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Incest बहना का ख्याल मैं रखूँगा

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रात को आठ बजे मैं वापस आया तब तक शालिनी ने खाना बना लिया था और हमने कुछ देर तक टीवी देखी फिर मैंने शालिनी से कहा, मैं नहा लूं फिर खाना खाते हैं और मैं नहाने के लिए बाथरूम में आ गया। पिछले दिनों से लगातार शालिनी के सेक्सी बदन को देखने से सैकड़ों बार मेरा लन्ड खड़ा हो चुका था, और इस समय भी मैंने जैसे ही अपनी बनयान और चढ्ढी उतार कर पानी डाला, तो लन्ड फिर से खड़ा हो गया। मैंने सोचा कि अब हस्तमैथुन करने से ही आराम मिलेगा , आज के पहले मैंने हजारों बार मुठ मारी थी अलग अलग भाभियों, आंटियों, फिल्म की हीरोइनों को याद करते हुए, आज भी मैं पड़ोस वाली सुनीता भाभी को याद करके मुठ मारने लगा। पर पता नहीं कब मेरी बंद आंखों में शालिनी का चेहरा आया और मैं दोपहर में देखे नजारे को सोचते हुए झड़ गया,

झड़ने के बाद मैं जल्दी से नहाया और सिर्फ टावेल लपेट कर बाहर आ गया । अंजाने में ही सही शालिनी के नाम ये मेरा पहला हस्तमैथुन था ।

कमरे में आ कर मैंने सिर्फ बरमूडा पहना बिना अंडरवियर के और उपर बनयान भी नहीं पहनी, बहाना गर्मी का था पर मेरे दिमाग में कुछ और खुराफात चल रही थी।

सागर- शालिनी तुम भी नहा लो फिर खाना खाते हैं ।

शालिनी- जी, भाई मैं भी यही सोच रही थी, यहां शहर में गर्मी कुछ ज्यादा ही होती है, खाना बनाने में पसीना पसीना हो जाता है पूरा। अगर कूलर ना हो तब तो यहां रहना मुश्किल है।

सागर- हां, यहां गर्मी थोड़ी ज्यादा होती है गांव से,,,

और शालिनी पीछे कमरे में जाकर अपने कपड़े लेकर बाथरूम में घुस गई।

थोड़ी देर बाद कमरे में फिर से मादा महक फैल गई, मैं लेटकर टीवी देख रहा था, मैंने नज़रें उठा कर देखा तो शालिनी ने दूसरी टी-शर्ट और निक्कर पहनी हुई थी और वह आईने के सामने अपने बाल संवार रही थी ।

क्या गजब ढा रही थी वो ....

हम लोगों ने खाना खाया और फिर मैंने शालिनी से कहा कि अगर तुम बोर हो गई हो दिन भर घर में तो चलो थोड़ा सा बाहर वाक करके आते हैं, शालिनी ने मना कर दिया बाहर जाने को,,,

आज मौसम में उमस और गर्मी कुछ ज्यादा ही थी, हम लोग बेड पर लेट कर टीवी देख रहे थे, और सुबह शालिनी के एडमिशन के बारे में बात कर रहे थे ।

शालिनी- भाई जी आज गर्मी बहुत है, ऐसा लग रहा है कि नींद नहीं आयेगी ।

सागर- हां,,,, है तो,,, और उपर से तुमने इतने कपड़े भी लाद रखें हैं ।

शालिनी- हां, बट हम लड़कियों को आप लोगों जैसी लिबर्टी कहां,,,

सागर- क्यों , किसने तुम्हारी लिबर्टी पे रोक लगा रखी है, कम से कम मैंने तो नहीं...

शालिनी- नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था, बट मैं कपड़े निकाल कर भी तो नहीं रह सकती,,,, आप की तरह

सागर- हां, निकाल कर नहीं रह सकती बट कम तो कर सकती हो,,, जब भी ज्यादा गर्म हो। तुम ऐसा करो कि अपनी पुरानी वाली समीज और निक्कर पहन लो, अंडरगार्मेंट टाइट होने से गर्मी ज्यादा ही लगती है , मैंने भी नहीं पहने हैं ।

शालिनी- नहीं नहीं भाई, मुझे ठीक नहीं लगेगा,,,, ऐसे मैं कभी रही नहीं ।

सागर- क्या ठीक नहीं लगेगा, तुम मेरे साथ भी कम्फ़र्टेबल नहीं हो तो बाहर कैसे निकलोगी अकेले माडर्न कपड़ों में,

मैंने उसे काफी समझाया तब उसने कहा कि ठीक है मैं ट्राई करती हूं, और वो उठकर पीछे रूम में चली गई।

मैं लेटे लेटे अपने प्लान की कामयाबी पर खुश हो रहा था और अब मुझे यकीन हो रहा था कि मैं शालिनी को धीरे धीरे अपनी लिव इन गर्ल फ्रेंड बना ही लूंगा बस मुझे थोड़ी होशियारी से काम लेना होगा, अब तक मैंने शालिनी को छुआ भी नहीं था ना ही मुझे इसकी कोई जल्दी थी... इतने में शालिनी आकर मेरे पास लेट गई।

सागर- दैट्स गुड,,,, अब कुछ गर्मी कम लगेगी।

शालिनी- जी,

वो अब भी मेरे तरफ देख नहीं रही थी, सीधे टीवी स्क्रीन पर ही नजर गड़ाए थी।

उसकी समीज सफेद रंग की थी और उसके उन्नत उरोजों से कुछ नीचे उसकी नाभि के ऊपर तक थी, मैंने थोड़ा सा आंखें घुमाकर देखा तो उसके निप्पल अलग से नुमायां हो रहे थे, मैंने तुरंत अपनी आंखें हटाई क्योंकि मुझे लगा कि मेरा लन्ड ने फिर से जागने लगा है और नीचे मैंने चढ्ढी भी नहीं पहनी हुई थी ।

मैं सोच रहा था कि जल्दी से जल्दी शालिनी सो जाये, जिससे मैं बिना डर के उसके शरीर को देखूं, शायद छू भी लूं।

हम ऐसे ही बातें करते हुए टीवी आफ करके सो गए।

मैं तो सोने का नाटक ही कर रहा था करीब एक घंटे तक मेरे मन में फिर से...

खुद के सवाल और खुद के ही जवाब....

वासना तो किसी रिश्ते को नही मानती, फिर ये उधेड़बुन क्यूँ?

कहीं ऐसा तो नही जो चाहत जिस्म की प्यास ने शुरू की थी वो आत्मा की प्यास में बदल गयी है।

मेरे दिलोदिमाग में आँधियाँ चल रही थी, मेरा जिस्म जैसे एक सूखे पत्ते की तरह फड़फडा रहा था. ये क्या हो रहा है, क्या ये समाज भाई बहन के प्यार को इज़ाज़त देगा अपनी ही बहन से प्यार करने के लिए.

क्या ये प्यार कभी परवान चढ़ पाएगा. अगर ये प्यार ही है तो इसमे वासना कहाँ से आ गयी। क्यूँ मेरा जिस्म शालिनी के जिस्म में समाने के लिए बेताब है. क्यूँ उसके जिस्म से भड़की हुई प्यास को मैं उसी के बदन से बुझाने की आस लगाए बैठा हूं ।

कैसे बेशर्मो की तरह अपनी बहन की लाज के टुकड़े टुकड़े कर रहा हूं उसके अर्ध नग्न बदन को घूरते हुए।

उफफफफफफ्फ़ ये क्या हो रहा है ये किस दलदल की ओर बढ़ रहा हूँ मैं,

क्या माँ के विश्वास को उसके निश्चल प्रेम को वासना की बलि चढ़ाना ठीक होगा? क्या शालिनी कभी दिल से उसके साथ ऐसा संबंध बनाएगी - नही.... क्या शालिनी कभी उसे एक मर्द के रूप में देखेगी - शायद नही ।

तो फिर क्यूँ ये गंदे ख़यालात मेरे मन से क्यूं नही जा रहे. इसी उधेड़बुन में मैं यूँ ही जागता रहा ।
 
कमरे की लाइट जल रही थी और मैं दूसरी तरफ करवट बदल कर लेटा हुआ था, अंत में जैसे ही मुझे लगा कि शालिनी सो गयी है, बस एक झटके में ही सारी नैतिकता गायब हो गई और मैं शालिनी के एकदम करीब आकर उसे सूंघने लगा, क्या मदहोश करने वाली महक आ रही थी उसके कामुक बदन से,,, मैं उठकर बैठ गया और उसके यौवन को जीभर कर देखने लगा ।

मेरा उसको समीज पहनाना अब काम में आ रहा था, अब तक मैंने शालिनी के दूध ब्रा में कैद हुए ही देखें थे,

अब समीज इतनी ढीली थी कि शायद नंगी चूचियों के दर्शन हो जाए,

धीरे धीरे मैंने शालिनी की समीज को आधी चूचियों तक उठा डाला ।

मैंने बहुत कोशिश की उसकी समीज को गर्दन तक उठाने की पर उसकी पीठ से दबी हुई थी, मैंने धीरे धीरे उसकी चूचियों पर हाथ रखकर हल्का सा दबाव बनाया तो ऐसा लगा जैसे रूई का नरम गोला हो, मैं डर भी रहा था कि अगर शालिनी जाग गई और अपने आप को इस हालत में देखेगी, और कहीं मेरे खड़े लौड़े को देख लिया तो आज ही मेरे लौड़े लग जाने हैं,।

करीब दो घंटे तक मैं जागता रहा और बिना ज्यादा छूए शालिनी के बदन को देख कर धीरे-धीरे अपने लौड़े को सहलाते सहलाते मुठ मार कर , वही पास में पड़े कपड़े में अपना वीर्य पोंछ कर सो गया, मुठ मारने में आज जैसा आनंद कभी नहीं आया था ।।

सुबह मैं जानबूझकर देर तक लेटा रहा और शालिनी ने फ्रेश होकर चाय बनाई और मुझे जगाया, मेरा लन्ड अभी सुबह वाले रेगुलर हार्ड कंडीशन में खड़ा था, मुझे पक्का यकीन था कि शालिनी ने चाय पकड़ाते हुए उसे देखा जरूर था , मैं इतने से ही गनगना उठा, शालिनी ने टी-शर्ट पहन ली थी, और हम लोग बातें करते हुए कालेज जाने की तैयारी करने लगे ।

मैं रूम में कपड़े पहन रहा था और शालिनी पीछे कमरे में ।

करीब 5 मिनट के बाद जब शालिनी बाहर निकल कर आई तो मैं उसे देखता रह गया, शालिनी ने जो कपड़े पहने हुए थे उनमे मैने उसे पहली बार देखा था,

उसने एक वाइट कलर की टी शर्ट पहनी हुई थी जो उसके बदन से बुरी तरह चिपकी हुई थी, और वो इतनी टाइट थी कि उसकी ब्लैक ब्रा की पूरी रूपरेखा मुझे दिखाई दे रही थी, और उसमे उसके बूब्स काफ़ी बड़े लग रहे थे, मैं तो रात को उसके बूब्स को अधनंगा देख चुका था इसलिए मुझे उनका असली साइज़ पता था, वरना इस वाली ब्रा मे उसके बूब्स देख कर मैं तो बेहोश ही हो जाता ।

और नीचे उसने जींस पहनी हुई थी, जो उसकी जाँघो पर चिपकी थी, वो भी काफ़ी टाइट थी, और उसे पहन कर चलने मे उसे शायद हल्की परेशानी हो रही थी..साथ मे उसने हाइ हील के सेंडिल पहने हुए थे..

