सफर का आता है ठीक वैसा ही दोनों के साथ हो रहा था दोनों को मंजिल पर पहुंचने की जल्दबाजी थी,,, लेकिन दोनों इस सफर का भरपूर लुफ्त उठा रहे थे दोनों को यकीन नहीं हो रहा था कि उनकी जिंदगी में ऐसा भी पल आएगा कि दोनों इस तरह से बिस्तर पर होंगे सुगंधा को बार-बार यह सोचकर शर्म भी आ रही थी लेकिन जो आनंद उसे मिल रहा था उसको वह अपने शब्दों में बयां नहीं कर सकती थी,,,। धीरे-धीरे रात गुजर रही थी उसे इस बात का डर भी था कि कहीं ऐसे ही देखते ही देखते यह रात न गुजर जाए और सुबह हो जाए वह जो कुछ भी करना चाहती थी आज की ही रात को करना चाहती थी अब उसे ही कोई जुगाड़ लगाना क्योंकि वह समझ गई थी कि उसका बेटा एकदम बुद्धू है जो काम से दिया जाएगा उसी में वह तल्लीन हो जाएगा उससे ज्यादा करने की हिम्मत उसमें नहीं है हालांकि थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए उसने अपनी उंगली से जो उसकी बुर की चुदाई की थी वह काबिले तारीफ की लेकिन वह इससे भी ज्यादा चाहती थी इससे भी ज्यादा की उम्मीद लगाकर बैठी थी वह चाहती थी कि उसकी बुर के अंदर उसके बेटे की उंगली नहीं बल्कि उसका मोटा तगड़ा लंड हो जिसको महसूस करके वह पहले ही धक्के में पानी पानी हो जाना चाहती थी कुछ देर तक कमरे में पूरी तरह से खामोशी छा गई केवल सुगंधा की गरम आहे गूंज रही थी,,, और रह-रहकर रोहन अपनी मां की गांड को मसल ता हुआ शिशक जा रहा था,,,,,,

सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें तभी उसके दिमाग में एक युक्ति सूझी और वह अपने बेटे से बोली,,,,,।

बेटा उस जालिम ने मेरी दोनों चुचियों को इतनी जोर जोर से मसल कर रगड़ा था कि अभी तक इस में दर्द होता है लगे हाथ तो इससे भी अपने हाथों का जादू दिखा कर इसका दर्द दूर कर दे मैं तो इस दर्द से परेशान हो गई हूं,,,,,।

( अपनी मां की यह बात सुनते ही रोहन के मुंह से गर्म सिसकारी छूट पड़ी क्योंकि वह चुचियों पर मालिश करने का मतलब अच्छी तरह से जानता था इसका मतलब था आनंद ही आनंद जबरदस्त माहौल बनता नजर आ रहा था सुगंधा ने पूरी बाजी पलट दी थी क्योंकि रोहन अच्छी तरह से जानता था कि चुचियों पर तेल की मालिश करने के लिए उसे पीठ के बल लेटना होगा और ऐसा करने पर वह अपनी मां की खूबसूरत दोनों खरबूजो के साथ-साथ टांगों के बीच छुपी हुई लहसुन की कली को भी आराम से देख पाएगा उसका मन गुदगुदा ने लगा और साथ ही उसका लंड एकदम कड़क हो गया,,,,। , उसे अभी भी अपने कानों पर भरोसा नहीं हो रहा था अपनी मां की तरफ से मिले इस आमंत्रण को पूरी तरह से परखने के लिए वह बोला,,,,

मम्मी तुम क्या बोली मैं ठीक से सुना नहीं फिर से कहो तो,,,,

बेटा मैं कह रही हूं कि उस जालिम ने इतनी जोर जोर से मेरी चूचियों को दबाया था मसला था कि मुझे अभी तक इस में दर्द होता है तु जरा इस पर भी मालिश करके अपने हाथों का जादू दिखाओ और उसमें से भी दर्द दूर कर दे मैं बहुत परेशान हो गई हूं इस दर्द से,,,,, ( सुगंधा जानबूझकर दर्द से कराहते हुए बोली)

क्या,,, चचचचचचच,,,,, चुची पर मालीश,,,,,, क्या कह रही हो मम्मी,,,,,
( चूची शब्द कहते हुए जिस तरह से रोहन हकलाया था उसे देखकर सुगंधा की हंसी छूट गई और वह हंसते हुए बोली,,,)

तो इसमें क्या हुआ रोहन तेरे से मैं अपनी गांड पर मालिश तो करवा ही चुकी हूं चूची पर करवाने में कैसी शर्म तु शायद नहीं जानता,, औरत के बदन में उसके तीन अंग बेहद अनमोल और गुप्त होते हैं जिसे औरत जब भी किसी को नहीं दिखाती यह तीनों होंगे सिर्फ और अपनी पत्नी या प्रेमी को ही दिखाती है और मुझे तुझसे शर्म करने की जरूरत नहीं है क्योंकि पूरी दुनिया में एक तू ही है जो मेरा अच्छा या बुरा समझ सकता है तेरे सिवा में किसी को अपना दर्द नहीं कह सकती,,, और वैसे भी पूरी दुनिया में तेरा मेरे सिवा कौन है और मेरे तेरे सिवा कौन है हमें दो है जो अपने दुख दर्द को आपस में बांट कर उसे कम कर सकते हैं इसलिए तू बिल्कुल भी शर्म मत कर,,,,।

रोहन को अपनी मां की बातें अच्छी लग रही थी वह अपनी मां के द्वारा कही गई तीन अंगों के बारे में सुनकर और ज्यादा उत्साहित हो रहा था वैसे तो अच्छी तरह से जानता था कि औरत के बदन में औरत अपने तीन से कौन से अंगों को छुपा कर रखती है लेकिन फिर भी वह अपने मां के मुंह से सुनना चाहता था इसलिए वह बोला,,,,।

मम्मी तुम कौन से तीन अंगों के बारे में कह रही हो मुझे जरा अच्छे से बताओ गी,,,,( अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा मंद मंद मुस्कुरा रही थी वह उसी तरह से पेट के बल लेटे हुए ही बोली,,,।)

देख रोहन मैं तुझे विस्तार से समझाती हूं तू औरतों को तो देखा ही होगा चलो लोगों को छोड़ मुझे तो तू देखता ही आ रहा है तूने आज तक मुझे साड़ी में देखा है,, साड़ी पहनने के बाद मेरे बदन में कौन-कौन सा हिस्सा तुझे बेपर्दा नजर आता है,, (रोहन कुछ कह पाता इससे पहले वह खुद बोली)
देख रोहन जब मैं साड़ी पहनती हो तो मेरे बाकी के सारे अंग ढके हुए होते हैं केवल मेरा चेहरा मेरा पेट और मेरे हाथ नजर आते हैं और तू जानता है मेरे तीन से कौन-कौन से मुख्य अंग साड़ी के अंदर ढके हुए होते हैं,,,( रोहन के बोलने से पहले ही वह खुद बोली,,,।) देख सबसे पहला औरतों का मुख्य और आकर्षण वाला अंग है गांड और मेरी गांड को तो तू देख ही चुका है बड़ी-बड़ी गोल गोल और एकदम गोरी,,,,।
( अपनी मां के मुंह से अपनी गांड के बारे में सुनकर रोहन एकदम सन्न हो गया उसकी कामोत्तेजना का पारा एकदम से चढ़ने लगा उसका लंड पजामे में ठोकर मारने लगा,,,,। तभी सुगंधा ने जो बात बोली उसे सुनकर रोहन की इच्छा हो रही थी कि अभी इसी वक्त अपनी मां के ऊपर चढ़कर उसकी गांड में अपना पूरा लंड पैल दे,, सुगंधा मादक अदाओं से अपने बेटे की तरफ नजरें घुमाकर देखते हुए बोली,,,,,।)

अच्छा रोहन तू सच सच बताना बिल्कुल भी झूठ मत बोलना और किसी भी प्रकार का शर्म मत करना जैसा कि मैं पहले से कहती आ रही हूं तुम मुझे सच सच बता कि तुझे मेरी गांड कैसी लगी,,,,,,
( रोहन तो अपनी मां के मुंह से यह सवाल सुनते ही उसके लंदन में पानी आ गया उसने इस बात की उम्मीद नहीं थी कि कभी वह अपने अंगों के बारे में उसकी राय पूछेगी लेकिन जिस तरह से वह मालिक स्वर में और कातिल अदाओं के साथ यह सवाल रोहन के माथे पर दागा था रोहन के चारों खाने चित हो चुका था रोहन अच्छी तरह से समझ गया था कि अब उसकी मां के आगे शर्माने से कोई फायदा नहीं है आगे बढ़ना है तो उसे,,, पूरी तरह से अपने शर्म को छोड़ना होगा और लगभग लगभग रोहन के अंदर से शर्म खत्म होती जा रही थी इसलिए तो वह बेधड़क अपनी मां के सवाल का जवाब देते हुए बोला,,,,।)

बहुत अच्छी मम्मी मुझे तो तुम्हारी गांड बहुत अच्छी लगी,,,,

सिर्फ अच्छी ही लगी कि इससे ज्यादा कुछ जरा खुल कर बता (सुगंधा अपने बेटे की तरह मादक मुस्कान बिखेरते हुए बोली,,)

बहुत बहुत अच्छी लगी मम्मी इतनी अच्छी लगी कि मैं बता नहीं सकता,,,,

तो ही तो मैं पूछ रही हूं बताना कैसी लगी तुझे सिर्फ अच्छी या उससे ज्यादा क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुम मर्दों की नजर औरतों के अंग पर इसी अंग पर सबसे पहले पड़ती है भले ही साड़ी के अंदर क्यों ना केद रहती है लेकिन इसके बारे में सोच कर ही तुम लोगों के तन बदन में आग लग जाती है क्यों सच कहीं ना,,,,

बात भी तो तुम सच ही कह रही हो मम्मी हम लोगों की नजर औरतों की गांड पर सबसे पहले और सबसे ज्यादा बार पड़ती है पता नहीं औरतों के गांड में किस तरह का आकर्षण होता है कि उसे देखते ही बस सम्मोहन सा हो जाता है और तुम्हारी गांड के बारे में कहूं तो मम्मी तुम्हारी जैसी गांड किसी औरत की नहीं होगी,,,,, मैं कसम खाकर कहता हूं कि मैं आज तक जितनी भी औरतों की गांड देखा हूं भले ही साड़ी के ऊपर से लेकिन जो आकर्षण साड़ी पहनने के बावजूद भी तुम्हारी गांड के अंदर होता है वैसा आकर्षण आज तक मैंने किसी औरत की गांड में नहीं देख पाया हालांकि यह मेरा पहला मौका है किसी औरत की नंगी गांड देखने का लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि तुम्हारे से खूबसूरत गोल मटोल गोरी गोरी गांडकिसी औरत की नहीं होगी,,,,,

सुगंधा तो अपने बेटे के मुंह से अपनी गांड की इतनी जबरदस्त तारीफ सुनकर एकदम गदगद हो गई,,,,,, रोहन भी अपनी मां से अपनी मां की गांड के बारे में तारीफ करके एकदम से उत्तेजित हो गया था सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अपनी दूसरे अंग के बारे में बोली,,,,

रोहन में तुझे औरतों के दूसरे अंग के बारे में बताती हूं जिसे औरत हमेशा कपड़े के अंदर ही रखती है लेकिन फिर भी मर्द की नजर उस पर भी सबसे पहले पड़ती है,,,,, औरत का दूसरा सबसे मुख्य आकर्षण वाला अंग है उसकी दोनों चूचियां,,,,( रोहन अपनी मां के मुंह से चूची शब्द सुनकर एकदम से कामोत्तेजित हो गया,,, रोहन का बुरा हाल हो रहा था वह बार-बार एक हाथ से अपने खड़े लंड को दबाने की कोशिश कर रहा था लेकिन बार-बार उसका बेलगाम लंड मुंह ऊठाए खड़ा हो जा रहा था,,,)
रोहन तू भी अच्छी तरह से जानता है कि किसी औरत की चूची छोटी होती है तो किसी औरत की चूची बड़ी बड़ी होती है और सच कहूं तो मर्दों की बड़ी-बड़ी चूचियां अच्छी लगती है,,,

ऐसा क्यों मम्मी,,,,?

क्योंकि औरतों की बड़ी बड़ी चूचियों को अपने हाथ में भरकर जोर जोर से दबाने में मर्दो को बहुत मजा आता है उन्हें आनंद मिलता है,,,,

इसीलिए मम्मी वह शैतान तुम्हारी चूची को जोर जोर से दबा रहा था,,,,

हां तु सच कह रहा है उसे बहुत मजा आ रहा था तभी तो वह सब कुछ छोड़कर मेरी चूची को जोर जोर से मस ले जा रहा था मुझे दर्द दे रहा था,,,,, और तो और निप्पल को मुंह में भर कर चूसने में भी मर्दों को बहुत मजा आता है तभी तो वह शैतान मेरी चूची को जोर जोर से दबाते हुए मेरी निप्पल को मुंह में लेकर जोर जोर से पी रहा था,,, (सुगंधा बातों ही बातों में एक इशारा के रूप में अपने बेटे को औरतों को खुश करने का तरीका बता रहे थे और औरतों के अंगों से कैसे मजा लिया जाता है यह तरीका भी उसे समझा रही थी क्योंकि उसे यकीन था कि अगर उसकी मुराद पूरी हो गई तो जरूर इस तरह की हरकत करते हुए दोनों रात भर मजा लेंगे रोहन तो अपनी मां के मुंह से इस तरह की अश्लील बातें सुनकर इतना कामोत्तेजना से भर गया था कि उसका मन खुद कर रहा था कि वह खुद अपने लंड को बाहर निकाल कर हीला ले,,, अपनी मां की बात सुनकर आश्चर्य जताते हुए रोहन बोला,,, )

क्या बात कर रही हो मम्मी क्या यह सच है क्या तुम जो भी कह रही हो वह बिल्कुल सच है,,,,?

मैं जो कुछ भी कह रही हूं रोहन वह सनातन सत्य है जब तुम थोड़े बड़े हो जाओगे तुम्हारी शादी होगी तुम्हारी बीवी आएगी तब यह बात तुम्हें खुद तो खुद पता चल जाएगी,,,,,,,
( अपनी मां की बात सुनते ही रोहन मन ही मन मे बोला कि शादी तक रुकने का किसके पास समय है मैं तो इतना उतावला हूं कि अगर थोड़ा सा मम्मी तुम अपने मुंह से इशारा कर दो तो मे अभी तुम्हारी टांगें फैलाकर तुम्हारी बुर में लंड पेल दूं,,,, और दूसरी तरफ सुगंधा पेट के बल लेटे हुए ही अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,।)

और औरत का तीसरा अंग बहुत ही बेशकीमती है जिसे औरत हमेशा पर्दे में छुपा कर रखती है साड़ी के अंदर छुपा कर रखती है और साड़ी पहनने के बावजूद भी उसे पेटीकोट के साथ-साथ अपनी चड्डी के अंदर छुपा कर रखती है तो इसी से सोच इसी से अंदाजा लगा की औरतों के लिए उस किया वह तीसरा अंग कितना ज्यादा महत्व रखता है और कितना खूबसूरत है जिसे देखने के लिए दुनिया का हर मदद करता रहता है जिसे पाने के लिए वह किसी भी हद तक नीचे जा सकता है किसी से भी लड़ाई कर सकता है किसी से भी झगड़ा कर सकता है औरतों के इस तीसरे अंग में बात ही कुछ ऐसी होती है,,,, तू जानता है औरतों के उस अंग को क्या कहते हैं,,, (इतना कहते हुए सुगंधा अपने बेटे की तरफ नजर घुमा कर देखने लगी तो वह मंद मंद मुस्कुराने लगी क्योंकि उसकी बातें सुनकर रोहन एकदम से ऊत्तेजीत हो गया था उसके चेहरे पर उत्तेजना का असर साफ झलक रहा था,,,, वह कुछ बोल पाने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था इसलिए सुगंधा बोली,,,,)
चल मैं ही बता देती हूं तुझको देख कर ऐसा लग रहा है कि तू कुछ बोल पाने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं है मेरी बातें सुनकर एकदम गरम हो गया है,,, (रोहन क्या कहता वह सच में कुछ भी बोलने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं था,,, रोहन सच में अपनी मां की बातें सुनकर एकदम गरम हो गया था सुगंधा आपने बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,।)

औरत के उस बेसिकीमती अंग को बुर कहते हैं,,,,( सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली और जिस अदा से जिस मादक एहसास के साथ वह अपने लाल-लाल होठों को आपस में सटाकर उसे गोल करके वह बोली थी उसे देख कर रोहन का लंड झड़ते झड़ते रह गया था उसके लंड में लावा का विस्फोट होने वाला था लेकिन वह संभल गया था वरना उसी समय ऊसका पानी निकल जाता,,,,,)
तुम तो जरूर देखे होंगे रोहन,,,,,

नननन,नही,,,, मम्मी मैं तुमसे कह चुका हूं कि मैंने नहीं देखा हूं,,,,

हां मैं तो भूल ही गई कि तूने अभी तक औरत की बुर नहीं देखा है (इतना कहकर सुगंधा कुछ सेकंड के लिए खामोश हो गई और थोड़ी देर बाद अपनी खामोशी को तोड़ते हुए अपने बेटे की तरफ उसकी आंखों में आंखें डाल कर बोली,,,, )

देखना चाहता है,,,,,।।
 
7 अपनी मां की यह बात सुनकर रोहन एकदम दंग रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां क्या कह रही है लेकिन जो भी कह रही थी वह बिल्कुल सत्य था एक मां अपने बेटे को बुर दिखाने के लिए उससे पूछ रही थी लेकिन इसमें देखने से ज्यादा एक मां अपने बेटे को अपनी बुर दिखाने के लिए कुछ ज्यादा ही उत्सुक थी सुगंधा अपनी ही बात से एकदम मदहोश होने लगी अपने बेटे की आंखों में एक मां की बुर देखने की ललक साफ नजर आ रही थी वह सुगंधा से नजरें भी नहीं मिला पा रहा था वह नजरें झुका कर इधर-उधर नजरें फेर ले रहा था लेकिन वह अपनी हालत को छुपाने में नाकामयाब था जिसका पूरा विस्तृत विवरण उसके पजामे में छुपा हुआ उसका दमदार हथियार दे रहा था जो कि इस समय तनकर एकदम खड़ा था और पजामे में तंबू बनाए हुए था उस पर सुगंधा की नजर पड़ते ही उसकी बुर उत्तेजना के मारे फुले ने पिचकने लगी,,,,, अपने बेटे के चेहरे पर छाई उदासी को देखकर एक बार सुगंधा फिर से मादक स्वर में बोली,,,,,,।

क्या हुआ शरमाओ मत मैं तुमसे ही पूछ रही हूं किसी गैर से नहीं पूछ रही हूं देखना चाहोगे मेरी बुर एक औरत की बुर कैसी एकदम दिन हसीन होती है,,,,, बोलो रोहन शरमाओ मत वैसे भी मैं तुम्हारी आंखों के सामने एकदम नंगी लेटी हुई हूं अगर शर्म करना होता तो तुम इस समय मेरे पास बैठकर मेरी गांड पर मालिश ना कर रहे होते,,,,,,, ( रोहन क्या कहता उसे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहे वैसे तो खुद वह अपनी मां की बुर देखने के लिए ना जाने कबसे लगाई तथा भले ही वह अपनी मां की बुर के अंदर उंगली तक डाल चुका था लेकिन उसकी आकार को वह अपनी आंखों से नहीं देख पाया था इसलिए उसके मन में अपनी मां की बुर देखने की तड़प उठ रही थी लेकिन वह अपने मुंह से बोलने में शर्मा रहा था।)
मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुम भी मेरी बुर को देखना चाहते हो और वैसे भी अगर एक औरत मर्द के सामने अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो जाए तो भले ही वह उसके दूसरे अंगों को घूर घूर कर देखते रहे लेकिन उसके मन में उसकी दोनों टांगों के बीच की उस पतली दरार को देखने की जितनी ललक होती है वह ललक दूसरे अंगों को देखने में नहीं होती क्योंकि बुरे चीज ही ऐसी है,,,,। इसलिए बोल दो बेटा तुम मेरी बुर देखना चाहते हो कि नहीं,,,,।

