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Incest बहन की कुँवारी चूत का उद्घाटन Complete

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ये सुनकर जय भैया का चेहरा देखने लायक था… और मेरी तो हँसी ही निकल गयी पायल दी की प्लानिंग सुनकर.. क्या दिमाग़ लगाया था उन्होने, ऐसी हालत मे लाकर अगर तुम किसी से कहो कि अपनी बेहन की सेट्टिंग पहले किसी और से करवा फिर मुझसे मज़े ले तो कैसा फील होगा..यही हाल था इस वक़्त जय भैया का..

पर वो कहते है ना एक बार अगर ठरक दिमाग़ पर सवार हो जाए तो मर्द के लंड को कुछ सुनाई नही देता… यही हाल इस वक़्त जय का था.. उसके सामने रबड़ी जैसी पायल दी खड़ी थी और उनकी शर्त के अनुसार उन्हे काजल और मेरे बीच होने वाली सेट्टिंग को अनदेखा करना था… ऐसा तो उन्होने शायद सपने मे भी नही सोचा था..

पर फिर उन्होने सोचा कि वो भी तो इस वक़्त वही सब कर रहे है, अपनी कज़िन के साथ मज़े लेने की कोशिश… ये अगर राज और काजल भी कर लेंगे तो क्या बुरा है… आख़िर जवानी तो उनपर भी मेहरबान है.

उन्होने झट से हां कर दी..

और सच कहूँ दोस्तो, उनकी हां का असर सीधा मेरे लंड पर हुआ… मेरा लंड सीधा खड़ा हो गया, चादर मे अगर जय भैया मेरे लंड मे बने तंबू को देख लेते तो उन्हे एक मिनिट मे ही पता चल जाता कि मैं जाग रहा हूँ.

जय भैया की हां सुनकर पायल दी भी खुश हो गयी, अब उनके हिसाब से सब चलने वाला था.

पायल दी जय भैया की तरफ पलटी और वो दोनो एक दूसरे से बुरी तरह लिपट गये और पलक झपकते ही वो एक गहरी स्मूच मे डूब गये…

अब मेरी आँखे पूरी खुल चुकी थी, अपनी बेहन को अपने कज़िन के साथ ऐसा करते देख कर मुझे गुस्सा भी आ रहा था और आने वाली संभावनाओ को सोचकर मैं रोमांचित भी हो रहा था…

अचानक पायल दी ने वो किस तोड़ दी… जय तो और आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा था, उनकी टी शर्ट उतारने की कोशिश कर रहा था..

पायल : “बस…. अभी के लिए इतना बहुत है… . ऐसा ना हो कि राज जाग जाए, उसने हमे ऐसा करते देख लिया तो मुश्किल हो जाएगी…”

जय : “पर तुमने ही तो कहा था कि वो और . कुछ भी कर सकते है, मुझे इसमे कोई प्राब्लम नही है…”

पायल : “हां, पर उन्हे ये बात बतानी भी तो पड़ेगी ना… इनफॅक्ट ये मैने तुमसे इसलिए भी कहा है कि काजल ने मुझे अपनी फीलिंग . थी… आंड आइ थिंक उसे राज पसंद है… वो भी उसके साथ ऐसा ही कुछ करने के लिए मरी जा रही है…”

अपनी बेहन के बारे मे ये बात सुनकर जय को विश्वास ही नही हुआ… उसकी छोटी बेहन अपने कज़िन के लिए ऐसी भावनाए रखती है, इस बात का अंदाज़ा भी नही था उसे.. और वो इतनी बड़ी कब हो गयी कि उसकी रूचि सेक्स के लिए इतनी बढ़ गयी कि अपने ही कज़िन ब्रदर को वो लाइक करने लगी है… ये लड़किया कब बड़ी हो जाती हैं, पता ही नही चलता..

पर फिर उसने सोचा कि वो भी तो यही कर रहा है, अपनी खुद की कज़िन सिस्टर के साथ इस तरह के संबंध बनाने की कोशिश करना भी उतना ही ग़लत है.

जय को चुप देख कर मेरे और पायल दी के मन मे बस यही बात चल रही थी कि इस मोड़ पर आकर अगर जय ने मना कर दिया तो सब गड़बड़ हो जाएगा, पायल दी का दिल भी टूटेगा और काजल की हड्डिया भी…

पर ऐसा कुछ नही हुआ, वो इंसान के टाँगो के बीच एक लंड नाम की चीज़ होती है ना, उसने सब संभाल लिया… और उसी लंड की . मे आकर जय ने ये सच्चाई भी कबूल कर ली कि उसकी बेहन अपने कज़िन के साथ मज़े लेना चाहती है..

इसलिए उसने इस बात पर भी हां कर दी..

जय का इतना कहना था कि पायल दी ने बिना एक पल गँवाए वहाँ से दौड़ लगा दी और कमरे से बाहर निकल गयी… और जय बेचारा देखता रह गया कि ये उसे हुआ क्या है..

कुछ ही देर मे वो वापिस आई और साथ मे काजल को भी ले आई वो..

जय ने जब काजल को उस वक़्त देखा तो उसकी फट कर हाथ मे आ गयी… उसने तो सोचा था कि अभी कम से कम पायल के साथ वो मज़े ले सकेगा, बाद मे जो होगा देखा जाएगा, पर पायल तो अभी के अभी जाकर काजल को ले आई…

और पायल दी ने उसे लाने से पहले , शॉर्ट मे सब समझा भी दिया था… पर फिर भी इस तरह से अपने बड़े भाई के सामने आने से वो सकुचा रही थी और डर भी रही थी.

पायल : “आओ काजल.. आओ…डरो मत, मेरी और जय की बात हो गयी है, तुम्हारे मन मे जो भी राज के लिए है वो तुम बोल सकती हो, और जो भी तुम्हारे दिल मे है वो तुम इसके साथ कर भी सकती हो, जय भैया तुम्हे कुछ नही कहेंगे… है ना जय…”

पायल ने जब जय से ये प्रश्न पूछा तो वो बेचारा हक्का-बक्का रह गया, पर इस वक़्त वो पायल दी के बिछाए जाल मे फँस चुका था… इसलिए उसने बिना कुछ बोले सिर्फ़ हाँ मे सिर हिला दिया..

काजल के चेहरे की खुशी देखने वाली थी, उसे भी शायद जय भैया के इस तरह जल्दी से मान जाने की उम्मीद नही थी… पर वो कहते है ना कि जवानी के जलवे सब काम करवा लेते है.. वही हुआ था अभी.

पायल ने काजल का हाथ पकड़ा और उसे लेकर वो सीधा मेरे बेड के करीब आई और बोली : “चलो…. शुरू हो जाओ… कर लो जो तुम्हारे मन मे है…”

पायल दी की ये बात सुनकर मुझे सच मे उनपर बहुत प्यार आया… मन तो किया की अभी के अभी चादर साइड मे फेंक कर अपना लंड निकालु और पहले पायल को चोदकर काजल की चूत की भी धज्जिया उड़ा दूं… पर इस वक़्त ये सब करना पासिबल नही था, ऐसा करने से जय को हमारी प्लानिंग पर शक हो सकता था..