कुल मिलाकर वो देखने मे एक कड़क पटाखा माल लग रही थी, वो अगर मेरी बहन ना भी होती तो इस वक़्त मैं उसे देख कर मर मिट ता..

मैने उसे देख कर हल्की सी सीटी मारी और वो शर्मा गयी,

शालिनी ने मुझे मुक्का दिखाकर मारने का इशारा किया, जो मुझे बहुत अच्छा लगा, हमारे बीच अब थोड़ी थोड़ी चुहलबाज़ी शुरू हो गई थी ।

उसके सीने का उभार देख कर मेरे दिल की धडकन तेज़ हो गयी. ब्रा में चूचियां और बड़ी हो जाती हैं, शालिनी बिलकुल किसी हिरोईन जैसी दिख रही थी. उसकी चुची किसी पहाड़ी की चोटी की माफ़िक खड़ी थी ।

मुझे लगा की शालिनी ने मुझे उसकी चूंची को घूरते हुये देख लिया है. मै शरम के मारे चुप रहा. और हम लोग बाइक से कालेज के लिए निकल पड़े ।

रास्ते मे बाईक पर जब मै ब्रेक मारता तो शालिनी का सीना मेरी पीठ से टकराता और मेरी पैंट मे तम्बू बन रहा था, मुझे महसूस हो रह था की शालिनी भी शरारती ढन्ग से मुस्कुरा रही थी.

"मुझे अच्ही तरह से पकड कर रखो, कही गिर ना जाना !" मैने कहा तो शालिनी ने मुझे कमर से कस के पकड़ लिया और उसका हाथ मेरे लन्ड से अधिक दूर नही था. उसकी सांस मेरी गर्दन से टकरा रही थी. उत्तेजना की हालत मे हम कालेज पहुंच गये.

कालेज में आ कर हम लोगों ने एडमिशन की फार्मेलिटीज पूरी की, और क्लासेज़ शुरू होने के लिए पता करके हम लोग कालेज घूमते रहे.. काफी पैरेंट्स और कुछ लड़कियों के ब्वायफ्रेन्ड भी साथ में थे वहां पर, सभी लोग अपने अपने काम में बिजी थे, इस कालेज की खासियत यह थी कि यहां अपर मिडिल क्लास फैमिली की लड़कियां ज्यादा पढ़ती थी, शहर की सबसे माडर्न लड़कियों में से कुछ एक यहां भी घूम रहीं थीं, सीनियर लड़कियों में कुछ ने बहुत ही सेक्सी कपड़े पहन रखे थे, किसी के दूध दिख रहे थे तो किसी की लो वेस्ट जींस के ऊपर पैंटी... और किसी की ब्रा नुमाइश कर रही थी कपड़ों के ऊपर से ...

लड़कियों का कालेज होने से खुलापन या कहें नंगापन कुछ ज्यादा ही था।

कुछ लड़कियां नये एडमिशन वाली भी गजब अंग प्रदर्शन कर रहीं थीं... मुझे लगा साला यहां तो एक से एक खूबसूरत आईटम हैं और चंचल भी,,,, कहीं शालिनी इन सब के चक्कर में ना आ जाए।। आज कल मैं सिटी का माहौल देख ही रहा था, पहले लड़कियां सिर्फ प्यार करतीं थीं और आज कल चुदाई और शापिंग ....

मैंने तो पहले से ही सोच लिया था कि मुझे शालिनी को ब्वायफ्रेन्ड के चक्कर में पड़ने से पहले ही अपना हमबिस्तर बना लेना है, और अब मैं ये जल्दी करना चाह रहा था ।

खैर,,, मैं और शालिनी लाईब्रेरी का कार्ड बनवाने के बाद बाहर बड़े ग्राउंड में आकर घास पर एक पेड़ की छांव में बैठ गये ।

सागर- तो तुम्हारे तो सारे काम हो गए, अब दस मिनट आराम कर लें फिर घर चलें । और कालेज कैंपस कैसा लगा।

शालिनी- बहुत जबरदस्त... बस पढ़ाई भी ऐसी ही जबरदस्त हो...

वह बहुत ही एक्साइटेड थी

सागर- हां, यहां पढ़ाई भी टापक्लास है और बाकी सब भी

शालिनी थोड़ा हंसने के बाद बोली हां वो तो दिख रहा है।

सागर- हां, दिख तो रहा ही है, यहां की लड़कियों का कान्फीडेन्स देखा... बोल्ड ब्यूटीज...

शालिनी- बोल्ड भी और बेशर्म भी...

सागर- अरे, यहां मुझे तो कोई बेशर्म नही दिखाई देता है...

शालिनी- वो सामने ही देखिए, वो लड़की की शर्म।

सागर- नहीं, वो क्या बेशर्मी कर रही है, वो तो अपने साथ आए लड़के से बात कर रही है।

शालिनी- नहीं,मेरा वो मतलब नहीं है, आप वो.... वो उसके कपड़े देखिए कितना एक्सपोज हो रहा है।
 
सामने कुछ दूर पर जो लड़की खड़ी थी, उसने खुले कन्धों वाली ड्रेस पहनी थी जिससे उसकी लाल रंग की ब्रा की पट्टियां पूरी दिखाई दे रही थी, और अंदर से उसकी लाल ब्रा का शेप पूरी तरह से सफेद रंग के झीने टाप से नुमायां हो रहा था, उसकी चूचियां काफ़ी बड़ी थी, नीचे उसने शार्ट जींस पहनी थी जो उसके घुटनों से कुछ ऊपर ही थी और उसके गोरे मांसल पैरों को देखकर किसी का भी लन्ड खड़ा हो जाता....

सागर- कम आन... यार इतना सब चलता है यहां सिटी में, किसी के पास इतना टाइम नहीं है कि वो ये सब देखें... बहुत बिजी हैं लोग और माडर्न भी ।

मैंने पहली बार शालिनी को यार कहकर बात की थी, और शायद उसे अच्छा ही लगा था

शालिनी- ओके .. ओके,भाई ...अब मुझे भी यहीं आना है , इन्हीं के साथ पढ़ना है,,,

सागर- हां भई, और एक तुम हो कि घर के अंदर भी तुम्हे शर्म आती है वो भी मेरे साथ, इन लड़कियों का कान्फीडेन्स देखो,,,,

शालिनी- ऐसा कुछ नहीं है वो आप के साथ थोडा़ ध्यान रखना जरूरी रहता है, आफ्टरआल, यू आर माई एल्डर ब्रदर, और मेरी तरफ से आपको कोई परेशानी ना हो, बस .... वैसे मैं भी इस तरह के कपड़े पहनना पसंद करूंगी, बट कालेज में नहीं, कोई पार्टी वगैरह हो तो....

सागर- कोई नहीं, जब तुम्हारे अंदर कान्फीडेन्स आ जायेगा तो तुम भी पहनोगी कालेज हो या पार्टी... इट्स आल अबाउट कान्फीडेन्स ।

शालिनी- ओके, देखते हैं, अब घर चलें,या और किसी की बेशर्मी देखनी है... हंसते हुए

सागर- हां, चलो, आज के लिए इतनी काफी है अब तो हर रोज तुम्हें जब कालेज छोड़ने आऊंगा तो ऐसी बेशरमियां हर रोज देखने को मिलेंगी .. ही ही हंसते हुए ...

मुझे तुमको घर पहुंचाकर काम पर भी जाना है,

कालेज की एक से एक जबरदस्त माल आईटम को देखकर मेरा लन्ड कई बार हरकत में आया था और बाईक पर वापसी के समय शालिनी भी कुछ ज्यादा ही सटकर बैठी थी, मैंने कई बार उसकी गुदाज चुचियों को अपनी पीठ पर महसूस किया, और बातें करते हुए हम घर आ गए । इस थोड़ी चुहलबाज़ी से मुझे थोड़ी हिम्मत और बढ़ी कि शालिनी को जल्दी ही मैं लाइन पर ले आऊंगा ।

शालिनी को घर छोड़ कर मैं अपना बैग लेकर घर से निकल लिया, मन में सारी पढ़ी हुई सेक्स कहानियों के किरदार नजर के सामने आ रहे थे, मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं शालिनी के साथ बातचीत में थोड़ा सा फ्री हो पाया हूं अब उसके शरीर के साथ अपने आप को कैसे फ्री करूं ,,, कालेज में लड़कियों के नंगेपन ने मेरी कुछ मदद तो कर दी थी, मगर इसके आगे क्या ??