( सुगंधा को बार-बार अपने मुंह से पूर्व शब्द बोलने में इतना ज्यादा मजा आ रहा था कि उसकी बुर से लगातार तीव्र गति से पानी बह रहा था उसके बदन में आनंद की लहर दौड़ रही थी,,,, खास करके उसके बदन में उत्तेजना इसी बात से और ज्यादा बढ़ जाती थी कि वह यह बात खुद अपने बेटे से ही कह रही थी जो कि तिरछी नजरों से बार-बार उसकी तरफ देख ले रहा था रोहन भी क्या कहता बार-बार अपनी मां के द्वारा इस तरह से जोर देने पर वह अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला,,,।)

मममम,,, मे देखना चाहता हूं,,,,,

क्या देखना चाहता है,,, (सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली)

तुम्हारी,,, बबबबबबब,,,,, ब,,,,,,

क्य़ा बबबबबबब लगाया है,,,, ठीक से बोल इतना शर्मा क्यों रहा है,,,,,,( सुगंधा मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तरफ देखते हुए बोली रोहन की तो जैसे सांसे अटक गई थी उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी मां इतनी ज्यादा रंडी पन दिखाएगी उसे तो यकीन नहीं हो रहा था कि सामने जो बिस्तर पर नंगी लेटी हुई है उसकी मां ही है या कोई और,,,, लेकिन जो भी हो रहा था उसमें रोहन को बहुत ज्यादा मजा आ रहा था वह अपनी मां की इस तरह की बेशर्मी को देखकर खुद शर्म की चादर ओढ़े बैठा था जो कि उसके समझ में आ गया था,,, कि शर्माने से काम चलने वाला नहीं है जब सामने से खुद रसगुल्ला मुंह में आने के लिए तड़प रहा है तो वह क्यों मुंह बंद करके रखे इसलिए वह भी बेशर्म बनते हुए तपाक से बोला,,।)

तुम्हारी बुर मैं तुम्हारी बुर देखना चाहता हूं मम्मी,,,,,।

यह हुई ना बात,,,, बेटा इस तरह से शर्माओगे तो जब शादी होगी तो सुहागरात के दिन क्या करोगे,,, (सुगंधा हंसते हुए बोली)

सुहागरात,,,, सुहागरात के दिन क्या होता है मम्मी,,, (रोहन अनजान बनता हुआ बोला)

सुहागरात के दिन आदमी अपनी औरत को चोदता है,,,,,।
( सुगंधा यह बात इतनी आराम से मंद मंद मुस्कुराते बोल रही थी लेकिन यही बात रोहन सुनकर और वह भी अपनी मां के मुंह से उसे इतना ज्यादा उत्तेजना का अनुभव और असर हो रहा था कि वहां समझ नहीं पा रहा था कि ऐसे हालात में क्या करें उसका लंड पजामा फाड़ कर बाहर आने की स्थिति में हो गया था,,, सुगंधा धीरे-धीरे एकदम बेशर्म बनते जा रही थी जैसे-जैसे रात और गहरातीे चली जा रही थी वैसे वैसे सुगंधा के अंदर से एक मा बाहर निकल रही थी और एक औरत उसके शरीर में प्रवेश कर रही थी जो की पूरी तरह से बेशर्म बनते जा रही थी सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,।)

चलो अब सब बात छोड़ अब तू जल्दी से मेरी चूची की मालिश कर दे,,,, (और इतना कहते हुए वहां पलटकर पीठ के बल हो गई रोहन तो यह देखकर एकदम आवाक रह गया उसकी आंखों के सामने उसकी मां की नंगी बड़ी-बड़ी चूचियां खरबूजे की तरह तनी हुई थी इस उम्र में भी उसकी चूची में जरा सा भी लटकन नहीं था वह पूरी तरह से कसी हुई थी और एकदम सीना ताने जिसे देखते ही रोहन के मुंह में पानी आ गया और रोहन जैसे ही कुछ कहने को हुआ कि तभी उसकी मां बोली,,,,।)

देखो औरत का यह दूसरा अंग है जिस पर मर्द की नजर हमेशा गड़ी रहती है और जब यह चूचियां मेरे जैसी मतलब की,,, (इतना कहते हुए वह अपने दोनों हाथ को अपनी चूची पर रखते हुए,)
बड़ी बड़ी और गोल हो तो मर्द उसका दीवाना हो जाता है मर्द औरत का पूरी तरह से गुलाम हो जाता है,,,( इतना कहते हुए सुगंधा जानबूझकर अपने दोनों हथेली में अपनी बड़ी-बड़ी चूचियां को रखकर उसे जोर से दबा दी और यह देखकर रोहन की तो जान अटक गई उसका गला उत्तेजना के मारे सूखने लगा,,,। रोहन की नजर जैसे चुचियों पर से नीचे की तरफ जाने लगी वैसे ही सुगंधा अपनी दोनों टांगों को सिकुड़ कर अपनी रसीली पूर्व को छुपा ली और बोली,,,।

देख रोहन मैं तुझे औरत के उन अंगों को दिखा रही हूं जो औरत कभी भी अपने बेटे को नहीं दिखाती वह सिर्फ अपने पति और अपने प्रेमी को भी दिखाती है मैं तुझ पर भरोसा करके अपने एक-एक अंग को दिखा रही हूं सबसे पहले मैंने तुझे अपनी मदमस्त बड़ी-बड़ी गोरी गोरी गांड दिखाई जिसे देखकर तू अंदर ही अंदर मस्त होने लगा था और अब यह देख मेरी दोनों चूचियां (एक बार फिर से सुगंधा अपने दोनों हाथ को अपनी चूची पर रखते हुए बोली,,,) इसे देखकर जरूर तेरे मुंह में पानी आ गया होगा और हां मैं तुझे अपनी दूर भी दिखाऊंगी लेकिन अभी थोड़ा समय है सबसे पहले तू जाए जल्दी से मेरी दोनों चूचियों की मालिश कर दे क्योंकि इसमें बहुत दर्द हो रहा है कहीं ऐसा ना हो कि बातों ही बातों में यह रात गुजर जाए,,, चलजल्दी कर (इतना सुनते ही रोहन फिर से अब बिस्तर पर से खड़ा हुआ और अपनी मां की तरफ देखते हुए आगे बढ़ा आगे बढ़कर वह फिर से सरसों की कटोरी को उठा लिया और बिस्तर पर आकर बैठ गया,,,,
आधी रात से ज्यादा का समय हो रहा था चारों तरफ केवल तेज बारिश की आवाज के साथ साथ तेज चलती हवाओं का शोर गूंज रहा था ऐसे में सारा गांव नींद की आगोश में था लेकिन यहां पर मां बेटे की आंखों से नींद कोसों दूर भाग चुकी थी,,, सुगंधा पल पल अपने बेटे का उत्साह बढ़ा रही थी एक तरह से उसका दिशानिर्देश कर रही थी रोहन के पजामे में तंबू जबरदस्त तरीके से सर उठाए खड़ा था जिस पर रह-रहकर सुगंधा की निगाह चली जा रही थी और उस पजामे में बने बड़े से तंबू को देखकर उसकी बुर कचोरी की तरह फूल जा रही थी,,,। लेकिन सुगंधा अपनी दोनों टांगों को अपनी मोटी मोटी केले के तने के समान चिकनी जांघों को आपस में सटाकर अपनी रसीली मखमली बुर को अपने बेटे की नजर से छुपाए हुए थी,,।
उत्तेजना के मारे दोनों का बदन पसीने से तरबतर हो चुका था बाहर से आ रही ठंडी हवा दोनों के बदन पर किसी भी प्रकार का शीतलता प्रदान नहीं कर पा रही थी क्योंकि पूरे कमरे को सुगंधा के खूबसूरत बदन और उसकी मदमस्त जवानी ने गर्म करके रखा हुआ था,,,,,

रोहन हाथ में सरसों के तेल की कटोरी लेकर बिस्तर पर नीचे पैर लटकाए बैठा हुआ था और उसकी मां अपनी नंगी जवानी की नुमाइश करते हुए बिस्तर पर मादक अदाएं बिखेरते हुए लेटी हुई थी वह रोहन की तरफ ही देख रही थी उसके होठों पर मादक मुस्कान तेरे रही थी उसके चेहरे पर वासना की लाली छाई हुई थी रोहन अपनी मां की बड़ी-बड़ी चुचियों को घूर रहा था,,,, सुगंधा की चूचियां ऐसे लग रही थी मानो की खेत में दो खरबूजे उग आए हो इस उम्र में भी जरा सा भी लचक उसकी चूची में नहीं थी अभी भी किसी जवान लड़की की तरह उसकी दोनों चूचियां सीना ताने मैदान में जमी हुई थी रोहन को तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि वह जो देखा है वह सच है सुगंधा की चूचियां ऐसी लग रही थी मानो किसी दो बड़े-बड़े गुब्बारे में पानी भर दिया गया हो और वह पानी के वजह से इधर-उधर लहरा रही है,,,,,।
रोहन की आंखों के सामने जैसे व्यंजन से भरी थाली रखी हो और उसमें पड़े दो बड़े-बड़े रसगुल्ले को देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था उत्तेजना के मारे रोहन का गला सूखा जा रहा था वह बार-बार अपने गले को तर करने के लिए अपना थूक निगल रहा था,,, रोहन को इस तरह से आंखें फाड़े अपनी चुचियों को घूरता हुआ पाकर सुगंधा मुस्कुराते हुए बोली,,,,,

ऐसे घूमता ही रहेगा कि इसकी मालिश भी करेगा,,,

हां हां करता हुं,,,, ( इतना कहकर रोहन कटोरी से सरसों के तेल की धार को अपनी मां की दोनों बड़ी-बड़ी चुचियों के बीच में गिराना शुरू कर दिया धीरे-धीरे वह अपनी मां की दोनों चुचियों के निप्पल पर सरसों के तेल की धार की राह मे लगा इससे सुगंधा के तन बदन में गुदगुदी सी हो रही थी वह कसमसा रही थी और जैसे-जैसे वह कसमसा रही थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां इधर-उधर गुब्बारे की तरह हिचकोले खा रही थी और कुछ ही देर बाद रोहन कटोरी को एक साइड में रख कर अपने दोनों हाथों में अपनी मां की दोनों बड़ी-बड़ी चुचियों को पकड़ कर जोर जोर से मसल ना शुरू कर दिया रोहन को इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत उसका लंड ऊतेजना के मारे फटने की स्थिति में हो गया था,,,,,,

रोहन की दोनों हथेलियों का कसाव और उसकी पकड़ देखकर सुगंधाको समझते देर नहीं लगी कि उसका बेटा उसकी चूचियों की मालिश नहीं कर रहा है बल्कि उन्हें जोर जोर से दबा रहा है जिससे उसे बहुत ही मज़ा आ रहा था साथ ही रोहन के तन बदन में भी आग लग रही थी,,,, अपनी मां की चौड़ी छाती को देखकर और उस पर लटक रहे दोनों गुब्बारों को देखकर रोहन की सांस ऊपर नीचे हो रही थी वह गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की चुचियों को जोर जोर से दबा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके हाथों में दशहरी आम आ गया हो और वह उसे दबा दबा कर उसके सारे रस को निचोड़ डालना चाह रहा है,,,,
लालटेन की रोशनी में सुगंधा की दोनों चुचियों पर सरसों के तेल लगने की वजह से वहां मोतियों की तरह चमक रही थी ,,, रोहन अपनी मां के दोनों दशहरी आमों को जोर जोर से दबा रहा था,,,, सुगंधा उत्तेजना एकदम मस्त होने लगी थी जिस तरह से रोहन अपनी मां की दोनों चुचियों को अपनी हथेली में जितना हो सकता था उतना भरकर दबा रहा था उससे सुगंधा सातवें आसमान पर उड़ रही उत्तेजना का थी वह अपनी उत्तेजना को दबा सकने में पूरी तरह से असमर्थ साबित हो रही थी और वह ना चाहते हुए भी अपने मुंह से गर्म सिसकारी छोड़ने लगी,, सिसकारी की आवाज सुनकर रोहन और ज्यादा मस्त होने लगा और वह जोर-जोर से अपनी मां की दोनों चूचियों को दबाना शुरू कर दिया वह भी अच्छी तरह से जान रहा था कि अब वह अपनी मां की चूची की मालिश नहीं बल्कि उन्हें दबा कर मजा ले रहा था रोहन का उत्साह बढ़ने लगा था वह अपनी मां के दोनों खरबूजो को अपने हाथ में पकड़ कर बोला,,,

अब कैसा लग रहा है मम्मी ?

सससहहहहहह,, आहहहहहहह (कसमसाते हुए ) बहुत अच्छा लग रहा है बेटा मुझे ऐसा लग रहा है कि आज इसका सारा दर्द दूर हो जाएगा बस ऐसे ही दबाता रह।,,,

रोहन को तो जैसे खुला दौर मिल गया था उसे पूरी तरह से छूट थी उससे गोरी गोरी मदमस्त कर देने वाली दूध से भरी हुई सूचियों के साथ खेलने के लिए इसलिए वह इस मौके का भरपूर फायदा उठाता हुआ उन्हें लगातार जोर जोर से दबाया जा रहा था सुगंधा इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि उसकी दोनों निप्पल चॉकलेट की तरह तन कर खड़ी हो गई थी मानो कि जैसे कि छोटी उंगली हो,,,,, उस तनी हुई निप्पल को देखकर रोहन के मुंह में पानी आने लगा उसका मन लग जाने लगा जिस तरह से उसकी मां ने बताई थी कि उस शैतान ने उसकी दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर जी भर कर चूस रहा था उसी तरह से उसका मन कर रहा था कि अपनी मां की निप्पल को मुंह में लेकर उसे लॉलीपॉप की तरह चूसे,,, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी लेकिन वह इतना ज्यादा ललचा गया था अपनी मां की दोनों चूचियों की कड़ी निप्पल को देखकर कि वह अपनी मां की तरफ देखा तो उसकी आंखें बंद थी और थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए अपने मुंह को अपनी मां की दोनों चूचियों की तरफ लेकर आया उसे वह मुंह में लेना चाहता था लेकिन एक अजीब सा डर उसके मन में था सुगंधा जब अपनी निप्पल पर गर्म गरम सांसो का एहसास की तो वह अपनी आंखें खोलकर देखी तो रोहन उसके ऊपर झुका हुआ था यह देखकर उसके तन बदन में आग लग गई वह भी यही सोच रही थी कि उसका बेटा उसकी दोनों चूचियों को मुंह में लेकर जी भर कर पी ले,,,,,, एक पल के लिए तो सुगंधा का मन किया कि वह अपने दोनों हाथों से अपने बेटे का सर पकड़ कर अपनी चूची पर दबाने उसे अपने सीने से लगा ले ताकि वह खुद जोर जोर से उसकी चूची को पीना शुरू कर दे लेकिन वह भी ऐसा नहीं कर पाई वह कुछ देर तक यूं ही अपने बेटे की तरफ देखती रही कि कब उसका बेटा उसकी दोनों निप्पलो को मुंह में लेकर चूसता है,,,, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया कुछ देर तक युं ही अपनी मां की दोनों निप्पल को नजदीक से देखता रहा,,,, और वापस अपना मुंह हटा लिया अपने बेटे की ईस हरकत पर सुगंधाको क्रोध तो जरूर आया लेकिन करती भी क्या वह अपना मन मसोसकर रह गई,,, लेकिन फिर भी निप्पल को मुंह में भरकर चूस करना चाहिए जिस तरह से वह दबा रहा था वह बेहद आनंददायक था इसलिए लगातार उसके मुख से सिसकारी की आवाज निकलने लगी अपनी मां की गरम सिसकारी की आवाज सुनकर रोहन बोला,,,,।

मम्मी तुम्हें कहीं उस दिन की तरह दर्द तो नहीं हो रहा है जो इस तरह से आवाजें निकाल रही हो,,,

नहीं रे बिलकुल भी दर्द नहीं हो रहा है मुझे तो ना जाने क्यों बहुत मजा आ रहा है,,,, (सुगंधा उसी तरह से आंखें बंद किए हुए ही बोली,,,,)

 
88:
तो जब वह आदमी तुम्हारी दोनों चुचियों को जोर जोर से दबा रहा था तो तुम्हें दर्द क्यों हो रहा था आज की तरह मजा क्यों नहीं आ रहा था,,,,( रोहन जानबूझकर अपनी मां के दोनों खरबूजो को जोर-जोर से दबाता हुआ बोला,,,।)

क्योंकि वह शैतान था और मेरे साथ जबरदस्ती कर रहा था इसलिए मुझे दर्द कर रहा था और तू है कि मेरा दर्द मिटाने के लिए मेरी चूचियों को दबा रहा है इसलिए मुझे मजा आ रहा है अब समझ में आया कि नहीं,, ?

हां मम्मी मुझे अच्छी तरह से समझ में आ गया है लेकिन मम्मी मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही कि जब मैं तुम्हारी चूचियों को दबाना शुरू किया था तो तुम्हारी यह निप्पल बहुत छोटी सी थी लेकिन अब देखो आधी उंगली के बराबर हो गई है ऐसा क्यों,,,?( रोहन आश्चर्य जताते हुए बोला,,,,।)

देख रोहन तेरा सवाल थोड़ा अटपटा है लेकिन मैं इसका जवाब जरूर दूंगी (मुस्कुराते हुए,,,) तुझे शायद यह बात बिल्कुल भी नहीं मालूम कि जब कोई मर्द औरत के बड़े-बड़े चुचियों को दबाता है उसे मचलता है तो औरत को इसमें बहुत ही ज्यादा मजा आता है उसे आनंद की अनुभूति होती है और सूचियों में रक्त का प्रभाव बड़ी तेजी से होने लगता है जिसकी वजह से आनंद की अनुभूति करके औरतों के निप्पल एकदम खड़ी होकर एकदम आधी उंगली के बराबर हो जाती है जब कभी भी औरत की निप्पल इस तरह से टाइट हो जाए तो समझ जाना चाहिए कि औरत को मजा आ रहा है,,,,,

इसका मतलब मम्मी तुम्हें भी बहुत मजा आ रहा है,,,,( रोहन मुस्कुराते हुए बोला और उसको इस तरह से मुस्कुराता हुआ देखकर सुगंधा के तन बदन में गुदगुदी होने लगी और वह बोली,,,।

बोल तो तू ऐसे रहा है जैसे तुझे मजा नहीं आ रहा,, है।
( अपनी मां की बात सुनते ही रोहन एकदम से झेंप गया और वह हक लाते हुए बोला,,,)
ननन नही,, नही,,, मम्मी ऐसी कोई भी बात नहीं है ऐसा कुछ भी नहीं है मैं तो बस आपकी मालिश कर रहा हूं इसमें मुझे क्या मजा मिल रहा है,,,,।

देख बेटा रोहन मैं तेरी मां हूं और उससे पहले एक औरत हूं,,, और एक मर्द को औरत से बेहतर कोई नहीं समझ सकता मैं तेरी हालत को देख कर अच्छी तरह से बता सकती हूं कि तुझे भी मजा आ रहा है वरना ठंडे मौसम में तेरे माथे से टपके पसीना ना टपक रहा होता,,,,,

मम्मी,,,,, ( रोहन के मुंह से शर्म के मारे सिर्फ इतना ही निकल पाया था कि सुगंधा अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,।)

कोई बात नहीं रोहन ये तो बिल्कुल सामान्य है अक्सर मर्दों के साथ ऐसा होता रहता है मात्र औरतों का स्पर्श अगर मर्द को मिल जाए तो मर्द वैसे ही गर्म हो जाता है और तू तो,,, एक औरत को मतलब कि अपनी ही मां को एकदम नंगी करके उसकी चुचियों को जोर जोर से मसल रहा है तो तेरी हालत क्या होती होगी मैं अच्छी तरह से समझ रही हूं,,, (अपनी मां के मुंह से इस तरह की बात सुनकर रोहन हल्के से मुस्कुरा दिया,,,, )
वैसे भी जिस तरह से मजा पाकर तेरे शरीर में बदलाव आना शुरू हो गया है उसी तरह से जब एक औरत को मजा आता है तो उसके शरीर में भी काफी बदलाव होते हैं जिसमें से एक बदलाव के बारे में तो तू अच्छी तरह से समझ भी गया (अपनी निप्पल की तरफ इशारा करके,,,।) बाकी के बदलाव तू धीरे-धीरे समझ जाएगा,,,,