काजल ने एक नज़र पायल को देखा और फिर जय को… जय तो नज़रे चुराने की कोशिश कर रहा था, वो मन मे सोच रहा था कि कहाँ तो वो खुद मज़े लेने के मूड मे था और कहाँ ये पायल उसी की बेहन की फिल्म दिखाने पर उतारू है…

पर जो भी था, मज़े मुझे ही मिलने वाले थे, काजल के मन मे भी हज़ारो लहरे उठ रही थी पर वो उनपर काबू करने की कोशिश कर रही थी… पायल दी ने उसे पहले ही समझा दिया था कि यही एक मौका है, या तो मामला इधर या उधर..मज़े लेने है तो बेशरम बनना पड़ेगा.

काजल ने एक गहरी साँस ली और मेरे करीब आकर बैठ गयी, वो अब जय भैया को देख ही नही रही थी.. उसका सारा ध्यान मेरी तरफ ही था…वो मुझपर झुकी और उसने अपने मोटे मम्मे मेरी छाती पर टिका कर मुझे एक किस कर दी.

 
मेरा तो रोम-2 पुलकित सा हो उठा.. और फिर एक पल के लिए रुककर उसने मेरे होंठों को अपनी जीभ से खोला और उन्हे फ्रेंच किस करने लगी… पहले धीरे-2 और फिर तेज़ी से… उसके मुँह से अजीव-2 सी आवाज़ें निकल रही थी, गहरी साँसे लेते हुए वो मुझे बुरी तहरा से स्मूच कर रही थी… शायद अपने भाई और कज़िन के सामने मुझे इस तरह किस करने की बात उसे अंदर तक उत्तेजित कर गयी थी और उसी रोमांच और उत्तेजना मे भरकर वो मुझपर टूट पड़ी थी..

और अब मुझे भी कंट्रोल करना मुश्किल हो गया था, इसलिए खाँसते हुए, नींद टूटने का नाटक करता हुआ मैं उठकर बैठ गया.

और सभी को अपने सामने इस तरह से खड़ा देख कर मैने हैरान होने का नाटक किया…

फिर पायल दी ने स्टेज संभाला

वो बोली : “देखो राज, डरो मत, ये सब मेरे कहने पर हो रहा है..”

इतना कहते हुए उसने शुरू से आख़िर तक की सारी बाते सामने रख दी… उसने तो ये भी बताया कि उसने जय भैया की सिनिमा हॉल मे बैठकर मूठ भी मारी थी… बेचारे जय का चेहरा देखने लायक था.

और फिर आख़िर मे वो बोली : “और मेरे और जय के रीलेशन को आगे बढ़ाने के लिए मुझे तुम दोनो को भी वही फ्रीडम देनी थी, और वो इसलिए भी ताकि ये बात हम चारो के बीच ही रह सके और इसलिए भी ताकि हम एक दूसरे के सामने भी बिना शर्म के वो सब कर सके जो चोरी छुपे करने मे लगे थे..”

मैने उसकी बात से सहमति जताई.. काजल भी अब तक सब कुछ समझ चुकी थी… और जय भी.

इसलिए पायल दी की बात ख़त्म होते ही काजल एक बार फिर से मुझपर टूट पड़ी..

आज की रात हम सभी भाई बहनो की लाइफ बदलने वाली थी.

काजल ने जैसे ही अपना चेहरा मेरे सामने किया, मैने उसे ज़ोर से पकड़ा और उसके होंठों पर टूट पड़ा… अब किस करने की बारी मेरी थी… मैं तो उसे अपने बिस्तर पर गिराकर उसके होंठों को चूस्ता चला गया…

ऐसा लग रहा था जैसे प्लेट मे सजाकर उसके गुलाबी होंठ मेरे बेड पर सज़ा कर रख दिए है.. मैं उसके नर्म मुलायम बूब्स को मसलता हुआ उसके होंठो का रस्पान कर रहा था, ऐसा करते हुए मुझे एक अलग ही तरह की एग्ज़ाइट्मेंट हो रही थी.

मुझे ये बात भी ज़्यादा एग्ज़ाइट कर रही थी कि इस वक़्त जय भैया मुझे घूर कर देख रहे है… उन्ही की बेहन को मैं उनके सामने अपने बिस्तर पर पटक कर मसल रहा था..

पायल दी ने जब देखा कि जय का सारा ध्यान वही पर है तो वो उसके करीब आई और अपनी बाहें जय भैया के गले मे डालकर उनसे लिपट गयी… और अपने होंठ उनके कान के करीब लाकर बोली : “अब उन्हे ही देखते रहोगे या कुछ करोगे भी… आइ आम बर्निंग फ्रॉम इनसाइड… कुछ करो ना जय भैया…”

उसने जब तड़प कर भैया बोला तो जय की उत्तेजना एकदम भड़क उठी… उसने उसे ज़ोर से अपनी बाहो मे भींच लिया और उसे पागलो की तरह चूमने लगा… उसके नाज़ुक शरीर को हवा मे उठा कर अपनी छाती से उसके बूब्स को रगड़ने लगा…

इसी बीच मेरे हाथ काजल की टी शर्ट मे घुस गये और मैने उसकी ब्रा कप्स को नीचे करके उसके बूब्स को आज़ाद कर दिया… मेरे हाथो मे एक बार फिर से उसके मोटे निप्पल आ गये जिन्हे मैं अपनी उंगलियो के बीच लेकर मसल्ने लगा…

काजल ने अपने दोनो हाथ उपर कर दिए और पीछे पड़ा पिल्लो पकड़ कर धीरे से फुसफुसाई : “उम्म्म्ममम राज……. सकक्क्क्क्क करो इन्हे….. प्लीज़ सक्क्क्क मी निपल्स…..”

उसने ये बात बहुत धीरे से कही थी ताकि उसका भाई ना सुन सके…

मैने जय को देखा जो इस वक़्त पायल दी को हवा मे उठाकर उनके नर्म होंठों को चूस रहा था… उनका ध्यान हमारी तरफ नही था..

मैने काजल की टी शर्ट को उपर किया और पहली बार मैने उसके बूब्स को नंगा देखा… एकदम अमरूद के आकार के थे वो… उसपर अंगूर जितने मोटे निप्पल लगे थे जो मेरे मसल्ने की वजह से कुछ ज़्यादा ही मोटे हो चुके थे… मैने जी भरकर उन्हे देखा और फिर उसके चेहरे को… वो बेचैन होकर मुझसे अपने निप्पल्स की खुजली मिटवाना चाहती थी…

मेरी तरफ से देरी होते देख कर उसने खुद ही मेरे सिर को पकड़ा और अपने बूब पर लगा कर ज़ोर से दबा लिया….

मुझे ऐसा लगा जैसे मैने कोई बंगाली रसगुल्ला अपने मुँह मे भर लिया है, और उसमे से चाशनी निकल कर मेरे मुँह मे जा रही है.

इतना रसीला और मीठा रसगुल्ला तो मैने रियल लाइफ मे भी नही खाया था….