शाम को सात बजे मैं वापस घर आया और आते ही मैंने कपड़े बदले और नहाने लगा,,, नहाकर मैंने फिर से बिना अंडरवियर के बरमूडा पहन लिया।।

शालिनी मेरे लिए नाश्ता बनाकर ले आई और मेरे सामने रख दिया और रखते हुए जब वो झुकी तो मेरी गंदी नज़रों ने पहली बार, जान बूझकर, उसकी टी-शर्ट के खुल्ले हुए गले के अन्दर की तरफ देखा…

और जो मुझे दिखा, उसके बाद तो मेरे लंड का बैठे रहना दुश्वार हो गया.. गला नीचे करने की वजह से उसके गले की गहरी घाटियाँ अंदर तक मुझे दिखाई दे गयी… दो पके हुए मोटे तरबूज ठीक मेरी नज़रों के सामने थे…

उनकी कसावट का अंदाज़ा मैं थोड़ा थोड़ा ले ही चूका था, काली ब्रा में कसे हुए ऐसे थे कि वो हिल भी नही रहे थे, एकदम किसी पत्थर की तरह जम कर चिपके हुए थे वो उसकी छाती से..

पर यहाँ मेरी गंदी नज़रों की चोरी पकड़ी गयी।

मैं उसके बूब्स को देख रहा था और वो मुझे

शालिनी- भाई कहां हो तुम, चाय ठंडी हो जायेगी ।

और एक कातिलाना स्माइल देकर वो अपनी गान्ड मटकाती हुई फिर से किचन मे चली गयी..

मेरा मुँह खुल्ला का खुल्ला रह गया, शालिनी ने कुछ नही कहा… एक तरह से देखा जाए तो मैने आज ही पहली बार शालिनी के ऑलमोस्ट नंगे बूब्स देखे उसकी जानकारी में, और उसने मुझे देखते हुए पकड़ा भी और मुस्कुराइ भी.. यानी उसे इस बात मे मज़ा आ रहा है क्या ??

शालिनी ने आज वीशेप गले की टी-शर्ट और निक्कर पहनी थी, इन कपड़ो मे उसके शरीर का एक एक उभार खुल कर दिखाई दे रहा था, मैं अभी लेटकर टीवी देखने लगा । शालिनी को खाना बनाने की तैयारी के लिए बार बार मेरे सामने से गुज़रना पड़ रहा था उसके मादक बदन और मस्त चाल को देख देख कर मेरा लंड खड़ा हो चुका था और मैं अपनी बहन की मस्त जवानी का नयन सुख ले रहा था मुझे पता ही नही चला कि कब मेरे बरमूडा मे बड़ा सा टेंट बन गया था तभी शालिनी मेरे पास आई और बोली-भाई खाना कब खायेंगे ?

सागर- थोड़ी देर में,,

इतना कहकर शालिनी वहाँ से नही हटी और एक टक मेरे बरमूडे मे बने तम्बू को देखने लगी मुझे समझ नही आया कि वो ऐसे क्या देख रही है जब मैने उसकी नज़रो का पीछा किया और अपने तम्बू को देखा तो झट से अपने हाथ से अपने लंड को दबा दिया और वो झट से बाहर बरामदे में चली गई ।

कुछ देर बाद वो अंदर आई और

हम लोगों ने खाना खाया और शालिनी ने साफ सफाई करने के बाद कहा, भाई मैं नहाने जा रही हूं, बहुत पसीना हो रहा है ऐसे तो नींद नहीं आयेगी, मैं लेटकर टीवी देख रहा था, कुछ देर बाद शालिनी नहाकर कमरे में आई तो मैं उसे देखता ही रह गया, आज उसने बिना कहे समीज और निक्कर पहन ली थी, ब्रा तो पक्का नहीं पहनी थी और शायद पैंटी भी नहीं ।
 
शालिनी मेरे सामने खड़ी हो कर अपने हाथ उपर करके बाल संवार रही थी जिससे उसकी चूचियां काफ़ी बड़ी लग रही थीं, मेरे लौड़े में फिर से तनाव आने लगा, फिर वो पानी की बोतल सर के पास रख कर मेरे बगल में लेट गई, हम टीवी देख रहे थे, तभी टीवी में मर्डर फिल्म का गाना आ गया... कभी मेरे साथ कोई रात गुजार...

गाना खत्म होते होते मेरा लन्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया जो शायद शालिनी भी देख रही थी, बट मैंने उसे छुपाने की कोशिश नहीं की... सोचो सामने स्क्रीन पर मल्लिका शेरावत और बगल में कुछ इंच की दूरी पर एक अधनंगी लड़की....

मैंने माहौल को थोड़ा हल्का करने की कोशिश की

सागर- शालिनी , अगले वीक से तुम्हारे क्लासेज़ शुरू हो जायेंगे, कल शाम को चलकर तुम्हारी बुक्स वगैरह ले लें और कुछ कपड़े भी...

शालिनी- जी भाई,

सागर- ओके, गुडनाईट, अब सोते हैं...

नींद तो मेरी आंखों से गायब थी, मुझे इंतज़ार शालिनी के सोने का था... करीब एक घंटे बाद मैंने अपना कल वाला कार्यक्रम फिर शुरू किया... शालिनी के बदन को सूंघने से ही मेरा लन्ड खड़ा हो गया और मैंने धीरे से उसकी समीज उपर उठाई और हौले हौले से उसकी चूचियां सहलाने लगा मैंने चूचियों को दबाया नहीं क्योंकि अगर दबाव ज्यादा हुआ तो शालिनी कहीं जाग ना जाए ।

मैं उसके पेट पर हाथ रख कर उसकी नाभि में उंगली डाल कर धीरे धीरे सहलाता रहा मैंने थोड़ी हिम्मत करके आज उसकी निक्कर को आराम से थोड़ा नीचे सरका दिया.... ये सारा काम करते करते हुए घंटे भर हो चुका था।

मैंने जब देखा निक्कर और नीचे नहीं हो रही है तो मैने धीरे से अपना हाथ उसके अंदर कर दिया... उसने पैंटी नहीं पहनी थी, और क्या बताऊं वो एहसास..... ये मेरी लाइफ का पहला टाइम था किसी की चूत को छूने का... बिल्कुल चिकनी और मखमली... निक्कर में इलास्टिक बैंड होने से बहुत ज्यादा परेशानी नहीं हुई हाथ को उसकी अनछुई बुर को सहलाने में... मैं शालिनी की बुर को देख नहीं पा रहा था मगर अंदर की गर्मी को पूरा महसूस कर रहा था,,, मैंने बहुत सावधानी से अपना दाहिना हाथ उसकी बुर के उपर रखा और बायें हाथ से अपने लौड़े को सहलाने लगा,, तभी शालिनी ने हल्की सी करवट बदलने की कोशिश की, मैंने झट से अपना हाथ बाहर निकाल लिया और कुछ देर इंतजार करने के बाद मैंने ज्यादा कोशिश नहीं की फिर से हाथ अंदर डालने की,,,,

मेरे लौड़े में अब दर्द हो रहा था जो बिना मुठ मारे ठीक नहीं होने वाला था,, मैं धीरे से उठकर बाहर बरामदे में आ गया और वहां शालिनी ने नहाने के बाद अपनी ब्रा और पैंटी सूखने के लिए फैलाई थी, उसकी ब्रा को हाथ में लेकर उसे चूसने चाटने लगा और अपने लौड़े पर रगड़ रगड़ कर उसी में अपना वीर्य निकाल दिया और उसे फिर से सूखने के लिए टांग दिया।

मुठ मारने के बाद सारा जोश ठंडा हो जाता है और वही मेरे साथ भी हुआ,एक बार मैने सोचा कि ब्रा को धोकर डाल दूं, पर कुछ सोच कर मैंने उसे ऐसे ही रहने दिया और कमरे में लेटी हुई अप्सरा के साथ लेट गया, सोने से पहले उसके पेट पर आज हाथ रखकर, मैं सोने लगा, मैं अभी भी शालिनी के बदन से चिपका नहीं था, सिर्फ उसके खुले पेट पर हाथ रखकर सो गया।

मुझे इस सब में मजा तो आ रहा था मगर मैं चाहता था कि जो काम मैं चोरी से करता हूं, वो खुलकर कर सकूं.... जाने वो दिन कब आएगा जब शालिनी कहेगी.... लो भाई पी लो मेरे दूध जीभर कर.... चूस लो इनका सारा रस... इन्ही कल्पनाओं में मुझे नींद आ गई ।

अगले दिन सुबह मेरी नींद फिर शालिनी से पहले खुल गई पर मैंने फिर से अपना हाथ उसके गोरे पेट पर रख दिया और सोने की एक्टिंग करने लगा, मैं शालिनी का रियेक्सन देखना चाहता था,,,

मैं आंखें बंद करके लेटा रहा और काफी देर तक इंतजार करने के बाद शालिनी के बदन में हरकत हुई,वो थोड़ा सा ऊपर की ओर खिसकी लेटे ही लेटे... उसने अब तक मेरा हाथ नहीं हटाया था अपने पेट से.... करीब पांच मिनट ऐसे ही लेटे रहने के बाद शालिनी ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और उसे हल्का सा सहलाते हुए धीरे से हटा दिया और वो बेड से उठ कर बाथरूम में चली गई ।

मैं वैसे ही लेटा रहा, शालिनी ने फ्रेश होकर चाय बनाई और मुझे जगाया...

शालिनी- उठो भाई, योर बेड टी इज रेडी ।

मैं अंगड़ाई लेते हुए उठा और उसे गुड मॉर्निंग बोलकर चाय का कप हाथ में पकड़ा,,, मेरे बरमूडे में फिर से मार्निंग हार्डआन की वजह से तम्बू बना हुआ था, मगर अब मैंने उसे छुपाने की कोशिश नहीं की, शालिनी भी मेरे साथ बेड पर बैठ कर चाय पी रही थी और उसने समीज निकाल कर टीशर्ट पहन ली थी,।

और वो काफी खुश लग रही थी मतलब उसे मेरा उसके पेट पर हाथ रखकर सोना बुरा नहीं लगा था,,,

सुबह सुबह बिना ब्रा के शालिनी के उछलते हुए दूध देखकर अपने आप को रोक पाना बहुत मुश्किल काम था...

खैर, डेली रूटीन के काम करते हुए मैं नाश्ता करके अपने काम पर निकल लिया और शालिनी से शाम को शापिंग मॉल चलने को कहकर उसे रेडी रहने को बोल दिया!