दोनों मां-बेटे को बहुत मजा आ रहा था रोहन तो एकदम मस्त होकर अपनी मां की चूची को ऐसे दबा रहा था जैसे दशहरी आम हो उत्तेजना के मारे सुगंधा की दोनों चूचियां भी एकदम खरबूजे की तरह गोल और कड़क होती जा रही थी सुगंधा कसमसा रही थी जवानी तूफान की तरह सुगंधा के बदन में हिचकोले खा रही थी रह रह कर सुगंधा इतनी ज्यादा उत्तेजित हो जा रही थी कि अपनी कमर को ऊपर की तरफ मार दे रही थी जिससे एक गजब का वातावरण बन जा रहा था,,,
कुछ देर तक यूं ही रोहन अपनी मां की दोनों चुचियों को दबा दबा कर अपने लंड पर कहर ढाता रहा उसे अपने लंड पर दया आ रही थी लेकिन कर भी क्या सकता था,,,,,, रोहन अपनी मां की रसीली मखमली कचोरी जैसी फूली हुई गुरु को देखना चाहता था उसके दर्शन करना चाहता था उसकी बनावट को अपने उंगलियों से छूकर महसूस करना चाहता था वही देखना चाहता था कि औरत की बुर में ऐसा क्या होता है जिसके पीछे सारे मर्द पागल हो जाते हैं जैसा कि उसने अभी तक ठीक से बुर के दर्शन भी नहीं किए थे वह ईतना तड़प रहा था उसे देखने के लिए,,,,।
हालांकि यह तड़प दोनों तरफ से थी रोहन जितना तड़प रहा था अपनी मां के बुर के दर्शन करने के लिए,,, उससे कई ज्यादा गुना उत्सुक सुगंधा थी अपनी रसीली बुर को अपने बेटे को दिखाने के लिए क्योंकि उसकी जिंदगी का आज यह दूसरा मौका था जब वह किसी पराए मर्द को अपनी बुर के दर्शन कराने जा रही थी,, पहले इससे पहले वह केवल अपने पति को ही अपनी बुर के दर्शन कर आई थी हालांकि उसने खुद साड़ी उठाकर यार कपड़े उतार कर अपनी नंगी जवानी को अपने पति के सामने परोसी नहीं थी बल्कि उसका पति खुद एक-एक करके उसके कपड़े उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी करके जी भर के उसकी रसीली कुंवारी बुर के दर्शन किया था और यहां पर मामला कुछ उल्टा ही था यहां खुद सुगंधा अपनी बुर को दिखाने के लिए तैयार थी,,,,,
रोहन बार-बार अपनी मां की चूची को मसलते हुए अपनी मां की मोटी चिकनी जांघों की तरफ देख ले रहा था कि कब वह अपनी जांघै खोलकर उसे बुर के दर्शन कराए लेकिन सुगंधा जैसे कि उसे अभी और तड़पाने के इरादे से अपनी दोनों टांगों को आपस में भींच कर रखी हुई थी,,,, जिससे रोहन को केवल कमर के नीचे जहां से जांघो का विस्तार शुरू होता है वहां केवल दोनों तरफ से लकीर भर दिखाई दे रही थी मानो कि किसी फिल्म से पहले उसके ऊपर पर्दा लगा हो और दर्शक उस पर देके उठने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हो ठीक उसी तरह का नजारा रोहन की आंखों के सामने था,,,, सुगंधा को अपने बेटे की आंखों में उसकी बुर के दर्शन करने की चमक साफ दिखाई दे रही थी रोहन लालायित हुए जा रहा था ,,, सुगंधा अपनी एक नजर अपने दोनों बड़े-बड़े खरबुजों की तरफ डाली तो शर्म से पानी पानी हो गई क्योंकि उसके बेटे ने उसे दबा दबा कर एकदम टमाटर की तरह लाल कर दिया था और उसका आकार भी बढ़ चुका था,,,, सुगंधा अपने बेटे के मर्दाना हाथों के जादू को देखकर एकदम प्रभावित हो गई वह मन ही मन सोचने लगी कि जब यह दोनों सूचियों से इस तरह से खेल रहा है तो उसकी बुर का क्या हाल करेगा यह सोचकर ही उसका तनबदन उत्तेजना के मारे कसमस आने लगा अब इससे भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह जल्द से जल्द अपनी बुर के दर्शन अपने बेटे को करा देना चाहती थी ताकि वह उसकी बुर को देखकर एकदम से उसका गुलाम बन जाए और वही करें जो वो चाहती है,,,, इसलिए वह खुद बेसब्र होकर अपने बेटे से बोली,,,।

देख रोहन अब मैं तुझे औरत की सबसे खूबसूरत और अनमोल चीज दिखाती हूं जिसे वह हमेशा छुपा कर रखती है केवल अपने पति या प्रेमी को भी दिखाती है लेकिन मैं आज तुझे दिखाने जा रही हूं क्योंकि मुझे तुझ पर भरोसा है,,, ।
(इतना सुनते ही रोहन का तन बदन गुदगुदाने लगा,,, पल भर में ही रोहन के लंड की नसें और ज्यादा फूलने लगी,,, सुगंधा अपने बेटे के चेहरे पर बदले हुए भाव को देखकर मन ही मन प्रसन्न होने लगी और वह अपने बेटे को और ज्यादा तड़पाने के उद्देश्य से बोली,,,,।)

लगता है तू औरत के उस अनमोल खजाने को देखना नहीं चाहता इसलिए कुछ बोल नहीं रहा है तो रहने दे नहीं दिखाती हूं (इतना सुनते ही रोहन तपाक से बोला,,,)

नहीं नहीं मम्मी ऐसी कोई भी बात नहीं है मैं,,, मैं,,,, ववव मैं तुम्हारी वह देखना चाहता,,हुं,,,

वह,,, क्या देखना चाहता है। ? जरा खुल कर बोल अफसर माली से कोई फायदा नहीं है जो देखना है बोल दे कि तू क्या देखना चाहता हैं,,,,,?

मम्मी मैं तुम्हारी बबबबबब,,,, बुर देखना चाहता हूं,,, (रोहन हक लाते हुए बोला,,,।)

यह हुई ना बात ऐसे ही थोड़ा मर्दानगी दिखाते हुए बोला कर दो एक औरत को दिखाने में मजा भी आएगा,,,,।

रोहन अपनी मां की बात को ध्यान से सुन रहा था लेकिन उसका ध्यान उसकी बातों में नहीं बल्कि अपनी मां की मोटी मोटी चिकनी गोरी जागो को देखने में लगा हुआ था उसका दिल जोरों से धड़क रहा था रोहन को बेसब्री से अगले पल का इंतजार था क्योंकि किसी भी पल उसकी मां अपनी दोनों टांगों को फैलाने वाली थी और उसके बाद जो नजारा उसे दिखने वाला था उसके बारे में सोच कर उसे डर लग रहा था कि कहीं उस नजारे को देखकर उसकी सांसे ना थम जाए,,,, हालांकि अभी भी रोहन अपनी मां के दोनों कबूतरों से खेल रहा था जो कि इस समय मालिश की वजह से लाल टमाटर की तरह हो गए थे और उसकी निप्पल एकदम भूरे रंग की जो कि ईस समय छोटी सी चॉकलेट की तरह लग रही थी,,,।
सुगंधा के भी दिल की धड़कनें तेज चल रही थी क्योंकि उसके मन में भी अजीब अजीब से ख्यालात आ रहे थे क्योंकि किसी के सामने उसने आज तक अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम निर्वस्त्र अवस्था में नंगी नहीं लेटी थी,, और आज वह अपने ही बेटे के सामने एकदम नंगी होकर लेटी थी और उसे अपनी रसभरी रसीली बुर दिखाने जा रही थी,,,,।

तू रोहन अपने आप को संभाल कर रखना कहीं अगला नजारा देखकर तेरी सांसे ना रुक जाए क्योंकि ऐसा मौका मर्दों की जिंदगी में बहुत ही कम आता है जब कोई गैर औरत उसे इस तरह से नंगी होकर अपनी बुर दिखाती है इसलिए कह रही हूं कि तू अपना दिल थाम कर रखना अपने होश संभाल कर रखना कहीं ऐसा ना हो कि अगला नजारा देखते ही तेरी सांसे रुक जाए और,,, तो किसी मूर्ति की तरह पत्थर हो जाए,, तू तैयार तो है ना अगला नजारा देखने के लिए,,,( रोहन अपनी मां की बात सुनकर बोला कुछ नहीं बस हां ने सिर हिला दिया और इसके बाद सुगंधा धीरे-धीरे अपनी दोनों मखमली चिकनी मोटी मोटी जांघों को खोलने लगी,,,, सुगंधा जानबूझकर बहुत ही आहिस्ता आहिस्ता अपनी टांगों को खोल रही थी और जैसे-जैसे सुगंधा की टांगे खुल रही थी वैसे-वैसे रोहन की दिल की धड़कन तेज होती चली जा रही थी और कुछ देर बाद ही रोहन की आंखों के सामने उसकी खूबसूरत मां की रसीदी चिकनी कचोरी जैसी पूरी हुई और मखमली बालों से सुसज्जित दूर नजर आने लगी जिसको देखकर ही रोहन की आंखों में चमक आ गई आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रह गया,,,,,।

रोहन को तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी मां से क्या कहें और कैसे कहे क्योंकि जिस तरह का नजारा उसकी आंखों के सामने था उसे देखकर उसका दिमाग काम करना बंद कर दिया था,,,,, रोहन को सब कुछ एकदम साफ नजर आ रहा था जिंदगी में पहली बार हुआ किसी औरत की और वह भी किसी और की नहीं बल्कि अपनी ही मां की रसीली बुर को इतने नजदीक से देख रहा था उसकी बनावट को देख रहा था उसके आकार को देखकर उसके आश्चर्य का कोई ठिकाना ना था उसे सच में समझ में नहीं आ रहा था कि औरत की टांगों के बीच इतनी खूबसूरत और हसीन चीज होती है,,,,,
सुगंधा अपने बेटे की हालत को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि एक जवान होते लड़के की क्या हालत होती है जब कोई औरत इस तरह से नंगी होकर अपनी रसीली पूर्व उसकी आंखों के सामने धर दे और वही हालत उसके बेटे की हो रही थी उसका मुंह खुला का खुला रह गया था आंखें फटी की फटी रह गई थी और सुगंधा अपने बेटे के पजामे में साफ देख पा रही थी कि उसका लंड पूरी तरह से खड़ा था और पजामे में तंबू बना दिया था,,,,,

सुगंधा एकदम बेशर्म की तरह अपनी दोनों टांगें फैलाई बिस्तर पर लेटी हुई थी और कभी अपनी बुर की तरफ तो कभी अपने बेटे की तरफ देख ले रही थी जो कि इस समय पूरी तरह से सदमे में था कुछ देर तक यूं ही कमरे में खामोशी छाई रही सुगंधा खुद खामोशी को दूर करते हुए बोली,,,,,,।

क्या हुआ ऐसे आश्चर्य से क्या देख रहा है मैं कहती थी ना अगला नजारा देखेगा तो तू अपने होश खो देगा,,, कैसी लगी तुझे मेरी बुर,,,,( सुगंधा यह शब्द बेहद ही मादकता भरे अंदाज मे बोली,,, और रोहन अपनी मां का कामुक रूप और उसकी मादक अदा देखकर चारों खाने चित हो गया वह पूरी तरह से अपनी मां का गुलाम हो गया वो कुछ बोल नहीं रहा था बस कभी अपनी मां की तरफ तो कभी अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देख रहा था सुगंधा वह क्या चाह रहा यह बात वह अच्छी तरह से समझ गई और अपने बेटे से बोली,,,,।

देख ले तू जी भर कर देख ले और तू चाहे तो इसे छू कर भी देख सकता है क्योंकि वैसे भी तुझे इस पर मालिश करना है ना जाने क्यों इसमें खुजली जैसी महसूस हो रही है,,,,।( रोहन तो अपनी मां की यह बात सुनते ही जैसे उसे मुंह मांगी मुराद मिल गई हो वह तो हवा में उड़ने लगा उत्तेजना से उसका बदन अकड़ने लगा,, क्योंकि जो बात उसकी मां कह रही थी उसमें रोहन को बेहद आनंद मिलने वाला था उसकी मनोकामना पूरी होने वाली थी आज वह एक रसीली खूबसूरत बुर को हाथों से छूने वाला था उसे स्पर्श करने वाला था,,,, उसे अपने हाथों से मसलने वाला था हालांकि कुछ देर पहले वह अपनी मां की रसीली बुर के अंदर बराबर का उंगली पेल चुका था लेकिन अपनी मां की बूर को देख नहीं पाया था और अब वह अपनी मां के बेशकीमती खजाने को देखते हुए उसके अंदर उंगली डालकर उसका मजा ले पाएगा अगर किस्मत अच्छी हुई तो,,, सुगंधा की रसीली फूली हुई बुर एकदम साफ नजर आ रही थी सुगंधा अपनी दोनों टांगों को फैला कर अपनी मदमस्त कचोरी जैसी फूली हुई बुर के दर्शन रोहन को करा रही थी और वह आंखे फाडे अपनी मां की मदमस्त लीला को देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था।
रोहन अपनी मां की रसीली फूली हुई बुर को छूने के लिए तड़प रहा था। लेकिन अब उसे अपनी इच्छा पूरी करने में किसी प्रकार की दिक्कत नजर नहीं आ रही थी क्योंकि उसकी मां खुद उसे अपनी बुर छु़ने की इजाजत उसे दे दी थी इसलिए रोहन एक पल भी गवाए बिना तुरंत बिस्तर पर से उठा और टेबल पर से सरसों की तेल की शीशी को अपने हाथों में ले लिया,,,,, सुगंधा अपने बेटे को सरसों की तेल की बोतल उठाते हुए देखा कर मन ही मन कसमसा रही थी क्योंकि उसे पता था कि अब उसके बेटे की उंगलियां उसकी रसीली बुर पर शिरकत करेंगी अपना नृत्य करेंगी उसे अपना असर दिखाएंगे जिससे वह पूरी तरह से मदहोश हो जाएगी,,, आने वाले कल के बारे में सोच कर के तन बदन में हलचल सी होने लगी थी उसका मन गुदगुदाने लगा था,
सुगंधा सुगंधा को साफ साफ नजर आ रहा था कि जवानी के जोश में उसके बेटे के माथे पर से इसे ठंडे मौसम में भी पसीना टपक रहा था जिसे देखकर वह और ज्यादा मस्त होने लगी उसके बदन पर गंजी पसीने की वजह से चिपक सी गई थी,, तभी उसके मन में अपने बेटे की नंगी चोरी छातियों को देखने की इच्छा जागरुक होने लगी और अपनी इस लालच को रोक नहीं पाए और वह अपने बेटे से बोली,,,।

बेटा यह क्या इतनी ठंडे मौसम में भी तेरे बदन से पसीना टपक रहा है तेरी बनियान पूरी तरह से पसीने में भीग गई है ऐसा कर इसे उतार दें रोहन अपनी मां की बात को सुनते हुए लगातार सुगंधा के खूबसूरत बदन पर नजर गाढ़े हुए था कभी वह अपनी मां की दोनों लटकती हुई खरबूजे जैसी चूचियों को देखता तो कभी टांगों के बीच की पतली दरार को देखकर मस्त हुए जा रहा था और वह तुरंत अपनी मां की बात को मानते हुए अपनी बनियान उतार फेंका सुगंधा तो अपने बेटे की जवान मर्दाना चौड़ी छाती को देखकर एकदम मस्त होने लगी और उसकी बुर उत्तेजना के मारे कुल बुलाने लगी,,,

 
क्या हुआ ऐसे आश्चर्य से क्या देख रहा है मैं कहती थी ना अगला नजारा देखेगा तो तू अपने होश खो देगा,,, कैसी लगी तुझे मेरी बुर,,,,( सुगंधा यह शब्द बेहद ही मादकता भरे अंदाज मे बोली,,, और रोहन अपनी मां का कामुक रूप और उसकी मादक अदा देखकर चारों खाने चित हो गया वह पूरी तरह से अपनी मां का गुलाम हो गया वो कुछ बोल नहीं रहा था बस कभी अपनी मां की तरफ तो कभी अपनी मां की दोनों टांगों के बीच देख रहा था सुगंधा वह क्या चाह रहा यह बात वह अच्छी तरह से समझ गई और अपने बेटे से बोली,,,,।

देख ले तू जी भर कर देख ले और तू चाहे तो इसे छू कर भी देख सकता है क्योंकि वैसे भी तुझे इस पर मालिश करना है ना जाने क्यों इसमें खुजली जैसी महसूस हो रही है,,,,।( रोहन तो अपनी मां की यह बात सुनते ही जैसे उसे मुंह मांगी मुराद मिल गई हो वह तो हवा में उड़ने लगा उत्तेजना से उसका बदन अकड़ने लगा,, क्योंकि जो बात उसकी मां कह रही थी उसमें रोहन को बेहद आनंद मिलने वाला था उसकी मनोकामना पूरी होने वाली थी आज वह एक रसीली खूबसूरत बुर को हाथों से छूने वाला था उसे स्पर्श करने वाला था,,,, उसे अपने हाथों से मसलने वाला था हालांकि कुछ देर पहले वह अपनी मां की रसीली बुर के अंदर बराबर का उंगली पेल चुका था लेकिन अपनी मां की बूर को देख नहीं पाया था और अब वह अपनी मां के बेशकीमती खजाने को देखते हुए उसके अंदर उंगली डालकर उसका मजा ले पाएगा अगर किस्मत अच्छी हुई तो,,, सुगंधा की रसीली फूली हुई बुर एकदम साफ नजर आ रही थी सुगंधा अपनी दोनों टांगों को फैला कर अपनी मदमस्त कचोरी जैसी फूली हुई बुर के दर्शन रोहन को करा रही थी और वह आंखे फाडे अपनी मां की मदमस्त लीला को देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था।
रोहन अपनी मां की रसीली फूली हुई बुर को छूने के लिए तड़प रहा था। लेकिन अब उसे अपनी इच्छा पूरी करने में किसी प्रकार की दिक्कत नजर नहीं आ रही थी क्योंकि उसकी मां खुद उसे अपनी बुर छु़ने की इजाजत उसे दे दी थी इसलिए रोहन एक पल भी गवाए बिना तुरंत बिस्तर पर से उठा और टेबल पर से सरसों की तेल की शीशी को अपने हाथों में ले लिया,,,,, सुगंधा अपने बेटे को सरसों की तेल की बोतल उठाते हुए देखा कर मन ही मन कसमसा रही थी क्योंकि उसे पता था कि अब उसके बेटे की उंगलियां उसकी रसीली बुर पर शिरकत करेंगी अपना नृत्य करेंगी उसे अपना असर दिखाएंगे जिससे वह पूरी तरह से मदहोश हो जाएगी,,, आने वाले कल के बारे में सोच कर के तन बदन में हलचल सी होने लगी थी उसका मन गुदगुदाने लगा था,
सुगंधा सुगंधा को साफ साफ नजर आ रहा था कि जवानी के जोश में उसके बेटे के माथे पर से इसे ठंडे मौसम में भी पसीना टपक रहा था जिसे देखकर वह और ज्यादा मस्त होने लगी उसके बदन पर गंजी पसीने की वजह से चिपक सी गई थी,, तभी उसके मन में अपने बेटे की नंगी चोरी छातियों को देखने की इच्छा जागरुक होने लगी और अपनी इस लालच को रोक नहीं पाए और वह अपने बेटे से बोली,,,।