मेरे दांतो ने उसके मोटे निप्पल पर शिकंजा जमा कर उसे कुतरना शुरू कर दिया.. मेरे दांतो की चुभन से उसका शरीर हवा मे उठने लगा… मैने बारी-2 से उसके दोनो बूब्स को उसी तरह से चूसा… अपने दांतो से उसके नर्म बूब्स पर मैने टॅटू भी बनाया जो एक हफ्ते से पहले जाने वाला नही था..

और जैसे ही मैं अपनी कलाकारी काजल के बूब पर करके पीछे हुआ, मेरी नज़र जय भैया पर गयी… उनकी नज़रें मुझे ही घूर रही थी….

 
मैं जैसे ही नज़रें झुकाने लगा तो मुझे एहसास हुआ कि उनकी नज़रें मुझे नही बल्कि काजल के नंगे बूब्स पर थी… यानी खुद की ही बेहन के बदन पर..

एक पल के लिए तो मैं भी चोंक सा गया… अभी थोड़ी देर पहले तक तो वो एकदम संत बने फिर रहे थे… और अब पायल को अपनी बाहो मे भरकर वो अपनी खुद की बेहन को देखने मे लगे है…

वैसे अपनी खुद की बेहन के साथ तो मैने भी बहुत कुछ कर लिया था… पर इस वक़्त तो क्रॉस कनेक्षन चल रहा था… मैं जय की और जय मेरी बेहन के साथ लगा हुआ था..

जय ने जब देखा कि मैने उसकी बेहन के बूब्स पर लाल निशान बना दिया है तो वो भी जोश मे आ गया और उसने खड़े-2 पायल दी की टी शर्ट और ब्रा को एक ही झटके मे उतार फेंका..

और अब पायल सभी के सामने टॉपलेस होकर खड़ी थी.

उनके मोटे-2 बूब्स देख कर एक बार के लिए तो मेरा भी मन मचल उठा उन्हे दोबारा चूसने के लिए.. पर अभी के लिए तो काजल के साथ ही संतुष्ट करना था मुझे..

जय ने पायल दी को उसी बेड पर लाकर लिटा दिया जिसपर मैं काजल के साथ लेटा हुआ था… यानी दोनो बहने एक ही बिस्तर पर थी इस वक़्त…

मैने भी काजल की टी शर्ट को पूरी तरह से उतार दिया…

काजल ने अपने हाथो से अपनी नंगी ब्रेस्ट छुपा ली… उसका बड़ा भाई इतने करीब से उसे घूर कर जो देख रहा था.

पायल : “शरमाओ मत काजल… ये सब तो अब आम बात रहेगी हम चारो के बीच, एक दूसरे से शरमाते रहेंगे तो मज़े कैसे लेंगे.. आज से हम सभी एक दूसरे के भाई बेहन नही बल्कि लवर बनकर रहेंगे.. और एक दूसरे के सामने कुछ भी करने से शरमाना नही है, वरना नुकसान तुम्हारा ही होगा..”

इतना कह कर उसने जय को खींच कर एक बार फिर से अपनी छाती से लगा लिया और उसे अपना दूध पिलाने लगी..

काजल भी शायद उनकी बात समझ गयी थी… उसने अपने हाथ हटा कर एक बार फिर से अपने हुस्न को बेपर्दा किया और मुझे अपने उपर खींचते हुए फुसफुसाई : “आ जाओ अब राज…. अब चूसो उन्हे ज़ोर से…”

ये बात तो जय ने भी सुनी… अपनी बेहन की इस बेशर्मी भरी बात को सुनकर उसका बदन और भी ज़्यादा सुलग उठा और वो और तेज़ी से पायल दी के बूब्स चूसने लगा…

काजल ने अपना दाँया स्तन मेरी तरफ लहराया और बोली : “यहाँ… इसपर थोड़ा ज़्यादा ध्यान दो भाई… यहाँ ज़्यादा खुजली हो रही है… काटो उन्हे…चूस लो…”

और उसी बात को सुनकर , जय ने पायल दी के दाँये बूब्स को मुँह मे भर लिया.. और उसे बुरी तरह से चूसने और चबाने लगा..

यानी जैसा-2 काजल मुझसे करवा रही थी या मुझे बोल रही थी… वैसा-2 जय पायल दी के जिस्म के साथ कर रहा था… शायद अंदर ही अंदर वो काजल की तरफ अट्रॅक्ट हो रहे थे…

मैं समझ गया कि उन्होने इस बात के लिए हाँ क्यो की थी… शायद इसी बहाने वो अपनी खुद की बेहन के नंगे जिस्म के दर्शन कर सकेंगे… जो शायद आज से पहले उन्होने नही किए थे.

मैने एक कदम और आगे बढ़ने की सोची… और धीरे-2 मैने काजल के पयज़ामे को नीचे खिसकाना शुरू कर दिया..

और इस बार तो काजल का शर्म के मारे बुरा हाल था… शायद वो अभी के लिए इससे आगे नही बढ़ना चाह रही थी… अपने ही भाई के सामने वो पूरी नंगी नही होना चाहती थी..

पर मैं भी जिद्दी था, मैने उसकी एक ना सुनी और उसके मना करने के बावजूद भी मैने उसका बॉटम निकाल कर नीचे फेंक दिया..

उसने शर्माकर अपने चेहरे को अपने हाथो से ढक लिया… बेचारी ये भूल गयी कि उसके ऐसा करने से दूसरो को तो दिखाई देना बंद नही हो गया था…

 
अब मेरे सामने उसका पूरा नंगा बदन था… और सच कहूँ, उसकी कसावट को मैने पायल दी से कंपेर किया तो काजल 20 ही निकली, 19 नही…

जैसे -2 उसका शरीर नीचे जा रहा था, वो फेलता जा रहा था, ख़ासकर उसके कूल्हे वाला हिस्सा… उसकी कमर एकदम लचक लिए हुए थी…

और मेरी नज़र जब उसकी चूत पर गयी तो मैं हैरान रह गया… वो एकदम सफाचट थी… और सॉफ पता चल रहा था कि वो उसे अभी सॉफ करके आई है…

यानी मेरी बात को उसने काफ़ी सीरियस्ली लिया था जब मैने उसे सिनिमा हॉल मे कहा था कि मैं आज रात उसकी पुसी को सक करूँगा..

मेरा मुँह सूखा जा रहा था…

मैने अपना चेहरा उसकी चूत के उपर किया और एक गहरी साँस ली… उसमे से भीनी -2 खुश्बू आ रही थी, मुझसे और बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया और मैने अपने प्यासे होंठ उसकी गर्म चूत पर चिपका दिए..

वो तड़प उठी और ज़ोर से चीखी भी…

”अहह…. उम्म्म्म…. राज.. एसस्स्स्स्स्सस्स…….”

उसके हाथ अपने आप अपने चेहरे से हट गये और उसने मेरे बालो को पकड़ कर अपनी चूत पर किसी मूली की तरह घिसना शुरू कर दिया… मैने भी अपनी कड़क जीभ निकाली और उसकी चूत की दरार से रिस रहे पानी को निगलना शुरू कर दिया.

”ओह माइ गॉड…. एसस्स्सस्स….. बहुत मज़ा आ रहा है…. अहह… ऐसे ही चाटो अंदर तक… घुसाओ…. जीभ को…. अहह..”