दिन में मैंने कई बार उसको वीडियो काल करी, मैं जल्दी घर आना चाहिए रहा था ।

मैं शाम को वापस आया और आज मैं ये सोच कर शापिंग मॉल जाने के लिए निकला था कि शालिनी के साथ बातचीत में और फ्री होने की कोशिश करूंगा।

मैं और शालिनी शाम पांच बजे शॉपिंग के लिए अपनी बाईक से निकल आये । मैंने नोटिस किया कि शालिनी ने घर से निकलते समय बाईक पर मुझसे दूरी बनाई थी और थोड़ी दूर निकल कर वो बात करने के बहाने मेरी पीठ से चिपक कर बैठ गई । इस दोहरे चरित्र को देख मुझे बहुत अच्छा लगा, ऐसा लगा जैसे शालिनी को घर पे मुझे अपना बदन दिखाने में कोई प्रॉब्लम नहीं होती है या शायद उसे मुझे अपना बदन दिखाना अच्छा लगने लगा है। वहीँ घर से निकलते समय बाहर वो एक साधारण सीधी लड़की की तरह सादगी से रहती है।
 
हम लोग पहले एक बुकस्टोर पर गए और शालिनी की कुछ बुक्स लेकर आगे की शापिंग के लिए निकले ।

शालिनी बाईक की सीट पे बैठे हुए ही मैंने अपनी बाईक एक मॉल के तरफ मोड़ लिया। मैं गाडी पार्किंग में लगा के शालिनी को आगे आगे चलने को बोल कर फॉलो करने लगा। शालिनी ने अपने बदन को जींस और टी-शर्ट में ढक तो लिया था लेकिन वो अपने सेक्सी फिगर को नहीं छुपा पा रही थी और जींस में उसके बड़े- बड़े हिप्स किस्सी को भी पागल बना सकते थे।

मॉल में हर उम्र के काफी लोग एक बार मुड़ के मेरी बहन की मटकती गांड को जरूर देखते।

सबसे पहले शालिनी ने एक शाप में ब्रा और पैंटी लेने पहुचे। मेरी चारो तरफ लेडीज के अंडरर्गारमेंट लटके थे मेरे अलावा वहां सभी लड़कियां शॉपिंग कर रही थी।

शालिनी का कांफिडेंस इस बार देखने वाला था वो टहल टहल कर कलरफुल ब्रा और पेंटी सर्च करने लगी मैंने भी हेल्प करना चाहा तो शालिनी ने मुझे ३४ साइज ढूंढने के लिए बोला। मैं २-३ ब्रा उठा कर शालिनी की तरफ बढ़ाया।

शालिनी - ओह ... वाव.. ये ब्रा तो अच्छी लग रही हैं लेकिन ये ३४बी है ।

मै - ३४बी, बट तुमने ३४ ही तो बोला था।

शालिनी - हाँ लेकिन मुझे कप साइज डी चहिये।

मैं - तो क्या ३४बी छोटा साइज है ?

शालिनी - (अपने हाथो को अपने बूब्स के तरफ दिखाते हुए।) साइज सेम है लेकिन ३४डी का कप बड़ा होता है ।

मै - (शालिनी के बूब्स को घूरते हुये) ओके मैं और देखता हूं ।

मैंने एक लाल रंग का सेट पसंद किया जो पोल्का डाट्स वाला था, एक और पर्पल कलर का, दो शालिनी ने पसंद किया उनमें से एक पैड वाली ब्रा स्किन कलर की भी थी। चार सेट ब्रा पैंटी लेने के बाद मैंने और शालिनी ने जींस टी-शर्ट हम दोनों के खरीदे दो दो सेट।

शालिनी की आज की शापिंग को देखकर कोई यह नहीं कह सकता था कि हम दोनों बॉय फ्रेंड और गर्लफ्रेंड नहीं हैं ।

मेरे लाख कहने पर भी उसने किसी भी कपड़े का ट्रायल नहीं किया । हम दोनों को आज की शॉपिंग में बहुत मजा आया था पिछली बार की शॉपिंग में शालिनी शर्मा रही थी इस बार सबसे पहले अपने लिए ब्रा और पैंटी खरीदी वो भी मुझे दिखा दिखाकर अलग अलग डिजाइन डिफरेंट फैब्रिक की ।

शालिनी ने अपने लिए कुछ स्टॉल और टी शर्ट के ऊपर पहनने वाले फुल लेंथ अपरन जैसी हल्की टी-शर्ट ली, ।

शालिनी- भाई जी आपके लिए तो अंडर गारमेंट लिए ही नहीं मैंने कहा था कि अब से जो भी शापिंग होगी दोनों की होगी।

मैं- अरे रहने को मेरे पास वैसे भी बहुत है।

शालिनी- हां हां, आपको कोई जरूरत ही नहीं, आप तो वैसे भी बिना अंडरगार्मेंट ज्यादा अच्छा फील करते हैं... और वो हल्के से मुस्कुराई...

मैं - हां वो तो है क्या तुम्हें अच्छा फील नहीं होता बिना ब्रा पैंटी के ।

शालिनी- कभी-कभी ।

रात के 10: 00 बजे थे हम दोनों को अब घर वापस आना था।

हमने रास्ते में ही एक रेस्टोरेंट में खाना खा लिया, रेस्टोरेंट से निकल कर बाहर..

शालिनी- भाई जी, एक मोस्ट इम्पार्टटेेन्ट चीज़ तो लेना मैं भूल ही गई।

मैं- क्या, अभी तो मार्केट क्लोज़ हो रही हैं ।

शालिनी- वो ... भाई मेरे पीरियड शायद कल से शुरू हो जायेंगे, तो वो पैड लेना है और कोई पेन किलर भी, मुझे पेट में दर्द कुछ ज्यादा होता है ।

मैंने आसपास नजर दौड़ाई तो देखा कि एक मेडिकल स्टोर खुला था, वहां से जाकर मैंने पैड लिए तब तक शालिनी रेस्टोरेंट के बाहर वेट करती रही।, हमारे पास काफी सारे बैग हो गये थे ।

हम 11: 00 बजे घर आ गए । घर आकर मैं तुरंत अपने बिना अंडरवियर के बरमूडे मे आ गया और लेटकर टीवी आन कर ली, शालिनी सारे बैग लेकर पीछे कमरे में चली गई।

शालिनी - भाई जी।। भाईजी

मैं

मै - क्या हुआ ?

शालिनी पीछे अपने कमरे मेंअपने नए कपडे ट्राई करना चाहती थी।।

कालेज में आ कर हम लोगों ने एडमिशन की फार्मेलिटीज पूरी की, और क्लासेज़ शुरू होने के लिए पता करके हम लोग कालेज घूमते रहे.. काफी पैरेंट्स और कुछ लड़कियों के ब्वायफ्रेन्ड भी साथ में थे वहां पर, सभी लोग अपने अपने काम में बिजी थे, इस कालेज की खासियत यह थी कि यहां अपर मिडिल क्लास फैमिली की लड़कियां ज्यादा पढ़ती थी, शहर की सबसे माडर्न लड़कियों में से कुछ एक यहां भी घूम रहीं थीं, सीनियर लड़कियों में कुछ ने बहुत ही सेक्सी कपड़े पहन रखे थे, किसी के दूध दिख रहे थे तो किसी की लो वेस्ट जींस के ऊपर पैंटी... और किसी की ब्रा नुमाइश कर रही थी कपड़ों के ऊपर से ...

लड़कियों का कालेज होने से खुलापन या कहें नंगापन कुछ ज्यादा ही था।

कुछ लड़कियां नये एडमिशन वाली भी गजब अंग प्रदर्शन कर रहीं थीं... मुझे लगा साला यहां तो एक से एक खूबसूरत आईटम हैं और चंचल भी,,,, कहीं शालिनी इन सब के चक्कर में ना आ जाए।। आज कल मैं सिटी का माहौल देख ही रहा था, पहले लड़कियां सिर्फ प्यार करतीं थीं और आज कल चुदाई और शापिंग ....

मैंने तो पहले से ही सोच लिया था कि मुझे शालिनी को ब्वायफ्रेन्ड के चक्कर में पड़ने से पहले ही अपना हमबिस्तर बना लेना है, और अब मैं ये जल्दी करना चाह रहा था ।

खैर,,, मैं और शालिनी लाईब्रेरी का कार्ड बनवाने के बाद बाहर बड़े ग्राउंड में आकर घास पर एक पेड़ की छांव में बैठ गये ।

सागर- तो तुम्हारे तो सारे काम हो गए, अब दस मिनट आराम कर लें फिर घर चलें । और कालेज कैंपस कैसा लगा।

शालिनी- बहुत जबरदस्त... बस पढ़ाई भी ऐसी ही जबरदस्त हो...

वह बहुत ही एक्साइटेड थी

सागर- हां, यहां पढ़ाई भी टापक्लास है और बाकी सब भी

शालिनी थोड़ा हंसने के बाद बोली हां वो तो दिख रहा है।

सागर- हां, दिख तो रहा ही है, यहां की लड़कियों का कान्फीडेन्स देखा... बोल्ड ब्यूटीज...

शालिनी- बोल्ड भी और बेशर्म भी...

सागर- अरे, यहां मुझे तो कोई बेशर्म नही दिखाई देता है...

शालिनी- वो सामने ही देखिए, वो लड़की की शर्म।

सागर- नहीं, वो क्या बेशर्मी कर रही है, वो तो अपने साथ आए लड़के से बात कर रही है।

शालिनी- नहीं,मेरा वो मतलब नहीं है, आप वो.... वो उसके कपड़े देखिए कितना एक्सपोज हो रहा है।
 
सामने कुछ दूर पर जो लड़की खड़ी थी, उसने खुले कन्धों वाली ड्रेस पहनी थी जिससे उसकी लाल रंग की ब्रा की पट्टियां पूरी दिखाई दे रही थी, और अंदर से उसकी लाल ब्रा का शेप पूरी तरह से सफेद रंग के झीने टाप से नुमायां हो रहा था, उसकी चूचियां काफ़ी बड़ी थी, नीचे उसने शार्ट जींस पहनी थी जो उसके घुटनों से कुछ ऊपर ही थी और उसके गोरे मांसल पैरों को देखकर किसी का भी लन्ड खड़ा हो जाता....