बेटा यह क्या इतनी ठंडे मौसम में भी तेरे बदन से पसीना टपक रहा है तेरी बनियान पूरी तरह से पसीने में भीग गई है ऐसा कर इसे उतार दें रोहन अपनी मां की बात को सुनते हुए लगातार सुगंधा के खूबसूरत बदन पर नजर गाढ़े हुए था कभी वह अपनी मां की दोनों लटकती हुई खरबूजे जैसी चूचियों को देखता तो कभी टांगों के बीच की पतली दरार को देखकर मस्त हुए जा रहा था और वह तुरंत अपनी मां की बात को मानते हुए अपनी बनियान उतार फेंका सुगंधा तो अपने बेटे की जवान मर्दाना चौड़ी छाती को देखकर एकदम मस्त होने लगी और उसकी बुर उत्तेजना के मारे कुल बुलाने लगी,,,
 
बाप रे तू तो एकदम जवान हो गया है तेरी चौड़ी छाती पूरी तरह से तुझे मर्द बना रही है,,( सुगंधा आंख फाड़े अपने बेटे की तरफ देख रही थी और अपनी मां के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर मन ही मन रोहन प्रसन्न हो रहा था,,,) सच में तेरी नंगी चौड़ी छाती को देखकर मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि तू रोहन है वही छोटा सा मुन्ना सा रोहन तू सच में बहुत बड़ा हो गया है,,, (ऐसा कहते हुए सुगंधा जानबूझकर अपनी हथेली को अपनी टांगों के बीच अपनी रसीली गुलाबी बुर पर रखकर हल्के हल्के सहला रही थी यह देखकर रोहन का रोम-रोम खड़ा हो गया और साथ ही उसके लंड में रक्त का प्रवाह कुछ ज्यादा ही तेज गति से होने लगा। रोहन अपनी मां की गर्म हरकतों से पूरी तरह से गर्म हो चुका था रोहन भी बेशर्म बनते हुए जानबूझकर अपने हाथ से अपनी पजामे में बने तंबू को पकड़कर बैठाने की कोशिश कर रहा था और यह देखकर सुगंधा की बुर पानी छोड़ने लगी वह अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगी और हल्के से ज्यादा अपनी टांगों को खोल दी जिससे उसकी रसीली मद भरी बुर और साफ नजर आने लगी,,,,
अब रोहन से सब्र करना बिल्कुल मुश्किल हुए जा रहा था वह तुरंत बिस्तर पर अपनी मां के बेहद करीब बैठकर सरसों के तेल की कटोरी से सरसों की तेल की धार को अपनी मां की रसीली बुर की गुलाबी पत्तियों के बीचो-बीच गिराने लगा जिससे सुगंधा एकदम से कसमसाने लगी,,,,, और अगले ही पल सुगंधा अपने बेटे की मजबूत हथेलियों को अपनी कचोरी जैसी फूली हुई बुर पर महसूस करके एकदम मस्त होने लगी,,, जैसे ही रोहन की हथेली का स्पर्श सुगंधा की मखमली रसीली बुर पर हुआ वैसे ही उत्तेजना के मारे सुगंधा की बुर से पानी बहने लगा और देखते ही देखते रोहन उत्तेजना के मारे अपनी मां की रसीली बुर को अपने हथेली में लेकर दबाना शुरू कर दिया उसे मसलने लगा उसकी गरमाहट को महसूस करके वह अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करने लगा उसे अभी भी अपने ऊपर यकीन नहीं हो रहा था कि वह अपनी मां की रसीली मखमली बुर को अपने हाथों से दबा रहा है उसे मसल रहा है और देखते ही देखते अपनी हरकत की वजह से सुगंधा को एकदम गर्म कर दिया वह बिस्तर पर मछली की तरह तड़पड़ाने लगी,, वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि बिस्तर पर बिजी चादर को अपनी हथेली में दबोच कर गर्मागरम सिसकारी भरने लगी यह देखकर रोहन अपने ऊपर का पूरी तरह से नियंत्रण खोने लगा और देखते ही देखते उत्तेजना वस,, वह अपनी मां की रसीली कसी हुई बुर में अपनी एक उंगली प्रवेश करा दिया और जैसे ही रोहन की बीच वाली उंगली सुगंधा की रसीली बुर के अंदर प्रवेश की वैसे ही सुगंधा का पूरा जिस्म मचल उठा और उसके मुख से जोरदार आह निकल गई,,,
देखते ही देखते सब कुछ बदलता चला जा रहा था कमरे के अंदर का नजारा बेहद कामोत्तेजना से बढ़ता चला जा रहा था ऐसा लग ही नहीं रहा था कि कमरे के अंदर एक मां और एक बेटा है बल्कि अंदर का दृश्य देखकर यही लग रहा था कि जैसे पति पत्नी की सुहागरात की शुरुआत हो रही हो और पति धीरे-धीरे अपनी पत्नी को सुहागरात के हसीन पल की खुशियां देते हुए उसकी नाजुक रसीली बुर से खेल रहा है,,,, सारे बंधन टूटते चले जा रहे थे वासना की आंधी में दोनों की मर्यादा ए लांघते चले जा रहे थे,,,। कमरे के बाहर बारिश अपना असर दिखा रहे थे और कमरे के अंदर उपासना अपना असर दिखा रही थी दोनों एकदम जोर पर कटे हुए थे ना बारिश थमने का नाम ले रही थी ना यह वासना खत्म होने क नाम ले रही थी।
वासना और आकर्षण की बूंदे दोनों को भीगो रही थी,,,,, देखते ही देखते रोहन अपनी मां की बुर को अपनी उंगली से चोदना शुरु कर दिया सुगंधा भी अब अच्छी तरह से समझ गई थी कि अब मालिश का कार्य समाप्त हो चुका था अब मस्ती का समय शुरू हो गया था इसलिए वह खुद अपने हाथों की कॉलोनियों के सहारे अपना चेहरा ऊपर उठाकर अपने बेटे की हरकत को देखने की कोशिश कर रही थी जो कि लालटेन की पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,, सुगंधा को साफ साफ नजर आ रहा था कि उसका बेटा अपनी बीच वाली उंगली को जोर-जोर से उसकी गुलाबी बुर की पत्तियों के बीचो बीच रखकर अंदर बाहर कर रहा है जिससे एक तरह से चोदने का ही सुख मिल रहा था सुगंधा की पूर्व इस उम्र में भी काफी कसी हुई थी इसका एहसास रोहन को बहुत ही जल्द हो गया और इस उम्र के पड़ाव पर भी सुगंधा की बुर पूरी तरह से खुली नहीं थी उसकी गुलाबी पत्तियां हल्की सी बुर की पत्नी दरार में से बाहर की तरफ झांत रही थी ऐसा लग रहा था जैसे चांद बादलों की ओट में से छुपकर देख रहा हो,,,,।
रोहन के माथे से अभी भी पसीने की बूंदें टपक रही थी वह अपनी मां की गर्म जवानी देखकर कर पूरी तरह से सकते में था उसका मुंह खुला का खुला था आश्चर्य से वह कभी अपनी मां के शर्म से लाल हुए चेहरे की तरफ तो कभी उसके दोनों खरबूजो की तरफ तो कभी अपनी उंगली को अपनी मां की रसीली बुर के अंदर बाहर होता हुए देख रहा था यह सब उसके लिए बिल्कुल नया था एक अद्भुत सुख से भरा हुआ,,,, रोहन जो भी कर रहा था उससे सुगंधा को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उससे रहा नहीं जा रहा था और रह-रहकर हल्के से अपनी कमर को ऊपर दे मार रही थी,,,,,,,

यह कैसी मालिश है रोहन,,, (गरम सिसकारी लेते हुए सुगंधा बोली)

मम्मी तुम ही तो कह रही थी कि इसके अंदर तुम्हें खुजली महसूस हो रही है इसलिए मैं सोचा कि अंतर भी मालिश कर दूं ताकि तुम्हारी खुजली मिट जाए,,,,

आहहहहह,,, सससहहह,,, बेटा तेरी हरकत की वजह से तो मेरी खुजली मिटाने की बजाय और ज्यादा बढ़ने लगी है अब तो और अंदर तक खुजली हो रही है,,,,,,,,।

,, तुम चिंता मत करो मम्मी मैं तुम्हारी खुजली मिटा दूंगा और ऐसा कहते हुए रोहन जोर-जोर से अपनी उंगली को अपनी मां की बुर में फैलने लगा जिससे सुगंधा को बहुत मजा आ रहा था हालांकि यह उंगली तो उसकी बुर के लिए कम ही पड़ रही थी लेकिन काफी दिनों बाद उसकी बुर में कुछ जा रहा था इसके लिए उसे अपनी बेटे की उंगली भी लंड के बराबर लग रही थी जिससे उसे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था,,,,।

बेटा एक हाथ से जरा दूध पर भी मालिश कर दे इसमें अभी भी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है सुगंधा जानबूझकर दर्द का बहाना करके अपने बेटे के दोनों हाथों से मज़ा लेना चाहती,,, एक हाथ की उंगली तो पहले से ही उसकी रसीली बुर के अंदर पेवस्त थी और और दूसरे हाथ से अपनी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चुचियों को मसल वाना चाहती थी उसे दबवाना चाहती थी ताकि उसे भरपूर आनंद मिल सके,,,,। रोहन भी कहां पीछे हटने वाला था अपनी मां की बात सुनते ही एक हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां के दोनों खरबूजे को बारी-बारी से पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया जिससे उसे भी दुगना आनंद मिल रहा था,,,,।
कमरे के अंदर का माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका था सुगंधा निर्वस्त्र अवस्था में अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगे फैला कर अपनी रसीली पुर के अंदर अपने बेटे से उंगली चोदन का भरपूर आनंद उठा रही थी,,,,, रोहन को एकदम साफ तौर पर महसूस हो रहा था कि उसकी मां की बुर की अंदरूनी दीवारें एकदम गर्म थी,,, उत्तेजना के मारे रह रह कर उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि उसकी उंगली उसकी मां की बुर के अंदर ही पिघल जाएगी सुगंधा पूरी तरह से गर्म आ चुकी थी उसके मुख से लगातार गर्म सिसकारी और आहह भरने की आवाज आ रही थी जिससे कमरे का वातावरण एकदम मादक हो चुका था रोहन ने भी आज तक इस तरह की गरम सिसकारी की आवाज नहीं सुना था,,, इसलिए वह भी अपनी मां के मुंह से गरम-गरम आवाजें सुनकर एकदम मदहोश होने लगा था और बड़ी तेजी से अपनी उंगली को अपनी मां की बुर के अंदर तक पेल रहा था,,,।,,, वह बड़ी तेजी से अपनी मां की बुर के अंदर उंगली पेलते हुए बोला,,,,,,

अब कैसा लग रहा है मम्मी,,,?

अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है रे ऐसा लग रहा है मेरा सारा दर्द दूर हो गया है,,,, (सुगंधा मदहोश होते हुए बोली,,,) दर्द तो दूर हो गया लेकिन अब खुजली बढ़ने लगी है,,,,।

कहां पे मम्मी,,,,,( रोहन आश्चर्य के साथ बोला)

अरे वहीं पर जहां तू जोर जोर से उंगली पेल रहा है,,,,,

मतलब तुम्हारी बुर में,,,, (उत्तेजना के मारे रोहन के मुंह से इस तरह का वाक्य निकल गया,,,,)

हां इसी में,,, (सुगंधा ऊंगली से अपनी बुर की तरफ इशारा करते हुए,,, )बोली तो थी तुझको कि ईसमें खुजली हो रही है,,,,।)

लेकिन मम्मी मैं भी तो खुजलाने के लिए तुम्हारी बुर के अंदर उंगली डालकर इतनी जोर जोर से अंदर बाहर कर रहा हूं ताकि तुम्हारी खुजली मिट जाए,,,, (रोहन मस्त होते हुए बोला अब वह भी पूरी तरह से बेशर्म हो चुका था क्योंकि उसे बेशर्म बनने में ही मजा आ रहा था,,,।)

तू एकदम बुद्धू है,,,, शायद तू नहीं जानता कि जिस तरह से तू अपनी छोटी सी उंगली को मेरी बुर के अंदर बाहर कर रहा है उससे मेरी खुजली दूर नहीं हो रही है बल्कि बढ़ जा रही है,,,,,

मम्मी में तो पूरी कोशिश कर रहा हूं फिर ऐसा क्यों हो रहा है,,,।

रोहन शायद तू नहीं जानता कि तेरी छोटी सी उंगली से इसकी खुजली मिटने वाली नहीं है,,,।

फीर केसे होगा मम्मी,,,, ?

इसमें मोटा और लंबा चीज़ जाएगा तभी इसकी खुजली मिटेगी,,
मैं कुछ समझा नहीं मम्मी,,, (रोहन उसी तरह से एक हाथ से अपनी मां की चूची और दूसरे हाथ की उंगली से अपनी मां की बुर चोदते हुए बोला।)

अपने बेटे से इस तरह की अश्लील बातें करने में सुगंधा को बहुत मजा आ रहा था अब वह पूरी तरह से सब कुछ साफ कर लेना चाहती थी इसलिए सीधे सीधे मुद्दे पर आते हुए वह बोली,,,।

देख बेटा तुझसे जो मैं कहने जा रही हूं वह तुझसे कहना तो नहीं चाहिए था लेकिन क्या करूं तू ही मेरा सब कुछ है इसलिए मैं तुझे बता देती हूं तूने कभी किसी औरत की चुदाई किया है,,,

यह तुम क्या कह रही हो मम्मी,,,?( रोहन आश्चर्य के साथ बोला)

मैं जो पूछ रही हूं उसका संबंध ठीक है मेरी खुजली से है इसलिए कह रही हूं किया तूने कभी किसी औरत को चोदा है,,,, (अपनी मां के मुंह से इस तरह की अश्लील गंदी बातें सुनकर रोहन तो उत्तेजित हो गया और उसका लंड एकदम से कड़क हो गया ना जाने कितनी बार अपनी मां की हरकत की वजह से उसका लंड पानी छोड़ते छोड़ते रह गया था,,,,)

नहीं मैंने आज तक ऐसा कुछ भी नहीं किया और मैं तो कैसे चोदा जाता है यह भी नहीं जानता,,,, (रोहन मासूमियत के साथ बोला)

इसलिए तो तू ऐसी बातें कर रहा है देख मैं तुझे बताती हूं,,, एक औरत तब चुदवाती है जब उसकी बुर के अंदर खुजली होने लगती है पर उंगली से खुजली मिटने वाली नहीं होती क्योंकि उंगली छोटी होती है और औरत को बुर के अंदर तक खुजली होती रहती है ऐसे में पता है वह अपनी खुजली कैसे मिटाती है (अपने बेटे की तरफ मादक मुस्कान बिखेरते हुए वह बोली,,)

कैसे,,,?( रोहन गरम आहे भरता हुआ बोला)

वह तेरे जैसे जवान लड़के का मोटा तगड़ा और लंबा लंड अपनी बुर के अंदर डलवाती है और उसे अपनी कमर आगे पीछे करने के लिए कहती है जो कि एक मर्द बड़ी फुर्ती के साथ अपनी कमर को आगे पीछे करते हुए बुर के अंदर अपने मोटे तगड़े लंड को अंदर-बाहर करता है जिससे औरत को अच्छा भी लगता है और उसकी खुजली भी मिट जाती है,,,,।

रोहन तो अपनी मां के मुंह से यह बात सुनकर एकदम मस्त हो गया और ना चाहते हुए भी अपने खड़े लंड को पजामे के ऊपर से नीचे करने के लिए दबा दिया जो कि यह हरकत सुगंधा ने देख ली और उसकी बुर भी पानी छोड़ने लगी हालांकि अभी भी उसकी उंगली बुर के अंदर ही थी,,,, रोहन अपनी मां की बातें सुनते हुए एकदम मस्त वजह रहा था और वह भी थोड़ा खुलते हुए बोला,,,।

मेरे जैसा मोटा तगड़ा लंड लेकिन मम्मी तुम्हें कैसे पता चला कि मेरे पास मोटा तगड़ा लंबा लंड है,,,,

( सुगंधा को अपने बेटे का इस तरह से खुल कर बोलना बहुत अच्छा लग रहा था इसलिए वह मुस्कुराते हुए बोली,,,।)

तेरे पजामे में बना तंबू बता रहा है कि तेरे पास मोटा तगड़ा और लंबा लंड है,,,। ( रोहन यह सुनकर शर्मिंदा हो गया लेकिन अपने पजामे में बने तंबू को छुपाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं किया वह भी चाहता था कि उसकी मां उसके पजामे में बने तंबू को खुल कर देखें लेकिन उत्तेजना के मारे रोहन की उंगली सुगंधा की बुर में कुछ ज्यादा ही तीव्र गति से अंदर बाहर हो रही थी,,, जिससे सुगंधा बहुत ही जल्दी चरम सुख की तरफ आगे बढ़ने लगी उसे ऐसा लगने लगा कि उसका पानी छूट जाएगा और उसे तीव्र गति से पेशाब भी महसूस हो रही थी उसे बहुत जोरों की पेशाब भी लगी थी उसके मुख से जोर जोर से सिसकारी की आवाजें आने लगी वह मस्त हो रही थी वह मदमस्त होकर अपने सर को इधर-उधर पटक रही थी आनंद की फुलकारी उसके बदन में चिकोटी काट रही थी।,,

रोहन भी अपनी मां की हालत को देखकर मस्त हुए जा रहा था उसकी उंगली बड़ी तीव्र गति से बुर की पतली दरार में अंदर बाहर हो रही थी और देखते ही देखते एक झटके से सुगंधा ने अपनी कमर को ऊपर की तरफ उठाई और भर भला कर पानी फेकने लगी यह देखकर रोहन भी एकदम मदमस्त होने लगा,,,, अपनी मां की मादक हालत को देखकर राहुल बोला,,,

क्या हुआ मम्मी तुम्हारी खुजली दूर हो गई क्या,,,?

कुछ देर के लिए क्योंकि मुझे मालूम है इसके बाद मेरी खुजली और ज्यादा बढ़ जाएगी,,,,( सुगंधा अपनी उखड़ती हुई सांसो को नियंत्रित करते हुए बोली,,,।)

तब क्या करोगी मम्मी,,,, ?