वो मस्ती मे भरकर मुझे ये सब बोल रही थी… और शायद इस वक़्त वो ये बात भी भूल चुकी थी कि उसका भाई उसी की बगल मे लेटा हुआ ये सब सुन रहा है…

पर उसे अब इन बातो से कोई फ़र्क नही पड़ रहा था…. ये वो हमाम था जिसमे अब सब नंगे हो चुके थे.

पायल दी ने जब देखा कि जय अब भी अपनी बेहन को देखने की कोशिश कर रहा है तो वो उसके कान मे बोली : “तुम्हे वो पसंद है तो तुम उसके पास जा सकते हो… मुझे कोई प्राब्लम नही है…”

जय ये बात सुनकर झेंप सा गया…जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो…

वो बोला : “अर्रे नही… मैं तो बस… ऐसे ही….”

और फिर से उसने पायल दी के बूब्स को चूसना शुरू कर दिया..

पायल दी अपनी सीट से खड़ी हुई और उन्होने भी अपनी निक्कर उतार दी… अब वो भी पूरी नंगी थी…

मैं तो उनके मस्त शरीर को पहले ही देख चुका था, मसल चुका था पर जय के लिए ये पहला मौका था… वो तो पायल के नंगे बदन को देख कर पलके झपकना भी भूल गया..

पायल दी ने खुद ही अपने हाथ से अपने बूब्स को उभार कर उसे दिखाया और फिर अपनी जवानी के जलवे दिखाती हुई… इतराती हुई वो पलंग पर चढ़ गयी… और अपनी टांगे जय भैया के सिर के दोनो तरफ फेला कर खड़ी हो गयी.

पायल दी की चूत से निकल रहे रस की एक बूँद सीधा आकर जय के मुँह मे आ गिरी… और उसके स्वाद को महसूस करके वो पागल सा हो गया और उसने पायल के कुल्हो को पकड़ कर नीचे खींच लिया और उसे अपने मुँह पर बिठा कर उसकी चूत मे जीभ घुसा दी…

पायल दी भी उसके बालों को पकड़ कर अपनी चूत को उसके मुँह पर रगड़ने लगी.. अपनी चूत का रस उसे पिलाने लगी..

एक तरफ मैं काजल को लिटा कर उसकी चूत चूस रहा था और दूसरी तरफ पायल दी ने जय को लिटा रखा था और अपनी चूत चुस्वा रही थी…

और कुछ ही देर मे दोनो भाई बहनो की मेहनत रंग लाई…. मेरे होंठों और जीभ के कमाल के सामने काजल ज़्यादा देर तक टिक नही पाई और वो किल्किलाती हुई झड़ने लगी..

”आआअहह …. उम्म्म्म…. फकककककककककक…. मैं तो गयी रे…….. मैं तो गयी….”

और उसकी कुँवारी चूत से निकले पहले झरने का स्वाद मैने उसपर मुँह लगाकर लिया….. और तब तक लगाए रखा जब तक वो झरना सूख नही गया…

मुझे ऐसा लगा जैसे मैने पेट भरकर नारियल पानी पिया है..

और वही दूसरी तरफ, अपनी तेज़ी को अपने हिसाब से कंट्रोल करके, पायल दी की चूत भी झड़ने के करीब पहुँच गयी… और जब वो झड़ी तो उन्होने खुल्ले दिल से अपनी चूत का रस जय भैया के खुल्ले मुँह मे डाला… जिसे वो भी किसी कुत्ते की तरह चपर-2 करके पी गया.

और फिर हाँफती हुई सी वो साइड मे लुढ़क कर गहरी साँसे लेने लगी…

 
कमाल की बात ये थी कि पूरा समय मैं और जय कपड़े पहने ये सब करते रहे और वो दोनो नंगी होकर…

पर अब नंगा होने का समय हमारा था…

हम दोनो के लंड तंबू बनाकर अपनी हालत को बयान कर रहे थे…

अब उन दोनो को हम दोनो को उसी अंदाज मे सॅटिस्फाइ करना था जैसे हमने उन्हे किया था.

हम दोनो ने आनन-फानन मे अपने-2 कपड़े उतार फेंके और उन्ही की तरह नंगे होकर उनके सामने लेट गये.

पायल दी की नज़रें कभी मेरे और कभी जय के लंड पर घूम रही थी, वो शायद दोनो के लंड का साइज़ कंपेर करने की कोशिश कर रही थी, मैने पहले भी जय का लंड देखा था सिनिमा हॉल मे, वो भले ही मेरे लंड से थोड़ा सा लंबा था पर मेरा लंड काफ़ी मोटा था जबकि उसका काफ़ी पतला, पर कड़क दोनो थे.

ऐसी उम्र मे कड़क लंड ही निकलते है लोंडो की पेंट मे से.

पायल दी की तरह काजल ने भी मेरे लंड को जी भरकर देखा, उसके मुँह मे पानी आ रहा था, उसने तिरछी नज़र करके जय के लंड को भी देखा, और ठीक उसी वक़्त जय की नज़रें भी चोरी चुपके काजल के नन्हे बूब्स को ताक रही थी, दोनो भाई बहेन की नज़रें एक दूसरे से टकराई और अपनी-2 चोरी पकड़े जाने के बाद दोनो सकपका कर अपने-2 माल की तरफ ध्यान लगाकर खड़े हो गये.

खैर, इस व्क़्त तो मुझे भी पायल से ज़्यादा काजल मे इंटेरेस्ट था, उसने जैसे ही मेरे लंड पर अपने कोमल हाथ लगाए मैं रोमांच और खुशी से चिल्ला सा पड़ा.

”आआहह उम्म्म्मममम”

और लगभग यही आवाज़ जय की तरफ से भी आई.

पायल दी ने उसके लंड को अपनी मुट्ठी मे क़ैद करके मसलना शुरू कर दिया था, उसकी दोनो जाँघो को अपनी बाहों के नीचे दबा कर वो उसके लंड की अच्छे से मालिश कर रही थी.

काजल ने थोड़ी देर तो मेरे लंड को अच्छे से मसला और फिर मैने उसके चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और अपने चेहरे के करीब लाकर मैने उसके होंठों को चूम लिया, उसके होंठ इस वक़्त बिल्कुल नर्म पड़ चुके थे, उनमे से भारी मात्रा मे शहद निकल कर मेरे मुँह मे जाने लगा, उसका हाथ अभी भी मेरे लंड पर ही था, वो उसे मसालती रही और मेरे हाथ उसके बूब्स पर आकर उन्हे मसल्ने लगे.

धीरे-2 मैने किस तोड़ी और उसे नीचे खिसकाना शुरू कर दिया, उसके चेहरे की मुस्कान बता रही थी कि वो मेरी बात समझ गयी है, वो भी अपने लरजते हुए होंठों को फड़काती हुई धीरे-2 नीचे तक गयी और मेरे लंड पर आकर उसका चेहरा जम सा गया.

उसने एक नज़र मेरी तरफ देखा और फिर लंड को परखने लगी.

ये उसकी लाइफ का पहला लंड था जो वो इतने करीब से देख रही थी, सिनिमा हॉल मे हालाँकि वो इसे चूस चुकी थी, पर अच्छे से देख नही पाई थी.