सागर- कम आन... यार इतना सब चलता है यहां सिटी में, किसी के पास इतना टाइम नहीं है कि वो ये सब देखें... बहुत बिजी हैं लोग और माडर्न भी ।

मैंने पहली बार शालिनी को यार कहकर बात की थी, और शायद उसे अच्छा ही लगा था

शालिनी- ओके .. ओके,भाई ...अब मुझे भी यहीं आना है , इन्हीं के साथ पढ़ना है,,,

सागर- हां भई, और एक तुम हो कि घर के अंदर भी तुम्हे शर्म आती है वो भी मेरे साथ, इन लड़कियों का कान्फीडेन्स देखो,,,,

शालिनी- ऐसा कुछ नहीं है वो आप के साथ थोडा़ ध्यान रखना जरूरी रहता है, आफ्टरआल, यू आर माई एल्डर ब्रदर, और मेरी तरफ से आपको कोई परेशानी ना हो, बस .... वैसे मैं भी इस तरह के कपड़े पहनना पसंद करूंगी, बट कालेज में नहीं, कोई पार्टी वगैरह हो तो....

सागर- कोई नहीं, जब तुम्हारे अंदर कान्फीडेन्स आ जायेगा तो तुम भी पहनोगी कालेज हो या पार्टी... इट्स आल अबाउट कान्फीडेन्स ।

शालिनी- ओके, देखते हैं, अब घर चलें,या और किसी की बेशर्मी देखनी है... हंसते हुए

सागर- हां, चलो, आज के लिए इतनी काफी है अब तो हर रोज तुम्हें जब कालेज छोड़ने आऊंगा तो ऐसी बेशरमियां हर रोज देखने को मिलेंगी .. ही ही हंसते हुए ...

मुझे तुमको घर पहुंचाकर काम पर भी जाना है,

कालेज की एक से एक जबरदस्त माल आईटम को देखकर मेरा लन्ड कई बार हरकत में आया था और बाईक पर वापसी के समय शालिनी भी कुछ ज्यादा ही सटकर बैठी थी, मैंने कई बार उसकी गुदाज चुचियों को अपनी पीठ पर महसूस किया, और बातें करते हुए हम घर आ गए । इस थोड़ी चुहलबाज़ी से मुझे थोड़ी हिम्मत और बढ़ी कि शालिनी को जल्दी ही मैं लाइन पर ले आऊंगा ।

शालिनी को घर छोड़ कर मैं अपना बैग लेकर घर से निकल लिया, मन में सारी पढ़ी हुई सेक्स कहानियों के किरदार नजर के सामने आ रहे थे, मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं शालिनी के साथ बातचीत में थोड़ा सा फ्री हो पाया हूं अब उसके शरीर के साथ अपने आप को कैसे फ्री करूं ,,, कालेज में लड़कियों के नंगेपन ने मेरी कुछ मदद तो कर दी थी, मगर इसके आगे क्या ??

शाम को सात बजे मैं वापस घर आया और आते ही मैंने कपड़े बदले और नहाने लगा,,, नहाकर मैंने फिर से बिना अंडरवियर के बरमूडा पहन लिया।।

शालिनी मेरे लिए नाश्ता बनाकर ले आई और मेरे सामने रख दिया और रखते हुए जब वो झुकी तो मेरी गंदी नज़रों ने पहली बार, जान बूझकर, उसकी टी-शर्ट के खुल्ले हुए गले के अन्दर की तरफ देखा…

और जो मुझे दिखा, उसके बाद तो मेरे लंड का बैठे रहना दुश्वार हो गया.. गला नीचे करने की वजह से उसके गले की गहरी घाटियाँ अंदर तक मुझे दिखाई दे गयी… दो पके हुए मोटे तरबूज ठीक मेरी नज़रों के सामने थे…

उनकी कसावट का अंदाज़ा मैं थोड़ा थोड़ा ले ही चूका था, काली ब्रा में कसे हुए ऐसे थे कि वो हिल भी नही रहे थे, एकदम किसी पत्थर की तरह जम कर चिपके हुए थे वो उसकी छाती से..

पर यहाँ मेरी गंदी नज़रों की चोरी पकड़ी गयी।

मैं उसके बूब्स को देख रहा था और वो मुझे

शालिनी- भाई कहां हो तुम, चाय ठंडी हो जायेगी ।

और एक कातिलाना स्माइल देकर वो अपनी गान्ड मटकाती हुई फिर से किचन मे चली गयी..

मेरा मुँह खुल्ला का खुल्ला रह गया, शालिनी ने कुछ नही कहा… एक तरह से देखा जाए तो मैने आज ही पहली बार शालिनी के ऑलमोस्ट नंगे बूब्स देखे उसकी जानकारी में, और उसने मुझे देखते हुए पकड़ा भी और मुस्कुराइ भी.. यानी उसे इस बात मे मज़ा आ रहा है क्या ??

शालिनी ने आज वीशेप गले की टी-शर्ट और निक्कर पहनी थी, इन कपड़ो मे उसके शरीर का एक एक उभार खुल कर दिखाई दे रहा था, मैं अभी लेटकर टीवी देखने लगा । शालिनी को खाना बनाने की तैयारी के लिए बार बार मेरे सामने से गुज़रना पड़ रहा था उसके मादक बदन और मस्त चाल को देख देख कर मेरा लंड खड़ा हो चुका था और मैं अपनी बहन की मस्त जवानी का नयन सुख ले रहा था मुझे पता ही नही चला कि कब मेरे बरमूडा मे बड़ा सा टेंट बन गया था तभी शालिनी मेरे पास आई और बोली-भाई खाना कब खायेंगे ?

सागर- थोड़ी देर में,,

इतना कहकर शालिनी वहाँ से नही हटी और एक टक मेरे बरमूडे मे बने तम्बू को देखने लगी मुझे समझ नही आया कि वो ऐसे क्या देख रही है जब मैने उसकी नज़रो का पीछा किया और अपने तम्बू को देखा तो झट से अपने हाथ से अपने लंड को दबा दिया और वो झट से बाहर बरामदे में चली गई ।

कुछ देर बाद वो अंदर आई और

हम लोगों ने खाना खाया और शालिनी ने साफ सफाई करने के बाद कहा, भाई मैं नहाने जा रही हूं, बहुत पसीना हो रहा है ऐसे तो नींद नहीं आयेगी, मैं लेटकर टीवी देख रहा था, कुछ देर बाद शालिनी नहाकर कमरे में आई तो मैं उसे देखता ही रह गया, आज उसने बिना कहे समीज और निक्कर पहन ली थी, ब्रा तो पक्का नहीं पहनी थी और शायद पैंटी भी नहीं ।
 
शालिनी मेरे सामने खड़ी हो कर अपने हाथ उपर करके बाल संवार रही थी जिससे उसकी चूचियां काफ़ी बड़ी लग रही थीं, मेरे लौड़े में फिर से तनाव आने लगा, फिर वो पानी की बोतल सर के पास रख कर मेरे बगल में लेट गई, हम टीवी देख रहे थे, तभी टीवी में मर्डर फिल्म का गाना आ गया... कभी मेरे साथ कोई रात गुजार...

गाना खत्म होते होते मेरा लन्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया जो शायद शालिनी भी देख रही थी, बट मैंने उसे छुपाने की कोशिश नहीं की... सोचो सामने स्क्रीन पर मल्लिका शेरावत और बगल में कुछ इंच की दूरी पर एक अधनंगी लड़की....

मैंने माहौल को थोड़ा हल्का करने की कोशिश की

सागर- शालिनी , अगले वीक से तुम्हारे क्लासेज़ शुरू हो जायेंगे, कल शाम को चलकर तुम्हारी बुक्स वगैरह ले लें और कुछ कपड़े भी...

शालिनी- जी भाई,

सागर- ओके, गुडनाईट, अब सोते हैं...

नींद तो मेरी आंखों से गायब थी, मुझे इंतज़ार शालिनी के सोने का था... करीब एक घंटे बाद मैंने अपना कल वाला कार्यक्रम फिर शुरू किया... शालिनी के बदन को सूंघने से ही मेरा लन्ड खड़ा हो गया और मैंने धीरे से उसकी समीज उपर उठाई और हौले हौले से उसकी चूचियां सहलाने लगा मैंने चूचियों को दबाया नहीं क्योंकि अगर दबाव ज्यादा हुआ तो शालिनी कहीं जाग ना जाए ।

मैं उसके पेट पर हाथ रख कर उसकी नाभि में उंगली डाल कर धीरे धीरे सहलाता रहा मैंने थोड़ी हिम्मत करके आज उसकी निक्कर को आराम से थोड़ा नीचे सरका दिया.... ये सारा काम करते करते हुए घंटे भर हो चुका था।

मैंने जब देखा निक्कर और नीचे नहीं हो रही है तो मैने धीरे से अपना हाथ उसके अंदर कर दिया... उसने पैंटी नहीं पहनी थी, और क्या बताऊं वो एहसास..... ये मेरी लाइफ का पहला टाइम था किसी की चूत को छूने का... बिल्कुल चिकनी और मखमली... निक्कर में इलास्टिक बैंड होने से बहुत ज्यादा परेशानी नहीं हुई हाथ को उसकी अनछुई बुर को सहलाने में... मैं शालिनी की बुर को देख नहीं पा रहा था मगर अंदर की गर्मी को पूरा महसूस कर रहा था,,, मैंने बहुत सावधानी से अपना दाहिना हाथ उसकी बुर के उपर रखा और बायें हाथ से अपने लौड़े को सहलाने लगा,, तभी शालिनी ने हल्की सी करवट बदलने की कोशिश की, मैंने झट से अपना हाथ बाहर निकाल लिया और कुछ देर इंतजार करने के बाद मैंने ज्यादा कोशिश नहीं की फिर से हाथ अंदर डालने की,,,,