क्या करूंगी ,,, मुझे भी समझ में नहीं आ रहा है,,, काश मेरे लिए भी मोटा तगड़ा लंड होता तो शायद मेरी खुजली मिट जाती (सुगंधा एकदम बेशर्म बनते हुए बोली लेकिन इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी उसकी हालत उसे एकदम मजबूर कर दिए थे अपने बेटे के सामने इस तरह की बेशर्मी दिखाते हुए बोलने के लिए,, वह साफ साफ शब्दों में अपने बेटे को उसे चोदने के लिए आमंत्रित कर रही थी लेकिन रोहन भी मर्यादा की डोर में बता हुआ था इसलिए अपनी मां के इशारे को समझते हुए भी व खुली छूट नहीं ले पा रहा था वह अपने मन में सोच रहा था कि काश उसकी मां उसे ही बोल देती उसकी खुजली मिटाने के लिए तो मजा आ जाता लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था फिर भी वह अपनी मां की इस तरह की अश्लील बातें सुनने के बाद बोला,,,।)

मम्मी बुर की खुजली सिर्फ लंड से ही मिटती है कोई और तरीका नहीं है क्या,,,,। ( वह अपनी मां के मदन रस में सने हुए उंगलियों को देखता हुआ बोला,,,।)

तो और क्या बुर की गहराई तक सिर्फ लंड ही पहुंच पाता है उसकी मोटाई बुर की अंदरूनी दीवारों से रगड़ता हुआ अंदर बाहर होता है तब जाकर खुजली मिटती है,,,,( सुगंधा गरम आए भरते हुए बोली,,,, रोहन अपनी मां की व्यथा को अच्छी तरह से समझ रहा था वह अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसकी मां एक जबरदस्त चुदाई के लिए तड़प रही है जो कि वह अपनी मोटे तगड़े लंड से बराबर का उसे चोद सकता है लेकिन वह अपने मुंह से कह नहीं पा रहा था,,,,। इसलिए रोहन अपनी मां से बातचीत के दरम्यान उसका ध्यान अपनी तरफ करते हुए बार-बार अपने हाथ से अपने मोटे तगड़े तगड़े खड़े लंड को पजामी को फिर से दबा दे रहा था ताकि इससे कोई बात बन जाए और सुगंधा भी अपने बेटे के सितारे को अच्छी तरह से समझ रही थी लेकिन वह चाह रही थी कि उसका बेटा हिम्मत दिखाते हुए उसे खुद चोदने के लिए बोले लेकिन ऐसा मुमकिन नजर नहीं आ रहा था,,,, तभी सुगंधाको बहुत जोर की पेशाब लगती हुई महसूस हुई और वह बिस्तर पर से नीचे उतरते हुए रोहन से बोली,,,

मुझे बहुत जोर की पेशाब लगी है मुझे बाहर जाना होगा,,,, रोहन तो अपनी मां के मुंह से पेशाब वाली बात सुनकर ऐसा काम उत्तेजना से मस्त हो गया कि उसे लगने लगा कि उसका पानी छूट जाएगा लेकिन बड़ी मुश्किल से वह अपने आप को संभाला और वह बोला,,,,

 
११,,, लेकिन मम्मी तुम इस तरह से जाओगी,, पूरी नंगी होकर,,,

तेरे सामने तो मैं पूरी तरह से नंगी हो चुकी हूं तो मेरे हर एक अंग को देख चुका है तो इसमें क्या हुआ,, यहां तेरे और मेरे सिवा कोई और नहीं है और वैसे भी ऐसी बरसाती रात में कौन देखेगा,,,,
( इतना कहकर वापिस सर से उतर कर चलने लगी रोहन अभी भी बिस्तर पर बैठा हुआ था लालटेन की रोशनी में रोहन साफ-साफ देख पा रहा था कि, चलने की वजह से उसकी मां की बड़ी-बड़ी तरबूज की जैसी गांड इधर-उधर हील रही थी जिससे एक जबरदस्त मादकता का एहसास हो रहा था,,,, रोहन अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखते हुए बोला,,, )

बाहर तेज बारिश हो रही है भीग जाओगी और,,, चारों तरफ अंधेरा भी है अगर ऐसे में लड़खड़ा कर गिर गई तो रुको मैं भी आता हूं,,,, (इतना कहने के साथ ही रोहन टेबल पर पड़ी लालटेन को उठा लिया और कमरे के कोने में रखी छतरी लेकर तुरंत अपनी मां के पास आ गया सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी वह आगे आगे चलने लगी,,, जानती थी कि उसका बेटा उसे पेशाब करते हुए देखने के लिए एक बहाने से आ रहा था और इसीलिए वह जानबूझकर उसके सामने पेशाब वाली बात की थी,,, और यही सच भी था जैसे ही सुगंधा ने पेशाब वाली बात की थी,,, वैसे ही रोहन की आंखों के सामने उस दिन का नजारा नाचने लगा जब वह शादी में गया था और उसकी आंखों के सामने ही उसकी मां बड़ी ही मादक अदा से अपनी साड़ी कमर तक उठा कर उसे अपनी भरपूर गांड का नजारा दिखाते हुए पेशाब कर रही थी,,,, वही सोच कर रोहन से रहा नहीं गया और वह एक बहाने से अपनी मां को पेशाब करते हुए देखने के लिए उसके साथ चला आया,,, सुगंधा आगे आगे चल रही थी और रोहन हाथ में लालटेन लिए पीछे पीछे चल रहा था,,, जिससे लालटेन की पीली रोशनी मे उसे अपनी मां की मदमस्त भरी हीलती डुलती गांड बराबर नजर आ रही थी,,,, । सुगंधा भी जानबूझकर कुछ ज्यादा ही अपनी गांड को मटका ते हुए चल रही थी एक अजीब सा अद्भुत सुख उसे मिल रहा था क्योंकि आज ओ पहली बार अपने घर में संपूर्ण नग्ना अवस्था में घूम रही थी और वह भी अपने बेटे की आंखों के सामने ही,,,,,

देखते-देखते वह घर के दरवाजे तक आ गई और वह घर का मुख्य द्वार खोल कर बाहर आ गई जहां पर आगे छत बनी हुई थी रोहन भी बाहर आ गया,,,,,, सुगंधाको बहुत जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह एक पल भी सब्र नहीं कर सकती थी और वह थोड़ा आगे जाकर एक बार पीछे मुड़कर अपने बेटे की तरफ देख ली और उसी तरह से नीचे बैठकर पेशाब करने लगी वह जानबूझकर अपने बेटे से पांच सात फीट दूर जाकर बैठ कर पेशाब कर रही थी ताकि रोहन उसे पेशाब करता हुआ बराबर देख सके,,,,
रोहन तो मंत्रमुग्ध सा अपनी मां की तरफ देखते जा रहा था वैसे तो उसे कुछ साफ ज्यादा नजर नहीं आ रहा था लेकिन लालटेन की रोशनी में उसे उसके पीछे वाला भाग भरपूर नजर आ रहा था,,,, सुगंधा जहां पर बैठकर पेशाब कर रही थी वहां बारिश की बौछार से उसका तन भीगने लगा था लेकिन अपनी मां को नंगी और वह भी पेशाब करता हुआ देखकर रोहन एकदम मंत्रम उनके साथ सब कुछ भूल कर बस उसे ही देखता जा रहा था उसे यह भी ख्याल नहीं आया कि वह छतरी हाथों में लिया है और उसे खोल कर अपनी मां के करीब खड़ा हो जाए जबकि यह बात सुगंधा भी अच्छी तरह से जानती थी लेकिन वह जानबूझकर अपने बेटे को इस तरह का मौका दे रहे थे ताकि वह उसे पेशाब करता हुआ देख सके,,,।
सुगंधा अपने बेटे की हालत को अच्छी तरह से परख चुकी थी वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी और वह थोड़ी देर में ही पेशाब करके एकदम फारीग हो चुकी थी लेकिन जानबूझकर उसी अवस्था में बैठी हुई थी और अपनी बेटे की तरफ देख रही थी,,,
लालटेन की रोशनी में सुगंधा को भी अपने बेटे के पजामे में बना लंबा अच्छा खासा तंबू साफ नजर आ रहा था उसका मन ललचा रहा था उसके मुंह में पानी आ रहा था अपने बेटे के लंड को एकदम नंगा देखने के लिए इसलिए वह अपने बेटे की तंद्रा भंग करते हुए बोली,,,,।

रोहन वहां खड़े होकर क्या देख रहा है इधर आकर छतरी पकड़ मैं देख नहीं रहा है पूरी तरह से भीग गई हूं तू पता नहीं वहां खड़े होकर क्या देख रहा है,,,,

( इतना सुनते ही जैसे रोहन को जगाने के लिए कोई उसके ऊपर एक बाल्टी पानी फेंक दिया हो इस तरह से हड़बड़ा कर तुरंत लालटेन को नीचे रख कर अपनी मां के करीब आकर छतरी खोल कर खड़ा हो गया,,, सुगंधा तो पेशाब कर चुकी थी लेकिन जानबूझकर उसी तरह से कुछ देर तक वहीं बैठी रही क्योंकि उसके करीब रोहन खड़ा था और उसकी नजर ठीक उसके पिज्जा में मैंने तंबू पर गई उस तंबू को देखते ही उसकी बुर कुलबुलाने लगी उसकी इच्छा हो रही है कि ईसी समय अपने हाथ उसके पजामा नीचे करके उसके मोटे तगड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ कर इसका जायजा ले,,,, लेकिन ऐसा करने की उसकी भी हिम्मत नहीं हो रही थी वह अपने बेटे के लंड को संपूर्ण नग्नावस्था में देखना चाहती थी इसलिए वह तुरंत खड़ी हुई और अपने बेटे के हाथ से छतरी लेकर बोली,,।

रोहन तुझे भी पेशाब लगी होगी तू भी कर ले,,,

नहीं मम्मी मुझे नहीं लगी है,, (रोहन शरमाते हुए बोला)

देख मुझसे शर्माने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है मैं अच्छी तरह से जानती कि तुझे पेशाब लगी हुई है अगर तुझे पेशाब नहीं लगी होती हुई होती तो तेरा यह लंड खड़ा ना होता,,,,,

नहीं मम्मी ऐसा नहीं होता है,,, (वह अपना बचाव करते हुए बोला)

देख रोहन मुझसे झूठ बोलने की जरूरत नहीं है मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि जब मर्दों को पेशाब लगती है तो उनका लंड खड़ा हो जाता है,,,,, चल अब बिल्कुल भी बहाना मत करो पेशाब कर ले काफी रात हो गई है और मैं यही खड़े खड़े भीग रही हूं,,,

( रोहन अपनी मां की बात सुनकर मन में ही बोला की जब यह खुद नहीं शर्मा रही है तो मैं क्यों शर्म करूं और यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके मोटा तगड़ा लंड देखना चाहती थी क्योंकि बात ही बात में जिस तरह की बयानबाजी उसने की थी कि काश उसे मोटा तगड़ा लंड मिल जाता तो मजा आ जाता इसीलिए वह चाहती थी उसके मोटे तगड़े लंड को देखने के लिए और इसीलिए वह भी मन में सोचा कि जब उसे कोई हर्ज नहीं है तो मुझे दिखने में कैसी शर्म उसने वह भी बिना हिचकिचाहट उत्तेजना अवस्था में,,, एक झटके में वह अपने पजामे को नीचे खिसका दिया और एकाएक पजामा नीचे आते हैं उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में ऊपर नीचे झूलने लगा जिसे देख कर सुगंधा का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बेटे का लैंड नजदीक से इतना भयानक नजर आएगा अपने बेटे के झुलतो लंड को देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गई उसकी बुर कुल बुलाने लगी और बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच से से मदन रस टपक कर नीचे गिर गया जैसे मानो की अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड के सामने वह अपने आप को पराजित समझकर घुटने ठीक रही हो सुगंधा का बहुत मन कर रहा था अपने बेटे के लेने को हाथ से पकड़ने के लिए लेकिन वह इतनी हिम्मत नहीं दिखा पाई हालांकि वह जिस तरह की हरकत करती आ रही थी वह पूरी तरह से बेशर्मी से भरी हुई थी लेकिन फिर भी वह अपने बेटे के लंड को पकड़ने में हीकीचा रही थी,,,,
रोहन भी जानबूझकर अपनी मां को दिखाने के उद्देश्य से ही अपने लंड को एक हाथ में पकड़ कर ऊपर नीचे ही लाते हुए पेशाब कर रहा था यह देखकर सुगंधा के बदन में से उत्तेजना के मारे झुर्झुरी छूट जा रही थी,,,, थोड़ी देर में वह भी पेशाब करके एकदम फारीग हो गया,,, और फिर से पजामा पहन कर अपनी मां के हाथ से छतरी ले लिया और अपनी मां को आगे आगे चलने के लिए बोला,,, सुगंधा की सांसो की गति बड़ी तेज चल रही थी उसके तन बदन में मदहोशी भर चुकी थी वह पूरी तरह से अपने बेटे की मौत इतने बड़े लंड के आकर्षण में बंध चुकी थी वह घर का मुख्य द्वार बंद करके अपने कमरे की तरफ जाने लगी,,,, रोहन पीछे पीछे जा रहा था दोनों कुछ भी बोल नहीं रहे थे दोनों के मन में उत्सुकता बढ़ी हुई थी,,, सुगंधा दोनों के बीच की चुप्पी तोड़ते हुए बिना रोहन की तरफ देखें आगे बढ़ते हुए बोली,,।

रोहन तू अब बहुत बड़ा हो गया है,,,

ऐसा क्यों कह रही हो मम्मी,,,,?

मैं जो कह रही हूं उसकी एक वजह है,,,,।

कैसी वजह मम्मी,,,,,? ( रोहन अपनी मां की मटकती हुई गांड की तरफ देखते हुए बोला)

तेरा लंड,,,,,, (सुगंधा एकदम बेशर्म बनते हुए बोली हालांकि वह रोहन की तरफ नहीं देख रही थी और अपने कमरे की तरफ बढ़ती चली जा रही थी,,,, रोहन तो अपनी मां के मुंह से लंड शब्द सुनते ही एकदम सन्न रह गया,, उत्तेजना के मारे उसका पारा बढ़ने लगा,,, रोहन अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां क्या कहना चाह रही है लेकिन फिर भी वह अनजान बनते हुए बोला,,

मैं कुछ समझा नहीं मम्मी तुम क्या कहना चाह रही हो,,

मैं यह कहना चाह रही हूं कि तेरा लंड जिस तरह से मोटा तगड़ा और लंबा है वह तेरी उम्र के लड़कों का इतनी जल्दी इतना जबरदस्त नहीं होता लेकिन तू शायद तेरी उम्र के लड़कों में सबसे अलग है तभी तेरा लंड ईतना मोटा तगड़ा और लंबा है ।
( इतना कहते हुए वह कमरे में प्रवेश कर गई और पीछे पीछे रोहन भी जो कि अपनी मां की बात सुनकर एकदम मस्त हुए जा रहा था जैसे ही रोहन कमरे में प्रवेश किया वैसे ही उसकी मां उसे दरवाजे की कड़ी लगाने के लिए बोलकर खिड़की के करीब चली गई रोहन अपनी मां की बात सुनते ही तुरंत,,, एक कोने में छतरी रखकर,,, टेबल पर लालटेन रखकर दरवाजे की कड़ी लगा दिया हालांकि घर में दोनों के सिवा दूसरा कोई भी नहीं था लेकिन वह दोनों पूरी तरह से निश्चिंत होना चाहते थे,,,
सुगंधा संपूर्ण नग्न अवस्था में पूरे घर में इधर से उधर घूम रही थी अपनी बड़ी-बड़ी मदमस्त गांड मटका ते हुए और वह भी अपने बेटे के सामने पूरी नंगी होकर घूमने में जो मजा उसे मिल रहा था वह आज तक उसे नहीं मिल पाया था एक अद्भुत अहसास से घीरी जा रही थी,,,। रोहन अपनी मां से लगभग 2 फीट की दूरी पर खड़ा होकर उसे देख रहा था जो कि लालटेन की पीली रोशनी में एकदम कामदेवी लग रही थी इस उम्र में भी सुगंधा का बदन एकदम गठीला और कसा हुआ था,,,,
सुगंधा के तन बदन में मादकता और कामुकता घर चुकी थी वह पूरी तरह से वासना में लिप्त हो चुकी थी अपने बेटे के नंगे मोटे तगड़े लंड का दीदार करते ही उसकी बुर में खुजली होने लगी थी वह अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,, सुगंधा के माथे से पसीने की बूंदें टपक रही थी जो कि इस तरह के ठंडे मौसम में होना नहीं चाहिए था लेकिन सुगंधा की मदमस्त जवानी उसके बदन में शीतलता की जगह उस्मा भर रही थी,,,, इसलिए वह ठंडक पाने के लिए कमरे की खिड़की को खोल दी जिससे एक तेज हवा का झोंका कमरे में प्रवेश कर गया और जिससे सुगंधा के रेशमी बाल हवा में उड़ने लगे और,, रोहन अपनी मां का रूप और तेज हवा के झोंके के साथ उसके उड़ते हुए रेशमी बालों को देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, वह खिड़की से बाहर तेज बारिश को देखते हुए बोली,,,।

रोहन तुझे मालूम है कि तेरा लंड ईस समय क्यों खड़ा है,,,? ( यह सवाल रोहन से पूछते हुए सुगंधा की सांसे बड़ी तेज गति से चल रही थी,,, रोहन भी अपनी मां के इस तरह के सवाल सुनकर एक दम से सकपका गया और बोला।

नहीं मम्मी मुझे नहीं मालूम अभी-अभी तुम ही बताई तो मुझे पता चला कि जब पेशाब लगती है तब यह लंड खड़ा हो जाता है,,,।

हां वह तो मैं तुझे बता ही लेकिन उसका एक कारण और भी है मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तेरा लंड क्यों खड़ा है,,, ।

क्यों मम्मी मुझे तो नहीं मालूम,,,, (रोहन अनजान बनता हुआ बोला,,)

मुझे नंगी देखकर,,,, हां यह बिल्कुल सच है तू मुझे नंगी देखकर अंदर ही अंदर मस्त हुआ जा रहा है,,,,, तभी तेरा लंड खड़ा हुआ है। ( सुगंधा उसी तरह से खिड़की से बाहर झांकते हुए वह बोली,,,। रोहन तो अपनी मां की यह बात सुनकर एकदम से सकपका गया और अपनी बचाव करने हेतु वह बोला,,,।)

नहीं मम्मी यह गलत है ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है यह तो अपने आप ही पेशाब लगने की वजह से खड़ा हो गया है,,,,

चल अब तू मुझे मत सिखा मैं एक औरत हुं, मुझे अच्छी तरह से मालूम है कि तेरा लंड मुझे नंगी देखकर ही खड़ा हुआ है (सुगंधा अपनी नजरों को पीछे घुमा कर अपने बेटे की तरफ देखी और उसके पजामे में तने हुए तंबू को,,, देखकर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।) तूने तो पेशाब कर चुका ना तो फिर यह तेरा लैंड क्यों खड़ा है अब बता इसका जवाब है तेरे पास मैं जो कह रही हूं बिल्कुल सच कह रही हूं,,, (फिर से खिड़की से बाहर झांकते हुए,,) तू मेरी बड़ी-बड़ी गोल-गोल चुचियों को देखकर मस्त हुआ जा रहा है मेरे चिकने गोरे बदन को देख कर मदहोश हुआ जा रहा है मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तू मेरी गोल-गोल बड़ी-बड़ी,,( खिड़की पर अपनी कोहनी टिका कर मादक अदा के साथ अपनी मदमस्त गांड को बाहर की तरह उभारते हुए,,) तरबूज जैसी गांड को देखकर अंदर ही अंदर मुझे भोगने का सपना देख रहा है,,,,,।

( अपनी मां की बातें सुनकर रोहन की तो हालत खराब होते जा रही थी क्योंकि जो सदा से उसने अपनी गांड को बाहर की तरफ निकालकर यह बात बोली थी उससे रोहन इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया था कि उसका मन कर रहा था कि अभी पीछे से अपनी मां की कमर थाम ले और अपना पूरा लंड उसकी बुर में डाल कर उसे चोदना शुरू कर ले लेकिन बहुत ही ज्यादा मन को कठोर करके अपने आप को संभाले रह गया। रोहन भी यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां जो कुछ भी कह रही थी वह एकदम सच था और इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी उसकी जगह कोई भी होता तो सुगंधा के खूबसूरत नवयोवन से भरा बदन देखकर उसका लंड खड़ा हो जाता,,, अपनी मां को जवाब देने के लिए रोहन के पास शब्द नहीं थे वह कुछ बोल नहीं पाया और धीरे-धीरे अपनी मां की करीब जाकर खड़ा हो गया सुगंधा अभी भी खिड़की से बाहर तेज बारिश को देख रही थी लेकिन उसे अपने बेटे की कदमों की आहट अपनी बिल्कुल करीब आती हुई सुनाई दे रही थी जिससे उसका बदन हिचकोले खा रहा था,, उत्तेजना से उसका सारा बदन भरता चला जा रहा था वह एकदम चुद वासी हो चुकी थी और ऐसे में उसके बेहद करीब 1 जवान मर्द खड़ा था जिसके पास मोटा तगड़ा और लंबा मजबूत लंड था जिससे वह अपनी प्यास बुझा सकती थी,,,

रोहन अपनी मां के ठीक पीछे खड़ा था और उसके के जाने में बना तंबू ठीक सुगंधा की मदमस्त गांड के सामने था अब अगर जरा सा भी रोहन अपनी कमर आगे की तरफ कर देता तो उसके तंबू सुगंधा की मदमस्त गांड से स्पर्श कर जाती लेकिन ऐसा करने में उसे डर लग रहा था लेकिन इच्छा बहुत कर रही थी कुछ देर तक सुगंधा भी जानबूझकर उसी तरह से खिड़की से कोहनी टिकाए अपनी गांड को बाहर की तरफ निकालकर झुकी रही,,, जिस तरह से रोहन उसके बेहद करीब आया था उसे देखते हुए सुगंधा को ऐसा लग रहा था कि उसका बेटा कुछ हरकत जरूर करेगा इसीलिए वह खिड़की से कहानी दिखाएं अपनी गांड को आमंत्रण की तौर पर अपने बेटे के आगे झुकाए रह गई लेकिन इससे ज्यादा आगे बढ़ने की हिम्मत रोहन नहीं कर पाया तो वह खुद ही अपनी मादक अदा,,दिखाते हुए,,,
 