उसने अपनी जीभ निकाली और लंड के टोपे पर लगी बूँद को उसने चूस लिया, स्वाद तो उसे पहले ही पता था, ऐसा नशा चढ़ा उसे वो बूँद चाटकर कि उसने एक ही बार मे उसे पूरा अंदर लेकर बुरी तरह से चूसना शुरू कर दिया, जैसे कोई भूतनी चढ़ गयी हो उसमे, मेरे टटटे सहलाती हुई वो मेरे लंड को बाँसुरी की तरह बजाने मे लगी थी, उसके नन्हे बूब्स पर लगे निप्पल्स मेरी जाँघो पर चुभ रहे थे, जो मेरे अंदर एक अलग ही तरह का सेन्सीशन पैदा कर रहे थे.

मेरी आँखे बंद होती चली गयी और मैं आनंद सागर मे गोते लगाने लगा.

 
दूसरी तरफ पायल दी ने भी जय के लंड को मुँह मे लेकर उसे दूसरा मज़ा देना शुरू कर दिया, पायल तो अच्छी सकर थी, उसने उसकी बॉल्स को चूसा, उसके लंड को कुतरा और उसकी गान्ड मे उंगली भी करी, ये सब बहुत होते है एक आदमी को ऑर्गॅज़म के करीब लाने के लिए.

मैने भी अपनी बॉल्स को काजल के मुँह मे ठूंस दिया, पहले तो वो मेरे लंड को छोड़कर कुछ और चूसने के लिए राज़ी ही नही हुई पर पायल दी को भी वैसा ही करते देख कर उसने मेरी बॉल्स को भी मुँह मे भर लिया, उसके बाद तो वो उन्हे छोड़ने के लिए राज़ी ही नही हुई, मेरे लंड को पूरा चूस्ते हुए वो बॉल्स तक ज़ाती और उन्हे मुँह मे भरकर चूस्ति और फिर से उपर आकर मेरे लंड को.

ऐसा करते-2 मैं भी अपने ऑर्गॅज़म के करीब पहुँच गया, ये वो पल था जब मैं अपने लंड से निकलने वाले रस को रोकना भी चाहता था और निकालना भी, एक ही पल मे अपने लंड के अंदर की सारी गर्मी मैने निकालनी शुरू कर दी, और एक के बाद एक केयी सफेद गोलिया मैने उसके फूल से चेहरे पर दाग दी.

”आआअहह काजल साली कुतिया अहह यू सकर”

मैने उसके भाई के सामने ही उसे कुतिया बोलकर अपना पानी पिलाना शुरू कर दिया.

और उसने भी एक कुतिया की तरह , मेरे लंड से निकले सफेद पानी की एक-2 बूँद अंदर लेकर पीनी शुरू कर दी, ये मेरे लंड का पानी उसके लिए एक नशे जैसा बन चुका था, जो उसे उत्तेजना के ऐसे शिखर पर ले जाता था जहाँ से पूरी दुनिया बहुत खूबसूरत लगती थी.

मेरे लंड को अच्छी तरह से चूस्कर वो मेरे सीने पर आकर लेट गयी और गहरी साँसे लेते हुए वो पायल दी और जय को देखने लगी.

वो भी अपने ऑर्गॅज़म के करीब था, पायल दी बड़ी कुशलता से उसके लंड को चूस रही थी, काजल भी उसे देख कर कुछ नया सीखने की कोशिश करने लगी.

इसी बीच जय को एहसास हो गया कि काजल उसे ही देख रही है, और उसने अपना चेहरा उसी की तरफ कर दिया, दोनो एक दूसरे को ऐसे देखने लगे जैसे कोई लवर देखते है, और इस बार उन्होने अपना चेहरा भी नही घुमाया, बस घूरते रहे एक दूसरे की आँखो मे.

और मैं ये बात टाल ठोक कर कह सकता था कि वो लंड तो पायल दी से चुस्वा रहा था पर उसके ज़हांन मे इस वक़्त उसी की बहेन काजल उसका लंड चूस रही थी.

और कुछ ही देर मे जय के लंड से सफेद पिचकारियाँ निकलने लगी, पायल दी का मुँह पूरा भर गया जय के वीर्य से, और झाड़ते हुए जय के मुँह से जो निकला उसे सुनकर मैं भी चोंक गया.

वो सिसकते हुए बोला : ”अहह काजल”

एक पल के लिए तो पायल दी ने भी उसका लंड चूसना छोड़ दिया.

फिर जय सॉरी-2 बोलता हुआ पायल की तरफ प्यार से देखने लगा, किसी ने इस बात का बतंगड़ नही बनाया पर एक बात क्लियर हो चुकी थी कि अब उन दोनो भाई बहेन के बीच कुछ होने वाला है और वो भी बहुत जल्द.

कुछ देर मे पायल ने उसके लंड को पूरा चूस्कर अच्छे से चमका दिया, और फिर धीरे-2 सबने अपने कपड़े पहेन लिए, और पायल दी और काजल वही हमारे साथ ही सो गये.

पर ये रात कुछ और लंबी होने वाली थी, और कुछ ऐसा होने वाला था जिसके बारे मे मैने सपने मे भी नही सोचा था.

रात को करीब 2 बजे मेरी नींद खुली, मुझे प्यास लग रही थी.

मैने सिर्फ़ एक शॉर्ट्स मे था.

और काजल मेरे कंधे पर सिर रखकर गहरी नींद मे सो रही थी.

जय और पायल दी भी एक दूसरे मे घुस कर सो रहे थे,

मैने अपनी टी शर्ट पहनी और उठकर नीचे चल दिया, पानी पीने.

और फिर एक पानी की बॉटल लेकर मैं उपर आ गया.

फिर मुझे इक्षा हुई कि थोड़ी देर खुली हवा मे टहला जाए.

इसलिए अपने रूम मे जाने के बजाए मैं उपर की तरफ चल दिया और छत का दरवाजा खोलकर अपनी बाल्कनी मे आ गया.

सच मे काफ़ी अच्छी हवा चल रही थी.

चाँद भी पूरा निकला हुआ था, जिसकी चाँदनी से ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा सा बल्ब जलाया हुआ है आसमान मे

मैं बाल्कनी मे खड़ा होकर नीचे देखने लगा,

और आज रात हुई घटना के बारे मे सोच-सोचकर मुस्कुराने लगा,

तभी.......................

 
तभी मुझे किसी ने पीछे से आकर पकड़ लिया

और वो कोई और नही बल्कि पायल दी थी,

पायल : “उम्म्म मुझे लगा कि तुम थोड़ी देर मे आ जाओगे फिर उपर का दरवाजा खुलने की आवाज़ आई तो मैं समझ गयी कि तुम उपर आ गये हो यहाँ खड़े होकर क्या सोच रहे हो ”

यानी जब मैं रूम से निकल कर नीचे गया तो वो जाग रही थी.

मैं मुस्कुरा दिया और मुड़कर उनकी तरफ मुँह कर लिया,

और बोला : “दी, मैं तो बस ठंडी हवा खाने आ गया था और सोच रहा था वो सब जो आज हमारे बीच हुआ है ”

वो भी मेरी बात सुनकर मुस्कुरा दी

और बोली : “अपने रिश्ते को खोलने के चक्कर मे मैने शायद कुछ ज़्यादा ही पंगा ले लिया काजल के साथ -2 जय भाई भी ग्रूप मे शामिल हो गया तुम्हे बुरा तो नही लगा ना ?”