मेरे लौड़े में अब दर्द हो रहा था जो बिना मुठ मारे ठीक नहीं होने वाला था,, मैं धीरे से उठकर बाहर बरामदे में आ गया और वहां शालिनी ने नहाने के बाद अपनी ब्रा और पैंटी सूखने के लिए फैलाई थी, उसकी ब्रा को हाथ में लेकर उसे चूसने चाटने लगा और अपने लौड़े पर रगड़ रगड़ कर उसी में अपना वीर्य निकाल दिया और उसे फिर से सूखने के लिए टांग दिया।

मुठ मारने के बाद सारा जोश ठंडा हो जाता है और वही मेरे साथ भी हुआ,एक बार मैने सोचा कि ब्रा को धोकर डाल दूं, पर कुछ सोच कर मैंने उसे ऐसे ही रहने दिया और कमरे में लेटी हुई अप्सरा के साथ लेट गया, सोने से पहले उसके पेट पर आज हाथ रखकर, मैं सोने लगा, मैं अभी भी शालिनी के बदन से चिपका नहीं था, सिर्फ उसके खुले पेट पर हाथ रखकर सो गया।

मुझे इस सब में मजा तो आ रहा था मगर मैं चाहता था कि जो काम मैं चोरी से करता हूं, वो खुलकर कर सकूं.... जाने वो दिन कब आएगा जब शालिनी कहेगी.... लो भाई पी लो मेरे दूध जीभर कर.... चूस लो इनका सारा रस... इन्ही कल्पनाओं में मुझे नींद आ गई ।

अगले दिन सुबह मेरी नींद फिर शालिनी से पहले खुल गई पर मैंने फिर से अपना हाथ उसके गोरे पेट पर रख दिया और सोने की एक्टिंग करने लगा, मैं शालिनी का रियेक्सन देखना चाहता था,,,

मैं आंखें बंद करके लेटा रहा और काफी देर तक इंतजार करने के बाद शालिनी के बदन में हरकत हुई,वो थोड़ा सा ऊपर की ओर खिसकी लेटे ही लेटे... उसने अब तक मेरा हाथ नहीं हटाया था अपने पेट से.... करीब पांच मिनट ऐसे ही लेटे रहने के बाद शालिनी ने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और उसे हल्का सा सहलाते हुए धीरे से हटा दिया और वो बेड से उठ कर बाथरूम में चली गई ।

मैं वैसे ही लेटा रहा, शालिनी ने फ्रेश होकर चाय बनाई और मुझे जगाया...

शालिनी- उठो भाई, योर बेड टी इज रेडी ।

मैं अंगड़ाई लेते हुए उठा और उसे गुड मॉर्निंग बोलकर चाय का कप हाथ में पकड़ा,,, मेरे बरमूडे में फिर से मार्निंग हार्डआन की वजह से तम्बू बना हुआ था, मगर अब मैंने उसे छुपाने की कोशिश नहीं की, शालिनी भी मेरे साथ बेड पर बैठ कर चाय पी रही थी और उसने समीज निकाल कर टीशर्ट पहन ली थी,।

और वो काफी खुश लग रही थी मतलब उसे मेरा उसके पेट पर हाथ रखकर सोना बुरा नहीं लगा था,,,

सुबह सुबह बिना ब्रा के शालिनी के उछलते हुए दूध देखकर अपने आप को रोक पाना बहुत मुश्किल काम था...

खैर, डेली रूटीन के काम करते हुए मैं नाश्ता करके अपने काम पर निकल लिया और शालिनी से शाम को शापिंग मॉल चलने को कहकर उसे रेडी रहने को बोल दिया!

दिन में मैंने कई बार उसको वीडियो काल करी, मैं जल्दी घर आना चाहिए रहा था ।

मैं शाम को वापस आया और आज मैं ये सोच कर शापिंग मॉल जाने के लिए निकला था कि शालिनी के साथ बातचीत में और फ्री होने की कोशिश करूंगा।

मैं और शालिनी शाम पांच बजे शॉपिंग के लिए अपनी बाईक से निकल आये । मैंने नोटिस किया कि शालिनी ने घर से निकलते समय बाईक पर मुझसे दूरी बनाई थी और थोड़ी दूर निकल कर वो बात करने के बहाने मेरी पीठ से चिपक कर बैठ गई । इस दोहरे चरित्र को देख मुझे बहुत अच्छा लगा, ऐसा लगा जैसे शालिनी को घर पे मुझे अपना बदन दिखाने में कोई प्रॉब्लम नहीं होती है या शायद उसे मुझे अपना बदन दिखाना अच्छा लगने लगा है। वहीँ घर से निकलते समय बाहर वो एक साधारण सीधी लड़की की तरह सादगी से रहती है।

हम लोग पहले एक बुकस्टोर पर गए और शालिनी की कुछ बुक्स लेकर आगे की शापिंग के लिए निकले ।

शालिनी बाईक की सीट पे बैठे हुए ही मैंने अपनी बाईक एक मॉल के तरफ मोड़ लिया। मैं गाडी पार्किंग में लगा के शालिनी को आगे आगे चलने को बोल कर फॉलो करने लगा। शालिनी ने अपने बदन को जींस और टी-शर्ट में ढक तो लिया था लेकिन वो अपने सेक्सी फिगर को नहीं छुपा पा रही थी और जींस में उसके बड़े- बड़े हिप्स किस्सी को भी पागल बना सकते थे।

मॉल में हर उम्र के काफी लोग एक बार मुड़ के मेरी बहन की मटकती गांड को जरूर देखते।

सबसे पहले शालिनी ने एक शाप में ब्रा और पैंटी लेने पहुचे। मेरी चारो तरफ लेडीज के अंडरर्गारमेंट लटके थे मेरे अलावा वहां सभी लड़कियां शॉपिंग कर रही थी।

शालिनी का कांफिडेंस इस बार देखने वाला था वो टहल टहल कर कलरफुल ब्रा और पेंटी सर्च करने लगी मैंने भी हेल्प करना चाहा तो शालिनी ने मुझे ३४ साइज ढूंढने के लिए बोला। मैं २-३ ब्रा उठा कर शालिनी की तरफ बढ़ाया।

शालिनी - ओह ... वाव.. ये ब्रा तो अच्छी लग रही हैं लेकिन ये ३४बी है ।

मै - ३४बी, बट तुमने ३४ ही तो बोला था।

शालिनी - हाँ लेकिन मुझे कप साइज डी चहिये।

मैं - तो क्या ३४बी छोटा साइज है ?

शालिनी - (अपने हाथो को अपने बूब्स के तरफ दिखाते हुए।) साइज सेम है लेकिन ३४डी का कप बड़ा होता है ।

मै - (शालिनी के बूब्स को घूरते हुये) ओके मैं और देखता हूं ।

मैंने एक लाल रंग का सेट पसंद किया जो पोल्का डाट्स वाला था, एक और पर्पल कलर का, दो शालिनी ने पसंद किया उनमें से एक पैड वाली ब्रा स्किन कलर की भी थी। चार सेट ब्रा पैंटी लेने के बाद मैंने और शालिनी ने जींस टी-शर्ट हम दोनों के खरीदे दो दो सेट।

शालिनी की आज की शापिंग को देखकर कोई यह नहीं कह सकता था कि हम दोनों बॉय फ्रेंड और गर्लफ्रेंड नहीं हैं ।

मेरे लाख कहने पर भी उसने किसी भी कपड़े का ट्रायल नहीं किया । हम दोनों को आज की शॉपिंग में बहुत मजा आया था पिछली बार की शॉपिंग में शालिनी शर्मा रही थी इस बार सबसे पहले अपने लिए ब्रा और पैंटी खरीदी वो भी मुझे दिखा दिखाकर अलग अलग डिजाइन डिफरेंट फैब्रिक की ।

शालिनी ने अपने लिए कुछ स्टॉल और टी शर्ट के ऊपर पहनने वाले फुल लेंथ अपरन जैसी हल्की टी-शर्ट ली, ।

शालिनी- भाई जी आपके लिए तो अंडर गारमेंट लिए ही नहीं मैंने कहा था कि अब से जो भी शापिंग होगी दोनों की होगी।

मैं- अरे रहने को मेरे पास वैसे भी बहुत है।

शालिनी- हां हां, आपको कोई जरूरत ही नहीं, आप तो वैसे भी बिना अंडरगार्मेंट ज्यादा अच्छा फील करते हैं... और वो हल्के से मुस्कुराई...

मैं - हां वो तो है क्या तुम्हें अच्छा फील नहीं होता बिना ब्रा पैंटी के ।

शालिनी- कभी-कभी ।
 
रात के 10: 00 बजे थे हम दोनों को अब घर वापस आना था।

हमने रास्ते में ही एक रेस्टोरेंट में खाना खा लिया, रेस्टोरेंट से निकल कर बाहर..

शालिनी- भाई जी, एक मोस्ट इम्पार्टटेेन्ट चीज़ तो लेना मैं भूल ही गई।

मैं- क्या, अभी तो मार्केट क्लोज़ हो रही हैं ।

शालिनी- वो ... भाई मेरे पीरियड शायद कल से शुरू हो जायेंगे, तो वो पैड लेना है और कोई पेन किलर भी, मुझे पेट में दर्द कुछ ज्यादा होता है ।

मैंने आसपास नजर दौड़ाई तो देखा कि एक मेडिकल स्टोर खुला था, वहां से जाकर मैंने पैड लिए तब तक शालिनी रेस्टोरेंट के बाहर वेट करती रही।, हमारे पास काफी सारे बैग हो गये थे ।

हम 11: 00 बजे घर आ गए । घर आकर मैं तुरंत अपने बिना अंडरवियर के बरमूडे मे आ गया और लेटकर टीवी आन कर ली, शालिनी सारे बैग लेकर पीछे कमरे में चली गई।

शालिनी - भाई जी।। भाईजी

मैं

मै - क्या हुआ ?

शालिनी पीछे अपने कमरे मेंअपने नए कपडे ट्राई करना चाहती थी।।

शालिनी ने पीछे कमरे से मुझे आवाज दी तो मैंने पूछा क्या हुआ तो उसने कहा भाई मैं अपने कपड़ो की फिटिंग चेक कर रही हूं, आप भी अपनी जींस चेक कर लीजिए, बट मैंने कहा मैं सुबह चेक कर लूंगा, तुम ट्राई कर लो.... और पहन कर बाहर आओ ... मैं हसीन नजारे को देखने की तमन्ना लिए लेटकर टीवी देखता रहा.....