११,,, लेकिन मम्मी तुम इस तरह से जाओगी,, पूरी नंगी होकर,,,

तेरे सामने तो मैं पूरी तरह से नंगी हो चुकी हूं तो मेरे हर एक अंग को देख चुका है तो इसमें क्या हुआ,, यहां तेरे और मेरे सिवा कोई और नहीं है और वैसे भी ऐसी बरसाती रात में कौन देखेगा,,,,
( इतना कहकर वापिस सर से उतर कर चलने लगी रोहन अभी भी बिस्तर पर बैठा हुआ था लालटेन की रोशनी में रोहन साफ-साफ देख पा रहा था कि, चलने की वजह से उसकी मां की बड़ी-बड़ी तरबूज की जैसी गांड इधर-उधर हील रही थी जिससे एक जबरदस्त मादकता का एहसास हो रहा था,,,, रोहन अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड देखते हुए बोला,,, )

बाहर तेज बारिश हो रही है भीग जाओगी और,,, चारों तरफ अंधेरा भी है अगर ऐसे में लड़खड़ा कर गिर गई तो रुको मैं भी आता हूं,,,, (इतना कहने के साथ ही रोहन टेबल पर पड़ी लालटेन को उठा लिया और कमरे के कोने में रखी छतरी लेकर तुरंत अपनी मां के पास आ गया सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी वह आगे आगे चलने लगी,,, जानती थी कि उसका बेटा उसे पेशाब करते हुए देखने के लिए एक बहाने से आ रहा था और इसीलिए वह जानबूझकर उसके सामने पेशाब वाली बात की थी,,, और यही सच भी था जैसे ही सुगंधा ने पेशाब वाली बात की थी,,, वैसे ही रोहन की आंखों के सामने उस दिन का नजारा नाचने लगा जब वह शादी में गया था और उसकी आंखों के सामने ही उसकी मां बड़ी ही मादक अदा से अपनी साड़ी कमर तक उठा कर उसे अपनी भरपूर गांड का नजारा दिखाते हुए पेशाब कर रही थी,,,, वही सोच कर रोहन से रहा नहीं गया और वह एक बहाने से अपनी मां को पेशाब करते हुए देखने के लिए उसके साथ चला आया,,, सुगंधा आगे आगे चल रही थी और रोहन हाथ में लालटेन लिए पीछे पीछे चल रहा था,,, जिससे लालटेन की पीली रोशनी मे उसे अपनी मां की मदमस्त भरी हीलती डुलती गांड बराबर नजर आ रही थी,,,, । सुगंधा भी जानबूझकर कुछ ज्यादा ही अपनी गांड को मटका ते हुए चल रही थी एक अजीब सा अद्भुत सुख उसे मिल रहा था क्योंकि आज ओ पहली बार अपने घर में संपूर्ण नग्ना अवस्था में घूम रही थी और वह भी अपने बेटे की आंखों के सामने ही,,,,,

देखते-देखते वह घर के दरवाजे तक आ गई और वह घर का मुख्य द्वार खोल कर बाहर आ गई जहां पर आगे छत बनी हुई थी रोहन भी बाहर आ गया,,,,,, सुगंधाको बहुत जोरों से पेशाब लगी हुई थी वह एक पल भी सब्र नहीं कर सकती थी और वह थोड़ा आगे जाकर एक बार पीछे मुड़कर अपने बेटे की तरफ देख ली और उसी तरह से नीचे बैठकर पेशाब करने लगी वह जानबूझकर अपने बेटे से पांच सात फीट दूर जाकर बैठ कर पेशाब कर रही थी ताकि रोहन उसे पेशाब करता हुआ बराबर देख सके,,,,
रोहन तो मंत्रमुग्ध सा अपनी मां की तरफ देखते जा रहा था वैसे तो उसे कुछ साफ ज्यादा नजर नहीं आ रहा था लेकिन लालटेन की रोशनी में उसे उसके पीछे वाला भाग भरपूर नजर आ रहा था,,,, सुगंधा जहां पर बैठकर पेशाब कर रही थी वहां बारिश की बौछार से उसका तन भीगने लगा था लेकिन अपनी मां को नंगी और वह भी पेशाब करता हुआ देखकर रोहन एकदम मंत्रम उनके साथ सब कुछ भूल कर बस उसे ही देखता जा रहा था उसे यह भी ख्याल नहीं आया कि वह छतरी हाथों में लिया है और उसे खोल कर अपनी मां के करीब खड़ा हो जाए जबकि यह बात सुगंधा भी अच्छी तरह से जानती थी लेकिन वह जानबूझकर अपने बेटे को इस तरह का मौका दे रहे थे ताकि वह उसे पेशाब करता हुआ देख सके,,,।
सुगंधा अपने बेटे की हालत को अच्छी तरह से परख चुकी थी वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी और वह थोड़ी देर में ही पेशाब करके एकदम फारीग हो चुकी थी लेकिन जानबूझकर उसी अवस्था में बैठी हुई थी और अपनी बेटे की तरफ देख रही थी,,,
लालटेन की रोशनी में सुगंधा को भी अपने बेटे के पजामे में बना लंबा अच्छा खासा तंबू साफ नजर आ रहा था उसका मन ललचा रहा था उसके मुंह में पानी आ रहा था अपने बेटे के लंड को एकदम नंगा देखने के लिए इसलिए वह अपने बेटे की तंद्रा भंग करते हुए बोली,,,,।

रोहन वहां खड़े होकर क्या देख रहा है इधर आकर छतरी पकड़ मैं देख नहीं रहा है पूरी तरह से भीग गई हूं तू पता नहीं वहां खड़े होकर क्या देख रहा है,,,,

( इतना सुनते ही जैसे रोहन को जगाने के लिए कोई उसके ऊपर एक बाल्टी पानी फेंक दिया हो इस तरह से हड़बड़ा कर तुरंत लालटेन को नीचे रख कर अपनी मां के करीब आकर छतरी खोल कर खड़ा हो गया,,, सुगंधा तो पेशाब कर चुकी थी लेकिन जानबूझकर उसी तरह से कुछ देर तक वहीं बैठी रही क्योंकि उसके करीब रोहन खड़ा था और उसकी नजर ठीक उसके पिज्जा में मैंने तंबू पर गई उस तंबू को देखते ही उसकी बुर कुलबुलाने लगी उसकी इच्छा हो रही है कि ईसी समय अपने हाथ उसके पजामा नीचे करके उसके मोटे तगड़े लंड को अपने हाथ में पकड़ कर इसका जायजा ले,,,, लेकिन ऐसा करने की उसकी भी हिम्मत नहीं हो रही थी वह अपने बेटे के लंड को संपूर्ण नग्नावस्था में देखना चाहती थी इसलिए वह तुरंत खड़ी हुई और अपने बेटे के हाथ से छतरी लेकर बोली,,।

रोहन तुझे भी पेशाब लगी होगी तू भी कर ले,,,

नहीं मम्मी मुझे नहीं लगी है,, (रोहन शरमाते हुए बोला)

देख मुझसे शर्माने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है मैं अच्छी तरह से जानती कि तुझे पेशाब लगी हुई है अगर तुझे पेशाब नहीं लगी होती हुई होती तो तेरा यह लंड खड़ा ना होता,,,,,

नहीं मम्मी ऐसा नहीं होता है,,, (वह अपना बचाव करते हुए बोला)

देख रोहन मुझसे झूठ बोलने की जरूरत नहीं है मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि जब मर्दों को पेशाब लगती है तो उनका लंड खड़ा हो जाता है,,,,, चल अब बिल्कुल भी बहाना मत करो पेशाब कर ले काफी रात हो गई है और मैं यही खड़े खड़े भीग रही हूं,,,

( रोहन अपनी मां की बात सुनकर मन में ही बोला की जब यह खुद नहीं शर्मा रही है तो मैं क्यों शर्म करूं और यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां उसके मोटा तगड़ा लंड देखना चाहती थी क्योंकि बात ही बात में जिस तरह की बयानबाजी उसने की थी कि काश उसे मोटा तगड़ा लंड मिल जाता तो मजा आ जाता इसीलिए वह चाहती थी उसके मोटे तगड़े लंड को देखने के लिए और इसीलिए वह भी मन में सोचा कि जब उसे कोई हर्ज नहीं है तो मुझे दिखने में कैसी शर्म उसने वह भी बिना हिचकिचाहट उत्तेजना अवस्था में,,, एक झटके में वह अपने पजामे को नीचे खिसका दिया और एकाएक पजामा नीचे आते हैं उसका मोटा तगड़ा लंड हवा में ऊपर नीचे झूलने लगा जिसे देख कर सुगंधा का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसके बेटे का लैंड नजदीक से इतना भयानक नजर आएगा अपने बेटे के झुलतो लंड को देखकर वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गई उसकी बुर कुल बुलाने लगी और बुर की गुलाबी पत्तियों के बीच से से मदन रस टपक कर नीचे गिर गया जैसे मानो की अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड के सामने वह अपने आप को पराजित समझकर घुटने ठीक रही हो सुगंधा का बहुत मन कर रहा था अपने बेटे के लेने को हाथ से पकड़ने के लिए लेकिन वह इतनी हिम्मत नहीं दिखा पाई हालांकि वह जिस तरह की हरकत करती आ रही थी वह पूरी तरह से बेशर्मी से भरी हुई थी लेकिन फिर भी वह अपने बेटे के लंड को पकड़ने में हीकीचा रही थी,,,,
रोहन भी जानबूझकर अपनी मां को दिखाने के उद्देश्य से ही अपने लंड को एक हाथ में पकड़ कर ऊपर नीचे ही लाते हुए पेशाब कर रहा था यह देखकर सुगंधा के बदन में से उत्तेजना के मारे झुर्झुरी छूट जा रही थी,,,, थोड़ी देर में वह भी पेशाब करके एकदम फारीग हो गया,,, और फिर से पजामा पहन कर अपनी मां के हाथ से छतरी ले लिया और अपनी मां को आगे आगे चलने के लिए बोला,,, सुगंधा की सांसो की गति बड़ी तेज चल रही थी उसके तन बदन में मदहोशी भर चुकी थी वह पूरी तरह से अपने बेटे की मौत इतने बड़े लंड के आकर्षण में बंध चुकी थी वह घर का मुख्य द्वार बंद करके अपने कमरे की तरफ जाने लगी,,,, रोहन पीछे पीछे जा रहा था दोनों कुछ भी बोल नहीं रहे थे दोनों के मन में उत्सुकता बढ़ी हुई थी,,, सुगंधा दोनों के बीच की चुप्पी तोड़ते हुए बिना रोहन की तरफ देखें आगे बढ़ते हुए बोली,,।

रोहन तू अब बहुत बड़ा हो गया है,,,

ऐसा क्यों कह रही हो मम्मी,,,,?

मैं जो कह रही हूं उसकी एक वजह है,,,,।

कैसी वजह मम्मी,,,,,? ( रोहन अपनी मां की मटकती हुई गांड की तरफ देखते हुए बोला)

तेरा लंड,,,,,, (सुगंधा एकदम बेशर्म बनते हुए बोली हालांकि वह रोहन की तरफ नहीं देख रही थी और अपने कमरे की तरफ बढ़ती चली जा रही थी,,,, रोहन तो अपनी मां के मुंह से लंड शब्द सुनते ही एकदम सन्न रह गया,, उत्तेजना के मारे उसका पारा बढ़ने लगा,,, रोहन अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां क्या कहना चाह रही है लेकिन फिर भी वह अनजान बनते हुए बोला,,

मैं कुछ समझा नहीं मम्मी तुम क्या कहना चाह रही हो,,

मैं यह कहना चाह रही हूं कि तेरा लंड जिस तरह से मोटा तगड़ा और लंबा है वह तेरी उम्र के लड़कों का इतनी जल्दी इतना जबरदस्त नहीं होता लेकिन तू शायद तेरी उम्र के लड़कों में सबसे अलग है तभी तेरा लंड ईतना मोटा तगड़ा और लंबा है ।
( इतना कहते हुए वह कमरे में प्रवेश कर गई और पीछे पीछे रोहन भी जो कि अपनी मां की बात सुनकर एकदम मस्त हुए जा रहा था जैसे ही रोहन कमरे में प्रवेश किया वैसे ही उसकी मां उसे दरवाजे की कड़ी लगाने के लिए बोलकर खिड़की के करीब चली गई रोहन अपनी मां की बात सुनते ही तुरंत,,, एक कोने में छतरी रखकर,,, टेबल पर लालटेन रखकर दरवाजे की कड़ी लगा दिया हालांकि घर में दोनों के सिवा दूसरा कोई भी नहीं था लेकिन वह दोनों पूरी तरह से निश्चिंत होना चाहते थे,,,
सुगंधा संपूर्ण नग्न अवस्था में पूरे घर में इधर से उधर घूम रही थी अपनी बड़ी-बड़ी मदमस्त गांड मटका ते हुए और वह भी अपने बेटे के सामने पूरी नंगी होकर घूमने में जो मजा उसे मिल रहा था वह आज तक उसे नहीं मिल पाया था एक अद्भुत अहसास से घीरी जा रही थी,,,। रोहन अपनी मां से लगभग 2 फीट की दूरी पर खड़ा होकर उसे देख रहा था जो कि लालटेन की पीली रोशनी में एकदम कामदेवी लग रही थी इस उम्र में भी सुगंधा का बदन एकदम गठीला और कसा हुआ था,,,,
सुगंधा के तन बदन में मादकता और कामुकता घर चुकी थी वह पूरी तरह से वासना में लिप्त हो चुकी थी अपने बेटे के नंगे मोटे तगड़े लंड का दीदार करते ही उसकी बुर में खुजली होने लगी थी वह अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,, सुगंधा के माथे से पसीने की बूंदें टपक रही थी जो कि इस तरह के ठंडे मौसम में होना नहीं चाहिए था लेकिन सुगंधा की मदमस्त जवानी उसके बदन में शीतलता की जगह उस्मा भर रही थी,,,, इसलिए वह ठंडक पाने के लिए कमरे की खिड़की को खोल दी जिससे एक तेज हवा का झोंका कमरे में प्रवेश कर गया और जिससे सुगंधा के रेशमी बाल हवा में उड़ने लगे और,, रोहन अपनी मां का रूप और तेज हवा के झोंके के साथ उसके उड़ते हुए रेशमी बालों को देखकर उत्तेजित हुआ जा रहा था,,, वह खिड़की से बाहर तेज बारिश को देखते हुए बोली,,,।

रोहन तुझे मालूम है कि तेरा लंड ईस समय क्यों खड़ा है,,,? ( यह सवाल रोहन से पूछते हुए सुगंधा की सांसे बड़ी तेज गति से चल रही थी,,, रोहन भी अपनी मां के इस तरह के सवाल सुनकर एक दम से सकपका गया और बोला।

नहीं मम्मी मुझे नहीं मालूम अभी-अभी तुम ही बताई तो मुझे पता चला कि जब पेशाब लगती है तब यह लंड खड़ा हो जाता है,,,।

हां वह तो मैं तुझे बता ही लेकिन उसका एक कारण और भी है मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तेरा लंड क्यों खड़ा है,,, ।

क्यों मम्मी मुझे तो नहीं मालूम,,,, (रोहन अनजान बनता हुआ बोला,,)

मुझे नंगी देखकर,,,, हां यह बिल्कुल सच है तू मुझे नंगी देखकर अंदर ही अंदर मस्त हुआ जा रहा है,,,,, तभी तेरा लंड खड़ा हुआ है। ( सुगंधा उसी तरह से खिड़की से बाहर झांकते हुए वह बोली,,,। रोहन तो अपनी मां की यह बात सुनकर एकदम से सकपका गया और अपनी बचाव करने हेतु वह बोला,,,।)

नहीं मम्मी यह गलत है ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है यह तो अपने आप ही पेशाब लगने की वजह से खड़ा हो गया है,,,,

चल अब तू मुझे मत सिखा मैं एक औरत हुं, मुझे अच्छी तरह से मालूम है कि तेरा लंड मुझे नंगी देखकर ही खड़ा हुआ है (सुगंधा अपनी नजरों को पीछे घुमा कर अपने बेटे की तरफ देखी और उसके पजामे में तने हुए तंबू को,,, देखकर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।) तूने तो पेशाब कर चुका ना तो फिर यह तेरा लैंड क्यों खड़ा है अब बता इसका जवाब है तेरे पास मैं जो कह रही हूं बिल्कुल सच कह रही हूं,,, (फिर से खिड़की से बाहर झांकते हुए,,) तू मेरी बड़ी-बड़ी गोल-गोल चुचियों को देखकर मस्त हुआ जा रहा है मेरे चिकने गोरे बदन को देख कर मदहोश हुआ जा रहा है मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तू मेरी गोल-गोल बड़ी-बड़ी,,( खिड़की पर अपनी कोहनी टिका कर मादक अदा के साथ अपनी मदमस्त गांड को बाहर की तरह उभारते हुए,,) तरबूज जैसी गांड को देखकर अंदर ही अंदर मुझे भोगने का सपना देख रहा है,,,,,।

( अपनी मां की बातें सुनकर रोहन की तो हालत खराब होते जा रही थी क्योंकि जो सदा से उसने अपनी गांड को बाहर की तरफ निकालकर यह बात बोली थी उससे रोहन इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया था कि उसका मन कर रहा था कि अभी पीछे से अपनी मां की कमर थाम ले और अपना पूरा लंड उसकी बुर में डाल कर उसे चोदना शुरू कर ले लेकिन बहुत ही ज्यादा मन को कठोर करके अपने आप को संभाले रह गया। रोहन भी यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां जो कुछ भी कह रही थी वह एकदम सच था और इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी उसकी जगह कोई भी होता तो सुगंधा के खूबसूरत नवयोवन से भरा बदन देखकर उसका लंड खड़ा हो जाता,,, अपनी मां को जवाब देने के लिए रोहन के पास शब्द नहीं थे वह कुछ बोल नहीं पाया और धीरे-धीरे अपनी मां की करीब जाकर खड़ा हो गया सुगंधा अभी भी खिड़की से बाहर तेज बारिश को देख रही थी लेकिन उसे अपने बेटे की कदमों की आहट अपनी बिल्कुल करीब आती हुई सुनाई दे रही थी जिससे उसका बदन हिचकोले खा रहा था,, उत्तेजना से उसका सारा बदन भरता चला जा रहा था वह एकदम चुद वासी हो चुकी थी और ऐसे में उसके बेहद करीब 1 जवान मर्द खड़ा था जिसके पास मोटा तगड़ा और लंबा मजबूत लंड था जिससे वह अपनी प्यास बुझा सकती थी,,,

रोहन अपनी मां के ठीक पीछे खड़ा था और उसके के जाने में बना तंबू ठीक सुगंधा की मदमस्त गांड के सामने था अब अगर जरा सा भी रोहन अपनी कमर आगे की तरफ कर देता तो उसके तंबू सुगंधा की मदमस्त गांड से स्पर्श कर जाती लेकिन ऐसा करने में उसे डर लग रहा था लेकिन इच्छा बहुत कर रही थी कुछ देर तक सुगंधा भी जानबूझकर उसी तरह से खिड़की से कोहनी टिकाए अपनी गांड को बाहर की तरफ निकालकर झुकी रही,,, जिस तरह से रोहन उसके बेहद करीब आया था उसे देखते हुए सुगंधा को ऐसा लग रहा था कि उसका बेटा कुछ हरकत जरूर करेगा इसीलिए वह खिड़की से कहानी दिखाएं अपनी गांड को आमंत्रण की तौर पर अपने बेटे के आगे झुकाए रह गई लेकिन इससे ज्यादा आगे बढ़ने की हिम्मत रोहन नहीं कर पाया तो वह खुद ही अपनी मादक अदा,,दिखाते हुए,,,।
 
रोहन तुझे मालूम है कि तेरा लंड ईस समय क्यों खड़ा है,,,? ( यह सवाल रोहन से पूछते हुए सुगंधा की सांसे बड़ी तेज गति से चल रही थी,,, रोहन भी अपनी मां के इस तरह के सवाल सुनकर एक दम से सकपका गया और बोला।