मैने मुँह बनाकर कहा : “बुरा क्यो नही लगेगा, मेरी बहन को मेरे ही सामने वो सब कुछ करने मे लगा था और मुझे बुरा ना लगे ”

मैने ये बात कुछ सोच समझकर ही बोली थी

ताकि उन्हे भी लग सके कि मैं सिर्फ़ काजल के हुस्न के पीछे नही भाग रहा

और वैसे भी, काजल ने तो हफ्ते बाद चले ही जाना था, बाद मे तो पायल दी के साथ ही रहना था मुझे,

पायल : “ओले मेला बैबी इतने पोज़ेसिव हो मेरे बारे मे तुम आइ लव यू फॉर दिस ”

इतना कहते हुए उन्होने अपनी बाहे मेरे गले मे डाली और मुझे ज़ोर से स्मूच कर लिया,

कब से मैं उनकी इस किस के लिए तरस रहा था

ठंडी हवा और गर्म होंठों का मिलन बड़ा ही सेक्सी लग रहा था इस वक़्त,

मैने भी उनके नितंबो को पकड़कर उन्हे अपने लंड से घिसते हुए उन्हे चूसना शुरू कर दिया

सिंपल सी स्मूच कुछ ही देर मे ख़ूँख़ार होती चली गयी

मेरी तरफ से कम पर पायल दी की तरफ से ज़्यादा

वो तो मेरे गालो को, गले पर छाती पर, हर जगह बुरी तरह से चूम रही थी जैसे आज के बाद कभी मिलूँगा ही नही उनसे

मेरे लंड को भी शॉर्ट्स के उपर से ही बुरी तरह से मसल रही थी वो,

कुछ घंटे पहले काजल ने उसे बड़ी बेदर्दी से चूस्कर उसका सारा जूस निकाल कर पी लिया था

पर अपनी सग़ी बहन का हाथ लगते ही ऐसा लगने लगा जैसे वो काई महीनो से झडा ही नही था,

मैने भी पायल दी की टी शर्ट को उपर किया और उनके बिना ब्रा के बूब्स को चूसने लगा

उन्होने खुद ही उसे निकाल कर फेंक दिया,

और नीचे की शॉर्ट्स भी उतार दी

पायल दी की फुर्ती देख कर मैं भी हैरान था

कुछ ही पॅलो मे वो मेरे सामने जन्मजात नंगी होकर खड़ी थी.

मैं भागकर बाल्कनी का दरवाजा अंदर से बंद कर आया, कि कही कोई उपर ना आ जाए,

मेरे कपड़ो को भी उन्होने जल्दी से उतारना शुरू कर दिया

मुझे तो समझ ही नही आ रहा था कि वो चाहती क्या है

इस छत पर जो काम हो सकता था वो तो बिना कपड़े उतारे भी कर सकती थी वो,

एक बार पूरे नंगे होकर जब हम दोनो एक दूसरे के गले से मिले तो ऐसा एहसास हुआ जैसे हम किसी और ही दुनिया मे पहुँच गये है

वो अपने जिस्म को मेरे बदन से बुरी तरह रगड़ रही थी

मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था

मैने उसे धक्का देकर नीचे बिठाना चाहा ताकि वो उसे चूस सके,

पर उसने मेरी आँखो मे देखते हुए मुझे चूम लिया और मेरे कान के पास आकर फुसफुसाई : “आज मुझे वो करना है ”

मेरे तो रोंगटे खड़े हो गये ये सुनकर

मैं : “क क क्या?”

उसके चेहरे से वासना टपक रही थी मेरे गालो को वो अपनी लंबी जीभ से किसी नागिन की तरह चाटने लगी मेरे कानो को मुँह मे लेकर उन्हे ज़ोर-2 से चुभलाने लगी.

और एक बार फिर से बोली : “उम्म्म्ममम , राज आइ वॉंट यू टुडे कंप्लीट्ली ”

 
मेरे अंदर तक एक सिहरन सी दौड़ गयी मेरी खुद की बहन मुझसे चुदने के लिए बोल रही थी और वो भी इस तरह से खुली छत पर अपने ही घर की इस छत पर ना जाने हम कितना खेला करते थे आज वही पर वो मुझसे चुदना चाहती है

मेरा बुरा हाल हो रहा था, मैं सोच नही पा रहा था कि ये करना चाहिए या नही.

वो मेरे खड़े लंड को अपनी चूत पर रगड़ते हुए बोली : “आआहह राज डाल दे ना इसे मेरी चूत मे अब और सब्र नही हो पाएगा काजल और जय को इस गेम मे शामिल करने के बाद पता नही कौन किसके साथ ये सब कर बैठे और मैं अपनी लाइफ मे पहली बार तुम्हारे साथ करना चाहती हूँ राज फकक्क्क्क्क मिईीईईईईई डाल दे अपना ये लंड मेरी चूत मे राज घुसा दे इसे मेरे अंदर ”

उसका कहने का स्टाइल इतना सेक्सी था कि मैं भी उसी रंग मे रंगता चला गया और पायल दी को पकड़ कर ज़ोर-2 से मसल्ने लगा उनके मम्मों को चूस्ता हुआ उनकी गान्ड को मसलता हुआ मैं भी बड़बड़ाने लगा

”आआहह दी सही कहा मुझे भी पहली बार तुम्हारे साथ ही करना था आइ लव यू दी आइ लव यू. मेरा लंड तो कब से तुम्हारी चूत मे जाने के लिए तड़प रहा है आज इसकी प्यास बुझा कर रहूँगा ”

इतना कहते हुए मैने अपनी शक्तिशाली बाजुओ का प्रयोग करते हुए पायल दी को अपनी गोद मे उठा लिया और उनकी सिसक रही चूत को अपने लंड पर लाकर लगा दिया

ये वो पल था जब पूरी कयनात रुक सी गयी थी

खुली छत पर, चाँद की रोशनी मे, मेरी बहन मेरी गोद मे थी और उसने अपनी दोनो टांगे मेरी कमर पर बाँध ली और अपने पंजे बाल्कनी की रेलिंग मे फँसा लिए

मेरे गले मे बाहे फँसाकर वो थोड़ी उपर हुई और अपनी चूत को सही से मेरे लंड पर अड्जस्ट कर दिया,

पायल दी की चूत से निकल रही गर्म भाप मुझे मेरे लंड के . पर महसूस हो रही थी,

मुझे पता था कि उनकी कुँवारी चूत मे जाकर मेरा लंड झुलस जाएगा, पर ये वो मोड़ था जहाँ से वापिस मुड़ना अब हम दोनो के लिए मुश्किल था

उन्होने धीरे-2 अपना भार मेरे लंड पर छोड़ना शुरू कर दिया,

और मेरे लंड के सुपाडे ने उनकी गीली चूत मे रास्ता बनाते हुए अंदर घुसना शुरू कर दिया,