थोड़ी देर में शालिनी ग्रीन कलर की टीशर्ट और डार्क ब्राउन कलर की जींस पैंट पहने मेरे सामने खड़ी थी। वह बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी। उसके बाल पूरे खुले हुये थे।

शालिनी - भाईजी, ये पैंट तो बहुत टाइट है, मैंने कमर के साइज २८ देख के लिया था। लेकिन ये यहाँ मेरी थाईज पे बहुत टाइट है।

मै - (टाइट पैंट में शालिनी की जांघें कसी-कसी थी और उसकी बुर का उभार भी साफ़ नज़र आ रहा था) हाँ , ये थोड़ी तो टाइट है। लेकिन इसमें तुम अच्छी दिख रही हो ।

(मैंने मुस्कराते हुए कहा और उठकर बैठ गया)

शालिनी -भाई,वो .... वो... मैंने ये पैंट बिना पैन्टी के पहनी है फिर भी ये इतनी टाइट है, तो पैन्टी पहनने के बाद और टाइट हो जाएगी।

(बिना पैन्टी के ?? शालिनी कीे बात सुनते हीे मैंने अपनी नज़र उसकी बुर वाले हिस्से पे गड़ा ली। ओह ....... शालिनी की बुर मुझसे बस कुछ इंच की दूरी पर थी । मेरा लंड खड़ा होने लगा)

शालिनी - (थोड़ा उदास होते हुये) मुझे सारे कपडे ट्राई कर के लेने चाहिए थे।

मै - कोई बात नहीं मेरी स्वीट बहना, ये अभी हल्का सा ढीली होयेगी पहनने पर, इसका फैब्रिक ऐसा ही है और नहीं तो चेंज करके दूसरी ले लेंगे। तुम बाकी के कपड़े भी ट्राई कर के देख लो,,,, ब्रा और पैन्टी भी ... कहीं वो भी तो छोटी नहीं है ?

मैंने मौका देख कर चौका मारा....

शालिनी - ठीक है भाई जी आप यहीं बेड पे बैठिये मैं बाकी के कपड़े भी ट्राई करती हूँ।

मै बेड पे बैठ गया, और शालिनी पीछे मुड़ कर कमरे में जाकर कपड़े उतारने लगी । आज के पहले वो हमेशा दरवाजा ढलका करके कपड़े बदलती थी और मैंने कभी उसे चोरी से देखा भी नहीं था, कपड़े बदलते हुए, मैं हल्का सा बेड से उतर कर पीछे कमरे की तरफ देखा तो खुले दरवाजे से उसकी नंगी गोरी चिकनी पीठ मेरे सामने थी ।

शालिनी शापिंग बैग से उसकी रेड ब्रा निकाल के पहन रही थी, शालिनी अपने हाथ पीछे करके ब्रा का हुक लगा रही थी, उसकी गोरी पीठ पर लाल ब्रा की सिर्फ एक पट्टी,,,,अह्ह्ह्ह

मैं सोचने लगा की शालिनी के सामने से बूब्स अभी कैसे दिख रहे होंगे। मैं दिवार के तरफ पिलो लगा कर बैठ गया और वहां से शालिनी को ऐसे अधनंगा देख मेरा लंड रगड़ने का मन करने लगा और मैं अपना हाथ बरमूडे में डालकर लंड को मसलने लगा।

शालिनी ने बिना मेरी तरफ मुड़े अपनी ब्रा पहन ली,मेरा एक हाथ अभी भी लंड को मसल रहा था। शालिनी ने एक टॉवल लपेटकर अपनी पैेंट उतार कर बेड पे फेंक दी और पैर उठा के पेंटी पहनने लगी। मैं तेजी से मुठ मार रहा था। उसने पैेंटी और ब्रा पहनने के बाद टॉवल को नीचे गिरा दिया और मेरी तरफ मुड़ गई।

मेरी तो जैसे साँस ही अटक गई।। मेरी जवान बहन अपने भरे-भरे बदन को सिर्फ एक रेड कलर के ब्रा और पैन्टी में ढके मेरे सामने कुछ दूर खड़ी थी, शालिनी ने कई बार अपनी बाडी को इधर उधर करके अपने आप को एडजस्ट किया और फिर वो मेरी तरफ बढ़ी..... सिर्फ लाल पोल्का डॉट्स ब्रा और लाल रंग की पैंटी में.... क़यामत लग रही थी वो .....

मैने अपना हाथ स्लो कर दिया ताकि शालिनी को पता न चले के मैं मुठ मार रहा हूं।

शालिनी - (मेरे एकदम करीब आकर) कैसी लग रही हूँ भाईजी, इसकी फिटिंग तो ठीक है।

मैं - (मेरी साँसे तेज़ थी) बहुत अच्छी लग रही हो बहना,,,,, लाल कलर के ब्रा पैन्टी में बहुत गोरी लग रही हो.... और और.... सेक्सी भी... मैंने एक झटके में बोल दिया ।

शालिनी - (हँसते हुवे ) सच्ची भाई, ,,, मुझे भी इसका कलर बहुत पसंद है।

मेरे सामने ही अपने ब्रा को छूते हुये बोली....

शालिनी - भाई जी, इस ब्रा की क्वालिटी कितनी अच्छी है ना ? वैसे भी ये आपकी पसंद की हुई है ।

मै- (मैं हिम्मत करके शालिनी के पास आया और अपने हाथ उसके काँधे के पास ब्रा को हल्का सा छूते हुए बोला-- हाँ इसका फैब्रिक तो बहुत अच्छा है और फिटिंग भी,,,,

मैंने धीरे से अपना हाथ नीचे किया और साइड से शालिनी कीे ब्रा के थोड़ा सा अंदर हाथ ड़ालते हुये ब्रा के कपड़े को छूने लगा। मेरी उंगलियों ने शालिनी की जानकारी में पहली बार उसकी नंगी बूब्स को महसूस किया था ।

मैंने हाथ को जल्दी से वहां से हटा लिया क्योंकि मैं शालिनी को शक में नहीं आने देना चाह रहा था , इस सब के दौरान मेरा लन्ड इस तरह खड़ा था कि मैं अगर शालिनी को सट जाता तो पक्का वो मेरे औजार को महसूस कर लेती,,,,

मुझे लगा कि आज मेरी लाटरी लग रही है पहली बार मैने शालिनी को छुआ और वो भी सीधे उसके अपर ब्रेस्ट को,,,,,

शालिनी फिर से अपनी मदमाती गांड़ को लहराते हुए कमरे में जाकर दूसरी जींस टी-शर्ट पहनकर बाहर आई....

मेरा लौड़ा बदस्तूर खड़ा था और मैं उसे छुपाने के बजाय अब और दिखाना चाहता था कि देख मेरी सेक्सी बहना, तुझे देखकर कैसे तेरे भाई का लन्ड बेकाबू हो रहा है ।

शालिनी ने मुझसे पूछा- ये कैसी है ?

मैं- बहुत ही शानदार, इस जींस की फिटिंग तो तुम्हारी थाईज पर भी ठीक आ रही है..... और ये कहकर मैंने उसकी गुदाज और मांसल दाहिनी जांघ को छू लिया, जैसे मैं उसका फैब्रिक देख रहा होऊं ।

शालिनी- थैंक गॉड.... ये फिट है... ... थैंक यू ब्रदर फार शापिंग... यू आर ग्रेट और ये कहकर वो पीछे कमरे में चली गई।

मुझे लगा कि वो और ब्रा पैंटी पहन कर आने वाली है पर उसने अंदर जाकर कपड़े उतारने के बाद समीज और निक्कर पहनी फिर मेरे सामने से निकलते हुए वो सीधे बाथरूम में घुस गई ।

मैंने अपने दिल को समझाया कि बेटा.... कहते हैं ना कि सब्र का फल मीठा होता है... और थोड़ा थोड़ा ही मीठा खाओ, नहीं तो डायबिटीज होने का खतरा रहता है.... मतलब आज ही सारा मजा लेने के चक्कर में कहीं काम ना बिगड़ जाए ।

खैर, रात काफी हो चुकी थी अब तक मेरा लन्ड भी कुछ शांत हो गया था कि शालिनी आकर बेड पर बैठ गई ।

मैं भी उठकर बाथरूम में आया और हस्तमैथुन करने के लिए लन्ड हाथ में लिया, फिर कुछ सोचकर बिना मुठ मारे मैं टायलेट करके शालिनी के बगल में लेट गया और हमने एक दूसरे को गुडनाईट बोला ....

कुछ देर बाद मैंने शालिनी को आवाज दी ... शालिनी..... शालिनी

वो भी अभी जाग रही थी और मेरी तरफ देख कर बोली - जी...

मैं- एक बात पूछूं ?

शालिनी- एक क्या .... कितनी भी पूछिए।

मैं- वो तुम्हे ब्रा के कप साइज और पैड वाली ब्रा, इस सबके बारे में कैसे पता चला ।

शालिनी- सिंपल भाई जी, गूगल बाबा से आप कुछ भी पूछो , उनके पास हर चीज का जवाब है,,,, वो ब्रा के बारे में भी मैंने गूगल से ही डिटेल जाना ।

मैं- ओहो... और क्या क्या सीक्रेट जाने हैं गूगल से ।

शालिनी- और क्या,,,, मतलब मैंने ब्रा डिजाइन सर्च किए फिर सारी डिटेल्स मिल गई ।

मैं- अच्छा,,,, और बाकी कपड़े भी कर ट्राई कर लेना... सुबह

शालिनी- जी,

और ये कहकर उसने करवट ली और अब हमारे चेहरे आमने-सामने थे कुछ इंच की दूरी पर, फिर उसने आंखें बंद कर ली और मैं समीज के गले से बाहर निकल आई उसकी चूचियों को देखता रहा, उसकी सांसों की महक सीधे मेरी सांसों में समा रही थी....