नहीं मम्मी मुझे नहीं मालूम अभी-अभी तुम ही बताई तो मुझे पता चला कि जब पेशाब लगती है तब यह लंड खड़ा हो जाता है,,,।

हां वह तो मैं तुझे बता ही लेकिन उसका एक कारण और भी है मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तेरा लंड क्यों खड़ा है,,, ।

क्यों मम्मी मुझे तो नहीं मालूम,,,, (रोहन अनजान बनता हुआ बोला,,)

मुझे नंगी देखकर,,,, हां यह बिल्कुल सच है तू मुझे नंगी देखकर अंदर ही अंदर मस्त हुआ जा रहा है,,,,, तभी तेरा लंड खड़ा हुआ है। ( सुगंधा उसी तरह से खिड़की से बाहर झांकते हुए वह बोली,,,। रोहन तो अपनी मां की यह बात सुनकर एकदम से सकपका गया और अपनी बचाव करने हेतु वह बोला,,,।)

नहीं मम्मी यह गलत है ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है यह तो अपने आप ही पेशाब लगने की वजह से खड़ा हो गया है,,,,

चल अब तू मुझे मत सिखा मैं एक औरत हुं, मुझे अच्छी तरह से मालूम है कि तेरा लंड मुझे नंगी देखकर ही खड़ा हुआ है (सुगंधा अपनी नजरों को पीछे घुमा कर अपने बेटे की तरफ देखी और उसके पजामे में तने हुए तंबू को,,, देखकर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली।) तूने तो पेशाब कर चुका ना तो फिर यह तेरा लैंड क्यों खड़ा है अब बता इसका जवाब है तेरे पास मैं जो कह रही हूं बिल्कुल सच कह रही हूं,,, (फिर से खिड़की से बाहर झांकते हुए,,) तू मेरी बड़ी-बड़ी गोल-गोल चुचियों को देखकर मस्त हुआ जा रहा है मेरे चिकने गोरे बदन को देख कर मदहोश हुआ जा रहा है मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तू मेरी गोल-गोल बड़ी-बड़ी,,( खिड़की पर अपनी कोहनी टिका कर मादक अदा के साथ अपनी मदमस्त गांड को बाहर की तरह उभारते हुए,,) तरबूज जैसी गांड को देखकर अंदर ही अंदर मुझे भोगने का सपना देख रहा है,,,,,।

( अपनी मां की बातें सुनकर रोहन की तो हालत खराब होते जा रही थी क्योंकि जो सदा से उसने अपनी गांड को बाहर की तरफ निकालकर यह बात बोली थी उससे रोहन इतना ज्यादा उत्तेजित हो गया था कि उसका मन कर रहा था कि अभी पीछे से अपनी मां की कमर थाम ले और अपना पूरा लंड उसकी बुर में डाल कर उसे चोदना शुरू कर ले लेकिन बहुत ही ज्यादा मन को कठोर करके अपने आप को संभाले रह गया। रोहन भी यह बात अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां जो कुछ भी कह रही थी वह एकदम सच था और इसमें उसकी कोई गलती नहीं थी उसकी जगह कोई भी होता तो सुगंधा के खूबसूरत नवयोवन से भरा बदन देखकर उसका लंड खड़ा हो जाता,,, अपनी मां को जवाब देने के लिए रोहन के पास शब्द नहीं थे वह कुछ बोल नहीं पाया और धीरे-धीरे अपनी मां की करीब जाकर खड़ा हो गया सुगंधा अभी भी खिड़की से बाहर तेज बारिश को देख रही थी लेकिन उसे अपने बेटे की कदमों की आहट अपनी बिल्कुल करीब आती हुई सुनाई दे रही थी जिससे उसका बदन हिचकोले खा रहा था,, उत्तेजना से उसका सारा बदन भरता चला जा रहा था वह एकदम चुद वासी हो चुकी थी और ऐसे में उसके बेहद करीब 1 जवान मर्द खड़ा था जिसके पास मोटा तगड़ा और लंबा मजबूत लंड था जिससे वह अपनी प्यास बुझा सकती थी,,,

रोहन अपनी मां के ठीक पीछे खड़ा था और उसके के जाने में बना तंबू ठीक सुगंधा की मदमस्त गांड के सामने था अब अगर जरा सा भी रोहन अपनी कमर आगे की तरफ कर देता तो उसके तंबू सुगंधा की मदमस्त गांड से स्पर्श कर जाती लेकिन ऐसा करने में उसे डर लग रहा था लेकिन इच्छा बहुत कर रही थी कुछ देर तक सुगंधा भी जानबूझकर उसी तरह से खिड़की से कोहनी टिकाए अपनी गांड को बाहर की तरफ निकालकर झुकी रही,,, जिस तरह से रोहन उसके बेहद करीब आया था उसे देखते हुए सुगंधा को ऐसा लग रहा था कि उसका बेटा कुछ हरकत जरूर करेगा इसीलिए वह खिड़की से कहानी दिखाएं अपनी गांड को आमंत्रण की तौर पर अपने बेटे के आगे झुकाए रह गई लेकिन इससे ज्यादा आगे बढ़ने की हिम्मत रोहन नहीं कर पाया तो वह खुद ही अपनी मादक अदा,,दिखाते हुए,,,।
 
१२सुगंधा खुद ही अपनी मादक अदां दिखाते हुए अपनी मद मस्त बड़ी-बड़ी भराव दार गांड दाएं बाएं करके हवा में लहराने लगी जिसे देखकर रोहन का मन एकदम से ललचने लगा उसके मुंह में पानी आने लगा,,,, सुगंधा की हरकत देख कर ऐसा लग रहा था कि मानो वह हाथ में लॉलीपॉप लेकर अपने बेटे के मुंह के इधर-उधर करते हुए उसे लालच दे रही हो और रोहन लार टपकाते हुए वह भी अपनी मां की गांड के दाएं बाएं अपना मुंह ले जा रहा था,,,,, सुगंधा अपनी मादक अदा बिखेरते हुए तिरछी नजरों से अपने बेटे की तरफ देख रही थी,,,, और अपने बेटे की नाजुक हालत को देखकर मंड मंद मुस्कुरा रही थी वह अच्छी तरह से समझ गई थी कि उसका बेटा पूरी तरह से उसके आकर्षण में बंध चुका है वह लगातार अपनी गांड को हिला रही थी और उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर उसकी हालत खराब हुए जा रही थी वह अपनी मां की गांड को पकड़ना चाहता था उसे दबाना चाहता था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,।
,,, अपने बेटे को अपनी मदमस्त गांड के इशारे पर नचाते हुए वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,,।

अब बोल रोहन तुझे कुछ कहना है,,, मुझसे झूठ बोलने की कोशिश बिल्कुल भी मत करना,,, क्योंकि मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि जो कुछ भी मैं कह रही हूं वह बिल्कुल सच है और यह बात भी अच्छी तरह से जानता है कि तेरा लंड किस वजह से अभी तक खड़ा है,,,,,, ( सुगंधा खिड़की से दोनों कोहनीयो को टीका कर पीछे की तरफ नजर करके अपने बेटे के चेहरे पर बदलते भाव को देख रही थी,,) और मुझसे शर्मा ने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं यह बात मैं तुझसे पहले भी कह चुकी हूं इसलिए,,, जो कुछ भी मैं तुझसे कह रही हूं उसे मानते हुए तू खुद ही अपने मुंह से बता दे कि तेरा जलन क्यों खड़ा है सच सच बताना,,,,।
( रोहन अपनी मां को नंगी और उसकी मादक अदाओं को देखकर एकदम उत्तेजित हो चुका था और जिस तरह से वह खुले शब्दों में उससे बात कर रही थी उससे तो उसके तन बदन में काम भावना और ज्यादा जागरूक हो चुकी थी उसका लंड लोहे के रोड की तरह एकदम कड़क हो चुका था जो कि पजामे मेसें बाहर आने के लिए फड़फड़ा रहा था,,, रोहन अपनी मां की हरकतों को देखकर अच्छी तरह से समझ गया था कि आप शर्म आने से कोई फायदा नहीं है जब वह खुद ही उससे गंदी गंदी बातें करना चाह रही है तो वह क्यों अपने आप को रोक रहा है इसलिए वह हल्के से,,, अपनी कमर को आगे की तरफ बढ़ा कर बोला,,,,। )

हां मम्मी यह सच है तुम्हारे नंगे बदन तुम्हारी नंगी नंगी मदमस्त गांड को देखकर तुम्हारी बड़ी-बड़ी गुलगुल चूचियों को देख कर और सच कहूं तो तुम्हारी टांगों के बीच की रसीली दरार को देख कर मेरा लंड अभी तक खड़ा है,,,,,,( रोहन एकदम से सब कुछ साफ-साफ बोल दिया लेकिन यह बोलने में वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था उसकी नजर अपनी मां की लहराती हुई गांड पर टिकी हुई थी और अपनी कमर को आगे बढ़ाने की वजह से सुगंधा को अपनी मदमस्त गांड पर अपने बेटे के पजामे में बने तंबू का स्पर्श बराबर होने लगा था जिसकी वजह से वह उत्तेजना के मारे एकदम सिहर उठी थी,,,,,, सुगंधा अपने बेटे की लंड का स्पर्श जो कि अभी भी पजामे के अंदर था उस स्पर्श को पाकर इतनी ज्यादा गरम हो चुकी थी की,, अपनी मदमस्त गोल गोल खरबूजे जैसी गांड को गोल-गोल घुमाते हुए अपने बेटे के लंड को और ज्यादा अपनी गांड पर महसूस करना चाह रही थी।,, रोहन अपनी मां की कामुक हरकत की वजह से अपने आप को रोक नहीं पाया और उसके दोनों हाथ खुद ब खुद आगे बढ़कर पढ़ कर सुगंधा की कमर को थाम लिया,,,,,, अपने बेटे की इस हरकत की वजह से सुगंधा के मुंह से सिसकारी निकल गई,,,,,।

सससससहहहहह,,,, रोहन,,,,,,
( इतना कहने के साथ ही वह आगे कुछ बोल पाती इससे पहले ही इतने जोर की बिजली कड़की कि वह तुरंत एक झटके से अपने बेटे के सीने से लग गई वो एकदम से डर गई थी,,,,, सब कुछ एक पल के लिए एकदम से थम गया,,, जिस कुर्ती के साथ सुगंधा पलट कर उसके सीने से लगी थी रोहन तो समझ ही नहीं पाया कि यह क्या हुआ सुगंधा भी कुछ पल के लिए सब कुछ भूल चुकी थी,,, वह डर के मारे अपने बेटे की चौड़ी छाती में वह दबाए उसे अपनी बाहों में दबोचे हुए थी,,,,

दोनों की सांसे तीव्र गति से चल रही थी थोड़ी देर बाद जब सुगंधाको एहसास हुआ तब तक वह एकदम गरम हो चुकी थी चुकंदर को अपनी टांगों के बीच उसकी बुर की दहाड़ के अगल-बगल अपने बेटे के पजामे में बना तंबू चुभता हुआ महसूस हो रहा था जिससे वह और भी ज्यादा गर्म होने लगी थी,,,,, सुगंधा को साफ साफ महसूस हो रहा था कि उसकी गोल गोल खरबूजे जैसी चूचियां उसके बेटे की चौड़ी छाती पर भाले की तरह चुभ रही थी,,, वह संपूर्ण रूप से एकदम नंगी अवस्था में थी और इस बात का अहसास होते ही वह और जोर से अपने बेटे को अपनी बाहों में कश्मीर और रोहन भी एकदम मस्त होता है वह अपनी मां की नंगी चिकनी पीठ पर अपनी हथेलियों को खिलाने लगा ऊपर से नीचे तक वह भी हिम्मत दिखाते हुए धीरे-धीरे अपनी मां की कमर के नीचे की तरफ हाथ बढ़ाते हुए जैसे ही वह सुगंधा की मदमस्त गोल गोल तरबूज जैसी गांड की दोनों फांतों पर पहुंचा वैसे ही वह अपनी मां की गांड को जोर से अपनी हथेली में दबोच लिया जिससे सुगंधा के मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,,,।

सससससहहह रोहन,,,,,,,,

दोनों एकदम मदहोश हो चुके थे दोनों एक दूसरे के बदन पर अपनी हथेलियों को फिरा रहे थे सुगंधा के मुख से तो बार-बार गर्म सिसकारी फूट पड़ रही थी रोहन अपनी मां को अपनी बाहों में कसे हुए उसके बड़े बड़े तरबूज जेसी गांड से खेल रहा था बार-बार उसे मसल रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे वह उसकी गांड ना होकर एक पावरोटी हो,,,,,।
सुगंधा के तन बदन में काम भावना की इच्छा प्रबल हुए जा रही थी वह अच्छी तरह से समझ रही थी कि यह पल बेहद नाजुक है ऐसे पल में कुछ भी हो सकता था वह संपूर्ण रूप से नंगी होकर अपने बेटे के बदन से चिपकी हुई थी,,,, वह अपने बेटे के चौड़े सीने का दबाव अपनी मखमली गोल-गोल चुचियों पर बड़े अच्छे से कर रही थी।,,, साथ ही अपने दोनों टांगों के बीच अपने बेटे के पजामें मे बने तंबु की रगड़ का एहसास वह अपनी रसीली बुर्के इर्द-गिर्द बड़े अच्छे से महसूस कर रही थी और उत्तेजना के मारे लगातार उसकी बुर से नमकीन पानी झर रहा था,,,।

रोहन की तो खुशी का ठिकाना ना था उसे ऐसा लग रहा था जैसे उसकी मुंह मांगी मुराद मिल गई हो उसके दोनों हाथों में लड्डू था बारिश की तूफानी रात में वह संपूर्ण रूप से लगना अवस्था में खड़ी अपनी मां के बदन से लिपटा हुआ था जिससे वह उत्तेजना के परम शिखर पर विराजमान हो चुका था उसका लंड टनटना इतना ज्यादा खड़ा हो चुका था कि ऐसा लग रहा था कि लोहे की कोई छड़ हो,,, उसकी इच्छा हो रही थी कि पहचाने को नीचे करके वह अपनी खड़े लेने तो अपनी मां की बुर में सटाकर एक धक्का लगावे ताकि उसका पूरा लंड उसकी मां की बुर के अंदर समा जाए लेकिन ऐसा कर सकने की स्थिति में वह बिल्कुल भी नहीं था वह नहीं चाहता था कि उसकी मां नाराज हो इसलिए वह वैसे ही खड़े खड़े अपनी मां को अपनी बाहों में लेकर उसके मदमस्त नंगे बदन से खेलता रहा,,,, सुगंधा भी अपने बेटे की हरकत की वजह से पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी वह गर्म सिसकारी लेते हुए बोली,,,,

औ रोहन मुझे ना जाने क्या हो रहा है मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं बहक जाऊंगी मैं अपने आपको संभाल नहीं पा रही हूं,,,,

संभाल नहीं पा रही हूं,,,, मैं कुछ समझा नहीं मम्मी,, (रोहन सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनते हुए बोला,,,)

मैं तुझसे बोली थी ना कि मेरी बुर में बहुत ज्यादा खुजली हो रही है,,, ।

हां,,, तो,,,,,

तो क्या मैंने तुझसे यह भी कही थी कि औरत की बुर की खुजली मोटे तगड़े और लंबे लंड से ही मिटती है,,,,,। और इस समय मेरी बुर में बहुत जोरों की खुजली हो रही है जो कि मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही है,,, ।

तो अब मम्मी इसमें कर भी क्या सकते हैं मैंने तो बहुत कोशिश किया तुम्हारे बुर की खुजली मिटाने की लेकिन तुम्हारी खुजली मिटने की जगह और ज्यादा बढ़ गई है,,,,,।

तू थोड़ी कोशिश और कर दे,,,,,,

मैं कुछ समझा नहीं मम्मी,,,,,,

देख रोहन ( अपने बेटे की बाहों से अलग होते हुए एक बार फिर से खिड़की की तरफ जाकर खिड़की से बाहर जाते हुए,,,।) देख रहा मैं तुझसे गोल गोल घुमा कर बातें करना नहीं चाहती मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तेरे पर जाने के अंदर अच्छा खासा मोटा तगड़ा और लंबा लैंड है जिससे मेरे बुर की खुजली मिटाई जा सकती है अगर तू तैयार हो तो,,,,।
( सुगंधा खिड़की से बाहर तेज बरस रही बारिश को देखते हुए बोली और रोहन की नजर सुगंधा के मदमस्त या 1 को ऊपर से नीचे की तरफ निहारने में लगे हुए थे एक बार फिर से रोहन की नजर सुगंधा की मदमस्त गोरी गोरी गोल गांड पर आकर टिक गई वह एकदम से आकर्षित होने लगा और वैसे भी अपनी मां की बात मानने के सिवाय ओर उसके पास कोई भी चारा नहीं था वह क्या दुनिया का कोई भी मर्द होता तो एक औरत का इस तरह का आमंत्रण ठुकराने की हिम्मत ना कर सकता लेकिन फिर भी रोहन आश्चर्य जताते हुए बोला,,,,।

मम्मी है तुम क्या कह रही हो तुम जानती भी हो यह क्या कह रही हो अगर किसी को पता चल गया तो हम दोनों के बारे में क्या सोचेगा,,,,। ( अपने बेटे की बात सुनकर सुगंधा अपने बेटे की तरफ पलट कर उसकी आंखों में आंखें डाल कर बोली,,,।)

बोल तू तो ऐसे रहा है जैसे तू मुझ को चोदना ही नहीं चाहता जबकि सच यह है कि तुम मुझे चोदने की कल्पना कर रहा है मुझे नंगी देखकर मस्त हुआ जा रहा है तभी तो यह तेरा ये
( पजामे में के ऊपर से यह अपने बेटे के लंड को पकड़ते हुए) खड़ा हो गया है,,,,,। ( रोहन भी क्या करता उसके पास कहने के लिए कुछ भी नहीं बचा था और वैसे भी वह ज्यादा चला कि नहीं दिखाना चाहता था क्योंकि वह इस बात से डर रहा था कि ज्यादा चला कि दिखाने में कहीं हाथ में आया ऐसा सुनहरा मौका चलाना जाए कहीं उसकी मां पलट ना जाए,,, इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,

लेकिन मम्मी (इतना कहने के साथ ही सुगंधा एक बार फिर से खिड़की से बाहर की तरफ झांकने लगी उसकी चिकनी नंगी पीठ लोहा की तरफ थी और रोहन अपनी बात कहते कहते अपनी नजर को सुगंधा की मखमली कमर के नीचे गांड के मदमस्त ऊभार पर ले गया और उस पर नजर पड़ते ही वह पूरी तरह से उत्तेजित हो गया,,,, और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) किसी को यह सब पता चल गया तो हम दोनों के बारे में क्या सोचेगा,,, (इतना कहकर अपनी मां का जवाब सुने बिना ही अपने कदम आगे बढ़ा दिया और ठीक अपनी मां के पीछे जाकर खड़ा हो गया और अपनी कमर को थोड़ा सा आगे बढ़ाते हुए अपने पजामी में बने तंबू का स्पर्श अपनी मां की मदमस्त गांड पर कराने लगा जिसका स्पर्श पाते ही सुगंधा एक बार फिर से ऊतेजना के मारे सिहर उठी,,,, वह कुछ बोल पाती इससे पहले ही रोहन हिम्मत दिखाते हुए एक बार फिर से अपनी मां की शेरनी जैसी कमर को अपने दोनों हाथों से थाम लिया जिससे एक बेहद उत्तेजना आत्मक पोज बन चुका था ऐसा लग रहा था मानो रोहन अपनी मां को पीछे से चोद रहा है और सुगंधा खिड़की पकड़कर अपने बेटे के हर धक्के को संभाल रही हैं,,,,