पायल दी का चेहरा ठीक मेरे सामने था, उनका मुँह खुला हुआ था, होंठ गीले थे और लरज रहे थे जैसे-2 लंड अंदर जा रहा था, टाइटनेस बढ़ती जा रही थी, और उसके चेहरे के एक्सप्रेशन भी,

”आहह भाऐईईईईइ उम्म्म्मममम दर्द हो रहा है ”

मुझे भी लग रहा था कि उसे काफ़ी दर्द हो रहा है मैने लंड निकालना चाहा तो उसने रोक दिया और बोली : “नही भाई दर्द तो होना ही है पहली बार मे आज नही तो कभी नही ”

इतना कहते हुए उसने एक गहरी साँस ली और एक ही बार मे अपना पूरा भार मेरे लंड पर छोड़ दिया,

 
मेरा स्टील जैसा खड़ा हुआ लंड फडफडाता हुआ सा उसकी चूत के परखच्चे उड़ाता हुआ अंदर घुसता चला गया बेचारी की चूत ककड़ी की तरह चिरती चली गयी एक ही पल मे मेरे लंड ने पायल दी के कुंवारेपन की झिल्ली को फाड़कर तहस नहस कर दिया

”आअहह मररर्ररर गयी ”

मेरे लंड पर गर्म लहू का एहसास हो रहा था मुझे

उसका शरीर निढाल सा हो चुका था मैने बड़ी मुश्किल से उसके कूल्हे पकड़ कर सही से बॅलेन्स किया और फिर धीरे-2 अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा,

मेरा लंड पायल दी की चूत मे धंसा पड़ा था, एकदम टाइट होकर, जैसे उनकी चूत के होंठो ने उसे पकड़ लिया हो और छोड़ने का नाम ही नही ले रहे थे,

पर मेरे लंड के धक्के लगने से शायद उन्हे कुछ-2 होने लगा था एक बार फिर से उनका शरीर गर्म होने लगा मेरी गर्दन और कमर पर उनकी ग्रिप बढ़ गयी और अपने पैर ग्रिल मे फंसकर वो अब खुद ही अपनी बॉडी को उपर नीचे करने लगी,

आँखे भले ही बंद थी पायल दी की पर उनके सेक्सी चेहरे को देख कर सॉफ पता चल रहा था कि उन्हे कितना मज़ा मिल रहा है

एकदम नंगी होकर वो मेरी गोद मे चढ़ि हुई थी, और खुद ही चुद रही थी पायल दी के बूब्स मेरी छाती पर चुभ रहे थे और उनके नर्म कुल्हो मे मेरी उंगलियाँ धँसी हुई थी

अब वो पूरे रंग मे आ चुकी थी दर्द तो कब का गायब हो चुका था अब सिर्फ़ रह गयी थी एक गहरी मस्ती लिस्लिसापॅन चिकनाहट जिसमे मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा था

वो चिल्लाई : “आआआहह राज मेरी जाआअँ उम्म्म्मममम एसस्स्सस्स चुद गयी तेरी बहन आआआज तेरे ही लंड से आइ एम सूऊ हॅपी अहह अब ऐसे ही चोदना मुझे रोज ऐसे ही चोदना ”

मैं : “आआहह एसस्स्स्स्स्स्स्सस्स दी रोज चोदुन्गा मैं तुम्हे मेरे इसी लंड से रोज तुम्हारी चूत चोदुन्गा मैं ”

मन तो मेरा कर रहा था कि ये बाते ये चुदाई ऐसे ही पूरी रात चलती रहे पर उपर वाले ने सब कुछ लिमिट मे ही बनाया है और उसी के परिणाम स्वरूप मेरे लंड ने जल्द ही जवाब दे दिया

और मैं चिल्ला पड़ा, ” दी आइ आम कमिंग आइ आम कमिंग ”

वो भी मेरे होंठो को चूस्ति हुई चिल्लाई : “आआहह मैं भी गयी रे मेरे अंदर ही निकाल कम इनसाइड मी कम इनसाइड मी ”

उनके इतना कहने की देर थी और मेरे लंड से ताबड़तोड़ गोलियाँ निकल कर उनकी चूत मे जाने लगी

मेरे लंड का माल उनकी चूत मे गया और अंदर से मिला जुला माल बाहर भी निकलने लगा, जो मेरे पैरो मे गिर रहा था

जब सब कुछ शांत हो गया तो मैने पायल दी को नीचे उतारा उनके चेहरे की चमक देखने लायक थी मैने एक बार फिर से उन्हे चूम लिया

फिर पानी की टंकी से हम दोनो ने पानी लेकर अपने-2 अंगो को सॉफ किया और कपड़े पहन कर नीचे आ गये दी ने कहा कि वो कल टॅबलेट खा लेगी

नीचे आकर हम दोनो एक बार फिर से अपने-2 पार्ट्नर्स के पास जाकर सो गये उन्हे तो कुछ पता ही नही चला था,

पर अब एक बात तो पक्की थी, एक बार अपनी-2 सील टूटने के बाद हम दोनो भाई बहन को रोकना मुश्किल था और आने वाले दिनो मे हमारी प्यास और भी बढ़ने वाली थी.

अगली सुबह मेरी लाइफ मे सबसे हसीन थी मेरे अगल बगल मेरी दोनो बहने सो रही थी जय एक कोने मे घुस कर सो रहा था और पायल और काजल मेरे दोनो कंधो पर अपने सिर रखकर मुझसे चिपक कर सो रही थी.

दोनो के उपर नीचे हो रहे सीने मुझे काफ़ी उत्तेजित कर रहे थे.

ख़ासकर पायल दी के बूब्स.

उन्होने अपनी टी शर्ट के नीचे ब्रा भी नही पहनी हुई थी, इसलिए उनकी नुकीली निप्पल्स मेरी छातियो मे अंदर चुभ रही थी.

और काजल का चेहरा मेरे उपर पूरा झुका हुआ सा था उसकी गर्म साँसे मेरे चेहरे पर टकरा रही थी और उसके रसीले होंठ मेरे होंठो से सिर्फ़ 1 इंच की दूरी पर थे मुझसे इतना अच्छा मौका छोड़ा नही गया और मैने अपने होंठ उसके होंठो से चिपका दिए.

सुबह की पहली किस ऐसी लग रही थी जैसे पहली धार की शराब उसके होंठो को चूस्कर मैं उसका शहद किसी मधमक्खी की तरह निकालने मे लगा था और उसे पता भी नही था, वो गहरी नींद मे थी पर किस करने से गहरी से गहरी नींद भी टूट जाती है उसके साथ भी वही हुआ, उसने अपनी नशीली आँखो को खोलकर मुझे देखा, और अपने होंठो को मेरे होंठो के बीच फँसा हुआ देख कर उसकी आँखो मे चमक सी आ गयी ऐसा लग रहा था जैसे उसका कोई सपना पूरा हो गया है.

वो भी अपने होंठो की मलाई मुझसे चटवाने लगी और साथ ही साथ उसका हाथ फिसलकर मेरे लंड पर आ गया, और आपको तो पता ही है हम लड़को की मॉर्निंग एरेक्षन वाली प्राब्लम आज तो मेरी किस्मत मुझपर मेहरबान थी जो मेरे अगल-बगल दो लड़किया थी, ये ना भी होती तो मेरे लंड का यही हाल होना था, रोज सुबह स्टील रोड जैसे तन कर खड़ा हो जाता है उसे बड़ी मुश्किल से रगड़ कर चुप करवाना पड़ता है.