कुछ देर बाद मुझे भी नींद आ गई और आज की रात मैं उसके शरीर से बिना खेले ही सो गया ।
 
सुबह मैं जब जगा तो शालिनी सो रही थी, मैंने देखा कि उसकी समीज थोड़ा ऊपर हो गई थी जिससे नीचे की तरफ से उसकी दाहिनी चूंची दिख रही थी मैंने ये मौका हाथ से जाने नहीं दिया और धीरे से अपना हाथ उसके मखमली पेट पर रख कर ऊंगली थोड़ा सा उसकी चूचियों तक पहुंचाकर सोने की एक्टिंग करके लेटा रहा,,,,,

ऐसा करते ही मेरा लौड़ा जबरदस्त तरीके से खड़ा हो गया पर अब मेरी हिम्मत बढ़ चुकी थी,,,,

काफी देर बाद शालिनी उठी और मेरे हाथ को साइड में करके बाथरूम में घुस गई,,,,

अब मैंने भी अपनी आंखें खोली, मेरा दिल और लन्ड दोनों बल्लियों उछलने लगा, क्योंकि अब मुझे यकीन हो गया था कि जल्दी ही मैं अपना हाथ शालिनी की जानकारी में उसकी चूचियों तक पहुंचा लूंगा, दबा लूंगा ।

बाथरूम के दरवाजे के खुलने की आवाज़ के साथ मैंने फिर से आंखें बंद कर ली और सीधे होकर लेटा रहा, इस तरह लेटने से मेरा लन्ड सीधा छत की ओर निशाना साधे हुए था ।

शालिनी कमरे में आई और मुझे बंद आंखों से ऐसा लगा जैसे वो मेरे लौड़े को ही देख रही हो, और ये सोच कर ही मेरे लौड़े ने हल्का सा झटका खाया, ये शायद कुछ ज्यादा ही हो गया था । शालिनी के किचन में जाकर चाय बनाने की आवाज़ आई ।

कुछ मिनट बाद वो आई और

भाई जी,,,, भाई,, उठिए,,, योर बेड टी इज वेटिंग ....

और मैंने अपने लौड़े के उभार को उसकी ओर देखते हुए एडजस्ट करने की कोशिश करते हुए उसे गुडमार्निंग बोल कर चाय अपने हाथ में ले ली।

मेरी चाय पकड़ाकर शालिनी अपनी चाय भी किचन से ले आयी और सामने कुर्सी पर बैठ कर चाय पीने लगी, मैं बेड पर ही बैठा था,,,,, आज मैंने गौर किया तो रोज की तरह उसने समीज उतार कर टीशर्ट नहीं पहनी थी, वो अब भी समीज में ही थी, मुझे ये देखकर और अच्छा लगा.... मतलब अब शालिनी भी मेरे साथ कम्फरटेबल है , कम कपड़ों में या या... आने वाले दिनों में बिना कपड़ों के.... सोच कर ही मैं मन ही मन में मुस्कुरा उठा ।

रोज की तरह मैं डेली रूटीन के काम करते हुए, शालिनी के मदमस्त यौवन को देखते हुए, और नहाने के समय मुठ मार कर, तैयार हो कर नाश्ता करके आफिस के लिए निकल लिया, एक नये दिन और नई उमंग के साथ.....

दिन में मैंने हमेशा की तरह उसे कई बार वीडियो काल की, और उसने मुझे बताया कि उसने सारे कपड़े चेक कर लिए हैं, साइज और फिटिंग ठीक है। तो मैंने कहा मुझे क्या पता कि फिटिंग ठीक है कि नहीं ...तो उसने कहा आप खुद देख लीजिएगा आकर, मैं कहीं जा नहीं रही हूं,,,, और हंसते हुए उसने बाय बोल कर फोन कट कर दिया ।

दोपहर तीन बजे शालिनी की काल आई और उसने मुझसे पूछा ...

शालिनी- हेलो भाईजी, वो पेन किलर टैबलेट कहां रखी है आपने ?

सागर- क्यों, क्या हुआ मेरी स्वीटी....?

शालिनी- जी... जी, , वो मेरा पीरियड शुरू हो गया है और मुझे दर्द हो रहा है।

सागर- ओह,,,, वो मेरी बुक्स की साइड में जो डब्बा है उसी में है,देखो...

शालिनी- जी, मिल गई,

सागर- ज्यादा पेन हो रहा हो तो मैं आ जाऊं और हम किसी डॉक्टर के पास चलते हैं।

शालिनी- नहीं,,, नहीं, भाई जी, ये टेंशन तो हर महीने की है, शुरू के दो दिन पेन रहता है बट पेन किलर से आराम मिल जाता है, आप अपना काम करने के बाद ही आना.... आई एम फाइन भाई... डोन्ट वरी .... ।

सागर- ओके बेटा,,,, अपना ख्याल रखना मैं जल्दी ही आ जाऊंगा।।
 
मैं शाम को घर आया और शालिनी से उसकी तबियत के बारे में पूछा तो उसने कहा,

शालिनी- जी, पेन किलर से आराम मिल गया है ।

वो इस समय बेड पर लेट कर टीवी देख रही थी, उसने आज अभी तक समीज और निक्कर ही पहन रखा था, समीज में भी ब्रा की तरह कंधों पर सिर्फ पट्टियां होने से उसके खुले कंधों के नीचे दो नारियल साइज की चूचियों के दर्शन करना एक अलग ही मजा है। मुझे लगा कि इस तरह उसके सेक्सीे शरीर का दीदार आसानी से मिलता रहेगा । वो उठने को हुई तो मैंने मना कर दिया और कहा कि तुम आराम करो, मैं चेंज करके काफी बनाता हूं । मैंने चेंज करके काफी बनायी और शालिनी के पास बेड पर बैठ कर ,हम दोनों काफी पीने लगे,

मैं- मैं बाहर से जाकर खाना ले आता हूं, तुम आराम करो ।

शालिनी- नहीं,,, नहीं मैं बना लूंगी,ऐसी कोई प्राब्लम नही है, अभी हल्का सा दर्द हो रहा है बस,,,

मैं- अच्छा ठीक है कुछ हल्का फुल्का बना लो, बस...

आप नहा लो तब तक मैं कुछ खाना बना लेती हूं,,,,

मैंने कुछ देर बाद नहाने के बाद फिर से बिना अंडरवियर के बरमूडा पहना, उपर बनयान भी नहीं पहनी और शालिनी के पीछे किचन में जाकर खड़ा हो गया और उसने मुझे देख कर बोला कि आप दो मिनट बाद गैस बंद कर देना, अब मैं भी जरा नहा लूं....

और वो अंदर कमरे में जाकर हाथ में एक पैड लिए हुए निकली और बाथरूम में घुस गई । मतलब शालिनी अब अपना पैड बदलेगी, शायद पहले वाला ब्लड में भीग गया हो, लड़कियां माहवारी के दौरान अपनी बुर में पैड कैसे लगाती हैं मुझे कोई आईडिया नहीं था, ये सब सोच कर ही मेरे लौड़े में गज़ब की सनसनी हुई ।

मैं पीछे से उसकी लहराती कमर को देखकर फिर से उसके पीरियड के दर्द को भूलकर अपने लिए मौके की तलाश करने लगा, कि शालिनी के साथ शारीरिक छेड़छाड़ या प्यार का कोई मौका मैं कैसे निकालूं ।

मैं गैस बंद करके टीवी देखने लगा और रोज की अपेक्षा शालिनी ने नहाने में काफी समय लगाया,

और फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया और सोने की कोशिश करने लगे,,,, इस बीच काफी बातें होती रहीं इधर उधर की और मैं शालिनी की हिलती चूचियों को देख कर मजा लेता रहा ।

मैं टीवी पर चैनल बदल रहा था फिर एक म्यूजिक चैनल पर एक हाट सांग आ रहा था जिसमें हीरो पूरे सांग में हीरोइन को सिर्फ चूमता और चाटता ही रहता है,,, मैं कनखियों से शालिनी को देख रहा था और वो भी बड़े आराम से सांग देख रही थी ।। उस चैनल पर एक से एक हाट गाने आते जा रहे थे और हम दोनों देखते रहे करीब आधा घंटे तक और फिर हम टीवी आफ करके सो गए।

करीब दो बजे रात को शालिनी ने मुझे जगाया और

फिर शालिनी ने कहा भाई जी थोड़ा सा पेन बढ़ रहा है क्या मैं दूसरी पेन किलर खा लूं, तो मैंने मना कर दिया कि अब सुबह से पहले दूसरी टैबलेट नहीं खा सकते ।

और मैं शालिनी की ओर करवट बदल कर देखने लगा....

मैंने शालिनी के चेहरे को गौर से देखा तो उसके चेहरे से दर्द की रेखाएं नजर आ रही थी, शालिनी ने मुझे ऐसे देखते हुए देखा और

उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और मेरी आंखों में देखते हुए बोली - भाई आप परेशान ना हों, थोड़ा दर्द तो होगा ही , घर पर कभी कभी रात में ज्यादा होता था तो मम्मी बाटल में गर्मपानी भरकर उससे पेट की सिंकाई कर देती थीं और फिर आराम हो जाता था ।

मैं वैसा ही करती हूं और वो उठने लगी तो मैंने उसे कहा तुम लेटो मैं लाता हुं पानी गर्म करके,,,,

पानी गर्म करके एक कांच की बोतल में भरकर शालिनी को बोला...

मैं- कैसे करना है बताओ तो मैं कर दूं ।

शालिनी- जी, जी, वो भाई मम्मी बोतल को पेट पर रख कर उसे गोल गोल घुमाया करती थी बस आराम हो जाता था,,,

मैं- ठीक है,,,,

और मैंने बेड पर शालिनी के साइड में बैठ कर पानी भरी बोतल उसके हाथ में छूआते हुए बोला कि देख लो ज्यादा गर्म तो नहीं है, उसने छूकर कहा - ठीक है ।

मैंने धीरे से बोतल शालिनी के पेट पर रख दी और समीज के उपर से ही बोतल को उसके पेट पर घुमाने लगा ।

मैं इस समय ऐसे बैठा था कि शालिनी की दाहिनी जांघ से मेरी जांघ छू रही थी और मैं धीरे धीरे उसके पेट पर हाथ से बोतल घुमाता रहा, इस बीच मेरा लन्ड खड़ा हो गया ।
 
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