किसी को कानों कान पता नहीं चलेगा रोहन वैसे भी घर में हम दोनों के सिवा कोई और नहीं है यह बात दरवाजे के बाहर कभी नहीं जा सकती,,,,, (इतना सुनते ही रोहन अपने दोनों हाथ को अपनी मां की कमर पर से हटा कर सीधे उसके दोनों खड़ पढ़ाते हुए कबूतर पर रखकर उसे हल्के हल्के दबाना शुरू कर दिया जिससे सुगंधा के भजन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी और वह हल्की हल्की दर्द का आनंद लेते हुए कहरने लगी,,,, सुगंधा अपने बेटे की इस हिम्मत की वजह से पूरी तरह से मस्त होने लगी,,,,, दोनों के बीच खामोशी छा गई केवल बाहर बरस रही बारिश की आवाज ही आ रही थी और साथ में आसमान में रह-रहकर बादल गरज रहे थे आधी रात से ज्यादा का समय बीत चुका था लेकिन दोनों की आंखों में नींद बिल्कुल भी नहीं थी,,,
रोहन अपनी मां की नारंगी और जैसी बड़ी-बड़ी चुचियों को जोर जोर से मसल ना शुरू कर दिया और थोड़ी देर में ही कमरे में सुगंधा की गरम सिसकारियां गुंजने लगी,,,,
सुगंधा एकदम बेशर्म औरत बन चुकी थी उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसके व्यवहार में इस तरह से बदलाव आएगा लेकिन बदन की जरूरत,,, वासना ने उसके तन बदन में उसके सोच में बदलाव ला दिया था।,,,, रोहन पागल हुआ जा रहा था उसे भी समझ में नहीं आ रहा था उसके अंदर इतनी हिम्मत कैसे आ गई वह अपनी मां की नंगी गोरी पीठ पर अपने होंठ को रगड़ रहा था और साथ ही दोनों चुचियों को जोर जोर से मसल रहा था ऐसा लग रहा था कि मानो उसके हाथ में दशहरी आम आ गया हो और वह जोर-जोर से दबाकर उसका सारा रस निचोड़ डालना चाहता हो अपने बेटे की हरकत की वजह से सुगंधा भी इतनी ज्यादा जोश में आ चुकी थी कि अपनी मदमस्त तरबूज जेसी गोल गोल गांड को अपने बेटे के पजामे में बने हुए तंबू पर गोल-गोल घुमाते हुए रगड़ रही थी,,,,,,, सुगंधा कमरे में छाई हुई खामोशी को तोड़ते हुए बोली,,,।

रोहन बेटा तेरा लंड पजामै में होने के बावजूद भी मेरी गांड की दरार के अंदर तक घुसा चला जा रहा है अगर पजामे के बाहर आएगा तो मुझे लगता है कि मेरी बुर का कचुंबर बना देगा,,,,।

क्या तुम सच कह रही हो मम्मी क्या मेरा लंड ईतना तगड़ा है तुमने तो आज तक उसे देखा भी नहीं है,,,,। ( अपनी मां की चुचियों को जोर जोर से दबाते हुए बोला,,,।)

मैं देखना चाहती हूं रोहन,,, मैं तेरे खड़े लंड का दीदार करना चाहती हूं मैं देखना चाहती हूं कि तेरे लंड में ऐसा क्या खास है जो मेरे मन को इतना बदल कर रख दिया है,,, ( सुगंधा गरम सिसकारी भरते हुए बोली,,,,। रोहन भला कब ना बोलने वाला था वह उसी तरह से अपनी मां की दोनों चूचियों को दबाता हुआ बोला,,,,)

देख लो मम्मी सब कुछ तुम्हारा है तुम्हारे लिए है।

( दोनों मां-बेटे पूरी तरह से मदहोश हो चुके थे दोनों के तन बदन में वासना सवार हो चुकी थी दोनों अपनी मर्यादा को भूल चुके थे सुगंधा एक मां होने के बावजूद भी अपनी प्यास को बुझाने के लिए इस कदर खो गई थी कि उसे रोहन में एक बेटा नहीं बल्कि एक मर्द नजर आ रहा था जिससे वह अपने तन की प्यास बुझाना चाहती थी,,,,। वह अपने बेटे की बात सुनते ही फिर से अपने बेटे की तरफ पलट कर खड़ी हो गई और अपनी नजर को नीचे की तरफ उसके पजामे में तने हुए तंबू पर करके मुस्कुरा दी उसकी कामुक मुस्कान देखकर रोहन पूरी तरह से घायल हो गया,,,,। रोहन के पास करने के लिए कुछ भी नहीं था जो कुछ भी करना था उसकी मां को ही करना था सुगंधा भी यह बात अच्छी तरह से जानती थी वरना अपनी खुद की चुदाई वाली बात उसे अपने मुंह से नहीं कहनी पड़ती अगर वह इशारा समझ गया होता तो अभी तक वह ना जाने कितनी बार उसकी चुदाई कर चुका होता लेकिन आधी रात से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद दोनों प्यासे के प्यासे थे इसलिए सुगंधाको ही शुरुआत करनी पड़ी,,,।

दोनों खुली हुई खिड़की के करीब खड़े हुए थे रोहन के बदन पर अभी भी उसका पैजामा था लेकिन सुगंधा पूरी तरह से निर्वस्त्र नंगी खड़ी थी खिड़की से आ रही ठंडी शीतल हवा का सुगंधा की गर्म जवानी पर बिल्कुल भी असर नहीं हो रहा था और साथ ही अपनी मां की मदमस्त जवानी को देखकर रोहन भी पूरी तरह से गर्म हो चुका था जिससे उसे भी खिड़की से आ रही ठंडी हवा का बिल्कुल भी असर नहीं हो रहा था,,,,।,,,
 
दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे सुगंधा संपूर्ण निर्वस्त्र अवस्था में अपने बेटे से चिपके हुए खिड़की से खड़ी थी लेकिन दूर दूर तक देखने वाला कोई नहीं था।,,,
बरसों से दबी सुगंधा की प्यास उभरने लगी थी वह अपने आप को बिल्कुल भी संभाल पाने की स्थिति में नहीं थी उसके बदन का उन्माद बढ़ता जा रहा था और वह अपना एक हाथ नीचे की तरफ ले जाकर पजामे के ऊपर से ही अपने बेटे की लंड को पकड़ ली,,,।

सससहहहह,,,, रोहन बहुत भारी लग रहा है रे मुझे तो बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मेरे पास इतना दमदार लंड होगा जो कि पर जाने के ऊपर से ही इतना कड़क है अगर सच में तेरा लंड किसी औरत की बुर में चला जाए तो वह तो एकदम मस्त हो जाए,,,( सुगंधा एकदम बेशर्म की तरह बातें कर रही थी जो कि रोहन को बहुत ही अच्छी लग रही थी उसके बदन में भी कामोत्तेजना का असर ज्यादा ही होता जा रहा था और वह जोर-जोर से अपनी मां की गोरी गांड को मसल मसल कर एकदम लाल कर दिया था,,,।) मुझसे बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा है मैं तेरे लंड को देखना चाहती हूं,,,,( सुगंधा सिसकारी लेते हुए बोली,,,,)

मम्मी मैं कह चुका हूं कि यह सब तुम्हारा ही है तुम इसके साथ,,
चाहे जो करो मैं कुछ नहीं कहूंगा,,,,,,( रोहन अपनी मां की कामुक हरकत की वजह से मस्त होता हुआ बोला,,, )

सुगंधा एक दम मस्त हो चुकी थी वह अपने आपे में बिल्कुल नहीं थी वासना उसके सर पर पूरी तरह से सवार हो चुकी थी वह अच्छे बुरे का फर्क भूल चुकी थी उसे बस अब अपनी प्यास बुझाना था और वह भी बरसों की प्यास इसलिए पजामे के ऊपर से यह अपने बेटे के नंदू को जोर जोर से मसल रही थी और अपने बेटे की लंड को मसलने ने उसे एक अद्भुत सुख का आनंद मिल रहा था जिसे वह शब्दों में बयां नहीं कर सकती थी उसका चेहरा पूरी तरह से लाल हो चुका था,,,,, दिल जोरों से धड़क रहा था,,,, और यही हाल रोहन का भी था वह भी अपनी मां की गर्म जवानी ने पूरी तरह से पिघलने लगा था वह रह रह कर अपनी मां की बड़ी बड़ी गांड को दबाता तो कभी एक हाथ से अपनी मां के फड़फड़ा ते हुए कबूतर को थाम लेता और उसे दबाने का आनंद लेता जिससे सुगंधा भी मस्त हुए जा रही थी,,,।
सुगंधा से अब बर्दाश्त करना मुश्किल में जा रहा था उसकी दूर से मदन रस पिघल कर उसकी जांघों से नीचे की तरफ बह रहा था,,,,।

ओहहहह,,, रोहन मुझे पता नहीं क्या हो रहा है मेरा मन बिल्कुल भी नहीं मान रहा है मैं तेरे लंड को देखना चाहती हूं जी भर कर देखना चाहती हूं मैं तेरी मर्दाना ताकत को अपने अंदर महसूस करना चाहती हूं,,,, ( सुगंधा एकदम मदहोश होते हुए बोली अपनी मां की हालत और उसकी हरकत को देखकर रोहन की हालत खराब हो जा रही थी उससे भी बर्दाश्त कर पाना बहुत मुश्किल हुए जा रहा था उसकी इच्छा कर रही थी कि इसी वक्त वह अपनी मां की बुर के अंदर पूरा लंड डालकर उसकी चुदाई कर दे लेकिन अपने आप को संभाले हुए था,,,,, और अपनी मां की हथेली का दबाव अपने लंड के ऊपर महसूस करते हुए वह बोला,,,।)

तो रोका किसने है मम्मी,,,
( इतना सुनते ही सुगंधा अपने आप को रोक नहीं पाए और तुरंत घुटनों के बल बैठ गई रोहन अपनी मां को देखता रह गया वह एकटक कुछ पल तक अपने बेटे के पजामे मे बने तंबू की तरफ देखती रही क्योंकि उसके आगे वाला भाग पूरी तरह से हो रहे स्राव की वजह से गिला हो चुका था,,,, सुगंधा अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर उसके पैजामा को पकड़ ली और एक झटके से उसे नीचे कर दी पजामे को नीचे आते ही रोहन का मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगा,,,, मोटा तगड़ा लंड हवा में लहराने लगा ऊपर नीचे हो रहा लंड बहुत ही भयानक लग रहा था जिसे देखकर सुगंधा का मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,,,, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी आंखें जो देख रही है वह सच है उसे कोई सपना सा लग रहा था,,,,, वह बिल्कुल भी सब्र नहीं कर पाई और अपने बेटे के कड़क मोटे तगड़े लैंड को अपने हाथ में पकड़ ली उसकी गर्मी अपनी हथेली में महसूस करते ही उसकी बुर फूलने पिचकने लगी और उसमें से मदन रस की दो बूंदे टपक कर नीचे जमीन पर गिर गई ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को देखकर सुगंधा की बुर अपने अंदर लेने के लिए हामी भर रही हो,,,।

बाप रे तेरा लंड है या गाय भैंस को बांधने वाला खूंटा तेरा लैंड एकदम खूटे की तरह लग रहा है,,,, (सुगंधा अपने बेटे के खड़े लंड को देखकर एकदम आश्चर्य में पड़ गई थी और सच में रोहन का मोटा तगड़ा लंबा लंड किसी खूटे की तरह ही लग रहा था जैसे खूंटे में बांधकर कर गाय भैंस को नियंत्रित किया जाता है वैसे ही रोहन का लंड ऐसा लग रहा था जैसे एक औरत की मस्ताई हुई जवानी को नियंत्रित करके वह अपना बल दिखाते हुए उसे अपने आधीन रखता है नियंत्रित में रखता है,,, सुगंधा तो पूरी तरह से अपने बेटे के लंड के आकर्षण में बंधती चली गई जा रही थी वह उसे खड़े लड़कों पर से लेकर उसके छोर तक अपनी हथेली फेर रही थी आज बरसों बाद उसे एक मस्ताना मर्दाना लंड देखने को मिल रहा था और उसे छूने का मौका जो मिल रहा था वह पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी,,,। रोहन भी अपनी मां की नर्म नर्म नाजुक हो वलियों के बीच अपने लंड को महसूस करके मस्त हुआ जा रहा था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि एक औरत जो कि उसकी मौत ही वह अपने हाथों में उसके मोटे तगड़े लंड को पकड़ कर हिला रही थी सुगंधा पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी अपने बेटे को देखते हुए उसके खड़े लंड को ऊपर नीचे करके हिला रही थी और उसे धीरे-धीरे मुठियाना शुरू कर दी,,,।)

ससससहहहहहह,,, ओहहहहहहहह मम्मी यह क्या कर रही हो मुझे ना जाने क्या हो रहा है,,,,।

खेलने दे रे मुझे अपने लंड से जी भर कर खेलने दी आज बरसों के बाद मेरे हाथों में एक मोटा तगड़ा गंडाला है जिसे देखकर मैं फूली नहीं समा रही और मुझे मालूम है तुझे क्या हो रहा है तुझे मस्ती चढ़ रही है तुझे मजा आ रहा है मैं जानती हूं मेरी नरम नरम हथेली में तेरा लंड और भी ज्यादा कड़क हो रहा है,,,,,

( रोहाना भी अब क्या कहता उसे भी तो मजा आ रहा था पहली बार कोई खूबसूरत औरत उसके मोटी तक ने लंड को अपने हाथों में लेकर उससे खेल रही थी और उससे ज्यादा खुशी वाली बात उसके लिए क्या हो सकती थी,,, सुगंधा संपूर्ण नग्न अवस्था में घुटनों के बल बैठकर अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड से खेल रही थी मानो की जैसे वह उसका लंड नहीं बल्कि एक खिलौना हो वह ऊपर नीचे करके हर तरह से अपने बेटे के लंड से खेल रही थी,,, कुछ देर तक सुगंधा वैसे ही अपने बेटे की लेने से खेलती रही लेकिन उसका मन ललचा रहा था अपने बेटे के लंड को मुंह में लेकर चूसने के लिए उसके सुपाड़े को अपनी जीभ से चाटने के लिए क्योंकि बरसों बाद उसके हाथ ऐसा मौका आया था जब वह एक बार फिर से वह एक मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में लेकर उसे चूस कर अपनी प्यास बुझा सकती थी जिंदगी में सर्वप्रथम वह पहली बार अपने पति का ही लंड अपने मुंह में प्रवेश कराने की इजाजत दी थी इससे पहले उसने लंड के दर्शन तक नहीं किए थे लेकिन एक बार अपने पति का लंड चूसने पर उसे ऐसा चस्का लगा के हर रात जगने से पहले वह अपने पति के निर्णय को चूस कर एकदम मस्त हो जाती थी शुरू शुरू में उसे सब खराब लगता था लेकिन अब उसकी आदत बन चुकी थी लेकिन वर्षों तक वह अपनी आदत को अपने अंदर दबा कर रखी थी अपनी प्यास को मार चुकी थी लेकिन आज वैसा सुनहरा मौका आया था जब वह अपनी इस आदत को दोहराने के लिए मजबूर हो चुकी थी और देखते ही देखते वह अपने बेटे की आंखों में झांकते हुए धीरे-धीरे वह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह के अंदर लेना शुरू कर दी रोहन तो यह देखकर एकदम पागल हो गया था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां उसके लंड को अपने मुंह में ले रही है जो कि उसके सोच के बिल्कुल विरुद्ध था व कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि उसकी जिंदगी में ऐसा पलआएगा की उसके लंड को उसकी मां अपने मुंह में लेकर चूसगी,,,,, लेकिन थोड़ी ही देर में दोनों को मजा आने लगा दोनों मस्ती के सागर में गोते लगाने लगे चुकंदर तो अपने बेटे के लैंड को अपने मुंह की गहराई में जहां तक हो सकता था उतना लेकर उसे चूसने का आनंद ले रही थी मानो वह उसका लंड नही बल्कि मीठी खट्टी लॉलीपॉप हो,, रोहन भी ना चाहते हुए खुद ब खुद अपनी कमर को आगे पीछे करके अपने लंड को अपनी मां के मुंह में पेल रहा था दोनों एक दम मस्त हो चुके थे आनंद के ऐसे सागर में गोते लगाने में उन दोनों को इतना सुख मिल रहा था कि उन दोनों ने कभी सपने में भी नही,,,,ं सोचे थे,,,।
रोहन पूरी तरह से उत्पादित होकर अपने दोनों हाथ को पीछे ले जाकर अपनी मां के बंधे हुए बाल को खोल कर उसके रेशमी बालों से खेलने लगा जिससे उसमें उसे और आनंद मिल रहा था,, सुगंधा जोर-जोर से अपना मुंह आगे पीछे करते हुए अपने बेटे के लंड की चुदाई कर रही थी जिससे उसके दोनों खरबूजे झूलते हुए बहुत ही ज्यादा आनंद दे रहे थे,,,,।

बारिश अभी भी जोरों से पढ़ रही थी शाम के शुरू हुई बारिश अभी तक थमने का नाम नहीं ले रही थी खिड़की से आ रही ठंडी हवा दोनों के बदन से टकराते ही गर्म हो जा रही थी कमरे में केवल बरसात की आवाज के साथ-साथ सुगंधा की गर्म सिसकारी और रोहन के सिसकने की आवाज गूंज रही थी,,,।
दोनों के बीच इस पर किसी भी प्रकार का संवाद होना नामुमकिन था क्योंकि दोनों अपनी मस्ती में खोए हुए थे केवल सुगंधा के मुंह में लंड अंदर बाहर होने की वजह से गप गप की आवाज आ रही थी और रोहन के मुंह से सीईईई,,,,सीईईई,,,,,की आवाज आ रही थी दोनों अपनी ही धुन में खोए हुए थे,,,,
ना तो सुगंधा रुकने का नाम ले रही थी और ना ही रोहन की कमर रुक रही थी दोनों अपनी ही लय में आगे पीछे होते हुए एक दूसरे को आनंद देने की होड़ में लगे हुए थे,,,।
दोनों अपनी अपनी पतवार चला रहे थे मानो अपनी नाव को किनारे लगाना चाहते हो किसी तूफान से बचना चाहते हो और जल्द से जल्द किनारे पहुंचना चाहते हो इसलिए दोनों को कुछ सूझ नहीं रहा था,,,,।
दोनों की मेहनत रंग ला रही थी,,, दोनों अपनी चरम सीमा पर पहुंचने वाले थे सुगंधा तो एक हाथ से रोहन के लंड को पकड़ कर उसकी चूसाई कर रही थी और दूसरे हाथ से अपने गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियों को मसल कर दोहरा आनंद ले रही थी,,,।

दोनों की सांसें तेज चल रही थी मानो इंजन से धुआं भक भक करके निकल रहा हो दोनों अपने चरम सुख के करीब पहुंचते चले जा रहे थे दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे और अगले ही पल रोहन के लंड से पानी की पिचकारी छुटी और सुगंधा के गले के नीचे उतरती चली गई,,,, रोहन झटके खा खाकर अपने लंड से पानी फेंक रहा था और सुगंधा नीचे से अपनी बुर झाड़ते हुए अपने बेटे के पानी को गले से नीचे उतार रही थी,,, तो हमको इस बात से आश्चर्य हो रहा था कि पानी निकलने वाला था फिर भी यह सब जानते हुए भी उसकी मां अपने मुंह में से लंड निकालने की दरकार बिल्कुल भी नहीं की क्योंकि उसे यह बात बिल्कुल भी नहीं मालूम थी कि सुगंधा को यही अच्छा लगता था इससे वह पूरी तरह से उत्तेजित हो जाती थी जिससे वह अपने पति को भरपूर आनंद देती थी,,,,।
तूफान थम चुका था लेकिन शांत बिल्कुल भी नहीं हुआ था दोनों अपनी-अपनी उखड़ती हुई सांसो को नियंत्रित करने में लगे हुए थे,,, सुगंधा अपनी जगह पर खड़ी हुई वह पसीने से तरबतर हो चुकी थी और खुली खिड़की से ठंडी हवा लेना चाहती थी इसलिए वह खिड़की के करीब खड़ी होकर ठंडी हवा का आनंद लेने लगी रोहन अपनी मां की तरफ देख कर मन ही मन प्रसन्न हो रहा था पानी निकल जाने की वजह से उसका लंड झूल गया था लेकिन अभी भी उसमें दम बाकी था क्योंकि अभी भी वह खड़े लंड की तरह ही लग रहा था,,,।
 
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