पर आज ये रगड़ने का काम काजल ही करने मे लगी थी.

पर अचानक मेरे लंड पर एक और हाथ आ लगा.

और वो था पायल दी का.

उनकी नींद भी खुल चुकी थी और वो भी काजल के साथ इस मॉर्निंग वाले मज़े को लेने मे कूद पड़ी.

हालाँकि रात की चुदाई का सरूर उसपर से अभी तक उतरा नही था, पर फिर भी सुबह-2 खड़े लंड को देख कर उनमे फिर से एक नया जोश आ चुका था.

मैने जय की तरफ देखा, जो अभी तक गहरी नींद मे सो रहा था और मुझे पता था कि वो अभी भी एक घंटे से पहले उठने वाला नही है

इसलिए मैने इस खेल को थोड़ा और आगे ले जाने की सोची

मैने पायल को इशारा किया और उसने मेरे लंड को बाहर निकाल दिया और उपर होकर अपनी टी शर्ट को भी, नीचे तो उसने कुछ पहना ही नही था

 
काजल को भी उसे देख कर जोश आ गया और उसने भी अपना समान उतारकर साइड मे रख दिया अब दोनो टॉपलेस होकर अपनी चुचिया मेरी छाती से रगड़ रही थी, मेरे होंठ अभी भी काजल से चिपके हुए थे उसके बावजूद पायल दी ने अपने होंठ बीच मे घुसा दिए, एक साथ 3 जोड़ी होंठ आपस मे भिड़ गये

कभी मेरे मुँह मे पायल दी के होंठ आते तो कभी काजल के दोनो मे जैसे होड़ लगी हुई थी की कौन मेरे होंठो को ज़्यादा देर तक चूस्ता है वही हाल उन्होने अपने बूब्स चुस्वाते हुए भी किया पायल दी ने थोड़ा उपर होकर अपनी नुकीली चुचि मेरे मुँह मे ठूंस दी, मैं भी काजल के रसीले होंठो को छोड़कर उनके निप्पल पर टूट पड़ा काजल भी कहाँ पीछे रहने वाली थी.

वो भी उपर आ गयी और अपनी छाती पकड़ कर मेरे मुँह मे घुसा दी, जैसे कोई माँ अपने बेटे को दूध पिलाते हुए करती है दोनो की इस लड़ाई मे मज़ा तो मुझे ही मिल रहा था पायल ने जब अपना पूरा मम्मा मेरे मुँह मे डाल रखा था तो काजल साउत की दिशा मे चली गयी यानी मेरे लंड की तरफ और मेरी शॉर्ट्स को नीचे खिसकाते हुए उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया.

मैं सिहर उठा जब उसके रसीले होंठो ने मेरे लंड को चूसना शुरू किया ,

मैं तो आवाज़ भी नही निकाल पा रहा था, मेरे मुँह मे पायल दी का मम्मा जो था.

काजल को मेरा लंड चूस्ता देख कर पायल दी भी नीचे आ गयी ऐसा लग रहा था कि दोनो वही काम करने मे लगी थी जो दूसरी कर रही थी, पर इसमे लड़ाई या जैलीसी जैसा कुछ नही था, सब मस्ती मे चल रहा था क्योंकि दोनो के चेहरों पर एक हँसी भी थी और सेक्सीपन भी था.

मेरे लंड के पास पहुँचकर दोनो मे ज़्यादा लड़ाई नही हुई, क्योंकि वहाँ लंड के साथ-2 मेरी बॉल्स भी थी एक मेरा लंड चूस सकता था और दूसरी बॉल्स और जब दोनो को बराबर का हिस्सा मिल रहा था तो खिचातानी भी कम ही हो रही थी.

काजल के लंड चूसने का स्टाइल बड़ा ही गजब का था ऐसा लग रहा था जैसे वो पैदा ही लंड चूसने के लिए हुई है, अपनी जीभ के नीचे मेरे लंड का टोपा रखकर वो जब उसे चुभलाती तो मेरी गान्ड हवा मे उठ जाती.

पायल दी ने जब देखा कि इस खेल मे काजल का पलड़ा भारी है तो उन्होने वो काम कर दिया जो काजल ने सोचा भी नही था और वो कर भी नही सकती थी.

उन्होने भी अपनी शॉर्ट्स उतारी और पूरी नंगी होकर मेरे उपर चढ़ गयी मेरी आँखो मे देखते हुए उनके चेहरे पर एक कातिलाना स्माइल थी, और इससे पहले मैं या काजल कुछ समझ पाते उन्होने अपनी गान्ड नीचे की और मेरे खड़े हुए लंड को काजल के मुँह से निकालकर अपनी चूत मे घुसा लिया.

ये वो पल था जिसमे काजल के चेहरे के एक्सप्रेशन्स लाख बार बदले, उसने तो सोचा भी नही था कि पायल दी ऐसा काम करेंगी.

कोई और दिन होता तो मुझे भी विश्वास नही होता, पर कल रात को अपनी सील तुड़वाने के बाद पायल दी मे इतनी हिम्मत आ चुकी थी कि वो सुबह सवेरे ही मेरे लंड को अंदर लेकर चुदाई करवाने लगी.

ये बात काजल को पता नही थी अभी तक, इसलिए वो हैरान हो रही थी कि पायल दी ने कैसे मेरे लंड को अपनी चूत मे ले लिया पर फिर जब उसने देखा कि वो बड़ी आसानी से मेरे लंड को अंदर लेकर सिसकारिया मार रही है तो वो समझ गयी कि ये हमारा पहली बार नही है और कल से पहले तक तो वो कुँवारी ही थी, इसलिए ये काम ज़रूर कल रात ही हुआ है.

पर जो भी था, हम दोनो भाई बहन को चुदाई करता देख कर वो काफ़ी उत्तेजित हो गयी उसने सिर घुमाकर जय की तरफ देखा जैसे देखना चाहती हो कि वो जाग रहा है या नही और शायद जाग रहा होता तो वो उसके लंड पर टूट पड़ती इस बात को सोचकर ही कि उसी के सामने हम भाई-बहन चुदाई मे मस्त है, वो बुरी तरह से पनिया उठी.

उसने भी अपनी शॉर्ट्स को उतार दिया और नंगी हो गयी बेचारा जय, उसे पता होता कि वहाँ क्या चल रहा है तो उसके तो होश ही उड़ जाते.

काजल लपककर मेरे चेहरे पर आकर बैठ गयी, उसने अपना चेहरा पायल दी की तरफ कर रखा था मेरा लंड पायल दी की रसीली चूत मे था और मेरी जीभ काजल की रसीली चूत मे ऐसा तो मैने सपने मे भी नही सोचा था.

काजल ने अपनी चूत मेरे चेहरे पर घिसी और धीरे से फुसफुसाई.

”उम्म्म्मम ये कब हुआ दी आपने राज से फक्किंग कब करवाई ”

वो मेरे राजसिहासन पर बैठकर शायद हमारी चुदाई की कहानी सुनना चाहती थी.

 
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